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फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR: ‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर मिले सबूत?

                                                नोएडा में हिंसक प्रदर्शन (साभार- दैनिक भास्कर)
नोएडा में सैलरी की माँग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा को लेकर भड़काऊ पोस्ट करने पर RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर शेयर किया था। इस पुराने वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारी को पीटते दिखाया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही इन वीडियो का फैक्टचेक किया था। पुलिस ने वीडियो को गलत बताते हुए कहा कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल झूठ है।

पुलिस ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के अलावा भी भड़काऊ पोस्ट करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।

ऐसे में अदालतों से भी प्रश्न है कि हिंसा भड़काने वालों पर कानूनी डंडा चलेगा? ऐसे फेक वीडियो फैलाकर हिंसा भड़काने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। देश में अशांति फैलाना बहुत ही संगीन अपराध माना जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई नेता या पार्टी ऐसा घिनौना काम नहीं कर सके। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि जिस अपराध के लिए आम नागरिक को आसानी से जमानत नहीं मिलती उसी अपराध में नेताओं को मिल जाती है, क्यों?    

नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।

अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…

हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका

साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।

वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।

सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई

डीजीपी राजीव कृष्ण, जो लखनऊ कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ने कहा है कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप को चिन्हित किया गया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। अफवाहें फैलाने वाले दो एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। अब उनकी जाँच होगी।
इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो को गलत बताते हुए कहा है कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य है।
यूपी पुलिस ने किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जानने की जरूरत पर बल दिया है। इसके अलावा NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऑडियो क्लिप में एक शख्स लोगों से कहता सुनाई दे रहा है कि मंगलवार को फिर से पुलिस पर हमला करना है और लाठीचार्ज करवाना है, क्योंकि कई लोग पहले दिन घायल हुए थे। इस ऑडियो में शख्स कह रहा है कि हमारे बहुत से बहन-भाई घायल हुए हैं और इसीलिए आप लोग सुबह आने की कृपा करें।
इसी के साथ कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा

9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।

दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।

पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।

रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली, सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा: ED, संपत्ति छिपाने में कांग्रेस MP प्रियंका वाड्रा भी नपेंगी?

                               कांग्रेस सांसद पत्नी प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो, साभार: न्यूज18)
जब से हरियाणा से कांग्रेस सत्ता गयी है तब से आज तक कोई रॉबर्ट वाड्रा ने कोई भूमि सौदा नहीं किया, ये अपने आपमें बहुत बड़ी खबर है। दूसरे यह कि आखिर चुनाव दिनों में ही क्यों घोटालों सामने आते हैं? शेष दिनों में क्या ED और अन्य संस्थाएं आराम फरमाने चली जाती हैं? इतने सालों में अभी कोई सख्त कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की? अगर यही घोटाला किसी आम नागरिक किया होता क्या उसका केस भी इसी तरह तारीख पे तारीख मिल रही होती?     

कांग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली थी। बाद में यह जमीन वाड्रा ने 58 करोड़ रुपए में रियल एस्टेट कंपनी DLF को बेच दी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में यह खुलासा किया है।

यह जमीन गुरुग्राम के सेक्टर 83 में है। वाड्रा ने जमीन के बदले 7.5 करोड़ रुपए भुगतान का दावा किया था। लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा वाड्रा को मिला। इसके कारण हरियाणा के तत्कालीन कांग्रेसी  मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा उनके प्रभाव में थे।

रॉबर्ट वाड्रा पर ED की चार्जशीट

ED ने 17 जुलाई 2025 को यह चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर प्रॉप्रटीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने जमीन स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को रिश्वत के तौर पर दी थी ताकि SLHPL के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुँच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन ‘नगर एवं ग्राम नियोजन’ मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को उसी गाँव में हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें।

इससे पहले ED ने बताया था कि उन्होंने वाड्रा से जुड़ी 37 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ अटैच की थी। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों पर 58 करोड़ रुपए की ‘अपराध की कमाई’ को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करने का आरोप है।

