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चेहरे चमक गए, पर मुद्दे धुंधले पड़े: CJP की अंदरूनी लड़ाई ने आंदोलन की साख पर उठाए सवाल


NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले छात्र दिल्ली की सड़कों पर उतरे, तो यह आंदोलन कुछ ही दिनों में चर्चा का विषय बन गया। अभिजीत दिपके, सौरव दास, विजेता दहिया जैसे चेहरों और सोनम वांगचुक के अनशन से प्रभावित हो कई युवा जंतर-मंतर पहुँचने लगे।

लेकिन अब जब इस प्रदर्शन को चलते हुए करीब 25 दिन हो गए हैं तो वे छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। पार्टी के भीतर आंतरिक कलह मच गई है, भरोसा टूट रहा है और नेता इन युवाओं को बस उकसाने में लगे हैं।

साभार : सोशल मीडिया 

CJP में हुई पहली बड़ी टूट की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता विजेता दहिया का एक वीडियो सामने आया जिसमें वे संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन स्थल से हटकर बर्गर खाते नजर आए। यह वीडियो ठीक उसी वक्त वायरल हुआ, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प चल रही थी और कई छात्र आँसू गैस व कथित लाठीचार्ज का सामना कर रहे थे। CJP ने इसे ‘असंवेदनशील आचरण’ बताते हुए विजेता दहिया को इस प्रदर्शन से अलग कर दिया।

अब यह आंदोलन छात्रों की समस्या से कहीं हटकर इन लोगों को खुद को चमकाने का मौका लग रहा था, तो ऐसे में अलग होने पर दहिया भी उखड़ गए। उन्होंने भी एक वीडियो जारी कर दिपके को आड़े हाथों लिया। दहिया ने अब अपनी वीडियो में कहा है कि उन्हें बर्गर खाने के लिए निकाल दिया गया लेकिन उन्होंने दिपके का कचौड़ी खाने पर बचाव किया था।

दहिया ने कहा, “अभी भी लोग कह रहे हैं कि अभिजीत ट्रक पर चढ़ गया, उस पर मैंने तेरा बचाव किया है कि थप्पड़ भी तो उसे ही लगा था। मेरे साथियों ने ही ‘बलि का बकरा’ बना दिया तो थोड़ा बुरा तो लगा।” दहिया बेशक इसे थोड़ा बुरा लगना बता रहे हैं लेकिन उनके वायरल वीडियो दिखा रहे हैं कि मामला ज्यादा गंभीर है। 

दहिया ने एक चैनल से बातचीत में कहा, “अभिजीत को लगा कि नहीं विजेता आंदोलन के लिए सही है कि आप इस्तीफा दे तो। तो मैंने कहा कि देखो इस्तीफा तो मैं नहीं दूँगा, ऐसा करो कि तुम ही मुझे निकाल दो, फिर उन्होंने ऐसा ही किया।”

असल में जब कोई ऐसा आंदोलन अचानक बड़ा रूप ले लेता है, तो नेतृत्व, अनुशासन और जवाबदेही को लेकर भीतर ही भीतर टकराव शुरू हो जाता है। डिजिटल स्टारडम हासिल करना आसान है लेकिन जमीन पर संगठन और नैतिक जवाबदेही बनाए रखना कहीं ज्यादा मुश्किल परीक्षा साबित होती है। यही कारण है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति को निकालने की खबर नहीं है बल्कि CJP के भीतर मौजूद महत्वाकांक्षाओं का पहला सार्वजनिक विस्फोट है।

जिस तरह इस आंदोलन में अरविंद केजरीवाल से लेकर वामपंथी पार्टियों, सपा और TMC के नेता पहुँचे हैं उससे साफ लग रहा है कि यह अब छात्रों का आंदोलन नहीं रहा है बल्कि एक राजनीतिक आंदोलन बन गया है। जो भीड़ ‘आम छात्रों’ के नाम पर जंतर-मंतर और संसद मार्च में जुटी उसमें सपा, AAP, आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता और जेएनयू-डीयू-जामिया जैसे संस्थानों के वामपंथी छात्र संगठन भी बड़ी संख्या में शामिल थे। इसके बाद जो इस आंदोलन में बदलाव देख रहे थे वो भी निराश होने लगे हैं।

