Showing posts with label bangladesh. Show all posts
Showing posts with label bangladesh. Show all posts

बंगाल के खेत में खून से लथपथ मिली लाश ; नासेर ने बांग्लादेशी युवती के हाथ-पाँव बांध गर्दन रेता, फिर चेहरे को जलाकर मिटाई पहचान; वीडियो वायरल

मणिपुर, गुजरात और भाजपा शासित राज्यों में होने वाले महिलाओं के यौन शोषण पर सड़क से संसद तक चीख-पुकार करने वाले पश्चिमी बंगाल में हो रही हिंसाओं पर क्यों खामोश हैं? अपने पत्रकारिता के लगभग 42 वर्ष में जितना उपद्रव बंगाल के 24 परगना में होता रहा है, भारत के शायद ही किसी अन्य राज्य में नहीं। सरकारें आती है जाती है लेकिन इस क्षेत्र में दंगाइयों की बल्ले-बल्ले ही रही है।  

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक बांग्लादेशी महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला का शव मंगलवार (26 सितंबर 2023) को स्वर्णपुर के गोबिंदपुर इलाके के फील्ड में पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि महिला के हाथों को रस्सी से बाँध दिया गया था। उसकी गर्दन को चाकू से काट मौत के घाट उतारा गया था।

अपराधियों ने उसकी पहचान को छिपाने के लिए चेहरे को भी जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने उसने प्रेमी नासेर मिल्स को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक महिला का नाम सोमैया अख्तर है। वह मूल रूप से बांग्लादेश के ढाका की रहने वाली थी और मुंबई में एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी।

स्थानीय लोग जब उस जगह पर फूल तोड़ने के लिए गए तो उन्हें महिला का शव मिला। महिला के शव मिलने का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसके चेहरे के हिस्से को जला दिया गया है। उसके दोनों हाथों के घुटने से नीचे से एक लकड़ी के सहारे बाँध दिया गया था। वहीं, चेहरे पर कपड़े डालकर आग लगा दी गई थी। जमीन पर चारों तरफ खून फैला हुआ था।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और आरोपी नासेर मिल्स को गिरफ्तार कर लिया है।

बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। मालवीय ने ट्वीट कर कहा, “यह पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति है। उत्तर 24-परगना में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक बाग से एक युवती का शव मिला है, जिसकी गर्दन काट दी गई है और चेहरा जलने की वजह से पहचान में नहीं आ रहा है।”

मालवीय ने आगे कहा, “इस मामले में ममता बनर्जी एक शब्द नहीं बोलेंगी। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर तृणमूल कांग्रेस द्वारा संरक्षित अपराधी महिला तस्करी में शामिल हों और इस कुकृत्य के पीछे हों। इसका मतलब ये है कि शायद इस हत्याकांड को भी दबा दिया जाए।”

मालवीय ने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी इस मामले पर क्या कहेंगे। मालवीय ने कहा, “राहुल गाँधी, जो राजनीतिक रूप से सुविधाजनक होने पर मगरमच्छ के आँसू बहाने में तेज हैं, क्या वे ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने के लिए फटकारेंगे? या I.N.D.I Alliance की मजबूरी आड़े आएगी?”

मुरादाबाद को मुस्लिम बहुल बनाने के लिए 30,000 बांग्लादेशी को घुसाया… फिर दंगों में 83 मौतें: केंद्र+राज्य की कांग्रेस सरकार का No Action – 496 पन्नों की रिपोर्ट

        मुरादाबाद के 1980 दंगों से पहले साजिशन बसाए गए थे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए (चित्र साभार- ऑर्गेनाइजर)
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 8 अगस्त 2023 को साल 1980 में हुए मुरादाबाद दंगों की जाँच रिपोर्ट पेश की। इस दंगे में कम से कम 83 लोगों की हत्या हुई थी और 112 अन्य घायल हो गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एमपी सक्सेना के एक सदस्यीय पैनल ने इन दंगों पर 496 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। जस्टिस सक्सेना की इस रिपोर्ट में दंगों के असल कारणों और उससे हुए नुकसान का जिक्र किया गया था।

तब केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों में ही कांग्रेस की सरकार थी। इस रिपोर्ट में हिंसा के दौरान वहाँ मौजूद न सिर्फ मुस्लिम और हिन्दुओं बल्कि तब तैनात पुलिस अधिकारियों का भी हवाला दिया गया है। दंगे के दौरान दर्ज हुए 6 हिंदुओं की गवाही का भी इस रिपोर्ट में उल्लेख है।

मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट के हर बयान में यह साफ़ है कि नरसंहार की योजना पहले से ही बनाई गई थी। 1980 में हुए इन दंगों के चश्मदीदों में से एक संतोष सरन ने अपनी लिखित गवाही में कहा है कि हिंसा की वजह वोट बैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति थी।

दंगे 13 अगस्त 1980 में भड़के थे। अपनी गवाही में संतोष सरन ने खुलासा किया है कि दंगे भड़कने से पहले 30,000 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को सोची समझी साजिश के तहत लाकर बसाया गया था। इन्हें मुरादाबाद के मुस्लिम बहुल गाँवों में रखा गया था।

दंगों की प्रमुख वजह संतोष सरन ने जिले की डेमोग्राफी बदलने की साजिश बताया। सरन के अनुसार 1947 में मिली आजादी के समय मुरादाबाद मुस्लिम बहुल था। तब शहर की आबादी में 52 प्रतिशत मुस्लिम और 48% हिन्दू थे। लेकिन स्वतंत्रता मिलने के बाद कई मुस्लिम पाकिस्तान चले गए थे, जिस वजह से आज़ादी के बाद मुरादाबाद हिन्दू बहुल हो गया था। तब यहाँ 52 हिन्दू और 48 प्रतिशत मुस्लिम हो गए थे।

चश्मदीद सरन ने बताया कि कांग्रेस शासन में धीरे-धीरे मुरादाबाद में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों की लगातार घुसपैठ करवाई गई। इस वजह से एक बार फिर शहर की जनसांख्यिकी बदल गई। इन्हीं अवैध घुसपैठियों को स्थानीय मुस्लिमों ने हिंदुओं के खिलाफ भड़काया।

आरोप यह भी है कि तत्कालीन राज्य और केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इन अवैध घुसपैठियों पर कोई एक्शन नहीं लिया। चश्मदीद के मुताबिक कालांतर में इन्हीं अवैध मुस्लिम घुसपैठियों का दबदबा बढ़ता गया और मुरादाबाद में सांप्रदायिक हिंसा होना बहुत आम बात हो गई।

पिछली रिपोर्ट में एक अन्य चश्मदीद दयानंद गुप्ता की गवाही का जिक्र किया गया था। दयानंद के मुताबिक हिंसा की शुरुआत 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद के ईदगाह से हुई थी। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस अधिकारियों और दलित समुदाय के वाल्मीकि लोगों पर बेवजह हमला किया था। इसके अलावा न्यायमूर्ति सक्सेना के नेतृत्व में हुई जाँच की रिपोर्ट में भाजपा, RSS व अन्य हिन्दू संगठनों को क्लीन चिट दी गई है।

इसी रिपोर्ट में हिंसा के लिए मुस्लिम लीग के कुछ राजनैतिक लोगों की सांप्रदायिक राजनीति को जिम्मेदार ठहराया गया था और बताया गया कि दंगो की वजह बना सांप्रदायिक उन्माद मुस्लिम लीग और कांग्रेस नेताओं द्वारा रची गई साजिश का परिणाम था। ‘मुरादाबाद में ईद की नमाज के दौरान ईदगाह में सुअर घुसने’ के आरोपों को भी इस रिपोर्ट में पूरी तरह से खारिज किया गया है।