प्रियंका गाँधी तक पहुँची जाँच की आँच

इस मामले में वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा तक भी जाँच की आँच पहुँच गई है। ED की चार्जशीट में फरीदाबाद के अमीपुर गाँव में 39.7 एकड़ की 3 हाई-वैल्यू संपत्तियों का जिक्र है, जिनकी जानकारी प्रियंका ने चुनावी हलफनामे में नहीं दी है। यह मामला केरल हाई कोर्ट में है और अदालत ने नोटिस भी जारी किया है। गौरतलब है कि चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देने को ‘भ्रष्ट आचरण’ के तौर पर देखा जाता है और इसमें अयोग्यता और जेल की सजा हो सकती है।

कैसे खुला रॉबर्ट वाड्रा का फर्जीवाड़ा?

ED की जाँच के दौरान हरियाणा सरकार के अधिकारियों और OPPL के प्रमोटरों सहित कम से कम 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इन लोगों ने शुरू में दावा किया था कि वाड्रा ने जमीन के लिए 7.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, लेकिन ED ने इस बयान को झूठा बताया है।

ED ने गुरुग्राम पुलिस से वाड्रा के इस कथित भुगतान की जाँच करने को कहा। जाँच में पुलिस उपायुक्त ने पाया कि SLHPL ने OPPL से 3.53 एकड़ ज़मीन 12 फरवरी 2008 को सेल डीड नंबर 4928 के जरिए खरीदी थी। कागजों में दिखाया गया कि भुगतान चेक नंबर 607251 से किया गया है, लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। इसके 6 महीने बाद एक और चेक से रकम दी गई।

यह चेक Skylight Realty Pvt Ltd (SLRPL) का था, न कि खरीददार कंपनी SLHPL का। SLHPL की पूँजी केवल 1 लाख थी और SLRPL के खाते में भी 7.5 करोड़ रुपए नहीं थे। 45 लाख का स्टांप ड्यूटी भी बेचने वाले ने दी थी, न कि वाड्रा की कंपनी ने। ईडी के अनुसार, रजिस्ट्री में झूठा भुगतान दिखाकर सौदा बेनामी तरीके से किया गया।

ये चुनावी दिनों में ही क्यों घोटाले की जाँच सामने आती है? इतने सालों से चल रही जाँच लेकिन कोई सजा नहीं? ED ने गुरुग्राम की विवादित लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट: 43 संपत्तियाँ हो चुकी हैं कुर्क

ये चुनावी मौसम में जो घोटालों की जाँच सामने आती है, शंका पैदा करती है कि 'क्या घोटाला हुआ था या नहीं, इतने सालों की जाँच में क्या पाया? किसी भी नेता का घोटाला हो चुनावी दिनों में सुनने को मिलते हैं। अगर यही घोटाले किसी सामान्य नागरिक ने किये होते कभी जाँच पूरी कर दोषी पाए जाने पर जेल हो गयी होती, लेकिन जहाँ सियासत हो तो ये सब ड्रामेबाज़ी। अगर घोटाला है जल्दी जाँच पूरी कर भेजो जेल।  
दूसरे, दिल्ली के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कितने घोटालों पर शोर हुआ, जेल जाना और आना पर्यटन बन गया था। चुनाव होने के बाद सारे घोटाले क्या ठंठे बस्ते में चले गए हैं? क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? क्या कार्यवाही हुई? या फिर यही समझा जाए कि जिस तरह केजरीवाल चुनावी रैलियों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घोटालों को दिखाकर जेल भेजने की बात करते थे शीला स्वर्ग सिधार गयी लेकिन कुछ नहीं किया, मतलब क्या वही दौर दोहराया जा रहा है? मसला सिर्फ केजरीवाल का ही नहीं, कई नेता हैं जिन पर किसी न किसी घोटाले में जो जमानत हुई मामला शांत हो गया। अगर यही घोटाले किसी आम नागरिक ने किये होते क्या उनके साथ भी सरकार से लेकर कोर्ट तक ऐसी ही नरमी बरतती? क्या नेताओं और आम नागरिक के अलग कानूनी प्रक्रिया होती है?

