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लंदन, कांग्रेस, किसान प्रदर्शन और जार्ज सोरोस में कनेक्शन! राहुल गांधी की यात्रा रुकी, किसानों का मार्च रुका; राहुल के वापस आते ही किसान आंदोलन फिर शुरू

कांग्रेस पार्टी ने अचानक अपनी न्याय यात्रा 1 मार्च तक रोक दी। फर्जी किसानों ने अपना दिल्ली मार्च अचानक 29 फरवरी तक रोक दिया। इस बीच राहुल गांधी अचानक देश विरोधी लेक्चर देने लंदन पहुंच गए। इससे साफ होता है कि लंदन, कांग्रेस और किसान प्रदर्शन सभी का आपस में कनेक्शन है। राहुल और अन्य विपक्ष किसान को जितना अधिक जीवित रखेगा, उससे अधिक इनके लिए घातक होने जा रहा है, क्योकि जनता इस उपद्रव की सच्चाई जान चुकी है। विदेशी भीख पर चलने वाला आंदोलन। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि 27 और 28 फरवरी को राहुल गांधी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की यात्रा की योजना 1 साल पहले निर्धारित की गई थी लेकिन 12 फरवरी 2024 को प्रकाशित भारत न्याय यात्रा का जो शेड्यूल था, इसमें 27-28 फरवरी को राहुल गांधी की लंदन यात्रा का कोई जिक्र नहीं था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भी 27-28 फरवरी के किसी विशेष समारोह की जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं दी। लेकिन 20 फरवरी को अचानक कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने राहुल गांधी को वहां आने और छात्रों को व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित कर लिया।

देश ने मोदी को दिल में बसाया, 2024 में विदेशी ताकतों का सपना होगा चकनाचूर
जिस तरह 2014 के बाद से भारत विकास के पथ पर अग्रसर है उसे देखते हुए देशवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल में बसाया है। इसकी झांकी पीएम मोदी के रोड शो में साफ देखने को मिलती है। लोग कह रहे हैं भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने वाले ये विदेशी ताकतें और जार्ज सोरोस कौन होता है। भारतीय मतदाता निश्चित रूप से 2024 में मोदी जी को फिर से वापस लाएगा! 2024 में सोरोस और विदेशी ताकतों का सपना चकनाचूर होगा। देशों में शासन परिवर्तन के उसके मंसूबे का अंत भारत में होगा। भारत में ऐसा कुछ करने की कोशिश करना मुश्किल है। अब देश ने मोदी को दिल में बसा लिया है।

राहुल गांधी लेक्चर देने गए या गुप्त मीटिंग करने?
लंदन जाने के लिए राहुल ने अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा रोक दी, अपनी सभी चुनावी बैठकें छोड़ दीं और वहां जाने के लिए तैयार हो गए। वह चाहते तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी व्याख्यान दे सकते थे। ऐसे में वहां जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। लेकिन असलियत यह है कि लेक्चर तो बहाना है और इसकी आड़ में गुप्त मीटिंग करनी है। क्या यह संयोग है कि जार्ज सोरोस जो भारत से नफरत करता है, जो भारत को नष्ट करना चाहता है और खुलेआम 2024 में मोदी को हटाने की घोषणा कर चुका है वह भी लंदन में रहता है। 

राहुल गांधी दो दिनों से लंदन में, एक भी पोस्ट नहीं आया 
राहुल गांधी 2 दिनों से लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हैं। लेकिन कांग्रेस, ओवरसीज़ कांग्रेस या कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से कोई पोस्ट सामने नहीं आया है। किसी भी समाचार में कोई कवरेज नहीं, कोई कार्यक्रम नहीं, कोई वीडियो नहीं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि वह वहां व्याख्यान के लिए गए हैं या जॉर्ज सोरोस के साथ कुछ गुप्त बैठकों के लिए गए हैं? कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने 2022 में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी।

राहुल गांधी का 27-28 फरवरी को कैंब्रिज में लेक्चर
जयराम रमेश ने कहा, ‘‘26 फरवरी से एक मार्च तक यात्रा में विराम होगा, ताकि राहुल गांधी 27 और 28 फरवरी को इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय (जहां से उनकी शिक्षा हुई) में दो विशेष व्याख्यान देने के अपने एक साल पहले के वादे को पूरा कर सकें। और इसके बाद उन्हें नई दिल्ली में होने वाली कुछ अहम बैठकों में शामिल होने का मौका मिल सके।’’

