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अब ममता भी कांग्रेस में जाने को तैयार; चाहिए राज्यसभा सीट

                                     सोनिया गाँधी और खरगे के साथ ममता बनर्जी (साभार: आज तक)
 शरद पवार कांग्रेस से अलग हुए सोनिया गाँधी को विदेशी महिला कहकर और ममता बनर्जी भी यही आरोप लगाकर कांग्रेस से अलग हुई। लेकिन आज दोनों ही उसी विदेशी महिला के चरणों में नतमस्तक। 
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) में लगातार भगदड़ मची हुई है। एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। इस बीच मीडिया में सूत्रों के हवाले से कई दिनों से खबरें चल रही हैं कि कांग्रेस पार्टी और सोनिया गाँधी ने ममता बनर्जी को अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है। अब ABP न्यूज ने सूत्रों के हवाले से यह बताया है कि ममता बनर्जी सशर्त इस बात के लिए जारी हो गई हैं।

ABP न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया गाँधी की ओर से मिले ऑफर पर ममता बनर्जी तैयार हैं लेकिन उन्होंने अभिषेक बनर्जी के जरिए राहुल गाँधी के सामने कुछ शर्तें भी रखवाई हैं। बताया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी ने राहुल गाँधी के साथ मीटिंग में इस विषय पर बात की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस लीडरशिप के सामने TMC की तरफ से माँग रखी गई है कि ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजा जाए और उन्हें राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद भी दिया जाए। हालाँकि, इस पर कांग्रेस ने क्या कहा है यह बात अब तक सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी और पार्टी में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया था। हालाँकि, पार्टी से मतभेदों के चलते वह 1998 में अलग हो गई थीं और बंगाल की राजनीति करने के लिए अलग TMC का गठन किया था। अब अगर वह वापस पार्टी में लौटती हैं तो फिर से इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

पंजाब का कैंसर संकट: 5 वर्ष में 13299 और 2025 में 2700 महिलाओं की मौत, AAP सांसद ने प्रदूषित पानी और खेती में केमिकल्स पर उठाए सवाल

           AAP के राज्यसभा सांसद सीचेवाल ने संसद में कैंसर से मौतों का मुद्दा उठाया (साभार: NDTV/Tribune)
पंजाब में कैंसर का संकट बेहद गंभीर होता जा रहा है। औसतन हर दिन आठ महिलाओं की कैंसर से मौत हो रही है। ताजा आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 2,700 महिलाओं की जान कैंसर के कारण जा चुकी है।

यह मामला 12 फरवरी को राज्यसभा में उठाया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने सदन में इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह पंजाब के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से तत्काल कदम उठाने की माँग की।

सीचेवाल ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

सीचेवाल ने विशेष उल्लेख (Special Mention) के दौरान पंजाब में महिलाओं के बीच बढ़ते कैंसर मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कैंसर के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी बेहद चिंताजनक है और इस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में पंजाब में लगभग 2,700 महिलाओं की कैंसर से मौत हुई जो औसतन प्रतिदिन 8 महिलाओं की मृत्यु के बराबर है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 13,299 महिलाओं की कैंसर से जान गई। इनमें सबसे अधिक 7,186 मौतें स्तन कैंसर से हुईं, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervix Uteri) से 3,502 और अंडाशय कैंसर (Ovary cancer) से 2,611 महिलाओं की मृत्यु हुई।

उन्होंने आगे कहा, “चिंताजनक बात यह है कि 40 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि कम उम्र की महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। उन्होंने पर्यावरणीय कारणों, खासकर जल प्रदूषण और कृषि में रासायनिक उर्वरकों के व्यापक उपयोग को इसके प्रमुख कारणों में बताया। उनका कहना था कि ये रसायन मिट्टी में मिलकर अंततः खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर में पहुँच जाते हैं।

सीचेवाल ने कहा कि ये आँकड़े नीति बनाने वालों और समाज दोनों के लिए चेतावनी हैं और इस पर गंभीरता से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

पंजाब में कैंसर के बढ़ते केस, इलाज में राहत की माँग

पर्यावरण प्रदूषण को कैंसर के बड़े कारणों में से एक माना गया है। प्रदूषित पीने का पानी, खेती में केमिकल खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल और उद्योगों का कचरा इसके संभावित कारण बताए गए हैं। सीचेवाल ने कहा कि जब माताओं के स्तन दूध में DDT जैसे खतरनाक रसायन पाए गए तब जाकर इन रसायनों पर रोक लगाई गई। इससे साफ होता है कि जहरीले तत्व कितनी गहराई तक इंसानी शरीर में पहुँच सकते हैं।

प्रदूषित/गंदे पानी की समस्या के दुष्परिणाम इंदौर में देखने बाद भी सरकारें सचेत नहीं है, क्योकि उनके घरों में 24 घंटे साफ पानी पहुँच रहा है।  दिल्ली में भी कई क्षेत्रों में मटमैला सरकारी पानी पहुँचने के कारण जनता पानी माफिया का पानी पीने को मजबूर हैं। सरकारें आएगी जाएँगी लेकिन पानी माफिया राज ख़त्म नहीं होगा। 

उन्होंने सरकार से माँग की कि महिलाओं के लिए कैंसर का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज के लिए कम से कम 75 से 80 प्रतिशत तक की सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि महिलाएँ परिवार और समाज की रीढ़ होती हैं, इसलिए पंजाब के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है।

पंजाब को क्यों कहा जाता है कैंसर कैपिटल?

पंजाब खासकर मालवा क्षेत्र को लंबे समय से भारत की ‘कैंसर कैपिटल’ कहा जाता है। कृषि उत्पादन के लिए मशहूर मालवा आज ‘कैंसर बेल्ट’ के नाम से भी जाना जाने लगा है।

Asian Pacific Journal of Cancer Prevention में प्रकाशित एक शोध पत्र में पंजाब के 500 कैंसर मरीजों का अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन के अनुसार, 500 मरीजों में से 65% महिलाएँ और 35% पुरुष थे। महिलाओं में 50–54 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित पाया गया। वहीं, पुरुषों में 65–69 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा देखा गया।

महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर के मामले सामने आए, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) और अंडाशय (ओवरी) का कैंसर प्रमुख रहा। पुरुषों में सबसे ज्यादा कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर पाया गया, इसके बाद भोजन नली (इसोफेगस) और जीभ का कैंसर प्रमुख रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में प्रति 1 लाख आबादी पर कम से कम 172 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे जबकि मालवा क्षेत्र में कैंसर के मामले और भी अधिक पाए गए। हाल के अनुमानों के मुताबिक मालवा में कैंसर की दर चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है। कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कृषि रसायनों और कीटनाशकों को व्यापक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में लगभग 15 लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए जो 2022 में 14.6 लाख थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरण प्रदूषण, आनुवंशिक कारण और देर से जाँच (डायग्नोसिस) कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। हालाँकि, पूरे देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन पंजाब की स्थिति विशेष रूप से गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यहाँ प्रदूषण और कृषि केमिकल्स से इसका संबंध है।

पंजाब की ‘कैंसर ट्रेन’

पंजाब की कैंसर स्थिति का सबसे मार्मिक प्रतीक है बठिंडा-बीकानेर ट्रेन जिसे लोग ‘कैंसर ट्रेन‘ कहते हैं। हर रात करीब 9:30 बजे 12 डिब्बों वाली यह ट्रेन बठिंडा से सैकड़ों यात्रियों, जिनमें कई कैंसर मरीज होते हैं, को लेकर रवाना होती है। लगभग 325 किलोमीटर का सफर तय कर यह सुबह राजस्थान के बीकानेर पहुँचती है।

अधिकांश मरीज आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर में इलाज कराने जाते हैं। बीकानेर में इलाज अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज दूसरे राज्य से रुख करते हैं। कैंसर मरीजों को ट्रेन में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है जबकि उनके साथ आने वाले को 75% किराया छूट दी जाती है।

मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना के तहत बीकानेर के कुछ अस्पतालों में मरीजों को 15 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। रातभर सफर कर इलाज के लिए जाते मरीजों के हाथों में मेडिकल फाइलों से भरे प्लास्टिक कवर, इस गंभीर संकट की दर्दनाक तस्वीर बन चुके हैं।

कौन हैं बलबीर सिंह सीचेवाल?