साल 1980 के मुरादाबाद दंगों पर जस्टिस सक्सेना की 496 पन्नों की रिपोर्ट मई 1983 में ही तैयार कर दी गई थी। हालाँकि इतने साल बीत जाने के बाद भी इस रिपोर्ट को एक विभाग से दूसरे सरकारी विभाग तक घुमाया जाता रहा। इसी के साथ पिछले लगभग 4 दशकों में इस जाँच रिपोर्ट को कोई न कोई बहाना बना कर कम से कम 14 बार दबाया गया था।

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : 43 साल बाद सामने आई मुरादाबाद दंगों की सच्चाई: हिंदुओं का हो कत्लेआम इसलिए नमाज में

योगी सरकार से पहले पहले किसी भी सरकार ने इसे सार्वजानिक नहीं किया। आखिरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में UP में चल रही भाजपा सरकार ने 43 साल पुराने इस मामले को खोलने का फैसला लिया है। इसी साल मई में राज्य कैबिनेट ने न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने का फैसला किया और मंगलवार 8 अगस्त को यह रिपोर्ट यूपी विधानसभा में पेश हुई।

स्वीडन, डेनमार्क के बाद अब बांग्लादेश में जलाई गई कुरान की 45 पुस्तकें

                                          बांग्लादेश में कुरान जलाने पर हुआ प्रदर्शन((फोटो साभार: Wion)
स्वीडन और डेनमार्क के बाद अब इस्लामिक देश बांग्लादेश में कुरान की दर्जनों प्रतियाँ जलाई गईं। नुरूर रहमान और महबूब आलम नामक दो व्यक्तियों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। इसकी जानकारी सामने आने के बाद करीब 10 हजार लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। साथ ही दोनों आरोपितों को मारने की कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुरान जलाने के आरोप में बांग्लादेश के पूर्वोत्तर शहर सिलहट से पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपितों की पहचान स्कूल के प्रिंसिपल नुरूर रहमान और उसके सहयोगी महबूब आलम नामक के रूप में हुई। आरोपितों का कहना है कि कुरान की प्रतियाँ बहुत पुरानी और कुछ में प्रिंटिंग मिस्टेक थी। इसलिए उन्होंने उनमें आग लगा दी। पुलिस ने दोनों के पास से कुरान की जली हुई 45 प्रतियाँ जब्त की हैं।

एएफपी ने पुलिस अधिकारी अजबहार अली शेख के हवाले से कहा है कि रविवार से लेकर सोमवार रात (6-7 अगस्त 2023) तक कुरान जलाने के विरोध में 10 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रबर की गोलियाँ और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

Wion ने ढाका ट्रिब्यून के हवाले से कहा है कि सिलहट मेट्रोपोलिटन पुलिस आयुक्त मोहम्मद एलियास शरीफ का कहना है कि कुरान जलाए जाने को लेकर स्कूल के शिक्षक, छात्र व क्षेत्र के अन्य लोग प्रिंसिपल व अन्य आरोपित से नाराज थे। इसलिए भीड़ ने दोनों को घेरकर पिटाई कर दी। हालाँकि बाद में पुलिस ने दोनों को बचा लिया। इस दौरान गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया। हमले में 14 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस और इस्लामवादियों के बीच हुई झड़प में कुछ अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। हालाँकि घायलों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई।

बीते कुछ महीनों में यूरोपीय देश स्वीडन और डेनमार्क में कई बार कुरान जलाई गई है। कई इस्लामिक देश इसका विरोध करते हुए दोनों देशों की सरकारों से रोक लगाने व कार्रवाई करने की माँग कर चुके हैं। हालाँकि स्वीडन और डेनमार्क दोनों ही देशों का कहना है कि वह देश के कानून के चलते कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, स्वीडन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर मजबूत कानून है। इसके तहत ही लोग वहाँ कुरान जला रहे हैं।

उत्तर प्रदेश : 4000 मदरसों को विदेशी फंडिंग, नेपाल और बांग्लादेश से लेकर अरब तक से आ रहे पैसे

उत्तर प्रदेश के 4000 मदरसों को विदेशी फंडिंग मिलने की बात सामने आई है। बता दें कि नवंबर 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मदरसों का सर्वेक्षण कराया था, जिसमें 8441 मदरसे अवैध मिले थे। अब परीक्षाएँ खत्म हो गई हैं, ऐसे में राज्य का अल्पसंख्यक विभाग कार्रवाई करने में जुट गया है। अधिकतर मदरसा संचालकों ने जकात को ही अपनी आय का प्रमुख स्रोत बताया था, यानी मुस्लिमों द्वारा दिया जाने वाला दान।

अब शुरुआती जाँच में सामने आया है कि नेपाल और बांग्लादेश के अलावा अरब के मुल्कों से भी फंडिंग आ रही है। गरीब मुस्लिमों को मुख्य धारा से जोड़ने की बात करते हुए अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि पुलिस के साथ मिल कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मौलवी बनने से उनका भला नहीं होगा, उन्हें NCERT की किताबें पढ़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिमों के बच्चे भी अधिकारी बनेंगे।

पिछले साल 10 सितंबर से लेकर 15 नवंबर तक मदरसों का सर्वे हुआ था, जिसे 30 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था। 2017 से मदरसों को मान्यता देनी भी बंद कर दी गई है, कारण है उनका मानकों पर खड़ा न उतरना। यूपी में फ़िलहाल 15,613 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से कइयों का कहना है कि कागज देने के बावजूद मान्यता न मिलने के कारण वो दीनी तालीम देने के लिए मदरसे चला रहे हैं। खासकर सीमावर्ती जिलों के मदरसों में फंडिंग में गड़बड़ी है।

ये जिले हैं – महाराजगंज, पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर। इन मदरसों के पास आय के स्रोत को लेकर कोई स्पष्ट कागजात नहीं हैं। मदरसों को कह दिया गया है कि भले ही वो उर्दू में पढ़ाएँ, लेकिन NCERT पढ़ाना ही पड़ेगा। अब ऐसे मदरसों पर क़ानूनी शिकंजा कसा जाएगा। सर्वे में मुख्यतः 12 सवाल पूछे गए थे। मदरसों को कम्प्यूटर से जोड़ने को लेकर भी योगी सरकार प्रयासरत है और जो मदरसे मानकों को पूरा कर रहे हैं उन्हें मान्यता देने में कोई परहेज भी नहीं है।


वीर सावरकर का अपमान लेकिन बांग्लादेशी मौलाना ‘भारत का स्वतंत्रता सेनानी’: AAP ने लगाया पोस्टर

                          बांग्लादेशी मौलाना को भारत का स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए AAP सरकार ने लगाए पोस्टर
भारतीय नेताओं को नेता बनने से पहले नेता की परिभाषा समझनी चाहिए। अपने ही देश की संस्कृति एवं इतिहास को धूमिल करने का नाम नेता नहीं होता। जनता भी इतनी मूर्ख है कि ऐसे लोगों को नेता समझ सिर पर बैठा लेते हैं। ये कुर्सी के भूखे नेता तुष्टिकरण करने में इतने अंधे हुए पड़े हैं कि भारतीय इतिहास को ही दरकिनार करने का कोई मौका नहीं चूक रहे, फिर कहते हैं की हमें देश की चिंता है। जो नेता अथवा पार्टी देश की धरोहर, संस्कृति को नहीं संभलकर रख सकती उसे नेता बनने का कोई अधिकार नहीं। अगर इन कुर्सी की भूखी पार्टियों ने अपने अपने अल्पसंख्यक 
प्रकोष्ठ से ही नूपुर शर्मा के बयान की पुष्टि के आगे किया होता, देश का माहौल ख़राब नहीं होता, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन? जबकि यूट्यूब पर नूपुर समर्थन की बाढ़ आयी हुई है, जो कुरान ही नहीं इस्लाम पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। 
वीर सावरकर का अपमान करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब बांग्लादेशी मौलाना महमूद हसन को भारत का स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए दिल्ली में पोस्टर्स लगा रही है। बता दें कि 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले जब राष्ट्र ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है, ऐसे में देश भर में भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर्स लगाए गए हैं। लेकिन, AAP को बांग्लादेश के मौलाना से प्यार है और वो उसे भारत का स्वतंत्रता सेनानी बताने को आतुर है।

