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आयकर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से दिमागी नक्सलियों के नेटवर्क की परतें खुलीं, GenZ की वायरल रील ने भी खोली पोल

विदेशी भीख पर देश में माहौल करने की जो कोशिश हो रही है, समय आ गया है हर देशप्रेमी को इनसे होशियार रहने की जरुरत है और जरुरत पड़ने पर पुलिस की सहायता करनी चाहिए। CAA से लेकर अब कॉकरोचों के हुए प्रदर्शन में सभी ने देखा कि किस तरह आन्दोलनजीवियों को खाना सप्लाई किया जा रहा था, जबकि झाड़खंड में भी छात्र प्रदर्शन/धरना दे रहे थे लेकिन वहां कोई दानवीर नहीं पहुंचा, क्यों? मतलब साफ है बीजेपी शासित राज्यों में तिल का ताड़ बनाकर अशांति फैलानी है। सरकार और पुलिस तो अपना काम कर रहे हैं लेकिन जनता को ऐसे लोगों से होशियार रहने की जरुरत है।    

आयकर विभाग ने एक बार फिर देशव्यापी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शुरू की है। इससे पहले आयकर विभाग ने नोटबंदी के समय काले धन को बाहर निकालने के लिए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शुरू की थी। इस बार निशाने पर वे कंपनियां हैं जो अपने आयकर रिकॉर्ड में या तो बहुत कम कारोबार दिखा रही हैं, अथवा कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं दिखातीं, लेकिन इसके बावजूद बहुत बड़ी रकम विदेश भेज रही हैं। विभाग को इन विदेशी प्रेषणों और घोषित कारोबार के बीच स्पष्ट असंगति मिली है। दरअसल, ये वो दिमागी नक्सली हैं, जो देश में रहकर भी देश के साथ गद्दारी करने में लगे हुए हैं। आयकर विभाग ने ऐसे ही दिमागी नक्सलियों के खिलाफ देशव्यापी वैरीफिकेशन एक्सरसाइज की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार अलग डेटा-विश्लेषण में 6,422 नई पहचानी गई संस्थाओं से कुल 1.29 लाख करोड़ रुपए के विदेशी भुगतान का ट्रेल सामने आया है। प्राथमिक जांच में लगभग 394 संस्थाओं को सत्यापन के दायरे में लिया गया है। इनमें 117 संस्थाएं उन राज्यों में स्थित हैं जो भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं से लगे हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 36 पेशेवरों, विशेष रूप से उन लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्होंने विदेशी भुगतान से जुड़े प्रमाणपत्र जारी किए।

दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने की जरूरत- पीएम मोदी
‘दिमागी नक्सल’ कोई संगठन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2026 के लाल किले के भाषण में इस्तेमाल किया गया राजनीतिक और वैचारिक शब्द है। पीएम मोदी ने हथियारबंद नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के संदर्भ में कहा कि अब समाज में ऐसी नक्सली मानसिकता रखने वालों को पहचानने और अलग-थलग करने की जरूरत है, जो अराजकता या देश की एकता के विरुद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने आगाह किया कि भले ही हथियारबंद नक्सली चले गए हैं, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ (माओवादी और देश विरोधी सोच रखने वाले लोग) अभी भी मौजूद हैं और वे लगातार मौके की तलाश में रहते हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दिमागी नक्सली की व्याख्या करते हुए कहा कि ये वो लोग हैं, जो माओवाद का समर्थन करते हैं और संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं, अथवा ‘चिकन नेक’ के जरिए पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात करते हैं।

समझते हैं कि दिमागी नक्सली कौन हैं और इनके खतरनाक मंसूबे क्या हैं…

विदेश जा रहे 1.29 लाख करोड़ रुपए और कागजों पर गायब कारोबार
इस बीच आयकर विभाग ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से दिमागी नक्सलियों के संदिग्ध नेटवर्क की परतें खोली हैं। देश की अर्थव्यवस्था जब दुनिया की बड़ी और तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रही है, तब देश की कमाई को संदिग्ध रास्तों से बाहर ले जाने की दिमागी नक्सलियों की कोशिशें केवल कर चोरी का मामला नहीं रह जातीं। यह उस आर्थिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार और देश से गद्दारी है, जिसमें करोड़ों ईमानदार करदाता अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे समय में आयकर विभाग की देशव्यापी सत्यापन कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें सवाल केवल इस बात का नहीं है कि कितना पैसा विदेश गया, बल्कि यह भी है कि किसके पास से गया, किस कारोबार के नाम पर गया, किसे गया और उसके पीछे वास्तविक आर्थिक गतिविधि थी भी या नहीं। ताजा जांच में 1.29 लाख करोड़ के विदेशी भुगतान का बड़ा ट्रेल सामने आया है, जबकि 394 संस्थाएं कार्रवाई के दायरे में हैं।

फ्रेट, सॉफ्टवेयर आयात और कंसल्टेंसी के नाम पर हो रहा खेल
आयकर विभाग के प्रारंभिक मैदानी सत्यापन में कई ऐसी दिमागी नक्सली संस्थाओं की पहचान हुई, जिनका घोषित कारोबार बेहद छोटा था या जिन्होंने आयकर रिटर्न तक दाखिल नहीं किया था। इसके बावजूद उनके माध्यम से विदेशों में बड़ी रकम भेजी गई। सबसे बड़ा सवाल यहीं पैदा होता है कि यदि किसी कंपनी का घोषित कारोबार मामूली है, तो उसके विदेशी भुगतान इतने बड़े कैसे हो गए? विभाग के अनुसार कई मामलों में घोषित टर्नओवर और विदेश भेजी गई रकम के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं दिखा। विदेशी भुगतान अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। भारतीय कंपनियां वैध रूप से माल आयात करती हैं, सॉफ्टवेयर खरीदती हैं, कंसल्टेंसी सेवाएं लेती हैं और विदेशों में अन्य कारोबारी भुगतान करती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब लेन-देन का घोषित उद्देश्य, कंपनी की वास्तविक गतिविधि और भुगतान की रकम आपस में मेल न खाएं। आयकर विभाग ने ऐसे मामलों में फ्रेट भुगतान, सॉफ्टवेयर आयात और कंसल्टेंसी जैसी बताई गई वजहों और वास्तविक रकम के बीच असंगति पाई है।

