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‘अचानक बेड से उठा, मेरी ब्रेस्ट छूने लगा’: आतंकियों और देशद्रोहियों के मानवाधिकारों की बात करने वाली इंदिरा जयसिंह के सहयोगी पर ट्रांसजेंडर महिला वकील ने लगाए यौन शोषण के आरोप

             इंदिरा जयसिंह के सहयोगी भट्ट पर यौन उत्पीड़न का आरोप ( फोटो साभार- ET n India today)
आतंकियों और देशद्रोहियों के मानवाधिकारों की बात करने वाली सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह अपने सहयोगी वकील रोहिन भट्ट पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप पर खामोश हैं। ये आरोप एक ट्रांसजेंडर महिला वकील राघवी ने लगाए हैं।

रोहिन भट्ट पर यौन उत्पीड़न का आरोप

सोशल मीडिया पर राघवी ने एक के बाद एक कई पोस्ट डाले हैं। इसमें कहा गया है कि समलैंगिक मामलों के अधिकारों की माँग करने वाले एक्टिविस्ट रोहिन भट्ट ने राघवी का यौन शोषण किया।
राघवी ने लिखा है कि दो साल पहले उनके साथ शर्मनाक हरकत की गई थी। उस वक्त वह कानून की पढ़ाई कर रही थी और हार्मोन थरेपी ले रही थी। दिल्ली में रोहिन भट्ट का कोई स्थायी घर नहीं था। इसलिए भट्ट दोस्तों के घर लाजपत नगर में रह रहा था। दरअसल ये दोस्त राघवी के भी दोस्त थे। उन्होंने राघवी को मिलने के लिए बुलाया था। वह जब मिलने पहुँची, तो उसने अपने दोस्तों से हार्मोन थरेपी से होने वाले शारीरिक बदलाव के बारे में बतलाया। उसने बताया कि उसके ब्रेस्ट अब बड़े होने लगे हैं। बेड पर लेटा भट्ट अचानक उठ गया और उसके ब्रेस्ट को छूने लगे। उसने पूरे शरीर को गलत तरीके से छूआ।
राघवी के मुताबिक, “वह काफी सकते में आ गई। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या हुआ। मेरे दोनों दोस्त भी काफी शॉक्ड थे। उन दोनों ने कुछ देर चुप रहने के बाद मुझे नॉर्मल किया और भट्ट से कहा कि आज के बाद कभी ऐसी हरकत किसी महिला के साथ नहीं करना। भट्ट खुद को सही साबित करने के लिए कहता रहा कि वह मजाक कर रहा है।”
राघवी के मुताबिक, उस वक्त समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इस तरह की हरकत के लिए कानून में क्या सजा है, ये समझ नहीं आ रहा था। उसने दोस्तों से बात की, लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला।
इसी तरह समय बीता। लेकिन पीड़िता के अंदर दहशत बैठ गया। कुछ दूसरे दोस्तों से बात हुई, जो भट्ट के भी दोस्त थे। दोस्तों ने भट्ट को लोगों को न छूने की सलाह दी। भट्ट ने इसे नजरअंदाज किया। पीड़िता के मुताबिक, “उसके पास माफी माँगने का मौका था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। मैंने उसे हर जगह नजरअंदाज करने की कोशिश की। वर्क प्लेस से लेकर दोस्तों के बीच भी। काफी वक्त तक मैं खुद से लड़ती रही। एक दिन मैंने उसका इंटरव्यू देखा। मुझे उसका अमानवीय चेहरा याद आ गया। वह उस वक्त रेप और उत्पीड़न पर बात कर रहा था।”
हाल ही में जब राघवी का रोहिन भट्ट से आमना-सामना हुआ, तो पुराने घाव याद आ गए। राघवी के मुताबिक, “उसने सोचा कि अब वह आवाज बुलंद करेगी। कुछ दिन इसमें बीत गया कि कैसे एक पुरुष ‘क्लास प्रिविलेज’ मिलने के बाद दूसरों को कुछ नहीं समझता है। उसे ट्रांसजेंडर और महिलाओं के अधिकारों का कोई ख्याल नहीं रहता है।”
राघवी का कहना है कि भट्ट ने एक महिला के इमोशन की परवाह नहीं की। न ही कभी माफी माँगी।

कौन है रोहिन भट्ट

रोहिन भट्ट समलैंगिकों के अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट में लड़ने वाला वकील और एक्टविस्ट है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर का सहयोगी रहा रोहिन भट्ट की पहचान LGBTQIA+ समुदाय के लोगों के रिश्ते और शादी को कानूनी मान्यता देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने से बनी। रोहिन भट्ट जुलाई 2022 से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के चैंबर में काम करता है। वह कानूनी और रिसर्च सहायता देता है।
उसने दो मामले, समीर समुद्र द्वारा दायर याचिका और नितिन करणी द्वारा दायर याचिका का मसौदा तैयार किया था। वह सेम सेक्स मैरिज केस में वादियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखता रहा है। बोस्टन के हार्वर्ड लॉ स्कूल में बायोएथिक्स में मास्टर्स करने वाले भट्ट को इंदिरा जयसिंह ने भारत में पहली नौकरी दी।
रोहिन खुद भी समलैंगिक है। रोहिन का जन्म गुजरात के भावनगर में हुआ। उसके पिता एक सिविल सेवक थे और माँ एक कॉलेज लेक्चरर थीं। रोहिन ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स गांधीनगर और उदगाम स्कूल अहमदाबाद से पूरी की।
उसका कहना है कि स्कूल में उसे धमकाया गया था। उसके समलैंगिक दोस्त थे, जो उसे डेटिंग ऐप्स के माध्यम से मिले थे। हालाँकि वह समलैंगिकों के आयोजनों से दूर रहता था। 2021 में हार्वर्ड में प्रवेश मिलने के बाद वह दहशत से बाहर आ पाया।
समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले समलैंगिक रोहिन भट्ट पर एक समलैंगिक महिला ने ही यौन उत्पीड़न का आरोप लगा कर बताया है कि कैसे ‘उच्चवर्ग वाले’ वकील महिलाओं और ट्रांसजेंडर को अपने पैर की जूती समझते हैं।

कहाँ है दलित हमदर्द और आन्दोलनजीवी? भीम आर्मी वाले चन्द्रशेखर को बृजभूषण शरण सिंह ने याद दिलाया ‘घसीटकर ले जाऊँगा’ वाला बयान, पूछा- दलित बेटी पर चुप्पी क्यों: रोहिणी घावरी ने सांसद पर लगाए हैं शोषण के आरोप

                                               बृजभूषण शरण सिंह और चंद्रशेखर रावण
भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद चन्द्रशेखर रावण पर केस दर्ज किए जाने की माँग की है। उन्होंने चंद्रशेखर रावण पर लगे शोषण के आरोपों को लेकर जवाब माँगा है। चंद्रशेखर रावण के खिलाफ रोहिणी घावरी लगातार सोशल मीडिया पर लिख रही हैं।
क्या हमारी मीडिया भी DeepState और Toolkit का हिस्सा है? यदि नहीं फिर कल तक भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगे यौन शोषण के आरोप पर अपनी TRP के चक्कर में चौपालें(परिचर्चा) लगाकर मदारी की तरह डूबडूबी बजाने वाला भीम आर्मी के चंद्र शेखर रावण के विरुद्ध एक दलित बेटी द्वारा ठीक वैसा आरोप लगाने पर क्यों खामोश है? फिर से हमारे मीडिया ने साबित साबित कर दिया है कि मोदी मीडिया का चोला ओढ़ विपक्ष के आगोश में बैठ उसके इशारे पर अपनी चौपाल आयोजित करती है। कहाँ है दलित हमदर्द और आन्दोलनजीवी?       

मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा, “जब मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लगे, तब इन्हीं सांसद महोदय ने कहा था कि अगर समाज मुझे यह अनुमति दे तो मैं इसे घसीटकर ले जाऊँ। आज मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि मेरे ऊपर तो FIR हो गई। मैं न्यायपालिका का सामना कर रहा हूँ। सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आरोप लगते ही मैंने कहा था कि जिस दिन आरोप सिद्ध हो जाएँगे उस दिन फाँसी पर लटक जाऊँगा।”

आगे उन्होंने कहा, “अगर यह लड़की दूसरे समुदाय से होती, तो अब तक सोशल मीडिया और तमाम मंचों पर तूफान मच चुका होता। मगर आज सब इसलिए चुप हैं क्योंकि वह दबे-कुचले समाज से आती है। आज एक दलित बेटी का सवाल है। उस वक्त जाट बेटी का सवाल था। क्या वो मीडिया के सामने मुँह खोलेंगे। जो लड़की आरोप लगा रही है उसका जवाब देना चाहिए।”

बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को न्याय का ठेकेदार बताने वालों की चुप्पी पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, ममता बनर्जी और किसान संगठन क्यों मौन हैं।

चंद्रशेखर पर रोहिणी ने लगाए शोषण के आरोप

आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर रावण पर रोहिणी घावरी ने कई आरोप लगाए हैं। रोहिणी घावरी पहले ही खुलासा कर चुकी हैं वो कि वो चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के साथ रिलेशनशिप में थीं और वहाँ उन्हें धोखा मिला।
रोहिणी घावरी ने बड़ा आरोप लगाया था कि चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ अपनी शादी के बारे में छिपा कर कई बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खेल चुके हैं। रोहिणी ने हाल ही में बताया था कि कैसे चन्द्रशेखर (तब वो सांसद नहीं, एक्टिविस्ट हुआ करते थे) ने अपनी शादी की बात छिपाकर कई लड़कियों की इज्जत के साथ खेला।
ऑपइंडिया से बात करते हुए डॉ रोहिणी घावरी ने बताया था कि कैसे उन्हें दलित समाज के सामने झूठा साबित करने के लिए उन्हें बदनाम करने की तमाम तरह की कोशिशें हुईं और दबाव डलवाकर उनसे वो पोस्ट्स X से डिलीट करवाए गए। रोहिणी कुछ अन्य लड़कियों की आपबीती भी सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं, ताकि अपने आरोपों की पुष्टि कर सकें।
अवलोकन करें:-
चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' और रोहिणी घावरी के चैट्स हो गए थे वायरल
रोहिणी ने सांसद के कई वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें किसी में वो जमीन पर लेटकर माफ़ी माँगते हुए दिख रहे हैं तो किसी में रोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

नीले गमछे वाले ढोंगी दलित हितैषी सांसद जी पर FIR जल्द: स्विट्जरलैंड में रह रहीं वाल्मीकि समाज की PhD स्कॉलर ने ऑपइंडिया को बताया – मिल रही करियर बर्बाद करने की धमकियाँ

                        डॉ रोहिणी घावरी UN में भारत का कर चुकी हैं प्रतिनिधित्व, एक सांसद के ख़िलाफ़ हैं मुखर
भारत में अक्सर एक हिन्दू विरोधी गिरोह समाज को बाँटने की साजिश में लगा रहता है और इसके लिए उसका पहला हथियार होता है – दलितों को भड़काना। दलितों को बार-बार ये एहसास दिलाया जाता है कि वो हिन्दू समाज का हिस्सा नहीं हैं। जाति के नाम पर मुलायमसिंह, लालू यादव, पासवान, माझी और काशी राम आदि दलितों ने दलितों के नाम पार्टियां बनाकर जाति नहीं अपने परिवार और सगे-सम्बन्धियों का ही भला किया है। जाति के नाम पर हिन्दुओं को बांटने का काम कर किया जा रहा और हिन्दू इन ढोंगियों के छलावे में बँट रहा है। जब कभी किसी नेता का निधन होता है है जिस पार्टी को देखो उसे जाति का बहुत बड़ा हमदर्द बताया जाता है, जबकि जाति वहीँ की वहीँ की हैं। इस विषय पर सारी पार्टियां एक हैं।    
खैर, ऐसे में कोई दलित बेटी UN (संयुक्त राष्ट्र) में ‘जय श्री राम’ के साथ अपने उद्बोधन की शुरुआत करे, तो ख़ुद को दलितों का ठेकेदार बताकर पेश करने वालों को अपनी चूलें हिलने का डर लगने लग्न स्वाभाविक है। ऐसा हुआ भी। उस दलित बेटी का नाम है रोहिणी घावरी वाल्मीकि।

वो रोहिणी, जिनके पिता इंदौर में सफाईकर्मी थे लेकिन बेटी ने स्विट्जरलैंड में PhD के लिए 1 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप प्राप्त की। ‘जनपॉवर फाउंडेशन’ चला रहीं डॉ रोहिणी घावरी वाल्मीकि सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। हालाँकि, उनके फ़िलहाल चर्चा में रहने का विषय कुछ और है। रोहिणी एक सांसद के ख़िलाफ़ ख़ासी मुखर हैं। उक्त सांसद नीले गमछे के लिए जाने जाते हैं, भारत के सबसे चर्चित दलित आइकॉन के नाम पर अपना राजनीतिक दल चलाते हैं और उन्हें Y+ सुरक्षा प्राप्त है। आप डॉ रोहिणी घावरी वाल्मीकि के सोशल मीडिया हैंडल पर जाएँगे तो आपको बख़ूबी पता चल जाएगा कि वो नए-नवेले सांसद कौन हैं।

रोहिणी ने सांसद के कई वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें किसी में वो जमीन पर लेटकर माफ़ी माँगते हुए दिख रहे हैं तो किसी में रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई चैट्स भी वायरल हुए हैं, जिनमें वो रोहिणी की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।

नीले गमछे वाले सांसद जी पर FIR की तैयारी

ख़ैर, तो ताज़ा ख़बर ये है कि अब सांसद जी के विरुद्ध औपचारिक FIR दर्ज होने जा रही है। ये सूचना ख़ुद रोहिणी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए साझा की है। फ़िलहाल क़ानूनी सलाहों के कारण वो वीडियो के माध्यम से मीडिया संस्थानों से नहीं जुड़ पा रही हैं, लेकिन FIR दर्ज होने के बाद वो जल्द ही मुखर होकर कुछ नए खुलासे करेंगी। वो अदालत का दरवाजा भी खटखटाने जा रही हैं। डॉ रोहिणी घावरी इससे पहले भी उक्त सांसद के ख़िलाफ़ मुखर रही हैं और उनपर कई लड़कियों का जीवन बर्बाद करने का आरोप लगा चुकी हैं।

रोहिणी ने बताया था कि कैसे सांसद (तब वो सांसद नहीं, एक्टिविस्ट हुआ करते थे) ने अपनी शादी की बात छिपाकर कई लड़कियों की इज्जत के साथ खेला। ऑपइंडिया से बात करते हुए डॉ रोहिणी घावरी ने बताया कि कैसे उन्हें दलित समाज के सामने झूठा साबित करने के लिए उन्हें बदनाम करने की तमाम तरह की कोशिशें हुईं और दबाव डलवाकर उनसे वो पोस्ट्स X से डिलीट करवाए गए। उन्होंने बताया कि उन्हें अब भी धमकियाँ भिजवाई जा रही हैं, सांसद जी अपने लोगों से बातचीत में कह रहे हैं कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, लड़की अपना ही करियर बर्बाद करेगी।

हालाँकि, रोहिणी इतनी अडिग हैं कि उनका कहना है कि उन्हें जेल जाना पड़े तो भी ग़म नहीं, वो इस देश की तमाम महिलाओं के सामने एक उदाहरण बनना चाहती हैं कि आपको घबराए बिना अपने साथ हो रहे अत्याचार के विरुद्ध लड़ाई लड़नी है। रोहिणी का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने सोचा कि इस मामले को अधिक तूल न दिया जाए क्योंकि उनके मन में दलित एकता की बात थी, उन्हें भय था कि इससे दलित एकता खंडित होगी। बता दें कि आरोपित सांसद जहाँ जाटव समाज से आते हैं वहीं रोहिणी वाल्मीकि समुदाय से।

अपने आरोपों को लेकर दोबारा आक्रामक हुईं डॉ रोहिणी घावरी

पिछले एक सप्ताह से रोहिणी कुछ अधिक ही आक्रामक हैं। धोखेबाज, गद्दार, कलंकित, नीच, नामर्द, नालायक… ऐसे तमाम शब्दों का इस्तेमाल वो सांसद जी के लिए कर चुकी हैं। आप इससे ये समझिए कि वो किस आक्रामकता के साथ अपनी लड़ाई लड़ रही हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए वो कहती हैं कि वो गुस्से में हैं, वाल्मीकि समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि जनता हर किसी को जज करती है, पहले उन्हें लगा कि समाज स्वयं ही न्याय करेगा इसीलिए उन्होंने कोई क़ानूनी प्रक्रिया नहीं अपना – लेकिन, अब नहीं। इस दौरान वो समाज और जनता से भी नाराज़ दिखाई देती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस संघर्ष में उन्हें अबतक बदनामी मिली है, लांछन मिले हैं और उन्हें लेकर तरह-तरह की बातें की गई हैं।

