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दिल्ली : मिलावटी और घटिया दारू… वो भी महँगी: AAP वाली केजरीवाल सरकार ने ‘1 पर 1 फ्री’ पिलाकर लूटा

                                                                                                                                      साभार: HT
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (25 फरवरी) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के खिलाफ CAG रिपोर्ट को सदन में पेश किया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि AAP सरकार की शराब नीति में कई गड़बड़ियाँ थीं। इसमें ना ही मूल्यों को तय किया गया और ना ही शराब की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। इन गड़बड़ियों के कारण सरकार को 2002.68 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि आबकारी विभाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। इस विभाग से कुल राजस्व का अकेले 14 प्रतिशत कर के रूप में हासिल होता है। इतना बड़ा स्रोत होने के बावजूद AAP सरकार ने इसमें भारी गड़बड़ी की। इसमें लाइसेंस का उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी, कमजोर निगरानी आदि शामिल हैं।

शराब के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी

भाजपा सरकार द्वारा सदन में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखपरीक्षक (CAG) के मुताबिक, आबकारी विभाग ने एल1 लाइसेंसधारी (निर्माता और थोक विक्रेता) को एक निश्चित स्तर से अधिक कीमत वाली शराब के लिए अपनी EDP कीमत घोषित करने का अनुमति दी। इसके बाद निर्माण के बाद सभी मूल्य घटकों को जोड़ा गया, जिसमें निर्माता का लाभ भी शामिल था।

इसमें CAG ने एक ही शराब निर्माता द्वारा विभिन्न राज्यों में अलग-अलग EDP (एक्स-डिस्टिलरी मूल्य) पर शराब की आपूर्ति पाई गई है। इतना ही नहीं, खुद EDP घोषित करने की अनुमति ने शराब निर्माताओं और थोक विक्रेताओं को शराब की कीमतों में अपने फायदे के लिए हेरफेर करने की अनुमति दी। इससे शराब की बिक्री में गिरावट आई और सरकार को भारी नुकसान हुआ।

दरअसल, शराब के उचित मूल्य के निर्धारण के लिए भी निर्माताओं से लागत विवरण नहीं माँगा गया था। इसलिए एल1 लाइसेंसधारी को बढ़ी हुई EDP में छिपे मुनाफे से मुआवजा मिलने का जोखिम था। CAG का कहना है कि आबकारी विभाग को मूल्य के निर्धारण को विनियमित करना चाहिए, ताकि मूल्य के कारण बिक्री पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करके उत्पाद शुल्क राजस्व को अनुकूलित किया जा सके।

गुणवत्ता निर्धारण में भारी कमी

दिल्ली में शराब की गुणवत्ता का निर्धारण भी आबकारी विभाग ही करता है। मौजूदा नियमों में प्रावधान है कि थोक लाइसेंसधारियों (एल1) के लिए लाइसेंस जारी करते समय भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य बनाता है। आबकारी आयुक्त ने इसके लिए अलग से गुणवत्ता निर्देश नहीं दिए हैं।

CAG ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि ऐसे अनेक मामले पाए गए, जिसमें परीक्षण रिपोर्ट BIS के मानकों के अनुरूप नहीं थे। AAP सरकार में आबकारी विभाग ने बड़ी कमियों के बावजूद लाइसेंस जारी किए थे। विभिन्न ब्रांडों के लिए जल की गुणवत्ता, हानिकारक तत्व, भारी धातुओं, मिथाइल अल्कोहल, सूक्ष्मजीव परीक्षण रिपोर्ट आदि प्रस्तुत ही नहीं किए गए।

इसके अलावा, कुछ लाइसेंसधारियों द्वारा दिए गए परीक्षण रिपोर्ट राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से नहीं थीं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) अधिनियम की दिशान-निर्देशों के अनुसार NABL की रिपोर्ट जमा करना जरूरी है। नमूना जाँच रिपोर्ट की जाँच के दौरान अपर्याप्त परीक्षण प्रमाण-पत्र भी पाए गए।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक में रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी शराब से संबंधित 51 प्रतिशत मामलों में नमूना जाँच रिपोर्टों उपलब्ध नहीं कराई गईं। अगर रिपोर्ट दी भी गईं तो परीक्षण रिपोर्ट एक वर्ष से या उससे अधिक पुरानी थीं या फिर उस रिपोर्ट में तारीख का उल्लेख ही नहीं किया गय था। इस तरह ये पूरा मामला ही संदिग्ध बन जाता है।

I.N.D.I.A में दरारें: दिल्ली में आप के सामने कांग्रेस लड़ेगी लोकसभा चुनाव, बदले में आप राजस्थान में कांग्रेस की खिलाफत!

I.N.D.I.A गठबंधन का मुख्य आधार राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा को स्थापित करना और दूसरे अरविन्द केजरीवाल द्वारा भारत में अपनी पैठ बनाना। लेकिन केजरीवाल की हरकतों को देख केवल कांग्रेस ही नहीं, दूसरे दल भी केजरीवाल से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, इन सब बातों को देख इस गठबंधन का समय पूर्व ही गर्भपात होना जान प्रतीत हो रहा है। केजरीवाल पार्टी को हाशिए पर लाने के लिए कांग्रेस को मजबूत ही नहीं बल्कि अपने वोट बैंक को सुरक्षित करना होगा, क्योकि जहां-जहां कांग्रेस कमजोर हुई है, केजरीवाल कांग्रेस समर्थकों के वोट अपनी झोली में डाल कांग्रेस को हो नुकसान होता है। ताजा उदाहरण पंजाब है, कांग्रेस की आपसी फूट का लाभ केजरीवाल लेने में सफल हुए, अन्यथा पंजाब में केजरीवाल सरकार नहीं बना सकते थे।  
मोदी सरकार के खिलाफ टुकड़े-टुकड़े जोड़कर बनाया गया ‘घमंडिया गठबंधन’ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ही निजी स्वार्थों के चलते तार-तार होने लगा है! आम चुनाव में केवल बीजेपी के विरोध के लिए 26 विपक्षी दल एक साथ तो आ गए, लेकिन अब राज्यों में इनके स्वार्थ टकराने लगे हैं। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और राजस्थान तक इस गठबंधन में आने वाली दरारें सुर्खियां बटोर रही हैं। ‘घमंडिया गठबंधन’ के कुनबे की सूत्रधार कांग्रेस ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के खिलाफ टाल ठोंक दी है तो आप ने भी राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपनी मर्जी की सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। उधर महाराष्ट्र में शरद पवार को लेकर ‘कंफ्यूजन’ की स्थिति पैदा हो गई है, जबकि गठबंधन की अगली बैठक मुंबई में होना तय हुई है। ऐसे हालात में गठबंधन की अन्य पार्टियां पसोपेश में हैं कि भविष्य की रणनीति साझा मुद्दों पर बनाएं, या फिर अपनी ढपली-अपने राग अलापना जारी रखें।

गठबंधन की मुंबई बैठक से पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में उफान
बता दें कि INDIA गठबंधन की पहली मीटिंग पटना में 23 जून को हुई थी। दूसरी मीटिंग 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में हुई। अब तीसरी मीटिंग 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में होनी है। मुंबई की बैठक से पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार को लेकर उफान आया है। गठबंधन बनने के करीब 1 महीने बाद ही इसमें खींचतान शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में जहां अजित-शरद पवार की सीक्रेट मीटिंग और कथित ऑफर को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। दोनों नेताओं के बीच लगातार हो रहीं मुलाकातों ने कांग्रेस और शिवसेना की टेंशन बढ़ा दी है। कांग्रेस अभी से लोकसभा की तैयारियों में जुट गई है। इसके लिए पार्टी ने बुधवार (16 अगस्त) को महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों को लेकर रिव्यू मीटिंग की. बैठक के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने दावा किया कि उनकी पार्टी गठबंधन के साथ मिलकर 42 सीटों पर जीट हासिल करेगी।


