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पंजाब सरकार ने फोरेंसिक एक्सपर्ट को 10 लाख रूपए देकर भगवंत मान के बेअदबी वाले असली वीडियो को फर्जी बताया, पुलिस ने खुद बनवाई नकली रिपोर्ट: हरियाणा पुलिस ने 2 को किया गिरफ्तार

        भगवंत मान की विवादित वीडियो को फर्जी बताने के लिए पंजाब सरकार ने फोरेंसिक एक्सपर्ट को दी गई घूस
विवादों से जन्मी अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी लगता है विवादों से ही ख़त्म हो जाएगी। दिल्ली में सत्ता में रहते नितरोज कोई नया विवाद चलता रहता था लेकिन जनता मुफ्त की रेवड़ियों में केजरीवाल पार्टी को वोट देती रही। अब जिस तरह पंजाब में बेअदबी के असली वीडियो को राज्य सरकार फर्जी बताने में शामिल बताई जा रही है, बंगाल में ममता की सरकार और पंजाब में केजरीवाल सरकार की कार्यशैली में कोई फर्क नहीं। 

अगर अकाल तख़्त इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है भगवंत सिंह मान ऐसी मुसीबत में फंस जायेंगे जहाँ से इनका निकलना बहुत मुश्किल हो सकता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इन दिनों सिख गुरुओं की बेअदबी वाले वीडियो को लेकर विवादों में घिरे हुए हैं। वीडियो में सिख गुरुओं और भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिख रहे हैं। इस वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए अब पूरी पंजाब पुलिस विवादों में है। हरियाणा के एक फोरेंसिक एक्सपर्ट ने दावा किया है कि पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने ₹10 लाख का लालच देकर वीडियो को फर्जी साबित करने को कहा था।

 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा के एक साइबर-फ़ोरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत ने दावा कि 15 जून 2026 को पंजाब पुलिस के अधिकारी बनकर कुछ लोग उनके पास आए और उनसे ऐसी रिपोर्ट बनवाने को कहा जो साबित करे कि सीएम भगवंत मान का यह वीडियो AI से बना हुआ फर्जी वीडियो है। जसप्रीत ने आरोप लगाया कि उन्हें फाइव स्टार क्राउन प्लाजा होटल में बुलाया गया और उनकी गाड़ी में जबरदस्ती ₹10 लाख नकद रखे गए। होटल का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

जसप्रीत ने विरोध किया तो उन्हें सिरसा के अरुण महेंद्रा और जींद के अंकित से मिलवाया गया, जिन्हें अधिकारियों ने पेन ड्राइव सौंपी थी।

हरियाणा पुलिस ने जसप्रीत की शिकायत के आधार पर इन दोनों को 23 जून 2026 को गुड़गाँव के सेक्टर 29 से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि अरुण हरियाणा सरकार का ही एक कर्मचारी है और अंकित दिल्ली सरकार में कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड कर्मचारी है।

वहीं शिरोमणि अकाली दल के महासचिव विक्रम सिंह मजीठिया ने भी कहा कि पंजाब पुलिस के कर्मचारी सीएम भगवंत मान की फर्जी वीडियो तैयार करने में शामिल थे। उन्होंने एक व्हाट्सऐप चैट भी शेयर की है, जिसमें फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का दावा किया गया है। उन्होंने फॉरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत की वीडियो शेयर करते हुए बताया कि पंजाब पुलिस लगातार उसे धमकियाँ दे रही है।

इसके अलावा दिल्ली के मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने भी इस विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “…भगवंत मान चुप रहे, अरविंद केजरीवाल भी चुप रहे, और आज उन लोगों को गिरफ़्तार किया गया और उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया जिन्होंने यह फ़ोरेंसिक रिपोर्ट दी थी… जिस तरह से इतना बड़ा गुनाह किया गया है और पैसे व पुलिस की मदद से इसे दबाने की कोशिश की गई है, उसे चुनौती दी गई है।” उन्होंने पंजाब के सीएम भगवंत मान के खिलाफ केस दर्ज करने की भी माँग की है।

कुछ समय पहले एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो को लेकर दावा किया गया कि इसमें दिख रहा शख्स सिख गुरुओं और भिंडारवाले की तस्वीरों के साथ कुछ आपत्तिजनक हरकतें करता दिखाई दे रहा है। इस पर सिख संगठनों और अकाल तख्त ने सीएम मान को खालसा पंथ विरोधी करार दिया था।

फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR: ‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर मिले सबूत?

                                                नोएडा में हिंसक प्रदर्शन (साभार- दैनिक भास्कर)
नोएडा में सैलरी की माँग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा को लेकर भड़काऊ पोस्ट करने पर RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर शेयर किया था। इस पुराने वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारी को पीटते दिखाया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही इन वीडियो का फैक्टचेक किया था। पुलिस ने वीडियो को गलत बताते हुए कहा कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल झूठ है।

पुलिस ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के अलावा भी भड़काऊ पोस्ट करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।

ऐसे में अदालतों से भी प्रश्न है कि हिंसा भड़काने वालों पर कानूनी डंडा चलेगा? ऐसे फेक वीडियो फैलाकर हिंसा भड़काने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। देश में अशांति फैलाना बहुत ही संगीन अपराध माना जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई नेता या पार्टी ऐसा घिनौना काम नहीं कर सके। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि जिस अपराध के लिए आम नागरिक को आसानी से जमानत नहीं मिलती उसी अपराध में नेताओं को मिल जाती है, क्यों?    

नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।

अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…

हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका

साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।

वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।

सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई

डीजीपी राजीव कृष्ण, जो लखनऊ कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ने कहा है कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप को चिन्हित किया गया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। अफवाहें फैलाने वाले दो एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। अब उनकी जाँच होगी।
इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो को गलत बताते हुए कहा है कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य है।
यूपी पुलिस ने किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जानने की जरूरत पर बल दिया है। इसके अलावा NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऑडियो क्लिप में एक शख्स लोगों से कहता सुनाई दे रहा है कि मंगलवार को फिर से पुलिस पर हमला करना है और लाठीचार्ज करवाना है, क्योंकि कई लोग पहले दिन घायल हुए थे। इस ऑडियो में शख्स कह रहा है कि हमारे बहुत से बहन-भाई घायल हुए हैं और इसीलिए आप लोग सुबह आने की कृपा करें।
इसी के साथ कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा

9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।

दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।

पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।

‘शीशमहल में मुर्गा बनाकर पीटे गए थे राघव चड्ढा’: पूर्व AAP नेता नवीन जयहिंद का दावा, कहा- उसी दौरान आँख में लगी चोट का इलाज कराने गए UK


आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर एक दावा सामने आया है। हरियाणा में ‘AAP’ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने Video शेयर कर आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास ‘शीशमहल’ में राघव चड्ढा के साथ मारपीट की गई थी।

नवीन जयहिंद ने सोशल मीडिया पर Video शेयर कर राघव चड्ढा पर निशाना साधकर कहा कि वे दिल्ली और पंजाब के बड़े राजदार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ‘शीशमहल’ में राघव चड्ढा को ‘मुर्गा’ बनाकर पीटा गया था, तब वो चुप क्यों थे। नवीन का दावा है कि उस दौरान राघव की आँखों में चोट लगी थी, जिसका इलाज राघव ने इंग्लैंड जाकर करवाया था।

डीलिंग और चार लोगों का जिक्र

नवीन जयहिंद ने Video में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूछा कि उस वक्त वहाँ कौन से चार लोग मौजूद थे? नवीन जयहिंद ने पैसों के लेन-देन और सूटकेस की डीलिंग का भी जिक्र किया। नवीन ने राघव को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह राज्यसभा में इतना बोलते हैं, तो इस पिटाई के सच को भी जनता के सामने रखें।

कौन हैं नवीन जयहिंद?

