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असम में 5 मुस्लिम छात्रों ने की हिंदू छात्रों को बीफ खिलाने की कोशिश, स्कूल ने नहीं लिया एक्शन तो पीड़ितों ने कराई FIR: 1 की माँ को पुलिस ने किया गिरफ्तार

                                                                                                                साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश
असम के गोलपारा जिले के एक स्कूल में बीफ खाने से जुड़ी घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। हब्रागघाट हायर सेकेंडरी स्कूल क्रिश्नई में कक्षा 9 के कुछ छात्रों से जुड़ी इस घटना को लेकर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि पाँच मुस्लिम छात्रों ने स्कूल परिसर में बीफ लाकर खाया और दो साथ पढ़ने वाले हिंदू छात्रों को खिलाने की कोशिश भी की।

स्कूल परिसर में हुई घटना

मामला गोलपाड़ा जिले के अंतर्गत कृष्णाई स्थित हाबराघाट हायर सेकेंडरी स्कूल का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (5 जून 2026) को कक्षा 9 के पाँच छात्रों ने लंच ब्रेक के दौरान बीफ खाया।

इसी दौरान उन्होंने अपने साथ पड़ने वाले दो हिंदू छात्रों को वही माँस खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। घटना के बाद पीड़ित छात्रों ने स्कूल के एक शिक्षक को इसकी जानकारी दी।

शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस जाँच

बताया गया है कि शुरुआत में स्कूल प्रशासन ने मामले को शांत करने की कोशिश की और छात्रों को चुप रहने की सलाह दी। बाद में परिजनों को जानकारी मिलने पर वे स्कूल पहुँचे और कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद मामले में कृष्णई पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने छात्रों और उनके अभिभावकों से पूछताछ की, जबकि एक छात्र की माँ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदीप तिमुंग और नवनीत महंता ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और जाँच जारी रखने की बात कही है।

भारत में घुसे बांग्लादेशी मियाँ-बीवी (रमजान-सादिना) ने 14 साल में खड़ा कर लिया करोड़ों का साम्राज्य: कभी सड़क किनारे बेचते थे नारियल-ताड़

        सड़क पर नारियल बेचने वाले बांग्लादेशी रमजान-सादिना निकले करोड़ों के मालिक(फोटो साभार : ChatGPT)
अक्सर फल-सब्ज़ी और खोमचे वाले को लोग गरीब कहते हैं, जबकि वह किसी वेतनभोगी से ज्यादा खुशहाल होते हैं। वेतनभोगी एक छोटा-सा मकान लेने से पहले हज़ार बार सोंचता है लेकिन ये खड़े-खड़े शानदार मकान का सौदा करने की हिम्मत रखते हैं। दिल्ली गोलचा सिनेमा के पीछे तिराहे बहराम खां पर रेहड़ी पर फल बेचने वाले मकान मालिक बने बैठे हैं। 
दो बार एक जूस बेचने वाले और एक गोलगप्पे बेचने वाले के बच्चों की शादी में जाने का मौका मिला। कोई वेतनभोगी उस तरह की शादी नहीं कर सकता जिस तरह की शानदार शादी इन लोगों ने की। 
इतना ही नहीं, जामा मस्जिद पर कल्लन स्वीट्स के थोड़ा-सा आगे शाम के समय एक माँ-बेटी भीख मांगती थी। कई दिन से नहीं दिखने पर जानकर दुकानदारों से पूछने पर मालूम हुआ की लड़की का निकाह हो गया। उन्होंने जो खुलासा किया वाकई चौकाने वाला था। महावीर वाटिका में निकाह हुआ, दहेज़ में कार, चिकन और मटन(कोई दूसरा मीट नहीं)  की दावत। दहेज़ में कार सुनकर हैरानी तो हुई लेकिन उन्होंने बताया कि इसकी दो कारें पहले ही किराये पर चल रही है। 
भीखना मांगना अपने आपमें एक बहुत बड़ा व्यापार है। शायद ध्यान हो, कुछ महीने पहले शायद मुंबई से एक भिखारी को गिरफ्तार करने पर मालूम हुआ कि वह करोड़ों का मालिक है और सैकड़ों भिखारी उसके अंतर्गत भीख मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहुत उस करोड़पति व्यापारी की फोटो भी खूब वायरल हुई थी। देखिए वीडियो 

              
पश्चिम बंगाल के हावड़ा से पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिया दंपती रमजान गाजी और उसकी बीवी सादिना बेगम को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

कभी सड़क किनारे कच्चा नारियल (डाब) और ताड़ के फल बेचने वाला यह दंपती महज कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा। अब पुलिस और जाँच एजेंसियाँ इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या इस खेल के पीछे सत्ताधारी पार्टी TMC के स्थानीय नेताओं का हाथ है।

दलालों के सहारे आए, प्रमोटर बनकर छाए

यह दंपती करीब 14 साल पहले दलालों की मदद से बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत घुसा था। शुरुआत में दोनों ने पेट पालने के लिए फल बेचे। इसके बाद रमजान गाजी ने चालाकी से स्थानीय प्रमोटरों से साँठगाँठ कर ली। वह पुराने मकान तोड़ने और जमीन की खरीद-बिक्री के धँधे में उतर गया।

