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आतंकवाद को समर्थन देने में पाकिस्‍तान को बड़ा झटका, FATF ने किया ब्‍लैकलिस्‍ट, और हो जाएगा कंगाल

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भागवत गीता में लिखा है, "विनाश काले, विपरीत बुद्धि", जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर शत-प्रतिशत सटीक बैठ रही है। इमरान से पूर्व जितने भी प्रधानमंत्री रहे, सबको मालूम था, कि पाकिस्तान में फौज के संरक्षण में आतंकवाद पल रहा है, लेकिन किसी ने अपना मुँह नहीं खोला। विपरीत इसके भारत पर ही आरोप लगाते रहे, परन्तु क्रिकेटर से नेता बने इमरान ने सबकुछ गुड़-गोबर कर दिया। एक तरफ, पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) की तरफ से आतंकी गतिविधियों को समाप्त करने की चेतावनी मिली होने बावजूद अमेरिका में स्पष्ट बोल दिया कि "पाकिस्तान में 40 के करीब आतंकी संगठन और 40,000 आतंकी सक्रीय हैं।" इमरान के इस वयक्तत्व ने सिद्ध कर दिया कि पाकिस्तान ही आतंकवाद की आरामगृह है और पाकिस्तान सरकार आतंकवाद को समाप्त करने में पूर्णरूप से असफल है। 
आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान को अब कौन और किस आधार पर वित्तीय सहायता देगा? यानि पाकिस्तान क्या भुखमरी का शिकार होगा? जिस आतंकवाद की आड़ में पाकिस्तान भारत को इस्लामिक बनाने की कवायद में जुटा हुआ था, वही आतंकवाद पाकिस्तान को खा गया और इस पर निम्न शेर स्मरण होता है, जो भागवत गीता के सन्देश की भाँति सत्य सिद्ध हो रहा है:-
"पहने थे हार, गला अपना सजाने को,
बन गए हैं सांप, आज हमें डस जाने को।"   
आतंकवाद का समर्थन करने और आतंकी संगठनों को फंडिंग करने वाले पाकिस्‍तान को एक और बड़ा झटका मिला है। शुक्रवार((अगस्त 23) को फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) के एशिया प्रशांत क्षेत्र ग्रुप (एपीजी) ने पाकिस्‍तान को ब्‍लैकलिस्‍ट की सूची में डाल दिया है। ऐसा पाकिस्‍तान की ओर से टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के 40 मानकों में से 32 मानकों में फेल होने पर किया गया है।
एफएटीएफ की ओर से ब्‍लैकलिस्‍ट की सूची में डाले जाने से पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था पर और बुरा असर होगा। अब पाकिस्‍तान को वैश्विक स्‍तर कर्ज लेने में और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अभी पाकिस्‍तान वैसे भी कंगाली के दौर से गुजर रहा है। कश्‍मीर मुद्दे पर उसे अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बेइज्‍जती भी झेलनी पड़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्‍तान आतंकवाद से लड़ने के लिए अपने कमिटमेंट में विफल रहा है। ये कदम एपीजी की बैठक में उठाया गया है। ऑस्‍ट्रेलिया के कैनबरा में हो रही एपीजी की बैठक का शुक्रवार(अगस्त 23) को अंतिम दिन था। एफएटीएफ जी-7 देशों के ओर से संस्‍थापित अंतरसरकारी संगठन है। इसकी स्‍थापना 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ने के लिए किया गया था। 2001 में इसने आतंकी फंडिंग से भी लड़ने को लेकर काम शुरू किया था। इसका सचिवालय पेरिस में है।
अवलोकन करें:-
इतिहास साक्षी है, जब-जब भारत ने पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, भारत को मिला, कारगिल, पठानकोट, उरी और अब पुलवामा। ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो से लेकर पता नहीं कितने नेता भारत से हज़ार सालों तक लड़ने की बात कह चुके हैं। जो प्रमाणित करता है कि पाकिस्तान दोस्ती के काबिल ही नहीं।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अभी तक़रीबन महीना भर पहले पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने प्रधानम...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रारम्भ से ही पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवा...

