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कानून/संविधान की धज्जियां उड़ाना कांग्रेस के DNA में शामिल; भारत का नागरिक बनने से पहले वोटर कैसे बन गईं? सोनिया गाँधी से दिल्ली की कोर्ट ने माँगा जवाब

मतदान प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते गाँधी परिवार और उम्मीदवार राजेश खन्ना 
कहते हैं कि ज्यादा बड़बड़ करना अक्सर नुकसानदेय ही साबित होता है। कांग्रेस शहजादा राहुल गाँधी जिस तरह टूलकिट के हाथों कठपुतली बन नाचते हुए जो बोल रहे हैं कांग्रेस का ही बेड़ागर्क कर रहे हैं। कांग्रेस की जिन कारगुजारियों से आज की युवा पीढ़ी अनजान थी, उन्हें राहुल के बडबोल जगजाहिर कर रहे हैं। वोट चोरी के नाम पर मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में कांग्रेस की ही पोलें खुल रही हैं कि जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया तक कांग्रेस खुद वोट चोरी करती रही है और महामूर्खों का झुण्ड INDI गठबंधन राहुल का पिछलग्गू बना हुआ है। 


दूसरे, कोई भी कानून हो या फिर संविधान उसकी धज्जियां कैसे उड़ाई जाती है, वह कांग्रेस से सीखने की जरुरत है। देश का जब सबसे पहला चुनाव हुआ था तब उत्तर प्रदेश के रामपुर से नेहरू के लाडले मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को हिन्दू महासभा के उम्मीदवार विशन सेठ ने 6000 वोट से हरा दिया जो नेहरू से बर्दाश्त नहीं हुआ। पढ़िए नीचे दिए लिंक में:-     

अवलोकन करें:-  

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दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गाँधी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट में दायर अर्जी में दावा किया गया है कि उनका नाम नई दिल्ली से 1980 वोटर लिस्ट में जोड़ा गया, फिर 1982 में हटा दिया गया। नोटिस नागरिकता लेने से पहले वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने को लेकर है। सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की शादी 25 फरवरी 1968 को हुई थी। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 1983 में देश की नागरिकता ली।

अर्जी में कहा गया है कि सोनिया गाँधी का नाम 3 साल पहले वोटर लिस्ट में जोड़ दिया गया था। इस संबंध में एक अर्जी मजिस्ट्रेट कोर्ट में खारिज की गई थी, जिसके खिलाफ रिवीजन अर्जी दायर की गई थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देने से मना कर दिया था।

फर्जी दस्तावेज का किया गया होगा इस्तेमाल- याचिकाकर्ता

याचिका में कहा गया है कि पहली बार नाम जोड़ने में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया होगा। क्योंकि उस वक्त उनके पास देश की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं थे। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि ये अपराध है इसलिए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए।

स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन पर सीनियर एडवोकेट पवन नारंग की शुरुआती दलीलें सुनीं और सोनिया गाँधी और दिल्ली पुलिस से जवाब माँग लिया। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी, 2026 को होगी।

अपनी अर्जी में त्रिपाठी ने कहा है कि सोनिया गाँधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र के इलेक्टोरल रोल में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में जानकारी दी गई है कि सोनिया गाँधी का नाम 1980 में जोड़ा गया, 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में जोड़ा गया।

इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट याचिकाकर्ता की माँग के अनुसार जाँच शुरू नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति की नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के खास अधिकार क्षेत्र में आते हैं और किसी व्यक्ति को इलेक्टोरल रोल में शामिल करने या बाहर करने की योग्यता तय करने का अधिकार भारत के चुनाव आयोग (ECI) के पास है।

कोर्ट ने माँगा सोनिया गाँधी से जवाब

नागरिक बने बगैर वोटर लिस्ट में नाम होने के फर्जीवाड़े को लेकर कोर्ट ने सोनिया गाँधी के खिलाफ दाखिल रिवीजन पिटीशन पर नोटिस जारी किया और जवाब माँगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।