नवीन जयहिंद आम आदमी पार्टी के पुराने नेता रहे हैं। वे साल 2011 के अन्ना आंदोलन से जुड़े थे। उन्हें हरियाणा में पार्टी की कमान सौंपी गई थी। हालाँकि, साल 2022 में आपसी मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। फिलहाल इन आरोपों पर राघव चड्ढा या अरविंद केजरीवाल की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है।

ISI के लिए जासूसी कर रहे वकील रिजवान को नूंह पुलिस ने दबोचा, पाकिस्तान भेजी थी संवेदनशील जानकारी: गुरुग्राम में कर रहा था वकालत की प्रैक्टिस

                             जासूसी के आरोप में वकील रिजवान गिरफ्तार (साभार: हिंदुस्तान)
दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जैसे-जैसे छानबीन हो रही है शायद ही कोई दिन जाता हो कि कोई न कोई गद्दार पुलिस और गुप्तचर एजेंसियों के हत्ते लग जाता है। ये तो मात्र ऊंट के मुंह जीरे के समान है। पाकिस्तान कोई ऐसे ही मार खाने के बाद भी आए दिन आंख दिखाता रहता है, क्योकि उसको मालूम है कि बिना तनखाह के भारत में उसके फौजी तैनात है। पुलिस और जाँच एजेंसियों को पाकिस्तानपरस्त नेताओं की भी गहन निगरानी करनी होगी। जैसे 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने की थी। एक बात जो गंभीरता से सोंचने और समझने की है वो है जितना भारत में कांग्रेस और विपक्ष कमजोर हो रहा है पाकिस्तान भी उतना ही कमजोर हो रहा है। हाथ में कटोरा आ गया। जिससे शक होता है कि ये ही विपक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की आर्थिक सहायता कर रहा हो। हाथ में कटोरा आने का मतलब साफ है कि कमाई बंद हो गयी। शक गलत भी हो सकता है। 

फिर मदनी जैसे सिरफिरे कट्टरपंथी कहते हैं कि मुसलमानों को जानबझ कर निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल, जब शोभा यात्राओं और मन्दिरों पर हो रही पत्थरबाज़ी की आड़ में हो रहे प्रयोग पर पुलिस और इंटेलिजेंस को इनकी गहनता से जाँच कर हरकत में आना चाहिए था। कौन ऐसी हरकतों के लिए धन लुटा रहा है? कौन पत्थर सप्लाई कर रहा है? हर कोई यह कहकर टालता रहा कि हिन्दुओं ने यात्रा में भड़काऊ नारेबाजी की। माना हिन्दुओं ने भड़काऊ नारेबाजी की, लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि एकदम इतना पत्थर कहाँ से आ गया? इसका मतलब साफ था कि यह पूर्व नियोजित षड़यंत्र था जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया। खैर, देर आए दुरुस्त आए।          

हरियाणा की नूंह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में गुरुग्राम की कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील रिजवान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रिजवान को दो दिन पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच में संदिग्ध गतिविधियों और कुछ डिजिटल सबूत सामने आने के बाद उसके खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

वकील के एक साथी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

बुधवार (26 नवंबर 2025) की सुबह पुलिस और केंद्रीय जाँच एजेंसी की टीम नूंह के गाँव खरखड़ी पहुँची और मौके से रिजवान को पकड़ा। अधिकारियों का कहना है कि रिजवान पर संवेदनशील और गोपनीय सूचनाएँ ISI तक पहुँचाने का संदेह है।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र के राजाका गाँव के अरमान और कांगरका गाँव के तारीफ को मई महीने में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के दौरान पाकिस्तानी मुद्रा और कई संदिग्ध सामान बरामद हुए थे। 

क्या कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने 60 करोड़ रूपए कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल इंचार्ज जावद को यूनिवर्सिटी बनाने के लिए दिए थे? अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद का भाई हमूद सिद्दीकी हैदराबाद से गिरफ्तार, 25 साल से चल रहा था फरार: चिटफंड के बहाने की थी करोड़ों की ठगी

     अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन का भाई हमूद सिद्दीकी हैदराबाद से गिरफ्तार (फोटो साभार: न्यूज 18, हिंदुस्तान)
दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जाँच अब मध्य प्रदेश के महू तक पहुँच गई है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों की टेरर मॉड्यूल में संलिप्तता सामने आने के बाद एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी। इसी कड़ी में महू पुलिस ने यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद सिद्दीकी के भाई हमूद सिद्दीकी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमूद पिछले 25 सालों से पुलिस की पकड़ से बचता आ रहा था। उस पर आरोप है कि महू में चिटफंड और इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाकर उसने लोगों को पैसा दोगुना करने का झाँसा दिया और करोड़ों रुपए हड़प लिए। उसके शिकार सिर्फ कारोबारी ही नहीं बल्कि नौकरीपेशा परिवार भी बने थे।
महू पुलिस अधिकारी और इंदौर एसपी ग्रामीण योगचोन भूटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस लगातार हमूद सिद्दीकी की तलाश में जुटी हुई थी लेकिन हमूद पुलिस की करवाई को देखते हुए अंडर ग्राउंड हो गया था। बकौल पुलिस, उसके बारे में किसी तरह की कोई जानकारी पुलिस को नहीं मिल रही थी और जब पूछताछ में उसकी लोकेशन का पता चला तो उसकी गिरफ्तारी हुई। 

खुद को शेयर ट्रेडिंग का बिजनेसमैन बताकर रह रहा था हमूद

दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट में जब महू कनेक्शन सामने आया तो पुलिस ने जवाद सिद्दीकी और उसके परिवार की पुरानी गतिविधियों की जाँच शुरू की। इसी दौरान पुराने ठगी मामलों की फाइलें खुलीं और हमूद की तलाश तेज कर दी गई। पुलिस को शक है कि जवाद ने अपने फरार भाई के नाम पर अल-फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी बनाई थी, जिसके जरिये भारी मात्रा में लोगों से पैसे जुटाए गए।
हैदराबाद में फरारी के दौरान हमूद खुद को शेयर ट्रेडिंग का बिजनेसमैन बताकर रह रहा था। पुलिस ने उसके रिश्तेदारों और परिचितों की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाया और योजना बनाकर उसे पकड़ लिया। अब उसे महू लाया जाएगा, जहाँ उसके पुराने मामलों की विस्तृत जाँच की जाएगी।
माना जा रहा है कि महू छोड़ने के बाद हमूद किन-किन लोगों के संपर्क में रहा, उसकी आय किन रास्तों से आती रही और ठगी की रकम का इस्तेमाल कहाँ हुआ, इन सब की परतें अब एक-एक कर खोली जाएँगी।
क्या कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने मात्र 100 में यूनिवर्सिटी को जगह दी थी? 
कहा जा रहा है कि ये हैं जवाद सिद्दीकी दिल्ली बम कांड के मास्टरमाइंड और कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के इंचार्ज और अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक। करोड़ों, अरबों की पोंजी स्कीम से लेकर यूनिवर्सिटी तक। इस यूनिवर्सिटी की परमिशन किसने दी थी, क्या आपको पता है? कहा जा रहा है कि कांग्रेस की भूपेन्द्र हुड्डा सरकार ने 2014 में।

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने बाकायदा नियम कानून और संविधान में संशोधन करके फरीदाबाद की बेशकीमती 60 एकड़ जमीन को बहुत कम कीमत में एक ठग और फ्रॉड जवाद अहमद सिद्दीकी को जो कि मध्य प्रदेश में फ्रॉड करके भागा था उसे दे दिया और इतना ही नहीं हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने माइनॉरिटी विकास योजना के अंतर्गत यहां इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए 60 करोड रुपए भी अलॉट किए, सोचिए जो कांग्रेस अदानी को जमीन देने पर छाती कूटती है वहीं कांग्रेस किस तरह से आतंक के अड्डे बनाने के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे 60 एकड़ जमीन देती है। इस अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अंदर एक विशाल मस्जिद बनी है और उस मस्जिद के इमाम के घर पर ही आतंकी मुजम्मिल शकील रहता था। पुलिस ने मस्जिद के इमाम को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, मुजम्मिल शकील के परिवार वाले कह रहे हैं कि मेरे डॉक्टर बेटे को उसे इमाम ने ही ब्रेनवॉश करके आतंकी बनाया होगा।

अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो समय के साथ पता लग ही जाएगा क्योंकि भारतीय एजेंसियों ने जावेद को भी अपनी यूनिवर्सिटी के संपूर्ण दस्तावेज और लेनदेन के खातों सहित  पूछताछ के लिए बुला लिया है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की जमीन के बारे में कई आरोप लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह जमीन मात्र 100 रूपए में दी थी, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी की जमीन की जांच शुरू हो गई है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन का कितना हिस्सा उपयोग किया, किसने और कितने पैसे में जमीन बेची गई, और इसमें किस-किस का हाथ है।

जांच में यह भी पता चला है कि यूनिवर्सिटी ने जमीन खरीदने में कई नियमों का उल्लंघन किया है, जिसमें रास्तों पर कब्जा करना और किसानों को दबाव में लाकर जमीन बेचने के लिए मजबूर करना शामिल है।

‘विधायक हो तो क्या, अलग से नहीं होगा ट्रायल’: नूहँ हिंसा केस में कांग्रेस MLA मामन खान को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा, HC के फैसले पर लगाई रोक

                                                        कांग्रेस विधायक मामन खान
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया है कि किसी राजनेता को सिर्फ उसके पद के आधार पर कोई विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हरियाणा कांग्रेस विधायक मामन खान के लिए अलग से ट्रायल चलाने की बात कहीं गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायक होना अलग ट्रायल का आधार नहीं हो सकता। कानून की नजर में सभी बराबर हैं।