संत बलबीर सिंह सीचेवाल को ‘ईको बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह पंजाब के एक सिख पर्यावरण कार्यकर्ता, आध्यात्मिक नेता और राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) ने उनके पर्यावरण संरक्षण कार्यों के लिए नामित किया था।

उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान उस समय मिली जब उन्होंने काली बेईं नदी की सफाई का बड़ा अभियान चलाया। यह नदी लगभग 160 किलोमीटर बहने के बाद सतलुज और ब्यास नदियों में मिलती है। एक समय यह नदी औद्योगिक कचरे और दर्जनों गांवों के गंदे पानी के कारण पूरी तरह प्रदूषित होकर कूड़ाघर बन चुकी थी।

ऐसे हालात में संत सीचेवाल ने स्वयंसेवकों के सहयोग से एक विशाल जनआंदोलन खड़ा किया और नदी को पुनर्जीवित करने का काम किया। उनके इस प्रयास की विश्व स्तर पर सराहना हुई। वर्ष 2008 में उन्हें ‘टाइम’ पत्रिका द्वारा ‘पर्यावरण के नायक’ (Hero of the Environment) सम्मान दिया गया। उस समय यह सम्मान पाने वाले वे एकमात्र भारतीय और एशियाई थे।

उन्होंने ‘सीचेवाल मॉडल’ भी शुरू किया जो कम लागत वाली अंडरग्राउंड सीवेज व्यवस्था है। इस प्रणाली के माध्यम से गंदे पानी को शुद्ध कर खेतों में उपयोग किया जाता है। इस मॉडल को पंजाब सरकार का समर्थन भी मिला है। संत सीचेवाल स्वास्थ्य समस्याओं विशेषकर कैंसर को प्रदूषण से जोड़ते हैं। वे साफ जल और साफ हवा के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं और संसद में किसानों से लेकर पर्यावरण संकट तक के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

भारत के इतिहास में पहली बार: उपराष्ट्रपति ने त्यागपत्र दिया : जब विपक्ष उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया; धनखड़ की मिमिक्री; लेकिन धनखड़ का त्यागपत्र राहुल गाँधी को बेनकाब कर गया

    संसद में सभापति जगदीप धनखड़ पर विपक्ष ने लगाए थे गंभीर आरोप ( फाइल फोटो, साभार- sansad tv n PTI )
2014 चुनाव के बाद से लगभग हर क्षेत्र में भारत में कई काम पहली बार हो रहे हैं। एक समय था जब आतंकी भारत में उनके आकाओं के दम पर बेगुनाहों के खून से सड़कें लाल करते थे, आतंकियों को प्रधानमंत्री आवास में बैठाकर सम्मान के साथ बिरयानी और कोरमा खिलाया जाता था। लेकिन कालचक्र ऐसा घुमा कि आतंकियों को गोला मिल रहा है, घर में घुसकर मारा जा रहा है। इन सब में सबसे प्रमुख बात सामने आयी कि भारत विरोधी देशों के हाथों कठपुतली बना विपक्ष। फिर कहते हैं "मोदी हटाओं, हमारे हाथ सत्ता दे दो।" लेकिन जनता इतनी महामूर्ख है कि आँखों देखी मक्खी खाने को पता नहीं क्यों मजबूर हैं? सड़क से लेकर लोक/राज्य सभा तक उपद्रव विदेशी चंदे को भुनाने के लिए होते हैं। एक समय था जब नेता विपक्ष की कही किसी बात पर सरकार सोंचने को मजबूर होती थी, परन्तु आज लगता नेता विपक्ष नहीं कोई गली का खलीफा बोल रहा है। जब LoP यह कहे कि "हमें nation के खिलाफ लड़ाई लड़नी है" LoP राष्ट्र को बताए कि कौन-से nation से लड़ रहे हो? यानि विपक्ष नेता की गरिमा बिलकुल तार-तार कर दिया।         

जगदीप धनखड़ ने भले ‘स्वास्थ्य कारणों’ से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया हो, पर विपक्ष इसमें ‘राजनीति’ देख रहा है। ये वही विपक्ष है जिसने न केवल धनखड़ की मिमिक्री कर सदन के बाहर उनका मजाक उड़ाया, बल्कि सदन के भीतर उन्हें ‘विपक्ष की आवाज दबाने वाला सभापति’ से लेकर ‘बीजेपी प्रवक्ता’ तक कहने में भी हिचक नहीं दिखाई।

यहाँ तक कि देश में पहली बार किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश तक की। अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश कह रहे हैं कि उन्होंने विपक्ष को मिलाकर चलने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य वजह से बजाए जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की वजह ‘गहरे’ हैं।

धनखड़ अविश्वास प्रस्ताव ला ला चुका है कांग्रेस 

कांग्रेस को जगदीप धनखड़ विपक्ष को साथ लेकर चलने वाले नजर आने लगे हैं। ये वही कांग्रेस है जिसने देश के इतिहास में पहली बार उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनका ‘संवैधानिक अपमान’ किया । 72 साल के संवैधानिक इतिहास में धनखड़ पहले ऐसे उपराष्ट्रपति रहे जिनके खिलाफ प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस की अगुवाई वाली इंडी गठबंधन ने दिसंबर 2024 में सदन में महाभियोग प्रस्ताव लेकर आया था।

उस वक्त धनखड़ पर ‘पक्षपातपूर्ण तरीके’ से सदन चलाने और विपक्ष को ‘बोलने का मौका नहीं ‘देने का आरोप लगाया था। हालाँकि तकनीकी कारणों से महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

लेकिन आज उपराष्ट्रपति धनखड़ कांग्रेस को सभी दलों को मिला कर चलने वाले नेता नजर आने लगे हैं। कांग्रेस के पूर्व नेता अब समाजवादी पार्टी के सांसद कपिल सिब्बल ने यहाँ तक कहा है कि धनखड़ सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलाकर चलना चाहते थे और दुनिया में भारत के लोकतंत्र की बेहतर छवि प्रस्तुत करना चाहते थे।

धनखड़ की मिमिक्री का मामला

उपराष्ट्रपति धनखड़ को विपक्ष ने आहत भी किया है। याद कीजिए मोदी सरकार 2.0 का वो आखिरी शीतकालीन सत्र जब सदन में हंगामे की वजह से राज्यसभा के 45 सांसदों समेत कुल 78 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सभी निलंबित सांसद संसद भवन की सीढ़ियों पर बैठकर निलंबन का विरोध कर रहे थे।
इसी दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी उठे और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री करने लगे। उनके बात करने और शारीरिक संरचना की खिल्ली उड़ाई। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी खड़े होकर हँसते और मिमिक्री का वीडियो बनाते नजर आए।
इस पर जगदीप धनखड़ ने अपनी नाराजगी भी जताई। उन्होंने संसद में कहा था कि एक सांसद चेयरमैन का मजाक बनाता है और कांग्रेस के बड़े नेता हँसते हैं और उसका वीडियो बनाते हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत और जाति आधारित अपमान बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी जाट पहचान और किसान बैकग्राउंड का मजाक उड़ाया गया। ये पूरे जाट समुदाय का अपमान है।
सांसद कल्याण बनर्जी ने इसके बाद भी कई बार जगदीप धनखड़ की मिमिक्री बनाई और कहा कि वो 1000 बार ऐसा करेंगे।

हाथ धोकर पीछे पड़ी रही टीएमसी

विपक्ष के हर उस दांव में टीएमसी साथ देती रही जो धनखड़ के खिलाफ थी। दरअसल उपराष्ट्रपति की मुखर आलोचक टीएमसी के साथ धनखड़ का रिश्ता उस वक्त से खराब रहा था, जब वह बंगाल के राज्यपाल थे। 2019 से 2022 के बीच राज्यपाल धनखड़ ने बंगाल की ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार की कई मुद्दों पर आलोचना की।
उन्होंने कहा था कि राज्य में संविधान का शासन नहीं है और अराजकता,गुंडागर्दी का बोलबाला है। इसको मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य का अपमान बताया था। उन्होंने सरकार के कामकाज में दखलंदाजी के आरोप भी लगाए। ऐसे में जब जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार बने तो उनका जमकर विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर धनखड़ और विपक्ष के बीच बहसबाजी

सुप्रीम कोर्ट को लेकर उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि संसद के बनाए कानूनों को अगर कोर्ट रोक देती है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। धनखड़ के इस बयान का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था। टीएमसी ने कहा था कि यह व्यक्ति बीजेपी का एजेंडा चला रहा है वहीं कांग्रेस ने कहा था, “उपराष्ट्रपति संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं।” अब वही कांग्रेस उपराष्ट्रपति का गुणगान करती नजर आ रही है। अब इसे दोगलापन नहीं कहा जाये तो क्या जाये? 

