Showing posts with label corruption. Show all posts
Showing posts with label corruption. Show all posts

300% महँगी खरीदी गई PPE किट, कोविड में जिस केरल मॉडल का ‘लिबरल’ करते थे बखान, उसका CAG ने किया भंडाफोड़: खास कंपनी को पहुँचाया गया फायदा

  केरल में पीपीई किटों की खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार, तत्कालीन मंत्री केके शैलजा (फोटो साभार: India Today/TOI)
कोरोना महामारी के दौरान पूरे देश में केरल सरकार के ‘केरल मॉडल’ की खूब तारीफ की गई। केरल की तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की कार्यशैली को ‘लिबरल गैंग’ ने आदर्श माना। लेकिन अब नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने पिनराई विजयन सरकार के कोविड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महामारी के दौरान पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट की खरीदारी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं और एक खास कंपनी को फायदा पहुँचाया गया।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 में सरकार ने केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMSCL) को PPE किट और अन्य स्वास्थ्य उपकरण खरीदने की विशेष अनुमति दी थी। सरकार ने उस समय PPE किट की अधिकतम दर 545 रूपए प्रति किट निर्धारित की थी, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसके बावजूद केरल में PPE किट को 1,550 रूपए प्रति किट की ऊँची दर पर खरीदा गया। यह दर सरकारी सीमा से लगभग 300% अधिक थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस खरीद प्रक्रिया में सन फार्मा (San Farma) नाम की कंपनी को विशेष लाभ दिया गया। इस कंपनी को 100% भुगतान एडवांस में दिया गया, जबकि अन्य कंपनियों ने कम दर पर किट देने की पेशकश की थी। CAG ने इस प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए कहा कि इससे राज्य को 10.23 करोड़ रूपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल 2020 के बीच ऊँची कीमत पर की गई खरीदारी ने राज्य के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव डाला। जहाँ लाखों किट सस्ती दरों पर खरीदी जा सकती थीं, लेकिन महँगे दामों पर 15,000 किट की खरीदी गई। इसके अलावा राज्य में दवाइयों, मेडिकल सामानों का भारी अभाव रहा। केरल में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की कमी भी रही। सीएजी रिपोर्ट में साफ है कि सस्ते दाम पर पीपीई किट देने वाली कंपनियों को कम ऑर्डर दिया गया, जबकि महँगा पीपीई देने वाली कंपनी को एडवाँस में ज्यादा पैसों का भुगतान किया गया और ऑर्डर भी बड़ा दिया गया।

 इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार पर हमला बोला है। कॉन्ग्रेस के नेता वी.डी. सतीशन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “कोविड महामारी को लोगों की जान बचाने के बजाय सरकार ने अपनी जेबें भरने का अवसर बना लिया।” उन्होंने यह भी कहा कि यह भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की जानकारी में हुआ।

केके शैलजा ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने CAG रिपोर्ट अभी तक नहीं पढ़ी है, लेकिन उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए PPE किट की खरीदारी जरूरी थी। उन्होंने कहा कि “महामारी के दौरान PPE किट की भारी कमी थी। कुछ किट महँगे दाम पर खरीदने पड़े, लेकिन लाखों किट सस्ते दामों पर खरीदी गईं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि जब यह मामला विधानसभा में उठाया गया था, तब इसका स्पष्ट उत्तर दिया गया था। उन्होंने कहा, “सिर्फ 15,000 किट ऊँची कीमत पर खरीदी गई थीं, और यह उस समय की परिस्थितियों की वजह से हुआ। विपक्ष इस मुद्दे को बार-बार उठाकर लोगों को गुमराह कर रहा है।”

CAG रिपोर्ट ने राज्य के कोविड प्रबंधन के दौरान हुए वित्तीय दुरुपयोग को उजागर करते हुए इसे ‘गैर-जरूरी खर्च’ बताया है। रिपोर्ट ने संकेत दिया कि खरीदारी के दौरान पारदर्शिता की कमी थी और कुछ कंपनियों को गलत तरीके से लाभ दिया गया।

इस बीच, राज्य सरकार ने CAG रिपोर्ट पर विस्तार से जवाब देने की बात कही है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि “रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया जाएगा, और जरूरत पड़ी तो सरकार उचित जवाब देगी।” वहीं, विपक्ष ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है और इसे विधानसभा में फिर से उठाने का इरादा जाहिर किया है। फिरलहाल, CAG रिपोर्ट के इस खुलासे ने न केवल केरल सरकार के कोविड प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन प्रशंसाओं और पुरस्कारों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है जो महामारी के दौरान राज्य सरकार को मिले थे।

कर्नाटक : हर वादे से पीछे हट रही है कांग्रेस; पहले कहा फ्री देंगे अब हो रही बिजली कटौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की राजनीति को एक नई दिशा दे रहे हैं जिसमें लोक लुभावन, भ्रष्टाचार, लोभ-लालच, फ्री की गारंटी के लिए कोई स्थान नहीं है। पीएम मोदी के नेतृत्व में आज केंद्र सरकार की योजनाएं समूचे देश के लिए होती है। वहीं कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार ही सबकुछ है। आजादी के बाद अब तक उन्होंने यही काम किया है और यही वजह है कि गांधी परिवार के परिवार के पास बिना किसी बिजनेस के अकूत संपत्ति है। आज जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं वहां भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है। कर्नाटक में मई 2023 में कांग्रेस की सरकार बनी। रेवड़ी कल्चर यानि फ्री की पांच गारंटी के झांसे में आकर लोगों ने कांग्रेस को तो जिता दिया लेकिन अब जनता पछता रही है। कर्नाटक में कांग्रेस ने सरकार बनते ही हाथ खड़े कर दिए और कहा कि कांग्रेस की पांच गारंटी को पूरा करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये अलग रखने पड़े हैं, इसीलिए अब विकास के लिए पैसा नहीं है। कांग्रेस ने चुनाव के समय फ्री बिजली का वादा किया था लेकिन अब उसने लोगों को बिजली कटौती झेलने के लिए तैयार रहने को कहा है। कुछ इलाकों में तो चार-चार घंटे बिजली कटौती हो रही है जिससे उद्योग-धंधे प्रभावित हो रहे हैं।

कर्नाटक में मुफ्त बिजली वादा कर काट रहे जेब, बिजली दरें बढ़ीं
सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मुफ्त बिजली का वादा कर आम आदमी की जेब काटने का काम कर रही है। सरकार ने नागरिकों को 200 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा किया है। वहीं बिजली की दरें 2.89 रुपये प्रति यूनिट बढ़ा दी गई। अगर कर्नाटक के लोग 200 यूनिट स्लैब से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं तो उन्हें अब 2.89 रुपये प्रति यूनिट की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यह अतिरिक्त लागत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) है और इसमें अप्रैल से बकाया शामिल है।

मई 2023 में कांग्रेस सरकार ने कहा- 200 यूनिट तक फ्री बिजली
कांग्रेस ने मई 2023 में सरकार बनाते ही जनता से कहा था कि 200 यूनिट से कम खपत होने पर 1 जून 2023 से बिजली बिल न भरें। हालांकि सरकार ने इसके लिए ‘गृह ज्योति मुफ्त बिजली योजना’ अगस्त 2023 में शुरू की। इस पर सालाना करीब साढ़े 14 हजार करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।

