Showing posts with label nepal. Show all posts
Showing posts with label nepal. Show all posts

उत्तर प्रदेश : 4000 मदरसों को विदेशी फंडिंग, नेपाल और बांग्लादेश से लेकर अरब तक से आ रहे पैसे

उत्तर प्रदेश के 4000 मदरसों को विदेशी फंडिंग मिलने की बात सामने आई है। बता दें कि नवंबर 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मदरसों का सर्वेक्षण कराया था, जिसमें 8441 मदरसे अवैध मिले थे। अब परीक्षाएँ खत्म हो गई हैं, ऐसे में राज्य का अल्पसंख्यक विभाग कार्रवाई करने में जुट गया है। अधिकतर मदरसा संचालकों ने जकात को ही अपनी आय का प्रमुख स्रोत बताया था, यानी मुस्लिमों द्वारा दिया जाने वाला दान।

अब शुरुआती जाँच में सामने आया है कि नेपाल और बांग्लादेश के अलावा अरब के मुल्कों से भी फंडिंग आ रही है। गरीब मुस्लिमों को मुख्य धारा से जोड़ने की बात करते हुए अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि पुलिस के साथ मिल कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मौलवी बनने से उनका भला नहीं होगा, उन्हें NCERT की किताबें पढ़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिमों के बच्चे भी अधिकारी बनेंगे।

पिछले साल 10 सितंबर से लेकर 15 नवंबर तक मदरसों का सर्वे हुआ था, जिसे 30 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था। 2017 से मदरसों को मान्यता देनी भी बंद कर दी गई है, कारण है उनका मानकों पर खड़ा न उतरना। यूपी में फ़िलहाल 15,613 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से कइयों का कहना है कि कागज देने के बावजूद मान्यता न मिलने के कारण वो दीनी तालीम देने के लिए मदरसे चला रहे हैं। खासकर सीमावर्ती जिलों के मदरसों में फंडिंग में गड़बड़ी है।

ये जिले हैं – महाराजगंज, पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर। इन मदरसों के पास आय के स्रोत को लेकर कोई स्पष्ट कागजात नहीं हैं। मदरसों को कह दिया गया है कि भले ही वो उर्दू में पढ़ाएँ, लेकिन NCERT पढ़ाना ही पड़ेगा। अब ऐसे मदरसों पर क़ानूनी शिकंजा कसा जाएगा। सर्वे में मुख्यतः 12 सवाल पूछे गए थे। मदरसों को कम्प्यूटर से जोड़ने को लेकर भी योगी सरकार प्रयासरत है और जो मदरसे मानकों को पूरा कर रहे हैं उन्हें मान्यता देने में कोई परहेज भी नहीं है।


नेपाल के कई शहरों में नूपुर शर्मा के समर्थन में विशाल रैली, पूछा – भारत के हिन्दू कहाँ?

फोटो साभार: Twitter-@HinduArmy0
भाजपा नेता नूपुर शर्मा और हिंदू धर्म के समर्थन में पड़ोसी देश नेपाल में बड़ी रैली आयोजित की गई। नेपाल में रह रहे हजारों हिंदुओं ने नूपुर शर्मा के समर्थन में सड़कों पर रैली निकाली। यह रैली राजधानी काठमांडू के अलावा बीरगंज, पीरगंज और अन्य शहरों में भी निकाली गई। जबकि भारत में हिन्दू सेकुलरिज्म और गंगा जमुनी तहजीब भ्रमित नारों में और तुष्टिकरण के नशे में सो रहे हैं। इनके आराध्य श्रीराम और शिव पर अभद्र टिप्पणियां की जाने पर खामोश रहता है, विपरीत इसके किताब में लिखी बात को टीवी पर बोलने पर देखिए मुस्लिम कट्टरपंथी किस तरह नूपुर के बहाने देश का माहौल ख़राब कर रहे हैं। हैरानी इस बात पर हो रही है कि हिन्दू तो क्या कोई टीवी नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी के विरुद्ध नहीं बोलता, क्यों? क्यों रहमानी ने शिवलिंग पर आपत्तिजनक बात बोली? 

 

इस दौरान ‘जय हिंदू’, ‘जय हिंदुत्व’ और ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाए गए। रैली में “जो हिंदू शिव और राम का नही वो किसी काम का नही” जैसे पोस्टर भी दिखाई दिए। बीरगंज में रैली के दौरान एक हिंदू संत को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हिंदू आस्था के खिलवाड़ होने पर वह भी चुप्पी साध कर नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी हिंदू धर्म को गाली दया गया। हाल ही में पाकिस्तान में शिव मंदिर को तोड़ दिया गया। फिर भारत की घटना को लेकर मुस्लिमों ने गुंडागर्दी किया। अब वह शांतिपूर्ण जुलूस निकालकर अपनी धर्म की रक्षा कर रहे हैं। इसमें भी कुछ जिहादी अडंगा डाल रहे हैं। हिंदू समर्थकों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के भी नारे लगाए।

