नरेंद्र मोदी-योगी विरोध में राहुल गाँधी और परिवार जॉर्ज सोरोस के कदमों में गिर कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाते रहा, जबकि अजय माकन दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास करते रहे। बीजेपी से कहीं अधिक आम आदमी पार्टी के घोटालों को उजागर अजय माकन और इनके सहयोगी करते रहे। माकन शुरू से अरविन्द केजरीवाल के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता करने का विरोध करते रहे, लेकिन नगारे की आवाज़ में तूती शीर्ष नेतृत्व नज़रअंदाज़ होती रही। अगर कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व दिल्ली चुनावों में माकन के मार्गदर्शन में लड़ेगी, कांग्रेस दिल्ली में अगर सरकार नहीं बना पाएगी अपना पहचान और जनता के दिलों में जगह बना लेगी।
देखा जाए तो कांग्रेस को बीजेपी ने नहीं आम आदमी पार्टी ने ही गड्डे में धकेला है। माकन तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विकास कार्यों को जनता को याद करा रहे थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व बीजेपी बीजेपी रोता रहा। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को समझना होगा कि बीजेपी को टक्कर देने के लिए केजरीवाल को दरकिनार करना होगा। शराब घोटाले और अन्य घोटालों पर जितना अजय माकन केजरीवाल पार्टी को धूल चटाने की क्षमता रखते हैं, बीजेपी नहीं। दिल्ली में केजरीवाल की हार का मतलब होगा दिल्ली में कांग्रेस को जीवन, और आम आदमी पार्टी का पतन।
इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि केजरीवाल पार्टी ही ऐसी पार्टी है जिसने दिल्ली और पंजाब से बाहर जमानत जब्त ही नहीं कई क्षेत्रों में NOTA से भी कम वोट लेने वाली अनोखी पार्टी है। अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए INDI गठबंधन में शामिल होने और रहने के लिए सिर पटकता रहा। जिसे गाँधी परिवार नहीं समझ सका। दिल्ली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए एक 12-सूत्रीय श्वेत पत्र जारी किया है। इस श्वेत पत्र में प्रदूषण, नागरिक सुविधाओं और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टियों की आलोचना की गई है। कांग्रेस ने इसे मौका मौका, हर बार धोखा शीर्षक दिया है। जिसमें दिल्ली और केंद्र सरकार पर कुप्रबंधन और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाया गया है।एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईसीसी कोषाध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फर्जीवाल कहते हुए उन्हें धोखाधड़ी का राजा करार दिया। माकन ने आरोप लगाया कि जन लोकपाल आंदोलन से सत्ता हासिल करने वाले केजरीवाल भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की स्थापना करने में असफल रहे।
उन्होंने कहा कि पंजाब में आप की पूर्ण सरकार है। फिर भी जन लोकपाल लागू क्यों नहीं किया गया। अगर दिल्ली में उपराज्यपाल इसे रोक रहे हैं तो केजरीवाल पंजाब में इसे लागू क्यों नहीं करते। माकन ने कहा कि आप ने दिल्ली को लंदन जैसा बनाने का वादा किया था। लेकिन इसके बजाय राजधानी आज प्रदूषण में नंबर एक बन गई है। भाजपा पर भी निशाना अजय माकन ने भाजपा सरकार की भी आलोचना की और केंद्र पर दिल्ली के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और आप दोनों की नीतियों ने दिल्ली को एक संकटग्रस्त शहर बना दिया है। आप-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल अजय माकन ने 2013 में आप को दिए गए कांग्रेस के समर्थन को एक गलती करार दिया। उन्होंने कहा कि आप के साथ गठबंधन से कांग्रेस कमजोर हुई और दिल्ली की वर्तमान समस्याओं में योगदान दिया। अब समय आ गया है कि इस गलती को सुधारा जाए। उन्होंने हाल के गठबंधनों पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता जताई। यह स्वीकार करते हुए कि ये गठबंधन कांग्रेस के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रमुख नेता शामिल थे। जिनमें एआईसीसी दिल्ली प्रभारी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव, सह-प्रभारी दानिश अबरार और सुखविंदर सिंह डैनी शामिल थे। राजनीतिक हलकों में हलचल इस श्वेत पत्र ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने आप और भाजपा दोनों पर शासन और जनता के मुद्दों को हल करने में असफल रहने का आरोप लगाया है। हालांकि आप और भाजपा की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। जैसे-जैसे 2025 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह आक्रामक रुख उसे दिल्ली में पुनर्जीवित करने में कितना कारगर साबित होता है।
