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पश्चिम बंगाल : बीजेपी शासित राज्य में कोई अप्रिय घटना होने पर चील-कौओं की चिल्लाने वाला मीडिया और विपक्ष खामोश क्यों? नहीं रुक रही दरिंदगी, कोलकाता में डॉक्टर और वकील के बाद फिर महिला की लूटी आबरू, ममता बनर्जी मौन

बीजेपी शासित किसी भी राज्य में कोई भी अप्रिय घटना होने पर मीडिया से लेकर सारा विपक्ष चील-कौओं की चिल्लाता रहता है, लेकिन बंगाल में हो रहे महिला अत्याचारों पर मातम क्यों पसरा? क्या सारी नैतिकता सिर्फ बीजेपी को ही सिखानी आती है गैर-बीजेपी राज्यों को नहीं, क्यों? अब इसे दोगलापन, नौटंकीबाज़ी और      
पश्चिम बंगाल में संदेशखाली से राजधानी कोलकाता तक महिलाओं का लगातार योन शोषण होने के बावजूद ममता बनर्जी सरकार चुप्पी साधे बैठी है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और लॉ कालेज में बर्बर रेप-मर्डर की दर्दनाक यादें अभी धूमिल भी नहीं हुईं है कि कोलकाता में महिला से दरिंदगी के फिर एक मामले ने राजधानी को शर्मसार कर दिया है। तृणमूल सरकार के महिलाओं के शोषण के प्रति हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने का ही दुष्परिणाम है कि इस बार तो दुष्कर्म होने के एक महीने तक पुलिस भी सोती रही और दुष्कर्मी खुलेआम छुट्टे घूमता रहा। संदेशखाली यौन शोषण से लेकर कोलकाता के रेप के दोनों मामलों में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की संलिप्तता सामने आई थी। बेशर्मी की हदें पार करते हुए सरकार दुष्कर्म जैसे घिनौने मामलों में भी अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं को बचाने की कोशिश करती रही। कोलकाता में हुए रेप के इस मामले में अब पुलिस जांच कर रही है कि इसमें भी तो टीएमसी कनेक्शन नहीं है। पीड़िता पहले इसलिए डरी-छुपी रही, क्योंकि दुष्कर्मी ने उसका अश्लील वीडियो बना लिया था और उसे वायरल करने की धमकियां दे रहा था। कोलकाता में लगातार रेप की घटनाओं के बाद यह भी सवाल उठ रहे हैं कि राहुल-प्रियंका को ऐसे भयावह मामलों के बाद भी कोलकाता जाने की फुर्सत क्यों नहीं मिल रही है?

इतनी दरिंदगी के बाद राहुल-प्रियंका को कोलकाता आने से कौन रोक रहा है
पश्चिम बंगाल की राजधानी में मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर, लॉ कालेज के छात्रा और अब विवाहिता के साथ हुई रेप और हत्या की घटना के बाद देशभर में गुस्से का माहौल है। महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रहते बंगाल में महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं से देश दहल रहा है। ऐसी घिनौनी घटनाओं को लेकर लोग अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं, लेकिन आपको हैरानी होगी कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मामले पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस पर कुछ नहीं बोल रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि हाथरस कांड पर ये कहने वाले कि ‘दुनिया की कोई भी ताकत मुझे हाथरस के इस दुखी परिवार से मिलकर उनका दर्द बांटने से नहीं रोक सकती’ आखिर इंडी गठबंधन के शासन वाले ममता बनर्जी के बंगाल जाने से उन्हें कौन रोक रहा है? इसे आप दोगलापन नहीं तो क्या कहेंगे कि बीजेपी शासित राज्य में कुछ हो तो दौड़ पर चले जाने वाले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा आखिर बंगाल की घटना पर एक शब्द तक बोल भी नहीं पा रहे हैं।

रेप की घटनाओं से पश्चिम बंगाल लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल खड़े हो रहे

ममता बनर्जी के राज में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना हुई थी। इस नृशंस घटना के देशभर में सुर्खियां बनने के बाद भी ममता बनर्जी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। इसके बाद कोलकाता के लॉ कॉलेज में गैंगरेप की घटना हो गई, जिसमें मुख्य आरोपी तृणमूल कांग्रेस से ही जुड़ा है। अब फिर कोलकाता में विवाहित महिला के साथ दरिंदगी होने की घटना को लेकर राज्य में लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बार मामला कोलकाता के पार्क स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का है। जहां महिला ने लगभग एक महीने पहले बलात्कार होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पहले तो पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और मामले को रफा-दफा करना चाहती थी, लेकिन महिला के थाने पहुंचकर विरोध दर्ज करने के बाद आखिरकार पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर जांच के लिए मजबूर होना पड़ा। पश्चिम बंगाल पुलिस की ऐसी लापरवाह कार्यशैली कई सवाल खड़े करती है।

 कोलकाता के पार्क स्ट्रीट थाने की पुलिस एक माह बाद जागी

अब दुष्कर्म का नया मामला कोलकाता के पार्क स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का है। जहां महिला ने लगभग एक महीने पहले बलात्कार होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पहले तो पुलिस काफी समय तक मामले को रफा-दफा करने में लगी रही, लेकिन जब दबाव पड़ा तो उसे एक्शन लेने को मजबूर होना पड़ा। एक माह पहले की उसी शिकायत के आधार पर पार्क स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच कर रही है कि पहले के दुष्कर्म मामलों को तरह आरोपी का कनेक्शन तृणमूल कांग्रेस से तो नहीं है। राजधानी में लगातार दरिंदगी की वारदातें होने से महिलाओं में खौफ और लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
बलात्कार का एक वीडियो बनाकर कर रहा महिला को ब्लैकमेल
इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि आरोपी ने महिला के सामने खुद को एक सैन्यकर्मी बताया था। और फिर उसने महिला को जेल में बंद उसके पति की रिहाई के लिए कानूनी मदद दिलाने का वादा किया था। आरोपी ने बलात्कार का एक वीडियो भी बना लिया था, जिसे दिखाकर वो महिला को ब्लैकमेल कर रहा था। उसने महिला को धमकी दी कि अगर उसने पुलिस से संपर्क किया तो वीडियो को वायरल कर देगा। महिला ने करीब एक माह पहले कोलकाता के पार्क स्ट्रीट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
विवाहिता से कई बार दुष्कर्म करके दरिंदे ने पैसे भी ऐंठे
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि जेल में बंद उसके पति को छुड़वाने के नाम पर खुद को सैन्यकर्मी बताने वाले दरिंदे ने उसके साथ अनेक बार दुष्कर्म किया। साथ ही पैसे भी ऐंठ लिए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी सैन्यकर्मी को गिरफ्तार कर लिया। उसका आरोप है कि पति को जमानत दिलाने के नाम पर आरोपी कई बार उसे अलग-अलग जगहों पर भी ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पता चला है कि वह किसी और राज्य में नौकरी पर है, लेकिन हाल वक्त कोलकाता में रह रहा है।

विपक्ष के हाथ कठपुतली बनी 56 इंच वाले मोदी की भाजपा ; नूपुर शर्मा की तरह कंगना रनौत का भाजपा में ही विरोध क्यों ? जनता के सामने सच्चाई लाने से क्यों डर रही भाजपा? वीडियो

                                    'किसान आंदोलन' पर कंगना रनौत के बयान से भाजपा ने झाड़ा पल्ला
नूपुर शर्मा के बाद कंगना रनौत से क्यों किनारा कर रही भाजपा? 
कंगना ने क्या गलत बोला है? क्यों कंगना द्वारा सच्चाई सामने लाने से 56 इंच वाले नरेंद्र मोदी की पार्टी और सरकार किनारा कर रही है? अगर नूपुर शर्मा के मामले में मोदी सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों और विपक्ष को प्रेस कांफ्रेंस कर छेड़छाड़ वाली और असली वीडियो बशर्ते डंडा हाथ में लेकर यह आदेश देकर कि प्रेस कांफ्रेंस को लाइव नहीं दिखाने चैनल को 6 महीने के बैन कर दिया जाएगा कहकर दिखाई होती, किसी कन्हैया की जान नहीं जाती। हैदराबाद में टी राजा सिंह के मामले में भी बीजेपी ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए थे। राजा सिंह को पार्टी से निकाल दिया, क्यों? जिसका जब किया सनातन का अपमान करता रहता है, मोदी सरकार चुप रहती है,क्यों? कितनों के विरुद्ध मोदी सरकार ने सनातन का अपमान करने पर कार्यवाही की? आखिर कब भारत विरोधियों और सनातन विरोधियों के मंसूबों पर कुठाराघात किया जाएगा? जब देश ही सुरक्षित नहीं रहेगा, कौन करवाएगा चुनाव?          

