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गुरुग्राम में हिन्दू संगठनों के नाम से पोस्टर लगाने वाला निकला आसिफ, ‘झुग्गी खाली करें मुस्लिम, वरना होगा बहन-बीवी का बलात्कार’: कांग्रेस-सपा ने हिन्दुओं को कहा भला-बुरा

VHP और बजरंग दल को बदनाम करने के लिए आसिफ (बाएँ) ने लगाए धमकी वाले पोस्टर
गुरुग्राम के सेक्टर 69- A क्षेत्र में 26-27 अगस्त 2023 की रात लगे कुछ पोस्टरों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन पोस्टरों में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) और ‘बजरंग दल’ के नाम से झुग्गी-झोपड़ी खाली करने की धमकी लिखी थी। धमकी में झुग्गियाँ खाली करने की डेडलाइन 28 अगस्त रखी गई थी। इन पोस्टरों को ले कर इस्लामी और वामपंथी समूहों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की।

आखिरकार इस पूरी साजिश की जड़ में आसिफ नाम का एक कबाड़ी शामिल मिला। पुलिस ने आसिफ को गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

कबाड़ कारोबार पर बादशाहत की चाहत

मामला गुरुग्राम के थाना क्षेत्र बादशाहपुर का है। 22 सितंबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने आसिफ की गिरफ्तारी की सूचना सार्वजनिक की। पुलिस ने बताया कि 26-27 अगस्त की रात लगे पोस्टरों की FIR 28 अगस्त को दर्ज हुई थी। मामले की जाँच क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने धमकी भरे पोस्टरों को लगाने के आरोप में उत्तराखंड के उधमसिंहनगर के गाँव सरकहड निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आसिफ ने बताया कि उसकी कबाड़ की दुकान गुरुग्राम के सेक्टर 69 के पास है। दुकान के पास एक अन्य कबाड़ी की भी दुकान है।
पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने बताया कि वह कबाड़ के काम में आसपास कोई कम्पटीशन नहीं चाहता था। वह पड़ोस के दुकानदार को भगाना चाहता था। इसी साजिश के तहत उसने पड़ोसी की दुकान के आगे धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए थे। आसिफ ने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसे जेल भी भेज दिया गया है। हालाँकि, केस में अभी जाँच जारी है।

आसिफ की साजिश को कट्टरपंथी, वामपंथी और राजनैतिक हवा

बड़े-बड़े शब्दों में सूचना हेडिंग के साथ इस पोस्टर में लिखा था, “सारे झुग्गी वालों को सूचित किया जाता है 28-08-2023 तक खाली कर के चले जाओ वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर नहीं गए तो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। जितना जल्दी हो सके तुम सब खाली कर दो। साले मुल्ले लोगों की बहन-बीवी का बलात्कार होगा। अगर इज्जत बचाना है तो बचा लोग। तुम्हारे पास दो दिन हैं। फिर मत चिल्लाना।” पोस्टर के अंत में बहन की गालियाँ देते हुए नीचे लिखा, “तुम्हारा बाप बजरंग दल।” लगभग इन्हीं शब्दों के साथ लिखे एक अन्य पोस्टर में नीचे विश्व हिन्दू परिषद लिख दिया गया था। हाथ से लिखे इन पोस्टरों को गोंद से चिपकाया गया था।
आफरीन नाम के हैंडल ने नूहं हिंसा के दौरान फर्जी ट्वीट कर के बिना माफ़ी माँगे डिलीट करने वाले पुनीत कुमार सिंह के ‘बोलता हिंदुस्तान’ की इस मुद्दे पर बनी खबर शेयर की। 31 अगस्त को कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “ये ज़रूर सड़े हुए नारंगी संतरों के छिलकों का काम है क्या पुलिस इस मामले की जाँच करेगी? या जब यह मामला खराब हो जाएगा तब एक्शन लेगी पुलिस, वो भी सिर्फ़ मुसलमानों पर, क्योंकि धमकी मुस्लिमों को मिल रही हैं। अभी खामोश रहिए क्योंकि खट्टर सरकार और गुड़गांव (गुरुग्राम) पुलिस सो रही है।”
NDTV ने तो बाकायदा इस पर एक शो बना डाला। NDTV के एंकर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वालों की गिरफ्तारी की माँग जोर-शोर से उठाते दिखे। NDTV ने इसी शो में मुस्लिम कामगारों को डरा हुआ घोषित कर दिया। NDTV ने अपने शो में नफरती पोस्टर लगाने की वजह झुग्गी में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मुस्लिम समुदाय का होना बताया। 3 मिनट से अधिक लम्बे 
इसी शो में यह भी बताते का प्रयास हुआ कि नूहं हिंसा में भी मुस्लिम ही पीड़ित हैं।
गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के अररिया से कॉन्ग्रेस नेता बदरे आलम ने इस खबर को शेयर किया। 31 अगस्त को उन्होंने लिखा, “दिल्ली से सटे हुए हरियाणा गुरुग्राम में मुस्लिम कामगार डरे हुए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 70 के पास एक मुसलमान की झुग्गी में धमकी भरी पोस्टर लगाए गए। कहा जा रहा है कि वह यहाँ छोड़ कर चले जाएँ वरना झुग्गी जला दी जाएगी।”
लगातार हिन्दू संगठनों के खिलाफ भ्रामक खबरें छापने वाले पोर्टल ‘जर्नो मिरर’ ने तो 29 अगस्त को इस मामले में हिन्दू संगठनों को दोषी ठहरा दिया था। पुलिस जाँच का इंतज़ार किए बिना ही सीधे तौर पर मीडिया संस्थान ने इन पोस्टरों के पीछे VHP और ‘बजरंग दल’ वालों को जिम्मेदार बता डाला था।
                                                               चित्र- journomirror.com
इन सभी के अलावा सदफ आफरीन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता संतोष कुमार यादव और कॉन्ग्रेस नेता डॉ अरुणेश कुमार यादव ने भी इस मुद्दे पर बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कुछ के निशाने पर हरियाणा सरकार थी तो कुछ के हिंदूवादी संगठन। इन सभी के ट्वीट 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच सिलसिलेवार ढंग से आए।
                                                चित्र साभार- ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स

