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BSF ने बॉर्डर पर 3 साल में पकड़े 5000 घुसपैठिए, वापस भी भेजा: रिपोर्ट में बताया- पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा गिरफ्तारी

                सीमा पर घुसपैठियों की निगरानी करती बीएसएफ (फोटो साभार : Udaipurkiran)
INDI गठबंधन की नरेंद्र मोदी सरकार से दुखी होना वाजिब है। क्योकि जिस तरह घुसपैठियों को पकड़ सीमा पर भेजा रहा है। यही घुसपैठी विपक्ष को कुर्सी पर बैठाते हैं। CAA विरोध से लेकर हर होने वाले आन्दोलनजीवियों के धरने और प्रदर्शनों में यही घुसपैठिये भीड़ जमावड़े का काम करते है। इतना ही नहीं सरकार शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम फेंकने वालों पर लगाम लगाने की योजना बना रही है, ताकि इनकी वर्तमान ही नहीं आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। 

भारत में लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान कर वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से घुसपैठिए पकड़ कर ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ में वापस भेजे जा रहे हैं। इसी बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बताया है कि उन्होंने पिछले तीन सालों से लगातार 5,000 घुसपैठिए सीमा पर पकड़े हैं। यह चोरी-छिपे भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSF के अधिकारियों ने बताया कि 2023 में 2406 लोगों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया। अगले साल 2024 में यह संख्या थोड़ी बढ़ी और 2425 लोगों को वापस भेजा गया। वहीं मई 2025 तक 557 ऐसे लोगों को पकड़ कर वापस भेजा जा चुका है।

रिपोर्ट बताती है कि BSF ने अधिकांश घुसपैठिए पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में पकड़े हैं। इसमें भी सबसे अधिक घुसपैठ पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई है। यहाँ पिछले 3 सालों में 2688 लोगों को पकड़ा गया। इनमें से 90% पश्चिम बंगाल के सीमाई इलाकों में पकड़े गए थे।

पश्चिम बंगाल के अलावा मिजोरम जैसे राज्यों में भी काफी घुसपैठ देखी गई। वहीं असम और त्रिपुरा में ऐसे मामले कम मिले। हालाँकि, बीते दिनों में घुसपैठिए त्रिपुरा से भी अंदर आने का प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा में पिछले तीन सालों में घुसपैठ की कोशिशों की संख्या 771 रही।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बड़ी संख्या में आने का मुद्दा गृह मंत्री अमित शाह भी हाल ही में उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को TMC सरकार का आशीर्वाद मिला हुआ है। उन्होंने कहा था कि CM ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के लिए सीमाएँ खोल हैं।

ऑपरेशन पुश-बैक भी जारी

जहाँ BSF ने बताया है कि वह सीमा पर पकड़ घुसपैठियों को वापस भेज रही है, वहीं इसी दौरान ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ भी चल रहा है। इसके तहत अब तक 2000 अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। इसके अलावा देश के अलग-अलग जगहों पर छुपकर रह रहे लगभग 2000 घुसपैठिए अब सामने से वतन वापसी के लिए तैयार हो गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियाँ अब घुसपैठियों की जानकारी बॉयोमेट्रिक के जरिए भी सहेज रही है। इसे राष्ट्रीय डेटाबेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे दोबारा देश में घुसपैठियों के घुसने पर जानकारी निकालना और कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।

ऑपरेशन पुश-बैक क्या है?

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। ये भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। 

इस ऑपरेशन के तहत अब पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल की लंबी प्रक्रिया से भारत सरकार ने किनारा कर लिया है।

भारत के गृह मंत्रालय (MHA) ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं।

पुणे के एक गाँव को बांग्लादेशियों ने बना रखा था ठिकाना, फर्जी दस्तावेजों के साथ 21 गिरफ्तार: त्रिपुरा में 3 रोहिंग्या पकड़े गए, जा रहे थे हैदराबाद


महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगाँव में अवैध रूप से रह रहे 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, त्रिपुरा पुलिस ने 3 रोहिंग्या मुस्लिम और 2 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुणे पुलिस ने 10 अवैध घुसपैठियों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें 24 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इनके पास से पैन-वोटर कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज मिले हैं। 

इनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज किन अधिकारियों ने किन नेताओं के कहने पर बनाए? जब तक इन लोगों पर भी कार्यवाही नहीं होगी गैंग का पता नहीं चलेगा। इनसे सारी जानकारी लेकर इन्हे जेल में रखने की बजाए देश से बाहर किया जाना चाहिए।  