ऐसा क्या है केजरीवाल में जो उसे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पहले चुनाव प्रचार के अंतरिम जमानत दे दी और एक बार फिर से दोबारा अंतरिम जमानत देकर बाहर ही कर दिया था लेकिन CBI के केस में गिरफ़्तारी से अड़चन पैदा हो गई वरना तो आज चिंघाड़ रहा होता राजनीति के बाजार में।
क्या वजह है कि कोर्ट केजरीवाल को इतनी छोटी तारीखें दे रहा है, जबकि कोर्ट में इतने केस pending पड़े हैं, उन्हें छोटी तारीख क्यों दी जाती? छोटी तारीख दो ताकि कोर्ट और केजरीवाल दोनों हमेशा समाचारों की सुर्ख़ियों में रहकर चर्चा में बने रहे। जो केजरीवाल से ज्यादा कोर्ट के लिए नुकसानदायक हो रही है। जनता का कोर्ट से उतना ही विश्वास दिन पर दिन कम होता दिखाई दे रहा है। मुख्य न्यायाधीश को कोर्ट के गिरते विश्वास का संज्ञान लेना चाहिए। क्योकि जनता और political parties के दिमाग में एक बात घर कर रही है कि कोर्ट को कोई जज नहीं अभिषेक सिंघवी चला रहा है।
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सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली लेकिन मीलॉर्ड इसके लिए बेताब है जैसे कोई दामाद जी अंदर पड़े हों। आपियों ने दोबारा अंतरिम जमानत मिलते ही बवाल काट दिया जैसे कोर्ट ने उसी बरी कर दिया हो। अगर ऐसा है फिर तो जैन और सिसोदिया को तो आपिये खुद ही दोषी बता रहे हैं। जबकि घोटालों का असली kingpin केजरीवाल ही है, क्योकि इसकी इजाजत के बिना पार्टी में किसी की कुछ नहीं करने की हिम्मत नहीं। दूसरे, जेल जाते समय इसने आतिशी और सौरभ का नाम लिया था, उस पर EDऔर CBI क्यों खामोश हैं?
वर्ष 2024-25 के बजट में केजरीवाल ने 18 वर्ष और उससे ऊपर की महिलाओं को “मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना” में 1000 रुपए महीने देने की घोषणा की थी। और इस योजना के लिए 2,714 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था लेकिन यह योजना कब से लागू होगी, वह घोषणा नहीं की गई थी।
इस योजना का लाभ केजरीवाल फरवरी, 2025 के चुनाव से ठीक पहले शुरू करना चाहता था और उसके लिए अक्टूबर, 2024 में उपयुक्त समझा था केजरीवाल ने जैसा सुनने में आया है और इसलिए ही वह चाहता है कि जमानत जल्दी मिल जाए जिससे खेल खेल सके। कांग्रेस से तो “तलाक” हो गया बिना “सुहागरात” के ही क्योंकि कांग्रेस ने तो उसकी हार का जिम्मा केजरीवाल पर थोप दिया और अब केजरीवाल को भ्रष्ट बता रही है कांग्रेस। ये “ब्रह्मज्ञान” कांग्रेस को हार के बाद ही मिला क्योंकि उसके पहले “गठबंधन” करते समय तो केजरीवाल “पाक साफ” था जैसे।
अब दिल्ली में आ गई पानी की किल्लत जो जनता को, खासकर महिलाओं को टैंकरों से एक एक बाल्टी पानी के मारा मारी करनी पड़ी थी लेकिन पानी की किल्लत भी केजरीवाल ने भाजपा सरकारों के सिर मढ़ दी। बस पानी के लिए केवल मुस्लिम परेशान नहीं हुए। कोई मुस्लिम टेंकरों से पानी लेता दिखाई नहीं दिया क्योंकि केजरीवाल ने जेल में बैठे हुए उनके इलाकों में पानी पहुंचाया था। जैसे इंडी ठगबंधन लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों के भरोसे था, उसी तरह केजरीवाल भी केवल मुस्लिमों के भरोसे बैठा है।
अब यही गैर मुस्लिम महिलाएं केजरीवाल से 1000 रुपए की भीख लेकर फिर बहक जाएंगी और पानी की मारा मारी भूल जाएंगी जैसे इंडी के राहुल और अखिलेश के “फटाफट फटाफट” एक एक लाख मिलने के झांसे में आ गई थी।
इस 1000 रुपए के लिए ही असली खेल खेलेगा केजरीवाल। उसके पास पैसा होगा नहीं और जब नहीं दे पाएगा महिलाओं को पैसा तो मोदी से कहेगा, पैसा दो, जैसे हर राज्य फ्री की रेवड़ी बाँटने के लिए पैसा केंद्र से मांगता है। मोदी पैसा देगा नहीं तो बदनाम करेगा महिलाओं में कि मैं तो आपको 1000 महीने देना चाहता हूं लेकिन मोदी पैसा नहीं दे रहा। केजरीवाल के सभी संस्थान भारी घाटे में चल रहे हैं और वह खुद जनता का पैसा अपने और पार्टी के अन्य लोगों के मुकदमों पर उड़ा रहा है।