भाजपा ने अपने सांसद कंगना रनौत के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के संबंध में कहा था कि उस दौरान बलात्कार और हत्या की घटनाएँ हुई थीं। अब भाजपा ने आधिकारिक बयान जारी कर के खुद को इससे अलग कर लिया है। भाजपा ने कहा है कि सांसद कंगना रनौत द्वारा ‘किसान परिप्रेक्ष्य’ में दिया गया बयान पार्टी का मत नहीं है। साथ ही पार्टी ने कंगना रनौत के बयान से असहमति भी व्यक्त की है।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि पार्टी की ओर से नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए न तो कंगना रनौत को अनुमति है और न ही वो बयान देने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही BJP ने कंगना रनौत को ये भी निर्देश दिया है कि भविष्य में वो इस प्रकार का बयान न दें। पार्टी ने दोहराया कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा सामाजिक समरसता के सिद्धांतों पर चलने के लिए कृतसंकल्पत है। कॉन्ग्रेस लगातार कंगना रनौत के बयान का विरोध कर रही थी।

कंगना रनौत ने इस दौरान ये भी कहा था कि फ़िल्मी लोगों को पता होना चाहिए कि देश नहीं रहेगा तो वो भी नहीं बचेंगे। अब कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि भाजपा को कंगना रनौत को पार्टी से निकालना चाहिए। बता दें कि इन्हीं सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत के लिए लोकसभा चुनाव के समय अश्लील शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद उन्हें इंस्टाग्राम पोस्ट डिलीट करना पड़ा था। अब वही कॉन्ग्रेस पार्टी कंगना रनौत के नाम पर भाजपा को घेर रही है।

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि अगर देश का शीर्ष नेतृत्व को बेहद मजबूत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो किसान आंदोलन के दौरान पंजाब को भी बांग्लादेश बना दिया जाता। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे। प्रदर्शन स्थल पर रेप और हत्याएँ हो रही थीं।

 कंगना ने एक मीडिया हाउस दो दिए इंटरव्यू में कहा, “आज हमारा शीर्ष नेतृत्व कमजोर होता तो भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति हो सकती थी। यहाँ किसान आंदोलन के दौरान क्या हुआ, उसे सबने देखा। प्रोटेस्ट के नाम पर वायलेंस फैलाया गया। वहाँ रेप हो रहे थे। मारकर लाशों को लटकाया जा रहा था।” उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने बहुत लंबी योजना बना रखी थी।

अभिनेत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले को सही ठहराया और कहा, “जब उस बिल को वापस लिया गया तो ये उपद्रवी चौंक गए, क्योंकि उनकी प्लानिंग तो बहुत लंबी थी। उन पर समय रहते कंट्रोल पा लिया गया, वरना वे कुछ भी कर सकते थे।” उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जहाँ ड्रग्स रैकेट और धर्मांतरण रैकेट सक्रिय हैं।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “पंजाब में क्या हो रहा है, यह सारी दुनिया देख रही है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म में वहाँ की रियलिटी भी दिखाई गई है। इस समय पंजाब में ड्रग्स माफिया, धर्म परिवर्तन गैंग और अलगाववादी खालिस्तान समर्थक खूब फल-फूल रहे हैं। वहाँ पर कुछ लोग हर वक्त कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।”

महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा महिलाओं के सपोर्ट में आवाज बुलंद की है। आज से 10 साल पहले आमिर खान जी के शो सत्यमेव जयते में मैंने फिल्मों में आइटम नंबर्स का खुला विरोध किया था। आइटम सॉन्ग में महिला को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है। एक महिला का शरीर सिर्फ मनोरंजन के लिए है? इससे समाज में गलत मैसेज जाता है।”

उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में आइटम सॉन्ग करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह, फराह खान ने भी अपनी फिल्म के लिए उन्हें कॉल किया था, लेकिन कंगना ने उन्हें भी मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरा वजूद मुझे यह सब करने की इजाजत नहीं देता, क्योंकि इसे मैं महिला के अपमान के तौर पर देखती हूँ।”

फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का उनसे खफा रहने के सवाल पर कंगना ने कहा, “लोगों को लगता है कि कंगना कुछ ज्यादा ही सच बोल देती है। मैंने इंडस्ट्री में फैले सेक्सिज्म, नेपोटिज्म और आइटम नंबर्स के खिलाफ हमेशा से ही बोला है। मीटू मूवमेंट के वक्त भी मैंने काफी लोगों के पोल खोले थे। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के वक्त भी मैंने काफी खुलासे किए, जिसकी वजह से काफी लोगों को मिर्ची लगी थी।”

किसान आंदोलन और पंजाब को लेकर कंगना रनौत द्वारा दिए गए बयान पर पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता राजकुमार वेरका ने निशाना साधा है। वेरका ने कहा, “कंगना लगातार किसानों पर ऐसे बयान दे रही हैं। उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उन पर NSA लगाया जाए।” राजकुमार वेरका 2 बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। 2017 से 2022 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। 


उत्तर प्रदेश : लड़की के कपड़े उतारते इमाम का Video… कहा – अल्लाह से करो तौबा वरना तुम्हें मुसलमान मार देंगे

  लड़की से रेप की कोशिश और तौबा न करने पर कत्ल की धमकी देते हुए रामपुर की मस्जिद के इमाम का वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में साल भर पहले हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वाली मुस्लिम लड़की ने अपने रिश्तेदारों पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई है। इसी के साथ पीड़िता ने रामपुर शहर के बेगम बाग़ इलाके में पड़ने वाली एक मस्जिद की भी शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। इस मस्जिद में न सिर्फ छोटी बच्चियों के गैंगरेप बल्कि हथियारों की तस्करी होने का भी आरोप लगाया गया है। मस्जिद का इमाम रईस बताया जा रहा है जिसके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इन वीडियो में इमाम रईस कथित तौर पर न सिर्फ हथियारों और अश्लील किताबों के आगे बैठा नजर आ रहा है बल्कि वो ‘घर वापसी’ करने वाली लड़की को अल्लाह का डर भी दिखा रहा है।

आरोप – अफसरों में औरतें सप्लाई करके कमाई

सोशल मीडिया के माध्यम से ऑपइंडिया को मिले कई वीडियो में से एक में कथित तौर पर रईस इमाम नग्न हालत में किसी लड़की से बात करता दिखाई दे रहा है। उसके आगे कुछ अवैध हथियार और कारतूस बिखरे दिखाई दे रहे हैं। सामने कंडोम और अश्लील किताबें भी दिखाई दे रहीं हैं जिसमें मॉडल्स की अधनंगी तस्वीरें छपी हुई हैं। इस वीडियो में मौलाना बोल रहा, “ये सप्लाई करते हैं औरतें। ले कर जाते हैं अफसरों में। इसी तरीके से ये पैसा कमा रहे हैं। बाकी इन्होंने ही मर्डर करा था ये तो सबको पता है। सारी दुनिया जानती है। मेरे कहने का काम है, मैं कह दूँगा। जिस जगह जरूरत पड़े वहाँ मुझ से कहलवा लियो।”
इसी दौरान स्पीकर पर चल रहे फोन में कोई पूछता है कि क्या इमाम रईस कोर्ट में बोलेगा? जवाब में रईस ने 2 बार कहा कि वह ये तमाम बातें कोर्ट में भी बोलने को तैयार है। एक अन्य वीडियो में मौलाना के आगे बैठी लड़की ने मस्जिद में बच्चियों के रेप की बात कही तो इमाम रईस ने कहा कि वो सब कुछ बताने को तैयार है। वह किसी चमरौआ गाँव में हुई हत्या और फिर जमीन कब्ज़े की बात भी उसके द्वारा कही जा रही है। रोते हुए वीडियो बना रही लड़की ने अपनी माँ के साथ 14 साल तक रेप की वजह पूछी तो इमाम रईस बोला, “पहले कह देती तो मैं सब बता देता। किस जगह मैंने साथ नहीं दिया तुम्हारा।”
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि मर्डर उसके सगे मामा का हुआ था। यह हत्या 350 बीघे जमीन को कब्ज़ा करने के लिए हुई थी। पीड़िता ने हत्या का आरोपित अपने मृतक मामा के चचेरे भाइयों पर लगा था जिसमें मुख्य आरोपित इम्तियाज है। आरोप है कि लड़की के मामा को मार कर फिर उसकी माँ को 14 वर्षों तक बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान इमाम रईस वाली मस्जिद में ही लड़की की माँ का 5 साल तक बलात्कार किए जाने का आरोप है। पीड़िता के पिता की साल 2012 में ही मौत हो चुकी थी।

धमकी – ‘तौबा करो वरना मुसलमान मार देंगे तुम्हें’