राहुल गांधी लगभग अपने हर विदेश दौरे में देशविरोधी लोगों से मिलते रहे हैं।

पूरे भारत में केरोसिन छिड़का जा चुका है, बस एक चिंगारी की जरूरत है
लंदन में 21 मई 2022 को‘आइडिया फॉर इंडिया’ कॉन्फ्रेंस में पहुंचे राहुल गांधी ने कहा था- ‘देश में धुव्रीकरण बढ़ता जा रहा है, बेरोजगारी अपने चरम पर है, महंगाई बढ़ती जा रही है। बीजेपी ने देश में हर तरफ़ केरोसीन छिड़क दिया है बस एक चिंगारी से हम सब एक बड़ी समस्या के बीच होंगे।’

भारत को बदनाम करने वाले ब्रिटिश सांसद कोरबिन से मिले राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने लंदन दौरे के दौरान मई 2022 में ब्रिटिश सांसद जेरेमी कोरबिन (Jeremy Corbyn) से भी मुलाकात की थी। कोरबिन वही शख्स हैं जो भारत को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वह भारत से कश्मीर के अलगाव की पैरवी करते हैं और स्पष्ट रूप से हिंदू विरोधी हैं। आखिर राहुल गांधी जैसे नेता किस हद तक अपने देश के खिलाफ जा सकता है, यह अपने आप में सवाल है।

राहुल गांधी ने लंदन में कहा- भारत में लोकतंत्र खत्म
राहुल ने लंदन में मार्च 2023 में जर्नलिस्ट एसोसिएशन नाम के संगठन की ओर से आयोजित कार्यकम में कहा था, ”यदि यूरोप से तीन या 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र खत्म हो जाता है, तो आप कैसे रिएक्ट करेंगे। असल में भारत में ऐसा हो चुका है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। इसकी वजह यह है कि कारोबार और पैसे का मामला है। अमेरिका से आबादी में तीन से 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र समाप्त हो रहा है और इसकी रक्षा करने का दावा करने वाले अमेरिका और यूरोप चुपचाप देख रहे हैं।” राहुल ने कहा था, विपक्ष के तौर पर हम लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह अकेले भारत की जंग नहीं है. यह पूरे लोकतंत्र का एक संघर्ष है।

राहुल ने पाकिस्तानी प्रोफेसर कमाल मुनीर के साथ मंच साझा किया
लंदन में भारतीय लोकतंत्र और संस्थानों पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने मार्च 2023 में पाकिस्तानी प्रोफेसर कमाल मुनीर के साथ मंच साझा किया। राहुल गांधी का परिचय पाकिस्तान में जन्मे कमाल मुनीर ने एमबीए दर्शकों से कराया। कमाल मुनीर को पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले राजकीय सम्मान तमगा-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया है। मुनीर का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संपर्क है। इससे आप समझ सकते हैं कि डीप स्टेट भारत को तबाह करने के लिए किस स्तर पर काम कर रहा है। एक तरफ राहुल गांधी को खड़ा किया गया, लेफ्ट लिबरल गैंग प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट जाती है। आईएसआई नेटवर्क के जरिये खालिस्तान मुद्दे को जिंदा किया गया जिससे देश में उथल-पुथल मचे।

अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई 2023 को अमेरिका पहुंचे थे। जिस अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठक करते नजर आए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।

विदेशों में राहुल के कार्यक्रम से जुड़े रहते हैं मुसलमान
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अपने दिमाग से कुछ नहीं करती है। जैसे पड़ोसी देश पाकिस्तान लोन लेकर अपना काम चलाती है उसी तरह गांधी परिवार अब विदेशी ताकतों से सुपारी लेकर देश को बदनाम का ठेका ले लिया। क्या वजह है कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो मुसलमान उनके आयोजक बन जाते हैं। अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने उनके कार्यक्रमों का आयोजन किया। राहुल के कार्यक्रम में जाने के लिए मस्जिदों से बसों की व्यवस्था की गई। 

