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कर्नाटक : महिला वकील के कपड़े उतरवाए, 36 घंटे बिठा कर रखा, डार्क वेब पर अश्लील वीडियो बेचने की धमकी: CBI-पुलिस बन कर ठगा, ब्लैकमेल कर वसूले 11 लाख रूपए

                                                                                                           प्रतीकात्मक चित्र- वारंगल पुलिस
कहते है आसमान पर तारे बहुत तोड़ने के लिए दिमाग चाहिए। अपने स्कूल दिनों में रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता "अभिनव मानव" पढ़ी थी, जो विज्ञानं के बढ़ते कदमों से शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है। दिनकर जी ने स्पष्ट लिखा था कि विज्ञानं जितनी अधिक प्रगति करेगा, मानव के लिए उतनी ही घातक होगी। इसमें दो राय भी नहीं कि विज्ञानं की प्रगति से देश भी प्रगति करते हैं, लेकिन इसका दुरूपयोग समाज में पल रहे कलंकित लोग भी अपनी जीविका के लिए कर रहे हैं। कर्नाटक से मिल रहे समाचार के अनुसार जब एक वकील तक अपने आपको न बचा पाए, आम नागरिक कैसे बच पाएगा। 

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से साइबर क्राइम का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला वकील को वीडियो कॉल कर के 36 घंटों तक कैमरे पर लाइव बिठाए रखा गया। इस दौरान उसके कपड़े तक उतरवा कर अश्लील वीडियो बनाए गई। वीडियो डार्क वेब पर बेचने की भी धमकी दी गई। महिला वकील को ब्लैकमेल कर के 15 लाख रुपए ठग लिए गए। आरोपितों ने खुद को मुंबई पुलिस और CBI का अधिकारी बताया था। घटना बुधवार (3 अप्रैल, 2024) की है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

फोन लाइन पर आए व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। पीड़िता का रैकेट मानव तस्करी और ड्रग्स रैकेट से जुड़े होने की धमकी देते हुए कॉलर ने अपने मोबाइल पर स्काइप एप डाउनलोड करने के लिए कहा। स्काइप एप डाउनलोड करवाने के बाद आरोपितों ने कॉल को किसी अभिषेक चौहान के पास ट्रांसफर कर दिया। खुद को अभिषेक चौहान बता रहे व्यक्ति ने अपना परिचय CBI अधिकारी के तौर पर दिया। कॉलर ने पीड़िता से कहा कि बैंक के किसी स्टाफ ने उनका खाता मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रयोग किया है।

थोड़ी देर बाद पीड़िता को स्काइप एप के जरिए वीडियो कॉल करने के लिए कहा गया। आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी कि वो लगातार वीडियो कॉल पर बनी रहे। यहाँ तक कि तब भी जब वो सो रही हो। डर के मारे पीड़िता ने ऐसा ही किया। अगले दिन खाता सत्यापित करवाने के नाम पर कॉलर ने पीड़िता से अपने एकाउंट में 10 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए। थोड़ी देर बाद उन्होंने पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से 2-2 लाख रुपए के 2 ट्रांजिक्शन और करवाए। इस दौरान उन्होंने पीड़िता से खुद को घर में बंद ही रखने को कहा था। महिला वकील डर से उनकी हर बात मानती रही।

आरोप है कि 36 घंटे तक चली इस वीडियो कॉल के दौरान कॉलर ने नार्को टेस्ट के नाम पर पीड़िता के सारे कपड़े तक उतरवा दिए। बाद में महिला के अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने की धमकी दे कर उस से 10 लाख रुपए और भेजने के लिए ब्लैकमेल किया जाने लगा। आखिरकार पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने IT एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

जैसे आज मणिपुर के Video से विचलित है देश, वैसे ही कभी तस्वीरों से सन्न रह गया था अजमेर: चौगुने पैसे में बिकते थे स्कूल-कॉलेज की लड़कियों के न्यूड फोटो वाले रील