सोनिया गाँधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिक बनीं। 1980 में सोनिया गाँधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया। जबकि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। याचिका में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का भी जिक्र किया गया है। अब सवाल यह है कि 1980 में नागरिकता किस आधार पर दी गई।

क्या है सोनिया गाँधी के वोटर लिस्ट का मामला

सोनिया गाँधी का नाम पहली बार 1980 में मतदाता सूची में दिखाई दिया था, उस वक्त उनके पास इटली की नागरिकता थी। इसके तीन साल बाद वो भारत की नागरिक बनीं। 1980 में गाँधी परिवार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आधिकारिक निवास 1, सफदरजंग रोड में रहता था। 1980 में गाँधी परिवार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आधिकारिक निवास 1, सफदरजंग रोड में रहता था।

 बीजेपी नेता अमित मालवीय के मुताबिक, 1980 से पहले पीएम आवास के पते पर पंजीकृत मतदाता सूची में इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, संजय गाँधी और मेनका गाँधी के नाम थे। नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में 1 जनवरी, 1980 को अर्हता तिथि मानकर 1980 में संशोधन किया गया था। संशोधन के बाद सोनिया गाँधी का नाम मतदान केंद्र 145 के क्रमांक 388 पर जोड़ा गया। यह प्रक्रिया उस कानून का स्पष्ट उल्लंघन थी, जिसके अनुसार मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए किसी व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।”

नाम हटा, फिर 2 साल बाद जुड़ा

सोनिया गाँधी का नाम वोटर लिस्ट से हटाने और फिर जोड़ने को लेकर अमित मालवीय ने कहा कि 1982 में भारी विरोध के बाद सोनिया गाँधी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया और 1983 में फिर से नाम जोड़ दिया गया। इस बार भी नाम जोड़ने पर सवाल उठे थे। 1983 के मतदाता सूची के संशोधन में सोनिया गाँधी का नाम मतदान केंद्र 140 के क्रम संख्या 236 पर दर्ज था। पंजीकरण की अर्हता तिथि 1 जनवरी, 1983 थी। जबकि उन्हें 30 अप्रैल, 1983 को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।

कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मालवीय ने कहा, “सोनिया गाँधी का नाम नागरिकता के लिए अनिवार्य शर्तें पूरी किए बिना ही दो बार मतदाता सूची में दर्ज हुआ। पहली बार 1980 में , जब वह एक इतालवी नागरिक थीं और दूसरी बार 1983 में जब कानूनी रूप से वह भारत की नागरिक नहीं बनी थीं।”

सोनिया गाँधी ने शादी के तुरंत बाद नागरिकता क्यों नहीं ली? इस पर सवाल खड़ा न करते हुए बीजेपी नेता ने कहा, “हम यह भी नहीं पूछ रहे हैं कि राजीव गाँधी से शादी करने के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता स्वीकार करने में 15 साल क्यों लग गए? लेकिन यह घोर चुनावी धाँधली नहीं है, तो और क्या है?”

‘सोनिया-राहुल गाँधी ने बनाए 142 करोड़ रूपए’: नेशनल हेराल्ड केस में ED ने कोर्ट को बताया, 2 जुलाई से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की होगी रोजाना सुनवाई

                      सोनिया-राहुल गाँधी नेशनल हेराल्ड केस में फँसे (फोटो साभार: OpIndia English)
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई बुधवार (21 मई 2025) को हुई। इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों ने अपराध की आय से 142 करोड़ रुपए का फायदा उठाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से प्राप्त किराये की आय से जुड़ी है। ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट में दावा किया कि यंग इंडियन के 76% मालिक सोनिया और राहुल गाँधी ने केवल 50 लाख रुपए का भुगतान करके 90.25 करोड़ रुपए की संपत्ति हासिल की।