नूहँ हिंसा मामले में हुआ था अलग ट्रायल का आदेश

यह मामला 2023 की नूहँ हिंसा से जुड़ा है, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। इस हिंसा को भड़काने के आरोप में विधायक मामन खान और अन्य लोगों पर केस दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने विधायक खान के लिए अलग से सुनवाई का आदेश दिया, जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया था।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि सिर्फ राजनीतिक पद के आधार पर किसी को अलग से ट्रायल की अनुमति देना संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

क्यों नहीं हो सकता अलग ट्रायल?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कुछ अहम बातें बताईं हैं। कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपित कानून के सामने बराबर हैं। विधायक होना अलग ट्रायल का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में विधायक खान और अन्य आरोपितों के खिलाफ सबूत एक जैसे हैं। अलग-अलग ट्रायल चलाने से गवाहों को बार-बार बुलाना पड़ेगा, जिससे बेवजह देरी होगी और विरोधाभासी फैसले आने का खतरा भी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही विधायकों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा होना चाहिए, लेकिन यह निष्पक्ष सुनवाई की कीमत पर नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी आरोपित को केवल राजनीतिक पद के कारण अलग ट्रायल की अनुमति देना सही नहीं है। इस फैसले के बाद, विधायक मामन खान का मामला दोबारा ट्रायल कोर्ट को भेज दिया गया है, जहाँ विधायक का ट्रायल अब बाकी आरोपितों के साथ ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने तय किए जॉइंट ट्रायल के प्रिंसिपल

सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले में कुछ जॉइंट ट्रायल के प्रिंसिपल भी तय किए है। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि आमतौर पर हर आरोपित का ट्रायल अलग-अलग होता है, लेकिन अगर अपराध एक ही घटना का हिस्सा हों, तो जॉइंट ट्रायल हो सकता है। यह फैसला जज की बुद्धिमानी पर निर्भर करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि जॉइंट या अलग ट्रायल का फैसला शुरुआत में ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि फैसला लेते समय यह देखना जरूरी है कि क्या जॉइंट ट्रायल से किसी आरोपित को कोई नुकसान हो सकता है या इससे सुनवाई में देरी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि एक ट्रायल में जिन सबूतों का इस्तेमाल किया गया है, वहीं सबूत दूसरे ट्रायल में इस्तेमाल नहीं हो सकते हैं। इसलिए, अलग-अलग ट्रायल से कानूनी प्रक्रिया में दिक्कतें आ सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि कोई भी फैसला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जाएगा कि जॉइंट या अलग ट्रायल संभव था। कोर्ट तभी दखल देगा जब आरोपित असलियत में कोई नुकसान हुआ हो।

रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली, सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा: ED, संपत्ति छिपाने में कांग्रेस MP प्रियंका वाड्रा भी नपेंगी?

                               कांग्रेस सांसद पत्नी प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो, साभार: न्यूज18)
जब से हरियाणा से कांग्रेस सत्ता गयी है तब से आज तक कोई रॉबर्ट वाड्रा ने कोई भूमि सौदा नहीं किया, ये अपने आपमें बहुत बड़ी खबर है। दूसरे यह कि आखिर चुनाव दिनों में ही क्यों घोटालों सामने आते हैं? शेष दिनों में क्या ED और अन्य संस्थाएं आराम फरमाने चली जाती हैं? इतने सालों में अभी कोई सख्त कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की? अगर यही घोटाला किसी आम नागरिक किया होता क्या उसका केस भी इसी तरह तारीख पे तारीख मिल रही होती?     

कांग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली थी। बाद में यह जमीन वाड्रा ने 58 करोड़ रुपए में रियल एस्टेट कंपनी DLF को बेच दी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में यह खुलासा किया है।

यह जमीन गुरुग्राम के सेक्टर 83 में है। वाड्रा ने जमीन के बदले 7.5 करोड़ रुपए भुगतान का दावा किया था। लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा वाड्रा को मिला। इसके कारण हरियाणा के तत्कालीन कांग्रेसी  मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा उनके प्रभाव में थे।

रॉबर्ट वाड्रा पर ED की चार्जशीट

ED ने 17 जुलाई 2025 को यह चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर प्रॉप्रटीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने जमीन स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को रिश्वत के तौर पर दी थी ताकि SLHPL के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुँच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन ‘नगर एवं ग्राम नियोजन’ मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को उसी गाँव में हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें।

इससे पहले ED ने बताया था कि उन्होंने वाड्रा से जुड़ी 37 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ अटैच की थी। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों पर 58 करोड़ रुपए की ‘अपराध की कमाई’ को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करने का आरोप है।

प्रियंका गाँधी तक पहुँची जाँच की आँच

इस मामले में वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा तक भी जाँच की आँच पहुँच गई है। ED की चार्जशीट में फरीदाबाद के अमीपुर गाँव में 39.7 एकड़ की 3 हाई-वैल्यू संपत्तियों का जिक्र है, जिनकी जानकारी प्रियंका ने चुनावी हलफनामे में नहीं दी है। यह मामला केरल हाई कोर्ट में है और अदालत ने नोटिस भी जारी किया है। गौरतलब है कि चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देने को ‘भ्रष्ट आचरण’ के तौर पर देखा जाता है और इसमें अयोग्यता और जेल की सजा हो सकती है।

कैसे खुला रॉबर्ट वाड्रा का फर्जीवाड़ा?

ED की जाँच के दौरान हरियाणा सरकार के अधिकारियों और OPPL के प्रमोटरों सहित कम से कम 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इन लोगों ने शुरू में दावा किया था कि वाड्रा ने जमीन के लिए 7.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, लेकिन ED ने इस बयान को झूठा बताया है।

ED ने गुरुग्राम पुलिस से वाड्रा के इस कथित भुगतान की जाँच करने को कहा। जाँच में पुलिस उपायुक्त ने पाया कि SLHPL ने OPPL से 3.53 एकड़ ज़मीन 12 फरवरी 2008 को सेल डीड नंबर 4928 के जरिए खरीदी थी। कागजों में दिखाया गया कि भुगतान चेक नंबर 607251 से किया गया है, लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। इसके 6 महीने बाद एक और चेक से रकम दी गई।

यह चेक Skylight Realty Pvt Ltd (SLRPL) का था, न कि खरीददार कंपनी SLHPL का। SLHPL की पूँजी केवल 1 लाख थी और SLRPL के खाते में भी 7.5 करोड़ रुपए नहीं थे। 45 लाख का स्टांप ड्यूटी भी बेचने वाले ने दी थी, न कि वाड्रा की कंपनी ने। ईडी के अनुसार, रजिस्ट्री में झूठा भुगतान दिखाकर सौदा बेनामी तरीके से किया गया।

गद्दारों के लिए Victim Card खेलना शुरू : ‘एक बार तो अल्लाह भी माफ कर देता है…’: नोमान इलाही के लिए भी चाहिए ‘माफी’, ISI जासूस के कैराना से पानीपत तक के लिंक ऑपइंडिया ने खँगाले

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले नोमान इलाही के कैराना वाले घर पर लटका ताला, पानीपत में बहन के घर से हुई गिरफ्तारी
छोड़ दो बच्चा है। पता नहीं क्या फितूल आ गया उसके। एक बार तो अल्लाह ताला भी माफ कर देता है। अगर नहीं छोड़ते तो रोटी कपड़ा तो देगी उसे सरकार?

ये बात ISI जासूस नोमान इलाही के लिए ऑपइंडिया से कैराना की एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने कही। इलाही का घर कैराना के बेगमपुरा इलाके में है। बुजुर्ग महिला हमें इलाही के तालाबंद घर के बाहर ही मिली थीं।

कैराना, उत्तर प्रदेश की वह जगह है जो सुर्खियों में गलत वजहों से ही आती है। अभी हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही की गिरफ्तारी ने उसे चर्चा में ला दिया है। 2014 में यह जगह हिंदू व्यापारियों की हत्या और 2016 में हिंदुओं के पलायन को लेकर चर्चा में आया था। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस माहौल में बदलाव आया और पलायन कर चुके कई हिंदू फिर से वापस लौटे हैं।

नोमान इलाही की हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर दिल्ली से करीब 125 किलोमीटर दूर कैराना तक गए। लोगों से पूछते-पूछते कैराना के उस बेगमपुरा तक भी पहुँचने में कामयाब हुए. जहाँ नोमान इलाही का घर है।