इससे पहले पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में था। सूत्रों के मुताबिक FATF ने जांच में पाया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों को फंडिंग से जुड़े 40 में से 32 स्टैंडर्ड पर पाकिस्तान खरा नहीं उतर पाया। इसके बाद पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। पाकिस्तान पर इस कार्रवाई के बाद अब उसकी आर्थिक हालात और पतली होनी तय है। पाकिस्तान को दुनिया में कर्ज मिलना और अधिक मुश्किल हो जाएगा।FATF की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान न सिर्फ जनवरी की समय सीमा में एक्शन प्लान लागू करने में नाकाम रहा है। बल्कि मई 2019 तक कार्ययोजना को पूरा करने में भी असफल रहा।
APG की फाइनल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान टेरर फंडिंग के ख़िलाफ़ सुरक्षा उपायों के लिए 11 मापदंडों में से 10 को पूरा करने में विफल रहा है। APG ने यह भी पाया है कि इस्लामाबाद की तरफ से कई मोर्चों पर खामियाँ हैं। साथ ही मनी लॉड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली कोशिशों में तमाम ख़ामियाँ हैं। पाकिस्तान की तरफ से 50 पैमानोंं पर सुधार के दावों को लेकर कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। बता दें कि APG एक अंतर सरकारी संगठन है जो क्षेत्र में टेरर फंडिंग और मनी लॉड्रिंग पर नज़र रखता है।
FATF ने जून, 2018 में पाकिस्तान को संदिग्ध सूची में डाल दिया था। इसका कारण अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और इंग्लैंड द्वारा दबाव बनाया जाना था। आपको बता दें कि FATF की ओर से ब्लैक लिस्ट करने का मतलब होता है कि उक्त देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को वित्तपोषण के ख़िलाफ़ मुहीम में अपना सहयोग नहीं कर रहा है।  
अगर पाकिस्तान को FATF द्वारा भी ब्लैक लिस्ट कर दिया गया तो उसे वर्ल्ड बैंक, IMF, ADB, यूरोपियन यूनियन जैसी संस्थाओं से क़र्ज़ मिलना मुश्किल पड़ जाएगा। इसके अलावा मूडीज, स्टैंंडर्ड एंड पूअर और फिच जैसी एजेंसियाँ उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश का बड़ा बयान : "हर वक्त मोदी को 'खलनायक' की तरह पेश करने से कुछ हासिल नहीं होगा"

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमन्त्री मोदी के शासन का मॉडल 'पूरी तरह नकारात्मक गाथा' नहीं है और उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करना और हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार(अगस्त 21, 2019) को कहा- “यह वक्त है कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझें, जिसके कारण वह सत्ता में लौटे। इसी के कारण 30% मतदाताओं ने उनकी सत्ता में वापसी करवाई।” लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 37.4% वोट मिले, जबकि सत्तारूढ़ NDA को कुल मिलाकर 45% वोट हासिल हुए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर यह बयान जयराम रमेश ने राजनीतिक विश्लेषक कपिल सतीश कोमीरेड्डी की किताब ‘मालेवॉलेंट रिपब्लिक: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द न्यू इंडिया’ का विमोचन करते हुए दिए।
जयराम रमेश ने कहा- “वह (मोदी) ऐसी भाषा में बात करते हैं जो उन्हें लोगों से जोड़ती है। जब तक हम यह न मान लें कि वह ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें जनता सराह रही है और जो पहले नहीं किए गए, तब तक हम इस व्यक्ति का मुकाबला नहीं कर पाएँगे।”
इसके आगे कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर आप हर समय उन्हें (मोदी को) खलनायक की तरह पेश करने जा रहे हैं, तो आप उनका मुकाबला नहीं कर पाएँगे। UPA के दौरान मनमोहन सिंह सरकार में ग्रामीण विकास और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय संभालने वाले जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि वह किसी से प्रधानमंत्री की सराहना या तारीफ करने के लिए नहीं कह रहे है बल्कि वे चाहते हैं कि राजनीतिक वर्ग कम से कम उन बातों को माने जो वह शासन में लेकर आए खासतौर से ‘शासन के अर्थशास्त्र’ के संदर्भ में।

‘शासन की राजनीति पूरी तरह अलग है’

जयराम रमेश ने कहा- “मैं आपको बता दूँ कि जब शासन के अर्थशास्त्र की बात आती है, तो यह पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं है, शासन की राजनीति पूरी तरह अलग है। मोदी के शासन मॉडल से जिस प्रकार के सामाजिक संबंध सृजित हुए हैं वे भी पूर्णत: भिन्न हैं।” अपने बयान के तर्क में जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कुछ उपलब्धियों, जैसे- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUJ) का उदाहरण देते हुए बताया कि वह कैसे प्रधानमंत्री मोदी के लिए सफल साबित हुई।

‘हम सबने मोदी की योजनाओं का मजाक उड़ाया, लेकिन ..’