अक्टूबर 2023 में कांग्रेस ने कहा- बिजली कटौती होगी
कांग्रेस ने पहले कहा कि 200 यूनिट बिजली फ्री देंगे और अब कह रही है बिजली में कटौती होगी। अब बताइए जब बिजली रहेगी ही नहीं तब कितनी बिजली फ्री मिलेगी। कर्नाटक में भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कांग्रेस ने कहा है कि बिजली कटौती होगी और इसका ठीकरा बिजली उत्पादन कम होने पर फोड़ दिया है। कांग्रेस ने कहा कि बारिश कम होने और जलापूर्ति प्रभावित होने से बिजली कटौती होगी। कांग्रेस सरासर झूठ कह रही है कि इस साल बारिश कम हुई है, इसलिए बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।

कांग्रेस सरकार के दावे के उलट सच्चाई कुछ और
कुल ऊर्जा मांग – 8,682 मेगावाट
कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार नवीकरणीय स्रोत ऊर्जा उत्पादन – 4,126 मेगावाट (47.25 प्रतिशत)
बिजली उत्पादन के लिए कुल तापीय संयंत्र – 3

तीन थर्मल पावर की छह इकाइयों में उत्पादन 
वर्तमान में तीनों थर्मल पावर स्टेशनों की कुल 13 इकाइयों में से छह बिजली उत्पादन कर रही हैं। रायचूर थर्मल पावर स्टेशन की आठ इकाइयों में से दो, बल्लारी की तीन इकाइयों में से दो और यरमरस थर्मल पावर स्टेशन की एक इकाई ने बिजली उत्पादन बंद कर दिया है। तीनों थर्मल पावर स्टेशनों में औसत दैनिक कोयले की खपत 25,000 मिलियन टन है।

कर्नाटक में 1,500-2,000 मेगावाट की भारी कमी
कर्नाटक सरकार उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे उत्तरी राज्यों के साथ बिजली अदला-बदली व्यवस्था पर बातचीत करेगी, साथ ही संकट से निपटने के लिए अन्य स्रोतों से अल्पकालिक बिजली खरीद पर भी विचार कर रही है। राज्य के ऊर्जा विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर को बिजली की मांग बढ़कर 15,012 मेगावाट हो गई, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 9,032 मेगावाट थी। विभाग ने कहा कि कर्नाटक 1,500-2,000 मेगावाट की भारी कमी का सामना कर रहा है।

कर्नाटक में भाजपा सरकार के दौरान 30 प्रतिशत से ज्यादा बिजली सरप्लस  
कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में, कर्नाटक ने 32,503 एमयू बिजली पैदा की। मार्च 2022 में कर्नाटक ने 285 मिलियन यूनिट (एमयू) की उच्चतम खपत के साथ 14,818 मेगावाट का सर्वकालिक पीक लोड हासिल किया, जो वर्ष 2022 में वर्ष 2021 की तुलना में 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत अधिक था। क्या कर्नाटक में बिजली की कमी और बिजली कटौती हुई? नहीं!! क्या जल आपूर्ति में कोई कमी थी? नहीं!!

कर्नाटक में हर वादे से पीछे हट रही है कांग्रेस
कांग्रेस के अलोकतांत्रिक झूठ का कोई अंत नहीं है। कांग्रेस सरकार में “झूठ” और “भ्रष्टाचार” का ही बोलबाला है। कर्नाटक के लोगों के पास एक ऐसी सरकार है जो चुनाव के दौरान कर्नाटक के लोगों से किए गए हर वादे से पीछे हट रही है।

मोदी ने रेवड़ी संस्कृति के प्रति किया था आगाह
पीएम मोदी ने रेवड़ी संस्कृति के प्रति चेताते हुए कई बार कहा है कि यदि देश को विकसित बनाना है तो इससे छुटकारा पाना ही होगा। लेकिन विडंबना है कि कई राजनीतिक दल फ्री की गारंटी देकर न केवल जनता को ठगने का काम कर रहे हैं बल्कि देश और प्रदेश के विकास की राह में रोड़ा भी बन रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने इसी तरह फ्री की गारंटी का लोक लुभावन नारा देकर कर्नाटक में सरकार गठन कर लिया लेकिन अब उसकी झूठ की पोल खुलने लगी है। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही दूध के दाम बढ़ा दिए गए और बस किराया बढ़ा दिया गया। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फ्री की गारंटी का वादा करके सत्ता में आई कर्नाटक की कांग्रेस सरकार जनता के पैसे की बर्बादी के नए आयाम बना रही है। लोगों के लिए बिजली नहीं है लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तांबे की प्रतिमा पर एक करोड़ रुपये खर्च करने के लिए पैसे हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस की गारंटी की सच्चाई अब लोगों से सामने आ रही है। कांग्रेस सरकार के पास विकास के लिए पैसा नहीं है, दूध-बिजली की कीमतें बढ़ा दी गई। राजीव गांधी की मूर्ति पर 1 करोड़ खर्च किए जा रहे। इन पर एक नजर-

विकास के लिए पैसा नहीं, राजीव गांधी की प्रतिमा पर खर्च होंगे 1 करोड़

रेवड़ियों का वादा करके सत्ता में आई कर्नाटक की कांग्रेस सरकार जनता के पैसे की बर्बादी के नए आयाम बना रही है। कर्नाटक सरकार अब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तांबे की प्रतिमा पर एक करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। यह स्थिति तब है जब पहले से ही वहां पर राजीव गांधी की पत्थर की प्रतिमा लगी हुई है। इस कदम को लेकर अब पार्टी के भीतर से भी प्रश्न उठ रहे हैं।

एससी-एसटी फंड का उपयोग अब फ्री की गारंटी के लिए
विकास के कामों को बंद करने के बाद अब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की दृष्टि अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी-एसटी) के कल्याण के लिए उपयोग किए जाने वाले फंड पर पड़ गई है। कांग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने के लिए अब इस फंड से 11,000 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है।

कर्नाटक सरकार पर हर साल लगभग 52,000 करोड़ का बोझ
अनुमान है कि कांग्रेस द्वारा दी गई पांच गारंटियों का बोझ हर साल लगभग 52,000 करोड़ रुपए का होगा। इन गारंटियों का फंड जुटाने के लिए सरकार अब विकास के कामों सहित बाकी कल्याणकारी कामों को भी बंद करने पर तुली हुई है।

मुफ्त चावल योजना पर ग्रहण, अब पैसे देगी सरकार
कर्नाटक सरकार अपना चावल देने का वादा नहीं पूरा कर पाई क्योंकि देश भर में चावल की कीमतें बढ़ गई थी और वह चावल खरीद नहीं पाई थी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि वे अन्न भाग्य योजना के तहत मुफ्त चावल के बदले पैसे देंगे। अन्न भाग्य योजना योजना के तहत बीपीएल परिवारों को अतिरिक्त पांच किलो चावल देने का वादा किया गया था, लेकिन अभी पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने के कारण अनाज के बदले लाभार्थियों को पैसे देने की बात कही गई।

