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PML Act में नित नई व्याख्या करने से बेहतर है मीलॉर्ड, या तो खुद पूरा कानून लिख दो और या इस कानून को रद्द कर दो; लेकिन अपराधियों को संरक्षण देना बंद कीजिए ; #हेमंत सोरेन और #sec 45

सुभाष चन्द्र 

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस खानविलकर की बेंच ने 27 जुलाई, 2022 को PML Act, 2002 और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दी गई की शक्तियों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कानून को सही कहा था। 

लेकिन तब ही से लगातार अलग अलग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस कानून के बारे में नई नई व्याख्या देकर उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह भ्रष्टाचारियों को बचने के रास्ते मिल रहे हैं जिसकी वजह से ऐसे अपराधियों को कानूनी संरक्षण मिल रहा है। विपक्ष तो चाहता ही है कि कानून ख़त्म हो जाए और उसकी मुहीम में अदालतें भी सहयोग कर रही हैं जिससे कानून कुंद होता जाए और प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार पर चोट कमजोर पड़ जाए।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
इससे तो बेहतर है मीलॉर्ड एक बार में पूरे कानून को ही रद्द कर दीजिए और या नित नई व्याख्या करके नए कानून में संशोधन करने की बजाय खुद ही पूरा PML Act लिख दो।

दो दिन पहले झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को जमानत दे दी और जमानत देते हुए जो कहा, उसे पढ़ कर मेरा दिमाग चकरा गया।जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि - 

“ED ने हेमंत सोरेन पर जमीन कब्ज़ा करने का जो आरोप लगाया है, उससे संबंधित एक भी दस्तावेज़ ED अभी तक कोर्ट में पेश नहीं कर सकी; ED ने इस मामले में जिन लोगों ने बयान लिए हैं, उससे भी साबित नहीं हो रहा कि वह जमीन हेमंत सोरेन से जुड़ी है”। 

हाई कोर्ट ने 13 जून को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था जो 28 जून को सुनाया है और जज साहब की यह दोनों टिप्पणियां कह रही हैं कि हेमंत सोरेन निर्दोष है और ED का उसके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। 

जस्टिस मुखोपाध्याय बताएं कि ED ने 31 मार्च को दायर 5500 पन्नों की चार्जशीट में क्या कोई भजन संग्रह दिया था, फिर ट्रायल कोर्ट ने उस पर संज्ञान कैसे ले लिया और 5 महीने तक हेमंत की जमानत की अर्जियां ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में कैसे ख़ारिज होती रहीं।

अगर ED के पास कुछ साबित करने के है ही नहीं तो जमानत क्यों दी आपने, आप उसे बरी ही कर देते।

याद रहे ये मुखोपाध्याय जी उसी हाई कोर्ट के जज हैं जहां लालू यादव की 32 साल की सजा के खिलाफ 5 अपील 5 से 11 साल से लंबित हैं।

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक और महान व्याख्या की है - 16 मई को जस्टिस AS Oka और जस्टिस Ujjal Bhuyan ने फैसला दिया कि यदि कोई आरोपी special court के summons पर पेश होता है, तो उसे custody में नहीं माना जा सकता और उसे PML Act के कठोर प्रावधानों में (Draconian Conditions) जमानत की अर्जी देने की जरूरत नहीं है। CRPC की धारा 88 में कोर्ट उसे बांड भरने को कह सकता है। उसके लिए PML Act की section 45 की twin conditions उस पर लागू नहीं होंगी।

Section 45 कहता है - “bail can be granted to an accused in a money laundering case only if twin conditions are satisfied, there should be prima facie satisfaction that the accused has not committed the offence and that he is not likely to commit any offence while on bail”.