डॉ रोहिणी घावरी की विचारधारा क्या है? वो स्वयं को आंबेडकरवादी तो बताती हैं, लेकिन साथ ही कहती हैं कि वो भारत की जनता को विभिन्न जातियों में बाँटकर नहीं देखतीं। विदेश से जब वो देखती हैं तो उन्हें हर भारतवासी अपना लगता है। वो ‘मनुवादी’ जैसे शब्दों से चिढ़ती हैं और ब्राह्मणों को सम्मान की नज़र दे देखती हैं। वो एक बार बता भी चुकी हैं कि स्विट्जरलैंड वाली स्कॉलरशिप की जानकारी देने वाले उनके एक ब्राह्मण शिक्षक ही थे, वहाँ वो नई-नई थीं तो एक ब्राह्मण सहेली ने ही उन्हें सहज बनाया, उन्हें UN का रास्ता दिखाने वाले भी एक ब्राह्मण ही थे। वो कहती हैं कि उनके लिए समर्पण और एकता महत्वपूर्ण है, जब वो विदेश में विदेशी दोस्तों के साथ सहजता के साथ रह सकती हैं, खा-पी सकती हैं – तो फिर देशवासियों संग क्यों नहीं?

सांसद जी को किन ‘बड़ी पार्टियों’ का समर्थन?

डॉ रोहिणी घावरी को लगता है कि उक्त सांसद जी को कुछ बड़ी राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन है। लेकिन, उन्हें विश्वास है कि एक बार उनके असली चरित्र के बारे में खुलासे हुए तो ऐसे दागदार व्यक्ति के साथ ख़ुद को जोड़ने में इन राजनीतिक दलों को शर्म आएगी और वो स्वयं को इनसे अलग कर लेंगे। भारत से कई लोगों ने उन्हें फोन करके FIR दर्ज कराने के लिए कहा है, ताकि वो न्याय के लिए आवाज़ उठा सकें। नीले गमछे वाले सांसद पर FIR होते ही विरोध प्रदर्शन शुरू होंगे। ब्राह्मण समाज के कई एक्टिविस्ट्स ने भी उन्हें समर्थन का भरोसा दिया है। कभी UN के ‘विश्व संसद’ में 3 बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं रोहिणी ने राम मंदिर निर्माण का बचाव करते हुए कई तर्क दिए थे।

अब डॉ रोहिणी घावरी की FIR व उनके द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद क्या होता है, ये तो समय बताएगा। लेकिन, इतना साफ़ है कि नीले गमछे वाले नए-नवेले सांसद जी के दिन ठीक नहीं चल रहे। रोहिणी कुछ अन्य लड़कियों की आपबीती भी सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं, ताकि अपने आरोपों की पुष्टि कर सकें। वो अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। थोड़ी सी नाराज़गी उन्हें भारतीय क़ानूनों को लेकर भी है, क्योंकि उनका मानना है कि स्विट्जरलैंड में उन्हें किसी ने ग़लत तरीके से घूरा भी तो उसपर कार्रवाई होगी। लेकिन, अपने देश को लेकर नकारात्मक बातें न करने की बात कहकर रोहिणी इसपर चर्चा नहीं करना चाहतीं।

‘अकेले में लगाता था जबरन गले, गंदे ढंग से छूता था’: 22 साल की महिला ने पादरी बजिंदर पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

                                            पादरी बजिंदर सिंह (साभार: X/AskAnshul)
पंजाब के कपूरथला में 22 साल की एक महिला ने पादरी बजिंदर सिंह पर उसकी किशोरावस्था में यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पंजाब पुलिस ने शुक्रवार (28 फरवरी) को ईसाई प्रचारक बजिंदर के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी देने और पीछा करने का मामला दर्ज कर लिया है। पीड़िता दिसंबर 2017 से पादरी बजिंदर सिंह की मंडली में शामिल हो रही थी।

पीड़िता 2020 तक पादरी की ‘वर्शिप टीम’ का हिस्सा गई। बकौल पीड़िता, उसका फ़ोन नंबर लेकर पीड़िता उसे अश्लील मैसेज भेजना शुरू कर दिया। उस समय वह 17 की साल थी। FIR में लिखा है, “मैं उससे डरने लगी, लेकिन माता-पिता से बताने में कतराती थी। 2022 में उसने मुझे रविवार को अपने केबिन में बैठाने लगा। जब मैं अकेली होती तो वह मुझे जबरन गले लगाता और गंदे तरीके से छूता था।”

पीड़ित महिला ने बताया, “जब मैं कॉलेज जाती थी तो वह अपनी कार से मेरा पीछा करने लगा। वह मुझे धमकी देता था कि अगर मैंने उससे शादी नहीं की या इस बारे में अपने माता-पिता को बताया तो वह मेरे माता-पिता और भाई को मरवा देगा। इसके बाद मुझे घबराहट के दौरे पड़ने लगे।” पीड़िता ने बताया कि पादरी बजिंदर सिंह ने उससे शादी करना चाहता था, जबकि वह पहले से ही शादीशुदा था।

पीड़िता का कहना है कि पादरी की धमकियों और उत्पीड़न से उसे पैनिक अटैक आने लगे। इसके कारण उसे 3 अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ा। पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि मार्च 2023 में एक अन्य ईसाई प्रचारक राजा सिंह से शादी से पहले पादरी बजिंदर ने उसे धमकाया था। उसने अपने चर्च के अध्यक्ष से उसकी माँ से बात करवाकर चुप रहने के लिए धमकाया था।

पादरी बजिंदर सिंह ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ चलाता है। इस पादरी को लोग ‘चमत्कारी उपचार’ के लिए भी जानते हैं, जो लोगों को ईसाई धर्म में लुभाने के लिए यह पादरी आजमाता है। पादरी बजिंदर को इससे पहले जुलाई 2018 में पंजाब के जीरकपुर में एक महिला से बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उससे भी पहले वह हत्या के एक मामले में जेल में बंद था।

बिहार : हिन्दू लड़कियों को कहां-कहां किसको बेचा? गैंग मुस्लिमों का, पर सबके नाम हिंदू, गाड़ी पर लिखा ‘जय बजरंग बली’… लड़कियों को दोस्ती-प्यार के जाल में फँसा बनाते थे सेक्स वर्कर

            आफताब (दाएँ) अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है ( फोटो साभार: BHaskar & Prabhat Khabar)
बिहार के पूर्णिया में हिन्दू लड़कियों को देह व्यापार में धकेलने वाला एक गैंग पकड़ा गया है। इस सेक्स रैकेट का सरगना आफताब नाम का एक युवक बताया जा रहा है। आफताब अंकित तिवारी बन कर हिन्दू लड़कियों को फंसा रहा था। उसके साथ मौसम और शाकिब समेत कई लोग शामिल थे। इनके ऊपर भी फर्जी रूप से हिन्दू नाम रखने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (29 जनवरी, 2025) को पूर्णिया के कटिहार मोड़ इलाके में चालू हुई छापेमारी से 11 नाबालिग रेक्स्यू की गईं। इन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेला गया था। पुलिस छापेमारी में 32 लोग पकड़े गए हैं। इनमें 6 पुरुष हैं जबकि 26 महिलाएँ हैं।

पूर्णिया के इस रेड लाईट इलाके से रेस्क्यू की गई एक लड़की ने पूरे गैंग की सच्चाई दैनिक भास्कर को बताई है। दैनिक भास्कर को पीड़िता ने बताया है कि इस गैंग का सरगना आफताब खान है। उसने अपना नाम बदल कर अंकित तिवारी कर लिया था। उसने एक थार गाड़ी खरीदी थी और इस पर ‘जय बजरंग बली’ भी लिखवा रखा था।

आफ़ताब बदले हुए नाम के सहारे खुद को कट्टर हिन्दू बताता था। इसके बाद वह हिन्दू लड़कियों को फंसाने लगा। उन्हें शादी का झांसा देता था और फिर उनको धमका कर देह व्यापार करवाने लगता था। रिपोर्ट के अनुसार, उसके धंधे में तीन और लोग शामिल थे। इन्होने भी मुस्लिम नाम बदल कर हिन्दू नाम अपना लिया था।