मैं बाहर नहीं आ सकती, पर्दा है: नोमान इलाही की पड़ोसन

मिश्रित आबादी के बीच एक संकरी गली में नोमान इलाही के घर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। हमने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाया। एक महिला ने नाम न बताते हुए जालीदार दरवाजे के अंदर से (पहचान छिपाते हुए) कहा, “इनके सारे काम गलत हैं। ये किसी के पैसे लेकर भागते हैं तो किसी का कुछ। इन लोगों से हमारा कोई मतलब नहीं है। ये कई सालों से यहाँ नहीं रहते हैं।” बाहर आकर बात करने के अनुरोध पर महिला ने कहा, “मैं बाहर नहीं आ सकती। पर्दा है। मैं अपना नाम नहीं बताऊँगी। इसे (नोमानी) खत्म कर दीजिए या जेल में डाल दीजिए।”

नोमान इलाही की गली में सन्नाटा, कोई पहचान बताने को तैयार नहीं

जिस गली में नोमान इलाही का घर है, सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बात करने से बच रहे थे। अपनी पहचान भी नहीं बता रहे थे। ऐसी ही एक महिला ने अपना नाम न बताते हुए कहा, “करीब 2 साल से नोमान के घर पर ताला लगा है। इसके भाई मजदूरी करते हैं और बहनों की शादी हो चुकी है। नोमान जब यहाँ रहता था तो बहुत अच्छा था बाहर जाने के बाद पता नहीं।” इस दौरान अन्य महिलाएँ अपने खिड़कियों से झाँक रहीं थी। लेकिन कैमरा सामने आते ही घर के अंदर चली जा रहीं थीं। इसी बीच एक युवक ने कहा, “नोमान के कारण कैराना बदनाम हुआ है। उसने जो भी किया है, गलत किया है।”

नोमान इलाही के लिए माफी चाहती हैं बुजुर्ग महिला

नोमान के घर के पास हाथ में चिप्स लिए खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “जब यहाँ रहता था तो अच्छा था। अब पता नहीं। जैसा उसने किया है, वैसा वह भरेगा। वह एक-दो बार पाकिस्तान गया होगा। उसके वहाँ रिश्तेदार हैं।” इस महिला का यह भी कहना था कि उनके रिश्तेदार भी पाकिस्तान में रहते हैं, लेकिन वे कभी गईं नहीं, क्योंकि पासपोर्ट नहीं बन सका। इसी बुजुर्ग महिला ने नोमान इलाही को माफ कर देने की बात की, जिसका हमने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नोमान की गिरफ्तारी के बाद इस गली में लोगों का आना बढ़ गया है। इसी दौरान नोमान के घर के सामने वाले मकान में मौजूद एक लड़के ने बताया, “वह (नोमान इलाही) जब भी यहाँ आता था तो अकेला ही घर में रहता था और फिर ताला लगाकर चला जाता था।”

जिस मस्जिद में जाता था नमाज पढ़ने, उसके इमाम बोले- मैं नोमान इलाही को नहीं जानता

हमने गली के सामने वाली मस्जिद के उस इमाम से भी बात करने की कोशिश की जहाँ नोमान इलाही नमाज पढ़ने के लिए जाता था। लेकिन मस्जिद के इमाम ने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। इमाम शहजाद ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। उसने गलत किया है। उसे सजा मिलनी चाहिए।”
इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले दानिश ने बताया, “नोमान ने शहर का नाम बदनाम किया है। पहले (जब वह कैराना रहता था) वह अक्सर नमाज के लिए मस्जिद आता था। मैंने उसे देखा है। अब वह अपनी बहन के यहाँ पानीपत रहता है। इसका बाप भी नकली पासपोर्ट बनाने का काम करता था। उसने देश के साथ गद्दारी की है। उसे फाँसी की सजा होनी चाहिए।” वहीं बैठे एक बुजुर्ग ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। लेकिन उसे अपने किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए।”

सपा राज में ‘मिनी पाकिस्तान’ कहलाता था कैराना

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप गोयल ने बताया कि सपा सरकार में कैराना ‘मिनी पाकिस्तान’ के नाम सा जाना जाता था। योगी सरकार के बाद छवि सुधरी है। लेकिन नोमान की गिरफ्तारी ने फिर से कैराना की छवि को धूमिल किया है।

हमें देखते ही भड़क उठी नोमान इलाही की बहन

नोमान इलाही की गिरफ्तारी पानीपत से हुई है। यहाँ के सेक्टर-29 स्थित मोहन नगर में वह अपनी बहन के घर रहता था। यहाँ हमें कैमरा के साथ देखते हुए नोमान इलाही के रिश्तेदार भड़क उठे। करीब 75-80 गज के पुराने से मकान के फर्श पर बैठी नोमान की बहन जीनत ने कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई घर में अंदर आने की। किससे पूछकर घर के अंदर आए। हमें किसी से बात नहीं करनी। अपना कैमरा बंद करो।”
हमने नोमान के जीजा इरफान से बात करने की कोशिश की तो उसने कहा कि हम मीडिया से तंग आ चुके हैं। मीडिया पूछती कुछ है और दिखाती कुछ है। हमें किसी से बात नहीं करनी। उसने कहा, “अब हमारा नोमान से कोई नाता नहीं है। उसने हमारी 35 साल की कमाई हुई इज्जत को मिट्टी में मिला दिया है।”
उल्लेखनीय है कि 3 बहन और 3 भाइयों में नोमान सबसे छोटा है। उसका निकाह नहीं हुआ है। उसका जीजा इरफान पानीपत में कार धुलाई सेंटर के साथ साथ बाइक लेमिनेशन और लकड़ी का भी काम करता है।

‘घास भारत का खा रहा, दूध पाकिस्तान में दे रहा’

जिस गली में नोमान की बहन का घर है, उसके बाहर दुकान करने वाली एक महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “वह कभी-कभी बीड़ी का बंडल लेने के लिए दुकान पर आता था। हमें कभी शक ही नहीं हुआ कि वह ऐसा भी कुछ करता है। अगर वह गुनहगार है तो कानून उसे सजा दे।”
पड़ोस की एक अन्य लड़की का कहना था कि यदि उनलोगों को पता होता तो वे पहले ही नोमान इलाही की खबर पुलिस को देकर उसे पकड़वा देते। उसने कहा, “ऐसे बंदे तो गोली मार देनी चाहिए। घास भारत का खा रहा है और दूध पाकिस्तान में दे रहा है।”

376 मर्द, 284 औरत… राजस्थान में 1000+ बांग्लादेशी-रोहिंग्या पकड़े गए : हरियाणा में 237 घुसपैठिए ‘बंगाली’ बनकर काम कर रहे थे

                      रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी (फोटो साभार: IDR)
राजस्थान और हरियाणा में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान में 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक 1,000 से ज्यादा घुसपैठिए पकड़े गए हैं, जबकि हरियाणा के तीन जिलों- नूहँ, झज्जर और हाँसी में 237 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। इनमें से कई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारत का नागरिक बताने की कोशिश की थी। अब घुसपैठियों को खास प्लेन से पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है, जहाँ से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार वापस भेजेगा।

राजस्थान में पकड़े गए घुसपैठियों में 341 बच्चे, 284 महिलाएँ और 376 पुरुष शामिल हैं। राजस्थान में सबसे ज्यादा घुसपैठिए सीकर जिले से पकड़े गए हैं, जहाँ 394 लोग हिरासत में हैं। जयपुर (218), अलवर (103), कोटपूतली-बहरोड़ (117) और भिवाड़ी (67) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में घुसपैठिए पकड़े गए।

बनवा लिए थे फर्जी निवास प्रमाण पत्र

जाँच में पता चला कि ये लोग फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनवाकर राजस्थान के मूल निवासी होने का दावा कर रहे थे। कई महिलाएँ घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थीं, जबकि पुरुष ईंट भट्टों, खान मजदूरी, कबाड़ बीनने और बेलदारी जैसे कामों में लगे थे। कुछ के खिलाफ चोरी और अन्य अपराधों के मामले भी सामने आए हैं।
राजस्थान सरकार ने 8 मई 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हर जिले में विशेष टास्क फोर्स और होल्डिंग सेंटर बनाए। इन सेंटरों में घुसपैठियों को अस्थायी रूप से रखा जा रहा है। 15 मई 2025 को 148 लोगों का पहला जत्था विशेष विमान से पश्चिम बंगाल भेजा गया। अगले कुछ दिनों में और लोगों को भेजने की तैयारी है। गृह विभाग इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहा है ताकि कोई चूक न हो।

हरियाणा में भी अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान

हरियाणा के मेवात इलाके में अब तक 237 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें से नूहँ जिले में पुलिस ने 125 बांग्लादेशियों को पकड़ा, जो बिना वैध दस्तावेजों के ईंट भट्टों पर काम कर रहे थे। झज्जर के भदानी गाँव में 47 और हाँसी में 26 घुसपैठिए हिरासत में लिए गए। 12 मई को भी हाँसी में 39 लोग पकड़े गए थे। इनमें से कई ने खुद को बंगाली मजदूर बताकर भट्टा मालिकों को गुमराह किया था।
पुलिस अब उन मालिकों पर भी कार्रवाई की योजना बना रही है, जो बिना दस्तावेज जाँच के अवैध मजदूरों को काम दे रहे हैं। नूहँ पुलिस ने स्थानीय कारोबारियों से कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील की है।

एक ज्योति, नकाब कई… क्या दानिश पर मर मिटी थी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाली भारत की यूट्यूबर? क्या पाकिस्तान ज्योति को भारत विरोधियों को परोस रहा था?