ऑपइंडिया को मिले एक अन्य वीडियो में पीड़िता और इमाम रईस आमने-सामने बैठे हैं। पीड़िता ने पूछा कि क्या मुस्लिम उसे मार देंगे? इमाम ने कहा, “हाँ, बिलकुल मार देंगे। मकसद यही है कि अल्लाह से तौबा करो। ये करो कि अल्लाह मुझ से जो गलती हो गई उसे माफ़ कर देना। धोखे से या किसी डर की वजह से मैं बनी इसलिए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे। कबर का अजीब बहुत सख्त है। अल्लाह बन्दों पर रहम करने वाला है।”

मुस्लिमों से छिप रहा वसीम रिज़वी

वीडियो बना रही लड़की ने आगे पूछा कि जो हिन्दू पैदा हुए हैं क्या अल्लाह उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा? इस पर इमाम रईस ने जवाब दिया, “उन्हें क्यों करेगा माफ़? जो कलमे का शरीक नहीं है उसे कोई भी हो। ऐसे-ऐसे लोगों का क़त्ल कर दिया गया है जिनके डंके बजते थे।” इमाम रईस ने नाम लिए बिना वसीम रिज़वी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ का वो शिया मुस्लिमों के डर से छिपा फिर रहा है जो कहता था कि मैं तो हिन्दू हो गया। इमाम रईस इसी वीडियो में आगे बोला, “जो कलमा पढ़ा होगा वो दोजख (नरक) में ज़रूर जाएगा लेकिन अल्लाह निकाल देगा उसमें से उन्हें।”
लड़की ने सामने बैठे इमाम रईस से पूछा कि अगर वो पूजा कर ले तो क्या होगा? इस सवाल पर इमाम बोला, “जब अल्लाह ने मुसलमान बनाया है तो उसमें हर जगह फतवा दिया है कि कत्ल गैर-मुस्लिमों का क़त्ल कर दो। ये फतवा निकला हुआ है। ये हदीस है।”

दूर-दूर की बच्चियाँ हैं मदरसे में

इमाम रईस का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में इमाम किसी मदरसे का जिक्र कर रहा है। रईस बोला कि उसमें दूर-दूर से आईं 800-900 बच्चियाँ हैं। जब वीडियो बना रही लड़की पूछती है कि उन बच्चियों को बाहर क्यों नहीं निकलने दिया जाता तो रईस बोला कि अगर ये छूट मिली तो कई भाग जाएँगी। इमाम रईस ने यह भी दावा किया कि पहले एकाध केस भागने के हो गए तब से अंदर से बहुत सख्ती कर दी गई है। बकौल इमाम, लड़कियों को आपस में साथ बैठने और बोलने भर की छूट है लेकिन बाहर निकलने पर मनाही है।
इमाम रईस इसी वीडियो में आगे कह रहा है कि भारत में अलीगढ़ के बाद ऐसा दूसरा मदरसा यही है। उसने बताया कि यहाँ से फ़ाज़िला हो कर लड़कियों को अलीगढ़ भेजा जाता है। दावा किया गया कि रामपुर में बने इस मदरसे में कम से कम 200 कमरे हैं और सबमें लड़कियाँ भरी हैं। इमाम रईस ने विकल्प के तौर पर यह भी बताया कि अगर लड़की मदरसे न रहना चाहे और सिर्फ वहाँ पढ़ने के मकसद से आए तो वो किसी मकसूद भाई के यहाँ उसके रहने का इंतजाम करवा देगा। इमाम रईस ने अपनी फीस 6 हजार रुपए बताया।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि यह मदरसा रामपुर जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में मौजूद है। पीड़िता ने यह भी कहा कि वह चाहती है कि वहाँ से बच्चियों को मुक्त करवाया जाए क्योंकि वो इमाम रईस जैसे कई लोगों के चंगुल में फँसी हुई हैं।

रेप की कोशिश करता दिखा इमाम

ऑपइंडिया को 2 अन्य वीडियो भी मिले हैं। इन दोनों वीडियो में इमाम रईस किसी लड़की से रेप का प्रयास करता दिख रहा है। वह नींद में लग रही किसी लड़की के कपड़े उतार कर पहले उसे नंगा करता है और बाद में उस से रेप की कोशिश करता है। थोड़ी देर बाद एक अन्य वीडियो में इमाम रईस पाजामा बाँधने की कोशिश करता दिख रहा है। वह पॉलीथिन में कुछ छिपाने की भी कोशिश करता दिख रहा है। एक अन्य वीडियो में इमाम रईस को तमाम साम्प्रदायिक बातों वाली वीडियो भी स्क्रॉल कर के सुनते देखा जा सकता है।
अवलोकन करें:- 
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ को इमाम रईस ने अपनी मस्जिद में लगभग 5 साल तक रखा था। आरोप है कि इस दौरान उसने कई लोगों के साथ मिल कर पीड़िता की माँ का गैंगरेप किया था। पीड़िता का दावा है कि ये तमाम वीडियो फरवरी 2024 महीने के हैं। बकौल पीड़िता वह रिश्तेदारों और इमाम की वजह से 14 साल तक बंधक बन कर गैंगरेप झेली अपनी माँ को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। (साभार: राहुल पाण्डेय,  http://www.opindia.com)

दिल्ली : ‘एक रात हमारे साथ सो जाओ तो ड्यूटी बढ़ा देंगे’: महिला कर्मचारियों ने खोली केजरीवाल के अस्पताल की सच्चाई, AAP विधायक का भी लिया नाम

बुराड़ी का अस्पताल और प्रदर्शन करती महिलाएं (चित्र साभार: HT & ScreenGrab form Viral Video)
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। रहस्यमयी कोली कांड से लेकर राशन कार्ड कांड, फर्जी डिग्री, घरेलू अत्याचार, भ्रष्टाचार, शराब घोटाला से पीछा छूटा नहीं, दिल्ली हॉस्पिटल्स में नकली दवाइयों और अब हॉस्पिटल में नौकरी के लिए यौन शोषण आदि यानि दूसरे शब्दों के कहा जाए कि केजरीवाल वास्तव में परिवर्तन ला रहे हैं। अपराध का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ केजरीवाल पार्टी लिप्त नहीं पायी जा रही हो। 
फर्जी सर्वे कराया है “आप” ने कि क्या जेल से सरकार चलानी चाहिए केजरीवाल को। ED को भी अभी स्वयं नहीं पता कि पूछताछ के बाद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का आधार बनेगा या नहीं। लेकिन “आपियों” का propaganda चालू है : “मोदी डरा हुआ है केजरीवाल से, उसके कामों से और उसकी लोकप्रियता से, इसलिए मोदी “आप” को ख़त्म करना चाहता है”।
24 नवंबर, 2012  का केजरीवाल का एक ट्वीट बाजार में चल रहा है जिसमें उसने लिखा था 
“As a patriot Indian, my head hangs in shame when our corrupt leaders do not appear before ED and CBI even after multiple summons by the investigating agencies, when they should have resigned from their posts immediately as soon as the allegations were made”
अब जमाना बदल गया, 2012 में भ्रष्टाचार को मिटा कर साफ़ राजनीति लाने की कसमें खाते थे केजरीवाल लेकिन आज भ्रष्टाचार की दलदल में डुबकी लगाए हुए नई तरह की राजनीति शुरू कर दी है “जनाब” ने। कोई क्षेत्र ऐसा बचा होगा  जिसमें घोटाला न किया हो केजरीवाल और उसके लोगों ने लेकिन फिर भी स्वघोषित “ईमानदार” हैं

दिल्ली के बुराड़ी के एक सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारियों ने काम देने के एवज में शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि उनके शीर्ष अधिकारी उन पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दबाव बनाते हैं और ऐसा ना करने पर उनको प्रताड़ित किया जाता है। इस मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी संज्ञान लिया है।

बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल के बाहर महिलाएँ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें अस्पताल में ड्यूटी नहीं दी जा रही है। उन्हें पूरी ड्यूटी दिए जाने के एवज में उनके अधिकारी उनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए कहते हैं और रिश्वत भी माँगते हैं।

महिलाओं ने कहा कि अस्पातल में AAP के स्थानीय विधायक संजीव झा के लोग भी हैं और उनके सहयोग से ये कुकर्म किया जाता है। महिलाओं के कहा कि संजीव झा के लोग पैसे लेकर-लेकर लोगों को नौकरी देते हैं। साथ ही आरोपितों को भी बचाते हैं। महिलाओं ने AAP विधायक और उसके लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।