             
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिखोपुर लैंड डील मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा सहित 11 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट गुरुवार (17 जुलाई 2025) को नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल की गई।

रिपोर्टस के अनुसार, यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें वाड्रा की कंपनी पर भारी मुनाफा कमाने और नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मामला वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिखोपुर गाँव (अब सेक्टर 83) की 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। ED के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा लि ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

कुछ ही महीनों में हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी के लिए लाइसेंस दे दिया, जिससे जमीन की कीमत लगभग 700% बढ़ गई। इसके बाद सितंबर 2012 में इस जमीन को DLF को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।

उस वक्त हरियाणा में कॉन्ग्रेस की भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार थी। इस सौदे की जाँच तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने शुरू की और म्यूटेशन रद्द कर दिया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का मामला बताया।

इसी के आधार पर 1 सितंबर 2018 को गुरुग्राम पुलिस ने FIR दर्ज की। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की। कहना है कि इस सौदे से जो मुनाफा हुआ, उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर घुमाया गया।

रॉबर्ट वाड्रा को अप्रैल 2025 में तीन दिनों तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहाँ उनके बयान PMLA के तहत दर्ज किए गए। वाड्रा ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि उन्होंने जाँच में पूरा सहयोग किया है और 23000 से ज्यादा पेज के दस्तावेज भी सौंपे हैं।

इस चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा उनकी कंपनियों, सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. को आरोपित बनाया गया है। इसके अलावा बुधवार (16 जुलाई 2025) को ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की कुल 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनकी कीमत लगभग 37.64 करोड़ रुपए बताई गई है।

फिलहाल कोर्ट ने इस चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है। अगली सुनवाई की तारीख तय की जा चुकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलेगा या नहीं।

हरियाणा : गाँव का नाम मोहम्मदपुर, खुदाई में निकली 400 साल पुरानी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्तियाँ

                                                 खोदाई मिली देव प्रतिमाएँ (साभार: जागरण)
हरियाणा के गुरुग्राम से सटे मानेसर में निर्माण के लिए एक प्लॉट की खुदाई के दौरान तीन प्राचीन प्रतिमाएँ मिली हैं। इनमें से एक प्रतिमा भगवान विष्णु की और दूसरी माता लक्ष्मी की है। वहीं, तीसरी प्रतिमा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी बैठे हुए अवस्था में हैं। ये सभी प्रतिमाएँ लगभग 400 साल पुरानी बताई जा रही हैं।

यह घटना मानेसर के गाँव बाघनकी की है। यहाँ के रहने वाले प्रभु दयाल ने एक प्लॉट खरीदा था। इस प्लॉट पर घर बनवाने के लिए वे बुलडोजर से खोदाई करवा रहे थे। खोदाई के दौरान वहाँ काम कर रहे श्रमिकों को ये मूर्तियाँ मिलीं। तीनों मूर्तियाँ जमीन में 15 फीट की गहराई में मिलीं हैं। ये कांस्य धातु की बनी हैं, जो बेहद कीमत बताई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में प्लॉट के मालिक ने बुलडोजर के चालक को लालच दिया और इन मूर्तियों के बारे में किसी को बताने से मना किया। यह भी कहा जा रहा है कि वह इन मूर्तियों को अपने घर में स्थापित करना चाहता था। प्लॉट से मूर्ति निकलने की बात दो-तीन दिन तक दबी रही। जब चालक को पैसे नहीं मिले तो उसने इसकी जानकारी बिलासपुर थाने को दी।

इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और मूर्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद इन मूर्तियों के बारे में गाँव वालों को पता चला। पुलिस ने इन मूर्तियों के बारे चंडीगढ़ स्थित पुरातत्व विभाग को जानकारी दी। इसके बाद सोमवार (22 अप्रैल 2024) को पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य और डॉक्टर कुश ढेबर बिलासपुर थाना पहुँचे।

