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कश्मीर : जब गैंगरेप करके सड़क पर फेंकी गई हिंदू नर्स की क्षत-विक्षत लाश… सरला भट्ट केस में 36 साल बाद आतंकी यासीन मलिक समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट दायर

                     यासीन मलिक पर सरला भट हत्याकांड में चार्जशीट दायर (फोटो साभार- दैनिक भास्कर)
वो भी क्या दिन थे जब शेख जी फाख्ता उड़ाते थे यानि आतंकवाद को बढ़ावा, सेना के जवानों को मारने और हिन्दुओं को मारने वालों को कांग्रेस से लेकर यूपीए(यानि वर्तमान INDI गठबंधन) बहुत सम्मान दिया करते थे, प्रधानमंत्री आवास में किसी सम्मानित की तरह आओभगत होती थी। वक़्त का चक्र ऐसा घुमा आज जेल में ज़िंदगी काटने को मजबूर।

टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा जेकेएलएफ का पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ 36 साल बाद कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई हुई है। जम्मू-कश्मीर की एसआईए ने 36 साल पुराने मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें उसे मुख्य आरोपितों में शामिल किया है।

इसके तीन आरोपितों, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद युसूफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। चौथा आरोपित मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको फरार है और उसके पीओके में छिपे होने की आशंका है। सरला को उसी ने गोली मारी थी। चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके 4 साथियों ने अप्रैल 1990 में सरला भट्ट को अगवा किया और उसकी हत्या की साजिश रची।

सरला भट्ट कौन थी?

कश्मीरी पंडित सरला भट्ट उस वक्त श्रीनगर के शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। 36 साल पहले उनका अपहरण किया गया। उन्हें यातनाएँ दी गईं। बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। सरला अनंतगाग की रहने वाली थी।

18 अप्रैल 1990 को सरला ड्यूटी पर जा रही थीं। इसी दौरान अस्पताल परिसर के पास से उन्हें उठा लिया गया। चार दिन तक अलग-अलग जगह रख कर बुरी तरह टॉर्चर किया गया। बाद में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला। शरीर पर गोलियों के साथ साथ उन यातनाओं के भी निशान थे, जो चार दिनों तक उन्हें दिए गए।

शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उसे ‘सुरक्षाबलों का मुखबिर’ होने की बात कही गई थी। इतना ही नहीं सरला के परिवार वालों पर भी जुल्म ढाए गए। उसके घर पर ग्रेनेड से हमला किया गया और कश्मीर से पलायन के लिए मजबूर किया गया। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि इस हत्या का उद्देश्य कश्मीरी पंडितों में भय पैदा करना था, ताकि उनका घाटी से पलायन तेज हो।

एसआईए ने 737 पन्नों की चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की। इसमें यासीन मलिक सहित 5 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री तथा नई जाँच के आधार पर आरोप तय किए गए।

यासीन मलिक पर अब तक किन-किन मामलों में कार्रवाई हुई?

यासीन मलिक आतंकियों की फंडिंग का दोषी है। इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली है। NIA ने 2017 में यह मामला दर्ज किया था। उसने घाटी में अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए हवाला के जरिए धन जुटाया। 2022 में यासीन मलिक ने अदालत में कई आरोप स्वीकार किए। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

उस पर आतंकवाद, आपराधिक साजिश और UAPA के तहत भी कई मामले दर्ज हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप है।

इन मामलों में भी उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।

जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले के मामले में भी यासीन मलिक का नाम आया था।

इस मामले में भी NIA ने कार्रवाई की है और मुकदमा न्यायिक प्रक्रिया में है।

1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के मामले में भी यासीन मलिक का नाम जाँच के दौरान आया। इस मामले में भी अदालत में मुकदमा चल रहा है और अंतिम फैसला नहीं आया है।

1990 के दशक में उनके खिलाफ कई FIR दर्ज हुई थीं। जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दर्जनों आपराधिक और आतंकवाद संबंधी मामले अलग-अलग वक्त पर दर्ज हुए हैं। इनमें से कुछ में वह दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि कुछ अभी भी न्यायालय में लंबित हैं।