विश्वविद्यालयों पर धनखड़ की टिप्पणी पर विपक्ष हुआ था आग-बबूला

मार्च 2023 में जब शैक्षणिक संस्थानों और छात्र राजनीति पर राज्यसभा में बहस चल रही थी तो सभापति धनखड़ ने कहा था, “कुछ विश्वविद्यालय देशविरोधी विचारधाराओं को प्रश्रय देते हैं।” उनका इशारा जेएनयू की तरफ था। इस पर कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने उपराष्ट्रपति की भाषा को ‘संघी एजेंडा’ करार दे दिया और बयान वापस लेने पर अड़े रहे। इस दौरान संसद में कई दिनों तक व्यवधान रहा।

विपक्ष ने लगाया बीजेपी प्रवक्ता होने का आरोप

दिसंबर 2023 में शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष ने धनखड़ पर विपक्षी सांसदों को नहीं बोलने का आरोप लगाया था। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था, “ये उपराष्ट्रपति नहीं, बीजेपी प्रवक्ता की तरह बर्ताव कर रहे हैं।” आज वही कांग्रेस उनकी तारीफ के पुल बाँध रही है और ‘लोकतंत्र का सच्चा सिपाही’ कह रही है।

2022 में उपराष्ट्रपति बनने का भी विपक्ष ने किया था विरोध

मोदी सरकार ने 2022 में बंगाल के राज्यपाल से सीधे केन्द्र में उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया। इंडी गठबंधन ने कांग्रेस नेता मार्गेट अल्वा को अपना उम्मीदवार बनाया था। धनखड़ ने 725 में से 528 वोट पाकर जीत दर्ज की थी और 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति बने।

क्या नितीश को उपराष्ट्रपति बनाने जया बच्चन की ‘बदतमीजी’ पर सबक सिखाने वाले निर्भीक जगदीप धनकड़ का इस्तीफा? राजनीति के ‘जग’ में ‘दीप’ की तरह जले धनखड़

राजनीति अनिश्चिताओं का खेल है। कब किसको कौन मात दे दे कुछ नहीं पता। सत्ता के गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा बहुत गर्म है कि बिहार के अस्वस्थ मुख्यमंत्री नितीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाने के लिए स्वस्थ उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ को बीमारी का बहाना देकर इस्तीफा लिया गया है। हकीकत में सच क्या है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। इस्तीफे का समाचार जंगल में लगी आग की फैलते ही अफवाहों का भी बाजार बहुत गरमा गया। अचानक इस्तीफे विपक्ष तक हैरान है।   
भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार (21 जुलाई 2025) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को त्याग पत्र भेजा। पत्र में इस्तीफे के कारण खराब स्वास्थ्य उल्लेख किया गया। इसके अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कैबिनेट के बाकी मंत्रियों का शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने पत्र में लिखा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ। जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 67(ए) में प्रावधान है।” उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे पर लगातार कयास लग रहे हैं।

इस बीच उनकी साधारण किसान परिवार वाली पृष्ठभूमि और फिर सुप्रीम कोर्ट में वकालत से लेकर उनकी राजनीतिक पारी तक पर चर्चाएँ चल रही हैं। उनका सबसे प्रभावशाली कार्यकाल पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और उपराष्ट्रपति के रूप में रहा है, जहाँ हर बार उन्हें लोकतंत्र के हित में खड़े देखा गया।

राजस्थान के जाट परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़

जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गाँव में एक जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता गोकुलचंद किसान थे। किसान के बेटे ने जगदीप धनखड़ ने सैनिक स्कूल से पढ़ाई की। फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की डिग्री पूरी की।

साल 1979 में सुदेश धनखड़ से शादी की। उनकी एक बेटी है, जिसका नाम कामना है। साल 1990 में जगदीप धनखड़ ने राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट बने। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत की। वह राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

 वर्षों की सक्रिय राजनीति के बाद उन्हें 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था। इस कार्यकाल में उनकी राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर कई मुद्दों से तनातनी देखी गई।

राज्यपाल रहते संवैधानिक मूल्यों पर मुखर रहे धनखड़

जगदीप धनखड़ राज्यपाल के रूप में लगातार संवैधानिक मूल्यों को संरक्षित करते रहे। जब वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे, तब ममता बनर्जी की सरकार से कई मुद्दों पर टकराव हुआ, लेकिन उन्होंने हमेशा संविधान के पक्ष में ही बात की।

बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर भी जगदीप धनखड़ ने आवाज उठाई। TMC के गुंडों ने जब हिंदुओं पर अत्याचार किया और महिलाओं का रेप से लेकर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमा को तोड़ा, तब धनखड़ ने मामले में न्यायिक जाँच के निर्देश दिए।

यही नहीं, बंगाल चुनाव 2021 के बाद हुई हिंसा में भी जगदीप धनखड़ ने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी और ममता सरकार की करतूतों को सामने रखा। बतौर राज्यपाल रहते उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर कई गंभीर प्रश्न उठाए।

जब चुनाव बाद की हिंसा पर रिपोर्ट तक नहीं भेजी गई, तब उन्होंने खुद सामने आकर आवाज उठाई। तबलीगी जमात के बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर लुकआउट नोटिस जारी न होने पर भी उन्होंने सरकार की चुप्पी पर सवाल किया।

जब धनखड़ ममता सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे, तो TMC सांसदों ने उनके खिलाफ खूब हँगामा किया। लेकिन धनखड़ बंगाल की लड़ाई के लिए डटे रहे। कोरोना संकट में जब कई जगह शव सड़कों पर पड़े मिले, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई और सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाया।

बंगाल की TMC सरकार ने हमेशा राज्यपाल का अपमान किया। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें ‘सड़ा हुआ सेब’ और ‘अंकल जी’ तक कहा, तब भी उन्होंने जवाब संयम और सच्चाई से दिया।

जया बच्चन की ‘बदतमीजी’ पर सिखाया सबक

जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा में सभापति के तौर पर अनुशासन और गरिमा को सर्वोपिर रखा है, चाहे सामने कोई भी हो। समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में जब धनखड़ के लहजे पर आपत्ति जताई थी, तब भी उन्होंने सख्त और सटीक जवाब दिया था।

जगदीप धनखड़ ने कहा, “जया जी, आपने बहुत नाम कमाया है। आप जानती हैं कि एक अभिनेता निर्देशक के अधीन होता है। लेकिन हर दिन मैं खुद को दोहराना नहीं चाहता। हर दिन मैं स्कूली (आपसे) शिक्षा नहीं लेना चाहता। आप मेरे लहजे के बारे में बात कर रही हैं? बहुत हो गया। आप कोई भी हो सकते हैं, आपको मर्यादा को समझना होगा। आप एक सेलिब्रिटी हो सकते हैं, लेकिन मर्यादा को स्वीकार करें।”

‘न्यायिक दखल’ पर प्रश्न उठाते रहे धनखड़

जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा के भीतर लगातार के दखल (Judicial Overreach) पर भी लगातार प्रश्न उठाए। उन्होंने इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति को आदेश देने वाले फैसले का भी विरोध किया था।

जब कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपालों को लंबित विधेयकों पर 3 महीने में फैसला लेने का आदेश दिया था, तब धनखड़ ने साफ कहा कि अदालत राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदक को आदेश नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ‘सुपर संसद’ बनने की कोशिश में है।

इतना ही नहीं, जगदीप धनखड़ ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से करोड़ों रुपए मिलने वाले मामले में भी सुप्रीम कोर्ट को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर इतनी नगदी किसी आम आदमी के घर मिलती, तो उसी दिन कार्रवाई हो जाती।

उपराष्ट्रपति रहते हुए जगदीप धनखड़ ने वर्ष 2022 में न्यायिक नियुक्ति बिल (NJAC) को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट पर प्रश्न उठाए थे। मोदी सरकार द्वारा पास किए गए कानून को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था। इसके जरिए न्यायिक नियुक्तियों की व्यवस्था की गई थी। जगदीप धनखड़ ने इसे संसद की संप्रुभता के साथ समझौता करार दिया था।

राज्यसभा के सभापति के तौर पर वह हमेशा ही सक्रिय रहे और प्रमुख मुद्दों पर अपनी राय रखने से नहीं चूके।

ऑपरेशन सिंदूर’ से हेमंत सोरेन की पार्टी की MP को दिक्कत, नाम नहीं पसंद आया: बोलीं- इसे ना दें ज्यादा महत्व; माजी उस समय क्यों नहीं बोली जब सुहागन के सामने उसके पति का धर्म पूछ पैंट खोलकर हिन्दू धर्म की पुष्टि होने पर गोली मारकर एक सुहागन को विधवा किया जा रहा था?

