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भ्रष्टाचार की नींव पर टिके नेशनल हेराल्ड की नई गुत्थी ने बढ़ाया राहुल-सोनिया के लिए संकट, INDI गठबंधन की एकता और बंगाल के चुनावी समीकरण पर पड़ेगा प्रभाव

नेशनल हेराल्ड में फैले भ्रष्टाचार की जैसे-जैसे परतें खुल रही है जिसमें जवाहर लाल नेहरू से लेकर वर्तमान सोनिया गाँधी परिवार डूबा नज़र आ रहा है। फिर जिस तरह EOW ने इस केस में हाथ डाला है सुब्रमण्यम स्वामी के हाथों से पूरा केस छीन लिया। पलटू राम सुब्रमण्यम स्वामी अब अगर पलटी मार केस को वापस लेना चाहे तो ले नहीं सकते। पलटू राम इसलिए कहा है कि इन्होने कई बार पलटी मार राजनीतिक उथल-पुथल मचा चुके हैं।  
आज जिस तरह सुब्रमण्यम स्वामी हर दिशा में तड़पते और छटपटाते नज़र आ रहे हैं, उससे यह बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है कि उनकी राजनीति का खेल अब पूरी तरह उलट चुका है।उन्हें पहला झटका तब लगा था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्रालय से संबंधित मामलों से उन्हें न केवल दूर रखा, बल्कि उनकी पहुँच को पाँच हज़ार किलोमीटर की दूरी तक सीमित कर दिया था, जिससे उनकी वर्षों पुरानी महत्त्वाकांक्षाएँ वहीँ ढह गई थीं।
अब उन्हें दूसरा और उससे भी बड़ा झटका नेशनल हेराल्ड केस में तब लगा है जब ED ने पूरी तरह अपनी शिकायत, अपने सबूत और अपनी जाँच के आधार पर नई FIR दर्ज कर दी है, जिसका किसी निजी याचिकाकर्ता से कोई लेना-देना नहीं है।इसका साफ़ और सीधा अर्थ यह है कि यदि स्वामी जी अपनी पुरानी याचिका वापस लेने की कोशिश भी करें, तब भी इस केस की दिशा में रत्ती भर बदलाव नहीं होगा, क्योंकि अब केस ED की कानूनी ढाँचे पर खड़ा है, न कि किसी व्यक्ति की इच्छा या राजनीति पर।
पिछले ग्यारह वर्षों में इस केस की धीमी रफ्तार के पीछे जिन “व्यक्तिगत लाभों” और “राजनीतिक सौदों” की चर्चा होती रही है, वे अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं, क्योंकि ED ने दिल्ली पुलिस को इस केस को तेज़ गति से आगे बढ़ाने के लिए औपचारिक निर्देश दे दिए हैं, जिससे स्वामी जी की बेचैनी कई गुना बढ़ गई है।
आज उनकी हर प्रतिक्रिया, हर टिप्पणी और हर तीरछी बात यह साबित करती है कि वह नियंत्रण खो चुके हैं और उन्हें समझ आ चुका है कि अब न तो बर्गेनिंग की गुंजाइश बची है और न ही किसी पार्टी से किसी कथित “राज्यसभा सीट डील” का सपना वास्तविकता में बदल सकता है।
नेशनल हेराल्ड केस अब उनकी पकड़ से पूरी तरह बाहर निकल चुका है, क्योंकि इस बार केस किसी के व्यक्तिगत स्वार्थ पर नहीं बल्कि संस्थागत जाँच और ठोस सबूतों पर आगे बढ़ रहा है, और यही बात स्वामी जी की सबसे गहरी बेचैनी बन गई है।
आज यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि नेशनल हेराल्ड केस काअंतिम और निर्णायक दौर शुरू हो चुका है, और इस बार मंच पर केवल एक ही शक्ति निर्णायक भूमिका निभाने जा रही है…ED और उसका कठोर कानून, जिसे न झुकाया जा सकता है और न खरीदा जा सकता है।
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नेशनल हेराल्ड का बहुचर्चित मामला एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में है। प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज किए गए नए मामले ने इस लंबे विवाद की कहानी को फिर से एक नई दिशा दे दी है। एजेंसियों का दावा है कि उन्हें वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी नई सूचनाएं मिली हैं। ये जानकारियों ऐसी हैं, जिनसे साफ पता चलता है कि नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी मे मिलीभगत की है। सोनिया-राहुल के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत पर की गई है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपने पद का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ उठाया है। नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी अपनी करतूतों के चलते घिर चुके हैं।

