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गृह मंत्री अमित शाह जी पत्थरबाजों पर blind firing कब? कहीं किया पथराव तो कहीं तोड़ीं मूर्तियाँ, सरस्वती पूजा पर भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने मचाया बवाल

   24 जनवरी को झारखंड के हजारीबाग में एक मुस्लिम भीड़ ने सरस्वती पूजा विसर्जन जुलूस पर पथराव किया। (साभार)
हिन्दू त्योहारों पर पत्थरबाज़ी करने वालों पर blind firing कब करोगो, गृह मंत्री अमित शाह जी? आखिर हिन्दू पुलिस के साये में कब तक अपने त्यौहार मनाएगा? बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है।     
ज्ञान और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में हिंदुओं द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। देश में हिंदू त्योहारों के जश्न को बिगाड़ना अब एक घृणित और नियोजित ट्रेंड बन चुका है। राम नवमी, हनुमान जयंती और अन्य त्योहारों के दौरान विघ्न डालने की प्रवृत्ति इस साल बसंत पंचमी पर भी दिखी। देश के कई हिस्सों में हिंदू विरोधी तत्वों ने सरस्वती पूजा में व्यवधान डालने की कोशिश की। पूजा के दौरान और विसर्जन के समय उत्सव को निशाना बनाकर हमला और तोड़फोड़ की कई घटनाएँ दर्ज की गईं।

झारखंड: हजारीबाग में माँ सरस्वती की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों ने किया पथराव

झारखंड के हजारीबाग में शनिवार (24 जनवरी 2026) को एक मुस्लिम भीड़ ने सरस्वती पूजा विसर्जन के लिए निकाली जा रही शोभायात्रा पर पथराव किया। केरेदरी प्रखंड के बेल्टू गाँव में मूर्ति विसर्जन के लिए जुलूस निकाला जा रहा था। अचानक, मुस्लिम भीड़ ने हिंदू जुलूस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके जवाब में जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने भी पलटवार किया।

विवाद जुलूस में बज रहे संगीत के कारण शुरू हुआ। मुस्लिम पक्ष को अचानक गीत आपत्तिजनक लगने लगे और थोड़ी ही देर में मामला हिंसा में बदल गया। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर पथराव किया, जिससे कई लोग घायल हो गए।

हजारीबाग वर्षों से हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी हिंसा का केंद्र रहा है। राम नवमी, हनुमान जयंती, होली जैसी अवसरों पर मुसलमान अक्सर मामूली बहानों जैसे संगीत बजना या भगवा झंडा के हवाले से हिंदुओं पर हमले करते रहे हैं। 2020 में भी हजारीबाग के लखे सुंडी बस्ती में मुस्लिम भीड़ ने सरस्वती पूजा विसर्जन जुलूस पर पथराव किया, कई वाहन तोड़े और 4-5 लोग घायल हुए थे। आज भी हिंदुओं के त्योहारों पर इसी तरह का तरीका अपनाया जा रहा है।

असम: डिब्रूगढ़ में सरस्वती की मूर्ति तोड़ी गई

शनिवार (24 जनवरी 2026) को पूजा के दिन माँ सरस्वती की मूर्ति को अज्ञात व्यक्तियों ने तोड़ दिया। अब तक इस घटना के पीछे कौन लोग हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है। स्थानीय हिंदुओं ने दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा देने की माँग की है।

त्रिपुरा: कैलाशहर में सरस्वती पूजा के दौरान मुसलमानों ने अशांति फैलाई

त्रिपुरा के कैलाशहार में सरस्वती पूजा के दौरान तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब कथित तौर पर लगभग 16 मुस्लिम युवाओं ने दरांती और डंडों से हिंदू जुलूस में तोड़ने का प्रयास किया। यह झड़पें कतल डिघीरपुर क्षेत्र में हुईं।

भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रीतम घोष ने कहा कि लगभग 16 मुस्लिम युवाओं ने दरांती और डंडों से हिंदुओं पर हमला कर सरस्वती पूजा में विघटन करने का प्रयास किया। घोष ने कहा, “सूचना मिलते ही जब हम मौके पर पहुँचे, उन्होंने हमारे ऊपर बेतहाशा हमला कर दिया। स्थिति और हिंसक हो गई। ये शरारती तत्व बांग्लादेश जैसी खतरनाक स्थिति दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। हमें ऐसे ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा।”

हमले में प्रीतम घोष घायल हुए, वहीं भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष अरूप धर का घर भी तोड़ा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतल डिघीरपुर में भाजपा का दफ्तर भी आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस बलों को स्थिति पर काबू पाने के लिए तैनात किया गया।

पश्चिम बंगाल: TMC की अंदरूनी लड़ाई ने उत्तर 24 परगना जिले में सरस्वती पूजा में खलल डाला

शुक्रवार (23 जनवरी) को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कामरहाटी शहर में तृणमूल कांग्रेस(TMC) के आंतरिक संघर्ष के कारण सरस्वती पूजा में बाधा उत्पन्न हो गई। सूत्रों के अनुसार, बेलघाड़िया सर्वजनिन श्री श्री दुर्गा चौक सोसाइटी मंदिर को TMC के एक गुट ने बंद कर दिया है।
इसके कारण स्थानीय हिंदू महिलाएँ माँ सरस्वती की पूजा नहीं कर पा रही हैं। स्थानीय पुलिस ने तब तक हस्तक्षेप करने या ताला हटाने से इनकार कर दिया है, जब तक TMC के विवादित गुटों के बीच किसी प्रकार का समझौता नहीं हो जाता।

TMC नेता ने ममता बनर्जी के स्कूल में सरस्वती पूजा न करने के लिए स्टूडेंट्स को धमकाया

साउथ कोलकाता के सरकारी समर्थित जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज में पढ़ाई कर रही एक महिला छात्रा ने बताया कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस(TMC) के एक नेता ने सरस्वती पूजा आयोजित करने के खिलाफ धमकी दी।
पीड़िता के अनुसार, TMC नेता का नाम दाऊद आलम मोल्ला बताया गया। छात्रा ने एक वायरल वीडियो में कहा,”दाऊद आलम मोल्ला बाहर खड़ा है। उसने मुझे धमकी दी कि वह मेरी LLM को बर्बाद कर देगा।” संयोगवश, जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पढ़ाई की है।

TMC गुटों के बीच अंदरूनी लड़ाई के कारण कूचबिहार में सरस्वती पूजा समारोह रोका गया

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के दिनहाटा कॉलेज में शुक्रवार (23 जनवरी) को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस(TMC) के दो गुटों के बीच आपसी झड़प के बाद सरस्वती पूजा मंडप को छोड़ना पड़ा।
स्थिति बिगड़ने पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया गया। मामले की जानकारी मिलते ही दिनहाटा थाने के प्रभारी और SDPO कॉलेज परिसर पहुँचे। सरस्वती पूजा में शामिल होने आए हिंदू श्रद्धालुओं को अपनी सुरक्षा के लिए वहाँ से भागने पर मजबूर होना पड़ा। मौके से सामने आई तस्वीरों में दिखा कि सत्तारूढ़ TMC के गुंडों ने कॉलेज परिसर को युद्ध के मैदान में बदल दिया।

हिंदू स्टूडेंट्स को स्कूल कैंपस में सरस्वती पूजा करने की इजाज़त नहीं है क्योंकि 50% से ज्यादा स्टूडेंट्स मुस्लिम हैं

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात शहर से एक अन्य घटना सामने आई, जहाँ हिंदू छात्रों को स्कूल परिसर के भीतर सरस्वती पूजा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अनुमति इसलिए रोकी गई क्योंकि संबंधित स्कूल में 50% से अधिक छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में पुलिसकर्मियों को छात्रों को देवी सरस्वती की पूजा करने से रोकते हुए देखा गया। बाद में हिंदू छात्रों को स्कूल परिसर के बाहर फुटपाथ पर सरस्वती पूजा आयोजित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस दौरान प्रदीप चटर्जी नामक एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना गया, “हमें बताया गया कि इस स्कूल में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, इसलिए यहाँ पूजा नहीं हो सकती… पश्चिम बंगाल में रहने वाले हिंदुओं की स्थिति और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति में कोई फर्क नहीं रह गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि 50 प्रतिशत मुस्लिम छात्रों वाला तर्क पूरे देश में लागू किया जाए, तो कल हिंदू यह दावा कर सकते हैं कि देश में उनकी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है और ऐसे में नमाज की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए।