शरद पवार को लेकर महाराष्ट्र की जनता के मन में तो भ्रम है- पटोले
इसके साथ ही नाना पटोले ने एनसीपी चीफ शरद पवार को लेकर कहा कि वह एक बड़े नेता हैं। इस बात का कांग्रेस के मन में कोई भ्रम नहीं है लेकिन जनता के मन में है। नाना पटोले ने कहा, “यह उनकी पार्टी के लिए चिंता का विषय है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार गुप्त तरीके मुलाकात कर रहे हैं। शरद पवार शिव सेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी के महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि उनके भतीजे अजित पवार पिछले महीने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना-बीजेपी सरकार में शामिल हो गए थे।

कांग्रेस दिल्ली की सभी सीटों पर लड़ेगी तो इंडिया गठबंधन का औचित्य ही क्या है?
दिल्ली में कांग्रेस की एक बैठक के बाद पार्टी के नेताओं ने संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने की तरफ से दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर मजबूत तैयारी करने के निर्देश मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के मूड में नहीं है और दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर लड़ना चाहती है। कांग्रेस नेताओं के बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो INDIA गठबंधन बनाने का औचित्य ही क्या है? आम आदमी पार्टी नेता विनय मिश्रा ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं का ये बहुत हैरान करने वाला बयान है। ऐसे बयानों के बाद गठबंधन का क्या मतलब रह जाता है?

सात महीने में दिल्ली की सातों सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगे- लांबा
कांग्रेस की मीटिंग के बाद पार्टी नेता अलका लांबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “लगभग 3 घंटे की मीटिंग में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और दिपक बाबरिया मौजूद रहे। तीन घंटे की मीटिंग में संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। संगठन में कमजोरियां क्या हैं? उसपर कैसे काम किया जाए? मीटिंग में हमें सुझाव मिले कि कैसे संगठन को मजबूत कर सकते हैं। सुझाव ये भी आया कि लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां अब हमें करनी है, मकसद वही था। हर नेता को आज से अभी से निकलना है। 7 महीने और 7 सीटें हैं। ये बात हुई कि जिसकी दिल्ली हुई, उसका देश होता है। यही इतिहास बताता है। इसलिए हमें कहा गया कि दिल्ली की सातों सीटों पर तैयारी रखनी है। आदेश हुआ कि हमें दिल्ली की सातों सीटों पर मजबूत संगठन के साथ लड़ना है।

18 राज्यों की लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों को लेकर हो चुकी है मीटिंग
क्या दिल्ली में कांग्रेस ‘एकला चलो’ पर काम कर रही है? इसके जवाब में अलका लांबा ने कहा, “एकला चलो पर तो अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसलिए ये कहना कि हम दो सीटों पर लड़ेंगे, चार सीटों पर लड़ेंगे या बाकी पर काम नहीं करेंगे… ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन ये तो सब जानते हैं कि दिल्ली की सात सीटों पर हम (कांग्रेस) 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे। अब भारत जोड़ो यात्रा के बाद हम देख रहे हैं कि लोग बीजेपी के खिलाफ देश में एक मजबूत विकल्प के तौर पर कांग्रेस को देख रहे हैं। दिल्ली से पहले 18 राज्यों की लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों को लेकर मीटिंग हो चुकी है। दिल्ली 19वां राज्य था, 2024 का चुनाव कैसे जीतना है इसपर चर्चा हुई।

कांग्रेस का वोटों से ही जीती AAP, उसके दो मंत्री भ्रष्टाचार के चलते जेल में बंद
कांग्रेस नेता लांबा ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस का जो वोट है, वो आम आदमी पार्टी की तरफ गया है। बीजेपी का पक्का वोट बैंक और एक स्थिर लाइन है। हमारी लड़ाई बीजेपी से है, लेकिन वोट हमारा आम आदमी पार्टी के पास है। आम आदमी पार्टी के दो बड़े नेता इस समय भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल पर भी शिकंजा कस सकता है। इसलिए कांग्रेस संगठन को अभी से मजबूत करना है। सातों सीटों पर हमें अपनी तैयारियों को पुख्ता करना है। कांग्रेस नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस पार्टी संगठन को मजबूत करके एकजुट होकर लड़ेगी। हमने आम आदमी पार्टी की या गठबंधन की कोई चर्चा नहीं की। हमारा अपना अलग रास्ता है। हमने पोल खोल यात्रा से लेकर हर एक कोशिश की है कि अरविंद केजरीवाल सरकार की नीतियों को एक्सपोज करें।

कांग्रेस के ये छुटभय्ये नेता, एमएलए इलेक्शन में दोनों की जमानत तक नहीं बची-आप
कांग्रेस की बैठक और दिल्ली को लेकर मिला दिशा-निर्देशों के बाद अब आप नेताओं का कहना है कि ऐसे हालात में अरविंद केजरीवाल को इस पर फैसला करना चाहिए कि आगे क्या करना है। आम आदमी के सौरभ भारद्वाज ने कांग्रेस नेताओं के इस तरह के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन की मूल भावना का खिलाफ बयान देने वाले बहुत छोटे-मोटे नेता हैं, जिनकी जमानतें विधानसभा चुनाव तक में नहीं बची हैं। उनके बयानों की क्या वैल्यू है, इसे आसानी से समझा जा सकता है। अनील चौधरी और अल्का लांबा ने बयान दिया है और सभी जानते हैं कि दोनों की ही जमानत कहां बची। दोनों की मिला लो तो भी नहीं जीतेंगे। जब सौरभ भारद्वाज से पूछा गया कि क्या आम आदमी पार्टी भी दिल्ली में लोकसभा की सातों सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है? या वे मानते हैं कि दिल्ली में आप-कांग्रेस का गठबंधन होना चाहिए? तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ये सभी PAC के लेवल की चीजे हैं। हमारी पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी है, वो इस पर चर्चा करेगी, निर्णय करेगी।

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ प्रत्याशी उतारेगी AAP
आप एक ओर दिल्ली में कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव लड़ने का विरोध कर रही है, दूसरी ओर राजस्थान में कांग्रेस के खिलाफ ही अपने उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी ने गंगानगर, हनुमानगढ़, बांसवाड़ा, सीकर, जयपुर, अलवर, कोटा, दौसा, चुरू, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर जिले की 26 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले चेहरे लगभग तय कर लिए हैं। अगले सप्ताह इन 26 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो सकती है। आम आदमी पार्टी के प्रभारी विनय मिश्रा के मुताबिक कई सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले उम्मीदवार तय कर लिए हैं। राजस्थान में हम तीन-चार फेज में विधानसभा उम्मीदवार घोषित करेंगे। राजस्थान की चुनाव तैयारियों को लेकर 18 अगस्त को पार्टी की अहम बैठक होने वाली है। इसके बाद पहली सूची 25 अगस्त से पहले जारी कर देंगे।

‘इंडिया’ अलायंस के बावजूद आप की विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तैयारी
पार्टी ने तय किया है कि इन 26 सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले लोगों को पहले विधानसभा प्रभारी बनाया जाएगा। कम से कम एक माह तक इनको पार्टी की ओर से संगठन विस्तार का काम देकर परफोर्मेंस देखी जाएगी। इसके बाद इनको टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। संभावना है कि 26 में से एक-दो ऐसे लोग जो परफॉर्मेंस में खरे नहीं उतरेंगे उनकी जगह नए नाम भी शामिल हो सकते हैं। मिश्रा ने साफ-साफ कहा कि ‘इंडिया’ अलायंस को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए कि हम राजस्थान में चुनाव नहीं लड़ रहे, बल्कि पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह से गंभीर है।

राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और गुजरात से सटी सीटों पर ज्यादा फोकस
पंजाब, गुजरात और दिल्ली से लगते राजस्थान के जिलों को पार्टी ने पहली प्राथमिकता में रखा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इन दोनों राज्यों से जुड़े इलाकों में पार्टी की सरकारों के काम और योजनाओं को लेकर पहले से हो रही माउथ पब्लिसिटी को भुनाने की रणनीति है। वहीं गुजरात में भी पिछले चुनाव में आप पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। यही कारण है कि तीनों राज्यों की सीमाओं से सटे राजस्थान के जिलों में पार्टी अपने लिए ज्यादा संभावनाएं देख रही हैं। इसी लिहाज से पहली सूची में ज्यादातर सीमावर्ती जिलों से जुड़ी सीटों पर फोकस रहेगा। चुनाव से पहले अपना धरातल मजबूत करने के लिए पार्टी प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर बड़ा कार्यक्रम करेगी। इसके आधार पर पार्टी चुनावी एजेंडा तय करेगी। पार्टी ने तय किया है कि राजस्थान के सभी जिलों में इसी माह के अंतिम सप्ताह से तिरंगा यात्राओं की शुरुआत होगी। दिल्ली, पंजाब और गुजरात से प्रत्येक जिले में पार्टी का कोई न कोई बड़ा नेता इन यात्राओं का नेतृत्व करेगा।

दिल्ली : ‘प्रचार पर 1100 करोड़ रूपए खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी पैसे देने होंगे’: रैपिड रेल के लिए केजरीवाल सरकार को 415 करोड़ रूपए देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

                                                                                                                  फोटो साभार: TOI/ABP
अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी रैपिड रेल के लिए 415 करोड़ रुपए देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है। यह रकम देने के लिए केजरीवाल सरकार को शीर्ष अदालत ने दो महीने की मोहलत दी है। विज्ञापन पर दिल्ली सरकार के 1100 करोड़ रुपए खर्च करने का हवाले देते हुए यह आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने सोमवार (24 जुलाई 2023) को कहा, “यदि पिछले 3 सालों में विज्ञापन पर 1100 करोड़ रुपए खर्च किए जा सकते हैं तो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए निश्चित रूप से पैसा दिया जा सकता है। या तो आप (दिल्ली सरकार) पैसा दें या हम आपका विज्ञापन बजट कुर्क कर लेंगे।” कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार के फंड देने से हाथ खड़े करने के कारण उसे यह आदेश देना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और चेतावनी के बाद दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि RRTS के लिए फंड दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कोर्ट से फंड किश्त में जमा करने और इसके लिए थोड़ा समय देने की माँग की। इस पर कोर्ट ने उन्हें दो महीने की मोहलत दी। अब केजरीवाल सरकार को RRTS के लिए 2 महीने के भीतर 415 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

RRTS प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर इससे पहले 3 जुलाई 2023 को सुनवाई हुई थी। इस दौरान दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि RRTS के लिए उसके पास फंड नहीं है। जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को बीते 3 सालों में विज्ञापन पर हुए खर्च का ब्यौरा 2 सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर बताया था कि बीते 3 सालों में उसने विज्ञापन पर 1073 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

क्या है RRTS प्रोजेक्ट

RRTS प्रोजेक्ट के जरिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को हरियाणा और राजस्थान से जोड़ने की प्लानिंग है। इसके तहत कम्प्यूटर संचालित हाई स्पीड ट्रेनें चलेंगी। पीक टाइम नहीं होने पर इन ट्रेनों से माल ढुलाई की भी योजना है। 180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ये ट्रेनें चलेंगी। RRTS के अंतर्गत दिल्ली-मेरठ-गाजियाबाद रूट का काम अंतिम चरण में है। इससे यात्रियों को सहूलियत के साथ प्रदूषण और जाम से भी राहत मिलेगी। रैपिड रेल की सेवा मेंट्रो से अलग होगी। मेट्रो के मुकाबले इसकी स्पीड अधिक और स्टॉपेज कम होगा।

दिल्ली के डूबने का जिम्मेदार कौन : अरविन्द केजरीवाल या फ्री की रेवड़ी में फंसे मतदाता?

दिल्ली बाढ़ (साभार: NBT)
दिल्ली में मृतप्राय यमुना में बाढ़ आने के बाद राजधानी के कई इलाके पानी में डूब गए हैं। रिंग रोड से लेकर लाल किला परिसर तक में पानी भर गया है। मकान-दुकान से लेकर स्कूल, अस्पताल तक में पानी भरने से लोग परेशान हैं। निगमबोध घाट पर पानी भर जाने के कारण शवों का दाह-संस्कार तक रोक दिया गया है। इस हालात में अब दिल्ली में पेयजल का संकट बढ़ता नजर आ रहा है।

कहा जा रहा है कि लगातार बारिश की वजह से दिल्ली का ये हाल हुआ है। उधर, हथिनीकुंड बैराज से एक लाख क्यूसेक ज्यादा पानी छोड़ा गया है। इसका असर भी दिख रहा है। राजधानी दिल्ली में 1978 के बाद पहली बार यमुना का जलस्तर इतना बढ़ा है। साल 1978 में दिल्ली में आए बाढ़ से भारी तबाही मची थी। तब पानी लोहे के पुल के ऊपर से बह रहा था। लेकिन चांदनी चौक में कभी पानी नहीं आया। पानी पुल के नीचे से बह रहा है और पानी चांदनी चौक तक आ गया, यानि यमुना की गहराई न होने के कारण ऊपर ही ऊपर बहना ही असली कारण है। अरविन्द केजरीवाल बताओं कितने वर्षों से यमुना नदी की सफाई नहीं हुई? कहां गया सफाई के लिए मिला फंड? केजरीवाल को वोट देकर मुख्यमंत्री बनाने वालों दिल्ली के डूबने के दोषी आप भी हो। कहाँ है फ्री रेवड़ियां? देख लिया अंजाम? दिल्ली की बर्बादी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या लोगे फ्री की रेवड़ियां खाने वालो? कल (13 जुलाई) को Zee News पर "ताल ठोक के" शो में हरियाणा के प्रवक्ता ने हरियाणा को दोषी बताने पर आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता को प्रमाणों के साथ सबूत देकर बेजुबान कर दिया। लेकिन मीडिया भी उन असली कारणों को केजरीवाल से नहीं पूछ रहा,क्यों? 

