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अमेरिका में राहुल गांधी का जमात-ISI-जॉर्ज सोरोस और सुनीता विश्वनाथ के साथ क्या है कनेक्शन?

सोनिया गाँधी के सक्रीय राजनीति ने आने से लेकर आज राहुल और प्रियंका तक की बयानबाज़ी से राजनैतिक पंडित कांग्रेस को सचेत करते आ रहे हैं, लेकिन परिवारभक्ति में अंधी हुई पार्टी ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, और पार्टी निरन्तर डूबती जा रही है। पार्टी जनता की नब्ज तक को पढ़ने में पूर्णरूप से असफल रही है। अभी भी हिन्दू विरोध और मुस्लिम तुष्टिकरण को ही अस्त्र-शस्त्र मान चल रही है। भारत का वास्तविक इतिहास खुलना शुरू हो चुका है, फिर भी कांग्रेस की वही गतिविधियां रुकने का नाम नहीं ले रही। भारत विरोधी लोगों से निकटता बड़ाई जा रही है। जो कांग्रेस के लिए जरुरत से ज्यादा नुकसानदायक हो रही है। यदि यही हालत रहे, फिर वह दिन भी दूर नहीं, जब कांग्रेस एक इतिहास बन रह जाएगी। परिणाम सामने है कि क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अधिक प्रभावी बन रहे हैं। 
राहुल गांधी इन दिनों एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर हैं। वह 30 मई को अमेरिका पहुंचे और तीन शहरों के दौरे के आखिरी चरण में वह 4 जून को न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक सभा के साथ अपनी यात्रा समाप्त करने वाले हैं। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हो रहा है उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।

जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ
सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।

हिंदुओं के विरोध में मुसलमानों के पक्ष में एजेंडा चलाती है सुनीता विश्वनाथ
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की सह-संस्थापक हैं, इसके जरिये भी वह हिंदुओं के खिलाफ एजेंडा चलाती है और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) जैसे कट्टर संगठनों के साथ कई कार्यक्रमों की सह-मेजबानी करती हैं। पश्चिम में व्यापक जमात-आईएसआई सांठगांठ का हिस्सा हैं और भारत में सामाजिक भेदभाव के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उनका काम है। उनके अन्य संगठन वुमन फॉर अफगान वीमेन को सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।

मुस्लिम4पीस के कार्यक्रम में सुनीता का हिंदू और मोदी-विरोधी भाषण
अमेरिका में “डिसमेंटल ग्लोबल हिंदुत्व” अभियान चलाने वाली सुनीता सोरोस द्वारा वित्तपोषित कई संगठनों के साथ जुड़ी हुई है। मुस्लिम4पीस संगठन द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में उन्हें हिंदू, मोदी-विरोधी भाषण देते हुए साफ देखा जा सकता है। इससे यह आशंका दृढ़ हो जाती है कि भारत में सत्ता-परिवर्तन की मंशा पाले लोगों द्वारा राहुल गांधी को तैयार किया जा रहा है?

बैठक में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एजेंट भी शामिल
आपने सुनीता विश्वनाथ के साथ राहुल गांधी की तस्वीर देखी। इस बैठक में और कौन-कौन मौजूद थे? अब्दुल मलिक मुजाहिद द्वारा प्रवर्तित भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद के जिहादी – आईएसआई फ्रंटमैन भी थे। हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स केवल मुजाहिद द्वारा समर्थित संगठन है। राहुल गांधी के कांग्रेस यूएसए इनर सर्कल के कनेक्शन के बारे में जानकर गंभीर चिंताएं होती हैं। एक चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन इंगित करता है कि सर्कल के एक सदस्य को सोरोस द्वारा सीधे वित्त पोषित किया जाता है, जिसका आईएसआई और जमात ए इस्लामी से जुड़े संगठनों से संबंध है, जो आतंकी गतिविधियों के लिए जाना जाता है।

सुनीता विश्वनाथ के पाकिस्तानी जमात-ए-इस्लामी से संबंध
हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की संस्थापक सुनीता विश्वनाथ एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका कथित तौर पर पाकिस्तानी जमात-ए-इस्लामी के एक प्रमुख व्यक्ति अब्दुल मलिक मुजाहिद के साथ करीबी संबंध हैं, जो भारत में आतंकी हमलों में सीधे तौर पर शामिल होने के लिए जाना जाता है। मुजाहिद का भारतीय प्रवासी संगठनों पर प्रभाव स्पष्ट है। उनकी वेबसाइट पर भारत के खिलाफ एजेंडा के रूप में ‘सेव इंडिया फ्रॉम फासिज्म’ और ‘सेव कश्मीर’ आदि के पोस्टर-बैनर देखे जा सकते हैं।

सुनीता विश्वनाथ का आईएसआई और खालिस्तानियों से भी गहरा संबंध
सुनीता विश्वनाथ के बारे में और जानकारी हासिल करने पर पता चलता है उनका आईएसआई और खालिस्तानियों से भी गहरा संबंध है। इसके साथ ही कई अन्य संगठनों से भी संबंध है जो उनके भारत विरोधी होने को उजागर करते हैं। वह अमेरिका में आईएसआई समर्थित खालिस्तानी गुर्गों, भजन सिंह भिंडर और पीटर फ्रेडरिक के साथ एलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी की सह-संस्थापक भी हैं।

भारत विरोधियों का कांग्रेस में सीधी पहुंच का क्या है मतलब?
सुनीता विश्वनाथ का विवादों से नाता यहीं तक नहीं है। सुनीता ने कई कार्यक्रमों का सह-आयोजन किया है और IAMC जैसे संगठनों के साथ सहयोग किया है, जो 2014 से पहले से ही भारत के खिलाफ खुले तौर पर पैरवी कर रहा है, देश के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करता रहा है। इन खुलासों से संकेत मिलता है कि अमेरिका में सुनीता विश्वनाथ और राहुल गांधी की बैठक किसी खतरनाक मंसूबे के तहत हुई। वे भारत के खिलाफ किसी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। यह सोचना भी परेशान करने वाला है कि इस तरह की सोच वाला कोई व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के अमेरिकी संगठन के अंदर तक सीधी पहुंच आखिर कैसे प्राप्त कर सकता है।

