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सूर्या को चाकू घोंपने वाला असद एनकाउंटर में ढेर, बकरीद के दिन किया था हिंदू युवक का मर्डर: UP पुलिस ने बताई मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी

            सूर्या (सबसे दाएँ) को असद (सबसे बाएँ) ने घोंपा था चाकू (फोटो साभार: आज तक/UP Police)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपित असद को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। दरअसल, बकरीद के दिन 17 साल के सूर्या चौहान पर असद और उसके साथियों ने चाकू से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

DCP धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि असद अपने कुछ साथियों से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। इसी दौरान असद और उसका एक साथी बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिस ने बताई एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

पुलिस को सूचना मिली कि असद अपने एक साथी से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। बताया गया कि वह कुछ पैसे लेकर इलाके से बाहर भागने की फिराक में था। सूचना मिलते ही पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कॉम्बिंग अभियान शुरू किया और कई जगह बैरियर लगाकर सघन चेकिंग शुरू कर दी।

इसी दौरान वसुंधरा क्षेत्र में पुलिस टीम को एक बाइक पर दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया लेकिन आरोप है कि मुख्य आरोपित असद ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में असद गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने घायल असद को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस गोलीबारी में खोड़ा थाना क्षेत्र में तैनात एक कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ है जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, असद का एक साथी मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मौके से पुलिस ने एक पिस्तौल और बाइक बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि असद के आपराधिक इतिहास की भी जाँच की जा रही है। साथ ही, बरामद हथियार की फोरेंसिक जाँच कराई जाएगी और पूरे मुठभेड़ मामले की नियमानुसार जाँच भी की जा रही है। सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपित के मारे जाने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और पुलिस अब फरार साथी की गिरफ्तारी में जुटी है।

‘मौत पर राजनीति मत करो राहुल गाँधी’: हरिओम वाल्मीकि के भाई ने राहुल से मिलने से किया इंकार, बताया- योगी सरकार की कार्रवाई से खुश

   हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मिलने पहुँचे राहुल गाँधी, मृतक के परिवार ने बताया योगी कार्रवाई से संतुष्ट (साभार : Amarujala & Jagran)
किसी भी बीजेपी शासित राज्य जरा भी कुछ होने पर बेशर्म राहुल गाँधी पिकनिक मनाने का कोई मौका नहीं चूकते, लेकिन गैर-बीजेपी शासित राज्यों में चाहे कुछ भी हो जाए पैरों में मेहंदी लग जाती है, आँखों में रतोंदा, कानों में सीसा और मुंह में दही जम जाता है। राहुल की ऐसी दोगली गन्दी सियासत को अब जनता ने समझना शुरू कर दिया है।   

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में हरिओम वाल्मीकि की हत्या के बाद अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी शुक्रवार (17 अक्टूबर 2025) को मृतक के परिवार से मिलने के लिए फतेहपुर पहुँचे। हालाँकि, मृतक के भाई शिवम ने एक वीडियो जारी कर राहुल गाँधी पर सियारत करने का आरोप लगाया और मिलने से इंकार कर दिया। शिवम ने ये भी कहा कि हम योगी सरकार से संतुष्ट है।

राहुल गाँधी को राजनीति नहीं करनी चाहिए- शिवम

शिवम ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर यह संदेश दिया है। उनका कहना है कि राहुल गाँधी को इस दुखद घटना पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। परिजनों ने बताया कि वे सरकार की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

दरअसल, फतेहपुर प्रशासन ने मृतक के परिवार को सरकारी नौकरी दी है। हरिओम की बहन कुसुम को स्टाफ नर्स की नौकरी मिली है, जबकि उनके भाई शिवम को समाज कल्याण विभाग के स्कूल में नौकरी मिली है। एडीएम एफआर अविनाश त्रिपाठी ने इस बात की जानकारी दी है।

राहुल गाँधी के खिलाफ पोस्टर जारी

राहुल गाँधी के फतेहपुर दौरे से पहले पोस्टर वार भी शुरू हो गया है। शहर में उनके विरोध में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में लिखा, “जाति के नाम पर बाँटने की तुम्हारी ये कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी।” अन्य पोस्टरों में यह भी कहा गया, “दर्द को मत भुनाओ, वापस जाओ।” हालाँकि, पोस्टर किसने लगवाए हैं, इसकी जानकारी नहीं मिली है।

