Showing posts with label #Ghaziabad. Show all posts
Showing posts with label #Ghaziabad. Show all posts

सूर्या चौहान के हत्‍यारे असद के परिवार की बैंड बज गई.. बुलडोज़र की तैयारी; DM ऑफिस ने घर पर लगाया नोटिस

                                सूर्या चौहान के हत्यारे असद के घर पर गाजियाबाद प्रशासन बड़ा एक्शन
खोड़ा कॉलोनी में सूर्या चौहान हत्याकांड में नई कार्रवाई हुई है. प्रशासन इस केस में सख्‍त रुख अपनाए हुए हैं. अब इस केस के मुख्य आरोपी असद के घर के बाहर प्रशासन ने एक नोटिस चस्पा कर दिया है. इसमें नवनीत विहार में असद के घर पर अवैध कब्‍जे का नोटिस चस्‍पा दिया गया है. बाकायदा अफसरों ने वहां ढोल बजवाकर माइक से मुनादी की 15 दिन के भीतर  बड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

दरअसल, गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद प्रशासन ने अब मुख्य आरोपी असद के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. खोड़ा के नवनीत विहार स्थित उसके मकान पर प्रशासनिक टीम पहुंची और उप जिलाधिकारी की ओर से जारी नोटिस को घर के बाहर चस्पा कराया. इस दौरान इलाके में ढोल बजाकर और माइक के जरिये मुनादी कर लोगों को कार्रवाई की जानकारी दी गई.

मौके पर पहुंचे तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों और जांच के आधार पर नोटिस जारी किया गया है.

नोटिस में संबंधित पक्ष को 15 दिनों के भीतर इस अवैध कब्‍जे को हटा लेने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही साफ चेतावनी दी गई है कि अगर तय अवधि के भीतर खुद कब्जा स्वयं नहीं हटाया जाता है तो प्रशासन नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा. इसे हटाए या तोड़े जाने का पैसा भी असद के परिवारवालों से लिया जाएगा.

इस दौरान बड़ी संख्‍या में स्थानीय लोग वहां इकट्ठा हो गए और उन्‍होंने अफसरों की बात ध्‍यान से सुनी. कई लोग तो बाकायदा इस नोटिस की फोटो खींचकर भी ले जा रहे हैं. यहां तक की लोग असद के घर को भी दूर-दूर से देखने के लिए आ रहे हैं. वह पूछ रहे हैं कि ये असद का ही घर है क्‍या? 

अखलाख, हमास, फिलिस्तीन और गाज़ा पर मातम करने वाले ईद पर सूर्या की क़ुरबानी पर खामोश क्यों? पड़ोसी मुस्लिमों के मुँह से भी कट्टरपंथियों के लिए नहीं फूट रहा एक भी शब्द

गाजियाबाद के खोड़ा में सूर्या चौहान की हत्या के बाद एनकाउंटर में मुख्य आरोपित असद भी ढेर हो गया। गंगा-जमुना की तहजीब और सेकुलरिज्म का रोना वाले सूर्या की क़ुरबानी पर क्यों खामोश हैं? टीवी पर चर्चाओं में जब घिरने पर बेशर्म संविधान की दुहाई देने लगते हैं। वामपंथी लिबरल गैंग ने सूर्या की हत्या से ज्यादा एनकाउंटर में मारे गए असद की चिंता की। यहाँ तक कि कुर्बानी देखने के लिए बुलाए गए सूर्या की निर्मम हत्या को आपसी विवाद में हत्या करार दे दिया।

सूर्या की हत्या में शामिल नवाब, फरहान, आतिफ और शारिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से असद फरार था, जिस पर 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा की गई थी। पुलिस ने सूचना मिलने पर उसे इंदिरापुरम में ढेर कर दिया। इससे पहले इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस लगातार सतर्क है। बकरीद के दिन सूर्या चौहान की घर से बुला कर हत्या कर दी गई। उसे ‘आओ कुर्बानी कैसे दी जाती है, तुम्हें दिखाते हैं…’ कह कर घर से बुलाकर सूर्या को ले जाने और उसकी चाकूओं से निर्मम हत्या करने पर लिबरल वामपंथी गैंग का मुँह नहीं खुला।

घटना की निंदा करना तो दूर प्रोपेगेंडाबाजों ने घटना की जानकारी देना भी जरूरी नहीं समझा। देता भी कैसे? इस खबर से उनकी पोल खुल जाती, जो हमेशा देश में मुस्लिमों पर तथाकथित ‘अत्याचार’ की दुहाई देते-देते नहीं थकते। ट्वीट करते हैं, रिट्वीट करते हैं, लंबी-लंबी पोस्ट लिखते हैं, सरकार की आलोचना करते हैं। लेकिन, 17 साल के हिन्दू युवक की इस तरह हत्या राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा में हो जाती है, ये कुछ नहीं बोलते।

Republic Bharat पर अपने शो महाभारत पर एंकर राम मोहन शर्मा जब इस दुर्घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे थे तब एक महिला ने कहा कि सरकार को इन लोगों को मिलने वाली हर सुविधा वापस ले लेनी चाहिए। यह सच भी है। जब तक सरकार ऐसे ठोस कदम नहीं उठाएगी इस तरह की हरकतों, दंगों और हिन्दू त्यौहारों पर होने वाली पत्थरबाज़ी बंद नहीं होगी। दूसरे, इन कट्टरपंथी और इनके समर्थकों को मालूम है कि मोदी सरकार सिर्फ पाकिस्तान के लिए सख्त हो सकती है, किसी और के लिए नहीं। बांग्लादेश में हिन्दुओं का नरसंहार होने के बावजूद मानवीय आधार पर आर्थिक मदद बंद नहीं की जबकि पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया।      

