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नूहं हिंसा : कांग्रेस MLA मामन खान को अंतरिम जमानत मिलने पर हिन्दुओं ने पूछा – जब मामन खान को जमानत मिल सकती है तो फिर मोनू मानेसर को क्यों नहीं?

                                                                                                                                 साभार: ANI
जुलाई 2023 के अंत में हरियाणा के नूहं में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा के मामले में कांग्रेस विधायक मामन खान को अंतरिम जमानत मिल गई है। वहीं हिन्दू कार्यकर्ताओं ने उसकी रिहाई का विरोध किया है। फिरोजपुर झिरका से विधायक मामन खान का नाम मेवात के नल्हड़ मंदिर पर हुए हमले और उसके बाद भड़की हिंसा में सामने आया था। मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को नूहं की अदालत ने उसे 2 मामलों में अंतरिम जमानत दे दी। 18 अक्टूबर को इस पर अगली सुनवाई होगी, तब तक के लिए उसे अंतरिम राहत मिली है।

मामन खान को इसके बाद रिहा कर दिया गया है। एडिशन डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशन जज अजय शर्मा ने उसे अंतरिम जमानत दी। मामन खान को 15 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। आपको याद होगा कि कैसे मेवात में हिन्दू कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली जा रही शोभा यात्रा पर हमला किया गया था। पत्थरबाजी से वारदात शुरू हुई और बाद में भीड़ अस्पताल तक में घुस गई। सोहना, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल तक में हिंसा फ़ैल गई थी। मेवात में ‘लव जिहाद’ की कई घटनाएँ भी सामने आती रही हैं।

अब गोरक्षक मोनू यादव के गाँव मानेसर में मामन खान की रिहाई के आदेश के बाद हिन्दुओं की पंचायत बैठी। गाँव स्थित भीष्म मंदिर में ये बैठक हुई। बता दें कि राजस्थान में नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू यादव का नाम आया था, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर के राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। 7 अक्टूबर को दोबारा हिन्दू कार्यकर्ताओं की बैठक होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने पूछा कि जब कांग्रेस विधायक मामन खान को जमानत मिल सकती है तो फिर मोनू मानेसर को क्यों नहीं?

अंतरिम जमानत के बाद मामन खान अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस नेता आफताब अहमद के आवास पर पहुँचा। कुछ दिनों पहले VHP की बैठक में इमरान नाम का एक संदिग्ध युवक मिला था, जिसके बाद पत्रकारों और बाहरी लोगों को बैठक में एंट्री नहीं दी जा रही है। पटौदी पुलिस भी एक मामले को लेकर मोनू मानेसर को राजस्थान से लाने की जुगत में लगी है। वहीं अब नूहं हिंसा में मामन खान की रिहाई के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उसके साथ नरमी क्यों बरती जा रही है?

‘पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा’: नूहं हिंसा में धराया है कांग्रेस का विधायक मामन खान

कांग्रेस विधायक मामन खान के साथ मौजूद शहनवाज (बाएँ तीर का निशान) उस पर FIR दर्ज करवाने वाले नंदकिशोर (दाएँ)
कांग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं। वहीं नूहं दंगा शांत हो जाने के बाद भी मामन खान के गुर्गे उन हिंदुओं को खोज-खोज कर पीट रहे हैं जिन्होंने हिंसा के दौरान आरोपित दंगाईयो की जानकारी पुलिस को दी थी। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था। 

ऐसा ही एक मामला इसी महीने 4 सितंबर, 2023 का है जिसमें मामन खान के गुर्गे शाहनवाज़ खान ने मेवात क्षेत्र के मूलथान गाँव की सरपंच के एक परिजन पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस मामले में सरपंच ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि शहनवाज विधायक मामन के साथ नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर किए गए हमले में शामिल था। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है जिसमें मामन खान के साथ दिखने वाले शहनवाज खान ने नंद किशोर प्रजापति को जान से मार डालने की भी धमकी दी थी। शहनवाज नूहं हिंसा में अपनी सूचना पुलिस को देने से नाराज था।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR और शिकायत की कॉपी में 4 सितम्बर को घटी घटना का पूरा व्यौरा है। दरअसल, नूहं के बड़कली चौक और पूरे जिले में 31 जुलाई को दंगा हुआ था जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दंगाइयों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी मामले में नगीना थाना में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान के खिलाफ भी FIR दर्ज हुआ था। जिसमें 14 सितम्बर को ही मामन खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं \15 सितम्बर, 2023 को कांग्रेस MLA खान को दो दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जहाँ पुलिस इसी मामले से जुड़े सबूतों और हिंसा को लेकर पूछताछ कर रही है। बता दें कि नूहं हिंसा की जाँच के हरियाणा की खट्टर सरकार ने विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।