दरअसल, AAP कई महीने पहले दिल्ली के जामिया नगर में आयोजित ‘फ्रीडम फाइटर फाउंटेन’ में चाहती थी कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक मौलाना महमूद हसन देवबंदी के पोस्टर भी लगाए जाएँ। लेकिन, उसने जो पोस्टर लगाया वो देवबंदी का नहीं, बल्कि मौलाना महमूद हसन का था, जो बांग्लादेशी है। वो भी उसकी तस्वीर महात्मा गाँधी, मौलाना अबुल कलम आज़ाद, भगत सिंह, सुखदेव और अशफ़ाक़ुल्लाह खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ लगाई गई।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि पिछले कई महीनों से ये बोर्ड वहीं पर पड़ा हुआ है और उसमें अब तक कोई सुधार नहीं किया गया है। इस सम्बन्ध में दिल्ली सरकार या AAP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। सैयद इरफ़ान हबीब नामक इतिहासकार ने भी इसकी पुष्टि की है कि वो तस्वीर महमूद हसन देवबंदी की नहीं है। सन् 1851 में उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे ज़ुल्फ़िकार अली देवबंदी के बेटे महमूद हसन के तस्वीर को AAP नहीं पहचानती।

ज़ुल्फ़िकार अली देवबंदी दारुल उलूम देवबंद के संस्थापक थे और बरेली कॉलेज में प्रोफेसर हुआ करते थे। उनके बेटे महमूद हसन देवबंदी को ‘खिलफर कमिटी’ ने ‘शेख अल-हिन्द’, अर्थात ‘भारत का नेता’ सम्मान से नवाजा था। मुहम्मद अली जौहर और हाकिम अजमल खान के साथ मिल कर उन्होंने जामिया की स्थापना की। वहीं जुलाई 1950 में बांग्लादेश के मयमनसिंह स्थित चरखारिचा में जन्मा महमूद हसन गुलशन सेन्ट्रल आज़ाद मस्जिद का का खब्तीब है।

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीर विनायक दामोदर सावरकर का अपमान किया था और खुद को भगत सिंह का अनुसरण करने वाला बताया था। उन्होंने खुद को ‘भगत सिंह की औलाद’ और भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘सावरकर की औलाद’ कहा था। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर लगे आरोपों पर बौखला कर उन्होंने ये बातें कही थीं। ये मामला आबकारी नीति में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।

इस्लाम की भेंट चढ़ गया 33% भारत, 75% वाले गाँव में चाहिए शरिया

डेमोग्राफी में बदलाव के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, ये हिन्दुओं को अब समझ में आ रहा है। ऐसा नहीं है कि इतिहास में इसका खामियाजा हमें नहीं भुगतना पड़ा, बल्कि उस इतिहास को हम भूल चुके हैं। पाकिस्तान के रूप में हमारा 8 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र और बांग्लादेश के रूप में डेढ़ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हमसे छिन गया। अफगानिस्तान, जो पहले भारतवर्ष का हिस्सा हुआ करता था, आज उस साढ़े 6 लाख वर्ग किलोमीटर में शरिया चलता है।

यानी, कुल मिला कर ये 16 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र हमारे हाथों से इस्लाम को फिसल गया। ये कोई छोटा क्षेत्र नहीं है, बल्कि भारत के वर्तमान क्षेत्रफल का लगभग आधा है। अर्थात, आधा भारत हमने खो दिया। वहाँ आज हिन्दू बेहाल हैं। पाकिस्तान में उनकी बहू-बेटियों का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण और निकाह करा दिया जाता है, अफगानिस्तान में गुरु ग्रन्थ साहिब सिर पर लाद कर भारत लाना पड़ता है और बांग्लादेश में एक झूठी अफवाह के कारण देश भर में दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले होते हैं।

ये होता है जनसांख्यिकी में बदलाव का असर। 1930 के दशक के कराची की तस्वीर देखिए। महाशिवरात्रि के मेले में भीड़ दिखेगी। आम हिन्दू वहाँ आते थे, समृद्ध हिन्दुओं की गाड़ियाँ पार्क हुई दिखेंगी। आज कराची में इस तरह के नज़ारे के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। क्यों? क्योंकि ये मुस्लिम बहुल इलाका है। नेपाल, भूटान, तिब्बत या म्यांमार भी प्राचीन भारत से अलग हुए, लेकिन वहाँ हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं होते। कारण कि वहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक नहीं हैं।

अफगानिस्तान में शरिया लागू है। यहाँ तक कि सिनेमा और गीत-संगीत पर भी प्रतिबंध है। भगवान बुद्ध की प्रतिमा को बम से उड़ा दिया गया। गुरुद्वारों पर हमले होते हैं। बांग्लादेश में क़ुरान के अपमान की झूठी अफवाह से कैसे देश भर के मंदिरों पर हमले और आगजनी हुई, हमने देखा। तीनों देशों में अल्पसंख्यकों, खासकर हिन्दुओं की जनसंख्या पिछले कुछ दशकों में कई गुना कम हो गई। जो बचे-खुचे हैं, डर कर रहते हैं। डर कर रहना पड़ता है।

लेकिन, ये तो इस्लामी कट्टरवाद की बस 33% सफलता है। बाकी की सफलता उन्हें तब प्राप्त होगी, जब उनका ‘गजवा-ए-हिंदुस्तान’ का सपना पूरा होगा। पूरे भारत पर इस्लाम का राज। इसकी एक साजिश हमें तभी देखने को मिली थी, जब देश के बँटवारे के समय बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से लेकर पाकिस्तान तक एक ‘मुस्लिम पट्टी’ की माँग की गई थी। अर्थात, भारत के बीचोंबीच मुस्लिम जनसंख्या बढ़ा कर देश को और खंडित करना।

ये साजिश अभी भी चल रही है। बांग्लादेश से पाकिस्तान तक एक ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं, यानी रास्ते में आने वाले सभी जिलों को मुस्लिम बहुसंख्यक बना दो। इससे न सिर्फ भारत के टुकड़े होंगे, बल्कि हिन्दू भी डर कर रहेंगे। पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप के इस मुस्लिम गलियारे के बारे में बताते हुए जानकारी दी थी कि कैसे इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने की साजिश चल रही है।

उन्होंने आँकड़े गिनाए थे कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन और पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव को उन्होंने इससे जोड़ कर देखा था। चिकेन्स नेक काटने की साजिश की तो शाहीन बाग़ में शरजील इमाम जैसों ने ही पोल खोल दी।

झारखंड की एक हालिया घटना को ही देख लीजिए। गढ़वा के एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पर इसीलिए इस्लामी नियम-कानून लागू करने का दबाव है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम 75% हो गए हैं। ये अलग बात है कि देश के 8 राज्यों में अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिन्दुओं को इसका फायदा नहीं मिलता और सुप्रीम कोर्ट भी इससे जुड़ी याचिका रद्द कर चुका है। मुस्लिम कहीं 100% हो जाएँ, फिर भी उन्हें सरकारी स्तर पर अल्पसंख्यकों वाली सारी सुविधाएँ मिलती रहेंगी।