वर्षा से आयी आपदा कोई पहली बार नहीं आयी है, हर साल आती है। देश में ऐसा कौन-सा प्रदेश है जहाँ बाढ़ नहीं, किसी मुख्यमंत्री ने केंद्र अथवा किसी अन्य राज्य पर दोष नहीं लगा रहा, लेकिन दिल्ली वालों ने फ्री की रेवड़ियों के जाल में फंस ऐसी पार्टी को दिल्ली सौंप दी, जिसके मुख्यमंत्री के पास दोषारोपण करने के अलावा कोई काम नहीं। अपनी विफलताओं के लिए केंद्र या अन्य राज्यों को दोषी करार कर बहुत ईमानदार बने फिर रहे हैं।  


यमुना में बाढ़ का पानी खतरे के निशान से 4 मीटर ऊपर तक बढ़ गया है। गीता कॉलोनी और अक्षरधाम की तरफ भी बाढ़ का पानी पहुँच चुका है। दिल्ली के बाढ़ प्रभावित विभिन्न इलाकों में फँसे लोगों को आपदा प्रबंधन बल (NDRF) निकालने का प्रयास कर रही है। NDRF बाढ़ प्रभावित विभिन्न इलाकों में नाव चला रही है।

सामने आई वीडियो में दिख रहा है कि यमुना का पानी सड़कों पर बेहद तेज गति से प्रवाहित हो रही है और इसकी धारा में खड़े होना लोगों के मुश्किल होता नजर आ रहा है। यमुना से सटे इलाके- खासकर कश्मीरी गेट, ITO, सिविल लाइंस में बाढ़ का पानी 5 फीट तक भर गया है। बाढ़ को देखते हुए कुछ इलाकों में धारा 144 लागू किया गया है।

दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक सिविल लाइंस में यमुना नदी का पानी भर गया है। यह इलाका दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल के आवास से कुछ ही दूरी पर है। यहाँ के घरों में कमर तक पानी भर चुका है। जान बचाने के लिए लोग घरों की ऊपरी मंजिल पर चले गए हैं।

बाढ़ के पानी से मेट्रो भी प्रभावित दिख रही है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन की तरफ जाने वाले रास्ते पर 5 फीट तक पानी भर गया है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन पर एंट्री और एग्जिट को बंद कर दिया गया है। घोषणा कर यात्रियों को बताया जा रहा है कि वो अक्षरधाम या लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन पर उतरें।

DMRC ने कहा कि यमुना नदी से गुजरने वाले चार पुलों शास्त्री पार्क-कश्मीरी गेट, यमुना बैंक-इंद्रप्रस्थ, मयूर विहार-सराय काले खाँ, बॉटेनिकल गार्डन-जामिया मिलिया पर मेट्रो ट्रेन की स्पीड घटा दी गई है। इन पुलों पर 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मेट्रो चलेगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रभावित इलाकों के लोगों से घर खाली करने की अपील की है। दिल्ली में लोगों ने शिविरों और फ्लाई ओवर के नीचे आसरा लिया है। वहीं, प्रभावित लोगों को शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

13 जुलाई 2023) की दोपहर एक बजे तक जल स्तर अब तक के उच्चतम स्तर 208.62 पर पहुँच गया था। उसके बाद से जल स्तर स्थिर बना हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि दोपहर 2 बजे, 3 बजे और शाम 4 बजे जलस्तर 208.62 मीटर दर्ज किया गया है। हालाँकि, 7:30 बजे यह स्तर 208.66 मीटर तक पहुँच गया।

इन सबके बीच सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यमुना में बढ़ते जल स्तर की वजह से वज़ीराबाद, चन्द्रावल और ओखला वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को बंद किया गया है। इस वजह से दिल्ली के कुछ इलाकों में 1-2 दिनों तक पेयजल की परेशानी हो सकती है। जैसे ही यमुना का पानी कम होगा, इन्हें जल्द-से-जल्द चालू करने की कोशिश की जाएगी।

केजरीवाल ने कहा, “यमुना में इस लेवल पर पानी पहुँचेगा, ऐसा कभी नही सोचा था। हमारे तीन वॉटर प्लांट बंद हो गए हैं, क्योंकि पंप के अंदर मशीनों में पानी घुस गया है। पानी कम होने पर मशीनों को सुखाया जाएगा। बिजली से चलाने पर करंट आ सकता है। इसकी वजह से दिल्ली में 25 प्रतिशत पानी की सप्लाई कम हो जाएगी। दिल्ली में 1-2 दिन पानी की काफी किल्लत रह सकती है।”

केजरीवाल जी सिसोदिया की 80 लाख की नहीं 52 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त हुई है

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनीष सिसोदिया समेत कई आरोपियों की 52 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली है। यह खबर सामने आते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने करीबी मनीष सिसोदिया के बचाव में सामने आ गए। आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने कहा कि मनीष सिसोदिया की सिर्फ 80 लाख की ही संपत्ति जब्त की गई है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा कि ईडी शाम से टीवी चैनलों पर झूठी खबरें चलवा रही है कि मनीष सिसोदिया की 52 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की गयी। ईडी ने असल में जो संपत्ति ज़ब्त की है, उसके काग़ज़ात ये रहे। टोटल 80 लाख की संपत्ति ज़ब्त की है, वो भी 2018 के पहले की, जब एक्साइज नीति बनी ही नहीं थी। सिसोदिया के बॉस दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के यह कहते ही लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर दौड़ाना शुरू कर दिया। बीजेपी नेता हरीश खुराना ने लिखा, ‘काहे जनता को घुमा रहे हो अरविंद केजरीवाल जी। प्रॉपर्टी अटैच हुई है घोटाले की वजह से। अभी तो बहुत रिकवरी बाकी है। चिंता ना करो आपसे भी रिकवरी होगी। वैसे, यह तो बताओ अगर केस में कुछ नहीं है तो मनीष सिसोदिया की बेल क्यों बार बार रिजेक्ट कर रहा है कोर्ट। आप तो अपने दिन गिनो। आपका नंबर भी आएगा।

सोशल मीडिया पर इसको लेकर केजरीवाल की फजीहत हो रही है। आप भी देखिए लोग क्या- क्या कमेंट कर रहे हैं।

दिल्ली शराब घोटाला केस : ED ने लिया फिर एक्शन: मनीष सिसोदिया और पत्नी की 52 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त

दिल्ली शराब घोटाला मामले में ED ने 7 जुलाई 2023 को बड़ी कार्रवाई करते हुए केस में पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपितों की 52 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया है। आरोपितों में सिसोदिया के अलावा अमनदीप सिंह ढल्ल, राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा का भी नाम है।

सिसोदिया इस समय दिल्ली शराब घोटाला मामले में फरवरी से तिहाड़ जेल में बंद हैं। पहले उन्हें इसे केस में सीबीआई ने गिरफ्तार किया और उसके बाद उन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत अन्य अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए एक अंतिम आदेश जारी किया गया था।

इस कुर्की में 44 करोड़ 29 लाख रुपए की कैश और चल संपत्ति भी है। इसमें से 11 लाख 49 हजार रुपए मनीष सिसोदिया और 16 करोड़ 45 लाख रुपए बृंदको सेल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के हैं।

ईडी ने बताया कि इस 52 करोड़ की चल-अचल संपत्ति में 7 करोड़ 29 लाख रुपए की 2 प्रॉपर्टी मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया की है। साथ ही राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा के प्लॉट और फ्लैट शामिल हैं।

ईडी की इस कार्रवाई पर भाजपा ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर अरविंद केजरीवाल चुप क्यों हैं। ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी की 52 करोड़ की संपत्ति कुर्की कर ली है।

गुजरात के AAP विधायक दूसरे की बीवी के साथ 50 मिनट साथ होटल में रहे, महिला के पति को देख मुँह छिपाकर भागेः Video वायरल

                    दूसरे की बीवी के साथ होटल में AAP विधायक भूपत भयानी (तस्वीर साभार: दिव्य भास्कर)
गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के विसावदार से विधायक भूपत भयानी का कथिततौर पर एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में भूपत एक महिला के साथ होटल में जाते दिखाई दे रहे हैं। अब सीसीटीवी की वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है।

बताया जा रहा है कि ये वीडियो सूरत के कडोदरा इलाके के सूरज होटल का है जिसमें कथिततौर पर विधायक दूसरे की बीवी के साथ जाकर रजिस्ट्रेशन करवाते दिख रहे हैं। इस संबंध में दिव्य भास्कर ने एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की है।