जानकारी के अनुसार, बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में मेडिकल के अतिरिक्त तमाम स्टाफ को आउटसोर्सिंग से रखा जाता है। इसके तहत एक कम्पनी ग्लोबल वेंचर यह काम करती है। इसका काम इन कर्मचारियों की भर्ती और उनके काम की देखरेख होता है। यह भी सामने आया है कि यहाँ कर्मचारियों को रखने के लिए रिश्वत ली गई।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुपरवाईजर और मैनेजर पद पर काम करने वाले नीरज शर्मा, राजकुमार और आदर्श नाम के शख्स पर ये आरोप लगाए गए हैं। एक महिला कर्मचारी का कहना है कि उसे इन अधिकारियों की करतूतों के बारे में सब पता है। महिलाओं के प्रदर्शन के इस वीडियो में उनके आरोप सुने जा सकते हैं।

महिला ने बताया है कि इस अस्पताल के बेसमेंट में ये अधिकारी महिला कर्मचारियों को बुलाते थे और उनका शारीरिक शोषण करते थे। उसका कहना था कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार ना होने वाली महिलाओं को अस्पताल में मात्र 15 दिन काम दिया जाता था।

अधिकारी महिलाओं से कहते थे कि उनके साथ एक रात सोने पर वह काम के दिन बढ़ाकर 20-25 कर देंगे। महिला का कहना है कि यदि अस्पताल के बेसमेंट के सीसीटीवी की जाँच करवाई जाए तो सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं ने इस मामले में स्थानीय AAP विधायक संजीव झा का संबध बताया है।

महिला का कहना है कि नीरज और राजकुमार यहाँ काम करने वाली महिलाओं से एक-एक करके अकेले में मिलने को कहते थे। उन्हें इस विषय में आवाज उठाने से भी रोका जाता था। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया गया।

महिलाओं का कहना है कि उन्हें धमकाया भी गया है। इसके अलावा एक महिला से मारपीट की घटना भी सामने आई है। उसके साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। इस मामले में महिला ने दिल्ली पुलिस के पास मामला भी दर्ज करवाया है।

इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में उत्तरी दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट माँगी है।

दिल्ली पुलिस को की गई शिकायत में महिला ने 17 और 19 दिसम्बर 2023 को मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी के खिलाफ IPC की धारा 323, 354, 506, 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘2 मिनट के मजे के लिए सेक्स…’: कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा किशोरियों पर की गई थी टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

'दो मिनट के मजे' की जगह 'सेक्स की इच्छा' पर कंट्रोल रखे लड़कियाँ: कलकत्ता हाईकोर्ट (साभार-लाइव लॉ)
कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा किशोरियों को ‘दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचने’ की सलाह देने पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। शीर्ष न्यायालय ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि न्यायाधीशों से उपदेश देने की अपेक्षा नहीं की जाती है। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO के मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग से रेप के दोषी एक युवक को बरी करते यह यह टिप्पणी की थी। युवक को जिससे रेप का दोषी ठहराया गया था, उसका नाबालिग लड़की के साथ ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ रहे थे।

हाईकोर्ट की भाषा पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से बेहद आपत्तिजनक और अनुचित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशोें से ये उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने निजी विचार रखें या भाषण दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने राज्य सरकार
सहित कई लोगों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी या नहीं। बेंच अब इस मामले पर शनिवार (9 दिसंबर 2023) को विचार करेगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए और दो मिनट के आनंद के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। पीठ ने कहा था कि लड़कियाँ अपनी यौन इच्छाओं को नियंत्रित करें, क्योंकि मुश्किल से दो मिनट का सुख पाकर लड़कियाँ समाज की नजरों में गिर जाती हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह युवा लड़कियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने शरीर की अखंडता, गरिमा को बनाएँ रखें। लड़कों को नसीहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लड़कों को भी लड़कियों की गरिमा की इज्जत करनी चाहिए और लड़कों के दिमाग को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वे महिलाओं की इज्जत करें।

हाई कोर्ट ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की थी। इसके साथ ही 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”

कोर्ट ने बताया था यौन इच्छाओं के जागृत होने का कारण

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था, “प्रमुख एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में वृषण (Testicle) और महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से और पुरुषों और महिलाओं दोनों में अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) से थोड़ी मात्रा में स्रावित होता है। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड्स टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, जो मुख्य रूप से (पुरुषों में) सेक्स या कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है।”
विज्ञान की बात करते हुए उच्च न्यायालय ने आगे कहा था, “इसका अस्तित्व शरीर में है, इसलिए जब संबंधित ग्रंथि उत्तेजना से सक्रिय हो जाती है, तो यौन इच्छा जागृत होती है। लेकिन संबंधित जिम्मेदार ग्रंथि का सक्रिय होना स्वचालित नहीं है। क्योंकि इसे हमारी दृष्टि, श्रवण, कामुक सामग्री पढ़ने और विपरीत लिंग के साथ बातचीत से उत्तेजना की आवश्यकता होती है। यौन इच्छा हमारी अपनी क्रियाओं से जागृत होता है।”
कलकत्ता हाईकोर्ट के अनुसार, “किशोरों में सेक्स सामान्य है लेकिन यौन इच्छा या ऐसी इच्छा की उत्तेजना व्यक्ति, शायद पुरुष या महिला, के कुछ कार्यों पर निर्भर होती है। इसलिए, यौन इच्छा बिल्कुल भी सामान्य और आदर्श नहीं है। अगर हम कुछ क्रियाएँ  बंद कर देते हैं, तो यौन इच्छा की उत्तेजना सामान्य नहीं रह जाती, जैसा कि हमारी चर्चा में वकालत की गई है।”  

‘जानवर, लाश और बच्ची से सेक्स जायज, नहाना भी ज़रूरी नहीं’: दारुल उलूम में बच्चों को दी जा रही स्तरहीन शिक्षा

NCPCR के संज्ञान के बाद दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटाए गए 'बहिश्ती जेवर' के फतवे (साभार- ABP न्यूज़ और हिंदुस्तान)
प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने शरई मसलों पर लिखी गई एक किताब ‘बहिश्ती जेवर’ के फतवों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए देवबंद के डीएम और एसपी को नोटिस भेजा था। इसमें दारुल उलूम देवबंद में बच्चों को दी जा रही तालीम पर सवाल उठाए गए थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए शासन ने देवबंद की वेबसाइट से उन विवादित अंशो को हटवा दिया है। जिसकी जानकरी अधिकारियों ने आयोग को 19 अक्टूबर, 2023 को दी।

शासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए NCPCR के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पोस्ट किया, “नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के तौर तरीक़े बताने वाली मौलाना अशरफ़ अली थानवी की किताब बाहिश्ती ज़ेवर,मदरसा दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर द्वारा फ़तवे जारी करने व बच्चों को सिखाने के काम में ली जा रही थी। जिस पर NCPCR ने संज्ञान ले कर ज़िला प्रशासन को नोटिस जारी किया था। ज़िला प्रशासन सहारनपुर ने तत्परता पूर्वक कार्यवाही करते हुए अवगत करवाया है कि उक्त किताब का उपयोग बंद करवा दिया गया है व संबंधित फ़तवे भी दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटवा दिए गए हैं। शेष जाँच जारी है।”

दरअसल, दारुल उलूम के मदरसों में ऐसा पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा था, जिसमें कई विवादित संदर्भ व फतवे शामिल थे। जैसे जानवरों से रेप, मृत महिलाओं और नाबालिग बच्चियों से यौन सम्बन्ध के तौर तरीके बताए गए थे एवं उन्हें जायज ठहराया गया था। यहाँ तक कि नहाना भी जरुरी नहीं था। जिस पर दिल्ली की सामाजिक संस्था मानुषी सदन ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद ही NCPCR की नोटिस के बाद अब इसे वेबसाइट व पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।

मानुषी सदन संस्था ने गत 7 जुलाई, 2023 को शिकायत की थी कि इस्लामिक विद्वान दिवंगत मौलाना अशरफ अली थानवी की 100 साल पुरानी किताब “बहिश्ती जेवर” के जरिए दारुल उलूम छात्रों को नाबालिगों पर आपराधिक हमले, अवैध संबंध, दुष्कर्म और नाबालिगों की शादी की पढ़ाई करा रहा है।

जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सहारनपुर के डीएम व एसएसपी को जाँच करने व दारुल उलूम की वेबसाइट पर उपलब्ध ऐसी विवादित सामग्री को हटाने के लिए कहा था। साथ ही अधिकारियों को आयोग में तलब भी किया था।

आयोग की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया था कि बच्चों को दारुल उलूम की तरफ से जारी फतवों को पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को वो फतवे पढ़ाए जा रहे हैं जो वेबसाइट पर मौजूद हैं। और यह बाल अधिकार के खिलाफ है। 

आयोग ने कहा कि उन्हें दारुल उलूम देवबंद की तरफ से जारी फतवों के खिलाफ एक शिकायत भी मिली है। फतवे में ‘बहिश्ती जेवर’ नामक पुस्तक का जिक्र है, जो बच्चों के लिए आपत्तिजनक, अनुचित और अवैध है। 