ईडी ने जब तक संपत्तियाँ जब्त नहीं की, तब तक सोनिया-राहुल ने उठाया फायदा

ईडी ने कोर्ट में यह भी कहा कि गाँधी परिवार ने न सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग की, बल्कि अपराध की आय को अपने पास रखकर इस अपराध को और बढ़ाया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि यंग इंडियन ने एजेएल के शेयरों का दुरुपयोग किया, जिसके जरिए भारी मुनाफा कमाया गया।

नवंबर 2023 में ईडी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त किया था, जिसके बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया। राजू ने कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपितों ने तब तक इस आय का लाभ उठाया, जब तक ईडी ने कार्रवाई नहीं की।

साल 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी शिकायत

यह मामला मूल रूप से 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि गाँधी परिवार ने यंग इंडियन के जरिए एजेएल को धोखाधड़ी, आपराधिक दुरुपयोग और विश्वासघात के जरिए हासिल किया। 2010 में एजेएल में 1,057 शेयरधारक थे, लेकिन स्वामी का दावा है कि यंग इंडियन ने गलत तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल कर लिया।
ईडी ने इस मामले की जाँच 2014 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी, जब एक ट्रायल कोर्ट ने स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर आयकर जाँच में अनियमितताओं का संज्ञान लिया।

राहुल-सोनिया के वकील ने समय माँग कर मामले को आगे बढ़वाया

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकीलों अभिषेक मनु सिंघवी और आरएस चीमा ने दस्तावेजों की जाँच के लिए और समय माँगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में करीब 5,000 पन्नों के दस्तावेज मिले हैं और मई का महीना कोर्ट और वकीलों के लिए व्यस्त रहता है। इसलिए उन्होंने जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय माँगा। कोर्ट ने उनकी माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले को 2 जुलाई से 8 जुलाई तक रोजाना सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट के दायरे में आता है, इसलिए नियमित सुनवाई जरूरी है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने माँगी चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी

इसके अलावा कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को भी मंजूरी दे दी, जिसमें उन्होंने नेशनल हेराल्ड केस की चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी माँगी थी। ईडी ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि सरकारी मँजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट एक अधिकृत अधिकारी के जरिए दायर की गई है, जो ईडी में सहायक निदेशक के पद पर है। राजू ने एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकार किसी अधिकारी को धारा 45 के तहत शिकायत दायर करने के लिए अधिकृत कर सकती है।

कितना पैसा बर्बाद होगा दिल्ली सरकार का केजरीवाल और उसके गिरोह के मुकदमों पर? कोर्ट सरकार को वकीलों के बिलों का भुगतान करने के लिए कह सकती है, लेकिन केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए नहीं, क्यों?

सुभाष चन्द्र

दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और लोअर कोर्ट में आए दिन केजरीवाल एक के बाद एक मुकदमा दायर करता है और वकीलों को मोटी कमाई का मौका दे रहा है। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह सभी के मुकदमों में वकीलों की फीस तो दिल्ली सरकार ही भर रही है और जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है।

परसों(जुलाई 2) केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली हाई कोर्ट में उसकी CBI द्वारा की गई गिरफ़्तारी को चुनौती दी और कहा कि CBI ने 2022 में केस दर्ज किया, तब कोई arrest की बात नहीं थी, फिर उसे 2023 में summon करके 9 घंटे पूछताछ की और 2024 में गिरफ्तार कर लिया जिसकी कोई जरूरत नहीं थी।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
सिंघवी साहब, 2022 से 2024 तक CBI के संज्ञान में कुछ तथ्य आए होंगे, तभी तो CBI ने कोर्ट से अनुमति मांगी उसे गिरफ्तार करने की और Rouse Avenue कोर्ट ने 3 दिन की custody दे दी और उसके बात न्यायिक हिरासत में भेज दिया 14 दिन के लिए। मतलब उसे CBI ने अपने आप गिरफ्तार नहीं किया बल्कि कोर्ट की अनुमति से किया और इसलिए सिंघवी साहब तथ्यों तोड़ मरोड़ कर पेश मत कीजिये।

