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5 साल में 75 लड़कियों से फर्जी शादी, 200 लड़कियों को जिस्मफरोशी में धकेलने वाला मुनीरुल गिरफ्तार

                                     SIT ने लड़कियों को देह-व्यापार में धकेलने वाले मुनीरुल को दबोचा (फोटो साभार: NBT)
इंदौर SIT की गिरफ्त में आए बांग्लादेशी लड़कियों के तस्कर मुनीर उर्फ मुनीरुल ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वह 200 से ज्यादा बांग्लादेशी लड़कियों को भारत लाकर जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल चुका है। 5 साल से इस धंधे में है। उसे सितम्बर 30, 2021 को सूरत से पकड़ा गया है। वह हर महीने 55 से अधिक लड़कियों को लाता था।

इंदौर पुलिस ने 11 महीने पहले लसूड़िया और विजय नगर इलाकों में ऑपरेशन चलाकर 15 लड़कियों को पकड़ा था। मामले में सागर उर्फ सैंडो, आफरीन आमरीन व अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया था। मुनीर भाग निकला था। उसे गुरुवार को सूरत से पकड़कर इंदौर लाया गया है। इंदौर पुलिस ने 11 महीने पहले लसूड़िया और विजय नगर इलाकों में ऑपरेशन चलाकर 21 बांग्लादेशी लड़कियों को रेस्क्यू कर छुड़ाया था। जिसमे 11 बांग्लादेशी लड़कियाँ और बाकि अन्य लड़किया भी शामिल थी।

मुनीर पर 10 हजार रुपए का इनाम था। वह बांग्लादेश के जसोर का है। 75 लड़कियों से उसने फर्जी शादी की और फिर इंडिया में लाकर बेचा। उसके पीछे बड़ा नेटवर्क है। मुनीर से पता चला है कि सेक्स रैकेट से जुड़ा गिरोह लड़कियों की पहले कोलकाता, फिर मुंबई में ट्रेनिंग कराता है। इसके बाद डिमांड पर लड़कियों को देश के दूसरे शहरों में सप्लाई किया जाता है। लड़कियों को बांग्लादेश और भारत के पोरस बॉर्डर पर नाले के रास्ते लाया जाता है। बॉर्डर के पास के छोटे गाँव में एजेंट्स लड़कियों को मुर्शिदाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लाकर ही भारत में एंट्री करवाते हैं। फिलहाल पुलिस मुनीर से पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश के एजेंट गरीब परिवार की लड़कियों को काम दिलाने के बहाने बांग्लादेश से लड़कियों को चोरी-छिपे अवैध तरीके से बॉर्डर पार कराकर लाया जाता है। लड़कियों को मुंबई से रवाना करने के पहले उनके दस्तावेज रखवा लिए जाते थे। लड़कियाँ बांग्लादेश की ही हैं, इसकी पहचान एजेंट आँखों के जरिए करते थे।

हाल ही में एसआईटी टीम ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हनीट्रैप में नौकरशाहों और राजनेताओं को फँसाने वाली कुछ महिलाओं को गिरफ्तार किया था। साथ ही उनके पास से लैपटॉप और कई मोबाइल भी बरामद किया था। जिसमें उन्होंने हनीट्रैप में फँसाए गए पीड़ितों को समझौता करने की स्थिति में चित्रित करने वाले कई वीडियो क्लिप बरामद किया था। उसके बाद से एसआईटी टीम राज्य में जगह-जगह पर छापेमारी कर इसमें लिप्त आरोपियों कि धर-पकड़ कर रही है।

उत्तर प्रदेश : आज़मगढ़ के मदरसों में भर्ती घोटाला, SIT करेगी जाँच

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में सारे नियम-कानूनों को ताक पर रख कर नियुक्तियों का खेल चल रहा था। इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा मदरसा के संचालक भी शामिल थे। तीसरे दर्जे से पास लोगों को भी शिक्षक बना दिया गया। एक मदरसे के अध्यक्ष ने तो अपनी चारों बेटियों को बतौर शिक्षक बहाल कर दिया। कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जिनके पास किसी मान्यताप्राप्त संस्थान का प्रमाण पत्र तक नहीं है।