अब सवाल उठता है मीलॉर्ड कि PML Act में कोई ट्रायल कोर्ट सीधा summon कैसे कर सकता है जबकि यह काम जांच एजेंसी का होता है। अगर ED/CBI के लगातार summons पर कोई हाज़िर नहीं होता जैसे केजरीवाल नहीं हुआ था, तब एजेंसी कोर्ट में शिकायत करती है और तब कोर्ट उसे summon करता है लेकिन वह कोई जांच में भाग लेना नहीं होता। ऐसे में जो व्याख्या की दोनों माननीय जजों ने उसके मायने तो वे ही जाने अलबत्ता उससे अपराधियों को संरक्षण जरूर मिल सकता है।

भ्रष्टाचार को कम आंकने की कोशिश मत कीजिए मीलॉर्ड, इसकी आग में एक दिन आपके भी हाथ जल जाएंगे।

ED ने केजरीवाल के नींबू निचोड़ दिए, गुर्दे फोड़ दिए; चारों खाने चित कर दिया, ये हालत होगी, पता था लेकिन इसके लिए जिम्मेदार केजरीवाल और सिंघवी है

सुभाष चन्द्र 

केजरीवाल को मार्च 22 को Rouse Avenue Court की special judge कावेरी बजाज ने ED द्वारा मांगी हुई 10 दिन की Custody की जगह 7 दिन की custody दे दी। 

केजरीवाल बहरूपी कांग्रेस की चाल को समझने में पूरी तरह से असफल रहा। केजरीवाल को मालूम होना चाहिए था कि शराब घोटाले को उजागर करने वाली कांग्रेस के ही वकील सिंघवी को करने की क्या जरुरत थी। सनातन विरोधी को क्या मालूम कि भागवत गीता का सन्देश है "विनाश काले विपरीत बुद्धि"। दूसरे, कांग्रेस ने गठबंधन में केजरीवाल को शामिल कर अपने वोट को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रही थी, और गिरफ़्तारी पर कांग्रेस का समर्थन घरियाली आंसू से कम नहीं। कांग्रेस के मकड़जाल में फंस कर केजरीवाल ने खुद अपनी पार्टी को घोर संकट में डाल दिया है। जितनी तेजी से यह पार्टी उठी थी अब उतनी तेजी से पतन निश्चित है। 

अपने पिछले 2 videos में मैंने कहा था कि केजरीवाल ने सिंघवी से संजय सिंह की जमानत अर्जी पर बेकार दलील दिलवा कर अपना पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिया जब सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि संजय को ED ने बिना “summon” जारी किए गिरफ्तार कर लिया और यह तथ्य केजरीवाल के खिलाफ जाता है क्योंकि उसे तो 9 summon दिए ED ने। 

   

लेखक 
दूसरी बात मैंने कही थी कि “कल हाई कोर्ट में सुनवाई जरूरी नहीं थी क्योंकि सब बातों पर परसों 20 मार्च को ही फैसला हो गया था। अब केजरीवाल अगले दिन सुप्रीम कोर्ट भागेगा हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ और इसलिए ED को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए”। 

ऐसा ही हुआ, ED ने शाम को ही केजरीवाल के घर पर रेड कर दी और 2 घंटे सवाल जवाब करने के बाद लपेट लिया जिसके खिलाफ केजरीवाल रात को सुप्रीम कोर्ट चला गया। लेकिन Rouse Avenue Court  में पेशी से पहले याचिका वापस ले ली यह कहते हुए कि हम lower court में पहले अपनी बात करेंगे। फिर सिंघवी ने इसे सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह ही क्यों दी?

केजरीवाल की आज की स्थिति के लिए वह खुद भी जिम्मेदार है और सिंघवी समेत इसके सारे वकील जिम्मेदार हैं जो उन्होंने केजरीवाल को हाई कोर्ट में 9 summons को चुनौती देने की सलाह दी और अगले दिन यानी कल Arrest से Protection मांगने के लिए सलाह दी। जब इस केस में 15 लोग पहले गिरफ्तार हो चुके हैं तो केजरीवाल में क्या सुर्खाब के पर लगे हैं जो उसकी गिरफ़्तारी पर कोर्ट रोक लगाता।

केजरीवाल जब 8 summons पर पेश नहीं हुआ तो 9वें पर भी न जाता जिसमें उसे कल 21 मार्च को बुलाया था। लेकिन वह चला गया हाई कोर्ट राहत की कोई उम्मीद में जो मिलना संभव नहीं थी क्योंकि कोई कोर्ट summons पर पेश न होने की छूट नहीं देता। जब 20 मार्च को राहत नहीं मिली तो 21 को गिरफ़्तारी रोकने की शर्त पूरी कराने पहुंच गया हाई कोर्ट और अगर दोनों दिन हाई कोर्ट न जाता तो शायद आज की स्तिथि पैदा न होती।