27 अगस्त को ही आ चुका था आसिफ का नाम

इस मामले में इस्लामी, वामपंथी हैंडलों, NDTV के अलावा कॉन्ग्रेसी और समाजवादी पार्टी नेताओं ने हंगामे की शुरुआत 28 अगस्त से की। लेकिन, ख़ास बात ये है कि घटना में आसिफ कबाड़ी का नाम एक दिन पहले 27 अगस्त को ही आ चुका था। 27 अगस्त, 2023 को ही मोजेद अली नाम के शिकायतकर्ता ने पुलिस में आसिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवा दी थी। मोज़ेद अली की ही दुकान पर 26-27 सितंबर को आसिफ ने VHP और बजरंग दल के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए थे। पुलिस में दर्ज कराई गई FIR में मोज़ेद अली ने पोस्टर चिपकाने के पीछे आसिफ के होने की आशंका जताई थी।
                                                                     FIR कॉपी
मोज़ेद ने यह भी बताया था कि 3-4 दिन पहले आसिफ ने उन्हें धमकी दे कर कबाड़ी की दुकान बंद करने के लिए कहा था। FIR में आसिफ पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया। आसिफ को नामजद करते हुए पुलिस ने FIR में IPC की धारा 188, 294, 295- A, 504 और 506 लगाई थी। मोज़ेद अली उसी ऋषि पंडित की झुग्गी में रहते हैं जिसे खाली करने के पोस्टर लगाए गए थे। शिकायतकर्ता मोज़ेद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले हैं। वह सेक्टर 69 गुरुग्राम में चाय-पानी बेचते हैं और कबाड़ का काम करते हैं।

कई हिन्दू हुए हैं ऐसी साजिशों के शिकार

ऑपइंडिया ने इस मामले में गुरुग्राम निवासी और ‘हरियाणा प्रदेश शिवसेना युवा मोर्चा’ (शिंदे गुट) अध्यक्ष रितुराज अग्रवाल से बात की। ऋतुराज ने बताया कि भले ही इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने खुलासा करते हुए असल आरोपित आसिफ को पकड़ लिया लेकिन इस से पहले भी ऐसी कई साजिशें हो चुकी हैं। शिवसेना नेता का दावा है कि उन साजिशों के शिकार कई हिन्दू संगठन के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह यह पोस्टर लगाए गए उसके आसपास के सेक्टरों में कुछ माह पहले खुले में नमाज़ को ले कर भी तनातनी हुई थी।

नूहं से जोड़ कर थी सनसनी फैलाने की साजिश

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘विश्व हिन्दू परिषद’ गुरुग्राम के जिला मंत्री यशवंत ने पोस्टर लगाने और उसे वायरल करने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा किया। यशवंत ने हमें बताया कि हिन्दू संगठनों ने 28 अगस्त को अधूरी बृजमंडल यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया था। इस बीच 26-27 की रात ये पोस्टर लग गए। ऐसा तब हुआ जब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। यशवंत ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले को बृजमंडल यात्रा से जोड़ कर बड़ी सनसनी की साजिश रही होगी। उन्होंने हमें बताया कि वो जल्द ही पुलिस को ज्ञापन दे कर इस मामले की गहराई से जाँच करने की माँग करेंगे।
VHP नेता ने यह भी बताया कि जैसे ही ये पोस्टर घटना के बाद वायरल हुए थे तभी उन लोगों ने खुल कर लोगों और मीडिया के साथ प्रशासन को भी बता दिया था कि ऐसी हरकतें VHP या बजरंग दल नहीं करते। यशवंत ने तनाव के माहौल में पुलिस द्वारा रखे धैर्य और अंत में सही कार्रवाई की तारीफ की।                                                         (साभार)

ओडिशा में कनाडा का ‘मोहन’, महिलाओं ने बंद कर दी भगवान जगन्नाथ की पूजा: ईसाई धर्मांतरण की साजिशों पर ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

              कनाडा के नागरिक पर ओडिशा के जनजातीय लोगों का ईसाई धर्मांतरण करने की कोशिश का आरोप
कनाडा की नागरिकता रखने वाले एक व्यक्ति पर ओडिशा पुलिस ने 24 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। इस व्यक्ति का नाम एपेन मोहन किडंगलील (Eapen Mohan Kidangalil) है। उस पर प्रार्थना सभा के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) समाज के गरीब लोगों को लुभाने और उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है। कलिंगा राइट्स फोरम के मुताबिक एपेन मोहन पर्यटक वीजा पर भारत आया हुआ है। लेकिन उसने नियमों के विपरीत 22 जून को प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसके बाद उसे पकड़कर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सौंप दिया।

ऑपइंडिया के पास इस मेल में दर्ज FIR की कॉपी मौजूद है। FIR के मुताबिक आरोपित पर ओडिशा धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1967 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की गई है। मामला जगतसिंहपुर क्षेत्र का कटेसिंहपुर गाँव का है। यहाँ 22 जून को विश्व हिंदू परिषद के एक सदस्य को धर्मान्तरण के कार्यक्रम की जानकारी मिली। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता जब मौके पर पहुँचे तो पाया कि कनाडा की नागरिकता रखने वाला एपेन मोहन करीब 33 स्थानीय निवासियों को ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। इनमें महिलाओं सहित 11 नाबालिग भी थे।

                                                                   FIR Copy

VHP कार्यकर्ता सूर्यकांत नंदा का आरोप है कि आरोपित के पास से कैश, कागजात, बाइबिल, टूरिस्ट वीजा और कुछ दवाएँ बरामद हुई। एपेन मोहन की मदद स्थानीय स्तर पर क्षेत्र में सक्रिय ईसाई मिशनरी के 2 अन्य सदस्य कर रहे थे। प्रार्थना सभा में ये सभी लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से आए थे। बताया जा रहा है कि प्रार्थना सभा को रोकने का प्रयास करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों से न सिर्फ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उन पर हमला भी हुआ।

मामले का संज्ञान स्थानीय कानूनी कार्यकर्ता समूह कलिंगा राइट्स फोरम ने लिया है। कनाडाई नागरिक पर पर्यटक वीजा के कानूनों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलिंगा राइट्स फोरम ने विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों पर मिशनरी सदस्यों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है।

मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठनों पर जवाबी FIR

इस घटना के बाद ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठन के कुछ लोगों पर जवाबी FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मिशनरियों ने VHP कार्यकर्ताओं पर अपने ‘व्यक्तिगत कार्यक्रम’ में बाधा डालने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के तौर पर लक्ष्मीप्रिया मल्लिक का नाम सामने आया है। लक्ष्मीप्रिया की शिकायत पर IPC की धारा 448, 294, 323, 506 और 34 के तहत हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों पर केस दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला ने बताया है कि नाबालिग बच्चे उसके बेटे के जन्मदिन में आए थे। उसने आरोप लगाया है कि सुबह लगभग 11 बजे उनका परिवार पूजा कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर दुर्व्यवहार किया। हालाँकि पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों को शांत करवाया।
                                                                 हिन्दू संगठनों पर दर्ज FIR

महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ भगवान की पूजा बंद की

ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP सदस्य सूर्यकांत नंदा ने बताया कि बजरंग दल के सदस्यों को बेरहमी से पीटा गया था, क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के नाम हो रहे धर्मान्तरण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि घटना के दिन बिना नंबर की सफेद बोलेरो गाड़ी देखकर जब पड़ताल की गई तो उसमें किसी कनाडा के नागरिक के आने की जानकारी मिली। नंदा ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद एक घर की तरफ जनजातीय समाज के करीब 40-50 गरीब हिन्दुओं को जाते देखा गया।
नंदा ने आगे बताया कि इस जमावड़े की बजरंग दल सदस्यों ने जाकर पड़ताल की तो उन्हें वहाँ प्रार्थना के नाम पर धर्म परिवर्तन का प्रयास होता दिखा। हिन्दू संगठन के सदस्यों को देख कर लक्ष्मीप्रिया नाम की महिला ने इस कार्यक्रम में हुए जमावड़े को घर में जन्मदिन पर हुआ जुटान बताया। बजरंग दल के सदस्यों ने प्रार्थना में बैठी कुछ महिलाओं से बातचीत की। VHP नेता नंदा का दावा है कि इस बातचीत में महिलाओं ने बताया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ की पूजा करना बंद कर दी है, क्योंकि उनका धर्म परिवर्तित हो गया है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान VHP नेता सूर्यकांत नंदा ने स्थानीय पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले तो पुलिस ने सब कुछ जानते हुए भी कनाडा के नागरिक को छोड़ दिया और अब हिन्दू संगठनों से भी पूछताछ करने जा रही है।

नाबालिग बच्चों के मामले का NCPCR ने लिया संज्ञान

कनाडा के आरोपित द्वारा नाबालिग बच्चों के धर्मान्तरण की साजिश की शिकायत कलिंगा राइट्स फोरम ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पत्र लिख कर की है। पत्र का संज्ञान NCPCR ने लिया है। मामले की गहनता से जाँच का भरोसा दिया है।

कनाडा के नागरिक को छोड़ने पर SHO की सफाई

ऑपइंडिया ने इस घटना पर SHO शुभ्रांशु परिदा से बात की। SHO ने बताया कि कनाडाई व्यक्ति एपेन मोहन के पास OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड पाया गया। उन्होंने एपेन मोहन को मूल रूप से केरल का निवासी और जन्मजात ईसाई बताया। बकौल SHO एपेन मोहन को भारत में अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, क्योंकि वो पर्यटक वीजा पर नहीं है। पुलिस के मुताबिक एपेन मोहन ने नियमों को नहीं तोड़ा है, इसलिए उसे धारा 41 का नोटिस जारी कर के रिहा किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर ही की जाती है।

पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं

ऑपइंडिया ने SHO से यह जानना चाहा कि OCI कार्ड धारक को क्या मिशनरी गतिविधि में शामिल होने का अधिकार है? इस सवाल के जवाब पर SHO ने कहा कि पुलिस को मौके से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि घटनास्थल पर धर्मान्तरण जैसा कुछ चल रहा था। थाना प्रभारी शुभ्रांशु के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है।
                                                                        OCI के कानून
हालाँकि कलिंगा राइट फोरम पुलिस की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। फोरम ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए ऑपइंडिया से बताया कि वो पूरी साजिश का पर्दाफाश करेंगे। (साभार)

क्या हिजाब, गोहत्या और धर्मांतरण पर कानून बदलेगी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार, एमनेस्टी की माँग पर खड़गे के मंत्री बेटे प्रियांक खड़गे

कर्नाटक में सरकार बनाते ही कांग्रेस ने अपने वादे के अनुसार मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य मे हिजाब पर प्रतिबंध, गोवध प्रतिबंध और धर्मांतरण कानून सहित अन्य मामलों पर विचार किया जाएगा।

स्वतंत्रता मिलने से पूर्व से ही हिन्दू का निरंतर उपहास हो रहा है, लेकिन हिन्दू आज तक अपने दुश्मनों को नहीं पहचान पा रहा या अनदेखा कर रहा है। चुनावी हिन्दुओं के षड्यंत्र में फंस सनातन विरोधियों को वोट देकर, मोदी और योगी की ओर उनकी सहायता करने के लिए देखते हैं। लेकिन फ्री रेवड़ियों के लालच में अपने विरोधियों को वोट दे आते हैं।  

कर्नाटक के सिद्धारमैया सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “हम अपने रुख को लेकर बहुत स्पष्ट हैं। हम ऐसे किसी भी कार्यकारी आदेश की समीक्षा करेंगे, हम किसी भी विधेयक की समीक्षा करेंगे जो कर्नाटक की आर्थिक नीतियों के प्रतिकूल है। जो राज्य की खराब छवि प्रस्तुत करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “कोई भी विधेयक जो आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, कोई भी विधेयक जो रोजगार पैदा नहीं करता है, कोई भी विधेयक जो किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है, कोई भी विधेयक जो असंवैधानिक है उसकी समीक्षा की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो उसे रद्द किया जाएगा।”

बताते चलें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही मानवाधिकार के नाम पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। उसने कहा था कि कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध, धर्मांतरण विरोधी कानून और गोवध कानून का सरकार समीक्षा करेगी।

एमनेस्टी इंडिया ने अपनी पहली माँग में शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा। उसने कहा, “यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है। इससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।”

अपनी दूसरी माँग में पशु क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम 2020 और कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2022 के प्रावधानों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने के लिए कहा। दूसरे शब्दों में, एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक में गोहत्या की अनुमति और हिंदू विरोधी ताकतों को राज्य में धर्मांतरण रैकेट (लव जिहाद) चलाने की माँग की है।

एमनेस्टी इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि गोवध और धर्मांतरण पर बने कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, एमनेस्टी इंडिया ने मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।

अपनी तीसरी माँग को लेकर एमनेस्टी ने कहा, “राज्य में चुनावों से पहले मुस्लिम के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया था। धर्म-जाति आधारित भेदभाव से प्रेरित घृणा और घृणित अपराधों को समाप्त करने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।” दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कई रिपोर्ट आई हैं, जिनमें मुस्लिमों ने हिंदू व्यवसायों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, लेकिन एमनेस्टी ने इसे कभी भी घृणित नहीं कहा।

