Showing posts with label Odisha. Show all posts
Showing posts with label Odisha. Show all posts

ओडिशा में कनाडा का ‘मोहन’, महिलाओं ने बंद कर दी भगवान जगन्नाथ की पूजा: ईसाई धर्मांतरण की साजिशों पर ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

              कनाडा के नागरिक पर ओडिशा के जनजातीय लोगों का ईसाई धर्मांतरण करने की कोशिश का आरोप
कनाडा की नागरिकता रखने वाले एक व्यक्ति पर ओडिशा पुलिस ने 24 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। इस व्यक्ति का नाम एपेन मोहन किडंगलील (Eapen Mohan Kidangalil) है। उस पर प्रार्थना सभा के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) समाज के गरीब लोगों को लुभाने और उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है। कलिंगा राइट्स फोरम के मुताबिक एपेन मोहन पर्यटक वीजा पर भारत आया हुआ है। लेकिन उसने नियमों के विपरीत 22 जून को प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसके बाद उसे पकड़कर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सौंप दिया।

ऑपइंडिया के पास इस मेल में दर्ज FIR की कॉपी मौजूद है। FIR के मुताबिक आरोपित पर ओडिशा धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1967 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की गई है। मामला जगतसिंहपुर क्षेत्र का कटेसिंहपुर गाँव का है। यहाँ 22 जून को विश्व हिंदू परिषद के एक सदस्य को धर्मान्तरण के कार्यक्रम की जानकारी मिली। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता जब मौके पर पहुँचे तो पाया कि कनाडा की नागरिकता रखने वाला एपेन मोहन करीब 33 स्थानीय निवासियों को ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। इनमें महिलाओं सहित 11 नाबालिग भी थे।

                                                                   FIR Copy

VHP कार्यकर्ता सूर्यकांत नंदा का आरोप है कि आरोपित के पास से कैश, कागजात, बाइबिल, टूरिस्ट वीजा और कुछ दवाएँ बरामद हुई। एपेन मोहन की मदद स्थानीय स्तर पर क्षेत्र में सक्रिय ईसाई मिशनरी के 2 अन्य सदस्य कर रहे थे। प्रार्थना सभा में ये सभी लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से आए थे। बताया जा रहा है कि प्रार्थना सभा को रोकने का प्रयास करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों से न सिर्फ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उन पर हमला भी हुआ।

मामले का संज्ञान स्थानीय कानूनी कार्यकर्ता समूह कलिंगा राइट्स फोरम ने लिया है। कनाडाई नागरिक पर पर्यटक वीजा के कानूनों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलिंगा राइट्स फोरम ने विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों पर मिशनरी सदस्यों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है।

मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठनों पर जवाबी FIR

इस घटना के बाद ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठन के कुछ लोगों पर जवाबी FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मिशनरियों ने VHP कार्यकर्ताओं पर अपने ‘व्यक्तिगत कार्यक्रम’ में बाधा डालने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के तौर पर लक्ष्मीप्रिया मल्लिक का नाम सामने आया है। लक्ष्मीप्रिया की शिकायत पर IPC की धारा 448, 294, 323, 506 और 34 के तहत हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों पर केस दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला ने बताया है कि नाबालिग बच्चे उसके बेटे के जन्मदिन में आए थे। उसने आरोप लगाया है कि सुबह लगभग 11 बजे उनका परिवार पूजा कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर दुर्व्यवहार किया। हालाँकि पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों को शांत करवाया।
                                                                 हिन्दू संगठनों पर दर्ज FIR

महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ भगवान की पूजा बंद की

ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP सदस्य सूर्यकांत नंदा ने बताया कि बजरंग दल के सदस्यों को बेरहमी से पीटा गया था, क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के नाम हो रहे धर्मान्तरण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि घटना के दिन बिना नंबर की सफेद बोलेरो गाड़ी देखकर जब पड़ताल की गई तो उसमें किसी कनाडा के नागरिक के आने की जानकारी मिली। नंदा ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद एक घर की तरफ जनजातीय समाज के करीब 40-50 गरीब हिन्दुओं को जाते देखा गया।
नंदा ने आगे बताया कि इस जमावड़े की बजरंग दल सदस्यों ने जाकर पड़ताल की तो उन्हें वहाँ प्रार्थना के नाम पर धर्म परिवर्तन का प्रयास होता दिखा। हिन्दू संगठन के सदस्यों को देख कर लक्ष्मीप्रिया नाम की महिला ने इस कार्यक्रम में हुए जमावड़े को घर में जन्मदिन पर हुआ जुटान बताया। बजरंग दल के सदस्यों ने प्रार्थना में बैठी कुछ महिलाओं से बातचीत की। VHP नेता नंदा का दावा है कि इस बातचीत में महिलाओं ने बताया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ की पूजा करना बंद कर दी है, क्योंकि उनका धर्म परिवर्तित हो गया है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान VHP नेता सूर्यकांत नंदा ने स्थानीय पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले तो पुलिस ने सब कुछ जानते हुए भी कनाडा के नागरिक को छोड़ दिया और अब हिन्दू संगठनों से भी पूछताछ करने जा रही है।

नाबालिग बच्चों के मामले का NCPCR ने लिया संज्ञान

कनाडा के आरोपित द्वारा नाबालिग बच्चों के धर्मान्तरण की साजिश की शिकायत कलिंगा राइट्स फोरम ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पत्र लिख कर की है। पत्र का संज्ञान NCPCR ने लिया है। मामले की गहनता से जाँच का भरोसा दिया है।

कनाडा के नागरिक को छोड़ने पर SHO की सफाई

ऑपइंडिया ने इस घटना पर SHO शुभ्रांशु परिदा से बात की। SHO ने बताया कि कनाडाई व्यक्ति एपेन मोहन के पास OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड पाया गया। उन्होंने एपेन मोहन को मूल रूप से केरल का निवासी और जन्मजात ईसाई बताया। बकौल SHO एपेन मोहन को भारत में अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, क्योंकि वो पर्यटक वीजा पर नहीं है। पुलिस के मुताबिक एपेन मोहन ने नियमों को नहीं तोड़ा है, इसलिए उसे धारा 41 का नोटिस जारी कर के रिहा किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर ही की जाती है।

पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं

ऑपइंडिया ने SHO से यह जानना चाहा कि OCI कार्ड धारक को क्या मिशनरी गतिविधि में शामिल होने का अधिकार है? इस सवाल के जवाब पर SHO ने कहा कि पुलिस को मौके से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि घटनास्थल पर धर्मान्तरण जैसा कुछ चल रहा था। थाना प्रभारी शुभ्रांशु के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है।
                                                                        OCI के कानून
हालाँकि कलिंगा राइट फोरम पुलिस की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। फोरम ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए ऑपइंडिया से बताया कि वो पूरी साजिश का पर्दाफाश करेंगे। (साभार)

कभी-कभी ह्यूमन एरर हो जाता है… रेल मंत्री रहते दुर्घटना पर बोलती थी ममता बनर्जी, लालू के समय 550 बार पटरी से उतरी ट्रेनें