झारखंड: लोहरदगा में सरस्वती पूजा जुलूस को लेकर मुसलमानों ने हिंदुओं पर हमला किया

झारखंड के लोहरदगा जिले में रविवार (25 जनवरी 2026) को सरस्वती पूजा जुलूस के दौरान हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। यह घटना लोहरदगा के कूडू थाना क्षेत्र अंतर्गत बारिडीह गाँव में सरस्वती पूजा विसर्जन के समय हुई। हिंदू श्रद्धालु गाँव से होकर माँ सरस्वती की झाँकी निकाल रहे थे, तभी मूर्ति ले जा रही गाड़ी एक मुस्लिम के घर की छत से हल्की सी टकरा गई।
इसके बाद मुस्लिम परिवार और उनके साथियों ने इकट्ठा होकर गाड़ी के ड्राइवर के साथ मारपीट की। सुबह तक मामला पूरी तरह हिंसक हो गया और मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं तथा उनके घरों पर हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कूडू थाना की पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की बाइक दस्ता मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
                                                                                                                             फोटो – आज तक
हमले में तीन लोग घायल हुए हैं, जिनका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने स्थिति पर काबू कर लिया है।

एक हाथ में त्रिशूल, एक में खप्पर और प्रसाद में मदिरा… 6 हजार साल पुराना है काल भैरव मंदिर का इतिहास, जहाँ होती है शिव के रौद्र रूप की पूजा

 काल भैरव की मूर्ति (बाएँ), मंदिर का प्रवेश द्वार (दाएँ) (साभार : Instagram -kaal_bhairav_temple_ujjain)
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। फिर उसी मदिरा को भक्तों को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ये सच्चाई है काल भैरव मंदिर की। जो उज्जैन का न सिर्फ धार्मिक बल्कि रहस्यमयी चमत्कार भी है। काल भैरव को शिव के रौद्र रूप के तौर पर पूजा जाता है। यहाँ हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शराब की बोतल लेकर आते हैं और काल भैरव को अर्पित करते हैं।

माना जाता है कि पिलाते वक्त शराब मूर्ति के मुँह से गायब हो जाती है। कोई नली, कोई ट्रिक, यहाँ तक की अब तक कोई वैज्ञानिक भी इसका ठोस जवाब नहीं दे सका है। ये मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि जिज्ञासा का भी केंद्र है। यहाँ साधारण भक्तों से लेकर तांत्रिक तक सभी बाबा काल भैरव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

                           काल भैरव की मूर्ति को शराब का प्रसाद चढ़ाते महंत ( साभार : TripAdvisor)

मंदिर का इतिहास

 काल भैरव मंदिर का इतिहास लगभग छह हजार वर्ष पुराना है। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। काल भैरव की पूजा कपालिका और अघोरा संप्रदाय का हिस्सा रही है। इतिहासकार की मानें तो मंदिर का निर्माण शिप्रा नदी के ऊपर राजा भद्रसेन ने करवाया था।

                                     काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य (साभार : MP Tourism)

हालाँकि वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। यह मंदिर मराठा काल में बनवाया गया था। सन् 1788 में मराठा शासक महादजी शिंदे ने इस मंदिर को फिर से बनवाया और सजाया। उज्जैन प्राचीन अवंतिका नगरी रही है और यहाँ शैव परंपरा का गहरा असर है।

मंदिर की संरचना

मंदिर की बनावट बहुत ही साधारण पर प्रभावशाली है। मालवा शैली के अद्भुत चित्र मंदिर की दीवारों को सजाते हैं। मुख्य द्वार पर दो विशाल सिंहों की मूर्तियाँ हैं जो मंदिर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। अंदर प्रवेश करते ही मुख्य गर्भगृह है। जहाँ काले पत्थर से बनी काल भैरव की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति की खास बात है इसका मुंँह, जिसके जरिए शराब ‘पी’ जाती है।
                                काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य ( साभार : MP Tourism)
मूर्ति के दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में खप्पर (खोपड़ी का पात्र) है। मंदिर में दीवारों पर भैरव से जुड़े चित्र और तांत्रिक प्रतीक भी देखे जा सकते हैं। आसपास छोटे-छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य भैरव रूपों को समर्पित हैं। मंदिर में एक अलग जगह पर शराब अर्पण की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अपनी बोतल वहीं पुजारी को देते हैं और वो मूर्ति के मुँह से चढ़ाते हैं।
                                          काल भैरव की मूर्ति ( साभार : timeofindia)

मंदिर तक कैसे पहुँचे?

काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। हवाई यात्रा कर आने वाले भक्तों के लिए नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है। जो मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से उज्जैन पहुँचना बहुत आसान है। शहर में होटल और धर्मशालाओं की भी अच्छी सुविधा है।

हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं मंदिर, विधर्मियों को रोजगार देने का स्कीम नहीं: तिरुपति से शनि शिंगणापुर तक ‘मुस्लिम घुसपैठ’; 167 को नौकरी से निकाला

                                                शनि शिंगणापुर मंदिर (फोटो साभार: TOI)
महाराष्ट्र के अहिल्या नगर (पुराना नाम-अहमदनगर) जिले में शनि शिंगणापुर मंदिर ने शुक्रवार (13 जून 2025) को 167 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जिनमें 114 मुस्लिम थे। मंदिर में कुल 114 मुस्लिम काम कर रहे थे और वो सभी इस कार्रवाई में निकाल दिए गए। मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि ये लोग अनुशासन नहीं मान रहे थे और कई महीनों से काम पर नहीं आ रहे थे।

ये फैसला तब हुआ जब हिंदू संगठन शनिवार (14 जून 2025) को बड़ा प्रदर्शन करने वाले थे। इसकी वजह एक वीडियो था – जिसमें मुस्लिम कारीगर मंदिर के पवित्र चबूतरे पर काम कर रहे थे।

इस पूरे मामले के बाद सवाल उठते हैं कि आखिर हिंदू मंदिर में 114 मुस्लिम कर्मचारी थे ही क्यों? बतौर हिंदू मेरा मत साफ है कि हिंदू मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी होने चाहिए। इस लेख में यही बात समझाने की कोशिश की गई है।

शनि शिंगणापुर में क्या हुआ?

शनि शिंगणापुर का मंदिर भगवान शनि का है। ये मंदिर अनोखा है क्योंकि यहाँ कोई दीवार या छत नहीं है, सिर्फ एक काला पत्थर है, जो शनिदेव का प्रतीक है। रोज हजारों लोग दर्शन करने आते हैं, और खास मौकों जैसे अमावस्या पर लाखों लोग पहुँचते हैं। गाँव में घरों के दरवाजे भी नहीं हैं, क्योंकि लोग मानते हैं कि शनिदेव उनकी रक्षा करते हैं।

हाल ही में मंदिर ट्रस्ट ने 167 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इनमें 114 मुस्लिम थे, जो खेती, कचरा प्रबंधन, और शिक्षा जैसे काम करते थे। ट्रस्ट का कहना है कि ये लोग पाँच महीने से बिना बताए गायब थे और काम में लापरवाही कर रहे थे। लेकिन फैसला 8 और 13 जून 2025 को हुआ, ठीक उस वक्त जब हिंदू संगठन 14 जून को प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे।

बीजेपी के आध्यात्मिक मोर्चे के प्रमुख आचार्य तुषार भोसले ने इसे हिंदुओं की जीत बताया। उन्होंने कहा, “हमने मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के लिए आंदोलन किया। मंदिर प्रशासन को झुकना पड़ा। मैं सभी शनि भक्तों और हिंदू समाज को बधाई देता हूँ।” उनका मानना था कि मुस्लिम कर्मचारियों की मौजूदगी मंदिर की पवित्रता को नुकसान पहुँचाती है।

शनि शिंगणापुर मंदिर से जुड़े विवाद की शुरुआत एक वीडियो से हुई, जिसमें मुस्लिम कारीगार शनि शिंगणापुर के पवित्र चबूतरे पर काम कर रहे थे। मंदिर का ये हिस्सा बहुत पवित्र है, और हिंदू भक्तों को लगा कि ऐसा काम सिर्फ हिंदुओं को करना चाहिए।

