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कश्मीर : जब गैंगरेप करके सड़क पर फेंकी गई हिंदू नर्स की क्षत-विक्षत लाश… सरला भट्ट केस में 36 साल बाद आतंकी यासीन मलिक समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट दायर

                     यासीन मलिक पर सरला भट हत्याकांड में चार्जशीट दायर (फोटो साभार- दैनिक भास्कर)
वो भी क्या दिन थे जब शेख जी फाख्ता उड़ाते थे यानि आतंकवाद को बढ़ावा, सेना के जवानों को मारने और हिन्दुओं को मारने वालों को कांग्रेस से लेकर यूपीए(यानि वर्तमान INDI गठबंधन) बहुत सम्मान दिया करते थे, प्रधानमंत्री आवास में किसी सम्मानित की तरह आओभगत होती थी। वक़्त का चक्र ऐसा घुमा आज जेल में ज़िंदगी काटने को मजबूर।

टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा जेकेएलएफ का पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ 36 साल बाद कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई हुई है। जम्मू-कश्मीर की एसआईए ने 36 साल पुराने मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें उसे मुख्य आरोपितों में शामिल किया है।

इसके तीन आरोपितों, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद युसूफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। चौथा आरोपित मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको फरार है और उसके पीओके में छिपे होने की आशंका है। सरला को उसी ने गोली मारी थी। चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके 4 साथियों ने अप्रैल 1990 में सरला भट्ट को अगवा किया और उसकी हत्या की साजिश रची।

सरला भट्ट कौन थी?

कश्मीरी पंडित सरला भट्ट उस वक्त श्रीनगर के शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। 36 साल पहले उनका अपहरण किया गया। उन्हें यातनाएँ दी गईं। बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। सरला अनंतगाग की रहने वाली थी।

18 अप्रैल 1990 को सरला ड्यूटी पर जा रही थीं। इसी दौरान अस्पताल परिसर के पास से उन्हें उठा लिया गया। चार दिन तक अलग-अलग जगह रख कर बुरी तरह टॉर्चर किया गया। बाद में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला। शरीर पर गोलियों के साथ साथ उन यातनाओं के भी निशान थे, जो चार दिनों तक उन्हें दिए गए।

शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उसे ‘सुरक्षाबलों का मुखबिर’ होने की बात कही गई थी। इतना ही नहीं सरला के परिवार वालों पर भी जुल्म ढाए गए। उसके घर पर ग्रेनेड से हमला किया गया और कश्मीर से पलायन के लिए मजबूर किया गया। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि इस हत्या का उद्देश्य कश्मीरी पंडितों में भय पैदा करना था, ताकि उनका घाटी से पलायन तेज हो।

एसआईए ने 737 पन्नों की चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की। इसमें यासीन मलिक सहित 5 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री तथा नई जाँच के आधार पर आरोप तय किए गए।

यासीन मलिक पर अब तक किन-किन मामलों में कार्रवाई हुई?

यासीन मलिक आतंकियों की फंडिंग का दोषी है। इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली है। NIA ने 2017 में यह मामला दर्ज किया था। उसने घाटी में अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए हवाला के जरिए धन जुटाया। 2022 में यासीन मलिक ने अदालत में कई आरोप स्वीकार किए। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

उस पर आतंकवाद, आपराधिक साजिश और UAPA के तहत भी कई मामले दर्ज हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप है।

इन मामलों में भी उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।

जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले के मामले में भी यासीन मलिक का नाम आया था।

इस मामले में भी NIA ने कार्रवाई की है और मुकदमा न्यायिक प्रक्रिया में है।

1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के मामले में भी यासीन मलिक का नाम जाँच के दौरान आया। इस मामले में भी अदालत में मुकदमा चल रहा है और अंतिम फैसला नहीं आया है।

1990 के दशक में उनके खिलाफ कई FIR दर्ज हुई थीं। जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दर्जनों आपराधिक और आतंकवाद संबंधी मामले अलग-अलग वक्त पर दर्ज हुए हैं। इनमें से कुछ में वह दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि कुछ अभी भी न्यायालय में लंबित हैं।