अजमेर में फार्महाउस में जाकर स्कूल-कॉलेज की लड़कियों का करते थे बलात्कार (फोटो: 'अजमेर 92' ट्रेलर)
आज सोशल मीडिया का जमाना है। ढाई महीने बाद ही सही, मणिपुर में 3 महिलाओं के साथ हैवानियत का वीडियो सामने आया और मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इस पर अपने-अपने स्तर पर टिप्पणी की, कार्रवाई के लिए कहा और आरोपितों की धर-पकड़ हुई। हमें CAA के विरोध में हो रहे धरने और प्रदर्शनों में लग रहे उन नारों को याद करना होगा। जो इस बात को सिद्ध करेंगे कि मणिपुर घटना किसी गहरे षड़यंत्र का हिस्सा है। कितने समय से इसकी पृष्ठभूमि लिखी जा रही होगी। सनातन पर होते हमले और अब मणिपुर। क्या CAA विरोध में बने शाहीन बागों में fuck Hindutva, जब तक हिन्दुस्तान गजवा-ए-हिन्द नहीं बन जाता, तिरंगा थामो और वंदे मातरम बोलो और chicken neck को अलग करेंगे, याद है नारे। नार्थईस्ट का यही मणिपुर ही उसी chicken neck का हिस्सा है। क्या जनता महिलाओं का शोषण करने वाले को अपने वोट की चोट से इन षड्यंत्रकारियों को धूल चटवाएगी? विशेषकर चुनावी हिन्दुओं को, यदि जनता ऐसा नहीं करती है, यह उनकी भयंकर भूल होगी। 
मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाए जाने और उनके साथ गैंगरेप की घटना में देर से ही सही, न्याय हो तो रहा है। लेकिन, अजमेर में अस्सी-नब्बे के दशक में जो हुआ था, उसकी नाबालिग पीड़िताएँ आज दादी-नानी बन गईं लेकिन न्याय नहीं मिला।
चिश्ती की दरगाह पर हुए महिलाओं के यौन-शोषण की जिम्मेवार कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां है, जिन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते भारत के हिन्दू सम्राटों के गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर आतताई मुगलों के खुनी और बलात्कारी इतिहास पर पर्दा डाल उन्हें महान बताकर पढ़ा दिया। ताज महल को मोहब्बत की निशानी बताया जाता रहा, लेकिन कभी ये नहीं पढ़ाया कि 14वे बच्चे को जन्म देते समय मुमताज़ की मौत हुई थी, और अगले ही दिन अपनी साली से निकाह कर लिया। हमें यह नहीं पढ़ाया कि अकबर मीना बाजार क्यों लगाता था और किस शेरनी-किरण देवी- के साहसिक कदम ने मीना बाजार बंद करवाया? (देखिए पेंटिंग)अकबर जिसे महान पढ़ाया जाता रहा, उसी महान अकबर ने इसी शेरनी से अपनी ज़िंदगी की भीख मांगी थी। ठीक वही हाल चिश्ती का भी है, जिसने हज़ारों हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया/करवाया, उनका इस्लामीकरण किया और जिसने इस्लाम स्वीकार नहीं किया उन्हें मरवा दिया गया। आखिर इस हत्यारे की कब्र पर क्यों जाते हैं लोग?   

उस समय सोशल मीडिया का जमाना नहीं था, टीवी मीडिया का भी नहीं। रेडियो पर सिर्फ सरकारी और राष्ट्रीय खबरें चलती थीं। उस दौरान अख़बार और पत्रिकाएँ ही खबरों और विश्लेषण का सबसे बड़ा स्रोत हुआ करती थीं। इसी दौरान ‘दैनिक नवज्योति’ में कुछ ऐसी तस्वीरें छपीं जिसने सबको सन्न कर दिया। ये तस्वीरें थीं उन पीड़िताओं की, जिनकी इज्जत लूटने में दरगाह के खादिमों के परिवार वालों, सफेदपोशों और कांग्रेस नेताओं का गिरोह शामिल था।

इस अख़बार के तत्कालीन संपादक हुआ करते थे दीनबंधु चौधरी, जिनके रिपोर्टर संतोष गुप्ता इस पूरे स्कैंडल की खबर लेकर उनके पास आए थे। खबर छपी भी, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। असल में संतोष गुप्ता ने अजमेर के अनाज मंदिर स्थित ‘भरोसा लेबोरेटरी’, जहाँ फिल्म्स के नेगेटिव पर काम होता था, वहाँ से 4 गुना ज्यादा पैसे देकर फोटो रील्स ले जाते हुए एक व्यक्ति को देखा था। उनके साथ एक दोस्त था, जिसने शुरू में तो आनाकानी की लेकिन बाद में उन्हें 4 रील्स दी।

उन्हें देख कर वो दंग रह गए थे। ‘दैनिक भास्कर’ ने पत्रकार दीनबंधु चौधरी का इंटरव्यू लिया है और उनसे उस जमाने में हुए इस स्कैंडल के बारे में जाना। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि अख़बार ने तस्वीरें छापने का निर्णय लिया और प्राइवेट पार्ट्स पर काली पट्टी डाल कर उन्हें प्रकाशित कर दिया गया। बार एसोसिएशन के वकील अख़बार की प्रतियाँ लेकर डीएम-एसपी के पास गए और फिर इस प्रकरण में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