दशकों बाद अब सच हो रही है सरदार पटेल की चेतावनी
दशकों बाद सरदार पटेल की ये चेतावनी अब लोगों के सामने आ रही है, जब ईडी इस मामले की जांच कर रही है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जो चेतावनी पत्र के रूप में तब शुरू हुई थी, वह अब एक बड़े घोटाले में बदल गई है। ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में आरोपपत्र दायर किया है। इसमें उन पर यंग इंडिया लिमिटेड के जरिए 5,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है, जो उनके नियंत्रण में है और नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएट जर्नल लिमिटेड से जुड़ी है। 5 मई 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर चिंता जताई कि नेशनल हेराल्ड ने हिमालयन एयरवेज से जुड़े दो व्यक्तियों से 75,000 रुपए से अधिक की रकम स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन ने भारतीय वायुसेना की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से रात्रि हवाई डाक सेवा के लिए सरकारी अनुबंध इसके जरिए हासिल किया है। उसी पत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को आगाह किया कि नेशनल हेराल्ड ने अखानी नामक एक व्यवसायी से धन स्वीकार किया था, जो उनकी विमानन कंपनी के लिए रात्रि डाक अनुबंध हासिल करने में शामिल था। सरदार पटेल ने उल्लेख किया कि अखानी टाटा और एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया जैसी फर्मों से भी धन जुटा रहा था।

नेशनल हेराल्ड के लिए धन जुटाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग
सरदार पटेल ने पत्र में आगे नेहरू को लिखा था कि अखानी पर बैंकों से धोखाधड़ी करने के लिए विभिन्न अदालतों में पहले से ही कई आरोप हैं। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अहमद किदवई द्वारा नेशनल हेराल्ड के लिए धन जुटाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के बारे में भी चेतावनी पत्र के जरिए दी थी, जिसमें जेपी श्रीवास्तव जैसे लखनऊ स्थित व्यापारियों से धन इकट्ठा करना भी शामिल है। उसी दिन, 5 मई 1950 को नेहरू ने पटेल को ऐसे लहजे में जवाब दिया था, जिससे लगता था कि उन्हें शांत करने की कोशिश की जा रही थी। नेहरू ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि उन्होंने अपने दामाद फिरोज गांधी, जो उस समय नेशनल हेराल्ड के महाप्रबंधक थे, से इस अवैध धन संग्रह के आरोपों की जांच करने के लिए कहा है।

सरदार पटेल ने नेहरू के रुख पर स्पष्ट असंतोष जताया था
इसके ठीक अगले ही दिन 6 मई को पटेल ने नेहरू के दावों का दृढ़ता से खंडन करते हुए फिर से नेहरू को जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि अवैध धन की उगाही पूरी तरह से जारी है। फिर पटेल को शांत करने का प्रयास किया गया। लेकिन सरदार पटेल के द्वारा अवैध फंडिंग के बारे में जो चिंता व्यक्त की गई थी, उसे दरकिनार कर दिया गया। हालांकि, तब नेहरू ने यह स्वीकार किया था कि इसमें कुछ गलतियां हुई होंगी। इसके बाद 10 मई, 1950 को लिखे अपने अंतिम पत्र में सरदार पटेल ने नेहरू के इस रुख पर स्पष्ट असंतोष व्यक्त किया था। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने भुगतानों से जुड़ी बेईमानी और नेशनल हेराल्ड के वित्तपोषण से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