इसमें दावा है कि सीसीटीवी में दिखने वाला शख्स आप विधायक भूपत भयानी ही है, जिनके इस शादीशुदा लड़की से काफी करीबी रिश्ते थे इसलिए वह यहाँ होटल के कमरे में उसके साथ समय बिताने आए थे।

एक अन्य रिपोर्ट में किए गए दावे के मुताबिक कडोदरा इलाके में स्थित सूरज नाम के इस होटल में भूपत भयानी ने 800 रुपए में एक कमरा किराए पर लिया था। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विसावदर से आप विधायक भूपत भयानी महिला के साथ होटल के कमरे में करीब 50 मिनट तक अकेले थे। हालाँकि, जब लड़की का पति मोबाइल से वीडियो बनाते हुए होटल पहुँचा तो भयानी को मुँह पर रुमाल रखकर भागना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की के पति ने पुलिस में शिकायत इसलिए दर्ज नहीं कराई क्योंकि वह अपने परिवार को बचाना चाहता था। यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने फोन पर जो वीडियो रिकॉर्ड किया है उसका कहीं खुलासा नहीं किया गया है। लड़की के पति का कहना है कि अगर पुलिस जाँच कराई जाए तो भूपत भयानी के अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध पाए जाएँगे।

इस मामले पर दिव्य भास्कर के पत्रकार देवेन चित्ते ने आप विधायक भूपत भयानी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, “मैं अभी अपने घर पर हूँ, प्लीज, मैं अभी आपको किसी भी तरह की टिप्पणी या प्रतिक्रिया नहीं दे सकता, मैं अपनी लीगल टीम से मिलूँगा और बाद में प्रतिक्रिया दूँगा।”

सिसोदिया की चिट्ठी ट्वीट करते ही ट्रोल हो गए केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर अपने करीबी मनीष सिसोदिया की एक चिट्ठी शेयर की। सिसोदिया में चिट्ठी में एक कविता लिखी है। कविता के साथ चिट्ठी में ग्राफिक्स भी बनाया गया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया की चिट्ठी ट्वीट करते ही आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए। लोग सिसोदिया के साथ केजरीवाल पर भी तंज कसने लगे।

लोग केजरीवाल का मजाक उड़ा रहे हैं…


पंजाब : AAP ले रही ‘ऑपरेशन शीशमहल’ का बदला : मोहल्ला क्लिनिक कवर करने जा रही टाइम्स नाऊ की महिला पत्रकार को पुलिस ने हिरासत में लिया

                                                  टाइम्स नाऊ की पत्रकार हिरासत में (तस्वीर साभार: TN)
पंजाब पुलिस ने टाइम्स नाऊ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को हिरासत में लिया है। मीडिया चैनल के अनुसार, उनकी पत्रकार को एक एक्सीडेंट केस में पुलिस ने पकड़ा जबकि हकीकत में वह गाड़ी चला ही नहीं रहीं थीं। इसके बाद उनपर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया… जिस पर चैनल ने पूछा कि आखिर उनकी पत्रकार किसी अंजान शख्स की जाति पर कैसे टिप्पणी करेंगी जब वो उससे टकराईं ही रास्ते में थीं।

टाइम्स नाऊ की नाविका कुमार ने इस संबंध में देर रात ट्वीट करते हुए कहा, “मैं भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल से टाइम्स नाऊ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को तुरंत छोड़ने की माँग करती हूँ। उन्हें पंजाब पुलिस ने पिछले 7 घंटे से पकड़ कर रखा है। उनके ऊपर ऐसी (गाड़ी से) एक्सीडेंट का इल्जाम लगाया गया है जो वो चला ही नहीं रही थीं। ये मीडिया को एक धमकी है।”

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग #SheeshmahalBadla भी लिखा। जिससे साफ होता है कि टाइम्स नाऊ अपने पत्रकार पर हुई इस कार्रवाई को उनके ‘ऑपरेशन शीशमहल’ के बदले में लिया गया एक्शन मान रहा है। इस शो में चैनल ने दिखाया था कि कैसे AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास की साज-सज्जा में 45 करोड़ रुपए खर्च किए।

टाइम्स नाऊ ने अपने शो में भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन शीशमहल के बाद उनके पत्रकारों से बदसलूकी की जा रही है। पहले उन्हें पीटा गया, उनके रास्ते रोके गए और अब एक पत्रकार को बीच रास्ते में हिरासत में ले लिया गया। चैनल ने बताया कि भावना को लुधियाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। एक एफआईआर हुई है। उनपर बेवजह SC/ST एक्ट लगा दिया गया है।

चैनल के मुताबिक भावना के खिलाफ ऐसी धाराएँ इसलिए लगाई गई हैं ताकि उनकी बेल खारिज हो जाए। चैनल ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क का कुछ नहीं कर पाई इसलिए पंजाब में कार्रवाई कर रही है।

रिपोर्ट बताती है भावना किशोर को उस समय पुलिस ने पकड़ा जिस समय वह पंजाब में ’80 मोहल्ला क्लिनिकों’ की ओपनिंग की कवरेज करने जा रही थीं। जब इस संबंध में AAP से सवाल हुए तो उन्होंने जवाब दिया कि पत्रकार के बारे में कुछ जानकारी चाहिए तो कोर्ट जाओ।

आप प्रवक्ता गोविंदर मित्तल ने टाइम्स नाऊ से बातचीत में कहा कि अगर महिला पत्रकार ने ऐसा कोई काम किया है जो कानून के खिलाफ है तो फिर कानून उसके ऊपर भी लागू होगा। जब पत्रकार ने पूछा कि क्या अगर गाड़ी की टक्कर हो जाए और पीछे उसमें महिला बैठी हो तो क्या फिर उसे पुरूष पुलिस वाला लेकर जाएगा? इस पर मित्तल कहते हैं- “अगर आपको लगता है कि आपकी महिला पत्रकार के साथ कुछ गलत हुआ तो यहाँ पर अदालतें भी हैं।”

टाइम्स नाऊ के एंकर लगातार पूछते हैं कि वो लड़की (पत्रकार भावना किशोर) कहाँ है इस बारे में न चैनल को पता है न ही उसके माता-पिता को…इस पर AAP प्रवक्ता कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है। इसलिए धैर्य रखें।

इस मामले को पूर्व एजी मुकुल रोहतगी ने अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बताया और साथ ही पंजाब पुलिस की कार्रवाई को अवैध भी कहा। उन्होंने कहा कि ये मामला कोई गुंडे से जुड़ा नहीं था जो राज्य में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने आया था। उन्होंने यह भी बताया कि कानून कहता है कि महिला को सूरज ढलने के बाद पुलिस थाने में नहीं बुलाया जा सकता। इन मामलों में अनुमति कोर्ट से ली जाती है। मुकुल रोहतगी ने इस मामले में चैनल को चीफ जस्टिस के पास फौरन एक याचिका दायर करवाने की सलाह दी।

इसके बाद भाजपा सांसद महेश जेठमलानी ने भी पुलिस कार्रवाई को गलत बताया। उन्होंने पूछा जब भावना कार भी नहीं चला रही थीं तो भी उन्हें किस आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस मामले में कहा कि जो लोग दिल्ली में अलग भाषा बोलते हैं उनके सुर पंजाब में बदल जाते हैं। एक महिला पत्रकार जो अपने काम पर थी उसे ऐसे गिरफ्तार किया जाना गलत है।