राहुल गांधी और कांग्रेस का जार्ज सोरोस, डीप स्टेट और इस्लामिक रेडिकल फ्रंट के साथ कनेक्शन

राहुल गांधी अपने एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर जिन लोगों से मिले, जिन लोगों ने उनके कार्यक्रम को कोआर्डिनेट किया और आयोजक थे उनके आतंकवादी संगठनों से कनेक्शन चिंता पैदा करने वाली है। इसी तरह अमेरिकी अरबपति डीप स्टेट एजेंट जार्ज सोरोस से नजदीकी संबंध रखने वाली सुनीता विश्वनाथ के साथ ही अन्य लोगों के साथ राहुल गांधी की बैठक भी चिंता पैदा करने वाली है। जार्ज सोरोस ने खुलेआम मोदी सरकार को हटाने के लिए फंड देने की बात कही थी। आखिर राहुल गांधी अमेरिका में देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? इससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी नौ साल से सत्ता से बेदखल होने की वजह से बौखला गए हैं और सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं।

राहुल गांधी के लिए बनी विशेष वेबसाइट में संपर्क सूची बदल गया

राहुल गांधी के अमेरिका दौरे से पहले एक विशेष वेबसाइट बनाई गई ताकि लोग पंजीकरण करा सकें और राहुल के साथ एनआरआई की बातचीत कार्यक्रम में भाग ले सकें। इस वेबसाइट में कुछ संपर्क सूची दी गई थी लेकिन जब लोगों ने पंजीकरण कराया तो संपर्क सूची कुछ और हो गई। जिसमें ज्यादातर मुस्लिम सुमदाय के लोग थे।

भारत विरोधी इस्लामिक देश से जुड़े संगठन थे आयोजक

ऐसा लगता है कि राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा और कार्यक्रम पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों और इस्लामिक देश के डीप स्टेट से जुड़े संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे। इन संगठनों को उनके भारत विरोधी रुख के लिए जाना जाता है और उनका कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का इतिहास रहा है।

कोआर्डिनेटर तंजीम अंसारी का पाकिस्तानी इमाम जवाद अहमद से जुड़ाव

राहुल के कार्यक्रम का एक कोआर्डिनेटर तंजीम अंसारी न्यूजर्सी के मुस्लिम समुदाय (MCNJ) की आउटरीच समिति के अमीर के रूप में कार्य करता है। MCNJ का नेतृत्व पाकिस्तान में जन्मे इमाम जवाद अहमद कर रहे हैं, जो उत्तरी अमेरिका के इस्लामिक सर्कल (ICNA) के परियोजना निदेशक के रूप में भी काम करते हैं।

यह संस्था सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकवादियों का करती है महिमामंडन