रैली का वीडियो सामने आने के बाद नेटिजन्स भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह है हमारा पड़ोसी देश नेपाल है तो छोटे भाई की तरह पर फर्ज निभाता है। बड़े भाई की तरह देखिए हमारे भारत में नूपुर शर्मा जी के पक्ष में किसी ने रैली नहीं निकाली पर नेपाल के हमारे भाइयों ने नूपुर शर्मा जी के पक्ष में रैलियाँ निकालने शुरू कर दी। जय श्री राम नेपाल के सभी भाई बहनों को प्रणाम।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “नूपुर शर्मा के समर्थन में नेपाल के काठमांडू में ज़बरदस्त प्रदर्शन। नेपाल के हिन्दू जाग गए लेकिन भारत का हिन्दू सोया हुआ है।”

शिवचरण सुदर्शन यादव लिखते हैं, “पड़ोसी देश नेपाल में हिन्दू भाइयों ने नूपुर शर्मा के समर्थन में रैली निकाली। भले हमारे बीच बार्डर है पर हम सभी भाई भाई हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “नेपाल के बीरगंज शहर में हिंदू समाज ने ‘सत्यवादी’ नुपूर शर्मा के समर्थन में विशाल जुलूस निकाला। अफसोस कि अपने देश के ही हिंदू इस धर्म और अधर्म की लडाई में कहीं सडकों पर नहीं दिखे।”

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह किए जा रहे दंगे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को सतर्क रहने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि हिंसा के दौरान उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

शुक्रवार (10 जून 2022) को विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश के कई शहरों में दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ सामने आईं।

नेपाल में लड़कियों संग पकड़ाए बि​हार के 3 जज बर्खास्त: होटल रजिस्टर के फटे पन्ने और फर्जी बिल से भी नहीं बचे

                                                                                       प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: The Swaddle
बिहार सामान्य प्रशासन विभाग ने निचली अदालतों के तीन न्यायाधीशों को बर्खास्त करने को मँजूरी दे दी है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इन तीनों न्यायाधीशों का नाम 2013 के नेपाल सेक्स स्कैंडल में सामने आया था।

दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इनकी बर्खास्तगी 12 फरवरी, 2014 से ही प्रभावी होगी। बर्खास्त किए गए तीनों न्यायाधीश समस्त लाभों से वंचित रहेंगे। इन तीनों जजों को अब रिटायरमेंट के बाद का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

बिहार सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार समस्तीपुर परिवार न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश हरिनिवास गुप्ता, तदर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश (अररिया) जितेंद्र नाथ सिंह और अररिया के अवर न्यायाधीश सह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोमल राम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 2015 की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और बिहार सरकार को न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी थी।

जिन तीन न्यायिक अधिकारियों को बर्खास्त किया गया, उन्हें पुलिस छापेमारी में नेपाल के एक होटल में लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था। घटना 26 जनवरी 2013 की है। न्यायिक अधिकारी होने के कारण नेपाल की पुलिस ने तीनों को छोड़ दिया था। ये सभी विराटनगर स्थित मैट्रो गेस्ट हाउस के अलग-अलग कमरों में ठहरे थे।

विराटनगर से प्रकाशित नेपाली भाषा के अखबार ‘उदघोष’ के 29 जनवरी 2013 के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इस मामले की जाँच पूर्णिया के जिला जज ने की और अपनी सिफारिश पटना हाई कोर्ट को भेजी थी। बिहार राज्य बार काउंसिल की ओर से घटना के एक सप्ताह के बाद मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर इस घटना की जानकारी दी गई थी। हालाँकि, जाँच के दौरान पता चला कि मैट्रो गेस्ट हाउस के रजिस्टर के पन्ने को भी फाड़ दिया गया था, जिसमें इन तीनों की एंट्री थी।

मामला सामने आने के बाद पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया के तत्कालीन जिला जज संजय कुमार से मामले की जाँच कराई। जाँच रिपाेर्ट में मामला सत्य पाए जाने के बाद हाई कोर्ट की स्टैंडिंग कमेटी ने तीनों को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इस मामले में गृह मंत्रालय के उप सचिव एसएम कंडवाल ने पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर मामले की जाँच करने के लिए कहा। 

पटना उच्च न्यायालय ने पूर्णिया जिले और सत्र न्यायाधीश को मामले की जाँच करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में लिखा गया कि तीनों न्यायाधीशों ने कहा कि जिस समय घटना हुई, उस समय वे नेपाल में नहीं बल्कि भारत में थे। पूर्णिया जिला और सत्र न्यायाधीश, संजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि नेपाली दैनिक ‘उद्घोष’ ने गलत स्टोरी प्रकाशित करने के लिए माफी माँगी थी।