गांधी परिवार पर बढ़ता दबाव, नेतृत्व का बोझ और कानूनी चुनौतियां
करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को केवल 50 लाख रुपये में “अधिग्रहित” करने से जुड़े इस मामले का सबसे सीधा असर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर पड़ रहा है। Young Indian कंपनी से जुड़े वित्तीय विवाद पहले भी कांग्रेस की राजनीति को भीतर तक हिलाते रहे हैं। नए मामले ने नेतृत्व की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। जब किसी राजनीतिक दल का सर्वोच्च नेतृत्व लगातार कानूनी लड़ाइयों में उलझ जाता है, तो संगठन का मनोबल प्रभावित होना लाजिमी ही है। उस दल की अपने ही सहयोगी गठबंधन में भूमिका कमजोर पड़ जाती है। कांग्रेस के भीतर यह चर्चा वर्षों से चलती रही है कि नेतृत्व का दबाव और मुकदमों का बोझ पार्टी के पुनर्निर्माण की राह में एक स्थायी रुकावट बन जाता है।

एफआईआर में सोनिया-राहुल के साथ सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के नाम
इस नई एफआईआर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस नेता सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के साथ-साथ यंग इंडियन (वाईआई), डॉटैक्स मर्चेंडाइज लिमिटेड (Dotex Merchandise Ltd), डॉटैक्स प्रमोटर सुनील भंडारी और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) तथा अज्ञात अन्य को आरोपी बनाया गया है। ईडी सूत्रों के अनुसार, संघीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग करके पुलिस FIR दर्ज कराई। यह धारा केंद्रीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक पूर्ववर्ती अपराध के पंजीकरण के लिए सबूत साझा करने की अनुमति देती है, ताकि बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया जा सके और जांच को आगे बढ़ाया जा सके। यह एफआईआर ईडी के मामले को मजबूत करेगी, जिसका आरोप पत्र एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली के आदेश से उत्पन्न हुआ है।

दो हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को केवल 50 लाख रुपये में अधिग्रहीत
बता दें कि यह आदेश भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 26 जून, 2014 को एजेएल की संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में दायर एक निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दिया गया था। एफआईआर में ईडी द्वारा 4 सितंबर को ईओडब्ल्यू को भेजे गए एक पत्र में लगाए गए आरोपों का संज्ञान लिया गया है। ईडी के इस संचार की सामग्री वही है, जो केंद्रीय एजेंसी ने अपने आरोप पत्र में बताई है। ईडी ने अपने आरोप पत्र में आरोप लगाया था कि एक “आपराधिक साजिश” कांग्रेस पार्टी के पहले परिवार के नेतृत्व में, जिसमें सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन शामिल हैं। एजेएल की 2000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों के धोखाधड़ी वाले अधिग्रहण से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग योजना में शामिल थे। सोनिया-राहुल यंग इंडियन के बहुसंख्यक शेयरधारक हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास 38 प्रतिशत शेयर हैं। ईडी का दावा है कि उसकी जांच ने “निर्णायक रूप से” पाया है कि यंग इंडियन ने एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को केवल 50 लाख रुपये में “अधिग्रहित” किया, जो उसके मूल्य से काफी कम था।

यह राजनीतिक हमला नहीं, करोड़ों की जालसाजी का प्रत्यक्ष प्रमाण
कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया हमेशा यही रही है कि यह “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” है। सवाल यह है कि क्या जनता इसे मानने को तैयार है? जब बार-बार करोड़ों की संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और कथित जालसाज़ी के आरोप सामने आते हैं, तब किसी भी दल को नैतिक रूप से खुद को साफ सिद्ध करना आसान नहीं रहता। जनता यह मानने लगती है कि जिन नेताओं के ऊपर पार्टी का मूल ढांचा खड़ा है, वे लगातार कानूनी विवादों में क्यों फंसे रहते हैं। कांग्रेस का संकट सिर्फ कानून या अदालत तक सीमित नहीं है। यह उसकी राजनीतिक छवि, जनविश्वास और विपक्ष में उसकी भूमिका पर सीधा प्रभाव डालती है। इसलिए यह शीशे की तरह साफ है कि यह कोई राजनीतिक हमला नहीं है, बल्कि कांग्रेस द्वारा किए गए धृत कर्मों का दुष्परिणाम है।