‘बह@$द, तुम आओ सा$, लतखोरी ठीक कर दूँगा’: बिहार के जिस जंगलराज ने सत्येंद्र दुबे को मार डाला, अब उसी जंगलराज की ‘पैदाइश’ पप्पू यादव का NHAI अधिकारी को धमकाने का ऑडियो वायरल

        पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव (बाएँ), मृतक सत्येंद्र दुबे की प्रोफाइल (फोटो साभार : Aajtak & indiatimes)
क्या आपको राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इंजीनियर सत्येंद्र दुबे याद हैं। दुबे की हत्या इसलिए कर दी गई थी, क्योंकि वो बिहार में सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर काफी सख्त थे। अब एक ऑडियो सामने आया है जिसमें में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव NHAI के ही एक अधिकारी को धमकाते हुए सुनाई दे रहे हैं।

इस वीडियो में पप्पू यादव NHAI अधिकारी पर एक एंबुलेंस ड्राइवर को नौकरी पर रखने का दवाब डाल रहे हैं। पप्पू यादव अधिकारी को धमकती देते हुए कहते की 2 मिनट में ‘लतखोरी’ खत्म कर दूँगा। जब अधिकारी उनके सासंद होने का हवाला देते हुए मर्यादित तरीके से बात करने की गुजारिश करते हैं, तब भी सासंद का लहजा नहीं बदलता है। वे अपने लोगों से इस अधिकारी के घर के बारे में पूछते हुए सुनाई देते है।

पप्पू यादव के वायरल ऑडियो में क्या हैं।

इस वायरल ऑडियों की पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह ऑडियों कब का है। इसमें पप्पू यादव NHAI अधिकारी को धमकाते हुए सुनाई देते हैं। फोन पर आते ही पप्पू यादव कहते है शेखर जी पप्पू यादव… NHAI अधिकारी जब कहते हैं, ‘हाँ’, तब पप्पू यादव कहते हैं कि इतना लूज मत होईये, हाँ… टाइट रहिए। फिर पप्पू यादव NHAI अधिकारी को कहते हैं एंबुलेंस में ड्राइवर थे मनीष को रख लो यार। जब अधिकारी कहते हैं कि हमारे अंदर का चीज नहीं है, तब पप्पू यादव भड़क जाते हैं और गुस्सा करते हुए कहते ‘जो है उसको रखो’।

इसके बाद अधिकारी सासंद से कहते हैं कि ‘हम कहाँ से रखें’। आग बबूला हुए पप्पू यादव अधिकारी से पूछते हैं कि ‘अभी कहाँ हो’। अधिकारी जवाब देते हैं कि ‘दिल्ली में हैं’। पप्पू यादव अधिकारी से कहते हैं कि ‘लतखोरी’ और जो ‘पैसा इधर-उधर करते हो’ 2 मिनट में खत्म हो जाएगी। इसके बाद पप्पू यादव अपने आसपास खड़े लोगों से पूछते हैं ‘घर कहाँ है इस साले का’। पीछे खड़े लोग बताते हैं कि पूर्णिया में है हॉस्पिटल में हैं। पप्पू यादव पूछते हैं ‘हॉस्पिटल में क्या काम करता है’।

पप्पू यादव इसके बाद अधिकारी से पूछते है ‘कब आ रहे हैं इधर’। अधिकारी जवाब देते हुए कहते हैं ‘हम काहें आप को बोले’। पप्पू यादव 2 से 3 बार कहते हैं कि ‘तुम्हारा दिमाग खराब है क्या’। और अधिकारी उन्हें याद दिलाते हैं कि ‘आप सांसद है, तहजीब से बात कीजिए’। फिर पप्पू यादव गाली देते हुए बोलते है ‘बह@$द तुम्हारा दिमाग खराब है क्या’, तुम आओ सा$, तुम्हारा इलाज करवाकर सही करते हैं। लेकिन फिर भी अधिकारी कहते रहते हैं कि ‘आप सांसद है तमीज में बात कीजिए।’ इतने में पीछे से आवाज आती है कि ‘आने दो इसको’। पप्पू यादव और NHAI अधिकारी का ऑडियो क्लिप भी आप सुन सकते हैं।

क्या था सतेंद्र दुबे मामला?