हिंदू मंदिर में गैर-हिंदू कर्मचारी क्यों नहीं होने चाहिए

एक हिंदू भक्त के लिए मंदिर सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि भगवान का घर है। यहाँ की हर चीज – पूजा, रीति-रिवाज, और माहौल को पवित्र रखना जरूरी है। हिंदू धर्म में मंदिर की पवित्रता बहुत मायने रखती है। अगर कोई गैर-हिंदू जो हिंदू नियमों को न माने, मंदिर के काम में शामिल हो, तो ये भक्तों की आस्था को ठेस पहुँचा सकता है।
उदाहरण के लिए हिंदू धर्म में कई नियम हैं – जैसे शाकाहारी भोजन, पूजा से पहले स्नान और खास मंत्रों का जाप। मंदिर में काम करने वाले को इनका पालन करना चाहिए। अगर कोई गैर-हिंदू इन नियमों को न माने, तो मंदिर का सात्विक माहौल खराब हो सकता है। शनि शिंगणापुर में जब एक मुस्लिम कर्मचारी मंदिर के चबूतरे पर चढ़ा, तो भक्तों को लगा कि ये गलत है। ऐसे पवित्र काम सिर्फ हिंदुओं को करने चाहिए, जो इन नियमों को समझते हों।
ये सवाल उठता है कि 114 मुस्लिम कर्मचारी वहाँ थे ही क्यों? मंदिर के काम, चाहे वो पूजा हो, रखरखाव हो या कोई और काम.. ये कम हिंदुओं को ही मिलना चाहिए। हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिर की सेवा वही करे, जो उसकी पवित्रता को समझे। गैर-हिंदू कर्मचारी, भले ही वो अच्छे इंसान हों, हिंदू रीति-रिवाजों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी रखना सही है।

कानून और परंपरा भी यही कहते हैं

इस सोच को कानूनी समर्थन भी मिला है। जनवरी 2024 में मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि तमिलनाडु के हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदू लोग ‘कोडिमरम’ (झंडे वाले खंभे) से आगे नहीं जा सकते। कोर्ट ने कहा कि मंदिर हिंदुओं की पूजा के लिए हैं, और गैर-हिंदुओं का पवित्र जगहों पर जाना मंदिर की पवित्रता को नुकसान पहुँचा सकता है। ये फैसला साफ बताता है कि मंदिरों में हिंदू परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अगर गैर-हिंदुओं को मंदिर के पवित्र हिस्सों में जाने की इजाजत नहीं, तो उन्हें मंदिर के काम में शामिल करने का क्या मतलब? शनि शिंगणापुर में मुस्लिम कर्मचारी भले ही पूजा न करते हों, लेकिन मंदिर की दीवार या शिखर पर काम करना भी पवित्र काम है। ऐसे काम हिंदुओं को ही करने चाहिए, ताकि कोई विवाद न हो।
ऐसे कई मंदिर हैं, जहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। जैसे सबरीमाला मंदिर में सख्त नियम हैं। तेलंगाना स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में ऐसी ही घटना के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केवल हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। शनि शिंगणापुर में भी यही भावना है कि मंदिर का हर काम हिंदू धर्म के हिसाब से हो।

मंदिरों के मैनेजमेंट से खुद को दूर रखें सरकारें

ये विवाद ये भी दिखाता है कि सरकार मंदिरों को अपने कंट्रोल में रखती है। महाराष्ट्र में कई मंदिर ट्रस्ट को सरकारी अधिकारी चलाते हैं। हिंदू संगठन इसका विरोध करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि मंदिरों का पैसा धर्म और संस्कृति के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, न कि सरकारी खर्चों में। 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने शनि शिंगणापुर मंदिर को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की थी, लेकिन हिंदू संगठनों ने इसे रुकवाया।
इस बार आचार्य तुषार भोसले और उनके संगठन ने मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की माँग की। कुछ लोग इसे राजनीति कह सकते हैं, लेकिन हिंदू भक्तों के लिए ये मंदिर की पवित्रता की लड़ाई है। जैसे अयोध्या के राम मंदिर में हिंदू अधिकारियों को अहम जगह दी गई, वैसे ही शनि शिंगणापुर में भी हिंदू कर्मचारी होने चाहिए।

फैसले पर सवाल उठाने वालों को जवाब

शनि शिंगणापुर देवस्थान के सीईओ गोरक्षनाथ दरंदाले ने बताया कि करीब 2400 कर्मचारी यहाँ काम करते हैं। इनमें से कई काम पर नहीं आते। ऐसे लोगों की सैलरी भी रोकी गई है। इसके बाद ही ये कार्रवाई की गई। कईयों की सैलरी 5-5 माह से रुकी है। कुछ लोग कहते हैं कि 114 मुस्लिम कर्मचारियों को निकालना भेदभाव है। ट्रस्टी अप्पासाहेब शेटे का कहना है कि धर्म की वजह से नहीं, बल्कि खराब काम और गैर-हाजिरी की वजह से ऐसा हुआ। लेकिन 167 में से 114 मुस्लिम कर्मचारियों का निकाला जाना और फैसले की टाइमिंग सवाल उठाती है।
हालाँकि हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिर का काम कोई साधारण नौकरी नहीं। ये सेवा है, जो आस्था और परंपरा से जुड़ी है। भले ही कर्मचारी पूजा न करते हों, लेकिन मंदिर के हर काम में पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है। अगर गैर-हिंदू कर्मचारी मंदिर की दीवार पेंट करें या शिखर पर चढ़ें, तो ये भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। इसलिए मंदिर में सिर्फ हिंदू कर्मचारी रखना ही सही है।
मद्रास हाई कोर्ट का फैसला भी यही कहता है कि मंदिरों में हिंदू परंपराओं को प्राथमिकता मिले। गैर-हिंदुओं को दूसरी नौकरियों में मौका मिल सकता है, लेकिन मंदिरों में हिंदुओं को ही काम करना चाहिए।

पहले भी बदले हैं नियम

शनि शिंगणापुर मंदिर पहले भी विवादों में रहा है। 2016 में महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं थी। तब कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने आंदोलन किया, और बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कोई कानून महिलाओं को मंदिर में जाने से नहीं रोक सकता। इस फैसले के बाद 400 साल पुराना नियम टूटा। ये दिखाता है कि समय के साथ मंदिरों के नियम बदल रहे हैं।
शनि शिंगणापुर मंदिर पहले भी विवादों में रहा। 2016 में महिलाओं को गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं थी। तृप्ति देसाई ने आंदोलन किया और बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कोई कानून महिलाओं को मंदिर में जाने से नहीं रोक सकता। तब 400 साल पुराना नियम टूटा। ये दिखाता है कि समय के साथ कुछ नियम बदल सकते हैं, लेकिन मंदिर की पवित्रता को बनाए रखना जरूरी है।
हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिरों में गैर-हिंदू कर्मचारियों को रखने का कोई मतलब नहीं। अगर मंदिर हिंदुओं का है, तो उसका हर काम हिंदुओं के हाथ में होना चाहिए। इससे न विवाद होगा, न किसी की भावनाएँ आहत होंगी।

मद्रास हाई कोर्ट का फैसला हर जगह हो लागू

शनि शिंगणापुर का ये मामला साफ करता है कि हिंदू मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी होने चाहिए। इसके लिए साफ नियम बनने चाहिए। पूजा, रखरखाव या कोई भी काम, जो मंदिर से जुड़ा हो, हिंदुओं को ही करना चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट का फैसला इसकी शुरुआत है, लेकिन इसे हर मंदिर में लागू करना होगा।
सरकार को मंदिरों से अपना कंट्रोल हटाना चाहिए। मंदिरों को हिंदू समाज चलाए, ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे। हिंदू संगठनों को भी अपनी बात रखते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि कोई तनाव न बढ़े।
एक हिंदू भक्त के लिए मंदिर की पवित्रता सबसे ऊपर है। इसलिए शनि शिंगणापुर में 114 मुस्लिम कर्मचारियों का होना गलत था। ऐसे में मंदिर का हर काम हिंदुओं के हाथ में होना चाहिए, ताकि भक्तों की आस्था बनी रहे। ये फैसला सही दिशा में है और इसे हर हिंदू मंदिर में लागू करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश : आजमगढ़ में मुस्लिम ऑर्केस्ट्रा संचालक ने हिंदू देवी-देवताओं पर की अभद्र टिप्पणी, अश्लील इशारे कर उड़ाया मजाक: बीजेपी नेताओं ने दर्ज कराई FIR


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक स्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और अश्लील इशारे करने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ आरोपित ने मंच से ऐसी हरकतें कीं, जिसने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वह व्यक्ति हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बातें कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति ‘लंगड़ा ग्रुप ऑर्केस्ट्रा’ का मालिक है।

अगर यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है तो क्या वह अपने मजहब इस्लाम के खिलाफ कर सकता है? ये नौटंकी सनातन के ही विरुद्ध क्यों? जब हिन्दुओं द्वारा पलटवार किया जाता है क्यों 'सिर तन से जुदा' गुंडों का गैंग हरकत में आ जाता है?      

