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विदेशी मेहमान के आने पर देशद्रोही औकात दिखाने लगते हैं; मोदी सरकार को हिटलर बन इन सफ़ेदपोशियों पर हंटर चलाना होगा; Indigo का लाइसेंस रद्द हो #Boycott Indigo

                                                        इंडिगो और डीजीसीए (फोटो साभार - AI)
2014 में जब से भारत में मोदी सरकार सत्ता में आयी है किसी भी विदेशी मेहमान के आने पर #Toolkit के बिकाऊ देशद्रोही हरकत में आ जाते हैं। CAA विरोध से लेकर अब एयरलाइन्स द्वारा हुए उपद्रव प्रत्यक्ष प्रमाण है। विदेशी मेहमान के भारत आने पर 
#Toolkit के बिकाऊ देशद्रोही कोई नया मुद्दा लेकर देश का माहौल ख़राब करते हैं। इतना ही नहीं कुछ समय पहले कुछ विदेशी हमारी संसद प्रणाली देखने आये तो संसद में बैठे सफेदपोशी गुंडों ने संसद में कितना हंगामा किया था। और अब जॉर्जिया के कुछ मेहमान आये तो उनके सामने इन सफेदपोशी गुंडों ने हंगामा कर देश को कलंकित करने की कोशिश की।  Indigo पर सख्त कार्यवाही करनी होगी। इसको प्रतिबंधित करना होगा। जनता को भी Indigo एयरलाइन का बहिष्कार करना होगा। जिस समस्या पर  रूस के राष्ट्रपति पुतिन के आने पर उपद्रव किया क्या वह पुतिन के जाने के बाद नहीं किया जा सकता था? आखिर इन  #Toolkit के बिकाऊ देशद्रोहियों पर मोदी सरकार हिटलर बन कब हंटर चलाएगी? इन उपद्रवियों पर मोदी सरकार को हंटर चलाना होगा। सरकार को इन उपद्रवियों उग्र होना पड़ेगा। जो किसी विदेशी मेहमान के भारत में आने पर उपद्रवियों द्वारा उपद्रव करने से पहले हज़ार बार सोंचे। 

    

भारत की सबसे बड़ी कम लागत वाली एयरलाइन ‘इंडिगो’ पिछले चार दिनों से उड़ान संकट से जूझ रही है। शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को देशभर के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर इंडिगो की उड़ानें रद्द होने की घटनाओं ने यात्री और अधिकारी दोनों को हैरान कर दिया।

दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी घरेलू उड़ानों को आधी रात तक रद्द कर दिया गया, जबकि बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कम से कम 102 उड़ानें रद्द हुईं। यह स्थिति उस दिन आई, जब इंडिगो ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को बताया कि 8 दिसंबर 2025 से उड़ानों को सीमित किया जाएगा ताकि उड़ान हो रही रुकावट को कम किया जा सके।

एयरलाइन ने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन दिनों तक विलंब और रद्द होने वाली उड़ानों की स्थिति बनी रहेगी। हालाँकि, एयरलाइन ने यह भी कहा कि फरवरी 10, 2026 तक संचालन पूरी तरह से स्थिर होने की उम्मीद है। इस दौरान, इंडिगो ने नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के तहत रात की उड़ानों में कमी के नियमों से छूट माँगी है। उसने कहा है कि अभी और फ्लाइट्स कैंसिल होंगी और सबकुछ सही होने में करीब 10 दिन का समय लग जाएगा।

वहीं, DGCA ने कहा है कि वो इस छूट पर विचार करेगी, लेकिन इसके लिए एयरलाइन को विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। उसमें पायलट और क्रू की भर्ती, प्रशिक्षण, रोस्टर पुनर्गठन और सुरक्षा योजनाओं का विवरण होगा।

केंद्र सरकार ने इंडिगो की लगातार उड़ान रद्द होने की स्थिति में DGCA के नए FDTL नियमों को तुरंत रोक दिया है और मामले में उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच यह पता लगाएगी कि इंडिगो ने नए नियमों की तैयारी क्यों नहीं की और इतनी बड़ी अव्यवस्था कैसे हुई। मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि उड़ान सेवाएँ जल्द सामान्य हों और जहाँ भी लापरवाही मिले, कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद सरकार की प्रतिक्रिया

 देश भर में इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने और शेड्यूल बिगड़ने के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने DGCA द्वारा लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को तुरंत प्रभाव से रोक दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुविधा को देखते हुए लिया गया है, ताकि समय पर यात्रा पर निर्भर बुजुर्गों, छात्रों और मरीजों को राहत मिल सके।

सरकार ने साफ कहा है कि FDTL आदेशों को रोका गया है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी किसी भी बात पर कोई समझौता नहीं किया गया है। मंत्रालय ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत ऐसे कदम उठाएँ, जिससे उड़ानें जल्द से जल्द सामान्य हो सकें और यात्रियों को काम से काम परेशानी हो।

इसी के साथ, इंडिगो में हुई भारी अव्यवस्था पर सरकार ने उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जाँच में यह पता लगाया जाएगा की आखिर इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट कैंसिल क्यों हुईं और इंडिगो ने DGCA के नए नियम लागू होने के बावजूद पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की। आरोप है कि जहाँ बाकी एयरलाइंस ने समय रहते नए क्रू और पायलटों की भर्ती की, वहीं इंडिगो ने भर्ती के बिना अपने ऑपरेशन लगातार बढ़ाए, जिसके कारण यात्रियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।

जाँच में इंडिगो के आंतरिक प्लानिंग, स्टाफ मैनेजमेंट और DGCA के नियमों को लागू करने की तैयारी की डीटेल से समीक्षा की जाएगी। सरकार ने कहा है कि जहाँ भी लापरवाही या जिम्मेदारी तय होगी, कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न पैदा हो।

मंत्रालय ने 24×7 कंट्रोल रूम भी बनाया है, ताकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके। सरकार ने उम्मीद जताई है कि अगले एक-दो दिनों में उड़ानें सामान्य होने लगेंगी और तीन दिनों के भीतर स्थिति पूरी तरह ठीक कर दी जाएगी।

क्या है समस्या का कारण ?

इस समस्या के पीछे मुख्य कारण DGCA के नए FDTL नियम हैं, जो पायलटों और उड़ान कर्मचारियों के लिए अधिक आराम करने और थकान को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

इन नियमों के तहत सात दिनों में पायलटों को 36 से 48 घंटे का आराम देना होगा, जिसके कारण लगातार काम करने वाले घंटे कम किए गए हैं। जुलाई और नवंबर 2025 में दो चरणों में लागू हुए इन नियमों के कारण इंडिगो ने अपनी उड़ान योजनाओं का सही अंदाज नहीं लगा सके।

एयरलाइन ने मान लिया कि उनके पास पर्याप्त पायलट और क्रू नहीं हैं, क्योंकि जिन पायलटों को पहले रोस्टर में ऑन ड्यूटी दिखाया गया था, उन्हें अब उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी। इंडिगो सामान्य परिस्थितियों में हर दिन 2,200 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती है, जिनमें कई रात की उड़ानें शामिल हैं।

एयरलाइन ने यह भी माना कि FDTL नियमों के दूसरे चरण को लागू करते समय उनकी प्लानिंग और गिनती में गलती हो गई। असल में उन्हें जितने पायलट और क्रू की जरूरत थी, वह उनकी उम्मीद से ज़्यादा निकली।

