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‘खामोशी के साथ वोट जिहाद करो’: सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम उमर ने मुस्लिमों को बताया एजेंडा

मारिया आलम (बाएँ) और सलमान खुर्शीद (दाएँ) (चित्र साभार: Bhaskar & Aqib Farrukhabadi/YT)
जिस तरह कांग्रेस और मुस्लिम कट्टरपंथी मुसलमानों से एकजुट होकर कांग्रेस को वोट देने की बात कर रहे हैं तो उन हिन्दुओं को भी आंखें खोलनी चाहिए और रहे वह भी पार्टी में लेकिन वोट बीजेपी के लिए करें। सेकुलरिज्म का यही तकाजा है। सेकुलरिज्म एक तरफ़ा नहीं चल सकता। इस छद्दम सेकुलरिज्म का मूल नाश हिन्दुओं को भी एकजुट होना पड़ेगा। जितना हिन्दू एकजुट होगा देश से छद्दम सेकुलरिज्म अपने आप दफ़न हो जाएगा। कांग्रेस और INDI गठबंधन की वापसी देश को दोबारा इस्लामिक आतंकवाद के हवाले कर देगी, जैसाकि आज(अप्रैल 30) को दिल्ली में लगे आतंकवादियों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के फोटो लगाकर आतंकवादियों की रिहाई के लिए कांग्रेस को वोट देने की अपील की गयी है, वैसे दिल्ली पुलिस ने इन पोस्टरों को हटा दिया है। लेकिन संकेत दे दिया कि इस्लामिक आतंकवाद को जीवित करने के लिए इस INDI गठबंधन को वोट देश के लिए भारी पड़ जाएगा। 

बंगाल में देखो क्या हो रहा है, अप्रैल 30 News18 पर जनता को धमकाते समाचार दिखाया। TMC बीजेपी को वोट न देने के लिए धमका रही है कि 'अगर बीजेपी को वोट दिया तुम्हारा पानी बंद कर देंगे।'  

कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम उमर ने लोकसभा चुनाव में ‘वोट जिहाद’ करने की अपील की है। उन्होंने यह अपील फर्रुखाबाद लोकसभा सीट के सपा-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार को जिताने के लिए की है। मारिया के इस बयान के दौरान कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद भी मंच पर मौजूद थे। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर घूम रहा है।

फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव के लिए आयोजित की गई एक जनसभा में मारिया आलम उमर ने कहा, “अगर हम अब भी एक नहीं हुए तो समझ लेना कि यहाँ से हमारा नामोनिशान मिटाने के लिए जो सरकार कोशिश कर रही है, उसको कामयाब करने का काम करोगे। इसीलिए अकलमंदी के साथ, बहुत खामोशी के साथ एक साथ होकर वोटों का जिहाद करो, क्योंकि हम सिर्फ वोटों का जिहाद कर सकते हैं।”

मारिया आलम उमर ने कहा कि उन्हें इस बात पर शर्म आती है कि कुछ मुसलमान भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत का समर्थन कर रहे हैं। मारिया आलम के इस बयान के दौरान मंच पर सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद भी मौजूद थीं। यह सभा सपा-कांग्रेस की एकजुटता दिखाने के लिए की गई थी। बताया गया कि जहाँ यह जनसभा आयोजित हुई, वह अल्पसंख्यक बहुल इलाका है।

सलमान खुर्शीद ने इस सभा में कहा कि उन्हें अलीगढ़, कानपुर और अन्य क्षेत्रों से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर मिला था लेकिन उन्होंने फर्रुखाबाद के चलते इससे मना कर दिया। सलमान खुर्शीद ने कहा कि भाजपा के बुरे दिन आने वाले हैं।

सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद से सांसद रह चुके हैं लेकिन गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में चली गई। वह इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन कांग्रेस को मिलने वाली सीटों में फर्रुखाबाद शामिल नहीं थी। उन्होंने इसको लेकर नाराजगी भी जताई थी।

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मारिया आलम उमर के वोट जिहाद के बयान से पहले उनके चाचा खुर्शीद भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। सलमान खुर्शीद ने दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों को लेकर कहा था कि यहाँ कि तस्वीरें देख कांग्रेस मुखिया सोनिया गाँधी की आँखों में आंसू थे। उन्होंने सोनिया गाँधी को पूरे देश की माँ भी बता दिया था।

श्रद्धा के कातिल आफताब के समर्थन कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद

आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है कि कैसे आफताब अमीन पूनावाला ने श्रद्धा नाम की हिन्दू लड़की की हत्या कर के शव के 35 टुकड़े किए और उन्हें अपने फ्रिज में डाल रखा था। अब इस घटना को लेकर कांग्रेस पार्टी व भाजपा में वाक् युद्ध छिड़ गया है। दरअसल, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आगाह किया था कि अगर देश में एक मजबूत नेता नहीं होगा तो हर शहर में आफताब जैसे हत्यारे पैदा होंगे और हम अपने समाज की रक्षा करने में समर्थ नहीं हो पाएँगे।

उन्होंने गुजरात के कच्छ में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आफ़ताब जैसे हत्यारे हर शहर में पैदा न हों, इसके लिए देश में एक मजबूत नेता का होना आवश्यक हैं। उन्होंने आगे कहा था कि इन्हीं कारणों से 2024 में नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना अति आवश्यक है। अब इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी एक तरह से आफताब के बचाव में उतर आई है। पार्टी नेता सलमान ख़ुर्शीद के बयान से विवाद पैदा हो गया है।