ICNA पाकिस्तान के जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़ा एक कट्टरपंथी इस्लामवादी संगठन है। इस संगठन का कट्टरपंथी और आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध हैं। वे भारत से कश्मीर को अलग करने के लिए हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकवादियों का महिमामंडन करते हैं।
सिमी के संस्थापक भी रह चुका ICNA के सदस्य
एक और कोआर्डिनेटर मोहम्मद असलम, मुस्लिम सेंटर ऑफ़ ग्रेटर प्रिंसटन (MCGP) के सदस्य हैं, जो ICNA के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। प्रतिबंधित कट्टरपंथी समूह सिमी (भारत में आतंकवादी संगठन) के संस्थापक आईसीएनए के सदस्य भी थे। जस्टिस फॉर आल, मानव संसाधन विकास, आजाद कश्मीर, भारत बचाओ, भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद ये सभी कट्टरपंथी इस्लामवादी संगठन ICNA और पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी की छत्रछाया में ही काम करते हैं।
IAMC भारत विरोध के लिए कई हथकंडे अपनाती है
मिन्हाज खान जिन्होंने यह कहा था कि वे इस आयोजन के लिए कोआर्डिनेट कर रहे थे, भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC ) के साथ संबंध रखते हैं। IAMC एक भारत विरोधी पैरवी समूह है जो मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता के बहाने भारत में सांप्रदायिक अशांति फैलाने के लिए फर्जी समाचार साझा करके भारत को लगातार निशाना बनाता है।
IAMC ने भारत के खिलाफ लॉबी करने के लिए दिए थे 55 हजार डॉलर
वर्ष 2013-14 में जब डॉ. मनमोहन सिंह सरकार सत्ता में थी, IAMC ने एक अमेरिकी लॉबिंग फर्म को नियुक्त किया और उन्हें संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) में भारत के खिलाफ लॉबी करने के लिए 55,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया।
केविड के नाम पर जुटाए लाखों रुपये कहां गए?
IAMC के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद एक अन्य जमात फ्रंट, इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) से भी जुड़े हैं, जिसने भारत की प्रतिष्ठा का लाभ उठाते हुए भारत की मदद के नाम पर कोविड काल के दौरान लाखों जुटाए और सारे पैसे खा गए और गोलमाल कर दिया।
IMANA का लश्कर और हिजबुल से संबंध चिंता पैदा करने वाली
IMANA कथित तौर पर पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी समूहों के दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ संबंध बनाए रखता है। इनमें आपस में कनेक्शन चिंता पैदा करने वाली है। अब जरा सोचिए कि कोविड रिलीफ फंड कहां गया होगा?
ISNA कनाडा ने हिजबुल मुजाहिदीन को दिया था फंड
IAMC और ICNA जैसे संगठन जमात और मुस्लिम ब्रदरहुड (MB) से भी संबंध रखते हैं। IMANA के सदस्य मुस्लिम ब्रदरहुड का मोर्चा एमबी फ्रंट इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ISNA) का हिस्सा रहे हैं। 2017 में ISNA कनाडा को हिजबुल मुजाहिदीन के ‘चैरिटी’ विंग के वित्तपोषण के लिए कनाडा राजस्व एजेंसी ने आरोप लगाया और मामला चलाया गया था।
सुनीता विश्वनाथ का पाकिस्तानी आतंकी समूहों से संबंध
अमेरिका दौरे पर राहुल गांधी को सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठक में शामिल होते देखे गए। सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की सह-संस्थापक हैं और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) जैसे संगठनों के साथ कई कार्यक्रमों की सह-मेजबानी करती हैं, जिनके पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों से संबंध हैं। सुनीता विश्वनाथ कोई और नहीं बल्कि खालिस्तानी, किसान विरोध के दौरान वैश्विक स्तर पर हिंदुओं का अपमान करने की कोशिश करने वाले हिंदू विरोधी सम्मेलन ‘ग्लोबल डिसमैनलिंग हिंदुत्व’ की आयोजक थीं। इस कार्यक्रम में नए कृषि कानूनों के बारे में भी एक सत्र था।
जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि के रूप में काम करती हैं सुनीता विश्वनाथ
सुनीता विश्वनाथ सोरोस रिप्रोडक्टिव हेल्थ एंड राइट्स फेलोशिप की पूर्व-एसोसिएट निदेशक भी थीं। उनके अन्य संगठन वुमन फॉर अफगान वीमेन (डब्ल्यूएडब्ल्यू) को सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। सुनीता विश्वनाथ और कुछ नहीं बल्कि जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि के रूप में काम करती हैं। अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस वही व्यक्ति है जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंकों, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए फंड देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे समझा जा सकता है कि राहुल गांधी अडानी का नाम क्यों लेते हैं।

अमेरिका में राहुल गांधी का जमात-ISI-जॉर्ज सोरोस और सुनीता विश्वनाथ के साथ क्या है कनेक्शन?

सोनिया गाँधी के सक्रीय राजनीति ने आने से लेकर आज राहुल और प्रियंका तक की बयानबाज़ी से राजनैतिक पंडित कांग्रेस को सचेत करते आ रहे हैं, लेकिन परिवारभक्ति में अंधी हुई पार्टी ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, और पार्टी निरन्तर डूबती जा रही है। पार्टी जनता की नब्ज तक को पढ़ने में पूर्णरूप से असफल रही है। अभी भी हिन्दू विरोध और मुस्लिम तुष्टिकरण को ही अस्त्र-शस्त्र मान चल रही है। भारत का वास्तविक इतिहास खुलना शुरू हो चुका है, फिर भी कांग्रेस की वही गतिविधियां रुकने का नाम नहीं ले रही। भारत विरोधी लोगों से निकटता बड़ाई जा रही है। जो कांग्रेस के लिए जरुरत से ज्यादा नुकसानदायक हो रही है। यदि यही हालत रहे, फिर वह दिन भी दूर नहीं, जब कांग्रेस एक इतिहास बन रह जाएगी। परिणाम सामने है कि क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अधिक प्रभावी बन रहे हैं। 
राहुल गांधी इन दिनों एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर हैं। वह 30 मई को अमेरिका पहुंचे और तीन शहरों के दौरे के आखिरी चरण में वह 4 जून को न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक सभा के साथ अपनी यात्रा समाप्त करने वाले हैं। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हो रहा है उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।

जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ
सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।

हिंदुओं के विरोध में मुसलमानों के पक्ष में एजेंडा चलाती है सुनीता विश्वनाथ
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की सह-संस्थापक हैं, इसके जरिये भी वह हिंदुओं के खिलाफ एजेंडा चलाती है और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) जैसे कट्टर संगठनों के साथ कई कार्यक्रमों की सह-मेजबानी करती हैं। पश्चिम में व्यापक जमात-आईएसआई सांठगांठ का हिस्सा हैं और भारत में सामाजिक भेदभाव के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उनका काम है। उनके अन्य संगठन वुमन फॉर अफगान वीमेन को सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।

मुस्लिम4पीस के कार्यक्रम में सुनीता का हिंदू और मोदी-विरोधी भाषण
अमेरिका में “डिसमेंटल ग्लोबल हिंदुत्व” अभियान चलाने वाली सुनीता सोरोस द्वारा वित्तपोषित कई संगठनों के साथ जुड़ी हुई है। मुस्लिम4पीस संगठन द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में उन्हें हिंदू, मोदी-विरोधी भाषण देते हुए साफ देखा जा सकता है। इससे यह आशंका दृढ़ हो जाती है कि भारत में सत्ता-परिवर्तन की मंशा पाले लोगों द्वारा राहुल गांधी को तैयार किया जा रहा है?

बैठक में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एजेंट भी शामिल
आपने सुनीता विश्वनाथ के साथ राहुल गांधी की तस्वीर देखी। इस बैठक में और कौन-कौन मौजूद थे? अब्दुल मलिक मुजाहिद द्वारा प्रवर्तित भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद के जिहादी – आईएसआई फ्रंटमैन भी थे। हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स केवल मुजाहिद द्वारा समर्थित संगठन है। राहुल गांधी के कांग्रेस यूएसए इनर सर्कल के कनेक्शन के बारे में जानकर गंभीर चिंताएं होती हैं। एक चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन इंगित करता है कि सर्कल के एक सदस्य को सोरोस द्वारा सीधे वित्त पोषित किया जाता है, जिसका आईएसआई और जमात ए इस्लामी से जुड़े संगठनों से संबंध है, जो आतंकी गतिविधियों के लिए जाना जाता है।

सुनीता विश्वनाथ के पाकिस्तानी जमात-ए-इस्लामी से संबंध
हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की संस्थापक सुनीता विश्वनाथ एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका कथित तौर पर पाकिस्तानी जमात-ए-इस्लामी के एक प्रमुख व्यक्ति अब्दुल मलिक मुजाहिद के साथ करीबी संबंध हैं, जो भारत में आतंकी हमलों में सीधे तौर पर शामिल होने के लिए जाना जाता है। मुजाहिद का भारतीय प्रवासी संगठनों पर प्रभाव स्पष्ट है। उनकी वेबसाइट पर भारत के खिलाफ एजेंडा के रूप में ‘सेव इंडिया फ्रॉम फासिज्म’ और ‘सेव कश्मीर’ आदि के पोस्टर-बैनर देखे जा सकते हैं।

सुनीता विश्वनाथ का आईएसआई और खालिस्तानियों से भी गहरा संबंध
सुनीता विश्वनाथ के बारे में और जानकारी हासिल करने पर पता चलता है उनका आईएसआई और खालिस्तानियों से भी गहरा संबंध है। इसके साथ ही कई अन्य संगठनों से भी संबंध है जो उनके भारत विरोधी होने को उजागर करते हैं। वह अमेरिका में आईएसआई समर्थित खालिस्तानी गुर्गों, भजन सिंह भिंडर और पीटर फ्रेडरिक के साथ एलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी की सह-संस्थापक भी हैं।