पुणे ग्रामीण एसपी पंकज देशमुख ने कहा, “कल रंजनगाँव एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में हमने एक अपराध दर्ज किया। पूछताछ के बाद हमें पता चला कि वे रंजनगाँव इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे। इसलिए हमने एक अपराध दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट ले जाया गया है। कोर्ट ने 24 अक्टूबर तक 10 ऐसे आरोपियों की पुलिस हिरासत मंजूर की है।”

उन्होंने कहा, “हम पता लगा रहे हैं कि वे कितने समय से भारत में हैं। प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि वे 6 महीने से लेकर 10 साल से ये देश में रहे हैं। हम पता लगा रहे हैं कि इस देश में रहने का उनका मकसद क्या है। उनमें से कई लोग श्रम गतिविधि में लिप्त हैं और उन्हें मजदूरी कर रहे हैं। इसलिए, उनकी वास्तविक स्थिति पर टिप्पणी करना अभी बहुत प्रारंभिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने उनके पास से मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों के पास से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। हम इस पहलू की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित रैकेट या एजेंट है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को हमारे देश में लाकर स्थापित कर रहा है।”

कहा जा रहा है कि आरोपितों में 15 पुरुष, 4 महिलाएँ और 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(2), 336(3), 338, 340(2) और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।

दरअसल, खुफिया सूचना के आधार पर पुणे पुलिस ने रजनगाँव में सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को सर्च ऑपरेशन चलाया था और इन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”

एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” उन्होंने कहा कि जाँच चल रही है और 2-3 दिन में यह बात स्पष्ट हो जाएगी।

जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनके नाम हैं- अजमुल शरत खान उर्फ ​​हासिफ खान (50) मोहम्मद अकबर अजीज अकबर सरदार (32) शफीकुल अलीमिया शेख (20) हुसैन मुखिद शेख (30) तारिकुल अतियार शेख (38) मोहम्मद उमर फारूक बाबू उर्फ ​​बाबू बुख्तियार शेख (32) शाहीन शाहजान शेख ( 44) मोहम्मद हुसैन शेख (32) रऊफ अकबर दफादार (35) इब्राहिम काजोल शेख (35) फरीद अब्बास शेख (48) मोहम्मद सद्दाम अब्दुल सखावती (35) मोहम्मद अब्दुल हबीब रहमान सरदार (32) आलिमिया तोहकील शेख (60) मोहम्मद इसराइल फकीर (35) फ़िरोज़ा मुताक़ीन शेख़ (20) लिपिया हसमुख मुल्ला (32) सलमा मलिक रोशन मलिक (23) हिना मुल्ला जुल्फिकार मुल्ला (40) सोनदीप उर्फ ​​काजोल बासुदीप विशेष (30) येनूर शाहदता मुल्ला (25)।

त्रिपुरा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या गिरफ्तार

वहीं, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।
दास ने कहा, “सूचना के आधार पर जीआरपी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और बीएसएफ के जवान सादे कपड़ों में स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे। जब वे लोग पहुँचे तो हमने उनमें से पाँच को हिरासत में लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा किया, लेकिन पूछताछ के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि उनमें से तीन रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी हैं। वे अवैध रूप से राज्य में घुसे थे।”
तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हम उन्हें अदालत में पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड माँगेंगे।”

त्रिपुरा : कैंपसों में पसरा AIDS, स्कूल-कॉलेज के 828 छात्र HIV पीड़ित, 47 की हो चुकी है मौत: कई संक्रमित दूसरे राज्यों में जाकर भी कर रहे पढ़ाई


भारत के पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में एचआईवी-एड्स से जुड़ी गंभीर जानकारी सामने आ रही है। त्रिपुरा में हजारों लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें छात्रों की संख्या भी काफी ज्यादा है। हैरानी की बात है कि त्रिपुरा में अब तक HIV-AIDS संक्रमित छात्रों की संख्या 828 तक पहुँच चुकी है, जिसमें 47 छात्रों की जान भी जा चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्रिपुरा में साल 1999 से अब तक एड्स के आँकड़ों से पता चला है कि मई 2024 तक राज्यों में एआरटी- एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी केंद्रों में 8,729 लोगों को रजिस्टर्ड किया गया है। इनमें एचआईवी से पीड़ित लोगों की कुल संख्या 5,674 है और इनमें भी 4,570 पुरुष, 1103 महिलाएँ और केवल एक मरीज ट्रांसजेंडर है। लेकिन जो संख्या सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है, वो है छात्रों की।