कारोबार चमकते ही रमजान ने मलबा ढोने के लिए अपना ट्रक खरीद लिया और जमीनों की डीलिंग करने लगा। इसी अवैध कमाई से उसने कई जमीनें खरीदीं और अपना एक आलीशान दोमंजिला पक्का मकान भी बना लिया। पुलिस अब इनके पूरे सिंडिकेट और पॉलिटिकल नेटवर्क को खंगाल रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट : PAK से समर्थन और बीमारी के बहाने बचने की कोशिश करने वाली नेहा सिंह राठौर की जमानत याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की खारिज

नेहा सिंह राठौर और इलाहाबाद हाईकोर्ट (फोटो साभार: इंडिया टीवी)
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोक गायिका नेहा सिंह राठौर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल, नेहा सिंह राठौर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी। इसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए नेहा हाई कोर्ट पहुँची थीं।

नेहा सिंह राठौर पर क्या हैं आरोप?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 पन्नों के आदेश में नेहा पर लगाए आरोपों की जानकारी दी गई है। आदेश के मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदू पर्यटकों को गोली मार दी थी जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई। भारत सरकार भी इस हमले का बदला लेने की तैयारी करते हुए Indus Water Treaty को रोकने समेत पाकिस्तान पर कई कड़े कदम उठाए।

आदेश में कहा गया है, “इसी माहौल में लोकगायिका और स्वयं को कवयित्री बताने वाली नेहा सिंह राठौर अपने X अकाउंट (Neha Singh Rathore @nehafolksinger) से लगातार ऐसे आपत्तिजनक पोस्ट कर रही थीं जो राष्ट्रीय एकता के खिलाफ थे और जो लोगों को धर्म और जाति के आधार पर एक-दूसरे के खिलाफ अपराध करने के लिए भड़का सकते हैं। सोशल मीडिया पर उनके द्वारा कई वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं।”

साथ ही, पाकिस्तान में नेहा सिंह राठौर के वायरल बयानों का भी जिक्र किया गया है। आदेश में लिखा है, “नेहा राठौर के सभी भारत विरोधी बयान पाकिस्तान में लगातार वायरल हो रहे हैं और वहाँ उनकी तारीफ की जा रही है। पाकिस्तान की मीडिया इन देश-विरोधी बयानों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रही है और भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नेहा सिंह राठौर के भारत विरोधी बयानों से भारत के कवि समुदाय की प्रतिष्ठा ही नहीं बल्कि पूरे देश का सम्मान भी आहत हो रहा है।”

नेहा सिंह राठौर के वकील ने दीं क्या दलीलें?

नेहा सिंह राठौर के वकील ने अपने पक्ष में दलीलें देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। वकील ने 2001 के आनंद चिंतामणि दिघे और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया है, “भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी को मौजूदा नजरिए से पढ़ा जाना चाहिए और सरकार के काम के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब यह नहीं है कि एप्लीकेंट (नेहा) ने देश के खिलाफ कोई अपराध किया है।”

साथ ही, वकील ने 2025 के इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य और अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी हवाला दिया है। इसमें कहा गया है, “विचारों और नजरियों को व्यक्त करने की आजादी के बिना, भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सम्मानजनक जीवन जीना नामुमकिन है।” वकील ने कहा, “एप्लीकेंट द्वारा इस्तेमाल किया गया ट्विटर हैंडल अभिव्यक्ति की आज़ादी की गारंटी देता है और उसने जो कुछ भी कहा है, वह सरकार के खिलाफ उसकी असहमति वाली आवाज़ है और इसे देशद्रोह के आरोप के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।”

सरकार के वकील ने क्या कहा?

वहीं, सरकार के वकील ने नेहा सिंह राठौर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही दायर की गई इसी केस से जुड़ी FIR रद्द करने की पुरानी याचिका का हवाला दिया। वकील ने बताया कि कोर्ट ने लोक गायिका की पुरानी याचिका खारिज कर उन्हें मामले में सहयोग देने को कहा गया था। हालाँकि, इसके खिलाफ नेहा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और वहाँ भी उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। वकील ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया।

वकील ने नेहा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें FIR में लगे आरोपों से जुड़े मुद्दों को आरोप तय किए जाते समय उठाने की आजादी दी थी। अगर चार्जशीट दाखिल हो चुकी है तो उचित समय पर अदालत में डिस्चार्ज की माँग कर सकती थीं। इसलिए हाई कोर्ट को अभी इस मामले पर विचार नहीं करना चाहिए।

सरकारी वकील ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद आवेदक को जाँच अधिकारी के सामने पेश होना चाहिए था लेकिन वह पुलिस जाँच से बच रही हैं। इसलिए, उन्हें किसी भी तरह की राहत नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही, इस आदेश में नेहा का कुछ ट्वीट्स को भी जिक्र किया गया है।

नेहा सिंह राठौर के ट्वीट्स (फोटो साभार: इलाहाबाद हाईकोर्ट)

बीमारी का बहाना कर जाँच से बच रहीं नेहा

कोर्ट के आदेश में हजरतगंज के थाना प्रभारी द्वारा 27 नवंबर 2025 को भेजे गए लिखित निर्देशों का भी जिक्र किया गया है। इसमें लिखा है, “नेहा सिंह राठौर की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। नेहा को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे लेकिन वह बीमारी का बहाना बनाते हुए उपस्थित नहीं हुई। उनके ठिकानों पर दबिश दी गई है लेकिन उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है। नेहा सिंह राठौर बार-बार अपना निवास बदल रही है।”