फिलहाल यासीन मलिक आतंकवाद फंडिंग मामले में तिहाड़ में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। NIA ने उनकी सजा बढ़ाकर मृत्युदंड किए जाने की भी अपील की है, जिस पर उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। सरला भट्ट हत्याकांड की नई चार्जशीट उनके खिलाफ एक अलग और महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई है, जिसकी सुनवाई आगे होगी।

अगवा कर हिंदू नर्स से गैंगरेप कर सड़क पर फेंक दी क्षत-विक्षत लाश… कौन थी कश्मीरी पंडित सरला भट्ट, जिनकी हत्या में यासीन मलिक और उसके साथियों के ठिकानों पर छापे

         कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या में SIA ने यासीन मलिक के घर की छापेमारी (फोटो साभार: NaiDunia)
जम्मू-कश्मीर में 1990 में हुई कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या का मामला एक बार चर्चा में है। राज्य जाँच एजेंसी (SIA) ने इस मामले की जाँच आगे बढ़ाई है। मंगलवार (12 अगस्त 2025) को श्रीनगर में SIA ने 8 जगह छापेमारी की है। यह छापेमारी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का मुखिया यासीन मलिक और उसके साथियों के घरों पर की गई है।

JKLF ही 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का जिम्मेदार है। सरला भट्ट को भी इसी आतंकी संगठन ने अपहरण और गैंगरेप कर हत्या कर दी थी। इस घटना को 35 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सरला भट्ट को न्याय नहीं मिला है।

SIA को मामले की जाँच सौंपे जाने के बाद तेजी आई है। SIA को जाँच में सरला भट्ट की हत्या से जुड़े काफी सबूत मिले, जिसके आधार पर SIA आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

कौन थीं सरला भट्ट?

27 साल की सरला भट्ट जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में रहने वाली एक कश्मीरी पंडित थीं। शायद यही उनका गुनाह था। जब 1990 में घाटी में कश्मीरी पंडितों का जिहादियों ने नरसंहार किया, तब सरला भी उसका शिकार हुईं।

वे कश्मीर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में एक नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकी उन्हें उठाकर ले गए 5 दिन बाद सड़क पर उनका शव पड़ा मिला था।

सरला भट्ट के शरीर के टुकड़े कर बाजार में फेंके गए

14 अप्रैल 1990 का दिन था। जब सरला भट्ट SKIMS के हब्बा खातून हॉस्टल से आतंकियों ने उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए। सरला भट्ट का 5 दिन तक कुछ पता नहीं लगा। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ गैंगरेप किया गया। उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया। 19 अप्रैल 1990 को उनका क्षत-विक्षत शव सड़क पर पड़ा मिला था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरला भट्ट के शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था। द हिंदू के मुताबिक, इस मामले में निगीन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसकी संख्या 56/1990 है। हालाँकि, इसमें हिंदू नर्स के साथ रेप का कोई जिक्र तक नहीं है। इस बर्बर मामले में JKLF के पूर्व नेता पीर नूरुल हक शाह उर्फ एयर मार्शल का भी नाम सामने आया था।

सरला भट्ट की हत्या में JKLF के खिलाफ सबूत

SIA को जब सरला भट्ट मामले की जाँच सौंपी गई तो JKLF सरगना यासीन मलिक और उसके साथियों के खिलाफ सबूत मिले। इसी के आधार पर SIA ने यासीन मलिक और उसके गुर्गों के घरों पर छापेमारी की है। बता दें कि यासीन मलिक आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते तिहाड़ जेल में बंद है।

NIA ने यासीन मलिक को फाँसी की सजा सुनाने की माँग की है। यासीन मलिक पर 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में शामिल होने के भी आरोप हैं।

700 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हुई हत्या

सरला भट्ट केवल एकलौता नाम नहीं है, जिनकी बर्बरता से हत्या की गई। 1980-90 तक ऐसे 700 कश्मीरी पंडितों की घाटी में हत्या कर दी गई। ये हत्या कश्मीरी पंडितों के बीच दहशत फैलाने के लिए की गई थी।

आतंकी सरेआम हिंदू महिलाओं को घर से उठा ले जाते थे, कई माँ-बाप के सामने उनके बच्चों की हत्या हुई, हिंदुओं का मकान चुनकर निशाना बनाया जाता था। इन सब से परेशान होकर उस समय लगभग 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 तक घाटी में केवल 728 गैर-प्रवासी पंडित ही बचे हैं, जबकि 2021 में 808 परिवारों की थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ भी कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन को दर्शाने वाली फिल्म थी, जिसमें घाटी की असलियत दिखाई गई थी।