कल एक और जमानत की अर्जी हाईकोर्ट में लगाई है केजरीवाल ने जबकि Rouse Avenue कोर्ट से मिली जमानत पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी और सुनवाई लंबित है, ऐसे में उसी कोर्ट में जमानत  लगाई जा सकती है। 

अब सवाल उठता है कि इतने सारे मुकदमों के बिल जनता के पैसे से क्यों भरे जाएं जबकि घोटाला किया केजरीवाल और उसके गिरोह ने। घोटाला ऐसे साबित होता है कि एक शराब नीति पहले से चल रही थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने उसे बदल कर नई नीति बना कर लागू कर दी और उसी में जब घोटाला पकड़ा गया तो नई नीति हटा कर पुरानी फिर से शुरू कर दी। 

इसका मतलब साफ़ है कि नई नीति में गड़बड़ तो की गई और तभी उसे Scrap किया गया।अगर उसमे कुछ गलत नहीं होता तो वह नीति लागू रहती। 

सबसे बड़ी बात यह है कि केजरीवाल, सिसोदिया, जैन और संजय सिंह घोटाले में शामिल थे जिसकी वजह से वे गिरफ्तार हुए और संजय को छोड़ कर किसी को जमानत नहीं मिल रही। क्या कोई कानून इन लोगों को घोटाला करने की अनुमति देता है? कभी नहीं ऐसी अनुमति कोई कानून नहीं दे सकता लेकिन फिर भी घोटाला किया जिसका मतलब साफ़ है कि संवैधानिक पद का दुरूपयोग करके पैसा कमाया गया। 

लेकिन हर कोर्ट में दहाड़ मार मार कर चीखते रहे केजरीवाल और उसकी गिरोह के लोग कि घोटाला हुआ तो पैसा कहां गया, हमारे घर में तो एक चवन्नी भी नहीं मिली? पैसा कभी हेराफेरी का घर में नहीं रखा जाता, उसे तो हाथों हाथ बट्टे खाते लगा दिया जाता है।

वकील अपने मुवक्किलों से हर तारीख पर अपनी फ़ीस के अलावा रूपए की मांग करते रहते हैं, होता है क्या उसका कोई हिसाब? वही हाल रिश्वत में लिए धन का होता है। 

इसलिए किसी भी गैर कानूनी काम करके उसके बचाव में लड़े जाने वाले मुकदमों पर सरकार का खर्च करना किसी तरह भी उचित नहीं है और इसका उपचार केवल यह है कि केजरीवाल की सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए जिससे बर्खास्त होने के बाद सरकार कोई बिल का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने LG को आप पार्टी के वकीलों के बिलों का भुगतान करने के जो आदेश दिए थे, वे अनुचित थे क्योंकि LG ने वकीलों का पैनल और उनकी फीस तय ही नहीं की थी। फिर भुगतान कैसे किया जा सकता है?

कोर्ट में “राजनीतिक प्रवचन” नहीं चलते, अभिषेक मनु सिंघवी के सभी दाव औंधे पड़े; मोटी खाल वाले केजरीवाल को सुरक्षा एजेंसियों को भी रिमांड पर लेना चाहिए

सुभाष चन्द्र

दिल्ली हाई कोर्ट के केजरीवाल की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते ही अभिषेक मनु सिंघवी दौड़े सुप्रीम कोर्ट CJI चंद्रचूड़ जी की शरण में कि तुरंत सुनवाई कीजिए लेकिन उन्होंने उसे याचिका दायर करने का तरीका समझा दिया और आज सुनवाई के लिए बेंच तय कर दी जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की। 

