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भारत में हिन्दुओं पर हमला करने वाले पाकिस्तान के sleeper cells पर पाकिस्तान जैसी कार्यवाही कब होगी? DJ शादी में नहीं बजेगा तो क्या कट्टरपंथियों के जनाजे में बजेगा? ‘गाँव के सभी हिंदुओं को खत्म करना चाहते हैं मुस्लिम’: देवी स्थान से पूजा कर लौट रही थी बारात, दावा- मस्जिद के सामने दूल्हे के पिता की हत्या: बिहार पुलिस बता रही DJ का विवाद

                                                  पीड़ित परिजन और पुलिस के गिरफ्त में आरोपित
अभी पाकिस्तान शांत नहीं हुआ है क्योकि भारत में बैठे 
पाकिस्तान के sleeper cells किसी न किसी बहाने अशांति फ़ैलाने में लगे हैं। पाकिस्तान को चारों खाने चित करने के लिए जब तक भारत में बैठे पाकिस्तान के इन sleeper cells पर सख्ती से पेश नहीं आया जाएगा पाकिस्तान का खेल चलता रहेगा। पाकिस्तान के इन sleeper cells और आतंकवादियों की काली करतूतों में कोई फर्क नहीं। ये sleeper cells पाकिस्तानी आतकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं। शोभा यात्रा हो या शादी ये sleeper cells उपद्रव करने से नहीं चूकते और इनके आका victim card खेल इनके बचाव में खड़े हो जाते हैं। पीड़ित हिन्दू को ही दोषी साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। जब कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हो सकती है शेष भारत में क्यों नहीं?

  

बिहार के गया में एक मुस्लिम बहुल गाँव में हिन्दुओं पर बारात निकालने के दौरान हमला हुआ। इस हमले में दूल्हे के पिता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। हमले में कई लोग घायल हुए हैं। लेकिन पुलिस ने मुस्लिमों के साथ साथ दूल्हे के परिजनों का नाम FIR में डाल दिया है। पुलिस का कहना है कि विवाद बरात में डीजे बजाने को लेकर हुआ, इसके चलते दो पक्षों में हुए पथराव के बाद गाँव में तनाव फ़ैल गया।

पुलिस ने बताया डीजे का विवाद

यह मामला गया जिले के गुरुडु प्रखंड में गुरुआ गाँव का है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित के परिजनों से भी बात की है। यहाँ 7 मई, 2025 को इसी गाँव में ननकु यादव के घर शादी का कार्यक्रम था। यहाँ बारात की विदाई से पहले गाँव के देवी स्थान पर पूजा करने के लिए बारात समेत तमाम हिन्दू गए हुए थे। वापस आने के दौरान मुस्लिम बहुल इलाके में मुस्लिमों ने उनसे लड़ाई कर दी। पुलिस ने बताया कि यहाँ मुस्लिमों ने हिन्दुओं से डीजे ना बजाने को लेकर दबाव डाला।
पुलिस के अनुसार, मस्जिद के सामने डीजे बजाने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पत्थरबाजी चालू हो गई, इसके चलते बारात में कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया है कि इस पथराव में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसकी मौत हो गई है। SHO सरफराज इमाम ने ऑपइंडिया को बताया कि वह मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुके हैं और आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कुछ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात भी कही है। उन्होंने अभी का माहौल शान्तिपूर्वक होने की बात कही है।
इस मामले में दर्ज FIR में पुलिस ने चाँद, जाकिर, लुकमान, इलियास, शाइस्ता, राणा, शमीम समेत 25 लोगों को आरोपित बनाया है। इसमें कुछ हिन्दुओं का भी नाम है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है। कई लोगों का इलाज चल रहा है।

पीड़ित बोले- डीजे बंद था तब भी हुआ हमला

जहाँ पुलिस ने इस मामले में डीजे बजने पर विवाद होने की बात कही तो वहीं दूल्हे के बड़े भाई गया यादव ने कहा है इस दौरान डीजे बंद था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने उनके पिता की हत्या लाठी डंडों से पीट पीटकर बेरहमी से कर दी। उन्होंने बताया कि उनके दो चाचा भी लगातार लाठी लगने से गंभीर रूप से घायल हैं। यह बातें उन्होंने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिजनों को अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है। उनके साथ मौजूद ग्रामीणों ने बताया है कि यहाँ मुस्लिम हिन्दुओं को ख़त्म कर देना चाहते हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि इस्लामी त्योहारों के समय मुस्लिम हिन्दू घरों के सामने आकर चिढ़ाने के अंदाज में हरकतें करते हैं।

ग्रामीणों ने बताया है कि हिन्दुओं के त्योहारों के समय मुस्लिम दबाव बनाते हैं कि किसी भी तरह का जुलुस या DJ नहीं बजना चाहिए। मृतक के परिजन सोनू ने आरोप लगाया कि यह सब कुछ मुस्लिमों ने सुनियोजित ढंग से किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम दूल्हे को मारना चाहते थे लेकिन उसके ना मिलने पर पिता की हत्या कर दी।

दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड ने कबूली जज के घर कैश मिलने की बात: नहीं किया जब्त, ऊपर से वीडियो भी डिलीट करवा दिया – अब आया जवाब


इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर 14 मार्च को आग की घटना के बाद पाए गए कैश को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद मामले की जाँच के लिए बनी कमेटी की उपस्थिति में घटनास्थल पर उस दौरान मौजूद रहे पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान सबसे मुख्य प्रश्न यह था कि आवास पर मिली नकदी को जब्त क्यों नहीं किया गया और घटना के तुरंत बाद पहुँचे पुलिसकर्मियों के फोन से वीडियो क्यों डिलीट किया गया। इसपर जवाब देते हुए अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कोई FIR ही दर्ज नहीं हुई थी।

यही कारण है कि नकदी जब्त नहीं की गई लेकिन इस मामले की जानकारी उनके द्वारा सीनियर अधिकारियों को दी गई थी, जिन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी घटना के बारे में सूचना दी थी। वहीं वीडियो डिलीट करने के बारे में उनका कहना है कि वीडियो गलत हाथों तक न जाए इसलिए सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर वीडियो डिलीट कराया गया था।

FIR और जब्ती पर उठे सवाल

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। पुलिस अधिकारियों ने जाँच समिति को बताया कि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श आवश्यक होता है। इसीलिए, बिना FIR के नकदी की जब्ती नहीं की गई। इसके अलावा, घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल फोन से वीडियो क्लिप वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हटा दिए गए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे गलत हाथों में न जाए।
वही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने, एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “उन्होंने जब्ती में शून्य दर्ज किया। चूँकि हम एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते, तो जब्ती कैसे हो सकती है? एफआईआर केवल मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से ही दर्ज की जा सकती है, हमें समिति के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।”