गढ़वा में समुदाय के दबाव के चलते स्कूल की प्रार्थना बदल गई है। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी है। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया है। गाँव का मुखिया शरीफ अंसारी है। मुस्लिमों के हंगामे के कारण प्रिंसिपल को सलाह दी गई कि उनके कहे अनुसार चलाएँ। क्या आज तक हिन्दुओं ने किसी स्कूल में घुस कर हंगामा किया है कि वहाँ यज्ञ-हवन करवाएँ जाएँ।

ये इस तरह की अकेली घटना नहीं है। राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का सिर कलम किए जाने का मामला हो या महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की गर्दन में खंजर घोंप कर उनकी हत्या की घटना, इस्लामी कट्टरपंथ का प्रयास यही है कि हिन्दू डर कर रहें। कश्मीर में दशकों से आम नागरिक निशाना बनाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में एक छोटी सी घटना पर निकली मुस्लिम भीड़ रेलवे की अरबों की संपत्ति का झटकों में नुकसान कर देती है।

खासकर जहाँ भाजपा की सरकार नहीं है, वहाँ ऐसी घटनाएँ और ज्यादा होती हैं। अव्वल तो ये कि इन्हें तुरंत अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल जाता है। 50 से अधिक इस्लामी मुल्क हैं दुनिया में, ऊपर से कई देशों में वो बहुसंख्यक हैं और कइयों में प्रभावशाली स्थिति में हैं। फिर भी वो पीड़ित बन कर ही रहते हैं। मीडिया आतंकवाद और कट्टरपंथ के विरोध को ‘इस्लामोफोबिया’ कहता है। किसी हिन्दू का सिर जिहादी काट लें, फिर भी ‘TIME’ जैसे मैगजीन एक तरह से ये पूछते हैं कि ये हिन्दू बिना शोर मचाए क्यों नहीं मर रहे?

जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या ज्यादा नहीं है, वहाँ भी कई गली-मोहल्लों में ये एक साथ रहते हैं। ये इलाके फिर ‘संवेदनशील’ कहे जाते हैं। वहाँ मस्जिद होता है। सड़क सरकार की होती है, लेकिन वहाँ से हिन्दू त्योहारों के जुलूस नहीं गुजर सकते। डीजे बजाने पर पत्थरबाजी होती है। लेकिन, ये सड़क पर नमाज पढ़ सकते हैं। सार्वजनिक स्थान पर शांतिपूर्ण हनुमान चालीसा पाठ को ‘गुंडई’ बता दिया जाता है। यानी, इनकी मंशा है कि ये जहाँ भी रहें, मर्जी इनकी ही चले। शरिया का पालन मुस्लिम ही नहीं, सभी गैर-मुस्लिम भी करें।

उत्तराखंड में भी डेमोग्राफी बदलने की बात सामने आई है। पर्यटन और हिन्दू तीर्थाटन आधारित इस राज्य के उद्योग-धंधों में बाहरी मुस्लिमों का वर्चस्व हो गया है। पश्चिम बंगाल में तो लगभग एक तिहाई जनसंख्या मुस्लिमों की होने जा रही है। तभी भाजपा कार्यकर्ताओं के नरसंहार पर मुस्लिमों की बदौलत सत्ता में आई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुप रहती हैं। हैदराबाद की सभी विधानसभा और लोकसभा सीटें असदुद्दीन ओवैसी को जाती हैं। बिहार के सीमांचल में मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते हैं। ये होता है डेमोग्राफी में बदलाव का असर।

हम कश्मीर को कैसे भूल सकते हैं। लाखों की संख्या में जहाँ पंडित हुआ करते थे और डल झील के किनारे मंत्र जपते पंडित जिस राज्य की पहचान थे, वहाँ से उन्हें अपनी घर-संपत्ति छोड़ कर भागना पड़ा और अपने ही देश में शरणार्थी बन कर जीना पड़ रहा है। नरसंहार हुआ, बलात्कार हुआ, पलायन हुआ – बदल गई डेमोग्राफी। इसकी कोई गारंटी नहीं कि ये प्रक्रिया भारत के अन्य हिस्सों में नहीं दोहराई जाएगी। गुजरात में एक जैन कॉलोनी का इस्लामीकरण कर दिया गया, जहाँ अहिंसक जैन को कटते हुए पशुओं की चीखें सुननी पड़ती है, बहता खून देखना पड़ता है। यही तो है डेमोग्राफी चेन्ज की प्रक्रिया।

सेक्स स्कैंडल में पकड़ा गया बांग्लादेश उच्चायोग का प्रथम सचिव मुहम्मद सानियुल

                                                                                                           तस्वीर साभार: एशिया नेट न्यूज
बांग्लादेश उच्चायोग के अधिकारी को सेक्स स्कैंडल में शामिल पाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने उसे ढाका भेज दिया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जाँच की शुरुआत भी हो गई है। इस बात की पुष्टि बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त तौफीक हसन ने भी की।

भारत में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिश्नर तौफीक हसन ने आज तक के साथ बातचीत में कहा कि भारत में बांग्लादेश के पहले सचिव (राजनीतिक) मोहम्मद सानियुल कादर को कथित तौर पर एक सेक्स चैट में शामिल पाए जाने के बाद उन्हें ढाका वापस भेज दिया गया।

हसन ने दावा किया कि उन्हें इस घटना के बारे में सोशल मीडिया से 25 जनवरी 2022 को जानकारी मिली थी। उप उच्चायुक्त ने कहा कि वे इस तरह के मुद्दों पर जीरो टॉलरेंस रखते हैं। उन्होंने बताया कि मुहम्मद सानियुल कादर सेक्स चैट और सेक्स वीडियो में शामिल थे इसलिए घटना के संज्ञान में आते ही उन्हें ढाका में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। 26 जनवरी को उनकी ढाका वापसी हुई। इस मामले की सूचना होने के बाद बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने उनके विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, 25 जनवरी को अलीशा नाम की एक कथित युवती ने कोलकाता में बांग्लादेश उप-उच्चायोग के आधिकारिक फेसबुक पेज पर कुछ अश्लील चैट और न्यूड वीडियो पोस्ट किए। मगर, पेज एडमिन ने इन पोस्ट को मंजूरी नहीं दी और वह पेंडिंग में ही रहे। इसके बाद युवती ने चैट और न्यूड वीडियो उप-उच्चायोग के फेसबुक पेज के फेसबुक मैसेंजर पर भेज दिए। अब कहा जा रहा है कि ये अश्लील वीडियो और सारी चैट अधिकारी ने पहले महिला को भेजे थे और इसके बाद महिला ने शिकायत करने के लिहाज से उन्हें मैसेंजर पर भेजा। 26 जनवरी को जब यह चैट की बातें बांग्लादेश दूतावास पहुँची तो कोलकाता उप उच्चायोग के अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी बताने से मना कर दिया। प्रतिक्रिया के तौर पर सिर्फ ये जवाब आया कि अगर मामला सच साबित हुआ तो आरोपित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।

5000 लड़कियों को सेक्स रैकेट में धकेल चुका है बांग्लादेश का मोमिन, 100 ‘गर्लफ्रेंड्स’ भी शामिल: 25 साल से भारत में, 10 शादियाँ

                     बांग्लादेश से लड़कियों भारत लाकर सेक्स रैकेट चलाने वाला गिरफ्तार (साभार: न्यूज 18)
मध्य प्रदेश स्थित इंदौर की पुलिस ने बहुत बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने मानव तस्करी और देह व्यापार में शामिल मोमिन नाम के एक बांग्लादेशी को उसके साथी बबलू के साथ गिरफ्तार किया है। उसने पुलिस के सामने 5000 से अधिक लड़कियों की खरीद-फरोख्त और उन्हें सेक्स रैकेट में धकेलने का खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘विजय कुमार’ के छद्म नाम से रह रहा मोमिन करीब 25 साल पहले बांग्लादेश से भारत आया था, भारत में घुसने के बाद वो मुंबई के नाला सोपारा इलाके के तंग इलाके में रहने लगा। फिलहाल, पूछताछ में उसने कबूल किया है कि मुंबई और सूरत जैसी जगहों पर दलालों की संख्या काफी ज्यादा थी। इसी कारण उसने इंदौर को अपने धंधे का नया ठिकाना बनाने की कोशिश में लगा हुआ था, ताकि एक सप्लाई चेन बनाई जा सके।