अब “आप” के नेताओं और केजरीवाल उसकी पत्नी की झल्लाहट देखिए क्या क्या बोल रहे हैं -

कह रहे है केजरीवाल एक “सोच है, प्रेरणा है”; केजरीवाल कह रहा है मैं देश के लिए काम करता रहूंगा और सुनीता केजरीवाल कह रही है कि “मोदी के अहंकार ने केजरीवाल को गिरफ्तार कराया है”। 

ऐसी सोच और प्रेरणा है केजरीवाल जो देश के लोगों को शराब के नशे में झोंक देना चाहता है और भ्रष्टाचार की शिक्षा देना चाहता है, उसे याद रखना चाहिए कि उसके सभी मंत्री अभी जेल में ही हैं और इसका भी बाहर आना संभव नहीं होगा। 

अभी भी मोदी को अपमानित करते शर्म नहीं आती। अब तो समझना चाहिए कि मोदी को अनपढ़, गंवार और डरपोक और चौथी पास राजा कह कर अपमान करने का ही आज नतीजा मिला है।

मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस के नेता, अजय माकन, अलका लांबा, सुप्रिया श्रीनेत, संदीप दीक्षित और रागिनी नायक ने केजरीवाल का त्यागपत्र मांगा था तो प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी केजरीवाल के साथ खड़े हैं।

जेल में बहुत समय मिलेगा “सोच” को “सोचने” का कि क्या ऐसे कर्म किए जिनका फल मिला है।

अवलोकन करें:-

केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले गिरफ़्तारी की मांग करने वाली कांग्रेस अब बहा रही घरियाली आंसू; सो

वैसे जेल में सत्येंद्र जैन, सिसोदिया, संजय सिंह के साथ केजरीवाल के मिलने से “चांडाल चौकड़ी” पूरी हो गई, पांचवा विजय नायर सेवा करेगा पेग बनाने और चखना तैयार करने की।

CJI चंद्रचूड़ जी केजरीवाल दूध का धुला नहीं है, जो उसके साथ खड़े दिखते हैं ; मोदी कोई अपराधी नहीं हैं जिसके विरोध में खड़े रहते हैं

सुभाष चन्द्र

अपने 24 जनवरी, 2024 के लेख में मैंने विस्तार से लिखा था कि किस तरह CJI चंद्रचूड़ लगता है एक षड़यंत्र के तहत गुजरात के हर उस केस में जस्टिस बीआर गवई को बेंच में बिठा रहे हैं जिनमें निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते हैं। दुर्भाग्य से उस लेख को चोरी करके एक व्यक्ति ने अपना ही यूट्यूब पर वीडियो बना कर चला दिया।

जस्टिस बीआर गवई ही थे जिनकी बेंच ने ED के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा को मनमाने तरीके से हटा कर ही दम लिया क्योंकि मिश्रा कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं के लिए विशेष खतरा बने हुए थे। तीस्ता सीतलवाड़ के मामले में गुजरात हाई कोर्ट में सुनवाई को दरकिनार करते हुए जस्टिस गवई ने उसे नियमित जमानत दी थी। फिर हाई कोर्ट की अहमियत ही क्या रह गई जब आपने ही फैसले करने हैं।

कल चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव के विषय में पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित याचिका के बावजूद CJI चंद्रचूड़, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई अपने हाथ में ले ली और CJI चंद्रचूड़ ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी वीडियो में मतपत्रों को विरूपित करते (Deface) करते दिखाई दे रहा है- यह लोकतंत्र की हत्या है, उस अधिकारी पर तो मुकदमा चलना चाहिए - Chandrachud virtually jumped to conclusion without complete hearing of the matter.

लेखक 
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे इस मामले के तथ्य सामने रखेंगे। लेकिन चंद्रचूड़ की बेंच कुछ सुनने को तैयार नहीं थी।

सवाल यह उठता है कि क्या पीठासीन अधिकारी इतना बेवकूफ था कि वह कैमरे लगे होने के बावजूद मतपत्रों से छेड़छाड़ करता। यह संभव तो नहीं लगता लेकिन चंद्रचूड़ की आंखे तो वही देख रही थी जो उन्हें अभिषेक मनु सिंघवी दिखा रहा था।