इस ऑडियो के वायरल होने के बाद, कई लोगों को सत्येंद्र दुबे की याद आई। सत्येंद्र दुबे एक ईमानदार इंजीनियर थे जो NHAI के तहत काम कर रहे थे। सत्येंद्र दुबे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ PMO को पत्र लिखा था। पर वो गलती कर बैठे, पत्र में अपना नाम लिख दिया। सरकार की तरफ से उनकी पहचान उजागर कर दी। और फिर हुआ वही, जो बिहार के ‘जंगलराज’ में अक्सर होता था। बिहार के गया में सर्किट हाउस में 27 नवंबर 2003 को सत्येंद्र दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इस घटना ने देश भर में इंजीनियरों के बीच डर पैदा कर दिया था कि ईमानदारी से काम करने पर उन्हें भी इसी तरह का अंजाम भुगतना पड़ सकता है। हालाँकि, इस मामले में मुख्य आरोपित उदय मल्लाह को पकड़ा गया, लेकिन सत्येंद्र दुबे के भाई का मानना है कि असली अपराधी अभी भी बाहर हैं और सीबीआई ने इस मामले को ठीक से नहीं सुलझाया।

पप्पू यादव खुद को कांग्रेस का बताते हैं और हाल ही में उन्होंने तेजस्वी यादव को जननायक बताया है। बिहार में जंगलराज अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। इनकी सरकार बनने के बाद क्या ही होगा। 90 से 2015 का दौर देखकर समझ सकते हैं। खुद को ‘गरीबों का मसीहा’ के तौर पर प्रचार करते हुए पप्पू यादव जी, लालू यादव के उसी जंगलराज की उपज है।

यमन : जमीन पर लिटा कम्बल ओढ़ा कर गोली मार दिल के उड़ा देते हैं चिथड़े… क्या ऐसे ही मिलेगी निमिषा प्रिया को ‘मौत की सजा’? : क्या है केरल की नर्स का मामला, क्या होता है ‘ब्लड मनी’

                               केरल की नर्स निमिषा प्रिया तस्वीर (फोटो साभार : NDTV)
केरल की नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई 2025 को यमन में मौत की सजा दी जाएगी। उन पर यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है।

केरल की नर्स निमिषा प्रिया की जान अब खतरे में है। उन्हें अब सात समंदर पार फांसी देने की तैयारी है। यमन में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया 2017 से यमन की जेल में बंद हैं। उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया है। मर्डर मामले में ही यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। 16 जुलाई 2025 को उनकी फांसी की तारीख तय की गई है। निमिषा प्रिया की फांसी पर अब भारत की नजर है। भारतीय विदेश मंत्रालय निमिषा की सजा को रोकने या कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

इस मामले में केंद्र सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 14 जुलाई 2025 की तारीख तय की है। निमिषा प्रिया इस समय यमन की राजधानी सना की सेंट्रल जेल में बंद हैं।

अब सवाल है कि आखिर केरल की नर्स निमिषा प्रिया कौन हैं? आखिर वह यमन क्यों गईं, उन्हें यमन में फांसी क्यों दी जा रही है, आखिर उनका जुर्म क्या है? आखिर निमिषा प्रिया कौन हैं? निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली है। अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 2011 में यमन गई थीं। उनके माता-पिता ने मजदूरी करके अपनी बेटी को यमन भेजने लायक बनाया। यहां उन्होंने नर्स का काम करना शुरू किया।

कौन हैं निमिषा प्रिया?