न्यायमूर्ति वर्मा का बयान

जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने आवास पर किसी भी नकदी की मौजूदगी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि आग लगने के समय वो और उनकी पत्नी दिल्ली में नहीं थे, और उनकी बेटी और निजी सचिव ने दमकल सेवा को सतर्क किया था। उन्होंने यह भी कहा कि आग बुझने के बाद उनके परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों को कोई नकदी नहीं दिखाई दी।

जाँच समिति की कार्रवाई

जाँच समिति ने 30, तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के आवास का दौरा किया और उस कमरे का निरीक्षण किया जहाँ आग लगी थी। समिति ने दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीसीपी (नई दिल्ली जिला), अतिरिक्त डीसीपी, और अन्य संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए। इन सभी ने अपने बयानों में उल्लेख किया कि आग में जले हुए बैग में नकदी थी।

महाराष्ट्र : ‘हिंदुओं की माँ $^&#, गणेश को देख उलटी आती है’: मीरा रोड की सोसायटी के हिन्दुओं ने गाली बकने वाले वजूद पर दर्ज कराई FIR, बकरीद पर किया था बवाल

                            मुंबई के मीरा रोड इलाके में पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देने वाले वजूद पर FIR
मुंबई के मीरा रोड इलाके की एक सोसायटी में बकरों की कुर्बानी को लेकर 16 जून (रविवार) को मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों का सोसायटी में रहने वाले हिन्दुओं से विवाद हो गया था। उस समय वजूद नाम के आरोपित ने पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देते हुए भगवान गणेश तक के खिलाफ अपशब्द बोले थे। 17 जून (सोमवार) को इस मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन में की गई थी। अब पुलिस ने आरोपित वजूद के खिलाफ FIR 
दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला मीरा रोड इलाके के काशीगाँव थानाक्षेत्र का है। यहाँ पुलिस ने हिल गैलेक्सी में रहने वाले वजूद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज किया है। वजूद पर “हिन्दुओं की माँ ** देंगे” जैसे शब्द बोल कर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। यह गालियाँ उसने तब दी थीं जब बकरीद के मौके पर हिन्दुओं ने सोसायटी के अंदर बकरे की कुर्बानी का विरोध किया था। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालत को संभाला था।

                                                                  FIR कॉपी

पुलिस ने सोसायटी के अंदर पशुओं को ले कर कोई नियम न बने होने का हवाला देकर वजूद को बकरियाँ रखने की अनुमति दे दी थी। FIR कॉपी में बताया गया है कि मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं को धमकी दी गई थी। उन्होंने कहा था, “हम सोसायटी में ही बकरों की कुर्बानी देंगे। चाहे कुछ भी हो जाए। जो भी कर सको कर लो।” इसी विवाद के दौरान भगवान गणेश का भी अपमान किया था। वजूद ने कहा, “जब तुम लोग गणेश उत्सव मनाते हो तब हम कुछ कहते हैं ? जब हम तुम्हारे भगवान गणेश को देखते हैं तो हमें गुस्सा और उल्टी आती है। हम भी देखेंगे कि तुम यहाँ अपना गणेश उत्सव कैसे मनाते हो।”

                                                                   शिकायत कॉपी

तब ऑपइंडिया से बात करते हुए हिन्दुओं ने सोसायटी को मुस्लिम बहुल बताया था। उन्होंने ये भी जानकारी दी थी कि मकान खरीदने से पहले उन्हें जिम और क्लब के लिए जो जगह बताई गई थी बाद में बिल्डर की तरफ से वहाँ मस्जिद बना दी गई थी। सोसायटी आर आर बिल्डर्स द्वारा बनाई गई है। इसके मालिक रसूल, इरफ़ान, जुनैद और जब्बार शेख हैं। बकरों की कुर्बानी सोसायटी के अंदर करने पर अड़े वजूद को समझाने के लिए जब बिल्डर को बुलवाया गया तो उन्होंने शहर से बाहर होने की दलील दी थी। सोसायटी के सिख समुदाय के भी कई लोग खुद को मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित बताते हैं।

‘हिंदू कोई धर्म नहीं, एक गाली… हिंदू का अर्थ चोर-डकैत-लुटेरा-गुलाम’: क्रिश्चियन मोर्चा , देवी-देवताओं पर भी अभद्र टिप्पणी

मंच से हिंदुओं के खिलाफ उगली गई आग (फोटो साभार : Youtube/Prasant Tirkey Vlogs)
छत्तीसगढ़ के जशपुर में जन जागृति सभा के नाम पर हिंदुओं, देवी देवताओं के खिलाफ जमकर आग उगली गई। इस सभा का आयोजन भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा और राष्ट्रीय एकता परिषद की ओर से संयुक्त रूप से किया गया था। इस कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं और हिंदुओं के खिलाफ जमकर आग उगली जा रही है। इस मामले में विहिप समेत तमाम हिंदूवादी संगठनों ने हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई की माँग की, जिसके बाद राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।

जानकारी के मुताबिक, जशपुर के कुनकुरी थाना इलाके में 27 फरवरी 2024 को इस सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा के मंच से हिंदुत्व और ब्राम्हणों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जमकर आग उगली गई। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष करनैल सिंह ने हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र और गलत टिप्पणी करते हुए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की शिकायत दर्ज कराई। याचिका में कहा गया है कि आरोपितों ने अलग-अलग संप्रदाय और धर्म के लोगों के बीच शत्रुता और घृणा पैदा कर राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता को धक्का पहुँचाया है।

मंच से हिंंदुओं और ब्राह्मणों के खिलाफ लोगों को भड़काते हुए कहा गया, “खुद को हिंदू कहना बंद करें। हिंदू कोई धर्म नहीं, हिंदू कहना गाली है। ये फारसी भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ चोर, डकैत, लुटेरा, गुलाम होता है। जिस तरह से 3.5 परसेंट ब्राह्मणों के द्वारा हमें 4000 साल से गुलाम बनाए रखा जा रहा है, वैसे ही आज हमें हिंदू के नाम पर गुलाम बनाए रखने का काम किया जा रहा है।” इसे आप नीचे दिए गए वीडियो में 2.20 मिनट से सुन सकते हैं।

ईवीएम तोड़ने की भी अपील

इस सभा के मंच से लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान लोगों से ईवीएम तोड़ने को भी कहा गया। इस दौरान एक वक्ता ने 2023 में हुए 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं के विवादित बोल के वीडियो इंटरनेट पर शेयर किए जा रहे हैं।
मिस्टर सिन्हा नाम के एक्स यूजर ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने इस मंच से बोले गए जहरीले बयानों को शेयर करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्रवाई की माँग की है।

