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रूबिया अपहरण कांड : 35 साल बाद शफत अहमद को CBI ने दबोचा, आतंकी यासीन मलिक का था मददगार


केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 01 दिसंबर 2025 को 1989 के रूबिया सईद अपहरण कांड में नई गिरफ्तारी की है। CBI ने 35 साल बाद इस केस में श्रीनगर के हवाल इलाके से शफत अहमद शुंगलू को धर दबोचा। पहले शुंगलू को निशात पुलिस स्टेशन ले जाया गया, फिर सीबीआई (CBI) ने हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ से कई राज खुल सकते हैं।

उस समय यह भी चर्चा थी कि यह तथाकथित अपहरण है। यह सिर्फ आतंकियों को छुड़ाने के लिए ड्रामा था। दादी उसके साथ रह रही है खाना घर से जा रहा है फिर अपहरण कैसा? और इसका किसी ओर से खंडन करने की बजाए चुप्पी साध ली गयी थी। असली कहानी अब आएगी सामने। 

देखा जाए तो अपहरण हो या प्लेन हाइजेक इसकी जन्मदाता कांग्रेस ही है। मुफ़्ती मोहम्मद सईद जनता पार्टी से पहले किस पार्टी में था कांग्रेस में। दूसरे, इंदिरा गाँधी को जेल से छुड़ाने के लिए प्लेन हाइजेक किसने करवाया संजय गाँधी ने, संजय गाँधी किस पार्टी में था कांग्रेस। फिर भी महामूर्ख कहते है कांग्रेस अच्छी पार्टी है।    

रूबिया अपहरण केस क्या था, जिसने हिला दिया था पूरा देश

शफत अहमद शुंगलू की ताजा गिरफ्तारी रूबिया सईद अपहरण कांड की जाँच को नई जान दे रही है, जो कश्मीर के आतंकवाद के इतिहास का एक काला अध्याय है। 8 दिसंबर 1989 को तब के गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के आतंकियों ने अगवा कर लिया था।

लाल डीड अस्पताल में डॉक्टर रूबिया बस से घर लौट रही थीं जब बंदूक की नोक पर उन्हें किडनैप कर लिया गया। यह खबर दिल्ली पहुँचते ही हड़कंप मच गया। पूरे देश में सन्नाटा छा गया, क्योंकि यह पहली बार था जब आतंकी केंद्र सरकार के मंत्री के घर तक सेंध लगा बैठे।

अपहरण के पीछे साफ मकसद था- जेल में बंद अपने साथियों को रिहा कराना। आतंकियों ने शर्त रखी: रूबिया की जान चाहिए तो पाँच खूँखार सदस्यों को छोड़ो। सरकार मुश्किल में फँस गई। एक तरफ मंत्री की बेटी की जिंदगी, दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा। कई दिनों तक पर्दे के पीछे बातचीत चली।

आखिरकार 13 दिसंबर को वीपी सिंह सरकार झुक गई। पाँच आतंकियों को रिहा किया गया, बदले में रूबिया घर लौट आईं। लेकिन इस सौदे ने कश्मीर का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी घटना ने आतंकियों के हौसले बुलंद कर दिए।

यासीन मलिक था अपहरण केस का मास्टरमाइंड, खुद रूबिया ने की थी पहचान

इस सौदे के केंद्र में था जेकेएलएफ का चीफ यासीन मलिक। मलिक पर अपहरण का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, दिसंबर 1989 के पहले हफ्ते में मलिक और उसके साथियों ने साजिश रची। रूबिया को निशाना बनाकर सरकार को ब्लैकमेल करने का प्लान था।

मलिक ने खुद को अपहरण की योजना का सूत्रधार बताया। 2022 में रूबिया ने टाडा कोर्ट में मलिक समेत चार आरोपितों की पहचान की। उन्होंने कहा, “यही वो लोग थे जिन्होंने मुझे अगवा किया।” रूबिया का यह बयान केस को मजबूत करने वाला साबित हुआ। “

यासीन मलिक की भूमिका सिर्फ अपहरण तक सीमित नहीं थी। वह जेकेएलएफ का चेहरा था, जो पाकिस्तान समर्थित आतंक को कश्मीर में फैला रहा था। मलिक ने अपहरण को एक राजनीतिक हथियार बनाया। रिहाई के बाद रिहा हुए आतंकी जैसे अली मोहम्मद मीर, मोहम्मद यासिन फतेह और इकबाल अहमद गंदरू ने जेकेएलएफ को नई ताकत दी। मलिक ने इन्हें हथियारों से लैस किया और हमलों की साजिशें रचीं।

