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गुरुग्राम में हिन्दू संगठनों के नाम से पोस्टर लगाने वाला निकला आसिफ, ‘झुग्गी खाली करें मुस्लिम, वरना होगा बहन-बीवी का बलात्कार’: कांग्रेस-सपा ने हिन्दुओं को कहा भला-बुरा

VHP और बजरंग दल को बदनाम करने के लिए आसिफ (बाएँ) ने लगाए धमकी वाले पोस्टर
गुरुग्राम के सेक्टर 69- A क्षेत्र में 26-27 अगस्त 2023 की रात लगे कुछ पोस्टरों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन पोस्टरों में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) और ‘बजरंग दल’ के नाम से झुग्गी-झोपड़ी खाली करने की धमकी लिखी थी। धमकी में झुग्गियाँ खाली करने की डेडलाइन 28 अगस्त रखी गई थी। इन पोस्टरों को ले कर इस्लामी और वामपंथी समूहों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की।

आखिरकार इस पूरी साजिश की जड़ में आसिफ नाम का एक कबाड़ी शामिल मिला। पुलिस ने आसिफ को गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

कबाड़ कारोबार पर बादशाहत की चाहत

मामला गुरुग्राम के थाना क्षेत्र बादशाहपुर का है। 22 सितंबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने आसिफ की गिरफ्तारी की सूचना सार्वजनिक की। पुलिस ने बताया कि 26-27 अगस्त की रात लगे पोस्टरों की FIR 28 अगस्त को दर्ज हुई थी। मामले की जाँच क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने धमकी भरे पोस्टरों को लगाने के आरोप में उत्तराखंड के उधमसिंहनगर के गाँव सरकहड निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आसिफ ने बताया कि उसकी कबाड़ की दुकान गुरुग्राम के सेक्टर 69 के पास है। दुकान के पास एक अन्य कबाड़ी की भी दुकान है।
पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने बताया कि वह कबाड़ के काम में आसपास कोई कम्पटीशन नहीं चाहता था। वह पड़ोस के दुकानदार को भगाना चाहता था। इसी साजिश के तहत उसने पड़ोसी की दुकान के आगे धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए थे। आसिफ ने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसे जेल भी भेज दिया गया है। हालाँकि, केस में अभी जाँच जारी है।