अब इस मामले की जाँच SIT को सौंपी गई है, जो 1974 से वर्ष 2013 के बीच आज़मगढ़ में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा खँगालेगी। SIT ने आज़मगढ़ के 20 मदरसों का निरीक्षण किया है। जब्त किए गए दस्तावेजों, दर्ज किए गए बयानों और जुटाए गए तथ्यों से खुलासा हुआ है कि कई शिक्षकों के प्रमाण पत्र ऐसे संस्थान के हैं, जिन्हें तो तो केंद्र और न ही राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त है।

नियम के अनुसार जो पूरी तरह अपात्र थे, उन्हें भी मदरसों में शिक्षक बना कर बिठा दिया गया। नियमानुसार ‘अध्यापक आलिया’ के लिए ‘फाजिल’ शैक्षिक योग्यता 55% अंक के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए, लेकिन अधिकतर शिक्षकों के मार्क्स इससे कम ही थे। एक शिक्षक को तो तीसरे दर्जे से भी उत्तीर्ण होने के लिए 1 अंक के ग्रेस मार्क की ज़रूरत पड़ी थी। ये घोटाला कई वर्षों से यूँ ही चला आ रहा था।

उदाहरण के लिए, एक शिक्षक ने मऊ के चिरैयाकोट के सेराजनगर स्थित सेराजुल ओलुम मदरसा से वर्ष फरवरी 28, 2004 में फाजिल का तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव दिखाया जबकि इस मदरसा को तब तक मान्यता मिली ही नहीं थी। इसी तरह नवंबर 6, 1981 को अरमान अहमद नामक शिक्षक की नियुक्ति हुई। 18 वर्ष से कम की उम्र में ही उसे सहायक शिक्षक के रूप में बहाल कर दिया गया। नियमों का खुला उल्लंघन किया गया।

मोहम्मद मेहंदी नामक प्रधानाचार्य ‘सहायक अध्यापक आलिया’ की नियुक्ति जनवरी 9, 1996 को हुई जबकि उनका अनुभव प्रमाण पत्र मार्च 21, 1996 का था। इसी तरह मुबारकपुर का मदरसा जामिया नुरूल ओलुम अंजुमन सिद्दीकीया जामिया नुरूल ओलुम सोसायटी द्वारा चलाया जाता है। सोसाइटी व चयन समिति के अध्यक्ष जहीन अहमद ने अपनी चारों बेटियों को प्रधानाचार्य सहित अन्य पदों पर बिठा दिया।

जिले के जिन मदरसों की जाँच हुई है उनमें मुबारकपुर के मदरसा जामिया नुरुल उलूम, मदरसा अशरफिया सिराजुल उलूम नेवादा अमिलो, अरबिया दारूतालीम सोफीपुरा, बाबुल ईल्म निस्वाँ, जफरपुर का मदरसा अरबिया जियाउल उलूम मंदे, बम्हौर का मदरसा मदरसतुल आलिया शेख रज्जब अली, जामिया अरबिया तनवीर उल उलूम नौशहरा, अरबिया कासिमुल मगराँवा, इस्लामिया जमीअतुल कुरैश जालंधरी समेत कुल 20 मदरसे शामिल है। 

दिल्ली हिंसा मामले में 3 और को SIT ने किया गिरफ्तार

फरवरी 6 को चक्का जाम शांतिपूर्वक निपटने का मुख्य कारण है, 26 जनवरी को अपने अनुबंध को दरकिनार करने पर सरकार के हो रहे उन पर प्रहार से इतने भयभीत हो गए, जो इस बात की ओर भी संकेत कर रही है कि कांग्रेस, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और वामपंथियों आदि के समर्थन चल रहे धरना/प्रदर्शन अपने अंतिम पड़ाव की ओर जा रहा है। जिस तरह पुलिस दंगाइयों को खोज-खोज कर पकड़ रही है, उससे आंदोलनकारी बौखलाने लगे हैं।

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने 3 और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित बुराड़ी और लाल किले पर हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल थे। लाल किला हिंसा मामले की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच अब तक हिंसा में शामिल 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इससे पहले दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हिंसा में शामिल धर्मेंद्र सिंह हरमन को गिरफ्तार किया था। धर्मेंद्र सिंह हरमन ने ही लाल किले के गुंबद पर धार्मिक झंडा लहराने के लिए दंगाइयों को उकसाया था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआइटी द्वारा गिरफ्तार धर्मेन्द्र सिंह हरमन दिल्ली दंगे के दौरान शाहीनबाग में हुए उपद्रव में भी काफी सक्रिय था।