सुनीता विश्वनाथ भगवान शिव को बता चुकी ‘चिलमबाज’
हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स नामक संगठन की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ हिंदुओं के नाम पर हिंदुओं के खिलाफ झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करती रही है। ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ के नैरेटिव का अभियान चलाकर लोगों को भ्रमित करने का काम करती रही है। वहीं सुनीता हिंदू देवी देवताओं को बदनाम करने के लिए उल-जुलूल बातें भी करती है। कभी वह भगवान शिव को चिलमबाज बताती है तो कभी कहती है हिंदुओं में शराब-सिगरेट का निषेध नहीं है, ये देवताओं को भी चढ़ाया जाता है।

राहुल गांधी को जेलेंस्की बनाना चाहता है डीप स्टेट!
राहुल गांधी हाल के समय में चीन का जिक्र बार-बार करते हैं। चीन भारत में घुसपैठ कर रहा है। चीनी सैनिक भारतीय जवानों को पीटते हैं। चीन में काफी सद्भावना है। इस तरह के न जाने कितने ही बयान हैं। लेकिन हाल में ब्रिटेन के दौरे के दौरान उनके जुबान से वह बात भी निकल गई जिसका उन्हें सब्जबाग दिखाया गया था। उन्होंने कहा- जैसा रूस ने यूक्रेन में किया, वही भारत के खिलाफ दोहरा सकता है चीन। पश्चिमी देशों के डीप स्टेट (दुनिया को अपने हिसाब से चलाने वाले) ने मई 2022 में राहुल गांधी के मेकओवर और पीएम उम्मीदवार बनाने की पटकथा तैयार की थी। उस वक्त राहुल भी ब्रिटेन के दौरे पर थे। उसी वक्त यह तय हुआ था कि जिस तरह यूक्रेन में आंदोलन खड़ा कर जेलेंस्की को प्रधानमंत्री बनाया गया उसी तरह 2024 में पीएम मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर राहुल की ताजपोशी करवाई जाएगी।
डीप स्टेट के प्लान के मुताबिक बयान दे रहे हैं राहुल गांधी
राहुल के मेकओवर की पटकथा की कहानी भारत जोड़ो यात्रा से शुरू होती है। इसके बाद पटकथा के मुताबिक पीएम मोदी की छवि खराब करने के लिए बीबीसी डॉक्यूमेंट्री, अडानी समूह को बदनाम करने के लिए हिंडनबर्ग रिपोर्ट और ANI, RSS जैसी संस्थाओं पर हमले किए जा रहे हैं। फिर रामचरितमानस विवाद के जरिये हिंदू धर्म को बदनाम करना और खालिस्तान मुद्दे को हवा देकर देश को आंदोलन की आग में झोंकने की साजिश रची जा रही है। यह कोई संयोग नहीं है कि खालिस्तान के नए झंडाबरदार अमृतपाल सिंह जो बात कहता है वही राहुल गांधी भी कहते हैं। RSS के खिलाफ एक तरफ कनाडा में रिपोर्ट तैयार होती है उसे आतंकवादी संगठन करार दिया जाता है तो दूसरी तरफ राहुल गांधी लंदन में RSS के खिलाफ जहर उगलते हैं। RSS को लेकर उनसे प्लांटेड सवाल किए जाते हैं।
सोरोस ने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने का किया ऐलान
अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस ने साल 2020 में वैश्विक स्तर पर राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने की बात कही थी। उसने कहा था कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना ‘राष्ट्रवादियों से लड़ने’ के लिए की जाएगी। सोरोस ने ‘अधिनायकवादी सरकारों’ और जलवायु परिवर्तन को अस्तित्व के लिए खतरा बताया था। सोरोस ने कहा था कि राष्ट्रवाद अब बहुत आगे निकल गया है। सबसे बड़ा और सबसे भयावह झटका भारत को लगा है, क्योंकि वहां लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नरेंद्र मोदी भारत को एक हिन्दू राष्ट्रवादी देश बना रहे हैं।

डीप स्टेट भारत की तरक्की से खुश नहीं
डीप स्टेट भारत की तरक्की से खुश नहीं है और वह चाहता कि किसी तरह से भारत को कमजोर किया जाए। इसीलिए उसने प्यादे के रूप में राहुल गांधी को चुना है। राहुल गांधी इसके लिए योग्य उम्मीदवार हैं। उनके पास अपना कोई विजन नहीं है। डीप स्टेट जैसा कहेगा वो वैसा ही करते जाएंगे। जैसा कि यूक्रेन में हो रहा है। कुल मिलाकर डीप स्टेट चाहता है कि पश्चिमी देशों को चुनौती देने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारत और चीन के बीच रूस-यूक्रेन की तरह युद्ध छिड़ जाए जिससे ये दोनों देश कमजोर हो जाएं। और राहुल गांधी लालचवश में उनके एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें इस बात से तनिक भी दुख नहीं है कि इससे देश का क्या होगा।

क्या राहुल के भाषण की स्क्रिप्ट अमेरिका में लिखी जा रही?
करण थापर के एक शो में सुनीता ने कहा था कि भारत के हिंदुओं के लिए जरूरी है कि वो हिंदुत्व से लड़ें क्योंकि जो आज हो रहा है वो नरसंहार की शुरुआत है। सुनीता की तरह ही राहुल गांधी भी पिछले कुछ समय से हिंदू और हिंदुत्व को अलग बताकर प्रोपेगेंडा फैलाने में जुटे हैं। लेकिन इससे इस बात को बल मिल रहा है कि क्या राहुल के भाषण की स्क्रिप्ट अमेरिका में लिखी जा रही है।
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राहुल गांधी ने अमेरिका में ‘मोहब्बत की दुकान’ के लिए मस्जिदों से आये ग्राहकों में भारत के खिला