The Kashmir Files : इस्लामी आतंकियों के बचाव में उतरी कांग्रेस ;‘399 कश्मीरी पंडित मरे, मुस्लिम तो 15000 मारे गए’

देर आए दुरुस्त आए कहावत The Kashmir Files के निर्माता ने साबित करता है कि गोधरा दंगों पर सियापा करने कांग्रेस और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स मुज़फरनगर दंगों, दिल्ली में दंगे और कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर चुप्पी साधे रहते हैं। किस तरह कश्मीर द कश्मीर फाइल्स की अपार सफलता के बाद कांग्रेस पार्टी ने इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव में धड़ाधड़ ट्वीट करके ये साबित करने की कोशिश की है कि 1990 में जो कुछ भी कश्मीर में हुआ उसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथी नहीं बल्कि आरएसएस से जुड़े राज्यपाल जगमोहन और भाजपा जिम्मेदार थी। पार्टी ने ‘कश्मीर फाइल्स बनाम सच’ हैशटैग के साथ 9 ट्वीट किए और दावा किया कि जो वो बता रहे हैं वहीं कश्मीरी पंडितों के मामले के तथ्य हैं।

केरल कांग्रेस द्वारा किए गए ट्वीट में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को मुस्लिमों की हत्या से जोड़ा गया। पहले ट्वीट में कांग्रेस ने ये दिखाया है कि भले ही 1990 से 2007 के बीच आतंकियों ने 399 कश्मीरी पंडितों को मारा लेकिन इतने ही अंतराल में 15000 मुस्लिम भी आतंकियों द्वारा मारे गए।

अगले ट्वीट में कश्मीरी हिंदुओं के उस पलायन पर सफाई दी गई जिसमें लाखों कश्मीरी इसलिए घाटी से निकले थे क्योंकि रातोंरात मस्जिद से ऐलान हुए थे कि सभी कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर निकल जाएँ, वरना मारे जाएँगे। ऐसे दर्दनाक पलायन पर कांग्रेस ने सफाई दी कि वो सब तो आरएसएस से जुड़े तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन की वजह से हुआ था जबकि सच ये है कि जगमोहन को राज्यपाल की कुर्सी 19 जनवरी 1990 को मिली और वे 21 जनवरी 1990 को श्रीनगर पहुँचे थे। इस बीच घाटी में कट्टरपंथियों का आतंक शुरू हो गया था।

तीसरे ट्वीट में कांग्रेस ने बताया कि आतंकी हमलों के बाद भाजपा ने पंडितों को सुरक्षा नहीं दी बल्कि भाजपा के जगमोहन ने उन्हें कहा कि वे लोग जम्मू में आकर रहें। ऐसे में जो पंडित परिवार वहाँ सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे थे उन्होंने घाटी को छोड़ दिया।

कांग्रेस पार्टी ने इस ट्वीट के जरिए ये सुनिश्चित किया कि वो अपने समर्थकों को ये बताएँ कि कश्मीर में जो हिंदुओं के साथ हुआ वो आतंकियों ने किया। इस थ्रेड में कांग्रेस द्वारा बार-बार मुस्लिमों की हत्या का आँकड़ा देकर ये दिखाते रहने का प्रयास हुआ कि जो कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुआ वही सब कश्मीरी मुस्लिमों ने भी सहा।

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की तस्वीर के साथ कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी अयोध्या के राम मंदिर मामले पर देश के हिंदू-मुस्लिमों को बाँट रही थी और पंडितों वाला मामला बीजेपी प्रोपेगेंडे को चुनावों में फायदा देने वाला था।

कश्मीरी पंडितों के मुताबिक, उन्हें घाटी से निकालने के लिए कट्टरपंथियों की ट्रेनिंग बहुत पहले से शुरू हो गई थी। 1989 से भी बहुत पहले। लेकिन कॉन्ग्रेस के अगले ट्वीट में सारा ठीकरा भाजपा सरकार पर फोड़ते हुए ये बताया गया कि कैसे दिसंबर 1989 में वीपी सिंह सरकार आई और पंडितों के पलायन पर उन्होंने कुछ नहीं किया, सिर्फ 1990 के नवंबर तक वीपी सिंह को समर्थन देते रहे। 