इनमें एक का नाम मोहम्मद शाकिब है, उसने अपना नाम बदल कर राजीव साह कर लिया था। शाकिब अलग-अलग इलाके से लड़कियाँ लाकर उन्हें देह व्यापार में लगाता था। उसके साथ ही मौसम खान ने अपना नाम ऋषभ साह कर लिया था। वह रॉंग नम्बर के सहारे लड़कियों से दोस्ती करता था। फिर उन्हें देह व्यापार में धकेलता था।

मौसम पर एक लड़की की हत्या का भी मामला दर्ज है। इसी तरह गुड्डू खान नाम का एक युवक भी इस पूरे मामले में संलिप्त है। इस पूरे गैंग में एक महिला जुबैदा भी शामिल है। उसने अपना नाम कैटरीना रखा हुआ है। इन चारों ने आसपास की हिन्दू आबादी में घुलने मिलने को हिन्दू नाम अपनाया हुआ था।

यह लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाने के एक रात के ₹10 हजार तक लेते थे। यह लड़कियों को दूसरे राज्य में बेचते भी थे। लड़कियों को उनकी सुन्दरता के हिसाब से ₹5 लाख तक में बेचा जाता था। यह कुछ दलालों से लडकियाँ खरीदते भी थे।

पुलिस ने इस मामले में रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियों को बाल सुधार गृह भेज दिया है। बाकी सभी को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई चालू कर दी है। हालाँकि, आफताब अभी फरार है। उसके लिए छापेमारी चल रही है।

कर्नाटक : महिला शिक्षकों का बनाता था अश्लील वीडियो, पूछता था मेरे साथ सेक्स कब करोगी: कांग्रेस महासचिव पर अपने ही स्कूल में यौन शोषण करने को लेकर FIR

      गुरप्पा नायडू (बाएँ), कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ (दाएँ) (फोटो साभार: bgnaidu.official/fb)
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी (KPCC) के महासचिव बी गुरप्पा नायडू के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज हुआ है। यह एफआईआर उसी स्कूल की एक पूर्व शिक्षिका ने कराई है जिसका संचालन नायडू खुद करता है। शिक्षिका का दावा है कि कॉन्ग्रेस नेता ने स्कूल की कई शिक्षिकाओं का रेप किया है। उनके अश्लील वीडियो बनाए हैं। उनको ब्लैकमेल करता है। नायडू इस स्कूल का चेयरमैन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक 38 वर्षीय शिक्षिका ने इस मामले में 26 नवम्बर, 2023 को FIR दर्ज करवाई है। उसने बताया है कि 2021 से 2023 के बीच इस स्कूल में वह पढ़ाती थी। शिक्षिका ने बताया कि नायडू लगातार अपने अपने चैम्बर में बुलाता था। नायडू शिक्षिका से पूछता था कि कब वह उससे संबंध बनाने को तैयार होंगी।

FIR में शिक्षिका ने बताया कि एक दिन 2023 में एक दिन इन सबकी अति हो गई। एक दिन नायडू ने शिक्षिका को अपने चैम्बर में बुलाया और जबरदस्ती करने की कोशिश की। जब शिक्षिका ने इसका विरोध किया तो उनके साथ छेड़छाड़ की और उनको अभद्र शब्द कहे।

नायडू ने शिक्षिका को गालियाँ दी और कहा कि अगर वह उसकी बात नहीं मानती तो इसके बुरे परिणाम होंगे। शिक्षिका ने किसी तरह भाग कर खुद को बचाया। वह रोते हुए घर लौटी। इसके बाद उसने अपनी पूरी कहानी अपनी माँ को बताई और नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

शिक्षिका ने FIR में कहा, “स्कूल का चेयरमैन गुरप्पा नायडू एक मनचला है, जिसने कई शिक्षिकाओं का यौन शोषण किया है। उसने इस शोषण का वीडियो बनाया है और जब चाहे तब उनसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए ब्लैकमेल करता है। सभी शिक्षिकाएँ उससे डरती हैं। पहले भी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई है, लेकिन परिणाम के डर से लोग पीछे हट गए हैं।”

शिक्षिका ने बताया है कि स्कूल में काम करने वाली महिलाएँ गरीब घरों की हैं, इसलिए वह बोलने से डरती हैं। शिक्षिका शिकायत के बाद बेंगलुरु की CK अचुकट्टू पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जाँच चालू कर दी है। नायडू ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को नकारा है। उन्होंने इसे आधारहीन और साजिश बताया है।

तमिलनाडु : अपने वेश्यालय को बचाने गए वकील पर मद्रास हाई कोर्ट ने लगाया 10000 रूपए का जुर्माना : जज ने कहा- इसके कागज चेक करो

            वकील पर 10000 रूपए का जुर्माना लगाया (चित्र प्रतीकात्मक , साभार: Livelaw & Leonardo AI)
मद्रास हाई कोर्ट में एक वकील ने अपने वेश्यालय के विरुद्ध कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर कर दी। वकील ने दावा किया कि वह लोगों को स्वेच्छा से सेक्स के लिए मिलाने का काम करता है। हाई कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए वकील की डिग्री जाँचने के आदेश दे दिए।

मद्रास हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करते समय बिफर गया। हाई कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कोई वकील वेश्यालय जैसी चीज को बचाने के लिए याचिका लेकर आया है। हाई कोर्ट ने इसे बड़े दुख की बात बताया और कहा कि यह वकील भी कन्याकुमारी से है जो 100% साक्षर है।

कोर्ट इस याचिका से उखड़ गया और वेश्यालय चलाने वाले वकील से उसकी डिग्री और उसका बार काउंसिल सर्टिफिकेट दिखाने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने बार काउंसिल से कहा कि अच्छे कॉलेज से पढ़े वकीलों को ही पंजीकृत करे और इधर उधर से डिग्री लेने वालों को मान्यता ना दे। कोर्ट ने बार काउंसिल को उसके कागज जाँचने के आदेश भी दे दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि वकालत एक इज्जतदार पेशा है और वकील सामाजिक बदलाव के इंजीनियर हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक गरीब लड़की की गरीबी का फायदा उठा कर उसको वेश्यावृत्ति में झोंका है। कोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया और उस पर 10,000 रूपए का जुर्माना भी लगाया।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच में एक वकील मुरुगन ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में माँग की गई थी कि उसके ऊपर नागरकोइल शहर में वेश्यालय चलाने के कारण दर्ज की गई FIR को रद्द कर दिया जाए और उन पुलिस वालों पर कार्रवाई की जाए जो इस धंधे में खलल डाल रहे थे।

मुरुगन ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर कहा था कि देश में सहमति से किया गया सेक्स मान्य है और वह ऐसे ही लोगों को मिलवाता है। मुरुगन ने अपन वेश्यालय पर कार्रवाई के पीछे रिश्तेदारों की साजिश की भी बात कही थी। उसने हाई कोर्ट से उसके खिलाफ सभी मामले रद्द करने की माँग की थी।

इस मामले में फरवरी, 2024 में नागरकोइल के इस वेश्यालय पर मारे गए छापे में एक 17 वर्ष की लड़की को भी बचाया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया था कि उसका यहाँ शोषण हो रहा था। इस कार्रवाई के बाद मुरुगन के विरुद्ध POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

पाकिस्तानी अधिकारी द्वारा घर में भारतीय महिला से सेक्स की डिमांड, शिकायत करने पर आरोपित को बकरीद के बहाने वापस पाकिस्तान भेजा; पीड़िता को नौकरी से निकाला

                                                   नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग
नई दिल्ली में तैनात एक पाकिस्तानी राजनयिक के घर में काम करने वाली भारतीय महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई है। आरोपित 54 साल का मिन्हाज हुसैन है। वह पाकिस्तान का ही रहने वाला है। पीड़िता की शिकायत पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद आरोपित को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है।

पीड़िता विधवा है। पुलिस में शिकायत करने से पहले उसने पाकिस्तानी राजनयिक से मिन्हाज हुसैन के करतूत की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मिन्हाज को बकरीद के बहाने पाकिस्तान भेज दिया गया। वहीं पीड़िता को नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद मिन्हाज फिर भारत लौट आया और राजनयिक के यहाँ काम करने लगा।

जिस पाकिस्तानी राज​नयिक के घर यह घटना हुई है, उनकी पहचान साद अहमद वाराइच के तौर पर सामने आई है। मिन्हाज हुसैन उनके आधिकारिक आवास में रसोइए के तौर पर काम करता था। पीड़िता भी यहीं घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थी। दोनों नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वाराइच के आधिकारिक आवास के सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे।