मलिक की गिरफ्तारी के बाद दोबारा खुली फाइल

साल 2019 में मलिक की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने पुरानी फाइलें खोलीं। जनवरी 2024 में मलिक समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इसमें अपहरण, साजिश और बंधक बनाने के आरोप हैं। अब उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी मलिक ने कभी अपराध नहीं माना, लेकिन गवाहों के बयानों ने उसे आखिरकार न्याय के कटघरे में खड़ा कर दिया।

रूबिया अपहरण केस के बाद कश्मीर में हिंदुओं पर हुआ जुल्म

इस अपहरण ने कश्मीर में आतंकवाद को तेजी से बढ़ावा दिया। पहले कश्मीर में अलगाववाद था, लेकिन 1989 के बाद यह हिंसा का सैलाब बन गया। रिहा हुए आतंकियों ने नई भर्तियाँ कीं, हथियारों का जखीरा बढ़ाया। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस सौदे ने आतंकियों को संदेश दिया- सरकार झुक सकती है। नतीजा? 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन शुरू हो गया।

जेकेएलएफ ने हिंदू परिवारों पर हमले किए, हजारों घर जलाए। मलिक पर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का भी आरोप है। सरकार ने 2019 में जेकेएलएफ को आतंकी संगठन घोषित किया। गृह मंत्रालय ने कहा, “यह संगठन 1989 के पंडित जेनोसाइड, आईएएफ अधिकारियों की हत्या और रूबिया अपहरण के लिए जिम्मेदार है।”

कश्मीर में आई अपहरण की बाढ़, हर तरफ आतंकी ही आतंकी

अपहरण के बाद किडनैपिंग की होड़ लग गई। 1991 में आईएएस अधिकारी ए.के. भट्टाचार्य का बेटा अपहरण हुआ। 1992 में वीसी चिल्टन का बेटा। ये सभी जेकेएलएफ की साजिशें थीं। मलिक ने इनसे फंडिंग और हथियार जुटाए। कश्मीर घाटी में ग्रेनेड हमले, सड़क किनारे बम विस्फोट आम हो गए। 1989 से 1990 के बीच आतंकी घटनाएं दोगुनी हो गईं।

पीआईबी के अनुसार, 1989 में 200 से ज्यादा हमले हुए, जो 1990 में 1000 पार कर गए। मलिक की रणनीति थी- हाई-प्रोफाइल टारगेट चुनो, सरकार को मजबूर करो। इसने अलगाववाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर पाकिस्तान को मजबूत किया।

कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने की वजह सिर्फ अपहरण नहीं, बल्कि मलिक जैसी साजिशें थीं। 1989 के बाद जेकेएलएफ ने आईएएफ के चार अधिकारियों की हत्या की। मलिक पर यह केस भी चल रहा है। एनआईए ने 2019 में मलिक को टेरर फंडिंग में उम्रकैद दी। ओपन मैगजीन के अनुसार, मलिक ने अपहरण से कश्मीर को ‘कॉन्सपिरेटर’ बना दिया।

इस अपहरण कांड के बाद बढ़ा था कश्मीर में आतंकवाद

सीबीआई की यह कार्रवाई दिखाती है कि कानून कभी सोता नहीं। शुंगलू की पूछताछ से बाकी फरार जैसे अली मोहम्मद मीर तक पहुँच बन सकती है। मलिक की साजिश ने कश्मीर को आग में झोंक दिया, लेकिन अब न्याय की बारी है। कश्मीर के इतिहासकार कहते हैं कि अपहरण ने ‘अलगाववाद से आतंकवाद’ का रास्ता खोला। 1990 में 1 लाख पंडित बेघर हुए। जेकेएलएफ ने 1000 से ज्यादा हमले किए। मलिक ने पाकिस्तान से ट्रेनिंग ली, हथियार मँगवाए।