कर्नाटक में 60,000 करोड़ का खर्चा मात्र पेंशन और कर्जों के ब्याज के भुगतान पर
कर्नाटक सरकार का वर्ष 2023-24 का बजट कुल 3.24 लाख करोड़ रुपए का है। इसमें से सरकार का लगभग 60,000 करोड़ का खर्चा मात्र पेंशन और कर्जों के ब्याज के भुगतान में होगा। इसके अतिरिक्त भी सरकार को तनख्वाह समेत शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य खर्चे करने हैं।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 66,000 करोड़ उधार लेगी
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा पेश किए गए बजट के अनुसार, वह इस वर्ष लगभग 66,000 करोड़ रुपए बाहर से उधार लेगी जिससे राज्य के खर्चे पूरे किए जा सकें। इन सभी परिस्थितियों में भी कांग्रेस लगातार ऐसे खर्चे कर रही है जिनकी आवश्यकता नहीं जबकि विकास के कामों के लिए दिया जाने वाला बजट घटा रही है।

नंदिन दूध के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार विकास के काम रोकने के बाद आम आदमी को महंगाई का झटकाक देने से भी गुरेज नहीं कर रही। कर्नाटक सरकार ने नंदिन दूध के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया। यह बढ़े हुए नए दाम 1 अगस्त 2023 से लागू हो गए। अगर यह बढ़े हुए दाम दही, दूध पाउडर जैसे अन्य डेयरी प्रोडक्ट पर भी लागू होते हैं तो आम लोगों की परेशानी और भी बढ़ने वाली है।

कर्नाटक में बसों में सफर हुआ महंगा, बढ़ गया किराया

कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसों ने अब किराया बढ़ा दिया है। बस किराए में 2 से 5 रुपये तक वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। दरअसल, ‘शक्ति योजना’ के कारण इन बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ गई थी। इसके बाद महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का भी ऐलान कर दिया था। लेकिन अब सरकार ने केएसआरटीसी बसों का किराया बढ़ा दिया है। इस नए आदेश के मुताबिक, मैसूर में घंटे के हिसाब से वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था रद्द कर दी गई है। कर्नाटक परिवहन के साथ ही राजहम्सा एक्जीक्यूटिव और राजहम्सा सहित सात विभिन्न प्रकार की अनुबंध बसों का संशोधित किराया 1 अगस्त से लागू हो गया।

पश्चिमी बंगाल : कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाया 50 लाख रूपए का जुर्माना, जज बोले- करोड़ों के घोटाले केस 3 दिन में CBI-ED को सौंपो

             कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार पर जुर्माना लगाते हुए कड़ी डांट लगाई है (चित्र साभार: द लीफलेट)
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई को सौंपने का आदेश नहीं मानने पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में हुए घोटाले से जुड़ा हुआ है। इसकी जाँच फिलहाल CID कर रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाने के साथ ही ममता सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है।

न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, वर्ष 2020 में बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में 50 करोड़ रुपए से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी के कारण सहकारी समिति बंद हो गई थी और इसमें पैसा जमा करने वालों को भी उनकी धनराशि वापस नहीं मिल पाई थी।

इस सम्बन्ध में मामला दर्ज करके जाँच राज्य की CID को सौंपी गई थी। सीआईडी इस मामले में बीते तीन वर्ष से जाँच कर रही है और अभी तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि समिति से गबन किया गया पैसा कहाँ गया। सीआईडी की धीमी कार्रवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट खफा हो गया और यह कदम उठाया है।

इससे पहले 24 अगस्त 2023 को इसी मामले में सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को आदेश दिया था कि इसकी जाँच सीआईडी से लेकर केन्द्रीय एजेंसियों ईडी और सीबीआई को सौंपे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को यह भी आदेश दिया था कि केन्द्रीय एजेंसियों को सभी ब्यौरा तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

बंगाल सरकार द्वारा इस आदेश की अवहेलना की गई और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह जुर्माना लगाया और कहा कि यदि अब आदेश का पालन नहीं होता है तो वह राज्य के गृह सचिव को कोर्ट में तलब करेंगे। कोर्ट ने डाँट लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीबों के पैसे के साथ खिलवाड़ कर रही है।

कोर्ट ने जुर्माने की रकम को दो हफ्ते में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने के लिए कहा है। इसके साथ ही इस केस से जुड़े सारे कागजात को 3 दिन के अंदर CID से लेकर केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।

जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि जाँच शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, लेकिन CID को अभी भी नहीं पता है कि पैसा कौन ले गया। उन्होंने कहा, “कोर्ट के साथ खेल रहे हैं? CID को नहीं पता है, लेकिन मुझे पता है। ये वही लोग हैं, जो कभी साइकिल चलाकर गरीबों का पैसा खाते थे, वे अब कार से चल रहे हैं।”

न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय इससे पहले भी बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार की गड़बड़ियों वाले कई मामलों में सुनवाई की थी। इसको लेकर सरकार सकते आ गई थी। इसी कारण से तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता उन पर अक्सर बयानबाजी करते रहते हैं।

आंध्र प्रदेश : पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को 371 करोड़ रूपए के APSSDC घोटाला के आरोप में 14 दिनों की जेल : गिरफ़्तारी से आंध्र की राजनीति में बड़ी हलचल

चुनावों में राजा हरिश्चंद्र का चोला ओढ़ जनता को मुर्ख बनाकर वोट बटोरने वाले किस तरह अपनी तिजोरियों को भरते हैं, क्या ऐसे नेता और उनकी पार्टी वोट की हक़दार है? ऐसे नेताओं की भारत में भरमार है। 

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को विजयवाड़ा की एक अदालत ने 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया। उन्हें आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APSSDC) में भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में 9 दिसंबर, 2021 को आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में 371 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें नायडू समेत 25 लोगों के नाम थे। इस मामले में नायडू को आरोपित नंबर-1 बनाया गया था।

निजी कंपनी को अनुचित लाभ दिलाने के आरोप

भ्रष्टाचार के इस मामले में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उन्हें विजयवाड़ा की अदालत में पेश किया गया था। नायडू को गिरफ्तार करने के लिए सीआईडी की स्पेशल टीम ने बीड़ा उठाया था और कई कार्यकर्ताओं के सामने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अपनी गिरफ्तारी के समय नायडू ने पूछा भी था कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इस मामले में सीआईडी ने आरोप लगाया है कि नायडू ने आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में रिश्वत के बदले में एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ दिलाया। कंपनी को कौशल विकास योजनाओं के लिए काम करने का ठेका मिला था। हालांकि नायडू ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें राजनीतिक बदले का शिकार बनाया जा रहा है।

तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं नायडू

चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर मानी जा रही है। नायडू तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वह एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं। उनकी गिरफ्तारी से आंध्र प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है।
जब आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार थी तो युवाओं के कौशल का विकास करने के लिए एक योजना शुरू की गई थी। इस योजना पर कुल 3300 करोड़ रुपए खर्च होने थे। इसमें राज्य सरकार के बजट के अलावे प्राइवेट कंपनी सीमेंस भी शामिल थी। आरोप है कि घोटाला राज्य सरकार के बजट में किया गया। पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों को पैसे ट्रांसफर किए और दस्तावेज भी नष्ट कर दिए।