पाकिस्तान में नेहा का समर्थन

सरकारी वकील ने आगे कहा कि आवेदक का ट्विटर अकाउंट दुनिया भर में खासकर पाकिस्तान में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है और जाँच के दौरान पाकिस्तान से भी बहुत सारे पोस्ट मिले हैं जो आवेदक के ट्वीट्स का समर्थन कर रहे हैं। वकील के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले के बाद उस समय देश की सुरक्षा और अखंडता खतरे में थी और सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव कदम उठाए थे लेकिन नेहा ने संवेदनशील स्थिति में ही ट्वीट करने शुरू कर दिए थे। ऐसे ट्वीट लोगों की भावनाओं को भड़का सकते थे।

सरकारी वकील ने यह भी दावा किया कि ऐसा लगता है कि नेहा की भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं जैसे प्रधानमंत्री के प्रति मंशा सही नहीं थी। वकील ने कहा, “उन्होंने (नेहा) हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच नफरत पैदा करने की भी कोशिश की ताकि देश का बुनियादी सामाजिक ताना-बाना बिगड़ सके।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि FIR को दर्ज हुए 7 महीने से अधिक का समय बीत गया है लेकिन नेहा अभी भी जाँच में सहयोग नहीं कर रही हैं। कोर्ट ने कहा, “जहाँ तक अग्रिम जमानत का सवाल है, संविधान के अनुच्छेद 19 से नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार मिलता है लेकिन यह अधिकार लोक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के लिए लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन होता है।”

जस्टिस सिंह ने कहा कि आवेदक ने कुछ ट्वीट उस संवेदनशील समय पर किए थे जब पहलगाम का दुर्भाग्यपूर्ण हमला हुआ था। कोर्ट ने कहा, “केस डायरी और FIR दोनों से यह पता चलता है कि आवेदक द्वारा किए गए ट्वीट भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ थे। प्रधानमंत्री का नाम अनादरपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया गया था।”

जस्टिस ब्रज लाल ने कहा कि 27 नवंबर के निर्देश और रिकॉर्ड देखने के बाद पता चलता है कि आवेदक (नेहा) जाँच में सहयोग नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, “नेहा की FIR के खिलाफ दर्ज की गई रिट याचिका को इसी कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया था कि वहा जाँच में सहयोग करेंगी और जाँच अधिकारी के सामने पेश होंगी।” साथ ही, उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी SLP पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने आवेदक द्वारा दायर की गई स्पेशल लीव पिटिशन में यह कहा कि उस समय याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद भी बगावत (mutiny) और अन्य धाराओं के तहत लगे आरोपों को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता था। इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि जिस FIR को आवेदक ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी, उसमें उसकी दलीलों में दम नहीं है।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि वह कानून के दायरे में कोई भी दूसरा उपाय अपना सकती हैं।

क्यों SIR का विरोध कर रहीं हैं मुख्यमंत्री ममता? पश्चिम बंगाल में जोड़े जा रहे थे फर्जी वोटर, चुनाव आयोग ने सैंपल चेकिंग में पकड़ी गड़बड़ी: जाँच के आदेश; SIR से ज्यादा फायदा वामपंथियों को होगा

                                                                                                                         साभार: द स्टेट्समैन
बिहार में SIR लागू कर चुनाव आयोग ने उस Pandora Box को खोल विपक्ष में खलबली मचना लाजमी है। जिन बोगस वोटरों के आधार पर जो पार्टियों ने अपनी दादागिरी दिखाई जा रही थी, वो सब मिट्टी में मिलते देख बिलबिला रहे हैं। बिहार में बोगस और घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में मिलने ने ममता बनर्जी की भी नींद हराम कर दी है। 

बंगाल में SIR होने से जितना फायदा वामपंथियों और बीजेपी को होगा उससे ज्यादा नुकसान ममता की तृणमूल और कांग्रेस को होने वाला है। इसीलिए ममता बंगाल में SIR नहीं करने की धमकी देनी दे रही है। चर्चा यह है कि बिहार से कहीं ज्यादा बड़ी संख्या में बोगस और घुसपैठियों के नाम बाहर होंगे। इस मुद्दे पर वामपंथियों को चुनाव आयोग का साथ देना चाहिए, क्योकि बंगाल में SIR होने से चुनाव में बीजेपी से कहीं ज्यादा वामपंथियों को होने वाला है। वामपंथियों को कांग्रेस के चुंगल में फंसने की बजाए अपनी पार्टी के हित और फिर से सत्ता की दौड़ से पीछे नहीं हटना चाहिए।      

पश्चिम बंगाल में वोटरलिस्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा चुनाव आयोग ने पकड़ा है। यहाँ चुनाव आयोग ने पाया है कि बड़ी मात्रा में फर्जी वोटर फॉर्म को स्थानीय अधिकारी जमा कर रहे थे। यह काम बंगाल के कुछ जिलों में हो रहा था। दो अधिकारियों ने यह माना भी है कि उन्होंने बड़ी संख्या में फर्जी फॉर्म भी जमा किए।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 28 जुलाई, 2025 को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में लिखा, “निरंतर अपडेशन के दौरान ERO द्वारा 1% से कम फॉर्म 6 निपटान की सैंपल जाँच में सामने आया है कि कि दो लोगों ने फर्जी मतदाताओं के लिए काफी संख्या में फॉर्म 6 स्वीकार किए थे।”