हालाँकि, संजय कुमार द्वारा की गई जाँच से असंतुष्ट पटना उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय को हस्तक्षेप करने के लिए कहा। गृह मंत्रालय की एक एजेंसी ने आरोपित जजों के मोबाइल फोन के हिस्ट्री को ट्रैक किया और पाया कि उनके फोन 26-27 जनवरी, 2013 को एक साथ ऑफ कर दिए गए थे और जब यह फिर से एक्टिव हुआ तो नेपाल के फोर्ब्सगंज शहर के पास कहीं ट्रेस किया गया था। यह दर्शाता है कि तीनों जज नेपाल में थे, न कि भारत में, जैसा कि उनके द्वारा दावा किया गया था।

गृह मंत्रालय द्वारा दायर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है आरोपित जजों ने होटल के बिल भी पेश किए थे, ताकि यह साबित किया जा सके कि घटना के दिन वे बिहार के पूर्णिया में थे, नेपाल में नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि होटल के बिल तैयार किए गए थे और एक आरोपित न्यायाधीश ने खुद हस्ताक्षर किए थे। निष्कर्षों के आधार पर, तीनों जजों की बर्खास्तगी को मँजूरी देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।

इस बीच फरवरी 2014 में, तीनों आरोपित न्यायाधीशों ने बर्खास्तगी के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसके बाद न्यायिक अधिकारियों यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट गए कि अनुशासनात्मक जाँच के बिना उन्हें बर्खास्त नहीं किया जा सकता है।

इस बीच, पटना HC की पूर्ण अदालत ने HC के आदेश के अनुपालन में उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश के आदेश पारित किए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में राज्य सरकार को सिफारिश पर कार्रवाई करने से रोकते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

हालाँकि, 2019 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा और संजीव खन्ना की पीठ ने आरोपित न्यायिक अधिकारियों की याचिका को खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसने राज्य सरकार को उनकी बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट की सिफारिश पर निर्णय लेने की अनुमति दी। इसमें कहा गया है कि न्यायाधीश राज्य सरकार द्वारा पारित किए गए बर्खास्तगी आदेशों को चुनौती दे सकते हैं।

नेपाल : सेक्स टेप की चर्चा के बीच जा सकती है प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी

केपी ओली, होऊ यांगी
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य का फैसला आज हो सकता है। सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की होने वाली बैठक में इस संबंध में फैसला होने की उम्मीद है।
भारत विरोधी रुख और चीन के बढ़ते दखल को लेकर ओली के खिलाफ पार्टी के भीतर काफी नाराजगी है। पिछले हफ्ते नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने साफ शब्दों में ओली से प्रधानमंत्री पद या पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा था।
इसके बाद ओली ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। ऐसे में उनके इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए बीते गुरुवार(2जुलाई 2020)  को पार्टी की शीर्ष ईकाई स्थायी समिति की बैठक होनी थी, जिसे बाद में शनिवार (4 जुलाई 2020) तक के लिए टाल दिया गया था।
पार्टी के भीतर अपने इस्तीफे की मॉंग उठने के बाद ओली ने इसका ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन प्रचंड ने उनकी इस टिप्पणी को अनुचित करार दिया था।
हाल में नेपाल ने एक नया नक्शा पास किया है। इसमें भारत के कुछ इलाकों को शामिल कर लिया गया है। दूसरी ओर, नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई है।
कोने-कोने में होऊ यांगी की घुसपैठ
नेपाल के भारत विरोधी एजेंडे के लिए होऊ यांगी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। होऊ यांगी नेपाल में चीन की राजदूत हैं। पहले नेपाल के नए नक्शे के पीछे उनका ही हाथ बताया गया था। अब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि होऊ यांगी की दखल नेपाल के आर्मी हेडक्वार्टर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक है।
नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा का दफ्तर हो या पीएम ओली का कार्यालय, बताया जाता है कि चीनी राजदूत नेपाल के किसी भी क्षेत्र में बेरोकटोक आ-जा सकती हैं।
मॉडल की तरह दिखने वाली होऊ यांगी के रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी उनके लिए विशेष भोज की मेजबानी करती हैं। ओली कैबिनेट के सदस्य उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर खुद को धन्य समझते हैं। होऊ यांगी भी नेपाल के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें आए दिन सोशल मीडिया में शेयर करती रहती हैं।
यहॉं तक कि ओली और प्रचंड के बीच तनाव की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने भी सुलह की कोशिशें की थी। इस क्रम में उन्होंने प्रचंड से भेंट कर उन्हें आपस में नहीं लड़ने की सलाह दी थी। कुर्सी बचाने की कोशिशों के बीच प्रचंड और ओली ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की है।
बताया जाता है कि चीन के साथ-साथ पाकिस्तान भी ओली की कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय है। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस क्रम में ओली मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के संपर्क में भी हैं। दिलचस्प यह है कि नेपाल में तैनाती से पहले होऊ यांगी तीन साल पाकिस्तान में भी काम कर चुकी हैं।