12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

एसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि शिकायत और कार्यक्रम से जुड़े वीडियो की जाँच के बाद आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। कुनकुरी थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 153 (क), 153 (ख), 295(क), 505(2), 109, 294 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में सुनील खलखो निवासी गोढ़ी थाना बागबहार, श्याम सुंदर मरावी निवासी कुनकुरी, मीरा तिर्की निवासी कांसाबेल, व्लासियुस तिग्गा निवासी अंबिकापुर, संजय सक्सेना निवासी कापू. रायगढ़, रेमिश तिर्की निवासी कांसावेल, दिनेश भगत निवासी नारियल डांड थाना कांसाबेल, हर्ष कुजूर निवासी पिराई थाना बगीचा, रूपनारायण एक्का निवासी जशपुर के साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है।

राजस्थान : ‘शिव मंदिर है अजमेर दरगाह, हो ASI सर्वे’: हिंदू संगठन ने की माँग, अल्पसंख्यक आयोग भी एक्टिव

अजमेर दरगाह को शिव मंदिर बताने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों (दाएँ) पर खादिम और दीवान के बेटे (बाएँ) द्वारा राजस्थान में 2 FIR दर्ज (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)
राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को पूर्व का हिन्दू मंदिर बताते हुए इसका ASI से सर्वे कराने की माँग पर विवाद खड़ा हो गया है। दरगाह से जुड़े 2 सदस्यों ने इस मामले में 2 अलग-अलग FIR दर्ज करवाई है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी मंगलवार (27 फरवरी 2024) को ऐसी माँगों को 2 समुदायों के बीच नफरत फैलाने वाला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर तलब की है। आयोग ने कार्रवाई के लिए प्रदेश के DGP से भी मुलाकात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर दरगाह के दीवान के बेटे नसरुद्दीन चिश्ती ने इस मामले में दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। मुकदमा में उन्होंने हिन्दू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता को आरोपित किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिमरन गुप्ता ने पंकज सहित अपने अन्य साथियों के साथ एक वीडियो बनाकर अजमेर दरगाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने इसे मज़हबी भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कार्रवाई की माँग की है।

इसके अलावा, अजमेर दरगाह का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य अल्पसंख्यक आयोग से भी मिला। मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल ने हिन्दू शक्ति दल के सदस्यों के बयानों को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की माँग की। इस मुलाकात के बाद राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने अजमेर के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भेजकर सिमरन गुप्ता और उनके साथियों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। जवाब देने के लिए डीएम अजमेर को 7 दिनों का समय दिया गया है।

ज्ञापन में एक सप्ताह पहले अजमेर दरगाह के एक खादिम शकील अब्बासी द्वारा सिमरन गुप्ता और उनके साथियों पर क्लॉक टॉवर थाने में दर्ज FIR का भी जिक्र किया गया है। उसमें की गई कार्रवाई की जानकारी माँगी गई है। इसके बाद राज्य अल्पसंख्यक आयोग का एक प्रतिनिधि मंडल मंगलवार (27 फरवरी 2024) को राजस्थान के DGP यूआर साहू से मिला। मुलाकात के बाद प्रतिनिधमंडल को आश्वासन मिला कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ निष्पक्षता से कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दू शक्ति दल की माँग

23 फरवरी 2024 को हिन्दू शक्ति दल के सिमरन गुप्ता ने अपने साथी पंकज के साथ एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने अजमेर दरगाह में मौजूद जन्नती दरवाजे को पूर्व में हिन्दुओं का शिव मंदिर बताया था। इसी के साथ दरगाह के पास जो ढाई दिन का झोपड़ा है, उसे सिमरन ने पहले सरस्वती माता का मंदिर बताया। वीडियो में सिमरन ने तारागढ़ के किले को प्राचीन हिंदू राजाओं की धरोहर बताते हुए इसे जिहादियों द्वारा कब्जा की गई जगह बताया था। उन्होंने अजमेर के ADM सिटी को एक ज्ञापन देते हुए इन सभी स्थानों की ASI जाँच की माँग की थी।

पहले भी उठी है ASI सर्वे की माँग

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह के ASI सर्वे की माँग पहली बार नहीं उठी है। इस से पहले भी जनवरी 2024 में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दरगाह को पूर्व का हिन्दू मंदिर बताते हुए ASI सर्वे की माँग उठाई थी। तब राजवर्धन सिंह ने कहा था कि वो पहले इस मामले को अशोक गहलोत की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के संज्ञान में ला चुके हैं।

केरल : ‘हिजाब न पहनने वाली महिलाओं का चरित्र गड़बड़’: आनाकानी के बाद पुलिस ने मौलाना पर दर्ज की FIR, महिला ने सरेआम हटा दिया था स्कार्फ

प्रगतिशील मुस्लिम मंच अध्यक्ष वीपी सुहरा ने मौलाना मुक्कम उमर फैजी के खिलाफ दर्ज की थी शिकायत (फोटो साभार: asianetnews/
केरल में टीवी डिबेट के दौरान एक मौलाना ने उन महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाया जो हिजाब नहीं पहनतीं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर 4 जनवरी 2024 को उनके खिलाफ केरल के कोझिकोड में एफआईआर दर्ज हुई। इस मामले में शिकायत प्रगतिशील मुस्लिम महिलाओं के मंच NISA की अध्यक्ष वीपी सुहरा ने की थी।

उनकी शिकायत के बाद ही 4 जनवरी को मौलाना के खिलाफ IPC की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले शब्द बोलना) के तहत FIR दर्ज की गई। इस एफआईआर के होने के बाद सुहरा ने मौलाना के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। वे मुस्लिम समुदाय और महिलाओं को खराब तरीके से दिखाने चाहते हैं। वे महिलाओं को बुर्का पहनने वाली और न पहनने वाली में बाँटकर समुदाय में तनाव पैदा करना चाहते हैं। फैजी ने उन सभी महिलाओं का अपमान किया है जो हेडस्कार्फ़ नहीं पहनती हैं।”

सुहरा ने पुलिस पर शुरू में उनकी शिकायत पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने 7 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की, तो पुलिस ने कहा कि अगर उन्हें अदालत से निर्देश मिलेगा तो वे केस दर्ज करेंगे। बाद में हमें कानूनी राय मिली कि पुलिस शिकायत पर कार्रवाई कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम संजीदगी और जिद के साथ अपनी शिकायत पर टिके थे ताकि यह पक्का किया जा सके कि मौलवी पर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए केस दर्ज किया जाए।”

दरअसल, एक टेलीविजन बहस के दौरान एक मौलवी मुक्कम उमर फैजी ने ये कथित टिप्पणी की थी कि जो मुस्लिम महिलाएँ हेडस्कार्फ या हिजाब नहीं पहनती थीं, वे संदिग्ध चरित्र वाली होती हैं।