आसिफ की साजिश को कट्टरपंथी, वामपंथी और राजनैतिक हवा

बड़े-बड़े शब्दों में सूचना हेडिंग के साथ इस पोस्टर में लिखा था, “सारे झुग्गी वालों को सूचित किया जाता है 28-08-2023 तक खाली कर के चले जाओ वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर नहीं गए तो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। जितना जल्दी हो सके तुम सब खाली कर दो। साले मुल्ले लोगों की बहन-बीवी का बलात्कार होगा। अगर इज्जत बचाना है तो बचा लोग। तुम्हारे पास दो दिन हैं। फिर मत चिल्लाना।” पोस्टर के अंत में बहन की गालियाँ देते हुए नीचे लिखा, “तुम्हारा बाप बजरंग दल।” लगभग इन्हीं शब्दों के साथ लिखे एक अन्य पोस्टर में नीचे विश्व हिन्दू परिषद लिख दिया गया था। हाथ से लिखे इन पोस्टरों को गोंद से चिपकाया गया था।
आफरीन नाम के हैंडल ने नूहं हिंसा के दौरान फर्जी ट्वीट कर के बिना माफ़ी माँगे डिलीट करने वाले पुनीत कुमार सिंह के ‘बोलता हिंदुस्तान’ की इस मुद्दे पर बनी खबर शेयर की। 31 अगस्त को कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “ये ज़रूर सड़े हुए नारंगी संतरों के छिलकों का काम है क्या पुलिस इस मामले की जाँच करेगी? या जब यह मामला खराब हो जाएगा तब एक्शन लेगी पुलिस, वो भी सिर्फ़ मुसलमानों पर, क्योंकि धमकी मुस्लिमों को मिल रही हैं। अभी खामोश रहिए क्योंकि खट्टर सरकार और गुड़गांव (गुरुग्राम) पुलिस सो रही है।”
NDTV ने तो बाकायदा इस पर एक शो बना डाला। NDTV के एंकर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वालों की गिरफ्तारी की माँग जोर-शोर से उठाते दिखे। NDTV ने इसी शो में मुस्लिम कामगारों को डरा हुआ घोषित कर दिया। NDTV ने अपने शो में नफरती पोस्टर लगाने की वजह झुग्गी में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मुस्लिम समुदाय का होना बताया। 3 मिनट से अधिक लम्बे 
इसी शो में यह भी बताते का प्रयास हुआ कि नूहं हिंसा में भी मुस्लिम ही पीड़ित हैं।
गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के अररिया से कॉन्ग्रेस नेता बदरे आलम ने इस खबर को शेयर किया। 31 अगस्त को उन्होंने लिखा, “दिल्ली से सटे हुए हरियाणा गुरुग्राम में मुस्लिम कामगार डरे हुए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 70 के पास एक मुसलमान की झुग्गी में धमकी भरी पोस्टर लगाए गए। कहा जा रहा है कि वह यहाँ छोड़ कर चले जाएँ वरना झुग्गी जला दी जाएगी।”
लगातार हिन्दू संगठनों के खिलाफ भ्रामक खबरें छापने वाले पोर्टल ‘जर्नो मिरर’ ने तो 29 अगस्त को इस मामले में हिन्दू संगठनों को दोषी ठहरा दिया था। पुलिस जाँच का इंतज़ार किए बिना ही सीधे तौर पर मीडिया संस्थान ने इन पोस्टरों के पीछे VHP और ‘बजरंग दल’ वालों को जिम्मेदार बता डाला था।
                                                               चित्र- journomirror.com
इन सभी के अलावा सदफ आफरीन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता संतोष कुमार यादव और कॉन्ग्रेस नेता डॉ अरुणेश कुमार यादव ने भी इस मुद्दे पर बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कुछ के निशाने पर हरियाणा सरकार थी तो कुछ के हिंदूवादी संगठन। इन सभी के ट्वीट 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच सिलसिलेवार ढंग से आए।
                                                चित्र साभार- ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स

27 अगस्त को ही आ चुका था आसिफ का नाम

इस मामले में इस्लामी, वामपंथी हैंडलों, NDTV के अलावा कॉन्ग्रेसी और समाजवादी पार्टी नेताओं ने हंगामे की शुरुआत 28 अगस्त से की। लेकिन, ख़ास बात ये है कि घटना में आसिफ कबाड़ी का नाम एक दिन पहले 27 अगस्त को ही आ चुका था। 27 अगस्त, 2023 को ही मोजेद अली नाम के शिकायतकर्ता ने पुलिस में आसिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवा दी थी। मोज़ेद अली की ही दुकान पर 26-27 सितंबर को आसिफ ने VHP और बजरंग दल के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए थे। पुलिस में दर्ज कराई गई FIR में मोज़ेद अली ने पोस्टर चिपकाने के पीछे आसिफ के होने की आशंका जताई थी।
                                                                     FIR कॉपी
मोज़ेद ने यह भी बताया था कि 3-4 दिन पहले आसिफ ने उन्हें धमकी दे कर कबाड़ी की दुकान बंद करने के लिए कहा था। FIR में आसिफ पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया। आसिफ को नामजद करते हुए पुलिस ने FIR में IPC की धारा 188, 294, 295- A, 504 और 506 लगाई थी। मोज़ेद अली उसी ऋषि पंडित की झुग्गी में रहते हैं जिसे खाली करने के पोस्टर लगाए गए थे। शिकायतकर्ता मोज़ेद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले हैं। वह सेक्टर 69 गुरुग्राम में चाय-पानी बेचते हैं और कबाड़ का काम करते हैं।

कई हिन्दू हुए हैं ऐसी साजिशों के शिकार

ऑपइंडिया ने इस मामले में गुरुग्राम निवासी और ‘हरियाणा प्रदेश शिवसेना युवा मोर्चा’ (शिंदे गुट) अध्यक्ष रितुराज अग्रवाल से बात की। ऋतुराज ने बताया कि भले ही इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने खुलासा करते हुए असल आरोपित आसिफ को पकड़ लिया लेकिन इस से पहले भी ऐसी कई साजिशें हो चुकी हैं। शिवसेना नेता का दावा है कि उन साजिशों के शिकार कई हिन्दू संगठन के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह यह पोस्टर लगाए गए उसके आसपास के सेक्टरों में कुछ माह पहले खुले में नमाज़ को ले कर भी तनातनी हुई थी।