वास्तविक पते पर कारोबारी गतिविधियों का कोई अता-पता ही नहीं
इनकम टैक्स विभाग की जांच का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। जब जांच की गई तो पता चला कि वास्तविकता में कुछ संस्थाएं उन पतों पर संचालित ही नहीं हैं, जो उनके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। यानी कागजों पर कंपनी मौजूद, बैंकिंग चैनल मौजूद, विदेशी भुगतान मौजूद है, लेकिन जिस पते पर उसका कारोबार होना चाहिए, वहां वास्तविक कारोबारी गतिविधि का कोई अता-पता ही नहीं है। यदि आगे की जांच इन आशंकाओं को प्रमाणित करती है, तो यह केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं, बल्कि फर्जी कारोबारी संरचनाओं के इस्तेमाल से धन स्थानांतरण की संभावित बड़ी कहानी बन सकता है। प्रारम्भिक जांच में 394 संस्थाओं का आंकड़ा इस कार्रवाई की शुरुआत का महत्वपूर्ण संकेत है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार आयकर जांच में 6,422 नई पहचानी गई संस्थाओं द्वारा 1.29 लाख करोड़ विदेश भेजे जाने का ट्रेल सामने आया है। इनमें से 394 फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और व्यापक नेटवर्क में कंपनियों तथा व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जा रही है। इसका अर्थ है कि सत्यापन की परतें खुलने के साथ दायरा बढ़ सकता है।

चीन समेत पांच प्रमुख देशों में गई 1.29 लाख करोड़ की रकम
विदेशों में भेजी गई इतनी धनराशि की जांच में कई गंभीर तथ्य भी सामने आए हैं। Economic Times के अनुसार कुल 1.29 लाख करोड़ रुपए में से 72.3 प्रतिशत धनराशि पांच प्रमुख देशों चीन, सिंगापुर, यूएई, हांगकांग और मॉरीशस भेजी गई है। अकेले सिंगापुर को 41,885 करोड़, UAE को 18,331 करोड़ और हांगकांग को 18,064 करोड़ भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका भौगोलिक दायरा है। करीब 117 संस्थाएं उन राज्यों में स्थित हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सीमावर्ती राज्य की हर संस्था संदिग्ध है; बल्कि आयकर विभाग ने वहां स्थित उन संस्थाओं को भी सत्यापन में शामिल किया है, जिनसे बड़े विदेशी भुगतान जुड़े पाए गए। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में वित्तीय नेटवर्क की वास्तविकता की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ धन के अवैध प्रवाह की संभावित कड़ियों को अलग-अलग एजेंसियां गंभीरता से देखती हैं।

असल कहानी कंपनियों की नहीं, दिमागी नक्सलियों की है
इस पूरे मामले का सबसे अहम पक्ष 36 ऐसे पेशेवर हैं, जिन्हें साफ तौर पर दिमागी नक्सली कहा जा सकता है। आयकर विभाग ने उन दिमागी नक्सलियों की भूमिका भी सत्यापन के दायरे में रखी है, जिन्होंने विदेशी भुगतान से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इसके साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को Form 15CB/Form 146 जारी करते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। दरअसल, Form 15CB कोई सामान्य कागज नहीं है। इसका उद्देश्य विदेशी भुगतान की कर-देयता और संबंधित कर अनुपालन का निर्धारण करना है। आयकर विभाग के अनुसार प्रमाणपत्र जारी करने वाले अकाउंटेंट को संबंधित खातों और दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की कर-स्थिति की जांच करनी होती है। अब यदि एक ही छोटे समूह के द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए जाने और विदेश भेजी गई रकम में संदिग्ध पैटर्न दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं कि क्या हर प्रमाणपत्र वास्तविक लेन-देन की पर्याप्त जांच के बाद जारी हुआ था?

फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट: सवाल पैसा भेजने का नहीं, हिसाब देने का है
किसी भारतीय कंपनी का विदेश में पैसा भेजना अपने आप में अपराध नहीं है। असली सवाल है कि क्या वह पैसा वास्तविक कारोबार के बदले गया? क्या उसके पीछे वास्तविक सेवा या वस्तु थी? क्या टैक्स कानूनों का पालन हुआ? क्या दस्तावेज सही थे? क्या जिस कंपनी ने पैसा भेजा, उसका कारोबार वास्तव में उतना था? और क्या प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों ने पर्याप्त जांच की? इन सवालों के जवाब ही इस पूरे ऑपरेशन की असली तस्वीर सामने लाएंगे। इस जांच का एक दूसरा सिरा कथित फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ता है। आयकर विभाग के अनुसार एक तलाशी अभियान में ऐसे कथित फर्जी ट्रस्टों का नेटवर्क सामने आया, जिन पर फर्जी दान और योगदान के बदले accommodation entries देने के आरोप हैं। इसी व्यापक डेटा और ग्राउंड इंटेलिजेंस ने विदेशी भुगतानों की संदिग्ध श्रृंखला की ओर ध्यान खींचा है।