जिस हाई कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था, उसी कोर्ट के सामने ED द्वारा की गई गिरफ़्तारी को चुनौती देना सिंघवी की कोई समझदारी नहीं थी। उसे समझ नहीं आया कि अपने फैसले में जो बिंदुवार टिप्पणियां हाई कोर्ट ने की, वो बहुत Damaging थीं जिससे केजरीवाल का केस और कमजोर हो गया।

फिर भी कमजोर पड़े केस को न जाने क्या सोच कर सिंघवी सुप्रीम कोर्ट ले गए और वहां भी वही घिसी पिटी दलील रखी कि चुनाव में हमें प्रचार से रोका जा रहा है, हमारी याचिका तुरंत सुनी जाए। जस्टिस खन्ना ने सिंघवी की एक नहीं सुनी और बड़े कायदे से उसकी ऐसी तैसी कर दी कि जो याचिका में आपकी दलीले हैं हमने पढ़ ली हैं लेकिन उस पर ED का जवाब भी लेना होगा जिसके बिना सुनवाई हो ही नहीं सकती। 

ED को 24 अप्रैल तक का समय दिया जवाब देने के लिए और सिंघवी को 26 अप्रैल तक अगर कोई rejoinder देने हो। फिर 29 को सुनवाई करेंगे। यानी एक तरह सिंघवी को बता दिया गया कानून में सब बराबर हैं चाहे “दिल्ली का राजा” हो या कोई रंक हो।

Kejriwal is the 3rd most dangerous implant by a foreign agency on Indian soil  Explore the Deep Web of an IITian hand in glove with CIA and its Foundations Network....                    THIS POST IS DIABOLIC.... HOW DO WE MAKE EVERY CITIZEN OF DELHI AND PUNJAB REALIZE HOW DANGEROUS THIS MAN IS.... THIS VIDEO MUST BE MADE VIRAL.....

लेखक 
उधर Rouse Avenue कोर्ट में “दिल्ली के राजा” को वीडियो के जरिए पेश किया गया और कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी।

“आप” के लोगों का दुष्प्रचार जम कर चल रहा है कि हमारी पार्टी के खिलाफ साजिश हो रही है, केजरीवाल को गिरफ्तार ही पार्टी को ख़त्म करने के लिए किया गया है। कोर्ट के फैसले आते ही शोर मचाते हैं भाजपा साजिश कर रही है। ईमानदार लोगों को जेल में डाला जा रहा है तो कौन राजनीति में आएगा।

आज भगवंत मान ने और शिगूफा छेड़ा है, उसने केजरीवाल से तिहाड़ में मिलने के बाद कहा है कि केजरीवाल के साथ Criminals की तरह बर्ताव किया जा रहा है, जो भी सुविधाएं Hard Core Criminals को मिलती हैं, वो भी केजरीवाल को नहीं दी जा रही। कुछ दिन पहले आपियों ने शोर मचाया था कि केजरीवाल का वजन 4 किलो कम हो गया। अब कोई पूछे कि तुमने वजन कैसे नाप लिया जेल में जा कर जबकि यह काम जेल कर्मचारी कर सकते हैं और उन्होंने पाया है कि उसका वजन एक किलो बढ़ा है।

एक ढोल और पीटते हैं “आप” वाले, केजरीवाल सरकार जेल से चलाएंगे। कानूनी पहलू छोड़िए, जो काम Practically होना नामुमकिन है, उस पर भी कोर्ट ध्यान नहीं दे रहा ये बात समझ से परे है। कोर्ट कहता है कि आज तक कोर्ट ने कोई मुख्यमंत्री को नहीं हटाया लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हटा ही नहीं सकता। कभी तो इस काम को शुरू किया जा सकता है।