राहुल के आयोजकों के नाम शाहीन बाग की लिस्ट जैसी क्यों?
अमेरिका में राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजकों में से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार है- फ़्रैंक इस्लाम, माजिद अली, नियाज़ ख़ान, जावेद सैयद, मोहम्मद असलम, मीनाज़ ख़ान, अकील मोहम्मद आदि। इन नामों को देखने ऐसा लगता है कि गोया यह शाहीन बाग की वोटर लिस्ट हो। लेकिन नहीं, ये उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने राहुल गांधी का अमेरिका में प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ कराया। इनमें से कई कश्मीर में कट्टरवाद के समर्थक हैं, यानी के आतंकवाद के समर्थक हैं। अब इससे यह समझना आसान हो जाता है कि राहुल गांधी क्यों सनातन संस्कृति का मजाक बना रहे थे और बस मुसलमान परेशान हैं, मुसलमानों को सेकेंड क्लास सिटीजन माना जाता है, भारत में यही सब गाना गा रहे थे।

जिस पाकिस्तानी पत्रकार ने की भारत की जासूसी, उसे नहीं बुलाने पर भड़क गए थे हामिद अंसारी: आयोजक का दावा, कहा- झूठ बोल रहे पूर्व उपराष्ट्रपति, सरकार करे जाँच

                           हामिद अंसारी और नुसरत मिर्जा (लाल घेरे में) (फोटो साभार: @adishcaggarwala)
पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) द्वारा भारत आकर जासूसी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सरकार से इसकी जाँच की माँग की है। डॉ. अग्रवाल इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के अध्यक्ष भी हैं।

बयान में बताया गया है कि अंसारी का कार्यालय चाहता था कि मिर्जा को सम्मेलन में बुलाया जाए। इसे स्वीकार नहीं किए जाने पर वे नाराज भी हो गए थे। डॉ. अग्रवाल ने जिस सम्मेलन को लेकर यह दावा किया है ​वह दिल्ली के विज्ञान भवन में 11 और 12 दिसंबर 2010 को आयोजित हुआ ​था।

उन्होंने आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अंसारी और मिर्जा को एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाया है। बताया है कि इस सम्मेलन में हामिद अंसारी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था। डॉ अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि हामिद अंसारी और उनके दोस्त जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के साथ दोस्ती कर रहे थे।

बयान में कहा गया है कि कि ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी एजेंसियों और जनता को गुमराह करने के लिए जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन के बारे में खुलासा नहीं किया है। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले की जाँच करे, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी से संबंधित है।

बयान में कहा गया है कि अंसारी और रमेश ने केवल 11 और 12 दिसंबर 2010 को विज्ञान भवन में आयोजित न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का ही उल्लेख किया है। इस सम्मेलन में अंसारी ने हिस्सा लिया था। लेकिन नुसरत मिर्जा इसमें आमंत्रित नहीं थे। यहाँ तक ​​कि नुसरत मिर्जा ने भी अपने साक्षात्कार में इस सम्मेलन का उल्लेख नहीं किया है।

डॉ. अग्रवाल का दावा है कि जब इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा था तो तत्कालीन हामिद अंसारी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। अशोक दीवान उस समय उपराष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक थे। बयान में कहा गया है, “दीवान ने मुझे बताया था कि उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) चाहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए। लेकिन हम इस अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सके क्योंकि मिर्जा पाकिस्तानी मीडिया से थे और हमने पाकिस्तान से जजों या वकीलों को आमंत्रित नहीं किया था।”

डॉ अग्रवाल के अनुसार जब दीवान को यह बात पता चली कि हमने मिर्जा को आमंत्रित नहीं किया है, तो उन्होंने सम्मेलन से एक दिन मुझे फोन कर नाराजगी जताई। यह भी बताया कि हामिद अंसारी को यह बुरा लगा है और अब वे केवल बीस मिनट के लिए समारोह में शामिल होंगे। अग्रवाल के अनुसार शुरुआत में अंसारी ने एक घंटे के लिए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति दी थी।

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भारत के 15 राज्यों में घूम कर ISI के लिए जुटाई सूचनाएँ’: भारत के 56 मुस्लिम सांसद थे मददगार-- लेखक का खु
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भारत के 15 राज्यों में घूम कर ISI के लिए जुटाई सूचनाएँ’: भारत के 56 मुस्लिम सांसद थे मददगार-- लेखक का खु

नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने 10 जुलाई, 2022 को एक इंटरव्‍यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए थे। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया था कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

राजस्थान : 8 महीने में पाकिस्तानी हनीट्रैप के 17 मामले: ISI हायर करता है गरीब घर की सुंदर युवतियाँ

प्रतीकात्मक चित्र साभार: Themes.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पाकिस्तान को चारों खाने चित कर भारतीय जनता से उसका डर निकालने में सफल हुए, लेकिन भारत में पल रहे पाकिस्तान परस्त नेता उनकी पार्टियां और समर्थक ही पाकिस्तान को शक्तिशाली साबित करने का प्रयत्न कर जनता को भयभीत करने का प्रयास कर रहे हैं। ये लोग अगर किसी विदेश में होते, कभी के जेल में बैठे होते, लेकिन ये भारत है जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर जनता को पागल बना सियासती रोटियां सेकी जाती हैं।  
राजस्थान में पिछले 8 महीनों में हनीट्रैप के 17 मामले सामने आए हैं। इसके जरिए ISI की खूबसूरत लड़कियों को भारतीय नागरिकों और जवानों के पीछे लगाया जाता है। सोशल मीडिया के सहारे अपने झाँसे में लेकर भारतीय सेना व सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े राज़ जुटाए जाते हैं और फिर उसे पाकिस्तान पहुँचाया जाता है। कई वर्षों से पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI इस तरह की करतूतों को अंजाम देती रही है। सेना के मूवमेंट और हथियारों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करना उनकी मुख्य मंशा होती है।