अधिकारिक बयान और एयरलाइन की प्रतिक्रिया

इस पूरे परेशानी के दौरान इंडिगो ने कई बार यात्रियों और अधिकारियों से माफी माँगी है। एयरलाइन ने एक्स पर कहा कि पिछले दो दिनों में उनके नेटवर्क में काफी समस्याएँ देखने को मिला है और उन्होंने प्रभावित सभी यात्रियों से माफी माँगी।
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने कर्मचारियों और यात्रियों से कहा कि सेवाओं और टाइम पर काम करने की व्यवस्था फिर से ठीक करना आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी टीम सरकार और DGCA के सहयोग से स्थिति को सामान्य बनाने में पूरी मेहनत कर रही है।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि 8 दिसंबर 2025 से उड़ानों की संख्या कम कर दी जाएगी ताकि व्यवधान कम हो सके और संचालन को स्थिर किया जा सके। DGCA ने एयरलाइन को निर्देश दिए हैं कि वह क्रू भर्ती और प्रशिक्षण, रोस्टर पुनर्गठन, सुरक्षा उपायों और तत्काल सुधारात्मक योजनाओं का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करे।
इसके साथ ही एयरलाइन को हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। DGCA इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखेगी और यात्रियों की मदद सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटीज को निर्देशित किया गया है।
DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने क्रू मेंबर्स को मिलने वाले साप्ताहिक अवकाश से जुड़ी अपनी पुरानी गाइडलाइन वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब पायलट और क्रू की भारी कमी की वजह से IndiGo समेत कई एयरलाइनों के संचालन में बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं।
नई अधिसूचना में DGCA ने कहा है कि मौजूदा ऑपरेशनल अव्यवस्था और एयरलाइनों से मिली शिकायतों को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। अब पहले वाला नियम, जिसमें कहा गया था कि क्रू के साप्ताहिक आराम की जगह कोई छुट्टी नहीं लगाई जा सकती, तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है।
इस फैसले का मतलब यह है कि एयरलाइंस अब पायलटों और क्रू की कमी को देखते हुए शेड्यूल को थोड़ी छूट के साथ चला सकेंगी, ताकि उड़ानों का संचालन स्थिर रहे और अव्यवस्था कम हो सके। यह कदम मौजूदा संकट को संभालने के लिए तत्काल राहत देने जैसा माना जा रहा है।

जनता की प्रतिक्रिया और व्यापक असर

इसका असर यात्रियों पर सबसे अधिक हुआ है। दिल्ली में अकेले शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को 220 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, बेंगलुरु में लगभग 100 और हैदराबाद में लगभग 90 उड़ानें रद्द हुईं।

यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए, जिसमें लम्बी प्रतीक्षा, भोजन और पानी की कमी और सही जानकारी न मिलने जैसी समस्याओं का जिक्र था। कई यात्री 12 से अधिक घंटे तक हवाई अड्डों पर फंसे रहे।

इंडिगो ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे उड़ान की स्थिति की जाँच करें, समय से पहले हवाई अड्डे पहुँचें और आवश्यक वस्तुएँ जैसे पानी, स्नैक्स और दवाइयाँ साथ रखें। इस दौरान पायलट संघों ने कहा कि एयरलाइन की प्लानिंग ठीक नहीं थी।

उनके हिसाब से यह पूरा सँकट इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी ने समय पर लोगों की भर्ती नहीं की और स्टाफ को संभालने की रणनीति भी ठीक नहीं थी। एयरलाइन पायलट संघों का कहना है कि FDTL नियमों की तैयारी के दो साल का समय मिला, लेकिन एयरलाइन ने इसे सही तरीके से लागू नहीं किया। हालाँकि नियम सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन एयरलाइन के संचालन और बड़ी संख्या में उड़ानों के कारण समस्या इतनी बढ़ गई।

शराब पिए हुए मस्जिद में क्यों नहीं गया, मंदिर में ही क्यों गया? बेंगलुरु में देवी-देवताओं की मूर्ति पर बांग्लादेशी घुसपैठिए ने फेंकी चप्पल, मंदिर में लगाए ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे

          हिंदू मंदिर में घुसकर देवताओं की मूर्तियों का अपमान करने वाला बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार
बेंगलुरु के देवराबीसनहल्ली गाँव में एक मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति को अपमानित करने के आरोप में 45 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक कबीर मंडल को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित ने कथित तौर पर मंदिर में घुसकर ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए और मूर्तियों पर चप्पल से हमला करने की कोशिश की।

जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने और अपमान करने के इरादे से हरकतें करने के आरोप में केस दर्ज किया है। कबीर मंडल ने गर्भगृह के बाहर रखी दो मूर्तियों में से एक को निशाना बनाया। वह मूर्तियों पर चप्पल से हमला करने की कोशिश कर रहा था।

स्थानीय लोगों ने पकड़ा, पिटाई भी की

घटना के समय आरोपित कथित तौर पर शराब के नशे में था। मंदिर में हुई इस हरकत को देखकर स्थानीय लोग तुरंत हरकत में आए। उन्होंने कबीर मंडल को तुरंत पकड़ लिया और उसे एक खंभे से बाँध दिया। उन्होंने पुलिस के आने तक उसे वहीं रोके रखा। इस दौरान आक्रोशित भीड़ में से कुछ लोगों ने उसकी पिटाई भी की। बाद में, पुलिस मौके पर पहुँची और आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

सवाल यह है कि शराब पिए हुए किसी मस्जिद में क्यों नहीं गया, मंदिर में ही क्यों गया? उपद्रवी जानता था कि शराब पीकर किसी मस्जिद में ऐसी हरकत करने का क्या अंजाम होगा। मंशा साफ है इस हरकत के लिए उसे साम्प्रदायिक तनाव बनाने के लिए भेजा गया था। रिमांड पर लेकर पुलिस को सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए।  

पुलिस जाँच में अवैध निवास का खुलासा

पुलिस जाँच में सामने आया कि गिरफ्तार किया गया आरोपित कबीर मंडल बांग्लादेशी नागरिक है। वह बेंगलुरु में अवैध रूप से रह रहा था और मोची का काम करता था। पुलिस ने उस पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने और अपमान करने के इरादे से की गई हरकतों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

पुलिस उसके इमिग्रेशन दस्तावेज और बेंगलुरु में रहने की वैधता की भी जाँच कर रही है। इसके साथ ही, पुलिस ने भीड़ द्वारा की गई पिटाई के मामले को भी संज्ञान में लिया है। अज्ञात लोगों के खिलाफ इस मामले में अलग से केस दर्ज किया गया है।

मंदिर बचाने के लिए मुस्लिमों ने बनाई ह्यूमन चेन; लिबरलों ने खूब गढ़ा था नैरेटिव, पर बच नहीं पाए बेंगलुरु के इस्लामी दंगाई: इकरामुद्दीन, आतिफ और सैयद को हो गयी 7 साल की सजा