ऐसे मामलों में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को संयमित बयान देने चाहियें। उन्हें पता होना चाहिए कि केजरीवाल और उसकी पार्टी के लोग कोई दूध के धुले नहीं हैं। मई, 2023 में भी चंद्रचूड़ ने उछलकूद मचाते हुए कहा था कि “चुनी हुई सरकार” के पास अधिकारियों के ट्रांसफर की शक्तिया होनी चाहिए और आदेश होते ही केजरीवाल ने आतंकी तांडव दिखा दिया था। उसके बाद ही केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा जिसे संसद ने मंजूरी दी थी जिसे केजरीवाल ने चंद्रचूड़ की अदालत में चुनौती दी हुई है।

चंद्रचूड़ को याद रहना चाहिए कि केजरीवाल के कई मंत्री और नेता शराब घोटाले में जेल में बंद हैं और वह खुद ED के समन से भागता फिर रहा है।

एक वक्त ऐसा भी आया था जब चंद्रचूड़ को ही कहना पड़ा था कि हम दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के रोज रोज के झगड़े निपटाने का ही काम नहीं कर सकते। चंद्रचूड़ को यह भी संज्ञान में रखना चाहिए कि केजरीवाल ने कई बार कहा है कि "मैं anarchy हूँ", ऐसे व्यक्ति से क्या किसी संतुलित बात/काम की अपेक्षा की जा सकती है? दिल्ली में यमुना नदी की कितने समय से सफाई नहीं हुई, जिस कारण दिल्लीवासियों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा, किसी न किसी विभाग का वेतन रोक दिया जाता है, क्या है ये सब, कौन पूछेगा केजरीवाल से?

केजरीवाल को अनावश्यक रूप से सहारा देना CJI चंद्रचूड़ के लिए उचित नहीं है। केजरीवाल के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहते हैं और अनेक मामले दर्शाते हैं कि चंद्रचूड़ के निशाने पर भी नरेंद्र मोदी ही रहते हैं। यह पक्षपात लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह High Courts के कार्यों में दखल न दे जैसा उन्होंने अभी कोलकाता हाई कोर्ट के गंगोपाध्याय और सोमेन सेन के मामले में किया है। उनका मामला अपने हाथ में ले लिया, ठीक है लेकिन गंगोपाध्याय को सभी शिक्षा घोटालों के मामलों से हटाना उचित नहीं था। सोमेन सेन और गंगोपाध्याय के बीच के CBI जांच के आदेशों के बारे तुरंत फैसला करना चाहिए।

केजरीवाल की वजह से एक दिन चंद्रचूड़ कलंकित हो सकते हैं।

दिल्ली शराब घोटाला केस : ED ने लिया फिर एक्शन: मनीष सिसोदिया और पत्नी की 52 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त

दिल्ली शराब घोटाला मामले में ED ने 7 जुलाई 2023 को बड़ी कार्रवाई करते हुए केस में पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपितों की 52 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया है। आरोपितों में सिसोदिया के अलावा अमनदीप सिंह ढल्ल, राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा का भी नाम है।

सिसोदिया इस समय दिल्ली शराब घोटाला मामले में फरवरी से तिहाड़ जेल में बंद हैं। पहले उन्हें इसे केस में सीबीआई ने गिरफ्तार किया और उसके बाद उन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत अन्य अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए एक अंतिम आदेश जारी किया गया था।

इस कुर्की में 44 करोड़ 29 लाख रुपए की कैश और चल संपत्ति भी है। इसमें से 11 लाख 49 हजार रुपए मनीष सिसोदिया और 16 करोड़ 45 लाख रुपए बृंदको सेल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के हैं।

ईडी ने बताया कि इस 52 करोड़ की चल-अचल संपत्ति में 7 करोड़ 29 लाख रुपए की 2 प्रॉपर्टी मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया की है। साथ ही राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा के प्लॉट और फ्लैट शामिल हैं।

ईडी की इस कार्रवाई पर भाजपा ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर अरविंद केजरीवाल चुप क्यों हैं। ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी की 52 करोड़ की संपत्ति कुर्की कर ली है।

शराब घोटाला : मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ी;घोटाले के जरिये कमाना था रुपये, खुद को दिखाना चाहते थे ईमानदार