नूहं से जोड़ कर थी सनसनी फैलाने की साजिश

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘विश्व हिन्दू परिषद’ गुरुग्राम के जिला मंत्री यशवंत ने पोस्टर लगाने और उसे वायरल करने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा किया। यशवंत ने हमें बताया कि हिन्दू संगठनों ने 28 अगस्त को अधूरी बृजमंडल यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया था। इस बीच 26-27 की रात ये पोस्टर लग गए। ऐसा तब हुआ जब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। यशवंत ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले को बृजमंडल यात्रा से जोड़ कर बड़ी सनसनी की साजिश रही होगी। उन्होंने हमें बताया कि वो जल्द ही पुलिस को ज्ञापन दे कर इस मामले की गहराई से जाँच करने की माँग करेंगे।
VHP नेता ने यह भी बताया कि जैसे ही ये पोस्टर घटना के बाद वायरल हुए थे तभी उन लोगों ने खुल कर लोगों और मीडिया के साथ प्रशासन को भी बता दिया था कि ऐसी हरकतें VHP या बजरंग दल नहीं करते। यशवंत ने तनाव के माहौल में पुलिस द्वारा रखे धैर्य और अंत में सही कार्रवाई की तारीफ की।                                                         (साभार)

‘जब कोरोना से लड़ रहा था देश, धर्मांतरण में लगे थे मुल्ला-मौलवी और ईसाई मिशनरी’: VHP का शंखनाद

देशभर में हो रहे धर्मान्तरण (Conversion) के खिलाफ जन जागरुकता फैलाने और अवैध धर्मान्तरण के खिलाफ कड़े कानून की माँग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (Vishwa hindu parishad) ने सोमवार (20 दिसंबर 2021) से 11 दिवसीय अभियान की शुरुआत की है। इसको लेकर वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार (Alok kumar) ने कहा है कि अब समय आ गया है कि लालच, भय या धोखे से धर्मान्तरण करवाने वालों के खिलाफ कठोर कानून की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने ये बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। कुमार के मुताबिक, देश में मुल्ला-मौलवी और ईसाई मिशनरी धर्मान्तरण का षड्यंत्र चला रहे हैं। इसकी भीषणता को देखते हुए हमने फैसला किया है कि अभियान चलाकर मुल्ला-मौलवियों और ईसाइयों के षणयंत्रों को उजागर करेंगे। इसके तहत जनसभाएँ, सोशल मीडिया साहित्य बाँटकर जनजागरण किया जाएगा। ताकि इन लोगों के हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी कृत्यों को समझकर इस पर रोक लगाई जा सके। वीएचपी नेता ने कहा, “कोरोना के समय जब पूरा देश कोरोना से जूझ रहा था और अधिकतर सामाजिक-धार्मिक संगठन सेवा के कार्यों में लगे थे, उस दौरान मौलवी और पादरी आक्रामक तरीके से धर्मान्तरण का काम कर रहे थे।”

आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि ‘चंगाई सभा’ के नाम पर चर्च खुले आम धर्मान्तरण करवा रहे हैं। ये लोग भोले-भाले वनवासियों को ग्रामीणों और पिछड़े लोगों को टार्गेट कर रहे हैं। कुमार का कहना है कि मिशनरी खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि कोरोना काल में जितने चर्च खोले गए, उतने तो बीते 25 सालों में भी नहीं खोले जा सके। लव जिहाद से पीड़ित हिंदू महिलाओं की प्रताड़ना, हत्या जैसी खबरें हर दिन सामने आती हैं। अवैध धर्मान्तरण के कारण भारत का विभाजन और उसके बाद करोड़ों हिंदुओं का नरसंहार, दंगे और आतंकवाद की पीड़ा से दो चार हो चुका हिंदू अब इन सारी चीजों को स्वीकार नहीं करेगा।