ट्वीट में भाजपा के लिए कहा गया, “भाजपा जो पंडितों के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाती है। उसने दो बार केंद्र में और एक बार जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आने के बाद भी उनकी वापसी के लिए कछ नहीं किया।” कांग्रेस की शिकायत ये भी है कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए जो जो किया उसका सारा क्रेडिट भाजपा ने ले लिया जबकि यूपीए सरकार ने 15 हजार कश्मीरों को जॉब दी और 6000 पंडितों को जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल किया।

अपनी वाहवाही के लिए कांग्रेस ने बताया कि यूपीए सरकार ने पंडितों को 5,242 आवास दिए और उन्हें 5-5 लाख रुपए की मदद की, साथ ही 1, 168 करोड़ रुपए की छात्रों को स्कॉलरशिप, किसानों को सहायता और कल्याणकारी योजनाएँ दी।

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The Kashmir Files : ‘कहाँ गए वे करोड़ों लोग (हिंदू)… टुकड़े गैंग का कैंसर निकाल फेंकिए’: कंगना रनौत
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The Kashmir Files : ‘कहाँ गए वे करोड़ों लोग (हिंदू)… टुकड़े गैंग का कैंसर निकाल फेंकिए’: कंगना रनौत
कंगना रनौत ने द कश्मीर फाइल्स को बताया बॉलीवुड का पापनाशक (साभार: इंडियन एक्सप्रेस/इंस्टाग्राम) विवेक अग्निहोत्र.....

केरल कांग्रेस डिजिटल मीडिया सेल के अध्यक्ष पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर हैं। इस हैंडल से किए गए लगातार 9 ट्वीट का सारांश यही है कि कश्मीर में 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के साथ जो हुआ वैसा कश्मीरी मुस्लिमों के साथ भी हुआ था। इसके अलावा पंडितों के पलायन के लिए भाजपा जिम्मेदार है इस्लामी कट्टरपंथी नहीं। भाजपा ने अपने प्रोपेगेंडे के लिए इस मामले को भुनाया जबकि कांग्रेस पार्टी जी जान लगाकर उनकी मदद में जुटी थी।

The Kashmir Files : ‘कहाँ गए वे करोड़ों लोग (हिंदू)… टुकड़े गैंग का कैंसर निकाल फेंकिए’: कंगना रनौत

          कंगना रनौत ने द कश्मीर फाइल्स को बताया बॉलीवुड का पापनाशक (साभार: इंडियन एक्सप्रेस/इंस्टाग्राम)
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ ने नब्बे के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को चर्चा में ला दिया है। इस पर लगातार तमाम तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (kangana ranaut)ने भी इस फिल्म को देखने के बाद एक वीडियो के जरिए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि विवेक अग्निहोत्री ने इस फिल्म के जरिए बॉलीवुड के सारे पाप धो दिए हैं। साथ ही उन करोड़ों हिंदुओं के बारे में भी पूछा है जो कभी पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहते थे।

लोगों से यह फिल्म देखने की अपील करते हुए कंगना ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए कहा है, “मैंने अपने के साथ द कश्मीर फाइल्स देखी। विवेक अग्निहोत्री जी आप और आपकी टीम धन्य है। आपने इस फिल्म के जरिए पूरे देश और फिल्म इंडस्ट्री को गौरवान्वित किया है। ये फिल्म इंडस्ट्री सदैव आपकी आभारी रहेगी। आपने दशकों से किए गए हमारे पापों को भी धो दिया है। मैं सबकी ओर से आपको मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूँ।”

एक्ट्रेस ने कहा है, “ये सरकार की नहीं, बल्कि सभ्यता की लड़ाई और ये हर हिंदुस्तानी की लड़ाई है। जिन चीजों को आपको आपके टीचर्स ने नहीं बताया, आपको किताबें नहीं बताएँगी, मीडिया नहीं बताएगा। आपको आपकी इंसानियत को झकझोरना है। आप अपनी मानवता को खुद को गाइड करने दीजिए आपको सबकुछ पता चलेगा। काय़रता के पर्दे के पीछे मत छुपो। सभ्यता की इस लड़ाई में ये जो टुकड़े गैंग का कैंसर आपको आपके आसपास दिखे उसे इस देश से निकालकर फेंकिए। ‘द कश्मीर फाइल्स’ जरूर देखें। एक नए भारत की नींव रखें।”