26 जनवरी को लाल किले में वीडियो फुटेज में देखे गए हरमन ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लाल किले पर झंडे को फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का लाइव स्ट्रीम किया था। पुलिस ने कहा कि हरमन सिंघु सीमा पर पिछले दो महीनों से किसानों के आंदोलन में जा रहा था।

दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने वीडियो फुटेज प्राप्त करने के बाद हरमन को गिरफ्तार किया था, जहाँ उसे एक कार के ऊपर बैठे देखा जा सकता है और भीड़ को लाल किले पर सिख झंडा फहराने के लिए उकसा रहा है। एक अन्य वीडियो फुटेज में, हरमन को गणतंत्र दिवस के दंगों में भाग लेते हुए भी देखा गया था, जहाँ दंगाइयों ने उपद्रव किया था।

दिल्ली पुलिस लाल किले और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में उत्पात मचाने वालों दंगाइयों की कुंडली खंगालने में जुटी है। 26 जनवरी को भड़की हिंसा में सैकड़ों दंगाइयों ने दिल्ली में प्रवेश किया। उन दंगाइयों में से कई ट्रैक्टर चलाकर लाल किले पर पहुँचे और लाल किले के गुंबदों पर धार्मिक ध्वज फहराया। इन तथाकथित किसानों ने क्रूरता से पुलिस अधिकारियों पर लाठियों, लोहे की छड़ों, ईंटों और पत्थरों से हमला किया था, जिससे लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

एसआईटी इन दंगाइयों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जोर-शोर से कर रही है, और उन्हें दबोचने के लिए मोबाइल का डेटा छान रही है। इसी क्रम में, 3 फरवरी को, SIT ने हिंसा में शामिल लगभग 20 दंगाइयों की तस्वीरें जारी कीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस की हिंसा से संबंधित अब तक जनता से 1,700 से अधिक वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। दिल्ली पुलिस ने अब दंगाइयों को पकड़ने के लिए संबंधित सामग्री का विश्लेषण करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली है।

दिल्ली पुलिस ने अभिनेता-कार्यकर्ता और खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू के ठिकाने की सूचना देने के लिए 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है, जो गणतंत्र दिवस के दंगों का मुख्य आरोपित भी है।

चिन्मयानंद केस : रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता को पुलिस ने 'हिरासत' में लिया, जबरन वसूली के मामले में की जाएगी पूछताछ- सूत्र