यहाँ उन्हें तीनों मूर्तियों को आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देखने पर ये मूर्तियाँ करीब 400 साल पुरानी लग रही हैं। हालाँकि, जाँच के बाद ही इनकी वास्तविक उम्र का पता चलेगा। इन मूर्तियों में भगवान विष्णु की लंबाई 1.5 फीट और माता लक्ष्मी की प्रतिमा की लंबाई लगभग 1 फीट है।

वहीं, ग्रामीणों ने इन मूर्तियों को गाँव वालों को सौंपने का आग्रह किया था। ग्रामीणों का मानना है कि ये मूर्तियाँ उनके गाँव की धरोहर हैं। जिस जगह से मूर्तियाँ मिली हैं, उस जगह पर वे मंदिर का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि वहाँ उन्हें स्थापित किया जा सके। हालाँकि, पुलिस ने ग्रामीणों को मूर्तियाँ देने से इनकार कर दिया।

पुलिस का कहना है कि भूमि की खोदाई में निकलने वाली वस्तु भारत सरकार की संपत्ति होती है। ऐसे में इन मूर्तियों पर पुरातत्व विभाग का अधिकार है। वहीं, ग्रामीणों ने प्लॉट में और खोदाई कराने की माँग की है। इस पर पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक भट्टाचार्य ने प्रशासन की निगरानी में खोदाई करने के लिए कहा है।

संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर बनानी भट्टाचार्य ने कहा कि इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखा जाएगा और वहाँ उन्हें प्रदर्शित किया जाएगा। बनानी ने कहा कि उन्होंने उस स्थान की भी जाँच की है, जहाँ वे पाए गए थे। ऐसा लगता है कि उन्हें लगभग 400 साल पहले गाँव में लाया गया था।

न्यूज18 के अनुसार, पुलिस का कहना है कि प्रभु दयाल को एक सोने का बर्तन और सिक्कों का भंडार भी मिला, लेकिन इन्हें बरामद नहीं किया गया है। पुलिस ने कहा कि मूर्तियों की खोज के बाद ग्रामीण उस स्थान पर एक मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन उनके और जमीन मालिक के बीच अनबन के कारण अभी कुछ नहीं हो सका।

गुरुग्राम में हिन्दू संगठनों के नाम से पोस्टर लगाने वाला निकला आसिफ, ‘झुग्गी खाली करें मुस्लिम, वरना होगा बहन-बीवी का बलात्कार’: कांग्रेस-सपा ने हिन्दुओं को कहा भला-बुरा

VHP और बजरंग दल को बदनाम करने के लिए आसिफ (बाएँ) ने लगाए धमकी वाले पोस्टर
गुरुग्राम के सेक्टर 69- A क्षेत्र में 26-27 अगस्त 2023 की रात लगे कुछ पोस्टरों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन पोस्टरों में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) और ‘बजरंग दल’ के नाम से झुग्गी-झोपड़ी खाली करने की धमकी लिखी थी। धमकी में झुग्गियाँ खाली करने की डेडलाइन 28 अगस्त रखी गई थी। इन पोस्टरों को ले कर इस्लामी और वामपंथी समूहों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की।

आखिरकार इस पूरी साजिश की जड़ में आसिफ नाम का एक कबाड़ी शामिल मिला। पुलिस ने आसिफ को गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

कबाड़ कारोबार पर बादशाहत की चाहत

मामला गुरुग्राम के थाना क्षेत्र बादशाहपुर का है। 22 सितंबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने आसिफ की गिरफ्तारी की सूचना सार्वजनिक की। पुलिस ने बताया कि 26-27 अगस्त की रात लगे पोस्टरों की FIR 28 अगस्त को दर्ज हुई थी। मामले की जाँच क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने धमकी भरे पोस्टरों को लगाने के आरोप में उत्तराखंड के उधमसिंहनगर के गाँव सरकहड निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आसिफ ने बताया कि उसकी कबाड़ की दुकान गुरुग्राम के सेक्टर 69 के पास है। दुकान के पास एक अन्य कबाड़ी की भी दुकान है।
पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने बताया कि वह कबाड़ के काम में आसपास कोई कम्पटीशन नहीं चाहता था। वह पड़ोस के दुकानदार को भगाना चाहता था। इसी साजिश के तहत उसने पड़ोसी की दुकान के आगे धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए थे। आसिफ ने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसे जेल भी भेज दिया गया है। हालाँकि, केस में अभी जाँच जारी है।