प्रोपेगेंडाबाजों की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग

हत्या की हर हाल में आलोचना की जानी चाहिए। यहाँ नाबालिग युवक को बुला कर हत्या कर दी जाती है। चूँकि सभी आरोपित मुस्लिम हैं, इसलिए चुप रह जाओ। आरफा खानम को ही देख लो, मुख्यमंत्री योगी के आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने की उसने आलोचना नहीं की, लेकिन ऐसा बोलने वाले मुस्लिम को जब पुलिस उठा कर ले गई, तो सामने आ गई अत्याचार की कहानी लेकर।

हिन्दू नाबालिग लड़के की बेरहम हत्या पर बात करना, तो वैसे भी उसके सिलेबस से बाहर का विषय है। द वायर, द क्विंट, द प्रिंट में तो खबर छापी, लेकिन हत्या को नाबालिगों द्वारा की गई वारदात कहा। द प्रिंट ने कहा, “सूर्या को पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई, जिससे खोड़ा कॉलोनी में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। शनिवार को स्थानीय बाजार बंद रहा, जबकि पुलिस ने फ्लैग मार्च किया।”

वहीँ द क्विंट ने मुख्य आरोपित असद के पुलिस एनकाउंटर में मौत पर जोर देते हुए बताया कि 31 मई 2026 को, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बकरीद के दौरान 17 साल के एक हिंदू छात्र की हत्या के मुख्य आरोपी असद को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। पीड़ित, सूर्य चौहान को बकरीद के दिन एक कहासुनी के दौरान चाकू मार दिया गया था, और 29 मई 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने असद की तलाश शुरू कर दी थी, जो घटना के बाद से कथित तौर पर फरार था।

क्यों की गई सूर्या की हत्या

सूर्या और असद पड़ोसी हैं। खोड़ा की गली में दोनों का मकान है। बताया जाता है कि सात आठ महीने पहले एक छोटा सा विवाद हुआ था। दोनों के माता-पिता ने अपने-अपने बच्चे को समझाया और मामला शांत हो गया। लेकिन बातचीत दोनों परिवारों में लगभग नहीं होती थी। बकरीद के दिन सूर्यो चौहान का बाइक चलाने को लेकर असद और उसके दोस्तों से विवाद हुआ। इनलोगों ने उसे चाकूओं से गोद कर हत्या कर दी।

चश्मदीदों के मुताबिक, असद और उसके साथियों ने सूर्या से कहा, “क्या तुमने कभी बकरे की कुर्बानी देखी है?” जब सूर्या ने मना किया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा, “आज तुझे दिखाते हैं।” इसके बाद आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में सूर्या बुरी तरह घायल हो गया और अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।

सूर्या का भाई मानसिक रूप से विक्षिप्त है। वह अपने माँ-बाप का एकमात्र सहारा था। इस मामले में असद, नवाब, फरहान, आतिफ और शारिक सहित कई लोगों के नाम सामने आए। सभी आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था, जिसे इंदिरापुरम में एक मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया।

पड़ोसी घटना को लेकर जता रहे अनभिज्ञता

घर से कुछ दूर पर 17 साल के युवक सूर्या चौहान की हत्या हो जाती है। उसके आस पड़ोस में ज्यादातर मुस्लिम परिवार रहते हैं। ये लोग मुँह खोलने को तैयार नहीं हैं। ये ऐसे जता रहे हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। भीडभाड़ पूरी है, लेकिन कोई ये नहीं बता रहा कि उसे घटना की जानकारी है।

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो आए हैं, जिससे पता चलता है कि हिन्दू युवक की बेरहमी से कत्ल किए जाने पर लोगों को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। ये लोग कैमरा देख कर चुपचाप बचते नजर आ रहे हैं।

सूर्या की मौत के बाद पड़ोसी मुस्लिम घर के बाहर एक किलो से ज्यादा बकरे का मांस नीचे रखा मिला। जब कुछ लोगों ने बोला, तो बच्चों को भेजकर उसे नाली में डाल दिया गया। इससे भी हिन्दुओं में गुस्सा है।

सूर्या की माँ ने असद के एनकाउंटर पर संतोष जताया

मुख्य आरोपित असद की मुठभेड़ में मौत के बाद सूर्या की माँ का बयान सामने आया। सूर्या की माँ सरोज का कहना है कि उसने सिर्फ एक का एनकाउंटर देखा है। वह चाहती है कि असद की तस्वीर उसे दिखाई जाए। तस्वीर देखने के बाद ही उसे विश्वास होगा कि वह मारा जा चुका है। सरोज का कहना है कि बाकी आरोपितों को भी इसी तरह से मौत के घाट उतारा जाना चाहिए। इतना ही नहीं उनके घरों पर बुलडोजर भी चलना चाहिए।

इस मामले में 5 नामजद आरोपितों को पुलिस ने 30 मई 2026 को गिरफ्तार किया। असद के बारे में पुलिस को जानकारी मिली कि वह इंदिरापुरम में छिपा हुआ है। उसे पुलिस ने घेर लिया, उसने पुलिस पर फायरिंग की। इस दौरान असद को पुलिस ने बुरी तरह घायल कर दिया और अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई। बाकी आरोपित भी पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में हैं।

सूर्या को चाकू घोंपने वाला असद एनकाउंटर में ढेर, बकरीद के दिन किया था हिंदू युवक का मर्डर: UP पुलिस ने बताई मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी

            सूर्या (सबसे दाएँ) को असद (सबसे बाएँ) ने घोंपा था चाकू (फोटो साभार: आज तक/UP Police)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपित असद को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। दरअसल, बकरीद के दिन 17 साल के सूर्या चौहान पर असद और उसके साथियों ने चाकू से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

DCP धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि असद अपने कुछ साथियों से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। इसी दौरान असद और उसका एक साथी बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिस ने बताई एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