गाज़ी जिन्हे मुग़ल बादशाह बताया जाता है भारत पर कब्ज़ा करने अपने साथ फौज नहीं लाए थे क्योकि उनको मालूम था कि वहां बिकाऊ जयचन्द मौजूद हैं। इसी तरह ब्रिटिशर्स को मीर ज़ाफ़र मिल गए।  
यदि आपका सोशल मीडिया से वास्ता है तो शायद यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (Youtuber Jyoti Malhotra) को जानते होंगे। शायद उसके चैनल ‘ट्रैवल विद जो (Travel with JO)’ का वीडियो भी देखा हो। अब खुलासा हुआ है कि यह ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान की जासूस है।

सोशल मीडिया से ही ज्योति ने नाम बनाया। सोशल मीडिया की गतिविधियों से ही वह एजेंसियों की रडार पर आई। उसका सोशल मीडिया प्रोफाइल खँगालते ही आपको एहसास हो जाएगा कि उसके लिए पाकिस्तान जाना और वहाँ के बड़े लोगों से मिल लेना कोई बड़ी बात नहीं थी।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि उसके पीछे किसका हाथ है? अब उसके ही एक वीडियो से पता चला है कि वह दिल्ली के पाकिस्तानी उच्चायोग में राजनयिक बनकर तैनात उस ISI जासूस एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के सीधे संपर्क में थी, जिसे हाल ही में भारत ने देश छोड़ने का आदेश दिया था। दावा यह भी है कि दानिश पर ज्योति मर मिटी थी। यह भी कहा जा रहा है कि दानिश ही ज्योति के पाकिस्तान आने-जाने का खर्च उठाया करता था।

आश्चर्यजनक तौर पर ज्योति को पाकिस्तान का वीजा आसानी से मिल जाता था। वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज से उनके बगल में ऐसे खड़ी होकर बतियाती थी, जैसे गहरी यारी हो।

आश्चर्यजनक यह भी है कि जिस पहलगाम में हिंदुओं की इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर हत्या की थी, वहाँ की उसने अटैक से कुछ महीने पहले ही यात्रा की थी और वीडियो बनाए थे। पहलगाम अटैक के बाद एक वीडियो में उसने पीड़ितों और भारत सरकार को ही इसका जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भी की थी।

 सोशल मीडिया पर ट्रैवल व्लॉगर ज्योति के कई चेहरे हैं। कभी वह लग्जरी लाइफ जीती नजर आती है। कभी वह मस्त​क पर चंदन किए धार्मिक स्थल की यात्रा करती दिखती है। लेकिन यह तथ्य बार-बार खटकता है कि हरियाणा के हिसार में 55 गज के एक घर में पली-बढ़ी लड़की अचानक से इतनी शान-शौकत वाली जिंदगी कैसे जीने लगी? भारत के दुश्मन मुल्क की हर जगह उसके पहुँच में कैसे आ गई?

दिल्ली में 20 हजार की नौकरी की, पिता कारपेंटर

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो‘ के 3.77 लाख सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर उसे 1.31 लाख फॉलो करते हैं। उसके वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है इन्हें बनाने में मोटा खर्च हुआ होगा।

        दुबई घूमने गई ज्योति। यह तस्वीर 25 अक्टूबर 2024 की है। (फोटो साभार: Instagram-travelwithjo)

ज्योति हरियाणा की रहने वाली एक सामान्य घर की लड़की है। उसके पिता हरीश कुमार अभी भी सामान्य नौकरी करते हैं। यूट्यूबर ज्योति का हिसार की न्यू अग्रसेन कॉलोनी में सिर्फ 55 गज का घर है। इसमें तीन छोटे-छोटे कमरे बने हैं। पिता कारपेंटर की नौकरी करते हैं, मगर इस कमाई से घर नहीं चल पाता है। घर का खर्च चाचा की पेंशन से चलता था। ज्योति के माता-पिता का तलाक 20 साल पहले हो चुका है।

                       हरियाणा के हिसार स्थित अग्रेसन कॉलोनी में ज्योति का घर (साभार: DainikBhaskar)

कभी दिल्ली में ज्योति 20 हजार की नौकरी करती थी। कोरोना में नौकरी छूटी और वह हिसार लौट आई। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया और अचानक से उसकी जिंदगी बदल गई।

सोशल मीडिया पर ‘धार्मिक-देशभक्त’ का नकाब

सोशल मीडिया पर ज्योति खुद को धार्मिक और देशभक्त दिखाने की पूरी कोशिश करती रही है। भारत के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के वीडियो बनाए हैं। देशभक्ति गीतों पर तिरंगे के साथ रील्स भी पोस्ट की है। लेकिन विदेश जाते ही उसका नकाब उतर जाता था।  

पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर से लेकर भूटान के फर्टिलिटी टैंपल और ‘कंडोम कैफे‘ तक के उसने आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए हैं। इन वीडियो के थंबनेल भी अश्लील हैं।

  इस फोटो में ज्योति केरल एक होटल में हैं। तस्वीर इसी साल 19 फरवरी की है (साभार: Instagram-travelwithjo)

यूट्यूब चैनल पर पाकिस्तान के वीडियो की भरमार

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ पर पाकिस्तान के कई वीडियो हैं। इनमें वहाँ की बस, ट्रेन, बाजार और संस्कृति को दिखाया गया है। इनमें ‘Indian Girl in Pakistan‘, ‘Indian Girl Exploring Lahore‘,’Indian Girl Ek Qatal Raaz Temple‘, ‘Indian Girl Rides Luxury Bus in Pakistan‘नाम से कई वीडियो हैं।

पाकिस्तान में कैसे बनाया नेटवर्क?

ज्योति ने पुलिस पूछताछ में कबूला है कि वह साल 2023 में पाकिस्तान का वीजा लगवाने दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई। दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बातचीत शुरू हो गई। इसके बाद ज्योति ने दो बार पाकिस्तान की यात्रा की। वहाँ दानिश के जानकार अली अहयान से मिली, जिसने उसके ठहरने और घूमने-फिरने का इंतजाम किया।

पाकिस्तान में अली अहयान ने उसे पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया अधिकारियों से मिलवाया। यहीं पर ज्योति की मुलाकात शाकिर और राणा शहबाज से भी हुई। शाकिर का नंबर उसने भारत लौटकर ‘जट रंधावा’ नाम से सेव कर लिया ताकि किसी को शक न हो। भारत लौटने के बाद वह व्हाट्सएप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे ऐप्स से लगातार पाकिस्तान से संपर्क में रही और देशविरोधी सूचनाएँ साझा करती रही।

दानिश की इफ्तार पार्टी की ‘खास मेहमान’

साल 2024 में ज्योति को पाकिस्तान हाई कमीशन से इफ्तार पार्टी का खास निमंत्रण मिला। वहाँ वह चीनी अधिकारियों से भी मिली। ज्योति ने इस कार्यक्रम का वीडियो खुद शेयर किया था, जिसमें वह दानिश के काफी नजदीक नजर आई। दानिश ने उसे पार्टी में रिसीव किया। वहाँ मौजूद अन्य मेहमानों से परिचय कराया और अपनी बीवी से भी मिलवाया।
इस 15 मिनट के वीडियो में ज्योति पाकिस्तान की व्यवस्था की तारीफ करती दिख रही है। वहाँ मौजूद भारतीयों से बातचीत कर रही है और पूछ रही है कि पाकिस्तान जाकर कैसा अनुभव रहा। आखिर में वीडियो का समापन दानिश और ज्योति मिलकर करते हैं। इसमें दानिश ने पार्टी में आने के लिए ज्योति का आभार भी जताया।
                 इफ्तार पार्टी में दानिश के साथ यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (साभार: Youtube/Travel with JO)
ज्योति की पाकिस्तान हाई कमीशन में तैनात दानिश से बार-बार मुलाकात होती रही। पूछताछ में यह सामने आया कि दानिश, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एजेंट था। भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे अवांछित व्यक्ति घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया था।

दानिश के हाथों में खेल रही थी ज्योति?