बांग्लादेशी दलाल की बीवी अपने देश में समाज कल्याण के नाम पर एक एनजीओ चलाती है, जिसकी आड़ में वो बांग्लादेश से भारत में लड़कियों की सप्लाई करती थी। वो गरीब घर की लड़कियों को नौकरी दिलवाने के बहाने भारत भेजती थी, लेकिन यहाँ पहुँचते ही उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था।

10 शादियाँ और 100 गर्लफ्रेंड 

इंदौर के आईजी हरिनारायण मिश्रा चारी का कहना कि मुख्य आरोपित मोमिन ने 10 शादियाँ की हैं और उसकी 100 गर्लफ्रेंड हैं। उसने इंदौर, धार, झाबुआ, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर समेत देश के कई शहरों में सप्लाई चेन बना ली थी। देह व्यापार की आड़ में वो नशीले पदार्थों की तस्करी भी कर रहा था।
ऐसे पकड़ा गया दलाल 
इंदौर की विजयनगर थाना पुलिस के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर 2020 में पुलिस में शिकायत कर बताया था कि वो बांग्लादेश की रहने वाली है और उसे शबाना औऱ बख्तियार ने अवैध तरीके से सीमा पार करवाकर भारत में विजय के हवाले किया था। तभी से वह पुलिस की रडार पर था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने टीम बनाई थी। वो करीब एक सप्ताह पहले मुंबई में था, लेकिन जैसे ही उसे पुलिस की कार्रवाई का पता चला तो वो इंदौर आ गया। हालाँकि, यहाँ विजयनगर पुलिस ने उसे धर दबोचा।

हिंदुओं का नरसंहार बर्दास्त नहीं, यूएन भेजे पीस कीपिंग फोर्स: डॉ सुरेन्द्र जैन

 

नई दिल्ली। अक्टूबर 
19, 2021। विश्व हिन्दू परिषद(विहिप) ने कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के अनवरत नरसंहार को रोकने के लिए अब संयुक्त राष्ट्र संघ को पीस कीपिंग फोर्स भेजनी चाहिए। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि हिंदुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों की तुलना केवल नाजियों की बर्बरता से की ही जा सकती है। हिंदुओं के विरुद्ध हो रहे पाशविक अत्याचारों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब संयुक्त राष्ट्र संघ को इस मामले में पहल करते हुए वहाँ बुरी तरह पीड़ित अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा हेतु अपनी पीस कीपिंग फोर्स अबिलंब बंगलादेश भेजनी चाहिए। विहिप हिन्दुओं पर हो रहे नृशंस अत्याचारों की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हुए शेख हसीना को आगाह करती है कि वे अपने राज धर्म का पालन करें, हिंदू समाज की सुरक्षा सुनिश्चित कर दोषियों को कठोरतम सजा दिलवाएं।

विहिप के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन 20 को, पुतला दहन कर देंगे ज्ञापन 

  उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ एवं सभी मानवाधिकार संगठन पंगु बने हुए हैं। इस्लामिक कट्टरपंथी बांग्लादेश को हिंदू शून्य बनाने पर तुले हैं। बांग्लादेश सरकार मूकदर्शक बनी है। वहां की प्रधानमंत्री जिहादियों पर नियंत्रण करने की जगह भारत सरकार को नसीहत दे रही हैं कि वे भारत में ऐसी कोई घटना ना होने दें जिससे कि वहां का मुसलमान भड़क जाए। शेख हसीना के इस बयान के बाद मुस्लिम कट्टरपंथी और भड़क गए तथा हिंदुओं पर हो रहे पाशविक अत्याचारों में  बढ़ोतरी हो गई। अत्याचारों का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा।

      विहिप के संयुक्त महा सचिव ने कहा कि बांग्लादेश घोषित रूप से इस्लामिक देश है। इसीलिए अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में प्रारंभ से ही हिंदुओं पर जघन्य अत्याचार होते रहे हैं लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। केवल पिछले 10 दिनों में 150 से अधिक मां दुर्गा के पूजा मंडप नष्ट कर दिए। 362 से अधिक मूर्तियां ध्वस्त कर दी। हजारों हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमला करके लूटा गया है। 1000 से अधिक हिंदू घायल हो गए हैं तथा अभी तक 10 हिंदुओं के मारे जाने का भी समाचार आ चुका है। कई हिंदू महिलाओं के साथ बर्बर रूप से सामूहिक बलात्कार किए गए हैं। चांदपुर के हाजी गंज में तो एक महिला, उसकी बेटी और उसकी बहन की बेटी के साथ पाशविक रूप से सामूहिक बलात्कार किए गए। 10 साल की एक मासूम बच्ची ने तो वहीं पर दम तोड़ दिया। इस्कॉन के तीन मंदिरोंरामकृष्ण मिशन के आश्रमों, राम ठाकुर आश्रम जैसे 50 से अधिक मंदिरों को नष्ट कर दिया गया है। इस्कॉन के दो संतो तथा चौमोहिनी मंदिर के तीन पुजारियों की बर्बर हत्या कर दी गई है। कल ही इस्कॉन मंदिर के तालाब में एक और पुजारी का शव देखा गया है। कई जिलों में इंटरनेट की पाबंदी के कारण अधूरे समाचार मिले हैं। वास्तविकता इससे भी कहीं भयानक है।

उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर इस तरह के अत्याचार कट्टर इस्लामिक चरित्र का एक अंग बन गए हैं जिसका साक्ष्य वर्तमान बांग्लादेश में हिंदुओं की निरंतर गिरती हुई जनसंख्या है। 1951 में पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं की जनसंख्या 22% थी, बांग्लादेश के निर्माण के समय 1971 में 18% थी जो अब घटकर मात्र 7% रह गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि बांग्लादेश के निर्माण के बाद भी हिंदूओं पर अत्याचारों का सिलसिला रुका नहीं अपितु और तेजी से बढ़ा है। संपूर्ण विश्व जानता है कि पाकिस्तानी सेना के द्वारा सभी बंगालियों पर इसी प्रकार के अमानवीय अत्याचार किए जाते थे जिन से मुक्ति दिलाने के लिए ही भारत ने मुक्ति वाहिनी का गठन किया था और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। लेकिन पाकिस्तानी अत्याचारों से मुक्ति पाते ही वहां के मुस्लिम समाज का असली चरित्र सामने आ गया और वहां की सरकारें इस बर्बर चरित्र की संरक्षक बन गई।

इस्लामिक देश घोषित करने के बाद वहां वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट बनाया गया जिसके अंतर्गत हिंदुओं की संपत्ति पर वहां की सरकार कभी भी कब्जा कर सकती है। विहिप का यह स्पष्ट मत है कि बंगलादेश के इस्लामिक चरित्र के कारण ही वहाँ की सरकारें हिंदूओं पर अत्याचारों की मूक दर्शक ही नहीं प्रेरक भी बनती रही हैं। बंगलादेश को इस्लामिक देश की जगह धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किए बिना वे कट्टरपंथियों के चंगुल से बाहर नहीं निकल सकते।