बहरहाल, ताजा गिरफ्तारी से केस में नया मोड़ आ गया है। शफत अहमद शुंगलू पर अपहरण में सहयोग का आरोप है। एक चश्मदीद गवाह ने कहा, “मैंने 1989 के बाद सोपोर में शुंगलू को देखा।” कुछ आरोपित धारा 164 के तहत जुर्म कबूल कर चुके हैं। वहीं, सीबीआई इस केस को टाडा कोर्ट में चला रही है। जिसमें जनवरी 2021 में कोर्ट ने मलिक समेत 10 के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब अगली सुनवाई में शुंगलू की भूमिका खुल सकती है।

अगवा कर हिंदू नर्स से गैंगरेप कर सड़क पर फेंक दी क्षत-विक्षत लाश… कौन थी कश्मीरी पंडित सरला भट्ट, जिनकी हत्या में यासीन मलिक और उसके साथियों के ठिकानों पर छापे

         कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या में SIA ने यासीन मलिक के घर की छापेमारी (फोटो साभार: NaiDunia)
जम्मू-कश्मीर में 1990 में हुई कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या का मामला एक बार चर्चा में है। राज्य जाँच एजेंसी (SIA) ने इस मामले की जाँच आगे बढ़ाई है। मंगलवार (12 अगस्त 2025) को श्रीनगर में SIA ने 8 जगह छापेमारी की है। यह छापेमारी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का मुखिया यासीन मलिक और उसके साथियों के घरों पर की गई है।

JKLF ही 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का जिम्मेदार है। सरला भट्ट को भी इसी आतंकी संगठन ने अपहरण और गैंगरेप कर हत्या कर दी थी। इस घटना को 35 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सरला भट्ट को न्याय नहीं मिला है।

SIA को मामले की जाँच सौंपे जाने के बाद तेजी आई है। SIA को जाँच में सरला भट्ट की हत्या से जुड़े काफी सबूत मिले, जिसके आधार पर SIA आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

कौन थीं सरला भट्ट?

27 साल की सरला भट्ट जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में रहने वाली एक कश्मीरी पंडित थीं। शायद यही उनका गुनाह था। जब 1990 में घाटी में कश्मीरी पंडितों का जिहादियों ने नरसंहार किया, तब सरला भी उसका शिकार हुईं।

वे कश्मीर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में एक नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकी उन्हें उठाकर ले गए 5 दिन बाद सड़क पर उनका शव पड़ा मिला था।

सरला भट्ट के शरीर के टुकड़े कर बाजार में फेंके गए

14 अप्रैल 1990 का दिन था। जब सरला भट्ट SKIMS के हब्बा खातून हॉस्टल से आतंकियों ने उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए। सरला भट्ट का 5 दिन तक कुछ पता नहीं लगा। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ गैंगरेप किया गया। उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया। 19 अप्रैल 1990 को उनका क्षत-विक्षत शव सड़क पर पड़ा मिला था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरला भट्ट के शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था। द हिंदू के मुताबिक, इस मामले में निगीन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसकी संख्या 56/1990 है। हालाँकि, इसमें हिंदू नर्स के साथ रेप का कोई जिक्र तक नहीं है। इस बर्बर मामले में JKLF के पूर्व नेता पीर नूरुल हक शाह उर्फ एयर मार्शल का भी नाम सामने आया था।

सरला भट्ट की हत्या में JKLF के खिलाफ सबूत

SIA को जब सरला भट्ट मामले की जाँच सौंपी गई तो JKLF सरगना यासीन मलिक और उसके साथियों के खिलाफ सबूत मिले। इसी के आधार पर SIA ने यासीन मलिक और उसके गुर्गों के घरों पर छापेमारी की है। बता दें कि यासीन मलिक आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते तिहाड़ जेल में बंद है।

NIA ने यासीन मलिक को फाँसी की सजा सुनाने की माँग की है। यासीन मलिक पर 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में शामिल होने के भी आरोप हैं।

700 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हुई हत्या

सरला भट्ट केवल एकलौता नाम नहीं है, जिनकी बर्बरता से हत्या की गई। 1980-90 तक ऐसे 700 कश्मीरी पंडितों की घाटी में हत्या कर दी गई। ये हत्या कश्मीरी पंडितों के बीच दहशत फैलाने के लिए की गई थी।