अब तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के पीछे बहुत गहरा षड़यंत्र है। जिसका पर्दाफाश सिर्फ सुरक्षा जाँच एजेंसियां ही कर सकती है। आखिर जिस कांग्रेस की शिकायत पर घोटाले की जाँच हो रही है, उसी पार्टी का वरिष्ठ नेता केस की पैरवी करे बहुत कुछ चीख-चीख कर कह रही है। जिस पर गंभीरता से कोर्ट, ED, सीबीआई और राष्ट्रीय सुरक्षा जाँच एजेंसियों के अलावा अजित डोवाल को संज्ञान लेना होगा। केजरीवाल बहुत मोटी खाल का बना दिया गया है, आसानी से नहीं कबूलेगा। शराब घोटाले से ज्यादा संगीन मुद्दा देश की  सुरक्षा का है।   

आज तो केजरीवाल घोटाले के आरोप में जेल में है जो सरकार जेल से चलाने की जिद कर रहा है, कल को कोई मुख्यमंत्री “हत्या” के आरोप में जेल में हो, तो क्या वह भी जेल से सरकार चला सकता है, इसका जवाब भी अदालत को ढूंढना चाहिए। केजरीवाल को न हटा कर अदालत अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है (shirking from responsibility)।

पार्टी भी अच्छी तरह जानती है कि केजरीवाल तो बाहर नहीं आने वाला, लेकिन तिहाड़ जाने से पहले आतिशी मार्लेना, सौरभ भारद्वाज का नाम ले दिया, और कितने लोग गिरोह में शामिल है थर्ड डिग्री में ही कबूलेगा। आसानी से नहीं कबूलने वाला। आतिशी और सौरभ तो केवल प्यादा है। लेकिन हैं राजदार।  

केजरीवाल राम मंदिर का विरोध करता रहा पर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी कराता रहा, राम मंदिर भी चले गए  लेकिन उसे पता नहीं समय के अनुसार राम की लाठी चलती है, प्रभु  सब नाटक समझते हैं। वो भूल गया उसने ही कहा था कि जो राम मंदिर किसी मस्जिद को गिरा कर बना हो तो उसमे नहीं जाना चाहिए। फिर भगवान को तुम्हारा वहां जाना कैसे स्वीकार होगा।

‘आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था विजय नायर’: ED के सामने केजरीवाल ने दो मंत्रियों के लिए नाम, कोर्ट में खुलासे के बाद सुनीता का मुँह ताकने लगे मंत्री

नामों के खुलासे होते ही चेहरों पर घबराहट 
दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार (1 अप्रैल 2024) को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 15 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि पूछताछ में सीएम केजरीवाल ने अपने दो मंत्री सौरभ भारद्वाज और आतिशी का नाम लिया है। ED ने कोर्ट में पहली बार इन दोनों का नाम लिया है। 
अब संभावनाएं यह व्यक्त की जा रही कि आतिश और सौरभ केजरीवाल, मनीष,संजय और सत्येंद्र की तरह तिहाड़ जाने से पहले ही केजरीवाल के बेटे के घोटाले को उजागर कर सकते हैं। जिसकी आग सुनीता केजरीवाल और बेटी पर भी आ सकती है।   

ED ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूछताछ में बताया कि घोटाले का आरोपित विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करते थे। जब ED यह बात कह रही थी, तब कोर्ट रूम में मौजूद अरविंद केजरीवाल चुप थे। इससे पहले 5 अक्टूबर 2023 को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कोर्ट में यही बात कही थी।

दरअसल, इससे पहले 28 मार्च 2024 को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीएम केजरीवाल ने लंबा-चौड़ा भाषण दिया था। उनके खिलाफ ED ने सी अरविंद के बयान का हवाला दिया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कोर्ट रूम में कहा था, मेरे घर पर ढेरों मंत्री आते रहते हैं। वो आपस में खुसुर-फुसुर करते रहते हैं, डॉक्युमेंट्स देते हैं।” उन्होंने पूछा था कि क्या ये बयान एक वर्तमान मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त है।