ओडिशा के बालासोर में हुए शुक्रवार (2 जून 2023) की शाम को हुए भीषण रेल हादसे में अब तक 288 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसको लेकर देश में राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी दल रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से इस्तीफा माँग रहे हैं। हालाँकि, रेल मंत्री कह रहे है कि यह राजनीति करने का वक्त नहीं है।

अश्विनी से इस्तीफा माँगने वालों में रेल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हैं। ये तीनों ही नेता केंद्र की विभिन्न सरकारों में रेल मंत्री रह चुके हैं। इनका आरोप है कि ये अब तक सबसे बड़ी रेल दुर्घटना है, इसलिए रेल मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

ममता बनर्जी तो इसके लिए मौत के आँकड़ें तक बढ़ाने की कोशिश करती नजर आईं। उन्होंने यहाँ तक झूठा दावा कर दिया कि बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त हुईं दो बोगियों में फँसे लोगों को रेस्क्यू करने का भी काम नहीं किया गया। हालाँकि, मौके पर मौजूद अश्विनी ने ममता को बीच में रोका और उन्होंने मौत के आँकड़ें सही बताए और रेस्क्यू की बात को झूठा साबित किया।

साल 2010 में ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए पश्चिम बंगाल के सैंथिया में एक बड़ा रेल हादसा हुआ था। इस हादसे में सैकड़ों लोग मारे गए थे। राहत और बचाव कार्य की ऐसी स्थिति थी कि समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली थी। घटनास्थल से मलबे को हटाने में कई दिन लग गए थे। मृतकों के अंतिम संस्कार तक की उचित व्यवस्था नहीं की गई थी।

हालाँकि, इन तीनों लोगों के रेल मंत्री के रूप में कार्यकाल देखें तो वो ग्रस्त सवालों के घेरे में आ जाएँगे। आँकड़े बताते हैं कि रेलमंत्री के रूप में सबसे अधिक रेल दुर्घटनाएँ और लोगों की मौत नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुए और उसके बाद ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए।

 रेलमंत्री के रूप में नीतीश कुमार

बिहार के सीएम नीतीश कुमार पहली बार अटल सरकार में रेल मंत्री बने थे। नीतीश कुमार के पहले ही कार्यकाल के दौरान 1999 में गैसल में बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें 285 लोगों की मौत हुई थी। हालाँकि, इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके पहले रेलमंत्री रहते हुए एक हादसे के बाद लाल बहादुर शास्त्री भी इस्तीफा दे चुके थे। नीतीश कुमार दूसरे रेलमंत्री थे।
साल 2001 में एक बार फिर नीतीश को रेल मंत्रालय मिला। इस पर वह साल 2004 तक रहे। नीतीश कुमार के कार्यकाल में कुल 79 रेल हादसे हुए, जिनमें कुल 1,527 लोगों की मौत हुई। वहीं, नीतीश कुमार के रेल मंत्री रहते ट्रेन के बेपटरी होने की 1000 घटनाएँ हुईं।

रेल मंत्री ममता बनर्जी हादसे को लेकर संसद में जवाब दी थीं

ममता बनर्जी दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं। एक बार अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल 1999 में और दूसरा यूपीए-2 के दौरान 2009 में। ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए 54 रेल दुर्घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें कुल 1451 लोगों की मौत हुई थीं। इसके साथ ही ममता के कार्यकाल में ट्रेनों के पटरी से उतरने की 839 घटनाएँ हुई थीं।
इस दौरान ममता बनर्जी पर सवाल भी खूब उठे थे। इसको लेकर उन्हें संसद में जवाब भी देना पड़ा था। लोकसभा में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, “कभी ह्यूमन एरर (मानवीय गलती) हो जाता है। वो भी हमलोग देखता है कि इसे नहीं होना चाहिए। इसको जितना जल्दी चेंज करके अपडेट करना है।”

रेलमंत्री रूप में लालू यादव

राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मनमोहन सिंह की नेतृत्व वाली यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बने थे। लालू के 5 साल के कार्यकाल में नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के कार्यकाल की तुलना में कम हादसे हुए थे। लालू के कार्यकाल में कुल 51 हादसे हुए। इन हादसों में कुल 1,159 लोगों की जान गई। ट्रेनों के पटरी से उतरने की 550 घटनाएँ हुईं।

भाजपा नेता ने बताया काम का रिकॉर्ड

इन नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और रेलमंत्री की इस्तीफे की माँग के बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने बताया है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में रेल हादसों की कितनी घटनाएँ हुईं, कितने लोग मारे गए और कितनी रेलगाड़ियाँ बेपटरी हुईं। वहीं, ममता बनर्जी के कार्यकाल में इस तरह की कितनी घटनाएँ हुईं और लालू के कार्यकाल में कितनी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भाजपा के कार्यकाल में रेलवे में कितना काम हुआ है।
मालवीय ने ट्वीट किया, “पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारतीय रेलवे द्वारा उठाए गए कुछ कदम इस प्रकार हैं: पटरियों के रखरखाव और नवीनीकरण के लिए रिकॉर्ड काम किया गया है। अकेले वर्ष 2022-23 में ही 5,227 किलोमीटर के ट्रैक नवीनीकरण और रखरखाव का काम किया गया है। पिछले दस वर्षों में कुल 37,159 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया गया। औसतन 3,716 किमी प्रति वर्ष। इसकी तुलना में वर्ष 2013-14 में केवल 2,885 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया गया।”
मालवीय ने आगे लिखा, “ब्रॉडगेज मार्ग पर सभी मानवरहित फाटकों को समाप्त कर दिया गया है। रेलवे मार्गों पर ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) या कवच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। देश भर में रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) और रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। पारंपरिक पुराने कोचों को अति सुरक्षित और अत्याधुनिक एलएचबी कोचों से बदलने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।”

ट्रेन दुर्घटना के बाद ‘कवच’ को बनाया जा रहा निशाना, जबकि ओडिशा वाले रूट में ये था ही नहीं

ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों के बीच हुई टक्कर में 260+ लोगों के मारे जाने के बाद रेलवे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स पूछ रहे हैं कि जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जब ‘कवच’ का उद्घाटन किया था तो उन्होंने कहा था कि इस रक्षा प्रणाली से ट्रेनों की टक्कर नहीं होगी, क्योंकि ट्रेन ड्राइवरों को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा।

सोशल मीडिया यूजर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल मंत्रालय पर तंज कस रहे हैं। राहुल नाम के यूजर ने इसको लेकर ट्वीट किया है। वहीं, राजद ने भी भाजपा सरकार पर तंज कसा है।

कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने वैष्णव का वो वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा है, जिसमें वे कवच प्रणाली को लेकर विस्तार से बता रहे थे। श्रीनिवास ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जब एक Train Derail होकर दूसरे Railway Track पर आ गयी थी, तब ‘Kavach’ कहाँ था? 300 के आसपास मौतें, करीब 1000 लोग घायल। इन दर्दनाक मौतों के लिए कोई तो जिम्मेदार होगा?”