भाजपा के खिलाफ टूलकिट है पहलवानों का प्रदर्शन, चुनाव के मद्देनजर जाट-राजपूत में दरार पैदा करने की साजिश

                                                                      साभार 
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ CAA विरोध और कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन की तर्ज पर एक टूलकिट है, जिसका बहुत जल्दी ही भांडा फूट गया है। जिससे देश में अस्थिरता पैदा की जा सके और मोदी सरकार को बदनाम किया जा सके। इस प्रदर्शन की साजिश हालिया कर्नाटक चुनाव और इसी साल होने वाले राजस्थान और मध्यप्रदेश चुनाव को ध्यान में रखकर रची गई और इसे हवा दी जा रही है। इसके साथ ही अगले साल लोकसभा चुनाव और हरियाणा विधानसभा चुनाव है इसीलिए जाट और राजपूतों में विवाद पैदा करने के लिए यह षडयंत्र किया गया। 
इस प्रदर्शन का मकसद हिंदुओं का वोट बांटना है और जाट-राजपूत में दरार पैदा करने की एक साजिश है जिससे कांग्रेस को राजस्थान हरियाणा चुनाव में फायदा मिल सके। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए बीबीसी डॉक्यूमेंट्री से लेकर हिंडनबर्ग रिपोर्ट जैसे टूलकिट भी लेकर आए लेकिन मोदी को दिल में बसा चुके भारतीय जनता पर इसका कोई असर नहीं हुआ, कोई देशव्यापी आंदोलन नहीं हुआ और उनका टूलकिट फेल हो गया। पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए नित नए टूलकिट तलाश रहे कांग्रेस ने अब इसके लिए पहलवानों को चुना है।
अब चर्चा है कि इस नए टूलकिट से भाजपा विरोधियों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला, लेकिन टूलकिट के हाथों बिक इन पहलवानों ने जनता में अपनी अर्जित प्रतिष्ठा को भी खो दिया है। जनता यह भी जानना चाहती है कि जब यौन शोषण हुआ था, तब क्यों नहीं आवाज़ उठाई? दूसरे, अगर बृज भूषण सिंह ने यौन शोषण किया था, फिर क्यों भूषण को अपने पारिवारिक कार्यक्रमों को क्यों आमंत्रित किया जा जाता था? क्यों कोई प्रतिष्ठित परिवार किसी यौन शोषण करने वाले को सम्मान के साथ अपने घर बुलाएगा? जो प्रमाणित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि सारी ही दाल काली है, और पहलवान अराजक तत्वों के हाथ मात्र एक खिलौना।   

पहलवानों के पर्दे के पीछे कोई और पहलवानी कर रहा

स्पष्ट है कि यह किसानों की आड़ में किसान आंदोलन करने वाले उसी टूलकिट या उसी की तर्ज का आंदोलन है। इन पहलवानों के पर्दे के पीछे कोई और पहलवानी कर रहा है जबकि कुछ भोले-भाले पहलवान इस कुचक्र में उलझकर बेकार ही मुफ्त में दंड पेल रहे हैं! इसके साथ ही प्रशिक्षण शिविरों से लेकर घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनिवार्यता और प्रदर्शन तथा ड्रग्स के प्रति बृजभूषण शरण सिंह का कठोर रवैया आदि के कारण भी आंदोलनजीवी बनने की राह पर चल रहे इन पहलवानों को वस्तुत: आपत्ति रही है।

कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ नैरेटिव बनाने के लिए इस मुद्दे को हवा दी

 कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने जब आलाकमान से इस मुद्दे पर बात की तो उनकी बांछें खिल गई। मुंह मांगी मुराद मिल गई। कर्नाटक में चुनाव है। इसी साल राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव होना है। अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ ही हरियाणा चुनाव भी होना है। इसीलिए उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल बीजेपी के खिलाफ नैरेटिव बनाने के लिए किया। सरकार द्वारा कमेटी बना दिए जाने के बाद जब पहलवानों ने धरना बंद कर दिया था तब अप्रैल 2023 में इसे फिर से शुरू करना बताता है इसके पीछे कोई मंसूबा है। अब कांग्रेस समर्थक जाट और राजपूत समूह ने अचानक मोदी सरकार को गाली देना और धमकी देना शुरू कर दिया। इससे साफ होता है कि जाट और राजपूत के बीच जातिगत विभाजन पैदा करने के लिए इस मुद्दे को उछाला गया। इसीलिए प्रियंका गांधी वाड्रा भी धरनास्थल पर पहुंच गई। राजस्थान और हरियाणा में बीजेपी ने 2014, 2019 में सफलतापूर्वक सभी हिंदुओं को एकजुट किया था। योजना हिंदुओं को विभाजित करने की है। आखिर वे 7 महिलाएं कौन हैं, जिन्हें प्रताड़ित किया गया, वह कभी सामने नहीं आईं, उन्हें कोई नहीं जानता।

प्रियंका गांधी का जंतर-मंतर जाना उल्टे गले पड़ गया

प्रियंका गांधी जंतर मंतर पर पहलवानों से मिलने और समर्थन देने पहुंची थी लेकिन वहां जाना उनके गले पड़ गया। इस दौरान प्रियंका के साथ उनके निजी सचिव संदीप सिंह भी थे। इस पर बबिता फोगाट ने प्रियंका गांधी को आड़े हाथ लिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, ‘प्रियंका वाड्रा अपने निजी सचिव संदीप सिंह को लेकर जंतर मंतर महिला पहलवानों को न्याय दिलाने पहुंची हैं लेकिन इस व्यक्ति पर खुद महिलाओं से छेड़छाड़ और एक दलित महिला को दो कौड़ी की औरत कहने जैसे तमाम आरोप लगे हैं।’

शुरू में प्रदर्शन कार्यशैली को लेकर था, बाद में यौन उत्पीड़न लाया गया

उसके बाद जनवरी 2023 में उन्होंने जंतर मंतर पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध शुरू किया। उनके शुरुआती आरोप कार्यशैली के थे। यौन उत्पीड़न का एंगल बाद में लाया गया। इसके बाद सरकार द्वारा कमेटी नियुक्त की गई और उन्होंने अपना धरना बंद कर दिया।

अप्रैल 2023 में धरना फिर शुरू, अब यौन उत्पीड़न का नया एंगल

अप्रैल 2023 से उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ फिर से धरना शुरू कर दिया। अपने पिछले विरोध में उनके मुख्य आरोप असभ्य व्यवहार और बीबी सिंह के दुराचार थे, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी योजना पूरी तरह से बदल दी और केवल यौन उत्पीड़न के बारे में बोलना शुरू कर दिया। हुड्डा की योजना इस मामले का उपयोग करने और WFI के अगले अध्यक्ष बनने की है जो कि वह 2012 में नहीं बन सके थे। सरकार ने मई 2023 के चुनाव रद्द किए और एड हॉक कमेटी बनाई।

बृजभूषण सिंह टीम के साथ ही नहीं थे तो यौन उत्पीड़न कैसे

पहले विनेश फोगट और साक्षी मलिक ने कमेटी के सामने दावा किया कि एक महिला फिजियो को परेशान किया गया, फिजियो ने परेशान होने से इनकार किया। तब विनेश फोगट ने आरोप लगाया कि 2015 में तुर्की यात्रा के दौरान उन्हें और साक्षी मलिक को परेशान किया गया था, लेकिन बृजभूषण सिंह टीम के साथ तुर्की नहीं गए। तब विनेश फोगट ने दावा किया कि वह सटीक तारीख भूल गई, यह वास्तव में 2016 में मंगोलिया दौरे के दौरान था, फिर से समिति ने जांच की और पाया कि बृजभूषण सिंह मंगोलिया दौरे के दौरान भी टीम के साथ नहीं थे।