आतंकी सरेआम हिंदू महिलाओं को घर से उठा ले जाते थे, कई माँ-बाप के सामने उनके बच्चों की हत्या हुई, हिंदुओं का मकान चुनकर निशाना बनाया जाता था। इन सब से परेशान होकर उस समय लगभग 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 तक घाटी में केवल 728 गैर-प्रवासी पंडित ही बचे हैं, जबकि 2021 में 808 परिवारों की थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ भी कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन को दर्शाने वाली फिल्म थी, जिसमें घाटी की असलियत दिखाई गई थी।

Operation Sindoor का डर : जिस BSF जवान को छोड़ने पर मजबूर हुआ पाकिस्तान, उसके बदले अपने शौहर को छुड़ाना चाहती थी आतंकी यासीन मलिक की बीवी

   मुशाल मलिक (यासीन मलिक के साथ) BSF जवान के साथ अपने आतंकी शौहर का सौदा करना चाहती थी (साभार:                                                                                         RahulSeeker/X & MushaalMullick/X)
आतंकी यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी ऑपरेशन सिंदूर के बाद डरी हुई है। वह पाकिस्तान की सरकार से यासीन मलिक को वापस लाने के लिए सौदा करने को कह रही है। आतंकी की बीवी चाहती है कि पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा पकड़े गए BSF जवान के बदले यासीन मलिक का सौदा हो। हालाँकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद खौफ में आए पाकिस्तान ने पहले ही BSF जवान को भारत को वापस सौंप दिया है। इस बीच यासीन मलिक की बीवी की वीडियो वायरल हो रही है।

यासीन मलिक का सौदा करने की कही बात

DAWN न्यूज चैनल पर एक पत्रकार के साथ इंटरव्यू में मौजूद आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल मलिक ने यह सारी बातें कही हैं। मुशाल मलिक ने इस इंटरव्यू में दावा किया कि उसकी अपने शौहर से बीते 6 सालों से कोई बात नहीं हो रही है क्योंकि सारी फोन लाइनें बंद हो चुकी हैं।
मुशाल मलिक ने इस बात की आशंका जताई कि आतंकी यासीन मलिक को भारत में फाँसी पर लटकाया जा सकता है। वायुसेना अधिकारियों को मारने वाले यासीन मलिक के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, यह दावा भी मुशाल मलिक ने किया।
मुशाल मलिक ने इसके बाद यासीन मलिक का सौदा करने की बात चालू की। पहले उसने दावा किया कि एक भारतीय महिला पायलट शिवांगी सिंह पाकिस्तान के कब्जे में है, लेकिन बाद में खुद उसने स्पष्ट किया कि यह मामला नहीं है।
मुशाल मलिक चाहती थी कि कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्जे में भारतीय महिला पायलट के बदले यासीन मलिक की माँग करे। हालाँकि, जब उसकी इन उम्मीदों पर पानी फिरा तो वह दूसरे सौदे में जुट गई। उसने कहा कि पाकिस्तान की सरकार रेंजर्स द्वारा हिरासत में लिए गए BSF जवान के बदले यासीन मलिक को रिहा करने की माँग करे।
मुशाल मलिक की यह बातें कुछ-कुछ 1999 के कंधार विमान हाइजैक से मिलती जुलती थीं। तब भी आतंकियों ने एक विमान हाइजैक कर भारतीय नागरिकों को अगवा किया था और उनके बदले आतंकी मौलाना मसूद अजहर को रिहा करवा ले गए थे।
मुशाल का यह पैंतरा हालाँकि इस बार नहीं चलने वाले क्योंकि BSF जवान को बुधवार (14 मई, 2025) को पाकिस्तान से वापस ले आया गया। पाकिस्तान को वैसे भी BSF जवान को छोड़ना ही पड़ता क्योंकि उस पर भारत का काफी दबाव था और वह स्वयं ही ऑपरेशन सिंदूर के बाद डरा हुआ था।
ऐसे में किसी आतंकी के बदले उसका सौदा हो ही नहीं सकता था। यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मुशाल मलिक भारत के खिलाफ जहर उगलती रही है। वह पाकिस्तान में अपनी बेटी के साथ रहती है। उसका और उसकी बेटी का इस्तेमाल पाकिस्तानी फौज करती है। दोनों से भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलवाया जाता है।

पाकिस्तानी सरकार में मिली थी जगह

मुशाल मालिक को 2023 में पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल काकर ने अपना सलाहकार बनाया था। उसे मानवाधिकार मामलों पर सलाहकार बनाया गया था। मुशाल को उसके भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का इनाम दिया गया था। मुशाल एक आर्टिस्ट भी है जो अक्सर अपनी अधनंगी पेंटिंग्स को लेकर चर्चा में रहती हैं।
यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। मुशाल हुसैन मलिक अर्धनग्न पेंटिंग बनाती है।
मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती है और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती है। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं।

कौन है आतंकी यासीन मलिक?