राजस्थान : ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे’: नरेंद्र मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान में कई विकास परियोजनाओं की का शुभारंभ किया और साथ ही राज्य की कांग्रेस सरकार पर भी बरसे। इस दौरान उन्होंने देश भर के करोड़ों किसानों को नमन करते हुए कहा कि खाटू श्याम जी की ये धरती देश भर के श्रद्धालुओं को भरोसा और उम्मीद देती है। उन्होंने वीरों की भूमि शेखावाटी से देश के लिए अनेक विकास परियोजनाओं की शुरुआत करने का अवसर मिलने को अपना सौभाग्य करार दिया।

मोदी ने कहा कि यहाँ से देश के करोड़ों किसानों को ‘PM किसान सम्मान निधि’ के लगभग 18,000 करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में सवा लाख ‘पीएम किसान समृद्धि केंद्रों’ की शुरुआत की गई है। गाँव और प्रखंड स्तर पर इन केंद्रों से करोड़ों किसानों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि 1500 से ज़्यादा FPO के लिए, किसानों के लिए ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)’ का लोकार्पण भी हुआ है।

शेखावाटी की धरती पर PM मोदी, किसानों को किया नमन

उन्होंने कहा कि इससे देश के किसी भी कोने में बैठे किसान के लिए अपनी उपज बाजार में पहुँचाना और आसान हो जाएगा। पीएम मोदी ने बताया कि आज भी देश के किसानों के लिए एक नया यूरिया गोल्ड शुरू किया गया है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों को नए मेडिकल कॉलेज और मॉडल स्कूल का उपहार भी मिला है। पीएम मोदी ने इसके लिए राजस्थान की जनता, देश की जनता और खासकर किसान भाई-बहनों को खास शुभकामनाएँ दी।
मोदी ने कहा, “आजादी के इतने दशक बाद आज देश में ऐसी सरकार आई है, जो किसान का दुख-दर्द समझती है, किसान की चिंता समझती है इसलिए पिछले 9 वर्षों में लगातार किसानों के हित में फैसले लिए गए हैं। किसान का सामर्थ्य, किसान का परिश्रम मिट्टी से भी सोना निकाल देता है। इसलिए हमारी सरकार देश के किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। पीएम-किसान की आज की 14वीं किश्त को जोड़ दें तो अब तक 2 लाख 60 हजार करोड़ से अधिक रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजे गए हैं। इन पैसों ने छोटे-छोटे अनेक खर्च निपटाने में किसानों की बहुत मदद की है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेखावाटी में आगे कहा कि उनकी सरकार कैसे अपने किसान भाइयों के पैसे बचा रही है, इसका एक उदाहरण यूरिया की कीमतें भी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आज भारत में यूरिया की जो बोरी हम किसानों को 266 रुपए में देते हैं उतनी ही यूरिया हमारे पड़ोस में पाकिस्तान के किसानों को 800 रुपए में मिलता है, बांग्लादेश के किसानों को 720 रुपए में मिलता है, चीन में 2100 रुपए में और अमेरिका में 3000 रुपए से अधिक में मिलता है।
मोदी ने ये भी कहा कि भारत का विकास तभी हो सकता है, जब भारत के गाँवों का विकास हो। भारत विकसित भी तभी बन सकता है, जब भारत के गाँव विकसित हों। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई को मातृभाषा में कराने का भी रास्ता बना दिया है। साथ ही कहा कि अब ये नहीं होगा कि अंग्रेजी न जानने के कारण किसी गरीब की बेटी और बेटा डॉक्टर न बन पाए और ये भी मोदी की गारंटी है।
बकौल पीएम मोदी, सफलता तब बड़ी होती है जब सपने बड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान तो भारत का वह राज्य है, जिसके वैभव ने सदियों तक दुनिया को हैरान किया है। उस विरासत को संरक्षित करने पर जोर देते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि राजस्थान को आधुनिक विकास की ऊँचाई तक भी पहुँचाना है। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की।

सीकर में पीएम मोदी ने विशाल जनसभा को किया संबोधित

सीकर में रैली के दौरान उपस्थित भीड़ को देख कर पीएम मोदी ने कहा कि ये जन सैलाब बता रहा है कि आने वाले चुनाव में ऊँट किस करवट बैठेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राजस्थान की करवट भी बदलेगी और राजस्थान की किस्मत भी बदलेगी। उन्होने कहा कि आज राजस्थान में एक ही गूँज है, एक ही नारा है… जीतेगा कमल, खिलेगा कमल। पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान में अच्छी सड़कों के लिए, अच्छे हाईवे के लिए, राज्य के विकास के लिए भाजपा सरकार लगातार पैसे भेज रही है।
उन्होंने बताया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब 10 वर्षों में राजस्थान में टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में एक लाख करोड़ रुपए ही दिए गए थे, जबकि बीते 9 वर्षों में भाजपा सरकार ने टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुँचाए हैं। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में शत-प्रतिशत नल से जल देने का काम पूरा हो गया है, लेकिन राजस्थान के लोगों को कांग्रेस की सरकार पानी के लिए भी तरसा कर रखना चाहती है। राजस्थान ‘हर घर जल’ योजना में बहुत पीछे चल रहा है।
मोदी ने कहा, “कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है और झूठ का बाजार चलाया है। झूठ की दुकान का सबसे ताजा प्रोजेक्ट है, राजस्थान की ‘लाल डायरी’। कहते हैं इस ‘लाल डायरी’ में कांग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे। कांग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस ‘लाल डायरी’ का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुँह पर ताला लगा लें, लेकिन ये ‘लाल डायरी’ इस चुनाव में कॉन्ग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है।”

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी दलित बेटी के साथ दुष्कर्म होता है और उस पर एसिड डाल दिया जाता है, किसी दलित बहन के साथ उसके पति के सामने गैंगरेप होता है, आरोपी उसका वीडियो बनाते हैं, पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। उन्होंने कहा कि बेखौफ आरोपी वीडियो वायरल कर देते हैं, छोटी-छोटी बच्चियाँ और स्कूल की टीचर तक राजस्थान में सुरक्षित नहीं हैं। बता दें कि कांग्रेस के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने लाल डायरी में कई रहस्य होने का खुलासा किया था।

दिल्ली के नागरिक कैसे ठगे गए? केजरीवाल दिल्ली में कैसे मशहूर हो गए?