कार्यक्रम में मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने जब यह सब सुना, तो वह गुस्से में आ गए और आरोपित को जमकर फटकार लगाई। बुजुर्ग ने उसे गालियाँ देकर उसकी हरकतों का विरोध किया। लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। मामला तब सामने आया जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग और धार्मिक संगठनों के सदस्य नाराज हो गए।

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए मुबारकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने माँग की कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। भाजपा नेताओं ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपित के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नेताओं ने इसे पुलिस की निष्क्रियता और हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए विरोध जताया और थाने के प्रभारी से तत्काल कार्रवाई की माँग की।

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी देखने को मिली। एक सोशल मीडिया यूजर ने इस घटना पर पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। इसके जवाब में आजमगढ़ पुलिस ने कहा कि मुबारकपुर थाना प्रभारी को मामले की जाँच करने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिस जगह पर भगवान राम ने की महादेव की पूजा, वहाँ मंदिर के पास खड़ी कर दी मस्जिद-मजार

                                      बांदा का अवैध मस्जिद (साभार: भारतवर्ष/आजतक)
उत्तर प्रदेश के बाँदा में जिस जगह पर भगवान राम ने भगवान शंकर को जलाभिषेक की थी, वहाँ अवैध रूप से एक मस्जिद बना दी गई है। इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया है और उस अवैध मस्जिद को गिराने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। बाम्बेश्वर पर्वत पर स्थित उस शिवलिंग को बमदेव भोलेनाथ की मंदिर के नाम से जाना जाता है।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का आरोप है कि कोरोना काल के जब हर तरफ लॉकडाउन था, उस दौरान इस पर्वत पर मुस्लिमों ने चुपके से एवं अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण कर लिया था। VHP के मंडल अध्यक्ष अशोक ने कहा कि वहाँ पर आधा दर्जन मजारें भी बना ली गई हैं। पहाड़ पर रोज फतिहा और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ी जाती है।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस जगह पर कोई मुस्लिम बस्ती नहीं थी, लेकिन अब काफी तादाद में यहाँ मुस्लिम हने लगे हैं। इससे सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में मस्जिद और अवैध ढाँचों को गिराने के लिए विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि इस्लाम धर्म के लोग भारत का इस्लामीकरण करा रहे हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर सरकार ने इसे नहीं हटाया तो वे इस मस्जिद को गिरा देंगे। हिंदू संगठनों की माँग है कि अवैध मस्जिद एवं मकबरे का बनाने वालों को तत्काल जेल में डाला जाना चाहिए और अवैध ढाँचों एवं उसे बनाने वालों के मकानों पर बुलडोज़र चलना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के चंद्रमोहन बेदी ने कहा कि यह पर्वत बहुत पुराना है। यहाँ पर पीछे की तरफ कुछ लोगों ने अवैध रूप से मजार बनाई और फिर उसे धीरे-धीरे मस्जिद में बदल दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को अंधविश्वास में डाल दिया और जगह हथिया ली। उन्होंने पूछा कि जब सतह पर पत्थर ही पत्थर हैं तो मजार कैसे बन सकती है। मजार बनाने के लिए खुदाई होती है, लेकिन पत्थर पर खुदाई कैसे होगी।

VHP के महामंत्री दीपू दीक्षित ने बताया कि शुरू में मुस्लिमों ने पर्वत के एक पत्थर को हरे रंग से पोता फिर धीरे-धीरे इस पर मजार बनाई। फिर इस पर एक बड़ी मस्जिद बना दी। इसके बाद काफी लोग यहाँ टोपी लगाकर आना शुरू हो गए। दीपू ने कहा कि यह एक कैंसर का रूप है। इसे तत्काल जड़ से काटकर फेंक देना चाहिए, वरना यह पूरे शरीर को खराब कर देगा।

बाम्बेश्वर पर्वत पर बने प्राचीन मन्दिर के पुजारी पुत्तन महाराज ने और मंदिर कमिटी के अध्यक्ष ने भी मस्जिद का विरोध किया है। उनका कहना है यह यह स्थिति अयोध्या और काशी मथुरा जैसी बन सकती है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान यहाँ के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया था। इस दौरान भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिया था।

हनुमान पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे, राम जी ने पहली बार पढ़वाया था: सरकारी टीचर जियाउद्दीन ने क्लास में कहा- वे मूर्ख थे, गंगा भी देवी नहीं; इन जेहादियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए अनवर शेख और अली सीना आदि की किताबों का वितरण होना चाहिए

                   शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन और विद्यार्थियों के गुस्साए परिजन (साभार: ऑपइंडिया अंग्रेजी)
मदरसा छाप शिक्षकों को इतना भी नहीं मालूम कि पुरुषोत्तम श्री राम और उनके परमभक्त हनुमान हुए थे त्रेता युग में फिर आया द्वापर युग यानि अनेक लाख वर्षों के बाद आया कलयुग और इस्लाम आया लगभग 5 लाख वर्ष बीत जाने के बाद, अब कोई ऐसे उपद्रवी शिक्षकों से पूछो सबूत दिखा या सार्वजानिक जमीन पर नाक रगड़ कर माफ़ी मांगे। या फिर इन जैसे दंगाई उपद्रवियों और इनके समर्थकों को पाताललोक भेजने के लिए अनवर शेख और अली सीना की किताबों का वितरण करना चाहिए। जब इन लोगों को ईंट का जवाब मिलेगा तब इन जैसों और इन जेहादियों की अक्ल ठिकाने आएगी। वरना लोग कहेंगे कि हिन्दू हमेशा हिन्दू-मुसलमान करता रहता है। जबकि सच्चाई कुछ और है। ये जेहादी देश का माहौल ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं। इन जेहादियों को मालूम होना चाहिए कि द्वापर युग तक हर पशु-पक्षी इंसान की तरह बोलता था, लेकिन जैसे-जैसे द्वापर युग समाप्ति की ओर बढ़ कलयुग की शुरुआत होने लगी, सभी पशु-पक्षियों की आवाज़ सिवाए तोता और मैना को छोड़ सबकी बंद हो गयी।        
Understanding Mohammad & Muslim के लेखक अली सीना लिखते हैं कि किताब को पढ़ लोग इस्लाम छोड़ रहे हैं, जबकि लगता है सिर्फ इसी किताब को ही नहीं अन्य किताबों से भी बदलाव आ रहा है जिसका बीजारोपण अनवर शेख ने किया। फिर अनवर शेख से बहुत पहले सीता राम गोयल की किताब आयी थी Why I became Hindu, पुस्तक के प्रकाशित होने से पूर्व गोयल ने Organser Weekly में सीरीज शुरू करने के बाद पुस्तक रूप में प्रकाशित की। उस समय केवल रतन मलकानी मुख्य संपादक होते थे।         

बिहार के बेगूसराय में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने हिंदुओं के आराध्य भगवान राम और हनुमान जी को मुस्लिम बताया है। क्लास में पढ़ाते समय जियाउद्दीन ने बच्चों से कहा कि ‘भगवान राम और उनके भक्त हनुमान पहले मुसलमान थे। वे नमाज पढ़ा करते थे।’ इतना ही नहीं, उसने हनुमान जी को मूर्ख और माँ गंगा को शक्तिहीन बताया। इसकी जानकारी लोगों को मिली तो उन्होंने हंगामा कर दिया। वहीं, बेगूसराय से भाजपा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शिक्षक पर कार्रवाई की बात कही है।

मोहम्मद जियाउद्दीन बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में स्थित हरिपुर कादराबाद के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक है। मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) को वह 7वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहा था। सामान्य ज्ञान और व्याकरण की कक्षा के दौरान उसने यह आपत्तिजनक बातें कही। शिक्षक जियाउद्दीन ने कहा, हनुमान जी पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे। रामजी ने उन्हें पहली बार नमाज पढ़वाया था।”

इतना ही नहीं, ईटीवी के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 से इस स्कूल में पदस्थापित शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने क्लास में बच्चों को पढ़ाते वक्त माँ गंगा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। गंगा नदी की शक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए उसने बच्चों से कहा, “गंगा नदी देवी का रूप नहीं है। अगर ऐसा होता तो लोग गंगा नदी में डूब क्यों जाते… मर क्यों जाते…?” 