निमिषा प्रिया ने साल 2015 में यमन की राजधानी सना’आ में एक मेडिकल क्लिनिक खोला। इसमें एक स्थानीय स्पॉन्सर तालाल अब्दो महदी ने उनकी मदद की। इससे एक साल पहले उनके पति और छोटी बेटी 2014 में आर्थिक तंगी के कारण भारत लौट आए थे। यमन में निमिषा की जिंदगी धीरे-धीरे मुश्किलों से घिरने लगी। यमन में उनकी जिंदगी भयावह हो गई। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को अंधेरे से बचाने के लिए जो किया, उसकी की सजा वह अब भुगत रही हैं।

निमिषा पर खूब हुए सितम

सैमुअल जेरोम और अदालती गवाहियों के अनुसार, तालाल ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए खुद को निमिषा का पति बताकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर लिया, पैसे की उगाही की, और बार-बार धमकियां दीं।

क्यों फांसी के फंदे तक पहुंची?

इन परिस्थितियों से तंग आकर साल 2017 में निमिषा ने यमन से भागने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने तालाल को बेहोश करने की योजना बनाई ताकि अपना पासपोर्ट वापस ले सकें। लेकिन कथित तौर पर दवा की अधिक मात्रा देने के कारण तालाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद निमिषा को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर हत्या का आरोप लगाया गया। साल 2018 में यमन की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

यमन में ‘मौत की सजा’ कैसे दी जाती है?

यमन में मौत की सजा गोली मारकर दी जाती है। यह तरीका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसमें जिस व्यक्ति को सजा दी जानी होती है, उसे जमीन पर पेट के बल लेटाया जाता है और फिर कंबल से ढक दिया जाता है।

एक डॉक्टर पीछे से दिल के चारों ओर निशाना बनाता है, जहाँ गोली मारी जाती है। इसके बाद एक व्यक्ति ऑटोमैटिक राइफल से दिल में तीन-चार गोलियाँ मारता है।

यमन में मौत की सजा खुले में या निजी तौर पर भी दी जा सकती है। हालाँकि, पथराव या सिर कलम करने जैसे पुराने तरीके अब यमन में इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं।

‘ब्लड मनी’ क्या है?

इस्लामी कानून के मुताबिक, हत्या के मामलों में सजा के 2 विकल्प हैं- किसास और दिया। किसास का मतलब ‘जान के बदले जान’ और दिया यानी ब्लड मनी। इस्लामी कानून में ‘दिया’ यानी ब्लड मनी ऐसा प्रावधान है जो सुलह का अवसर प्रदान करता है।

शरिया कानून के अनुसार, हत्या के मामलों में पीड़ित परिवार को यह तय करने का अधिकार होता है कि वे हत्यारे को माफ करेंगे या सजा दिलाएँगे। कुरान के अनुसार, माफी और ब्लड मनी को न्याय और दया का माध्यम बताया गया है।

कुरान की सूरह अल-बकरा, आयत 178 में उल्लेख है: “मगर यदि हत्यारे को पीड़ित के संरक्षक द्वारा क्षमा कर दिया जाए, तो ब्लड मनी को न्यायपूर्वक तय किया जाए और सम्मानपूर्वक भुगतान किया जाए। यह तुम्हारे पालनहार की ओर से एक दया और सुविधा है।”

निमिषा प्रिया के मामले में ‘ब्लड मनी’ पर सहमति क्यों नहीं बनी

यमन और कई अन्य इस्लामी देशों में ब्लड मनी का भुगतान परिवारों के बीच आपसी सहमति से तय होता है। निमिषा प्रिया को बचाने के लिए उनके परिवार और कुछ संगठन ब्लड मनी इकट्ठा कर रहे हैं। वे मृतक तलाल के परिवार को पैसा देकर निमिषा को माफ करवाने की कोशिश कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ब्लड मनी कारगर नहीं हो पा रही है क्योंकि, मृतक तलाल के परिवार ने अभी तक पैसा लेने पर सहमति नहीं जताई है। बता दें, कि बल्ड मनी की रकम 8 करोड़ हैं।

रकम के साथ मृतक तलाल के परिवार को एजुकेशन, मेडिकल के साथ कई अन्य सहयोग देने का भरोसा जताया है। लेकिन पीड़ित के परिवार ने पेशकश ठुकरा दी है।

निमिषा प्रिया का मामला

निमिषा प्रिया पर आरोप है कि उन्होंने 2017 में एक यमनी नागरिक ‘तलाल अब्दो महदी’ को नशीला इंजेक्शन दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