भारतीय रेलवे द्वारा विकसित कवच का उद्घाटन पिछले साल मार्च में हुआ था। उस दौरान कहा गया था कि यह भारतीय रेलवे के लिए मील का पत्थर साबित होगा। रेल हादसों को रोकने में भारतीय रेलवे के इस कवच को मास्टर स्ट्रोक और बड़ी क्रांति कहा जा था।

मार्च 2022 में कवच टेक्नोलॉजी के ट्रायल में एक ही पटरी पर दौड़ रही दो ट्रेनों को दौड़ाया गया था। इनमें से एक ट्रेन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) सवार थे और दूसरी ट्रेन के इंजन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन मौजूद थे। इन ट्रेनों में कवच लगा होने के कारण एक ही पटरी पर आमने-सामने आने के बावजूद ट्रेन नहीं टकराए थे और यह परीक्षण सफल रहा था।

इस बीच अब तक के भीषणतम ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक बालासोर ट्रेन दुर्घटना को लेकर घिरने पर रेलवे ने जवाब दिया है। रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा है जिस रूट पर यह दुर्घटना हुई है, उस रूट पर ऐंटी-कॉलिजन कवच सिस्टम नहीं लगाया गया था। रेलवे द्वारा हर रूट पर कवच को लगाने की प्रक्रिया जारी है।

साल 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2,164 किलोमीटर के लिए कवच प्रणाली को रेलवे बोर्ड ने स्वीकृत किया है। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा पहले चरण में 615 किलोमीटर लंबी नागपुर से झारसुगुड़ा रेल खंड में सर्वे का कार्य आरंभ किया जा चुका है।

 क्या है कवच रक्षा प्रणाली

कवच एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है जो कि रेडियो कम्युनिकेशन, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबर पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक की मदद से रेलवे ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके तहत जब दो आने वाली ट्रेनों पर इसका उपयोग होगा तो ये तकनीक उन्हें एक दूसरे का आकलन करने में और टकराव के जोखिम को कम करने में ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी। इससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगीं।

यदि ड्राइवर कहीं स्पीड कंट्रोल करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच (Kavach ) प्रणाली ब्रेक इंटरफेस यूनिट द्वारा ट्रेन को कंट्रोल कर लेती है। कवच प्रणाली द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य विशेषताओं में रेलवे फाटकों पर स्वत: सीटी बजाना और जोखिम की स्थिति में अन्य ट्रेनों को नियंत्रित एवं सावधान करने के लिए ऑटो-मेनुअल एसओएस प्रणाली को तुरंत सक्रिय करना शामिल है।

कवच सिस्टम के एक्टिवेट होते ही आसपास के क्षेत्र में सभी ट्रेनों का संचालन तुरंत रुक जाता है। रेलवे मंत्री अश्विन वैष्णव ने इस तकनीक के संबंध में बताया था कि ये SIL4 प्रमाणित है, जिसका अर्थ है कि 10,000 सालों में कोई एक गलती की संभावना है।

6 राज्यों में विधानसभा उपचुनावों में यूपी में योगी-योगी, मोकामा में फिर से अनंत सिंह की ‘सरकार’, ओडिशा में BJP ने बढ़ाया दबदबा

बिहार के मोकामा में फिर से 'छोटे सरकार' की ही जीत (फाइल फोटो)
विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में जहाँ भाजपा गठबंधन के लिए अच्छी ख़बरें आई हैं, वहीं बिहार के मोकामा में अनंत सिंह ने अपना दबदबा बरकरार रखा है। राजद के टिकट पर यहाँ से उतरीं अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को 54% वोट मिले। उनके खिलाफ एक अन्य ‘बाहुबली’ ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को भाजपा ने टिकट दिया था और सूरजभान सिंह भी उधर से गोलबंदी करने में लगे हुए थे, लेकिन फिर भी अनंत सिंह जीत में कामयाब रहे।

हालाँकि, बिहार की गोलपगंज की सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत हुई है। भाजपा की कुसुम देवी काफी कम अंतर से जीतने में सफल रहीं। हरियाणा से भी भाजपा के लिए अच्छी खबर आई है, जहाँ की आदमपुर सीट पर दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। कुलदीप बिश्नोई कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के लिए अच्छी खबर है। उनकी नई पार्टी ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के उम्मीदवार ऋतुजा रमेश लटके की जीत हुई।

बात करते हैं ओडिशा की, जहाँ की धामनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था। यहाँ भाजपा की जीत बड़ी मायने रखती है, क्योंकि राज्य में नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है। धामनगर में भाजपा के सूर्यवंशी सूरज कम अंतर से ही सही, लेकिन जीत दर्ज करने में सफल रहे। दक्षिण भारत में तेलंगाना के मुनगोडे में भाजपा ने सत्ताधारी TRS को लगभग पानी पिला दिया, लेकिन काफी कम अंतर से वो पीछे चल रहे हैं।

चौथे राउंड के बाद TRS की लीड मात्र 714 वोट थी। उत्तर प्रदेश में जनता ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर तगड़ा भरोसा जताया है, तभी लखीमपुर खीरी में स्थित गोला गोरखनाथ में अमन गिरी ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें सवा एक लाख के आसपास वोट मिले। 56% से अधिक मत पाकर वो जीत दर्ज करने में सफल रहे। उनके प्रतिद्वंद्वी सपा के विनय तिवारी को 40% वोटों से संतोष करना पड़ा। 

ओडिशा : हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – इस महिला ने 4 साल में खड़ा किया 30 रूपए करोड़ का साम्राज्य

                                      अर्चना नाग के साथ-साथ उसके पति पर भी केस दर्ज हुआ है
हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – ओडिशा की एक महिला ने इन्हीं माध्यमों का इस्तेमाल कर के अपने लिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। उक्त महिला का नाम है अर्चना नाग, जिसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। भाजपा ने इस मामले की CBI जाँच की माँग की है। कलाहांडी की इस 26 साल की महिला की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से भी ज़्यादा रोचक है। कई राजनेताओं, फिल्म निर्माताओं और कारोबारियों से उसके संबंध हैं।

कई ऐसे अमीर लोग हैं, जिन्हें ब्लैकमेल कर के इस महिला ने अपना साम्राज्य बनाया। एक महिला और एक उड़िया फिल्म निर्माता की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ-साथ उसके पति के विरुद्ध भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अर्चना नाग का काम था सोशल मीडिया के माध्यम से अमीरों को दोस्त बनाना और फिर उन्हें अपने जाल में फाँस कर अंतरंग तस्वीरें क्लिक कराना। फिर शुरू होता था ब्लैकमेल का खेल।

कुछ ही वर्षों में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके आलीशान घर में एक सफ़ेद घोड़ा और कई ब्रीड के कुत्तों सहित कई लक्जरी कारें भी हैं। उसी की रैकेट में शामिल एक लड़की की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। उड़िया फिल्म निर्माता श्रीधर मार्ता अब इस मामले पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि इस मामले में राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJD के कई नेता-मंत्री शामिल हैं।