फिलहाल यासीन मलिक आतंकवाद फंडिंग मामले में तिहाड़ में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। NIA ने उनकी सजा बढ़ाकर मृत्युदंड किए जाने की भी अपील की है, जिस पर उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। सरला भट्ट हत्याकांड की नई चार्जशीट उनके खिलाफ एक अलग और महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई है, जिसकी सुनवाई आगे होगी।

ये चुनावी दिनों में ही क्यों घोटाले की जाँच सामने आती है? इतने सालों से चल रही जाँच लेकिन कोई सजा नहीं? ED ने गुरुग्राम की विवादित लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट: 43 संपत्तियाँ हो चुकी हैं कुर्क

ये चुनावी मौसम में जो घोटालों की जाँच सामने आती है, शंका पैदा करती है कि 'क्या घोटाला हुआ था या नहीं, इतने सालों की जाँच में क्या पाया? किसी भी नेता का घोटाला हो चुनावी दिनों में सुनने को मिलते हैं। अगर यही घोटाले किसी सामान्य नागरिक ने किये होते कभी जाँच पूरी कर दोषी पाए जाने पर जेल हो गयी होती, लेकिन जहाँ सियासत हो तो ये सब ड्रामेबाज़ी। अगर घोटाला है जल्दी जाँच पूरी कर भेजो जेल।  
दूसरे, दिल्ली के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कितने घोटालों पर शोर हुआ, जेल जाना और आना पर्यटन बन गया था। चुनाव होने के बाद सारे घोटाले क्या ठंठे बस्ते में चले गए हैं? क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? क्या कार्यवाही हुई? या फिर यही समझा जाए कि जिस तरह केजरीवाल चुनावी रैलियों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घोटालों को दिखाकर जेल भेजने की बात करते थे शीला स्वर्ग सिधार गयी लेकिन कुछ नहीं किया, मतलब क्या वही दौर दोहराया जा रहा है? मसला सिर्फ केजरीवाल का ही नहीं, कई नेता हैं जिन पर किसी न किसी घोटाले में जो जमानत हुई मामला शांत हो गया। अगर यही घोटाले किसी आम नागरिक ने किये होते क्या उनके साथ भी सरकार से लेकर कोर्ट तक ऐसी ही नरमी बरतती? क्या नेताओं और आम नागरिक के अलग कानूनी प्रक्रिया होती है?

             
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिखोपुर लैंड डील मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा सहित 11 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट गुरुवार (17 जुलाई 2025) को नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल की गई।

रिपोर्टस के अनुसार, यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें वाड्रा की कंपनी पर भारी मुनाफा कमाने और नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मामला वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिखोपुर गाँव (अब सेक्टर 83) की 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। ED के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा लि ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

कुछ ही महीनों में हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी के लिए लाइसेंस दे दिया, जिससे जमीन की कीमत लगभग 700% बढ़ गई। इसके बाद सितंबर 2012 में इस जमीन को DLF को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।

उस वक्त हरियाणा में कॉन्ग्रेस की भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार थी। इस सौदे की जाँच तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने शुरू की और म्यूटेशन रद्द कर दिया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का मामला बताया।

इसी के आधार पर 1 सितंबर 2018 को गुरुग्राम पुलिस ने FIR दर्ज की। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की। कहना है कि इस सौदे से जो मुनाफा हुआ, उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर घुमाया गया।

रॉबर्ट वाड्रा को अप्रैल 2025 में तीन दिनों तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहाँ उनके बयान PMLA के तहत दर्ज किए गए। वाड्रा ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि उन्होंने जाँच में पूरा सहयोग किया है और 23000 से ज्यादा पेज के दस्तावेज भी सौंपे हैं।

इस चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा उनकी कंपनियों, सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. को आरोपित बनाया गया है। इसके अलावा बुधवार (16 जुलाई 2025) को ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की कुल 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनकी कीमत लगभग 37.64 करोड़ रुपए बताई गई है।

फिलहाल कोर्ट ने इस चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है। अगली सुनवाई की तारीख तय की जा चुकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलेगा या नहीं।