बस इस खेल से भाजपा को सावधान रहना चाहिए क्योंकि विपक्षी दल कोई भी हो, narrative गढने में उस्ताद हैं। जिसका असर सबसे ज्यादा महिलाओं पर होता है जैसे अभी 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ जिन्हें मोदी का उन्हें दिया हुआ कुछ याद नहीं रहा, बस लार टपक गई एक लाख रुपए के लिए।
दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और लोअर कोर्ट में आए दिन केजरीवाल एक के बाद एक मुकदमा दायर करता है और वकीलों को मोटी कमाई का मौका दे रहा है। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह सभी के मुकदमों में वकीलों की फीस तो दिल्ली सरकार ही भर रही है और जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है।
परसों(जुलाई 2) केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली हाई कोर्ट में उसकी CBI द्वारा की गई गिरफ़्तारी को चुनौती दी और कहा कि CBI ने 2022 में केस दर्ज किया, तब कोई arrest की बात नहीं थी, फिर उसे 2023 में summon करके 9 घंटे पूछताछ की और 2024 में गिरफ्तार कर लिया जिसकी कोई जरूरत नहीं थी।
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सिंघवी साहब, 2022 से 2024 तक CBI के संज्ञान में कुछ तथ्य आए होंगे, तभी तो CBI ने कोर्ट से अनुमति मांगी उसे गिरफ्तार करने की और Rouse Avenue कोर्ट ने 3 दिन की custody दे दी और उसके बात न्यायिक हिरासत में भेज दिया 14 दिन के लिए। मतलब उसे CBI ने अपने आप गिरफ्तार नहीं किया बल्कि कोर्ट की अनुमति से किया और इसलिए सिंघवी साहब तथ्यों तोड़ मरोड़ कर पेश मत कीजिये।
कल एक और जमानत की अर्जी हाईकोर्ट में लगाई है केजरीवाल ने जबकि Rouse Avenue कोर्ट से मिली जमानत पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी और सुनवाई लंबित है, ऐसे में उसी कोर्ट में जमानत लगाई जा सकती है।
अब सवाल उठता है कि इतने सारे मुकदमों के बिल जनता के पैसे से क्यों भरे जाएं जबकि घोटाला किया केजरीवाल और उसके गिरोह ने। घोटाला ऐसे साबित होता है कि एक शराब नीति पहले से चल रही थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने उसे बदल कर नई नीति बना कर लागू कर दी और उसी में जब घोटाला पकड़ा गया तो नई नीति हटा कर पुरानी फिर से शुरू कर दी।
इसका मतलब साफ़ है कि नई नीति में गड़बड़ तो की गई और तभी उसे Scrap किया गया।अगर उसमे कुछ गलत नहीं होता तो वह नीति लागू रहती।
सबसे बड़ी बात यह है कि केजरीवाल, सिसोदिया, जैन और संजय सिंह घोटाले में शामिल थे जिसकी वजह से वे गिरफ्तार हुए और संजय को छोड़ कर किसी को जमानत नहीं मिल रही। क्या कोई कानून इन लोगों को घोटाला करने की अनुमति देता है? कभी नहीं ऐसी अनुमति कोई कानून नहीं दे सकता लेकिन फिर भी घोटाला किया जिसका मतलब साफ़ है कि संवैधानिक पद का दुरूपयोग करके पैसा कमाया गया।
लेकिन हर कोर्ट में दहाड़ मार मार कर चीखते रहे केजरीवाल और उसकी गिरोह के लोग कि घोटाला हुआ तो पैसा कहां गया, हमारे घर में तो एक चवन्नी भी नहीं मिली? पैसा कभी हेराफेरी का घर में नहीं रखा जाता, उसे तो हाथों हाथ बट्टे खाते लगा दिया जाता है।
वकील अपने मुवक्किलों से हर तारीख पर अपनी फ़ीस के अलावा रूपए की मांग करते रहते हैं, होता है क्या उसका कोई हिसाब? वही हाल रिश्वत में लिए धन का होता है।
इसलिए किसी भी गैर कानूनी काम करके उसके बचाव में लड़े जाने वाले मुकदमों पर सरकार का खर्च करना किसी तरह भी उचित नहीं है और इसका उपचार केवल यह है कि केजरीवाल की सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए जिससे बर्खास्त होने के बाद सरकार कोई बिल का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने LG को आप पार्टी के वकीलों के बिलों का भुगतान करने के जो आदेश दिए थे, वे अनुचित थे क्योंकि LG ने वकीलों का पैनल और उनकी फीस तय ही नहीं की थी। फिर भुगतान कैसे किया जा सकता है?