कांग्रेस भी जाँच की माँग कर रही है। अर्चना नाग का शानदार घर और उसमें के इंटीरियर व डेकोरेशन राज्य में चर्चा का विषय बने हुए हैं। लांजीगढ़ में जन्मी अर्चना का पालन-पोषण केसिंगा में हुआ। 2015 में उसने भुवनेश्वर का रुख किया। पहले उसने एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में काम किया, फिर ब्यूटी पार्लर में जॉब किया। 2018 में बालासोर का जगबंधु चाँद से उसकी शादी हुई। ब्यूटी पार्लर में काम करते हुए ही उसने सेक्स रैकेट चलाना शुरू कर दिया था।

राज्य के कई प्रभावशाली व्यक्तियों को अर्चना कंपनी देने के लिए महिलाएँ सप्लाई करती थी। जिस फिल्म प्रोड्यूसर ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिससे उसने 3 करोड़ रुपए माँगे थे। मात्र 4 साल में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके बैंक खाते खँगाले जा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि 25 BJD विधायक उसके नेटवर्क में शामिल हैं। उसका पति एक कार शोरूम चलाता है।

ओडिशा : गर्ल्स हॉस्टल में बैन होने के बावजूद भी सेक्स रैकेट में शामिल लड़कियाँ रखती थीं मोबाइल

दिव्य शंकर मिश्रा (बाएँ), गोविंद साहू (दाएँ)
ओडिशा के बलांगीर जिले के तुरेकेला प्रखंड स्थित झरनी गाँव की रहने वाली 24 साल की शिक्षिका ममिता मेहर के अपहरण और हत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस अपहरण और हत्या का खुलासा होने के बाद भाजपा नेता बैजयंत जय पांडा ने नवीन पटनायक सरकार पर अपने मंत्री को बचाने को लेकर निशाना साधा है।

इस मामले में पांडा ने एक रिपोर्ट शेयर कर लिखा, “पढ़ो और रोओ। एक महिला की हत्या, लड़कियों का कथित रूप से शोषण, उथल-पुथल की स्थिति, लेकिन @Naveen_Odisha ने इस व्यक्ति को अपनी सरकार से हटाने से इनकार कर दिया। ममिता मेहर मामला: ओडिशा के मंत्री गर्ल्स हॉस्टल जाते थे, छात्राएँ बताती हैं कि गोविंद साहू सेक्स रैकेट चलाते थे।”

जय पांडा ने एक लेख का हवाला दिया। इसमें जहाँ ममिता पढ़ाती थीं, वहीं स्कूल के एक छात्रा के माध्यम से बताया गया है कि कैप्टन दिब्य शंकर मिश्रा गर्ल्स हॉस्टल जाते थे। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की प्रबंध समिति के अध्यक्ष और हत्याकांड के मुख्य आरोपित गोविंद साहू सेक्स रैकेट चला रहे हैं।

साहू और मिश्रा बहुत बेहद करीबी हैं। ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो हैं, जिनमें दिब्यशंकर मिश्रा स्कूल के कार्यक्रमों में शामिल हुए और साहू की प्रशंसा की थी। छात्रा ने खुलासा किया कि उन सभी पर मोबाइल फोन रखने पर रोक है, लेकिन रैकेट का हिस्सा रही लड़कियों को गोविंद ने स्कूल परिसर में मोबाइल फोन रखने की इजाजत दे रखी थी।

ममिता मेहर का अपहरण और हत्या 

सनशाइन इंग्लिश मीडियम स्कूल की शिक्षिका ममिता मेहर 8 अक्टूबर को लापता हो गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर गोविंद ने किसी आधिकारिक काम के लिए स्कूल आने के लिए बुलाया था। उन्हें बलांगीर जिले के चंदोतारा आने के लिए कहा गया, जहाँ से उन्हें साहू की कार में लिफ्ट दी गई।

बस से चंदोतारा पहुँचने के बाद शिक्षिका लापता हो गई और उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। ममिता का पता नहीं लगा पाने के बाद उसके परिवार के लोगों ने केगाँव पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

दूसरी शिकायत सिंधकेला थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए शिक्षिका की तलाश में अभियान शुरू किया। जाँच के दौरान पुलिस ने गोविंद की कार को जब्त कर लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी (उत्तरी रेंज) दीपक कुमार ने कहा कि बलांगीर पुलिस ने कालाहांडी जिले का दौरा किया और पीड़ित और मुख्य आरोपित की आवाजाही का पता लगाने के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोविंद साहू के कबूलनामे के साथ-साथ बयानों, सामग्री और वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य से पता चलता है कि यह साजिश के तहत की गई हत्या थी। आरोपित बीते 8 अक्टूबर को जब भवानीपटना से केगाँव लौट रहा था उसी दौरान उसने कार में ही ममिता का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

कथित तौर पर ममिता को मुख्य आरोपित गोविंद साहू के दो अवैध संबंधों के बारे में पता चल गया था और उसने अवैध संबंधों को उजागर करने की चेतावनी दी थी। इस जाँच में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि ममिता की हत्या गोविंद ने बदला लेने के इरादे से की थी, क्योंकि उसने गोविंद के अवैध संबंधों का खुलासा करने की धमकी दे दी थी।

ममिता के शरीर को टुकड़ों में काटा 

लापता होने के 11 दिन बाद 19 अक्टूबर को ममिता के अवशेष मिले। कालाहांडी जिले के महालिंग में सनशाइन इंग्लिश मीडियम स्कूल के स्टेडियम निर्माण स्थल से उसके शरीर की हड्डियों को निकाला गया। उसी स्कूल में ममिता पढ़ाती थीं। वहीं, पुलिस को शव को ठिकाने लगाने में गोविंद के साथियों के शामिल होने का अंदेशा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने कहा कि 8 अक्टूबर को गोविंद ने ममिता की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह शव स्कूल के निर्माणाधीन स्टेडियम में ले गया। वहाँ उसने शव को दफनाने से पहले गत्ते और टायर की मदद से जला दिया।

गोविंद को गंडामुंडा की एक अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 5 दिन की पुलिस रिमाँड पर भेज दिया गया। डीआईजी के मुताबिक, “क्राइम सीन को फिर से रीक्रिएट किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी बहुत ही करीब से इस पर नजर बनाए हुए हैं। जल्द ही इसकी चार्जशीट दाखिल की जाएगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाएगी।”

दाऊद के भाई का पैसा, ISI की प्लानिंग: निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर, ओडिशा में DRDO के 4 कर्मचारी निकले पाकिस्तानी जासूस