                                             बेंगलुरु में इस्लामी भीड़ ने थाने को निशाना बनाया था
भारत की जनता संसद के बर्बाद होते दिन शायद अपने होशोहवास में देख रही होगी। जो संसद से बाहर बहस की बात कर रहे अंदर क्यों मवालियों के चीखते चिल्लाते हैं। तमीज से बैठ बहस करने में क्या मुसीबत आ रही है। कहते हैं रोज 2.5 लाख रूपए एक मिनट का बर्बाद हो रहा है। इसीलिए विपक्ष को अपशब्दों से अलंकृत किया जा रहा है। जनता भी शायद धतूरे के नशे रहती है। जो उपद्रवी विपक्ष के मकड़जाल से बाहर नहीं आती। ये जो संविधान बचाने के लिए रो रहा है गलत नहीं रो रहा। क्योकि मोदी सरकार संविधान में उन सभी संशोधनों को हटाना चाहती है जो शरीयत के हिसाब से किये गए हैं। संविधान के मूल स्वरुप को बदल रखा है। मस्जिदों में मीटिंग की जा रही है, जमीअत की मीटिंगों में जा रहे हैं, क्यों? मुसलमानों के वोट जो चाहिए। सनातन के लिए अपशब्द निकालने वालों ने अगर माँ का दूध पिया है तो इस्लाम के खिलाफ बोलकर दिखाएं। गुफाओं में छिपकर बैठ जाएंगे। सेकुलरिज्म के नाम से हिन्दुओं को गुमराह किये हुए हैं और हिन्दू महापागल बन गुमराह हो रहा है।    

बेंगलुरु की एक विशेष NIA अदालत ने अगस्त, 2020 में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ के दंगे पर सजा सुनाई है। बेंगलुरु की अदालत ने इस्लामी भीड़ के पुलिस थाने पर हमले के मामले में यह सजा सुनाई है। इस दंगे में इस्लामी भीड़ ने कांग्रेस विधायक के घर पर हमला बोला था और पुलिस थानों को भी जला दिया था। इस हमले में प्रतिबंधित संगठन PFI और उसकी राजनीतिक विंग SDPI के लोगों के शामिल होने के सबूत NIA को मिले थे। दंगे के बाद लिबरल-वामपंथी गैंग मुस्लिमों की ‘ह्यूमन चेन’ वाला नैरेटिव चलाया था।

NIA कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?

बेंगलुरु की एक विशेष NIA अदालत ने सैयद इकरामुद्दीन उर्फ सैयद नवीद, सैयद आतिफ और मोहम्मद आतिफ को सजा सुनाई है। उन्हें 7 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है। उन्होंने इस मामले में आरोप तय किए जाने के दौरान ही इस्लामी भीड़ वाले दंगे में शामिल होना कबूल कर लिया था।

इन तीनों को NIA कोर्ट ने UAPA, कर्नाटक सम्पत्ति एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई है। NIA कोर्ट को सरकारी वकील प्रसन्ना ने जनता में विश्वास वापस पैदा करने वाला बताया है।

उन्होंने कहा, “यह फैसला पुलिस बलों में जनता का विश्वास बहाल करता है और साथ ही PFI को गैरकानूनी घोषित करने के केंद्र के फैसले को वैध ठहराता है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पर हमले जनता का विश्वास डिगाते हैं।

उन्हें जहाँ इस मामले में सजा सुना दी गई है, बाकी आरोपितों के खिलाफ अभी मुकदमा चालू होना है। इस मामले में 199 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था जबकि 180 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए थे। इनके खिलाफ अभी आरोप तय करके मुकदमा चालू किया जाना है और बहस होनी है।

इस्लामी भीड़ ने थाने-कांग्रेस MLA के घर पर किया था हमला

11 अगस्त 2020 की रात पूर्वी बेंगलुरु में दंगे और आगजनी का भीषण नज़ारा देखने को मिला था। केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। 1000 से भी अधिक की इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया था और तोड़फोड़ शुरू कर दी थी।

इस्लामी भीड़ का कहना था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया है। उन्होंने आसपास कड़ी हिन्दुओं की कई गाड़ियाँ जला दी थीं। घंटों तक यह दंगा फसाद चलता रहा था। उन्होंने विधायक की बहन के घर भी हमला किया था। इसके अलावा DJ हल्ली और HJ हल्ली पुलिस थानों को भी आग लगा दी थी।

इस मामले में बाद में हुई जाँच में सामने आया था कि इस्लामी भीड़ का यह दंगा पूर्व प्रायोजित था। पता चला था कि PFI से जुड़े मुजम्मिल पाशा और SDPI के लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जाँच NIA को सौंपी गई थी, इसमें सामने आया था कि दंगा करने को पैसा भी बांटा गया था। तीन दंगाई मारे भी गए थे।

लिबरल-वामपंथी गैंग चला रहा था ‘ह्यूमन चेन’ वाली थ्योरी

जहाँ एक ओर इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ आधे बेंगलुरु को जलाने पर तुली हुई थी तो वहीं लिबरल-वामपंथी गैंग इस दौरान उसे बचाने को अलग ही थ्योरी गढ़ रहा था। इस दौरान उन्होंने एक वीडियो वायरल किया था जिसमें एक मुस्लिम भीड़ एक मंदिर के बाहर खड़ी थी।

लिबरलों का दावा था कि यह मुस्लिम इस मंदिर को मानव शृंखला बना कर दंगाइयों से बचा रहे थे। इस वीडियो को राजदीप सरदेसाई जैसे लिबरल पत्रकारों से लेकर कांग्रेस नेताओं तक ने खूब प्रसारित किया था। हालाँकि, बाद में यह भी सामने आया था कि इस वीडियो को संभवतः स्क्रिप्ट करके बनाया गया था क्योंकि इसे जल्दी अपलोड किया जाना था।

कर्नाटक : ‘अब सिर्फ कैश, नो UPI’: व्यापारियों ने बंद किया डिजिटल लेन-देन, कांग्रेस सरकार पर लगाया गलत तरीके से ‘वसूली’ का इल्जाम

बेंगलुरु में व्यापारियों ने रोका डिजिटल लेन-देन ( फोटो साभार- NBT)
बेंगलुरु के व्यापारियों ने 25 जुलाई को बंद का आह्वान किया है। हजारों छोटे-छोटे दुकानदार और व्यापारी कर्नाटक व्यावसायिक टैक्स विभाग के जीएसटी नोटिस का विरोध कर रहे हैं। ये नोटिस उन व्यापारियों को दिया गया है जिन्होंने 40 लाख रुपए से अधिक की कमाई डिजिटल माध्यम से की है। इसको देखते हुए अब डिजिटल पेमेंट को व्यापारी ‘नो’ कह रहे हैं।

बेंगलुरु यूपीआई को तेजी से अपनाने वाले शुरुआती शहरों में से एक रहा है, लेकिन अब इसमें भारी उलटफेर देखने को मिल रहा है। शहर भर के छोटे विक्रेता यूपीआई लेनदेन छोड़कर नकदी की ओर लौट रहे हैं।

14000 व्यापारियों पर गिरी गाज

वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई लेन-देन के आधार पर विभाग ने 14,000 ऐसे व्यापारियों की पहचान की है जिनका डिजिटल ट्रांसेक्शन 40 लाख रूपए (वस्तुओं के लिए) या 20 लाख रूपए (सेवाओं के लिए) से ज्यादा थे। फिर भी उन्होंने जीएसटी के नियम के मुताबिक पंजीकरण नहीं कराया। 5,500 से ज्यादा व्यापारियों को टैक्स देने के लिए नोटिस भी भेजे गए। कुछ व्यापारियों ने तो एक ही पैन कार्ड पर 2 करोड़ रूपए से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन किए।

सड़क किनारे छोटे-छोटे स्टॉल लगाने वालों और दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट को शुरुआत में ही अपनाया था। उन्हें लगता है कि अब उन्हें इसका दंड मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि 3 हजार रुपए प्रतिदिन बेचने वाले व्यापारियों को भी नोटिस भेजा गया है। जबकि उसका वास्तविक टर्नओवर कम है। व्यापारियों का कहना है कि व्यापार और व्यक्तिगत या पारिवारिक लेन-देन को व्यावसायिक आय में शामिल करने की गलती की जा रही है।