हालॉंकि जानकारों का मानना है कि शायद ही ओली कुर्सी बचाने में कामयाब रहें। बताया जाता है कि 44 सदस्यीय स्थायी समिति में केवल 13 सदस्य ही ओली के पक्ष में हैं। पिछले सप्ताह हुई बैठक में प्रचंड ने ओली पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे नेपाल को पाकिस्तान नहीं बनने देंगे।
उन्होंने कहा था, “हमने सुना है कि सत्ता में बने रहने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश मॉडल पर काम चल रहा है। लेकिन इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। भ्रष्टाचार के नाम पर कोई हमें जेल में नहीं डाल सकता है। देश को सेना की मदद से चलाना आसान नहीं है और ना ही पार्टी को तोड़कर विपक्ष के साथ सरकार चलाना संभव है।”
तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच ओली को चीन द्वारा हनी ट्रै​पिंग में फॅंसाने की अफवाहें भी पिछले कई दिनों से चल रही है। मेजर गौरव आर्या ने भी पिछले दिनों इस संबंध में ट्वीट किया था। हालॉंकि ओली के सेक्स टेप को लेकर सोशल मीडिया में अब तक किए गए दावे निराधार ही साबित हुए हैं।

कश्मीर में चौकसी बढ़ी तो ISI ने बनाया नया ठिकाना, यूपी-बिहार के युवाओं को बना रहे आतंकी

भारत और पाकिस्तान सीमा पर सेना और सुरक्षा बलों की चुस्त निगरानी के चलते पाकिस्तान की आइएसआई (ISI) अब नेपाल के जरिये जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले के साजिश रच रही है. ख़ुफ़िया एजेंसीज़ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनो में आतंकियों के नेपाल जाकर ISI के ऑपरेटिव के साथ-साथ आतंकी गुटों के कमांडर्स से मिलने के इनपुट मिले है. 
कश्मीर में चौकसी बढ़ी तो ISI ने बनाया नया ठिकाना, यूपी-बिहार के युवाओं को बना रहे आतंकी Zee न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक इस साल मार्च और अप्रैल के महीने में दो कश्मीरी आतंकी नेपाल गए और जहां उनकी मुलाकात हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर्स से हुई इस बैठक का सारा इंतजाम पाकिस्तान की ISI ने का कराई. मीटिंग में उनकी मुलाक़ात हिजबुल के ही तीन और आतंकियों से करायी गई जिसके बाद आतंकी हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए सभी पांचो आतंकी वापस कश्मीर आ गए. सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक आतंकी ग्रुप्स को सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले के लिए ISI निर्देश देती है, लेकिन अब आतंकी गुटों को ये दर सताने लगा है कि उन पर भारतीय एजेंसीज़ लगातार नज़र रख रही है ऐसे में अब आतंकी कश्मीर से नेपाल जा कर ISI के एजेंट्स से मिल रहे हैं जहाँ उनको हमले के लिए मदद दी जाती है. आतंकियों को ISI नेपाल में फंडिंग भी कर रही है. 
केंद्रीय सुरक्षा में तैनात एक अधिकारी के मुताबिक, कश्मीर में टेरर फंडिंग पर जहां नकेल कसी गयी है वहीं लाइन ऑफ़ कंट्रोल और इंटरनेशनल बॉर्डर पर कड़ी निगरानी के चलते ISI के लिए कश्मीर में मौजूद आतंकियों को मदद करना इतना आसन नहीं रहा. इसी वजह से नेपाल के जरिये अब आतंकियों को भारत के खिलाफ हमले के लिए तैयार किया जा रहा है. भारतीय एजेंसीज़ अब ये पता कर रही है कि पिछले कुछ महीनों में अब तक कितने आतंकी कश्मीर से नेपाल गए हैं. 
ख़ुफ़िया एजेंसीज ने पिछले दिनों गृह मंत्रालय को भेजे एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान के इशारे पर आतंकी गुट लश्कर ए तय्यबा फैज़ाबाद और गोरखपुर में अपना बेस बना रहा है और नेपाल और उत्तर प्रदेश से सटे तराई के इलाकों में उसने अपनी गतिवधिया बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर और फैज़ाबाद से वो अपने आतंकी संगठन में लोगों को भर्ती करने की साज़िश में लगा हुआ है और इसके लिए उसने एक लश्कर आतंकी मोहम्मद उमर मदनी को अपने नेटवर्क को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी है. 
ZEE न्यूज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक उमर मदनी ने नेपाल के कपिलवस्तु में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है जिससे वो यहाँ बैठ कर लोगो को अपने ग्रुप से जोड़ सके और भारतीय सुरक्षा एजेंसीज़ की नज़र से भी बच सके.
गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक उमर मदनी ने इस साल मार्च में कोलकाता भी गया था और वो पिछले कुछ दिनों में बिहार के दरभंगा में कई बार जा चुका है. लश्कर की नज़र मदरसा में पढ़ने वाले मुस्लिम युवकों पर है जिससे वो इन युवकों को बहला फुसला कर अपने ग्रुप से जोड़ सके.
केंद्रीय सुरक्षा में तैनात के अधिकारी के मुताबिक पिछले कई महीनो से लश्कर अपना नेटवर्क उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में मजबूत करना चाहता है. उमर मदनी को लश्कर ने टास्क दिया हुआ है कि वो गोरखपुर, फैज़ाबाद और दरभंगा के युवकों को भर्ती कर ज़कात के बहाने पाकिस्तान भेजे और उसके बाद पाकिस्तान में बने टेरर कैम्पस में इन्हे आतंकी हमले की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके बाद इन्हें वापस भारत भेजा जायेगा और जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल आतंकी हमले के लिए किया जायेगा. (साभार)