स्कूल के विद्यार्थी जब घर गए तो उन्होंने परिजनों और गाँव वालों को इस बात की जानकारी दी। इसके बाद गाँव वाले एकजुट होकर उसी दिन शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन के घर गए थे। कहा जा रहा है कि लोगों के गुस्से को देखते हुए शिक्षक ने माफी माँग ली। हालाँकि, लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ। अगले दिन बुधवार को जब स्कूल खुला तो छात्रों के परिजन स्कूल पहुँच गए और विद्यार्थियों से पूछताछ की।

साहिबा परवीन नाम की छात्रा ने कहा, “टीचर ने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के पहले ऐसे भगवान हैं, जिन्होंने नमाज पढ़ी थी। उनको रामजी ने नमाज पढ़वाया था। हनुमान जी मुसलमान हैं।” वहीं, मानव कुमार नाम के छात्र ने कहा, “जियाउद्दीन सर ने क्लास में हनुमान जी मुस्लिम थे। हनुमान जी पढ़ने-लिखने में मूर्ख थे। मूर्खता के कारण ही वो पर्वत उठा लाए थे। उन्हें राम जी ने पहली बार नमाज पढ़ाया था।”

अन्य विद्यार्थियों ने भी यही बातें दोहराईं। इतनी बातें सुनकर परिजनों के साथ-साथ स्कूल के अन्य शिक्षक भी सन्न रह गए। उन्होंने मोहम्मद जियाउद्दीनसे नाराजगी जाहिर जाहिर की। विद्यार्थियों के मुँह से इतना सुनते ही परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और हंगामा करते हुए शिक्षक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। परिजनों की नाराजगी को देखते हुए मोहम्मद जियाउद्दीन ने एक बार फिर माफी माँगी।

शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने कहा, “मैंने गलती से ऐसी बातें बच्चों को पढ़ा दी। मुझसे गलती हो गई, माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसा नहीं होगा।” जियाउद्दीन ने परिजनों से कहा कि वह उसने ‘मुसल्लम ईमान’ की बात छात्रों को बताई। जब परिजनों ने उससे पूछा कि बच्चों को उसने क्या पढ़ाया था तो इस सवाल के वह जवाब में चुप्पी साधे रहा। इसके बाद परिजनों के गुस्सा और बढ़ गया।

परिजनों ने शिक्षक जियाउद्दीन को निलंबित कर उस पर एफआईआर दर्ज करने की माँग पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने की जानकारी जब अधिकारियों को हुई तो बीडीओ अभिषेक राज और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निर्मला कुमारी स्कूल पहुँचे और जाँच की। बीडीओ ने कहा कि शिक्षक ने परिजनों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। हालाँकि, जाँच के दौरान शिक्षक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

इस घटना के बाद बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के महान भक्त हैं। इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्होंने धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जिला प्रशासन से शिक्षक पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की है।

गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने बयान का वीडियो जारी करते हुए कहा, “बछवाड़ा प्रखंड के हरपुर, कादराबाद (बेगूसराय) के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक जियाउद्दीन द्वारा भगवान राम और हनुमान जी को मुसलमान बताने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। जियाउद्दीन ने इसे स्वीकारा और मुस्लिम छात्राओं समेत अन्य ने पुष्टि की। समाज में विद्वेष फैलाने वाले ऐसे शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज में चोर माफ़ी लिख लौटा गया भगवान की मूर्ति: जबसे मंदिर में चोरी की बुरे सपने आ रहे, हमारे बाल-बच्चों को क्षमा करें… : कर्नाटक में घर की दीवार पर सिर मार-मार मरा था नवाज

                प्रयागराज में चोर ने माफीनामा लिख कर लौटाई मंदिर से चोरी की गई मूर्ति  (चित्र साभार- जागरण)

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मंदिर से मूर्ति चुराने वाला चोर मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को खुद ही उन्हें लौटा गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी छोड़ कर गया है। इसमें उसने मंदिर में चोरी के बाद अपने साथ लगातार अनिष्ट होने की बात कही है। मूर्ति को फिर से विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित करवाया जा रहा है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि मूर्ति को जूट की बोरी में आश्रम के गेट के पास रखकर चोर चला गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला प्रयागराज जिले के थाना क्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ गऊघाट इलाके में खासला आश्रम है। इस आश्रम में बने मंदिर के गर्भगृह में अष्टधातु की बनी करीब 100 साल पुरानी राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित है। सोमवार (23 सितंबर 2024) को इस अष्टधातु की मूर्ति को कोई चुरा ले गया। तब मंदिर के महंत जयराम दास ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर चोर की तलाश शुरू कर दी।

लगभग 1 हफ्ते बीत जाने के बावजूद चोर को पकड़ा नहीं जा सका था। इस बीच मूर्ति चोरी से दुखी महंत जयराम दास ने अन्न का त्याग कर दिया। आश्रम के अन्य शिष्य भी दुखी रहने लगे। तभी अचानक मंगलवार (1 अक्टूबर) को चोर मूर्ति मंदिर के पास रख कर चुपचाप चला गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी महंत को सम्बोधित करते हुए छोड़ कर गया है। इस माफीनामे में उसने अपने काम को अज्ञानता बताते हुए लिखा है, “मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे बुरे-बुरे सपने आ रहे हैं।”

अपनी पहचान उजागर न करते हुए चोर ने माफीनामे में महंत को प्रणाम करते हुए लिखा है, “मेरे बेटे की तबीयत भी बहुत खराब हो गई है। थोड़े पैसे के लिए मैंने बहुत गंदा काम किया है। मैंने मूर्ति को बेचने के लिए उसके साथ काफी छेड़छाड़ किया है। अपनी गलती की माफी माँगते हुए मैं मूर्ति को रख कर जा रहा हूँ। आपसे विनती करता हूँ कि मेरी गलती को माफ कर भगवान को फिर से मंदिर में रखवा दिया जाए। हमारे बच्चों को क्षमा करते हुए अपनी मूर्ति स्वीकार करें।”

चोर ने मूर्ति को बेचने के लिए पॉलिश भी करवा दिया था। फिलहाल मूर्ति वापस आ जाने से आश्रम में ख़ुशी का माहौल है। प्रतिमा को जलाभिषेक व अन्य धार्मिक विधि-विधान करते हुए फिर से स्थापित किया जा रहा है। मामले की सूचना पुलिस को भी दे दी गई है। पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि वो सिद्ध मंदिर के महंत हैं और उन्होंने चोरी के बाद ईश्वर को ही न्याय करने के लिए कहा था।

कर्नाटक में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

जनवरी 2021 में कर्नाटक के मंगलुरु में ऐसा ही मामला सामने आया था। तब स्वामी कोरगज्जा मंदिर की दानपेटी में कंडोम डाल दिया गया था। पुलिस आरोपितों को खोज नहीं पाई थी, लेकिन एक दिन अब्दुल रहीम और तौफीक खुद ही मंदिर में महंत के आगे पहुँच गए थे। उन्होंने नवाज के साथ मिल कर मंदिर की दानपेटी में कंडोम डालने का गुनाह कबूल करते हुए बताया कि उस करतूत के बाद उन दोनों को खून की उल्टियाँ और खूनी पेचिश शुरू हो गई थी।
दोनों ने यह भी बताया था कि इस घटना के बाद नवाज अपने घर की दीवार पर सिर पटक-पटक कर मर गया था। मंदिर के पुजारी से तौफीक और रहीम ने कान पकड़ कर दया की भीख माँगी थी।

उत्तर प्रदेश : वाराणसी में साईं प्रतिमाओं को गंगा में कर रहे प्रवाहित

             कई मंदिरों से साईं की मूर्ति हटा कर गंगा नहीं में किया जा रहा विसर्जित (चित्र- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी काशी में कई मंदिरों से शिरडी साईं की प्रतिमाएँ हटाई जा रही हैं। अब तक 14 मंदिरों से साईं की मूर्तियाँ हटा दी गई हैं। यह कदम केंद्रीय ब्राह्मण सभा के विरोध के बाद उठाया गया है, जिसमें साईं की पूजा को सनातन धर्म विरोधी बताया गया था। मूर्तियाँ हटाने से पहले संबंधित मंदिरों की सहमति ली गई है और उन्हें विधि-विधान से गंगा में विसर्जित किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाराणसी के जिन प्रमुख मंदिरों से साईं की प्रतिमाएँ हटाई गई हैं, उनमें बड़ा गणेश मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और पुरुषोत्तम मंदिर समेत 14 मंदिर शामिल हैं। सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि कुल 100 मंदिरों की सूची बनाई गई है, जहाँ से साईं की मूर्तियों को हटाया जाएगा। इनमें अगस्त्यकुंडा और भूतेश्वर जैसे पौराणिक स्थल भी शामिल हैं।