3 जुलाई कोप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दशकों बाद एक सरकार को लगातार तीसरी बार सेवा करने का मौका मिला लेकिन कुछ लोगों को यह जनादेश समझ में नहीं आया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 60 साल के बाद हुआ है कि 10 साल के बाद, कोई एक सरकार उसकी वापसी हुई है। भारत के लोकतंत्र की 6 दशक के बाद यह असमान्य घटना है। कुछ लोग जानबूझकर उससे अपना मुंह फेर कर बैठे रहे। कुछ लोगों को समझ नहीं आया। जिन्हें समझ आया उन्होंने हल्ला इस वजह से किया कि जनता के निर्णय पर कैसे छाया कर दी जाए। कैसे उसे ब्लैकआउट किया जाए।
दिल्ली: राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा " 60 साल के बाद हुआ है कि 10 साल के बाद, कोई एक सरकार उसकी वापसी हुई है। भारत के लोकतंत्र की 6 दशक के बाद यह असमान्य घटना है। कुछ लोग जानबूझकर उससे अपना मुंह फेर कर बैठे रहे। कुछ लोगों को समझ नहीं आया। जिन्हें समझ आया उन्होंने… pic.twitter.com/umN5xHQYIe
विपक्ष पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र की जांच एजेंसियों पर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का सरकार दुरुपयोग कर रही है, ऐसा कहा गया है। शराब घोटाला करे AAP, भ्रष्टाचार करे AAP, बच्चों के क्लासरूम बनाने में घोटाला करे AAP, पानी तक में घोटाला करे AAP… AAP की शिकायत करे कांग्रेस, AAP को कोर्ट तक घसीट कर ले जाए कांग्रेस और कार्रवाई हो तो गाली दें मोदी को। जवाब मांगे। कांग्रेस देश को बताए कि कांग्रेस ने प्रेस वार्ता करके AAP के घोटालों के इतने सारे सबूत देश के सामने रखे थे, वो सबूत सच्चे थे या झूठे थे?
एक और महाघोटाला, जिस ओर कोई गंभीरता से नहीं देख रहा, केजरीवाल की पैरवी करने वाले वकीलों की फ़ीस सरकार की जेब से जा रही है। इसीलिए केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रहा। इस ओर बीजेपी समेत जितने भी केजरीवाल है सभी को कोर्ट पर केजरीवाल को इस्तीफा देने के लिए जोर देना चाहिए। देखिए चर्चित YouTuber सुभाष चन्द्र का वीडियो:
कालचक्र कब किसकी तरफ मूड जाए, किसी को नहीं पता होता, लेकिन मोदी विरोध में मोदी को दुश्मन समझ अपने ही दुश्मनों की गोदी में बैठ गयी पार्टी। ये वही आम आदमी पार्टी है जो दिल्ली विधान सभा चुनावों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के 370 सबूत रैलियों में लहराकर जेल भेजने का दावा करती थी, शीला को तो अरविन्द केजरीवाल जेल नहीं पहुंचा पाए, परन्तु शीला की पार्टी कांग्रेस ने केजरीवाल को जेल भेज दिया।
शराब घोटाला करे AAP पानी घोटाला करे AAP AAP की शिकायत करे कांग्रेस
और कार्यवाही हो तो गाली दे मोदी को... आज मोदी जी सारे घोटालेबाजो को एक्सपोज कर रहे.... 🤣 pic.twitter.com/ATVGw6etO7
प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हमारे लिए मिशन है। ये हमारे लिए चुनाव में हार-जीत का विषय नहीं है। हमने 2014 में जब सरकार बनाई तब हमने कहा था कि हमारी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए काम करेगी। हमारी सरकार भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करेगी, कालेधन पर वार करेगी। मैं बिना लाग-लपेट के कह रहा हूं, हमने एजेंसियों को भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए खुली छूट दे रखी है। हां, वो ईमानदारी से ईमानदारी के लिए काम करे। कोई भी भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा, ये मोदी की गारंटी है।
#WATCH | PM Narendra Modi says, "I would like to say without hesitation that I have given a free hand to agencies to take stringent action against corruption and the corrupt. Government will not interfere anywhere. They should work honestly for honesty...I would like to tell the… pic.twitter.com/23yVmPq2Hs
उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि संवेदनशील मामलों में जब राजनीति होती है, तो देशवासियों को और खासकर महिलाओं को अकल्प पीड़ा होती है। ये जो महिलाओं के साथ होते अत्याचार में विपक्ष का सेलेक्टिव रवैया है, ये सेलेक्टिव रवैया चिंताजनक है। मैं किसी राज्य के खिलाफ नहीं बोल रहा हूं और न ही कोई राजनीतिक स्कोर करने के लिए बोल रहा हूं। कुछ समय पहले, मैंने बंगाल से आई कुछ तस्वीरों को सोशल मीडिया पर देखा। एक महिला को वहां सरेआम सड़क पर पीटा जा रहा है, वो बहन चीख रही है। वहां खड़े हुए लोग उसकी मदद के लिए नहीं आ रहे है, वीडियो बना रहे हैं। जो घटना संदेशखाली में हुई, जिसकी तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, लेकिन बड़े बड़े दिग्गज जिनको मैं कल से सुन रहा हूं, पीड़ा उनके शब्दों में भी नहीं झलक रही है। इससे बड़ा शर्मिंदगी का चित्र क्या हो सकता है? जो लोग खुद को प्रगतिशील नारी नेता मानते हैं, वो भी मुंह पर ताले लगाकर बैठ गए हैं। क्योंकि घटना का संबंध उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े दल से या राज्य से है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने जी भरकर समर्थन और आशीर्वाद दिए हैं। उन्होंने भरोसे की राजनीति पर मुहर लगाई है। नतीजे आए तब से हमारे एक साथी की ओर से बार-बार ढोल पीटा गया था कि एक तिहाई सरकार…इससे बड़ा सत्य क्या हो सकता है कि हमारे 10 साल हुए हैं, 20 और बाकी हैं। एक तिहाई हुआ है, दो तिहाई और बाकी है और इसलिए उनकी इस भविष्यवाणी के लिए उनके मुंह में घी शक्कर।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव नतीजों से कैपिटल मार्केट में तो उछाल नजर ही आ रहा है, लेकिन दुनिया में भी उमंग और आनंद का माहौल है। इस बीच हमारे कांग्रेस के लोग भी खुशी में मग्न हैं, लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस खुशी का कारण क्या है? क्या ये खुशी हार की हैट्रिक पर है? क्या ये खुशी नर्वस 90 का शिकार होने की है? क्या ये खुशी एक और असफल लॉन्च की है?
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब लोकसभा में जब हमारी सरकार की तरफ से कहा गया कि हम 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाएंगे तो मैं हैरान हूं कि जो आज संविधान की प्रति लेकर घूमते रहते हैं, दुनिया में लहराते रहते हैं, उन्होंने विरोध किया था कि 26 जनवरी तो है, फिर संविधान दिवस क्यों लाएं? आज संविधान दिवस के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों को संविधान की भावना को, संविधान की रचना में क्या भूमिका रही है, देश के गणमान्य महापुरुषों ने संविधान के निर्माण में किन कारणों से कुछ चीजों को छोड़ने का निर्णय किया और किन कारणों से कुछ चीजों को स्वीकार करने का निर्णय किया इसके विषय में विस्तार से चर्चा हो। एक व्यापक रूप से संविधान के प्रति आस्था का भाव जगे और संविधान के प्रति समझ विकसित हो। संविधान हमारी प्रेरणा रहे इसके लिए हम कोशिश करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो ये मानते हैं कि इसमें क्या है, ये तो होने ही वाला है, ये तो अपने आप हो ही जाएगा… ऐसे विद्वान हैं। ये लोग ऐसे हैं, जो ऑटो पायलट मोड में, रिमोट कंट्रोल सरकार चलाने के आदी हैं। ये कुछ करने धरने में विश्वास नहीं रखते, ये इंतजार करना जानते हैं। लेकिन हम परिश्रम में कोई कमी नहीं रखते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं किसानों को लेकर सभी सदस्यों का और उनकी भावनाओं का आदर करता हूं। बीते 10 वर्षों में हमारी खेती लाभकारी हो, किसान को लाभकारी हो, इस पर हमने हमारा ध्यान केंद्रित किया है और अनेक योजनाओं से उसको ताकत देने का प्रयास किया है। एक प्रकार से बीज से बाजार तक हमने किसानों के लिए हर व्यवस्था को बहुत माइक्रो प्लानिंग के साथ मजबूती देने का भरसक प्रयास किया है और व्यवस्था को हमने चाक चौबंद किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकटों की वजह से कुछ समस्याएं उत्पन्न हुईं, लेकिन हमने 12 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर इसका असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया। हमने कांग्रेस के मुकाबले कहीं अधिक पैसा किसानों तक पहुंचाया। अन्न भंडारण का विश्व का