नगीना थाना में दर्ज सरपंच के FIR के अनुसार, पुलिस को नूहं हिंसा में पाकिस्तान और कुछ कट्टरपंथी संगठनों का हाथ होने का अंदेशा था। जिसमें मूलथान गाँव निवासी शहनवाज पुत्र समसुद्दीन के पाकिस्तान व अन्य कई कट्टरपंथियों के साथ मिलीभगत की बात सामने आई है। शहनवाज को मामन खान का सपोर्टर बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मामन खान शहनवाज के हर अपराध में साथ देता है शहनवाज को पाकिस्तान और सऊदी अरब के कई व्हाट्सप्प ग्रुपों से जुड़ा हुआ भी बताया गया है।

शिकायत मे यह भी कहा गया है कि क्योंकि नन्द किशोर प्रजापति ने ही नूहं हिंसा में आरोपित शहनवाज के खिलाफ पुलिस मे शिकायत की थी इसलिए आरोपित उससे पहले से ही रंजिश रखता आया है। 

                                    शहनवाज खान के खिलाफ नगीना थाने में दर्ज FIR की कॉपी

अपनी शिकायत में नन्द किशोर के हवाले से कहा गया है, “आज 4 सितम्बर को शाम करीब 5 बजे मैं उस्मान की बैठक पर कुछ निजी काम से गया था तभी वहाँ पर शहनवाज आया और मुझ पपर जानलेवा हमला कर दिया और लात घूसों से मेरी पिटाई की। शहनवाज के पास अवैध कट्टा भी था लेकिन बचाओ-बचाओ का शोर सुनकर मौके पर कुछ साथी आ गए और किसी तरह मेरी जान बच पाई अन्यथा शहनवाज उस दिन मुझे मार ही डालता। क्योंकि, शहनवाज ने एक दिन धमकी देते हुए कहा था कि तुझे किसी दिन गोली मारूँगा और पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा।”

इस FIR में शहनवाज को मामन खान के साथ दंगों मे शामिल होना बताया गया है। हरियाणा पुलिस से की गई शिकायत में नंदकिशोर ने यह बात साफ़-साफ़ कही है, “कांग्रेस विधायक मामन खान से नजदीकी के चलते शहनवाज के हौसले बुलंद हैं जिससे हिन्दू वहाँ डरे हुए हैं। क्योंकि, उसे कानून का डर नहीं है ऐसे मे कभी भी मेरे साथ अनहोनी हो सकती है।”

शिकायत में आरोपित शहनवाज पर  मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की माँग की गई है। साथ ही नंदकिशोर ने अपने जान की हिफाजत के लिए अनुरोध किया है। FIR में  शहनवाज और मामन खान के बीच के दंगे से एक महीने पहले के व्हाट्सप्प कॉल डीटेल वगैरह की जाँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की गई है। 

पुलिस ने कहा हो रही है कार्रवाई

गौरतलब है कि इस मामले में FIR 5 सितम्बर को ही दर्ज कर लिया गया था। वहीं ऑपइंडिया ने जब इस मामले में नगीना थाने के SHO जगबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक शहनवाज खान की गिरफ्तारी नहीं हुई है, वह फरार बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज हुई है और जल्द ही कानून सम्मत कार्रवाई होगी। 

ISIS ने भारतीय मुस्लिमों को ‘हिन्दुओं के रक्तपात’ के लिए उकसाया, कहा – मूर्तियाँ तोड़ने वाला युग वापस लाओ

           आतंकी संगठन आईएसआईएस ने मैगजीन 'द वॉयस ऑफ खुरासान' में हिन्दुओं का खून बहाने की धमकी दी
आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (ISIS) ने अपनी पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ का 28वाँ एडिशन जारी किया है। इस एडिशन का कवर पेज हरियाणा की नूहं हिंसा और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे को लेकर बनाया है।

केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर लिखे भड़काऊ लेखों में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इन जहर बुझे लेखों में भारत के मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ने को कहा गया है। आतंकी समूह ने इसमें हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को भी खुली धमकी दी है। ये मैगजीन आईएसआईएस प्रकाशन फ्रंट ‘अल-अज़ैम फाउंडेशन’ पब्लिश करता है।