अजय शर्मा ने दावा है कि काशी महादेव शिव की नगरी है, और अनजाने में लोग साईं की पूजा करने लगे थे। उनका दावा है कि जिन मंदिरों से साईं की मूर्तियाँ हटाई जा रही हैं, उन्हें 2013 में स्थापित किया गया था। मूर्तियों को हटाने के बाद गंगा नदी में विधिपूर्वक विसर्जित किया जा रहा है। बड़ा गणेश मंदिर में साईं की मूर्ति की जगह माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

अजय शर्मा ने यह भी कहा कि साईं की पूजा करने वालों को अपने घर में पूजा करने की छूट है, या वे चाहें तो एक अलग मंदिर का निर्माण कर सकते हैं।

मंदिरों से मूर्तियाँ हटाने से पहले मंदिर प्रबंधन की सहमति ली जा रही है। बड़ा गणेश मंदिर के महंत रम्मू गुरु का कहना है कि लोग अज्ञानता के कारण साईं की पूजा कर रहे थे। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने भी इस कदम का समर्थन किया, उनका कहना है कि शास्त्रों में शिरडी साईं की पूजा का कोई विधान नहीं है। हालाँकि, समाजवादी पार्टी के MLC आशुतोष सिंह और कुछ अन्य लोग इस कदम का विरोध कर रहे हैं।

महाराष्ट्र : ‘हिंदुओं की माँ $^&#, गणेश को देख उलटी आती है’: मीरा रोड की सोसायटी के हिन्दुओं ने गाली बकने वाले वजूद पर दर्ज कराई FIR, बकरीद पर किया था बवाल

                            मुंबई के मीरा रोड इलाके में पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देने वाले वजूद पर FIR
मुंबई के मीरा रोड इलाके की एक सोसायटी में बकरों की कुर्बानी को लेकर 16 जून (रविवार) को मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों का सोसायटी में रहने वाले हिन्दुओं से विवाद हो गया था। उस समय वजूद नाम के आरोपित ने पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देते हुए भगवान गणेश तक के खिलाफ अपशब्द बोले थे। 17 जून (सोमवार) को इस मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन में की गई थी। अब पुलिस ने आरोपित वजूद के खिलाफ FIR 
दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला मीरा रोड इलाके के काशीगाँव थानाक्षेत्र का है। यहाँ पुलिस ने हिल गैलेक्सी में रहने वाले वजूद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज किया है। वजूद पर “हिन्दुओं की माँ ** देंगे” जैसे शब्द बोल कर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। यह गालियाँ उसने तब दी थीं जब बकरीद के मौके पर हिन्दुओं ने सोसायटी के अंदर बकरे की कुर्बानी का विरोध किया था। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालत को संभाला था।

                                                                  FIR कॉपी

पुलिस ने सोसायटी के अंदर पशुओं को ले कर कोई नियम न बने होने का हवाला देकर वजूद को बकरियाँ रखने की अनुमति दे दी थी। FIR कॉपी में बताया गया है कि मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं को धमकी दी गई थी। उन्होंने कहा था, “हम सोसायटी में ही बकरों की कुर्बानी देंगे। चाहे कुछ भी हो जाए। जो भी कर सको कर लो।” इसी विवाद के दौरान भगवान गणेश का भी अपमान किया था। वजूद ने कहा, “जब तुम लोग गणेश उत्सव मनाते हो तब हम कुछ कहते हैं ? जब हम तुम्हारे भगवान गणेश को देखते हैं तो हमें गुस्सा और उल्टी आती है। हम भी देखेंगे कि तुम यहाँ अपना गणेश उत्सव कैसे मनाते हो।”

                                                                   शिकायत कॉपी

तब ऑपइंडिया से बात करते हुए हिन्दुओं ने सोसायटी को मुस्लिम बहुल बताया था। उन्होंने ये भी जानकारी दी थी कि मकान खरीदने से पहले उन्हें जिम और क्लब के लिए जो जगह बताई गई थी बाद में बिल्डर की तरफ से वहाँ मस्जिद बना दी गई थी। सोसायटी आर आर बिल्डर्स द्वारा बनाई गई है। इसके मालिक रसूल, इरफ़ान, जुनैद और जब्बार शेख हैं। बकरों की कुर्बानी सोसायटी के अंदर करने पर अड़े वजूद को समझाने के लिए जब बिल्डर को बुलवाया गया तो उन्होंने शहर से बाहर होने की दलील दी थी। सोसायटी के सिख समुदाय के भी कई लोग खुद को मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित बताते हैं।

हरियाणा : गाँव का नाम मोहम्मदपुर, खुदाई में निकली 400 साल पुरानी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्तियाँ

                                                 खोदाई मिली देव प्रतिमाएँ (साभार: जागरण)
हरियाणा के गुरुग्राम से सटे मानेसर में निर्माण के लिए एक प्लॉट की खुदाई के दौरान तीन प्राचीन प्रतिमाएँ मिली हैं। इनमें से एक प्रतिमा भगवान विष्णु की और दूसरी माता लक्ष्मी की है। वहीं, तीसरी प्रतिमा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी बैठे हुए अवस्था में हैं। ये सभी प्रतिमाएँ लगभग 400 साल पुरानी बताई जा रही हैं।

यह घटना मानेसर के गाँव बाघनकी की है। यहाँ के रहने वाले प्रभु दयाल ने एक प्लॉट खरीदा था। इस प्लॉट पर घर बनवाने के लिए वे बुलडोजर से खोदाई करवा रहे थे। खोदाई के दौरान वहाँ काम कर रहे श्रमिकों को ये मूर्तियाँ मिलीं। तीनों मूर्तियाँ जमीन में 15 फीट की गहराई में मिलीं हैं। ये कांस्य धातु की बनी हैं, जो बेहद कीमत बताई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में प्लॉट के मालिक ने बुलडोजर के चालक को लालच दिया और इन मूर्तियों के बारे में किसी को बताने से मना किया। यह भी कहा जा रहा है कि वह इन मूर्तियों को अपने घर में स्थापित करना चाहता था। प्लॉट से मूर्ति निकलने की बात दो-तीन दिन तक दबी रही। जब चालक को पैसे नहीं मिले तो उसने इसकी जानकारी बिलासपुर थाने को दी।

इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और मूर्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद इन मूर्तियों के बारे में गाँव वालों को पता चला। पुलिस ने इन मूर्तियों के बारे चंडीगढ़ स्थित पुरातत्व विभाग को जानकारी दी। इसके बाद सोमवार (22 अप्रैल 2024) को पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य और डॉक्टर कुश ढेबर बिलासपुर थाना पहुँचे।

यहाँ उन्हें तीनों मूर्तियों को आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देखने पर ये मूर्तियाँ करीब 400 साल पुरानी लग रही हैं। हालाँकि, जाँच के बाद ही इनकी वास्तविक उम्र का पता चलेगा। इन मूर्तियों में भगवान विष्णु की लंबाई 1.5 फीट और माता लक्ष्मी की प्रतिमा की लंबाई लगभग 1 फीट है।

वहीं, ग्रामीणों ने इन मूर्तियों को गाँव वालों को सौंपने का आग्रह किया था। ग्रामीणों का मानना है कि ये मूर्तियाँ उनके गाँव की धरोहर हैं। जिस जगह से मूर्तियाँ मिली हैं, उस जगह पर वे मंदिर का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि वहाँ उन्हें स्थापित किया जा सके। हालाँकि, पुलिस ने ग्रामीणों को मूर्तियाँ देने से इनकार कर दिया।

पुलिस का कहना है कि भूमि की खोदाई में निकलने वाली वस्तु भारत सरकार की संपत्ति होती है। ऐसे में इन मूर्तियों पर पुरातत्व विभाग का अधिकार है। वहीं, ग्रामीणों ने प्लॉट में और खोदाई कराने की माँग की है। इस पर पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक भट्टाचार्य ने प्रशासन की निगरानी में खोदाई करने के लिए कहा है।

संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर बनानी भट्टाचार्य ने कहा कि इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखा जाएगा और वहाँ उन्हें प्रदर्शित किया जाएगा। बनानी ने कहा कि उन्होंने उस स्थान की भी जाँच की है, जहाँ वे पाए गए थे। ऐसा लगता है कि उन्हें लगभग 400 साल पहले गाँव में लाया गया था।

न्यूज18 के अनुसार, पुलिस का कहना है कि प्रभु दयाल को एक सोने का बर्तन और सिक्कों का भंडार भी मिला, लेकिन इन्हें बरामद नहीं किया गया है। पुलिस ने कहा कि मूर्तियों की खोज के बाद ग्रामीण उस स्थान पर एक मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन उनके और जमीन मालिक के बीच अनबन के कारण अभी कुछ नहीं हो सका।

नीचता की भी हद होती है; मोदी विरोध में कायस्थों के अराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का अपमान करने की कैसे हिम्मत की कांग्रेसी पवन खेरा? तेरे में शर्म है या नहीं ?