इनमें से कुछ छात्र जो असल में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक पर जवाबदेही जैसे मुद्दों पर आए थे उन्हें अब दिखने लगा है कि चर्चा का केंद्र बिंदु धीरे-धीरे शिक्षा से हटकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, नेताओं की मौजूदगी, प्रवक्ता के निष्कासन और हिंसा की घटनाओं पर सिमटता चला गया है।

वीरू भाई नामक एक युवक एक आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय था लेकिन अब उसने निराशा में खुद को इस आंदोलन से अलग कर लिया है। वीरू भाई का कहना है कि पुलिस के साथ झड़प के समय कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया। आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे धकेल दिया। इसी कारण भटके नौजवानों और युवाओं ने पहली बार आंदोलन में भाग लिया और अंत में उन्हें परेशानी का सामना खुद करना पड़ा।

उनका सीधा आरोप है कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाली सीजेपी असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आंदोलन में असामाजिक तत्वों के घुसने का भी दावा किया है। यह निराशा केवल वीरू की नहीं है, दर्जनों ऐसे वीरू हैं जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं।

जब आंदोलन के भीतर से ही अनुशासनहीनता, आपसी अविश्वास और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगें तो जमीन पर मौजूद आम प्रदर्शनकारी के मन में यह सवाल उठता ही है कि क्या यह नेतृत्व वाकई उनके मुद्दों के प्रति गंभीर है या यह वो सिर्फ अपनी डिजिटल लोकप्रियता की मौज ले रहे हैं।

किसी भी जन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी नैतिक साख और उसका मूल उद्देश्य होता है। CJP के मामले में यह दोनों चीजें एक साथ खतरे में हैं। एक तरफ नेतृत्व के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर उठे सवाल संगठन की आंतरिक मजबूती पर सवाल खड़ा करते हैं। दूसरी तरफ राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी और उससे जुड़े आरोप इस आंदोलन की ‘स्वतंत्र छात्र आंदोलन’ वाली पहचान को धुँधला कर दिया है।

सोशल मीडिया के दौर में किसी आंदोलन को रातों-रात लोकप्रियता और डिजिटल समर्थन मिल सकता है लेकिन उसे लंबे समय तक अनुशासित, केंद्रित और राजनीति से दूर रखना बहुत मुश्किल काम है। इन सबमें सबसे ज्यादा नुकसान उन आम छात्रों का हुआ है, जो ईमानदारी से अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद लेकर सड़कों पर उतरे थे।

ये बात सही है कि सिस्टम में खामियाँ हैं, पेपर लीक हुए हैं। और अगर परीक्षा प्रणाली में खामियाँ हैं तो उनका समाधान राजनीतिक टकराव से नहीं बल्कि सिस्टम में सुधारों से ही निकलेगा। वरना ऐसे आंदोलनों के नाम पर भीड़ इकट्ठा हो तो जाएगी लेकिन उसका फायदा नेता बस अपनी नेतागिरी के लिए उठाएँगे और आम जन केवल ठगे जाएँगे।

दंगों में जला ब्रिटेन का लीड्स: यहीं से सांसद चुना गया है गाजा समर्थक मोतिन अली, जीत के बाद लगे थे ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे

             दंगे के दौरान कई गाड़ियों को आग लगा दी गई (चित्र साभार: AshleaSimonBF/X & TPointUK/X)
भारत में राज करते ब्रिटेन ने Divide & Rule की नीति का बीजारोपण किया था, वह आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है, जिस कारण भारत में कभी जाति के नाम पर तो कभी मजहब के नाम पर दंगे होते रहते हैं, लेकिन वही दंगे का जहर आज ब्रिटेन में फैलता दिखाई दे रहा है। इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है। कल तक जो देश भारत में साम्प्रदायिक दंगे होने पर मजाक बनाते थे, धीरे-धीरे वही देश 
इस आग में जलने शुरू हो चुके है। इस सन्दर्भ में अपने बुजुर्गों की बताई एक बात दिमाग में आ गयी। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने या यूँ कहिये गुरुद्वारा शीश गंज के निकट लाला हरदयाल लाइब्रेरी है। जब लाला हरदयाल ICS उपाधि के लिए परीक्षा में एक प्रश्न 'How British ruled over India' का 300 शब्दों में उत्तर देना था, लेकिन हरदयाल ने केवल 3 शब्दों "Divide & Rule" में उत्तर देने पर ब्रिटिश सरकार ने कहा था कि 'सरकार आपको ICS उपाधि तो नहीं देगी, लेकिन आप आज से Lala Hardayal MA Kayastha के नाम से जाने जाओगे। यानि आज ब्रिटेन उसी आग में जलने की राह पर चल निकला था। 