राज्य में प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामवादी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बजरंग दल (Bajarang Dal) पर प्रतिबंध को लेकर भी प्रियांक खड़गे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “कोई भी संगठन- धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक, जो असंतोष और वैमनस्य के बीज बोने जा रहा है… उसे कर्नाटक में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम कानूनी और संवैधानिक रूप से उनसे निपटेंगे – चाहे वह बजरंग दल हो, पीएफआई हो या कोई अन्य संगठन हो। हम उन्हें प्रतिबंधित करने में संकोच नहीं करेंगे, यदि वे कर्नाटक में कानून और व्यवस्था के लिए खतरा बनेंगे।”

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि अगर वह सत्ता में आएगी तो राज्य में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देगी। बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की कांग्रेस की घोषणा की देश भर में आलोचना हुई थी। भाजपा ने तो बजरंग दल को बजरंग बली से जोड़ दिया था।

बजरंग दल को बैन करे कांग्रेस, नहीं तो आने वाले चुनावों में साथ नहीं देंगे मुस्लिम: सैयद अरशद मदनी, अध्यक्ष, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कांग्रेस से बजरंग दल को प्रतिबंधित करने का वादा पूरा करने को कहा है। ऐसा नहीं होने पर आगामी चुनावों में मुस्लिमों का समर्थन नहीं मिलने की चेतावनी भी दी है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से बजरंग दल की तुलना करते हुए उस पर बैन की बात कही थी। हालाँकि बाद में पार्टी इससे पलट गई और हर जिले में बजरंग बली का मंदिर बनाने का वादा किया था।

अब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सैयद अरशद मदनी ने उसे उसका वादा दिलाया है। एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में मदनी ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस को 90-100 प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट दिया। अब कर्नाटक की कांग्रेस  सरकार अपना वादा पूरा करे और बजरंग दल पर बैन लगाए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को अब अपना वादा निभाना चाहिए। कांग्रेस को बजरंग दल और अन्य फिरकापरस्त (साम्प्रदायिक) ताकतों पर बैन लगाना चाहिए। यदि कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया तो आने वाले चुनावों में मुस्लिम कांग्रेस पर भरोसा नहीं करेंगे।”

कर्नाटक चुनाव से पूर्व देश में कई चुनावों में कांग्रेस का कुर्सी की खातिर मुस्लिमों से सौदेबाज़ी की बात सामने आ चुकी हैं, जिस कारण एकतरफा वोट किसी अन्य पार्टी को जाने की बजाए मुस्लिम वोट कांग्रेस को जाता रहा है, लेकिन 'गंगा-जमुनी तहजीब' के ढोंगी नारों के मकड़जाल में फंसे हुए हैं। दूसरे, हिन्दुओं को जातियों में बांटने के कुचक्र से विभाजित करने का षड्यंत्र खेल खेला जा रहा है, जाति के आधार पर जनगणना आदि। लेकिन कोई भी नेता यह कहने का साहस नहीं करता कि मुस्लिम समाज में एक जाति का मुसलमान दूसरी जाति की मस्जिद में नमाज़ क्यों नहीं पढ़ सकता, दूसरे के कब्रिस्तान में मुर्दा क्यों नहीं दफ़न किया जा सकता? ये इस्लाम के नाम पर एकजुट रहते हैं, जबकि हिन्दू जाति भेदभाव में उलझा रहता है। नूपुर शर्मा मुद्दे पर क्या हुआ, विवादित पत्रकार जुबेर द्वारा वीडियो को ट्विस्ट कर प्रस्तुत करने पर देखा सारा मुसलमान एक हो गया, लेकिन अयोध्या, काशी और मथुरा तीर्थों को विवादित बनाने में मुस्लिम समाज से कहीं अधिक हिन्दू जिम्मेदार हैं। ऐसे हिन्दुओं से भी शेष हिन्दुओं को सतर्क रहने की जरुरत है। हिन्दुओं को मांग करनी चाहिए कि अगर हिन्दुओं की जनगणना होगी तो मुस्लिमों की भी उसी आधार पर होनी चाहिए।     

इंटरव्यू के दौरान मदनी ने स्वतंत्र भारत में दंगों का जिम्मेदार भी कांग्रेस को बताया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 1956-57 के दौरान जबलपुर में दंगे हुए। इसके बाद देश भर में 20 हजार से ज्यादा दंगे-फसाद हुए। उस वक्त कांग्रेस की हुकूमत थी। किसी दंगाई को सजा नहीं हुई। कांग्रेस की लचर पॉलिसी की वजह से ऐसा हुआ।

मदनी ने कॉमन सिविल कोड (UCC) को बहुसंख्यकों का कानून बताया है। कहा है कि मुस्लिम अपने मजहब का कानून छोड़कर गवर्मेंट द्वारा बनाए गए बहुसंख्यकों के कानून को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने मोदी सरकार पर नफरत फैलाने का भी आरोप लगाया। यह पूछे जाने पर कि वे मोदी के पास अपने मसलों के लेकर क्यों नहीं जाते, मदनी ने कहा, “मुझे पता है कि अपनी नफरत के आगे वो हम लोगों की नहीं सुनने वाले। अगर वो बुलाएँगे तो मैं जाऊँगा।” साथ ही यह भी कहा कि बीजेपी यदि नफरत की पॉलीसी छोड़ दे तो मुस्लिम भी उसकी तरफ जाएँगे।

कर्नाटक चुनाव : 1600 PFI दंगाइयों पर से केस वापस लेने वाली कांग्रेस अब ‘बजरंग दल’ के पीछे पड़ी: वोटों के लिए SDPI से भी हुई थी ‘डील’

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करना कांग्रेस पार्टी के लिए कोई नई बात नहीं है। मुस्लिम तुष्टिकरण तो तभी से चला आ रहा है जब से पार्टी का जन्म हुआ था। क्योकि कांग्रेस की स्थापना किसी भारतीय ने नहीं बल्कि ब्रिटिश नागरिक द्वारा की गयी थी। जब किसी पार्टी का संस्थापक ही उस देश से हो जिससे आज़ादी के लिए कांग्रेस लड़ने का दावा करती रही है, उस पर भी अब संदेह होता है। PFI जिस तरह से फैला-फूला, उसमें कांग्रेस पार्टी का भी बड़ा योगदान है। मोदी सरकार ने बड़ी तैयारी के साथ ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया’ को बैन किया। इसने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश के साथ हथियारों के प्रशिक्षण से लेकर विदेशी फंडिंग जुटाने तक के प्रयास तेज कर दिए थे।