UN सर्वे: पाकिस्तान की आर्थिक हालत नेपाल, बांग्लादेश से भी बदतर होने के कगार पर

इमरान खानइन दिनों पाकिस्तान का हाल काफी बुरा है। वहाँ की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है और महंगाई आसमान छू रही है। जरूरत का हर सामान दुगने-तिगुने दामों पर मिल रहा है। खाने-पीने से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमताें में बेतहाशा बढ़ाेतरी दर्ज की गई है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्‍तान के लिए एक और बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र की एक आर्थिक रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस साल 2019 में पाकिस्‍तान की जीडीपी वृद्धि दर सबसे कम 4.2% और 2020 में मात्र 4% रह सकती है। बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान की जीडीपी दर नेपाल, बांग्‍लादेश और मालदीव से भी पीछे रह सकती है।
एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की तरफ से ‘एंबिशंस बियॉन्ड ग्रोथ’ शीर्षक से जारी की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि 2019 में पाकिस्तान की जीडीपी की वृद्धि दर इस क्षेत्र में सबसे कम 4.2% रहने का अनुमान है। जबकि इसी वर्ष बांग्‍लादेश की जीडीपी 7.3%, भारत की 7.5%, मालदीव और नेपाल की 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
पाकिस्तान में पर्यावरणीय पतन खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है, जो कि विकास की उपलब्धियों के लिए खतरा बन रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी कहा था कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में सुस्त होकर 3.9% रहेगी। एडीबी ने ‘व्यापक आर्थिक चुनौतियों’ का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 में 5.2% से गिरकर 2019 में 3.9% पर आने का अनुमान है। 
एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, कृत्रि क्षेत्र में सुधार के बावजूद 2018 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति ने बजट और चालू खाते के घाटे को व्यापक रूप से बढ़ाया और विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है। एडीबी ने कहा कि जब तक वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है, तब तक वृद्धि के लिए परिदृश्य धीमा बना रहेगा, ऊँची मुद्रास्फीति रहेगी, मुद्रा पर दबाव बना रहेगा। 

पशुपतिनाथ मंदिर क्यों नहीं गए राहुल?

गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने जो हिन्दू नाम का चोला ओढ़ा है, आज तक नहीं उतारा।कभी शिव भक्त बन रहे हैं, तो कभी राम भक्त। हैरानी की बात यह है कि जो राहुल गाँधी मन्दिर जाने वालों को आरोपित करते नहीं थकते थे, आज कुर्सी की खातिर मन्दिर मन्दिर के चक्कर काट रहे हैं, अब इसे पाखण्ड नहीं कहा जाए, तो क्या नाम दिया जाए। दूसरे यह कि पहले राहुल तो क्या कांग्रेस को हिन्दुत्व की बात करने पर साम्प्रदायिकता नज़र आती थी। इतना ही नहीं, कोर्ट में लंबित अयोध्या में राममन्दिर मुद्दे पर पुरातत्व विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉ के.के.मोहम्मद के अनुसार खुदाई में मन्दिर के बहुत प्रमाण मिले थे, लेकिन कांग्रेस के सहयोग से वामपंथी इतिहासकारों ने सारे प्रमाण छुपाकर केवल एक ही खम्बा दिखाकर कोर्ट को धोखा दिया। यदि आज भी कोर्ट के समक्ष खुदाई में मिले सारे प्रमाण प्रस्तुत कर दिए जाएं, दुनियाँ की ताकत अयोध्या में मस्जिद नहीं राममन्दिर बनने से कोई नहीं रोक सकता।परन्तु कांग्रेस में विराजमान समस्त हिन्दू कुछ नहीं बोलते, विपरीत इसके मन्दिर मन्दिर जाने के विवाद पर राहुल के पक्ष में खड़े हो रहे हैं। 
अब इनके कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी विवाद होना स्वाभाविक है। जाने क्या हैं वह कारण:-  
राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौट आए, लेकिन इसके साथ ही उनकी यात्रा को लेकर विवाद एक बार फिर से खड़ा हो गया है। सिर्फ 10 दिन में यात्रा पूरी करके लौटने वाले वो हिंदुस्तान के शायद पहले शख्स होंगे। यह शक जताया जा रहा है कि संभवत: उन्हें चीनी सेना ने अपने हेलीकॉप्टर या गाड़ी पर बिठाकर कैलाश यात्रा करवाई। राहुल सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए कुछ देर वहां रुके होंगे और फिर वापस लौट आए। कैलाश मानसरोवर जाने वाले तमाम लोगों का भी यही कहना है कि अगर कोई चलकर वहां जाता है तो इतनी जल्दी लौट ही नहीं सकता। इतना ही नहीं लौटते ही वो भारत बंद में पदयात्रा नहीं कर सकता। जो सबसे बड़ा सबूत है वो ये कि कैलाश मानसरोवर जाने वालों को चेहरे पर सनबर्न हो जाते हैं। लोगों के चेहरे बिल्कुल काले या फिर लाल हो जाते हैं। जबकि राहुल गांधी के चेहरे पर ऐसे कोई निशान नहीं हैं।