ऐसे में एक ज्वलंत प्रश्न आता है कि जब कोई मुस्लिम देश फिलिस्तीनियों और रोहिंग्यों को अपने देश में रखने को तैयार नहीं, फिर गैर-मुस्लिम देशों में इनके समर्थकों के साथ सख्ती से पेश क्यों नहीं आया जाता? सभी गैर-मुस्लिम देशों के लिए ब्रिटेन का लीड्स एक मिसाल है। सरकार जब तक इनको मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से महरूम नहीं करेंगे, इस तरह के उपद्रव रुकने का नाम नहीं लेंगे।   

ब्रिटेन के शहर लीड्स में दंगे भड़क गए हैं। प्रवासी दंगाइयों ने एक इलाके में जम का उत्पात मचाया और पुलिस की गाड़ियों तोड़ आग लगा दी। उन्होंने कुछ वाहनों में आग लगा दी। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। दंगे का कारण एक समुदाय और सरकारी एजेंसी के बीच का विवाद बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लीड्स के हेयर हिल्स इलाके में यह दंगा गुरुवार (18 जुलाई, 2024) को चालू हुआ। दंगे की स्थिति शाम 5 बजे से ही बना चालू हो गई थी। इसके बाद दंगाइयों ने पुलिस की एक गाड़ी को पलट दिया और एक बस को आग लगा दी। पथराव होने की भी सूचना है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिखता है कि भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और दंगा कर रहे हैं। वह पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रहे है, इस बीच पुलिस यहाँ से गायब नजर आती है। इन दंगों के बीच यहाँ के नवनिर्वाचित सांसद मोतिन अली भी देखे गए हैं।

बताया गया है कि दंगे का कारण यहाँ रहने वाले लोगों के बच्चों को उनसे अलग करने का प्रयास रहा। ब्रिटेन में बच्चों की देखरेख करने वाली चाइल्ड केयर एजेंसी इस इलाके से बच्चों को बाल देखभाल गृह में ले जाना चाहती थी। इस इलाके में रहने वाले लोग इसके खिलाफ थे।

जब गुरुवार को एजेंसी ने यह प्रयास किया तो बच्चों के अभिभावक भड़क गए और एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन चालू कर दिया। इसके बाद यहाँ दंगा और तोड़फोड़ चालू हो गई। दरअसल, इस इलाके में ब्रिटेन के बाहर से आए शरणार्थी रहते हैं, इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।

इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण इनके बच्चों को अच्छी देखभाल ना मिल पाने का शक ब्रिटेन की चाइल्ड केयर एजेंसी को है। इसीलिए वह इन बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करके अपने साथ रखना चाहती है। अभिभावक और कई मामलों में बच्चे, इसके लिए तैयार नहीं हैं।

लीड्स में हुए दंगों के बाद यहाँ भारी पुलिस बल और अग्निशमन दस्ते भेजे गए। स्थानीय नेताओं ने भी इस इलाके का दौरा करके लोगों को शांत रहने की अपील की। ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेत्ते कूपर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं आज रात लीड्स में पुलिस वाहनों और सार्वजनिक परिवहन पर हुए चौंकाने हमलों से स्तब्ध हूँ। इस तरह की अव्यवस्था का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है। मैं वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस को उनकी कार्रवाई के लिए धन्यवाद देती हूँ। मैं लगातार अपडेट ले रही हूँ।”

Lala Hardayal

I.N.D.I.A. में अभी से दरार; उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर राहुल गाँधी-ममता बनर्जी में ठनी; सबके अपने-अपने पीएम, सबके अपने-अपने राम!