यौन उत्पीड़न की शिकार एक भी महिला खिलाड़ी सामने नहीं आई

विनेश फोगट और साक्षी मलिक ने दावा किया कि नाबालिगों सहित हजारों लड़कियों को परेशान किया गया। समिति ने उनसे कुछ नाम बताने को कहा। हम उनके नाम नहीं जानते, लेकिन ऐसा हुआ, प्रदर्शनकारी पहलवानों ने कहा। और फिर वे यह दावा करते हुए सड़क पर आ गए कि सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि आरोपी भाजपा सांसद है। दिलचस्प बात यह है कि उनमें से किसी ने भी बृजभूषण सिंह के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की और उन 1000 पीड़ितों में से कोई भी अपने दावों को साबित करने के लिए सामने नहीं आया।

निम्न बिन्दुओं पर एक टूलकिट तैयार किया गया

1. भाजपा को महिला विरोधी घोषित करना
2. भाजपा को जाट विरोधी के रूप में चित्रित करना
3. जाट और राजपूत के बीच दरार पैदा करना
4. हिंदुओं को बांटो

टूलकिट के प्रमुख किरदार बजरंग पुनिया और दीपेंद्र हुड्डा

इस टूलकिट के प्रमुख किरदार हैं पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगट और साक्षी मलिक, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और विपक्षी दल एवं लेफ्ट लिबरल गैंग। इस टूलकिट के जरिए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा के सांसद बृजभूषण शरण सिंह (बीबीएस सिंह) को निशाना बनाया गया है।

बृजभूषण शरण सिंह 2012 में WFI के अध्यक्ष बने

पहलवानों के ताजा विवाद के बाद इस कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। ट्विटर यूजर STAR Boy ने इस मुद्दे पर ट्वीट की श्रृंखला जारी की है। वर्ष 2011 में, रेसलिंग फेड ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए। जम्मू-कश्मीर के पहलवान दुष्यंत शर्मा जीते और अध्यक्ष बने। हरियाणा कुश्ती संघ ने इस चुनाव को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी और वे केस जीत गए। कोर्ट ने दोबारा चुनाव कराने को कहा। कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष बनना चाहते थे। बीबीएस सिंह ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया, उस वक्त वे समाजवादी पार्टी में थे। उन्होंने मुलायम सिंह से मदद मांगी, मुलायम ने अहमद पटेल से बात की। उस समय कांग्रेस सपा के समर्थन से सत्ता में थी। अहमद पटेल ने दीपेंद्र हुड्डा को अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा। भारी मन से उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। बीबीएस सिंह 2012 में WFI के अध्यक्ष बने।

बृजभूषण शरण सिंह 2015 और 2019 में चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने

अध्यक्ष पद 4 साल के लिए होता है। बीबीएस सिंह 2015 और 2019 में भी जीतकर अध्यक्ष बने रहे। 2014 में, वह फिर से बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी भी केंद्र में जीती, इसलिए उन्हें बीजेपी से समर्थन मिला।

राम मंदिर आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे बृजभूषण शरण सिंह

बीबीएस सिंह बीजेपी के पुराने सदस्य हैं, वे राम मंदिर आंदोलन में भी शामिल थे और बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए पहले व्यक्ति थे। 2008-14 के दौरान वे सपा में थे।

दीपेंद्र हुड्डा 2011, 2015 और 2019 में हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने

दीपेंद्र हुड्डा 2011, 2015 और 2019 में हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने। कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा 2012 से डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष बनना चाहते थे। लेकिन अहमद पटेल की दखलंदाजी की वजह से उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।

बृजभूषण शरण सिंह WFI के सबसे सफल अध्यक्ष

बृजभूषण शरण सिंह भारतीय इतिहास में WFI के सबसे सफल अध्यक्ष बने। भारतीयों ने उनके कार्यकाल में कई पदक जीते, इससे डब्ल्यूएफआई में उनकी स्थिति और मजबूत हुई लेकिन सबसे ज्यादा पदक हरियाणा के पहलवानों ने जीते।

भारतीय कुश्ती में चयन को लेकर पहलवानों के बीच खींचतान

भारतीय कुश्ती में चयन को लेकर पहलवानों के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है। सबसे चर्चित केस में से एक 2016 में सुशील कुमार और नरसिंह यादव के बीच हुआ था। सुशील ओलंपिक पदक विजेता थे और वह रियो ओलंपिक में खेलना चाहते हैं लेकिन डब्ल्यूएफआई नरसिंह को भेजना चाहता था। सुशील हरियाणा के थे और नरसिंह यूपी के। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने नरसिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन जाने से पहले ही वह डोप टेस्ट में फेल हो गए। उन्होंने सुशील कुमार को दोषी ठहराया और हरियाणा के खिलाडिय़ों ने उनके खाने में मिलावट की।

केजरीवाल पहलवानों को समर्थन देने पहुंचे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित यौन उत्पीड़न को लेकर खेल महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों से मुलाकात की। अपने बंगले पर किए गए खर्च को लेकर घिरे केजरीवाल ने लोगों से बृजभूषण शरण सिंह के विरोध में देश के शीर्ष एथलीटों का समर्थन करने की अह्वान किया। केजरीवाल ने कहा कि, “इस देश से प्यार करने वाला हर नागरिक पहलवानों के साथ खड़ा है।” उन्होंने कहा कि, बीजेपी सांसद के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार को पहलवानों की मदद करनी चाहिए।

शराब घोटाला : मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ी;घोटाले के जरिये कमाना था रुपये, खुद को दिखाना चाहते थे ईमानदार

दिल्ली की एक अदालत ने शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह कहते हुए सिसोदिया को राहत देने से इनकार कर दिया कि यह उन्हें जमानत देने के लिए उपयुक्त समय नहीं है। ईडी ने जमानत याचिका का विरोध किया था और कहा था कि जांच ‘महत्वपूर्ण’ चरण में है। कोर्ट ने सिसोदिया को मामले का ‘सूत्रधार’ भी बताया। इससे पहले सिसोदिया ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का भी रुख किया था लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। 

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर एसवी राजू ने कहा कि सिसोदिया पैसा कमाना चाहते थे और वह दिखाना चाहते थे कि वे ईमानदार हैं और पारदर्शिता बरतते हैं, लेकिन उन्होंने पारदर्शिता नहीं बरती। शराब बनाने वाले, होलसेलर और रिटेलर सभी जुड़े हुए थे। इस तरह 100 करोड़ रुपये घूस लिए गए। मनीष सिसोदिया इन सभी चीजों में शामिल थे। चूंकि पुरानी शराब नीति में रिश्वत लेना संभव नहीं था इसीलिए नई नीति बनाई गई और इसके लिए उपराज्यपाल से मंजूरी भी नहीं ली गई। इससे साफ होता है कि निकट भविष्य में मनीष सिसोदिया को कोर्ट से राहत मिलने की संभावना कम ही है और उन्हें फिलहाल जेल में ही अपने दिन गुजारने होंगे।

सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ी

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की ओर से जांच की जा रही आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ा दी। सिसोदिया के वकील ने दावा किया कि जांच एजेंसी ने मामले में अधूरी जांच दायर की थी, अदालत से उनके मुवक्किल को डिफॉल्ट जमानत देने का आग्रह किया, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली। सीबीआई जांच के मामले में जहां सिसोदिया को 12 मई तक जेल हुआ है वहीं ईडी की जांच मामले में भी वह 8 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए हैं।