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रवीश का ‘सर’ और कश्मीरी पंडितों का हत्यारा! : वो ‘यासीन मलिक’ जिसे UPA सरकार से मिला भरपूर ‘प्यार’
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रवीश का ‘सर’ और कश्मीरी पंडितों का हत्यारा! : वो ‘यासीन मलिक’ जिसे UPA सरकार से मिला भरपूर ‘प्यार’

इससे पहले भी कंगना ने कश्मीर फाइल्स को लेकर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “बुल्लीदाऊद और उनके चमचे सदमे में चले गए हैं। कोई कुछ कह नहीं रहा है, सारी दुनिया देख रही है इनको लेकिन फिर भी कुछ नहीं कह रहे हैं। उनका समय खत्म हो गया है।” 

रवीश का ‘सर’ और कश्मीरी पंडितों का हत्यारा! : वो ‘यासीन मलिक’ जिसे UPA सरकार से मिला भरपूर ‘प्यार’

                                      यासीन मलिक को भारतीय मीडिया और कॉन्ग्रेस से मिला प्यार
द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद पाकिस्तान के हितैषी और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में भागीदार यासीन मलिक की चर्चा सोशल मीडिया पर जोरों-शोरों से हो रही है। लेकिन यासीन से जुड़ी ये हालिया चर्चा उन मीडिया संस्थानों जैसी नहीं है जहाँ पर यासीन जैसे अलगाववादी को ‘सर-सर’ कहकर उसकी बातें सुनीं जाएँ। उसके विचारों के लिए उसे पूरा मंच सौंप दिया जाए या कॉन्ग्रेस की मनमोहन सरकार की तरह उसकी पीएम आवास में आवभगत की जाए।

यासीन मलिक को मनमोहन सरकार में मिला प्यार

इनके अलावा यासीन मलिक को यूपीए सरकार में पार्टी से भी खूब प्यार मिला था। साल 2006 में मनमोहन सिंह ने जेके एलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक को नई दिल्ली में पीएम आवास पर बुलाया और कई मुद्दों पर उससे चर्चा की। आज भी यासीन मलिक के साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की मुस्कुराती फोटो, वीडियो आपको वायरल होती मिल जाएगी।

इंडिया टुडे का यूथ आइकन

सोशल मीडिया यूजर्स खुलकर इस अलगाववादी यासीन के कृत्यों को साझा कर रहे हैं और उन लोगों को भी लताड़ रहे हैं जिन्होंने इसके कुकर्मों को न केवल छिपाने का प्रयास किया बल्कि इसे मसीहा की तरह दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 2008 में इंडिया टुडे के कॉन्क्लेव में यासीन मलिक को यूथ आइकन बनाकर उतारा गया और उसके अलगाववादी संगठन को सेकुलर कहा गया। इस मंच का इस्तेमाल करके मलिक ने पूरे 12 मिनट ऑन टीवी अपने अलगाववादी विचारों का प्रचार प्रसार बुद्धिजीवी बनकर किया था।      

बीबीसी पर स्वीकारी थी मलिक ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात

इससे पहले बीबीसी जैसा विदेशी मीडिया भी यासीन को अपने चैनल के माध्यम से हीरो दिखाने का प्रयास कर चुका था और इसी शो में उसने स्वीकार किया था कि उसने कश्मीरी हिंदू रिटायर्ड जज नीलकंठ गंजू को मारा। उसका तर्क था कि आखिर गंजू ने जिसे फाँसी की सजा सुनाई उस मकबूल भट की गलती ही क्या थी। उसके मुताबिक आतंकी मकबूल को जो गंजू ने सजा दी वो राजनीति से प्रेरित फैसला था। हैरानी की बात ये है कि इसी इंटरव्यू में यासीन मलिक ने हँस-हँस कर चार निहत्थे इंडियन एयर फोर्स सैनिकों को कश्मीर में मारने की बात स्वीकारी थी। उसके हाथ अन्य कश्मीरी हिंदुओं के खून से भी रंगे कहे जाते हैं।

जब रवीश के मुँह से यासीन मलिक के लिए निकला ‘सर’

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पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद का कांग्रेस पर तंज - जब लगता है कि कांग्रेस इससे ज्यादा नी