पहले से ही टूट रहे INDIA गठबंधन की एकता पर पड़ेगा असर
INDIA गठबंधन पहले ही कई असहमतियों और रणनीतिक मतभेदों से जूझ रहा है। राहुल गांधी और कांग्रेस को गठबंधन का “मुख्य चेहरा” बनाने का प्रयास कई क्षेत्रीय दलों को रास नहीं आ रहा। ममता बनर्जी से लेकर तेजस्वी यादव तक इसका विरोध कर चुके हैं। तेजस्वी ने तो बिहार में कांग्रेस का साथ देने का हश्र देख ही लिया। अब ममता को बंगाल चुनाव को लेकर चिंता है। दरअसल, नए मामले ने उन सभी दलों को और भी अधिक ताकत दे दी है जो पहले से ही कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में विपक्षी गठबंधन की एकता अब और भी कठिन होती जाएगी, क्योंकि सहयोगी दलों को कांग्रेस के साथ मंच साझा करने से पहले राजनीतिक जोखिमों का मूल्यांकन करना होगा।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का आधार और कमजोर होगा
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य पहले ही लगातार बदल रहा है। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी विपक्षी राजनीति में अपनी स्वतंत्र भूमिका स्थापित करने की कोशिश करती रही हैं। वे कई बार राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा चुकी हैं। अब नेशनल हेराल्ड का नया प्रकरण उनके लिए एक ताज़ा राजनीतिक हथियार का काम करेगा। कांग्रेस पहले ही बंगाल में सीमित उपस्थिति रखती है। अब यह मामला तृणमूल को कांग्रेस को “कमजोर, नेतृत्वहीन और समस्याग्रस्त पार्टी” के रूप में पेश करने का अवसर देगा। इससे कांग्रेस का बंगाल में आधार और कमजोर पड़ने की पूरी संभावना है। इसका फायदा 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल सकता है।

बिहार के राजनीतिक बदलाव और विपक्ष की भ्रष्टाचारी छवि का लाभ
भाजपा वर्षों से जिस सच्चाई को उजागर करती आई है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार और परिवारवाद से घिरी पार्टी है, उसे यह मामला पुनः नई ऊर्जा देता नजर आ रहा है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसे राज्य, जहां भ्रष्टाचार, घोटालों और कटमनी की राजनीति पर जनता बेहद संवेदनशील है, वहां भाजपा इसे एक बड़ा मुद्दा बना सकती है। भाजपा की नीतिगत स्थिरता और “साफ़-सुथरी राजनीति” का संदेश, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के विवादों के चलते इसका फायदा अगले चुनाव में भाजपा को मिलने वाला है। हाल ही में बिहार में हुए राजनीतिक उतार-चढ़ाव ने विपक्ष की एकता को हिलाकर रख दिया है। भाजपा की वापसी और गठबंधन समीकरणों में हुए बदलाव ने पहले ही विपक्ष को कमजोर किया है। अब नेशनल हेराल्ड केस का नया अध्याय इस कमजोरी को और उजागर करता है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अब कई हिस्सों में बंटा दिखाई देता है। बिहार की तरह अन्य राज्यों में भी क्षेत्रीय दल कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की वजह तलाश रहे हैं। पीएम मोदी ने इसीलिए कांग्रेस को परजीवी नाम दिया है, जो जिसके साथ जुड़ती है, उसे ही खत्म कर देती है।

गांधी परिवार के इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार कांग्रेस के लिए नुकसानदेह
यह सवाल अब पार्टी के भीतर भी पहले से अधिक तीखे रूप में पूछा जा रहा है। नेशनल हेराल्ड मामला पहले भी कांग्रेस के लिए नकारात्मक धारणा बनाता रहा है। अदालत का फैसला जो भी आए, लेकिन जनता की नजर में गांधी परिवार के इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार, परिवारवाद, असफलता और विवादों की पुनरावृत्ति कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित होगी। बंगाल में ममता बनर्जी की दूरी, सहयोगी दलों की सतर्कता और कांग्रेस की अपनी सीमाएं, ये फैक्टर इस धारणा को और मजबूत करते हैं कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुका है। कांग्रेस की राजनीतिक चुनौती सिर्फ बाहरी नहीं, आंतरिक भी है। कई कांग्रेस नेता वर्षों से कह रहे हैं कि पार्टी को नए नेतृत्व या व्यापक संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता है। लेकिन पार्टी शीर्ष नेतृत्व पर निर्भरता कम नहीं कर पाई है। जब भी कोई नया केस सामने आता है, यह बहस फिर ज़िंदा हो जाती है। क्या कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन इसलिए खो रही है क्योंकि राहुल-सोनिया के नेतृत्व कमजोर पड़ता जा रहा है। 