अब ‘मास्टरमाइंड’ दिमागी नक्सलियों तक पहुंचना होगा
गौरतलब है कि 2016 में नोटबंदी के बाद काले धन के खिलाफ आयकर कार्रवाइयों को तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने “surgical strike” कहे जाने की बात कही थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नोटबंदी को काले धन, आतंक और ड्रग मनी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक बताया था। Economic Times के मुताबिक 394 संस्थाओं की पहचान अंत नहीं, शुरुआत है। आयकर विभाग ने खुद कहा है कि ऐसे मामलों में ऑपरेशन का वास्तविक तौर-तरीका आगे की जांच से स्पष्ट होगा। इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण चरण यह जानना है कि कागजी कंपनियों के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन हैं? पैसा किस स्रोत से आया? किस उद्देश्य से गया ? किन विदेशी संस्थाओं तक पहुंचा और इस पूरी श्रृंखला में किसकी क्या भूमिका थी? ऐसी जांच का उद्देश्य और इसका एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे ईमानदारी से कारोबार करने वाली कंपनियों का भरोसा मजबूत होता है। यदि कोई कंपनी नियमों के अनुसार आयात करती है, विदेशी सेवाओं का भुगतान करती है और उसके पास हर लेन-देन का स्पष्ट दस्तावेज है, तो मजबूत सत्यापन व्यवस्था उसके लिए परेशानी नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच बन सकती है।भीख 

POL-KHOL: राहुल गाँधी Leader of Opposion है या Leader of Pakhand?; कांग्रेस के ‘युवराज’ राहुल गांधी झूठों के सरताज, देखिए झूठ की लंबी फेहरिस्त

                                                                                                                                                                        साभार 
जिस तरह राहुल गाँधी एक के बाद एक झूठ बोलकर देश में अशांति फ़ैलाने की कोशिश कर रहे हैं, अब जनता में यह शक होने लगा है कि चांदी के चमच मुंह में लेकर पैदा हुए कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी Leader of Opposion है या Leader of Pakhand? इनके द्वारा मोदी सरकार से लेकर चुनाव आयोग आदि संवैधानिक संस्थाओं पर बोला जा रहा झूठ जमीन पर औंधे मुंह गिर रहा है। प्रधानमंत्री के लिए बोलना कि "लोग डंडों से मारेंगे" और तू-तुराके से बोलना ये किसी Leader of Opposion की भाषा नहीं बल्कि किसी उपद्रवी की भाषा है। राहुल ने  Leader of Opposion पद की गरिमा तक को तार-तार कर दिया है। हैरानी इस बात की होती लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला या सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं कोई कार्यवाही करते? अगर विपक्ष राहुल पर होने वाली कार्यवाही पर सदन में हंगामा करता है या बहिष्कार करता है, उसे नज़रअंदाज कर सदन की कार्यवाही चालू रखनी चाहिए। INDI गठबंधन में शामिल पार्टियों को भी इस गंभीर विषय पर गंभीरता से सोंचना चाहिए। अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए कांग्रेस से किनारा करना चाहिए। वोट चोरी का शोर मचाकर राहुल खुद कांग्रेस का काला चिठ्ठा खोल रहा है, क्योकि एक चुनाव नहीं अनेक चुनावों में वोट चोरी कर कांग्रेस सत्ता पर काबिज रही है। कहानी शुरू होती है जब इंटरिम सरकार में प्रधानमंत्री पद के बहुमत सरदार पटेल के पक्ष में था लेकिन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बन गए। दूसरे, कोर्ट ने इंदिरा गाँधी का चुनाव रद्द करने के साथ-साथ 6 सालों के चुनाव लड़ने पर पाबन्दी लगाने पर देश में इमरजेंसी लगाकर सत्ता पर काबिज रही।         

   
भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेशी ताकतें तरह-तरह के नैरेटिव बनाती हैं। बिना किसी तर्क के ऐसे नैरेटिव्स को आगे बढ़ाने में काम कांग्रेस के युवराज और सांसद राहुल गांधी करते हैं। इसलिए उनके झूठ की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि यदि वे खुद इसे देख लें तो शर्मसार हो जाएं। गांधी परिवार में झूठों के सरदार राहुल गांधी तो झूठ बोलने में नित-नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यहां तक कि अपने झूठ और गलतबयानी के लिए राहुल गांधी को कोर्ट तक से माफी मांगनी पड़ी है। लेकिन झूठ बोलने की आदत है कि जाती ही नहीं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि झूठ दर झूठ बोले हैं तुमने सनम, सोचोगे तो दिल भी दहल जाएगा…राहुल गांधी के झूठ के कारोबार पर यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं। क्योंकि वे एक के बाद एक कितने झूठ बोल रहे हैं कि इसका अंदाजा खुद उन्हें भी नहीं हैं। राहुल गांधी ने तो चीन से लेकर पाकिस्तान तक, सेना से लेकर राफेल तक और ईवीएम से लेकर वोट चोरी तक इतने झूठ बोले हैं कि खुद झूठ को ही अपने-आपसे शर्म आ रही है।

अमन कुमार ने राहुल गांधी के झूठ की पोल 
राहुल गांधी ने अपनी वोट अधिकार यात्रा में निर्दोष मतदाताओं को झूठ बोलने के लिए मजबूर करने का नया चलन अपनाया है। कांग्रेस और आजेडी के कार्यकर्ता पहले झूठ बोलने के लिए भोले-भाले लोगों को फंसाते हैं और फिर राहुल गांधी उस झूठ पर अपने नाम की मुहर लगाकर झूठ के कारोबार को आगे बढ़ाते हैं। बिहार के अमन कुमार भी ऐसे ही राहुल गांधी के झांसे में आ गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमन कुमार का वोट जानबूझकर काट दिया गया है। गरीबों से वोट का अधिकार छीना जा रहा है। लेकिन अमन कुमार ने राहुल के झूठ की पोल खोलकर रख दी। उसने बताया कि नई मतदाता सूची में उसका नाम मौजूद है।