दिल्ली की एक अदालत ने शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह कहते हुए सिसोदिया को राहत देने से इनकार कर दिया कि यह उन्हें जमानत देने के लिए उपयुक्त समय नहीं है। ईडी ने जमानत याचिका का विरोध किया था और कहा था कि जांच ‘महत्वपूर्ण’ चरण में है। कोर्ट ने सिसोदिया को मामले का ‘सूत्रधार’ भी बताया। इससे पहले सिसोदिया ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का भी रुख किया था लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। 

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर एसवी राजू ने कहा कि सिसोदिया पैसा कमाना चाहते थे और वह दिखाना चाहते थे कि वे ईमानदार हैं और पारदर्शिता बरतते हैं, लेकिन उन्होंने पारदर्शिता नहीं बरती। शराब बनाने वाले, होलसेलर और रिटेलर सभी जुड़े हुए थे। इस तरह 100 करोड़ रुपये घूस लिए गए। मनीष सिसोदिया इन सभी चीजों में शामिल थे। चूंकि पुरानी शराब नीति में रिश्वत लेना संभव नहीं था इसीलिए नई नीति बनाई गई और इसके लिए उपराज्यपाल से मंजूरी भी नहीं ली गई। इससे साफ होता है कि निकट भविष्य में मनीष सिसोदिया को कोर्ट से राहत मिलने की संभावना कम ही है और उन्हें फिलहाल जेल में ही अपने दिन गुजारने होंगे।

सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ी

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की ओर से जांच की जा रही आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ा दी। सिसोदिया के वकील ने दावा किया कि जांच एजेंसी ने मामले में अधूरी जांच दायर की थी, अदालत से उनके मुवक्किल को डिफॉल्ट जमानत देने का आग्रह किया, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली। सीबीआई जांच के मामले में जहां सिसोदिया को 12 मई तक जेल हुआ है वहीं ईडी की जांच मामले में भी वह 8 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए हैं।

सिसोदिया साजिश के सूत्रधार, इसीलिए जमानत अर्जी खारिज

कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि वह न केवल साजिश के सूत्रधार थे, बल्कि थोक विक्रेताओं के लिए 12 प्रतिशत लाभ मार्जिन के सेक्शन को शामिल करने और थोक विक्रेताओं के लिए पात्रता मानदंड को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने के पीछे भी उनका ही दिमाग था। जज एमके नागपाल की अदालत ने 83 पन्नों के आदेश में कहा कि वह इस आर्थिक अपराध के मामले में आवेदक को जमानत देने के लिए इच्छुक नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में “आम जनता और बड़े पैमाने पर समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है”। उन्होंने देखा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूत अपराध के कमीशन में सिसोदिया की संलिप्तता की बात करते हैं। इससे पहले संघीय एजेंसी ने यह भी कहा था कि उसे कथित अपराध में उनकी मिलीभगत के नए सबूत मिले हैं।

सीबीआई की चार्जशीट में आया सिसोदिया का नाम

मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में सिसोदिया का भी नाम लिया है। इससे उन्हें जमानत मिलने की संभावना भी कम हो गई है। दरअसल, भ्रष्टाचार के मामले में जांच एजेंसी को आरोपी की गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है वरना आरोपी स्वाभाविक जमानत का हकदार हो जाता है। सीबीआई ने सिसोदिया को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था और 58वें दिन चार्जशीट दाखिल कर दी। एजेंसी ने सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की कुछ धाराओं के अलावा सेक्शन 201 (सबूत नष्ट करने) और 420 (धोखाधड़ी) भी जोड़ा है।

सिसोदिया रिश्वत के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये लेने में लिप्त

जज ने कहा कि आम तौर पर अदालतों और जांच एजेंसियों को ऐसी नीतियों को बनाने के लिए विधायिका की शक्ति में हस्तक्षेप या अतिक्रमण नहीं करना चाहिए, लेकिन एक बार ऐसी नीति बनाने या उसके कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से कानून के दायरे में है। अदालत ने कहा कि उसके सामने पेश किए गए सबूतों से यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि सिसोदिया एडवांस में रिश्वत के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये की अपराध की आय के सृजन से जुड़े थे। यह दक्षिण लॉबी की तरफ से सह-अभियुक्त विजय नायर को भुगतान किया गया था। सह-आरोपी अभिषेक बोइनपल्ली, जो शराब कारोबार में विभिन्न साजिशकर्ताओं और हितधारकों के साथ आयोजित बैठकों में भाग ले रहे थे।