देशद्रोहियों का जाल कितना फैला हुआ है, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है। दिल्ली पुलिस थोड़े दिनों के अंतराल में कोई न कोई खुलासा कर जनता को घर में छिपे बैठे देशद्रोहियों से सतर्क रहने के संकेत देती आ रही है। इन देशद्रोहियों के लिए देश से अधिक चांदी के कुछ टुकड़े हैं, जो इस लालच में अपने परिवार तक को जोखिम में डाल रहे हैं।  
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अलग-अलग राज्यों से 6 आतंकियों को पकड़कर बड़ी साजिश नाकाम कर दी है। इनमें से दो आतंकियों ने पाकिस्तान में प्रशिक्षण लिया था। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक भी मिले थे। त्योहारी सीजन में 6 राज्यों के 15 शहर इनके निशाने पर थे।

यह बात भी सामने आई है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का भाई अनीस इसके लिए फंड मुहैया करा रहा था। इस बड़े आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने रची थी। इस बीच ओडिशा पुलिस ने चार लोगों को पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में संविदा पर काम कर रहे थे। इन पर विदेशी एजेंटों को गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है।

रिपोर्टों के अनुसार बालासोर स्थित DRDO के एकीकृत परीक्षण रेंज से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के 4 आरोपितों को ओडिशा पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने कहा है कि ये लोग लगातार आईएसडी नंबरों के जरिए विदेशी एजेंटों के संपर्क में थे।

 रिपोर्टों के मुताबिक, सभी चार संविदा कर्मचारी काफी समय से रक्षा स्थापना में मैनुअल ऑपरेशनल कार्य में थे। इसी कारण रक्षा प्रतिष्ठान में उनकी नियमित पहुँच थी। ये चारों डीआरडीओ की एकीकृत परीक्षण रेंज चांदीपुर से महत्वपूर्ण जानकारी लीक कर रहे थे। सभी आरोपित बालासोर जिले के चांदीपुर के झामपुरा हाटा और नुआनाई इलाके के रहने वाले हैं।

बालासोर जिले के सुधांशु मिश्रा ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि कुछ लोग पाकिस्तान के एजेंटों को गोपनीय जानकारी लीक कर रहे हैं। पुलिस ने कहा, “चारों आरोपितों से लगातार विभिन्न आईएसडी से संपर्क किया जा रहा था और खुफिया जानकारी के बदले में उन्हें पैसे दिए जा रहे थे। इनपुट के आधार पर अपराधियों को पकड़ने के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया। छापे के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।”

हैंडलर से संपर्क 

सूत्रों के मुताबिक, पृथ्वी मिसाइल केंद्र के पैड III में काम करने वाला एक आरोपित बसंत बेहरा लगातार अपने हैंडलर से संपर्क बनाए हुए था। वह बार-बार कॉल करते और आईएसडी कॉल रिसीव करते पाया गया। अधिकारियों को शक है कि उसने DRDO के मिसाइल सीक्रेट्स को पाकिस्तानी एजेंटों को बेचा होगा।

पुलिस ने चारों आरोपितों को 13 सितंबर 2021) देर रात डीआरडीओ गेट के पास उनके घरों से गिरफ्तार किया। चारों के खिलाफ चांदीपुर थाने में IPC-R/W की धारा 120-B (आपराधिक साजिश के लिए सजा), 121-A (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), 34 (सामान्य इरादे से किया गया कृत्य) और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3, 4 और 5 के तहत कार्रवाई की गई है।

इससे पहले चांदीपुर आईटीआर के एक संविदा फोटोग्राफर ईश्वर बेहरा को मिसाइल डिजाइन और प्रौद्योगिकी से संबंधित जानकारी पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे हाल ही में इस गंभीर मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सितंबर 14, 2021 को पाकिस्तान द्वारा संचालित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 6 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाकिस्तान से प्रशिक्षित दो आतंकवादी भी शामिल हैं। पुलिस ने अपने इस मल्टी स्टेट ऑपरेशन में विस्फोटक व अन्य चीजों को भी बरामद किया। पुलिस का कहना था कि ये संदिग्ध देश में हत्याओं और विस्फोटों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा इनके निशाने पर नामचीन लोग भी शामिल थे।

ओडिशा: मंदिर की मूर्तियाँ तोड़ीं, छत्र भी चोरी.. मिशनरी गतिविधियों के लिए जाना जाता है आंध्र की सीमा से लगा ये गाँव

                                                            भगवान रामेश्वर महादेव मंदिर
दिल्ली से लेकर आंध्रा और ओडिशा तक सुनियोजित साज़िश के तहत हिन्दू मंदिरों पर हो रहे प्रहारों से हिन्दुओं को एकजुट होकर केंद्र एवं राज्य सरकारों को सचेत करने की जरुरत है। यदि मंदिरों की बजाए किसी मस्जिद अथवा कब्र को नुकसान पहुंचा होता सारे गंगा-जमुनी तहजीब राग अलापने वाले गैंग सडकों पर आ चुके होते, लेकिन हिन्दू मंदिरों पर प्रहारों के समय इन सबके घरों में शायद कोई मातम हो रहा है, जिस कारण इनकी बोलती बंद है। 

शनिवार (जनवरी 02, 2021) देर रात ओडिशा के एक मंदिर में देवी सरस्वती, लक्ष्मी की मूर्तियों को कथित तौर पर कुछ अज्ञात उपद्रवियों द्वारा तोड़ दिया गया। यह घटना ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे रायगढ़ जिला स्थित हुकुमटोला गाँव की है। दावा किया जा रहा है कि यह इलाका मिशनरी गतिविधियों के लिए मशहूर है।

खबरों के मुताबिक, भगवान रामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी को अगले दिन, रविवार सुबह इस मंदिर के दरवाजे खुले मिले। उन्होंने जब मंदिर में प्रवेश किया उन्होंने मंदिर के वास्तुशिल्प और मूर्तियों के टुकड़े मंदिर परिसर में पाए। इसके बाद पुजारी ने मंदिर प्रबंधन समिति को इस घटना की जानकारी दी। मंदिर प्रबंधन समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि मूर्तियाँ तोड़ने वाले उपद्रवियों ने भगवान जगन्नाथ के गहने भी चोरी कर लिए।

इसके बाद, मंदिर प्रबंधन समिति ने इस संबंध में मुनिगुड़ा पुलिस स्टेशन में इस सम्बन्ध में एक लिखित शिकायत दर्ज की। स्थानीय निवासियों और मंदिर प्रबंधन ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि कुछ शरारती तत्वों ने रामेश्वर शैवपीठ के देवता की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। मंदिर में देवी सरस्वती, महालक्ष्मी और वृंदावती की भी मूर्तियाँ हैं उन्हें भी खंडित कर दिया गया है।

कुछ मूर्तियों को तोड़ दिया गया, किसी को कमर के हिस्से से ही क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मंदिर से भगवान जगन्नाथ का एक छत्र भी चोरी किया गया। जिसके बाद मंदिर प्रबंधन

समिति के सचिव पुरुषोत्तम जेना ने इसकी शिकायत मुनिगुड़ा थाने में की। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रविवार शाम तक भी कथित तौर पर मंदिर परिसर का निरीक्षण नहीं किया गया था। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा सकता है। कुछ ट्विटर यूजर्स ने इसमें मिशनरी लोगों का हाथ होने की सम्भावना भी जताई हैं।

मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों से घिरी आंध्र सरकार : गर्भगृह में घुसे उपद्रवी, भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर धड़ से अलग

एक तरफ आंध प्रदेश की सरकार पर मुस्लिमों और ईसाइयों के तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं, दूसरी तरफ हिंदू मंदिरों पर हमले रुक नहीं रहे। ताजा घटना में प्रदेश के विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया।

मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। कथित तौर पर उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया।

बताया जाता है कि यह मूर्ति 400 साल पुरानी थी। इसके साथ ही मंदिर में माता सीता और लक्ष्मण की भी मूर्तियाँ विराजमान हैं। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है। जिस मंदिर में मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई वह पहाड़ी की चोटी पर है। एक ही पुजारी दोनों मंदिरों में नियमित अनुष्ठान करते हैं। यह घटना तब सामने आई जब पुजारी मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) सुबह मंदिर में नियमित अनुष्ठान करने के लिए पहुँचे। 

मंगलवार की सुबह, पुजारियों को रामतीर्थम में बोडिकोंडा पहाड़ी पर प्राचीन सीता लक्ष्मण कोदंडाराम मंदिर के दरवाजे खुले मिले और गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति का सिर धड़ से अलग दिखा। मंदिर के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। बुधवार को क्षतिग्रस्त किए गए हिस्से को पास के तालाब में प्रवाहित कर दिया गया।

जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को एक बयान में कहा, “जिस समय अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण चल रहा है, हमारे राज्य में भगवान राम की मूर्ति को नष्ट कर दिया गया है। मूर्ति के सिर को अलग करना एक पागल व्यक्ति का कार्य नहीं हो सकता है। यह धार्मिक उन्मादियों का कृत्य है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर लापरवाह है। इसकी वजह से ही यह घटना हुई है। उन्होंने पूछा कि मंदिर पर लगातार हो रहे हमले पर मुख्यमंत्री जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? वे चुप क्यों हैं?

पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुँचकर सबूत इकट्ठे किए और अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जाँच सभी संभावित एंगल से की जा रही है।

TNM से बात करते हुए, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) राजा कुमारी ने कहा, “घटना सोमवार को मंदिर के बंद होने के बाद हो सकती है। यह कल (मंगलवार) हमारे संज्ञान में आई। अज्ञात बदमाशों ने भगवान राम की मूर्ति का सिर अलग कर दिया। अभी तक आरोपित का पता नहीं चला है। टीमें मामले पर काम कर रही हैं।”

मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने के पीछे के मकसद के बारे में पूछे जाने पर एसपी ने कहा, “यह घटना दुर्घटना की तरह नहीं दिख रही है, बल्कि इरादन किया गया कृत्य जान पड़ता है। हालाँकि, फिलहाल हम इस बारे में निष्कर्ष नहीं निकाल सकते हैं कि इसके पीछे क्या इरादे थे।”

घटना की जानकारी मिलने के बाद टीडीपी के स्थानीय नेता एस.रविशेखर और अन्य लोगों ने मंदिर में जाकर पहाड़ी पर धरना दिया। उन्होंने सरकार से उपद्रवियों पर कार्रवाई करने और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करने की माँग की। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष आर.पावनी और अन्य लोगों ने भी मंदिर का दौरा किया और धरना दिया। उन्होंने भी घटना की निंदा की और सरकार से अपराधियों का पता लगाने और मंदिर की सुरक्षा करने की माँग की।

दूसरी तरफ, नेल्लीमारला के विधायक बी.पला नायडू ने मंदिर का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। रामतीर्थम परिक्षेत्र परिषद के अध्यक्ष श्रीनिवासानंद स्वामी ने भी मंदिर का दौरा किया और कहा कि इसकी अपमानजनक घटना से भक्तों की भावनाएँ आहत हुई है। सरकार को इस मुद्दे पर तेजी से काम करना चाहिए और जनता में विश्वास पैदा करना चाहिए। राज्य के सभी मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

पिछले कुछ समय से आंध्र प्रदेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। कहीं मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, तो कहीं रथों को आग में जलाकर राख किया जा रहा है। 27 सितंबर को चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में नंदी की मूर्ति को 26 और 27 सितंबर की रात कुछ बदमाशों ने तोड़ा। मूर्ति के टुकड़े पास रखी कुर्सी पर बिखरे हुए पाए गए थे।

ओडिशा : फेथ आउटरीच : नाबालिक के यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप में 68 वर्षीय जॉन पैट्रिक ब्रिटिश मिशनरी गिरफ्तार

ब्रिटिश मिशनरी ने नाबालिक के साथ किया यौन शोषण
जॉन पैट्रिक ब्रिज (साभार : प्रगतिवादी)
ओडिशा के झारसुगुडा ज़िले में इंग्लैंड का 68 वर्षीय मिशनरी शेल्टर होम और आवासीय विद्यालय चलाता है। उस व्यक्ति पर एक बच्चे के यौन शोषण का आरोप लगा था। जिसके संबंध में पुलिस ने बुधवार (19 अगस्त 2020) को उसे गिरफ्तार कर लिया। जिस बच्चे के साथ यह घटना हुई है वह शेल्टर होम का ही रहने वाला है।
फेथ आउटरीच ओडिशा संस्थापक जॉन पैट्रिक ब्रिज ने जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जिसे अदालत ने बुधवार(अगस्त 19) को ठुकरा दिया और आरोपित जॉन पैट्रिक को जेल भेज दिया गया है। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण संबंधी अधिनियम (POSCO Act) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।  
स्थानीय समाचार समूहों संवाद और प्रगतिवादी ने इस मुद्दे पर विस्तार से ख़बर प्रकाशित की है। इस घटना की शिकायत एक ऐसे युवक ने की थी जो फेथ आउटरीच संस्था संचालित एक शेल्टर होम में रहता था। वह साल 2015 तक इस शेल्टर होम में रहता था और तब वह नाबालिक था। जॉन पैट्रिक ने इस संस्था का गठन लगभग 25 साल पहले किया था। प्रगतिवादी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जॉन पर पहले भी इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। 
जॉन पैट्रिक और उसकी पत्नी
साभार – फेथ आउटरीच उड़ीसा
इसके पहले उस पर एक न्यूज़ीलैंड के नागरिक ने इस तरह के ही आरोप लगाए थे। और तो और यह आरोप न्यूज़ीलैंड दूतावास से लगाए गए थे। जॉन इंग्लैंड में पैदा हुआ था और साल 1977 में भारत आया। इस दौरान उसने अपनी तमिल पत्नी के साथ मिल कर सामाजिक समूह फेथ आउटरीच, उड़ीसा शुरू किया। शुरुआत में केवल 4 बच्चे ही इस अनाथालय में रहते थे लेकिन अब यह एक बड़ा संगठन बन चुका है। फिलहाल इसमें लगभग 800 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं। इसके अलावा कुल 4 डे केयर सेंटर भी चलते हैं जिसमें लगभग 250 बच्चे रहते हैं। इसमें से अधिकांश बच्चे गरीब और वंचित घर परिवारों से आते हैं।
जॉन के शेल्टर होम में हर उम्र के बच्चे रहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चे भी मौजूद हैं। उसने अपनी पत्नी के साथ मिल कर काफी संख्या में बच्चों को ईसाई धर्म कबूल कराया है। उसके शेल्टर होम और डे केयर सेंटर में रहने वाले ज़्यादातर बच्चे गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों से आते हैं। उसे साल 1992 में भारत की नागरिकता मिली थी। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। 

रथ यात्रा रोकने की साजिश: एक अनजाने NGO को इतने बड़े वकील उतारने के लिए फंड कहाँ से आए?