चिन्मयानंद केस: रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता को पुलिस ने 'हिरासत' में लिया, जबरन वसूली के मामले में की जाएगी पूछताछ- सूत्र
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य गृहमंत्री चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली पीड़िता को एसआईटी ने अपनी हिरासत में ले लिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के सूत्रों ने बताया कि कानून की पढ़ाई कर रही पीड़िता को पूछताछ के लिए पुलिस अपने साथ लेकर गई है। साथ ही पीड़िता ने गिरफ्तारी से छूट के लिए शाहजहांपुर की स्थानीय कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट में इस मामले पर दोपहर के बाद सुनवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक जब पीड़िता अपनी याचिका कोर्ट में लगाने के लिए जा रही थी तो पुलिस ने उसे रास्ते में रोका और अपने साथ ले गई। बता दें, पुलिस ने पीड़िता के खिलाफ जबरन वसूली का मामला भी दर्ज किया है।
गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली शाहजहांपुर की पीड़ित छात्रा की अर्जी पर किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया था।
उधर, सितम्बर 20 को गिरफ्तार हुए चिन्मयानंद को सितम्बर 23 को शाहजहांपुर जेल से लखनऊ के एक अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हृदय संबंधी समस्याओं के लिये एंजियोग्राफी की गई। मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सीलबंद लिफाफे में दो न्यायाधीशों की पीठ को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति रानी चौहान की पीठ ने इस मामले में अब तक की जांच पर संतोष जताया और आगे की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 22 अक्टूबर, 2019 की तारीख तय की। चिन्मयानंद से कथित तौर पर जबरन वसूली का प्रयास करने को लेकर एसआईटी के उसके खिलाफ मामला दर्ज करने और तीन लोगों को गिरफ्तार करने के बाद पीड़ित छात्रा ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने कहा, ‘यदि पीड़ित छात्रा इस संबंध में कोई राहत चाहती है तो वह उचित पीठ के समक्ष नयी याचिका दायर कर सकती है।'
Image may contain: 1 person, beard and closeupवीडियो का बनाना क्या किसी षड़यंत्र को नहीं बताता? आखिर कौन बना रहा/रही थी वीडियो? 
एक अमीर बिल्डर की बेटी और खुद भी वकालत की उच्च शिक्षा प्राप्त महिला, आखिर क्यों एक नेता के घर उसकी मालिश करने जाती थी ? उसका अपना आलीशान घर चिन्मयानन्द के आश्रम से मात्र 2 किमी दूर था फिर भी आश्रम के हॉस्टल में क्यों रहती थी ?
वहां रहकर कौन सा ज्ञान प्राप्त कर रही थी ? वह उस का मसाज़ क्यों किया करती थी ? जब उसके साथ पहली बार अचानक कुछ गलत हुआ तब ही उसने इसका विरोध क्यों नहीं किया? 43 वीडियो आखिर क्यों बनबाये ? किस बात का इन्तजार था ? जो इस बात को सिद्ध करता है कि मसाज की आड़ में कोई और साज़िश को अंजाम देने के षड़यंत्र किया गया। 
बार बार जाने वाली और 43 वीडियो बनबाने वाली महिला, बिना मामले की जांच के मासूम और पीड़ित कैसे घोषित कर दी गयी ? क्या यह जानना आवश्यक नहीं कि वह इस सबके बदले चिन्मयानंद से क्या चाहती थी, जिसके न होने पर वीडियों रिलीज किये गए ?
ऐसी शातिर महिलाओं के कारण वास्तविक मजबूर और पीड़ित लड़कियों का केस कमजोर होता है, जो वास्तव में जबरदस्ती का शिकार होती हैं। इसलिए किसी की मसाज करने से पहले उनको खुद भी सोंच लेना चाहिए।
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पीड़ित छात्रा के साथी संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर गिरफ्तार लॉ की छात्रा के साथ रेप के ...

कुछ बर्ष पहले एक महिला वकील की वीडियो तत्कालीन कानून मंत्री अभिषेक मनु संघवी के साथ भी देखी गई थी जो सम्बन्ध बनाने के बदले में जज बनने की रिक्वेस्ट कर रही थी क्या यह मामला भी कुछ बैसा ही नहीं लगता है ?
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Image may contain: 5 peopleभारतवर्ष में
गुरुकुल कैसे खत्म हो गये ?

कॉन्वेंट स्कूलों ने किया बर्बाद| 1858 में Indian Education Act बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग ‘लोर्ड मैकोले’ ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी।
अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Litnar और दूसरा था Thomas Munro ! दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। Litnar, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है |
मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से #हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से #अंग्रेज_पैदा_होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे| मैकाले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है :
“कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।” इस लिए उसने सबसे पहले #गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया जब #गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज की तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी फिर #संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया
और इस देश के #गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमें आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा- पीटा, जेल में डाला
1850 तक इस देश में ’7 लाख 32 हजार’ गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे ’7 लाख 50 हजार’ मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में ‘Higher Learning Institute’ हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिलके चलाते थे #न_कि_राजा, महाराजा इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और #कलकत्ता_में_पहला_कॉन्वेंट_स्कूल खोला गया उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं
मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि: “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो #भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से #अंग्रेज होंगे
और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा इनको अपने #संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने #परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही हैऔर उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, #अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा। लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है।
इन अंग्रेजों की जो #बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी समय के #कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।
संयुक्तराष्टसंघजो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है।
जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी



चिन्मयानंद, अश्लील वीडियो और ₹5 करोड़ की फिरौती: पीड़िता के 2 भाई और 1 साथी गिरफ्तार