इस सम्बन्ध में ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में बताया है कि जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, और श्रीगंगानगर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों पर पाकिस्तान की नजर रहती है। इन सभी जिलों की सीमाएँ पाकिस्तान से लगती हैं। राजस्थान की 1037 किलोमीटर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। भारत इन सीमाओं पर आतंकवाद रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती अपनाता है। पाकिस्तान अब तक स्ट्राइक के डर से अपने 15 गाँवों को खाली करा चुका है।

साथ ही वो पश्चिमी सीमा पर आतंकी कैंपों के तबाह होने से भी घबराया हुआ है। भारत की तरफ से कभी भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है, इसकी पूर्व जानकारी के लिए पाकिस्तान अब हनीट्रैप का सहारा ले रहा है। सेना में नौकरी करने करने वाले, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों और उनकी मूवमेंट पर नजर रखने वालों को फँसाया जाता है। इसके जरिए बंकरों और नई तकनीकों के बारे में सूचना जुटाई जाती है। इसके लिए खूबसूरत युवतियों को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है।

ये सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार के लोगों को फँसाती हैं। खासकर जिन लोगों ने सेना की वर्दी में तस्वीरें डाल रखी होती हैं, उन्हें निशाना बनाया जाता है। इसके बाद चैटिंग की प्रक्रिया शुरू की जाती है। उनके साथ घूमने-फिरने से लेकर शादी तक का झाँसा दिया जाता है। उनके अश्लील वीडियो बना कर के ब्लैकमेल का तरीका भी आजमाया जाता है। अश्लील बातें कर के अकेले मिलने के लिए बुलाया जाता है। कई मामलों में चीनी कंपनी के गैजेट्स या मोबाइल का प्रयोग कर रहे जवानों को ज्यादा निशाना बनाया गया है।

भारतीय सेना के अधिकारियों के गैजेट्स को ट्रैक करने के लिए भी कई तरीके आजमाए जा रहे हैं। उनकी इंटरनेट हैबिट्स और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है और फिर साजिश रची जाती है। सीमा पर कितनी चौकियाँ हैं और जवानों को क्या-क्या नए आदेश मिले हैं, ये जानने में पाकिस्तान की ज्यादा दिलचस्पी है। जवानों से बात कर कैसे उन्हें ब्लैकमेल करना है, इसका प्रशिक्षण इन महिलाओं को ISI देती है। उस हिसाब से उन्हें प्रमोशन मिलता है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय ख़ुफ़िया व सुरक्षा एजेंसियों को इसका पता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों व सेना के जवानों को हिदायत दी है कि वो ऐसी किसी भी अजान लड़कियों से बातचीत न करें। समय-समय पर उन्हें सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह भी दी जाती रही है। जिन महिलाओं को उनके पीछे लगाया जाता है, उनके परिवारों की जिम्मेदारी ISI ही उठाता है। उन्हें टेक्नोलॉजी की भी पूरी ट्रेनिंग देकर भेजा जाता है। इसके लिए सुंदर और गरीब तबके की महिलाओं को चुना जाता है।

झुंझुनू : पाकिस्तानी जासूस आया पुलिस गिरफ्त में, ISI की महिला एजेंट के लिए करता था जासूसी !

राजस्थान इंटेलिजेंस और जयपुर मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को एक गैस एजेंसी के मालिक को गिरफ्तार किया ! युवक पर आरोप है कि सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेज रहा था!

इंटेलिजेंस ने युवक को नरहड़ कस्बे से गिरफ्तार किया है और उस पर आरोप है कि युवक नरहड़ आर्मी बेस कैंप की खुफिया जानकारी वाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेज रहा था!

शक के बुनियाद पर 12 सितंबर को युवक से पूछताछ हुई और गुरुवार को इसे गिरफ्तार कर लिया गया है! साथ ही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संदीप नाम का शख्स नरहड़ आर्मी बेस कैंप के पास गैस एजेंसी चलाता था! गैस सप्लाई के काम से उसका आर्मी बेस में आना-जाना लगा रहता था मौके देखकर संदीप सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी एजेंट को खुफिया जानकारी सप्लाई करने लगा। इसी तरह आर्मी की नजर में संदीप आ गया!

मिलिट्री इंटेलिजेंस उसके मूवमेंट पर नजर रखने लगी सूत्र बताते हैं कि इंटेलिजेंस ने जब अपना शक पुख्ता किया तो आरोपी संदीप को 12 सिंतबर को झुंझुनू के नरहड़ कस्बे से गिरफ्तार किया गया!

जिसके बाद उसे पूछताछ के लिए जयपुर लाया गया पूछताछ में आरोपी ने मामले का खुलासा किया! सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी संदीप का भाई राजस्थान पुलिस में पदस्थ है संदीप के बैंक अकाउंट की जांच में पाया गया कि उसके खाते में कुछ रकम भी ट्रांसफर किए गए थे!

आरोपी युवक ने पैसों को लेकर कोई सही जानकारी नहीं दी है जानकारी के अनुसार आरोपी सब इंस्पेक्टर परीक्षा की तैयारी कर रहा था वो परीक्षा भी देने वाला था! लेकिन उससे पहले ही इंटेलिजेंस की टीम ने उसे दबोच लिया सूत्र बताते हैं कि आरोपी के फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की जा रही है पूछताछ में इंटेलिजेंस कुछ अहम जानकारी हाथ लगी है! लेकिन इसके बार में कोई खुलासा नहीं किया गया है फिलहाल इंटेलिजेंस की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है!