21 दिन की यात्रा 10 दिन में कैसे?

पवित्र कैलाश पर्वत तक पहुंचने के लिए भारत से दो रास्ते हैं। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होते हुए है जिसमें लोगों को चलना पड़ता है। इस मार्ग से यात्रा की अवधि 24 दिनों की होती है। दूसरा मार्ग सिक्किम के नाथूला दर्रे से होकर जाता है। इसमें ट्रेकिंग नहीं करनी होती है पूरी यात्रा वाहन से होती है। इसमें 21 दिन लगते हैं। मोदी सरकार आने के बाद ये रास्ता खोला गया है। राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा 31 अगस्त के दिल्ली से शुरु हुई थी। शुरुआत से ही अजीबोगरीब बातें सामने आने लगीं। सबसे पहले पता चला कि राहुल चाहते थे कि चीन के राजदूत उन्हें दिल्ली के वीआईपी लाउंज में एक आधिकारिक क्रार्यक्रम के तहत विदा करें। इस पर चीनी दूतावास ने विदेश मंत्रालय को चिट्ठी भेजकर इजाज़त मांगी। विदेश मंत्रालय ने ये कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि राहुल गांधी न तो किसी संवैधानिक पद पर हैं, न ही किसी ऐसे पद पर कभी रहे हैं। वैसे भी वो दिल्ली से चीन नहीं, बल्कि नेपाल रवाना हुए थे।

राहुल का नेपाल जाना भी एक पहेली

कैलाश जाने के लिए राहुल गांधी नेपाल क्यों गए? ये भी एक रहस्य है। अगर उन्हें नाथूला दर्रे से कैलाश जाना था तो उन्हें बागडोगरा एयरपोर्ट जाना चाहिए था। लेकिन वो नेपाल चले गए। इस यात्रा में वो अकेले नहीं थे रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी के साथ उनके कुछ खास दोस्त और सलाहकार भी थे। उनके दोस्तों में अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ बच्चन के बेटे भीम बच्चन भी उनके साथ थे। मतलब साफ है कि ये कोई धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि मौजमस्ती और सैर-सपाटे वाला टूर था। नेपाल जाने की दो वजहें थीं। पहला ये कि वो काठमांडू का लुत्फ भी उठाना चाहते थे साथ ही राहुल को ये सुझाव दिया गया था कि कैलाश मानसरोवर से पहले अगर पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन हो जाए तो एक पंथ दो काज हो जाएगा। सच्चा शिवभक्त साबित करने में कांग्रेस प्रवक्ताओं को एक ठोस सबूत मिल जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि ये कैसा शिवभक्त है जो काठमांडू तो गया लेकिन पशुपतिनाथ मंदिर नहीं गया? ये भला कैसे हो सकता है कि कोई शिवभक्त काठमांडू एयरपोर्ट तक पहुंच जाए लेकिन बगल में पशुपतिनाथ मंदिर न जाए?

पशुपतिनाथ मंदिर क्यों नहीं गए राहुल?

दरअसल राहुल गांधी अपने दोस्तों के साथ 31 अगस्त को दोपहर एक बजे काठमांडू पहुंचे। फिर वहां उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर जाने की इच्छा जताई। उनके साथ गए लोगों ने काठमांडू के कुछ पुराने नेताओं से बात की। वो 1 तारीख की सुबह पशुपतिनाथ मंदिर जाना चाहते थे। लेकिन जब ये प्रस्ताव आया तो पशुपतिनाथ मंदिर के मैनेजमेंट ने इस विषय पर एक मीटिंग बुलाई, जिसमें ये तय करना था कि राहुल गांधी को हिंदू माना जाए या नहीं। पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ हिंदू ही जा सकते हैं। मंदिर प्रबंधन ने वही फैसला लिया जो 1985 में सोनिया गांधी के लिए लिया था। प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी के रुप में सोनिया काठमांडू गई थी लेकिन इसके बावजूद उन्हें मंदिर में घुसने नहीं दिया गया था। इसी तरह इस बार भी राहुल गांधी के हिंदू होने पर मंदिर प्रबंधन को भऱोसा नहीं था इसलिए राहुल गांधी को मना कर दिया गया।