यह कहानी बिट्टू नाम के एक युवा कामकाजी पेशेवर के बारे में है, जिसने दिल्ली में 2010 से काम करना शुरू किया। उस दौरान जब भी वो कोई न्यूज़ चैनल देखते था तो देश के अलग-अलग हिस्सों से भ्रष्टाचार की ख़बरें आती थीं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने मंत्रियों को नियंत्रण में रखने में पूरी तरह से विफल रहे थे। बिट्टू को यह बात बहुत बुरी लगी कि शीर्ष नेतृत्व देश को कैसे चला रहा है। इसे देखते हुए राजनेताओं से उसकी सारी उम्मीदें खत्म हो गई थीं। वह उन सभी से नफरत करने लगा।

बिट्टू कोई और नहीं, दिल्ली का हर एक नागरिक है। आज वे सभी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि जब दिल्लीवासी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं तो उन्होंने 2019 में केजरीवाल को वोट क्यों दिया। उसके प्रमुख कारण हैंः उनके भ्रष्टाचार के बड़े और ज्यादातर मामले 2019 के बाद सामने आए। 2019 तक AAP एक साफ छवि रखने में कामयाब रही और उसने घोटाले उजागर नहीं होने दिए। 2019 के बाद उनकी हिंदू विरोधी छवि साफ हो गई। 2019 तक लोगों को उनके हिंदू विरोधी होने पर संदेह था। कुल मिलाकर केजरीवाल दिल्ली में लोकप्रिय नहीं हैं। एक ईमानदार आम आदमी की उनकी छवि ख़त्म हो चुकी है। आने वाले सभी चुनावों में इसके नतीजे देखने को मिलेंगे। केवल डबल एक्सएल शर्ट और सैंडल या मफलर पहनना आम आदमी होने की निशानी नहीं है।

यह कहानी ट्विटर पर Eagle Eye (@DeshiProfessor) ने शेयर की है। कहानी आगे पढ़िए…

फिर एक दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आंदोलन शुरू हो गया। वह आंदोलन हिट हो गया। बिट्टू भी उस आंदोलन के साथ हो लिया। बिट्टू की तरह एक आम आदमी की तरह दिखने वाला व्यक्ति उस आंदोलन से उभरा। उसने समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आईआरएस अधिकारी की नौकरी छोड़ दी।

एक देशभक्त, एक निस्वार्थ नागरिक, कोई ऐसा व्यक्ति जो हम में से एक था। उसने नेतृत्व का सही अर्थ बताया। उसने बताया कि एक राजनेता को कैसा होना चाहिए। उसने बताया कि किसी राजनेता को वीआईपी की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। उसके पास कारों का लंबा बेड़ा नहीं होना चाहिए जो करदाताओं के पैसे के खर्च पर चलती हो। एक राजनेता को उन आलीशान बंगलों में नहीं रहना चाहिए जो करदाताओं के पैसे से बनाए और रखरखाव किए जाते हैं। एक राजनेता को भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रखना चाहिए। अगर उसका अपना बेटा भ्रष्ट पाया जाए, उसे वह स्वीकार नहीं करे। एक राजनेता हममें से एक होना चाहिए। उसके आसपास कमांडो नहीं होने चाहिए। करदाताओं का पैसा उन पर बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। उसने बताया कि किसी राजनेता को वोट मांगने के लिए मंदिर या मस्जिद नहीं जाना चाहिए। उनके काम से उन्हें वोट मिलना चाहिए।

किसी राजनेता को विज्ञापन पर एक पैसा भी खर्च नहीं करना चाहिए। अगर आपने लोगों के लिए काम किया है तो आपको विज्ञापन क्यों देना चाहिए। एक राजनेता को जाति की राजनीति से दूर रहना चाहिए। चुनाव के दौरान एससी, एसटी या अन्य शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। किसी राजनेता को भ्रष्ट पार्टियों से गठबंधन नहीं करना चाहिए।

एक राजनेता को कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसके बारे में उन्होंने और भी बहुत सी बातें कहीं। बिट्टू को वो सारी बातें समझ में आ गईं। बिट्टू को आशा की किरण दिखी। अरविंद केजरीवाल आशा की वह किरण थे। बिट्टू को विश्वास होने लगा कि केजरीवाल भारतीय राजनीति को कुछ बेहतर के लिए बदल देंगे। केजरीवाल को बदलाव लाने में मदद करने के लिए बिट्टू ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालना शुरू कर दिया।

बिट्टू अन्ना और केजरीवाल के नेतृत्व में भारत के सबसे बड़े मिशन “भारत भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन” का हिस्सा बन गया। बिट्टू ने सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में काम किया, फिर आंदोलन का समर्थन करने के लिए दिल्ली मेट्रो के प्रगति मैदान तक की यात्रा की, इस उम्मीद में कि यह भारत को बदल देगा।

बिट्टू एक स्वयंसेवक के रूप में अन्ना आंदोलन के लिए काम करने लगा। इतने संघर्ष के बाद केजरीवाल राजनीति में आए। फिर उसके बाद क्या हुआ। केजरीवाल ने उस कांग्रेस से हाथ मिलाया, जिसे वे हमेशा भ्रष्ट कहते थे। बिट्टू को समझ में नहीं आया ये क्या हो रहा है। उसने मुश्किल से खुद समझाया कि परिवर्तन लाने के लिए कभी-कभी आपको अपनी विचारधारा से समझौता करने की ज़रूरत होती है। उसने फिर भी केजरीवाल का समर्थन किया। उसके बाद केजरीवाल ने करदाताओं के पैसे पर कारों का बेड़ा स्वीकार किया। बिट्टू ने फिर अपने मन को समझाया कि सीएम की सुरक्षा अहम है। यानि केजरीवाल को समर्थन अभी भी मजबूत था।

इसके बाद केजरीवाल सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए। बिट्टू ने फिर भी केजरीवाल का समर्थन किया क्योंकि आवास भी सीएम की सुरक्षा से जुड़ा है। उसके बाद केजरीवाल ने उन नेताओं के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया, जिन्हें वे खुद दिन-रात कोसते रहते थे। उन्होंने लालू, ममता, सीताराम येचुरी और कई अन्य लोगों से हाथ मिलाया।

यही वह दिन था जब बिट्टू को एहसास होना शुरू हुआ कि केजरीवाल वह नहीं हैं जो वह होने का दिखावा करते थे। बिट्टू को सभी अखबारों में केजरीवाल के फुल पेज विज्ञापन नजर आने लगे। कुछ मामलों में विज्ञापन पर व्यय किसी विकास योजना के बजट से भी अधिक था। बिट्टू को एहसास हुआ कि केजरीवाल की कोई विचारधारा नहीं है।

केजरीवाल की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ने लगी। उन्होंने मस्जिदों और इफ्तार पार्टियों का दौरा किया। उनका तुष्टिकरण इस हद तक पहुंच गया कि उन्होंने इस बात की वकालत की कि हिंदुओं को भी कुरान पढ़ना चाहिए। बिट्टू यह सब सुन रहा था। फिर केजरीवाल ने राम मंदिर निर्माण के खिलाफ बयान दिया। अब बिट्टू को यकीन हो गया कि उसने गलत आदमी का साथ दिया है। केजरीवाल ने मस्जिदों में इमामों और अन्य सहायक कर्मचारियों के लिए मासिक वेतन की घोषणा की, लेकिन पंडितों के लिए ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई। वक्फ बोर्ड को 100 करोड़ रुपये करदाताओं का पैसा दिया गया। हिंदू संगठनों को कुछ नहीं दिया गया।

बटला हाउस मुठभेड़ में आतंकवादियों के मारे जाने पर केजरीवाल ने पुलिस पर सवाल उठाया और जब पाकिस्तान की धरती पर सर्जिकल स्ट्राइक किए गए तब भारतीय सेना से सबूत मांगा। बिट्टू को इतनी बुरी तरह ठगे जाने पर विश्वास नहीं हो रहा था। केजरीवाल ने घोषणा की कि पंजाब में सीएम उम्मीदवार सिख समुदाय से होगा और गोवा में उम्मीदवार भंडारी जाति से होगा। केजरीवाल से मुंह से जातिगत राजनीति की बात सुनकर बिट्टू को एक और झटका लगा!