अब कांग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र में ‘बजरंग दल’ की तुलना PFI से करते हुए इसे प्रतिबंधित करने का वादा कर रही है। ‘बजरंग दल’ का नाम आज तक न तो किसी देश विरोधी गतिविधि में आया है और न ही राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ जाकर इसने कुछ किया है। संगठन हिन्दुओं को सुरक्षा देने का कार्य करता है। पीड़ित हिन्दुओं की आवाज़ उठाता है। ऐसे में बजरंग बली की जन्मभूमि पर ‘बजरंग दल’ को बैन करने का वादा करना कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को बताता है।

ये वही कांग्रेस पार्टी है, जिसने केंद्र में सत्ता में रहते लिंगायत समाज को अलग धर्म की मान्यता देने का प्रयास कर के हिन्दू धर्म को तोड़ने की कोशिश की थी। लिंगायत समाज भगवान शिव की पूजा करता है। कांग्रेस पार्टी का हमेशा से प्रयास रहा है कि हिन्दुओं को कमजोर किया जाए और मुस्लिम तुष्टिकरण कर के अपने पक्ष में हिन्दू विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए। लेकिन, लोग अब पार्टी के इस प्रयास को समझ गए हैं और यही कारण है कि जनता ने कई राज्यों की सत्ता से उसे उखाड़ फेंका।

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1600 PFI सदस्यों के खिलाफ केस वापस लिया था कॉन्ग्रेस सरकार ने

कर्नाटक में मई 2013 से मई 2018 तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ता में रही। इसके बाद भी अगले 1 वर्ष तक JDS के एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रही। इन 6 वर्षों में PFI को पनपने के बड़ा अवसर दिया गया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण समझने के लिए हमें चलना होगा जून 2015 में। तब सिद्धारमैया की सरकार ने 1600 PFI आतंकियों के खिलाफ सारे केस वापस लेने का निर्णय लिया था।
सोचिए, ये कितना खतरनाक निर्णय था। एक ऐसा संगठन जिसके दर्जनों ठिकानों पर NIA की छापेमारी में हथियार और देश विरोधी साहित्य से लेकर विदेशी फंडिंग के सबूत तक मिले, उसके सदस्यों के साथ इतनी नरमी? ये अदूरदर्शिता का नहीं, बल्कि जानबूझ तक तुष्टिकरण और वोटों के लिए देश की सुरक्षा से खेलने का मामला था। आज इस संगठन की तुलना ‘बजरंग दल’ से कर के कॉन्ग्रेस विपक्ष में बैठ कर भी यही काम कर रही है।
PFI के अलावा ‘कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KFD)’ के सदस्यों पर से भी केस वापस लिए गए थे। ये दोनों ही संगठन SIMI से निकले थे, जिसका गठन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अप्रैल 1977 में हुआ था। ये एक आतंकी संगठन था, जिसके लोगों ने बाद में ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ बनाया। जयपुर, इलाहाबाद, दिल्ली, पुणे, पटना और बोधगया से लेकर हैदराबाद तक बम विस्फोटों में इस संगठन का नाम सामने आया। SIMI के लोग ही बैन के बाद PFI का हिस्सा बन गए।
जहाँ तक KFD की बात है, मैसूर में सांप्रदायिक दंगों से लेकर IISC बेंगलुरु में गोलीबारी जैसी घटनाओं तक में इसका नाम सामने आया। मैसूर के एक कॉलेज में 2 छात्रों की हत्या का सीधा आरोप इसी संगठन पर लगा। ये सब सिद्धारमैया की सरकार बनने से पहले की घटनाएँ हैं, अर्थात सब कुछ जानबूझ कर किया गया। तब कर्नाटक के कानून मंत्री रहे TB जयचंद्र ने केस वापस लेने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ये शांतिपूर्ण लोग हैं जो सिर्फ विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हुआ थे, लेकिन इनका नाम चार्जशीट में डाल दिया गया।
बिना किसी जाँच के उन्होंने ऐलान कर दिया कि वो भीड़ का हिस्सा थे और हिंसा में उनका कोई हाथ नहीं था। तब भाजपा ने 1600 PFI कार्यकर्ताओं पर से 175 मामले वापस लेने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि देश की सुरक्षा की कीमत पर ये सब किया जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया था कि इन संगठनों को लेकर जो आरोप हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है जिससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव और बढ़ेगा। इन पर कोई साधारण आरोप नहीं थे, बल्कि मैसूर और शिवमोगा सहित कई इलाकों में दंगे के आरोप थे।
अक्टूबर 2022 में भाजपा ने फिर से जनता को इस फैसले की याद दिलाने के लिए अभियान शुरू किया था, जिसमें बताया गया था कि तत्कालीन DGP और कानून विभाग के सचिव की राय के विरुद्ध जाकर कॉन्ग्रेस की सरकार ने ये निर्णय लिया था। कॉन्ग्रेस महासचिव किसी वेणुगोपाल ने बयान दिया था कि PFI को बैन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कॉन्ग्रेस विधायक तनवीर सैत द्वारा सरकार को लिखे पत्र में केस वापस लेने की माँग की गई थी, जिसके बाद ये निर्णय हुआ।

PFI के साथ ‘डील’, जिहादी मानसिकता से समाज को बचाने वाले ‘बजरंग दल’ से दिक्कत: कॉन्ग्रेसी मानसिकता

इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस ने कई सीटों पर PFI और इसके छात्र संगठन SDPI के साथ एक गुप्त डील भी की थी, जिसके तहत 2018 के विधानसभा चुनाव में इन्होंने कॉन्ग्रेस के खिलाफ अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। केरल और तमिलनाडु के मुकाबले PFI कर्नाटक में तेजी से पाँव पसार रहा था और इसने हिन्दू धर्म के बड़े चेहरों की हत्या के लिए हिटलिस्ट भी बना ली थी। RSS नेता इनका निशाना थे। पुत्तुर में एक पूरा का पूरा कम्युनिटी हॉल हथियारों का गोदाम बना दिया गया था, जिसे NIA ने सीज भी किया था।
जो कॉन्ग्रेस पार्टी कल तक PFI के साथ डील करती थी और उसके सदस्यों को कानून से बचाती थी, आज वही ‘बजरंग दल’ को बदनाम करने के लिए PFI के साथ उसका नाम जोड़ रही है। VHP ने इसे पार्टी की जिहादी मानसिकता करार दिया है। राहुल गाँधी कह चुके हैं कि 2008 में मुंबई को दहलाने वाले आतंकियों से ज्यादा हिन्दू संगठन खतरनाक हैं। उनकी पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह ने मुंबई हमले को RSS की साजिश करार दिया था।
इससे ही पता चल जाता है कि कॉन्ग्रेस किस कदर हिन्दू विरोधी मानसिकता में डूब चुकी है। ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाने वालों की तुलना उनसे की जा रही है जो इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से समाज को सुरक्षित रखने के कार्य में लगे हुए हैं। PFI 17 राज्यों में फ़ैल गया, इसके श्रेय कॉन्ग्रेसी मानसिकता को जाता है। ‘बजरंग दल’ को बिना सबूत आतंकी संगठन बताने वाली कॉन्ग्रेस को तथ्यों के साथ बात करनी चाहिए। या फिर, ये बार-बार ऐसी हरकतों से ये जताती रहे कि ये राहुल गाँधी की पार्टी है।