इसी मामले में 19 जुलाई, 2023 को बाल संरक्षण आयोग के निर्देश पर एसडीएम संजीव कुमार के नेतृत्व में सीओ रामकरण सिंह, डीआईओएस योगराज सिंह, डीएसओ डॉ. विनिता, बीईओ डॉ. संजय डबराल की टीम दारुल उलूम पहुँची थी। टीम ने संस्था के नायब मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी और सद्र-मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की थी और पूरे मामले की जाँच की थी।

इस मामले में दारुल उलूम के जिम्मेदारों ने टीम को बताया था कि पुस्तक से संस्था का कोई वास्ता नहीं है। जिसके बाद उन्हें वेबसाइट से हटवा दिया गया। वहीं अब 19 अक्टूबर, 2023 को आयोग में प्रस्तुत होकर अधिकारियों ने बताया कि चार सदस्यीय टीम की जाँच के बाद विवादित सभी फतवों और पुस्तक को दारुल उलूम समेत अन्य सभी वेबसाइट से हटवा दिया गया है।

इजरायल में हमास के इस्लामी आतंकियों की हैवानियत का नज़ारा, बच्चियों की लाशें, लाशों पर स्पर्म, कटे हुए स्तन… बलात्कार करते-करते मार देते थे गोली

            7 अक्टूबर के हमास हमले की यौन हिंसा की जाँच में हुए खौफनाक खुलासे फोटो साभार: X हैंडल                                @IDF/@CochavElkayam
हमास ने इजरायल पर आतंकी हमले के बाद न सिर्फ आम इजरायलियों को मौत के घाट उतारा बल्कि जीवित और मृत बच्चियों और महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी दरिंदगी भी किया। इसी के मद्देनजर अब इज़रायल पर 7 अक्टूबर, 2023 हमास के हमलों के बाद बलात्कार के मामलों का दस्तावेज तैयार कर रही है। जिसके लिए फोरेंसिक सबूतों, वीडियो और गवाहों के बयान और संदिग्धों से पूछताछ किया जा रहा है।

इसे लेकर जो खुलासे प्रत्यक्षदर्शियों ने अब तक किए हैं वो इंसानियत को शर्मसार करने वाले हैं। हमास के आंतकियों ने पकड़ी गई महिलाओं और लड़कियों का खौफनाक तरीके से रेप और यौन उत्पीड़न ही नहीं किया बल्कि उनके साथ शारीरिक तौर पर भी भयानक हिंसा की। किसी की छाती काट डाली तो किसी को रेप करने के दौरान ही गोली मार कर जान ले ली।

इजरायली बच्चियों की लाशों पर पड़े ताजा स्पर्म ये चीख-चीख कर कह रहा था कि उनके साथ हमास के आतंकियों ने किस कदर हैवानियत की है। खून से सने उनके जिस्मों पर अनगिनत घाव बगैर कहे गवाही दे रहे थे कि हैवानियत का नंगा नाच कैसा होता है।

हमास आंतकियों के भयावह, अमानवीय अपराध

इजरायल की खास 669 स्पेशल टैक्टिस रेस्क्यू यूनिट के एक पैरामेडिक ने सीएनएन को बताया कि उसने पहले भी सभी तरह की जान माल के नुकसान वाली वारदातों की जाँच की है, लेकिन 7 अक्टूबर की हिंसा कल्पना से भी परे की थी।
इस फाइटर पैरामेडिक ने अपना नाम छापने की शर्त पर बताया कि किबुत्ज़ बेरी में हमास के नरसंहार के बाद जब वो किसी जिंदा बचे शख्स की तलाश में घर-घर जा रहे थे। उस दौरान उन्हें एक बेडरूम में दो दो युवा किशोर लड़कियों की लाश मिली।
पैरामेडिक के मुताबिक, “एक की लाश बिस्तर पर पड़ी हुई थी और दूसरी की एक फर्श पर।” उन्होंने आगे बताया फर्श पर पड़ी लड़की अपने पेट के बल थी। उन्हें इसमें कोई शक नहीं था कि किशोरी के साथ बलात्कार किया गया था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता चला कि वह पहले मर गई थी या नहीं।
उन्होंने आगे बताया, “उसकी पैंट घुटने तक खुली हुई है और उसकी गर्दन के पीछे सिर के पास गोली के जख्म थे। उसके सिर के चारों ओर खून का ढेर लगा था है और उसकी पीठ के निचले हिस्से पर स्पर्म पड़ा था।”
उन्होंने आगे बताया कि बिस्तर पर पड़ी लड़की के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी छाती में गोली लगी थी। उनका कहना था कि इन दो लड़कियों को उनके पहुँचने से कुछ वक्त पहले ही मारा गया हो या पहले मार डाला गया हो शायद उनके ही बेडरूम में उनके साथ बलात्कार किया गया था, अभी जाँच के बाद ही पता लगेगा।”
अन्य लोगों ने भी नोवा संगीत समारोह में इसी तरह की खौफनाक और हैवानियत से भरे वाकयों के बारे में बताया था। यहाँ सैकड़ों युवाओं को आतंकवादियों ने मार डाले थे। समारोह के एक आयोजक रामी शमूएल ने कहा कि जब वह भाग रहे थे तो उसने महिला पीड़ितों को बगैर कपड़ों के देखा और जो कुछ हुआ उसके बारे में उसे कोई संदेह नहीं है। उन्होंने बताया, “उन्हें नंगा कर उनके (महिलाओं) दोनों पैर फैलाए गए थे और उनमें से कुछ को मार डाला गया था।”
उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि इन महिलाओं से वहशीपन की हद पार करते हुए यौन हिंसा की गई थी। उनका कहना था कि हमास के आतंकियों ने खासकर औरतों, युवा युवतियों के ही कपड़े उतार फेंके थे। इससे साफ है कि उनका मकसद पहले से ही इनके साथ बलात्कार करना था, क्योंकि उन्होंने वहाँ उस दिन किसी भी पुरुष के कपड़े नहीं उतारे थे।

अभी लंबी चलेगी जाँच

इज़रायल की पुलिस मानती है कि उनकी जाँच में महीनों लग सकते हैं। हिब्रू विश्वविद्यालय की मानवाधिकार कानून विशेषज्ञ एल्कायम-लेवी भी कहती हैं कि यह साफ नहीं है कि किसी भी मामले को कैसे और कहाँ संभाला जाएगा। हालाँकि, उन्होंने कहा कि दोहरी नागरिकता वाले कुछ परिवार इज़रायल के अलावा अन्य देशों में न्याय के लिए जा सकते हैं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी अपने मामले को ले जा सकते हैं।
इजरायली अधिकारियों ने एक प्रेस ब्रीफिंग में जो सबूत जुटाए थे। उसमें एक महिला का बयान भी शामिल था। इस महिला ने 7 अक्टूबर, 2023 को अपने छिपने की जगह से नोवा म्यूजिक फेस्टिवल पर हमास आंतकियों के हमले को अपनी आँखों से देखा था। इस मायने में उनका बयान काफी मददगार साबित होगा।
इस महिला ने अपने बयान में कहा, “उन्होंने (हमास) किसी को झुकाया हुआ था और मुझे समझ आया कि वह उस युवती के साथ बलात्कार कर रहा था और फिर वह उसे दूसरे को बलात्कार के लिए सौप रहा था।”
उसने आगे बताया, “वह जीवित थी। वह अपने पैरों पर खड़ी थी और उसकी पीछे से खून बह रहा था। मैंने देखा कि वह उसके बाल खींच रहा था। उसके लंबे भूरे बाल थे। मैंने उन्हें उसके स्तन काटते हुए देखा और फिर वह उसकी कटे स्तनों को सड़क की ओर फेंक रहा था। उसे दूसरे शख्स ने किसी दूसरे की तरफ उछाला और वो उससे खेलने लगे।”
इसके बाद भी हमास के आतंकियों ने उस युवती को नहीं छोड़ा। गवाह ने आगे बताया, “मुझे याद है कि एक अन्य शख्स ने फिर और उसके साथ बलात्कार किया था और उससे बलात्कार करते-करते ही उसने युवती के सिर में गोली मार दी।”