इन सबकी शुरुआत कहाँ से हुई, इसका किस्सा भी उन्होंने सुनाया। असल में श्रीहरि रोड पर स्थित एक कॉलेज की लड़की एडमिट कार्ड के लिए फीस के लिए पैसे न होने के कारण रोती हुई जा रही थी, जिसे वहाँ से गुजरते कुछ रसूखदार युवकों ने देखा और उसकी मदद की। उसके बाद रोज मुलाकात करते-करते उन्होंने लड़की से जान-पहचान बढ़ा ली और एक दिन वैन में बिठा कर हटूंडी स्थित अपने फार्महाउस ले गए, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी अश्लील तस्वीरें भी ले ली गईं।

फिर तो ब्लैकमेल कर-कर के आए दिन उसका रेप किया जाने लगा। एक दिन दरिंदों ने उस लड़की से अपनी दोस्त को भी लाने को कहा, मना करने पर तस्वीरें शहर भर में फैला देने की धमकी दी। इस डर से वो अपनी दोस्त को लेकर आई। उसके साथ भी वही दरिंदगी दोहराई गई। फिर दूसरी वाली लड़की को अपनी दोस्त को लाने के लिए कहा गया। इस तरह चेन बनता गया और कई लड़कियाँ इस जाल में फँस गईं। दीनबंधु चौधरी ने ये भी बताया कि कैसे उन्हें ये खबर न छपने की धमकी देते हुए हत्या की धमकियाँ आती थीं।

उन्होंने बताया कि आधी रात को उन्हें फोन कॉल्स आते थे, जिनके जवाब में वो बिना डरे कहते थे कि कायरों की तरह छिप कर बात मत करो, सामने आओ। दीनबंधु चौधरी के पिता दुर्गा प्रसाद चौधरी तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के अच्छे दोस्त थे। खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें फोन कॉल कर के ये तस्वीरें न छपने का आग्रह किया और कहा कि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। लेकिन, दीनबंधु चौधरी ने सफेदपोशों को बेनकाब करने के रास्ते पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

उन्हें सुरक्षा के लिए 2 गनर भी मुहैया कराए गए, लेकिन उन्होंने ये भी ठुकरा दिया। आज दीनबंधु चौधरी कहते हैं कि अगर उन्होंने सुरक्षा ले ली होती तो ये सन्देश जाता कि वो डर गए हैं। उन्हें रूट बदल कर ऑफिस जाने-आने की सलाह दी गई। इस घटना की शिकार अधिकतर लड़कियाँ नाबालिग थीं, जिनकी उम्र 16-17 साल थी। लड़कियों को धमकाया जाता था कि किसी को इस बारे में कुछ भी बताने पर ये तस्वीरें लीक कर दी जाएँगी।

लेकिन, जिस लैब में रील्स दिए गए थे तस्वीरें निकलवाने के लिए, उन्होंने इसकी कॉपियाँ अपने पास रख लें। लैब कर्मचारियों की नीयत बिगड़ गई और उनके माध्यम से ही ये तस्वीरें शहर भर में सर्कुलेट होने लगीं। 6 लड़कियों ने आत्महत्या का कदम उठा लिया था। अजमेर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष फारूक चिश्ती, उपाध्यक्ष नफीस चिश्ती और जॉइंट सेक्रेटरी अनवर चिश्ती का नाम इसमें सामने आया। CID को जाँच की जिम्मेदारी मिली, 18 आरोपित बनाए गए।

पीड़िताओं में कई लड़कियों के बारे में कुछ पता ही नहीं चला कि वो कहाँ गईं, कुछ ने नाम-पहचान बदल लिया और कुछ परिवार के साथ कहीं और शिफ्ट हो गईं। ये लड़कियाँ नहीं चाहती थीं कि उनकी पहचान बाहर आए। अजमेर की लड़कियों के रिश्ते होने बंद हो गए थे। बदनामी के डर से वो पीछे हट गई थीं। 12 लड़कियों को केस दर्ज कराने के लिए एक NGO ने राजी किया, लेकिन लगातार धमकियों के कारण 10 पीछे हट गईं। बची हुई 2 ने 16 आरोपितों की पहचान की, उनमें से भी 11 ही गिरफ्तार हुए।