आलोक कुमार ने ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों के धर्मान्तरण कराए जाने के षड्यंत्र का खुलासा किया और कहा कि संविधान के मुताबिक, अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्मान्तरण करता है तो उसे मिलने वाला विशेषाधिकार समाप्त हो जाता है। जबकि इसके उलट अनुसूचित जनजाति वालों के अधिकार धर्मान्तरण के बाद भी बने रहते हैं। इसी संवैधानिक गलतियों का फायदा ईसाई मिशनरी उठाते हैं। हालाँकि, जनजातियों का अपने धर्म के प्रति अटूट विश्वास ही है जो ढाई सौ सालों में हजारों करोड़ डॉलर खर्च करने के बाद भी अभी तक केवल 18% वनवासियों का धर्मान्तरण कराया जा सका है।

विहिप के कार्याध्यक्ष के मुताबिक, भारत में ज्यादातर धर्मान्तरण, बलपूर्वक, धोखे से या फिर लालच देकर करवाया गया है। यही वजह रही है देवल ऋषि, स्वामी विद्यारण्य, रामानुजाचार्य, रामानंद, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद जैसे महापुरुषों धर्मान्तरण रोकने के सतत प्रयास किए हैं।

विश्व हिंदू परिषद ने 6 दिसंबर 2021 को देश में धर्मान्तरण के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ने के अभियान को शुरू करने का ऐलान किया था।

हिंदुओं का नरसंहार बर्दास्त नहीं, यूएन भेजे पीस कीपिंग फोर्स: डॉ सुरेन्द्र जैन

 

नई दिल्ली। अक्टूबर 
19, 2021। विश्व हिन्दू परिषद(विहिप) ने कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के अनवरत नरसंहार को रोकने के लिए अब संयुक्त राष्ट्र संघ को पीस कीपिंग फोर्स भेजनी चाहिए। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि हिंदुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों की तुलना केवल नाजियों की बर्बरता से की ही जा सकती है। हिंदुओं के विरुद्ध हो रहे पाशविक अत्याचारों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब संयुक्त राष्ट्र संघ को इस मामले में पहल करते हुए वहाँ बुरी तरह पीड़ित अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा हेतु अपनी पीस कीपिंग फोर्स अबिलंब बंगलादेश भेजनी चाहिए। विहिप हिन्दुओं पर हो रहे नृशंस अत्याचारों की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हुए शेख हसीना को आगाह करती है कि वे अपने राज धर्म का पालन करें, हिंदू समाज की सुरक्षा सुनिश्चित कर दोषियों को कठोरतम सजा दिलवाएं।

विहिप के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन 20 को, पुतला दहन कर देंगे ज्ञापन 

  उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ एवं सभी मानवाधिकार संगठन पंगु बने हुए हैं। इस्लामिक कट्टरपंथी बांग्लादेश को हिंदू शून्य बनाने पर तुले हैं। बांग्लादेश सरकार मूकदर्शक बनी है। वहां की प्रधानमंत्री जिहादियों पर नियंत्रण करने की जगह भारत सरकार को नसीहत दे रही हैं कि वे भारत में ऐसी कोई घटना ना होने दें जिससे कि वहां का मुसलमान भड़क जाए। शेख हसीना के इस बयान के बाद मुस्लिम कट्टरपंथी और भड़क गए तथा हिंदुओं पर हो रहे पाशविक अत्याचारों में  बढ़ोतरी हो गई। अत्याचारों का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा।

      विहिप के संयुक्त महा सचिव ने कहा कि बांग्लादेश घोषित रूप से इस्लामिक देश है। इसीलिए अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में प्रारंभ से ही हिंदुओं पर जघन्य अत्याचार होते रहे हैं लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। केवल पिछले 10 दिनों में 150 से अधिक मां दुर्गा के पूजा मंडप नष्ट कर दिए। 362 से अधिक मूर्तियां ध्वस्त कर दी। हजारों हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमला करके लूटा गया है। 1000 से अधिक हिंदू घायल हो गए हैं तथा अभी तक 10 हिंदुओं के मारे जाने का भी समाचार आ चुका है। कई हिंदू महिलाओं के साथ बर्बर रूप से सामूहिक बलात्कार किए गए हैं। चांदपुर के हाजी गंज में तो एक महिला, उसकी बेटी और उसकी बहन की बेटी के साथ पाशविक रूप से सामूहिक बलात्कार किए गए। 10 साल की एक मासूम बच्ची ने तो वहीं पर दम तोड़ दिया। इस्कॉन के तीन मंदिरों, रामकृष्ण मिशन के आश्रमों, राम ठाकुर आश्रम जैसे 50 से अधिक मंदिरों को नष्ट कर दिया गया है। इस्कॉन के दो संतो तथा चौमोहिनी मंदिर के तीन पुजारियों की बर्बर हत्या कर दी गई है। कल ही इस्कॉन मंदिर के तालाब में एक और पुजारी का शव देखा गया है। कई जिलों में इंटरनेट की पाबंदी के कारण अधूरे समाचार मिले हैं। वास्तविकता इससे भी कहीं भयानक है।

उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर इस तरह के अत्याचार कट्टर इस्लामिक चरित्र का एक अंग बन गए हैं जिसका साक्ष्य वर्तमान बांग्लादेश में हिंदुओं की निरंतर गिरती हुई जनसंख्या है। 1951 में पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं की जनसंख्या 22% थी, बांग्लादेश के निर्माण के समय 1971 में 18% थी जो अब घटकर मात्र 7% रह गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि बांग्लादेश के निर्माण के बाद भी हिंदूओं पर अत्याचारों का सिलसिला रुका नहीं अपितु और तेजी से बढ़ा है। संपूर्ण विश्व जानता है कि पाकिस्तानी सेना के द्वारा सभी बंगालियों पर इसी प्रकार के अमानवीय अत्याचार किए जाते थे जिन से मुक्ति दिलाने के लिए ही भारत ने मुक्ति वाहिनी का गठन किया था और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। लेकिन पाकिस्तानी अत्याचारों से मुक्ति पाते ही वहां के मुस्लिम समाज का असली चरित्र सामने आ गया और वहां की सरकारें इस बर्बर चरित्र की संरक्षक बन गई।

इस्लामिक देश घोषित करने के बाद वहां वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट बनाया गया जिसके अंतर्गत हिंदुओं की संपत्ति पर वहां की सरकार कभी भी कब्जा कर सकती है। विहिप का यह स्पष्ट मत है कि बंगलादेश के इस्लामिक चरित्र के कारण ही वहाँ की सरकारें हिंदूओं पर अत्याचारों की मूक दर्शक ही नहीं प्रेरक भी बनती रही हैं। बंगलादेश को इस्लामिक देश की जगह धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किए बिना वे कट्टरपंथियों के चंगुल से बाहर नहीं निकल सकते।

      डॉ जैन ने कहा कि हिंदू समाज पर हो रहे इन अमानवीय अत्याचारों को हिन्दू समाज और बर्दास्त नहीं करेगा। इसलिए आज 19 अक्टूबर को कोलकाता में विशाल आक्रोश प्रदर्शन किया जा रहा है। दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने 20 अक्टूबर को एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे देश में जिला स्थानों पर आक्रोश प्रदर्शन किए जाएंगे।

 विहिप बांग्लादेश सरकार को आगाह करती है कि यदि वे विकासशील देशों की पंक्ति में खड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें अपनी कट्टरपंथी छवि से मुक्त होना पड़ेगा। कट्टरपंथियों पर उसी तरह की कार्यवाही करनी पड़ेगी जो 1971 में की गई थी। आवश्यकता हो तो उन्हें भारत सरकार की सहायता भी लेनी चाहिए।

विहिप की संयुक्त राष्ट्र संघ से भी अपील है कि वह हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाये। इन स्थानों पर पीस कीपिंग फोर्स  भेज कर अपने अस्तित्व के औचित्य को सिद्ध करें। विहिप सरकार भारत सरकार से अपील करती है कि वे अपनी पूरी ताकत से बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाएं जिससे वह हिंदू समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को पूरा कर सके।

भवदीय

विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता

विश्व हिंदू परिषद

दिल्ली : बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर किसने किया कलम?