व्यापारियों का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें उत्पीड़न, सामान ज़ब्त होने और यहाँ तक कि सार्वजनिक स्थानों से बेदखल किए जाने का डर है। फेडरेशन ऑफ बेंगलुरु स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव, एडवोकेट विनय के. श्रीनिवास कहते हैं, “कई व्यापारियों को जीएसटी अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और नगर निगम अधिकारियों द्वारा बेदखल किए जाने का डर है।”

व्यापारियों ने तीन दिन तक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। 23 जुलाई को दूध की बिक्री बंद रहेगी। 24 जुलाई को गुटखा और सिगरेट की बिक्री बंद रहेगी और 25 जून को बेकरी, मसालों की दुकानें और छोटी दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।

डिजिटल पेमेंट बंद किया

दुकान के बाहर लगे क्यूआर कोड हटाए जा रहे हैं। केआर मार्केट, शिवाजीनगर, होरमावु और कई अन्य इलाकों में “नो यूपीआई, ओनली कैश” के पोस्टर लगे हैं। व्यापारी जाँच से बचने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल बंद कर रहे हैं। इससे भारत के डिजिटल पेंमेंट का लक्ष्य कमजोर पड़ रहा है। होरमावु के एक दुकानदार शंकर ने बताया, “मैंने यूपीआई स्वीकार करना पूरी तरह से बंद कर दिया है।”

सरकार का रवैया

नोटिस केवल तय सीमा के उल्लंघन करने वालों को ही भेजे जाने चाहिए। उन्हें जीएसटी या कंपोजिशन स्कीम के तहत पंजीकरण कराने का आग्रह करना चाहिए। पूर्व इनकम टैक्स अधिकारी एच.डी. अरुण कुमार जोर देकर कह रहे हैं कि अधिकारियों को “जुर्माना लगाने से पहले डेटा की पुष्टि करनी चाहिए”।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बेंगलुरु की तरह मुंबई जैसे दूसरे शहरों ने अगर राजकोषीय घाटा भरने के लिए ऐसा रवैया अपनाया तो व्यापारी वर्ग के लिए काफी दिक्कत होगी। राज्यों को अपने राजकोषीय घाटा भरने के लिए दूसरा तरीका अपनाना चाहिए । दरअसल कल्याणकारी योजनाओं के दबाव के बीच कर्नाटक का लक्ष्य 2025-26 में 1.20 लाख करोड़ रूपए एकत्र करना है।

छोटे व्यापरियों का डिजिटल ट्रांजेक्शन से विमुख होना शुभ लक्षण नहीं है। नीति निर्माताओं ने बिजनेस में पारदर्शिता लाने और न्यायसंगत प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाने के मकसद से डिजिटल ट्रांजेक्शन शुरू किया था। 25 जुलाई के बंद से इसे धक्का लगेगा। वहीं राज्यों के लिए भी ये सबक है।

साउथ ईस्ट बेंगलुरु : अपार्टमेंट में सीवेज की सफाई के दौरान निकला कुछ ऐसा, फटी रह गईं की आंखें, इलाके में मच गई दहशत

                                                                                                                                        साभार 
16 जून को साउथ ईस्ट बेंगलुरु में एमएन क्रेडेंस फ्लोरा अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स के सीवेज की सफाई करते समय मजदूरों को कुछ ऐसी चीजें मिलीं, जिन्हें देखकर वे चौंक गए। उन्हें सीवेज में इंसान जैसी खोपड़ी और हड्डियां मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूरों ने तुरंत रेजिडेंट्स एसोसिएशन को इसकी सूचना दी, जिन्होंने पुलिस को बुलाया।

अपार्टमेंट के टैंक में मानव कंकाल मिलने से मची सनसनी

अपार्टमेंट की पार्किंग के नजदीक सीवेज में इंसान जैसी हड्डियां मिलीं। वहीँ, अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि ये हड्डियां इंसानों की हैं या जानवरों की। पुलिस ने बताया कि मिली हड्डियों को फोरेंसिक लैब भेज दिया गया है और जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

अवशेषों को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया

जब पुलिस मामले की जांच करने पहुंची, तो अपार्टमेंट के कुछ लोगों ने बताया कि पहले यह जगह श्मशान हुआ करती थी, इसलिए ये हड्डियां वहीं की हो सकती हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने तक कुछ भी कहना मुश्किल है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय निकाय द्वारा कई बार नोटिस जारी करने के बाद ही एसोसिएशन ने सीवेज की सफाई करवाई।

अपार्टमेंट में करीब 16 सीवेज पिट हैं। लेकिन हड्डियां सिर्फ एक पिट में मिलीं। अपार्टमेंट में करीब 45 फ्लैट हैं। इनमें से कई लोग दस साल से यहां रह रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अजीबोगरीब घटना से निवासियों में डर का माहौल है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 194 (3) (iv) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

“पाकिस्तान को मोदी के घर पर बम फेंकना चाहिए…”, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बंगलुरु के नवाज़ ने बनाया विवादित वीडियो, गिरफ्तार

                                                                                                                                                                          साभार 
भारत में बैठे पाकिस्तानपरस्त भूल रहे हैं कि यह 2014 से पहले वाला भारत नहीं। अब आस्तीन के साँपों को नहीं बक्शा जाएगा। इतना ही नहीं शोभायात्राओं पर पत्थरबाज़ी करने वालों पर इसी तरह की सख्ती करने का समय आ गया है। 
बेंगलुरु पुलिस ने 25 साल के नवाज को गिरफ्तार किया है। इलेक्ट्रीशियन नवाज बेंगलुरु के मंगम्मानपाल्या का रहने वाला है। उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देने वाला वीडियो पोस्ट किया था।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ चलाये गए ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। इसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 9 आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया। हालांकि, इस सफल ऑपरेशन के खिलाफ और दुश्मन देश पाकिस्तान के पक्ष में देश के भीतर ही छिपे कुछ आस्तीन के सांप खुलकर बोल रहे हैं। जिनका इलाज भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में बंगलुरु के नवाज़ को भी गिरफ्तार किया गया है।

वायरल वीडियो में उसने कहा है कि “आज भारत और पाकिस्तान के बीच जंग चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर पर अभी तक बमबारी क्यों नहीं की गई? जब लोग शांति से रह रहे थे, तब पीएम मोदी ने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी। सबसे पहले उनके आवास पर बमबारी होनी चाहिए।” वीडियो के वायरल होते ही पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और नवाज को हिरासत में ले लिया। नवाज से पूछताछ के बाद परप्पन आग्रहारा जेल भेज दिया गया है। 

इस बीच ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अब तक कई ऐसे लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी हैं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित टिप्पणी की थी। ऐसा ही एक मामला कर्नाटक के बेंगलुरू से सामने आया है। यहां पीएम मोदी के खिलाफ भड़काऊ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में बेंगलुरू पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। दरअसल, शहर के मंगअम्मन पाल्या के रहने वाले नवाज़ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि उसे बंदेपाल्या पुलिस ने जेल भेज दिया है। दरअसल जो वीडियो नवाज ने बनाया है, उसमें वह कह रहा है, ‘भारत और पाकिस्तान के सैनिकों के बीच संघर्ष के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी घर पर बम क्यों नहीं गिर रहे हैं। सारे फसाद की जड़ वही हैं। पाकिस्तान को मोदी के घर पर बम फेंकना चाहिए।’