सिसोदिया पर लगाए गए गंभीर आरोप

. चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि आबकारी नीति को लेकर एक्सपर्ट समिति की सिफारिशों को जीओएम (मंत्रियों के समूह) ने पलट दिया था। इस GoM के हेड सिसोदिया ही थे।

2. इसी जीओएम ने कमीशन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का फैसला लिया था।

3. गैरकानूनी तरीके से मिले पैसे के बदले ‘साउथ लॉबी’ के इशारे पर जीओएम ने 12 प्रतिशत कमीशन का प्रावधान जोड़ा। यह साउथ ग्रुप दिल्ली में ही डटा हुआ था, जब जीओएम रिपोर्ट फाइनल की गई। ऐसे में आखिरी मिनट में कई नियम जोड़े गए।

4. चार्जशीट में आईपीसी की धारा 420 (चीटिंग) और 201 (सबूत नष्ट करना) जोड़ी गई है।

5. आबकारी नीति से संबंधित कानूनी सलाह पर एक नोट गायब है। कानूनी सलाह दी गई थी कि पुरानी नीति ठीक है और इसमें कोई बदलाव की जरूरत नहीं है।

6. साउथ ग्रुप के लिए होलसेल डिस्ट्रिब्यूटर के लाइसेंस सिसोदिया के निर्देश पर दिए गए जबकि खिलाफ में कई शिकायतें मिली थीं।

7. मोबाइल फोन गायब होने के कारण सीबीआई का मानना है कि बड़े पैमाने पर सबूत नष्ट किए गए हैं।

8. सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारियों से मंजूरी ले ली गई है।

दिनेश अरोड़ा के बयान से फंसे संजय सिंह

शराब घोटाले में दिल्ली सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस समय जेल में हैं। अब आम आदमी पार्टी के एक और कद्दावर नेता संजय सिंह पर भी इसकी गाज गिर सकती है। ईडी ने इस मामले में अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में संजय सिंह को भी आरोपी बना लिया है। संजय सिंह को आरोपी बनाने के लिए दिनेश अरोड़ा के बयान को आधार बनाया गया है।

CBI के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत

ईडी के अनुसार, समीर महेंद्रू विजय नायर के साथ मिलकर काम कर रहा था और राजनेताओं और शराब कारोबारियों के साथ कई बैठकों का हिस्सा रहा था। ईडी ने यह भी बताया था कि केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में शराब के कारोबार के सिलसिले में आंध्र प्रदेश के एक सांसद मगुनता श्रीनिवासलु रेड्डी से मुलाकात की थी। वहीं, दो प्रमुख गवाहों ने सीबीआई को बताया कि अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आबकारी नीति की ड्राफ्ट कॉपी आबकारी अधिकारी को दी गई और बाद में लागू की गई।

शराब घोटाले में Package कोड वर्ड का मतलब था 15 करोड़ कैश

शराब घोटाले में दिल्ली की जेल में बंद 200 करोड़ की ठगी के मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर के ‘लेटर-बम’ से नए खुलासे हुए। इस खत में अब सुकेश चंद्रशेखर ने उन कूट शब्दों (कोड वर्ड्स) का भांडा फोड़ा है, जो उसकी दिल्ली सरकार के नेताओं-मंत्रियों से अवैध लेनदेन की कथित बातचीत के दौरान इस्तेमाल किए गए। इन तमाम नेताओं-मंत्रियों और अन्य संबंधित राजनीतिक लोगों के नाम के कोड वर्ड्स का भी खुलासा किया है। इन कोडवर्ड्स को सुकेश चंद्रशेखर के साथ बातचीत में इस्तेमाल किया जाता था। सुकेश चंद्रशेखर के ही इस लैटर बम के मुताबिक, AK मतलब अरविंद केजरीवाल, SJ BRO यानी सतेंद्र जैन, Manish यानी मनीष सिसौदिया, अरुण मतलब अरुण पिल्लई। JH मतलब के. कविता का वह Jublie Hills House गेस्ट हाउस जो कथित रूप से अवैध लेनदेन का अड्डा था। Office कोड वर्ड TRS पार्टी हेडक्वार्टर के लिए था। इसी तरह से Package कोड वर्ड का मतलब था 15 करोड़ कैश।