दानिश का मकसद सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की अच्छी छवि दिखाना और भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना था। इसी काम में उसने ज्योति का इस्तेमाल किया। ज्योति ने अपने सोशल मीडिया चैनलों पर ऐसे वीडियो और पोस्ट डाले हैं जिनका मकसद पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाना है।
खुलासा हुआ कि दानिश भारत के कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के संपर्क में भी था, जिन्हें उसने पैसे और सुविधाएँ देकर अपने पक्ष में किया। खासकर पहलगाम हमले के बाद जब भारत में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा था, तब दानिश की रणनीति थी कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को शांतिप्रिय देश बताया जाए। ज्योति ने इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

जब मरियम नवाज की बगलगीर बनी ज्योति

पाकिस्तान पंजाब की पहली महिला मुख्यमंत्री मरियम नवाज का इंटरव्यू भी ज्योति ले चुकी है। गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में मरियम नवाज के बगल में वह दिखाई पड़ती है।
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में सीएम मरियम नवाज का इंटरव्यू लेती ज्योति (साभार: Youtube/Travel with JO)
दोनों काफी सहज अंदाज में बातचीत करते नजर आते हैं। 42 मिनट का यह वीडियो अप्रैल 2024 का है, जिसे 7.53 लाख दर्शक देख चुके हैं और करीब दो हजार कमेंट आए हैं। वीडियो में ज्योति कहती नजर आ रही कि वह यहाँ दूसरी बार आई हैं और यहाँ आकर उन्हें बहुत अच्छा महसूस होता है।

पाकिस्तान-चीन यात्रा के बाद हुआ शक

साल 2024 में ज्योति ने दो महीने के भीतर पाकिस्तान और चीन का दौरा किया। इसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई। वह 17 अप्रैल को पाकिस्तान गई। 15 मई को भारत वापस लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून 2024 को वह चीन चली गई। 09 जुलाई 2024 तक चीन में रही। फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुँच गई।
   चीन की यात्रा के दौरान फ्लाइट में एयर होस्टेस के साथ ज्योति ने ली तस्वीर (साभार:  Instagram-travelwithjo)
इन यात्राओं के देखते हुए जाँच एजेंसी के अधिकारी अलर्ट हो गए। वह ज्योति को ट्रैक करने लगे। पुख्ता सबूत मिलते ही 15 मई 2025 को सुबह 9 बजे पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा। पिता और चाचा के मोबाइल जब्त कर लिए। ज्योति को थाने लेकर आई और पूछताछ की। रात 9 बजे उसे घर वापस भेज दिया। 17 मई को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ISI के संपर्क में थी ज्योति?

फिलहाल ज्योति को पाँच दिन की रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिसार DSP कमलजीत ने बताया कि ज्योति पर अधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और BNS 152 के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा उसके मोबाइल और लैपटॉप से कई संदिग्ध सामग्री मिली है।
SP शशांक कुमार सावन ने पुष्टि की कि ज्योति ISI के संपर्क में थी। उसकी आय और खर्च में भारी अंतर है। बैंक खाते और सोशल मीडिया गतिविधियाँ खंगाली जा रही हैं। कुछ और सोशल मीडिया यूज़र्स भी जाँच के घेरे में है।

धार्मिक यात्रा पर पाकिस्तान गया देवेंद्र, हुस्न जाल में फँस बन गया ISI जासूस: पैसे-लड़कियों का दिया लालच, हथियारों संग फोटो से खुला भेद

                पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था देवेंद्र सिंह ढिल्लों-बीच में (फोटो साभार - अमर उजाला)
पंजाब के पटियाला की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने हरियाणा के कैथल जिले में छापेमारी की और मस्तगढ़ गाँव के देवेंद्र सिंह ढिल्लों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया। उसे आईएसआई ने हनी ट्रैप में फँसाकर जासूसी के लिए तैयार किया था। वो आईएसआई के 5 एजेंट्स के संपर्क में था। उसे आईएसआई ने लड़की का लालच भी दिया था, जिसके बदले में उसने सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़ी तस्वीरें भी भेजी थी। इस मामले में स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने कैथल के मस्तगढ़ गाँव से उसे पकड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के पटियाला में रहकर देवेंद्र पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था और वो खालसा कॉलेज में पढ़ रहा था। राजनीति शास्त्र के छात्र देवेंद्र पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने का आरोप है। जाँच में पता चला कि नवंबर 2024 में वह करतारपुर कॉरिडोर के जरिए सिख श्रद्धालुओं के साथ पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब और लाहौर जैसे धार्मिक स्थलों का दौरा किया, जहाँ उसकी मुलाकात आईएसआई एजेंटों से हुई।

पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र पाँच से ज्यादा पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में था। उसकी दोस्ती फेसबुक पर एक पाकिस्तानी युवती से हुई, जो बाद में आईएसआई एजेंट निकली। हनी ट्रैप में फँसकर उसने पटियाला के सैन्य क्षेत्र की तस्वीरें खींचकर एजेंटों को भेजीं। जब पुलिस जाँच की आहट मिली, तो उसने अपने मोबाइल का सारा डाटा डिलीट कर दिया। साइबर यूनिट अब डाटा रिकवरी में जुटी है।

देवेंद्र मध्यमवर्गीय परिवार से है, जिसमें माता-पिता और एक बहन हैं। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालने से पुलिस का ध्यान उसकी ओर गया। ये हथियार गाँव के मालक सिंह के थे, जिसके आधार पर पुलिस ने डर फैलाने का आरोप भी जोड़ा।

डीएसपी वीरभान सिंह के अनुसार, देवेंद्र करतारपुर साहिब दर्शन के बहाने पाकिस्तान गया था, जहाँ वह ISI एजेंटों के संपर्क में आया और भारत की सैन्य जानकारी पाकिस्तान को भेजने लगा।

एसपी आस्था मोदी ने कहा कि देवेंद्र के अन्य संपर्कों की जाँच जारी है। यह मामला आईएसआई के सोशल मीडिया हनी ट्रैप नेटवर्क को फिर उजागर करता है, जिसने पहले भी कई भारतीय कर्मचारियों को निशाना बनाया है।

यह मामला एक बार फिर आईएसआई द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाए गए हनी ट्रैप नेटवर्क को सामने ला रहा है, जिससे पहले भी DRDO और विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है।

जम्मू के आप शंभू मंदिर के भीतर नहीं घुस पाई जेहादी पाकिस्तानी की नापाक मिसाइल, दरवाजे पर ही हुए टुकड़े

                जम्मू कश्मीर का आप शंभु मंदिर (लेफ्ट), सिरसा में ही 'फतेह-2' को मार गिराया (राइट)
इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है। गाज़ियों(मुग़ल) के कदमों पर चलते पाकिस्तान की जेहादी जहरीली मानसिकता को देख पाकिस्तानपरस्तों को होश में आना चाहिए। इजराइल को गालियां देने वालों अपने लाडले पाकिस्तान की जहरीली हरकतों पर क्यों नहीं बोलते? क्यों नहीं पाकिस्तान जाकर उससे पूछते कि क्यों स्कूलों और शहरी इलाकों में बमबारी कर बेकसूर नागरिकों को मारा जा रहा है? पाकिस्तान की जहरीली हरकत को रक्षा मंत्री 
ख्वाजा आसिफ ने अपनी ही पार्लियामेंट में कहा कि "जरुरत पड़ने पर मदरसों के लड़कों को भी सरहद पर भेजा जा सकता है।" पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मदरसों में दी जाने वाली तालीम को कबूल कर लिया है। 
हमारा प्रधानमंत्री बुजदिल है मोदी का नाम लेने से डरता है--पाकिस्तानी सांसद, संसद में   

दूसरे, भारत में पल रहे पाकिस्तानपरस्तों को पाकिस्तान संसद में उनके ही सांसद अपने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।  

भारत-पाक तनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक पाकिस्तानी सांसद अपने प्रधानमंत्री को बुजदिल बता रहा है। यह वीडियो पाकिस्तानी संसद का है। इस वीडियो में वहां के सांसद शाहिद खट्टर अपने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की तुलना गीदड़ से कर रहे हैं और उन्हें बुजदिल बता रहे हैं। शाहिद खट्टर ने यह भी कहा कि हमारे पीएम तो नरेन्द्र मोदी का नाम भी नहीं ले सकते हैं, उन्हें डर लगता है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो के शेयर कर पाकिस्तानी पीएम पर तंज कस रहे हैं। आप भी देखिए…

खैर, आतंकी पाकिस्तान जिस तरह मन्दिरों और गुरुद्वारों को निशाना बना रहा है। 1965 में भी जेहादी पाकिस्तान ने जम्मू में माता वैष्णो मन्दिर पर हमला किया था। भारत में पाकिस्तान के दलाल जो अपनी कुर्सी की खातिर सनातन को कलंकित करने का कोई मौका नहीं चूकते उन्हें देखना चाहिए कि जम्मू के आप शम्भू मंदिर में दागी मिसाइल मंदिर के द्वार पर ही टुकड़े-टुकड़े हो गयी। इतना ही नहीं राजस्थान एक मंदिर में भी दागे गए बमों का अम्बार देखा जा सकता है। मंदिर में इतने बम दागे गए लेकिन फटा एक भी नहीं।        