सिसोदिया साजिश के सूत्रधार, इसीलिए जमानत अर्जी खारिज

कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि वह न केवल साजिश के सूत्रधार थे, बल्कि थोक विक्रेताओं के लिए 12 प्रतिशत लाभ मार्जिन के सेक्शन को शामिल करने और थोक विक्रेताओं के लिए पात्रता मानदंड को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने के पीछे भी उनका ही दिमाग था। जज एमके नागपाल की अदालत ने 83 पन्नों के आदेश में कहा कि वह इस आर्थिक अपराध के मामले में आवेदक को जमानत देने के लिए इच्छुक नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में “आम जनता और बड़े पैमाने पर समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है”। उन्होंने देखा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूत अपराध के कमीशन में सिसोदिया की संलिप्तता की बात करते हैं। इससे पहले संघीय एजेंसी ने यह भी कहा था कि उसे कथित अपराध में उनकी मिलीभगत के नए सबूत मिले हैं।

सीबीआई की चार्जशीट में आया सिसोदिया का नाम

मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में सिसोदिया का भी नाम लिया है। इससे उन्हें जमानत मिलने की संभावना भी कम हो गई है। दरअसल, भ्रष्टाचार के मामले में जांच एजेंसी को आरोपी की गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है वरना आरोपी स्वाभाविक जमानत का हकदार हो जाता है। सीबीआई ने सिसोदिया को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था और 58वें दिन चार्जशीट दाखिल कर दी। एजेंसी ने सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की कुछ धाराओं के अलावा सेक्शन 201 (सबूत नष्ट करने) और 420 (धोखाधड़ी) भी जोड़ा है।

सिसोदिया रिश्वत के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये लेने में लिप्त

जज ने कहा कि आम तौर पर अदालतों और जांच एजेंसियों को ऐसी नीतियों को बनाने के लिए विधायिका की शक्ति में हस्तक्षेप या अतिक्रमण नहीं करना चाहिए, लेकिन एक बार ऐसी नीति बनाने या उसके कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से कानून के दायरे में है। अदालत ने कहा कि उसके सामने पेश किए गए सबूतों से यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि सिसोदिया एडवांस में रिश्वत के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये की अपराध की आय के सृजन से जुड़े थे। यह दक्षिण लॉबी की तरफ से सह-अभियुक्त विजय नायर को भुगतान किया गया था। सह-आरोपी अभिषेक बोइनपल्ली, जो शराब कारोबार में विभिन्न साजिशकर्ताओं और हितधारकों के साथ आयोजित बैठकों में भाग ले रहे थे।

सिसोदिया पर लगाए गए गंभीर आरोप

. चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि आबकारी नीति को लेकर एक्सपर्ट समिति की सिफारिशों को जीओएम (मंत्रियों के समूह) ने पलट दिया था। इस GoM के हेड सिसोदिया ही थे।

2. इसी जीओएम ने कमीशन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का फैसला लिया था।

3. गैरकानूनी तरीके से मिले पैसे के बदले ‘साउथ लॉबी’ के इशारे पर जीओएम ने 12 प्रतिशत कमीशन का प्रावधान जोड़ा। यह साउथ ग्रुप दिल्ली में ही डटा हुआ था, जब जीओएम रिपोर्ट फाइनल की गई। ऐसे में आखिरी मिनट में कई नियम जोड़े गए।

4. चार्जशीट में आईपीसी की धारा 420 (चीटिंग) और 201 (सबूत नष्ट करना) जोड़ी गई है।

5. आबकारी नीति से संबंधित कानूनी सलाह पर एक नोट गायब है। कानूनी सलाह दी गई थी कि पुरानी नीति ठीक है और इसमें कोई बदलाव की जरूरत नहीं है।

6. साउथ ग्रुप के लिए होलसेल डिस्ट्रिब्यूटर के लाइसेंस सिसोदिया के निर्देश पर दिए गए जबकि खिलाफ में कई शिकायतें मिली थीं।

7. मोबाइल फोन गायब होने के कारण सीबीआई का मानना है कि बड़े पैमाने पर सबूत नष्ट किए गए हैं।

8. सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारियों से मंजूरी ले ली गई है।

दिनेश अरोड़ा के बयान से फंसे संजय सिंह

शराब घोटाले में दिल्ली सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस समय जेल में हैं। अब आम आदमी पार्टी के एक और कद्दावर नेता संजय सिंह पर भी इसकी गाज गिर सकती है। ईडी ने इस मामले में अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में संजय सिंह को भी आरोपी बना लिया है। संजय सिंह को आरोपी बनाने के लिए दिनेश अरोड़ा के बयान को आधार बनाया गया है।

CBI के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत

ईडी के अनुसार, समीर महेंद्रू विजय नायर के साथ मिलकर काम कर रहा था और राजनेताओं और शराब कारोबारियों के साथ कई बैठकों का हिस्सा रहा था। ईडी ने यह भी बताया था कि केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में शराब के कारोबार के सिलसिले में आंध्र प्रदेश के एक सांसद मगुनता श्रीनिवासलु रेड्डी से मुलाकात की थी। वहीं, दो प्रमुख गवाहों ने सीबीआई को बताया कि अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आबकारी नीति की ड्राफ्ट कॉपी आबकारी अधिकारी को दी गई और बाद में लागू की गई।

शराब घोटाले में Package कोड वर्ड का मतलब था 15 करोड़ कैश

शराब घोटाले में दिल्ली की जेल में बंद 200 करोड़ की ठगी के मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर के ‘लेटर-बम’ से नए खुलासे हुए। इस खत में अब सुकेश चंद्रशेखर ने उन कूट शब्दों (कोड वर्ड्स) का भांडा फोड़ा है, जो उसकी दिल्ली सरकार के नेताओं-मंत्रियों से अवैध लेनदेन की कथित बातचीत के दौरान इस्तेमाल किए गए। इन तमाम नेताओं-मंत्रियों और अन्य संबंधित राजनीतिक लोगों के नाम के कोड वर्ड्स का भी खुलासा किया है। इन कोडवर्ड्स को सुकेश चंद्रशेखर के साथ बातचीत में इस्तेमाल किया जाता था। सुकेश चंद्रशेखर के ही इस लैटर बम के मुताबिक, AK मतलब अरविंद केजरीवाल, SJ BRO यानी सतेंद्र जैन, Manish यानी मनीष सिसौदिया, अरुण मतलब अरुण पिल्लई। JH मतलब के. कविता का वह Jublie Hills House गेस्ट हाउस जो कथित रूप से अवैध लेनदेन का अड्डा था। Office कोड वर्ड TRS पार्टी हेडक्वार्टर के लिए था। इसी तरह से Package कोड वर्ड का मतलब था 15 करोड़ कैश।

15 किलो घी मतलब 15 करोड़ रुपए

सुकेश चंद्रशेखर और दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जो खुद भी महीनों से तिहाड़ जेल में बंद है, के बीच बातचीत में कोड वर्ड Bro SJ था। इसी तरह से 15 kg Ghee का मतलब 15 करोड़ और 25g Ghee मतलब 25 करोड़ रुपए। इसी तरह चैट में इस्तेमाल होने वाले कोडवर्ड Hyd का मतलब Hyderabad और Sister कोड वर्ड के. कविता (K Kavita) के लिए फिक्स था। चैट में कुछ स्थानों पर AK Bhai का भी इस्तेमाल देखने को मिलता है। जिसका मतलब अरविंद केजरीवाल था।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की जांच में मिलीं ये 7 ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।

2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।

3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।

4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।

5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।

6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।

7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कमी आई।