गिरफ्तार आतंकियों के समर्थन में उतरा अमानतुल्लाह खान, बोला- बेकसूर मुसलमानों को फंसाया जा रहा है

जैसे ही किसी दंगे अथवा आतंकवाद में कोई मुस्लिम पकड़ा जाता है, victim card का खेल शुरू हो जाता है। उन्हें गरीब, मासूम, बेगुनाह और मजलूम कहा जाता है। जिस पार्टी में अपराध में भी मजहब देखा जाता हो, देश क्या चलाएंगे? 
दो दिन पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 6 आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया था, इनमें से दो आतंकी ऐसे हैं जिनको पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ट्रेनिंग दी थी, इन आतंकवादियों के मंसूबें बहुत खतरनाक थे, हिन्दू त्योहारों पर बम धमाका करके निर्दोषों का खून बहाना चाहते थे, अपने नापाक मकसद में कामयाब हो पाते उससे पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, अब इन आतंकवादियों का समर्थन करते हुए आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा है कि निर्दोष मुसलमानों को फंसाने खेल शुरू हो गया.

आतंकियों की गिरफ़्तारी होनें के बाद दिल्ली के ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीट में लिखा, जैसे – जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, देश के मुसलमानों पर ज़ुल्म बढ़ता जाता है। आतंकवाद के नाम पर बेकसूरों को फर्ज़ी मुकदमों में फंसाकर परेशान करने का खेल शुरु कर हो गया है। आगे और न जाने कितने लोगों पर झूठे मुकदमे लगाए जाएंगे। अल्लाह हिफाज़त करे! आपको बता दें कि पहली बार अमानतुल्लाह ने आतंकियों का समर्थन नहीं किया है. इससे पहले भी मजहब के नाम पर ऐसा कर चुके हैं.

मिली जानकारी के मुताबिक, आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के भाई के साथ मिलकर ISI हिन्दू त्योहारों पर दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हमलें की योजना बना रही थी, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, स्पेशल सीपी (स्पेशल सेल) नीरज ठाकुर ने कहा, “हमने महाराष्ट्र निवासी जान मोहम्मद शेख (47), जामिया नगर निवासी ओसामा उर्फ सामी (22); रायबरेली निवासी मूलचंद उर्फ साजू (47), इलाहाबाद निवासी जीशान कमर (28); बहराइच निवासी मोहम्मद अबू बकर (23); और लखनऊ निवासी मोहम्मद आमिर जावेद (31) को गिरफ्तार किया है.

पुलिस अधिकारी ने कहा, “दो आरोपियों, ओसामा और जीशान ने इस साल पाकिस्तान में ट्रेनिंग ली थी और आईएसआई से निर्देश प्राप्त कर रहे थे। उन्हें आईईडी लगाने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश में उपयुक्त स्थानों की रेकी करने के लिए कहा गया था। कुछ हफ्ते पहले, इंस्पेक्टर सुनील राजैन और रविंदर जोशी के नेतृत्व में एक टीम को खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला था कि पाकिस्तान-प्रेरित और प्रायोजित समूह भारत में सीरियल आईईडी विस्फोटों को अंजाम देने की योजना बना रहा है।

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दाऊद के भाई का पैसा, ISI की प्लानिंग: निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर, ओडिशा में DRDO के 4 कर्मचारी निकले पाक

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दाऊद के भाई का पैसा, ISI की प्लानिंग: निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर, ओडिशा में DRDO के 4 कर्मचारी निकले पाक

पुलिस अधिकारी ने कहा, सितम्बर 14 को इनके बारे में जानकारी जुटाकर अलग-अलग राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई. शुरुवात में, अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव जान मोहम्मद शेख को कोटा से पकड़ा गया था, जब वह दिल्ली जा रहा था। ओसामा को ओखला से, मोहम्मद अबू बकर को सराय काले खां से, जीशान को इलाहाबाद से, मोहम्मद आमिर जावेद को लखनऊ से और मूलचंद को रायबरेली से पकड़ा गया। यूपी एटीएस के अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद यूपी में ऑपरेशन चलाया गया था.

दाऊद के भाई का पैसा, ISI की प्लानिंग: निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर, ओडिशा में DRDO के 4 कर्मचारी निकले पाकिस्तानी जासूस

देशद्रोहियों का जाल कितना फैला हुआ है, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है। दिल्ली पुलिस थोड़े दिनों के अंतराल में कोई न कोई खुलासा कर जनता को घर में छिपे बैठे देशद्रोहियों से सतर्क रहने के संकेत देती आ रही है। इन देशद्रोहियों के लिए देश से अधिक चांदी के कुछ टुकड़े हैं, जो इस लालच में अपने परिवार तक को जोखिम में डाल रहे हैं।  
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अलग-अलग राज्यों से 6 आतंकियों को पकड़कर बड़ी साजिश नाकाम कर दी है। इनमें से दो आतंकियों ने पाकिस्तान में प्रशिक्षण लिया था। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक भी मिले थे। त्योहारी सीजन में 6 राज्यों के 15 शहर इनके निशाने पर थे।

यह बात भी सामने आई है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का भाई अनीस इसके लिए फंड मुहैया करा रहा था। इस बड़े आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने रची थी। इस बीच ओडिशा पुलिस ने चार लोगों को पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में संविदा पर काम कर रहे थे। इन पर विदेशी एजेंटों को गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है।

रिपोर्टों के अनुसार बालासोर स्थित DRDO के एकीकृत परीक्षण रेंज से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के 4 आरोपितों को ओडिशा पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने कहा है कि ये लोग लगातार आईएसडी नंबरों के जरिए विदेशी एजेंटों के संपर्क में थे।

 रिपोर्टों के मुताबिक, सभी चार संविदा कर्मचारी काफी समय से रक्षा स्थापना में मैनुअल ऑपरेशनल कार्य में थे। इसी कारण रक्षा प्रतिष्ठान में उनकी नियमित पहुँच थी। ये चारों डीआरडीओ की एकीकृत परीक्षण रेंज चांदीपुर से महत्वपूर्ण जानकारी लीक कर रहे थे। सभी आरोपित बालासोर जिले के चांदीपुर के झामपुरा हाटा और नुआनाई इलाके के रहने वाले हैं।