त्रिपुरा पत्रकार यूनियन, वेब मीडिया फोरम और टीएसएसीएस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वर्कशॉप में टीएसएसीएस के संयुक्त निदेशक ने बताया कि राज्य में 828 छात्रों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। एड्स कंट्रोल सोसायटी ने 828 छात्रों को एचआईवी संक्रमण के लिए रजिस्टर्ड किया है। इनमें से 47 छात्रों की मौत हो चुकी है। टीएसएसीएस ने राज्य के 220 स्कूल, 24 कॉलेज और यूनिवर्सिटी के ऐसे छात्रों की पहचान की है जो नशे के लिए इंजेक्शनों का इस्तेमाल करते हैं।

त्रिपुरा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के संयुक्त निदेशक ने कहा, “हमने अप्रैल 1999 से राज्य में काम करना शुरू किया है। अब तक बीते 25 वर्षों में हमें छात्रों में 828 मामले एचआईवी-एड्स के मिले हैं। इनमें से 47 छात्रों की मौत हो चुकी है। हालाँकि 572 छात्र अब तक जीवित हैं, जिसमें से बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों में पढ़ाई कर रहे हैं।”

त्रिपुरा में एड्स फैलने के पीछे संक्रमित सुई से नशा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एचआईवी-एड्स से जुड़े ज्यादातर मामलों में बच्चे संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे परिवार जहाँ माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में हैं और बच्चों की माँगों को पूरा करने में कोई संकोच नहीं करते। जब तक उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चे ड्रग्स के शिकार हो गए हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
दरअसल, एचआईवी/एड्स एक महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, जिसका नसों में इंजेक्शन लगाकर नशा करने से सीधा संबंध है। ड्रग यूजर्स के बीच इंजेक्शन शेयर करना एचआईवी ट्रांसमिशन का एक प्राइमरी तरीका है, जो ब्लड-टू-ब्लड संपर्क के जरिए से वायरस को फैलाने में मददगार होती है। त्रिपुरा में अधिकतर मामलों में ये चीज कॉमन पाई गई है।

जिस दिल्ली में केजरीवाल ने कहा- मुझे जेल जाने से बचाना है तो AAP को जिताएँ, वहाँ INDI का सूपड़ा साफ

जनता ने कालनेमि बनी पार्टियों को वोट देकर कालनेमि के नाम को भी कलंकित कर दिया। कालनेमि अपनी राक्षस जाति को बचाने ढोंगी रामभक्त बना, जबकि I.N.D.I. गठबंधन संविधान और देशप्रेमी होने का स्वांग का खेल खेल कालनेमि बन जनता को भ्रमित किया। लेकिन मूर्ख जनता कालनेमि को पहचान कर भी सूरदास बन उनको वोट दे दिया। दूसरे, वामपंथियों को तो 1962 में इंडो-चीन युद्ध के बाद ही नकार देना चाहिए था, क्योकि इस पार्टी ने जवानों को खून देने के लिए मना कर दिया था। तीसरे, बंगाल में ममता बनर्जी के आने के बाद से हिन्दुओं पर जानलेवा हमले होने के बावजूद TMC को वोट दिया यानि वहां का हिन्दू पीटने में ही खुश है।   
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। लगातार 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत का प्राप्त होना जनमानस का स्पष्ट संदेश है। इस बीच, बीजेपी ने कई राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अपना चुनावी प्रदर्शन बेहतर से भी बेहतरीन किया है। ऐसे कई राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद की है। आइए, आपको बताते हैं कि किन-किन राज्यों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में भी क्लीन स्वीप किया था। दिल्ली में बीजेपी द्वारा क्लीनस्वीप की हैट्रिक लगा दी गई है। यहाँ बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर जोर लगाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो जनता से यहाँ तक अपील की थी कि अगर उन्हें जेल जाने से बचाना है, तो आम आदमी पार्टी को जिताना होगा। इसके बावजूद दिल्ली में विपक्षी दलों की सभी कोशिशों को ध्वस्त करते हुए बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की है।