ये टेलीविजन बहस बीते साल अक्टूबर 2023 में समान नागरिक संहिता पर एक सेमिनार के दौरान सीपीआई (एम) नेता अनिल कुमार के बयान को लेकर हुई थी। कुमार ने कहा था,”कम्युनिस्ट पार्टी के असर की वजह मलप्पुरम में मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब छोड़ दिया और इससे मुस्लिम समुदाय अधिक प्रगतिशील हुआ है।”

इस बयान के बाद वो सीपीआई (एम) के लोकसभा सांसद ए एम आरिफ और पार्टी के कई अन्य मुस्लिम नेताओं के निशाने पर आ गए थे। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य एम वी गोविंदन ने कहा था कि पार्टी कुमार के रुख से राजी नहीं है। वहीं मौलाना ने भी टीवी प्रोग्राम में इस पर अपनी राय दी थी, जिसे सुनकर सुहारा काफी नाराज हो गईं थीं। उन्होंने अक्टूबर में एक सार्वजनिक मंच पर अपने सिर से स्कॉर्फ को हटा दिया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शहर के नल्लालम में कुदुम्बश्री के थिरिके स्कूलिल (बैक टू स्कूल) अभियान के उद्घाटन सत्र के दौरान फैजी की टिप्पणी पर निशाना साधाते हुए कहा था कि सिर ढंकना या नहीं ढंकना महिला की पसंद है ये स्कॉर्फ हटाते हुए कहा था- “मैं सिर पर स्कार्फ पहनकर बड़ी हुई हूँ। यह मेरी आदत का हिस्सा है इसलिए नहीं कि मैं मुस्लिम हूँ।” उनके हेडस्कॉर्फ हटाने का विरोध भी हुआ था जिसके बाद पुलिस के पास शिकायत भी पहुँची थी। 

हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर हिंदू एवं अन्य समुदाय के व्यापारियों का बहिष्कार, आतंकियों को फंडिंग की आशंका: FIR में साजिशों का खुलासा

                                                                                                                      साभार- दैनिक जागरण
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 नवम्बर 2023 को हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द सहित कुछ अन्य संस्थाओं एवं लोगों पर FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में हलाल सर्टिफिकेट को हिन्दू आस्था पर आघात बताते हुए इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने की माँग की गई थी। केस दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने अगले दिन 18 नवम्बर को हलाल के बजाय FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र को मानकों के लिए उचित बताया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इस केस में दर्ज हुई FIR में हलाल इंडिया के चेन्नई और मुंबई कार्यालय के साथ जमीयत उलेमा ए हिन्द के दिल्ली और मुंबई ऑफिस को नामजद किया है। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेट को बढ़ावा देने वाली कुछ अज्ञात कम्पनियाँ, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने वाले कुछ अन्य अज्ञात लोग, आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे अज्ञात समूह और जनआस्था से खिलवाड़ करने के साथ दंगे करवाने की साजिश रच रहे कुछ अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायतकर्ता शैलेन्द्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि हलाल सर्टिफिकेट मजहब के नाम पर मजहब विशेष के लोगों द्वारा जारी किया जा रहा है। इस साजिश में एक मजहब विशेष के लोगों के सामानों की बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल के नाम पर छल किया जा रहा है। FIR में कहा गया है कि जिन कंपनियों ने इनसे हलाल सर्टिफिकेट नहीं लिया है, उनकी बिक्री घटाने के लिए आपराधिक कृत्य किया जा रहा है।

शिकायत में हलाल सर्टिफिकेट को मुस्लिमों की अपनी तरफ आकर्षित करने का खास तरीका बताया गया है। FIR में आरोप है कि हलाल सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों ने सरकार के नाम का भी फर्जी कागजातों से दुरूपयोग किया है। हालात सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों के कागजातों में भी गड़बड़ी होने की बात कही गई है। इसके साथ ही गया है कि इसके जरिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

शिकायतकर्ता ने सभी आरोपितों पर समाज में विद्वेष फैलाने, आपराधिक कृत्य कर के करोड़ों रुपए कमाने, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने के साथ हलाल सर्टिफिकेट से मिल रहे पैसे से आतंकियों को फंडिंग होने की आशंका जताई गई है। FIR में कहा गया है कि इससे होने वाले अनुचित लाभ को देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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FIR में कहा गया है कि तेल, साबुन, टूथपेस्ट, शहद आदि तक के लिए हलाल सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जबकि इनके लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये शाकाहारी वस्तुएँ हैं। शाकाहारी वस्तुओं के लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्कयता नहीं होती। इसमें आगे कहा गया है कि एक विशेष वर्ग द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि उन वस्तुओं का इस्तेमाल ना करो, जिन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया गया हो। इससे दूसरे वर्ग के व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

‘पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा’: नूहं हिंसा में धराया है कांग्रेस का विधायक मामन खान

कांग्रेस विधायक मामन खान के साथ मौजूद शहनवाज (बाएँ तीर का निशान) उस पर FIR दर्ज करवाने वाले नंदकिशोर (दाएँ)
कांग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं। वहीं नूहं दंगा शांत हो जाने के बाद भी मामन खान के गुर्गे उन हिंदुओं को खोज-खोज कर पीट रहे हैं जिन्होंने हिंसा के दौरान आरोपित दंगाईयो की जानकारी पुलिस को दी थी। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था। 

ऐसा ही एक मामला इसी महीने 4 सितंबर, 2023 का है जिसमें मामन खान के गुर्गे शाहनवाज़ खान ने मेवात क्षेत्र के मूलथान गाँव की सरपंच के एक परिजन पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस मामले में सरपंच ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि शहनवाज विधायक मामन के साथ नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर किए गए हमले में शामिल था। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है जिसमें मामन खान के साथ दिखने वाले शहनवाज खान ने नंद किशोर प्रजापति को जान से मार डालने की भी धमकी दी थी। शहनवाज नूहं हिंसा में अपनी सूचना पुलिस को देने से नाराज था।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR और शिकायत की कॉपी में 4 सितम्बर को घटी घटना का पूरा व्यौरा है। दरअसल, नूहं के बड़कली चौक और पूरे जिले में 31 जुलाई को दंगा हुआ था जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दंगाइयों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी मामले में नगीना थाना में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान के खिलाफ भी FIR दर्ज हुआ था। जिसमें 14 सितम्बर को ही मामन खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं \15 सितम्बर, 2023 को कांग्रेस MLA खान को दो दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जहाँ पुलिस इसी मामले से जुड़े सबूतों और हिंसा को लेकर पूछताछ कर रही है। बता दें कि नूहं हिंसा की जाँच के हरियाणा की खट्टर सरकार ने विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।