मैग्जीन के कवर पेज पर टाइटल में लिखा है रक्तपात का जिहाद इस धरती पर हिंदुओं का आखिरी इलाज है। इससे साफ है कि आतंकी संगठन हिंदुओं के खिलाफ लड़ाई में उनके उनका ज़्यादा से ज़्यादा खून बहाने की मंशा रखता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएस ने अपनी प्रोपेगैंडा मैगजीन के नए एडिशन में ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) के बारे में भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ अच्छा खासा-जहर उगला गया है।

NIA के रडार पर है ‘वॉयस ऑफ खुरासान’

टेलीग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में प्रसारित होने वाली आईएस मैगजीन की सामग्री लगातार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) के रडार पर है। इस्लामिक स्टेट मैगजीन के कवर पेज पर उस बुलडोजर की तस्वीर है जिसका इस्तेमाल 31 जुलाई को हरियाणा के नूहं जिले में हुई हिंसा के बाद आरोपितों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए किया गया था।
रिपोर्टों में कहा गया है कि आईएस की प्रोपेगैंडा मैगजीन के लेख में मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि इन दोनों गौरक्षकों ने एक भड़काऊ वीडियो बनाया था। इसके बाद मुस्लिमों पर कथित तौर पर हमला किया गया।
आईएस मैग्जीन ने आगे आरोप लगाया कि हिंसा के बाद मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त कर दिया गया और जला दिया गया और इस कदम को हरियाणा के गृह मंत्री का समर्थन मिला। इसी वजह से मैगजीन ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज से बदला लेने का भी इशारा किया और उन्हें धमकी भी दी।

आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा

ऑपइंडिया ने आतंकी संगठन आईएस की मैग्जीन के नए अंक की पड़ताल में पाया कि ‘मूर्तियों को तोड़ने के स्वर्ण युग को वापस लाओ’ चैप्टर में आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि हिंदू मुस्लिम आक्रमणकारियों से छुटकारा पाने के काबिल नहीं थे। भारत में अंग्रेजों के आने के बाद ही मुस्लिम शासन की चमक फीकी हुई।
इसमें आगे कहा गया है, “अपमान बहुदेववादियों का आखिरी किस्मत है।” इसमें दावा किया गया है कि जो लोग कई देवताओं की पूजा करते हैं वे अपमानित होने के पात्र हैं। आक्रमणकारियों के हाथों सोमनाथ मंदिर और अन्य हिंदू मंदिरों के साथ जो हुआ उस पर फक्र जताया है। इसके साथ ही मैगजीन के लेख में दावा किया गया कि अंग्रेज केवल ‘कुछ धोखेबाजों मुस्लिमों के विश्वासघात की वजह’ से इस्लामी शासन को दबाने में कामयाब रहे।

हिंदुओं पर मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार का आरोप

इस मैगजीन के लेख में भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर ही उगला गया है। भारत और हिंदुओं पर ‘मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार’ करने का आरोप लगाया गया। मैगजीन के प्रचारक लेखक ने ज्ञानवापी में विवादित ढाँचे को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले हिंदुओं पर निशाना साधा है।
इसमें यह बताया गया कि अयोध्या में विवादित ढाँचे पर कब्ज़ा करने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई। लेख में कहा गया है, “हिंदू बहुदेववादी साँप अब साहसी बन रहे हैं और भारत और पूरी दुनिया में इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ अपना सिर उठा रहे हैं।”
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को ‘हिंदू तवागीत (Tawagheet) का सुप्रीम कोर्ट’ कहा। इस्लाम के मुताबिक, तवागीत एक ऐसी चीज़ है जिसकी पूजा खुद के लिए की जाती है। लेख में हिंदुओं के खिलाफ ‘जिहाद’ का भी ऐलान किया गया। इसमें लिखा था, “भारत में मुस्लिमों के लिए इस दुर्दशा और अपमान से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है जब तक कि वे इन कायर गाय-पूजक हिंदू गंदगी के खिलाफ जिहाद के ऐलान का जवाब नहीं देते।”

आईएसआईएस ने पुलिस को ‘कुत्ते’ कहा

अगले चैप्टर ‘रक्तपात की इबादत: इस सांसारिक जीवन में हिंदुओं का आखिरी इलाज’ में आईएसआईएस ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को निशाना बनाया और उन पर नूहं में ‘तलवारों, चाकुओं और बंदूकों से लैस’ हिंदू जुलूस को “मुस्लिम बहुल क्षेत्रों” से गुजरने की मंजूरी देने का आरोप लगाया।
उसने मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी पर जुलूस से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए हिंसा भड़काने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि पुलिस ने साफ कहा है कि हिंसा भड़काने में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं है। आईएसआईएस ने हिंदुओं पर एक इमाम की हत्या करने और मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए उनके के घरों में घुसने और उन्हें गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों को ‘कुत्ते’ कहा।
ISIS ने पुलिस अधिकारियों पर मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उसने भारत के सुप्रीम कोर्ट पर हिंदू यात्राओं को तथाकथित मुस्लिम क्षेत्रों से गुजरने से रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया।

वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहा

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहते हुए आईएसआईएस ने हिंदुओं को मारने की धमकी दी। लेख में कहा गया है, “हम इंशाअल्लाह आपके हर अन्याय और उत्पीड़न का बदला लेंगे, और बहुत जल्द हम आपको आपकी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक के रूप में आपकी दवा का स्वाद चखने के लिए देंगे।”
हिंदुओं के खिलाफ बदला लेने का उकसाते हुए, आईएसआईएस ने भारतीय इस्लामवादियों से ‘हिंदुओं को जिंदा जलाने, उनके घरों, बाजारों और फसलों को जलाकर राख करने’ के लिए कहा। उसने आगे कहा कि ‘उन्हें उनकी गलियों में मार डालो, वाहनों से उन्हें कुचल दो, उनकी पानी की टंकियों में जहर मिला दो और उनके जुलूसों में साँप फेंक दो।’

मीर फैसल की महिमा गाई

फेक न्यूज पैडलर मीर फैसल आईएसआईएस ने खासी इज्जत दी है। उसकी तीन पोस्ट का जिक्र आंतकी संगठन ने 30 जुलाई को अपनी मैगजीन में किया है। इससे ऐसा लगता है कि इस तारीख को आईएसआईएस ने मैगेजीन बनाने के लिए सोशल मीडिया को ‘स्क्रॉल’ किया था। इसमें आतंकी संगठन ने ये भी जिक्र किया है कि मीर फैसल की पोस्ट कहाँ-कहाँ से ली जा सकती हैं।
मीर फैसल एक प्रचारक और सिलसिलेवार फर्जी खबरें बेचने वाला शख्स है। ऑपइंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में उनके झूठ को बड़े पैमाने पर खुलासा किया है। मार्च 2023 में, उसने एक लंबा थ्रेड प्रकाशित किया जिसमें दावा किया गया कि हिंदू हिंसा में शामिल थे।
थ्रेड में कुल 30 वीडियो के साथ कुल 24 ट्वीट थे, जिनमें से 21वाँ ट्वीट अब हटा दिया गया है। ऑपइंडिया ने थ्रेड के शेष ट्वीट्स में सभी झूठों का भंडाफोड़ किया, जिसे यहाँ जाँचा जा सकता है। जून 2022 में, ऑपइंडिया ने मीर फैसल की एक प्रोफ़ाइल बनाई थी, जब उसने ट्वीट किया था कि सभी गैर-मुस्लिम एक जैसे हैं, वह काफिर है।

नूहं हिंसा में क्या हुआ?

इस साल 31 जुलाई को, हरियाणा के मुस्लिम बहुल नूहं जिले में दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। भीड़ ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के जुलूस पर पथराव किया था। पुलिस के अनुसार, 31 जुलाई को दोपहर 2 बजे के आसपास लगभग 200 लोगों का जुलूस एडवर्ड चौक से नूहं शहर की ओर बढ़ने के 10 मिनट बाद हिंसा शुरू हुई।
जैसे ही समूह मुख्य सड़क से नीचे चला गया, एक बड़ी भीड़ ने उस पर पत्थरों से हमला किया गया। हिंदू पक्ष शुरू में पीछे हट गया, लेकिन फिर से संगठित हो गया और इस्लामी भीड़ का सामना किया। खबरों के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष ने जुलूस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी जिसके बाद हिंदू पक्ष के लोग भड़क गए।
नीरज और गुरसेवक नाम के दो होम गार्डों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए और दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। नूंह और गुरुग्राम जिलों में भीड़ ने वीएचपी-बजरंग दल के जुलूस को रोकने की कोशिश की। लगभग दो सप्ताह बाद, 13 अगस्त को सर्व जातीय हिंदू महापंचायत ने पवित्र महीने सावन के आखिरी सोमवार, 28 अगस्त को नूहं में बृज मंडल शोभा यात्रा को फिर से शुरू करने का आह्वान किया।
हिंदू संगठन की इस शोभा यात्रा से पहले नूहं और इसके आसपास के जिले सोमवार (28 अगस्त) को किले में तब्दील हो गए। जिस स्थान पर 31 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी, वहाँ भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। हालाँकि, अधिकारियों ने सोमवार (28 अगस्त) को जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।(साभार)