चुनाव आयोग ने बताया कि इन दो ERO अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने से निचले अधिकारियों को चुनाव आयोग पोर्टल का एक्सेस दिया था। यहाँ ERO.net पोर्टल पर ‘डाटा एंट्री ऑपरेटरों’ ने फॉर्म 6 के आवेदन निपटा दिए।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा है,”ममता बनर्जी द्वारा बूथ लेवल अधिकारियों को खुलेआम धमकी देने और उन्हें भारत के चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन न करने के लिए कहने के कुछ ही दिनों बाद, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने नियमित मतदाता सूची जाँच और नमूना सर्वेक्षणों के दौरान गंभीर अनियमितताओं को चिन्हित किया है।”

और भी गंभीर बात यह है कि इन मामलों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से फॉर्म की सत्यापन प्रक्रिया को बिना किसी जरूरी कारण के हटा दिया गया। एक जैसे दस्तावेज कई फॉर्मों में इस्तेमाल किए गए और उनकी जाँच रिपोर्ट भी एक जैसी दिखाई दी।

इस गंभीर गड़बड़ी को देखते हुए CEO ने तत्काल जाँच के आदेश दिए हैं। सभी DEOs को निर्देश दिया गया है कि वे वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम बनाकर पिछले एक साल में निपटाए गए सभी फॉर्म 6 की सैंपल जाँच करें। यह रिपोर्ट 14 अगस्त 2025 तक अनिवार्य रूप से CEO को भेजनी होगी।

CEO ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट जाँच पर हो रही बात

राज्य चुनाव आयोग की वेबसाइट पर स्पेशल इन्टेंशिव रीवीजन (SIR) 2002 के डेटा के प्रकाशन के साथ ही राज्य में मतदाता सूची की समीक्षा की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट कर सकता है।

बिहार में चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया करवाई है। यहाँ अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजद, कॉन्ग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह मतदाता सूची के बहाने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को गुपचुप तरीके से लागू करने की कोशिश है।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि यह मतदाता सूची को अपडेट करने की नियमित प्रक्रिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को यह करने का पूरा अधिकार है।

बिहार में SIR के बाद करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इससे पहले 21 जुलाई 2025 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपने राज्य में SIR प्रक्रिया नहीं होने देंगी।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में फर्जी मतदाताओं को लेकर जताई चिंता

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बांग्लादेश से सटी पश्चिम बंगाल की सीमावर्ती जिलों में मतदाता आवेदन की संख्या में अचानक तेजी आई है। उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी राज्य प्रशासन द्वारा जिला अधिकारियों को डोमिसाइल (स्थायी निवास) प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश देने के बाद देखने को मिली है।

सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर माँग की है कि अगर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में कोई विशेष पुनरीक्षण (SIR) किया जाता है, तो 25 जुलाई 2025 या उसके बाद जारी किए गए डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को मान्य नहीं माना जाए।

बीजेपी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में फर्जी और डुप्लिकेट वोटरों का मुद्दा उठाती रही है। फरवरी 2024 में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी के छह सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मिला और 16 लाख फर्जी या दोहरे वोटरों की शिकायत की। उन्होंने चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई की माँग की।

इसके अलावा, दिसंबर 2023 में झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों का मुद्दा उठाया था और केंद्र सरकार से जल्द से जल्द राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने की माँग की थी।

पीलीभीत में ढेर हुए थे जिस खालिस्तानी संगठन के आतंकी, उसने ही ली महाकुंभ में आग की जिम्मेदारी: ATS-NIA की रडार पर 1000 संदिग्ध, NSUI नेता शाहिद से पूछताछ

                                  इस अग्निकांड में जान का नुकसान नहीं हुआ था (फोटो साभार: Jansatta)
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में हाल ही में लगी आग की जिम्मेदारी खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स (KZF) ने ली है। इस संगठन के ही तीन आतंकी हाल में पीलीभीत में पुलिस ने मार गिराए थे। KZF ने अग्निकांड को एनकाउंटर का बदला करार दिया है। इस अग्निकांड की जाँच अब NIA और यूपी ATS कर रही हैं। कई संदिग्धों को इस मामले में पकड़ा भी गया है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 19 जनवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के कुछ टेंटों में लगी आग में खालिस्तानी एंगल सामने आया है। लंदन और ग्रीस से चलने वाले KZF आतंकी समूह ने इस आग का कारण ब्लास्ट बताया था और दावा किया था कि उसने ही यह काम किया है।

KZF ने दावा किया है कि वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे और केवल यह दिखाना चाहते थे कि क्या करने की क्षमता रखते हैं। यह पूरी बात उन्होंने मीडिया संस्थानों को भेजे गए एक ईमेल में लिखी है। उन्होंने इसे एक शुरुआत बताया है और पीलीभीत एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। पुलिस अभी इस खालिस्तानी एंगल को नकार रही है।

हालाँकि, NIA और ATS ने आग लगने के दौरान आसपास मौजूद 1000 लोगों पर जाँच चालू की है। यह भी बताया गया है कि इन 1000 में से लगभग 900 हिन्दू नहीं हैं। ऐसे में शक और भी गहरा हो गया है। इनसे पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं।