मुंबई में भी पुलिस ने की कार्रवाई

ऑपरेशन सिंदूर के तहत इसी तरह महाराष्ट्र के कुर्ला क्षेत्र के निवासी 20 वर्षीय छात्र को सैन्य हमलों के संबंध में कथित रूप से भारत विरोधी टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में एक व्यक्ति को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं मुंबई के ही एक अन्य मामले में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली एक महिला को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। बता दें कि महिला ने ऑपरेशन सिंदूर को खारिज करने के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए महिला ने व्हाट्सऐप पर स्टेटस लगाया और कहा, ‘‘जब सरकारें लापरवाही से फैसले लेती हैं, तो इसकी कीमत सत्ता में बैठे लोगों को नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के निर्दोष लोगों को चुकानी पड़ती है।’’

बेंगलुरु : ओड़िया साइनबोर्ड देख भड़का कन्नड़ गुंडा, धमकी से डर कर रेस्टोरेंट मालिक ने बोर्ड उतारा

                                                                           ओडिया खाना
कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थानीय भाषा के चलते एक और विवाद सामने आया है। यहाँ ‘डिलिशियस पखाल (Delicious pakhal)’ नाम के ओड़िया रेस्टोरेंट के मालिक को एक कन्नड़ भाषी आदमी ने आकर धमकी दी कि वो रेस्टोरेंट के ऊपर से उस साइनबोर्ड को हटाए जिसमें ओड़िया भाषा में रेस्टोरेंट का नाम लिखा है।

राहुल गाँधी द्वारा खोली गयी 'मौहब्बत की दुकान' में बिकने वाले माल की असलियत सामने आती ही रहती है। जब 'मौहब्बत की  दुकान' का ये हाल है नफरत की दुकान का होने पर क्या होता अंदाजा लगाया जा सकता है।    

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कार में बैठा युवक रेस्टोरेंट के कर्मचारी को बुलाता है और पूछताछ शुरू करता है। वह पूछता है कि आखिर बोर्ड पर ओड़िया भाषा में रेस्टोरेंट का नाम क्यों लिखा है?

दिलचस्प बात ये है कि ये सवाल वो व्यक्ति तब करता है जब रेस्टोरेंट पर कन्नड़ भाषा में भी रेस्टोरेंट का नाम साफ लिखा था। व्यक्ति का रवैया परखते हुए रेस्टोरेंट का कर्मचारी बहुत सहजता से जवाब देता है, “इस रेस्टोरेंट में ओडिशा का खाना मिलता है। यह खाना 90 फीसदी ओड़िया लोगों के लिए होता है इसलिए इस साइनबोर्ड को लगाया गया है।”

अजीब बात ये है कि ओड़िया रेस्टोरेंट में काम करने वाला कर्मचारी पूरी तरह से कन्नड़ में बात कर रहा था, फिर भी उस कार सवार का गुस्सा बढ़ता गया। उसने कर्मचारी को धमकी दी कि वह अपने रेस्टोरेंट से ओड़िया भाषी बोर्ड हटा दे, क्योंकि वो एक हफ्ते बाद आकर दोबारा देखेगा।

उसने कहा, “बेंगलुरु में काम करने के लिए कन्नड़ भाषा और कन्नड़ लोगों को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए। क्या आपने अन्य राज्यों को हमारी भाषा में बोर्ड लगाने की अनुमति देते देखा है? यहाँ उस भाषा की अनुमति नहीं है। इसे हटा दें। मैं एक हफ़्ते में वापस आऊँगा।”

इस घटना के बाद उस रेस्टोरेंट के मालिक ने किसी विवाद से बचने के लिए अपने रेस्टोरेंट से वो बोर्ड हटा दिया जिसकी नई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर हैं। लेकिन, इस बीच लोग पुरानी वीडियो को शेयर करते हुए कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। खुद कन्नड़ भाषी लोग ये कह रहे हैं कि जब रेस्टोरेंट का मालिक कन्नड़ में बात कर रहा है, साइनबोर्ड सिर्फ मार्केटिंग के लिए लगाया है तो दिक्कत क्या है? वो लोग ओड़िया व्यंजन परोसते हैं तो इतना तो किया ही जा सकता है।

कर्नाटक : 45% बढ़ा मेट्रो का किराया, पहले बस फेयर में हुआ था 15% इजाफा: लोगों ने पूछा- क्या यही कांग्रेस का ‘खटाखट मॉडल’?

बेंगलुरु मेट्रो 
कर्नाटक सरकार द्वारा फ्री बस यात्रा की रेवड़ी बाँटने के बीच अब आम जनता पर और बोझ डालने की तैयारी हो गई है। सरकार द्वारा फ्री यात्रा की सुविधा का ऐलान करने के बाद सरकार का खजाना खाली हो गया था और अब इसे भरने के लिए कर्नाटक सरकार ने जनता के परिवहन खर्च को बढ़ाने का कदम उठाया है। कर्नाटक में राज्य परिवहन निगम द्वारा बसों का किराया 15 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद अब बेंगलुरु मेट्रो (Namma Metro) के किराए में भी 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 20 जनवरी से लागू होने की संभावना है, जिससे मेट्रो में सफर करने वालों को बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 17 जनवरी को अपनी बोर्ड मीटिंग में मेट्रो किराए में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वृद्धि के तहत, मेट्रो का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो जाएगा, जबकि अधिकतम किराया 60 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाएगा। इस वृद्धि का कारण मुख्य रूप से ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बिजली के खर्च और पुराने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

BMRCL अधिकारियों के अनुसार, नए किराए की घोषणा जल्दी ही की जाएगी और यह बढ़ोतरी 20 जनवरी से लागू हो सकती है। इसके अलावा स्मार्टकार्ड उपयोगकर्ताओं को 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जो मेट्रो यात्रा को थोड़ा सस्ता बनाए रखने में मदद करेगा। हालाँकि यह फैसला यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि 45 प्रतिशत की वृद्धि एक बड़ा बदलाव है और इस कारण बेंगलुरु में मेट्रो के उपयोगकर्ता खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं।

इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। लोग कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर तंज भी कस रहे हैं।

शिल्पा नाम की एक्स यूजन ने इसे ‘खटा खट कॉन्ग्रेस मॉडल’ करार दिया।

सिद्दाराम नाम के यूजर ने इसे कॉन्ग्रेस की कार्यप्रणाली करार दिया है। उन्होंने नम्मा मेट्रो के किराए की बढ़ोतरी को जनता के साथ धोखा कहा।

बसों में बढ़ाया गया था 15% किराया

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी बसों के किराए में की थी, और इसके पीछे भी वही कारण थे – ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया था कि इन बढ़ती लागतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन परिवहन सेवाओं में लगातार बढ़ती लागत के कारण राज्य सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईंधन और कर्मचारियों के खर्च में बढ़ोतरी के कारण राज्य परिवहन निगमों को लगभग 74.84 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे भरने के लिए यह कदम जरूरी था।
मेट्रो और बसों के किराए में बढ़ोतरी का यह कदम तब उठाया गया है, जब कर्नाटक सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी थी और अब इसे भरने के लिए आम आदमी को और अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव केवल मेट्रो और बसों के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बेंगलुरु शहर के ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। कई लोग पहले ही बढ़ते हुए किराए की वजह से मेट्रो और बसों के उपयोग में संकोच कर सकते हैं, जिससे निजी वाहन उपयोग में वृद्धि हो सकती है और इससे शहर में ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है।

कर्नाटक : कांग्रेस सरकार का एक और घोटाला आया सामने, मुख्यमंत्री की पत्नी का भी नाम


कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का एक और घोटाला सामने आया है। इस बार के घोटाले में सीधा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के शामिल होने का आरोप लगा है। मामला मैसूरु विकास प्राधिकरण (MUDA- मुडा) और वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले से जुड़ा हुआ है। मुडा भूखंड आवंटन फर्जीवाड़े में भूखंड प्राप्त करने वालों में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती सिद्धारमैया के पास मैसूर के केसारे गांव में 3.16 एकड़ जमीन थी। जो कि पार्वती को उसके भाई ने 2010 में दिया था। मुडा ने विकास कार्यों के लिए इस जमीन को अधिग्रहित कर लिया। मुडा ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत अन्य भूखंड आवंटित किए। पार्वती सिद्धारमैया को मैसुरू के विजयनगर में इतने ही जमीन का मुआवजा दिया गया। लोगों का कहना है कि पार्वती की जिस जमीन को अधिग्रहित किया गया वो शहर से बाहर की थी, लेकिन उन्हें मुआवजे में जो जमीन दिया वो मैसूरु शहर के अंदर का एक पॉश इलाका है। विजयनगर में इस जमीन का बाजार मूल्य केसारे गांव के जमीन से काफी ज्यादा है। बीजेपी का आरोप है कि इस जमीन पर सीएम की पत्नी का हक ही नहीं था, लेकिन सिद्धारमैया ने मुदा पर दबाव बनाकर इस प्राइम लैंड को अपने कब्जे में कर लिया।
घोटाले का मामला इस लिए भी गंभीर है क्योंकि सीएम सिद्धारमैया ने 2013 के चुनावी शपथ पत्र में इस जमीन का जिक्र नहीं किया, लेकिन 2018 के शपथ पत्र में इस जमीन की कीमत 25 लाख रुपये बताई। शपथ पत्र के अनुसार 2023 में इसके बदले मुआवजे में जो जमीन मिली उसकी कीमत 8.33 करोड़ रुपये थी। आज 2024 में उसकी कीमत 62 करोड़ से ज्यादा की हो चुकी है।

बीजेपी का आरोप है कि इस जमीन आवंटन में 4000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। बीजेपी का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और भूखंडों के आवंटन में बहुत भ्रष्टाचार हुआ है। बीजेपी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफा की मांग कर रही है। इसके साथ ही उसका ये भी कहना है कि मुडा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बीजेपी ने इस मामले में सदन में स्थगन प्रस्ताव दिया और चर्चा की मांग की, लेकिन स्पीकर ने चर्चा की अनुमति नहीं दी। बीजेपी का कहना है कि सीएम को डर है कि अगर सदन में चर्चा हुई तो उनकी पोल खुल जाएगी। बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जेडीएस का कहना है कि जब तक सदन में मुडा घोटाले पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलती तब तक वो विधानसभा में ही धरना- प्रदर्शन करते रहेंगे।

इसको लेकर कल 24 जुलाई की रात बीजेपी ने विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों के अंदर पूरी रात धरना दिया और सोए भी वहीं। सुबह हुई तो हाथ में कंबल और तकिया लिए हुए विधायक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। लोग सोशल मीडिया पर इस घोटाले के साथ रात में सदन में सोए विधायकों की तस्वीरें भी शेयर कर रहे हैं।

कर्नाटक : हर दिन 14 घंटे करो काम, कांग्रेस सरकार ला रही बिल: भड़का कर्मचारी संघ, पहले थोपा था 75% आरक्षण

                                          IT कंपनियों को झटके पर झटका दे रही सिद्दारमैया सरकार
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु को भारत की सिलिकन वैली के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन, जब से वहाँ कांग्रेस पार्टी सत्ता में लौटी है तभी से वहाँ के IT सेक्टर को झटके पर झटके दिए जा रहे हैं। अब कर्नाटक सरकार नया कानून लेकर आ रही है, जिसके तहत IT कर्मचारियों को प्रतिदिन 14 घंटे काम करना होगा। यानी, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की सरकार इसे कानून का रूप देती है तो इंजीनियरों को दफ्तर में अधिक समय गुजारना पड़ेगा, इससे उनका वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ेगा।

अभी ज़्यादा दिन नहीं हुए जब कर्नाटक सरकार एक ऐसा बिल लेकर आई थी, जो अगर कानून बन जाता तो मैनेजमेंट की नौकरियों में राज्य के नागरिकों को 50% और नॉन-मैनेजमेंट की नौकरियों में 75% आरक्षण मिलता। इसके बाद IT कंपनियों के संघ NASSCOM ने कहा था कि किसी भी महानगर को आईटी हब बनने के लिए अलग-अलग क्षेत्र की प्रतिभाओं को आकर्षित करना पड़ेगा। इसके बाद आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेशन ने इन कंपनियों को हैदराबाद और विशाखापत्तनम आने का न्योता तक दे दिया था।

जहाँ पहले वाले फैसले से कंपनियों को दिक्कत होती, नए फैसले से कर्मचारियों का जीवन तबाह होगा। कर्नाटक के ‘IT/ITeS Employees Union (KITU)’ ने कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। KITU ने कहा कि लेबर डिपार्टमेंट ने इंडस्ट्री के विभिन्न हितधारकों की एक बैठक में प्रस्ताव दिया कि कर्नाटक शॉप्स एन्ड कमर्शियल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन किया जाए। इसके लिए विधानसभा में बिल लाने की भी तैयारी है। हालाँकि, कर्नाटक सरकार ने फ़िलहाल इस पर चुप्पी साध रखी है।

मौजूदा नियमों की बात करें तो ओवरटाइम मिला कर एक दिन में किसी कर्मचारी से अधिकतम 10 घंटे काम लिया जा सकता है। यूनियन का कहना है कि नए आदेश के बाद वर्क ऑवर्स अनिश्चित समय के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। KITU ने इसे इस काल में वर्किंग क्लास पर सबसे बड़ा हमला करार दिया। संघ ने कहा कि इसके बाद कंपनियाँ 3-शिफ्ट व्यवस्था की जगह 2-शिफ्टव्यवस्था पर व्यवस्था पर आ जाएगी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से बाहर फेंक दिया जाएगा।

उक्त बैठक में लेबर डिपार्टमेंट के मंत्री संतोष S लाड के अलावा IT व बायोटेक्नोलॉजी विभाग के कई अधिकारी भी मौजूद थे। KITU ने कहा कि ये फैसला लागू होता है तो IT सेक्टर में काम करने वालों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। आँकड़े कहते हैं कि पहले से ही 45% IT कर्मचारी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, 55% शारीरिक रूप से दुष्प्रभाव का सामना कर रहे हैं। WHO-ILO का अध्ययन कहता है कि वर्क ऑवर्स बढ़ाने से स्ट्रोक से मौत का खतरा 35% और दिमाग-हृदय रोगों से मौत का खतरा 17% बढ़ जाएगा।

यूनियन ने कहा कि ये बिल ऐसे समय में लाया जा रहा है जब दुनिया मान रही है कि वर्क ऑवर्स बढ़ाने से उत्पादन क्षमता पर गलत असर पड़ता है। कई देशों में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ का कानून लाया जा रहा है, जिसके तहत नॉन-वर्क ऑवर्स में कर्मचारी खुद को काम से एकदम दूर रख सकेंगे और ईमेल वगैरह की रिप्लाई देने की भी बाध्यता नहीं होगी। पिछले साल इनफ़ोसिस के अध्यक्ष NR नारायणमूर्ति ने 70 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की सलाह देकर विवाद पैदा कर दिया था।