आसिफ की साजिश को कट्टरपंथी, वामपंथी और राजनैतिक हवा

बड़े-बड़े शब्दों में सूचना हेडिंग के साथ इस पोस्टर में लिखा था, “सारे झुग्गी वालों को सूचित किया जाता है 28-08-2023 तक खाली कर के चले जाओ वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर नहीं गए तो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। जितना जल्दी हो सके तुम सब खाली कर दो। साले मुल्ले लोगों की बहन-बीवी का बलात्कार होगा। अगर इज्जत बचाना है तो बचा लोग। तुम्हारे पास दो दिन हैं। फिर मत चिल्लाना।” पोस्टर के अंत में बहन की गालियाँ देते हुए नीचे लिखा, “तुम्हारा बाप बजरंग दल।” लगभग इन्हीं शब्दों के साथ लिखे एक अन्य पोस्टर में नीचे विश्व हिन्दू परिषद लिख दिया गया था। हाथ से लिखे इन पोस्टरों को गोंद से चिपकाया गया था।
आफरीन नाम के हैंडल ने नूहं हिंसा के दौरान फर्जी ट्वीट कर के बिना माफ़ी माँगे डिलीट करने वाले पुनीत कुमार सिंह के ‘बोलता हिंदुस्तान’ की इस मुद्दे पर बनी खबर शेयर की। 31 अगस्त को कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “ये ज़रूर सड़े हुए नारंगी संतरों के छिलकों का काम है क्या पुलिस इस मामले की जाँच करेगी? या जब यह मामला खराब हो जाएगा तब एक्शन लेगी पुलिस, वो भी सिर्फ़ मुसलमानों पर, क्योंकि धमकी मुस्लिमों को मिल रही हैं। अभी खामोश रहिए क्योंकि खट्टर सरकार और गुड़गांव (गुरुग्राम) पुलिस सो रही है।”
NDTV ने तो बाकायदा इस पर एक शो बना डाला। NDTV के एंकर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वालों की गिरफ्तारी की माँग जोर-शोर से उठाते दिखे। NDTV ने इसी शो में मुस्लिम कामगारों को डरा हुआ घोषित कर दिया। NDTV ने अपने शो में नफरती पोस्टर लगाने की वजह झुग्गी में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मुस्लिम समुदाय का होना बताया। 3 मिनट से अधिक लम्बे 
इसी शो में यह भी बताते का प्रयास हुआ कि नूहं हिंसा में भी मुस्लिम ही पीड़ित हैं।
गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के अररिया से कॉन्ग्रेस नेता बदरे आलम ने इस खबर को शेयर किया। 31 अगस्त को उन्होंने लिखा, “दिल्ली से सटे हुए हरियाणा गुरुग्राम में मुस्लिम कामगार डरे हुए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 70 के पास एक मुसलमान की झुग्गी में धमकी भरी पोस्टर लगाए गए। कहा जा रहा है कि वह यहाँ छोड़ कर चले जाएँ वरना झुग्गी जला दी जाएगी।”
लगातार हिन्दू संगठनों के खिलाफ भ्रामक खबरें छापने वाले पोर्टल ‘जर्नो मिरर’ ने तो 29 अगस्त को इस मामले में हिन्दू संगठनों को दोषी ठहरा दिया था। पुलिस जाँच का इंतज़ार किए बिना ही सीधे तौर पर मीडिया संस्थान ने इन पोस्टरों के पीछे VHP और ‘बजरंग दल’ वालों को जिम्मेदार बता डाला था।
                                                               चित्र- journomirror.com
इन सभी के अलावा सदफ आफरीन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता संतोष कुमार यादव और कॉन्ग्रेस नेता डॉ अरुणेश कुमार यादव ने भी इस मुद्दे पर बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कुछ के निशाने पर हरियाणा सरकार थी तो कुछ के हिंदूवादी संगठन। इन सभी के ट्वीट 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच सिलसिलेवार ढंग से आए।
                                                चित्र साभार- ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स