पुलिस को सूचना मिली कि असद अपने एक साथी से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। बताया गया कि वह कुछ पैसे लेकर इलाके से बाहर भागने की फिराक में था। सूचना मिलते ही पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कॉम्बिंग अभियान शुरू किया और कई जगह बैरियर लगाकर सघन चेकिंग शुरू कर दी।

इसी दौरान वसुंधरा क्षेत्र में पुलिस टीम को एक बाइक पर दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया लेकिन आरोप है कि मुख्य आरोपित असद ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में असद गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने घायल असद को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस गोलीबारी में खोड़ा थाना क्षेत्र में तैनात एक कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ है जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, असद का एक साथी मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मौके से पुलिस ने एक पिस्तौल और बाइक बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि असद के आपराधिक इतिहास की भी जाँच की जा रही है। साथ ही, बरामद हथियार की फोरेंसिक जाँच कराई जाएगी और पूरे मुठभेड़ मामले की नियमानुसार जाँच भी की जा रही है। सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपित के मारे जाने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और पुलिस अब फरार साथी की गिरफ्तारी में जुटी है।

उत्तर प्रदेश : कलावा बाँध छिपाई पहचान, ईरम ने ‘महक’ नाम रखकर किया आकाओं के लिए काम: भारत में ISI कैसे खेल रहा जासूसी वाला खेल, वामपंथी सिर्फ हिंदुओं को बदनाम करने में जुटे

                                 हिंदू नाम की आड़ में जासूसी करने वालों से कौन पूछेगा धर्म?
गाजियाबाद से सामने आया जासूसी नेटवर्क सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उस नैरेटिव पर भी सीधा निशाना है जो एक खास दिशा में गढ़ा जाता रहा है। यह मामला बताता है कि सच्चाई कितनी परतों में छिपी होती है और कैसे उसे चुन-चुनकर तोड़ा-मरोड़ा जाता है।

हिन्दुओं को आतंकवादी हरकतों में बदनाम करने का पाकिस्तान ही नहीं भारत में सनातन विरोधी का बहुत गहरा रिश्ता है। अगर कसाब जिन्दा नहीं पकड़ा गया होता हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद कहकर हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले हिन्दू विरोधी पीछे नहीं हटते। भारत में पाकिस्तान के स्लीपर सेल ही नहीं हिन्दुत्व का चोला ओढे कालनेमियों की भी कमी नहीं। टीवी पर एक से बढ़कर एक श्लोक/चौपाई सुनाकर लोगों को भ्रमित करने वाले ही हिन्दुत्व और देश के दुश्मन हैं। मुस्लिम की मौत होने पर कोहराम मचाते हैं लेकिन जब किसी हिन्दू की मोबलीचिंग में हत्या होने पर इन सबकी बोलती ऐसे बंद रहती है जैसे कि इनके घरों में शोक हो।   

कौशांबी और साहिबाबाद से पकड़े गए इस गिरोह के तार सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े मिले। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं थी कि ये लोग जासूसी कर रहे थे, बल्कि यह थी कि ये सब हिंदू नाम और पहचान की आड़ लेकर भारत के खिलाफ काम कर रहे थे। सरफराज ने खुद को जोरा सिंह बना लिया, शहजाद ने भट्टी और वकार ने विक्की जट नाम रख लिया। कौशांबी से पकड़े गए सुहेल ने खुद का नाम रोमियो, नौशाद ने लालू, समीर ने शूटर और एक औरत साने इरम बन गई महक।

यह सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं था। सुहेल कलावा बाँधता था, गले में रुद्राक्ष पहनता था, माथे पर टीका लगाता था। नौशाद और समीर भी इसी तरह की हिंदू पहचान लेकर घूमते थे। यानी साजिश यह थी कि हिंदू बनकर जासूसी करो और हिंदुओं का भरोसा जीतो और फिर उनसे भी जासूसी करवाओ। क्योंकि इस गिरोह में युवक गणेश और महिला मीरा का भी नाम सामने आया।

अब जब गाजियाबाद का पूरा नेटवर्क खुलकर सामने आ चुका है और साफ दिख रहा है कि किस तरह हिंदू नाम और पहचान को ढाल बनाकर जासूसी की जा रही थी, तब वे लोग कहाँ चले गए जो हर बार हिंदू नाम देखते ही उछल पड़ते हैं? वही लोग जो किसी एक नाम के आधार पर पूरी चर्चा का रुख मोड़ देते हैं, इस संगठित साजिश पर चुप रहे। न तो मजहब के आधार पर हेडलाइन बनी, न कोई किसी मजगब को निशाना बनाया गया और यहाँ तक कि देश हित में भी सवाल नहीं पूछे गए। यही बताता है कि समस्या नजरिए की है।

राजस्थान का ही मामला सामने रखिए। एयरफोर्स में काम करने वाला प्राइवेट कर्मचारी सुमित कुमार जासूसी के आरोप में पकड़ा गया। रिपोर्ट्स में साफ बताया गया कि उसका ब्रेनवॉश पाकिस्तानी हैंडलर्स ने किया था और उसे इसलिए चुना गया क्योंकि वह हिंदू था। उससे सत्संग और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए दूसरे हिंदुओं को ब्रेनवॉश करवाने की योजना बनाई गई। यानी यहाँ भी एक बड़ी साजिश थी, जिसमें हिंदू पहचान का इस्तेमाल एक औजार की तरह किया जा रहा था।  

लेकिन जैसे ही सुमित कुमार का नाम सामने आया, मीडिया और सोशल मीडिया पर वामपंथी अकाउंट्स ने बिना देर किए हेडलाइन बना दी- हिंदू निकला पाकिस्तानी जासूस। न कोई गहराई देखी गई, न कोई सोर्स जाँचा गया, न यह सवाल कि उसके पीछे कौन है? बस नाम देखा और हिंदुओं को बदनाम करने का पूरा नैरेटिव सेट कर दिया।