हालाँकि, निमिषा का कहना है कि तलाल के पास उनका पासपोर्ट था, जो वापस लेना चाहती थीं और उन्होंने उसे सिर्फ बेहोश करने की कोशिश की थी, मारने की नहीं।

मृतक तलाल के शव को टुकड़े-टुकड़े करके पानी की टंकी में डालने का भी आरोप है।

यमन की कोर्ट ने निमिषा को 2020 में मौत की सजा सुनाई थी। निमिषा प्रिया की आखिरी अपील को 2023 में यमन की सबसे बड़ी अदालत ने भी खारिज कर दिया था।

इसके बाद, जनवरी 2024 में यमन के हूती विद्रोहियों की सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल ने भी उन्हें मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है।

कर्नाटक : कांग्रेस सरकार ने फाजिल के परिवार को दिए 25 लाख रूपए, इसी पैसे से हिंदुवादी सुहासी शेट्टी की हत्या के लिए अब्दुल सफवान गैंग को दी ‘सुपारी’

                 सुहास शेट्टी की हत्या के लिए सुपारी मुआवजे के पैसे से दी गई थी (फोटो साभार: theweek)
कर्नाटक के मंगलुरु में हिन्दू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या के लिए 3 लाख 
रूपए दिए गए थे। यह रकम आदिल ने अब्दुल सफवान गैंग को दी थी। फिरौती का यह पैसा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से मिले मुआवजे से दिया गया था। यह सारी बातें पुलिस की जाँच में सामने आई हैं। आदिल अपने भाई की मौत का बदला सुहास शेट्टी की हत्या से लेना चाहता था।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 2023 में मोहम्मद फाजिल नाम के एक शख्स की मौत के बाद 25 लाख रूपए का मुआवजा दिया था। उसकी हत्या का आरोप सुहास शेट्टी पर था। फाजिल का भाई आदिल इसका बदला सुहास शेट्टी की हत्या करवा के लेना चाहता था।

 रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए आदिल ने अब्दुल सफवान नाम के गुंडे से सम्पर्क किया था। अब्दुल सफवान भी किसी बात को लेकर सुहास शेट्टी से बदला लेना चाहता था। आदिल ने इसके बाद सुहास शेट्टी की हत्या के लिए 5 लाख रूपए में अब्दुल सफवान से डील की। अब्दुल सफवान को आदिल ने 3 लाख रूपए इस काम के लिए पहले ही दिए।

सुपारी का यह पैसा कांग्रेस सरकार के मुआवजे के 25 लाख रूपए में से दिया गया था। यह भी पता चला है कि इस हत्या की साजिश एक महीने पहले से रची जा रही थी। इसके लिए अब्दुल सफवान ने कई और लड़कों को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया था।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह बदला लेने के लिए किया गया मर्डर है। पुलिस कमिश्वर अनुपम अग्रवाल ने बताया है कि हत्या की साजिश को 8 लोगों के ग्रुप ने मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने इस हत्या के मामले में अब्दुल सफ़वान, मोहम्मद मुजामिल, मोहम्मद रिजवान, कलंधर शफी, आदिल महरूफ, नियाज, रंजीत और नागराज को गिरफ्तार किया है।

पुलिस कमिश्नर ने यह भी बताया है कि अब्दुल पर साल 2023 में हमला किया गया था। इसी के बाद से उसने बदला लेने की ठान ली थी। गौरतलब है कि 1 मई 2025 को हिंदू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या कर दी गई थी। सुहास शेट्टी की हत्या 1 मई, 2025 को मंगलुरु के बाजपे इलाके में कर दी गई थी।

अब्दुल सफवान के गैंग ने घेर कर तलवारों से काट कर सुहास शेट्टी की हत्या की थी। अस्पताल ले जाते वक्त सुहास शेट्टी की मौत हो गई थी। भाजपा ने 25 लाख रूपए का मुआवजा सुहास शेट्टी के परिवार को दिया था।

केजरीवाल जी अपनी नेता संतोष कोली की मौत की CBI जाँच क्यों नहीं करवाई? क्या वंदना इस मौत की राजदार है, कहाँ है?