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नामक इस्लामी आतंकी संगठन चलाता था। लेकिन बाद में भारतीय सेना की कार्रवाई के डर से गाँधीवाद का ढोंग करने लगा था।
कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार में उसे खूब भाव दिया जाता था। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक उससे हाथ मिलाते दिखते थे। यासीन मलिक ने 4 भारतीय वायुसेना अधिकारियों की जम्मू-कश्मीर में हत्या कर दी थी। इस मामले में वह वर्तमान में जेल है। उसे उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है।

यासीन मलिक सिर्फ इन हत्याओं में ही नहीं बल्कि अनेकों कश्मीरी पंडितों की हत्याओं में भी शामिल था। उसका नाम महबूबा मुफ़्ती की बहन रूबिया सईद के अपहरण में भी शामिल था। यासीन मलिक को मोदी सरकार आने के बाद आतंक के मामलों में प्रभावी रूप से सजा दी गई है।

दिल्ली में लगे पोस्टर में आतंकी यासीन मलिक के साथ पूर्व PM मनमोहन सिंह… अपील- कांग्रेस को करें वोट: पुलिस ने उतारे

                                                                                                          साभार: Cityairnews & ANI
नई दिल्ली में आतंकी यासीन मलिक की रिहाई के लिए कांग्रेस को वोट देने की अपील करने वाले पोस्टर सामने आए हैं। इन पोस्टर पर आतंकी यासीन मलिक की पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साथ वाली तस्वीर लगाई गई है। दिल्ली पुलिस ने इन पोस्टर को हटा दिया है। मोहब्बत की दुकान चलाने वाले पहले X-Ray करने की बात करते हैं, फिर 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को दिल्ली से उम्मीदवार और अब आतंकियों की रिहाई के नाम पर वोट मांगकर क्या दोबारा देश को बारूद के ढेर पर लाने की तैयारी कर रहे हैं? क्या कांग्रेस इतनी नीचे गिर सकती हैं? चुनाव आयोग को इसका स्वयं संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए। 

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के मंडी हाउस चौक के पास यह पोस्टर मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को सामने आए हैं। इनमें 25 मई को कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की गई है। इसके साथ ही इनमें आतंकी यासीन मलिक के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एक फोटो है।

इसके अलावा इनमें नीचे लिखा हुआ है, “यासीन मलिक की रिहाई और बोलने की आजादी के लिए वोट करें।” इसके नीचे वॉईस फॉर डेमोक्रेसी नाम लिखा हुआ है। यह पोस्टर इस इलाके में खम्भों पर लगवाए गए थे। इनकी जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस ने इन्हें यहाँ से उतरवा दिया।

यासीन मलिक के लिए कॉन्ग्रेस को वोट देने के पोस्टर किसने लगवाए, यह अभी सामने नहीं आया है। कॉन्ग्रेस के भी किसी पदाधिकारी ने इस सम्बन्ध में कोई पुष्टि नहीं की है। दिल्ली पुलिस ने भी पोस्टर लगाने वाली की जानकारी नहीं दी है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस पर हमला बोला जा रहा है।

यासीन मलिक जम्मू कश्मीर का एक आतंकी है जो कि वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद है। वह विंग कमांडर अधिकारी रवि खन्ना समेत कई अधिकारियों की हत्या के मामले में आरोपित है। उसके ऊपर टेरर फंडिंग का मामला भी चल रहा है।

यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नामक संगठन चलाता था जिसे केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। यासीन मलिक 1990 के दशक में आतंक करने के बाद कार्रवाई से बचने के लिए गाँधीवादी होने का ढोंग करने लगा था और शांति की बातें बघारता था।