सबसे बड़ा अभियान हमने हाथ में लिया और इस दिशा में काम चल पड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने पिछले पांच साल में जितना काम किया है, उतना काम करना होता तो कांग्रेस को 20 साल लग जाते। नॉर्थईस्ट में स्थायी शांति के लिए 10 साल निरंतर प्रयास किए गए हैं। बिना रुके, बिना थके प्रयास किए गए हैं। उसकी चर्चा देश में कम हुई है, लेकिन परिणाम व्यापक रहे हैं। राज्यों के बीच सीमा विवाद संघर्षों को जन्म देता रहा है और आजादी के बाद से ये निरंतर चलता रहा है। हम राज्यों के साथ इसे हल करते जा रहे हैं। ये नॉर्थईस्ट की बहुत बड़ी सेवा है। हिंसा से जुड़े संगठन, जो हथियारबंद गिरोह थे जो लड़ाई लड़ते रहते थे, आज उनको साथ लेकर स्थायी समझौते हो रहे हैं। जिनके खिलाफ गंभीर मामले हैं, वे अदालत में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। न्यायतंत्र में भरोसा बढ़ना महत्वपूर्ण बात है।
राज्यसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर की स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। वहां जो घटनाएं घटीं, 11 हजार से ज्यादा FIR की गईं हैं, 500 से ज्यादा लोग अरेस्ट हुए हैं। इस बात को भी हमें स्वीकार करना होगा कि मणिपुर में लगातार हिंसा की घटनाएं कम होती जा रही हैं। मणिपुर में भी स्कूल-कॉलेज संस्थान खुले हुए हैं। जैसे देश में परीक्षाएं हुईं, वहां भी परीक्षाएं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार सभी से बातचीत करके सौहार्द का रास्ता खोलने की कोशिश कर रही है। छोटे-छोटे ग्रुपों से बात की जा रही है। गृहमंत्री वहां जाकर कई दिन रहे हैं। अधिकारी भी लगातार जा रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए हर प्रकार से प्रयास किया जा रहा है। जो भी तत्व मणिपुर की आग में घी डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें आगाह करना चाहता हूं कि ये हरकतें बंद करें। एक समय आएगा जब मणिपुर ही रिजेक्ट करेगा उन लोगों को।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लोग ये ना भूलें कि इन्हीं हालातों की वजह से इस छोटे से राज्य में 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा है। ये हमारे कार्यकाल में नहीं हुआ है। कुछ तो वजह होगी। लेकिन फिर भी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए वहां हरकतें हो रही हैं। हमें समझदारी के साथ स्थितियों को ठीक करने के लिए प्रयास करना है।
अजीब विडंबना है, चुनावों में अपने आपको निष्पक्ष और ईमानदार बताने वाली कांग्रेस की असलियत सामने आने लगी है यानि राजस्थान की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की पोल चुनाव परिणाम आने से पहले ही खुलने लगी है। क्योकि सभी राजनीतिज्ञ विश्लेषक भी मानते हैं कि राजस्थान, कर्नाटक, पंजाब और हिमाचल आदि प्रदेशों में हर 5 साल के बाद सत्ता बदलती रही है।
कोचिंग सिटी कोटा में जिस चंबल रिवर फ्रंट में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप बीजेपी निरंतर लगा रही थी, उसे बनाने वाले यूआईटी के इंजीनियर के पास से छापे में कुबेर का खजाना मिला है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जब चंबल रिवर फ्रंट का काम देख रहे सरकारी इंजीनियर कमल मीणा के घर आय से अधिक संपत्ति के मामले में सर्च की तो करोड़ों की प्रॉपर्टी की जानकारी सामने आई। कोटा नगर विकास न्यास में पोस्टेड आरोपी इंजीनियर करोड़ों की कीमत के प्लॉट्स, गोल्ड और 10 करोड़ के हॉस्टल का भी मालिक है। पीएम मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान करोड़ों की काली कमाई और सोना लॉकरों से निकलने की बात कही थी। बता दें कि इसी चंबल रिवर फ्रंट पर घंटा लगाने के लिए यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल ने इतना दबाव बनाया था कि उनकी जल्दबाजी ने दो इंजीनियरों की जान ही ले ली थी।