कोरोना महामारी के समय में दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हर घर तक राशन पहुँचाने का निर्णय लिया था। अपनी मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने घर-घर राशन योजना शुरू करने का ऐलान किया।

इस घोषणा के साथ ही उन्होंने एक आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि दी। कार्यकर्ता वो, जिनका निधन साल 2013 में एक सड़क दुर्घटना के बाद हो गया था। नाम है- संतोष कोली।

आम आदमी पार्टी की उम्‍मीदवार संतोष कोली 30 जून की शाम एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं थी। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि उनकी कोर कमेटी की एक नेता संतोष कोली पर जानलेवा हमला किया गया। 30 जून को कोली एक कार्यकर्ता के साथ बाइक से दिल्ली जा रही थीं। तभी गाजियाबाद के कौशांबी मेट्रो स्टेशन के पास उनकी बाइक को एक कार ने टक्कर मार दी और फरार हो गया था।

दिल्ली मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में दावा किया कि संतोष कोली पर लगातार कुछ गुंडे हमला कर रहे थे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हालाँकि संतोष की माता इस बारे में कोई और ही कहानी बताती हैं।

संतोष कोली अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू किए गए परिवर्तन नाम के एनजीओ की पहली कर्मचारी थीं। उस समय वे सरकारी नौकरी करती थीं, लेकिन वे सामाजिक संगठनों के साथ जुड़कर काम भी करती थीं। उन्होंने मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल की एक दूसरी एनजीओ Public Cause Research Foundation में भी काम किया था।

संतोष कोली ने इसके अलावा न्यूज लॉन्ड्री के अभिनंदन शेखरी के साथ भी काम किया था। मगर, 7 अगस्त 2013 को वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। जिसके बाद उनके परिजन व कुछ AAP सदस्यों ने संदेह जताया कि हो सकता है कि संतोष की हत्या की गई हो।

हालाँकि साल 2017 में उनकी माता ने एक वीडियो रिलीज किया। जहाँ वह अपने हाथ में एक प्लाकार्ड लिए नजर आईं। इस प्लाकार्ड में उन्होंने अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं पर आरोप लगाया था कि वे कोली की हत्या को दुर्घटना बताकर लीपा-पोती कर रहे हैं।

वीडियो में संतोष की माँ कहती हैं कि संतोष को केजरीवाल के बारे में कुछ ऐसी बातें पता थीं, जिसके कारण वे उनसे ठीक से बात नहीं करते थे। वे आगे कहती हैं कि जिस दिन संतोष की मौत हुई, उस दिन वह ऑफिस नहीं जाना चाहती थी। मगर उसे जबरन ले जाया गया। वंदना और कुलदीप उसे ऑफिस ले गए। वो भी उसकी स्कूटी से नहीं। बल्कि कुलदीप की बाइक से, जो एक्सीडेंट में जल गई।

उनका कहना है कि उन्होंने कभी बाइक को ऐसे राख बनने तक जलते नहीं देखा। दुर्घटना में ड्राइवर भी बिन हताहत हुए भाग गया और कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं रहा। तब हर किसी ने कहा कि संतोष को मारा गया। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और गोपाल राय ने तब मामले की जाँच का वादा भी किया था। इसके बाद बहुत सारा पैसा संतोष के इलाज के नाम पर एकत्रित हुआ। पर, वो कहाँ है, ये किसी को नहीं मालूम।

आगे संतोष की माँ ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में FIR की जानकारियों से उन्हें दूर रखा गया, उनके बयान भी दर्ज नहीं हुए। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस वीडियो में संतोष की माँ दावा करती हैं कि अरविंद केजरीवाल ने उन्हें कहा था कि उनके सामने वे संतोष का नाम दोबारा न लें और जाँच से भी मना कर दिया था।

अवलोकन करें:-

केजरीवाल जवाब दो सुन्दर नगरी की बेटी संतोष कोली की मौत का जिम्मेदार कौन? दलाल मीडिया क्यों खामो