ट्रिब्यून इंडिया का खुलासा : इमाम फजरू मियाँ ने मस्जिद से फैलाई थी अफवाह, जिससे नूहं में भड़की हिंसा

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ द्वारा किए गए हमले को लेकर ट्रिब्यून इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नल्हड़ की मस्जिद के एक इमाम द्वारा दिए गए फर्जी बयान ने नूहं के मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हुई सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने का काम किया। बता दें कि इस हिंसा की जाँच विशेष जाँच दल (एसआईटी) कर रही है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इमाम फजरू मियाँ ने कथित तौर पर 31 जुलाई को मुस्लिमों को झूठ बोलकर उकसाया था। उसने मस्जिद के लाउडस्पीकर पर फर्जी घोषणा की थी कि जलाभिषेक शोभायात्रा में भाग लेने वालों ने कुछ मुस्लिमों की दुकानों को लूट लिया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने इमाम को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मस्जिद के लाउडस्पीकरों पर किए गए फर्जी दावों के बाद इकट्ठा हुए मुस्लिमों की भीड़ ने लूटपाट, आगजनी और हिंसा शुरू कर दिया। विशेष जाँच दल (एसआईटी) के एक सदस्य ने बताया, “इस घोषणा ने ग्रामीणों के बीच गुस्से को भड़काने का काम किया, जिससे वे लोग भड़क गए। वे लोग पहले से ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो के कारण उत्तेजित थे।” बाद में इन लोगों ने संगठित होकर पत्थर, हथियार इकट्ठे कर शोभायात्रा पर हमला बोल दिया।

इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि मस्जिद के इमाम द्वारा अफवाह फैलाने के बाद कई दूसरे इमामों ने व्हाट्सएप ग्रुपों के साथ-साथ दूसरे मस्जिदों के माध्यम से भी इस अफवाह को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। वहीं, अब इस खुलासे के बाद जाँच एजेंसियाँ भी उन आरोपितों को तलाश रही है, जो नूहं में शोभायात्रा के दौरान अफवाह फ़ैलाने में शामिल रहे हैं। 

 मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिदों से ऐलान कर हर बच्चे, महिला और पुरुष को हथियार लेकर बाहर आने को कहा गया। हिंदुस्तान-9 ने हाल ही में एक बच्चे का वीडियो भी साझा किया था, जिसने कहा था कि मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। एक अन्य महिला गवाह से, जिनसे उन्होंने बात की, थी कथित तौर पर कहा था कि भीड़ हथियार लहरा रही थी, गालियाँ दे रही थी और चिल्ला रही थी कि उनमें से किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

हालाँकि, ऑपइंडिया एक ट्विटर यूजर द्वारा साझा की गई हिंदुस्तान-9 की रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा किए गए दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करती है। 

हालाँकि, एक इमाम द्वारा मुस्लिमों को भड़काने के लिए मस्जिद के लाउडस्पीकरों का उपयोग करने की रिपोर्ट पहले की रिपोर्टों से बिल्कुल मेल खाती है, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिमों ने जलाभिषेक यात्रा के दौरान हिन्दुओं पर हमले की योजना पहले ही बनाई थी और हमले के लिए पत्थरों और काँच की बोतलों को इकट्ठा करने के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। 

फिर भी, यह नया खुलासा लेफ्ट-लिबरल गैंग द्वारा नूहं हिंसा का दोष बिट्टू बजरंगी और मोनू मानेसर जैसे लोगों पर मढ़ने और उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए दोषी ठहराने के प्रयासों के बिल्कुल विपरीत है। हाल के रहस्योद्घाटन में इमाम को कथित तौर पर गलत बयान देकर तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अब यह गिरोह इस नए खुलासे पर कैसे लीपापोती करते हैं। 

बृजमण्डल शोभा यात्रा पर हमला

31 जुलाई को द्वारा आयोजित ‘बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान हरियाणा के नूहं जिले में हिंसा भड़क उठी। हरियाणा के मुस्लिम बहुल क्षेत्र नूहं में शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। 

दिल्ली से लेकर हरियाणा तक दंगों में आम आदमी पार्टी नेता ही क्यों आरोपित?