हमास की दरिंदगी के हजारों बयान वीडियो क्लिप

इजरायली पुलिस सुपरिटेंडेंट डूडी काट्ज़ की रूह भी इन सबूतों के बारे में बताते हुए हुए काँप उठी थी। काट्ज़ के मुताबिक, अधिकारियों ने हमास के हमलों से जुड़े 1,000 से अधिक बयान और 60,000 से अधिक वीडियो क्लिप इकट्ठा किए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इनमें उन लोगों के बयान भी शामिल हैं जिन्होंने महिलाओं के साथ बलात्कार होते देखा था। हालाँकि, उन्होंने कहा कि जाँचकर्ताओं के पास भुक्तभोगी नहीं है और यह भी साफ नहीं है कोई बलात्कार पीड़िता जीवित बची है या नहीं।
बीते महीने हमास के आंतकी हमले में उस दिन गाजा और इजरायल की सीमा के गाँवों और खेतों में लगभग 1,400 इजरायली मारे गए और इससे अधिक घायल हुए। वहीं हमास के आतंकियों ने 240 से अधिक इजरायली नागरिकों को बंधक बनाया। इसमें बच्चे, बुजुर्ग, औरतें सब शामिल थे।
हमास के इन आतंकियों की इस काली करतूत को दुनिया के सामने लाने के लिए सुबूत जरूरी है। तभी इजरायल के पुलिस कमिश्नर शबताई याकोव कहते हैं कि जाँच संभावित तौर पर अभियोग लगाने के काम आएगी, लेकिन अभी इन अपराधों के दस्तावेज़ तैयार करना पहला मिशन है।

कहीं दुनिया भूल न जाए इजरायली बच्चियों, औरतों से हुई हैवानियत

हिब्रू विश्वविद्यालय की मानवाधिकार कानून विशेषज्ञ कोचाव एल्कायम-लेवी ने अत्याचारों के सबूतों के दस्तावेज तैयार करने के लिए अपने साथियों के साथ एक नागरिक आयोग का गठन किया है। उन्हें डर है कि गाजा और इजरायल की जंग के बीच दुनिया इजरायली महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर गौर करना कहीं भूल न जाए। उन्होंने आतंकी हमलों के ठीक एक हफ्ते बाद आए संयुक्त राष्ट्र के एक बयान की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस बयान में यौन हिंसा का जिक्र तक नहीं था।
एल्कायम-लेवी का कहना है, “हम उनके साथ जो कुछ भी हुआ है उसे कभी नहीं जान पाएँगे। जब हम जानते हैं कि जिन महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और जिन पर यौन हमला किया गया उनमें से अधिकांश की हत्या भी कर दी गई।”
लेवी ने यूएन के बयान पर कहा, “इजरायली महिलाओं के तौर पर, हमारे बच्चों के लिए और हम लोगों के लिए यह सिर्फ चुप्पी या बेइज्जती से भी कहीं अधिक बुरा है। यहाँ जो कुछ हुआ उसे हम स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यह बहुत बुरा हुआ है।”

केरल : स्कूल में चुम्मा, प्राइवेट पार्ट छुआ, बलात्कार : CPM नेता की भतीजी का कोर्ट में वीडियो… चाचा पर गंभीर आरोप

                    अपने चाचा और CPM नेता पर ही लगाया गंभीर आरोप (फोटो साभार: OnManorama)
केरल में कासरगोड का रहने वाला 20 साल का मोहम्मद अंजार पिछले 25 दिनों से न्यायिक हिरासत में है। उस पर 17 साल की नाबालिग लड़की से बलात्कार और यौन शोषण का आरोप है। पीड़िता को आरोपित की गर्लफ्रेंड बताया जा रहा है। अब आरोपित के परिवार ने इस केस को एक साजिश बताया है। साजिश किसने की? आरोपित के परिवार के अनुसार CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने। आरोपित युवक के पिता द्वारा अदालत में सबूत के तौर पर एक वीडियो जमा की गई। वीडियो में 17 साल की पीड़ित लड़की ने खुद को बालिग बताते हुए मोहम्मद अंजार पर लगाए गए आरोपों को दबाव में उठाया गया कदम बताया है।

मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला कासरगोड के नीलेश्वर थानाक्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली और केस दर्ज करते समय अपनी उम्र 17 साल बताने वाली एक लड़की ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में पुलिस में यौन शोषण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड मोहम्मद अंजार पर आरोप लगाया कि उसने साल 2022 में स्कूल के अंदर न सिर्फ जबरन उसे चुम्मा लिया बल्कि प्राइवेट पार्ट को गलत ढंग से छुआ भी। पीड़िता की शिकायत में आरोपित द्वारा जुलाई 2023 में उसके साथ रेड मून बीच पर रेप करना भी शामिल था।

लड़की की इस शिकायत पर पुलिस ने मोहम्मद अंजार के खिलाफ IPC में बलात्कार की धारा 376 (1) के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। नवम्बर के पहले सप्ताह में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अब आरोपित के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अंजार को सिर्फ लड़की से प्यार करने की वजह से फर्जी केस में फँसाया गया है। इस पूरी साजिश के सूत्रधार के तौर पर CPM पार्टी के नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) का नाम लिया गया है।

शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को मोहम्मद अंजार की जमानत अर्जी कासरगोड की अदालत में दाखिल हुई। अंजार के 57 वर्षीय अब्बा अबू बकर ने कोर्ट में लड़की का एक वीडियो बयान पेन ड्राइव के जरिए दाखिल किया। यह वीडियो लड़की ने खुद बना कर अपने एक दोस्त को भेजा था। वीडियो को अंजार के परिवार तक पहुँचाने की अपील भी की गई थी। वीडियो में पीड़िता ने अपने ही परिजनों पर खुद को जबरन बंधक बना कर रखने और स्कूल जाने से रोकने का आरोप लगाया है।

लड़की का यह भी दावा है कि अंजार ने उसके साथ कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाए। गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में लड़की ने खुद को 18 साल की बालिग बताया। लड़की ने अपने चाचा और CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) पर अपनी पिटाई का आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने ही मोहम्मद अंजार पर फर्जी केस दर्ज करवाने का दबाव बनाया था। लड़की ने अदालत से अंजार के साथ खुद को भी अपने घर वालों से बचाने की गुहार लगाई है। बकौल पीड़िता उसे उनके ही घर वालों द्वारा ठीक से खाना भी नहीं दिया जा रहा है।

आरोपित अंजार के अब्बा अबू बकर ने भी CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) पर गंभीर आरोप जड़े। उनका कहना है कि मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने उनके बेटे और उसके 3 साथियों को 2-3 अक्टूबर की रात में अपने घर में बंद करके बेरहमी से पीटा था। आरोप है कि जब वो अंजार से अपनी भतीजी का कोई अवैध संबंध साबित नहीं कर पाए तब फर्जी शिकायत दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया। इन आरोपों की पुष्टि अंजार के साथियों अलजाब, हसन और जामिन ने भी की है। उन्होंने बताया कि मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने अपने 10 साथी गुंडों के साथ उन्हें बंधक बना कर पीटा है।

CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) का दावा है कि अंजार और उसके साथियों के मोबाइल से उनकी भतीजी की आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें मिली थीं। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को भी गलत बताया है। हालाँकि पुलिस ने अदालत में अंजार की जमानत का विरोध किया है। पीड़िता के मेडिकल परीक्षण में भी यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई है। सभी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 30 अक्टूबर तय की है।

उत्तर प्रदेश : BSP के पूर्व सांसद शाहिद अख़लाक़ के बेटे दानिश ने लड़की से किया रेप, पीड़िता बोली- और भी हिंदू लड़कियों को फँसा रखा है

पूर्व बसपा सांसद शाहिद अख़लाक़ के बेटे दानिश के खिलाफ रेप की शिकायत (चित्र साभार- @RajuSharmajour1 ट्विटर)
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बसपा के पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के बेटे दानिश पर रेप का आरोप लगा है। दिल्ली की रहने वाली एक हिन्दू लड़की ने शुक्रवार (25 अगस्त 2023) को दानिश के खिलाफ शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित पर लड़की को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को एक लड़की मेरठ के SSP ऑफिस में शिकायत लेकर पहुँची। खुद को दिल्ली की रहने वाली बताते हुए लड़की ने कहा कि कुछ समय पहले उसके इंस्टाग्राम पर दानिश कुरैशी नाम के एक युवक ने मैसेज किया था। थोड़े समय की चैटिंग के बाद दोनों के बीच फोन नंबर की लेन-देन हुई और फिर बातचीत होने लगी। पीड़िता का आरोप है कि दानिश ने खुद को कुँवारा बताया और अपने झाँसे में ले लिया।

दानिश 20 अगस्त को लड़की से मिलने के लिए दिल्ली के हौजखास इलाके में आया। यहाँ उसने खुद को पूर्व सांसद शाहिद अखलाक का बेटा बताया। 2 दिनों के बाद यानी 22 अगस्त को दानिश अख़लाक़ ने लड़की को मेरठ के देहरादून-दिल्ली रोड पर स्थित होटल क्रोम का पता देकर वहाँ मिलने के लिए बुलाया। पीड़िता का कहना है कि होटल में उससे कोई पहचान पत्र नहीं लिया गया। जब वह होटल पहुँची तो मैनेजर ने उसको एक कमरे में भेज दिया।