इसके बाद तो केजरीवाल की पार्टी के तमाम भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने लगे। उनके सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक सत्येंद्र जैन को ईडी ने गिरफ्तार किया। कोर्ट ने यह कहते हुए जैन की जमानत खारिज कर दी कि जैन के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत हैं। केजरीवाल भ्रष्ट मंत्री का समर्थन करते रहे। फिर जैन की वेब सीरीज लॉन्च हुई जहां उन्हें जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा था। केजरीवाल अभी भी उनका समर्थन कर रहे हैं।(साभार)

RPSC घूस कांड : कुमार विश्वास की पत्नी पर FIR

मशहूर कवि व पूर्व AAP नेता कुमार विश्वास की पत्नी और राजस्थान लोक सेवा आयोग की सदस्य मंजू शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज हुई। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने यह कार्रवाई अधिशासी अधिकारी (EO) परीक्षा में ओएमआर शीट बदलवाने के बदले घूस लेने के आरोप में की। हालाँकि एसीबी के डीजी ने उन्हें मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी है। इस मामले में पुलिस कांग्रेस नेता और पूर्व राज्य मंत्री गोपाल केसावत समेत अन्य लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित अधिशासी अधिकारी (ईओ) की भर्ती परीक्षा में घूस लेने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो सख्त रुख अपना रहा है। एसीबी ने इस मामले में कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा के अलावा आयोग की सदस्य संगीता शर्मा और संगीता आर्य के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। इनमें से संगीता आर्य राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी हैं।

इस मामले में राजस्थान एसीबी के कार्यवाहक डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने कहा है कि एक शिकायतकर्ता को विश्वास में लेने के लिए एक बिचौलिए ने कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा का नाम लिया था। यही नहीं एक बिचौलिए ने शिकायतकर्ता से यह भी कहा था कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे गोपाल केसावत लोक सेवा आयोग की सदस्य संगीता आर्य और मंजू शर्मा को जानते हैं। केसावत इन दोनों के जरिए लोगों को पास करा सकते हैं।

हालाँकि एसीबी के डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने मंजू शर्मा समेत राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों को मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में लोक सेवा आयोग का किसी भी स्तर का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है। 

क्या है मामला

एडवोकेट ह‍रदीप सिंह सुंदरिया अभ्यर्थी विकास व एक अन्य व्यक्ति ने 7 जुलाई 2023 को सीकर के एंटी करप्शन ब्यूरो में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि अधिशासी अधिकारी यानि ईओ की भर्ती परीक्षा में विकास नामक अभ्यर्थी को मेरिट में लाने के लिए अनिल कुमार नामक बिचौलिए ने आरपीएससी सदस्‍य मंजू शर्मा व आरपीएससी चेयरमैन के नाम से 40 लाख रुपए की माँग की थी। 
शिकायत में यह भी कहा गया था कि बिचौलिए के साथ रिजल्ट आने से पहले 25 लाख रुपए और बाद में 15 लाख रुपए देने का सौदा हुआ था। अनिल ने ओएमआर शीट देखकर यह भी कहा था कि अभ्यर्थी के 62 प्रश्न सही और 20 गलत हैं। इसके बाद एसीबी ने बिचौलियों और कांग्रेस नेता गोपाल केसावत को दलालों संग रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

ACB के ट्रैप से हुई गिरफ्तारी

भर्ती के लिए 40 लाख रुपए की घूस की माँग को लेकर शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाल बिछाया था। शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को एसीबी ने जाल के तहत ही बिचौलिए अनिल कुमार और ब्रह्मप्रकाश को 18.50 लाख रुपए की रिश्वत दिलाई थी। इसके बाद एसीबी दोनों पर निगरानी रख रही थी। शुक्रवार रात को ही दोनों आरोपित एक अन्य बिचौलिए रविन्द्र शर्मा को 7 लाख 50 हजार रुपए देने पहुँचे थे। जहाँ एसीबी ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपितों से हुई पूछताछ में गोपाल केसावत सहित अन्य लोगों का नाम सामने आया था।
इसके बाद एसीबी ने कुल 18.50 लाख रुपए में से 7.5 लाख रुपए शिकायतकर्ता को वापस देते हुए जयपुर में राजस्थान राज्य विमुक्त, घुमंतू व अर्द्धघुमंतू कल्याण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे गोपाल केसावत ​को देने के लिए कहा था। जब गोपाल केसावत शिकायतकर्ता से यह पैसा ले रहे थे तब एसीबी ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। 

ललित मोदी ने 3 ट्वीट में कांग्रेसियों की हवा निकाल दी : राहुल, गाँधी परिवार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो

ललित मोदी लड़ेंगे राहुल गाँधी से... कोर्ट में!
मोदी सरनेम को लेकर आजकल कांग्रेसी नेता कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं। ‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’ मामले में राहुल गाँधी को जब से 2 साल की सजा सुनाई गई है, तब से उनकी पार्टी के नेता बिलबिलाए हुए हैं, कुछ भी अल-बल बक रहे हैं। अब लेकिन करारा जवाब मिला है… वो भी मोदी सरनेम वाले से ही, ललित मोदी की ओर से।

ललित मोदी ने 30 मार्च 2023 को 3 ट्वीट किए। तीनों में निशाने पर रहे राहुल गाँधी, उनकी पार्टी कांग्रेस और उनके भ्रष्टाचारी नेता लोग। पहली ही ट्वीट में ललित मोदी ने क्लियर कर दिया कि वो राहुल गाँधी पर केस करने वाले हैं लंदन की अदालत में। सासंदी छिनने के बाद आम आदमी कहते हुए उन्होंने राहुल गाँधी को चेतावनी भी दी कि कोर्ट में सॉलिड बचाव के साथ आना है।

ललित मोदी ने लिखा:  “मैं देख रहा हूँ कि हर ऐरा-गैरा और गाँधी मुझे भगोड़ा कह रहा। क्यों? कैसे? क्या अब तक मुझे कभी भी इसके लिए दोषी ठहराया गया? जबकि इसके विपरीत #Papu उर्फ राहुल गाँधी को तो सजा भी सुना दी गई है, अब वो एक सामान्य नागरिक है… वो यह बोल रहा है। और ऐसा लगता है कि सभी विपक्षी नेताओं के पास करने के लिए और कुछ नहीं है, इसलिए वे भी या तो गलत जानकारी रखते हैं या सिर्फ बदले की भावना रख कर ऐसा बोल रहे हैं।”

ललित मोदी ने इसी ट्वीट में अपने लिए फैसले पर बात की। उन्होंने लिखा कि वो राहुल गाँधी पर इंग्लैंड की अदालत में केस करेंगे। साथ ही कटाक्ष या चेतावनी भरे लहजे में यह भी लिखा कि राहुल को ठोस सबूतों के साथ आना होगा क्योंकि वो उत्सुक हैं उन्हें पूर्ण रूप से #मूर्ख बनते हुए देखने के लिए।