ये दो मामले सामने रखकर देखा जाए तो यही दोहरा रवैया सामने आ जाता है। जब गाजियाबाद में पूरा जासूसी नेटवर्क हिंदू नाम की आड़ में काम करता पकड़ा गया, तब यह बात नहीं उठती कि यह हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश है। तब यह नहीं कहा जाता कि देखो कैसे हिंदू पहचान का इस्तेमाल ढाल की तरह किया जा रहा है। लेकिन जैसे ही ऐसे मामलों में एक व्यक्ति का नाम हिंदू निकलता है, पूरी कहानी उसी पर टिक जाती है।

क्या कभी यह सवाल उठाया जाएगा कि जिन पाकिस्तानी आकाओं के इशारों पर ये सारे लोग काम कर रहे थे, उनकी मजहबी पहचान क्या है? क्या तब भी उतनी ही तेजी से हेडलाइन बनेगी? या फिर वहाँ चुप्पी ही साध ली जाएगी?

समस्या यह है कि कुछ लोगों के लिए सच्चाई मायने नहीं रखती, उन्हें सिर्फ मौका चाहिए। मौका हिंदुओं को घेरने का, उन्हें कटघरे में खड़ा करने का। और जैसे ही ऐसा कोई मौका दिखता है, पूरा इकोसिस्टम एक्टिव हो जाता है। तथ्यों की जाँच बाद में होती है, पहले फैसला सुना दिया जाता है।

गाजियाबाद का मामला इस पूरे खेल को उजागर करता है। यह दिखाता है कि कैसे दुश्मन ताकतें सिर्फ सीमापार पर ही नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक समाज के भीतर घुसकर भी काम कर रही हैं। और उससे भी ज्यादा खतरनाक यह है कि उनके इस खेल में देश की गिनी-चुनी मीडिया और वामपंथी लोग अपने नैरेटिव को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

गाजियाबाद की घटना एक चेतावनी है, हिंदुओं के लिए। यह उस सोच के लिए भी जो हर बार एक ही दिशा में देखने की आदत डाल चुकी है। अग अब भी यह नहीं समझा गया, तो अगली बार कोई और ‘हिंदू नाम’ फिर से इस्तेमाल होगा और कहानी फिर से उसी तरह मोड़ी जाएगी।

शौहर पाकिस्तानी, बीवी बांग्लादेशी… कर्नाटक में हिंदू नाम रख YouTube पर देता था इस्लामी ज्ञान

                     गाजियाबाद और बेंगलुरु से 3-3 गिरफ्तार (फोटो साभार: आजतक/इंडिया टीवी)
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर अवैध प्रवासियों और मजहबी पहचान छिपाकर भारत में रहने वालों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रामलीला के मंच पर हिंदू पहचान लेकर काम कर रहे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो दूसरी ओर कर्नाटक में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों के एक ग्रुप को भी गिरफ्तार किया गया जो हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे थे।

गाजियाबाद में गलत पहचान बताकर रामलीला, हिंदू नामों से आधार कार्ड

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में पुलिस ने तीन मुस्लिमों वजीर खान, राहुल (जिसका असली नाम सामने नहीं आया), और नानक को देवी मंदिर में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किया। इन तीनों पर आरोप है कि ये अपनी असल पहचान छिपाकर रामलीला में हिंदू पात्रों का अभिनय कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब तीनों आरोपित गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ महंत नरसिंहा नंद गिरी ने धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। पुलिस ने इनके पास से हिंदू नाम और पहचान के आधार कार्ड बरामद किए, जो इनके वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते थे।
पुलिस जाँच के दौरान इन युवकों ने बताया कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से रामलीला मंचन से जुड़ा हुआ है। ये लोग रामलीला में कैकई, मंथरा जैसे किरदार निभाते हैं और ढोलक बजाने तथा नृत्य का भी कार्य करते हैं। गिरफ्तार युवकों का दावा है कि वे मथुरा के रहने वाले हैं और रामलीला मंचन करना उनकी आजीविका का हिस्सा है। हालाँकि, पुलिस ने यह साफ किया कि मामले की जाँच जारी है और तब तक कुछ ठोस कहा नहीं जा सकता।
डासना देवी मंदिर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हमेशा पुलिस बल तैनात रहता है, खासकर महंत नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। महंत का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों के मंदिर में प्रवेश को रोकने के पीछे उनका धार्मिक और सुरक्षा से जुड़ा कारण है।

कर्नाटक में हिंदू पहचान के साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक

दूसरी घटना कर्नाटक के पीन्या इलाके की है, जहाँ तीन और पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सैयद तारिक और उसकी पत्नी अनीला शामिल हैं, जबकि उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह परिवार पिछले आठ साल से भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहा था और हिंदू नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था। तारिक अपने यूट्यूब चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था, जबकि उसकी पत्नी घरेलू महिला है। इन लोगों के पास से पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बरामद किए हैं, जो सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे।
इस परिवार के बारे में जानकारी तब मिली जब पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पाकिस्तानी नागरिकों ने इनके बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने शंकर शर्मा के नाम से रह रहे राशिद अली सिद्दिकी को भी हाल ही में गिरफ्तार किया था, जो अपनी बांग्लादेशी पत्नी और ससुरालवालों के साथ फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था। राशिद का मामला भी तारिक से जुड़ा हुआ पाया गया है। अकेले कर्नाटक में ही कुल 11 पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों को फर्जी हिंदू पहचान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चला है कि यह परिवार पहले कोच्चि में रह रहा था और चार साल पहले बेंगलुरु आया था। तारिक को हर महीने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के माध्यम से मिलती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी तकरीरें करनी थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन अवैध पाकिस्तानी नागरिकों को पैसा कैसे और कहाँ से मिल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
कर्नाटक पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि राज्य में और कितने पाकिस्तानी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में भी चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसी प्रकार फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई लोग हो सकते हैं जो अवैध रूप से रह रहे हों और अपनी मजहबी और राष्ट्रीय पहचान छिपाकर काम कर रहे हों।