राजस्थान : गैंगरेप के बाद ज़िंदा बच्ची को भट्ठी में डाल कर जलाया… 400 पन्नों की चार्जशीट से खुलासा

                             जिन्दा जला दी गई थी नाबालिग गैंगरेप पीड़िता: राजस्थान पुलिस (साभार-TOI)
राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित नरसिंगपुर में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के बाद उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को चार्जशीट दायर किया जिसमें पता चला कि 14 वर्षीय लड़की को जब कोयले की भट्टी में जलाया गया था तब वह जीवित थी। चार्जशीट के अनुसार, लगभग एक महीने के बाद उसके अवशेष राजस्थान के भीलवाड़ा में एक कोयला भट्ठी के अंदर पाए गए थे। नाबालिग के साथ गैंगरेप के बाद जिन्दा जला दिया गया था। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 400 पृष्ठों से अधिक लम्बी चार्जशीट में 11 अपराधियों में से 9 के नाम शामिल हैं। जिसे जाँच अधिकारी (आईओ) और कोटारी डिप्टी पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर बिश्नोई द्वारा शाहपुरा जिले में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अदालत में प्रस्तुत किया गया था। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अपराध में शामिल दो किशोरों के खिलाफ अलग से आरोप पत्र दायर किया जाएगा।

14 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप के बाद न सिर्फ उसकी हत्या कर दी गई, बल्कि शव को कोयले की भट्ठी में डाल कर जला दिया गया था। घटना 2 अगस्त को भीलवाड़ा के कोटारी की है, जो अब शाहपुरा जिले का हिस्सा है जबकि इसके बारें में पता 3 अगस्त को लगा था। वहीं इस मामले में राजस्थान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि इस भयानक घटना ने जाँच अधिकारी को बहुत मुश्किल में डाल दिया था। यह अपनी तरह का एक कठिन मामला है। 

क्योंकि, नाबालिग किशोरी के कुछ जले हुए शरीर के हिस्सों को भट्टी से निकाला गया था, जबकि अन्य को इधर-उधर ले जाकर फेंक दिया गया था, जिन्हें खोजने और सावधानीपूर्वक एकत्र करने और गहन फोरेंसिक जाँच में पुलिस को बहुत ही कठनाई का सामना करना पड़ा। 

इस मामले में दूसरी बड़ी कठिनाई वैजाइनल स्वाब सैंपल के अभाव में सामूहिक बलात्कार को साबित करना था। पुलिस टीम ने अपराध को साबित करने के लिए फोरेंसिक पेशेवरों से आरोपितों के नमूने इकट्ठा करने में सहायता माँगी। सभी साक्ष्यों के आलोक में यह साबित किया गया कि पीड़िता को आग में जलाने से पहले पेट्रोलियम आदि ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग किया गया था।

पूरा मामला 

राजस्थान के भीलवाड़ा में बुधवार (2 अगस्त, 2023) को 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर कोयला भट्टी में जलाने का मामला सामने आया था। मृतक लड़की अपनी माँ के साथ बकरियाँ चराने गई थी। दोपहर में माँ बकरी लेकर घर वापस आ गई। लेकिन लड़की घर नहीं पहुँची थी। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी जब लड़की घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गाँव के खेतों से लेकर आसपास के रिश्तेदारों तक के घर तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।
लगातार जारी तलाश के बीच रात करीब 10 बजे गाँव के बाहर कालबेलियों के डेरे के पास कोयला बनाने वाली एक भट्टी जलती दिखाई दी। चूँकि बारिश के दिनों में भट्टी नहीं जलाई जाती है। ऐसे में लोगों को शक हुआ। इस पर भट्टी के पास जाकर देखने पर वहाँ लड़की के जूते पड़े दिखाई दिए। साथ ही भट्टी में लड़की के हाथ में पहना हुआ चाँदी का कड़ा और हड्डी के टुकड़े मिले। इसके बाद ग्रामीणों कालबेलियों को पकड़कर उनसे पूछताछ की। इस पर तीन लोगों ने गैंगरेप कर भट्टी में जलाने की बात कही।
पुलिस की जाँच में यह सामने आया है कि आरोपित नाबालिग लड़की को पकड़कर दोपहर करीब 2 बजे तक उसके साथ गैंगरेप करते रहे। इसके बाद जब उसके लापता होने की सूचना फैली तो आरोपितों ने लड़की को मारने का प्लान बनाया। इसके लिए सबसे पहले उन लोगों ने अपनी पत्नियों को इसकी सूचना दी। फिर पत्नियों की सहायता से लड़की को भट्टी में डालकर जला दिया। बाद में अधजला सिर और छाती का हिस्सा भट्टी से निकाल कर तालाब में फेंक दिया। आरोपितों ने 4 महीने पहले मृतक लड़की के पिता से खेत किराए पर लिया था। इसके बाद वे वहीं झोपड़ी बनाकर रह रहे थे।