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पसंद नहीं आया है। उन्होंने इससे समस्या जताई है। माजी को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिए जाने से समस्या हो गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

अपनी मांग में सिन्दूर लगाने वाली माजी को नहीं मालूम कि कोई सनातनी महिला अपनी मांग में सिन्दूर क्यों लगाती है? माजी उस समय क्यों नहीं बोली जब सुहागन के सामने उसके पति का धर्म पूछ पैंट खोलकर हिन्दू धर्म की पुष्टि होने पर गोली मारकर एक सुहागन को विधवा किया जा रहा था? माजी मुस्लिम वोटों की खातिर आखिर कितना नीचे गिरेगी?

जहां तक परमाणु की बात है पाकिस्तान द्वारा परमाणु इस्तेमाल करने से पहले ही भारतीय सेना माजी के लाडले पाकिस्तान को कहीं का नहीं छोड़ेगी। दूसरे, अभी सेना ने असली आतंकवादियों को छुआ भी नहीं है, क्योंकि जिन्हे आतंकवादी कहा जा रहा है ये तो झाड़ू के तिनके हैं असली आतंकी सरगना तो पाकिस्तान की फ़ौज और पुलिस है। आतंकी याकूब के जनाजे में फ़ौज और पुलिस का शामिल होना सबसे बड़ा सबूत है।

माजी ने कहा, “जब तीनों सेनाओं को अपने लक्ष्य और समय चुनने की छूट दी गई तो भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसका नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रख दिया, इसलिए इसमें कुछ राजनीति जरूर है, नाम कुछ और भी हो सकता था।” माजी ने इसके बाद पाकिस्तान की परमाणु धमकी को भी दोहराया।

महुआ माजी ने कहा, “किसी भी देश को नागरिकों पर हमला नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह दूसरी दिशा ले सकता है। जब हर देश परमाणु शक्ति से लैस है, इसलिए ऑपरेशन सिंदूर को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए और नागरिकों की जान की रक्षा की जानी चाहिए।”

 महुआ माजी का यह बयान भारतीय सेनाओं द्वारा पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर किए गए 9 ठिकानों पर हमले के बाद आया है। भाजपा ने उनके इस बयान को सेना का मनोबल गिराने वाला बताया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट नहीं, पाकिस्तान की कुटाई है पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले का जवाब: कपिल सिब्बल चाहते हैं कश्मीर पर नेहरू वाली भूल फिर करे भारत

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लगातार आंतकियों पर कार्रवाई की माँग हो रही है। हमले में शामिल 2 आतंकी पाकिस्तानी भी थे। लोगों की माँग है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। लेकिन इस बीच पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की लिबरल जमात ने माँग कर दी है। इस बार यह अटपटी माँग करने वाले कपिल सिब्बल हैं।

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने पहलगाम हमले के बाद कहा, “यह मामला राज्य प्रायोजित आतंकवाद का है। हमारे कानूनों के अनुसार, पाकिस्तान को आंतकी राष्ट्र ठहराया जाना चाहिए। इस आतंकी हमले के जिम्मेदारों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में दोषी ठहराया जाना चाहिए।”

 सिब्बल ने आगे कहा, “मैं गृह मंत्री से माँग करता हूँ कि पाकिस्तान को हमारे क़ानून के अनुसार आतंकी राष्ट्र घोषित किया जाए और फिर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय लेकर जाया जाए। वह इस न्यायालय में पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने की माँग करें।”

जहाँ यह 100% सच है कि पाकिस्तान की शह पर यह हमला हुआ है और वह स्वयं में एक आतंकी राष्ट्र है, लेकिन इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता। इस मामले पर भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ के मसले को खुद ही निपटा लेगा।

भारत का स्टैंड है कि कश्मीर और उससे जुड़ा कोई भी मामला अंतरराष्ट्रीय नहीं है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नहीं ले जाया जाएगा। कश्मीर का सीमा विवाद का मामला हो या फिर पाकिस्तान का कश्मीर के बड़े हिस्से पर अनाधिकृत कब्जा, भारत इसे द्विपक्षीय तरीके से हल करने की बात करता आया है।

ऐसे में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना कहीं से भी ठीक नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर का मुद्दा ले जाना भारत के लिए कभी लाभदायक नहीं रहा है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू यह गलती एक बार कर चुके हैं। आजादी के बाद पाकिस्तान में कश्मीर पर हमले को वह संयुक्त राष्ट्र लेकर गए थे।

इसके बाद कश्मीर का मामला फंस कर रह गया और भारतीय सेना आगे के आगे बढ़ने के बजाय भारत को भी सीजफायर करना पड़ा। इसके चलते कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान समेत तमाम इलाका पाकिस्तान के अनाधिकृत कब्जे में चला गया। यह कब्ज़ा 7 दशक के बाद भी जारी है।

इस बीच स्पष्ट हो चुका है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच भारत को लेकर पक्षपात करते हैं। 3 दशक से कश्मीर को आतंक की आग में झोंकने के बाद भी पाकिस्तान पर वह कोई कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। ना ही वह पाकिस्तान से यह कह पाए हैं कि वह भारत को उसका इलाका वापस करे।

पहलगाम हमले के बाद जहाँ पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की सलाह देना मूर्खता भरी बात है। यह तब और मूर्खता भरा काम होगा जब भारत 1972 में पाकिस्तान के साथ शिमला समझौता कर चुका है। इसमें पाकिस्तान ने इस बात पर हामी भरी थी कि वह भारत के मामले को द्विपक्षीय स्तर पर हल करेगा।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी मामले को ले जाने का मतलब यह होगा कि भारत इन मामलों में अपने स्तर हल नहीं कर सकता। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मदद माँगना दिखाएगा कि वह अकेले ही पाकिस्तान को उसके पापों के लिए भी नहीं दण्डित कर सकता।

ऐसे में कपिल सिब्बल की यह राय एकदम अप्रासंगिक है और सच्चाई से कोसों दूर है। यह राय उसी कॉन्ग्रेसी मानसिकता से उपजती है जो सोचता है कि पाकिस्तान को दशकों तक शह देने वाले अंग्रेज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के साथ न्याय करेंगे। पाकिस्तान का एक ही इलाज है जो मोदी सरकार करती आई है।

एक तरफ उसे अप्रासंगिक बना देना और जब भी वह कोई ऐसी हरकत करे तो उसे ऐसी सजा देना कि वह खुद काँप जाए। 2016 में आतंक के कैम्पों पर सर्जिकल स्ट्राइक और 1019 में बालाकोट में हुआ हवाई हमला मोदी सरकार की इसी दृढ़ता का उदाहरण था। पहलगाम का जवाब इससे भी बड़ा होना चाहिए।


राणा सांगा को कहा ‘गद्दार’, बाबर के लिए दिखाया ‘प्यार’: सपा सांसद ने राज्यसभा में उगला जहर, उपसभापति ने फटकारा

                                                          सपा सांसद रामजी लाल सुमन
आखिर मुस्लिम वोटों की खातिर कब तक कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियां इतिहास को झुठलाते रहेंगे? केंद्र सरकार क्यों नहीं गलत इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों को ब्लैकलिस्ट कर उनकी सरकारी सुविधाएं छीनी जाती? अगर किसी भी विदेश में वहां के असली इतिहास से छेड़छाड़ की गयी होती सख्त कार्यवाही हो गयी होती, लेकिन ये भारत है जहाँ ऐसे लोग ऐश करते देखे जाते हैं। असली इतिहास बताने वाले को सांप्रदायिक करार कर दिया जाता है। जब तक जनता के सामने असली इतिहास नहीं लाया जाएगा उपद्रवी उपद्रव करते रहेंगे।      

उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा के नाम से विख्यात महाराणा संग्राम सिंह को गद्दार बताया है। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वाले मुस्लिमों को बदनाम करने के लिए कहते हैं कि उनमें बाबर का डीएनए है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का मुस्लिम बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता है। वह मोहम्मद शाह और सूफी संतों को अपना आदर्श मानता है।

सुमन ने कहा, “मैं जानना चाहूँगा कि बाबर को लाया कौन? इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। अगर मुस्लिम बाबर की औलाद हैं तो तुम (हिंदू और भाजपा) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। ये हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। हम बाबर की आलोचना तो करते हैं, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। ये देश की एकता का सवाल है।” इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने उन्हें संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की नसीहत देकर बैठा दिया।

रामजी लाल सुमन ने इससे पहले दिसंबर 2018 में देश का बँटवारा करके अलग पाकिस्तान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को देशभक्त बताया था और वीर सावरकर को गद्दार कहा था। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में जिन्ना के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। तब उन्होंने कहा था, “विनायक दामोदर सावरकर तो बहुत ही बड़ा गद्दार था।”

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट से मिली नोटों की गड्डी, खड़गे ने सदन में डाला सिंघवी का नाम छिपाने का दबाव


राज्यसभा में शुक्रवार (06 दिसंबर 2024) को उस वक्त जोरदार हंगामा हुआ जब सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को बताया कि कांग्रेस सांसद की सीट से नोटों की गड्डी मिली है। सभापति ने जानकारी दी कि गुरुवार (05 दिसंबर 2024) को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने सीट नंबर 222 से कैश बरामद किया। यह सीट तेलंगाना से कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है।

इस खुलासे के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक जाँच पूरी न हो जाए, किसी का नाम सार्वजनिक करना गलत है। उन्होंने इसे एक “चिल्लर हरकत” बताते हुए देश को बदनाम करने की साजिश करार दिया।

दूसरी ओर, अभिषेक मनु सिंघवी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, “मैंने इस बारे में पहली बार सुना है। मैं तो राज्यसभा में सिर्फ 500 रुपये का नोट लेकर जाता हूँ। घटना के वक्त मैं सदन में नहीं था।”

सभापति ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जाँच जारी रहने की बात कही है।

राजनीति के लिए पति का नाम भी छोड़ने के लिए हो गई तैयार; अमिताभ नाम से बिलबिला रही हैं लेकिन एक OBC नाबालिग बेटी के साथ हुए दुष्कर्म पर नहीं बोलती ; Opposition के नाम को कलंकित करती Opposition

 सुभाष चन्द्र

राजनीति को इतना घटिया कर देगा विपक्ष, कभी सपने में भी नहीं सोचा था लेकिन अब लगता है विपक्ष के गिरने की कोई सीमा नहीं है, इससे भी ज्यादा देखने को मिल सकता है। राज्यसभा में सभापति जगदीप धनकड़ जी ने सपा सांसद को “जया अमिताभ बच्चन” कह कर संबोधित क्या कर दिया, मैडम तो बिलबिला गईं

यह नाम किसी तरह से भी गलत नहीं था लेकिन उन्हें जवाब देते हुए खुद अपना नाम “जया अमिताभ बच्चन” कहती हैं कि मैं कलाकार हूं, Body Language समझती हूं expression समझती हूं, आपकी tone is not acceptable”। राज्यसभा से बाहर निकल कर भी सभापति के खिलाफ अनाप शनाप बोला और आरोप लगाया कि वो चेयर पर बैठ कर Unparliamentary शब्द बोलते हैं, हमारे विपक्ष के नेता खड़गे जी का माइक बंद कर दिया, ऐसा आप कैसे कर सकते हैं। I Want an apology for saying you may be a celebrity, I don’t care, यह महिला का अपमान है”

 

इसके पहले भी उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह जी से भी ये मैडम ऐसे ही उलझी थी और तब उन्होंने कहा था कि आपका नाम जो राज्यसभा के रिकॉर्ड में है वह लिया जाएगा, आप चाहें तो आपने नाम बदल सकती है और उन्होंने उसे तरीका भी समझा दिया। फिर भी सभापति से तकरार करना साबित करता है कि समूचे विपक्ष को केवल हंगामा करना है

अपने नाम पर बिलबिला रही हैं और उनकी पार्टी के लोगों ने अयोध्या में जो एक पिछड़ी जाति की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया उस पर खामोश है। क्यों न हो जब वह अपनी नातिन को कह सकती है कि उसे कोई दिक्कत नहीं है अगर वह बिना शादी के माँ बनती है। ये मैडम तो हर किसी का अपमान करने को तैयार रहती हैं, याद होगा रवि किशन को कहा था “जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं”। अब इनसे पूछो तुम्हारे बाप से लेकर खा रहे हैं, मेहनत करते हैं काम करते है और तब ही कमाते हैंइसमें किसकी थाली में छेद हो गया

लेखक 
चर्चित YouTuber 
पुराना समय याद आता है सोनिया गांधी को इसके साथ खड़े देख कर कि 2006 में जया अमिताभ बच्चन की शिकायत की थी कांग्रेस के सांसद ने चुनाव आयोग से कि राज्यसभा की सदस्य होते हुए, ये देवी जी UP Film Development Corporation की Chairperson हैं और चुनाव आयोग ने इन्हे राज्यसभा से निष्काषित कर दिया था और मुलायम सिंह यादव बुरी तरह सोनिया गांधी पर बरसे थे लेकिन आज प्यार मोहब्बत की पींगे बढ़ रही है

अब सुनिये, मैंने सर्च किया तो मुझे इन मैडम के 2018 में चुनाव आयोग में दिए हुए दो Affidavit मिले, उसमें एक में  अपना नाम मैडम ने लिखा था “Jaya Amitabh Bachchan”  और दूसरे में लिखा था “Bachchan Jaya Amitabh” 

खुद अपना नाम अमिताभ के साथ जोड़ कर लिखती हैं और सभापति और उपसभापति कहते हैं तो बवाल काहे काट रही हो देवी जी। ये 5th time राज्यसभा की सदस्य बनी हैं और पहले भी उन्हें जया अमिताभ बच्चन नाम से पुकारा जाता रहा होगा लेकिन इस बार परेशानी इसलिए है कि मोदी है सामने। 

आप खड़गे की वकालत कर रही हैं, ये माइक बंद करने का अब रोज का शोशा बन गया है लेकिन मैडम आपको याद नहीं इसी खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को “जहरीला नाग” कहा था और कांग्रेस के लोग अब तक मोदी को 100 से ज्यादा गालियां दे चुके है और आपको जया अमिताभ बच्चन सुनकर भी लगता है गाली दे दी। आप अपना Original नाम नहीं सुनना चाहती और सोनिया गांधी भी नहीं सुनना चाहती

अगर जया अमिताभ बच्चन को लगता है धनकड़ जी ने आपका महिला होने के नाते अपमान किया है तो महिला आयोग में शिकायत कर दीजिए

बेचारा अमिताभ बच्चन भी सोचता होगा कि परिवार के 80 की उम्र पार करने पर भी 18 घंटे काम करता हूं लेकिन आज बीवी को मेरे नाम से ही नफरत है। कहीं तलाक की नौबत तो नहीं आ रही। बड़े घरों में क्या होता है किसी को पता नहीं चलता

छेड़ोगे तो छोड़ूंगा नहीं… किसानों के मुद्दे पर मामा(शिवराज सिंह चौहान) ने कांग्रेस के सारे धागे खोल दिए; तथाकथित किसान बने राहुल को भी किया बेनकाब


केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 अगस्त 2024 को राज्यसभा में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। किसानों की आत्महत्या को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के सारे धागे खोलते हुए जमकर लताड़ लगाई। कांग्रेस पर भड़कते हुए उन्होंने कहा कि मैंने कहा था मुझे छेड़ो मत। अगर छेड़ोगे तो छोडूंगा नहीं। ये किसान गोलीबारी की बात कर रहे है। जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी अलग-अलग राज्यों में तब गोली चला करती थी और कई किसान मारे गए थे। आज वही कांग्रेस हमसे किसानों को लेकर सवाल पूछती है। इनके साथ दिग्विजय सिंह बैठे हैं, इनके हाथ खून से सने हैं। 24-24 किसानों को मारा था।

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि साल 1986 में जब कांग्रेस की सरकार बिहार में थी, तब 23 किसानों की मौत गोलीबारी हुई थे। 1988 में दिल्ली में इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर किसानों पर गोली चलाई गई थी, उसमें दो किसान मारे गए थे। 1988 में मेरठ में किसानों पर फायरिंग में 5 किसान मारे गए। दम है तो सुन के जाओ। 23 अगस्त 1995 में हरियाणा में गोली चलाई , जिसमें 6 किसान मारे गए थे। 19 जनवरी 1998 को मुलताई, एमपी में किसानों पर गोली चली, कांग्रेस की सरकार थी, 24 क‍िसान मारे गए। मैं शालीनता से बात करना चाहता हूं, लेकिन ये छेड़ेंगे तो में छोड़ूंगा नहीं।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं और कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं।

सभापति ने लगाई कांग्रेस सांसद की क्लास, कहा- जयराम रमेश आपको किसान के बारे में क ख ग नहीं पता


उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने आज 26 जुलाई को सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने पर कांग्रेस सांसद की जमकर क्लास लगाई। राज्यसभा में किसानों की समस्या को लेकर सभापति जगदीप धनखड़ कुछ बोलने की कोशिश कर रहे ही थे कि राहुल गांधी के करीबी मार्गदर्शक जयराम रमेश में उन्हें टोकने की कोशिश की। इस पर सभापति ने उन्हें डपट दिया। सभापति धनखड़ राज्यसभा में सांसद को कह रहे थे कि भारत किसान प्रधान देश है। सदन के अंदर किसान की चर्चा के समय इतनी गुजारिश करूंगा कि हर व्यक्ति… सभापति इतना बोले ही थे कि कांग्रेसी सांसद जयराम रमेश टोका-टाकी करने लगे। इस पर सभापति ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक समस्या की तरह है। आप किसान के बारे में क्या जानेंगे? आपको किसान के बारे में क ख ग नहीं पता है।

जयराम रमेश को डपटने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लोग वीडियो को शेयर कर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश पर तंज कस रहे हैं।

भ्रष्टाचार करे AAP, शिकायत करे कांग्रेस और कार्रवाई हो तो गाली दें मोदी को- प्रधानमंत्री मोदी, राज्य सभा में; केजरीवाल का एक और महाघोटाला, इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा, वकीलों की फ़ीस कौन दे रहा है?देखिए वीडियो

 
3 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दशकों बाद एक सरकार को लगातार तीसरी बार सेवा करने का मौका मिला लेकिन कुछ लोगों को यह जनादेश समझ में नहीं आया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 60 साल के बाद हुआ है कि 10 साल के बाद, कोई एक सरकार उसकी वापसी हुई है। भारत के लोकतंत्र की 6 दशक के बाद यह असमान्य घटना है। कुछ लोग जानबूझकर उससे अपना मुंह फेर कर बैठे रहे। कुछ लोगों को समझ नहीं आया। जिन्हें समझ आया उन्होंने हल्ला इस वजह से किया कि जनता के निर्णय पर कैसे छाया कर दी जाए। कैसे उसे ब्लैकआउट किया जाए।

विपक्ष पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र की जांच एजेंसियों पर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का सरकार दुरुपयोग कर रही है, ऐसा कहा ​गया है। शराब घोटाला करे AAP, भ्रष्टाचार करे AAP, बच्चों के क्लासरूम बनाने में घोटाला करे AAP, पानी तक में घोटाला करे AAP… AAP की शिकायत करे कांग्रेस, AAP को कोर्ट तक घसीट कर ले जाए कांग्रेस और कार्रवाई हो तो गाली दें मोदी को। जवाब मांगे। कांग्रेस देश को बताए कि कांग्रेस ने प्रेस वार्ता करके AAP के घोटालों के इतने सारे सबूत देश के सामने रखे थे, वो सबूत सच्चे थे या झूठे थे?

एक और महाघोटाला, जिस ओर कोई गंभीरता से नहीं देख रहा, केजरीवाल की पैरवी करने वाले वकीलों की फ़ीस सरकार की जेब से जा रही है। इसीलिए केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रहा। इस ओर बीजेपी समेत जितने भी केजरीवाल है सभी को कोर्ट पर केजरीवाल को इस्तीफा देने के लिए जोर देना चाहिए। देखिए चर्चित YouTuber सुभाष चन्द्र का वीडियो:

कालचक्र कब किसकी तरफ मूड जाए, किसी को नहीं पता होता, लेकिन मोदी विरोध में मोदी को दुश्मन समझ अपने ही दुश्मनों की गोदी में बैठ गयी पार्टी। ये वही आम आदमी पार्टी है जो दिल्ली विधान सभा चुनावों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के 370 सबूत रैलियों में लहराकर जेल भेजने का दावा करती थी, शीला को तो अरविन्द केजरीवाल जेल नहीं पहुंचा पाए, परन्तु शीला की पार्टी कांग्रेस ने केजरीवाल को जेल भेज दिया।  

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हमारे लिए मिशन है। ये हमारे लिए चुनाव में हार-जीत का विषय नहीं है। हमने 2014 में जब सरकार बनाई तब हमने कहा था कि हमारी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए काम करेगी। हमारी सरकार भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करेगी, कालेधन पर वार करेगी। मैं बिना लाग-लपेट के कह रहा हूं, हमने एजेंसियों को भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए खुली छूट दे रखी है। हां, वो ईमानदारी से ईमानदारी के लिए काम करे। कोई भी भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा, ये मोदी की गारंटी है।

उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि संवेदनशील मामलों में जब राजनीति होती है, तो देशवासियों को और खासकर महिलाओं को अकल्प पीड़ा होती है। ये जो महिलाओं के साथ होते अत्याचार में विपक्ष का सेलेक्टिव रवैया है, ये सेलेक्टिव रवैया चिंताजनक है। मैं किसी राज्य के खिलाफ नहीं बोल रहा हूं और न ही कोई राजनीतिक स्कोर करने के लिए बोल रहा हूं। कुछ समय पहले, मैंने बंगाल से आई कुछ तस्वीरों को सोशल मीडिया पर देखा। एक महिला को वहां सरेआम सड़क पर पीटा जा रहा है, वो बहन चीख रही है। वहां खड़े हुए लोग उसकी मदद के लिए नहीं आ रहे है, वीडियो बना रहे हैं। जो घटना संदेशखाली में हुई, जिसकी तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, लेकिन बड़े बड़े दिग्गज जिनको मैं कल से सुन रहा हूं, पीड़ा उनके शब्दों में भी नहीं झलक रही है। इससे बड़ा शर्मिंदगी का चित्र क्या हो सकता है? जो लोग खुद को प्रगतिशील नारी नेता मानते हैं, वो भी मुंह पर ताले लगाकर बैठ गए हैं। क्योंकि घटना का संबंध उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े दल से या राज्य से है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने जी भरकर समर्थन और आशीर्वाद दिए हैं। उन्होंने भरोसे की राजनीति पर मुहर लगाई है। नतीजे आए तब से हमारे एक साथी की ओर से बार-बार ढोल पीटा गया था कि एक तिहाई सरकार…इससे बड़ा सत्य क्या हो सकता है कि हमारे 10 साल हुए हैं, 20 और बाकी हैं। एक तिहाई हुआ है, दो तिहाई और बाकी है और इसलिए उनकी इस भविष्यवाणी के लिए उनके मुंह में घी शक्कर।

उन्होंने कहा कि इस चुनाव नतीजों से कैपिटल मार्केट में तो उछाल नजर ही आ रहा है, लेकिन दुनिया में भी उमंग और आनंद का माहौल है। इस बीच हमारे कांग्रेस के लोग भी खुशी में मग्न हैं, लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस खुशी का कारण क्या है? क्या ये खुशी हार की हैट्रिक पर है? क्या ये खुशी नर्वस 90 का शिकार होने की है? क्या ये खुशी एक और असफल लॉन्च की है?