नरेंद्र मोदी की जनता के बीच पकड़ का उदाहरण देते हुए जयराम रमेश ने कहा- “साल 2019 में राजनीतिक विमर्श में हम सभी ने उनकी एक या दो योजनाओं का मजाक उड़ाया लेकिन सभी चुनावी अध्ययनों में यह सामने आया कि पीएमयूजे अकेली ऐसी योजना रही जो उन्हें करोड़ों महिलाओं से जोड़ पाई। इसने उन्हें ऐसा राजनीतिक खिंचाव दिया जो उनके पास 2014 में नहीं था।” उन्होंने कहा कि पिछले दशक में ऐसा कुछ हुआ जिसने मोदी को 2009 के आम चुनाव में राष्ट्रीय राजनीति में एक मामूली नेता से ऐसा व्यक्ति बना दिया, जिसने लगातार चुनाव जीते।
मनमोहन सिंह सरकार में ग्रामीण विकास और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय संभालने वाले रमेश ने साफ किया कि वह किसी से प्रधानमंत्री की सराहना या तारीफ करने के लिए नहीं कह रहे है बल्कि चाहते हैं कि राजनीतिक वर्ग कम से कम उन बातों को माने जो वह शासन में लेकर आए खासतौर से 'शासन के अर्थशास्त्र' के संदर्भ में। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने कहा, 'मैं आपको बता दूं कि जब शासन के अर्थशास्त्र की बात आती है तो यह पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं है, शासन की राजनीति पूरी तरह अलग है।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके शासन मॉडल से जिस प्रकार के सामाजिक संबंध सृजित हुए हैं वे भी पूरी तरह से अलग हैं। 
अपनी बात को साबित करने के लिए रमेश ने पीएमयूजे का उदाहरण दिया कि वह कैसे प्रधानमंत्री के लिए सफल साबित हुई। कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य ने कहा, 'साल 2019 में राजनीतिक विमर्श में हम सभी ने उनकी एक या दो योजनाओं का मजाक उड़ाया लेकिन सभी चुनावी अध्ययनों में यह सामने आया कि पीएमयूजे अकेली ऐसी योजना रही जो उन्हें करोड़ों महिलाओं से जोड़ पायी। इसने उन्हें ऐसा राजनीतिक खिंचाव दिया जो उनके पास 2014 में नहीं था।' 
यदि कांग्रेस जयराम रमेश, जनार्दन द्विवेदी आदि बुद्धिजीवियों के परामर्श पर चलती, कांग्रेस की इतनी बुरी दुर्दशा नहीं होती। सोनिया और राहुल गाँधी दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर, चिदंबरम और सलमान खुर्शीद जैसे मंदबुद्धि वाले नेताओं पर ही आश्रित रही, जिनका काम केवल सोनिया के हिन्दू विरोधी अभियान को इस्लामिक आतंकवाद को बचाने की खातिर बेकसूर हिन्दू साधु, संत और साध्वियों को जेल में डाल "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर हिन्दुओं को कलंकित करने के लिए एक के बाद एक योजना बनाकर देश को भ्रमित कर परिवार से मालपुए खाते रहे। 
दूसरे, राहुल के सलाहकारों ने राहुल से "आलू से सोना" बनाने की बात तो कहलवा दी, लेकिन इस बात को जमीन पर नहीं उतारा, जिस कारण राहुल एक मजाक बनकर रह गए। सलाहकारों को चाहिए था, कि अमेठी या रायबरेली में एक आलू के चिप्स बनाने की फैक्ट्री चालू करवा देते। अमेठी छोड़ वायनाड जाने की जरुरत ही नहीं पड़ती और अमेठी से एक बार फिर स्मृति ईरानी को पराजित कर सकते थे। लेकिन चाटुकारों ने ऐसा नहीं होने दिया। 
कांग्रेस की हिन्दू विरोधी वीडियो देखिए:-   
कांग्रेस की भूमिका पर जयराम रमेश से खास बातचीत