विपक्ष के नए-नए बने गठबंधन में जितने दल हैं उतने ही पीएम पद के दावेदार हैं। I.N.D.I.A. गठबंधन की मुंबई बैठक से पहले गठबंधन के कई घटक दलों ने अपने-अपने नेताओं को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश कर दिया। जेडीयू ने नीतीश कुमार, समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) ने उद्धव ठाकरे, तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस ने राहुल गांधी का नाम आगे बढ़ाया। उधर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर भी पीएम उम्मीदवार के रूप में अपनी दावेदारी ठोकते रहे हैं। रावण के दस चेहरे की तरह I.N.D.I.A. गठबंधन में पीएम उम्मीदवार के अनगिनत चेहरे हैं। जिस तरह I.N.D.I.A. गठबंधन में पीएम उम्मीदवार के अनेक चेहरे हैं उसी तरह उनके अपने-अपने राम हैं! ये तिलक लगाकर राम मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं, सनातन धर्म का अपमान करते हैं, रामचरितमानस को लेकर अनर्गल बयान देते हैं। मोहब्बत की दुकान से नफरत फैलाना ही इनका काम है।

I.N.D.I.A. गठबंधन की पहली बैठक में ही केजरीवाल ने दिखाए थे रंग!
I.N.D.I.A. गठबंधन की पटना में हुई पहली बैठक में भी रंग में भंग देखने को मिला था। जब आम आदमी पार्टी की ओर से यह कहा गया कि आगे विपक्षी एकता की जिस बैठक में कांग्रेस शामिल होगी, उसमें वह शामिल नहीं होगी। इसका कारण यह था कि दिल्ली के बाद पंजाब में सरकार बनाने और राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के उपरांत उसे लग रहा है कि वह कांग्रेस का स्थान ले सकती है। वह उसके ही जनाधार में सेंध लगा रही है। यानि केजरीवाल बेमन से विपक्षी गठबंधन में बने हुए हैं।

विपक्षी एकता में अभी से दरार पड़ती दिख रही है। मुंबई में 1 सितंबर 2023 को खत्म हुई I.N.D.A. की बैठक के दौरान उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के बीच तकरार हो गई। बताया जा रहा है कि इसकी वजह से ममता गठबंधन की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुईं।

राहुल गाँधी-ममता बनर्जी में ठनी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गाँधी ने बैठक के दौरान गौतम अडानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अडानी का नाम लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलने की कोशिश की, लेकिन इससे ममता बनर्जी खफा हो गईं। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने अडानी का मुद्दा उठाने से पहले किसी भी साथी दल को भरोसे में नहीं लिया।
ममता बनर्जी ने कहा कि साथी दलों से चर्चा किए बिना और उनकी सहमति के बगैर ही कांग्रेस  नेता राहुल गाँधी ने गौतम अडानी का मुद्दा उठा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वामदलों के गठबंधन के मुद्दे पर भी अपना मतभेद जारी किया।

जातिगत जनगणना पर नहीं बनी सहमति?

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में जातिगत जनगणता पर राजनीतिक प्रस्ताव भी पास किया जाना था, लेकिन इसको लेकर सभी पार्टियों में सहमति नहीं बन पाई। इस मुद्दे पर बिहार और उत्तर प्रदेश की प्रमुख पार्टियों- जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल साथ आए, लेकिन ममता बनर्जी व कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया।
अवलोकन करें:- 

कपिल सिब्बल को लेकर हो गया था विवाद

31 अगस्त 2023 को मुंबई में शुरू हुई इस बैठक में सपा के राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल अचानक पहुँच गए थे। इससे कांग्रेस नाराज हो गई थी। कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कपिल सिब्बल की मौजूदगी का विरोध किया था।
एकवोकेट कपिल सिब्बल के मंच पर पहुँचने से केसी वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे से शिकायत की थी, जिसके बाद राहुल गाँधी ने हस्तक्षेप किया। तब जाकर कपिल सिब्बल को मंच पर फोटोशूट के समय जगह मिल पाई थी, वो भी एकदम किनारे।

ओडिशा में कनाडा का ‘मोहन’, महिलाओं ने बंद कर दी भगवान जगन्नाथ की पूजा: ईसाई धर्मांतरण की साजिशों पर ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

              कनाडा के नागरिक पर ओडिशा के जनजातीय लोगों का ईसाई धर्मांतरण करने की कोशिश का आरोप
कनाडा की नागरिकता रखने वाले एक व्यक्ति पर ओडिशा पुलिस ने 24 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। इस व्यक्ति का नाम एपेन मोहन किडंगलील (Eapen Mohan Kidangalil) है। उस पर प्रार्थना सभा के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) समाज के गरीब लोगों को लुभाने और उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है। कलिंगा राइट्स फोरम के मुताबिक एपेन मोहन पर्यटक वीजा पर भारत आया हुआ है। लेकिन उसने नियमों के विपरीत 22 जून को प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसके बाद उसे पकड़कर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सौंप दिया।