नगीना थाना में दर्ज सरपंच के FIR के अनुसार, पुलिस को नूहं हिंसा में पाकिस्तान और कुछ कट्टरपंथी संगठनों का हाथ होने का अंदेशा था। जिसमें मूलथान गाँव निवासी शहनवाज पुत्र समसुद्दीन के पाकिस्तान व अन्य कई कट्टरपंथियों के साथ मिलीभगत की बात सामने आई है। शहनवाज को मामन खान का सपोर्टर बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मामन खान शहनवाज के हर अपराध में साथ देता है शहनवाज को पाकिस्तान और सऊदी अरब के कई व्हाट्सप्प ग्रुपों से जुड़ा हुआ भी बताया गया है।

शिकायत मे यह भी कहा गया है कि क्योंकि नन्द किशोर प्रजापति ने ही नूहं हिंसा में आरोपित शहनवाज के खिलाफ पुलिस मे शिकायत की थी इसलिए आरोपित उससे पहले से ही रंजिश रखता आया है। 

                                    शहनवाज खान के खिलाफ नगीना थाने में दर्ज FIR की कॉपी

अपनी शिकायत में नन्द किशोर के हवाले से कहा गया है, “आज 4 सितम्बर को शाम करीब 5 बजे मैं उस्मान की बैठक पर कुछ निजी काम से गया था तभी वहाँ पर शहनवाज आया और मुझ पपर जानलेवा हमला कर दिया और लात घूसों से मेरी पिटाई की। शहनवाज के पास अवैध कट्टा भी था लेकिन बचाओ-बचाओ का शोर सुनकर मौके पर कुछ साथी आ गए और किसी तरह मेरी जान बच पाई अन्यथा शहनवाज उस दिन मुझे मार ही डालता। क्योंकि, शहनवाज ने एक दिन धमकी देते हुए कहा था कि तुझे किसी दिन गोली मारूँगा और पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा।”

इस FIR में शहनवाज को मामन खान के साथ दंगों मे शामिल होना बताया गया है। हरियाणा पुलिस से की गई शिकायत में नंदकिशोर ने यह बात साफ़-साफ़ कही है, “कांग्रेस विधायक मामन खान से नजदीकी के चलते शहनवाज के हौसले बुलंद हैं जिससे हिन्दू वहाँ डरे हुए हैं। क्योंकि, उसे कानून का डर नहीं है ऐसे मे कभी भी मेरे साथ अनहोनी हो सकती है।”

शिकायत में आरोपित शहनवाज पर  मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की माँग की गई है। साथ ही नंदकिशोर ने अपने जान की हिफाजत के लिए अनुरोध किया है। FIR में  शहनवाज और मामन खान के बीच के दंगे से एक महीने पहले के व्हाट्सप्प कॉल डीटेल वगैरह की जाँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की गई है। 

पुलिस ने कहा हो रही है कार्रवाई

गौरतलब है कि इस मामले में FIR 5 सितम्बर को ही दर्ज कर लिया गया था। वहीं ऑपइंडिया ने जब इस मामले में नगीना थाने के SHO जगबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक शहनवाज खान की गिरफ्तारी नहीं हुई है, वह फरार बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज हुई है और जल्द ही कानून सम्मत कार्रवाई होगी। 

गुजरात : ‘हिन्दुओं को मारो, जुलूस रोको… कोई जिंदा नहीं जाना चाहिए’: मदरसे और आसपास के घरों की छतों से किया शिव यात्रा पर हमला

                 मुस्लिमों की भीड़ ने घेरकर किया शिव यात्रा पर हमला (तस्वीर- ऑपइंडिया गुजराती)
गुजरात के खेड़ा जिले के थसरा में शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को श्रावण के आखिरी दिन आयोजित भगवान शिव यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। यह हमला तब किया गया जब यात्रा मदरसे के पास से गुजर रही थी तभी अचानक से शिव यात्रा पर पथराव शुरू हो गया, जिससे वहाँ अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। अब इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

आज हिन्दू जानना चाहता है कि कहीं न कहीं हिन्दुओं की शोभा यात्राओं पर होती मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा की जाने वाली पत्थरबाज़ी पर सरकार कब प्रहार करेगी? क्यों नहीं सरकार और न्यायालय इन जेहादियों और इनके समर्थकों को ब्लैकलिस्ट कर सरकारी सुविधाओं से वंचित करती? हिन्दू अपने त्यौहार भारत में नहीं मनाएंगे तो कहाँ मनाने जाएं? सरकार और न्यायालय पेट्रोल बम और पत्थर सप्लाई करने वालों पर प्रहार करेगी? एकदम इतने पत्थर कहाँ से आये? पत्थरबाज़ी कोई अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित षड़यंत्र है। बाहरी दुश्मनों से निपटने से साथ-साथ देश में पल रहे इन जेहादियों से निपटने के लिए सरकार और न्यायालय को सख्त होना पड़ेगा। हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं और नेताओं को टीवी पर बैठ प्रवचन देने की बजाये इन जेहादियों के विरुद्ध सड़क पर आकर राज्य, केंद्र और न्यायालय को इन पर प्रहार करने के बाध्य करें। 

घटना के संबंध में थसरा पुलिस स्टेशन में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से सभी की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। एफआईआर से पता चलता है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने पहले डीजे को लेकर जुलूस पर हमला कर दिया।

इस मामले में थसरा पुलिस ने विजय परमार नाम के युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। जिसमें बताया गया कि हर साल की तरह इस बार भी शुक्रवार को श्रावण मास की समाप्ति पर भगवान शिव की शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके लिए कानूनी मंजूरी भी ले ली गई थी। 

हर साल यह यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होती है और बाघी, बलियादेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला, तीनबत्ती और आशापुरी मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति रखकर नागेश्वर मंदिर वापस लौटती है।

जानकारी के मुताबिक यात्रा सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और थसरा और आसपास के गाँवों से करीब 1000 हिंदू श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। जिसमें महिला-पुरुष, बच्चे सभी शामिल थे। यात्रा में दो डीजे बुलाये गए  थे तथा पूरे मार्ग पर थसरा थाने से आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर तय रूट के अनुसार ही बालीदेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला होते हुए करीब साढ़े तीन बजे तीनबत्ती पहुँची। 

मुस्लिमों ने मदरसे का हवाला देकर बंद कराया डीजे 

यात्रा के दौरान लगातार भक्ति गीत बजते रहे। शिकायत में कहा गया है कि जब जुलूस तीनबत्ती चौक स्थित मदरसे के पास पहुँचा, तो थसरा नगर पालिका सदस्य मोहम्मद अबरार रियाजुद्दीन सैयद, अस्पाक मजिम्मियान बेलीम और लगभग पचास अन्य मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस के पास पहुँचे और आयोजकों से कहा, “हमारा मदरसा बगल में है, अपना डीजे बजाना बंद करो।” और इतना कहने के बाद ही मारपीट कर डीजे बंद कर दिया गया।