रिपोर्ट के अनुसार इसी साल फरवरी में मिन्हाज हुसैन भारत आया था। उसके बाद से वह पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था। उसे यौन संबंध बनाने को कहता था। अश्लील हरकतें करता था। पीड़िता ने वाराइच को इसके बारे में बताया तो उन्होंने उसे बकरीद के बहाने चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया। इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग ने पीड़िता को फोन कर 30 जून तक नौकरी और वाइराइच का घर छोड़ने को कहा। इस बीच मिन्हाज पाकिस्तान से लौटकर फिर वाइराइच के आवास में काम करने लगा।

इस घटना ने पीड़िता को बुरी तरह झकझोर दिया। 28 जून 2024 को वह तिलक मार्ग थाने गई और मिन्हाज हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मिन्हाज को 30 जून को वापस पाकिस्तान भेज दिया। वह आधिकारिक पासपोर्ट और वीजा पर भारत में रह रहा था।

Times of India ने छाप दी फर्जी खबर : आर्मी अफसर बलिदानियों की विधवाओं से करते हैं ‘सेक्स’ की माँग

                                                 कारगिल युद्ध बलिदानी की विधवा
अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने गुरुवार (27 जून) को खबर दी कि अधिकारियों ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बलिदान हुए सैनिकों की पत्नियों से यौन संबंध बनाने की माँग की थी। उस लेख का 
शीर्षक कुछ ऐसा था, ‘हम कारगिल विधवाएँ अधिकारियों की वासना की संतुष्टि के लिए आसान लक्ष्य थीं।’ इससे लगता है कि सेना के अधिकारी इस तरह की माँग कर रहे थे।

शीर्षक में शब्दों का चयन चालाकी से किया गया था। इससे पता चलता था कि कारगिल युद्ध में हुतात्मा सैनिकों की विधवाओं को सेना के अधिकारी अपनी वासना की पूर्ति के लिए शिकार बनाया गया था। हालाँकि, लेख को ध्यान से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि पीड़ितों से यौन संबंध बनाने की माँग करने वाले लोग सेना के अधिकारी नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी थे।

                                  टाइम्स ऑफ इंडिया की विवादास्पद हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

TOI के अनुसार, 60 वर्षीय इंदु सिंह को संकट के समय सहायता के बजाय कई वर्षों तक सरकारी कार्यालयों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बलिदानी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की विधवा ने कहा कि मेरठ में एक सरकारी अधिकारी ने वासना के कारण उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोपित अधिकारी ने उन्हें अपने पैरों से अनुचित तरीके से छुआ भी था।

लालकृष्ण आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी निलंबित हुआ

रिपोर्ट के अनुसार, “उक्त अधिकारी को उनके संबंधित गाँवों में शहीदों के स्मारकों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की देखरेख का काम सौंपा गया था। जब वह आवंटन के संबंध में कुछ मदद के लिए उसके सामने बैठी थी तो अधिकारी ने उनके पैर छुए थे।” इंदु सिंह द्वारा 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क करने के बाद उक्त अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अधिकारी की अनुचित हरकतों और अन्य युद्ध विधवाओं से अधिकारियों के उनके प्रति अपमानजनक रवैये के बारे में सुनने के बाद इंदु ने कहा कि उन्होंने 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने का फैसला किया। आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।”

यह कोई अकेली घटना नहीं है: इंदु सिंह

इंदु सिंह ने एक और घटना का भी जिक्र किया, जिसमें सरकारी स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (LIC) के एक अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों द्वारा की जाने वाली इन हरकतों में दोहरे अर्थ वाली बातें करना, विधवाओं को अपने बगल में बैठने के लिए मजबूर करना या उन्हें देर तक रुकने के लिए कहना शामिल था।
पीड़िता ने कहा, “मैं पढ़ी-लिखी थी और हर मौके पर इस कृत्य का विरोध करती थी। हालाँकि, अधिकांश युवा विधवाएँ, जो अशिक्षित थीं और ग्रामीण क्षेत्रों से थीं और बाहरी दुनिया से उनका कोई संपर्क नहीं था, उन्हें परेशान किया जाता था।” इंदु सिंह के अनुसार, सरकारी अधिकारी विधवाओं को ‘आसान शिकार’ मानते थे। उन्होंने बताया, “विधवापन के शुरुआती दिनों में मैंने नैतिकता का पूर्ण पतन देखा।”

लोगों की नाराजगी के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक बदला

लेख की विषय-वस्तु से स्पष्ट है कि कारगिल युद्ध की विधवा इंदु सिंह द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप राज्य सरकार के अधिकारियों पर लगाए गए थे, न कि भारतीय सेना के अधिकारियों पर। TOI ने पाठकों को गुमराह करने का प्रयास किया। खासकर उन लोगों को जो इस लेख को पूरा पढ़ने का धैर्य नहीं रखते।
सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ को इस लेख का शीर्षक बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस लेख का नया शीर्षक है, ‘हम कारगिल की विधवाएँ “सरकारी अधिकारियों के अवांछित प्रयासों का आसान लक्ष्य थीं”।’
हालाँकि, भारतीय मीडिया क्षेत्र में क्लिकबेट लेखों की कोई कमी नहीं है, लेकिन एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक को ध्यान आकर्षित करने के लिए भ्रामक रणनीति का सहारा लेते देखना निराशाजनक था।

केरल : CPM नेता शानवास खान ने 50 साल छोटी महिला वकील को घर बुलाकर किया यौन शोषण

                CPM नेता शान्वास खान (बाएँ) (चित्र साभार : Onmanorama & New Indian Express)
केरल के कोल्लम में CPM के एक नेता और वरिष्ठ वकील ने एक जूनियर महिला वकील को घर पर बुलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। CPM नेता ने अपना घर दिखाने के बहाने महिला वकील के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। महिला ने अब उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल के कोल्लम जिले के CPM नेता और वकील E शानवास खान (74) के खिलाफ एक 24 वर्षीया वकील ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया है। महिला ने बताया है कि वह 14 जून, 2024 को अपनी एक साथ के साथ एक काम के लिए शानवास के घर पर गई हुई थी।

जब महिला वकील वापस जाने लगी तो खान ने उसे हाथ का इशारा देकर बुलाया और पूछा कि क्या वह उनका घर देखना चाहेगी। घर दिखाने के बाद उन्होंने महिला वकील से कहा कि क्या वह जाने से पहले उन्हें किस नहीं करेगी। महिला ने जब मना किया तो खान ने उसे जबरदस्ती पकड़ लिया और फिर माथे पर किस भी किया।

खान ने महिला वकील से यह भी कहा कि वह अगली बार उनके ऑफिस अकेली आए। महिला वकील ने वापस आने के बाद यह बात अपने वरिष्ठ वकील को बताई और फिर इस मामले में FIR दर्ज हुई। महिला वकील ने CPM नेता खान को 20 जून, 2024 सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने का मौका भी दिया था लेकिन उन्होंने माफ़ी नहीं माँगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि CPM नेता खान ने घटना के बाद महिला वकील को फोन करके उससे सुलह-समझौते की कोशिश भी की। खान ने महिला वकील से कहा कि यह सब उन्होंने यह सब उन्हें अपनीं बेटी की तरह समझ कर किया था। खान ने इसके बाद महिला वकील से फोन पर माफी माँगी।

यह भी बताया गया है कि इस मामले में कई वरिष्ठ वकील महिला वकील पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। शानवास खान की गिनती केरल के बड़े वकीलों में होती है। वह केरल की बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे हैं। शानवास खान CPM के बड़े नेता भी हैं और कोल्लम में CPM की ट्रेड यूनियन CITU के अध्यक्ष भी हैं।

उनके खिलाफ पुलिस ने शीलभंग, महिला का यौन उत्पीड़न करने और अश्लील टिप्पणियाँ करने समेत कई धाराओ में मुकदमा दायर किया है। बताया जा रहा है कि शानवास खान अब अंतरिम जमानत की कोशिश कर रहे हैं।

कोलकाता : ‘रात साथ में गुजारो, पास कर दूँगा’: विश्व भारती का गेस्ट प्रोफेसर अब्दुल्ला छात्राओं को भेजता था गंदे मैसेज