‘सेंट मेरी’ और DAV स्कूल की रामलीला, रामायण में घुसाई अश्लीलता : ‘बजरंग दल’ ने दर्ज कराई शिकायत

                    हरियाणा के फतेहाबाद में 2 स्कूलों पर लगा हिन्दू भावनाओं के अपमान का आरोप
हरियाणा के फतेहाबाद के 2 अलग अलग स्कूलों पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा है। इसमें पहले का नाम डी ए वी पब्लिक स्कूल और दूसरा सेंट मेरी पब्लिक स्कूल है। बजरंग दल ने दोनों स्कूलों के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। सोशल मीडिया पर भी इन घटनाओं से जुड़ा वीडियो वायरल हो रहा है।
                                         DAV स्कूल में रामलीला मंचन

वायरल हो रहे वीडियो में भगवान् राम और लक्ष्मण का आपत्तिजनक चित्रण किया गया है। साथ ही अन्य दृश्य में अश्लीलता दिखाई गई है। वीडियो में मंचन के दौरान बाकी स्कूल स्टाफ द्वारा कोई आपत्ति नहीं जताया जा रहा। वीडियो के दौरान दर्शक दीर्घा से ठहाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

अपने शिकायती पत्र में बजरंग दल ने कहा है कि डी ए वी स्कूल और सेंट मेरी स्कूल में रामलीला का मंचन किया गया। इस मंचन के दौरान देवताओं का भद्दे तरीके से मज़ाक उड़ाया गया। बजरंग दल ने दोनों स्कूल संचालक, प्रिंसिपल, शामिल सभी अध्यापक और अध्यापिकाओं के साथ आपत्तिजनक मंचन करने वालों पर कार्रवाई की माँग की है।

                                                               दोनों स्कूलों के विरुद्ध शिकायत

इस मामले में ऑप इंडिया ने शिकायतकर्ता से बात की। बजरंग दल पदाधिकारी दीपक सैनी ने बताया कि आए दिन हिन्दू भावनाओं का अपमान करना इस स्कूलों की आदत बन चुकी है। इसी के साथ उन्होंने इस मामले में ऊपर से समझौते का दबाव आने की भी बात कही। दीपक सैनी ने पुलिस की कार्यशैली पर पर असंतोष जताया। उनके अनुसार शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने अब तक इस प्रकरण में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। दीपक सैनी ने यह भी बताया कि पुलिस की हीलाहवाली के विरोध में बजरंग दल ने प्रदर्शन भी किया था। इस प्रदर्शन में सेंट मेरी और डी ए वी स्कूल के बहिष्कार के भी नारे लगे थे।


जब सेंट मेरी स्कूल का पक्ष जानने के लिए उन्हें सम्पर्क किया गया तब उनके सोशल हैंडलों पर दिए गए नंबर बंद आए।

रिंकू शर्मा हत्या कांड : ‘गाना’ वाली तंजिला के खिलाफ क्रिमिनल कंप्लेन

                     तंज़िला अनीस ने रिंकू शर्मा की हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की थी
दिल्ली के मंगोलपुरी में बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हुई हत्या की पुलिस हर एंगल से जॉंच कर रही है। इस बीच, चंडीगढ़ में म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ की कर्मचारी तंज़िला अनीस के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने माँग की है कि तंज़िला अनीस को कंपनी तुरंत निकाल बाहर करे। तंजिला ने एक ट्वीट के जरिए रिंकू शर्मा की बर्बर हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की थी। लोगों का आरोप है कि इस घृणित ट्वीट के माध्यम से वो न सिर्फ रिंकू शर्मा की हत्या का समर्थन कर रही थी, बल्कि इस घटना का जश्न भी मना रही थी।

गौरव गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कंपनी की कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि वो धर्म की भूमि भारत में जन्म लेने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं, जहाँ हर सजीव वस्तु की पूजा की जाती है, क्योंकि इकोसिस्टम को बनाए रखने में सभी का किरदार है।

उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों का पोषण करने वाला देश है, जहाँ कई भाषाएँ और संस्कृतियों के लोग साथ में शांति से निवास करते हैं। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि समय-समय पर कई लोगों ने इस सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने की कोशिश की है और इसमें ताज़ा नाम तंज़िला अनीस का है। उन्होंने कहा कि ‘टाइम्स इंटरनेट’ समूह की ‘Gaana’ की इस पदाधिकारी ने अप्रिय, निंदात्मक और आपत्तिजनक ट्वीट्स किए हैं।

उन्होंने कहा कि तंज़िला ने अपनी कई ट्वीट्स में हिन्दू देवी-देवताओं को नीचा दिखाया है। उन्होंने प्रशान अग्रवाल से पूछा कि क्या आपकी कंपनी भी अपनी इस पदाधिकारी के विचारों का समर्थन करती है? उन्होंने लिखा कि वे स्वदेशी कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते, इसीलिए उन्हें जानना है कि तंज़िला के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। साथ ही साइबर क्राइम में शिकायत देकर FIR दर्ज करने की माँग भी की गई है।

                                  तंज़िला के खिलाफ आपराधिक शिकायत, FIR दर्ज करने की माँग
रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं हुई थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

उधर, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रिंकू शर्मा हत्याकांड मामले में हर एंगल से जाँच जारी है। पुलिस ने कहा कि वो पीड़ित परिवार से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और उनसे जो भी सूचना मिल रही है, उस पर काम किया जा रहा है। इससे पहले पुलिस ने किसी कम्युनल एंगल होने से इनकार किया था। लेकिन, अब राम नाम का नारा लगाए जाने के कारण हत्या होने के आरोपों पर हर एंगल से जाँच की बात कही गई है।