27 अगस्त को ही आ चुका था आसिफ का नाम

इस मामले में इस्लामी, वामपंथी हैंडलों, NDTV के अलावा कॉन्ग्रेसी और समाजवादी पार्टी नेताओं ने हंगामे की शुरुआत 28 अगस्त से की। लेकिन, ख़ास बात ये है कि घटना में आसिफ कबाड़ी का नाम एक दिन पहले 27 अगस्त को ही आ चुका था। 27 अगस्त, 2023 को ही मोजेद अली नाम के शिकायतकर्ता ने पुलिस में आसिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवा दी थी। मोज़ेद अली की ही दुकान पर 26-27 सितंबर को आसिफ ने VHP और बजरंग दल के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए थे। पुलिस में दर्ज कराई गई FIR में मोज़ेद अली ने पोस्टर चिपकाने के पीछे आसिफ के होने की आशंका जताई थी।
                                                                     FIR कॉपी
मोज़ेद ने यह भी बताया था कि 3-4 दिन पहले आसिफ ने उन्हें धमकी दे कर कबाड़ी की दुकान बंद करने के लिए कहा था। FIR में आसिफ पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया। आसिफ को नामजद करते हुए पुलिस ने FIR में IPC की धारा 188, 294, 295- A, 504 और 506 लगाई थी। मोज़ेद अली उसी ऋषि पंडित की झुग्गी में रहते हैं जिसे खाली करने के पोस्टर लगाए गए थे। शिकायतकर्ता मोज़ेद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले हैं। वह सेक्टर 69 गुरुग्राम में चाय-पानी बेचते हैं और कबाड़ का काम करते हैं।

कई हिन्दू हुए हैं ऐसी साजिशों के शिकार

ऑपइंडिया ने इस मामले में गुरुग्राम निवासी और ‘हरियाणा प्रदेश शिवसेना युवा मोर्चा’ (शिंदे गुट) अध्यक्ष रितुराज अग्रवाल से बात की। ऋतुराज ने बताया कि भले ही इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने खुलासा करते हुए असल आरोपित आसिफ को पकड़ लिया लेकिन इस से पहले भी ऐसी कई साजिशें हो चुकी हैं। शिवसेना नेता का दावा है कि उन साजिशों के शिकार कई हिन्दू संगठन के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह यह पोस्टर लगाए गए उसके आसपास के सेक्टरों में कुछ माह पहले खुले में नमाज़ को ले कर भी तनातनी हुई थी।

नूहं से जोड़ कर थी सनसनी फैलाने की साजिश

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘विश्व हिन्दू परिषद’ गुरुग्राम के जिला मंत्री यशवंत ने पोस्टर लगाने और उसे वायरल करने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा किया। यशवंत ने हमें बताया कि हिन्दू संगठनों ने 28 अगस्त को अधूरी बृजमंडल यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया था। इस बीच 26-27 की रात ये पोस्टर लग गए। ऐसा तब हुआ जब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। यशवंत ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले को बृजमंडल यात्रा से जोड़ कर बड़ी सनसनी की साजिश रही होगी। उन्होंने हमें बताया कि वो जल्द ही पुलिस को ज्ञापन दे कर इस मामले की गहराई से जाँच करने की माँग करेंगे।
VHP नेता ने यह भी बताया कि जैसे ही ये पोस्टर घटना के बाद वायरल हुए थे तभी उन लोगों ने खुल कर लोगों और मीडिया के साथ प्रशासन को भी बता दिया था कि ऐसी हरकतें VHP या बजरंग दल नहीं करते। यशवंत ने तनाव के माहौल में पुलिस द्वारा रखे धैर्य और अंत में सही कार्रवाई की तारीफ की।                                                         (साभार)