कोलकाता की विश्व भारती यूनिवर्सिटी की तीन छात्राओं ने एक गेस्ट प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने सेमेस्टर परीक्षा में पास करने के बदले में उनसे यौन संबंध बनाने को बोला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोफेसर का नाम अब्दुल्ला मोल्लाह है। मोल्लाह के खिलाफ दी गई शिकायत में तीन विभाग के छात्राओं ने आरोप लगाया है। ये छात्राएँ फारसी, उर्दू और इस्लामिक स्टडीज के डिपार्टमेंट की हैं। इनका कहना है कि गेस्ट टीचर ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से अश्लील संदेश भेजे और कई बार उन्हें अनुचित तरीके से छुआ।

छात्राओं ने इस संबंध में 28 मार्च को शांतिनिकेतन पुलिस थाने में दी है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें फेल होने का डर दिखाकर इस प्रकार से प्रताड़ित किया गया। प्रोफेसर की हरकत ज्यादा बढ़ने पर छात्राएँ उसके विरुद्ध सारे सबूत लेकर थाने पहुँचीं। उन्होंने प्रोफेसर के भेजे मैसेज दिखाए। इन संदेशों में उसने छात्राओं से अलग जगह मिलने और राज गुजारने जैसी बातें कही हुई हैं।

इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वो मामले की जाँच कर रहे हैं। वहीं प्रोफेसर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोप खारिज करते हुए कहा, “मैं इस वक्त बोलपुर में नहीं हूँ। बाहर हूँ। मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। मुझे फँसाया जा रहा है।”

आरोपित टीचर का कहना है, “वॉट्सएप पर अगर किसी छात्र को कोई मैसेज भेजा जाता है तो वह पढ़ाई को लेकर होता है। उनका किसी और से कोई रिश्ता नहीं है। मैं यहाँ इतने लंबे से पढ़ा रहा हूँ। पहले कभी मेरे खिलाफ इस तरह के आरोप नहीं लगे।”

वहीं विश्व भारती यूनिवर्सिटी फैकल्टी एसोसिएशन के प्रवक्ता सुदीप्त भट्टाचार्य ने कहा कि आरोपों की जल्द से जल्द उचित जाँच की जानी चाहिए।


केरल : ‘ओरल सेक्स’ वाले प्रोफेसर इफ्तिखार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल: पढ़ाता था – मुख मैथुन मतलब कम्युनिकेशन, चौड़ी ललाट वाली लड़कियाँ कामातुर

केरल सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्राओं को कविता और साहित्य के नाम पर ‘ओरल सेक्स’ को बेस्ट बताने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। केरल पुलिस ने छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में बेकल पुलिस ने कान्हागंज की अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें आईपीसी की धारा 354 के तहत चार्जशीट अदालत को सौंपी गई।

ये चार्जशीट 13 नवंबर वाले मामले में दाखिल की गई, जब परीक्षा के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई थी। उस छात्रा को उठाने के बहाने इफ्तिखार अहमद ने उसकी छाती व अन्य अंगों को अनुचित तरीके से छुआ। लेकिन इस मामले में केरल सेंट्रल वूनिवर्सिटी की आंतरिक टीम ने जाँच की खानापूर्ति की और आरोपित इफ्तिखार अहमद को आरोपों से बरी कर दिया। इस दौरान इफ्तिखान अहमद के खिलाफ क्लास की सभी छात्राओं ने उत्पीड़न के आरोप लगाए और कहा कि क्लासरूम में कविता और साहित्य के नाम पर इफ्तिखार अहमद घटिया बाते करता है।

इफ्तिखार अहमद पर 34 छात्राओं ने आरोप लगाए थे। इसके बावजूद आंतरित जाँच समिति ने आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद चार छात्राओं के परिजनों ने पुलिस में शिकायत की। जानकारी के मुताबिक, 23 नवंबर को असिस्टेंट प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निलंबित कर दिया, लेकिन पुलिस को सूचना नहीं दी। लेकिन जब चार छात्राओं के परिजनों ने कलेक्टर से शिकायत की, तो कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी, जब जाकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने इस मामले में इफ्तिखार अहमद के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354ए(1) और आईपीसी की धारा 509 के तहत मामला दर्ज किया। हालाँकि पुलिस ने सभी छात्राओं के आरोपों को खारिज करते हुए सिर्फ एक छात्रा के यौन उत्पीड़न का ही मामला पाया। बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की जाँच समिति आईसीसी ने इफ्तिखार अहमद को यौन उत्पीड़न की जगह सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया, इसके बाद 23 फरवरी को कुलपति ही उसका निलंबन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद पूरे यूनिवर्सिटी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके 6 दिन बाद 29 फरवरी को कुलपति ने इफ्तिखार अहमद को फिर से निलंबित कर दिया। इस बार इफ्तिखार अहमद की जमानत की शर्तों को लेकर पेंच था।

छात्राओं के आरोप

छात्राओं ने ये आरोप लगाया कि इफ्तिखार अमहद कविता और साहित्य के नाम पर सेक्स, सेक्सुअल प्लेजर और चरम आनंद की बात करते हैं। अहमद क्लास के लिए डिजाइन अपने कोर्स में महिलाओं को सेक्स की वस्तु कहते हैं। ऐसी ही एक कक्षा में अहमद ने कहा था, “ओरल सेक्स (मुख मैथुन) कम्युनिकेशन का सबसे बेहतरीन माध्यम है।” क्लास में ऐसा ही एक अश्लील उदाहरण देते हुए अहमद ने कहा था, क्या तुम लोग जानती हो कि बस पर सबसे खुश बस कंडक्टर क्यों होता है? क्योंकि, वह बहुत से लोगों (महिलाओं) में टच करता है।”
अहमद ने तो क्लास की एक छात्रा को लेकर ही अश्लील टिप्पणी कर दी। अहमद ने क्लास की एक छात्रा से कहा, क्या तुम मुझे अपने पूरे शरीर को चाटने दोगी, जैसा कि ‘जर्मन संभ्रांत वर्ग’ में प्रचलित था। उन्होंने चौड़ी ललाट वाली लड़कियों को क्लास में घूरते हुए कहा कि मध्यकालीन इंग्लैंड में चौड़ी ललाट वाली महिलाओं को काम-वासना से परिपूर्ण महिला माना जाता था।
इसी तरह ‘To His Coy Mistress’ कविता की चर्चा करते हुए अहमद ने कविता के संदर्भ हटकर बताया कि योनि प्रवेश (Penetration) कैसे किया गया है। इस दौरान अहमद ने छात्राओं की देखकर शारीरिक रूप से अश्लील संकेत भी किया। अहमद ने पढ़ाने को सेक्स करने की तरह बताया और कहा कि इसमें बोरियत से बचने के लिए पोजिशन बदलते रहने और अलग-अलग तकनीक अजमाने की जरूरत होती है।
एक छात्रा की ओर इशारा करते हुए अहमद ने यौन प्रलोभन और उन्माद को लेकर कहा कि वह दो साड़ी देकर उस लड़की को अपने कमरे में बुलाए और वह आने के लिए तैयार भी हो गई, लेकिन इसके बदले उसने तीन साड़ी की माँग की। अहमद ने कविता के जूनून को महिलाओं के अंडरवियर सूंघने की दीवानगी से की।

‘मेरी ब्लाउज के बारे में बात करते थे कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता’: असम की पूर्व महिला मंत्री ने बताया राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में क्या हुआ, छोड़ी पार्टी

कांग्रेस की बिस्मिता गोगोई ने छोड़ी पार्टी, सुनाया राहुल गाँधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान का वाकया
असम में कांग्रेस की एक महिला नेता ने अपनी ही पार्टी में महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर आवाज़ उठाई है। कलियाबोर के खुमतई से कांग्रेस विधायक रहीं बिस्मिता गोगोई ने जब कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके ब्लाउज पर टिप्पणी की गई, जिसका उनके जीवन पर नकारात्मक रूप से गहरा असर पड़ा। बिस्मिता गोगोई अब भाजपा में शामिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि ये वाकया तब का है, जब वो कमल के फूल की डिजाइन वाला ब्लाउज पहनी हुई थीं।

उन्होंने बताया, “मैंने कभी इस बारे में कि मेरा ब्लाउज की डिजाइन कमल के फूल वाली है। इस डिजाइन के ब्लाउज पहनना एक सामान्य बात है। मैं यहाँ सार्वजनिक रूप से ब्लाउज के बारे में बात करने में भी कठिनाई महसूस कर रही हूँ। ये घटना ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान की है, जब राज्य स्तर पर खुमतई में इसका आयोजन हुआ था। उसी दौरान मैंने ये ड्रेस पहनी थी। कांग्रेस नेताओं ने ये देख कर सोचा कि मैं भाजपा में शामिल होने जा रही हूँ।”