मदरसे और आसपास के घरों की छतों से हुआ पथराव 

जैसा कि FIR में बताया गया है कि जब ये लोग लौट रहे थे, तो मदरसे और आसपास के घरों की छतों पर इकट्ठा हुए मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, ‘हिन्दुओं को रोको… हिन्दुओं के  जुलूस को रोको’ और ‘कोई हिन्दू जिन्दा नहीं जाना चाहिए। तभी पथराव शुरू हो गया था और जुलूस पर ईंटें और बड़े-बड़े पत्थर फेंके जाने लगे।

 
इस बीच जुलूस में साथ चल रहे पुलिसकर्मियों और यात्रा के नेताओं ने पथराव रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन उत्तेजित मुस्लिमों की भीड़ ने पथराव नहीं रोका। इससे थसरा थाने के कई पुलिसकर्मी और यात्रा में शामिल कई लोग घायल हो गए। तभी हालात बिगड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का काफिला भी मौके पर पहुँच गया, जिसे देखकर पथराव करने वाले लोग मदरसे और आसपास के घरों की छतों से उतरकर भाग निकले।

17 के खिलाफ नामजद और पचास अन्य की भीड़ के खिलाफ शिकायत

थसरा में शिव यात्रा पर हमले के बाद इस मामले में कुल 17 मुस्लिमों को नामजद किया गया है और बाकी 50 मुस्लिम लोगों पर धारा 143, 147, 148, 149, 153A, 295A, 323, 324, 504, 505, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। थसरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उनके नाम इस प्रकार हैं :
  1. मुहम्मद अबरार रियाज़ुद्दीन सैयद
  2. अस्पाक मजिम्मियान बेलीम
  3. ज़ैद अली मुहम्मद अली सैयद
  4. अतीक मालेक
  5. अहद सैयद
  6. हारून पठान
  7. रुकमुद्दीन रियाकतअली सैयद
  8. फ़िरोज़ मजीत खान पठान
  9. इदरीश
  10. नावेद
  11. जुनैद
  12. तनवीर सैयद
  13. फैजान सैयद
  14. फ़ोम बैटरी
  15. जाबिर खान इनायत खान पठान
  16. मुर्गा
  17. अल्ताफ खान मुख्तयार खान पठान
15 सितंबर को, श्रावण के शुभ महीने के आखिरी दिन, गुजरात के खेड़ा जिले के थसरा इलाके में भगवान शिव की बारात पर क्रूरता से हमला हुआ। खबरों के मुताबिक, जब हिंदू श्रद्धालु इलाके से जुलूस निकाल रहे थे तो एक मदरसे से पथराव किया गया। इस मामले में “शिवजी की सवारी” यात्रा के आयोजक विजय दास जी महाराज ने कहा कि हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। हमला इस तरह से किया गया कि इस शिव यात्रा में शामिल  श्रद्धालुओं को यात्रा बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं इस घटना में दो अधिकारी और एक पीएसआई समेत तीन पुलिस अधिकारियों को भी घायल हुए हैं। 

गुजरात के खेड़ा में हिंदू त्योहारों पर पथराव आम बात 

खेड़ा गुजरात का वही इलाका है जहाँ पिछले साल नवरात्रि का उत्सव तब हिंसक हो गया था जब आरिफ और जहीर नाम के दो युवकों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू भक्तों पर पथराव किया था।
रिपोर्टों में कहा गया था कि आरिफ और जहीर के साथ आई मुस्लिम भीड़ ने नवरात्रि उत्सव के दौरान हंगामा किया था। इससे पहले, यह बताया गया था कि कैसे खेड़ा में एक मुस्लिम शिक्षक ने छात्रों को नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा करने के बजाय मुहर्रम-शैली के शोक में अपनी छाती पीटने और ‘या हुसैन’ का नारा लगाने के लिए कहा था। ऐसी भी खबरें आई थी कि जहाँ मुस्लिम पुरुषों ने फर्जी नामों के तहत नवरात्रि स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। साथ ही कुछ इलाकों में स्थानीय मुस्लिमों ने नवरात्रि मनाने का विरोध भी किया था।

कर्नाटक : सुधीर चौधरी ने पूछा ‘सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए क्यों’ तो दर्ज हुई FIR: मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी धमकी, मोहम्मद ज़ुबैर की स्व-घोषित ‘फैक्ट चेक’ ने किया गुमराह

                                     प्रियांक खरगे, सुधीर चौधरी और फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार एक नए विवाद में फँस गई है। इसकी शुरुआत 8 सितंबर 2023 को हुई, जब भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अखबार में छपे विज्ञापन की कटिंग शेयर की। इस विज्ञापन में कर्नाटक सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजना के बारे में जानकारी दी गई थी।

इस विज्ञापन को देखकर ये लगता है कि इसे सरकार ने नहीं, बल्कि एआर-रहीम ट्रस्ट नाम के किसी निजी संगठन की ओर से दिया गया था। इसे कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम लिमिटेड की ओर से जारी किया गया है। इस विज्ञापन को लेकर ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा साझा किए गए विज्ञापन में बताया गया है कि कर्नाटक सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों को टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। बता दें कि स्वावलंबी सारथी योजना पिछले महीने कर्नाटक सरकार के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमीर अहमद खान ने शुरू की थी।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से गैर-हिंदुओं के लिए है। यहाँ तक ​​कि आर्थिक रूप से गरीब हिंदू समुदायों को भी इससे बाहर रखा गया है। मंत्री ने इसे खुलेआम भेदभाव और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया है।

चंद्रशेखर ने कहा कि इसी पार्टी के नेता विदेश जाकर देश के संविधान के खतरे में होने की बात करते हैं। उन्होंने इसे ‘राज्य प्रायोजित धर्मांतरण प्रलोभन’ कहा। उन्होंने इस योजना को ‘कर्नाटक में राहुल गाँधी की कांग्रेस द्वारा कुछ समुदायों को रिश्वत देने की बेशर्म नीति और तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया।

                                                   एआर-रहीम ट्रस्ट द्वारा दिया गया विज्ञापन

चन्द्रशेखर ने कहा, “सभी कन्नडिगाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करके एक समुदाय को बेशर्मी से रिश्वत देकर भेदभाव और संविधान की धारा 14 का उल्लंघन किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए राज्य-प्रायोजित प्रलोभन है ये। यह यूपीए/I.N.D.I गठबंधन के वंशवादियों की तुष्टिकरण और भ्रष्ट राजनीति है।”

8 सितंबर को ही AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने राजीव चंद्रशेखर और तेजस्वी सूर्या की पोस्ट का ‘फैक्ट चेक’ करने की कोशिश की। यहाँ ध्यान रखना जरूरी है कि AltNews और मोहम्मद जुबैर ऑफिशियली खबरों के ‘फैक्ट चेक’ के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी कर रही है। यह जानकारी कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे दे चुके हैं।

मोहम्मद जुबैर ने राजीव चन्द्रशेखर और तेजस्वी सूर्या के पोस्ट का फैक्ट चेक करने के चक्कर में कुछ दावे भी किए, जिसमें-