ऑपइंडिया के पास इस मेल में दर्ज FIR की कॉपी मौजूद है। FIR के मुताबिक आरोपित पर ओडिशा धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1967 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की गई है। मामला जगतसिंहपुर क्षेत्र का कटेसिंहपुर गाँव का है। यहाँ 22 जून को विश्व हिंदू परिषद के एक सदस्य को धर्मान्तरण के कार्यक्रम की जानकारी मिली। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता जब मौके पर पहुँचे तो पाया कि कनाडा की नागरिकता रखने वाला एपेन मोहन करीब 33 स्थानीय निवासियों को ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। इनमें महिलाओं सहित 11 नाबालिग भी थे।

                                                                   FIR Copy

VHP कार्यकर्ता सूर्यकांत नंदा का आरोप है कि आरोपित के पास से कैश, कागजात, बाइबिल, टूरिस्ट वीजा और कुछ दवाएँ बरामद हुई। एपेन मोहन की मदद स्थानीय स्तर पर क्षेत्र में सक्रिय ईसाई मिशनरी के 2 अन्य सदस्य कर रहे थे। प्रार्थना सभा में ये सभी लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से आए थे। बताया जा रहा है कि प्रार्थना सभा को रोकने का प्रयास करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों से न सिर्फ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उन पर हमला भी हुआ।

मामले का संज्ञान स्थानीय कानूनी कार्यकर्ता समूह कलिंगा राइट्स फोरम ने लिया है। कनाडाई नागरिक पर पर्यटक वीजा के कानूनों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलिंगा राइट्स फोरम ने विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों पर मिशनरी सदस्यों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है।

मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठनों पर जवाबी FIR

इस घटना के बाद ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठन के कुछ लोगों पर जवाबी FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मिशनरियों ने VHP कार्यकर्ताओं पर अपने ‘व्यक्तिगत कार्यक्रम’ में बाधा डालने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के तौर पर लक्ष्मीप्रिया मल्लिक का नाम सामने आया है। लक्ष्मीप्रिया की शिकायत पर IPC की धारा 448, 294, 323, 506 और 34 के तहत हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों पर केस दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला ने बताया है कि नाबालिग बच्चे उसके बेटे के जन्मदिन में आए थे। उसने आरोप लगाया है कि सुबह लगभग 11 बजे उनका परिवार पूजा कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर दुर्व्यवहार किया। हालाँकि पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों को शांत करवाया।
                                                                 हिन्दू संगठनों पर दर्ज FIR

महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ भगवान की पूजा बंद की

ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP सदस्य सूर्यकांत नंदा ने बताया कि बजरंग दल के सदस्यों को बेरहमी से पीटा गया था, क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के नाम हो रहे धर्मान्तरण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि घटना के दिन बिना नंबर की सफेद बोलेरो गाड़ी देखकर जब पड़ताल की गई तो उसमें किसी कनाडा के नागरिक के आने की जानकारी मिली। नंदा ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद एक घर की तरफ जनजातीय समाज के करीब 40-50 गरीब हिन्दुओं को जाते देखा गया।
नंदा ने आगे बताया कि इस जमावड़े की बजरंग दल सदस्यों ने जाकर पड़ताल की तो उन्हें वहाँ प्रार्थना के नाम पर धर्म परिवर्तन का प्रयास होता दिखा। हिन्दू संगठन के सदस्यों को देख कर लक्ष्मीप्रिया नाम की महिला ने इस कार्यक्रम में हुए जमावड़े को घर में जन्मदिन पर हुआ जुटान बताया। बजरंग दल के सदस्यों ने प्रार्थना में बैठी कुछ महिलाओं से बातचीत की। VHP नेता नंदा का दावा है कि इस बातचीत में महिलाओं ने बताया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ की पूजा करना बंद कर दी है, क्योंकि उनका धर्म परिवर्तित हो गया है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान VHP नेता सूर्यकांत नंदा ने स्थानीय पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले तो पुलिस ने सब कुछ जानते हुए भी कनाडा के नागरिक को छोड़ दिया और अब हिन्दू संगठनों से भी पूछताछ करने जा रही है।