चिन्मयानंद, रेप
पीड़ित छात्रा के साथी संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर गिरफ्तार
लॉ की छात्रा के साथ रेप के आरोपित पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानंद जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं। स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) ने उन्हें गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके अलावा, एसआईटी ने चिन्मयानंद के अश्लील वीडियो के बदले 5 करोड़ रुपए माँगने के आरोप में पीड़ित छात्रा के साथी संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा तीनों का मेडिकल कराने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, वहाँ से तीनों को जेल भेज दिया जाएगा।
वहीं, गिरफ्तार स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। मामले की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का दावा है कि चिन्मयानंद ने पीड़ित लड़की को मसाज के लिए बुलाने की अपनी गलती स्वीकार की है।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन के प्रमुख नवीन अरोड़ा ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने अपने खिलाफ लगे लगभग सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि वह अपने इन कृत्यों से शर्मिंदा हैं।
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कई दिनों की जद्दोजहद के बाद अंतत: स्वामी चिन्मयानंद को शुक्रवार(सितम्बर 20) सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। चिन्मयानंद क....

पूर्व केंद्रीय मंत्री पर अपने ही कॉलेज की लॉ स्टूडेंट से रेप करने का आरोप है। पीड़िता की ओर से इस संबंध में लगातार कई विडियो जारी कर चिन्मयानंद पर आरोप लगाए गए थे। हालाँकि, चिन्मयानंद और उनके समर्थक लगातार कह रहे थे कि वह निर्दोष हैं और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

स्वामी चिन्मयानंद गिरफ्तार : पीड़िता की आत्महत्या की धमकी से हरकत में आई SIT!

Chinmayanand
कई दिनों की जद्दोजहद के बाद अंतत: स्वामी चिन्मयानंद को शुक्रवार(सितम्बर 20) सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। चिन्मयानंद को उनके ही कॉलेज की छात्रा और उसके पिता द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी स्वामी के ही मुमुक्ष आश्रम से हुई बताई जा रही है। आईएएनएस से बात करते हुए एसआईटी टीम मेंबर पुलिस अधीक्षक भारती सिंह ने स्वामी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि चिन्मयानंद को शुक्रवार सुबह उनके मुमुक्षु आश्रम से गिरफ्तार किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, 'गिरफ्तारी एसआईटी की टीम द्वारा की गई है। गिरफ्तारी से पूर्व चिन्मयानंद के सहयोगियों और समर्थकों ने खासा विरोध भी किया। पहले से हर बाधा से निपटने को तैयार एसआईटी ने मगर चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के विरोध को विफल कर दिया।" फिलहाल एसआईटी आरोपी से पूछताछ में जुटी है।
कई दिन से एसआईटी की जांच पर सवालिया निशान लगाए जाने लगे थे। वजह थी तमाम गवाह सबूतों की मौजूदगी के बाद भी आरोपी स्वामी की गिरफ्तारी न होना। दो दिन पहले ही पीड़िता ने अदालत में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए थे। तभी आशंकाएं प्रबल होने लगी थीं कि, चिन्मयानंद की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है। उधर पीड़िता के अदालत में बयान दर्ज कराते ही आरोपी चिन्मयानंद कथित बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती हो गया था।
दूसरी ओर स्वामी को गिरफ्तार न किए जाने से नाराज पीड़ित छात्रा ने कुछ घंटे पहले ही धमकी दी थी कि अगर आरोपी अब भी गिरफ्तार नहीं किया गया तो वो आत्महत्या कर लेगी। सूत्र बताते हैं कि पीड़िता की इस धमकी के बाद ही एसआईटी की जांच में अचानक तेजी आ गई। जिसका परिणाम एसआईटी द्वारा स्वामी की गिरफ्तारी के रूप में सामने आया है।
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बीजेपी नेता आजाद सिंह ने पार्टी के आफिस में पूर्व पत्नी सरिता चौधरी को थप्पड़ मार दिया. आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रका...

स्वामी पर उनके ही कॉलेज में पढ़ने वाली कानून की एक छात्रा ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय विशेष पीठ गठित करवा कर पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। स्वामी को गिरफ्तार करने वाली एसआईटी टीम का नेतृत्व यूपी पुलिस के महानिरीक्षक नवीन अरोरा कर रहे हैं।