दावा है कि ATS वाराणसी से 10 लोगों को हिरासत में ले चुकी है। इनसे पूछताछ चल रही है। संदिग्धों से पूछताछ के लिए सवालों की एक लिस्ट तैयार की गई है। इसमें उनकी महाकुंभ में आस्था से लेकर घटनास्थल के वीडियो फोटो से जुड़े सवाल तक हैं।

वाराणसी में NSUI नेता शाहिद से भी पूछताछ हुई है। उन्हीं लोगों से मुख्य तौर पर पूछताछ हो रही है जिन्होंने घटना के दिन महाकुंभ को सोशल मीडिया पर दिखाया था और लोकेशन भी साझा की थी। इनमें से शक उन पर अधिक है जिन्होंने बाद में फोटो वीडियो डिलीट किए।

मामले में दूसरे प्रदेशों की पुलिस को भी अलर्ट भेज दिया गया है। जिनसे पूछताछ हुई है, उन्हें शहर ना छोड़ने को कहा गया है। धमकी में फ़तेह सिंह बागी का नाम भी लिखा है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह वही बागी है जिसका हाल ही में गुरदासपुर हमले में नाम आया था। वह ब्रिटिश आर्मी का एक सैनिक रहा है और आतंकियों का हैंडलर है।

महाकुंभ शुरू होने से पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी हमला करने की बात कही थी। उसने भी पीलीभीत एनकाउंटर को फेक बताया था और बदला लेने की बात कही थी। इसको लेकर उसने वीडियो जारी किए थे।

पन्नू ने मंगलवार (24 दिसम्बर, 2024) को एक वीडियो जारी किया। 3 मिनट के इस वीडियो में उसने कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी था और मारे गए तीनों आतंकी असल में शहीद हैं। उसने परिवार को मदद देने का भी ऐलान किया है। उसने कहा है कि SFJ उन तीनों परिवारों को ₹5 लाख देगा।

उसने साथ ही में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर भी अपशब्द कहे। पन्नू ने कहा है पीलीभीत में ही 1991 में एक फर्जी एनकाउंटर हुआ था जिसमें 11 सिखों को मार दिया गया था। उसने कहा है कि हालिया एनकाउंटर का बदला वह प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में लेगा।

पन्नू ने कहा है कि 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में हमला किया जाएगा। उसने हिंदुत्व को आतंकवाद करार दिया है। उसने पंजाब की आजादी और खालिस्तान को लेकर भी अपना प्रलाप दोहराया है। पन्नू की धमकी को पीलीभीत पुलिस ने संज्ञान में लिया है।

पीलीभीत पुलिस ने साइबर थाने में इस संबंध में एक FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बताया है कि वह इस वीडियो को लेकर जाँच कर रहे हैं। कई जगह दावा किया गया है कि पीलीभीत पुलिस को भी इस घटना के बाद धमकियाँ दी गई हैं।

अवलोकन करें:-

महाकुंभ में लेंगे पीलीभीत एनकाउंटर का बदला: खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने वीडियो जारी कर दी धमकी, PM

पन्नू की धमकी पर अखाड़ा परिषद का जवाब; समय रहते सभी सिख संगठनों और सनातन विरोधियों को भी अपनी स्

19 जनवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में आग लगी थी। यह आग सेक्टर 19 में लगी थी। इसमें कई टेंट जल गए थे। आग पर कुछ ही मिनटों के भीतर काबू पा लिया गया था। इसका कारण एक खाना बनाने वाले सिलेंडर का फटना बताया गया था। आग में किसी की जान नहीं गई थी।

उत्तर प्रदेश : नासर पठान वाली आईडी से महाकुंभ में 1000 हिंदुओं के सर कलम की धमकी: इंस्टाग्राम पर मैसेज में कहा- मा@र9द… ब्लास्ट होगा; जेहादियों साधुओं के संयम की अग्नि-परीक्षा मत लो

                                                        महाकुंभ में साधु संत चालू हो चुके हैं 
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ में हिन्दुओं के सर कलम करने और बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई है। यह धमकी नासर पठान नाम की एक इंस्टाग्राम आईडी से दी गई है। आईडी चलाने वाला शख्स खुद को कट्टर मिया और बिहार निवासी बता रहा है। सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चल रहा है।

समय रहते जितने भी मुस्लिम कट्टरपंथी, मुस्लिम संगठन, छद्दम धर्म-निरपेक्ष, संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले इन जेहादियों पर लगाम लगाएं, अन्यथा धमकी सही साबित होने पर इसके दुष्परिणामों पर कोई संविधान या गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाई देने न आए। इस महाकुम्भ में अन्य साधुओं के अलावा नागा साधु भी होंगे और नागा साधुओं द्वारा अपना संयम खोने पर उन्हें संभालना बहुत मुश्किल काम होगा। कालचक्र कहाँ घूम जाए कुछ पता नहीं।      

ये जेहादी शायद साधु समाज के श्राप से अनजान हैं। जो 7 नवंबर 1966 को महात्मा कृपालुजी महाराज का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को गो-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों के खून से पार्लियामेंट स्ट्रीट लाल हो रही थी, के समय दिया था। उनका श्राप व्यर्थ नहीं गया सार्धक सिद्ध हुआ। समय लगा लेकिन शत-प्रतिशत सार्धक सिद्ध हुआ।    