बालासोर जिले के सुधांशु मिश्रा ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि कुछ लोग पाकिस्तान के एजेंटों को गोपनीय जानकारी लीक कर रहे हैं। पुलिस ने कहा, “चारों आरोपितों से लगातार विभिन्न आईएसडी से संपर्क किया जा रहा था और खुफिया जानकारी के बदले में उन्हें पैसे दिए जा रहे थे। इनपुट के आधार पर अपराधियों को पकड़ने के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया। छापे के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।”

हैंडलर से संपर्क 

सूत्रों के मुताबिक, पृथ्वी मिसाइल केंद्र के पैड III में काम करने वाला एक आरोपित बसंत बेहरा लगातार अपने हैंडलर से संपर्क बनाए हुए था। वह बार-बार कॉल करते और आईएसडी कॉल रिसीव करते पाया गया। अधिकारियों को शक है कि उसने DRDO के मिसाइल सीक्रेट्स को पाकिस्तानी एजेंटों को बेचा होगा।

पुलिस ने चारों आरोपितों को 13 सितंबर 2021) देर रात डीआरडीओ गेट के पास उनके घरों से गिरफ्तार किया। चारों के खिलाफ चांदीपुर थाने में IPC-R/W की धारा 120-B (आपराधिक साजिश के लिए सजा), 121-A (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), 34 (सामान्य इरादे से किया गया कृत्य) और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3, 4 और 5 के तहत कार्रवाई की गई है।

इससे पहले चांदीपुर आईटीआर के एक संविदा फोटोग्राफर ईश्वर बेहरा को मिसाइल डिजाइन और प्रौद्योगिकी से संबंधित जानकारी पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे हाल ही में इस गंभीर मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सितंबर 14, 2021 को पाकिस्तान द्वारा संचालित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 6 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाकिस्तान से प्रशिक्षित दो आतंकवादी भी शामिल हैं। पुलिस ने अपने इस मल्टी स्टेट ऑपरेशन में विस्फोटक व अन्य चीजों को भी बरामद किया। पुलिस का कहना था कि ये संदिग्ध देश में हत्याओं और विस्फोटों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा इनके निशाने पर नामचीन लोग भी शामिल थे।

ISI ने रची दरभंगा में बम ब्लास्ट की साजिश, करोड़ों की फंडिंग: जिस कैराना से हुआ था हिन्दुओं का पलायन, वहाँ से 2 आतंकी गिरफ्तार

                       दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़े (फोटो साभार; लाइव हिंदुस्तान)
बिहार के दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं और इसके पीछे वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साजिश भी सामने आ रही है। इस मामले में STF ने उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैराना से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ जारी है। बिहार में हुए इस बम ब्लास्ट में पश्चिमी यूपी के सलीम और कासिम की भूमिका बताई जा रही है। इस ब्लास्ट के लिए करोड़ों रुपयों की फंडिंग हुई है।

ऐसे प्रश्न यह हो रहा है कि एक तरफ केंद्र सरकार आतंकवादी गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बम धमाकों के तार पाकिस्तान से क्यों जुड़ रहे हैं? कौन हैं इनके संरक्षक? क्यों नहीं उनको दण्डित किया जाता?

तेलंगाना के एक आतंकी को इस बम ब्लास्ट का ठेका दिया गया था। NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) और ATS (आतंकरोधी दस्ता) इस मामले की जाँच कर रही है। कफील के पिता ने मीडिया के सामने आकर कहा है कि उनके बेटे को बेवजह फँसाया जा रहा है। सलीम ने एक पाकिस्तानी युवक की मदद से ISI से संपर्क किया था। ISI एजेंट ने पश्चिमी यूपी में धमाके के लिए उससे बात की। सलीम ने अपने दोस्त कासिम उर्फ़ कफील को इस वारदात में शामिल किया।

फिर दोनों ने तेलंगाना के सिकंदराबाद के कुछ युवकों के साथ मिल कर धमाके की साजिश रची। सुरक्षा एजेंसियाँ दोनों का पुराना रिकॉर्ड खँगाल रही है। ISI की फंडिंग के नेटवर्क की तह तक जाने के लिए कई बैंक खातों के भी डिटेल्स खँगाले जा रहे हैं। ISI की आगे भी ऐसी कोई साजिश हो सकती है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन की बात भी सामने आई थी, वहीं अब वहाँ ISI कनेक्शन की खबर मिली है।

पश्चिमी यूपी में धमाके की साजिश दरभंगा कैसे पहुँच गई, इसका भी पता लगाया जा रहा है। जून 17, 2021 को दरभंगा रेलवे जंक्शन पर हुए ब्लास्ट का बम एक कपड़े की गठरी में रखा हुआ था। पार्सल भेजने वाले का नाम-पता ‘सूफियाना, निवासी सिकंदराबाद’ लिखा हुआ था। उस पर लिखा मोबाइल नंबर कैराना के ही एक व्यक्ति का था। NIA की लखनऊ यूनिट ने इस ब्लास्ट को लेकर FIR दर्ज की है।

NIA की 6 सदस्यीय टीम मामले की जाँच के लिए बिहार पहुँची है। कपड़े की गाँठ में ही रह जाने के कारण इस केमिकल बम का उतना बड़ा असर नहीं हुआ था। पार्सल बुक करने वाले नंबर से जिस नंबर की बात हो रही थी, वो भी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर सक्रिय था। फ़िलहाल ये नंबर नेपाल से सटे इलाकों में सक्रिय आ रहा है। जल्द ही इस मामले में कई अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे सारे राज़ खुल सकेंगे।