ताहिर हुसैन के बाद अब नूँह दंगों में हत्यारोपित जावेद अहमद 
हरियाणा के नूँह और गुरुग्राम के इलाकों में हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप कुमार की मौत हो गई थी। सोहना में प्रदीप की हत्या के मामले में AAP नेता जावेद अहमद के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी निकलकर सामने आ रही हैं कि जावेद का भतीजा तौसीफ फरीदाबाद के चर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में दोषी पाया गया था। उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आप नेता जावेद अहमद का नूँह दंगों में नाम आते ही आम आदमी पार्टी उसके बचाव में उतर गई है ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में AAP ने मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन के बचाव में किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AAP नेता जावेद अहमद के सोहना इलाके में लगे पोस्टर में उसे अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बताया गया है। वहीं, नूँह दंगे में हत्या और मुस्लिम दंगाई भीड़ का नेतृत्व करने के मामले में आप नेता पर FIR दर्ज होने के बाद दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ट्वीट किया और अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछा है। सचदेव ने लिखा, “दिल्ली में ताहिर हुसैन और अब हरियाणा में जावेद अहमद… जगह अलग हो सकती है, पर पार्टी एक ही है।”

सचदेव ने AAP सुप्रीमों अरविन्द केजरीवाल से सवाल पूछा है, “क्या दंगा करना और मासूमों की हत्या करना ही है AAP की अलग तरह की राजनीति है?” वहीं उन्होंने आगे AAP के दंगाई और हिंदू-विरोधी चेहरे की बात करते हुए केजरीवाल को लताड़ लगाई है। 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में उतरी पार्टी 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए हैं। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा (Anurag Dhanda) ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”
AAP नेता अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि जावेद अहमद जो हमारी पार्टी के नेता है उनके खिलाफ झूठी FIR दर्ज करवाई गई है। उन्होंने दावा किया कि जहाँ पर ये घटना हुई उस दौरान जावेद उस जगह से करीबन 100-150 किलोमीटर दूर थे।

‘इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा’: जावेद अहमद 

बजरंग दल नेता प्रदीप की हत्या के मामले में पुलिस को एक फुटेज भी हाथ लगा है, जिस सीसीटीवी फुटेज में बजरंग दल के नेता प्रदीप को घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया है। बता दें कि 31 जुलाई को हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप शर्मा को गाँव रायसीना के समीप गंभीर रूप से हमला किया गया था, जिसके 1 दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। इस मामले में आप नेता जावेद अहमद पर FIR दर्ज हुई है। 
दर्ज FIR में चश्मदीद पवन ने बताया, “नूहं के नल्हड़ मंदिर से प्रदीप कुमार और मुझे रेस्क्यू कराने के बाद नूहं की पुलिस लाइन लाया गया। वहाँ से रात 10:30 बजे वो अपनी तीन गाड़ियों में घर के लिए निकले। उन्हें एक पुलिस वैन एस्कॉर्ट कर रही थी, लेकिन सोहना के पास पुलिस वैन के पुलिसकर्मी ये कहते हुए चले गए कि आगे रूट क्लीयर है। इसके बाद एक स्कॉर्पियो कार ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। इसके बाद केएमपी पर उनकी गाड़ी को कार ने ओवरटेक करके रुकवा लिया। पवन के मुताबिक, “भीड़ में मौजूद जावेद अहमद ने कहा कि इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा।”
प्रत्यक्षदर्शी पवन के अनुसार, दंगाई मुस्लिम भीड़ ने दोनों को कार से निकाल कर बुरी तरह पीटा। पवन के मुताबिक उसे तो किसी तरह पुलिस भीड़ के चंगुल से निकाल कर ले गई, लेकिन प्रदीप नहीं निकल सके क्योंकि उनके सिर पर दंगाइयों ने रॉड मार दी थी। वहीं बाद में प्रदीप की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई। पवन ने एफआईआर में लिखाया कि वो जावेद अहमद को अच्छी तरह पहचानते हैं। इसी बीच सोहना चौक पर 200 लोगों की भीड़ मिली जिसे जावेद अहमद लीड कर रहा था।
इससे पहले दिल्ली दंगों के समय भी तमाम वीडियो सबूत मिलने के बाद भी मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी अंत तक बचाती रही थी वही एक बार फिर दोहराया जा रहा है। AAP ने तब उलटा ताहिर हुसैन को ही पीड़ित बताते हुए कहा था कि भीड़ उसके घर में घुस गई। बता दें कि नूहं दंगा मामले में अब तक कुल 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 80 को एहतियातन हिरासत में लिया गया है तथा 104 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।