राहुल की गतिविधियां भी थीं संदिग्ध

राहुल गांधी देश के बड़े नेता हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं। जब वो नेपाल के लिए रवाना हुए तो चीनी राजदूत से औपचारिक विदाई चाहते थे लेकिन जब वो अपने दोस्तों के साथ काठमांडू पहुंचे तो न ही उन्होंने काठमांडू में मौजूद भारतीय उच्चायोग से संपर्क किया न ही विदेश मंत्रालय को कोई खबर दी। काठमांडू पहुचने के बाद राहुल की मित्र मंडली वहां होटल ढूंढने में जुट गई। जब इसका पता उच्चायोग के अधिकारियों को चला तो उन्होंने मदद की और सुरक्षा मुहैय्या कराया। लेकिन, शाम होते ही वो फिर काठमांडू में मौजमस्ती के लिए निकल पड़े। वूडू रेस्तरां में डिनर किया जहां ये विवाद खड़ा हो गया कि उन्होंने चिकन और सुअर का मांस खाया। राहुल के मांसाहार की खबर भारतीय मीडिया ने नहीं, बल्कि नेपाली मीडिया ने दी थी।

मानसरोवर के बजाय ल्हासा क्यों गए?

पशुपतिनाथ मंदिर में एंट्री नहीं मिलने के बाद राहुल अगले दिन अपने दोस्तों के साथ काठमांडू से तिब्बत के ल्हासा रवाना हो गए। उन्होंने दोपहर 12:10 बजे वाली एयर चाइना 408 की फ्लाइट पकड़ी। सवाल ये है कि वो ल्हासा क्यों गए? ये तो मानसरोवर का रास्ते में पड़ता नहीं है। दरअसल ये शहर तो मानसरोवर के ठीक उल्टी दिशा में हैं। राहुल गांधी ल्हासा इसलिए गये क्योंकि मौजमस्ती करने वालो और अमीरों के लिए मानसरोवर का रास्ता ल्हासा से गुजरता है। राहुल गांधी ल्हासा में 2-3 दिन रुके। आराम किया। तिब्बत के पठारी वातावरण में खुद को ढाला और फिर ल्हासा से फ्लाइट के जरिए न्गोरा शहर पहुंचे। तिबब्त का ये शहर मानसरोवर और कैलाश के सबसे करीब है। ये शहर कैलाश से करीब 190 किलोमीटर दूर है लेकिन दोनों को चायनीज नेशनल हाइवे नंबर 219 जोड़ता है। यानि काठमांडू से ल्हासा फिर ल्हासा से न्गारो और वहां से गाड़ी पर बैठ कर मानसरोवर और फिर कैलाश पर्वत तक पहुंचे।

34 घंटे पदयात्रा का झूठ बोला गया!

राहुल गांधी की तरफ से कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने लगातार 34 किलोमीटर तक पैदल रास्ता तय किया। इस दौरान वो घोड़े पर भी बैठ सकते थे, लेकिन नहीं बैठे। लेकिन सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक यह पूरी तरह गलत है। कई ट्रेकर्स ने भी लिखा है कि बेहद कम ऑक्सीजन वाले उस इलाके में 34 किलोमीटर तक इतने कम समय में लगातार चलना एक तरह से नामुमकिन होता है। बीच-बीच में रुककर आराम करना जरूरी होता है। लेकिन खुद को फिट साबित करने के लिए राहुल गांधी ने यह झूठ बताया कि वो 34 किलोमीटर चले। वैसे भी अगर को इतना पैदल चले तो उसे सनबर्न (ऊंचे पहाड़ों पर तेज़ धूप के कारण त्वचा जलना) होना तय था। जो लोग भी कैलाश से लौटते हैं वो काफी काले हो जाते हैं। गोरे लोगों का भी चेहरा बिल्कुल लाल या कत्थई हो जाता है। लेकिन राहुल गांधी को देखकर ऐसा नहीं लगता कि उन्हें कोई सनबर्न हुआ। इसी बात से शक होता है कि वो कार से कैलाश तक पहुंचे होंगे। साथ ही कैलाश यात्रा से आने वाले बिल्कुल फिट व्यक्ति को भी 2-4 दिन आराम करना ही पड़ता है। लेकिन राहुल गांधी अगले ही दिन जिस फुर्ती से भारत बंद कराने निकल पड़े वो बात भी कई लोगों को हजम नहीं हुई।