                     रिंकू के परिवार को बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ताओं ने दिलाया न्याय का भरोसा
‘रिंकू शर्मा की हत्या करने वाली भीड़ में औरतें भी शामिल थीं, चाकू नहीं निकला तो पीठ में और धँसा दिया’

मृतक के परिवार ने बताया कि कैसे बुधवार देर रात 20-25 लोगों की भीड़ लाठियों, डंडों और चाकू लेकर उनके घर के अंदर घुस गई और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। उन्होंने रिंकू शर्मा को घर से बाहर खींच लिया और उसे नीचे गिरा दिया। उसके बाद उस पर बेरहमी से चाकू से वार किया गया।

भयावह घटना को याद करते हुए बजरंग दल के राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रमुख राकेश पांडे ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि उन्मादी हमलावर भीड़ में औरतें भी थीं।

घर में घुसने के बाद भीड़ ने रिंकू शर्मा के परिवार के सदस्यों पर लाठी और डंडों से धावा बोल दिया। उन्होंने कथित तौर पर गैस सिलेंडर भी लीक कर दिया। इस बीच रिंकू शर्मा ने वहाँ से भागने की कोशिश की। जिसके बाद भीड़ में से कुछ लोगों ने रिंकू को पकड़ लिया और एक तेज चाकू से उस पर वार किया।

सुदर्शन न्यूज़ से बात करते हुए, रिंकू शर्मा के भाई ने कहा कि हत्यारे पाँच मुस्लिम भाई अपने बच्चों, बीवी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उनके घर में घुस गए और सभी ने मिलकर उनके परिवार के सभी सदस्यों को बहुत मारा और उसके भाई (रिंकू) को तो जान से ही मार डाला।

भाई ने कहा कि मुस्लिम भाइयों ने राम मंदिर के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के कारण उनके परिवार को पहले भी धमकी दी थी। ये सभी मंगोलपुरी में रहते हैं और श्री राम के नारे और कार्यक्रमों का विरोध करते थे।

बजरंग दल के एक अन्य कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि जिस चाकू से रिंकू शर्मा को मारा गया था, वह उसकी पीठ में धँस गया था। आरोपितों ने शायद दोबारा चाकू मारने की मंशा से उसकी पीठ से चाकू बाहर निकालने की बहुत कोशिश की। लेकिन वे नाकामयाब रहे। फिर उन्होंने निर्दयतापूर्वक रिंकू की पीठ के अंदर चाकू को और धकेल दिया। जिससे रिंकू गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद वह भाग गए। खून से लथपथ रिंकू को मंगोलपुरी के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गुरुवार दोपहर 12 बजे के करीब उसने दम तोड़ दिया।

रिंकू पश्चिम विहार के एक अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की नौकरी करता था। रिंकू की माँ राधा देवी के अनुसार छुरा घोंपने के दौरान भी उनका बेटा जय श्री राम का नारे लगा रहा था। रिंकू पड़ोस के मुसलमानों के रडार में था, क्योंकि उसने अगस्त में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद इलाके में जय श्री राम के नारों के साथ एक रैली भी निकाली थी।

‘एक-दूसरे के करीब रेस्टोरेंट को खोलने’ वाले दिल्ली पुलिस के बयान के बारे में बात करते हुए राकेश पांडे ने कहा, “मुझे नहीं पता कि दिल्ली पुलिस क्या कह रही है। लेकिन अगर मामला इतना आसान था और घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था तो इलाके में हिंदुओं के बीच उतना गुस्सा नहीं होता। पुलिस मामले से मीडिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।”

बाहरी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी एस धामा ने 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया था, “रिंकू शर्मा को 10 फरवरी को मंगोलपुरी में एक जन्मदिन की पार्टी में चाकू मार दिया गया। यह झड़प एक रेस्टोरेंट के बंद हो जाने की वजह से शुरू हुआ था। किसी भी अन्य मकसद से हत्या की बात गलत है।”

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दिल्ली : रिंकी शर्मा हत्या कांड : हिन्दुओं को लेकर ‘गाना’ की तंजिला का फिर दिखा ज​हर
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दिल्ली : रिंकी शर्मा हत्या कांड : हिन्दुओं को लेकर ‘गाना’ की तंजिला का फिर दिखा ज​हर

इससे पहले सुदर्शन न्यूज़ को रिंकू के पिता अजय शर्मा ने रोते हुए अपने बेटे की बेरहमी से किए गए हत्या की जानकारी देते हुए बताया था कि, “वे (आरोपित) लाठी और चाकू से लैस थे। उन्होंने मेरे बेटे को मार डाला। वह हमेशा के लिए चला गया।” अजय शर्मा ने यह भी कहा था, “राम मंदिर के मुद्दे पर पहले भी इसी तरह की घटना हुई थी। इसके बाद दोषियों ने पीएम मोदी को गालियाँ दीं और कहा कि रिंकू बीजेपी से जुड़ा है।”

दिल्ली : रिंकी शर्मा हत्या कांड : हिन्दुओं को लेकर ‘गाना’ की तंजिला का फिर दिखा ज​हर

जब से दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं, किसी भाजपा शासित राज्य में किसी मुस्लिम की हत्या होने पर वहां अपनी राजनीती करने पहुँच जाते हैं, लेकिन दिल्ली में हो रही हिन्दुओं की हत्याओं पर चुप्पी साध लेते हैं, यह कौन-सी सियासत कर रहे हैं? अब दिल्लीवालों को अपनी आंखें खोलने का समय आ चूका है। मुफ्त के चक्कर में आम आदमी पार्टी को वोट देने की गलती नहीं करें। 

अयोध्या में राममंदिर के लिए चंदा जमा करने वाले उस रिंकी शर्मा की शांतिप्रिय लोगों द्वारा हत्या कर दी जाती है, यह वही रिंकी है, जिसने एक आरोपी की गर्भवती बीबी को खून दिया था। अब कोई 'गंगा-जमुनी तहजीब', 'हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई' आदि भ्रमित नारे लगाने वाले #not in my name, #intolerance, #mob lynching, #award vapasi आदि गैंगस्टर कहाँ है? किस मातम में डूबे हैं? मोदी सरकार को चाहिए दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में पकडे गए आरोपियों के बैंक खातों की जाँच की है, उसी तर्ज पर रिंकी शर्मा की हत्या में पकडे गए आरोपियों के साथ सख्ती से पेश आने के साथ-साथ इनके बैंक खातों की भी जाँच होनी चाहिए। बंगाल में राम नाम पर ममता बनर्जी के विरुद्ध मोर्चा खोला है, राममंदिर पर चंदा जमा करने वालों पर प्रहार क्यों? 
दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हत्या कर दी गई। रिंकू अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह अभियान में सक्रिय थे। इससे इलाके के एक संप्रदाय के लोग नाराज थे। रिंकू के जय श्रीराम नारे के परेशान 15-20 लोगों ने घर में घुसकर 26 साल के रिंकू शर्मा की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद इस्लाम, दानिश नसीरुद्दीन, दिलशान और दिलशाद इस्लाम के तौर पर हुई है।