बिहार के सुबोध पर राहुल का ट्वीट निकला झूठा
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऐसा ही झूठ बिहार के सुबोध कुमार को लेकर बोला। राहुल गांधी ने एक वीडियो में सुबोध कुमार से दावा कराया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। राहुल गांधी ने बिहार से एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा, “जो सुबोध कुमार जी के साथ हुआ, वही लाखों लोगों के साथ बिहार में हो रहा है। वोट चोरी भारत माता पर आक्रमण है, बिहार की जनता ये होने नहीं देगी।” बाद में चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक करके बताया कि सुबोध RJD का बूथ एजेंट है। उसका नाम SIR-2025 से पहले भी वोटर लिस्ट में नहीं था तो एकदम आरोप झूठा है।

राहुल के झूठ का रंजू देवी ने किया पर्दाफाश!
बिहार की वोटर अधिकार यात्रा में राहुल ने वोट चोरी का झूठ बार-बार फैलाने की असफल कोशिश की। राहुल ने बिहार के नौहटा प्रखंड की भोली-भाली रंजू देवी के जरिए झूठ बोला कि उनके परिवार के छह लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। लेकिन बीएलओ की मतदाता सूची ने राहुल के झूठ की पोल खोल दी। इसके बाद रंजू देवी ने बताया कि उनको ऐसा कहने के लिए राहुल और तेजस्वी यादव के आदमियों ने ही बोला था और कहा था उनके सामने कहोगी तो राहुल गांधी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा देंगे। लेकिन असलियत यह है कि नई वोटर लिस्ट में रंजू देवी समेत सभी छह परिजनों के नाम दर्ज हैं।

CSDS के झूठे डेटा ने वोट चोरी मुद्दे की हवा निकाली
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी दिल्ली स्थित एक प्रमुख सर्वेक्षण एजेंसी – सेंटर फार स्टडी आफ डेवेलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) के ‘झूठे आंकड़ों’ को आधार बनाकर महाराष्ट्र की मतदाता सूची में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर हमलावर हुए थे। राहुल गांधी ने जिस CSDS के डेटा के आधार पर आरोप लगाए, उसी के प्रमुख संजय कुमार ने अपनी बड़ी गलती के लिए माफी मांगते हुई अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। ऐसे में झूठ पर झूठ बोले जा रहे राहुल का बम फिर से फुस्स हो गया। राहुल गांधी के वोट चोरी मुद्दे की भी हवा निकल गई।

राहुल ने शकुन के दो बार वोट देने का झूठ बोला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यवाही पर बार-बार सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक चुनाव में वोट चोरी और फर्जी वोटर आईडी के आरोप लगाए। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि शकुन रानी नामक महिला ने दो बार मतदान किया। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि उनके कार्यालय ने इन आरोपों की शुरुआती तौर पर जांच की है। पता चला है कि राहुल गांधी की ओर से प्रेजेंटेशन में दिखाए गए टिक मार्क ईसी के ऑफिसियल डॉक्युमेंट नहीं है। वहीं, शकुन रानी ने भी बयान दिया है कि उन्होंने केवल एक बार ही मतदान किया है न कि दो बार। इसके बाद 9 अगस्त को चुनाव आयोग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक बार फिर चेतावनी दी है कि मतदाता सूचियों के संबंध में लगाए गए आरोपों के समर्थन में वे शपथ पत्र दें या झूठे आरोपों के लिए देश से माफी मांगें।

कमला हैरिस से फोन की बात निकली झूठी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बार झूठ बोलकर अपनी इंटरनेशनल बेइज्जती कराई है। राहुल के कहने पर कांग्रेसी पक्षकारों ने दुनिया भर में एक खबर फैलाई कि अमेरिका की तत्कालीन उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने 11 जुलाई 2024 को राहुल गांधी से फोन पर बात की है। तब नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला था और राष्ट्रपति जो बाइडन के हेल्थ इश्यू के कारण कमला हैरिस के राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने की चर्चा जोरों पर थी। राहुल गांधी के साथ उनकी फोन पर बात होने की खबर देश-दुनिया में सुर्खियों में आ गई। कांग्रेसी नेता इसे जोर-शोर से प्रचारित-प्रसारित करने लगे। लेकिन जल्द ही इसका पर्दाफाश हो गया कि कमला हैरिस ने राहुल गांधी से कोई बात नहीं की है। अमेरिका में पीटीआई के पत्रकार ललित के झा ने साफ किया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय ने इस बात से इनकार किया है कि कमला हैरिस की भारत के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ फोन पर कोई बात हुई है।

EVM पर झूठ फैलाने के लिए राहुल-राठी साथ-साथ
राहुल गांधी ने ध्रुव राठी के साथ मिलकर एक नैरेटिव बनाया गया कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आने के 11 दिन बाद कांग्रेस ने ईवीएम को लेकर यह झूठ फैलाया। यहां तक कि बिजनेसमैन एलन मस्क ने 15 जून को लिखा- EVM को खत्म कर देना चाहिए। इसके एक दिन बाद 16 जून, 2024 को मिड डे ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित की कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है, जिसने राजनीतिक हलकों और आम जनता में विवाद खड़ा कर दिया। चुनाव अधिकारी ने मिड-डे की रिपोर्ट को ‘झूठी खबर’ कहकर खारिज कर दिया। अधिकारी ने पब्लिकेशन को मानहानि का नोटिस जारी किया। नोटिस मिलते ही मिड डे ने माफीनामा प्रकाशित कर दिया, लेकिन इंडी अलायंस के नेता राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे समेत विपक्षी नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश करते रहे। उधर ध्रुव राठी और अन्य लेफ्ट लिबरल एजेंडा चलाने वालों ने इसे जोर-शोर से उठाकर मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की।