महिला पहलवानों के गले-कमर-पेट पर हाथ, सेक्स की बातें, टीशर्ट उठाना-पलंग के पास बुलाना… बृजभूषण के खिलाफ चार्जशीट में सब कुछ

                          आरोप पत्र में इस तरह की तस्वीरों का साक्ष्य के तौर पर जिक्र है (साभार: TOI)
महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ मामला चलाया जा सकता है। इसमें दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह के साथ पहलवानों द्वारा सार्वजनिक रूप से खींची गईं तस्वीरों को भी शामिल किया है।

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में दो तस्वीरों को शामिल किया है और कहा कि इसमें भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह पीड़िता के साथ खड़े हैं। ये तस्वीरें बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस के आरोप पत्र में ‘तकनीकी साक्ष्य’ के रूप में शामिल की गई हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप पत्र में कहा गया है कि कुश्ती संघ के अधिकारियों ने पुलिस नोटिस का जवाब देते हुए चार तस्वीरें मुहैया कराई हैं, जिनमें बृजभूषण सिंह और शिकायतकर्ता की विदेश (कजाकिस्तान) में मौजूदगी दिखाई दे रही थी। आरोप पत्र में कहा गया है, “दो तस्वीरों में वे शिकायतकर्ता का फायदा उठाते दिख रहे हैं।”

पहलवान 1 का आरोप: “(पदक मिलने के बाद) कोच मुझे बृजभूषण से मिलने के लिए अपने साथ ले गए। वहाँ उन्होंने मुझे जबरन गले लगाने की कोशिश की। मेरे एक हाथ में झंडा था, इसलिए मैंने अपने दूसरे हाथ से उन्हें दूर धकेलने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।”

साक्ष्य: “दो तस्वीरों में, वे शिकायतकर्ता का फायदा उठाते दिख रहे हैं… विभिन्न घटनाओं की तस्वीरों और वीडियोग्राफ़ के रूप में उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य, आरोपित की उपस्थिति को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप का स्पष्ट रूप से समर्थन करते हैं।”

पहलवान 2 का आरोप: “मुझे डब्ल्यूएफआई कार्यालय में बुलाया गया था, जहाँ मैं अपने कोच के साथ गई थी… कुर्सी पर बैठे बृजभूषण ने मुझे बैठने के लिए कहा… मैंने उन्हें अपनी चोट के बारे में बताया… उन्होंने मुझे पूरी मदद का आश्वासन दिया, लेकिन इसके लिए उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने के बारे में उन्होंने पूछा।”

साक्ष्य: “…कथित घटना के दिन वह (शिकायतकर्ता के कोच) नई दिल्ली जिले के उस क्षेत्र में मौजूद था और उसके मोबाइल टॉवर स्थान अशोक रोड (कार्यालय स्थान) के आसपास नॉर्थ एवेन्यू के क्षेत्र में था।”

पहलवान 3 का आरोप: “मैं (टीम फोटो में) आखिरी पंक्ति में खड़ी थी… आरोपित (बृजभूषण सिंह) आए और मेरे साथ खड़े हो गए। मुझे अचानक अपने नितम्ब पर किसी का हाथ महसूस हुआ। जब मैंने दूर जाने की कोशिश की तो मुझे जबरदस्ती मेरे कंधे से पकड़ लिया गया।”