‘2500 करोड़ रूपए में CM, 500 करोड़ में मंत्री बनाती है BJP’: मानहानि केस में बेंगलुरु कोर्ट ने राहुल गाँधी को 7 जून को बुलाया, कहा- हर हाल में पेश हों

एक बहुत पुरानी कहावत है 'बर्बाद करने को 1 ही उल्लू काफी है, यहाँ हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तां क्या होगा', कांग्रेस  केजरीवाल पार्टी की hit & run नीति अपनाकर पार्टी को जल्दी से जल्दी धूल में मिलाने को कमर कस चुकी है। अभी जयराम नरेश द्वारा अँधेरे में छोड़े तीर से बच नहीं पायी कि बेंगलुरु कोर्ट ने बीजेपी के मानहानि केस में राहुल गाँधी नोटिस दे दिया।    
बेंगलुरु के एक कोर्ट ने आदेश दिया है कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी 7 जून, 2024 को पेश हों। कोर्ट ने कहा है कि राहुल गाँधी को हर हाल में पेश होना होगा। कोर्ट ने भाजपा नेता द्वारा किए गए एक मुकदमे में यह आदेश दिया है। मामला 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के विरुद्ध भ्रामक विज्ञापन चलाने से जुड़ा हुआ है।

बेंगलुरु के कोर्ट ने शनिवार (1 जून, 2024) को एक भाजपा नेता एस केशव प्रसाद द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई की। इस मुकदमे में कहा गया है कि कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को भ्रष्ट चलाने वाले विज्ञापन चलवाए जिनसे भाजपा की मानहानि हुई।

इस मामले में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राहुल गाँधी को आरोपित बनाया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिद्दारमैया और शिवकुमार को जमानत दे दी। इस दौरान राहुल गाँधी नहीं पेश हुए। उनके ना पेश होने पर भाजपा नेता के वकील ने माँग की कि राहुल गाँधी के विरुद्ध गैर जमानत वारंट जारी किया जाए।

कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से चुनावी व्यस्तताओं के चलते बेंगलुरु जाने में असमर्थता जताई गई थी, जिसे कोर्ट ने 1 जून को मान लिया लेकिन सख्त हिदायत दी कि वह 7 जून को जरूर पेश हों। राहुल गाँधी ने इससे पहले मार्च में अपने विरुद्ध समन जारी किए जाने पर जून में तारीख माँगी थी।

भाजपा नेता द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने भाजपा पर 2500 करोड़ रूपए में मुख्यमंत्री और 500 करोड़ रूपए में मंत्रिपद बेचने की बात कही, इससे भाजपा की छवि खराब हुई। इसके अलावा कांग्रेस ने मई, 2023 में अखबारों में विज्ञापन छपवा कर दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार के दौरान कोविड से जुड़े ठेकों में 75%, PWD ठेकों में 40% और धार्मिक संस्थानों में दान के मामले में 30% कमीशन लिया गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।

अवलोकन करें :-

‘कांग्रेस नेता फैला रहे भ्रम, अमित शाह ने 150 जिलाधिकारियों को किया कॉल तो सबूत दिखाएँ’ : जयराम रम

2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई थी और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।

कर्नाटक : महिला वकील के कपड़े उतरवाए, 36 घंटे बिठा कर रखा, डार्क वेब पर अश्लील वीडियो बेचने की धमकी: CBI-पुलिस बन कर ठगा, ब्लैकमेल कर वसूले 11 लाख रूपए

                                                                                                           प्रतीकात्मक चित्र- वारंगल पुलिस
कहते है आसमान पर तारे बहुत तोड़ने के लिए दिमाग चाहिए। अपने स्कूल दिनों में रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता "अभिनव मानव" पढ़ी थी, जो विज्ञानं के बढ़ते कदमों से शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है। दिनकर जी ने स्पष्ट लिखा था कि विज्ञानं जितनी अधिक प्रगति करेगा, मानव के लिए उतनी ही घातक होगी। इसमें दो राय भी नहीं कि विज्ञानं की प्रगति से देश भी प्रगति करते हैं, लेकिन इसका दुरूपयोग समाज में पल रहे कलंकित लोग भी अपनी जीविका के लिए कर रहे हैं। कर्नाटक से मिल रहे समाचार के अनुसार जब एक वकील तक अपने आपको न बचा पाए, आम नागरिक कैसे बच पाएगा। 

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से साइबर क्राइम का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला वकील को वीडियो कॉल कर के 36 घंटों तक कैमरे पर लाइव बिठाए रखा गया। इस दौरान उसके कपड़े तक उतरवा कर अश्लील वीडियो बनाए गई। वीडियो डार्क वेब पर बेचने की भी धमकी दी गई। महिला वकील को ब्लैकमेल कर के 15 लाख रुपए ठग लिए गए। आरोपितों ने खुद को मुंबई पुलिस और CBI का अधिकारी बताया था। घटना बुधवार (3 अप्रैल, 2024) की है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

फोन लाइन पर आए व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। पीड़िता का रैकेट मानव तस्करी और ड्रग्स रैकेट से जुड़े होने की धमकी देते हुए कॉलर ने अपने मोबाइल पर स्काइप एप डाउनलोड करने के लिए कहा। स्काइप एप डाउनलोड करवाने के बाद आरोपितों ने कॉल को किसी अभिषेक चौहान के पास ट्रांसफर कर दिया। खुद को अभिषेक चौहान बता रहे व्यक्ति ने अपना परिचय CBI अधिकारी के तौर पर दिया। कॉलर ने पीड़िता से कहा कि बैंक के किसी स्टाफ ने उनका खाता मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रयोग किया है।

थोड़ी देर बाद पीड़िता को स्काइप एप के जरिए वीडियो कॉल करने के लिए कहा गया। आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी कि वो लगातार वीडियो कॉल पर बनी रहे। यहाँ तक कि तब भी जब वो सो रही हो। डर के मारे पीड़िता ने ऐसा ही किया। अगले दिन खाता सत्यापित करवाने के नाम पर कॉलर ने पीड़िता से अपने एकाउंट में 10 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए। थोड़ी देर बाद उन्होंने पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से 2-2 लाख रुपए के 2 ट्रांजिक्शन और करवाए। इस दौरान उन्होंने पीड़िता से खुद को घर में बंद ही रखने को कहा था। महिला वकील डर से उनकी हर बात मानती रही।

आरोप है कि 36 घंटे तक चली इस वीडियो कॉल के दौरान कॉलर ने नार्को टेस्ट के नाम पर पीड़िता के सारे कपड़े तक उतरवा दिए। बाद में महिला के अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने की धमकी दे कर उस से 10 लाख रुपए और भेजने के लिए ब्लैकमेल किया जाने लगा। आखिरकार पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने IT एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

बेंगलुरु धमाके में मजहबी कनेक्शन: आतंकी ने एक मस्जिद के पास छोड़ी टोपी, बदले कपड़े भी – NIA ने जारी की फोटो, 10 लाख रूपए इनाम

कश्मीर से लेकर लगभग हर दंगे में और अब बेंगलुरु में हुए धमाके में मस्जिद क्यों आती है? केंद्र और राज्य सरकारों को इस गंभीर मुद्दे पर सख्ती से निर्णय लेने होंगे। मजहब की आड़ में क्या इस तरह की हरकतें होती रहेंगी?  
1 मार्च को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक मशहूर कैफे के भीतर हुए धमाके के आरोपित की और भी जानकारी निकल कर सामने आ रही हैं। इस धमाके की जाँच अब NIA के हाथों में है। NIA ने धमाका करने वाले संदिग्ध की एक फोटो जारी करके ईनाम की घोषणा की है।