1-जुबैर ने दावा किया कि दोनों नेता इस योजना का सांप्रदायिकरण कर रहे हैं और यह योजना एससी/एसटी के लिए भी उपलब्ध है।
2- इस योजना में SC/ST को 75% या अधिकतम 4 लाख तक की सब्सिडी राशि मिल सकती है।
3- अल्पसंख्यक 50% या अधिकतम 3 लाख तक की सब्सिडी राशि के लिए पात्र हैं।
3- भाजपा के तहत भी ऐसी ही योजना थी, इसलिए चंद्रशेखर और सूर्या गलत सूचना फैला रहे थे।

चूँकि जुबैर को अपने हिसाब से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और अपना एजेंडा चलाने की पुरानी आदत है, उसने इस मामले में भी ऐसा ही किया। उसने अपनी बात साबित करने के लिए 2 स्क्रीनशॉट्स शेयर किए। जुबैर ने ‘डिस्ट्रिक्टइंफो‘ वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स को आधिकारिक जानकारी के तौर पर शेयर किया, जबकि वो वेबसाइट निजी है, जिसका सरकार से कोई लेना देना ही नहीं है।

डिस्ट्रिक्ट इंफो वेबसाइट का अबाउट अस सेक्शन, जो ये बताता है कि वेबसाइट थर्ड पार्टी से मिली जानकारियाँ साझा करती है।

जुबैर ने जिस आर्टिकल का इस्तेमाल अपने फैक्ट चेक में किया, वो 19 अगस्त 2023 को पब्लिश हुआ था, कर्नाटक सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद। ये अलग बात है कि उस दिन उस वेबसाइट के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एयर फ्रायर और इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के विज्ञापन वाले अमेजन के लिंक पोस्ट कर रहा था। उस वेबसाइट के सोशल मीडिया पर महिलाओं के कपड़े और जूतों से जुड़े लिंक भी पोस्ट किए जाते हैं।

                        डिस्ट्रिक्ट्स इंफो के सोशल मीडिया हैंडल पर अमेजन के सामानों की मार्केटिंग

वैसे, ये वेबसाइट देखने में बिल्कुल साफ है कि वो कोई भरोसेमंद वेबसाइट नहीं है, जिसका इस्तेमाल फैक्ट चेक में किया जाए। हालाँकि जो जानकारी वेबसाइट पर है, वो पूरी तरह से गलत भी नहीं है।

कांग्रेस सरकार के बजट के अनुसार, वास्तव में इस योजना की घोषणा सरकार ने की थी। हालाँकि महत्वपूर्ण बात ये है कि उक्त वेबसाइट और मोहम्मद जुबैर ने शायद जानबूझकर पूरी बात नहीं रखी और पाठकों को ये पता करने के लिए कि क्या सही है, उन्हीं पर छोड़ दिया।

जुबैर ने इन बातों को पाठकों के विवेक पर छोड़ा

जब कोई व्यक्ति ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ के बारे में सर्च करता है, तो वह केएमडी – कर्नाटक अल्पसंख्यक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुँचता है। इस सरकारी वेबसाइट पर भी इस योजना के बारे में जानकारी दी गई है कि ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है।
                            कर्नाटक सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना के बारे में जानकारी
                                                योजना का लाभ पाने की शर्तों की जानकारी
वेबसाइट स्पष्ट रूप से कहती है कि इस योजना के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक को धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए। यह योजना अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी है, और चल रही है, जैसा कि “ऑनलाइन आवेदन करें” बटन से साफ पता चला है।
अब, कोई यह तर्क दे सकता है कि चूँकि यह अल्पसंख्यक विभाग की वेबसाइट है, इसलिए यह केवल अल्पसंख्यकों से जुड़ी जानकारी ही देगी। ऐसे में हमने समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट को भी देखा और ये जानने की कोशिश की कि क्या ये योजना एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए भी चल रही है, जैसा कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में घोषणा की थी?
उस वेबसाइट पर ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ नाम की कोई योजना नहीं दिखी और न ही उसके लिए आवेदन करने की कोई जगह मिली। जब ऑपइंडिया ने समाज कल्याण विभाग से बात की तो हमें साफ तौर पर बताया गया है कि इस योजना का लाभ सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही मिलेगा। एससी/एसटी समुदाय के लोगों को नहीं।
हालाँकि, यह सच है कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदाय के लिए इस योजना की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक की जानकारी से ऐसा लगता है कि यह योजना अभी तक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई है, एससी/एसटी समुदाय के लिए नहीं। यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय इस योजना का लाभ तभी प्राप्त कर सकता है, जब इस बारे में सरकार अधिसूचना जारी करे। फिलहाल तो ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है।
इस योजना को लेकर आजतक के पत्रकार सुधीर चौधरी ने 12 सितंबर को एक शो किया था। इस शो में उन्होंने अंबेडकर विकास निगम के प्रमुख पी नागेश के हवाले से बताया था कि यह योजना अभी एससी/एसटी समुदाय के लिए लागू नहीं है। हालाँकि इसे इन समुदायों के लिए शुरू करने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने पुष्टि की थी कि ये योजना अभी तक एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए अधिसूचित नहीं की गई है।
जब मोहम्मद जुबैर अमेजन के विज्ञापनों को शेयर करने वाली एक ‘ऐरी-गैरी’ वेबसाइट पर भरोसा कर रहे था, तब भी इस बात की पूरी जानकारी मौजूद थी कि कर्नाटक सरकार ने इस योजना की घोषणा तो अल्पसंख्यकों के साथ ही एससी/एसटी वर्ग के लिए भी की थी। इसे लागू भी कर दिया गया, लेकिन सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए। एससी/एसटी के लिए इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इस बीच एक अन्य ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने एक और भ्रामक दावा किया। जुबैर ने ट्वीट किया, ”बीजेपी सरकार में भी ऐसी ही एक योजना थी। यहाँ अल्पसंख्यक विभाग @DOMGOK के कुछ पुराने ट्वीट हैं, ‘प्रत्येक लाभार्थी को वाहन की कीमत 33% सब्सिडी मिलेगी, जिसमें ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी खरीदने के लिए अधिकतम 2.5 लाख रुपये दिए जाएँगे’।”
                                                                  जुबैर का ट्वीट
ज़ुबैर ने फिर से चालाकी से सेलेक्टिव जानकारी साझा की, ताकि इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट न हो।
हालाँकि, यह भी सच है कि ऐसी ही एक योजना भाजपा सरकार में भी चल रही थी। ये जानकारी कर्नाटक के अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 2021-2022 में दी गई थी, जिसमें बताया गया है कि 31 मार्च 2022 तक वाहनों की खरीद के लिए कितनी सब्सिडी दी गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 1,333 वाहनों पर सब्सिडी दी गई थी।
                                                   सरकारी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी
हालाँकि, जुबैर द्वारा डाले गए स्क्रीनशॉट भ्रम पैदा करने वाले थे, क्योंकि भाजपा सरकार ने 2022 में इस योजना को होल्ड (रोक) पर रख दिया था।
जुबैर ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए, उनमें से एक कर्नाटक के अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का जवाब था। ये जवाब 17 अक्टूबर 2022 को दिया गया था। इसमें विभाग ने लिखा था, “प्रत्येक लाभार्थी को वाहन मूल्य पर 33% सब्सिडी मिलेगी, अधिकतम रु 2.5 लाख रुपए। अगर ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी बैंक लोन पर खरीदा जा रहा है तो उसके लिए बैंक का पत्र भी जमा करना होगा। (1/1)”
कोई भी व्यक्ति ध्यान देगा कि अगर किसी ट्वीट में 1/1 लिखा है, तो इसका मतलब है कि जवाब अभी अधूरा है और वो दूसरे ट्वीट में आ रहा है। कम से कम असली फैक्ट चेकर तो इस बात पर ध्यान देगा ही। चूँकि अगले ट्वीट में पूरा मामला साफ हो जाता, इसलिए जुबैर ने सिर्फ अपने काम का अधूरा ट्वीट ही लगाया।
मोहम्मद जुबैर ने जिस दूसरे ट्वीट को ‘जानबूझकर’ छोड़ा, उसमें साफ लिखा है कि ये योजना अब बंद हो चुकी है। ये सभी ट्वीट्स अब भी विभाग के सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं।
जुबैर ने दिसंबर 2022 का एक और स्क्रीनशॉट शेयर किया था। ये भी दो हिस्सों में है, लेकिन उसने जानबूझकर पहला हिस्सा ही शेयर किया है।
इस ट्वीट में भी साफ लिखा है कि ये योजना लागू की जाएगी। इसका जवाब दिसंबर माह में दिया गया है। इस बात से ये साफ है कि ट्वीट के समय ये योजना बंद थी, चल नहीं रही थी।
अब ये सब कुछ पूरी तरह से साफ है कि किस तरह से जुबैर ने KMDC के जवाबी ट्वीट का महज एक हिस्सा ही शेयर किया, दूसरे को छोड़ दिया (जिसमें साफ साफ लिखा है कि ये योजना उस समय बंद थी)। लोग गुमराह ही रहें, इसलिए उसने एक और स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया।
इन सब तथ्यों के आधार पर ये बात साफ है कि जब मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आई, तब ये योजना बंद थी। ऐसे में ये कांग्रेस सरकार की ही योजना है, जिसके बारे में सरकार ने पूरी योजना बनाई और बजट में इसकी घोषणा की। बजट में घोषणा के समय ये कहा गया था कि इस योजना का लाभ एससी/एसटी समुदाय को भी मिलेगा, लेकिन अब तक ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही चलाई जा रही है।
ऐसे में ये भी संभव है कि कर्नाटक सरकार की अन्य योजनाएँ जो एससी/एसटी/ओबीसी के लिए भी चल रही हैं, उनका भी हश्र ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ की तरह ही हुआ हो।
उदाहरण के लिए, कर्नाटक सरकार की एक और योजना है, जिसे ऐरावत योजना कहा जाता है। इस योजना के तहत एससी/एसटी समुदाय के ग्रामीण युवाओं को सब्सिडी वाली गाड़ियाँ पाने की सुविधा देने के लिए ओला और उबेर के साथ पार्टनरशिप की गई है। हालाँकि, ये योजना स्वावलंबी सारथी योजना के बराबर नहीं है, जो सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए थी, बल्कि ये योजना एससी/एसडी समुदाय के ग्रामीण युवाओं के लिए है।