साक्ष्य: WFI ने कार्यक्रम से संबंधित रंगीन तस्वीरों के चार प्रिंटआउट उपलब्ध कराए और इन तस्वीरों में शिकायतकर्ता अन्य पहलवानों के साथ आगे की पंक्ति में बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। इन तस्वीरों में आरोपित बृजभूषण भी दिख रहे हैं, जिसका आकलन आरोपों के आलोक में किया जा सकता है।”

पहलवान 4 का आरोप: “जब मैं मैट पर लेटी हुई थी तो आरोपित मेरे पास आया और मुझे आश्चर्य हुआ। वह मेरी ओर झुक गया और मेरे कोच की अनुपस्थिति में मेरी अनुमति के बिना, मेरी टी-शर्ट खींची मेरी साँस जाँचने के बहाने मेरे स्तन पर हाथ रखा।”

पहलवान ने आगे कहा, “फेडरेशन कार्यालय जाने पर… मुझे आरोपित के कमरे में बुलाया गया… मेरे भाई, जो मेरे साथ था, को स्पष्ट रूप से वहीं रुकने के लिए कहा गया… अन्य व्यक्तियों के जाने के बाद आरोपित ने दरवाज़ा बंद कर दिया… मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे साथ ज़बरदस्ती शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश की।”

साक्ष्य: “शिकायतकर्ता को अन्य पहलवानों के साथ बृजभूषण सिंह के संग खड़ा देखा गया, जिससे घटना के स्थान पर आरोपित और शिकायतकर्ता की उपस्थिति स्थापित होती है।”

पहलवान 5 का आरोप: “मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने के बहाने उन्होंने मुझे कंधे से पकड़कर अपनी ओर खींचा… खुद को बचाने के लिए मैंने आरोपित से दूर जाने की कोशिश की।”

साक्ष्य: “डब्ल्यूएफआई ने चैंपियनशिप की तस्वीरों के छह रंगीन प्रिंटआउट प्रदान किए हैं, जो कार्यक्रम में पीड़ित और आरोपित की उपस्थिति को दर्शाते हैं।”

पहलवान 6 का आरोप: “उन्होंने मुझे अपने माता-पिता से फोन पर बात कराई, क्योंकि उस समय मेरे पास निजी मोबाइल फोन नहीं था… आरोपित ने मुझे अपने बिस्तर की ओर बुलाया, जहाँ वह बैठा था और फिर अचानक मेरी इजाज़त के मुझे ज़बरदस्ती गले लगा लिया।”

साक्ष्य: “कार्यक्रम के मेजबान डब्ल्यूएफआई को नोटिस भेजकर उनसे फोटोग्राफ, होटल का विवरण, जहाँ पहलवान रुके थे उसका कमरा नंबर प्रदान करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।”

ये चार्जशीट 6 पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न की शिकायतों में पुलिस द्वारा की गई जाँच पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि बृजभूषण सिंह पर धारा 506 (आपराधिक धमकी), 354 (एक महिला की लज्जा को ठेस पहुँचाना), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354D (पीछा करना) के तहत यौन उत्पीड़न के अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।