मध्य प्रदेश : भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत इस बार इंदौर में मिली है। इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी ने 11.75+ लाख वोटों से जीत हासिल किया है। यही नहीं, इस बार बीजेपी ने कांग्रेस और कमलनाथ परिवार का गढ़ मानी जाने वाली छिंदवाड़ा की सीट भी फतह कर ली है।

त्रिपुरा : कभी कम्युनिष्टों का गढ़ रहा त्रिपुरा अब भगवा ध्वज उठाए हुए है। त्रिपुरा की दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। यहाँ विपक्षी दल कोई खास चुनौती तक पेश नहीं कर पाए।

उत्तराखंड : देवभूमि उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं। उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर एक बार फिर से बीजेपी ने क्लीवस्वीप किया है। बीजेपी के हरेक उम्मीदवार को प्रचंड जीत मिली है। कांग्रेस पार्टी का कोई उम्मीदवार किसी भी सीट पर टक्कर देने की स्थिति में नहीं दिखा। यही वजह रही कि चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उत्तराखंड से दूरी बनाए रखी, मानों उन्हें पता हो कि हर बार की तरह इस बार भी जनता कांग्रेस को भाव नहीं देने वाली।

हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश राज्य की विधानसभा में कांग्रेस की सरकार है। इसके बावजूद हिमाचल की सभी 4 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ ही मंडी की सीट से कंगना रनौत तक ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन को सुधारा है।

अंडमान & निकोबार द्वीप समूह : देश के सुदूर दक्षिण-पूर्वी द्वीपीय केंद्र शासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। अंडमान & निकोलबार द्वीप समूह पर भी भगवा लहरा रहा है।

गुजरात : लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के विजय रथ को गुजरात में रोकने की कोशिश कर रहे कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने यहाँ भी हाथ मिला। इसके बावजूद दोनों ही दलों को असफलता का मुँह देखना पड़ा। गुजरात में बीजेपी ने गुजरात की 26 में से 25 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को बनासकाँठा(सुरक्षित) सीट से एकमात्र जीत मिली, वहीं 2 सीटों पर लड़ी आम आदमी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।

छत्तीसगढ़ : बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर प्रचंड जीत हासिल की। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। कोरबा सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी को जीत मिली, बाकी की सभी 10 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को भी हार झेलनी पड़ी।

ओडिशा में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन : भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत तो मिला ही, लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में बीजेपी ने 19 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की है। ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी को महज 1-1 सीटों पर जीत मिली है।

इन राज्यों के अलावा भी बीजेपी ने कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया है। फिलहाल बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत से अधिक संख्या में सीटों को हासिल किया है। जल्द ही इस बात की घोषणा हो जाएगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तारीख को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

त्रिपुरा : सरस्वती माता की ‘क्लीवेज’ वाली मूर्ति, साड़ी भी नहीं: बवाल, ABVP और बजरंग दल के प्रदर्शन के बाद ढकी गई मूर्ति

बसंत पंचमी में त्रिपुरा के कॉलेज में बिन कपड़े पहनाए लगाई गई माँ की मूर्ति (तस्वीर साभार: ABVP त्रिपुरा)
त्रिपुरा के एक आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में सरस्वती माँ की मूर्ति को अश्लीलता से गढ़ने और बिना पारंपरिक साड़ी के दिखाने पर विवाद हो गया। मूर्ति देखने के बाद अखिल भातीय विद्यार्थी परिषद और बजरंग दल ने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरस्वती माता को इस तरह दिखाना अश्लीलता फैलाने से अधिक कुछ नहीं।

सरस्वती माता की जिस मूर्ति को लेकर इतना बवाल हुआ है उसकी वीडियो फोटो भी एबीवीपी त्रिपुरा ने अपने हैंडल पर शेयर की है। इस मूर्ति की फोटो में साफ पता चल रहा है कि कितने अश्लील ढंग से माता को प्रदर्शित करने का प्रयास हुआ है। मूर्ति में क्लीवेज का डिजाइन गढ़ा गया और मूर्ति पर पारंपरिक साड़ी तो दूर कोई कपड़ा तक नहीं है। इस मूर्ति की जानकारी जब हिंदूवादी कार्यकर्ताओं को हुई तो वो बहुत भड़के।

इस मामले पर एबीवीपी के त्रिपुरा यूनिट के महासचिव दिबाकर आचार्यजी ने कहा कि उन्हें इस प्रकार सरस्वती माता गलत चित्रण से समस्या है। उन्होंने कहा- “जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज बसंत पंचमी है और पूरे देश में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सुबह-सुबह हम सभी को खबर मिली कि गवर्नमेंट आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में देवी सरस्वती की मूर्ति को बहुत गलत और अश्लील तरीके से बनाया गया है।”