हत्या के अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दैनिक जागरण के अनुसार जिस इस्लाम ने रिंकू की बेरहमी से हत्या की उसकी पत्नी की जान बचाने के लिए रिंकू ने दो बार दिया था। बताया जा रहा है कि डेढ़ साल पहले मोहम्मद इस्लाम की पत्नी गर्भवती थी। उस दौरान हालत गंभीर होने पर इस्लाम की पत्नी को रोहिणी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसे खून की जरूरत थी। उस समय रिंकू ने इस्लाम की पत्नी को बचाने के लिए एक नहीं बल्कि दो बार खून दिया। इतना ही नहीं रिंकू ने मोहम्मद इस्लाम के भाई शुकरु को कोरोना होने पर अस्पताल में भर्ती कराने पर भी मदद भी की थी। रिंकू ने कभी सोचा भी नहीं होगी कि एहसान का बदला कुछ इस तरह चुकाया जाएगा।

हत्या के बाद इलाके में तनाव है और सदमे से रिंकू के परिजनों की हालात खराब है। ऐसे समय में ट्विटर पर यूजर्स रिंकू के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं और #JusticeForRinkuSharma टॉप ट्रेंड कर रहा है-

हिन्दुओं को लेकर ‘गाना’ की तंजिला का फिर दिखा ज​हर, रिंकू शर्मा की हत्या को सही ठहराने की कोशिश

एक तरफ हिंदू युवक की नृशंस हत्या की घटना को लेकर लोग आक्रोशित हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ इस्लामवादी और वाम-उदारवादी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर इस हत्या का जश्न मना रहे है। ऑनलाइन म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना’ की कंटेंट हेड तंजिला अनीस ने अपनी इस्लामी कट्टरता का प्रदर्शन करते हुए रिंकू शर्मा की हत्या को सही ठहराने की कोशिश की।

तंजिला अनीस ने ट्विटर पर कहा कि मृतक व्यक्ति बजरंग दल का कार्यकर्ता था और इतना ही काफी है। ट्वीट पर गौर करें तो जाहिर है कि तंजिला अप्रत्यक्ष तौर पर इस हत्या को सही ठहरा रही हैं, क्योंकि रिंकू शर्मा बजरंग दल के कार्यकर्ता थे, जो राम मंदिर निर्माण के लिए जारी धन संग्रह अभियान में भागीदारी कर रहे थे। तंजिला ने विवाद होने पर ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देने की कोशिश की है।

हिंदुओं और विशेष रूप से हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार करने में आगे रहने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या वाम-उदारवादियों और इस्लामवादियों द्वारा धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सामान्य घटना के तौर पर गिना जाने लगा है। भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए शुरू हुए दान अभियान के बाद से ही हिंदुओं के खिलाफ फैल रही नफरत में अचानक से वृद्धि देखी गई है।

हिंदुओं और उनकी संस्कृति के खिलाफ घृणा फैलाने वाले वामपंथी-उदारवादियों और इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ लगातार डर पैदा किया जा रहा। जिसका उदाहरण तंजिला अनीस के ट्वीट से देखा जा सकता है, जहाँ वे बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की मौत पर जश्न मनाते हुए, हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा को व्यक्त कर रही हैं।

ट्वीट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने ‘गाना’ से तंजिला अनीस को बर्खास्त करने की माँग की है। इस मामले पर ऑपइंडिया ने भी ‘गाना’ का पक्ष जानने की कोशिश की है। अगर कंपनी हमारे प्रश्नों का जवाब देती है तो यह रिपोर्ट आगे अपडेट की जाएगी।

हिन्दुओं के प्रति तंजीला अनीस का जहर 

ट्विटर पर तंजीला अनीस का हिंदूफोबिक कृत्य कोई नया नहीं है। इससे पहले भी उसने हिन्दू भावनाओं को आहत करने वाले कई पोस्ट शेयर किए है। हालाँकि नेटिज़न्स ने इस तरह के नफरत को पालने और ऑनलाइन मनोरंजन उद्योग में हिन्दू और उनकी संस्कृति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली को जगह देने के लिए टाइम्स ग्रुप के प्रति अपने गुस्से का इजहार करते हुए कंपनी की काफी आलोचना की है। बता दें, ऑनलाइन म्यूजिक ऐप ‘गाना’ टाइम्स मीडिया नेटवर्क की एक सहायक कंपनी है

वहीं कई नेटिज़न्स ने तो यह कहते हुए भी टाइम्स ग्रुप को लताड़ा वह कभी भी ऐसे हिंदूफोबिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि उन्हें बढ़ावा देगा। सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे टाइम्स ग्रुप ने सायमा जैसों को एक प्लेटफॉर्म प्रदान कर रखा है जो हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा में माहिर हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने पिछले दिनों गाना कर्मचारी द्वारा किए गए कई अपमानजनक ट्वीट का खुलासा किया है।


यहाँ तंजिला अनीस द्वारा पोस्ट किए गए कुछ ऐसे ट्वीट हैं, जिसमें न केवल हिंदुओं का मजाक उड़ाया गया हैं, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया।

तंजिला अनीस ने 2012 में हिंदू देवताओं का अपमान करते हुए भगवान शिव के लिए आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया था।

तंजिला अनीस द्वारा हिंदू भावनाओं को आहत करने का प्रयास कई बार किया जा चुका है।

2015 में तंजीला ने एक ट्वीट में कहा था कि किसी को भी इस बात के लिए नाराज होना चाहिए शेफ ज्यादातर पुरुष क्यों होते? ज्यादातर पोर्नस्टार महिलाएँ क्यों होती हैं? भारत में अधिक हिंदू क्यों हैं?

सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा शेयर किए गए बेतुके ट्वीट्स में से एक में तंजिला को भगवान सीता और भगवान हनुमान पर अश्लील कमेंट करते हुए भी देखा जा सकता है।वहीं एक ट्वीट में उसने रामायण का भी मजाक उड़ाया था। एक और ट्वीट में उसने हिंदू संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों का भी अपमान किया था।