शुक्रवार (9 मई 2025) की रात अचानक एक खबर फैली कि पाकिस्तान ने दिल्ली एयरपोर्ट की तरफ फतेह-2 नाम की एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। इस खबर से लोगों में डर और गलत जानकारी फैलने लगी। इसकी पुष्टि दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने तुरंत की और इस खबर को गलत साथ ही गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

उन्होंने लोगों से अपील की है, कि हमले से जुड़ी अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। इसके अलावा सही खबरों के लिए सिर्फ आधिकारिक सोर्स पर ही भरोसा करें। एयरपोर्ट पर उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहीं और कामकाज में कोई रुकावट नहीं आई।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने जो मिसाइल दागी थी, वह दिल्ली तक पहुँची ही नहीं। उसे हरियाणा के सिरसा के ऊपर ही भारत के हवाई सुरक्षा सिस्टम से मार गिराया गया है। इससे किसी भी आम नागरिक या जरूरी जगह को कोई खतरा नहीं हुआ।

पाकिस्तान माहौल खराब करने के लिए ऐसी झूठी अफवाह फैला रहा है। भारतीय सेना ने यह भी बताया कि नियंत्रण रेखा (LoC) पर ड्रोन की गतिविधियाँ और गोलाबारी भी बढ़ गई है।

सेना के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के कई ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उनके हमले नाकाम कर दिए गए। कड़ी निगरानी और तैयारी की वजह से पंजाब और जम्मू में हमारे हवाई सुरक्षा सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को मार गिराया।

जम्मू कश्मीर के आप शंभु मंदिर पर भी पाकिस्तान द्वारा हमले की खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने शंभु मंदिर के ठीक सामने गेट पर मिसाइल से हमले कर दिया। लेकिन फिलहाल किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।

सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो काफी वायरल हो रही है। शुकवार (9 मई 2025) को ही पाकिस्तान ने लगातार दूसरी रात जम्मू कश्मीर से लेकर गुजरात तक के 26 स्थानों पर ड्रोन से हमला किया। रक्षा मंत्रालय का दावा है कि हवाई अड्डों और वायुसेना ठिकानों किए गए हमलों को हवा में ही विफल कर दिया गया। इसकी वीडियो भी जारी हुई है। वीडियो में स्थान जम्मू कश्मीर बताया गया है और उधमपुर के डिब्बर इलाके से जोरदार धमाके के बाद धुआँ उठता दिखाई दे रहा है। इसके बाद हवाई सायरन बजाए गए।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कुछ संवेदनशील इलाकों में रात के समय ब्लैकआउट के नियम लागू कर दिए गए हैं और निगरानी ड्रोन लगातार संदिग्ध इलाकों पर नजर रख रहे हैं।

हालाँकि, रक्षा अधिकारियों ने लोगों को विश्वाश दिलाया कि भारत के सभी हवाई ठिकाने सुरक्षित हैं और एयरपोर्ट समेत भीड़भाड़ वाले एरिया को किसी भी प्रकार का सीधा खतरा नहीं है।

हरियाणा : कांग्रेस नेता हिमानी नरवाल बॉयफ्रेंड को करती थी ब्लैकमेल, मार कर सूटकेस में भर दिया: मृतका का मोबाइल और ज्वेलरी भी बरामद

                                                     हिमानी नरवाल (साभार: ऑनमनोरमा)
हरियाणा के रोहतक में कांग्रेस नेता हिमानी नरवाल की हत्या के मामले में पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित सचिन बहादुरगढ़़ का रहने वाला है और खुद को हिमानी का ब्वॉयफ्रेंड बताया है। उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया था। आरोपित के पास से हिमानी का सामान भी बरामद हुआ है। हत्या के बाद शव को सूटकेस में भरकर फेंक दिया गया था।

भास्कर ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि हत्या के पीछे ब्लैकमेलिंग मुख्य कारण है। कहा जा रहा है कि हिमानी आरोपित को ब्लैकमेल कर रही थी। इससे तंग आकर आरोपित ने उसकी हत्या की। आरोपित के पास से हिमानी नरवाल का मोबाइल फोन और ज्वैलरी भी बरामद की गई है। हत्यारा बहादुरगढ़ के नजदीक के एक गाँव का रहने वाला है। आरोपित ने हत्या की बात कबूल कर ली है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जाँच में आरोपित सचिन ने पुलिस को बताया है कि उसने हिमानी की हत्या उसके घर पर ही की थी। इसके बाद शव को सूटकेस में डालकर ले गया था और सांपला बस स्टैंड के पास सुनसान देखकर फेंक दिया था। बता दें कि जिस जगह पर सूटकेस फेंका गया था, वहाँ से कुछ ही दूरी पर पुलिस का थाना भी है।

पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि हिमानी उसकी गर्लफ्रेंड थी और उसके साथ वह लंबे समय से रिलेशनशिप में था। उसने दावा किया कि हिमानी उसे ब्लैकमेल करती थी और उससे पैसे माँगती थी। उसने कहा कि उसने हिमानी को कई बार पैसे दिए भी थे, लेकिन वह बार-बार और भी अधिक पैसों की माँग कर रही थी। इससे वह तंग आ गया और हत्या कर दी।

1 मार्च को हिमानी का शव नीले रंग के एक सूटकेस में रोहतक के सांपला बस स्टैंड के पास से बरामद हुआ था। हिमानी MBA कर चुकी थी और फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही थी। उसने अपनी सोशल मीडिया हैंडल पर राहुल गाँधी के साथ यात्रा के अलावा भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा सहित कई कांग्रेस नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें डाली हैं।

उधर, हिमानी की माँ सविता रानी ने दावा किया है कि कुछ उसे राजनीति के दलदल में फँसाना चाहते थे। इसलिए वह राजनीति छोड़कर नौकरी करना चाहती थी। सविता रानी ने दावा किया था कि हिमानी 28 फरवरी को कांठवाड़ी में कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गई थी। इसके बाद उनकी बेटी लापता हो गई थी।

हालाँकि, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा का कहना है कि 28 फरवरी को कांठवाड़ी में उनका कोई कार्यक्रम नहीं था। इसके बाद यह मामला और भी उलझ गया है। सविता रानी ने हत्यारों की गिरफ्तारी तक शव लेने से भी इनकार कर दिया है। पुलिस ने शव को फिलहाल मोर्चरी में रखा गया है। हिमानी के शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सोमवार (3 मार्च 2025) को आने वाली है।

कांग्रेस की युवा नेता हिमानी नरवाल की जाँच के लिए गठित किए गए विशेष जाँच दल (SIT) के प्रमुख डीएसपी रजनीश कुमार ने कहा है कि इस मामले में पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। उन्होंने कहा कि मृतक हिमानी का मोबाइल फोन बरामद किया जा चुका है। जिस सूटकेस में डेड बॉडी मिली, वह परिवार का ही है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की हर एंगल से जाँच कर रही है।

अमेरिका में अवैध घुसपैठियों को भारत की तरह दामाद बनाकर नहीं रखा जाता ; चीखा-चिल्ली करने की बजाए अवैध घुसपैठियों को बचाने शाहीन बाग बनाना और मुसलमानों को भड़काना छोड़ो


अमेरिका में अवैध रूप से घुसे 104 भारतीय वापस भारत आ गए हैं। इन्हें अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार करने के बाद भारत वापस भेजा। इन्हें अमृतसर में अमेरिकी सेना का प्लेन लेकर आया। अमेरिका से वापस भेजे जाने वाले भारतीय पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। इसी के साथ ही विदेश जाने की ललक और इसके लिए अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर भी बात हो रही है। इस बीच ‘डंकी रूट’ फिर से चर्चा में आया है।

अमेरिका की अवैध घुसपैठियों पर चील-कौओं की तरह चीखा-चिल्ली करने की बजाए विपक्ष को सीखना चाहिए कि अवैध घुसपैठियों को बचाने CAA विरोध में शाहीन बाग बनाना और मुसलमानों को भड़काना कि सरकार मुस्लिम विरोधी है। उनके राशन कार्ड और पहचान पत्र बनवाते हो। बल्कि अब तो चर्चा होने लगी है कि सरकार नहीं विपक्ष ही मुसलमान विरोधी है जो उनको दंगों की आग में झोंककर अपनी तिजोरियां भरने के साथ-साथ उनकी लाशों पर बैठ मालपुए खाते हैं।  

क्या होती है डंकी?