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पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद का कांग्रेस पर तंज - जब लगता है कि कांग्रेस इससे ज्यादा नी

इंडिया टुडे और बीबीसी की इस रेस में ध्यान रहे एनडीटीवी भी पीछे नहीं था। एनडीटीवी चैनल के प्राइम टाइम एंकर रवीश कुमार ने साल 2013 में यासीन मलिक को तब बोलने का मंच दिया था जब वह भूख हड़ताल के नाम पर हाफिज सईद के साथ बैठा दिखा था। आपको जानकर शायद हैरानी न हो कि रवीश कुमार इस शो में कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूल चुके यासीन को यासीन साहब और सर-सर कहकर बुला रहे थे।

‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है’ – The Kashmir Files यही पूछता है – सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की राजनीति?

                        सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की राजनीति - पूछता है The Kashmir Files
कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्म बनाना एक जिगरे का काम है। पुष्करनाथ पंडित और उनके जैसे लाखों कश्मीरी पंडितों की जीवंत गाथा है ये फिल्म, जिन्हें एक रात में अपना सब कुछ छोड़ कर घाटी से भागना पडा, क्योंकि इस्लामिक जिहादियों ने उन्हें केवल तीन ही विकल्प दिए थे – रालिव, त्सालिव या गालिव अर्थात, धर्मपरिवर्तन करो, भाग जाओ, या मर जाओ | राजनीतिक समझौतों से भावशून्य हो चुके बाकी भारतीय समाज की पाषाण हो गई संवेदना पर भी एक तीखी टिप्पणी है कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)।

यह एक ज़बरदस्त फिल्म है जो स्वतंत्र भारत की सबसे गहरी मानवीय त्रासदी के घावों को कुरेदती ही नहीं बल्कि उन्हें उघाड़ कर हमारे सामने रख कर हमसे पूछती है – ‘क्या अब भी तुम कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार को भुलाने की राजनीति करोगे या सच को स्वीकार करोगे?’

फिल्म में एक डायलॉग है। ‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है।’ धर्मांध जिहादी आतंक के शिकार कश्मीरी हिन्दुओं के सीनों में दशकों से जमे उस अवसाद को बाहर लाने के लिए साधुवाद विवेक रंजन अग्निहोत्री!

जम्मू-कश्मीर के घाटी (Kashmir Valley) में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को हर तरह से नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। इस्लामवादी से लेकर बॉलीवुड के एजेंडा सेटर तक नहीं चाहते है कि 90 के दशक के इस इस्लामिक नरसंहार की सच्चाई को जनता की सामने लाया जाए। फिल्म के प्रोड्यूसर और निर्देशक के मनोबल तोड़ने के लिए आर्थिक बहिष्कार कर रहे हैं। इसके बावजूद दर्शकों की भारी भीड़ इस फिल्म को देखने पहुँच रही है और फिल्म जबरदस्त कमाई भी कर रही है।

अपनी रिलीज के पहले दिन यानी 11 मार्च को ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने जबरदस्त कमाई है, वो भी तब जबकि बॉलीवुड गैंग के दबाव में यह सिर्फ 550 स्क्रीन पर रिलीज हो पाई। बताया जा रहा है कि पहले दिन इस फिल्म 2.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपए की बीच कमाई की है। यह हाल में रिलीज हुई बॉलीवुड की कई फिल्मों की पहले दिन की कमाई से बेहतर है। इस फिल्म ने निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की पिछली फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ की पहले दिन की कमाई से 6-7 गुना अधिक कमाई की है। बता दें कि ‘द ताशकंद फाइल्स’ ने पहले दिन सिर्फ 40 लाख रुपए की कमाई की थी।

बीतने वाले हर एक दिन के साथ फिल्म की कमाई बढ़ने की उम्मीद है। जिस तरह से यह लोगों के दिल और दिमाग को झकझोर रही है, लोग इसे लंबे समय तक भूल नहीं पाएँगे। फिल्म देखकर निकले एक दर्शक ने कहा कि यह फिल्म हर भारतीय और हिंदुओं को देखना चाहिए। एक अन्य दर्शक ने कहा कि यह फिल्म दिखाती है कि आज से 30 साल पहले कश्मीर में वास्तव में क्या हुआ था, इस फिल्म के जरिए समझा जा सकता है।