बीजेपी के पूर्व विधायक और आर्य के बेटे ने लगाए थे UIT इंजीनियर्स पर आरोप कोटा रिवर फ्रंट को लेकर करीब दो माह पहले कोटा उत्तर से पूर्व विधायक रहे प्रहलाद गुंजल ने UIT में बड़े घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से टेंडरों में बड़े भ्रष्टाचार की बात कही थी। वहीं इसी माह 20 नवंबर को रिवर फ्रंट पर दुनिया की सबसे बड़ी घंटी निकालते हुए इंजीनियर देवेंद्र आर्य की मौत हो गई थी। इसी मामले में उनके बेटे ने भी UIT इंजीनियर पर आरोप लगाते हुए कहा था कि मंत्री शांति धारीवाल के पॉलिटिकल प्रेशर के चलते उनके पिता को परेशान किया जा रहा है। अब एसीबी ने यूआईटी में चंबल रिवर फ्रंट का काम देख रहे इंजीनियर कमल मीणा पर रेड की कार्रवाई की है। कमल मीणा की मूल पोस्टिंग राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड में है। लेकिन अपनी जुगाड़ के चलते वह 10 साल से ज्यादा समय से यूआईटी में ही पोस्टेड है। यूआईटी में रहते हुए उसका प्रमोशन भी हुआ है। वर्तमान में कमल मीणा के पास एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का चार्ज है। कोटा में करोड़ों के प्रोजेक्टों में कमल मीणा शामिल रहा है। जिनमें चंबल रिवर फ्रंट भी शामिल है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने तीन ठिकानों पर चलाया अभियान राजस्थान के कोटा में एसीबी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आय से अधिक संपत्ति मामले में एक सहायक अभियंता के पास भारी मात्रा में सोना, चांदी और भूखंड के दस्तावेज बरामद किए हैं। एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर इंटेलिजेंस की इकाई की टीम ने कमल मीणा के तीन अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक हेमन्त प्रियदर्शी ने बताया कि “ब्यूरो मुख्यालय द्वारा मिली सूचना के आधार पर राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सहायक अभियंता कमल मीणा के विरुद्ध शिकायत का सत्यापन करने के लिए एक टीम गठित की गई। जिसके लिए एसआई डब्ल्यू जयपुर इकाई और इंटेलिजेंस यूनिट के सहयोग से ललित शर्मा विशेष अनुसंधान इकाई जयपुर के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेरणा शेखावत, एसीबी कोटा ग्रामीण और अन्य टीमों की संयुक्त कार्रवाई में सहयाक अभियंता के तीन विभिन्न ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई की गई।
यूआईटी इंजीनियर और उसकी पत्नी पर वैध आय से बहुत अधिक संपत्ति मिली अतिरिक्त महानिदेशक हेमन्त प्रियदर्शी के मुताबिक, ब्यूरो की प्रथम सूचना रिपोर्ट के प्राथमिक आकलन और अब तक मिले दस्तावेजों के अनुसार सहायक अभियंता कमल मीणा और उसकी पत्नी पर अनेक परिसम्पत्तियां अर्जित करने की सूचना है, जो उनकी वैध आय से आनुपातिक रूप से बहुत ही अधिक है। आरोपी इंजीनियर द्वारा अपनी अवैध आय को कोटा, जयपुर, केशोरायपाटन, बूंदी में आवासीय, व्यावसायिक भूखण्डों, फ्लैटों और म्यूचअल फण्ड, इन्श्योरेन्स आदि में निवेश की सूचना मिली है। जयपुर में एसीबी मुख्यालय को कमल मीणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति होने का इनपुट मिला था। जिस पर FIR दर्ज हुई है। इसके बाद जयपुर, कोटा व टोंक एसीबी की टीमों ने बुधवार सुबह से यूआईटी इंजीनियर कमल मीणा के घर व हॉस्टल पर सर्च की कार्रवाई शुरू की।
ACB को सर्च ऑपरेशन में क्या-क्या मिला? एक अन्य टीम कोटा यूआईटी के इंजीनियर कमल मीणा के कल्पना चावला सर्किल विवेकानन्द नगर स्थित घर पहुंची। वहीं अन्य टीमों ने घर, बैंक और हॉस्टल में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसमें ACB को करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। एसीबी के अनुसार, कमल मीणा ने खुद व पत्नी के नाम से कोटा, जयपुर, केशवरायपाटन बूंदी में आवासीय/व्यवसायिक/भूखंडों फ्लैट्स, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस में निवेश किया हुआ है। कमल मीणा के घर से 32 हजार 110 रुपए की नगदी, 22 लाख का गोल्ड, डेढ़ किलो से ज्यादा चांदी व परिजनों के नाम से अलग-अलग जगहों पर 29 आवासीय व कृषि भूखंडों के दस्तावेज मिले हैं। ACB अधिकारियों का कहना है कि मीणा के ठिकानों पर सर्च अभियान जारी है। जिसमें और भी खुलासा होने की उम्मीद है।