नाबालिग बच्चों के मामले का NCPCR ने लिया संज्ञान

कनाडा के आरोपित द्वारा नाबालिग बच्चों के धर्मान्तरण की साजिश की शिकायत कलिंगा राइट्स फोरम ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पत्र लिख कर की है। पत्र का संज्ञान NCPCR ने लिया है। मामले की गहनता से जाँच का भरोसा दिया है।

कनाडा के नागरिक को छोड़ने पर SHO की सफाई

ऑपइंडिया ने इस घटना पर SHO शुभ्रांशु परिदा से बात की। SHO ने बताया कि कनाडाई व्यक्ति एपेन मोहन के पास OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड पाया गया। उन्होंने एपेन मोहन को मूल रूप से केरल का निवासी और जन्मजात ईसाई बताया। बकौल SHO एपेन मोहन को भारत में अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, क्योंकि वो पर्यटक वीजा पर नहीं है। पुलिस के मुताबिक एपेन मोहन ने नियमों को नहीं तोड़ा है, इसलिए उसे धारा 41 का नोटिस जारी कर के रिहा किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर ही की जाती है।

पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं

ऑपइंडिया ने SHO से यह जानना चाहा कि OCI कार्ड धारक को क्या मिशनरी गतिविधि में शामिल होने का अधिकार है? इस सवाल के जवाब पर SHO ने कहा कि पुलिस को मौके से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि घटनास्थल पर धर्मान्तरण जैसा कुछ चल रहा था। थाना प्रभारी शुभ्रांशु के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है।
                                                                        OCI के कानून
हालाँकि कलिंगा राइट फोरम पुलिस की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। फोरम ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए ऑपइंडिया से बताया कि वो पूरी साजिश का पर्दाफाश करेंगे। (साभार)

मुस्लिमों के गढ़ में 13वीं सदी की मस्जिद तोड़ रहा चीन, पत्थरबाजों की कुटाई भी: प्रदशर्नकारी मुस्लिमों को सरेंडर का अल्टीमेटम; Video वायरल

 मस्जिद तोड़ने को लेकर मुस्लिमों और पुलिस के बीच झड़प (फोटो साभार-AFP)
मुस्लिमों की मजहबी और सांस्कृतिक पहचान मिटाने पर अमादा चीन के निशाने पर अब 13वीं सदी की एक मस्जिद है। यूनान प्रांत के नागू कस्बे स्थित नाजियिंग मस्जिद की गुंबद और मीनारों को गिराने की कोशिश का विरोध हो रहा है। इसके वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हैं। लेकिन उम्माह के ठेकेदार बनने वाले इस्लामी मुल्कों ने इस पर चुप्पी साध रखी है।

बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह चीन की पुलिस ने इस मस्जिद में घुसने की कोशिश की। लेकिन उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सैकड़ों की संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए बल प्रयोग भी किया। वायरल वीडियो में पत्थरबाजी करने वालों की पुलिस पिटाई करती भी दिख रही है। कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को सरेंडर का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में नाजियिंग मस्जिद का विस्तार हुआ है। नई मीनारें और गुंबद जोड़े गए हैं। स्थानीय कोर्ट ने इन निर्माणों को अवैध करार देते हुए तोड़ने का आदेश दिया है। इसी के तहत कार्रवाई करने शनिवार (27 मई 2023) को पुलिस पहुँची थी। चीन के यूनान प्रांत में मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। यह इलाका हुई मुस्लिमों का गढ़ है।

मुस्लिमों के भारी विरोध के चलते पुलिस मस्जिद के अवैध निर्माण नहीं तोड़ पाई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मस्जिद के बाहर पुलिसकर्मियों और मुस्लिमों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। इस दौरान मुस्लिमों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मस्जिद में घुसने की कोशिश कर रही पुलिस पर पथराव भी किया गया।

 इस घटना के बाद पुलिस ने रविवार को (28 मई 2023) को एक बयान जारी करते हुए विरोध करने वालों को सरेंडर करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। पुलिस ने कहा है कि जो लोग 6 जून तक खुद से सरेंडर करते हुए अपना बयान दर्ज कराएँगे उन्हें कम सजा दी जाएगी। चीनी अधिकारियों ने इस घटना को कानून-व्यवस्था में बाधा डालने की एक गंभीर कोशिश करार दिया। साथ ही विरोध करने वाले लोगों के बारे में जानकारी देने की जनता से अपील की है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि चीनी पुलिस अब तक विरोध-प्रदर्शन में शामिल दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इससे पहले साल 2018 में भी चीनी सरकार हुई मुस्लिमों की निंगशिया में स्थित एक मस्जिद को तोड़ना चाहती थी। लेकिन मुस्लिमों के विरोध के बाद सरकार ने कुछ दिनों की शांति पकड़ ली थी। तथा बाद में मीनारों और गुंबदों को तोड़कर उसे चीनी संस्कृति के पगोडा में बदल दिया गया था। इसी तरह अक्टूबर 2021 में चीन के उत्तर-पश्चिमी शहर जिनिंग में स्थित डोंगुआन मस्जिद चीन की कम्युनिस्ट सरकार की शिकार हुई थी। लगभग 700 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक मस्जिद के हरे गुंबदों को नष्ट कर दिया गया था।