एक्स पर वायरल एक पोस्ट के अनुसार, नासर पठान नाम से चल रही इस आईडी से एक और व्यक्ति को एक मैसेज भेजा गया। यह मैसेज इंस्टाग्राम पर भेजा गया। इसमें लिखा गया, “रे मा@र9@ हिन्दू तुम सब का सर कलम करूँगा इंशाअल्लाह। तुम लोग का कुंभ मेला आ रहा है ना उसमें देखो कम से कम 1000 सर कलम होगा। ऐसा ब्लास्ट होगा, अल्लाह हू अकबर।”

यह आईडी नासर पठान के नाम से बनी है जबकि इसका यूजर नेम नासर कट्टर मिया (Nasar_kattar_miya) है। आईडी चलाने वाले शख्स से जब उसका पता पूछा गया तो उसने धमकाते हुए खुद को पूर्णिया के भवानीपुर गाँव का निवासी बताया। उसने यह भी कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

इसके बाद इस आईडी के स्क्रीनशॉटस को एक्स (पहले ट्विटर) पर शेयर किया गया। इन स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए प्रयागराज पुलिस से कार्रवाई की माँग की गई है। इसके अलावा बिहार पुलिस से भी इस व्यक्ति पर कार्रवाई के लिए लगातार माँग की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में इस मामले का पुलिस ने संज्ञान लेकर आईडी चलाने वाले की जानकारी जुटाना चालू कर दिया है। पुलिस आईडी किस नम्बर और इमेल से बनाई गई, इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस इसके बाद कार्रवाई करेगी।

महाकुंभ को लेकर इससे पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी धमकी दी थी। पन्नू ने दावा किया था कि वह इस महाकुंभ में 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को हमला करेगा। पन्नू ने दावा किया था कि यह हमला पीलीभीत में मारे गए खालिस्तानी आतंकियों की मौत का बदला होगा।

महाकुंभ में आए साधु संतो को इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ की सुरक्षा के लिए 35,000 से भी अधिक पुलिस और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया है। महाकुंभ क्षेत्र के भीतर 56 चौकियाँ बनाई गई हैं। पूरा क्षेत्र कैमरे से लैस है।

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट से मिली नोटों की गड्डी, खड़गे ने सदन में डाला सिंघवी का नाम छिपाने का दबाव


राज्यसभा में शुक्रवार (06 दिसंबर 2024) को उस वक्त जोरदार हंगामा हुआ जब सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को बताया कि कांग्रेस सांसद की सीट से नोटों की गड्डी मिली है। सभापति ने जानकारी दी कि गुरुवार (05 दिसंबर 2024) को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने सीट नंबर 222 से कैश बरामद किया। यह सीट तेलंगाना से कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है।

इस खुलासे के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक जाँच पूरी न हो जाए, किसी का नाम सार्वजनिक करना गलत है। उन्होंने इसे एक “चिल्लर हरकत” बताते हुए देश को बदनाम करने की साजिश करार दिया।

दूसरी ओर, अभिषेक मनु सिंघवी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, “मैंने इस बारे में पहली बार सुना है। मैं तो राज्यसभा में सिर्फ 500 रुपये का नोट लेकर जाता हूँ। घटना के वक्त मैं सदन में नहीं था।”

सभापति ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जाँच जारी रहने की बात कही है।

मदरसों के बाद अब मकतब की बारी, UP ATS खँगाल रही रिकॉर्ड-फंडिंग की जुटा रही जानकारी

        मदरसों के बाद अब ATS के रडार पर UP के सैकड़ों मकतब (चित्र साभार- alwahabfoundation.org)
उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।

इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।

शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।

सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

                                                                      शासनादेश

क्या होता है मकतब

ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।
अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।

दिल्ली : CRPF स्कूल के पास जोरदार ब्लास्ट, घरों-कारों के शीशे टूटे: जाँच में जुटी फोरेंसिक टीमें

                                                                                                                                 साभार 
दिल्ली के रोहिणी स्थित प्रशांत विहार इलाके में रविवार (20 अक्टूबर 2024) की सुबह जोरदार धमाका हुआ। यह धमाका सुबह करीन 7:45 बजे CRPF स्कूल के पास हुआ है। धमाके के साथ ही आसमान में धुएँ भी दिखाई दिए। दिवाली से पहले इस तरह की घटना के बाद इलाके के लोगों में दहशत फैल गई। जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची और जगह का मुआयना किया।

धमाके का कारण अभी तक पता नहीं चला है। घटनास्थल पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है। इसके साथ ही बम निरोधक दस्ता, फायर ब्रिगेड और डॉग स्क्वॉयड की टीम भी वहाँ पहुँची है। DCP अमित गोयल ने बताया कि धमाका किसमें हुआ है और कैसे हुआ है? इसका पता लगाने के लिए एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

उन्होंने कहा कि घटनास्थल की प्राथमिक जाँच से पता चला है कि स्कूल की जिस दीवार के पास धमाका हुआ है वहाँ आसपास मिठाई की दुकान है। सिलिंडर फटने की भी आशंका जताई जा रही है। घटनास्थल से तेज दुर्गंध आ रही थी। धमाके से स्कूल से सटी दुकान, आसपास खड़ी कारों और घरों के शीशे टूट गए। लोगों का कहना है कि धमाका बहुत जोरदार था।