नीचता की भी हद होती है, पहले हिन्दू विरोधी कांग्रेस अपने शासनकाल में किस तरह पुरुषोत्तम श्रीराम का अपमान करती रही और अब कायस्थों के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का अपमान कर रही है। कांग्रेस में जितने भी कायस्थ है, उन्हें तुरन्त कांग्रेस छोड़ देनी चाहिए। इतना ही नहीं जब तक पवन खेरा नाक रगड़ कर माफ़ी न मांगे कोई कायस्थ कांग्रेस को वोट नहीं दे।  कांग्रेस अपने आप साबित कर रही है कि यह एक हिन्दू विरोधी पार्टी है। 

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तय करने में लगा हुआ है। हालाँकि, INDI गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस रोज-नए विवाद पैदा कर रही है। कभी कंगना रनौत को लेकर आपत्तिजनक बयान देती है तो कभी हिंदू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी करती है। अब कांग्रेस के एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। यूजर्स का कहना है कि कांग्रेस ने कायस्थ समाज के कुलदेवता चंद्रगुप्त भगवान का अपमान किया है।


दरअसल, कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने रविवार (14 अप्रैल 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “आज की प्रेस कांग्रेस की शुरुआत में यमलोक की एक घटना का मैं जिक्र करना चाहता हूँ। यमराज ने एक ऐसी मशीन बनाई थी कि जब भी कोई झूठ बोलता था तो टन…टन… आवाज शुरू हो जाती। आज सुबह से मशीन बंद ही नहीं हुई। टन…टन…टन… बजे जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “यमराज बहुत चिंतित हुए और चित्रगुप्त को बुलाया और कहा कि चित्रगुप्त ये बंद क्यों नहीं हो रही है। चित्रगुप्त ने कहा- महाराज, आज मोदी जी का संकल्प पत्र जारी होने वाला है। अभी तक बज रही है, आपको आवाज आ रही होगी। ये स्थिति एक ऐसे नेता की हो गई है, जो 10 साल से प्रधानमंत्री है। मोदी जी के घोषणा पत्र का नाम संकल्प पत्र नहीं, माफीनामा होना चाहिए।”

पवन खेड़ा ने भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए जिस तरह की कहानी गढ़ी और उसमें यमराज एवं चित्रगुप्त का वर्णन किया, उससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। सोशल मीडिया यूजर्स पवन खेड़ा और कांग्रेस को हिंदू विरोधी बता रहे हैं। उन पर हिंदू देवता का अपमान करने का आरोप लग रहा है।

NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी इसको लेकर पवन खेड़ा और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने X पर लिखा, “चित्रगुप्त जी “भगवान” हैं, अपमानजनक तरीक़े से भगवान चित्रगुप्त जी का नाम लेना भगवान की निंदा करना है। ये केवल हमारे कायस्थ कुल का नहीं बल्कि समस्त हिंदुओं का अपमान है, ये असहनीय है।”

अंकुश नाम के सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “चित्रगुप्त जी संपूर्ण कायस्थ समाज के लिए भगवान स्वरुप हैं। वह तो स्वयं संपूर्ण कायस्थ समाज के कुलदेवता भी हैं। हैरानी तो नहीं हुई के पवन खेड़ा जी उनका सम्मान नहीं कर पाए क्यूंकि कांग्रेस तो समस्त सनातन के विनाश में ही लगी हुई है। कांग्रेस का विनाश निश्चित है।”

राकेश पांडेय नाम के यूजर ने लिखा, “चित्रगुप्त देव हैं, उनका अपमान करना हिंदुओं का अपमान है। संपूर्ण कांग्रेस हिंदुओं के देवी-देवताओं को अपमानित करने का ठेका लेकर बैठी है। अब इस पर कार्यवाही हो तो ये मूर्ख प्रवक्ता और नेता विक्टिम कार्ड दिखाने लगते है।”

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पंकज सिन्हा नाम के यूजर ने लिखा, “बोलते रहो, बोलते-बोलते अपने आप एक दिन ऐसा होगा कि मुख से आवाज आनी बंद हो जाएगी और फिर अचानक तुम्हारे मुख आवाज निकलने लगेगी – मोदी, मोदी। भारत को भारत नहीं बनने देनेवाले तुम्हारे जैसे लोग और तुम्हारा दल कांग्रेस का अब कोई महत्व नहीं है।”

शुभम वर्मा ने लिखा, “भगवान चित्रगुप्त सभी कायस्थों के अराध्य देव हैं । कांग्रेस को इनका अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। कॉन्ग्रेस को माफी माँगनी चाहिए, अन्यथा कोई भी कायस्थ कभी कांग्रेस को वोट नही करेगा।”

अहसानफरामोश फर्जी गांधी, देश से बस मांगता फिरता है; सारा विपक्ष सनातन का शत्रु; उदयनिधि स्टालिन को सीधी सजा का ऐलान करे सुप्रीम कोर्ट

 सुभाष चन्द्र

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनने से पहले विपक्षी ये कहकर तंज कसते थे कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, तारीख नहीं बताएँगे।’ रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए, तो विपक्षी दलों ने ये कहकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया कि ये बीजेपी का मंदिर है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने तमाम घृणा भरे बयान दिए, फिर भी बीजेपी के प्रति आम जन का समर्थन बढ़ता ही चला गया।

लेखक 
अब हताशा में आए विपक्षी नेता एक बार फिर से भगवान राम का ही नाम लेकर बीजेपी को निशाना बना रहे हैं। भले ही वो बीजेपी को निशाना बना रहे हों, लेकिन देश का आम जन अब उनके बयानों को अपने विरुद्ध समझने लगा है। इसके बावजूद उनकी आँखें खुलती नहीं दिख रही हैं। इसी कड़ी में विपक्ष की तीन सबसे बड़ी पार्टियों कॉन्ग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने एक ही समय में अलग-अलग बयानों के माध्यम से फिर से भगवान राम और भारतीय के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन किया है। चाहे वो कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी हों, या डीएमसे के ए राजा… या फिर टीएमसी विधायक रामेंदु सिन्हा रॉय।

समूचा विपक्ष सनातन धर्म और भगवान राम का शत्रु बना हुआ है। जिस किसी के मुंह में जो आ रहा है बक रहा है। आज ममता की TMC के एक विधायक रामेंदु सिन्हा राय ने कह दिया कि श्रीराम मंदिर “अपवित्र” और कहा कि किसी हिन्दू को उस मंदिर में पूजा नहीं करनी चाहिए। DMK का A Raja खुलकर बोला है कि हम राम के शत्रु हैं और पहले उसी ने उदयनिधि स्टालिन के सुर में सुर मिलाते हुए सनातन धर्म की तुलना HIV और Leprosy से की थी जबकि उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया और कोरोना कहते हुए कहा था कि इसका  विरोध नहीं होना चाहिए बल्कि इसे ख़त्म कर देना चाहिए। 

इसके अलावा भी स्वामी प्रसाद मौर्य और लालू की पार्टी और अन्य दलों के नेताओं ने सनातन धर्म, रामचरितमानस और भगवान राम के लिए अपमानजनक शब्द बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राहुल “कालनेमि” या उसके “फर्जी गांधी” परिवार के किसी सदस्य ने किसी बात का विरोध नहीं किया बल्कि राहुल ने तो कुछ दिन पहले यहां तक कहा कि “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” का नारा लगाने वाले एक दिन भूखे मर जाएंगे।

अभी एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें राहुल कालनेमि लोगों से पूछ रहा है कि “ये जो सोने की चिड़िया है, जिसे भारत माता कहते हैं और दुनिया भी इसे सोने की चिड़िया कहती है उसमे से मुझे कितना सोना मिला”।

यह अहसानफरामोश देश से केवल मांगना जानता है लेकिन कभी यह नहीं बताता कि इसने देश के लिए क्या किया। कितना सोना मिला यह जानने के लिए राहुल “कालनेमि” को पता होना चाहिए कि एक नाकाबिल निकम्मे आशिक व्यक्ति नेहरू की वजह से देश के टुकड़े हुए और वह प्रधानमंत्री बन गया और उसी वजह से आज यह आवारा सा फर्जी गांधी मौज कर रहा है। 