अग्निवीर पर राहुल गांधी ने फिर फैलाया झूठ
राहुल गांधी ने 1 जुलाई को संसद में बोलने के बाद 3 जुलाई को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर अग्निवीर पर फिर से झूठ फैलाने का काम किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा- ”सत्य की रक्षा हर धर्म का आधार है! लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद अग्निवीर के परिवार को सहायता मिलने के बारे में संसद में झूठ बोला। उनके झूठ पर शहीद अग्निवीर अजय सिंह के पिता जी ने खुद सच्चाई बताई। परिवार ने भी कहा कि उसे मुआवजा मिल चुका है। इसके साथ ही सेना ने सामने आकर राहुल के झूठ का पर्दाफाश किया। सेना ने कहा कि परिवार को 98.39 लाख रुपये दिया जा चुका है। सेना ने स्पष्टीकरण में कहा कि कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये दी जाएगी। इसके बाद भी राहुल गांधी द्वारा लगातार इस मुद्दे पर झूठ बोलना कायदे से यह देशद्रोह की श्रेणी में आना चाहिए। यहां सवाल यह भी उठता है कि क्या वो देश के अग्निवीरों में विद्रोह पैदा कराना चाहते हैं?

राहुल गांधी ने बोला झूठ, मुसलमान डरे हुए हैं
राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में अल्पसंख्यकों पर अन्याय और हमले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं। राहुल गांधी ऐसा कहकर डर फैला रहे हैं। ये भारत के विकास के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर भारत में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। अगर वे सचमुच डरे हुए हैं, तो विश्व इतिहास की ये पहली घटना होगी जब एक पीड़ित, भयभीत समुदाय अपनी आबादी को सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ा रहा है। 1951 में जो समुदाय 10 प्रतिशत से कम था, वह अब के प्रोजेक्शन के हिसाब से 15 प्रतिशत से ज्यादा है। बाकी सब घटे हैं। हिंदू सबसे ज्यादा घटे हैं। हिंदू जाति पर वोट करता है। मुसलमान एकजुट होकर धर्म के आधार पर। इसलिए वोट के नतीजों को प्रभावित करने की मुसलमानों की ताकत अधिक है। वे कतई डरे नहीं हैं। देश के कुछ सबसे बड़े बिजनेसमैन मुसलमान हैं। वे आराम से अपना काम करते हुए विकास में योगदान कर रहे हैं। अगर तथ्यों पर गौर करें तो राहुल के झूठ की चिंदियां उड़ जाएंगी। देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित है।

चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' और रोहिणी घावरी के चैट्स हो गए थे वायरल

‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के साथ अपने पुराने रिश्ते को लेकर स्विट्जरलैंड में Ph.D कर रहीं वाल्मीकि समाज की रोहिणी घावरी चर्चा में हैं। अब उन्होंने उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का एक वीडियो शेयर किया है, जो इन दोनों के वीडियो कॉल के दौरान का है। इसमें वो रोता हुआ दिख रहा है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली रोहिणी का कहना है कि झूठे आँसू दिखा कर और अपनी शादी छिपा कर ‘रावण’ कई मासूम लड़कियों का जीवन बर्बाद कर चुका है।

रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के चैट्स हुए थे वायरल

चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के कैरेक्टर को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। रोहिणी घावरी के साथ उसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें दोनों मास्क लगाए दिख रहे हैं और एक-दूसरे के काफी करीब नजर आ रहे हैं। एक चैट स्क्रीनशॉट में चंद्रशेखर ने अपनी उदास तस्वीर भेजते हुए रोहिणी को लिखा था, “मुझे गर्व है आप पर। आप सम्मान की हकदार हो। आप इनका अधूरा सपना ज़रूर पूरा करोगे। मैं लगभग हार मान चुका हूँ।” एक अन्य स्क्रीनशॉट भी चैट का वायरल हुआ था।

इसमें चंद्रशेखर ने लिखा है, “सच कहा आपने, इसीलिए मुझे छोड़ देना चाहिए आपको। ये ही तो कह रही हो आप। समाज भी मेरा साथ नहीं दे रहा, मुझे भी समाज को छोड़ देना चाहिए।” घावरी ने इस पर जवाब दिया था, “मैं बिना कमिटमेंट के नहीं रह सकती। मेरी भी सेल्फ-रेस्पेक्ट है। ख्याल रखना अपना, हेल्थ चेकअप कराते रहना। बाय।” इस पर ‘रावण’ ने लिखा था, “अब जो भी होगा उसके लिए आप भी जिम्मेदार होंगी – हार या जीत ज़िंदगी में।”
तब रोहिणी ने ये भी बताया था कि उनकी हँसती-खेलती ज़िंदगी में आकर एक व्यक्ति ने रात-रात भर अपने तकलीफ-संघर्ष की कहानियाँ सुनाई और ये एहसास कराया कि उसे कभी प्यार नहीं मिला, आंदोलन को सफल बनाने के लिए उसे रोहिणी जैसी बुद्धिजीवी महिला की आवश्यकता है। घावरी ने बताया था कि उसने हमेशा साथ रहने का वादा किया था, लोगों के मना करने के बावजूद उन्होंने सब दाँव पर लगा कर चंद्रशेखर का साथ दिया। हालाँकि, रोहिणी कहती हैं कि उन्हें धोखा मिला, बीच रास्ते में उन्हें छोड़ कर वो चला गया और विदेश में इस हादसे ने उन्हें तोड़ दिया।
रोहिणी घावरी इसे अपने जीवन का सबसे दर्दनाक हादसा बताते हुए कहती हैं कि इसने उन्हें बुरी तरह तोड़ कर रख दिया। उलटे लोग उन्हें भी गंदा बोलते रहे, और वो समाज का नेता बना रहा। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ पहले एक-दूसरे के ट्वीट्स को रीट्वीट भी करते थे, लेकिन 5 नवंबर, 2023 में अंतिम बार ऐसा हुआ था। उलटे रोहिणी घावरी को ही सोशल मीडिया पर ‘भीम आर्मी’ समर्थकों ने खरी-खोटी सुनाई थी।