सत्येंद्र जैन ने 54 कंपनियां बनाकर जुटाया काला धन

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में फंसे दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) सहित छह लोगों के खिलाफ सीबीआई ने दिसम्बर 3 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। सीबीआई (CBI) ने आरोपियों पर 54 कंपनी बनाकर काला धन (Black Money) जुटाने सहित अन्य आरोप लगाए हैं। अदालत में पेश किए आरोप पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन ने अपनी पत्नी व कारोबार के साझेदारों के साथ मिलकर कथिततौर पर फर्जी कंपनियां बनाईं। साथ ही कोलकत्ता के तीन हवाला ऑपरेटर के माध्यम से कथित कंपनी बनाई। कुल 54 कंपनियां सामने आई हैं। इन कंपनियों के माध्यम से करीब 16 करोड़ 39 लाख रुपये का काला धन जुटाया गया है।
सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में सत्येंद्र जैन व अन्य के खिलाफ साक्ष्य पेश करते हुए पिछले पांच साल के दौरान हवाला ऑपरेटर के माध्यम से अनगिनत नगदी व दो सौ बीघा जमीन दिल्ली में खरीदने की बात कही गई है। सीबीआई का आरोप है कि हवाला ऑपरेटर को लेकर शुरू की गई जांच के दौरान पिछले पांच साल में हवाला ऑपरेटर के द्वारा जारी चेक के माध्यम से अनगिनत नगदी व दिल्ली के कई गांवों में करीब दो सौ बीघा बेनामी जमीन खरीदने से संबंधित साक्ष्य जुटाए गए हैं। यह सारी संपत्ति जैन व उनसे जुड़े लोगों व कंपनियों के अंतर्गत पाई गई है। यह जमीन बाहरी दिल्ली के करला, औचंदी, निजामपुर, बुद्धान, उत्तर व उत्तर-पश्चिम दिल्ली में मौजूद हैं। दावा है कि यह जमीन काले धन का इस्तेमाल कर खरीदी गई है।
आरोप के मुताबिक आयकर विभाग के राडार पर आने के बाद सत्येन्द्र जैन ने कालेधन को आय खुलासा योजना (इनकम डिस्क्लोजर योजना) 2016 के तहत अज्ञात नाम से जमा करा दिया था। जांच के दौरान पाया गया कि जिन लोगों के नाम से राशि जमा कराई गई वे किसी भी तरह से उन सेल कंपनियों से नहीं जुड़े थे जिनके जरिए कालेधन को हवाला ऑपरेटर के जरिए वैध बनाया गया।
सूत्रों ने दावा किया कि हवाला ऑपरेटर ने जांच के दौरान स्वीकार किया था कि उन्होंने हवाला लेनदेन सत्येंद्र जैन के निर्देश पर कमीशन लेकर किया। अधिकारियों ने कहा कि जैन ने बेहिसाब आय की घोषणा आयकर डिस्क्लोजर योजना के तहत की है इसलिए उनके खिलाफ एक अलग जांच भी हो रही है।
आयकर विभाग द्वारा इस मामले में बेनामी लेन-देन निषेद्य अधिनियम के तहत जांच शुरू की गई थी। विभाग का कहना था कि प्रारंभिक जांच में वर्ष 2015-2016 मे स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन द्वारा पद के दुरुपयोग का मामला सामने आया। वह चार करोड़ 63 लाख रुपये के धन धोशन के मामले में शामिल रहे। इसी आधार पर इस मामले को जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द किया गया। आयकर विभाग की जांच में धनशोधन में प्रयास इंफो सोल्यूशन प्राइवेट लि., अकिनचंद डेवलपर्स प्राइवेट लि., मंगलयतन प्रोजेक्ट प्राइवेट लि. सहित 54 कंपनियों का नाम सामने आया है।
सत्येंद्र जैन व अन्य पर आरोप है कि वर्ष 2010 से 12 के बीच 11 करोड़ 78 लाख रुपये मैसर्स इंडोमेटल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से नगद राशि कोलकत्ता के एंट्री ऑपरेशन को दी गई थी। वर्ष 2013 में स्वास्थ्य मंत्री ने इस कंपनी से त्याग पत्र दे दिया था, क्योंकि उन्हें चुनाव लड़ना था। हालांकि जैन ने खुद त्यागपत्र देते समय अपनी पत्नी पूनम जैन को इस कंपनी में शामिल करा दिया था। इस तरह इस काले धन को जोड़ने में जैन ने अपनी पत्नी का इस्तेमाल किया। सीबीआई ने इसी आधार पर जैन के अलावा उनकी पत्नी को मामले में आरोपी बनाया था। 

गृह मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में बीते 29 नवंबर को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी। इसके चार दिन बाद सीबीआई ने अदालत में सत्येंद्र जैन व अन्य के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। सीबीआई ने इस मामले में बीते साल 24 अगस्त को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में अदालत द्वारा आरोपपत्र पर विचार के बाद आगे की कार्रवाई होगी।