राहुल “कालनेमि” बताएं कि पिछले चुनाव में उसने जो 15 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी वह कहां से आई और जो सोनिया गांधी ने इस राज्यसभा के चुनाव में 12.80 करोड़ की संपत्ति घोषित की है वह कहां से आई। जीजा जी और बहन के पास करोड़ो की जमीन कहां से आई। समस्या यह है कि ये “फर्जी गांधी” खानदान देश को लूटना ही जानता है।

कल सुप्रीम कोर्ट में उदयनिधि स्टालिन की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने अपील करते हुए कहा कि स्टालिन के खिलाफ 6 राज्यों में दायर सभी मुकदमों को एक जगह कर दिया जाए और इसके लिए उसने अर्नब गोस्वामी और नूपुर शर्मा के cases का हवाला दिया जबकि सच्चाई यह है कि दोनों के खिलाफ अलग अलग राज्यों में cases कांग्रेस ने ही दर्ज कराए थे और अर्नब के cases club करने का विरोध खुद अभिषेक मनु सिंघवी ने किया था।

कल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने उदयनिधि स्टालिन को बड़े संयमित अंदाज में कहा कि आप मंत्री हैं आपको पता होना चाहिए कि जो आपने कहा उसके परिणाम क्या हो सकते थे, बयान देते हुए सावधानी बरतनी चाहिए थी।

दूसरी तरफ यह शालीनता नूपुर शर्मा के लिए नहीं दिखाई गई, उसके लिए तो जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत ने अदालत के इतिहास की सबसे भयंकर “hate speech” देते हुए उसे देश को आग लगाने के लिए जिम्मेदार कह दिया था।

अब सवाल उठता है कि 22 सितंबर, 2023 को जो नोटिस बहुत हीलाहवाली के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन को दिया था, उसका जवाब देने की बजाय उसने cases को club करने की अपील की जिसका मतलब है वह अपने बयान को गलत नहीं बता रहा। इसलिए ऐसे में उस पर कहीं कोई case चलाने की बजाय सुप्रीम कोर्ट को सीधे सजा का ऐलान कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ऐसा करने में सक्षम है अगर इच्छा शक्ति हो।

त्रिपुरा : सरस्वती माता की ‘क्लीवेज’ वाली मूर्ति, साड़ी भी नहीं: बवाल, ABVP और बजरंग दल के प्रदर्शन के बाद ढकी गई मूर्ति

बसंत पंचमी में त्रिपुरा के कॉलेज में बिन कपड़े पहनाए लगाई गई माँ की मूर्ति (तस्वीर साभार: ABVP त्रिपुरा)
त्रिपुरा के एक आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में सरस्वती माँ की मूर्ति को अश्लीलता से गढ़ने और बिना पारंपरिक साड़ी के दिखाने पर विवाद हो गया। मूर्ति देखने के बाद अखिल भातीय विद्यार्थी परिषद और बजरंग दल ने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरस्वती माता को इस तरह दिखाना अश्लीलता फैलाने से अधिक कुछ नहीं।

सरस्वती माता की जिस मूर्ति को लेकर इतना बवाल हुआ है उसकी वीडियो फोटो भी एबीवीपी त्रिपुरा ने अपने हैंडल पर शेयर की है। इस मूर्ति की फोटो में साफ पता चल रहा है कि कितने अश्लील ढंग से माता को प्रदर्शित करने का प्रयास हुआ है। मूर्ति में क्लीवेज का डिजाइन गढ़ा गया और मूर्ति पर पारंपरिक साड़ी तो दूर कोई कपड़ा तक नहीं है। इस मूर्ति की जानकारी जब हिंदूवादी कार्यकर्ताओं को हुई तो वो बहुत भड़के।

इस मामले पर एबीवीपी के त्रिपुरा यूनिट के महासचिव दिबाकर आचार्यजी ने कहा कि उन्हें इस प्रकार सरस्वती माता गलत चित्रण से समस्या है। उन्होंने कहा- “जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज बसंत पंचमी है और पूरे देश में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सुबह-सुबह हम सभी को खबर मिली कि गवर्नमेंट आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में देवी सरस्वती की मूर्ति को बहुत गलत और अश्लील तरीके से बनाया गया है।”

प्रदर्शनकारियों के विरोध के बाद त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में रखी गई मूर्ति को साड़ी पहनाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी ने कॉलेज प्राधिकरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

वहीं कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि मूर्ति हिंदू मंदिरों में देखी जाने वाली पारंपरिक मूर्तिकला के अनुसार है और इसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। मूर्ति को अंततः कॉलेज अधिकारियों द्वारा बदल दिया गया और पूजा पंडाल के पीछे प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया गया। प्रदर्शन के बाद मौके पर पुलिस भी आई लेकिन कोई आधिकारिक कंप्लेन नहीं हुई।


तेलंगाना : ‘हरे रामा… हरे कृष्णा’ का जाप और बिकनी में नाचती लड़कियाँ; अभिनेत्री कल्याणी बोलीं- हिंदुओं के अपमान पर माफी माँगें

संगीतकार DSP के गाने में हिंदू धर्म का अपमान (फोटो साभार: स्क्रीनशॉट)
DSP के नाम से प्रसिद्ध तेलुगू फिल्मों के संगीतकार देवी श्री प्रसाद (Musician Devi Sri Prasad or DSP) के खिलाफ तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है उन्होंने अपनी गीत ‘ओ परि’ (O Pari) में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

इस गाने को लेकर तेलुगू फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री कराटे कल्याणी (Karate Kalyani) ने हैदराबाद के साइबर क्राइम स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। अपनी शिकायत में कल्याणी ने आरोप लगाया है कि प्रसाद के गाने के बोल ‘बेहद आपत्तिजनक’ और ‘धार्मिक भावनाओं को आहत’ करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि गाने के वीडियो में कम कपड़े पहनी महिलाओं को धार्मिक मंत्र वाले संगीत पर नाचते हुए दिखाया गया है। गाने के बोल में ‘बोलो राम.. राम हरे… बोलो कृष्णा… कृष्णा हरे…’ शामिल है। इस गाने को YouTube पर 20 मिलियन (2 करोड़) से अधिक बार देखा जा चुका है। गाने के बोल रकीब आलम ने लिखे हैं।

कल्याणी ने कहा, “अगर कोई भगवदगीता या किसी अन्य पवित्र भजन के पूर्ण श्लोकों को नहीं कह सकता है तो हम उसे ‘हरे राम हरे कृष्ण‘ का जाप करने के लिए कहते हैं। यहाँ तक ​​कि ये श्लोक भी इतने ही शक्तिशाली हैं। ऐसी हिंदू धर्म की समृद्ध संस्कृति, हिंदू धर्मग्रंथ हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वह व्यक्ति जो ‘ऊ अंतवा ऊ ऊ अंतवा’ जैसे आइटम गीत का संगीतकार है, अब एक ऐसी रिलीज़ के साथ आया है जिसमें बिकनी पहनी महिलाओं को इन छंदों का जाप कर हिंदू लोगों की भावनाओं को आहत करते हुए दिखाया गया है। ऐसे लोग एक बार भी सोचते हैं कि इस तरह के उत्तेजक चित्रण करने वाले गीत को प्रदर्शित करने से हम सभी को कितना दुख होगा?”

कल्याणी बोलीं, “यदि आप हिंदू धर्म के बचे हुए को बचाने में सक्षम नहीं हैं तो कम-से-कम इसे अपमानित न करें। यही हम अनुरोध कर रहे हैं। हम इसके लिए आपसे माफी की माँग कर रहे हैं। हम माँग करते हैं कि गीत को हटा दिया जाए। यदि आवश्यक हो तो हम उसे सुनने के लिए उनके स्टूडियो में भी जाएँगे।”

शिकायत मिलने के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम ब्रांच के ACP प्रसाद ने कहा, “2 नवंबर को हमें ललित कुमार और अभिनेत्री कराटे कल्याणी से संगीत निर्देशक देवी श्री प्रसाद के गाने के बारे में शिकायत मिली थी। हम इस मामले की जाँच करेंगे, क्योंकि यह एक कानूनी मुद्दा है।” पुलिस ने शिकायत के आधार पर IPC की धारा 153 (ए) और 295 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है।

उधर, आंध्र प्रदेश भाजपा के महासचिव एस विष्णुवर्धन रेड्डी ने कहा, “मैं माँग करता हूँ कि संगीत निर्देशक DSP हिंदुओं का अपमान करने और गाने में भगवान राम और कृष्ण का अपमान करने के लिए हिंदू समुदाय से माफी माँगें। हिंदू देवी-देवी और देवताओं का बार-बार अपमान करना फिल्म उद्योग में कुछ लोगों की आदत बन गई है।”