भारत से रिश्‍ते खत्‍म कर, बर्बादी की राह पर पाकिस्‍तान

जम्‍मू-कश्‍मीर पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले से बौखलाया पाकिस्‍तान, कही ये बात...
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छे 370 खत्म कर विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद से पाकिस्तान की बेचैनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आलम ये है कि पाक पीएम तीन दिन में दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के साथ बैठक कर चुके हैं। पाकिस्तानी संसद भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को राजनीतिक दबाव में अगस्त 7 को भारत संग व्यापारिक और राजनयिक संबंध खत्म करने की घोषणा तक करनी पड़ी। लेकिन उसके लिए यह कदम आत्‍मघाती साबित होगा। इसकी वजह भी बेहद साफ है। भारत को छोड़कर वह अरबों डॉलर का व्‍यापार करने के लिए चाहकर भी बाजार तैयार नहीं कर सकेगा। ऐसे में हमारे लिए भी ये जानना जरूरी है कि आखिर पाकिस्तान के इस फैसले का असर उस पर और भारत पर क्‍या होगा। साथ ही जान लेते हैं कि दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक गणित क्‍या है और इस मुद्दे पर क्‍या है विशेषज्ञ की राय।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को कुल 2.3 लाख अरब रुपये का निर्यात किया। इसी वर्ष भारत ने पाकिस्तान से कुल 3.6 लाख अरब रुपये का सामान आयात किया। आसान भाषा में समझें तो पिछले वित्तीय वर्ष में भारत के मुकाबले पाकिस्तान ने हमें 1.3 लाख अरब रुपये का ज्यादा सामान बेचा है। मतलब भारत, पाकिस्तान से खरीदता ज्यादा है और बेचता कम है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए भारत एक बड़ा बाजार है, जहां पिछले वर्ष उसने कुल 3.6 लाख अरब रुपये का व्यापार किया। वहीं, पाकिस्तान अपने आवाम की जरूरी आवश्यकतें पूरी करने के लिए भी काफी हद तक भारत पर निर्भर है।
क्या कहते हैं वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े?
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मार्च में पाकिस्तान का आयात 92 प्रतिशत घटकर लगभग 24 लाख डॉलर रह गया था, जो मार्च 2018 में 3.4 करोड़ डॉलर था। वित्त वर्ष 2018-19 की जनवरी-मार्च अवधि के दौरान पाकिस्तान से आयात 47 प्रतिशत घटकर 5.3 करोड़ अमरीकी डॉलर रहा। पाकिस्तान में भारत का निर्यात भी मार्च में लगभग 32 प्रतिशत घटकर 17 करोड़ अमरीकी डॉलर के आसपास रहा है। हालांकि, 2018-19 के दौरान निर्यात 7.4 प्रतिशत बढ़ा।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि भारत से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने के बाद पाकिस्तान 3.6 लाख रुपये के व्यापार की भरपाई कैसे करेगा। यहां ये भी जानना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के मुकाबले पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते बहुत सीमित हैं। ऐसे में पहले से ही तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब होना तय है। पाकिस्तान ने अभी महंगाई दर लगभग 10.35 प्रतिशत है। वर्ष 2013 में पाकिस्तान की महंगाई दर अब तक सबसे ज्यादा 10.9 फीसद थी। जानकारों का अनुमान है कि भारत से व्यापारिक रिश्ते खत्म कर पाकिस्तान ने अपने लिए मुसीबत बढ़ा ली है। इससे उसकी महंगाई दर 11 फीसद तक पहुंचने का अनुमान है। मतलब पहले ही महंगाई की मार झेल रही पाकिस्तानी आवाम की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।
निर्यातक देशों की सूची में पाक का स्थान 68वां
पाकिस्तान का कुल निर्यात करीब 24.8 बिलियन डॉलर ( लगभग 1757 अरब रुपये) का है और आयात करीब 55.6 बिलियन डॉलर (तकरीबन 3939 अरब रुपये) है। निर्यात के मामले में वह दुनिया के 221 देशों की सूची में 68वें और आयात में वह 47वें नंबर पर है। प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो पाकिस्तान 138वें स्थान पर है। भारत से व्या‍पारिक संबंध खत्म करने के बाद पाकिस्तान को जो 3.6 लाख अरब रुपये का नुकसान होगा, उसके लिए उसे कहीं न कहीं अपनी परिस्थितियों से समझौता करना जरूरी होगा। इसको ऐसे भी देखा जा सकता है कि अमेरिका, जर्मनी और चीन समेत जो भी उसके उत्पादों के बड़े खरीदार हैं, वहां अपने सामान को ज्यादा खपाने का प्रयास करेगा। ऐसे में उसे मजबूरन अपने सामान की कीमतों को कम करना होगा। ऐसे में मुमकिन है कि वह अपना सामान तो बेचने में सफल हो जाए, लेकिन भारत से हो रहे व्यापारिक घाटे की भरपाई नहीं कर पाएगा।
पाक के लिए मुश्किल है घाटे की भरपाई