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वे आरोप लगाती हैं कि उनकी बेटी की मृत्यु के बाद, परिवार को उसकी स्मृति में आयोजित शोक सभा में भाग लेने से रोक दिया गया था। वे बताती हैं, “हमारे लिए सभी दरवाजे बंद थे। आज हमारे परिवार में हर कोई मानता है कि उसकी हत्या कर दी गई थी। हम जोर देकर कहते हैं कि सीबीआई से केजरीवाल की हत्या में शामिल होने की जाँच हो।”

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क : मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 साल की बच्ची पर 5-6 मर्दों को छोड़ा: चश्मदीदों को जिंदा जलाने की दी जाती थी धमकी

                                               ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत (फोटो साभार: bbc)
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ इन दिनों मुखर होकर बोलने वाले एलन मस्क ने हाल में ग्रूमिंग गैंग की दरिंदगी को बताने के लिए कुछ घटनाओं की डिटेल को साझा किया है। इस क्रम में एक 13 साल की बच्ची के साथ हुई हैवानियत की डिटेल भी है।

एलन मस्क के ट्वीट में एक इस्लामी कट्टरपंथी मोहम्मद करार के कुकर्मों का जिक्र है जिसने एक 13 साल की बच्ची को एनल गैंग रेप के लिए तैयार किया था और बाद में 5 से 6 लोग उसपर टूट पड़े। इस दौरान बच्ची के गुदाद्वार को फैलाने के लिए पंप तक का इस्तेमाल किया और उसके बाद एक टाइम तो ऐसा भी आया कि चार-चार मर्दों ने उसके भीतर एक साथ लिंग डाला हुआ था।। वो दर्द से चिल्लाए न इसलिए उसके मुँह में लाल रंग की गेंद डाल दी गई थी।

इतना ही नहीं, मोहम्मद करार ने सिर्फ दूसरों से उसका गैंगरेप नहीं कराया बल्कि खुद भी उसका रेप किया। ये सब उसी समय हुआ जब वो 13 साल की पूरी भी नहीं हुई थी। उसके साथ न केवल ओरल सेक्स किया गया बल्कि वेजाइनल सेक्स भी किया गया।

एलन मस्क द्वारा साझा किया गया ये स्क्रीनशॉट www.judiciary.uk पर मौजूद लीगल दस्तावेज का है जिसमें ग्रूमिंग गैग के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार ग्रूमिंग गैंग से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथी चश्मदीदों को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की धमकी देते थे, उन्हें बंदूक दिखाकर डराया धमकाया जाता था। ग्रूमिंग गैंग चश्मदीदों को ये कहकर चुप कराते थे कि अगर उन्होंने किसी को कुछ भी कहा था उनके साथ भी वही होगा तो पीड़िताओं के साथ हो रहा है यानी कई मर्द मिलकर रेप करेंगे। बता दें कि साल 2019 में इसी मोहम्मद करार को इसके 2 भाइयों सहित कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मौजूदा दस्तावेज ये भी बताते हैं कि कैसे ग्रूमिंग गैंग को पुलिस ने संरक्षण दिया हुआ था। दो ऐसे मामले थे जहाँ लड़कियों के पिता को उनकी बेटियों के बारे में पता भी चला और वो उन्हें बचाने भी गए, लेकिन हुआ क्या? जिस जगह पहुँचकर पुलिस को पिता की मदद करनी चाहिए थी, उन्हीं जगहों पर पहुँचकर पुलिस ने लाचार पिता को अरेस्ट कर लिया और आरोपितों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एलन मस्क ऐसे केसों को आधार बनाकर कहते हैं कि सोचकर देखिए कि आप पिता हैं और बेटी को गैंगरेप और हत्या से बचाने के लिए कहीं पहुँचे हैं, लेकिन पुलिस ने उलटा आपको ही गिरफ्तार कर लिया।

अवलोकन करें:-

ग्रूमिंग गैंग : ‘बड़े हिप्स और भारी ब्रेस्ट हो तो 13 साल की लड़की से भी कर लो सेक्स’: समझें छोटी बच्

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। 2013 के बाद इस गैंग के बारे में दुनिया को पता चला और फिर एक टास्कफोर्स बनी जिसने पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया था और 4000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की थी।