‘डंकी’ शब्द पंजाबी भाषा में उपयोग होता है। डंकी का अर्थ एक जगह से उछल कर दूसरी जगह जाना है। लेकिन बीते कुछ समय में डंकी शब्द का अर्थ बदल गया है। ‘डंकी रूट’ नाम उस रास्ते को दे दिया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति अवैध तरीके से भारत छोड़ कर दूसरे देश को जाता है। यह शब्द हालिया समय में अमेरिका जाने के अवैध रास्ते का नाम हो गया है। इस नाम से रील्स बनती हैं, वीडियो बनते हैं, फिल्म तक बनाई गई है। इसका अपना एक ‘पॉप कल्चर’ (संस्कृति) है।

कैसे काम करता है ‘डंकी रूट’

डंकी रूट के जरिए भारतीयों को कई एजेंट विदेश भेजने का वादा करते हैं। जो लोग डंकी का रास्ता चुनते हैं, सबसे पहले उनका पासपोर्ट और वीजा तैयार करवाया जाता है। डंकी का काम करने वाले एजेंट पैसा लेकर किसी यूरोपियन या फिर लैटिन अमेरिका के किसी देश का वीजा तैयार करवाते हैं। अधिकांश मौकों पर यह टूरिस्ट वीजा होता है। इसी के सहारे डंकी वालों को भारत से निकाला जाता है। इनको नेपाल, दुबई और किसी अन्य देश में कुछ दिन यात्रा करवा कर इनकी एक यात्रा की पूरी कहानी तैयार करवाई जाती है।
इसके बाद डंकी रूट का सहारा लेने वाले की लैटिन अमेरिकी देश पहुँचते हैं। इन देशों में भारतीय डंकी एजेंटों के सहायक होते हैं, जो डंकी रूट लेने वालों को रास्ता बताते हैं और यहाँ अवैध तरीके से उनकी मदद करते हैं। कई बार यह लोग आपराधिक गैंग से जुड़े होते हैं। यह लोग इन्हें अमेरिका सीमा तक की यात्रा करवाते हैं। यह यात्रा जंगल, नदी और पहाड़ों से होकर गुजरती है। 40-50 किलोमीटर तक पैदल चलना भी पड़ता है। अमेरिका में घुसने के लिए सीमा लांघनी पड़ती है।

क्या है अमेरिका में घुसने का रास्ता?

अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले लोग सबसे पहले किसी लैटिन अमेरिकी देश में हवाई यात्रा के जरिए पहुँचते हैं। यह देश ब्राजील, वेनेज़ुएला, बोलिविया, पेरू, कोलंबिया, निकारागुआ समेत कोई भी हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति ब्राजील पहुँचा है तो उसे यहाँ से सीमा पर करके कोलंबिया पहुँचना होगा। इसके लिए कभी कभार मानव तस्करी करने वाले गाड़ी उपलब्ध करवाते हैं। फिर उस व्यक्ति को पनामा में घुसाया जाता है। पनामा में अधिकांश लोगों को चुपके से जंगल पार करना होता है।
इसके बाद निकारागुआ और गुआटेमाला होते यह लोग मेक्सिको पहुँचते हैं। मेक्सिको और अमेरिका आपस में सीमा साझा करते हैं। मेक्सिको की सुरक्षा एजेंसियों से बचते हुए यह यहाँ इकट्ठा होते हैं। अमेरिका और मेक्सिको की सीमा पर वर्तमान में ऊँची लोहे की बाड़ लगी हुई है। इसे पार करने के लिए रस्सियों का सहारा लिया जाता है। डंकी रूट लेने वाले लोग अमेरिकी सीमा फांद लेना एक उपलब्धि की तरह लेते हैं। इसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर साझा होती है। इसका जश्न मनता है।  
इस बीच इन्हें कई बार पहाड़, नदी तक पार करने होते हैं। डंकी रूट से गए एक व्यक्ति ने बताया, “हमने 17-18 पहाड़ियाँ पार कीं। अगर कोई फिसल जाता, तो उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कोई घायल हो जाता, तो उसे मरने के लिए छोड़ दिया जाता। हमने लाशें देखीं।” एक और व्यक्ति ने बताया कि उन्हें नाव की 10-15 घंटे तक की यात्रा करनी पड़ी। यात्रा में आने वाली इन कठिनाईयों के वीडियो भी अक्सर सामने आते हैं। 

अमेरिका में घुसने के बाद क्या होता है?

अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीय बताते हैं कि डंकी रूट के सहारे जो लोग घुसने में कामयाब हो जाते हैं, वह शरणार्थी का दर्जा पाने का प्रयास करते हैं। सीमा पार करते समय अगर किसी शरणार्थी को अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ पकड़ लेती हैं, तो वह अपना रटा हुआ वर्जन उन्हें बताते हैं। वह दावा करते हैं कि भारत में उनके साथ उत्पीड़न हो रहा है और वह खाने-पीने तक को मोहताज हैं। वह दावा करते हैं कि शरण लेने के लिए अमेरिका पहुँचे हैं। डंकी रूट लेने वालों को यह पूरी स्क्रिप्ट पहले ही रटा दी जाती है।
अमेरिका में पकड़े जाने वाले यह लोग वकील की सहायता लेते हैं और मुकदमा लड़ कर शरणार्थी का दर्जा पाने का प्रयास करते हैं। जो लोग पकड़े नहीं जाते, वह उन लोगों के साथ घुल मिल जाते हैं, जो पहले इसी तरीके से अमेरिका पहुँच चुके हैं। कई मामलों में लोगों को वापस भारत भेज दिया जाता है। कई मामलों में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ इनके पैर में एक ट्रैकर लगा का छोड़ देती हैं, जिन्हें यह बाद में काट कर फेंक देते हैं।

कौन करता है डंकी रूट का इस्तेमाल?

डंकी रूट बीते कुछ सालों में काफी पॉपुलर हुआ है। इसका प्रभाव सबसे पहले पंजाब और हरियाणा में आया। इसकी उन युवाओं में खासी पकड़ है, जो वैध तरीकों से विदेश जाने में अक्षम हैं। सामान्य तौर पर विदेश जाने के लिए वीजा लेना होता है। काम करने के लिए वीजा मिलने की प्रक्रिया काफी कठिन है। इसके लिए कई टेस्ट भी होते हैं। पढ़ाई में औसत छात्र इन्हें नहीं पार कर पाते। ऐसे में वह डंकी रूट को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। वर्तमान में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से और गुजरात आदि में इसका काफी क्रेज है।
जो बायडेन के अमेरिका के राष्ट्रपति रहते हुए डंकी का इस्तेमाल काफी बढ़ गया था। लोगों ने समझा कि बायडेन प्रशासन इन अवैध प्रवासियों के प्रति नरम है, ऐसे में अमेरिका जाना कोई बुरा सौदा नहीं है। एक रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में अमेरिका में 7.25 लाख भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं।

कितना पैसा लगता है?

डंकी रूट को लेकर अब तक सामने आई अधिकांश रिपोर्ट में बताया गया है कि इस काम में ₹30 लाख से ₹50 लाख का निवेश होता है। गुजरात से जाने वाले एक परिवार ने दावा किया है कि उनसे इस काम के ₹1 करोड़ तक लिए गए। पंजाब और हरियाणा से सामने आए डंकी के मामलों में देखा गया है कि युवा अपने खेत-जमीन बेच कर इन पैसों का इंतजाम करते हैं। कई रिश्तेदारों से भी उधार लेकर अमेरिका को जाते हैं।
डंकी रूट लेकर जाने वालों को उम्मीद होती है कि एक बार अमेरिका में पहुँचने के बाद वह महीने का ₹3 लाख तक बचा सकते है। ऐसे में उन्हें डंकी रूट पर खर्च होने वाली यह धनराशि बहुत छोटी लगती है। सारे कष्ट उठा कर भी इसी लिए हरियाणा के कई जिलों से युवा अमेरिका जाते हैं। कई मौकों पर इनसे डंकी के नाम पर ठगी भी हो जाती है। डंकी वाले एजेंटों का यह जाल हरियाणा पंजाब के गाँव-गाँव तक फ़ैल चुका है। सपने दिखाए जाने के बाद लोग अपना पैसा लगाने से नहीं डरते।

अब क्या बदलाव आया है?

बायडेन के खिलाफ चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प ने इन अवैध प्रवासियों को एक बड़ा मुद्दा बनाया था। ट्रम्प का कहना था कि लगातार अवैध रूप से घुस रहे प्रवासी अमेरिका के संसाधनों का गलत फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने वादा किया था कि अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर अवैध प्रवासियों पर वह कड़ा एक्शन लेंगे। उनके राष्ट्रपति बनने के बाद तेजी से अमेरिका में इन अवैध तरीके से घुसने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। कई देशों के अवैध अप्रवासी वापस भेजे जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत में भी पहली खेप के रूप में 104 लोग आए हैं।