बांग्लादेश : मदरसा-मौलवी, सऊदी शेखों की फंडिंग, ISI की कठपुतली हिफाजत-ए-इस्लाम

                       मोदी के दौरे पर कट्टरपंथियों ने भड़काई हिंसा (साभार: अलजजीरा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश पहुँचने से पहले ही बांग्लादेशी कट्टरपंथियों ने दौरे का विरोध शुरू कर दिया था। वामपंथी भी इसमें उनके साथ थे। उनके दौरे के दौरान भी हिंसा हुई। उनके भारत लौटने के बाद भी बांग्लादेश से हिंसा की खबरें आ रही हैं।

26 मार्च 2021 को मोदी बांग्लादेश पहुँचे थे। उस दिन जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा और आगजनी की थी। इस दौरान हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिसमें चार की मौत हो गई थी। शनिवार को पूरे बांग्लादेश में फेसबुक बंद होने की खबरें मीडिया में आती रहीं।

बांग्लादेश में मचे बवाल के पीछे जिस एक कट्टरपंथी संगठन का नाम प्रमुखता से आ रहा है वह है, हिफाजत-ए-इस्लाम। मोदी की यात्रा के विरोध में शुक्रवार को हिंसा-आगजनी में भी वह शामिल था। शनिवार को चटगाँव से ढाका तक मार्च निकाला। रविवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर काम करने वाले इस कट्टरपंथी संगठन को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है।

                              हिफाजत ए इस्लाम के लोग मोदी विरोध में एकत्रित (साभार: अलजजीरा)
2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन को ISI का पूरा समर्थन है।

                            बांग्लादेश में मोदी विरोध में एकत्रित हिफाजत ए इस्लाम के लोग (साभार: अलजजीरा)
द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISI के अलावा हिफाजत-ए-इस्लाम को फाइनेंसिंग का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के कट्टरपंथी शेखों के जरिए प्राप्त होता है। इस संगठन की प्रमुख माँग है कि बांग्लादेश को इस्लामी देश करार दिया जाए।

हिफाजत-ए-इस्लाम की स्थापना में हतज़ारी मदरसा के पूर्व डॉयरेक्टर अहमद शफी, वर्तमान अमीर ए हिफाजत अल्लामा जुनैद बाबुनगरी और इस्लामिक पार्टी इस्लामी ओइक्या जोते के चेयरमैन मुफ्ती इजहारुल इस्लाम प्रमुख नाम हैं। इनके अलावा पहली महिला क्वामी मरदसे की संस्थापक और प्रिंसपल अब्दुल मालेक हलीम भी इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं।

इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है। 7 अक्टूबर 2013 में इस संगठन के एक नेता द्वारा संचालित किए जा रहे मदरसे में विस्फोट हुआ था। छापेमारी में विस्फोटक बरामद हुए थे। लेकिन मदरसा प्रशासन का दावा था कि कम्प्यूटर का यूपीएस फटा था। 

                                                                 ग्रीक देवी की मूर्ति
साल 2017 में इसी संगठन ने ग्रीक देवी की मूर्ति बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय में देख 
प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना था कि बांग्लादेश में इस्लाम को कमजोर करने के लिए ये एक साजिश है। बाद में वह मूर्ति न्यायालय से हटानी पड़ी थी।

हिफाजत-ए-इस्लाम हमेशा से बांग्लादेश को इस्लामी देश बनाने की पैरवी करता रहा है। साल 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश संविधान से इस्लाम शब्द हटाने की याचिका को स्वीकार किया था, तो इसका विरोध करते हुए धमकियाँ दी थीं। हिफाजत ने कहा था कि देश का राष्ट्र धर्म यदि इस्लाम होगा तो इससे अल्पसंख्यकों के धर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा इस संगठन के तमाम प्रमुख नेताओं पर हत्या, तोड़फोड़, आगजनी जैसे गंभीर आरोप हैं। इस संगठन का कहना है कि संविधान में सर्वेसर्वा अल्लाह को माना जाए और जो कोई भी इस्लाम को बदनाम करे उसके ख़िलाफ़ मौत की सजा का प्रावधान हो। इसके अलावा नास्तिकों और गैर इस्लामी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो। इस्लामी शिक्षा को अनिवार्य करने, अहमदियों को गैर मुस्लिम करार देने और स्कूलों में मूर्तियों पर पाबंदी की माँग वह करता है। साथ ही हर उलेमा और मदरसा छात्र को हर इल्जाम से बाइज्जत बरी करने की भी माँग कर रहा है।

‘खालिस्तान को नए पड़ोसी के रूप में मान्यता देने को तैयार रहे पाक’ : खालिस्तान मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू

प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस के पाकिस्तान से नापाक गठजोड़ का खुलासा हुआ है। संगठन के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को लिखी चिट्ठी में कहा है कि खालिस्तान को अपने नए पड़ोसी के रूप में मान्यता देने के लिए पाकिस्तान को तैयार रहना चाहिए। पन्नू ने साफ किया है कि उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस को पाकिस्तान और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त है। जाहिर है, लंबे समय तक पाकिस्तान से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार करते रहे सिख फॉर जस्टिस का आईएसआई से संबंध जाहिर हो गया है। यह भी स्पष्ट है कि किस प्रकार पाकिस्तान ने खालिस्तान के नाम पर चलाई जा रही इस पूरी साजिश को संचालित किया है।
खालिस्तान के सिख होने पर सिख समाज को शंका है, जिसका प्रमाण ये खुद ही दे रहे हैं, कि पाकिस्तान में महाराजा रंजीत सिंह की प्रतिमा तोड़े जाने पर विरोध में आवाज़ तक नहीं निकली। जिस कारण इनके सिख होने पर शंका की जा रही है। 

पन्नू ने यह चिट्ठी उस दिन लिखी है जब बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस और भारत विजय दिवस मना रहा है। पन्नू ने ढाका के पतन की तुलना खालिस्तान से की है। सरकारी सूत्रों को कहना है कि पन्नू की यह चिट्ठी उन किसानों के लिए भी आंख खोलने वाली है जिन्हें आंदोलन के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है।