सावधान करने वाली हैं दोनों घटनाएँ

इन दोनों घटनाओं में एक चीज समान है: आरोपितों द्वारा अपनी मजहबी पहचान को छिपाना। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपित मुस्लिम युवक हिंदू नामों के साथ रामलीला में काम कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कर्नाटक में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों ही मामलों में मजहबी पहचान को छिपाकर अवैध कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया गया।

 

पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ शिकायत दर्ज, बदायूँ हत्या के बाद ‘छोटे नरसिंहानंद’ पहुँचे थाने: 39 साल पहले ऐसे ही मामले में भड़के थे दंगे, मारे गए थे हिंदू

अनिल यादव ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ दी शिकायत (शिकायतकर्ता दाएँ, जिन पर शिकायत उनका चेहरा नहीं लगा सकते)
उत्तर प्रदेश के बदायूँ में रमजान के दिनों में साजिद द्वारा दो मासूम बच्चों का गला रेतकर की गई हत्या से पूरा देश सन्न है। ऐसे में डासना के शिव शक्ति धाम से जुड़े अनिल यादव ने आहत होकर माँग की है कि इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो। यादव ने शिकायत में कहा है कि कुरान के कारण दुनिया में जघन्य अपराध हो रहे हैं। यादव ने अपनी इस शिकायत को गाजियाबाद के थाना वेब सिटी में दिया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनिल यादव ने कहा है, “पिछले 1400 सालों से हिंदू महिलाओं से बलात्कार लूटपाट, बच्चों की नृशंस हत्या की वजह कुछ और नहीं बल्कि कुरान है। हजरत पैगंबर मुहम्मद द्वारा दी गई तालीम व कुरान में जो कानून लिखा है आज तक वही दोहराया जा रहा है। बदायूँ में बच्चों की हत्या ने गजवा-ए-हिंद की घंटी बजा दी है जो कि हजरत मुहम्मद का सपना है। इससे मेरी भावना आहत हुई है। हजारों हिंदुओं को गजवा-ए-हिंद से बचाने के लिए ये FIR होना जरूरी है।”

बता दें कि जिस गजवा-ए-हिंद का मुद्दा अनिल यादव ने अपनी शिकायत में उठाया है, उसी के संबंध में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद बात करने जामा मस्जिद जा रहे थे, मगर बताया जा रहा है कि उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया।

इस्लाम के विरुद्ध आवाज़ उठना कोई नई बात नहीं। 1985 से चल रही है। जब Calcutta High Court में कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने मुकदमा दर्ज किया था। इतना ही नहीं, 31 जुलाई 1986 को दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने 24 आयतों के विरुद्ध फैसला दिया था।(देखिए नीचे लिंक) अनवर शेख ने अपनी पुस्तकों में खुलकर इसका विरोध किया, लेकिन आज तक शेख के विरुद्ध किसी ने फतवा जारी करने का साहस नहीं किया। दूसरे, नूपुर शर्मा के कही बात का गलत वीडियो दिखाने पर कट्टरपंथियों ने सर तन से जुदा का फरमान दे दिया, लेकिन नवभारत चैनल के एंकर सुशांत सिन्हा के अलावा किसी भी चैनल में सच्चाई दिखाने की हिम्मत नहीं की, सब की खोजबीन पत्रकारिता अँधेरी गलियों में खो गयी। लेकिन Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation(इस्लाम क्या कहता है) चैनलों ने इस्लाम की सच्चाई सामने ला दी। इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ex-muslim वर्ग ने। जिनके तीखे प्रश्नों का उन मौलानाओं को-जिन्हे आम मुसलमान बहुत इज्जत बख्शता है-वातानुकूलित कमरों में पसीने पोंछते देखा। इतने मुद्दों पर गर्मागर्म बहस देखी, काश किसी हिन्दू ने एक भी बोल दी होती, सर तन से जुदा की आवाज़ बुलंद हो गयी होगी, और सारा मीडिया उस हिन्दू को ही अपमानित कर रहा होता।   

डासना का शिव शक्ति धाम यति नरसिंहानंद के कारण ही 2021 में खूब चर्चा में रहा था। अब उसी जगह अनिल यादव (जिन्हें छोटा नरसिंहानंद कहा जाता है) ने ऐसी शिकायत दी है। यादव की शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई हुई इसका पता अभी नहीं चला है लेकिन संभावना है कि इस मामले को आगे न सुना जाए या अगर मामला कोर्ट तक पहुँचे तो वहाँ से खारिज हो जाए। ऐसा क्यों कहा जा सकता है इसके लिए 36 साल पहले दर्ज केस और उसकी डिटेल जानने की जरूरत है जब इस्लाम की ‘पवित्र पुस्तक’ पर सवाल उठते ही न्यायपालिका के भी हाथ-पाँव फूल गए थे।

कलकत्ता कुरान याचिका

36 साल पहले 1985 में कुरान को प्रतिबंधित करने की माँग लेकर वकील चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह कलकत्ता हाईकोर्ट पहुँचे थे। 29 मार्च, 1985 को उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक आवेदन दायर किया था, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय से सरकार को ‘पवित्र पुस्तक’ की प्रत्येक प्रति को ‘जब्त’ करने का निर्देश देने की अपील की गई थी।
याचिका में तर्क दिया गया था कि भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A और 295A के आधार पर कुरान की प्रत्येक प्रति दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 95 के तहत ज़ब्त किए जाने के लिए उत्तरदायी है। इसमें चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने ‘काफिरों’ के खिलाफ हिंसा को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने कुरान के एक आयत को उद्धृत किया, जिसमें कहा गया था, “जब पवित्र महीने समाप्त हो जाते हैं तो जहाँ भी मूर्ति-पूजा करने वाले मिले, उसे मार डालो।”