अब रोहिणी घावरी ने जारी किया चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का वीडियो

इस वीडियो को जारी करते हुए रोहिणी घावरी ने कहा कि उन्होंने झूठे आँसू दिखा-दिखा कर उन्हें उन पर विश्वास करने के लिए मजबूर कर दिया। बकौल रोहिणी, ये उनकी गलती है कि ‘रावण’ को उन्होंने सच्चा आंदोलनकारी इंसान मान कर उनके साथ खड़ी हो गईं। रोहिणी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने उस समाज के सामने उन्हें झूठा साबित कर दिया, जिसके लिए वो विदेश में रह कर भी सोचती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सच्ची लड़की होने की सज़ा भुगती, अकेले रह कर जिस मानसिक पीड़ा से उन्होंने खुद को सँभाला उसके बारे में वो ही समझती हैं।
उन्होंने इस वीडियो के साथ लिखा, “अब कभी जीवन में किसी मर्द पर भरोसा नहीं कर पाऊँगी इसलिए शादी रिश्ते जैसी चीज़ो से बहुत दूर हो चुकी हूँ। अब मेरा बचा हुआ जीवन देश और समाज को समर्पित। मैं झूठे आरोप झेल झेल के थक गई हूँ अब जब भी कुछ अच्छा करती हूँ लोग मेरा चीरहरण करना शुरू कर देते है। एक लड़की होने की खूब सज़ा मिल रही है मुझे। जैसे पूरा समाज बेवक़ूफ़ बन रहा है में भी बन गई। मैंने तो पूरी ईमानदारी से दूसरे देश में रहकर भी साथ निभाया था यही सोच के त्याग था की समाज के लिए दोनों मिलकर कुछ अच्छा करेंगे।”

स्विट्जरलैंड में Ph.D कर रही दलित रोहिणी घावरी

रोहिणी घावरी वाल्मीकि समाज से आती हैं और खुद को दलितों का ठेकेदार बताने वाले कुछ नेताओं द्वारा ब्राह्मणों के प्रति घृणा फैलाए जाने से ताल्लुक नहीं रखती। उलटा उन्होंने बताया है कि वो वाल्मीकि समाज से आती हैं और ब्राह्मणों का उनके जीवन में बहुत योगदान है। उन्होंने बताया कि उनके शिक्षक शर्मा सर ने उन्हें 1 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप की जानकारी दी। स्विट्जरलैंड में जिस आभा ने उनका साथ दिया, वहाँ रहना सिखाया वो भी ब्राह्मण हैं।
रोहिणी घावरी संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी संबोधन दे चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि वहाँ भी जाने के लिए उनके एक पंडित अंकल ने उनका मार्गदर्शन किया। इसीलिए, वो कहती हैं कि वो ब्राह्मणों को गाली देकर एहसानफरामोशी नहीं कर सकतीं। बता दें कि वो UN में राम मंदिर को लेकर पाकिस्तान को खरी-खरी सुना चुकी हैं। उन्होंने ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करते हुए कहा था कि दुनिया के हर हिन्दू के लिए राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा वाला दिन ऐतिहासिक है।
अवलोकन करें:-
जेनेवा में रह रही रोहिणी घावरी शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ दलित समाज के लिए भी आवाज़ उठाती रहती हैं। वो बाबासाहब भीमराव आंबेडकर में श्रद्धा रखती हैं। भारत सरकार से उन्हें 1 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप प्राप्त हुई। रोहिणी घावरी ने भारत के ठेकेदारों की पोल खोलते हुए UN में बताया था कि भारत के प्रधानमंत्री OBC समाज से आते हैं, वहाँ के दलित ऑक्सफ़ोर्ड-हार्वर्ड में सरकारी सहायता से पढ़ते हैं, इसके बावजूद विदेशी संस्थाएँ भारत को गलत रूप में पेश करती हैं।

दिल्ली से लेकर हरियाणा तक दंगों में आम आदमी पार्टी नेता ही क्यों आरोपित?

ताहिर हुसैन के बाद अब नूँह दंगों में हत्यारोपित जावेद अहमद 
हरियाणा के नूँह और गुरुग्राम के इलाकों में हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप कुमार की मौत हो गई थी। सोहना में प्रदीप की हत्या के मामले में AAP नेता जावेद अहमद के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी निकलकर सामने आ रही हैं कि जावेद का भतीजा तौसीफ फरीदाबाद के चर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में दोषी पाया गया था। उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आप नेता जावेद अहमद का नूँह दंगों में नाम आते ही आम आदमी पार्टी उसके बचाव में उतर गई है ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में AAP ने मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन के बचाव में किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AAP नेता जावेद अहमद के सोहना इलाके में लगे पोस्टर में उसे अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बताया गया है। वहीं, नूँह दंगे में हत्या और मुस्लिम दंगाई भीड़ का नेतृत्व करने के मामले में आप नेता पर FIR दर्ज होने के बाद दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ट्वीट किया और अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछा है। सचदेव ने लिखा, “दिल्ली में ताहिर हुसैन और अब हरियाणा में जावेद अहमद… जगह अलग हो सकती है, पर पार्टी एक ही है।”

सचदेव ने AAP सुप्रीमों अरविन्द केजरीवाल से सवाल पूछा है, “क्या दंगा करना और मासूमों की हत्या करना ही है AAP की अलग तरह की राजनीति है?” वहीं उन्होंने आगे AAP के दंगाई और हिंदू-विरोधी चेहरे की बात करते हुए केजरीवाल को लताड़ लगाई है। 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में उतरी पार्टी 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए हैं। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा (Anurag Dhanda) ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”
AAP नेता अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि जावेद अहमद जो हमारी पार्टी के नेता है उनके खिलाफ झूठी FIR दर्ज करवाई गई है। उन्होंने दावा किया कि जहाँ पर ये घटना हुई उस दौरान जावेद उस जगह से करीबन 100-150 किलोमीटर दूर थे।