      डॉ जैन ने कहा कि हिंदू समाज पर हो रहे इन अमानवीय अत्याचारों को हिन्दू समाज और बर्दास्त नहीं करेगा। इसलिए आज 19 अक्टूबर को कोलकाता में विशाल आक्रोश प्रदर्शन किया जा रहा है। दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने 20 अक्टूबर को एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे देश में जिला स्थानों पर आक्रोश प्रदर्शन किए जाएंगे।

 विहिप बांग्लादेश सरकार को आगाह करती है कि यदि वे विकासशील देशों की पंक्ति में खड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें अपनी कट्टरपंथी छवि से मुक्त होना पड़ेगा। कट्टरपंथियों पर उसी तरह की कार्यवाही करनी पड़ेगी जो 1971 में की गई थी। आवश्यकता हो तो उन्हें भारत सरकार की सहायता भी लेनी चाहिए।

विहिप की संयुक्त राष्ट्र संघ से भी अपील है कि वह हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाये। इन स्थानों पर पीस कीपिंग फोर्स  भेज कर अपने अस्तित्व के औचित्य को सिद्ध करें। विहिप सरकार भारत सरकार से अपील करती है कि वे अपनी पूरी ताकत से बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाएं जिससे वह हिंदू समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को पूरा कर सके।

भवदीय

विनोद बंसलराष्ट्रीय प्रवक्ता

विश्व हिंदू परिषद

‘काबा में पैगंबर मुहम्मद ने तोड़ डाली थी 360 मूर्तियाँ, उनके ही रास्ते पर चल रहे उन्हें मानने वाले’: बांग्लादेश के हालात पर लेखिका तस्लीमा नसरीन

                                  बांग्लादेश के फेनी में हिन्दू मंदिरों पर हमला करते इस्लामी चरमपंथी
बांग्लादेश में हिन्दुओं, उनके मंदिरों और प्रतिष्ठानों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले का दौर जारी है। पहले दुर्गा पूजा के दौरान कई पंडालों को तबाह कर दिया गया, उसके बाद इस्कॉन के परिसर में घुस कर भक्तों के साथ मारपीट की गई। अब तक आधा दर्जन से अधिक हिन्दू मारे जा चुके हैं। इसी बीच भारत में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस घटना की तुलना पैगम्बर मुहम्मद के समयकाल से की है।
अब देखना यह कि पैगम्बर साहब की आलोचना पर कट्टरपंथी उनके विरुद्ध क्या कदम उठाते हैं? कितने मुस्लिम देश तस्लीमा नसरीन के विरुद्ध या पक्ष में खड़े होते हैं? 

तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पैगम्बर मुहम्मद ने काबा में पेगन समुदाय की 360 मूर्तियों को खंडित कर दिया था। उनका अनुसरण करने वाले उनके ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं।” सुधारवादी लेखिका ने कहा कि बांग्लादेश में जिहाद रोकने का उपाय है कि सभी मदरसों, मस्जिदों, वाज़ महफ़िलों और इज्तेमा को पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में दो ही तरह के मुस्लिम होते हैं – जिहादी और प्रो जिहादी।

‘खान एकेडमी’ पर प्रकाशित इस्लाम के इतिहास के अनुसार, पैगम्बर मोहम्मद को सन् 620 में मक्का से बाहर निकाल दिया गया था और उन्होंने यथ्रीब में शरण ली थी। उसे ही आज मदीना के नाम से जानते हैं। 629-30 ईश्वी में उनकी वापसी के बाद ये जगह इस्लाम की एक पवित्र स्थल बन गई। इस्लामी युग से पहले काबा में काला पत्थर और पेगन समुदाय की कई मूर्तियाँ थीं। इसमें लिखा है कि पैगम्बर मुहम्मद ने काबा को इन मूर्तियों से ‘साफ़’ कर दिया।

इसमें ये भी बताया गया है कि मूर्तियों से काबा को ‘साफ’ कर के पैगम्बर मुहम्मद ने ‘इब्राहिम के एकेश्वरवाद’ की स्थापना की। माना जाता है कि एंजेल गेब्रियल ने उस काले पत्थर को इब्राहिम को दिया था और इसीलिए इस्लाम में उसका विशेष महत्व है। पैगम्बर मुहम्मद अपने निधन के समय सन् 632 में अंतिम बार मक्का आए थे। आज भी दुनिया भर के मुस्लिम हज के लिए मक्का-मदीना की यात्रा करते हैं।

‘द मॉर्गन’ पर उस तस्वीर का विवरण दिया गया है, जिसमें पैगम्बर मुहम्मद के दादा काबा के उस पत्थर के सामने सिर झुका रहे हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे पैगम्बर मुहम्मद से पहले काबा में 360 मूर्तियाँ हुआ करती थीं, लेकिन पैगम्बर मुहम्मद ने उन सभी को तोड़े जाने का आदेश दिया। तस्लीमा नसरीन ने इसी घटना को याद करते हुए आज बांग्लादेश में खंडित की जा रही प्रतिमाओं से जोड़ा है।

अवलोकन करें:-

‘दक्षिण एशिया में एक बड़ा इस्लामी एजेंडा’: कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की हिंदुओं की टारगेट किलि

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘दक्षिण एशिया में एक बड़ा इस्लामी एजेंडा’: कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की हिंदुओं की टारगेट किलि

बांग्लादेश के नोआखाली इलाके में जुमे की नमाज के बाद 200 कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के इस्कॉन मंदिर पर हमला कर इस्कॉन श्रद्धालु पार्थ दास की बर्बरता से हत्या कर दी। इस्कॉन ने अपने बयान में बताया कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब में तैरता मिला। वहीं इस्‍कॉन से जुड़े राधारमण दास ने ट्वीट कर बताया कि पार्थ को बुरी तरह से पीटा गया था कि जब उनका शव मिला तो शरीर के अंदर के हिस्से गायब थे।

5 साल में 75 लड़कियों से फर्जी शादी, 200 लड़कियों को जिस्मफरोशी में धकेलने वाला मुनीरुल गिरफ्तार

                                     SIT ने लड़कियों को देह-व्यापार में धकेलने वाले मुनीरुल को दबोचा (फोटो साभार: NBT)
इंदौर SIT की गिरफ्त में आए बांग्लादेशी लड़कियों के तस्कर मुनीर उर्फ मुनीरुल ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वह 200 से ज्यादा बांग्लादेशी लड़कियों को भारत लाकर जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल चुका है। 5 साल से इस धंधे में है। उसे सितम्बर 30, 2021 को सूरत से पकड़ा गया है। वह हर महीने 55 से अधिक लड़कियों को लाता था।

इंदौर पुलिस ने 11 महीने पहले लसूड़िया और विजय नगर इलाकों में ऑपरेशन चलाकर 15 लड़कियों को पकड़ा था। मामले में सागर उर्फ सैंडो, आफरीन आमरीन व अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया था। मुनीर भाग निकला था। उसे गुरुवार को सूरत से पकड़कर इंदौर लाया गया है। इंदौर पुलिस ने 11 महीने पहले लसूड़िया और विजय नगर इलाकों में ऑपरेशन चलाकर 21 बांग्लादेशी लड़कियों को रेस्क्यू कर छुड़ाया था। जिसमे 11 बांग्लादेशी लड़कियाँ और बाकि अन्य लड़किया भी शामिल थी।