भारत विरोधियों का कांग्रेस में सीधी पहुंच का क्या है मतलब?
सुनीता विश्वनाथ का विवादों से नाता यहीं तक नहीं है। सुनीता ने कई कार्यक्रमों का सह-आयोजन किया है और IAMC जैसे संगठनों के साथ सहयोग किया है, जो 2014 से पहले से ही भारत के खिलाफ खुले तौर पर पैरवी कर रहा है, देश के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करता रहा है। इन खुलासों से संकेत मिलता है कि अमेरिका में सुनीता विश्वनाथ और राहुल गांधी की बैठक किसी खतरनाक मंसूबे के तहत हुई। वे भारत के खिलाफ किसी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। यह सोचना भी परेशान करने वाला है कि इस तरह की सोच वाला कोई व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के अमेरिकी संगठन के अंदर तक सीधी पहुंच आखिर कैसे प्राप्त कर सकता है।

सुनीता विश्वनाथ भगवान शिव को बता चुकी ‘चिलमबाज’
हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स नामक संगठन की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ हिंदुओं के नाम पर हिंदुओं के खिलाफ झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करती रही है। ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ के नैरेटिव का अभियान चलाकर लोगों को भ्रमित करने का काम करती रही है। वहीं सुनीता हिंदू देवी देवताओं को बदनाम करने के लिए उल-जुलूल बातें भी करती है। कभी वह भगवान शिव को चिलमबाज बताती है तो कभी कहती है हिंदुओं में शराब-सिगरेट का निषेध नहीं है, ये देवताओं को भी चढ़ाया जाता है।

राहुल गांधी को जेलेंस्की बनाना चाहता है डीप स्टेट!
राहुल गांधी हाल के समय में चीन का जिक्र बार-बार करते हैं। चीन भारत में घुसपैठ कर रहा है। चीनी सैनिक भारतीय जवानों को पीटते हैं। चीन में काफी सद्भावना है। इस तरह के न जाने कितने ही बयान हैं। लेकिन हाल में ब्रिटेन के दौरे के दौरान उनके जुबान से वह बात भी निकल गई जिसका उन्हें सब्जबाग दिखाया गया था। उन्होंने कहा- जैसा रूस ने यूक्रेन में किया, वही भारत के खिलाफ दोहरा सकता है चीन। पश्चिमी देशों के डीप स्टेट (दुनिया को अपने हिसाब से चलाने वाले) ने मई 2022 में राहुल गांधी के मेकओवर और पीएम उम्मीदवार बनाने की पटकथा तैयार की थी। उस वक्त राहुल भी ब्रिटेन के दौरे पर थे। उसी वक्त यह तय हुआ था कि जिस तरह यूक्रेन में आंदोलन खड़ा कर जेलेंस्की को प्रधानमंत्री बनाया गया उसी तरह 2024 में पीएम मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर राहुल की ताजपोशी करवाई जाएगी।
डीप स्टेट के प्लान के मुताबिक बयान दे रहे हैं राहुल गांधी
राहुल के मेकओवर की पटकथा की कहानी भारत जोड़ो यात्रा से शुरू होती है। इसके बाद पटकथा के मुताबिक पीएम मोदी की छवि खराब करने के लिए बीबीसी डॉक्यूमेंट्री, अडानी समूह को बदनाम करने के लिए हिंडनबर्ग रिपोर्ट और ANI, RSS जैसी संस्थाओं पर हमले किए जा रहे हैं। फिर रामचरितमानस विवाद के जरिये हिंदू धर्म को बदनाम करना और खालिस्तान मुद्दे को हवा देकर देश को आंदोलन की आग में झोंकने की साजिश रची जा रही है। यह कोई संयोग नहीं है कि खालिस्तान के नए झंडाबरदार अमृतपाल सिंह जो बात कहता है वही राहुल गांधी भी कहते हैं। RSS के खिलाफ एक तरफ कनाडा में रिपोर्ट तैयार होती है उसे आतंकवादी संगठन करार दिया जाता है तो दूसरी तरफ राहुल गांधी लंदन में RSS के खिलाफ जहर उगलते हैं। RSS को लेकर उनसे प्लांटेड सवाल किए जाते हैं।
सोरोस ने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने का किया ऐलान
अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस ने साल 2020 में वैश्विक स्तर पर राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने की बात कही थी। उसने कहा था कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना ‘राष्ट्रवादियों से लड़ने’ के लिए की जाएगी। सोरोस ने ‘अधिनायकवादी सरकारों’ और जलवायु परिवर्तन को अस्तित्व के लिए खतरा बताया था। सोरोस ने कहा था कि राष्ट्रवाद अब बहुत आगे निकल गया है। सबसे बड़ा और सबसे भयावह झटका भारत को लगा है, क्योंकि वहां लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नरेंद्र मोदी भारत को एक हिन्दू राष्ट्रवादी देश बना रहे हैं।