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब लोकसभा में जब हमारी सरकार की तरफ से कहा गया कि हम 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाएंगे तो मैं हैरान हूं कि जो आज संविधान की प्रति लेकर घूमते रहते हैं, दुनिया में लहराते रहते हैं, उन्होंने विरोध किया था कि 26 जनवरी तो है, फिर संविधान दिवस क्यों लाएं? आज संविधान दिवस के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों ​को संविधान की भावना को, संविधान की रचना में क्या भूमिका रही है, देश के गणमान्य महापुरुषों ने संविधान के निर्माण में किन कारणों से कुछ चीजों को छोड़ने का निर्णय किया और किन कारणों से कुछ चीजों को स्वीकार करने का निर्णय किया इसके विषय में विस्तार से चर्चा हो। एक व्यापक रूप से संविधान के प्रति आस्था का भाव जगे और संविधान के प्रति समझ विकसित हो। संविधान हमारी प्रेरणा रहे इसके लिए हम कोशिश करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो ये मानते हैं कि इसमें क्या है, ये तो होने ही वाला है, ये तो अपने आप हो ही जाएगा… ऐसे विद्वान हैं। ये लोग ऐसे हैं, जो ऑटो पायलट मोड में, रिमोट कंट्रोल सरकार चलाने के आदी हैं। ये कुछ करने धरने में विश्वास नहीं रखते, ये इंतजार करना जानते हैं। लेकिन हम परिश्रम में कोई कमी नहीं रखते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं किसानों को लेकर सभी सदस्यों का और उनकी भावनाओं का आदर करता हूं। बीते 10 वर्षों में हमारी खेती लाभकारी हो, किसान को लाभकारी हो, इस पर हमने हमारा ध्यान केंद्रित किया है और अनेक योजनाओं से उसको ताकत देने का प्रयास किया है। एक प्रकार से बीज से बाजार तक हमने किसानों के लिए हर व्यवस्था को बहुत माइक्रो प्लानिंग के साथ मजबूती देने का भरसक प्रयास किया है और व्यवस्था को हमने चाक चौबंद किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकटों की वजह से कुछ समस्याएं उत्पन्न हुईं, लेकिन हमने 12 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर इसका असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया। हमने कांग्रेस के मुकाबले कहीं अधिक पैसा किसानों तक पहुंचाया। अन्न भंडारण का विश्व का सबसे बड़ा अभियान हमने हाथ में लिया और इस दिशा में काम चल पड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने पिछले पांच साल में जितना काम किया है, उतना काम करना होता तो कांग्रेस को 20 साल लग जाते। नॉर्थईस्ट में स्थायी शांति के लिए 10 साल निरंतर प्रयास किए गए हैं। बिना रुके, बिना थके प्रयास किए गए हैं। उसकी चर्चा देश में कम हुई है, लेकिन परिणाम व्यापक रहे हैं। राज्यों के बीच सीमा विवाद संघर्षों को जन्म देता रहा है और आजादी के बाद से ये निरंतर चलता रहा है। हम राज्यों के साथ इसे हल करते जा रहे हैं। ये नॉर्थईस्ट की बहुत बड़ी सेवा है। हिंसा से जुड़े संगठन, जो हथियारबंद गिरोह थे जो लड़ाई लड़ते रहते थे, आज उनको साथ लेकर स्थायी समझौते हो रहे हैं। जिनके खिलाफ गंभीर मामले हैं, वे अदालत में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। न्यायतंत्र में भरोसा बढ़ना महत्वपूर्ण बात है।

राज्यसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर की स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। वहां जो घटनाएं घटीं, 11 हजार से ज्यादा FIR ​की गईं हैं, 500 से ज्यादा लोग अरेस्ट हुए हैं। इस बात को भी हमें स्वीकार करना होगा कि मणिपुर में लगातार हिंसा की घटनाएं कम होती जा रही हैं। मणिपुर में भी स्कूल-कॉलेज संस्थान खुले हुए हैं। जैसे देश में परीक्षाएं हुईं, वहां भी परीक्षाएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार सभी से बातचीत करके सौहार्द का रास्ता खोलने की कोशिश कर रही है। छोटे-छोटे ग्रुपों से बात की जा रही है। गृहमंत्री वहां जाकर कई दिन रहे हैं। अधिकारी भी लगातार जा रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए हर प्रकार से प्रयास किया जा रहा है। जो भी तत्व मणिपुर की आग में घी डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें आगाह करना चाहता हूं कि ये हरकतें बंद करें। एक समय आएगा जब मणिपुर ही रिजेक्ट करेगा उन लोगों को।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लोग ये ना भूलें कि इन्हीं हालातों की वजह से इस छोटे से राज्य में 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा है। ये हमारे कार्यकाल में नहीं हुआ है। कुछ तो वजह होगी। लेकिन फिर भी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए वहां हरकतें हो रही हैं। हमें समझदारी के साथ स्थितियों को ठीक करने के लिए प्रयास करना है।

सागरिका घोष क्या आप इसी लिए संसद में आई हैं? राज्यसभा के वेल में हंगामे पर सभापति जगदीप धनखड़ ने फटकारा, कहा- यह भारतीय इतिहास का कलंकित दिन

                                       जगदीप धनखड़ एवं सागरिका घोष (साभार: हिंदुस्तान/वेब दुनिया)
संसद सत्र के पाँचवें दिन राज्यसभा में शुक्रवार (28 जून 2024) को विपक्ष ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर खूब हंगामा किया। इस दौरान कई सांसद वेल में पहुँच गए। इससे राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने भड़क गए और इसमें टीएमसी सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ ब्रायन सहित को फटकार लगाते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

सांसदों के व्यवहार को देखते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा, “जो लोग वेल में खड़े हैं, हम उनका नाम ले रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने खड़े होकर उन सांसदों का नाम लेना शुरू किया जो हंगामा कर रहे थे। सबसे पहले टीएमसी सांसद सागरिका घोष का नाम लेते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आप यहाँ सदन में हंगामे के मकसद से आई हैं?”

सभापति जगदीप धनखड़ यहीं नहीं रूके। कुछ देर के बाद तृणमूल कॉनग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन का नाम लेकर उन्होंने कहा, “मिस्टर डेरेक ओ ब्रायन, आप इस हंगामे के डायरेक्टर बन रहे हैं।” वहीं टीएमसी सांसद साकेत गोखले को लेकर कहा, “आप वर्चुअली अपने लिए ही परेशानी बन रहे हैं।” इस दौरान विपक्षी सांसद सदन में नारेबाजी करते रहे।

उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, “आज भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा कलंकित दिन है कि विपक्ष के नेता खुद वेल में आ गए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। मैं दुखी हूँ, स्तब्ध हूँ। भारतीय संसदीय परंपरा इस हद तक बिगड़ जाएगी कि विपक्ष के नेता वेल में आ जाएँगे, उपनेता वेल में आ जाएँगे।”

इसके कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दिया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए 21 घंटे का समय निर्धारित किया है। सांसद इस समय को चर्चा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

राज्यसभा में शुक्रवार को नीट से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिए। सभापति जगदीप धनखड़ ने बताया कि उन्हें इस विषय पर चर्चा के लिए कुल 22 नोटिस मिले हैं। इनमें नीट में अनियमितता, चीटिंग और पेपर लीक के विषय पर बहस के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया गया था। हालाँकि, सभापति ने इन सभी नोटिस को अस्वीकार कर दिया। 

‘पेपर लीक पर न करें राजनीति, दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध’: इमरजेंसी संविधान पर सबसे बड़ा हमला :राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18वीं लोकसभा के पहले संसद सत्र में सदन के दोनों सदनों को संबोधित किया। राष्ट्रपति लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अगले 5 सालों के लिए नई सरकार के रोडमैप की रूपरेखा सामने रखा। राष्ट्रपति का संसद भवन के अंदर सांसदों ने खड़े होकर स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ जिसके बाद राष्ट्रपति ने अपना अभिभाषण शुरू किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आपातकाल संविधान पर सीधे हमले का सबसे बड़ा और काला अध्याय था।