बिस्मिता गोगोई ने यहाँ तक बताया कि कांग्रेस का आलाकमान भी ‘राजीव भवन’ में इसी मुद्दे पर बात कर रहा था। असम सरकार में मंत्री रहीं बिस्मिता गोगोई ने बताया कि ये घटना उनके लिए काफी अपमानजनक थी, जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो वो रो पड़ीं। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि उन्हें न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि पार्टी की आंतरिक बैठकों से भी दूर रखा गया। उन्होंने बताया कि ये एक महिला का अपमान था, इससे मुझे वास्तव में ठेस पहुँची थी।

बिस्मिता गोगोई ने कहा कि उस दिन उनकी प्रतिष्ठा ख़त्म कर दी गई थी। उन्होंने पूछा कि जिस दल में महिला विरोधी बातें होती हों, वहाँ लोग कैसे रोक सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि हर कदम पर उनकी मानसिक प्रताड़ना की गई है। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि वो उसके कामकाज में शामिल हों। महत्वपूर्ण फैसले लेने में उनकी सहभागिता खत्म कर दी गई। कांग्रेस और ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU)’ के 150 से अधिक नेता रविवार (28 जनवरी, 2024) को भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

असम की ही एक अन्य महिला नेता अंगकिता दत्ता भी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस ने डॉ अंगकिता दत्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”

केरल : केक खिलाया, पोर्न दिखाया…फिर किया 13 साल के नाबालिग का यौन उत्पीड़न

प्रतीकात्मक तस्वीर
केरल के तिरुवनंतपुरम में एक पादरी ने नाबालिग बच्चे का यौन शोषण कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। केरल पुलिस ने शुक्रवार (19 जनवरी,2024) को कट्टक्कडा के पेंटेकोस्टल चर्च के इस पादरी को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से आरोपित को न्यायायिक हिरासत में भेज दिया।

इस पादरी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 59 साल के इस पादरी की पहचान रविन्द्रनाथ के तौर पर की गई। रविन्द्रनाथ ने 13 साल के बच्चे को पहले अपनी बातों से फुसलाया। इसके बाद उसका यौन शोषण किया।

ये घटना आरोपित को हिरासत में लेने से दो दिन पहले 17 जनवरी 2024 की है। बताते चलें कि इस लड़के को इसकी माँ छोड़ कर चली गई है। वो अपनी अपनी दादी के साथ रहता है।

घटना के दिन बच्चे की दादी अस्पताल गई थीं। इसी का फायदा उठाकर पादरी ने बच्चे को बहकाया- फुसलाया और अपने घर ले गया। घर ले जाकर पादरी ने उसे केक खिलाया। उसने कथित तौर पर उसे टैबलेट पर अश्लील फोटो दिखाईं और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।

दक्षिण भारत में पादरियों के बच्चों और औरतों के यौन शोषण करने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते साल तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक महिला ने नींद की 40 गोलियाँ निगल आत्महत्या की कोशिश की थी। महिला ने पादरी के यौन शोषण से तंग थी।

आरोपित पादरी 39 साल जगन था। उसका महिला से पहचाना चर्च में प्रार्थना के लिए आने-जाने के दौरान हुआ था। इससे पहले मार्च 2023 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में एक पादरी नर्सिंग छात्रा के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

ब्रिटेन : ‘मदरसे में पढ़ा हूँ, मुझे पता नहीं ये(बलात्कार) अपराध है’: 13 साल की बच्ची से बलात्कार कर सजा से बच गया आदिल

                   ब्रिटेन में 13 साल की लड़की से संबंध बनाने वाला आदिल राशिद (फोटो साभार: Dailymail)
सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें आदिल राशिद नाम के युवक ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप किया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि रेप करना अपराध है। उसने कहा कि वह मदरसे में पढ़ा है और वहाँ उसे महिलाओं को बेकार और सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप की तरह बताया जाता था।

राशि की दलील को सुनते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को खत्म कर दिया और कहा, “आप 18 वर्ष के हैं, लेकिन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जब यौन मामलों की बात आती है तो आप बहुत अनुभवहीन और अपरिपक्व हैं।” जज ने कहा कि चूँकि वह निष्क्रिय था और उसमें मुखरता की कमी थी, इसलिए जेल भेजना नुकसानदायक हो सकता है।

राशिद ने कहा कि लड़की ने उसे ऑनलाइन बहकाया था, इसके बाद उसने नाबालिग से यौन संबंध बनाए थे। यौन संबंध बनाने से पहले दोनों ने लगभग दो महीने तक फेसबुक पर चैटिंग की थी और उसके बाद फोन पर एक दूूसरे से बातें की थीं। इसके बाद वे दोनों एक स्थान पर मिले और होटल का एक कमरा बुक किया।

13 साल की नाबालिग लड़की ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे दो घंटे तक होटल में रुके। वहाँ राशिद बाथरूम गया और कंडोम पहनकर बाहर आया। इसके बाद दोनों ने सेक्स किया। इस घटना के बाद राशिद सीधा मस्जिद गया और वहाँ नमाज पढ़ी। इसके बाद वह अपने घर लौट आया। उसी सप्ताह पुलिस ने राशिद को गिरफ्तार कर लिया।

इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर कर लोग न्यायिक व्यवस्था पर हमला बोल रहे हैं, जिसमें आदिल राशिद को नाबालिग लड़की से रेप के लिए बेहद कम सजा दी गई। दरअसल, यह मामला ब्रिटेन का है और जनवरी 2013 में सामने आया था। हालाँकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस खबर को अब शेयर कर रहे हैं। एश्लिया सिमोन नाम की महिला ने एक्स पर लिखा, “ये ब्रिटेन का हाल है। ये बदमाश फाँसी का हकदार है, लेकिन उसे आजादी दे गई।”

ये मामला ब्रिटेन के नॉटिंघम का है, जहाँ आदिल रशीद नाम के युवक ने 13 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट में कहा कि उसे ब्रिटेन के कानून की जानकारी नहीं है, क्योंकि वो मदरसे में पढ़ा है। मदरसे में उसे बताया गया है कि महिलाओं की औकात सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप से ज्यादा की नहीं होती है।

इसके बाद उसके वकील ने उसे ‘सेक्स को लेकर भोला या अनजान’ साबित कर दिया। इस मामले में न्यायाधीश माइकल स्टोक्स ने राशिद को 9 महीने की जेल की सजा और 2 साल की निलंबित सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, भले ही इसमें उसमें मर्जी शामिल हो। इससे पहले नॉटिंघम क्राउन कोर्ट ने कहा था कि ऐसे अपराधों के लिए आमतौर पर चार से सात साल की जेल की सजा होती है।

पूछताछ में राशिद ने बताया था कि वो लड़की 13 की है, इस बारे में उसे पता था। वो शुरू में सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहता था, लेकिन लड़की को देखकर बहक गया और सेक्स संबंध भी बनाए। पुलिस के अनुसार, इसके बारे में नाबालिग लड़की ने इसके बारे में स्कूल में अपनी सहेली को बताया था। इसके बाद उस लड़की ने शिक्षक को जानकारी दी थी। फिर शिक्षक ने पुलिस को बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

‘चूस-चूस कर सुजा देते थे, कुसुमित निप्पल्स देख पागल हो जाते थे डोनाल्ड ट्रम्प’ : ‘सेक्स टेप’ केस में बोली पीड़िता – बहुत दर्द होता था

डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर आरोप - लड़कियों की तस्करी करने वाले से संबंध (फोटो साभार: Wrestling-Edge)
अभी दुनिया भर में जेफरी एप्सटीन के साथ बड़े-बड़े नेताओं और सेलेब्स का नाम जुड़ने के कारण बवाल मचा हुआ है। जेफ्री एप्सटीन लड़कियों की तस्करी करने वाला माफिया था, जिसके पास अमेरिका के वर्जीनिया में 72 एकड़ का एक प्राइवेट द्वीप भी था। इसका नाम है – लिटिल सेंट जेम्स आइलैंड। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों डोनाल्ड ट्रम्प एवं बिल क्लिंटन के अलावा UK के प्रिंस एंड्रू तक का नाम जेफरी एप्सटीन के ग्राहकों में जुड़ा है। मामला अमेरिका की अदालत में चल रहा है।