करोड़ों के कांग्रेसी घपले वाला नेशनल हेराल्ड केस क्या है?
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के ही मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार को धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप लगाया था। आरोप के मुताबिक, कांग्रेसी नेताओं ने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों पर कब्जे के लिए यंग इंडियन लिमिटेड ऑर्गेनाइजेशन बनाया और उसके जरिए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) का अवैध अधिग्रहण कर लिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तो बकायदा चार्जशीट फाइल कर दी है। ईडी की चार्जशीट में राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुमन दुबे भी अभियुक्त हैं। दरअसल, नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) करती है। इसका मालिकाना हक यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के पास है। यही वह कंपनी है जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों की हिस्सेदारी है। यही वजह है कि ईडी की जांच की आंच इन दोनों तक जा पहुंची है। नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी अपनी करतूतों के चलते घिर चुके हैं। इस मामले में एक रोचक तथ्य यह भी है कि अगर 75 साल पहले सरदार पटेल की बात जवाहर लाल नेहरू मान लेते और बाद में ये लोग साजिश ना करते तो शायद आज राहुल गांधी और सोनिया गांधी को यह दिन ना देखने पड़ते।

करोड़ों की संपत्तियों पर यंग इंडियन ने कब्जा किया – ED
प्रवर्तन निदेशालय ने 15 अप्रैल को नेशनल हेराल्ड अखबार और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुडे मनी लॉन्ड्रिंग केस में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे के नाम शामिल हैं। मामले की सुनवाई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। कोर्ट ने ED से मामले की केस डायरी भी मांगी है। ED का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लि. (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कब्जे के लिए उसका अधिग्रहण निजी स्वामित्व वाली कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए केवल 50 लाख रुपए में कर लिया। इस कंपनी के 76प्रतिशत शेयर सोनिया व राहुल के पास हैं। इस मामले में ‘अपराध से अर्जित आय’ 988 करोड़ रुपए की मानी गई। साथ ही संबद्ध संपत्तियों का बाजार मूल्य 5,000 करोड़ रुपए बताया गया है। जून 2022 में नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी से 5 दिनों में 50 घंटे पूछताछ हुई थी। फिर 21 जुलाई 2022 में नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी से 3 दिन में 12 घंटे सवाल हुए थे। इस दौरान उनसे 100 से ज्यादा सवाल किए गए।

आजादी से पहले शुरु हुए थे नेशनल हेराल्ड समेत तीन अखबार
इतिहास की बात करें तो 1937 में एसोसिएट जर्नल का गठन हुआ। इसके बाद 9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया। यह बात आजादी मिलने के ठीक 9 साल पहले की है। इस अखबार को शुरू करने में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके तहत तीन अखबार थे, अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’, हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’.यही नेशनल हेराल्ड आज सुर्खियों में बना हुआ है। नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई लोगों पर ईडी ने 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर चार्जशीट दायर की है। इसे लेकर ही बवाल है।

फिरोज के कमजोर संचालन से अखबार आर्थिक संकट में आया
जवाहर लाल नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने अपनी किताब में सरदार पटेल और नेहरू की कहानी का जिक्र है। इसमें इस बात का भी जिक्र है कि फिरोज गांधी इस कंपनी के संचालन में बहुत अच्छे नहीं थे। इसलिए यह नेशनल हेराल्ड आर्थिक संकट में फंस गया। इसे आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट के रूप में बदल दिया गया। इस नए ट्रस्ट पर भी नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा। इस ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी नेहरू और उनके परिवार के बेहद करीबी लोग बनाए गए। उस समय विज्ञापन के नाम पर कई बड़े औद्योगिक घरानों से लाखों की रकम एक साल में इस अखबार ने हासिल की।

