ऐसा क्या है केजरीवाल में जो उसे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पहले चुनाव प्रचार के अंतरिम जमानत दे दी और एक बार फिर से दोबारा अंतरिम जमानत देकर बाहर ही कर दिया था लेकिन CBI के केस में गिरफ़्तारी से अड़चन पैदा हो गई वरना तो आज चिंघाड़ रहा होता राजनीति के बाजार में।
क्या वजह है कि कोर्ट केजरीवाल को इतनी छोटी तारीखें दे रहा है, जबकि कोर्ट में इतने केस pending पड़े हैं, उन्हें छोटी तारीख क्यों दी जाती? छोटी तारीख दो ताकि कोर्ट और केजरीवाल दोनों हमेशा समाचारों की सुर्ख़ियों में रहकर चर्चा में बने रहे। जो केजरीवाल से ज्यादा कोर्ट के लिए नुकसानदायक हो रही है। जनता का कोर्ट से उतना ही विश्वास दिन पर दिन कम होता दिखाई दे रहा है। मुख्य न्यायाधीश को कोर्ट के गिरते विश्वास का संज्ञान लेना चाहिए। क्योकि जनता और political parties के दिमाग में एक बात घर कर रही है कि कोर्ट को कोई जज नहीं अभिषेक सिंघवी चला रहा है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
वर्ष 2024-25 के बजट में केजरीवाल ने 18 वर्ष और उससे ऊपर की महिलाओं को “मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना” में 1000 रुपए महीने देने की घोषणा की थी। और इस योजना के लिए 2,714 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था लेकिन यह योजना कब से लागू होगी, वह घोषणा नहीं की गई थी।
इस योजना का लाभ केजरीवाल फरवरी, 2025 के चुनाव से ठीक पहले शुरू करना चाहता था और उसके लिए अक्टूबर, 2024 में उपयुक्त समझा था केजरीवाल ने जैसा सुनने में आया है और इसलिए ही वह चाहता है कि जमानत जल्दी मिल जाए जिससे खेल खेल सके। कांग्रेस से तो “तलाक” हो गया बिना “सुहागरात” के ही क्योंकि कांग्रेस ने तो उसकी हार का जिम्मा केजरीवाल पर थोप दिया और अब केजरीवाल को भ्रष्ट बता रही है कांग्रेस। ये “ब्रह्मज्ञान” कांग्रेस को हार के बाद ही मिला क्योंकि उसके पहले “गठबंधन” करते समय तो केजरीवाल “पाक साफ” था जैसे।
अब दिल्ली में आ गई पानी की किल्लत जो जनता को, खासकर महिलाओं को टैंकरों से एक एक बाल्टी पानी के मारा मारी करनी पड़ी थी लेकिन पानी की किल्लत भी केजरीवाल ने भाजपा सरकारों के सिर मढ़ दी। बस पानी के लिए केवल मुस्लिम परेशान नहीं हुए। कोई मुस्लिम टेंकरों से पानी लेता दिखाई नहीं दिया क्योंकि केजरीवाल ने जेल में बैठे हुए उनके इलाकों में पानी पहुंचाया था। जैसे इंडी ठगबंधन लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों के भरोसे था, उसी तरह केजरीवाल भी केवल मुस्लिमों के भरोसे बैठा है।
अब यही गैर मुस्लिम महिलाएं केजरीवाल से 1000 रुपए की भीख लेकर फिर बहक जाएंगी और पानी की मारा मारी भूल जाएंगी जैसे इंडी के राहुल और अखिलेश के “फटाफट फटाफट” एक एक लाख मिलने के झांसे में आ गई थी।
इस 1000 रुपए के लिए ही असली खेल खेलेगा केजरीवाल। उसके पास पैसा होगा नहीं और जब नहीं दे पाएगा महिलाओं को पैसा तो मोदी से कहेगा, पैसा दो, जैसे हर राज्य फ्री की रेवड़ी बाँटने के लिए पैसा केंद्र से मांगता है। मोदी पैसा देगा नहीं तो बदनाम करेगा महिलाओं में कि मैं तो आपको 1000 महीने देना चाहता हूं लेकिन मोदी पैसा नहीं दे रहा। केजरीवाल के सभी संस्थान भारी घाटे में चल रहे हैं और वह खुद जनता का पैसा अपने और पार्टी के अन्य लोगों के मुकदमों पर उड़ा रहा है।
बस इस खेल से भाजपा को सावधान रहना चाहिए क्योंकि विपक्षी दल कोई भी हो, narrative गढने में उस्ताद हैं। जिसका असर सबसे ज्यादा महिलाओं पर होता है जैसे अभी 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ जिन्हें मोदी का उन्हें दिया हुआ कुछ याद नहीं रहा, बस लार टपक गई एक लाख रुपए के लिए।


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