जिन 18 आरोपितों का नाम FIR में था, वो हैं – हरीश दोला (कलर लैब का मैनेजर), फारुख चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट), नफीस चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट), अनवर चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस जॉइंट सेक्रेटरी), पुरुषोत्तम उर्फ बबली (लैब डेवलपर), इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, जमीर हुसैन, अल्मास महाराज, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, नसीम उर्फ टारजन, महेश लोदानी (कलर लैब का मालिक), शम्सू उर्फ माराडोना (ड्राइवर), जऊर चिश्ती (लोकल नेता)।

इनमें से एक सलीम चिश्ती तो इस घटना के सामने आने के 2 दशक बाद 2012 में धराया, बुर्के में। उसे जमानत भी मिल गई। नफीस को पकड़ने में भी पुलिस को 11 साल लग गए थे, वो 2003 में धराया था। सोहैल गनी चिश्ती भी 26 साल तक पुलिस की पहुँच से दूर रहा। उसने दिसंबर 2018 में आत्मसमर्पण किया। उसे भी बेल मिल गई। इकबाल भाटी भी 13 साल बाद 2005 में पकड़ाया और उसे भी जमानत मिल गई। अल्मास महाराज का आज तक कोई अता-पता नहीं है, जबकि उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है।

नसीम उर्फ़ टार्जन जमानत मिलने के बाद कहाँ फरार हुआ, कोई अता-पता नहीं है। मुख्य आरोपित फारूक चिश्ती ने खुद को ‘सिजोफ्रेनिया’ का मरीज बता कर मानसिक रोगी घोषित करवा दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे ये कहते हुए बरी कर दिया कि उसने पर्याप्त सज़ा काट ली है। एक आरोपित पुरुषोत्तम उर्फ़ बबली ने आत्महत्या ही कर ली। उस समय भी सोशल मीडिया होता तो शायद इन आरोपितों की त्वरित गिरफ़्तारी होती और इनका ये खेल इतना लंबा नहीं चलता।

ओडिशा : हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – इस महिला ने 4 साल में खड़ा किया 30 रूपए करोड़ का साम्राज्य

                                      अर्चना नाग के साथ-साथ उसके पति पर भी केस दर्ज हुआ है
हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – ओडिशा की एक महिला ने इन्हीं माध्यमों का इस्तेमाल कर के अपने लिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। उक्त महिला का नाम है अर्चना नाग, जिसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। भाजपा ने इस मामले की CBI जाँच की माँग की है। कलाहांडी की इस 26 साल की महिला की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से भी ज़्यादा रोचक है। कई राजनेताओं, फिल्म निर्माताओं और कारोबारियों से उसके संबंध हैं।

कई ऐसे अमीर लोग हैं, जिन्हें ब्लैकमेल कर के इस महिला ने अपना साम्राज्य बनाया। एक महिला और एक उड़िया फिल्म निर्माता की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ-साथ उसके पति के विरुद्ध भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अर्चना नाग का काम था सोशल मीडिया के माध्यम से अमीरों को दोस्त बनाना और फिर उन्हें अपने जाल में फाँस कर अंतरंग तस्वीरें क्लिक कराना। फिर शुरू होता था ब्लैकमेल का खेल।

कुछ ही वर्षों में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके आलीशान घर में एक सफ़ेद घोड़ा और कई ब्रीड के कुत्तों सहित कई लक्जरी कारें भी हैं। उसी की रैकेट में शामिल एक लड़की की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। उड़िया फिल्म निर्माता श्रीधर मार्ता अब इस मामले पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि इस मामले में राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJD के कई नेता-मंत्री शामिल हैं।

कांग्रेस भी जाँच की माँग कर रही है। अर्चना नाग का शानदार घर और उसमें के इंटीरियर व डेकोरेशन राज्य में चर्चा का विषय बने हुए हैं। लांजीगढ़ में जन्मी अर्चना का पालन-पोषण केसिंगा में हुआ। 2015 में उसने भुवनेश्वर का रुख किया। पहले उसने एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में काम किया, फिर ब्यूटी पार्लर में जॉब किया। 2018 में बालासोर का जगबंधु चाँद से उसकी शादी हुई। ब्यूटी पार्लर में काम करते हुए ही उसने सेक्स रैकेट चलाना शुरू कर दिया था।

राज्य के कई प्रभावशाली व्यक्तियों को अर्चना कंपनी देने के लिए महिलाएँ सप्लाई करती थी। जिस फिल्म प्रोड्यूसर ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिससे उसने 3 करोड़ रुपए माँगे थे। मात्र 4 साल में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके बैंक खाते खँगाले जा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि 25 BJD विधायक उसके नेटवर्क में शामिल हैं। उसका पति एक कार शोरूम चलाता है।