ज्ञात हो कि कम्युनिस्ट चीन में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है। साल 2021 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘धर्म का चीनीकरण’ करने की बात कही थी। इसका सीधा मतलब यह है कि चीन धार्मिक आस्थाओं को चीनी संस्कृति और समाज के अनुकूल बनाना चाहता है। 


हैदराबाद यूनिवर्सिटी में भिड़े SFI और ABVP के छात्र; पैने चाकुओं से किया वार, शीशे हुए चकनाचूर, 8 घायल

                     हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एबीवीपी और एसएफआई छात्रों के बीच झगड़ा (तस्वीर साभार: ANI)
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में यूनियन इलेक्शन खत्म होने के बाद वहाँ एसएफआई और एबीवीपी के छात्रों के बीच झगड़ा हो गया। घटना लड़कों के होस्टल में देर रात घटी। हाथापाई में 8 छात्र घायल हुए हैं। इसके अलावा होस्टल के शीशे के दरवाजे और कई छात्रों की साइकिल भी टूटी मिली।

एबीवीपी का आरोप है कि SFI के छात्रों ने ABVP के आदिवासी छात्रों के खिलाफ पहले हिंसा की और उन पर हमला करने के लिए धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल किया। वहीं एसएफआई का कहना है कि पूरी लड़ाई एबीवीपी छात्रों ने शुरू की थी।

एसएफआई छात्रों का दावा है कि, एबीवीपी वाले काफी समय से SFI-AISA-DSU के इलेक्शन पोस्ट फाड़ रहे थे, जिसका उन्हें पता था लेकिन कल उन्होंने ऐसा करते समय एक एबीवीपी के छात्र को पकड़ लिया। आरोप है कि वो छात्र नशे की हालत में था जिसने पहले खुद को शीशे से मारा और फिर चोट लगने पर हंगामा करके अन्य एबीवीपी के छात्रों को इकट्ठा कर हंगामा किया।

सामने आई तस्वीरों में शीशे के टूटे गेट और चोटिल छात्र साफ देखे जा सकते हैं। एबीवीपी के नेशनल सेक्रेट्री हरिकृष्णा नगौथू ने कहा है कि छात्रों पर पैने चाकुओं से हमला हुआ। उन्हें चाहिए कि सिर्फ गुंडों को सजा दी जाए ताकि न्याय हो सके।

इसी तरह एसएफआई के तेलंगाना यूनिट ने कहा है एबीवीपी वालों को गुंडा कहा है। उनका कहना है कि केवल सवाल पूछे जाने पर मारपीट शुरू हुई और फिर कमरे में घुस-घुस कर कॉमरेडों को मारा गया। उनके अनुसार आकाश नाम का एक साथ गंभीर रूप से घायल है जिसका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

दिल्ली में ‘हाथ मरोड़ो-शर्ट फाड़ो’ स्टंट, छत्तीसगढ़ कांग्रेस में 9 लाख मेंबर साफ

5 अगस्त वह तारीख है, जिस दिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन की। इसी तारीख को आर्टिकल 370 से जम्मू-कश्मीर को मुक्ति मिली। लेकिन 2022 की 5 तारीख को कांग्रेस ने काले कपड़ों में प्रदर्शन के लिए चुना।

नेशनल हेराल्ड मामले में फर्जीवाड़े की वजह से गांधी परिवार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इससे बचने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही पूरी कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतर कर हाथ-पैर मार रही है। इसी बीच छत्तीसगढ़ में यूथ कांग्रेस के चुनाव में फर्जी सदस्य बनाये जाने के मामले ने कांग्रेस की अंदरुनी हकीकत को दुनिया के सामने ला दिया है। कुत्ते, बिल्ली, पेड़ और तालाब को भी यूथ कांग्रेस का सदस्य बनाया गया था। इससे पता चलता है कि कांग्रेस की बुनियाद ही फर्जीवाड़े पर टिकी है।