मुनीर पर 10 हजार रुपए का इनाम था। वह बांग्लादेश के जसोर का है। 75 लड़कियों से उसने फर्जी शादी की और फिर इंडिया में लाकर बेचा। उसके पीछे बड़ा नेटवर्क है। मुनीर से पता चला है कि सेक्स रैकेट से जुड़ा गिरोह लड़कियों की पहले कोलकाता, फिर मुंबई में ट्रेनिंग कराता है। इसके बाद डिमांड पर लड़कियों को देश के दूसरे शहरों में सप्लाई किया जाता है। लड़कियों को बांग्लादेश और भारत के पोरस बॉर्डर पर नाले के रास्ते लाया जाता है। बॉर्डर के पास के छोटे गाँव में एजेंट्स लड़कियों को मुर्शिदाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लाकर ही भारत में एंट्री करवाते हैं। फिलहाल पुलिस मुनीर से पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश के एजेंट गरीब परिवार की लड़कियों को काम दिलाने के बहाने बांग्लादेश से लड़कियों को चोरी-छिपे अवैध तरीके से बॉर्डर पार कराकर लाया जाता है। लड़कियों को मुंबई से रवाना करने के पहले उनके दस्तावेज रखवा लिए जाते थे। लड़कियाँ बांग्लादेश की ही हैं, इसकी पहचान एजेंट आँखों के जरिए करते थे।

हाल ही में एसआईटी टीम ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हनीट्रैप में नौकरशाहों और राजनेताओं को फँसाने वाली कुछ महिलाओं को गिरफ्तार किया था। साथ ही उनके पास से लैपटॉप और कई मोबाइल भी बरामद किया था। जिसमें उन्होंने हनीट्रैप में फँसाए गए पीड़ितों को समझौता करने की स्थिति में चित्रित करने वाले कई वीडियो क्लिप बरामद किया था। उसके बाद से एसआईटी टीम राज्य में जगह-जगह पर छापेमारी कर इसमें लिप्त आरोपियों कि धर-पकड़ कर रही है।

हिन्दुओं का चोला पहनो, हिन्दू लड़कियों को फँसाओ और शुरू करो माइंडवॉश

                                                                                                                     जेएमबी मॉड्यूल सक्रिय
नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हिन्दू विरोधी पार्टियों द्वारा बनाये शाहीन बागों में लगे नारे हिन्दुत्व विरोधी नारों की गूंज का असली मकसद सामने आ रहा है। जैसाकि संभावनाएं व्यक्त की जा रही थीं कि शाहीन बागों में जमावड़ा इन्ही अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों का है, सच हो रही हैं। किसान आंदोलन के पीछे भी यही मकसद है, लेकिन जयचंद जनता को भ्रमित कर रहे हैं। समय आ गया है कि देशप्रेमी जनमानस चाहे वह किसी भी धर्म, मजहब, जाति अथवा समुदाय से हों, इनका विरोध करना चाहिए, क्योकि जो देश का नहीं हुआ, जनता का क्या होगा?
पिछले वर्ष ढाका में आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश की सदस्य आएशा जन्नत उर्फ प्रज्ञा देबनाथ के गिरफ्तार होने के बाद पश्चिम बंगाल में चल रहे धर्मांतरण और माइंडवॉश के घिनौने खेल का पर्दाफाश हुआ था। आएशा एक हिंदू लड़की थी जिसका 2009 में धर्मांतरण हुआ और वह करीब दस साल बाद आतंकी संगठन की सक्रिय सदस्य होने के कारण ढाका में पकड़ी। इसी क्रम में इसी संगठन के तीन सदस्य हाल में फिर बंगाल से पकड़े गए और जब कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने इनसे पूछताछ की तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक जानकारी निकल कर सामने आई और ये भी पता चला कि आखिर प्रज्ञा जैसी लड़कियाँ आएशा में कैसे तब्दील हो रही हैं।

दरअसल, पिछले माह कोलकाता पुलिस की एसटीएफ ने नजीउर रहमान पावेल, मेकैल खान और रबीउल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। ये तीनों जेएमबी के संचालक थे और मौका पाकर भारत में घुस आए थे। इसलिए इनकी गिरफ्तारी बड़ी कामयाबी मानी गई। मगर जब पूछताछ हुई तो तस्वीर कुछ और ही थी। हकीकत में आतंकी संगठन से जुड़े यह तीनों सदस्य न केवल अपनी असल पहचान छिपाकर बंगाल के रिहायशी इलाके हरिदेवपुर में अपार्टमेंट लेकर रह रहे थे बल्कि हिंदू लड़कियों को निशाना बना रहे थे ताकि इन्हें एक सेफ पहचान मिल सके। इन्होंने शक की नजरों से बचने के लिए खुद को व्यापारी, फल विक्रेता और मच्छरदानी बेचने वाले के तौर पर पेश किया हुआ था। इनमें नजीउर ने अपना नाम जयराम बेपारी रखा था और फिर मैकेल के साथ दो हिंदू महिलाओं को दोस्ती के जाल में फँसाकर उनसे शादी की योजना बना रहा था। 

हिन्दू चोला ओढ़ आतंकी चला रहे मॉडूयल  

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कोलकाता स्पेशल टास्क फोर्स के अधिकारी कहते हैं, “आतंकी समूहों के लिए धर्म अब वर्जित नहीं है, बल्कि वे इसे अपनी पहचान छिपाने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। धर्म बदलना अब इन आकाओं के लिए कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है, बल्कि वे इंटेलिजेंस को चकमा देने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं।”

अधिकारी बताते हैं कि इन आतंकियों के लिए शादी महत्वपूर्ण और प्रभावी साधन है। इससे इन्हें भारतीय पहचान मिलने में मदद तो मिलती ही है, साथ ही इन्हें एक स्थानीय पहचान भी प्राप्त होती है जो इनके लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। इससे स्थानीय लोग और स्वाभाविक रूप से पुलिस उनके अस्तित्व से अनजान रहती है।

बेरोजगारी का उठाते लाभ 

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी में बढ़ी बेरोजगारी का आतंकी संगठनों ने खूब फायदा उठाया। न केवल जेएमबी, अंसारुल्लाह गुट, बल्कि आईएस जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी गुट ने भी युवाओं को निशाना बनाते हुए अपना जाल फेंका। पुलिस की टीम ने स्वयं उन तीनों आतंकियों से पूछताछ के बाद बताया कि ये लोग कभी आमने-सामने मिलकर तो कभी ऑनलाइन बेरोजगार लड़के-लड़कियों को निशाना बना रहे थे।

बंगाल पुलिस में कम हैं स्लीपर सेल से निपटने वाले कांस्टेबल 

पूछताछ के बाद निकलकर आई जानकारी ने जाँच अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मेधावी बेरोजगारों का ब्रेनवॉश केवल जमीनी स्तर पर ही पुलिस द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए कॉन्सटेबल स्तर के कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। मगर, दुर्भाग्य से बंगाल में ऐसा नहीं हुआ। बंगाल पुलिस में उन जवानों की कमी है जो स्लीपर सेल के खतरे से निपटने के लिए प्रशिक्षित हैं।

कोलकाता के छोटे गांव की प्रज्ञा कैसे बनी आएशा जन्नत 

जेएमबी की आएशा भी कोलकाता के धनियाकाली पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गाँव पश्चिम केशाबपुर की रहने वाली थी। पढ़ाई के दौरान उसकी सबसे अच्छी दोस्त मुस्लिम थी। उसके प्रभाव में बेहद खुफ़िया तरीके से प्रज्ञा (आएशा) का धर्म परिवर्तन कराया गया।

साल 2009 के दौरान धोखे से उसे इस्लाम धर्म कबूल कराया गया और फिर उसका नाम बदलकर रखा गया आएशा जन्नत मोहोना। इसके बाद उसमें मजहबी कट्टरता भरकर जेएमबी की सदस्यता दिलाई गई और काम सौंपा गया कि वह भी हिंदू लड़कियों को इस्लाम कबूल करने का लालच दे।