आजतक के सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR और जुबैर का फेक न्यूज

जब जुबैर ने भ्रामक जानकारी फैलाना शुरू कर दिया तो प्रियांक खड़गे, जो जुबैर को ‘चीफ’ कहना पसंद करते हैं, ने सुधीर चौधरी को कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद उनके के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के लिए एफआईआर दर्ज करा दी गई।
सुधीर चौधरी ने एक शो किया था, जिसमें उन्होंने इस योजना के बारे में बताया था कि कैसे इसे हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही हिंदू विरोधी बयान देने वाले प्रियांक खड़गे ने ट्वीट किया कि सुधीर गलत सूचना फैला रहे हैं और वह एंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
रात 11:36 बजे मोहम्मद जुबैर ने सबसे पहले ट्वीट किया था कि सुधीर चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

इन सबके बीच, सुधीर चौधरी ने एक और शो किया, जिसमें उन्होंने ये बातें साफ कीं।

1-बजट में कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि यह योजना अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदायों के लिए उपलब्ध होगी
2-अखबार और कांग्रेस सरकार की अपनी वेबसाइट के विज्ञापन से साबित होता है कि इस योजना के लिए पात्रता की आवश्यकता यह है कि व्यक्ति अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए।
3-एससी/एसटी समुदाय के लिए योजना की पात्रता अभी तक अधिसूचित नहीं की गई है।
4-इस बात की पुष्टि अंबेडकर विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने आजतक से की है।
5-साफ है कि यह योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
यहाँ ये ध्यान देने लायक बात है कि असल चीजों को अभी तक मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट नहीं किया है, जबकि सुधीर चौधरी जब शो कर रहे थे, तब यही जुबैर लगातार ट्वीट पर ट्वीट कर रहा था।
स्व-घोषित फैक्ट चेकर जुबैर ने इन मामले में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं किया। सच्चाई ये है कि उसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इस पूरे मामले में आगे चलकर यह संभव है कि कर्नाटक सरकार अपनी घोषणा पर अमल करते हुए एससी/एसटी वर्ग के लिए भी योजना को अधिसूचित कर दे, लेकिन अभी तथ्य यही है कि ये योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
साफ है कि इस मामले में सुधीर चौधरी हों या अन्य मीडिया हाउस, उन्होंने कोई फेक न्यूज नहीं फैलाया है। फिर भी कर्नाटक सरकार ने सच्चाई को स्वीकार करने की जगह उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की है।
चूँकि कर्नाटक सरकार की ये योजना अगर एससी/एसटी वर्ग के लिए लागू होती तो वो इसका नोटिफिकेशन सार्वजनिक करते, न कि जुबैर के फर्जी फैक्ट चेक की आड़ में सुधीर चौधरी पर एफआईआर दर्ज करते।
ऐसे में साफ है कि सुधीर चौधरी पर एफआईआर सिर्फ इसलिए की गई है कि अगर कोई सच्चाई बताने का प्रयास करेगा और इससे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की असलियत बाहर आएगी, तो वो बच नहीं पाएगा। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उसे प्रताड़ित किया जाएगा।
मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।(साभार)