इस प्रदर्शन की दो तस्वीरें काफी वायरल हैं। इनमें से एक में कांग्रेस  महासचिव प्रियंका गाँधी किसी का हाथ पकड़े नजर आ रही हैं। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि प्रियंका पुलिसकर्मी का हाथ मरोड़ रहीं थीं। दूसरी तस्वीर में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और सांसद दीपेंद्र हुड्डा दिख रहे हैं। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि राहुल ने हुड्डा का शर्ट फाड़ने की कोशिश की ताकि पुलिस पर आरोप लगा सकें। बीजेपी ने इन तस्वीरों को लेकर कांग्रेस  पर निशाना साधा है और भाई-बहन की पर तमाशे की राजनीति का आरोप लगाया है।

लेकिन कांग्रेस की यह स्टंटबाजी केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। राज्यों में भी इसका प्रसार हो रहा है। इसका असर तब देखने को मिला जब हिमाचल प्रदेश के नाहन में ‘रोजगार संघर्ष यात्रा’ के दौरान कांग्रेसी आपस में ही भिड़ गए। इसी तरह छत्तीसगढ़ में युवक कांग्रेस के सदस्यों की संख्या आधे से भी कम हो गई है। वजह जानवर से लेकर पेड़-पौधों तक संगठन के सदस्य बन गए थे। ऐसी करीब 9 लाख सदस्यता रद्द की गई है। सदस्यता अभियान के दौरान छत्तीसगढ़ में युवक कांग्रेस ने 17 लाख के करीब मेंबर बनाए थे।

सदस्यता टारगेट पूरा करने के लिए फर्जीवाड़ा

कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान के लिए टारगेट दिया था, लेकिन यूथ कांग्रेस उसे पूरा करने में नाकाम रही। इसे पूरा करने के लिए फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया। सदस्यता अभियान का टारगेट पूरा करने के लिए कार्यकर्ताओं ने डिजिटल मेंबरशिप अभियान के तहत बनाए गए एप में कुत्ते, बिल्ली समेत कई अन्य जानवरों, पेड़ और तालाब की तस्वीर लगाकर लाखो फर्जी सदस्य बना दिए। यहां तक कि कुछ उम्मीदवारों ने कुत्ते-बिल्ली की फोटो खींचकर मतदान करा दिया। दरअसल यूथ कांग्रेस को फर्जीवाड़े की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद युवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ना नहीं चाहते हैं। उनका कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है।

सदस्यता अभियान में हर स्तर पर गड़बड़ी

फर्जी सदस्य बनाये जाने के मामले का खुलासा होने के बाद युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी सदस्यता की जांच कराई, तो पता चला कि सदस्यता एप में 9 लाख सदस्यों को फर्जी तरीके से सदस्यता दी गई थी। सदस्यता अभियान में हर स्तर पर गड़बड़ी की गई थी। मतदाता सूची में जो तस्वीरें थी, उससे अलग तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। मतदाता परिचय पत्र में गड़बड़ी की गई थी। यहां तक कि आवेदन को भी गलत तरीके से भरा गया था। गलत वीडियो बनाकर अपलोड किया गया था। गड़बड़झाले के ये मामले सामने आने के बाद सदस्यता समाप्त की गई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छत्तीसगढ़ में युवक कांग्रेस के सदस्यता अभियान में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। सदस्यता एप के जरिए नौ लाख ऐसे सदस्य बनाए गए, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। कुत्ते, बिल्ली, पेड़, तालाब वगैरह के फोटो अपडेट कर इनको मेंबरशिप दी गई। जब यह बात मीडिया में आ गई तो पार्टी ने सदस्यता अभियान की स्क्रूटनी करवाई। इसके बाद अब तक 9 लाख सदस्यता रद्द की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि युवक कांग्रेस की सदस्यता अभियान के दौरान छोटे से राज्य छत्तीसगढ़ ने बड़े-बड़े प्रदेशों को पीछे छोड़ दिया था। नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के एक जिले में एक लाख 22 हजार सदस्य बनाए गए थे। अब जाँच के बाद इनमें से 84 हजार की सदस्यता अब तक समाप्त की जा चुकी है।