इसी बीच पीड़िताओं में से एक सारा रैनसम सामने आई हैं। उन्होंने बताया है कि डोनाल्ड ट्रम्प के कई लड़कियों के साथ यौन संबंध थे, जिनमें से एक सारा की दोस्त भी थी। बकौल सारा रैनसम, जेफरी एप्सटीन के न्यूयॉर्क स्थित टाउनहाउस पर डोनाल्ड ट्रम्प देखे गए थे। सारा ने बताया, “मेरी दोस्त ने मुझे डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उसकी अनौपचारिक दोस्ती के बारे में बताया था। डोनाल्ड ट्रम्प के मन में उसके लिए कुछ न कुछ था। उसने मुझे बताया कि कैसे ट्रम्प लगातार बताते रहते थे कि वो ‘कुसुमित (Pert) निप्पल्स’ को कितना पसंद करते हैं।”

पीड़िता ने ये भी बताया कि उसने डोनाल्ड ट्रम्प की हरकतों के कारण कई बार लड़कियों की निप्पल्स में दर्द हो जाता था और वो इसकी गवाह है। सारा रैनसम ने आरोप लगाया कि जेफरी एप्सटीन के न्यूयॉर्क स्थित बँगले पर उसने अपनी दोस्त को डोनाल्ड ट्रम्प के साथ देखा था। कोर्ट में डाले गए दस्तावेज में तो सारा ने डोनाल्ड ट्रम्प को ‘Pedophile (बच्चों के प्रति कामुकता रखने वाला)’ तक बता दिया है। साथ ही उन्होंने बिल क्लिंटन पर भी कई आरोप लगाए हैं।

कोर्ट के दस्तावेज में पीड़िता ने कहा है, “डोनाल्ड ट्रम्प मेरी दोस्त की निप्पल्स को तब तक उँगलियों से दबा कर हिलाते रहते थे और चूसते रहते थे, जब तक उन पर एकदम से निशान न बन जाएँ। एक शाम जब मैं और मेरी दोस्त साथ नहा रही थी तो उसने मुझे अपने निप्पल्स दिखाए। ये काफी दुःखदायी था। वो लाल हो गए थे और सूजे हुए थे। मैं उसके निप्पल्स को देख कर डर गई थी।” उसने कहा कि ट्रम्प व क्लिंटन वगैरह ने जो किया उन्हें इसकी सज़ा मिलनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बिल क्लिंटन के खिलाफ चुप रहने के लिए उनकी पत्नी हिलेरी ने लोगों को भेज कर जबरन उनसे समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए। उन्होंने कहा कि 2008 में उनकी एक दोस्त ने एप्सटीन, क्लिंटन, गायक ब्रेनसन और ट्रम्प के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पीड़िता ने कहा कि उल्टा उसकी दोस्त को ‘गंदी वेश्या और झूठी’ महसूस कराया गया। ‘क्लिंटन फाउंडेशन’ ने लड़की को चुप रहने के लिए पैसे भी दिए थे।

दिल्ली : ‘एक रात हमारे साथ सो जाओ तो ड्यूटी बढ़ा देंगे’: महिला कर्मचारियों ने खोली केजरीवाल के अस्पताल की सच्चाई, AAP विधायक का भी लिया नाम

बुराड़ी का अस्पताल और प्रदर्शन करती महिलाएं (चित्र साभार: HT & ScreenGrab form Viral Video)
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। रहस्यमयी कोली कांड से लेकर राशन कार्ड कांड, फर्जी डिग्री, घरेलू अत्याचार, भ्रष्टाचार, शराब घोटाला से पीछा छूटा नहीं, दिल्ली हॉस्पिटल्स में नकली दवाइयों और अब हॉस्पिटल में नौकरी के लिए यौन शोषण आदि यानि दूसरे शब्दों के कहा जाए कि केजरीवाल वास्तव में परिवर्तन ला रहे हैं। अपराध का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ केजरीवाल पार्टी लिप्त नहीं पायी जा रही हो। 
फर्जी सर्वे कराया है “आप” ने कि क्या जेल से सरकार चलानी चाहिए केजरीवाल को। ED को भी अभी स्वयं नहीं पता कि पूछताछ के बाद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का आधार बनेगा या नहीं। लेकिन “आपियों” का propaganda चालू है : “मोदी डरा हुआ है केजरीवाल से, उसके कामों से और उसकी लोकप्रियता से, इसलिए मोदी “आप” को ख़त्म करना चाहता है”।
24 नवंबर, 2012  का केजरीवाल का एक ट्वीट बाजार में चल रहा है जिसमें उसने लिखा था 
“As a patriot Indian, my head hangs in shame when our corrupt leaders do not appear before ED and CBI even after multiple summons by the investigating agencies, when they should have resigned from their posts immediately as soon as the allegations were made”
अब जमाना बदल गया, 2012 में भ्रष्टाचार को मिटा कर साफ़ राजनीति लाने की कसमें खाते थे केजरीवाल लेकिन आज भ्रष्टाचार की दलदल में डुबकी लगाए हुए नई तरह की राजनीति शुरू कर दी है “जनाब” ने। कोई क्षेत्र ऐसा बचा होगा  जिसमें घोटाला न किया हो केजरीवाल और उसके लोगों ने लेकिन फिर भी स्वघोषित “ईमानदार” हैं।

दिल्ली के बुराड़ी के एक सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारियों ने काम देने के एवज में शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि उनके शीर्ष अधिकारी उन पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दबाव बनाते हैं और ऐसा ना करने पर उनको प्रताड़ित किया जाता है। इस मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी संज्ञान लिया है।

बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल के बाहर महिलाएँ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें अस्पताल में ड्यूटी नहीं दी जा रही है। उन्हें पूरी ड्यूटी दिए जाने के एवज में उनके अधिकारी उनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए कहते हैं और रिश्वत भी माँगते हैं।

महिलाओं ने कहा कि अस्पातल में AAP के स्थानीय विधायक संजीव झा के लोग भी हैं और उनके सहयोग से ये कुकर्म किया जाता है। महिलाओं के कहा कि संजीव झा के लोग पैसे लेकर-लेकर लोगों को नौकरी देते हैं। साथ ही आरोपितों को भी बचाते हैं। महिलाओं ने AAP विधायक और उसके लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।

जानकारी के अनुसार, बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में मेडिकल के अतिरिक्त तमाम स्टाफ को आउटसोर्सिंग से रखा जाता है। इसके तहत एक कम्पनी ग्लोबल वेंचर यह काम करती है। इसका काम इन कर्मचारियों की भर्ती और उनके काम की देखरेख होता है। यह भी सामने आया है कि यहाँ कर्मचारियों को रखने के लिए रिश्वत ली गई।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुपरवाईजर और मैनेजर पद पर काम करने वाले नीरज शर्मा, राजकुमार और आदर्श नाम के शख्स पर ये आरोप लगाए गए हैं। एक महिला कर्मचारी का कहना है कि उसे इन अधिकारियों की करतूतों के बारे में सब पता है। महिलाओं के प्रदर्शन के इस वीडियो में उनके आरोप सुने जा सकते हैं।

महिला ने बताया है कि इस अस्पताल के बेसमेंट में ये अधिकारी महिला कर्मचारियों को बुलाते थे और उनका शारीरिक शोषण करते थे। उसका कहना था कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार ना होने वाली महिलाओं को अस्पताल में मात्र 15 दिन काम दिया जाता था।

अधिकारी महिलाओं से कहते थे कि उनके साथ एक रात सोने पर वह काम के दिन बढ़ाकर 20-25 कर देंगे। महिला का कहना है कि यदि अस्पताल के बेसमेंट के सीसीटीवी की जाँच करवाई जाए तो सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं ने इस मामले में स्थानीय AAP विधायक संजीव झा का संबध बताया है।

महिला का कहना है कि नीरज और राजकुमार यहाँ काम करने वाली महिलाओं से एक-एक करके अकेले में मिलने को कहते थे। उन्हें इस विषय में आवाज उठाने से भी रोका जाता था। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया गया।

महिलाओं का कहना है कि उन्हें धमकाया भी गया है। इसके अलावा एक महिला से मारपीट की घटना भी सामने आई है। उसके साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। इस मामले में महिला ने दिल्ली पुलिस के पास मामला भी दर्ज करवाया है।

इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में उत्तरी दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट माँगी है।

दिल्ली पुलिस को की गई शिकायत में महिला ने 17 और 19 दिसम्बर 2023 को मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी के खिलाफ IPC की धारा 323, 354, 506, 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।