दिल्ली में सामने आए जिन पोस्टर में आतंकी यासीन मलिक पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साथ दिख रहा है, वह तस्वीर 2006 की हैं। 2006 में यासीन मलिक को कॉन्ग्रेस सरकार ने पीएम आवास बुलाया था। वह इस दौरान पीएम मनमोहन सिंह से मिलकर चर्चा कर रहा था। इस दौरान वह पीएम मनमोहन सिंह के साथ हाथ मिलाते भी दिखा था।

पाकिस्तान : अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल-हक काकर की सलाहकार आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल हुसैन मलिक अधनंगी पेंटिंग्स की शौक़ीन

कश्मीर के अलगाववादी नेता व कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के आरोपित आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल हुसैन मलिक अक्सर अपनी भारत विरोधी मानसिकता की वजह से सुर्खियों में आती हैं। हाल में उन्होंने कुछ ट्वीट करके भारत के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाना चाहा था। इससे पहले वह अधनंगी पेंटिंग्स बनाने के कारण चर्चा में कई बार रह चुकी हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अलगाववादी नेता की पाकिस्तानी बीवी मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती हैं और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती हैं। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं।

                                                      मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)

                                               मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)
मुशाल की कुछ पेंटिंग्स में कश्मीर को लेकर उनका जो एजेंडा है वो साफ दिखाई देता है। वह फिलहाल पीस एंड कल्चर ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष हैं और उनके संबंध कई वरिष्ठ राजनेताओं व ब्यूरोक्रेट्स से भी हैं। आपको जानकर शायद हैरानी न हो, कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकियों को मुशाल कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर देखती हैं और बुरहान वानी जैसे आतंकी को श्रद्धांजलि देती रहती हैं। एक बार मुशाल ने कहा था, “बुरहान एक क्रांतिकारी प्रतीक और आइकन था जिसने कश्मीर के लिए बलिदान दिया।”

कश्मीर के ख़िलाफ़ फैलाई फर्जी खबर

कुछ दिन पहले ही 80 हजार फॉलोवर्स वाली मुशाल ने ट्वीट में दावा किया था कि  कि 1989 से लेकर अब तक कश्मीर में भारतीय सेना ने 11, 250 औरतों का रेप किया है जबकि 22 हजार से ज्यादा औरतें सेना के कारण विधवा हो गई हैं। उनके ट्विटर पर उन्हें अपनी पहचान प्राउड वाइफ ऑफ यासीन मलिक बताते देखा जा सकता है।
अवलोकन करें:-

यासीन मलिक और मुशाल मलिक का निकाह

यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। इसके बाद दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। निकाह के समय तक जहाँ यासीन अलगाववादी होने के चलते पाकिस्तान में एक जाना-माना नाम था वहीं उसकी बीवी रावलपिंडी की ही थी लेकिन लोग उन्हें कम जानते थे। मुशाल ने एक बार बताया था कि उन्हें यासीन की एक स्पीच पसंद आई थी। फिर उन्होंने उससे ऑटोग्राफ माँगा और नजदीकियाँ बढ़ने पर दोनों ने निकाह कर लिया। मुशाल की माँ पाकिस्तान मुस्लिम लीग की पूर्व महासचिव रह चुकी हैं जबकि भाई यूएस में प्रोफेसर और नेवल ऑफिसर है।

पाकिस्तान प्रधानमंत्री की सलाहकार बनी आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल

तिहाड़ जेल में बंद आतंकी यासीन मलिक की प्रोपेगेंडाबाज बीवी मुशाल हुसैन मलिक को पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल-हक काकर ने अपना सलाहकार बनाया है। उसने 17 अगस्त 2023 को शपथ ली। वह मानवाधिकार मामलों पर पाकिस्तानी पीएम की सलाहकार होगी। यह पहला मौका है जब किसी कश्मीरी आतंकी के परिजन को पाकिस्तान की संघीय सरकार में जगह मिली है। हालाँकि भारत विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए उनक इस्तेमाल पाकिस्तान हमेशा से करता रहा है।

शुरुआत में मीडिया में मुशाल को कार्यवाहक सरकार में मंत्री बनाने के चर्चे थे। लेकिन 17 अगस्त को मंत्री के तौर पर जिन 16 लोगों ने शपथ ली उनमें उसका नाम नहीं था। मुशाल सहित 3 लोगों को पीएम के 3 सलाहकार के तौर पर शपथ दिलाई गई। मुशाल हुसैन और यासीन मलिक की 11 साल की बेटी रजिया सुल्तान का भी पाकिस्तान अपने प्रोपेगेंडा के लिए इस्तेमाल करता रहता है। मुशाल एक आर्टिस्ट भी है जो अक्सर अपनी अधनंगी पेंटिंग्स को लेकर चर्चा में रहती हैं।