प्रदर्शनकारियों के विरोध के बाद त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में रखी गई मूर्ति को साड़ी पहनाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी ने कॉलेज प्राधिकरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

वहीं कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि मूर्ति हिंदू मंदिरों में देखी जाने वाली पारंपरिक मूर्तिकला के अनुसार है और इसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। मूर्ति को अंततः कॉलेज अधिकारियों द्वारा बदल दिया गया और पूजा पंडाल के पीछे प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया गया। प्रदर्शन के बाद मौके पर पुलिस भी आई लेकिन कोई आधिकारिक कंप्लेन नहीं हुई।


असम : पार्टी के लिए परिवार फर्स्ट, नेशन लास्ट: यूथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, त्रिपुरा में पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन की माँग

देश के पाँच राज्यों में जारी चुनावों के बीच भी कांग्रेस में उठा-पटक जारी है। असम प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने पार्टी में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए 11 नवंबर 2023 को अपना इस्तीफा दे दिया। वहीं, त्रिपुरा कांग्रेस ने AICC को पत्र लिखकर अपने विधायक बिराजित सिन्हा के खिलाफ ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के लिए कार्रवाई की माँग की है।

त्रिपुरा कांग्रेस ने बिराजित सिन्हा पर ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने और पार्टी नेताओं के भीतर ‘गुटबाजी के लिए उकसाने’ का आरोप लगाया है। बता दें कि बिराजित सिन्हा ने त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही AICC त्रिपुरा कांग्रेस के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देगी।

इस साल की शुरुआत में बिराजित सिन्हा को त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उनके करीबी सहयोगी सम्राट रॉय को भी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के त्रिपुरा अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसके बाद ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेना बंद कर दिया था।

वहीं, असम में प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय द्वारा इस्तीफा देने का मामला नागांव जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश बोरा द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आया है। रॉय ने अपने त्याग-पत्र में पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाया और पार्टी के कामकाज से असंतोष व्यक्त किया।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में रॉय ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं इस संगठन में बने नहीं रह पाऊँगा, क्योंकि यह केवल एलीट वर्ग के लोगों का पक्ष लेता है। अब यह महसूस होने लगा है कि इस संगठन में हम जैसे समाज के निचले तबके से आने वाले लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती है।”

असम प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने अपने त्याग-पत्र में आगे लिखा, “इस संगठन (युवा कांग्रेस) में काम करते हुए मुझे एहसास हुआ कि दिसपुर से लेकर दिल्ली तक यह संगठन फैमिली फर्स्ट को तरजीह देता है और राष्ट्र को अंतिम रखता है।” माना जा रहा है कि ये नेता जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि सुरेश बोरा के साथ-साथ प्रत्युश रॉय ने भी भाजपा में शामिल होने की उत्सुकता व्यक्त की है। इससे पहले बोरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे। असम भाजपा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ इन नेताओं की तस्वीरें भी साझा की है।

असम : 450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने के बाद 47 दलाल गिरफ्तार: 7 राज्यों में NIA और असम पुलिस की कार्रवाई

रोहिंग्या घुसपैठियों की मदद करने वाले 47 दलाल गिरफ्तार (प्रतीकात्मक चित्र)
असम में त्रिपुरा से ट्रेन के माध्यम से पहुँचे 450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेज दिया गया। असम के स्पेशल DGP (विशेष पुलिस महानिदेशक) हरमीत सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस सतर्क थी। अवैध घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बलों की सहायता से वापस भेजा गया। जुलाई में असम के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने एक ऑपरेशन लॉन्च किया था। इस अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी में सक्रिय दलालों की पहचान करने के लिए ये ऑपरेशन चलाया गया था।

SDGP ने बताया कि ऐसे 10 दलालों को त्रिपुरा से दबोचने में कामयाबी मिली। उनसे पूछताछ के आधार पर जाँच की गई तो पता चला कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है जिसके दुष्प्रभाव कई राज्यों पर पड़े हैं। उन्होंने बताया कि पहले दिन से ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं) को इस मामले की जानकारी थी और सरकार ने इस मामले को NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) के पास भेजने का निर्णय लिया। फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस संबंध में निवेदन किया गया।