धमाका करने वाले संदिग्ध की बस और कैफे के भीतर की CCTV वीडियो सामने आई हैं। पता चला है कि वह धमाके वाली जगह पर सार्वजनिक बस में आया था। उसके चेहरे की जानकारियाँ भी स्पष्ट हुई हैं, इसमें उसका बिना टोपी का चेहरा दिखा है। जाँच एजेंसी को उसकी टोपी भी एक मस्जिद के पास से मिली है।

रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाला संदिग्ध सुबह 10:45 मिनट पर एक सार्वजनिक बस से उतरा था। यह बस स्टॉप कैफे से मात्र 100 मीटर ही दूर है। इसके बाद वह घूमता हुआ 11:34 पर कैफे में घुसा और 8 मिनट बाद ही बाहर निकल गया। इस बीच ही उसने यहाँ बम रखा।

वह यहाँ से निकलने के बाद एक किलोमीटर दूर स्थित एक बस स्टॉप पर गया और वहाँ से बस पकड़ ली। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह संदिग्ध अपने इस रास्ते में एक मुस्लिम मजहबी केंद्र पर भी रुका था। यहाँ उसने अपना भेष बदला था और टोपी भी छोड़ दी थी।

NIA ने यह टोपी बरामद कर ली है। यह इस मामले में एक बड़ा सुराग मानी जा रही है। अपने 8 मिनट के ठहराव के दौरान ही उसने इस कैफे में हाथ धोने वाली जगह पर बम का बैग रख दिया। यह एक IED था, जिसमें टाइमर लगा हुआ था। संदिग्ध के जाने के लगभग 1 घंटे बाद (12:56 बजे) यह धमाका हो गया। जिसमें 9 लोग घायल हुए।

इस बम को बनाने के लिए कुछ विस्फोटक और लोहे के नट बोल्ट इस्तेमाल किए गए थे। धमाका होने पर यह उड़ कर लोगों को चोट पहुँचाते। हालाँकि, यह बैग रखने में इस आतंकी से चूक हुई जिसके कारण इसका असर सीमित रहा और कोई हताहत नहीं हुआ।

इस संदिग्ध की पहचान के लिए NIA ने उसकी फोटो वाला एक पोस्टर जारी किया है। इसमें वह टोपी लगाए हुए नजर आता है, उसके कंधे पर एक बैग भी है। इसने काले रंग की पैंट और ग्रे रंग की शर्ट पहनी है। इसी के साथ उसने काले रंग के जूते पहने हैं जबकि उसकी टोपी क्रीम कलर की है।

उसने एक चश्मा भी लगाया है। बस के अंदर से सामने आई फोटो में वह बिना टोपी के दिखा है। इसमें स्पष्ट नहीं है लेकिन जहाँ तक उसने एक टीशर्ट पहनी हुई है। NIA ने इसके विषय में जानकारी देने पर 10 लाख रूपए ईनाम घोषित किया है।

पिछले शुक्रवार (1 मार्च, 2024) को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इस संदिग्ध की पहचान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या कांग्रेस के पाकिस्तान प्रेम का असर एक दिन में नज़र आ गया; पहले पाकिस्तान जिंदाबाद हुआ और अगले दिन बेंगलुरु में धमाका

 सुभाष चन्द्र

कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव के पहले से ही मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू विरोधी नीतियां शुरू कर दी थी। अब हाल ही में मंदिरों को लूटने का भी कार्यक्रम बना कर पैसा मस्जिदों, मदरसों और चर्चों में लगाने का बिल विधान सभा से पास करा लिया था जो विधान परिषद में गिर गया लेकिन ये विचार कांग्रेस की कुटिल बुद्धि में घुस चुका है तो उसे पूरा करने का जुगाड़ ये लगाते ही रहेंगे

लेखक 
अभी याद होगा कुछ दिन पहले भी मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पाकिस्तान जाकर पाकिस्तान की शान में कसीदे पढ़े थे और 29 फरवरी को राज्यसभा के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सईद नासिर हुसैन की जीत के बाद उसके समर्थकों ने विधानसभा परिसर में “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए

विधानसभा में भाजपा द्वारा विरोध जताने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हमने “वॉयस रिपोर्ट जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेज दी और यदि इसमें “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा लगाया गया पाया गया तो ऐसे व्यक्ति को गंभीर सजा दी जाएगी दूसरी तरफ खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने ऐसे नारे से इंकार किया और इसे भाजपा की साजिश बता दिया नारे सुनकर भी इन लोगों को पता नहीं लगता कि क्या नारा लगा है 

अब खबर है कि फॉरेंसिक जांच में साबित हो गया है कि पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाया गया था जिसके लिए पुलिस ने हावेरी जिले के एक मिर्च व्यापारी को हिरासत में लिया है लेकिन  उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी क्या क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता बीके हरिप्रसाद ने तो पाकिस्तान को एक तरह कांग्रेस का “मित्र देश” बता दिया है और कोर्ट इसे “अभिव्यक्ति की आज़ादी” भी कह सकता है

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भाजपा के लिए “शत्रु देश” है जबकि हमारे लिए एक “पड़ोसी मुल्क” है और सहारा लिया आडवाणी जी की लाहौर यात्रा का जिसमे उन्होंने जिन्ना की तारीफ़ की थी आडवाणी की एक यात्रा को कंधा बनाए रहते हैं कांग्रेस के लोग जबकि पाकिस्तान को जन्म देकर कांग्रेस ने तभी से पाकिस्तान की लल्लोचप्पो ही की है

एक दिन “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगवाए कांग्रेस ने और दूसरे दिन बेंगलुरु में बम धमाका होता है जबकि पिछले 10 सालों से कोई आतंकी हमले नहीं हुए क्या कांग्रेस मोदी सरकार के इसी दावे को पलीता लगाना चाहती है कि भाजपा राज में कांग्रेस राज की तरह आतंकी हमले नहीं हुए कांग्रेस भूल रही है कि इस धमाके की जिम्मेदारी भी कांग्रेस सरकार पर होगी जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगवा कर और फिर पाकिस्तान को “मित्र देश’ बता कर पाकिस्तान के साथ खड़ी है 

यह धमाका भारत विरोधी निताशा कौल को वापस भेजने के बाद हुआ कांग्रेस सरकार वैसे ही इस महिला को निमंत्रण पर बुला कर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की दोषी है क्योंकि निताशा कौल पाकिस्तान प्रेमी और भारत विरोधी है, कहती है कश्मीर भारत का नहीं है और 370 हटाना गलत है जबकि यह महिला कश्मीरी है और ऐसी भारत विरोधी महिला से कांग्रेस के संबंध का क्या मतलब है 

जो माहौल कांग्रेस ने कर्नाटक में बनाया हुआ है और जिस तरह राज्य सरकार का खजाना खाली हो चुका है और विकास के पैसा बचा ही नहीं है ऐसे में कोई निवेश राज्य में होना नामुमकिन है, कांग्रेस के विदेशी आका चाहते हैं  कि भारत को खोखला करते रहो और अडानी अंबानी टाटा का विरोध करते रहो

अभी तो कांग्रेस का युवराज राहुल “कालनेमि” लंदन से कोई नया टूल किट लेकर आया होगा जो हो सकता है चुनाव से पहले देश में दंगे भड़काने के काम आएगी