                                                         प्रदर्शन में अपनी बनाई पेंटिंग के साथ मुशाल (साभार: starsunfolded)

अधनंगी पेंटिंग की वजह से चर्चा में रहती है मुशाल हुसैन मलिक

यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। मुशाल हुसैन मलिक अर्धनग्न पेंटिंग बनाती है।
मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती है और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती है। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं। ऑप इंडिया ने उसके प्रोपेगेंडा वाले कारनामों पर रिपोर्ट भी छापी थी।

यासीन मलिक की बेटी का भी पाकिस्तान करता है इस्तेमाल

कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने आतंकी यासीन मलिक की 11 साल की नाबालिग बेटी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा में किया था। उसकी बेटी ने कहा था कि उसके अब्बा को कुछ भी नुकसान पहुँचता है तो वो इसका दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी। उसने कहा कि उसके अब्बा को फर्जी मामले में फँसाया गया है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही वो जेल से निकलेंगे। यासीन मलिक की बेटी ने दावा किया कि वो जल्द ही जेल से निकल कर पाकिस्तानियों के बीच में होगा।

कौन है आतंकी यासीन मलिक?

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। इसके बावजूद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते उससे मुलाकात की थी और उससे हाथ मिलाया था। उस पर ‘अलगाववादी नेता’ के मुखौटे में कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का भी आरोप है। साथ ही उसे भारत में टेरर फंडिंग समेत दूसरे अपराधों के मामले में हिरासत में भी लिया गया था। यासीन मलिक पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप है।

पीठ दिखाती, स्तन छिपाती औरतें: आतंकी यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी की अधनंगी पेंटिंग्स

                                                यासीन मलिक और उसकी बीवी मुशाल मलिक
कश्मीर के अलगाववादी नेता व कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के आरोपित आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल हुसैन मलिक अक्सर अपनी भारत विरोधी मानसिकता की वजह से सुर्खियों में आती हैं। हाल में उन्होंने कुछ ट्वीट करके भारत के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाना चाहा था। इससे पहले वह अधनंगी पेंटिंग्स बनाने के कारण चर्चा में कई बार रह चुकी हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अलगाववादी नेता की पाकिस्तानी बीवी मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती हैं और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती हैं। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं।

                                           मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)
                                          मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)

मुशाल की कुछ पेंटिंग्स में कश्मीर को लेकर उनका जो एजेंडा है वो साफ दिखाई देता है। वह फिलहाल पीस एंड कल्चर ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष हैं और उनके संबंध कई वरिष्ठ राजनेताओं व ब्यूरोक्रेट्स से भी हैं। आपको जानकर शायद हैरानी न हो, कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकियों को मुशाल कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर देखती हैं और बुरहान वानी जैसे आतंकी को श्रद्धांजलि देती रहती हैं। एक बार मुशाल ने कहा था, “बुरहान एक क्रांतिकारी प्रतीक और आइकन था जिसने कश्मीर के लिए बलिदान दिया।”

कश्मीर के ख़िलाफ़ फैलाई फर्जी खबर

कुछ दिन पहले ही 80 हजार फॉलोवर्स वाली मुशाल ने ट्वीट में दावा किया था कि  कि 1989 से लेकर अब तक कश्मीर में भारतीय सेना ने 11, 250 औरतों का रेप किया है जबकि 22 हजार से ज्यादा औरतें सेना के कारण विधवा हो गई हैं। उनके ट्विटर पर उन्हें अपनी पहचान प्राउड वाइफ ऑफ यासीन मलिक बताते देखा जा सकता है।

यासीन मलिक और मुशाल मलिक का निकाह

यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। इसके बाद दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। निकाह के समय तक जहाँ यासीन अलगाववादी होने के चलते पाकिस्तान में एक जाना-माना नाम था वहीं उसकी बीवी रावलपिंडी की ही थी लेकिन लोग उन्हें कम जानते थे। मुशाल ने एक बार बताया था कि उन्हें यासीन की एक स्पीच पसंद आई थी। फिर उन्होंने उससे ऑटोग्राफ माँगा और नजदीकियाँ बढ़ने पर दोनों ने निकाह कर लिया। मुशाल की माँ पाकिस्तान मुस्लिम लीग की पूर्व महासचिव रह चुकी हैं जबकि भाई यूएस में प्रोफेसर और नेवल ऑफिसर है।