रथयात्रा
रथ यात्रा रोकने की साजिश किसकी?
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक लगाई थी उसे हटा लिया है। सोमवार (जून 22, 2020) को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा निकालने की अनुमति दी है।
यात्रा पर रोक लगाए जाने के बाद कई याचिकाएँ दाखिल कर शीर्ष अदालत से पुनर्विचार का आग्रह किया गया था। इन याचिकाओं में कहा गया था कि जगन्नाथ रथयात्रा सदियों पुरानी परंपरा है। इससे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। इस यात्रा को सिर्फ पुरी में ही निकालने की इजाजत दी जाए।
याचिका में माँग की गई थी कि पुरी की मुख्य रथ यात्रा को ही अनुमति दे दी जाए। कोर्ट से आग्रह किया गया कि यात्रा निकालने और पूजा के लिए लाखों लोगों के बजाय सिर्फ 500-600 लोगों को ही अनुमति दी जाए। इस दौरान कोरोना से बचाव संबंधी सभी गाइडलाइन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का भरोसा भी दिलाया गया।
गौर करने वाली बात ये है कि जगन्नाथ यात्रा को रोकने के लिए ‘ओडिशा विकास परिषद’ की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी गई थी। ‘ओडिशा विकास परिषद’ NGO का नाम शायद ही कभी प्रकाश में आया हो। ये एक अनजाना सा ही नाम है, मगर इसने मुकुल रोहतगी, रंजीत कुमार जैसे वरिष्ठ वकील को अपना पक्ष रखने के लिए रखा।
ऐसे में ये सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि ये NGO नक्सलियों द्वारा या फिर ईसाई मिशनरियों द्वारा बनाया गया है, या फिर पहले से ही था।
इससे पहले इस एनजीओ ने 5 जून को होने वाले स्नान पूर्णिमा पर रोक लगाए जाने को लेकर ओडिशा हाईकोर्ट का रुख किया था कि अगर ये उत्सव मनाया गया तो महामारी फैल जाएगा। जब देश पहले से ही कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रही है, ऐसे में इस तरह की बातें करना भय को बढ़ावा देने से ज्यादा कुछ नहीं है।
अगर ओडिशा विकास परिषद को कोरोना को फैलने से रोकने, लोगों को इसके प्रति जागरुक करने या फिर उनकी स्वास्थ्य को लेकर इतनी ही चिंता थी, तो क्या उन्होंने इसको लेकर किसी प्रकार का अभियान चलाया? किसी तरह की सेवा प्रदान की? इस बारे में कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 
खैर, ये एक अनजाना सा नाम है, जिसे एक जरिया के तौर पर इस्तेमाल किया गया। ये लोग स्नान पूर्णिमा को रुकवाना चाहते थे। इस मामले में केंद्र सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए थे कि यह राज्य सरकार का विषय है कि वो इसे करवाना चाहती है या नहीं।
शुक्रवार(जून 19) तक जब तक कि रोक हटवाने की मुहिम पब्लिक मूवमेंट नहीं बनी थी, न तो केंद्र सरकार, न राज्य सरकार और न ही कोई भी पार्टी इसको लेकर गंभीर थी। किसी भी बीजेपी नेता ने न तो इसको लेकर ट्वीट किया और न ही कोई मुहिम चलाई।
हम चाहते हैं कि रथ यात्रा की परंपरा चलती रहे, लेकिन हम ये नहीं चाहते कि लोग इकट्ठा हों, क्योंकि ये महामारी का समय है। अगर हम भी ऐसा करेंगे तो तबलीगी जमात और हम में क्या अंतर रह जाता है। स्नान पूर्णिमा के दिन वहाँ पर पुजारियों और संतों के अलावा एक भी इंसान नहीं आया। इतनी समझ तो है हिंदू में।
मगर ओडिशा विकास परिषद का तो ये मकसद था ही नहीं। ये नक्सली, आतंकियों के हिमायती, हिंदू से घृणा करने वाले और वामपंथी विचारधारा की पूरी लॉबी हिंदुओं के हर प्रतीक को नष्ट करना चाहती है। महामारी के इस समय में हिंदुओं के परंपरा को तोड़ना चाहती है।
और फिर बाद में इसको लेकर ताना भी देती है कि हमने जगन्नाथ रथ यात्रा रुकवा दिया। हमने तो तुम्हारे भगवान को 70 सालों तक टेंट में बैठाकर रखा। इसे सुनकर हिंदुओं के मन में हीन भावना आती है कि 80% आबादी हमारी है, सरकार भी इसी मुद्दे पर सत्ता में आती है, लेकिन इसके बावजूद ओडिशा विकास परिषद जैसा संस्थान सीधा सुप्रीम कोर्ट पहुँच जाता है। लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ पाते हैं। 
जब सुप्रीम कोर्ट ने रथ यात्रा की इजाजत दे दी तो लिबरल गिरोह ने एक नया प्रपंच फैलाना शुरू किया कि आफताब हुसैन नाम के मुस्लिम लड़के ने रथ यात्रा की परंपरा टूटने से बचा लिया। हाँ, ये सच है कि मुस्लिम लड़के ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मगर वो इकलौता नहीं था। और भी लोग थे जिन्होंने याचिका दायर की।
गजपति महाराज जैसे लोग थे जो सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से ही इसे हटाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे थे। लेकिन लिबरल गिरोह का प्रोपेगेंडा देखिए, पहले तो रथ यात्रा न हो इसके लिए तमाम प्रयास किए और जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, कोर्ट ने मंजूरी दे दी तो सिक्यूलर छवि के नाम पर एक मुस्लिम याचिकाकर्ता को हीरो बनाया जा रहा है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकार, बीजेपी नेता संबित पात्रा, जगन्नाथ संस्कृत जन जागरण मंच, अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा संघ, लक्ष्मी बिस्बाल आदि की तरफ से कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी, जिसमें कहा गया कि मंदिर में 1172 सेवक हैं। इन सभी का कोविड-19 टेस्ट किया जा चुका है जो निगेटिव आया है। तीनों रथ खींचने के लिए 750 लोगों की आवश्यकता होती है। मंदिर के पास 1172 सेवक हैं। ये लोग ही रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले जा सकते हैं। इस तरह रथयात्रा बिना बाहरी लोगों के शामिल हुए भी निकाली जा सकती है।
मगर एनडीटीवी, द वायर जैसी कई मीडिया संस्थान मे मुस्लिम लड़के आफताब का ऐसे महिमामंडन किया कि उसने हिंदुओं की परंपरा को टूटने से बचा लिया और हिंदुओं को इसके लिए उसका आभारी होना चाहिए। मीडिया पोर्टल ने इसके माध्यम से मुस्लिम की हिन्दू देवताओं के प्रति ‘आस्था’ दिखाने का भी भरसक प्रयास किया।