‘इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा’: जावेद अहमद 

बजरंग दल नेता प्रदीप की हत्या के मामले में पुलिस को एक फुटेज भी हाथ लगा है, जिस सीसीटीवी फुटेज में बजरंग दल के नेता प्रदीप को घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया है। बता दें कि 31 जुलाई को हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप शर्मा को गाँव रायसीना के समीप गंभीर रूप से हमला किया गया था, जिसके 1 दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। इस मामले में आप नेता जावेद अहमद पर FIR दर्ज हुई है। 
दर्ज FIR में चश्मदीद पवन ने बताया, “नूहं के नल्हड़ मंदिर से प्रदीप कुमार और मुझे रेस्क्यू कराने के बाद नूहं की पुलिस लाइन लाया गया। वहाँ से रात 10:30 बजे वो अपनी तीन गाड़ियों में घर के लिए निकले। उन्हें एक पुलिस वैन एस्कॉर्ट कर रही थी, लेकिन सोहना के पास पुलिस वैन के पुलिसकर्मी ये कहते हुए चले गए कि आगे रूट क्लीयर है। इसके बाद एक स्कॉर्पियो कार ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। इसके बाद केएमपी पर उनकी गाड़ी को कार ने ओवरटेक करके रुकवा लिया। पवन के मुताबिक, “भीड़ में मौजूद जावेद अहमद ने कहा कि इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा।”
प्रत्यक्षदर्शी पवन के अनुसार, दंगाई मुस्लिम भीड़ ने दोनों को कार से निकाल कर बुरी तरह पीटा। पवन के मुताबिक उसे तो किसी तरह पुलिस भीड़ के चंगुल से निकाल कर ले गई, लेकिन प्रदीप नहीं निकल सके क्योंकि उनके सिर पर दंगाइयों ने रॉड मार दी थी। वहीं बाद में प्रदीप की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई। पवन ने एफआईआर में लिखाया कि वो जावेद अहमद को अच्छी तरह पहचानते हैं। इसी बीच सोहना चौक पर 200 लोगों की भीड़ मिली जिसे जावेद अहमद लीड कर रहा था।
इससे पहले दिल्ली दंगों के समय भी तमाम वीडियो सबूत मिलने के बाद भी मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी अंत तक बचाती रही थी वही एक बार फिर दोहराया जा रहा है। AAP ने तब उलटा ताहिर हुसैन को ही पीड़ित बताते हुए कहा था कि भीड़ उसके घर में घुस गई। बता दें कि नूहं दंगा मामले में अब तक कुल 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 80 को एहतियातन हिरासत में लिया गया है तथा 104 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। 

केजरीवाल को एक और झटका, क्या भारत विरोधी अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ से सम्बन्ध चलते दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन पर ताला डाला?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन दिनों झटके पर झटके लग रहे हैं। एक तरफ सत्येंद्र जैन जेल में हैं और उनका मसाज वाला वीडियो उनके गले की हड्डी बना हुआ है वहीं इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन के उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। जैस्मीन शाह के कार्यालय के कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया गया है और उनके सिविल लाइंस स्थित कार्यालय पर भी ताला जड़ दिया गया है। भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने शिकायत की थी कि जैस्मीन शाह अपने कार्यालय का दुरुपयोग अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी) की राजनीतिक उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे थे। इससे केजरीवाल का अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ अब बेनकाब होने लगा है। विदेश में स्थित कई एनजीओ से केजरीवाल के संबंध रहे हैं और जैस्मीन शाह भी उसी इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने जैस्मीन शाह जैसे लोगों को अपने इकोसिस्टम में फिट करने के लिए दिल्ली डायलॉग कमीशन बनाया था। लेकिन अब इसके ऊपर से भी पर्दा उठने लगा है।

 जैस्मीन शाह पर पद के दुरुपयोग का आरोप

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने जैस्मीन शाह को दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग के उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया है। उन पर राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। कुछ दिन पहले जैस्मीन शाह पर आरोप लगे थे कि वह बतौर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता भी बयान जारी कर रहे हैं और मीडिया से बात कर रहे हैं। इसी को लेकर उपराज्यपाल कार्यालय ने उन पर सवाल उठाए थे और नोटिस भेजकर जवाब तलब किया था। उपराज्यपाल ने डीडीसीडी के वाइस चेयरमैन जैस्मीन शाह को मिलने वाली सभी सरकारी सेवाओं और सुविधाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने अफसरों को शाह के दफ्तर पर तुरंत ताला लगाने का निर्देश दिया है। उनका सरकारी वाहन और स्टाफ भी तुरंत वापस लेने का आदेश एलजी ने अधिकारियों को दिया है। दिल्ली सरकार डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (DDC) अपना थिंकटैंक बताती रही है, लेकिन इसकी आड़ कुछ और ही कहानी चल रही थी यह अब सामने आ रहा है। दिल्ली की सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार ने इसका गठन किया था।

इस तरह प्रकाशित होती है NYT और खलीज टाइम्स में पेड न्यूज

अब्दुल लतीफ जमील सऊदी अरब में स्थित एक पारिवारिक स्वामित्व वाला व्यावसायिक घराना है। अब इससे आप समझ सकते हैं कि दिल्ली एजुकेशन मॉडल को लेकर अमेरिका स्थित NYT और गल्फ स्थित खलीज टाइम्स में पेड न्यूज क्यों प्रकाशित की गई! अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद, J-PAL ने आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु और गुजरात सहित कई राज्य सरकारों के साथ MOU किया है। लेकिन दिल्ली की नीति में जितनी दखलंदाजी इनकी है वैसी कहीं और नहीं दिखती। इस साल फरवरी में, डीडीसी ने फिर से J-PAL के साथ एक नया समझौता ज्ञापन किया और उन्हें सभी नीति और योजना डेटा तक पहुंच प्रदान की! यह हमारी चिंता होनी चाहिए! दिलचस्प बात यह है कि एमआईटी में ‘फोर्ड फाउंडेशन’ इंटरनेशनल के इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी 2019 में कांग्रेस की न्याय योजना के पीछे मास्टरमाइंड थे! अब, फोर्ड फाउंडेशन की ए और बी टीम कौन है? वहीं इकबाल धालीवाल अब J-PAL के वैश्विक कार्यकारी निदेशक हैं। वह गीता गोपीनाथ के पति हैं। वह एक अमेरिकी नागरिक हैं और एक कम्युनिस्ट परिवार से ताल्लुक रखती हैं!