शिकायत के अनुसार, कुछ देर बाद वहाँ दानिश आया और बातचीत करने लगा। इसी दौरान उसने शराब पीनी शुरू कर दी। शराब पीने के बाद दानिश ने पीड़िता का रेप किया। लड़की रोने लगी तो दानिश ने शादी का वादा करके उसे चुप करा दिया। यहीं नहीं, इसी होटल में आरोपित ने पीड़िता का नहाते हुए वीडियो भी बना लिया। शक होने पर पीड़िता ने दानिश का मोबाइल चेक किया और वीडियो डिलीट कर दिया।

दानिश का मोबाइल चेक करने के दौरान ही पीड़ित युवती को उसके शादीशुदा होने की जानकारी मिली। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि दानिश के फोन की चैटिंग में उसने देखा कि वह कई हिंदू लड़कियों के संपर्क में है। इन सब लड़कियों को वह ऐसे ही बात करके धोखा दे रहा है।

इस घटना से पीड़िता खुद को ठगा महसूस करने लगी। इसके बाद उसने मामले में शिकायत दर्ज करवाई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पीड़िता ने मीडिया को दिए गए बयान में यह भी बताया कि उसे धोखा दिया गया है। उसने कहा कि दानिश ने उसे हर सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया है और कॉल भी नहीं उठा रहा है।

शिकायत के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने शाहिद अख़लाक़ के बेटे दानिश पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। एक हिन्दू संगठन के पदाधिकारी सचिन सिरोही ने कहा कि शाहिद अख़लाक़ के परिवार का इतिहास साल 1990 से कलंकित रहा है। सचिन का कहना है कि दानिश अख़लाक़ एक बार बंदूक के साथ पकड़ा गया था, जिसे मेरठ पुलिस ने खिलौना बता दिया था।

दानिश के अब्बा मोहम्मद शाहिद अख़लाक़ मांस के कारोबारी हैं। वो बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर साल 2004 में सांसद भी रह चुके हैं। शाहिद पर साल 2009 में कमेला (कसाईघर) को लेकर 24 अन्य लोगों के साथ केस भी दर्ज हो चुका है।


जैसे आज मणिपुर के Video से विचलित है देश, वैसे ही कभी तस्वीरों से सन्न रह गया था अजमेर: चौगुने पैसे में बिकते थे स्कूल-कॉलेज की लड़कियों के न्यूड फोटो वाले रील

अजमेर में फार्महाउस में जाकर स्कूल-कॉलेज की लड़कियों का करते थे बलात्कार (फोटो: 'अजमेर 92' ट्रेलर)
आज सोशल मीडिया का जमाना है। ढाई महीने बाद ही सही, मणिपुर में 3 महिलाओं के साथ हैवानियत का वीडियो सामने आया और मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इस पर अपने-अपने स्तर पर टिप्पणी की, कार्रवाई के लिए कहा और आरोपितों की धर-पकड़ हुई। हमें CAA के विरोध में हो रहे धरने और प्रदर्शनों में लग रहे उन नारों को याद करना होगा। जो इस बात को सिद्ध करेंगे कि मणिपुर घटना किसी गहरे षड़यंत्र का हिस्सा है। कितने समय से इसकी पृष्ठभूमि लिखी जा रही होगी। सनातन पर होते हमले और अब मणिपुर। क्या CAA विरोध में बने शाहीन बागों में fuck Hindutva, जब तक हिन्दुस्तान गजवा-ए-हिन्द नहीं बन जाता, तिरंगा थामो और वंदे मातरम बोलो और chicken neck को अलग करेंगे, याद है नारे। नार्थईस्ट का यही मणिपुर ही उसी chicken neck का हिस्सा है। क्या जनता महिलाओं का शोषण करने वाले को अपने वोट की चोट से इन षड्यंत्रकारियों को धूल चटवाएगी? विशेषकर चुनावी हिन्दुओं को, यदि जनता ऐसा नहीं करती है, यह उनकी भयंकर भूल होगी। 
मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाए जाने और उनके साथ गैंगरेप की घटना में देर से ही सही, न्याय हो तो रहा है। लेकिन, अजमेर में अस्सी-नब्बे के दशक में जो हुआ था, उसकी नाबालिग पीड़िताएँ आज दादी-नानी बन गईं लेकिन न्याय नहीं मिला।
चिश्ती की दरगाह पर हुए महिलाओं के यौन-शोषण की जिम्मेवार कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां है, जिन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते भारत के हिन्दू सम्राटों के गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर आतताई मुगलों के खुनी और बलात्कारी इतिहास पर पर्दा डाल उन्हें महान बताकर पढ़ा दिया। ताज महल को मोहब्बत की निशानी बताया जाता रहा, लेकिन कभी ये नहीं पढ़ाया कि 14वे बच्चे को जन्म देते समय मुमताज़ की मौत हुई थी, और अगले ही दिन अपनी साली से निकाह कर लिया। हमें यह नहीं पढ़ाया कि अकबर मीना बाजार क्यों लगाता था और किस शेरनी-किरण देवी- के साहसिक कदम ने मीना बाजार बंद करवाया? (देखिए पेंटिंग)अकबर जिसे महान पढ़ाया जाता रहा, उसी महान अकबर ने इसी शेरनी से अपनी ज़िंदगी की भीख मांगी थी। ठीक वही हाल चिश्ती का भी है, जिसने हज़ारों हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया/करवाया, उनका इस्लामीकरण किया और जिसने इस्लाम स्वीकार नहीं किया उन्हें मरवा दिया गया। आखिर इस हत्यारे की कब्र पर क्यों जाते हैं लोग?   

उस समय सोशल मीडिया का जमाना नहीं था, टीवी मीडिया का भी नहीं। रेडियो पर सिर्फ सरकारी और राष्ट्रीय खबरें चलती थीं। उस दौरान अख़बार और पत्रिकाएँ ही खबरों और विश्लेषण का सबसे बड़ा स्रोत हुआ करती थीं। इसी दौरान ‘दैनिक नवज्योति’ में कुछ ऐसी तस्वीरें छपीं जिसने सबको सन्न कर दिया। ये तस्वीरें थीं उन पीड़िताओं की, जिनकी इज्जत लूटने में दरगाह के खादिमों के परिवार वालों, सफेदपोशों और कांग्रेस नेताओं का गिरोह शामिल था।

इस अख़बार के तत्कालीन संपादक हुआ करते थे दीनबंधु चौधरी, जिनके रिपोर्टर संतोष गुप्ता इस पूरे स्कैंडल की खबर लेकर उनके पास आए थे। खबर छपी भी, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। असल में संतोष गुप्ता ने अजमेर के अनाज मंदिर स्थित ‘भरोसा लेबोरेटरी’, जहाँ फिल्म्स के नेगेटिव पर काम होता था, वहाँ से 4 गुना ज्यादा पैसे देकर फोटो रील्स ले जाते हुए एक व्यक्ति को देखा था। उनके साथ एक दोस्त था, जिसने शुरू में तो आनाकानी की लेकिन बाद में उन्हें 4 रील्स दी।

उन्हें देख कर वो दंग रह गए थे। ‘दैनिक भास्कर’ ने पत्रकार दीनबंधु चौधरी का इंटरव्यू लिया है और उनसे उस जमाने में हुए इस स्कैंडल के बारे में जाना। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि अख़बार ने तस्वीरें छापने का निर्णय लिया और प्राइवेट पार्ट्स पर काली पट्टी डाल कर उन्हें प्रकाशित कर दिया गया। बार एसोसिएशन के वकील अख़बार की प्रतियाँ लेकर डीएम-एसपी के पास गए और फिर इस प्रकरण में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

इन सबकी शुरुआत कहाँ से हुई, इसका किस्सा भी उन्होंने सुनाया। असल में श्रीहरि रोड पर स्थित एक कॉलेज की लड़की एडमिट कार्ड के लिए फीस के लिए पैसे न होने के कारण रोती हुई जा रही थी, जिसे वहाँ से गुजरते कुछ रसूखदार युवकों ने देखा और उसकी मदद की। उसके बाद रोज मुलाकात करते-करते उन्होंने लड़की से जान-पहचान बढ़ा ली और एक दिन वैन में बिठा कर हटूंडी स्थित अपने फार्महाउस ले गए, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी अश्लील तस्वीरें भी ले ली गईं।

फिर तो ब्लैकमेल कर-कर के आए दिन उसका रेप किया जाने लगा। एक दिन दरिंदों ने उस लड़की से अपनी दोस्त को भी लाने को कहा, मना करने पर तस्वीरें शहर भर में फैला देने की धमकी दी। इस डर से वो अपनी दोस्त को लेकर आई। उसके साथ भी वही दरिंदगी दोहराई गई। फिर दूसरी वाली लड़की को अपनी दोस्त को लाने के लिए कहा गया। इस तरह चेन बनता गया और कई लड़कियाँ इस जाल में फँस गईं। दीनबंधु चौधरी ने ये भी बताया कि कैसे उन्हें ये खबर न छपने की धमकी देते हुए हत्या की धमकियाँ आती थीं।