इसी ट्वीट में ललित मोदी ने कुछ कांग्रेसी नेताओं का नाम भी लिखा। इन नेताओं को गाँधी परिवार ने कैसे यूज किया, उसे उजागर किया। उन्होंने लिखा, “आरके धवन #सीताराम केसरी #मोती लाल वोहरा आदि सभी गाँधी परिवार के लिए पंचिंग बैग रहे हैं। #नारायण दत्त तिवारी को भी नहीं भूलना चाहिए।”

दूसरे ट्वीट में ललित मोदी ने कांग्रेसी नेताओं के भ्रष्टाचार पर वार किया। उन्होंने डायरेक्ट सवाल किया कि इन लोगों के पास विदेशों में संपत्ति कैसे है? खुद ही जवाब देते हुए “कमलनाथ से पूछो” वाला सूत्र भी दे दिया। इतना ही नहीं, ललित मोदी ने एक कदम आगे बढ़ कर यह भी लिख डाला कि वो इन संपत्तियों के पते और फोटो आदि भेज सकते हैं। इसके बाद उन्होंने लिखा: “भारत की जनता को बेवकूफ मत बनाओ। असली धूर्त और बदमाश कौन है, सब जानते हैं। #गाँधी परिवार न हो गया मानो वे हमारे देश पर शासन करने के हकदार हैं। और हाँ, जैसे ही आप कड़े कानून पारित करेंगे, मैं वापस आ जाऊंगा। 

🙏जय-हिंद
IPL पर बोलते हुए ललित मोदी ने लिखा कि उन्होंने पिछले 15 सालों में आज तक एक पैसा भी लिया हो, यह साबित नहीं हुआ है। हाँ, यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया है कि उन्होंने इस दुनिया में सबसे बड़ा खेल आयोजन बनाया, जिसने 100 बिलियन डॉलर के करीब बिजनेस किया।
तीसरे और अंतिम ट्वीट में उन्होंने याद दिलाया कि एक कांग्रेसी नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1950 के दशक की शुरुआत से ही मोदी-परिवार ने उनके लिए और भारत देश के लिए इतना कुछ किया है जिसकी वे कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। अपनी तारीफ करते हुए उन्होंने लिखा कि जितना करने का सपना देखा था, उससे कहीं अधिक किया। अन्त में सबसे मारक लाइन ललित मोदी ने लिखी:  
“इसलिए गाँधी परिवार की तरह घोटालेबाज, दागदार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो 🙏 जय हिन्द।”

अब केजरीवाल की पार्टी AAP(आम आदमी पार्टी) का होगा BBP (भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी) नाम

किसन बाबूराव हजारे जिन्हें लोग समाजसेवी अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं, उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहे अरविंद केजरीवाल ने उनको धोखा देकर न सिर्फ आम आदमी पार्टी का दो अक्टूबर 2012 को गठन कर लिया, बल्कि अन्ना हजारे के मूल सिद्धांतों को भी तिलांजलि दे दी। आम आदमी पार्टी जिस भ्रष्टाचार विरोध के मुद्दे पर जन्मी थी, एक के बाद एक उसके नेता भ्रष्टाचार के जनक ही बनते गए। पार्षद, विधायक, मंत्री से लेकर अब उप-मुख्यमंत्री तक करोड़ों के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। आप सरकार के कानून मंत्री की वकालत की डिग्री फर्जी मिली, तो महिला कल्याण मंत्री ही महिला का बलात्कार करते धरे गए। अन्ना हजारे को अब दुख हो रहा है कि उन्होंने कैसे भ्रष्ट नेताओं के साथ मंच शेयर करके उनको आगे बढ़ाया था। दिल्ली से लेकर पंजाब तक नित-नए घोटाले, घपले और घूसखोर नेता सामने आने के कारण लगता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) को अपना नाम बदलकर भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी (BBP) कर लेना चाहिए। क्योंकि केजरीवाल की भ्रष्टाचार पर खोखली जीरो टालरेंस नीति की अब पूरी तरह पोल खुल चुकी है। सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया केसों की जाँच में अरविन्द केजरीवाल का नाम आने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। 

दो मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने से आप के पाप धुलने वाले नहीं

द‍िल्‍ली के ड‍िप्‍टी सीएम मनीष स‍िसोद‍िया की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिन में तारे नजर आने लगे हैं। व‍िपक्ष इस घटनाक्रम में बाद आप सरकार और अरव‍िंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार को लेकर पूरी तरह से हमलावर हो गया है। इस सबको क‍िस तरह से जवाब द‍िया जाए और सरकार की धूम‍िल हो रही छव‍ि को कैसे बचाया जाए, इसको लेकर अब माथापच्ची की जा रही है। इसी के तहत कई महीने से जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और अब धरे गए मनीष सिसोदिया से इस्तीफा मांग लिया है। लेकिन केजरीवाल के इन दोनों मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने भर से आप के पाप धुलने वाले नहीं है। क्योंकि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, जबकि आप का बड़ा नेता भ्रष्टाचार को लेकर एक्सपोज हुआ हो।

डिप्टी सीएम और मंत्री ही नहीं, दो दर्जन से ज्यादा विधायक भी आरोपी

इससे पहले भी दिल्ली से लेकर पंजाब तक आप सरकार के मंत्री जेल जा चुके हैं। बहुत उछलकूद कर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी अब इन्हीं नेताओं की पंगत में शुमार हो गए हैं। मंत्रियों के अलावा आप के करीब दो दर्जन विधायकों पर घूसखोरी के अलावा अन्य आरोप लगे हैं और कुछ जेल गए हैं। वहीं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद दिल्ली की राजनीति उफान पर है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से गत वर्ष 17 अक्तूबर को भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। इसके साथ ही ईडी ने भी कई जगह छापेमारी की थी। इससे पहले दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। ईडी ने जैन की लगभग पौने पांच करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है।