कर्नाटक : इस्लाम के नाम पर मुस्लिम महिला का ही सामूहिक बलात्कार करने का कोई अफ़सोस नहीं

प्रतीकात्मक 
कर्नाटक के होटल से हिंदू साथी के साथ ठहरी एक मुस्लिम महिला को उठाकर ले जाने वाले मुस्लिम लड़कों को उसका सामूहिक बलात्कार करने का कोई अफ़सोस नहीं है। आरोपितों ने पुलिस को बताया है कि यह बलात्कार उन्होंने अपने मजहब के लिए किया था, क्योंकि पीड़िता इस्लाम के रास्ते से भटक रही थी। पुलिस जाँच में और भी कई तथ्य सामने आए हैं।

पुलिस ने बताया, “पूछताछ के दौरान जिन सात आरोपितों ने पीड़िता से बलात्कार किया था, उन्होंने कोई अफ़सोस जाहिर नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने मजहब के लिए किया है। उन्होंने बताया कि महिला को पहले भी मुस्लिम छोड़कर अन्य धर्म के लोगों से मिलने-जुलने पर चेतावनी दी गई थी, लेकिन वह नहीं मानी। इसलिए उसका बलात्कार करके उसे सजा दी।”

घटना 7 जनवरी 2024 की है। कुछ मुस्लिम युवकों ने हावेरी के हनागल के एक होटल में हिन्दू व्यक्ति के साथ रुकी मुस्लिम महिला का यहाँ से अपहरण करके जंगल में लेकर गए थे और वहाँ अलग-अलग जगहों पर उससे सामूहिक बलात्कार किया था। उन्होंने हिन्दू पुरुष से भी मारपीट की थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में महिला ने मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में अब तक 18 मुस्लिमों युवकों को गिरफ्तार किया गया है।

बन गए हैं मुस्लिम गैंग

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि हावेरी में मुस्लिम युवकों ने दूसरे धर्म के लोगों के साथ सम्बन्ध रखने वाली मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने के लिए कई ग्रुप बना लिए हैं। ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हैं और कोडवर्ड में बात करते हैं। ये ग्रुप आसपास के होटल, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सक्रिय रहते हैं। ईगल, X, Y और Z आदि नाम के ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं।

यह जब भी कोई अलग-अलग धर्मों के महिला पुरुष को साथ में देखते हैं तो उनको निशाना बनाते हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों के फ़ोन को जब्त करके फोरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं। उनसे डाटा रिकवर किया जा रहा है। एक आरोपित ने इस मामले में जमानत याचिका भी दायर की है। हालाँकि, पुलिस का कहना है वह पूरी कोशिश करेगी कि किसी भी आरोपित को जमानत ना मिले।

मामला कर्नाटक के हावेरी जिले का है और 7 जनवरी 2024 की है। उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले एक हिन्दू युवक और एक मुस्लिम महिला होटल के एक कमरे में ठहरे थे। इसकी जानकारी मिलने पर अक्कीलुर के कुछ मुस्लिम युवक होटल पहुँच गए। वहाँ वीडियो बनाते हुए कमरे का नम्बर रिकॉर्ड किया। इसके बाद ये लोग कमरा खोलने को कहते हुए धमकियाँ दीं।

जब कपल ने होटल स्थित अपने कमरे को खोला तो आरोपितों ने कमरे में घुसकर उनके साथ मारपीट की। इनलोगों को हिंदू पुरुष की बुरी तरह पिटाई की। इसके साथ ही मुस्लिम महिला के साथ भी जमकर मारपीट की। इसके बाद ये मुस्लिम युवक महिला को उठाकर अपने साथ ले गए थे और जंगल में तीन बार उसके साथ गैंगरेप किया था।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद यहाँ काफी बवाल मचा था। इस मामले में भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार से SIT जाँच की माँग की थी। पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में जाँच आगे बढ़ने पर पूरे गैंग का खुलासा हुआ और अब गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़कर 18 हो चुकी है।

पश्चिमी बंगाल : कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाया 50 लाख रूपए का जुर्माना, जज बोले- करोड़ों के घोटाले केस 3 दिन में CBI-ED को सौंपो

             कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार पर जुर्माना लगाते हुए कड़ी डांट लगाई है (चित्र साभार: द लीफलेट)
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई को सौंपने का आदेश नहीं मानने पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में हुए घोटाले से जुड़ा हुआ है। इसकी जाँच फिलहाल CID कर रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाने के साथ ही ममता सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है।

न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, वर्ष 2020 में बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में 50 करोड़ रुपए से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी के कारण सहकारी समिति बंद हो गई थी और इसमें पैसा जमा करने वालों को भी उनकी धनराशि वापस नहीं मिल पाई थी।

इस सम्बन्ध में मामला दर्ज करके जाँच राज्य की CID को सौंपी गई थी। सीआईडी इस मामले में बीते तीन वर्ष से जाँच कर रही है और अभी तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि समिति से गबन किया गया पैसा कहाँ गया। सीआईडी की धीमी कार्रवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट खफा हो गया और यह कदम उठाया है।

इससे पहले 24 अगस्त 2023 को इसी मामले में सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को आदेश दिया था कि इसकी जाँच सीआईडी से लेकर केन्द्रीय एजेंसियों ईडी और सीबीआई को सौंपे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को यह भी आदेश दिया था कि केन्द्रीय एजेंसियों को सभी ब्यौरा तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