ED की ओर से कोर्ट में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने दलील दी कि विजय नायर सीएम केजरीवाल के करीबी रहे हैं। उन्होंने सीएम कैंप कार्यालय में भी काम किया है। हालाँकि, सीएम केजरीवाल इसका जवाब देने से बचते रहे कि नायर ने सीएम कैंप कार्यालय में काम करने वाले लोगों के बारे में जानकारी नहीं होने का दावा क्यों किया था।

ED जब कोर्ट में आतिशी और सौरभ भारद्वाज का जिक्र कर रही थी, तब भारद्वाज वहीं मौजूद थे। वे अपना नाम सुनकर चौंक गए। भारद्वाज ने अपने साथ खड़ी अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल की तरफ देखा। इस दौरान सुनीता केजरीवाल ने भी सौरभ भारद्वाज की तरफ देखा। 

इससे पहले मनीष सिसोदिया की मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 5 अक्टूबर 2023 को इस बात का जिक्र किया था। सिंघवी ने कोर्ट को बताया था कि विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करता था। सीएम केजरीवाल को नहीं।

विजय नायर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी (AAP) के कम्युनिकेशन प्रभारी रहे हैं। वो एंटरटेनमेंट जगत के जाना-माना नाम हैं। नायर ने इंडी बैंड्स (Indie bands) के लिए मैनेजमेंट कंपनी OML यानी ओनली मच लाउडर शुरू की थी। बाद में उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडी और लाइव म्यूजिक शो पर फोकस किया। ये एक एंटरटेनमेंट और इवेंट मीडिया कंपनी है।

विजय नायर इसके सीईओ और डायरेक्टर रहे हैं। साल 2018 में विजय नायर का नाम विवादों में तब आया, जब #MeToo कैंपेन के दौरान उन पर आरोप लगे। हालाँकि, कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। CBI की FIR में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया के सहयोगी अर्जुन पांडे ने शराब कारोबारी समीर महेंद्रू से 2 से 4 करोड़ रुपए लिए थे, जो विजय नायर की ओर से ली गई थी।


ED ने केजरीवाल के नींबू निचोड़ दिए, गुर्दे फोड़ दिए; चारों खाने चित कर दिया, ये हालत होगी, पता था लेकिन इसके लिए जिम्मेदार केजरीवाल और सिंघवी है

सुभाष चन्द्र 

केजरीवाल को मार्च 22 को Rouse Avenue Court की special judge कावेरी बजाज ने ED द्वारा मांगी हुई 10 दिन की Custody की जगह 7 दिन की custody दे दी। 

केजरीवाल बहरूपी कांग्रेस की चाल को समझने में पूरी तरह से असफल रहा। केजरीवाल को मालूम होना चाहिए था कि शराब घोटाले को उजागर करने वाली कांग्रेस के ही वकील सिंघवी को करने की क्या जरुरत थी। सनातन विरोधी को क्या मालूम कि भागवत गीता का सन्देश है "विनाश काले विपरीत बुद्धि"। दूसरे, कांग्रेस ने गठबंधन में केजरीवाल को शामिल कर अपने वोट को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रही थी, और गिरफ़्तारी पर कांग्रेस का समर्थन घरियाली आंसू से कम नहीं। कांग्रेस के मकड़जाल में फंस कर केजरीवाल ने खुद अपनी पार्टी को घोर संकट में डाल दिया है। जितनी तेजी से यह पार्टी उठी थी अब उतनी तेजी से पतन निश्चित है। 

अपने पिछले 2 videos में मैंने कहा था कि केजरीवाल ने सिंघवी से संजय सिंह की जमानत अर्जी पर बेकार दलील दिलवा कर अपना पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिया जब सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि संजय को ED ने बिना “summon” जारी किए गिरफ्तार कर लिया और यह तथ्य केजरीवाल के खिलाफ जाता है क्योंकि उसे तो 9 summon दिए ED ने। 

   