बड़ौदा के महाराजा से ही मांग ली थी दो लाख की रिश्वत
अपनी किताब में ओ. एम. मथाई ने तो यहां तक दावा किया कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के महाराजा से पूरे दो लाख रुपए की रिश्वत मांग ली गई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल को जब इसकी सूचना मिली थी तो उन्होंने इसकी शिकायत नेहरू से की थी। नेहरू के प्रधानमंत्री रहते ही दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर नेशनल हेराल्ड को ऑफिस बनाने के लिए जमीन भी आवंटित की गई। 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर नेशनल हेराल्ड का समर्थन करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने के साथ ही संदिग्ध धन उगाही के बारे में भी चेतावनी दी थी। सरदार पटेल के पत्राचार में दर्ज इन चिंताओं को नेहरू ने खारिज कर दिया था, जबकि वह इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में आशंकित थे।

‘सोनिया-राहुल गाँधी ने बनाए 142 करोड़ रूपए’: नेशनल हेराल्ड केस में ED ने कोर्ट को बताया, 2 जुलाई से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की होगी रोजाना सुनवाई

                      सोनिया-राहुल गाँधी नेशनल हेराल्ड केस में फँसे (फोटो साभार: OpIndia English)
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई बुधवार (21 मई 2025) को हुई। इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों ने अपराध की आय से 142 करोड़ रुपए का फायदा उठाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से प्राप्त किराये की आय से जुड़ी है। ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट में दावा किया कि यंग इंडियन के 76% मालिक सोनिया और राहुल गाँधी ने केवल 50 लाख रुपए का भुगतान करके 90.25 करोड़ रुपए की संपत्ति हासिल की।

ईडी ने जब तक संपत्तियाँ जब्त नहीं की, तब तक सोनिया-राहुल ने उठाया फायदा

ईडी ने कोर्ट में यह भी कहा कि गाँधी परिवार ने न सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग की, बल्कि अपराध की आय को अपने पास रखकर इस अपराध को और बढ़ाया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि यंग इंडियन ने एजेएल के शेयरों का दुरुपयोग किया, जिसके जरिए भारी मुनाफा कमाया गया।

नवंबर 2023 में ईडी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त किया था, जिसके बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया। राजू ने कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपितों ने तब तक इस आय का लाभ उठाया, जब तक ईडी ने कार्रवाई नहीं की।

साल 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी शिकायत

यह मामला मूल रूप से 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि गाँधी परिवार ने यंग इंडियन के जरिए एजेएल को धोखाधड़ी, आपराधिक दुरुपयोग और विश्वासघात के जरिए हासिल किया। 2010 में एजेएल में 1,057 शेयरधारक थे, लेकिन स्वामी का दावा है कि यंग इंडियन ने गलत तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल कर लिया।
ईडी ने इस मामले की जाँच 2014 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी, जब एक ट्रायल कोर्ट ने स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर आयकर जाँच में अनियमितताओं का संज्ञान लिया।

राहुल-सोनिया के वकील ने समय माँग कर मामले को आगे बढ़वाया

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकीलों अभिषेक मनु सिंघवी और आरएस चीमा ने दस्तावेजों की जाँच के लिए और समय माँगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में करीब 5,000 पन्नों के दस्तावेज मिले हैं और मई का महीना कोर्ट और वकीलों के लिए व्यस्त रहता है। इसलिए उन्होंने जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय माँगा। कोर्ट ने उनकी माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले को 2 जुलाई से 8 जुलाई तक रोजाना सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट के दायरे में आता है, इसलिए नियमित सुनवाई जरूरी है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने माँगी चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी

इसके अलावा कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को भी मंजूरी दे दी, जिसमें उन्होंने नेशनल हेराल्ड केस की चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी माँगी थी। ईडी ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि सरकारी मँजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट एक अधिकृत अधिकारी के जरिए दायर की गई है, जो ईडी में सहायक निदेशक के पद पर है। राजू ने एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकार किसी अधिकारी को धारा 45 के तहत शिकायत दायर करने के लिए अधिकृत कर सकती है।