 जेल में बंद सबसे करीबी सत्येंद्र जैन को केजरीवाल ने दी थी क्लीन चिट

मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपों में जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को केजरीवाल का बहुत करीबी माना जाता है। यही वजह है कि जैन के तिहाड़ जेल में जाने के बावजूद केजरीवाल ने अपने इस विश्वस्त मंत्री को पद से नहीं हटाया गया। खास बात ये रही कि अरविंद केजरीवाल की ओर से जैन को क्लीन चिट दी गई थी। उन्होंने कई अवसरों पर कहा कि राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए आप नेताओं को परेशान किया जा रहा है। लेकिन जांच एजेंसियों की लगातार की जा रही पड़ताल में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। सत्येंद्र जैन के बाद मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी से केजरीवाल के भी तोते उड़ने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह यही है कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचारियों की फौज बनती चली जा रही है। पंजाब की जनता ने केजरीवाल की पार्टी को जिताया तो वहां भी स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला भ्रष्टाचार के मामले जेल जा चुके हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का केस
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में शिकंजा कसते हुए दिल्ली में AAP सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। ईडी ने जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की थी। दरअसल, जैन के परिवार के लोग कुछ ऐसी फर्म से जुड़े थे जो PMLA के तहत जांच के दायरे में हैं। सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को मोहल्ला क्लीनिक के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाने के मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था। इस मामले की जांच सीबीआई तक को दी गई थी। ईडी की जांच में पता चला है कि साल 2015-16 के दौरान जब सत्येंद्र कुमार जैन एक लोक सेवक थे, तब जैन पर अधिकारों के दुरुपयोग के भी कई आरोप लग चुके हैं।
महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार ने महिला को बनाया हवस का शिकार
आम आदमी पार्टी के मंत्री भ्रष्टाचार में ही नहीं, रेप केस में भी संलिप्त पाए गए हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार 2016 में राशन कार्ड बनवाने के बहाने महिला से रेप केस में फंस चुके हैं। इस मामले में उनको जेल भेजा गया। इस घटना की एक सीडी भी सामने आई थी। संदीप कुमार 2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट से विधायक बना और उसको केजरीवाल सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री बनाया गया था। 2016 में एक ऐसी सीडी वायरल हुई, जिसमें संदीप कुमार को दो महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालात में देखे जाने के आरोप लगे। महिला का कहना था कि वह संदीप कुमार के पास राशन कार्ड बनवाने गई थी। यहां कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया गया। उसके बाद रेप किया गया। मंत्री के रेप केस में आने के बाद भारी दबाव पड़ने पर केजरीवाल को संदीप को हटाना पड़ा।
दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की ही वकालत की बोगस डिग्री
साल 2015 में दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर वकालत की फर्जी डिग्री रखने के आरोप लगे। एक आरटीआई के हवाले से पता चला कि जितेंद्र की डिग्री बोगस है। भागलपुर यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि जो पंजीकरण नंबर उनकी डिग्री पर है, उस नंबर पर कोई और पंजीकृत है। डिग्री पूरी तरह से गलत और बोगस है। जितेंद्र पहले कांग्रेस नेता भी रहे हैं। दिल्ली चुनाव में वो आम आदमी पार्टी से त्रिनगर से चुनाव जीते और केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बने। उनको दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी।
खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान ने खाई छह लाख की रिश्वत
दिल्ली सरकार में साल 2018 में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार की सुर्खियों में आया। दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपये की रिश्वत खाने के आरोप लगे। आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच CBI को सौंपी गई। भारी दबाव के बाद तब सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटाना पड़ा था।

गृहमंत्री अनिल देशमुख ने दिया था सचिन वाजे को हर माह 100 करोड़ रूपए की वसूली का लक्ष्य: परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव को लिखा पत्र

पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह, गृहमंत्री अनिल देशमुख, और निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे।

परमबीर ने कोई नया आरोप नहीं लगाया है, अगर आरोप की गंभीरता को देखा जाए तो यह केवल अनिल देशमुख के माध्यम से समस्त पुलिस पर आरोप लगा दिया है। 

परमबीर सिंह को हाल ही में मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाया गया था। इसके बाद आज (मार्च 20) को उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के हेड सचिन वाजे को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पिछले कुछ महीनों में कई बार अपने सरकारी आवास ज्ञानेश्वर पर बुलाया था।

परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। उनके मुताबिक गृहमंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1750 बार, रेस्ट्रां और अन्य जगह हैं। यदि प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए एकत्रित किए जाएँ तो हर महीने 40-50 करोड़ मिल जाएँगे। बाकी का कलेक्शन अन्य माध्यमों से किए जा सकते है।

इस पत्र को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कोई हस्ताक्षर भी नहीं दिख रहे। हालाँकि, इसमें बताया गया है कि फरवरी के मध्य और उसके बाद गृह मंत्री ने वाजे को अपने सरकारी आवास पर बुलाया था। तब गृह मंत्री के एक-दो कर्मचारी और उनके निजी सचिव भी वहाँ मौजूद थे। वहीं उन्हें पैसा इकट्ठा करने के आदेश दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अनिल देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए परमबीर सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है।

गृहमंत्री का कहना है कि मुकेश अंबानी मामले के साथ-साथ मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी सचिन वाजे की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है और आगे ये जाँच तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक पहुँचने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले के सामने आते ही भाजपा ने राज्य के गृहमंत्री अनील देशमुख से इस्तीफे की माँग भी कर दी है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त का कहना है कि असल में जबरन वसूली करने वाला और कोई नहीं बल्कि महाराष्ट्र का गृह मंत्री अनिल देशमुख है, सचिन वाजे से कई बार मिलता था। देशमुख पब आदि से पैसा निकाल रहे थे। भाजपा की माँग है कि अनिल देशमुख को बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के पास 118 करोड़ रूपए की अवैध संपत्ति और 4.5 किलो सोना मिला

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने ईसाई मजहब के प्रचारक पॉल दिनाकरन के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद उसकी 118 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। तमिलनाडु के ईसाई प्रचारक और उसकी कई संस्थाओं के खिलाफ बड़ी रकम की धोखाधड़ी और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने और कर चोरी के कई आरोप हैं। विभाग ने उसके 25 ठिकानों पर छापा मारा था, जिसके बाद ये खुलासा हुआ।

उसके पास से 4.5 किलो सोना भी मिला, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। साथ ही 120 करोड़ रुपए की ऐसी आय का पता चला, जिसका कोई पुष्ट दस्तावेज नहीं था। सोना उसके घर से ही पाया गया।

चेन्नई और कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था ‘Jesus Calls Ministries’ से जुड़े 25 ठिकानों पर बुधवार (जनवरी 20, 2021) को छापा मारा गया था। सुबह 6 बजे ही शुरू हुई छापेमारी में 200 के करीब इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने अलग-अलग टीमों में बँट कर एक साथ 25 ठिकानों पर छापेमारी की। उसकी संस्थाओं को विदेशी फंडिंग भी जम कर मिली थी, जिसे लेकर जाँच की जा रही है।बता दें कि ‘Jesus Calls Ministries’ और ‘Karunya University’ की स्थापना पॉल दिनाकरन के पिता डीजीएस दिनाकरन ने की थी। उनका 2008 में निधन हो गया था। इसके बाद दोनों संस्थानों की कमान ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के हाथ में आ गई थी। इस परिवार का तमिलनाडु में खासा प्रभाव है और सभी सत्तारूढ़ दलों के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। जब डीजीएस दिनाकरन का निधन हुआ था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और नेता प्रतिपक्ष जे जयललिता, इन दोनों बड़े नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की थी।

पॉल दिनाकरन, टीवी पर लगातार ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने और उसके जरिए फंड इकट्ठा करने वाले डीजीएस दिनाकरन का बेटा है। पॉल तमिलनाडु में ईसाई धर्म प्रचारक के रूप में जाना जाता है। उसके काफी फॉलोवर्स हैं और वो ईसाई प्रचार-प्रसार के लिए कई संगठन भी चलाता है। आईटी विभाग को दिनाकरन और जीसस कॉल्स के खिलाफ टैक्स चोरी और विदेशी फंडिंग में अनियमितता की शिकायत मिली थी।