भारत में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन के 16 सदस्यों के खिलाफ हाल में राष्ट्र जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा चार्जशीट किए हैं, जिन पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और जनमत संग्रह करने के आरोप है। आरोप है कि विदेश में बैठकर सिख फॉर जस्टिस संगठन के सक्रिय सदस्य भारत के विरूद्ध षडयंत्र रचते हैं। एनआईए ने सभी आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 12,17,18 और आईपीसी की धारा 120B, 124B, 153A, 153B और 505 चार्जशीट दाखिल की है। संगठन पर किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तानी मूवमेंट चलाने का भी आरोप हैं।

 2019 में सरकार सिख फॉर जस्टिस संगठन को प्रतिबंधित किया गया

केंद्र सरकार 10 जुलाई, 2019 को खालिस्तान समर्थक संगठन दि सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) को इसकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एसएफजे को गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून (UAPA) के तहत प्रतिबंधित घोषित करने का फैसला किया है। खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस संगठन अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में बैठकर चलाया जाता है। इस संगठन को UAPA, 1967 की धारा (1) के प्रावधानों के तहत गैर कानूनी घोषित किया गया है।

क्या है सिख फॉर जस्टिस संगठन

अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन का मुख्य उद्देश्य पंजाब में एक स्वतंत्र व संप्रभु देश स्थापित करना है। यह खालिस्तान के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखता है और इस प्रक्रिया में भारत की संप्रुभता व अंखडता को चुनौती देता है। प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस संगठन खासकर ऑनलाइन फ्लेटफॉर्म के जरिए ऑपरेट करता है, जिसके लगभग दो लाख समर्थक बताए जाते हैं। हालांकि संगठन के सशरीर सदस्यों की संख्या बहुत कम है, जो कि महज 8-10 हैं। यह अपने अलगाववादी एजेंडा के तहत 2020 में सिख जनमत संग्रह की वकालत करता रहा है।

पंजाब पुलिस और एएनआई कई बार कर चुका है भंडाफोड़ 

पंजाब में अमन चैन भंग करने की जुगत में अक्सर लगा रहने वाला सिख फॉर जस्टिस के सक्रिय सदस्यों में से एक परमजीत सिंह पम्मा ने गत 30 जून, 2019 में वर्ल्ड कप क्रिकेट के एक मैच के दौरान भारत विरोधी बयानबाजी की थी। सिख फॉर जस्टिस के कारनामों का पंजाब पुलिस और एएनआई कई बार भंडाफोड़ कर चुकी है। यह मुख्य रूप से पंजाब के गरीब युवकों को बहकाकर उनसे हिंसा और आगजनी की घटनाएं करवाता था। 

दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी आतंकी साजिश को किया नाकाम : गोलीबारी के बाद 5 खालिस्तानी व कश्मीरी आतंकी गुरजीत, सुखदीप, अयूब, शब्बीर गिरफ्तार

किसान आंदोलन में उठ रहे खालिस्तानी, पाकिस्तान और जैसे इंदिरा को ठोका वैसे ही मोदी को भी ठोकेंगे आदि नारों पर इस आंदोलन को समर्थन दे रही कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल को तुरंत अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए था, क्योकि किसानों की आड़ में उत्तेजक नारों के लगने पर भी अपनी आंखें नहीं खोलने का अर्थ है कि इन्हें देश की नहीं बल्कि लाशों पर अपनी तिजोरियों को भरने की चिंता है। यदि इन तीनों पार्टियों में से किसी एक को भी देश की चिंता होती, तुरंत अपना समर्थन वापस ले लेती, जो इस बात को प्रमाणित करती है कि इन्हें देश से अधिक अपनी तिजोरी और कुर्सी की फ़िक्र है। आने वाले चुनावों में इस तीनों पार्टियों से जनता को पूछना चाहिए, और इनका चुनावों में बहिष्कार करना चाहिए। 
दिल्ली में ‘किसान आंदोलन’ चल रहा है और इसकी आड़ में खालिस्तानी ताकतें फिर से सिर उठा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन 5 आतंकियों को गिरफ्तार किए जाने से पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ इनकी मुठभेड़ भी हुई। दोनों तरफ से गोलीबार के बाद इन्हें धर-दबोचा गया। उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार के अलावा अन्य भड़काऊ मैटेरियल्स भी जब्त किए गए हैं। दो कश्मीरी आतंकियों की पहचान मोहम्मद अयूब और मोहम्मद शब्बीर के रूप में हुई है।

दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को शकरपुर क्षेत्र से 5 आतंकियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि ये आतंकी किस संगठन से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनमें से दो पंजाब के खालिस्तानी आतंकी हैं जबकि बाकी के 3 जम्मू कश्मीर के आतंकी हैं। ये किसी बड़े हमले की फिराक में थे।

 गिरफ्तार आतंकियों में से दो की पहचान गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह के रूप में हुई है। इन्होंने एक शौर्य चक्र से सम्मानित सैन्य अधिकारी की हत्या की थी। बताया गया है कि इन आतंकियों को पाकिस्तान की ISI से फंडिंग मिल रही थी। इससे 20 दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने खान मार्केट से जैश-ए-मोहम्मद के 2 आतंकियों को गिरफ्तार कर के एक बड़े हमले की साजिश को नाकाम किया था।

हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन और इसके इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की नई साजिश है कि अब जम्मू कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के रास्ते चीन के ड्रोन्स के माध्यम से खतरनाक हथियार व अन्य दहशत का साजो-सामान भेजा जाएगा। पाकिस्तान में मौजूद खालिस्तानी संगठनों को उनके आका पंजाब में हो रहे ‘किसान आंदोलन’ का फायदा उठाकर राज्य में दहशतगर्दी को दोबारा जिंदा करने के लिए तमाम तरह की साजिश रच रहे हैं।