डीप स्टेट भारत की तरक्की से खुश नहीं
डीप स्टेट भारत की तरक्की से खुश नहीं है और वह चाहता कि किसी तरह से भारत को कमजोर किया जाए। इसीलिए उसने प्यादे के रूप में राहुल गांधी को चुना है। राहुल गांधी इसके लिए योग्य उम्मीदवार हैं। उनके पास अपना कोई विजन नहीं है। डीप स्टेट जैसा कहेगा वो वैसा ही करते जाएंगे। जैसा कि यूक्रेन में हो रहा है। कुल मिलाकर डीप स्टेट चाहता है कि पश्चिमी देशों को चुनौती देने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारत और चीन के बीच रूस-यूक्रेन की तरह युद्ध छिड़ जाए जिससे ये दोनों देश कमजोर हो जाएं। और राहुल गांधी लालचवश में उनके एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें इस बात से तनिक भी दुख नहीं है कि इससे देश का क्या होगा।

क्या राहुल के भाषण की स्क्रिप्ट अमेरिका में लिखी जा रही?
करण थापर के एक शो में सुनीता ने कहा था कि भारत के हिंदुओं के लिए जरूरी है कि वो हिंदुत्व से लड़ें क्योंकि जो आज हो रहा है वो नरसंहार की शुरुआत है। सुनीता की तरह ही राहुल गांधी भी पिछले कुछ समय से हिंदू और हिंदुत्व को अलग बताकर प्रोपेगेंडा फैलाने में जुटे हैं। लेकिन इससे इस बात को बल मिल रहा है कि क्या राहुल के भाषण की स्क्रिप्ट अमेरिका में लिखी जा रही है।
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राहुल के आयोजकों के नाम शाहीन बाग की लिस्ट जैसी क्यों?
अमेरिका में राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजकों में से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार है- फ़्रैंक इस्लाम, माजिद अली, नियाज़ ख़ान, जावेद सैयद, मोहम्मद असलम, मीनाज़ ख़ान, अकील मोहम्मद आदि। इन नामों को देखने ऐसा लगता है कि गोया यह शाहीन बाग की वोटर लिस्ट हो। लेकिन नहीं, ये उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने राहुल गांधी का अमेरिका में प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ कराया। इनमें से कई कश्मीर में कट्टरवाद के समर्थक हैं, यानी के आतंकवाद के समर्थक हैं। अब इससे यह समझना आसान हो जाता है कि राहुल गांधी क्यों सनातन संस्कृति का मजाक बना रहे थे और बस मुसलमान परेशान हैं, मुसलमानों को सेकेंड क्लास सिटीजन माना जाता है, भारत में यही सब गाना गा रहे थे।

अजमेर दरगाह पर भी कन्हैया लाल की खून के छींटे? उदयपुर में हत्यारे से मिला था खादिम गौहर चिश्ती

                 अजमेर दरगाह के खादिम गौहर के संपर्क में था कन्हैया लाल का कातिल (चित्र साभार: Zee न्यूज़)
नूपुर शर्मा विवाद पर जिस तरह अजमेर की बहुचर्चित दरगाह का नाम विवादों में आया है, वह हर उस गैर-मुस्लिम को शर्मसार कर रहा है, जो वहां जाकर चादर चढाई। कन्हैया की हत्या में जिस तरह दरगाह का नाम उछल रहा है, समय आ गया है कि दरगाह पर जाने से पहले चिश्ती का इतिहास पढ़ लेना ही उचित होगा। जहाँ का प्रबंधन ही हिन्दू विरोधी हरकतों में लिप्त हो, क्या कहा जाए। जब हिन्दू बोलेगा तब victim card खेलेंगे। हिन्दू की दुकान से सामान मत खरीदो, क्या मतलब 
है इसका? कौन-सी आग लगाई जा रही है दरगाह के प्रबंधन द्वारा? इन अक्ल से पैदल वालों को नहीं मालूम कि जब हिन्दू दरगाह जाना छोड़ देगा, क्या होगी तुम्हारी आर्थिक स्थिति? सरकार को आरोपित खादिमो के साथ-साथ दरगाह प्रबंधकों के बैंक खातों की जाँच करनी चाहिए। 

उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट डाला था। अब इस बर्बर हत्या के तार अजमेर से भी जुड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती से हत्यारों के कनेक्शन सामने आए हैं। कन्हैया लाल की हत्या के बाद रियाज और गौस भागकर गौहर के पास ही पनाह लेने अजमेर आ रहे थे। लेकिन रास्ते में पकड़े गए थे।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार गौहर चिश्ती 17 जून को उदयपुर गया था। उसने सर कलम करने के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही जा रही है। दिलचस्प यह है कि इसी दिन रियाज ने वह वीडियो शूट किया था, जिसमें नबी की शान में गुस्ताखी करने वालों का सिर काटने की बात कही गई थी। कन्हैया लाल की हत्या के बाद यह वीडियो भी सामने आया था।

उदयपुर जाने से पहले गौहर ने अजमेर में भी सर तन से जुदा वाली नारेबाजी करवाई थी। यह नारेबाजी दरगाह के बाहर ही हुई थी। 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ अजमेर पुलिस ने भड़काऊ नारे लगाने का मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद से वह फरार है। वायरल वीडियो में दरगाह के बाहर गौहर ने कहा था, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख ए रसूल की एक सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

इंडिया TV का दावा है कि कन्हैया की हत्या के बाद दोनों हत्यारे गौहर चिश्ती के पास ही अजमेर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए। बताया जा रहा है कि गौहर चिश्ती ने ही रियाज और गौस को कन्हैया लाल के कत्ल का वीडियो बनाने को भी कहा था।

गौहर चिश्ती कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI का सक्रिय सदस्य भी बताया जा रहा है। कन्हैयालाल का हत्यारा रियाज अक्सर अजमेर आता-जाता रहता था। यहीं उसकी मुलाक़ात गौहर से हुई। इस मुलाकात में अनवर हुसैन नाम के व्यक्ति ने मध्यस्थता की थी। फिलहाल अनवर हुसैन राजस्थान ATS की हिरासत में है।

अजमेर दरगाह प्रंबधन कमेटी ने एडवोकेट अशोक माथुर के माध्यम से गौहर चिश्ती को कानूनी नोटिस भेज कर दरगाह परिसर का नारेबाजी में इस्तेमाल करने पर जवाब माँगा है। हालाँकि यह नोटिस कन्हैया की हत्या के काफी बाद पुलिस जाँच में गौहर का नाम आने के बाद भेजा गया है।  

 देखिए कैसे एक बार फिर शरीयत पर भड़काने की कोशिश कर रहा है:-

कन्हैया लाल की हत्या कथित तौर पर नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने को लेकर की गई थी। पिछले दिनों राजस्थान पुलिस ने अजमेर दरगाह के एक और खादिम सलमान चिश्ती को नूपुर की हत्या के लिए उकसाने को लेकर गिरफ्तार किया था। सलमान का जो वीडियो वायरल हुआ था उसमें वह कह रहा था कि नूपुर का गर्दन लाने वाले को वह अपना मकान देगा।

इसके बाद अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती का भी बयान सामने आया था। उन्होंने नुपूर शर्मा को मिल रहे समर्थन पर एतराज जताया था। कहा था कि सलमान इसे बर्दश्त नहीं करेंगे। हालॉंकि अजमेर दरगाह के बाहर ‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी को उन्होंने गलत बताया था। कहा था कि इस्लाम में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है। साथ ही यह भी कहा था कि इसे उदयपुर की घटना से जोड़ना गलत है। लेकिन गौहर चिश्ती से जिस तरह कन्हैया लाल के हत्यारों के लिंक सामने आए हैं, उससे जाहिर हैं कि यह पूरा घटनाक्रम एक ही कड़ी का हिस्सा हैं।