रवीश का ‘सर’ और कश्मीरी पंडितों का हत्यारा! : वो ‘यासीन मलिक’ जिसे UPA सरकार से मिला भरपूर ‘प्यार’

                                      यासीन मलिक को भारतीय मीडिया और कॉन्ग्रेस से मिला प्यार
द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद पाकिस्तान के हितैषी और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में भागीदार यासीन मलिक की चर्चा सोशल मीडिया पर जोरों-शोरों से हो रही है। लेकिन यासीन से जुड़ी ये हालिया चर्चा उन मीडिया संस्थानों जैसी नहीं है जहाँ पर यासीन जैसे अलगाववादी को ‘सर-सर’ कहकर उसकी बातें सुनीं जाएँ। उसके विचारों के लिए उसे पूरा मंच सौंप दिया जाए या कॉन्ग्रेस की मनमोहन सरकार की तरह उसकी पीएम आवास में आवभगत की जाए।

यासीन मलिक को मनमोहन सरकार में मिला प्यार

इनके अलावा यासीन मलिक को यूपीए सरकार में पार्टी से भी खूब प्यार मिला था। साल 2006 में मनमोहन सिंह ने जेके एलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक को नई दिल्ली में पीएम आवास पर बुलाया और कई मुद्दों पर उससे चर्चा की। आज भी यासीन मलिक के साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की मुस्कुराती फोटो, वीडियो आपको वायरल होती मिल जाएगी।

इंडिया टुडे का यूथ आइकन

सोशल मीडिया यूजर्स खुलकर इस अलगाववादी यासीन के कृत्यों को साझा कर रहे हैं और उन लोगों को भी लताड़ रहे हैं जिन्होंने इसके कुकर्मों को न केवल छिपाने का प्रयास किया बल्कि इसे मसीहा की तरह दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 2008 में इंडिया टुडे के कॉन्क्लेव में यासीन मलिक को यूथ आइकन बनाकर उतारा गया और उसके अलगाववादी संगठन को सेकुलर कहा गया। इस मंच का इस्तेमाल करके मलिक ने पूरे 12 मिनट ऑन टीवी अपने अलगाववादी विचारों का प्रचार प्रसार बुद्धिजीवी बनकर किया था।      

बीबीसी पर स्वीकारी थी मलिक ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात

इससे पहले बीबीसी जैसा विदेशी मीडिया भी यासीन को अपने चैनल के माध्यम से हीरो दिखाने का प्रयास कर चुका था और इसी शो में उसने स्वीकार किया था कि उसने कश्मीरी हिंदू रिटायर्ड जज नीलकंठ गंजू को मारा। उसका तर्क था कि आखिर गंजू ने जिसे फाँसी की सजा सुनाई उस मकबूल भट की गलती ही क्या थी। उसके मुताबिक आतंकी मकबूल को जो गंजू ने सजा दी वो राजनीति से प्रेरित फैसला था। हैरानी की बात ये है कि इसी इंटरव्यू में यासीन मलिक ने हँस-हँस कर चार निहत्थे इंडियन एयर फोर्स सैनिकों को कश्मीर में मारने की बात स्वीकारी थी। उसके हाथ अन्य कश्मीरी हिंदुओं के खून से भी रंगे कहे जाते हैं।

जब रवीश के मुँह से यासीन मलिक के लिए निकला ‘सर’

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इंडिया टुडे और बीबीसी की इस रेस में ध्यान रहे एनडीटीवी भी पीछे नहीं था। एनडीटीवी चैनल के प्राइम टाइम एंकर रवीश कुमार ने साल 2013 में यासीन मलिक को तब बोलने का मंच दिया था जब वह भूख हड़ताल के नाम पर हाफिज सईद के साथ बैठा दिखा था। आपको जानकर शायद हैरानी न हो कि रवीश कुमार इस शो में कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूल चुके यासीन को यासीन साहब और सर-सर कहकर बुला रहे थे।