जिस जज के पास पहुँची कुरान से जुड़ी याचिका उसका भी हुआ बहिष्कार

यह मामला शुरू में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति खस्तगीर जे के समक्ष आया था जिसके बाद 70 से अधिक अधिवक्ताओं द्वारा ‘खस्तगीर जे’ की अदालत का बहिष्कार करने का आग्रह अन्य वकीलों से किया। वहीं वरिष्ठ वकील सीएफ अली ने कहा था, “यह बेतुका है। पृथ्वी पर कोई भी नश्वर पवित्र धर्मग्रंथ को चुनौती नहीं दे सकता है और दुनिया की किसी भी अदालत को इस पर कोई अधिकार नहीं है।”

बंगाल से लेकर बांग्लादेश में सड़कों पर थी इस्लामी भीड़

इसके बाद तमाम इस्लामवादी विरोध में आ उतरे। नतीजतन बताया जाता है कि भारत से लेकर बांग्लादेश तक में दंगे होने लगे। विकीपीडिया पर मौजूद जानकारी बताती है कि दंगों में हिंदुओं को निशाना बनाया गया था। हजारों की भीड़ ने सड़क पर उतरकर बांग्लादेश में भारतीय उच्च आयोग के सामने हल्ला की थी। बांग्लादेश के सीमाई इलाके में स्थित शहर में 12 लोग मारे गए थे जबकि 100 घायल हुए थे ये सारे हिंदू थे। इसी तरह 20000 मुस्लिमों की भीड़ ढाका में निकलकर आई थी। वहीं अन्य दंगे कश्मीर और बिहार समेत कई जगह देखे गए थे।

बंगाल सरकार ने कहा था- नहीं बदला जा सकता एक शब्द

वहीं सीपीआई (एम) शासित पश्चिम बंगाल सरकार ने याचिका और कलकत्ता उच्च न्यायालय में इसके प्रवेश के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। अपने हलफनामे में सरकार ने कहा था कि यह, “अदालत को दुनिया भर के मुसलमानों के पवित्र धर्मग्रंथ कुरान पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, जिसका प्रत्येक शब्द, इस्लामी मान्यता के अनुसार, अपरिवर्तनीय है।” सरकार का कहना था कि यह याचिका दुर्भावनापूर्ण इरादे से दायर की गई थी और भारतीय इतिहास में ऐसी याचिका कभी दायर नहीं की गई है।
अवलोकन करें:-
The Case of Inder Sain Sharma
VOICEOFDHARMA.ORG
The Case of Inder Sain Sharma
State, Vs. Inder Sain Sharma s/o Sh. Dewan Chand Sharma r/o 90 Vino-Bha (Vinobha Puri), Lajpat Nagar, New Delhi. 2. Raj Kumar s/o Ishwar Parshad c/o H.No. 67-South Ext., New Delhi.

Some Articles Of The Quran Are Harmful-Delhi Magistrate Z.s. Lohat
SIKHAWARENESS.COM
Some Articles Of The Quran Are Harmful-Delhi Magistrate Z.s. Lohat
SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL-DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT by Sarita Nair on Tuesday, 15 March 2011 at 11:23 SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL,TEACH HATRED AND CREATE DIFFERENCES BETWEEN MOHAMMEDANS AND OTHER COMMUNITIES – DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT I am enclosing herewith a copy of....

याचिका पर सुनवाई तक नहीं, पुस्तक प्रकाशित करने पर गिरफ्तारी

एक याचिका से मामला इतना गरमा गया था कि राजनीतिक दबाव के कारण, न्यायमूर्ति खास्तगीर ने इसे अपनी सूची से हटा दिया और इसे न्यायमूर्ति सतीश चंद्रा की अदालत को भेज दिया। उसके बाद राज्य के महाधिवक्ता एसके आचार्य की सलाह पर, मामला न्यायमूर्ति बिमल चंद्र बसाक की पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया, जिन्होंने 17 मई, 1985 को याचिका खारिज कर दी। 18 जून को फिर चंद्रमल चोपड़ा ने रिव्यू याचिका डाली जिसे बाद में 21 जून को ही खारिज कर दिया गया। इसके बाद इस याचिका को लेकर चंद्राल चोपड़ा ने सीता राम गोयल के साथ मिलकर 1986 में ‘द कलकत्ता कुरान याचिका’ नाम की पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वहीं गोयल को गिरफ्तारी से बचने के लिए भागना पड़ा था।

‘CM योगी गुंडा… हम मुसलमान, उसकी नब्बे नस्लें हमें खत्म नहीं कर सकती’; पुलिस ने कर दिया लंगड़ा

योगी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाला मोहम्मद वसीम UP पुलिस की गिरफ्त में
उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद की मसूरी पुलिस ने मोहम्मद वसीम को गिरफ्तार किया है। उस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ही सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप है। आरोपित के खिलाफ मसूरी थाने के दरोगा राजीव कुमार ने केस करवाया था।

वहीं मसूरी के एसीपी नरेश कुमार के मुताबिक, वीडियो संज्ञान में आते ही केस दर्ज कर आरोपी की तलाश की जा रही थी। इसे के तहत मंगलवार (2 जनवरी, 2024) को मोहम्मद वसीम को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वसीम मूल रूप से मेरठ के लिसाड़ी गेट के फतेहउल्लापुर का रहने वाला है, लेकिन वो मसूरी में किराए के मकान में रहता और फेरी लगाकर प्लास्टिक की कुर्सी बेचने का काम करता है। दरअसल, वसीम का सीएम योगी के लिए अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का ये वीडियो इंटरनेट पर खासा वायरल हो रहा था।