उन्होंने बताया कि आधी रात को उन्हें फोन कॉल्स आते थे, जिनके जवाब में वो बिना डरे कहते थे कि कायरों की तरह छिप कर बात मत करो, सामने आओ। दीनबंधु चौधरी के पिता दुर्गा प्रसाद चौधरी तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के अच्छे दोस्त थे। खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें फोन कॉल कर के ये तस्वीरें न छपने का आग्रह किया और कहा कि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। लेकिन, दीनबंधु चौधरी ने सफेदपोशों को बेनकाब करने के रास्ते पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

उन्हें सुरक्षा के लिए 2 गनर भी मुहैया कराए गए, लेकिन उन्होंने ये भी ठुकरा दिया। आज दीनबंधु चौधरी कहते हैं कि अगर उन्होंने सुरक्षा ले ली होती तो ये सन्देश जाता कि वो डर गए हैं। उन्हें रूट बदल कर ऑफिस जाने-आने की सलाह दी गई। इस घटना की शिकार अधिकतर लड़कियाँ नाबालिग थीं, जिनकी उम्र 16-17 साल थी। लड़कियों को धमकाया जाता था कि किसी को इस बारे में कुछ भी बताने पर ये तस्वीरें लीक कर दी जाएँगी।

लेकिन, जिस लैब में रील्स दिए गए थे तस्वीरें निकलवाने के लिए, उन्होंने इसकी कॉपियाँ अपने पास रख लें। लैब कर्मचारियों की नीयत बिगड़ गई और उनके माध्यम से ही ये तस्वीरें शहर भर में सर्कुलेट होने लगीं। 6 लड़कियों ने आत्महत्या का कदम उठा लिया था। अजमेर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष फारूक चिश्ती, उपाध्यक्ष नफीस चिश्ती और जॉइंट सेक्रेटरी अनवर चिश्ती का नाम इसमें सामने आया। CID को जाँच की जिम्मेदारी मिली, 18 आरोपित बनाए गए।

पीड़िताओं में कई लड़कियों के बारे में कुछ पता ही नहीं चला कि वो कहाँ गईं, कुछ ने नाम-पहचान बदल लिया और कुछ परिवार के साथ कहीं और शिफ्ट हो गईं। ये लड़कियाँ नहीं चाहती थीं कि उनकी पहचान बाहर आए। अजमेर की लड़कियों के रिश्ते होने बंद हो गए थे। बदनामी के डर से वो पीछे हट गई थीं। 12 लड़कियों को केस दर्ज कराने के लिए एक NGO ने राजी किया, लेकिन लगातार धमकियों के कारण 10 पीछे हट गईं। बची हुई 2 ने 16 आरोपितों की पहचान की, उनमें से भी 11 ही गिरफ्तार हुए।

जिन 18 आरोपितों का नाम FIR में था, वो हैं – हरीश दोला (कलर लैब का मैनेजर), फारुख चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट), नफीस चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट), अनवर चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस जॉइंट सेक्रेटरी), पुरुषोत्तम उर्फ बबली (लैब डेवलपर), इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, जमीर हुसैन, अल्मास महाराज, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, नसीम उर्फ टारजन, महेश लोदानी (कलर लैब का मालिक), शम्सू उर्फ माराडोना (ड्राइवर), जऊर चिश्ती (लोकल नेता)।

इनमें से एक सलीम चिश्ती तो इस घटना के सामने आने के 2 दशक बाद 2012 में धराया, बुर्के में। उसे जमानत भी मिल गई। नफीस को पकड़ने में भी पुलिस को 11 साल लग गए थे, वो 2003 में धराया था। सोहैल गनी चिश्ती भी 26 साल तक पुलिस की पहुँच से दूर रहा। उसने दिसंबर 2018 में आत्मसमर्पण किया। उसे भी बेल मिल गई। इकबाल भाटी भी 13 साल बाद 2005 में पकड़ाया और उसे भी जमानत मिल गई। अल्मास महाराज का आज तक कोई अता-पता नहीं है, जबकि उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है।

नसीम उर्फ़ टार्जन जमानत मिलने के बाद कहाँ फरार हुआ, कोई अता-पता नहीं है। मुख्य आरोपित फारूक चिश्ती ने खुद को ‘सिजोफ्रेनिया’ का मरीज बता कर मानसिक रोगी घोषित करवा दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे ये कहते हुए बरी कर दिया कि उसने पर्याप्त सज़ा काट ली है। एक आरोपित पुरुषोत्तम उर्फ़ बबली ने आत्महत्या ही कर ली। उस समय भी सोशल मीडिया होता तो शायद इन आरोपितों की त्वरित गिरफ़्तारी होती और इनका ये खेल इतना लंबा नहीं चलता।

’17 साल की उम्र से तुम्हारी बेटी का रेप कर रहा हूँ, जो करना है कर लो’: क्रिकेट कोच महबूब ने कराया हिन्दू लड़की का धर्मांतरण

आरोपित कोच महबूब बुखारी (बाएँ), पीड़िता के माता-पिता (दाएँ) (फोटो साभार: भास्कर)
गुजरात के राजकोट में हिंदू लड़की का बलात्कार और धर्मांतरण के आरोप में महबूब बुखारी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि महबूब बुखारी क्रिकेट कोचिंग के बहाने 17 साल की उम्र से पीड़िता का बलात्कार कर रहा है। यही नहीं, उसने लड़की का धर्मांतरण कराकर उसका नाम नाजनीन रख दिया था। पीड़िता गत 26 जून से लापता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता का परिवार मूल रूप से भावनगर जिले के तलाजा का रहने वाला है। लेकिन वे लंबे समय से राजकोट में रह रहे हैं। क्रिकेटर बनने का सपना लिए पीड़ित लड़की ने 17 साल की उम्र में महबूब बुखारी नामक व्यक्ति की क्रिकेट कोचिंग जॉइन की थी। जहाँ महबूब ने इउसे अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। इसके बाद बीते 4 साल से वह पीड़िता को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। पीड़ित लड़की के परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी गत 26 जून को महबूब बुखारी के घर से लापता हुई है।  

‘जय द्वारकाधीश बोलने वाली लड़की लगाती थी अल्लाहु अकबर के नारे’: पीड़ित परिवार

पीड़िता के परिवार ने शिकायत में कहा है “हमारी बेटी कुंडलिया कॉलेज में पढ़ रही है। उसे बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। इसलिए हमने क्रिकेट कोच महबूब अंसारी से बात करके उसे कोचिंग भेजना शुरू कर दिया। वह 17 साल की उम्र से क्रिकेट सीखने जा रही है। लेकिन महबूब बुखारी ने कोचिंग में क्रिकेट सिखाने के बजाय नाबालिग बेटी को प्रेम जाल में फँसाया और उसका ब्रेनवॉश कर दिया। महबूब ने उसका नाम बदलकर नाजनीन रख दिया था। ‘जय द्वारिकाधीश’ बोलने वाली हमारी बेटी ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगी। यही नहीं उसने नमाज पढ़ना भी शुरू कर दिया था।”
पीड़ित लड़की के पिता का कहना है उनकी बेटी अब 21 साल की हो चुकी है। घर पर रहने के दौरान वह अक्सर मस्जिद जाकर नमाज पढ़ती थी। परिवार ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन महबूब के दबाव के आगे वह सब करती जा रही थी। जब पीड़ित लड़की के पिता महबूब बुखारी से बात करने गए तो उसने उन्हें हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही कहा, “मैं तुम्हारी बेटी के साथ तब से बलात्कार कर रहा हूँ जब वह 17 साल की थी। अब तुम जो कर सकते हो कर लो”
महबूब बुखारी की हवस का शिकार हुई पीड़ित हिंदू लड़की के परिजन का कहना है, “मेरी बेटी अक्सर कहती थी कि अब जिंदगी बर्बाद हो गई है। अगर मैं किसी और से शादी करूँगी तो महबूब मुझे मार देगा और अगर मैं महबूब के साथ रही तो वह मेरी जिंदगी नर्क बना देगा। क्रिकेटर बनने का मेरा सपना भी एक तरीके से खत्म हो गया है।” परिजनों का यह भी कहना है कि महबूब के उकसाने और धमकी देने के चलते पीड़ित लड़की ने अपने घर से डेढ़ लाख रुपए के सोने के गहने चुराकर महबूब को दे दिए।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत और बयानों के आधार पर मामला दर्ज करते हुए पुलिस ने आरोपित कोच महबूब बुखारी को गिरफ्तार कर किया है। हालाँकि, गत 26 जून से लापता हिंदू लड़की का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है।