‘रिपब्लिक’ की खबर के अनुसार, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पूछा है कि क्या सीएम सरमा ‘आफ़ताब’ शब्द का अर्थ जानते हैं? फिर उन्होंने समझाया कि ‘आफताब’ का मतलब सूर्य होता है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए ये कहा। आखिर सलमान को आफताब का मतलब बताने की जरुरत पड़ी, जबकि हर कोई जानता है कि आफताब का मतलब क्या होता है। बता दें कि श्रद्धा वॉकर हत्याकांड में पुलिस को अब आफताब के परिवार की तलाश है, जो लापता है। यह भी शंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं उनके(परिवार) किसी बयान से आफताब की मुसीबतें बढ़ सकती है। आखिर किस बिल में छिपा है परिवार? कौन दे रहा है उन्हें संरक्षण और क्यों? क्या यह सुनोयोचित हत्या है? क्या परिवार भी इस हत्या खेल में शामिल है? मुंबई के मीरा रोड स्थित उसका फ़्लैट खाली है। दीवाली के आसपास परिवार यहाँ रहने आया था।

श्रद्धा जिस कंपनी में काम करती थी, उसके मैनेजर करण बारी का बयान भी पुलिस दर्ज करेगी। उन्होंने जानकारी दी है कि नवंबर 2020 में श्रद्धा ने उन्हें आफताब द्वारा पीटे जाने की बात बताई थी। करण ने अपने एक परिचित को श्रद्धा की मदद के लिए भी भेजा था। आफताब का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ चुका है, जिसमें वो अपने घर से कुछ लेकर जाता दिख रहा है। हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद होने की बात कही जा रही है।

मेरा नेता मुझे बचाता है, मैं उसे बचाने आया हूं! : सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गाँधी परिवार के विरुद्ध तेज होती कार्यवाही से जनता का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस को महंगाई और बेरोजगारी याद आ गयी। अब से पहले किसी भी भाजपा विरोधी को इन जनहित मुद्दों की याद नहीं आयी। 1947 से लेकर 1975 में इमरजेंसी लगने से पूर्व तक महंगाई और बेरोजगारी पर जितने धरने-प्रदर्शन तत्कालीन विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए 1977 से लेकर 2022 तक उससे आधे भी नहीं हुए। वास्तव में 1980 के बाद से हर पार्टी सत्ता के गठजोड़ में व्यस्त रही। आतंकवादियों को संरक्षण देने हिन्दू और हिन्दुत्व को बदनाम किया जाता रहा। लेकिन 2014 के बाद से आतंकवादियों को संरक्षण मिलने की बजाए गोली मिलने से कुर्सी की भूखी पार्टियों की नींद हराम कर दी है। जब देश को आज़ादी मिली थी तब सोना 17/18 रूपए तोला(11+ग्राम) था और 1975 में था 675 रूपए का 10 ग्राम और आज क्या भाव है, ये क्या 2014 में मोदी सरकार के आने पर हज़ारों में पहुंचा है? आज़ादी के समय कच्चा दूध 1 आने सेर(सेर लीटर से ज्यादा होता है) था और आज दूध का क्या भाव है? 1939 में एक शानदार शादी लगभग 650 रूपए में होती थी, उन दिनों हफ्ता-दस दिन पहले से ही मेहमान शादी वाले घर में ही खाते थे। शुद्ध देसी घी का खाना होता था, 5 से 7 मिठाई, श्रीदान और नमकीन दान होते थे, आज शुद्ध देशी देखने को नहीं मिलता। कहने का मतलब सिर्फ इतना है महंगाई पर आज तक कोई पार्टी अंकुश नहीं लगा पायी। इस कटु सच्चाई से कोई पार्टी इंकार नहीं कर सकती। 

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी जमानत पर बाहर हैं। अब जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में जांच तेज कर दी है, दोनों को गिरफ्तारी का डर सताने लगा है। ईडी ने हाल ही में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कई राउंड पूछताछ की है। इस सिलसिले में नेशनल हेराल्ड से जुड़े कई जगहों पर छापे भी मारे गए हैं और हवाला लेनदेन के सबूत भी मिले हैं। 

छापे के बाद दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस दफ्तर को सील कर दिया है। इस सबसे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी के बड़े नेता बौखला गए हैं। तमाम राज्यों के बड़े नेता अपना कामकाज छोड़कर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन में लगे हुए हैं। लेकिन कांग्रेस ने इसे ईडी की कार्रवाई के खिलाफ ना बताते हुए महंगाई के खिलाफ बताया है। वैसे इसमें महंगाई से ज्यादा ईडी की चर्चा होती है। ईडी की कार्रवाई से पार्टी के डरे हुए हैं। 

उन्हें लग रहा है कि 5 लाख रूपये से 5 हजार की कंपनी कब्जाने के मामले में ईडी कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। इसी लिए पार्टी नेता धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपना रहे हैं ताकि कुछ दिन राहत मिल सके। इस बात की तस्दीक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने खुद कर दी। उन्होंने साफ कहा कि मेरा नेता मुझे बचाता है मैं उन्हें बचाने आया हूं।