इसी पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद वसीम के सीएम को अनाप-शनाप कहने के साथ ही उसका पुलिस हिरासत में लँगड़ाते हुए वीडियो भी चर्चा में हैं। लोग वसीम का पुलिस की गिरफ्त और उसके पहले के शेखी बघारने वाले वीडियो को जमकर शेयर कर रहे हैं।

एसीपी मसूरी नरेश कुमार के मुताबिक, दरोगा राजीव कुमार 23 दिसंबर, 2023 को गश्त पर थे। उन्होंने इस दिन मसूरी अंडरपास पास भीड़ देखी। ये भीड़ मोबाइल पर एक वीडियो देख रही थी। इसमें एक शख्स सांप्रदायिक उन्माद फैलाने के मकसद से भड़काऊ भाषा के साथ ही सीएम योगी को अपशब्द कह रहा था।

सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहे 43 सेकंड के इस वीडियो का मजमून कुछ इस तरह से था। दरअसल, वसीम से एक इंटरव्यूवर ने 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर सवाल किया था।

                         मोहम्मद वसीम के खिलाफ की गई FIR की कॉपी (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

इसके जवाब में वसीम कहता है कि तुम्हारे अंदर हिम्मत है प्रधानमंत्री से सवाल करने की। इसके बाद इंटरव्यूवर कहता है कि योगी आदित्यनाथ की छह साल की सरकार हो चुकी, इस पर वसीम भड़क उठता है।

वीडियो में वसीम कहता है, “हम मुसलमान है, क्या मुसलमान को खत्म कर देगा? उसकी तो नब्बे नस्लें भी हमें खत्म नहीं कर सकती। वो क्या आसमान से आया है।” इसके बाद इंटरव्यू लेने वाले ने सवाल किया,” क्या योगी सरकार में गुंडागर्दी खत्म नहीं हुई थी?”

इस पर वसीम तैश में कहता है, “योगी खुद गुंडा है। मैं कह रहा हूँ चलो करो मेरे पर केस, योगी खुद एक गुंडा है। उसकी हिस्ट्री देखो, उसका रिकॉर्ड देखो, उसकी एफआईआर देखो।” इसके बाद वो पूरे दम से दोनों हाथ कमर पर रख कर कहता है, “मेरा नाम मोहम्मद वसीम, जिला गाजियाबाद, गाँव मसूरी।”

उत्तर प्रदेश : ‘हिन्दू कीड़े-मकोड़े की तरह मसले जाएँगे… योगी ने कुछ नहीं किया, हमारी सरकार आने पर सब जाएँगे जेल’: अयान कुरैशी

अयान कुरैशी ने हिंदुओं को कहा कीड़ा-मकोड़ा (चित्र साभार- न्यूज़ गैलरी /Youtube)
सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खुद को अयान कुरैशी बता रहा एक मुस्लिम युवक हिन्दुओं को कीड़ा-मकोड़ा कहते हुए अपनी सरकार आने पर सब सफा (मतलब सारे विपक्षी साफ, सारे विरोधी साफ, सारे किए गए काम साफ इत्यादि) हो जाने जैसी बयानबाजी कर रहा है। आरोपित हिन्दुओं के त्योहारों पर बंद होने वाली मांस की दुकानों के फैसले पर भी आपत्ति जताता दिख रहा। पीछे मुस्लिम समुदाय के ही कुछ अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं, जो अयान कुरैशी का समर्थन कर रहे हैं। पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर FIR दर्ज कर ली है। अयान कुरैशी हिरासत में ले लिया गया है।

यह वीडियो मसूरी थानाक्षेत्र का है। न्यूज़ गैलरी नाम के एक यूट्यूब चैलन ने इसे शनिवार (4 नवंबर 2023) को पब्लिश किया है। 7 मिनट 48 सेकेंड के इस यूट्यूब वीडियो में पत्रकार ने रफ़ीकाबाद में रहने वाले लोगों से सवाल-जवाब किए। इसी दौरान अयान कुरैशी ने भी जवाब दिया। अयान ने कहा, “भाई हिन्दू क्या है? तुम इंडिया में रहने के बाद सिर्फ हिन्दू-हिन्दू हो। कौन से देश में हैं हिन्दू, ये बताओ मुझे। बाबर का इतिहास और उसका इतिहास क्या कर रहे हो… आप कुछ भी कर लो बस इंडिया तक ही सीमित हो।”

सरकार द्वारा हिन्दू तीर्थस्थलों को उनके पौराणिक नाम फिर से देने पर भी अयान कुरैशी ने आपत्तिजनक बयानबाजी की। उसने कहा, “प्रयागराज का नाम वो रख दिया, ये रख दिया। भाई तुम्हारी सरकार है, तुम कुछ भी रख दो। जिस दिन हमारी सरकार आएगी, उस दिन सब सफा (मतलब सारे विपक्षी साफ, सारे विरोधी साफ, सारे किए गए काम साफ इत्यादि) हो जाएगा। जो पहले का था, वही रहेगा।”

कर्नाटक बुर्का विवाद पर भी अयान कुरैशी ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की मर्जी, वो कुछ भी पहनें। इस दौरान अजीब ढंग से अयान ने करवा चौथ जैसे हिन्दू त्योहारों का नाम लेते हुए इस दौरान बंद करवाई जाने वाली मांस की दुकानों पर आपत्ति जताई।

मुर्गे का मांस बेचने वाला अयान कुरैशी ने गायों के संरक्षण पर भी तंज कसा। उसने कहा कि जैसे गाय की चिंता की जा रही है वैसे ही बिल्ली, मुर्गे और भैंसे की भी फ़िक्र की जाए। अयान के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने एक भी काम अच्छा नहीं किया है। अंत में अयान ने कहा, “इस्लाम जिंदा था, है और रहेगा भी।”

इस पूरे इंटरव्यू के दौरान अयान कुरैशी के पीछे मौजूद कुछ लोगों की भीड़ इस बयानबाजी का समर्थन करते हुए बीच-बीच में नारेबाजी करती रही। कैमरे में नहीं दिख रहे बगल खड़े किसी शख्स ने यह भी कहा कि बाबर उनका है।