असम के विशेष पुलिस प्रमुख हरमीत सिंह ने जानकारी दी कि NIA ने इस मामले की जाँच अपने हाथों में ली और मिलजुल कर जाँच की गई जिसके बाद देश भर में ऐसे दलालों की सूची तैयार की गई जो घुसपैठियों की मदद करते हैं। बकौल स्पेशल DGP, अब इस मामले में बुधवार (8 नवंबर, 2023) को तड़के सुबह ऑपरेशन लॉन्च किया गया जिसमें 47 ऐसे दलाल पकड़े गए हैं जो एक गिरोह बना कर काम कर रहे थे। इनमें से 25 तो अकेले त्रिपुरा से गिरफ्तार किए गए हैं।

वहीं 9 कर्नाटक से, 5 दलाल असम से, 3 पश्चिम बंगाल से, 3 तमिलनाडु से और एक-एक हरियाणा और तेलंगाना से दबोचे गए हैं। SDGP ने बताया कि NIA और असम पुलिस ने मिल कर परस्पर सहयोग करते हुए ये अभियान चलाया है। इसमें विभिन्न स्थानीय पुलिस ने भी मदद की। असम पुलिस की इस प्रकरण में 17 टीमें ग्राउंड पर हैं। बता दें कि म्यांमार और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर बसे हुए हैं।

त्रिपुरा : अगरतला से 145 किलोमीटर दूर, उनाकोटी में हैं कुल 9999999 पत्थर की मूर्तियां

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 145 किलोमीटर दूर, उनाकोटी है यहां कुल 9999999 पत्थर की मूर्तियां हैं अर्थात करोड़ में एक कम
इस रहस्य को आज तक कोई भी सुलझा नहीं पाया है कि- ये मूर्तियां किसने कब और क्यों बनाई और सबसे जरूरी कि एक करोड़ में एक कम ही क्यों?
इन रहस्यमय मूर्तियों के कारण ही इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ा है, जिसका अर्थ होता है करोड़ में एक कम। कई सालों तक ये जगह अज्ञात थी,अभी भी बहुत कम लोग ही इसके बारे में जानते हैं।
उनाकोटी को रहस्यों से भरी है, क्योंकि एक पहाड़ी इलाका है जो दूर-दूर तक घने जंगलों और दलदली इलाकों से भरा है। अब ऐसे में जंगल के बीच में लाखों मूर्तियों का निर्माण कैसे किया गया होगा, क्योंकि इसमें तो सालों लग जाते और पहले तो इस इलाके के आसपास कोई रहता भी नहीं था। यह लंबे समय से शोध का विषय बना हुआ है।
उनाकोटि में दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां।जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है। इस स्थान के मध्य में भगवान शिव के एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव की यह मूर्ति लगभग 30 फीट ऊंची बनी हुई है। इसके अलावा भगवान शिव की विशाल प्रतिमा का साथ दो अन्य मूर्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें से एक मां दुर्गा की मूर्ति है। साथ ही यहां तीन नंदी मूर्तियां भी दिखीं हैं। इसके अलावा यहां और भी ढेर सारी मूर्तियां बनी हुई हैं।
इन मूर्तियों के बारे में एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है।
मान्यता है कि एक बार भगवान शिव समेत एक करोड़ देवी-देवता कहीं जा रहे थे। रात हो जाने की वजह से बाकी के देवी-देवताओं ने शिवजी से उनाकोटी में रूककर विश्राम करने को कहा। शिवजी मान गए, लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सूर्योदय से पहले ही सभी को यह स्थान छोड़ देना होगा। लेकिन सूर्योदय के समय केवल भगवान शिव ही जग पाए, बाकी के सारे देवी-देवता सो रहे थे। यह देखकर भगवान शिव क्रोधित हो गए और श्राप देकर सभी को पत्थर का बना दिया। इसी वजह से यहां 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं, यानी एक करोड़ से एक कम (भगवान शिव को छोड़कर)
यहां हर साल अप्रैल महीने के दौरान अशोकाष्टमी मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। इसके अलावा यहां जनवरी के महीने में एक और छोटे त्योहार का आयोजन किया जाता है। यह स्थान अब एक प्रसिद्ध पर्यटन गंतव्य बन चुका है। यहां की अद्भुत मूर्तियों को देखने के लिए अब देश-विदेश के लोग आते हैं।

Note:सभी चित्र श्री शंकर सुमन शांडिल्य जी की wall से