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दूसरी बात मैंने कही थी कि “कल हाई कोर्ट में सुनवाई जरूरी नहीं थी क्योंकि सब बातों पर परसों 20 मार्च को ही फैसला हो गया था। अब केजरीवाल अगले दिन सुप्रीम कोर्ट भागेगा हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ और इसलिए ED को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए”। 

ऐसा ही हुआ, ED ने शाम को ही केजरीवाल के घर पर रेड कर दी और 2 घंटे सवाल जवाब करने के बाद लपेट लिया जिसके खिलाफ केजरीवाल रात को सुप्रीम कोर्ट चला गया। लेकिन Rouse Avenue Court  में पेशी से पहले याचिका वापस ले ली यह कहते हुए कि हम lower court में पहले अपनी बात करेंगे। फिर सिंघवी ने इसे सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह ही क्यों दी?

केजरीवाल की आज की स्थिति के लिए वह खुद भी जिम्मेदार है और सिंघवी समेत इसके सारे वकील जिम्मेदार हैं जो उन्होंने केजरीवाल को हाई कोर्ट में 9 summons को चुनौती देने की सलाह दी और अगले दिन यानी कल Arrest से Protection मांगने के लिए सलाह दी। जब इस केस में 15 लोग पहले गिरफ्तार हो चुके हैं तो केजरीवाल में क्या सुर्खाब के पर लगे हैं जो उसकी गिरफ़्तारी पर कोर्ट रोक लगाता।

केजरीवाल जब 8 summons पर पेश नहीं हुआ तो 9वें पर भी न जाता जिसमें उसे कल 21 मार्च को बुलाया था। लेकिन वह चला गया हाई कोर्ट राहत की कोई उम्मीद में जो मिलना संभव नहीं थी क्योंकि कोई कोर्ट summons पर पेश न होने की छूट नहीं देता। जब 20 मार्च को राहत नहीं मिली तो 21 को गिरफ़्तारी रोकने की शर्त पूरी कराने पहुंच गया हाई कोर्ट और अगर दोनों दिन हाई कोर्ट न जाता तो शायद आज की स्तिथि पैदा न होती।

अब “आप” के नेताओं और केजरीवाल उसकी पत्नी की झल्लाहट देखिए क्या क्या बोल रहे हैं -

कह रहे है केजरीवाल एक “सोच है, प्रेरणा है”; केजरीवाल कह रहा है मैं देश के लिए काम करता रहूंगा और सुनीता केजरीवाल कह रही है कि “मोदी के अहंकार ने केजरीवाल को गिरफ्तार कराया है”। 

ऐसी सोच और प्रेरणा है केजरीवाल जो देश के लोगों को शराब के नशे में झोंक देना चाहता है और भ्रष्टाचार की शिक्षा देना चाहता है, उसे याद रखना चाहिए कि उसके सभी मंत्री अभी जेल में ही हैं और इसका भी बाहर आना संभव नहीं होगा। 

अभी भी मोदी को अपमानित करते शर्म नहीं आती। अब तो समझना चाहिए कि मोदी को अनपढ़, गंवार और डरपोक और चौथी पास राजा कह कर अपमान करने का ही आज नतीजा मिला है।

मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस के नेता, अजय माकन, अलका लांबा, सुप्रिया श्रीनेत, संदीप दीक्षित और रागिनी नायक ने केजरीवाल का त्यागपत्र मांगा था तो प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी केजरीवाल के साथ खड़े हैं।

जेल में बहुत समय मिलेगा “सोच” को “सोचने” का कि क्या ऐसे कर्म किए जिनका फल मिला है।

अवलोकन करें:-

केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले गिरफ़्तारी की मांग करने वाली कांग्रेस अब बहा रही घरियाली आंसू; सो

वैसे जेल में सत्येंद्र जैन, सिसोदिया, संजय सिंह के साथ केजरीवाल के मिलने से “चांडाल चौकड़ी” पूरी हो गई, पांचवा विजय नायर सेवा करेगा पेग बनाने और चखना तैयार करने की।