15 किलो घी मतलब 15 करोड़ रुपए

सुकेश चंद्रशेखर और दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जो खुद भी महीनों से तिहाड़ जेल में बंद है, के बीच बातचीत में कोड वर्ड Bro SJ था। इसी तरह से 15 kg Ghee का मतलब 15 करोड़ और 25g Ghee मतलब 25 करोड़ रुपए। इसी तरह चैट में इस्तेमाल होने वाले कोडवर्ड Hyd का मतलब Hyderabad और Sister कोड वर्ड के. कविता (K Kavita) के लिए फिक्स था। चैट में कुछ स्थानों पर AK Bhai का भी इस्तेमाल देखने को मिलता है। जिसका मतलब अरविंद केजरीवाल था।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की जांच में मिलीं ये 7 ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।

2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।

3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।

4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।

5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।

6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।

7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कमी आई।

सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी खारिज, अब पूछे जा रहे हैं सवाल- क्या मजबूरी है? क्यों मंत्री पद से हटा नहीं पा रहे केजरीवाल ?

दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर वर्तमान में भाजपा नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले अरविन्द केजरीवाल अपनी ही पार्टी के मंत्रियों और नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर क्यों नहीं उनसे इस्तीफा लेते? उनसे इस्तीफा लेने में उनकी कौन-सी मजबूरी है? 
यह भी चर्चा है कि सत्येंद्र जैन को पार्टी से निष्कासित करते ही, पार्टी में तूफान आ जाएगा। 
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और आम आदमी के नेता सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी शनिवार (18-06-2022) को सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने जैन को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें जमानत देने के लिए मामले का यह सही चरण नहीं है। 

गौरतलब है कि अदालत ने जैन और ईडी की दलीलें सुनने के बाद आदेश 14 जून को सुरक्षित रख लिया था। ईडी ने जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 30 मई को गिरफ्तार किया था। उन्हें PMLA की आपराधिक धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था। जैन फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब लोग सवाल कर रहे हैं कि केजरीवाल के सामने क्या मजबूरी है ? वे किस वजह से सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटा नहीं पा रहे हैं ?

 


महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को ED ने किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र में नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता व उद्धव सरकार में मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) को प्रवर्तन निदेशालय (ED/ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी ‘मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और दाऊद से कनेक्शन’ पर चली 8 घंटे की पूछताछ के बाद हुई है। इससे पहले खबर आई थी कि आज सुबह कुर्ला में मलिक के आवास पर जाकर ईडी के कुछ अधिकारियों ने मलिक को पूछताछ में सहयोग देने को कहा और करीब 7: 30 बजे उन्हें अपने साथ ईडी के बलार्ड एस्टेट कार्यालय ले गए।

ईडी ने मलिक से कथिततौर पर उनसे 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के दोषियों में से एक से कुछ संपत्ति खरीदने के संबंध में पूछताछ की है। इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उन्हें विश्वास है नवाब मलिक शाम तक घर लौंटेंगे और ये जो गिरफ्तारी महा विकास अघाड़ी सरकार में नेताओं की करवाई जा रही हैं इन सब पर 2024 के बाद जाँच होगी।

कुछ महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि मलिक परिवार ने उस जमीन की कीमत को साढ़े तीन करोड़ रुपए दिखाया, जिससे उन्हें स्टैम्प ड्यूटी कम भरनी पड़े। जब इसका पेमेंट करने की बात आई तो इसकी कीमत 25 रुपए प्रति स्क्वायर फुट की दर से बताई गई लेकिन असल में पेमेंट 15 रुपए प्रति स्क्वायर फीट के रेट से हुई। मलिक पर आरोप है कि उन्होंने यह जमीन अंडरवर्ल्ड दाऊद के लोगों से खरीदी थी।

कुछ माह पहले ईडी ने महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के 7 ठिकानों पर छापेमारी की थी। राज्य में वक्फ बोर्ड NCP नेता नवाब मलिक के मंत्रालय के अंतर्गत आता है। वक्फ बोर्ड लैंड केस में ये कार्रवाई की गई। पुणे में वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर घोटाले का मामला सामने आया था, जिसकी जाँच ED ने अपने हाथों में ले ली थी।