वहीं, कुछ सिनेमाघरों में फिल्म के कुछ हिस्सों को म्यूट (आवाज बंद करना) करने की भी कोशिश गई। महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित PVR सिनेमा में फिल्म के एक हिस्से में आवाज को बंद कर दिया गया। दर्शकों का आरोप है कि चिन्मय मंडेलकर के हिस्से वाले के संवाद को जानबूझकर बंद कर दिया गया। इसके बाद दर्शक भड़क उठे।

वहीं, मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के एक सिनेमाघर में दर्शक फिल्म का इंतजार करते रहे, लेकिन इसे विवादास्पद बताकर प्रदर्शित नहीं किया गया। सनबीर सिंह रनहोत्रा ने इसको लेकर ट्वीट किया, “@vivekagnihotri जी, आज शिलॉन्ग के गैलेरिया सिनेमा में द कश्मीर फाइल्स के शो के लिए गए थे। हाउसफुल सिनेमा हॉल के दर्शकों को बताया गया कि उन्हें ‘फाइल नहीं मिली’ और शो रद्द कर दिया गया। सिनेमा हॉल के मैनेजर को को यह कहते हुए सुना गया कि फिल्म ‘विवादास्पद’ है।”

अग्निहोत्री ने बताया कि एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने द कश्मीर फाइल्स को रिलीज करने के लिए साल 2020 में उनसे संपर्क किया था। विवेक के अनुसार, प्लेटफॉर्म के मुखिया का कहना था कि वे फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “हमारी एक वैश्विक नीति है कि हम अपनी किसी भी फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं। मुझे आशा है कि आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।”

इतना ही नहीं, कपिल शर्मा ने अपने शो के माध्यम से ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रमोशन करने से इनकार कर दिया था। कपिल शर्मा ने तर्क दिया था कि इस फिल्म में कोई बड़ा हीरो नहीं है। पिछले दिनों निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा को ‘शूर्पणखा’ बताते हुए फिल्म को नुकसान पहुँचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने वीडियो जारी कर चोपड़ा की कारस्तानी के बारे में विस्तार से बताया था। साथ ही उनलोगों के नाम भी बताए थे जो कथित तौर पर बॉलीवुड को चलाते हैं। उसके नियम-कायदे सेट करते हैं। यह फिल्म लगातार कट्टरपंथियों के भी निशाने पर है।

दूसरी तरफ, हरियाणा में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है। एक्ससाइज एंड टैक्सेशन विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है।

नरसंहार की इस दिल दहलाने वाली सत्य घटना में असल में 23 मार्च 2003 को लश्करे तैयबा के आतंकियों ने 11 महिलाओं और दो बच्चों समेत 24 पंडितों को मार डाला था। फिल्म के हीरो कृष्णा पंडित (दर्शन कुमार) का भाई शिवा उनमें से ही एक बच्चा है। फिल्म के अंतिम दृश्य में जैसे ही ये बच्चा गोली खाकर खाई में पड़ी अन्य लाशों के ढेर पर गिरता है तो पहले तो एक गहरी खामोशी हॉल में छा जाती है। उसके बाद ज्यों ही टाइटल की पहली प्लेट आती है तो अनायास ही हमारे पीछे वाली दर्शक दीर्घा से एक लड़का उस गंभीर ख़ामोशी को तोड़ पहली ताली बजाता है। फिर तो पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँजने लगती है।

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जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमे सुनने से भी मना कर दिया : अनुपम खेर

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जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमे सुनने से भी मना कर दिया : अनुपम खेर

इस फिल्म को रिलीज से रोकने के लिए निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को हर तरह से घेरने की कोशिश की गई थी। अग्निहोत्री को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जब वो नहीं माने तो इस फिल्म को रोकने के लिए कोर्ट में याचिका दी गई कि इससे मुस्लिमों की भावनाएँ आहत होती हैं। हालाँकि, फिल्म पर रोक नहीं लगी, लेकिन जम्मू की अदालत ने सैन्य अधिकारी रवि खन्ना से जुड़ा सीन हटाने को कहा। सेंसर बोर्ड ने कुछ सीन को कट करने और नाम बदलने के लिए कहा। उसके बाद फिल्म में JNU का नाम बदलकर ANU कर दिया गया।

जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमे सुनने से भी मना कर दिया : अनुपम खेर

                                                         साभार: Anupam kher twitter & HT
फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों चर्चा में है। यह फिल्म नब्बे के दशक में कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर केंद्रित है। इस​ फिल्म में अनुपम खेर की भी भूमिका है। खेर ने सोशल मीडिया के जरिए कश्मीरी हिंदुओं का आवाज और चेहरा बनने की बात कही है। साथ ही बताया है कि कैसे देश की व्यवस्था ने कश्मीर के हिंदुओं की उपेक्षा की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘कू’ और ट्विटर पर उन्होंने एक वीडियो साझा किया है। वीडियो शेयर करते हुए अनुपम खेर ने लिखा है, “आज मैं सिर्फ अभिनेता नहीं रहा। मैं गवाह हूँ और द कश्मीर फाइल्स मेरी गवाही है। वो सब कश्मीरी हिंदू, जो या तो मार डाले गए या जीते जी एक शव की तरह जीने लगे। अपने पुरखों की जमीन से उखाड़ कर फेंक दिए गए। आज भी न्याय को तरस रहे हैं। अब मैं उन सब कश्मीरी हिंदुओं की जुबान और चेहरा हूँ।”

वीडियो की शुरुआत में अनुपम कहते हैं, “ईश्वर की कृपा और आप सबके प्यार व आर्शीवाद से, मैं 522 फिल्में कर चुका हूँ। अनुपम खेर हूँ। पात्र बनता हूँ। अभिनय करता हूँ। हँसाता हूँ। रुलाता हूँ। यही मेरा सारांश है। लेकिन इस बार मैं कोई पात्र नहीं बना। मैंने अभिनय नहीं किया और द कश्मीर फाइल्स कोई डायलॉग भरी कहानी भी नहीं है।”

कश्मीरी पंडितों की बात करते हुए कहा है, “32 साल पहले लाखों कश्मीरी हिंदू तहस-नहस कर दिए गए थे। मेरे हाथ, पाँव, बाजू, ये शरीर जैसे रातों-रात जिहाद ने रौंद डाला। 90 करोड़ का यह भरा-पूरा देश बेखबर रहा। पुलिस मानों गायब हो गई। मीडिया गूँगी-बहरी हो गई। सेना छावनियों में पड़ी रही और कश्मीर हम हिंदुओं से खाली करा लिया गया।”

वे आगे कहते हैं, “कश्मीरी पंडितों के पलायन पर कोई जाँच नहीं हुई। आज तक कोई आयोग नहीं बैठा। कोई मुकदमा नहीं चला। कोई दोषी नहीं पाया गया। किसी को सजा नहीं हुई। हाँ मुद्दा जरूर उछाला गया। लेकिन जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमें सुनने से भी मना कर दिया।” 

अनुपम खेर ने अपने लिए इस फिल्म का महत्व बताते हुए कहा है, “द कश्मीर फाइल्स फिल्म से कहीं बढ़कर, आप सबकी की अंतरात्मा की अदालत में हम कश्मीरी हिंदुओं की एक दस्तक है। मैं अनुपम खेर नहीं हूँ। मैं अब पुष्कर नाथ हूँ। आप सब तक पहुँचने के लिए छटपटा रहा हूँ। मुझसे मिलिए… द कश्मीर फाइल्स में।”

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The Kashmir Files का असर ऐसा भी : शारदा की चीखों ने एक कश्मीरी पंडित को रात भर सोने नहीं दिया…

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कुछ समय पहले अनुपम खेर ने इस फिल्म को लेकर अपनी माँ की भावनाओं को भी लोगों के साथ साझा किया था। उस वीडियो में उनकी माँ दुलारी कहती हुई नजर आईं थी, “मुझे सब कुछ पता है क्या किया उन्होंने। जिसने भी ये फिल्म बनाई उसने बहुत अच्छा किया। हम हिंदुओं के लिए बहुत अच्छा किया। मोदी तो बेचारा कर ही रहा है। लेकिन इस फिल्म से पता चलेगा कश्मीरियों के साथ क्या हुआ। अब तक बाहर वालों को क्या पता कि हमारे साथ क्या हुआ था। वो लोग तो हमारी दौलत, हमारा सामान सब कुछ ले गए। सबको ऐसे निकाला जैसे फकीर हों।”