 

दिल्ली के बेगमपुर थानांतर्गत कैलाश विहार पंसारी के एक मंदिर में तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। घटना को अंजाम देने वाले विधर्मी ने हिंदू देवी-देवताओं की दर्जन भर मूर्तियों पर हमला करके उन्हें खंडित किया। तस्वीरों को यदि देखें तो यह साफ पता चलता है कि उसने मुख्य रूप से मंदिर में स्थापित मूर्तियों के सिर को धड़ से अलग किया है जैसे उसकी नियत ही सिर कलम करने की रही हो।

खंडित की गई मूर्ति

ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया तो हमने मंदिर के ट्रस्टी विभूति शर्मा से बात की। उनका घर मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने इस मामले की पुष्टि करते हुए यह बताया कि वह शिवशक्ति मंदिर के ट्रस्टी हैं। उन्हें कल यानी 25 नवंबर 2020 को सुबह करीब 7 बजे इस घटना की जानकारी मिली थी। मंदिर में साफ सफाई करने वाली महिला ने उन्हें इस बारे में घर आकर बताया था और फिर उन्होंने खुद जाकर देखा तो वाकई वहाँ हर मूर्ति का सिर अलग हो रखा था। 

अख़लाक़ की हत्या पर इतना शोर-शराबा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बताएं कि उनके कार्यकाल में अब तक कितने हिन्दू मंदिरों को खंडित किया जा चूका है? टीवी पर बहुत कहते हो कि "मै आपके परिवार का हिस्सा हूँ", फिर कुछ अंतराल के बाद क्यों हिन्दू मंदिरों पर हमले हो रहे हैं?

शिवशक्ति मंदिर

कैलाश विहार के ए ब्लॉक के शिवशक्ति मंदिर में लक्ष्मी नारायण की मूर्ति, कृष्ण-राधिका की मूर्ति, दुर्गा माता की मूर्ति, बगलामुखी माता की मूर्ति और पूरे शिव परिवार की मूर्तियाँ थी। विभूति शर्मा के अनुसार, “मंदिर में साफ-सफाई के लिए लगाई एक महिला सफाई कर्मी ने मुझे घर आकर बताया, ‘भैया किसी ने मूर्तियाँ तोड़ दी हैं।’ मैंने जाकर देखा तो सारी मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हो रखी थीं। मैंने तुरंत पुलिस को फोन किया और कुछ देर में प्रशासन की टीम भी वहाँ पहुँची।”

मंदिर के ट्रस्टी के मुताबिक प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह उन्हें मंदिर में स्थापित करने के लिए नई मूर्तियाँ देंगे। उनके मुताबिक, खंडित की गई मूर्तियों का कल विसर्जन हो चुका है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अभी (खबर लिखने तक) नई मूर्तियाँ नहीं दी हैं।

मामले में कराई गई एफआईआर

सीसीटीवी आदि के बारे में पूछे जाने पर विभूति कहते हैं कि आम आदमी पार्टी की ओर से गली में सीसीटीवी लगा तो था, लेकिन जब घटना हुई और उसे चेक करने की बात उठी, तब पता चला कि उसका डीवीआर कोई 3-4 दिन पहले तोड़ चुका था।

उनके अनुसार, स्थानीयों ने 24 की रात एक लड़के को इलाके में भागते देखा था जो चिल्ला रहा था, “सिर काट दिया, सिर काट दिया।” मगर कोई उस लड़के का चेहरा नहीं देख पाया। ट्रस्टी के अनुसार, मंदिर का दरवाजा बंद रहता है लेकिन परसों किसी ने जब ध्यान नहीं दिया तो दरवाजा खुला रह गया और यह घटना हुई।

इस मामले में विभूति शर्मा ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए अज्ञात आरोपित के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की माँग की है। इस मामले को पुलिस ने आईपीसी की धारा 457 और 295 के तहत दर्ज किया है। बेगमपुर थाने की पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वो इस मामले में अभी पड़ताल कर रहे हैं। बाकी इलाके में शांति हैं। आगे की कोई जानकारी पड़ताल होने के बाद ही दी जाएगी।

VHP ने उठाया मंदिर में तोड़फोड़ का मामला

मंदिर में हुई इस निंदनीय घटना को विश्व हिंदू परिषद ने भी उठाया है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल लिखते हैं, “दिल्ली के बेगमपुर थानांतर्गत कैलाश विहार पंसाली में शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

आगे उन्होंने बताया कि इस मामले में एफआईआर हुई है लेकिन बहुत सीमित धाराओं के साथ। भगवान का सिर कलम करने के लिए अभी तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है।              (एजेंसीज इनपुट्स सहित)