आएशा ने ये सब किया भी। उसने कट्टर मौलवी सलफी से हिंदू लड़कियों का परिचय करवाया और फिर उनके धर्मांतरण पर काम किया। आएशा को संगठन से फंड इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी भी मिली थी। लेकिन उसका मुख्य काम यही था कि सबसे पहले वह ऐसे युवाओं की पहचान करे जिन्हें आसानी से कट्टरपंथी बनाया जा सकता है। इसके बाद उन्हें जेएमबी की सदस्यता दिलवाना था।

साल 2020 में ही बंगाल के मुर्शिदाबाद में पुलिस ने इस्लामिक आतंकी और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के टॉप कमांडर अब्दुल करीम उर्फ बोरो अब्दुल करीम को गिरफ्तार किया था। वह लंबे समय से देश भर में पहचान छिपाकर घूम रहा था। वह बोधगया विस्फोट में शामिल धुलियन मॉड्यूल का भी मेन लीडर था। उसका काम भी युवाओं को भ्रमित करके संगठन से जोड़ना था।

बेंगलुरु से गिरफ्तार हुआ अबू इब्राहिम

ऐसे ही साल 2020 में बेंगलुरु से भी एक गिरफ्तारी हुई। ये गिरफ्तारी ISIS संचालकों में से एक की थी। इसकी पहचान अबू इब्राहिम के तौर पर हुई। जो कभी अर्थशास्त्र का मेधावी छात्र था लेकिन बाद में सुजीत चंद्र देबनाथ बनकर बेंगलुरु में एक राजमिस्त्री के सहायक के तौर पर काम करके अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा।

बांग्लादेश-पाकिस्तान को जोड़ने के लिए उत्तर भारत में 'मुस्लिम पट्टी' बनाने की साजिश?

'दैनिक जागरण' में प्रकाशित बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप के लेख से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बंटवारे के समय तबादला-आबादी क्यों नहीं हुई? दूसरे, महात्मा गाँधी की हत्या क्यों की गयी थी? लेकिन कुर्सी के भूखे छद्दम देशप्रेमी नेताओं ने नाथूराम गोडसे को अपराधी क्यों माना? जिस कारण गाँधी की हत्या हुई, उस के संकेत हरेंद्र के लेख से प्रमाणित हो रहे हैं। क्या देशप्रेम का दम भरने वाले नेता देश के एक और बंटवारे के विरुद्ध एकजुट होंगे या वोट बैंक की गन्दी सियासत खेलेंगे? तीसरे, समय आ गया है कि हर देशप्रेमी चाहे वह किसी भी जाति, धर्म अथवा संप्रदाय से हो, नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को स्वयं पढ़े और घर-घर बंटवाए, ताकि वर्तमान पीढ़ी को भी पता लगे, गाँधी को क्यों मारा गया था? क्योकि जिस काम को 'गंगा-जमुनी तहजीब' के नाम पर 'मुस्लिम पट्टी' बनाकर देश को विभाजित करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, यही मांग मोहम्मद अली जिन्ना की थी। 
उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की साजिश चल रही है। इस पट्टी में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों के इलाके होंगे जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा होगा। यह दावा ‘दैनिक जागरण' में प्रकाशित एक लेख में किया गया है। इसे लिखा है बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने। लेख में उन्होंने कहा है कि जहाँ देश में मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ती चली गई, वहीं बाकी मतावलंबियों की आबादी कम हुई है।

इसका कारण बताते हुए कहा कि अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि जहाँ अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे, मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बड़ा दावा किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने के लिए भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की कट्टरपंथियों की साजिश है।

‘मुस्लिम गलियारा’ बना पाकिस्तान-बांग्लादेश को जोड़ने की साजिश: पूर्व MLC

‘दैनिक जागरण’ में लिखे इस लेख में उन्होंने बताया है कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शासन के संरक्षण और भाषाई अनुकूलता के कारण वो खुले रूप से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी-बिहार में इसकी अनदेखी आश्चर्यजनक है। उन्होंने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबर याद दिलाते हुए लिखा है कि 2011 की जनगणना में जहाँ हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19% तथा मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से तीन गुना यानी 29.81% थी।

उन्होंने आँकड़ा पेश किया कि 2001-11 में पश्चिम बंगाल से 35 लाख हिन्दुओं के पलायन की बात सामने आई है। उन्होंने पूर्णिया के बायसी विधानसभा में एक दलित बस्ती को जलाए जाने की घटना को भी याद किया और कहा कि वहाँ से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की है। बकौल हरेंद्र प्रताप, ओवैसी हैदराबाद को कश्मीर बनाना चाहते हैं और वहाँ हिन्दू जनसंख्या पहले से घटी है।

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र प्रताप ने अपने लेख में नेपाल सीमा पर मरदसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण गिरोह की सक्रियता को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। 

‘चिकेन्स नेक’ को काटने की बात

दिल्ली के शाहीन बाग़ में कई महीनों तक हिन्दू विरोधी प्रदर्शन चला था। इस विरोध प्रदर्शन के सरगना शरजील इमाम ने असम को हिंदुस्तान से अलग करने की बात की थी। उसने कहा था कि अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। साथ ही धमकी दी थी कि अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं।

इसके बाद उसने बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए कहा था कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास संगठित रूप से हों तो हम उत्तर-पूर्व और शेष भारत को हमेशा के लिए काट सकते हैं। उसने कहा था, “परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

उसने कहा था, असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है।

इस चिकन नेक के माध्यम से ही उत्तर-पूर्वी भारत शेष भारत से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किलोमीटर है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है। कई इलाकों से ऐसी ख़बरें आती हैं जहाँ इस तरह के मुस्लिम बहुल इलाकों से हिन्दुओं के पर्व-त्योहारों के दौरान उन पर पत्थरबाजी होती है। उन्हें उधर से गुजरने नहीं दिया जाता।

घुसपैठ और इस्लामी कट्टरता की कई घटनाएँ

इसी साल जून में उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध रूप से भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के मामले में 4 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया था। हाफिज शफीक नामक व्यक्ति मेरठ में एक गिरोह चला रहा था, जो भारत में लाए गए रोहिंग्याओं के आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि बनवाते थे। इसी तरह हरियाणा का मेवात इस्लामी कट्टरता के लिए कुख्यात हो चुका है, जहाँ से आए दिन कई घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

मीडिया रिपोर्ट में ये भी सामने आया था कि हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं। यह इलाका पशुओं की तस्करी सहित विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों के लिए भी पहचान रखता है। रिपोर्ट्स का कहना था कि 600-700 रोहिंग्या परिवार राज्य में बसे हैं। करीब 2 हजार रोहिंग्या के अकेले मेवात जिले में होने की बात कही जा रही है। VHP तो इसे वास्तविकता से कम बताती है।

दरभंगा में बम ब्लास्ट, महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर हमला और अलकायदा के नेटवर्क का खुलासा भी पिछले कुछ दिनों में ही हुआ है। केरल और पश्चिम बंगाल से आतंकियों के मॉड्यूल का खुलासा पहले ही हो चुका है। धर्मांतरण गिरोह के मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर काजी धराए, जिन्होंने 1000 मूक-बधिर हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन कराया था। कैराना, मुर्शिदाबाद और एर्नाकुलम जैसे जगह आतंकियों के हॉटस्पॉट बने।

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले रोहिंग्या मुसलमानों को राज्य में बसाने को लेकर एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश भी हुआ है। इनके फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार करवाए जा रहे हैं ताकि वे वोट डाल सकें। एजेंसियों को पता चला है कि दिल्ली के खजूरी खास इलाके के एक वेंडर ने रोहिंग्याओं को उत्तर प्रदेश में बसाया था। रोहिंग्या मुस्लिम फर्जी राशन कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड के साथ प्रदेश के विभिन्न स्थानों में बसने लगे हैं। आर्थिक मदद भी मिल रही।