कभी अंग्रेज़ भारतीयों की सूरत का मखौल उड़ाया करते थे लेकिन आज ये उड़ाया फर्जी गांधी परिवार के गुरु सैम पित्रोदा ने ; शर्म से डूब मरना चाहिए उसे

सुभाष चन्द्र

सैम पित्रोदा का असली नाम है “सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा” (उम्र है 82 वर्ष) लेकिन अंग्रेज़ों को भी मात दे दी है इन्होनें और सुपर अंग्रेज़ बन चुके हैं, इसलिए इनके लिए “राम नाम सत्य है” तो नहीं कहा जाएगा। इनके नाम और चरित्र में कोई मेल नहीं है। कांग्रेस की Indian Overseas Congress के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए ये महाशय राहुल गांधी के Political Guru हैं जिन्होंने राहुल गांधी को उसकी विशेषताओं के अनुसार निकृष्ट से निकृष्ट भाषा बोलना सिखाया है और विदेशों में राहुल की सभी सभाओं को ये ही आयोजित करते हैं जहां से राहुल गांधी इनके मार्गदर्शन में भारत को गालियां देकर देश को नीचा दिखाते हैं।

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पित्रोदा को 20 फरवरी, 2016 को metropolitan magistrate ने हेराल्ड केस में जमानत दी थी और तभी से ये भारत से बाहर ही रह रहा है क्योंकि इसे डर रहता है कहीं गिरफ़्तारी न हो जाए, ये हमारे कोर्ट की लापरवाही है जो हेराल्ड केस को 10 साल से लटकाए बैठे हैं अन्यथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ये केस एक साल में ख़त्म हो जाना चाहिए था।

पित्रोदा ने घटिया भाषा की सभी हदें पार करते हुए 140 करोड़ भारतवासियों का अपमान कर दिया। पित्रोदा ने कहा :- 

“भारत में पूर्व के लोग दिखने में चीनी जैसे लगते हैं; पश्चिम के लोग अरब के जैसे लगते हैं; उत्तर के लोग कुछ हद तक “सफ़ेद” (white) और दक्षिण के लोग अफ्रीकी लगते हैं। इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता, हम सब आपस में भाई बहन हैं”।

भारत की “विविधता में एकता” के लिए ऐसा वर्णन कोई घृणित मानसिकता का व्यक्ति ही कर सकता है और आज विश्व में शायद ही कोई देश होगा जो भारतीयों के बारे में ऐसा सोचता या कहता होगा।

उसके बयान से किनारा करते हुए कांग्रेस के ठेकेदार जयराम रमेश ने कहा है -"The analogies drawn by Mr Sam Pitroda in a podcast to illustrate India's diversity are most unfortunate and unacceptable. The Indian National Congress completely dissociates itself from these analogies”

कांग्रेस इस तरह हलके में पित्रोदा जैसे वरिष्ठ नेता के बयान से कैसे किनारा कर सकती है और जयराम राम के पास क्या authority है ऐसे किनारा करने की जबकि पित्रोदा फर्जी गांधी परिवार के सबसे करीब हैं। राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पित्रोदा के बयान की  न आलोचना की और न उससे खुद को अलग किया और न ही उनके जड़खरीद गुलाम अध्यक्ष खड़गे ने कुछ कहा है।

सैम पित्रोदा का केवल कांग्रेस की Indian Overseas Congress के अध्यक्ष के पद इस्तीफा देना काफी नहीं है। उसे कांग्रेस से निष्कासित न करना साबित करता है कि कांग्रेस और गांधी परिवार पित्रोदा की सोच से सहमत हैं। सोनिया गांधी की विदेशी संस्कृति और उसके बच्चों की विदेशी मानसिकता भारतीयों को वैसे ही समझती है जैसा पित्रोदा ने कहा और सत्य यह ही है कि  उसके बोल “फर्जी गांधी” परिवार के ही बोल हैं।