अपने अभिभाषण की शुरुआत राष्ट्रपति ने 18वीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई देकर की। राष्ट्रपति ने नवनिर्वाचित स्पीकर ओम बिरला को भी बधाई दी और सकुशल चुनाव संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग का भी धन्यवाद किया। उन्होंने जम्मू कश्मीर से चुनाव की आई तस्वीरों को सुखद बताते हुए कहा कि इस बार घाटी में दशकों का रिकॉर्ड टूटा है। हमने जम्मू कश्मीर में हड़ताल का दौर देखा है। कम मतदान को दुश्मन कश्मीर की राय के रूप में वैश्विक मंचों पर उठाते थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “ये दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था, करीब 64 करोड़ मतदाताओं ने उत्साह और उमंग के साथ अपना कर्तव्य निभाया है। इस बार भी महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया है। इस चुनाव की बहुत सुखद तस्वीर जम्मू-कश्मीर से भी सामने आई है। कश्मीर घाटी में वोटिंग के अनेक दशकों के रिकॉर्ड टूटे हैं।” राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विकास गति को तेज किया जाएगा। ग्रोथ की निरंतरता हमारी गारंटी है और आने वाले बजट में ऐतिहासिक कदम दिखेंगे। किसानों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “किसानों को 20 हजार करोड़ ट्रांसफर किए गए। हम किसानों को ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर करेंगे।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा “देश में छह दशक के बाद पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार बनी है। लोगों ने इस सरकार पर तीसरी बार भरोसा जताया है। लोग जानते हैं कि सिर्फ यही सरकार उनकी आकाँक्षाओं को पूरा कर सकती है। 18वीं लोकसभा कई मायनों में ऐतिहासिक लोकसभा है। इस लोकसभा का गठन अमृतकाल के शुरुआती वर्षों में हुआ था। यह लोकसभा देश के संविधान को अपनाने के 75वें ​​वर्ष की भी साक्षी बनेगी। आगामी सत्रों में यह सरकार अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है। यह बजट सरकार की दूरगामी नीतियों और भविष्य के विजन का प्रभावी दस्तावेज होगा। बड़े आर्थिक और सामाजिक फैसलों के साथ-साथ इस बजट में कई ऐतिहासिक कदम भी देखने को मिलेंगे।”

राष्ट्रपति के अभिभाषण में पेपर लीक का जिक्र भी किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “पेपर लीक की घटनाओं की निष्पक्ष जाँच और दोषियों कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। पहले भी कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं। इस मामले पर दलीय राजनीति से ऊपर उठकर देश व्यापी ठोस उपाय करने की जरूरत है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देश के किसानों को 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्रदान की है। मेरी सरकार के नए कार्यकाल की शुरुआत से अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है। सरकार ने खरीफ फसलों के लिए MSP में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। आज का भारत अपनी वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी कृषि व्यवस्था में बदलाव कर रहा है। आजकल दुनिया में जैविक उत्पादों की माँग तेजी से बढ़ रही है। भारतीय किसानों के पास इस माँग को पूरा करने की पूरी क्षमता है, इसलिए सरकार प्राकृतिक खेती और इससे जुड़े उत्पादों की सप्लाई चेन को सशक्त कर रही है।”

राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद में कहा कि विभाजनकारी ताकतें लोकतंत्र को कमजोर करने, देश के भीतर और बाहर से समाज में खाई पैदा करने की साजिश रच रही हैं। हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने के हर प्रयास की सभी को निंदा करनी चाहिए।

‘प्यार से माँगते तो जान दे देती, अब किसी कीमत पर नहीं दूँगी इस्तीफा’: स्वाति मालीवाल; जब जमीन हड़पने के लिए बाप बहन को अपने पिता की पत्नी लिखवा दे, बेटे केजरीवाल द्वारा नौटंकियां करना कोई नयी बात नहीं

                                    साभार: वन इंडिया 
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा है कि उनसे अगर प्यार से राज्यसभा सीट से इस्तीफा देने को कहा जाता तो वह छोड़ देतीं। उन्होंने अब किसी भी हाल में राज्यसभा से इस्तीफा देने से मना कर दिया है। उन्होंने अपने साथ हुई मारपीट और चरित्र हनन के पीछे का कारण यही बताया है।

स्वाति मालीवाल और अरविन्द केजरीवाल के बीच छिड़ी जंग सांप और छछूंदर की लड़ाई बन गयी है या यह भी कह सकते हैं अब केजरीवाल के लिए आगे कुआँ पीछे खाई वाली स्थिति बन गयी है। मालीवाल के पूर्व पति जयहिंद ने तो दिल्ली पुलिस से अरविन्द केजरीवाल के narco test करवाने की बात बोल दी। दूसरे यह कि बात बात पर नाटक करना केजरीवाल के संस्कारों में है। जिसका बाप अपनी बहन को माँ लिखवाकर अपनी बहन की जमीन हड़प ले, इससे दर्दनाक क्या हो सकता है? इससे ज्यादा शर्मनाक किस्सा नहीं मिल सकता। जब खून में ही छल-कपट हो ईमानदार कैसे हो सकता है, सोंचने की बात है। फिर जब केजरीवाल interim bail पर घर पहुंचे तब इसके माँ-बाप बिना किसी सहारे के चल रहे थे और अब पूछताछ के हाथ पकड़ कर बाहर लाया जा रहा है। यानि जब माँ-बाप ही ऐसा नाटक कर रहे हों, बेटा करे कोई हैरानी की बात नहीं। परिवार ही गोलीबाज़ है। देखिए वीडियो   

 

किसी ख़ास वकील के लिए राज्यसभा सीट खाली करने को लेकर स्वाति मालीवाल ने ANI पॉडकास्ट पर स्मिता प्रकाश से बताया, “अगर मेरी राज्यसभा सीट उनको वापस चाहिए थी, तो अगर प्यार से माँगते तो मैं जान भी दे देती, राज्यसभा सीट तो बहुत छोटी चीज है।”

जिस खास वकील के लिए राज्यसभा सीट खाली करने की बात कही जा रही है, मीडिया रिपोर्ट्स में वह अभिषेक मनु सिंघवी बताए गए हैं। वह हाल ही में हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा चुनाव हार गए थे। वह दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविन्द केजरीवाल के वकील हैं।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने कभी भी पद की लालसा नहीं दिखाई, मैं 2006 में तब जुड़ी थी जब कोई किसी को जानता नहीं था। मैंने जमीन से जुड़ कर काम किया है। 2006 से 2012 तक सारे ऑपरेशन चलाए हैं। मैं 3-4 लोगों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति थी।”

उन्होंने अब राज्यसभा सीट से इस्तीफ़ा देने को लेकर साफ इनकार किया। उन्होंने कहा, “मुझे सांसद पद की कोई लालसा नहीं है, ये मुझे प्यार से बोलते तो मैं हर हाल में इस्तीफा दे देती, मुझे कोई समस्या नहीं। मैं किसी पद में नहीं बंधी। जिस तरीके से इन्होने मुझे मारा पीटा है, अब मैं किसी भी हाल में इस्तीफा नहीं दूँगी। मुझे बताया गया है कि इसी वजह से मेरा चरित्र हनन हो रहा है, मेरी बेइज्जती की जा रही है। मैं अब सांसद के तौर पर मेहनत करुँगी और एक आदर्श सांसद कैसा होता है, बन कर दिखाऊँगी।”

AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ 13 मई, 2024 को दिल्ली CM के आधिकारिक आवास पर मारपीट हुई थी। उनके साथ यह मारपीट दिल्ली CM केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने की थी। इस घटना को लेकर स्वाति मालीवाल ने FIR भी दर्ज करवाई थी।उन्होंने FIR में बताया था कि विभव कुमार ने उन्हें गालियाँ दी थी।

विभव ने उनसे कहा, “तू कैसे हमारी बात नहीं मानेगी? कैसे नहीं मानेगी? साली तेरी औकात क्या है कि हमको ना करदे। समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझको हम सबक सिखाएँगे।” उन्हें जमीन पर घसीटा गया था और उनकी शर्ट भी खोली गई थी। इसके अलावा उन्हें लातों से मारा गया। इसके बाद उन्हें CM आवास से बाहर कर दिया गया था। उनकी मेडिकल रिपोर्ट में चेहरे के अंदर चोट लगने की बात की पुष्टि हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR के आधार पर विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। अब दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।