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में अर्थशास्त्री राधिका पांडे कहती हैं पाकिस्तान द्वारा व्यापार संबंध खत्म करने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी दो वजह हैं। पहला भारत का पाकिस्तान के साथ जो ट्रेड है वो डायरेक्ट रूट से बहुत कम है। पाकिस्तान के साथ हमारा जो ज्यादातर व्यापार है वो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास्ते से होता है। इस रूट से व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ये पहले की तरह ही जारी रहेगा। भारत के भी ज्यादातर उत्पाद इसी रूट से पाकिस्तान को निर्यात होते हैं। डायरेक्ट व्यापार बहुत कम है। बावजूद जो भी नकारात्मक असर होगा वो पाकिस्तान पर होगा, क्योंकि भारत के मुकाबले उनकी अर्थव्यवस्था काफी छोटी है। पाकिस्तान, भारत पर ज्यादा निर्भर है।
हमारी अर्थ व्यवस्था 2900 बिलियन डॉलर (लगभग 2054 खरब रुपये) है। पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था 300 बिलियन डॉलर (करीब 212 खरब रुपये) से भी कम है। उनका फॉरेन रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) भी भारत के मुकाबले बहुत कम है। पाकिस्तान, भारत से हुए नुकसान की भरपाई जल्दी नहीं कर सकेगा। जब दो देश आपस में व्यापार शुरू करते हैं, तो एक-दूसरे की अर्थ व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंच में उनकी छवि को भी देखते हैं। पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगे हैं। उसकी छवि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के तौर पर है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए शार्ट टर्म में इस नुकसान की भरपाई कर पाना संभव नहीं होगा।
भारत पर क्या होगा असर
भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान को 2.3 लाख अरब रुपये का सामान निर्यात किया था। इससे बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ सकता है कि भारत को भी पाकिस्तान से होने वाले व्यापार में घाटा उठाना पड़ेगा। हालांकि, ऐसा नहीं है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तनावपूर्ण हैं। लिहाजा, भारत से पाकिस्तान को निर्यात होने वाले सामान में पहले ही भारी कटौती हो चुकी है। यहा ये भी जानना जरूरी है कि भारत ने 1996 में पाकिस्तान को व्यापार के लिए सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा दिया था, जो पुलवामा हमले के बाद वापस ले लिया गया है। वहीं पाकिस्तान ने भारत को कभी MFN का दर्जा नहीं दिया।
इन जरूरतों को कैसे पूरा करेगा भारत?
इसके बाद भी बहुत से लोगों के जेहन में ये सवाल होगा कि भारत-पाकिस्तान से जो सामान मंगाता है, वो जरूरत कैसे पूरी करेगा। यहां, आपके लिए ये जानना जरूरी है कि भारत, पाकिस्तान से जो सामान मंगाता है उसमें ड्राई फ्रूट्स, कपास, ताजे फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद और खनिज अयस्क जैसे सामान शामिल हैं। पुलवामा के बाद से ही भारत ने पाकिस्तान से आयातित सभी सामानों पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया है। लिहाजा पाकिस्तान से आयात बहुत कम हो गया है। इसकी भरपाई के लिए भारत ने अन्य पड़ोसी देशों से आयात बढ़ाया है।
 इन चीजों के लिए भारत पर निर्भर है पाकिस्तानइन चीजों के लिए भारत पर निर्भर है पाकिस्तान 
भारत के साथ व्यापारिक संबंध खत्म करने के फैसले से खुद पाकिस्तान को झटका लगा है। चीजें आयात नहीं होने से महंगाई बढ़ रही है। खाने के लाले पड़ रहे हैं। पाकिस्तान प्याज और टमाटर जैसी खाद्य वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर है। व्यापार बंद होने से अब पाकिस्तान में इन चीजों की मांग और कीमत बढ़ गई है। इसके अलावा केमिकल्स के लिए भारत पर निर्भर है। एक्सपर्ट्स और ट्रेडर्स की मानें तो इससे पाकिस्तान को ही झटका लगेगा। भारत आयात के मुकाबले पाकिस्तान के साथ सामान निर्यात ज्यादा करता है। साल 2018-19 में भारत ने जहां पाकिस्तान ने 49.5 करोड़ की चीजें खरीदी तो वहीं 206.7 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया। निर्यात की बात करें तो भारत पाकिस्तान को सबसे ज्यादा केमिकल, प्लास्टिक, रबड़ और मशीन और उनके पार्ट-पुर्जें बेचता है।
ये चीजें पाकिस्तान को बेचता है भारत 
 ये चीजें पाकिस्तान को बेचता है भारतअगर बात करें कि भारत पाकिस्तान को कौन-कौन सी चीजें बेचता है तो भारत केमिकल और इंडस्ट्री से संबंधित उत्पाद पाकिस्तान को सबसे ज्यादा बेचता है। इसके बाद टेक्सटाइल और टेक्सटाइल आर्टिकल्स बेचता है। तीसरे नंबर पर प्लास्टिक और रबड़ उत्पाद, चौथे नंबर पर सब्जियां और पांचवें नंबर पर मशीन उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट-पुर्जे बेचता है।
पाकिस्तान से क्या खरीदता है भारत 