10 करोड़ का आठ मंजिला हॉस्टल, PWD करेगा संपत्ति का आंकलन ACB की टीम कमल मीणा के हॉस्टल में भी पहुंची। ये हॉस्टल सालभर पहले ही बनाया गया है। अंदर पहुंची तो देखकर चौंक गई। हॉस्टल बोरखेड़ा, बारां रोड़ स्थित कॉरल पार्क में है। इस 8 मंजिला हॉस्टल को दो प्लॉट को मिलाकर बनाया गया है। इस हॉस्टल में कुल 83 रूम है। हर रूम में एसी व फर्नीचर लगा हुआ है। हर फ्लोर पर करीब 10 कमरे बनाए हुए हैं। ACB अधिकारियों के अनुसार, कमल मीणा ने साल 2022 में हॉस्टल निर्माण का काम शुरू करवाया था। इस हॉस्टल की कीमत 8 से 10 करोड़ रुपए बताई जा रही है। एसीबी की टीम जब्त दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। ये 29 प्लॉट कब कब व कितने कितने रुपये में खरीदे गए। इसे लेकर पूछताछ की जा रही है। एसीबी की टीम ने सर्च कार्रवाई में मिले दस्तावेजों की कीमत करोड़ों में बताई है।
राजस्थान में मंत्री ही बन रहे हैं मासूम जनता के कातिल… राजस्थान में मंत्री ही मासूम जनता के `हत्यारे’ बन रहे हैं। पहले जल संसाधन मंत्री महेश जोशी ने एक व्यक्ति को इतना प्रताड़ित किया कि उसने घबराकर जान ही दे दी। अब नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल दो इंजीनियरों की मौत के बाद सवालों के घेरे में। आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही कोटा में दुनिया का सबसे बड़ा घंटा लगाने के लिए उन्होंने और यूआईटी अध्यक्ष ने इंजीनियरों पर दबाब बनाया। चुनाव आचार संहिता लगी होने के बावजूद इस काम को तत्काल कराने के पीछे राजनीतिक मंशा विधानसभा चुनाव में फायदा लेने की थी। लेकिन स्वार्थ भरी इस राजनीति, दबाव और घंटा लगाने की जल्दबाजी ने दो लोगों की जान ही ले ली। रिवर फ्रंट पर बनाए गए घंटे को लेकर भी यूआईटी पर आरोप लगाए गए थे। मृतक इंजीनियर देवेन्द्र आर्य के बेटे धनंजय आर्य ने आरोप लगाया था कि मोल्ड बॉक्स से घंटी निकालते समय हादसा हुआ था। जिसमें कांट्रेक्टर इंजीनियर देवेंद्र आर्य और उनके सहयोगी छोटू की मौत हो गई थी। इस मामले में मंत्री धारीवाल और यूआईटी अधिकारी लगातार घंटे को जल्दी खोलने के लिए दबाव बना रही थे. धनंजय का आरोप था कि अधिकारी चुनाव से पहले घंटी खोलने का दबाव बना रहे थे।
चुनाव के चलते मंत्री-अधिकारी की जिद ने इंजीनियर पर बनाया दबाव बहुचर्चित कोचिंग सिटी कोटा के चंबल रिवर फ्रंट पर विश्व का सबसे बड़ा घंटा लगा है। इसका वजन लगभग 79000 किलो है और इसे विशेष तकनीक से लंबी मेहनत के बाद तैयार किया गया। घंटा को पिछले कुछ समय से मोल्ड बॉक्स के अंदर पैक रखा गया था। करोड़ों की लागत से बनाए गए चंबल रिवर फ्रंट का पिछले दिनों ही सीएम अशोक गहलोत ने लोकार्पण किया था। इस दौरान गहलोत सरकार की करीब-करीब पूरी कैबिनेट कोटा पहुंची थी। इसी रिवर फ्रंट पर लगे घंटा का तत्काल खोलने का दबाव नगर विकास मंत्री शांति धारीवाल, जिला कलेक्टर महावीर प्रसाद मीणा बना रहे थे।
पिता ने चेताया था कि जल्दबाजी में घंटा टूट सकता है, लेकिन मंत्री नहीं माने इंजीनियर देवेंद्र आर्य के बेटे का आरोप है कि उसके पिताजी को धारीवाल, अनूप बरतरिया और जिला कलेक्टर उन्हें घंटा जल्दी खोलने के लिए धमका रहे थे। जबकि उन्होंने कहा था कि इस घंटे को चुनाव के बाद तकनीकी प्रोसेस के साथ खोलेंगे। जल्दबाजी में यह घंटा टूट सकता है। लेकिन, वे नहीं माने और वही हुआ, जल्दबाजी ने उसके पिता की जान ले ली। इनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। जनता की गाढ़ी कमाई को खर्च कर करीब 1500 करोड़ रुपये का यह चंबल रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट पहले दिन से ही विवादों में है। क्योंकि इसे चंबल नदी की चौड़ाई सीमा में घड़ियाल सेंचुरी सीमा के पास बनाया गया है। कोटा बैराज के डाउन स्ट्रीम में होने के साथ-साथ वन्यजीव अधिनियम, पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन होने के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहले ही इस पर कोटा यूआईटी, राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर चुका है। अब दो लोगों की मौत ने इसे और भी भयावह बना दिया है।