बंगाल सरकार द्वारा इस आदेश की अवहेलना की गई और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह जुर्माना लगाया और कहा कि यदि अब आदेश का पालन नहीं होता है तो वह राज्य के गृह सचिव को कोर्ट में तलब करेंगे। कोर्ट ने डाँट लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीबों के पैसे के साथ खिलवाड़ कर रही है।

कोर्ट ने जुर्माने की रकम को दो हफ्ते में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने के लिए कहा है। इसके साथ ही इस केस से जुड़े सारे कागजात को 3 दिन के अंदर CID से लेकर केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।

जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि जाँच शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, लेकिन CID को अभी भी नहीं पता है कि पैसा कौन ले गया। उन्होंने कहा, “कोर्ट के साथ खेल रहे हैं? CID को नहीं पता है, लेकिन मुझे पता है। ये वही लोग हैं, जो कभी साइकिल चलाकर गरीबों का पैसा खाते थे, वे अब कार से चल रहे हैं।”

न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय इससे पहले भी बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार की गड़बड़ियों वाले कई मामलों में सुनवाई की थी। इसको लेकर सरकार सकते आ गई थी। इसी कारण से तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता उन पर अक्सर बयानबाजी करते रहते हैं।

हिज्ब-उत-तहरीर के आतंकी के तार असदुद्दीन ओवैसी से जुड़ा, नरोत्तम मिश्रा ने दिए जाँच के आदेश

मध्य प्रदेश एटीएस ने आतंकी इस्लामी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) के जिन 16 सदस्यों को पकड़ा है, उनमें से एक मोहम्मद सलीम एआईएमआईएम चीफ व हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के कॉलेज में पढ़ाता था। जाँच में यह बात सामने आने के बाद बीजेपी लगातार औवेसी पर हमला कर रही है। उन पर हैदराबाद में आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया जा रहा है। इस क्रम में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

उन्होंने सोमवार (15 मई, 2023) को कहा, “इन जिहादी कॉकरोचों के लिए हमारे मध्य प्रदेश की एटीएस पुलिस पेस्टिसाइड्स की तरह है। पुलिस लगातार ऐसे संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। ब्रेनवॉश करने वाले सभी पढ़े लिखे लोग हैं। इनमें से एक हैदराबाद का प्रोफेसर है। एक इंजीनियर है। ये सभी लोग जो कार्य कर रहे हैं, वह निंदनीय है। मैं उन लोगों के बारे में कहना चाहता हूँ, जो केरल स्टोरी पर बोले, लेकिन HUT पर एक शब्द भी नहीं कहा। हमने पीएफआई को पकड़ा, सिमी का नेटवर्क ध्वस्त किया, लेकिन ये लोग एक शब्द भी नहीं बोले। ये तुष्टिकरण की राजनीति इन लोगों को बढ़ावा देती है। पहले लड़कों का धर्म परिवर्तन फिर उनके द्वारा लड़कियों का धर्मांतरण, ऐसे लोगों का कनेक्शन किससे जुड़ा है।”

उन्होंने इशारों-इशारों में इसका जिम्मेदार औवेसी को भी ठहराया। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “इनमें से एक प्रोफेसर औवेसी के हैदराबाद वाले कॉलेज में ही पढ़ाता था। ये गंभीर विषय है। सार्वजनिक जीवन में जीने वाले लोग भी अगर इस तरह के काम को हतोत्साहित नहीं करेंगे तो दिक्कत होगी। इनको कहाँ से फंडिंग होती थी। इनके किस-किस से कनेक्शन हैं, इसके जाँच के आदेश दिए गए हैं। ये मामला ‘लव जिहाद’ से भी ऊपर जा रहा है इसलिए हमने कड़ी जाँच के आदेश दिए हैं।”

इससे पहले तेलंगाना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने औवेसी को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वह हैदराबाद में आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा था कि हैदराबाद हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) जैसे आतंकवादी संगठनों के लिए एक सुरक्षित जगह बन गया है। संजय ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से माँग की थी कि वह इस मामले की जाँच करवाएँ। भाजपा नेता ने साथ ही यह भी आरोप लगाया था कि बीआरएस और कॉन्ग्रेस दोनों को हैदराबाद के लोगों की सुरक्षा की चिंता नहीं है। वे केवल अल्पसंख्यकों के वोट से सत्ता में आना चाहते हैं।

सलीम पहले सौरभ हुआ करता था। उसका पूरा नाम सौरभ राजवैद्य था। वह भोपाल के बैरसिया के पास का रहने वाला है। साल 2010 में उसने पहले खुद इस्लाम कबूला और 2012 में अपनी हिंदू बीवी को इस्लाम कबूल करवाया। इसके बाद दोनों हैदराबाद शिफ्ट हो गए। चूँकि सलीम मध्य प्रदेश से था, इसलिए उसे पूरे एमपी में हिज्ब-उत-तहरीर संगठन का एजेंडा फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई और ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा गया।

हैरानी की बात यह है कि सौरभ राजवैद्य से सलीम बनने के बाद उसे हैदराबाद में डेक्कन कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के बायोटेक्निकल डिपार्टमेंट में प्रोफेसर की नौकरी मिल गई और यहाँ वह कॉलेज में पढ़ाने के नाम पर मजहबी जहर फैलाने लगा।