चीन सरकार के मेहमान बने थे राहुल

कैलाश मानसरोवर कैसी तीर्थयात्रा है इसके बारे में वो लोग बता सकते हैं जो पहाड़ पर मीलों पैदल चल कर मानसरोवर पहुंचते हैं? इस तरह से कैलाश अगर जाना हो तो दो दिन में वहां पहुंचा जा सकता है। लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को ये बताना चाहिए कि उन्होंने नेपाल में क्या क्या किया? ल्हासा में कितने दिन रहे और किस-किस से मिले? मानसरोवर की यात्रा के दौरान चीन की सरकार और एजेंसी से क्या क्या मदद ली? क्योंकि जिस तरह से चीनी राजदूत की तरफ से सरकार को चिट्ठी दी गई उससे तो यही लगता है कि नेपाल से ल्हासा पहुंचने के बाद राहुल की खातिरदारी चीनी सरकार की तरफ से की गई होगी। राहुल गांधी और उनके दोस्तों को तीर्थयात्रा और सैर-सपाटे का फर्क समझ में नहीं आया। यही वजह है कि कैलाश पहुंचते ही तस्वीरें शेयर करने लगे। वीडियो भी अपलोड कर दिया। कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने वाला हर हिन्दू वहां पर थोड़ी-पूजा पाठ और स्नान जरूर करता है। अब तक की तस्वीरों से ऐसा कोई लक्षण नहीं दिखता कि राहुल गांधी ने कैलाश पर्वत की तरफ मुंह करके एक बार श्रद्धा से नमस्कार भी किया होगा।
अवलोकन करें:--
इतना ही नहीं, जिस हिन्दू शब्द में कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों को साम्प्रदायिकता नज़र आती थी, मन्दिर जाने वालों पर टिप्पणियां की जाती थी, आज वही राहुल गाँधी कुर्सी की खातिर एक मन्दिर से दूसरे मन्दिर माथा टेकने जा रहे हैं। दूसरे, मुस्लिम वंश( दादा फ़िरोज़ गाँधी, एक मुस्लिम) पैदा हुआ. हिन्दू कैसे बन सकता है; इस्लाम में तो टीका लगाने और मन्दिरों में पूजा करना पर पाबन्दी है, तो क्या उनका यह सब ड्रामा मात्र किस्सा कुर्सी का नहीं है?
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का गुजरात चुनाव के दौरान मंदिरों में जाकर माथा टेकना कि...

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
क्या राहुल गाँधी ब्राह्मण हैं? राजनीति में जाति, धर्म और मजहब से ऊपर उठकर लोगों की सेवा की जाती है। चुने हुए प्रतिनि...

मुगलवाद को जिस तरह भारत में ज़िंदा रखा जा रहा है और वोट के भूखे नेता कट्टरपंथियों के आगे शीश झुकाते हैं, विश्व में भारत को एक मजाक बना दिया है, विश्व इन करतूतों की वजह से हम पर हँसता है। मक्का जिसे इस्लाम का तीर्थ कहा जाता है, भारत में मुगलों के हिमायती जवाब दें कि मक्का में बानी बिलाल मस्जिद कहाँ है? जहाँ सजदा किए बिना हज पूरा नहीं होता था। किसी माई के लाल में हिम्मत है, सऊदी सरकार के विरुद्ध एक लब्ज़ निकाल सकें। भारत में मुगलों के लिए विधवा-विलाप करने वाले सऊदी सरकार के विरुद्ध मुँह खोलने का अर्थ भलीभाँति जानते है कि कहीं हमारे हज के जाने पर वहाँ की सरकार प्रतिबन्ध न लगा दे। भारत में ही कह सकते हैं "हमारा सिर सिर्फ अल्लाह के आगे झुकता है, किसी और के आगे नहीं", अब कोई इनसे पूछे सऊदी सरकार के विरुद्ध क्यों नहीं ? सऊदी सरकार के आगे झुक गया न सिर, इससे बड़ा प्रमाण और क्या चाहिए?
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने अयोध्या के रामजन्मूभि पर राम मंदिर बनाने का निर्णय ले लिया था। राजीव गांधी को ....
वैसे मत्स्य पुराण, स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण में लिखा है पदयात्रा ही तीर्थ यात्रा है।
ऐश्वर्य लोभान्मोहाद् वागच्छेद यानेन यो नरः।
निष्फलं तस्य तत्तीर्थ तस्माद्यान विवर्जयेत्। (मत्स्य पुराण)
तीर्थयात्रा में वाहन/यान वर्जित है क्योंकि ऐश्वर्य के गर्व से, मोह से या लोभ से जो यान पर बैठकर तीर्थयात्रा करता है, उसकी तीर्थ यात्रा निष्फल हो जाती है। राहुल गांधी ने अपनी तीर्थयात्रा के बारे में सच बोला या झूठ बोला आने वाले समय में उनको मिलने वाले भगवान महादेव के आशीर्वाद से खुद ही स्पष्ट हो जाएगा।