ओडिशा की सरकारी किताब में गांधी जी की हत्‍या को बताया गया 'दुर्घटना'

ओडिशा की सरकारी किताब में गांधी जी की हत्‍या को बताया गया 'दुर्घटना', छिड़ा विवादओडिशा में एक सरकारी किताब में महात्‍मा गांधी की मौत से जुड़े एक दावे के बाद विवाद छिड़ गया है. इस किताब में दावा किया गया है कि महात्मा गांधी की मृत्यु 'दुर्घटना' के चलते हुई थी. राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से माफी मांगने और इस 'बड़ी भूल' को तत्काल सुधारने को कहा है.
दिया गया जांच का आदेशमहात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रकाशित दो पेज की किताब ‘आमा बापूजी: एका झलक’ में उनकी शिक्षाओं, उनके कार्यों और ओडिशा से उनके जुड़ाव की संक्षिप्त जानकारी दी गई है. इसमें दावा किया गया है कि गांधी जी का 'दिल्ली के बिड़ला हाउस में 30 जनवरी, 1948 को अचानक हुए घटनाक्रम में दुर्घटना के चलते निधन हो गया'.
पुस्तिका पर मचे बवाल के बीच पटनायक नीत सरकार ने यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया है कि स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने ऐसी जानकारी प्रकाशित क्यों की. इस पुस्तिका को राज्य सरकार के स्कूलों और राज्य सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में वितरित करने के लिए प्रकाशित किया गया था.
सीएम पटनायक पर कांग्रेस का निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरसिंह मिश्रा ने कहा कि सरकार के प्रमुख होने के नाते मुख्यमंत्री को पुस्तिका में प्रकाशित गलत सूचना के लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने इस गलती को 'अक्षम्य कृत्य' बताया. कांग्रेस विधायक दल के नेता ने कहा, 'पटनायक को इस बड़ी भूल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, माफी मांगनी चाहिए और पुस्तिका तत्काल वापस लेने के लिए निर्देश जारी करने चाहिए.'

मिश्रा ने बीजद सरकार पर गांधी जी से नफरत करने वालों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि महात्मा गांधी की हत्या किसने की और उनकी हत्या किन परिस्थितियों में की गई. उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपिता से नफरत करने वालों को खुश करने के लिए उनके निधन की जानकारी इस प्रकार दी गई.'
'बच्‍चों को सच बताया जाना चाहिए' 
भाकपा ने राज्य सचिव आशीष कानूनगो ने भी आरोप लगाया कि यह कदम इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने और सच को छुपाने के लिए राज्य के रचे षड्यंत्र का हिस्सा है. कानूनगो ने कहा, 'हर कोई जानता है कि नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या की, जिसके बाद उसे पकड़ा गया, उसके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और मौत की सजा सुनाई गई. बच्चों को सच बताया जाना चाहिए और किताब को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.'

जाने माने शिक्षाविद प्रोफेसर मनोरंजन मोहंती ने सरकारी प्रकाशन में गलत तथ्य पेश करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की. सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा ने दावा किया कि 'गोडसे से सहानुभूति रखने वालों ने लेखक एवं प्रकाशक को प्रभावित किया होगा'. उन्होंने सही जानकारी प्रकाशित कर संशोधित पुस्तिका छात्रों में पुन: वितरित करने पर जोर दिया.

माओवाद का असर : ओडिशा के 12 से अधिक पोलिंग बूथों पर नहीं पड़ा 1 भी वोट

लोकसभा चुनाव 2019: ओडिशा के 12 से अधिक पोलिंग बूथों पर नहीं पड़ा 1 भी वोटओडिशा में अप्रैल 11 को लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में मतदान हिंसामुक्त रहा, लेकिन मलकानगिरी जिले के कुछ माओवाद प्रभावित इलाकों में शून्य प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. इसके अलावा कुछ जगहों पर ग्रामीणों ने स्थानीय मांगों को लेकर चुनावों का बहिष्कार किया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है.
उन्होंने कहा कि मलकानगिरी जिले के चित्रकोंडा इलाके में लगभग एक दर्जन मतदान केन्द्रों पर "शून्य प्रतिशत मतदान" दर्ज किया गया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सुरेंद्र कुमार ने कहा, "हां, हमें कुछ मुद्दों पर ग्रामीणों द्वारा चुनाव बहिष्कार की रिपोर्ट मिली हैं, जबकि मलकानगिरी जिले के कुछ नक्सल प्रभावित इलाकों में शून्य मतदान दर्ज किया गया." 
मलकानगिरी जिला प्रशासन के सूत्रों ने कहा कि चित्रकोंडा विधानसभा क्षेत्र में कई स्थानों पर लोग मतदान करने नहीं आए. 
लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए गुरुवार को 20 राज्यों की 91 सीटों के लिए मतदान लगभग शांति पूर्ण रहा. शाम पांच बजे तक के आंकड़ों के अनुसार सबसे हुआकम बिहार में 50 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 81 प्रतिशत मतदान. 
उप चुनाव आयुक्त उमेश सिंहा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पहले चरण के चुनाव में मतदान का स्तर सामान्य रहा. सिंहा ने कहा कि अंतिम आंकड़े आने तक यह स्तर पिछले चुनाव की तुलना में लगभग बराबर ही होगा. उन्होंने कहा कि सभी 20 राज्यों की मतदान वाली सीटों पर सामान्य रूप से शांतिपूर्ण मतदान रहा. कुछ इलाकों में हिसा और बाधा पहुंचाने की शिकायतें जरूर मिली जिन्हें तत्काल दूर कर दिया गया. 
उन्होंने बताया कि पहले चरण में 91 सीटों पर कुल 1239 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है. इनमें जिन राज्यों की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ उनमें आंध्र प्रदेश की 25 सीटों पर शाम पांच बजे तक 66 प्रतिशत और तेलंगाना की 17 सीटों पर 60 प्रतिशत मतदान हुआ. जबकि संयुक्त आंध्र प्रदेश में 2014 के चुनाव में 76.64 प्रतिशत मतदान हुआ था.
इसके अलावा उत्तराखंड की पांच सीटों पर 57.85 प्रतिशत मतदान हुआ. राज्य में 2014 में 62.15 प्रतिशत मतदान हुआ था. अरुणाचल प्रदेश की दो सीटों पर 66 प्रतिशत मतदान रहा. राज्य में 2014 में मतदान का स्तर 80 प्रतिशत था. मेघालय की दो सीटों पर शाम छह बजे तक 67.1 प्रतिशत हुआ और पिछली बार 68 प्रतिशत मतदान हुआ था.(स्रोत : एजेंसीज)