सरकार को अब दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी देकर ट्रायल कोर्ट को हेराल्ड केस को 6 महीने में अंजाम तक पहुंचाने के निर्देश देने के लिए कहना चाहिए और सैम पित्रोदा को वापस भारत लाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उसके लिए पित्रोदा का पासपोर्ट रद्द कर देना चाहिए और 140 करोड़ भारतियों का अपमान करने के लिए पित्रोदा पर देशद्रो का केस दर्ज करना चाहिए।

वैसे इस जैसे 82 साल के आदमी का कुछ नहीं होगा क्योंकि अगर सजा हो भी जाती है तो सीधा हॉस्पिटल में होगा सजा का ऐलान होते ही लालू की तरह। सुप्रीम कोर्ट उसकी उम्र देख कर तुरंत जमानत भी दे देगा क्योंकि अमेरिका का गुलाम जो है।

मेरा नेता मुझे बचाता है, मैं उसे बचाने आया हूं! : सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गाँधी परिवार के विरुद्ध तेज होती कार्यवाही से जनता का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस को महंगाई और बेरोजगारी याद आ गयी। अब से पहले किसी भी भाजपा विरोधी को इन जनहित मुद्दों की याद नहीं आयी। 1947 से लेकर 1975 में इमरजेंसी लगने से पूर्व तक महंगाई और बेरोजगारी पर जितने धरने-प्रदर्शन तत्कालीन विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए 1977 से लेकर 2022 तक उससे आधे भी नहीं हुए। वास्तव में 1980 के बाद से हर पार्टी सत्ता के गठजोड़ में व्यस्त रही। आतंकवादियों को संरक्षण देने हिन्दू और हिन्दुत्व को बदनाम किया जाता रहा। लेकिन 2014 के बाद से आतंकवादियों को संरक्षण मिलने की बजाए गोली मिलने से कुर्सी की भूखी पार्टियों की नींद हराम कर दी है। जब देश को आज़ादी मिली थी तब सोना 17/18 रूपए तोला(11+ग्राम) था और 1975 में था 675 रूपए का 10 ग्राम और आज क्या भाव है, ये क्या 2014 में मोदी सरकार के आने पर हज़ारों में पहुंचा है? आज़ादी के समय कच्चा दूध 1 आने सेर(सेर लीटर से ज्यादा होता है) था और आज दूध का क्या भाव है? 1939 में एक शानदार शादी लगभग 650 रूपए में होती थी, उन दिनों हफ्ता-दस दिन पहले से ही मेहमान शादी वाले घर में ही खाते थे। शुद्ध देसी घी का खाना होता था, 5 से 7 मिठाई, श्रीदान और नमकीन दान होते थे, आज शुद्ध देशी देखने को नहीं मिलता। कहने का मतलब सिर्फ इतना है महंगाई पर आज तक कोई पार्टी अंकुश नहीं लगा पायी। इस कटु सच्चाई से कोई पार्टी इंकार नहीं कर सकती। 

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी जमानत पर बाहर हैं। अब जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में जांच तेज कर दी है, दोनों को गिरफ्तारी का डर सताने लगा है। ईडी ने हाल ही में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कई राउंड पूछताछ की है। इस सिलसिले में नेशनल हेराल्ड से जुड़े कई जगहों पर छापे भी मारे गए हैं और हवाला लेनदेन के सबूत भी मिले हैं। 

छापे के बाद दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस दफ्तर को सील कर दिया है। इस सबसे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी के बड़े नेता बौखला गए हैं। तमाम राज्यों के बड़े नेता अपना कामकाज छोड़कर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन में लगे हुए हैं। लेकिन कांग्रेस ने इसे ईडी की कार्रवाई के खिलाफ ना बताते हुए महंगाई के खिलाफ बताया है। वैसे इसमें महंगाई से ज्यादा ईडी की चर्चा होती है। ईडी की कार्रवाई से पार्टी के डरे हुए हैं। 

उन्हें लग रहा है कि 5 लाख रूपये से 5 हजार की कंपनी कब्जाने के मामले में ईडी कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। इसी लिए पार्टी नेता धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपना रहे हैं ताकि कुछ दिन राहत मिल सके। इस बात की तस्दीक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने खुद कर दी। उन्होंने साफ कहा कि मेरा नेता मुझे बचाता है मैं उन्हें बचाने आया हूं।