भारत में रहने, भारतीय लोगों के पैसों पर पलने वाले अयान कुरैशी ने हद तब कर दी, जब उसने कहा: “मुसलमानों की लड़ाई केवल यहूदियों से है। ये क्या हैं हिन्दू? ये कीड़े-मकोड़े की तरह मसले जाएँगे।”

इस बयान पर पत्रकार ने आपत्ति जताई और ऐसा न बोलने की हिदायत दी। हालाँकि इस हिदायत का अयान कुरैशी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वो अपनी बात पर कायम रहा। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति ने सरकार को ढोंगी कहा। अंत में अयान ने कहा, “ये सरकार जाने के बाद इन्हें छुपने की कहीं जगह नहीं मिलेगी। ये सब जेल में जाएँगे। एक-एक कर के। सफा बिलकुल। हम तो इतना जानते हैं।”

इस वायरल वीडियो का गाजियाबाद पुलिस ने संज्ञान लिया है। ACP मसूरी के मुताबिक वीडियो के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपित अयान कुरैशी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।


उत्तर प्रदेश : किसान आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल का प्रिंसिपल छात्राओं से पूछता- तुमने अंदर क्या पहना है, ऑफिस में बुलाकर कहता- कपड़े बदलो: योगी को खून से लिखी शिकायत

                            स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री को खून से लिखा पत्र (फोटो साभार: जागरण)
गाजियाबाद के किसान आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. राजीव पांडेय के खिलाफ छात्राओं ने यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्कूल की 5 छात्राओं ने खून से लिखा खत भेजा था। इसके बाद प्रिंसिपल को 29 अगस्त 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया। हालाँकि कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है।

प्रिंसिपल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। यह स्कूल गाजियाबाद के शाहपुर के बम्हेटा गाँव में स्थित है। छात्राओं ने सीएम को लिखे पत्र में प्रिंसिपल पर छेड़छाड़ और धमकाने का आरोप लगाया था।

रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं ने 21 अगस्त को प्रिंसिपल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। छात्राओं के अनुसार बहाने से प्रिंसिपल उन्हें अपने ऑफिस में बुलाता था और छेड़छाड़ करता था।

छात्राओं के अनुसार प्रिंसिपल कक्षाओं में आकर लड़कियों के बीच बैठ जाता था। उनसे उनके कपड़ों को लेकर बात करता था। पूछता था कि उन्होंने अंदर क्या पहन रखा है। इधर-उधर गलत तरीके से छूता था। एक छात्रा की माँ के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि 15 अगस्त को प्रिंसिपल ने अपने ऑफिस में छात्रा को कपड़े बदलने को कहा था।

 इसको लेकर जब छात्राओं ने परिजनों ने स्कूल में हंगामा किया तो प्रिंसिपल से उनकी झड़प हो गई। इस मामले में दोनों तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई है। स्थानीय पार्षद परमोश यादव के अनुसार प्रिंसिपल के खिलाफ 50 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। हालाँकि स्कूल मैनेजमेंट ने कहा कि प्रिंसिपल ने दबाव में आकर एडमिशन देने से मन कर दिया था, इसलिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।

पुलिस उपायुक्त (ग्रामीण) विवेक चंद यादव ने बताया कि छात्राओं के माता-पिता की शिकायत के आधार पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का उपयोग), 507 (धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उत्तर प्रदेश : खुद ही अपने प्राइवेट पार्ट में जिभिया घुसा रॉड बता गाजियाबाद में फर्जी गैंगरेप केस दर्ज कराने वाली गिरफ्तार

                 फेक गैंगरेप केस दर्ज कराने के आरोप में लड़की गिरफ्तार (फोटो साभार- हिंदुस्तान टाइम्स)
मोदी-योगी को बदनाम करने अपने आकाओं के बहकाने में आकर अपने ही शरीर को जख्मी कर चरित्र को भी कलंकित करना क्या अक्लमंदी है? उत्तर प्रदेश सरकार को फर्जी गैंगरेप का शोर मचाने वाली महिला पर सख्ती से पेश आना ही नहीं, बल्कि इसके परिवार से हर सरकारी सुविधा को वापस लिया जाए। गाजियाबाद में 5 लड़कों के खिलाफ फर्जी गैंगरेप केस दर्ज कराने के आरोप में लड़की को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले पुलिस ने लड़की के साथ मिलकर पूरी साजिश रचने वाले 3 अन्य लोगों को पकड़ा था।

गाजियाबाद की एसपी निपुन अग्रवाल ने बताया कि आरोपित लड़की को दिल्ली से पुलिस ने पकड़ लिया है। उसे कुछ दिन पहले दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

18 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े तीन बजे नंदग्राम थाने को सूचना मिली कि आश्रम रोड पर एक महिला पड़ी है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और महिला को अस्पताल ले गई। महिला ने दावा किया था कि उसे 5 लोगों ने अगवा किया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जिन्हें वह जानती है।

इस मामले में पुलिस ने शाहरुख, शाहरुख के भाई जावेद, औरंगजेब, जहीर उर्फ ढोला और दीनू के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

हालाँकि जाँच के बाद सामने आया कि महिला के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ, बल्कि संपत्ति विवाद में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह साजिश रची और सारे लड़को को फँसाया। महिला के पकड़े जाने से पहले उसके दोस्त आजाद, गौरव और अफजल को गिरफ्तार किया था।

ये बात भी सामने आई कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड नहीं घुसाई गई, हकीकत यह थी कि महिला ने साजिश के तहत अपने प्राइवेट पार्ट के अंदर टंग क्लिनर डाली थी। गाजियाबाद एसएसपी मुनिराज के मुताबिक जिभिया का साइज 5 से 6 सेंटीमीटर था।