अगर बात करें कि भारत कौन-कौन सी चीजें पाकिस्तान से खरीदता है तो लिस्ट में सबसे ऊपर खनिज उत्पाद हैं। इसके बाद सब्जियां,टेक्सटाइल आर्टिकल्स, केमिकल इंडस्ट्री । इसके अलावा चमड़ा, खाल, लेदर, घोड़े की जीनसाजी, ड्राई फ्रूट, मसाले, शॉल आदि खरीदता है।
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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद बौखलाये पाकिस्तान को भारत ने करारा जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान के सारे ....

UN सर्वे: पाकिस्तान की आर्थिक हालत नेपाल, बांग्लादेश से भी बदतर होने के कगार पर

इमरान खानइन दिनों पाकिस्तान का हाल काफी बुरा है। वहाँ की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है और महंगाई आसमान छू रही है। जरूरत का हर सामान दुगने-तिगुने दामों पर मिल रहा है। खाने-पीने से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमताें में बेतहाशा बढ़ाेतरी दर्ज की गई है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्‍तान के लिए एक और बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र की एक आर्थिक रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस साल 2019 में पाकिस्‍तान की जीडीपी वृद्धि दर सबसे कम 4.2% और 2020 में मात्र 4% रह सकती है। बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान की जीडीपी दर नेपाल, बांग्‍लादेश और मालदीव से भी पीछे रह सकती है।
एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की तरफ से ‘एंबिशंस बियॉन्ड ग्रोथ’ शीर्षक से जारी की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि 2019 में पाकिस्तान की जीडीपी की वृद्धि दर इस क्षेत्र में सबसे कम 4.2% रहने का अनुमान है। जबकि इसी वर्ष बांग्‍लादेश की जीडीपी 7.3%, भारत की 7.5%, मालदीव और नेपाल की 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
पाकिस्तान में पर्यावरणीय पतन खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है, जो कि विकास की उपलब्धियों के लिए खतरा बन रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी कहा था कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में सुस्त होकर 3.9% रहेगी। एडीबी ने ‘व्यापक आर्थिक चुनौतियों’ का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 में 5.2% से गिरकर 2019 में 3.9% पर आने का अनुमान है। 
एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, कृत्रि क्षेत्र में सुधार के बावजूद 2018 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति ने बजट और चालू खाते के घाटे को व्यापक रूप से बढ़ाया और विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है। एडीबी ने कहा कि जब तक वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है, तब तक वृद्धि के लिए परिदृश्य धीमा बना रहेगा, ऊँची मुद्रास्फीति रहेगी, मुद्रा पर दबाव बना रहेगा।