केजरीवाल को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का समर्थन !

अरविंद केजरीवाल हमेशा दावा करते हैं कि वह सिर्फ एक आम व्यक्ति हैं लेकिन ये सभी सबूत बताते हैं कि उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश, एनजीओ, मीडिया और अन्य सभी विदेशी-वित्तपोषित संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है! इससे यह भी साबित होता है कि उनकी मुफ्तखोरी की राजनीति का सूत्रधार एक विदेशी चंदा देने वाली विदेशी संस्था है। वे अपने अंतरराष्ट्रीय तंत्र का उपयोग करके एक नकली शिक्षा और चिकित्सा मॉडल बनाने में उनकी मदद करते हैं। इस विदेशी संस्था ने उनकी पूरी सरकारी नीति भी तैयार की। वे न केवल नीति तैयार करते हैं, वे उसे ट्रैक भी करते हैं! तो अब बताइए दिल्ली सरकार कौन चलाता है?

इस तरह बना दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन

केजरीवाल के विदेशी संस्थाओं एवं एनजीओ से संपर्क बहुत पहले से हैं और अब भी बने हुए हैं। 2003 में अभिजीत बनर्जी को एमआईटी में ‘फोर्ड फाउंडेशन’ अर्थशास्त्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। उसी वर्ष, उन्होंने अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) की स्थापना की। 2000 से 2010 के बीच केजरीवाल को अपने एनजीओ के लिए फोर्ड फाउंडेशन से सीधे फंडिंग मिली। उन्हें अशोका फेलोशिप और मैग्सेसे अवार्ड भी मिला है, जो फोर्ड फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित हैं। दिसंबर 2013 में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल के प्रोफेसर और अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) के संस्थापक ने मीडिया में आप के लिए समर्थन और लेख लिखे। फरवरी 2015 में चुनाव के दौरान उन्होंने आप का समर्थन करने के लिए एक लेख लिखा और लिखा कि “जो कोई भी भारतीय लोकतंत्र की परवाह करता है उसे 7 फरवरी को आप का समर्थन करना चाहिए।” फरवरी 2015 में केजरीवाल ने सरकार बनाई और दिल्ली के लिए एक नीति बनाने और उनकी सलाह और योजना पर दिल्ली सरकार चलाने के लिए एक थिंक टैंक दिल्ली डायलॉग कमीशन (DDC) भी बनाया।

नीति आयोग की तर्ज पर केजरीवाल ने बनाया था डायलॉग कमीशन

दरअसल, अरविंद केजरीवाल सरकार ने राजधानी में दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन की स्थापना की थी। नीति आयोग की तर्ज पर इस कमीशन का उद्देश्य राजधानी के विकास के लिए विभिन्न मुद्दों पर दिल्ली सरकार को सलाह देना था। इस कमीशन की सलाह पर ही राजधानी में विभिन्न कार्य किये जा रहे थे और इसकी चारों ओर चर्चा हो रही थी। लेकिन भाजपा नेताओं का आरोप रहा है कि इस कमीशन के चेयरमैन जैस्मिन शाह आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने का काम कर रहे थे। वे टीवी बहस में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में पार्टी का पक्ष रखा करते थे। इसके बाद ही प्रवेश वर्मा ने शिकायत दी जिस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

जैस्मीन शाह अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ गठजोड़ का हिस्सा हैं

2016 में जैस्मीन शाह आप में शामिल हो गए और तुरंत उन्हें डिप्टी सीएम सिसोदिया के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। जैस्मीन शाह आप में शामिल होने से पहले अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) के साथ काम कर रहे थे। 2018 में केजरीवाल ने जैस्मीन शाह को डीडीसी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें दिल्ली के लिए नीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी दे दी। 2019 में डीडीसी ने अपनी सभी योजनाओं की निगरानी के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण डेटा है लेकिन किसे परवाह है? कोई इस महत्वपूर्ण डेटा को किसी विदेशी संस्था को कैसे सौंप सकता है? ऐसा लगता है कि मुफ्त बिजली से लेकर ‘मीडिया’ शिक्षा मॉडल ‘फोर्ड फाउंडेशन’ इंटरनेशनल के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी द्वारा विकसित किया गया है! बाद में 2019 में, उन्होंने अपने J-PAL प्रोजेक्ट के लिए अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता।

सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अमान्तुल्लाह खान पहले ही जांच के घेरे में

आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अमान्तुल्लाह खान पर विभिन्न मामलों में जांच चल रही है। एमसीडी चुनावों के कारण इन मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप गंभीर हो गए हैं। जैस्मिन शाह पर हुई कार्रवाई के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि आम आदमी पार्टी यह आरोप लगाएगी कि उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है और भाजपा उसके कार्यों में बाधा पहुंचाने का काम कर रही है। आम आदमी पार्टी इसके पहले भी इस तरह के आरोप लगाती रही है। वहीं, भाजपा इस पर आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बताती रही है। चुनावी मौसम में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर एक नई जंग देखने को मिल सकती है।