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गद्दारों के लिए Victim Card खेलना शुरू : ‘एक बार तो अल्लाह भी माफ कर देता है…’: नोमान इलाही के लिए भी चाहिए ‘माफी’, ISI जासूस के कैराना से पानीपत तक के लिंक ऑपइंडिया ने खँगाले

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले नोमान इलाही के कैराना वाले घर पर लटका ताला, पानीपत में बहन के घर से हुई गिरफ्तारी
छोड़ दो बच्चा है। पता नहीं क्या फितूल आ गया उसके। एक बार तो अल्लाह ताला भी माफ कर देता है। अगर नहीं छोड़ते तो रोटी कपड़ा तो देगी उसे सरकार?

ये बात ISI जासूस नोमान इलाही के लिए ऑपइंडिया से कैराना की एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने कही। इलाही का घर कैराना के बेगमपुरा इलाके में है। बुजुर्ग महिला हमें इलाही के तालाबंद घर के बाहर ही मिली थीं।

कैराना, उत्तर प्रदेश की वह जगह है जो सुर्खियों में गलत वजहों से ही आती है। अभी हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही की गिरफ्तारी ने उसे चर्चा में ला दिया है। 2014 में यह जगह हिंदू व्यापारियों की हत्या और 2016 में हिंदुओं के पलायन को लेकर चर्चा में आया था। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस माहौल में बदलाव आया और पलायन कर चुके कई हिंदू फिर से वापस लौटे हैं।

नोमान इलाही की हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर दिल्ली से करीब 125 किलोमीटर दूर कैराना तक गए। लोगों से पूछते-पूछते कैराना के उस बेगमपुरा तक भी पहुँचने में कामयाब हुए. जहाँ नोमान इलाही का घर है।

मैं बाहर नहीं आ सकती, पर्दा है: नोमान इलाही की पड़ोसन

मिश्रित आबादी के बीच एक संकरी गली में नोमान इलाही के घर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। हमने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाया। एक महिला ने नाम न बताते हुए जालीदार दरवाजे के अंदर से (पहचान छिपाते हुए) कहा, “इनके सारे काम गलत हैं। ये किसी के पैसे लेकर भागते हैं तो किसी का कुछ। इन लोगों से हमारा कोई मतलब नहीं है। ये कई सालों से यहाँ नहीं रहते हैं।” बाहर आकर बात करने के अनुरोध पर महिला ने कहा, “मैं बाहर नहीं आ सकती। पर्दा है। मैं अपना नाम नहीं बताऊँगी। इसे (नोमानी) खत्म कर दीजिए या जेल में डाल दीजिए।”

नोमान इलाही की गली में सन्नाटा, कोई पहचान बताने को तैयार नहीं

जिस गली में नोमान इलाही का घर है, सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बात करने से बच रहे थे। अपनी पहचान भी नहीं बता रहे थे। ऐसी ही एक महिला ने अपना नाम न बताते हुए कहा, “करीब 2 साल से नोमान के घर पर ताला लगा है। इसके भाई मजदूरी करते हैं और बहनों की शादी हो चुकी है। नोमान जब यहाँ रहता था तो बहुत अच्छा था बाहर जाने के बाद पता नहीं।” इस दौरान अन्य महिलाएँ अपने खिड़कियों से झाँक रहीं थी। लेकिन कैमरा सामने आते ही घर के अंदर चली जा रहीं थीं। इसी बीच एक युवक ने कहा, “नोमान के कारण कैराना बदनाम हुआ है। उसने जो भी किया है, गलत किया है।”

नोमान इलाही के लिए माफी चाहती हैं बुजुर्ग महिला

नोमान के घर के पास हाथ में चिप्स लिए खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “जब यहाँ रहता था तो अच्छा था। अब पता नहीं। जैसा उसने किया है, वैसा वह भरेगा। वह एक-दो बार पाकिस्तान गया होगा। उसके वहाँ रिश्तेदार हैं।” इस महिला का यह भी कहना था कि उनके रिश्तेदार भी पाकिस्तान में रहते हैं, लेकिन वे कभी गईं नहीं, क्योंकि पासपोर्ट नहीं बन सका। इसी बुजुर्ग महिला ने नोमान इलाही को माफ कर देने की बात की, जिसका हमने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नोमान की गिरफ्तारी के बाद इस गली में लोगों का आना बढ़ गया है। इसी दौरान नोमान के घर के सामने वाले मकान में मौजूद एक लड़के ने बताया, “वह (नोमान इलाही) जब भी यहाँ आता था तो अकेला ही घर में रहता था और फिर ताला लगाकर चला जाता था।”

जिस मस्जिद में जाता था नमाज पढ़ने, उसके इमाम बोले- मैं नोमान इलाही को नहीं जानता

हमने गली के सामने वाली मस्जिद के उस इमाम से भी बात करने की कोशिश की जहाँ नोमान इलाही नमाज पढ़ने के लिए जाता था। लेकिन मस्जिद के इमाम ने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। इमाम शहजाद ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। उसने गलत किया है। उसे सजा मिलनी चाहिए।”
इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले दानिश ने बताया, “नोमान ने शहर का नाम बदनाम किया है। पहले (जब वह कैराना रहता था) वह अक्सर नमाज के लिए मस्जिद आता था। मैंने उसे देखा है। अब वह अपनी बहन के यहाँ पानीपत रहता है। इसका बाप भी नकली पासपोर्ट बनाने का काम करता था। उसने देश के साथ गद्दारी की है। उसे फाँसी की सजा होनी चाहिए।” वहीं बैठे एक बुजुर्ग ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। लेकिन उसे अपने किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए।”

सपा राज में ‘मिनी पाकिस्तान’ कहलाता था कैराना

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप गोयल ने बताया कि सपा सरकार में कैराना ‘मिनी पाकिस्तान’ के नाम सा जाना जाता था। योगी सरकार के बाद छवि सुधरी है। लेकिन नोमान की गिरफ्तारी ने फिर से कैराना की छवि को धूमिल किया है।

हमें देखते ही भड़क उठी नोमान इलाही की बहन

नोमान इलाही की गिरफ्तारी पानीपत से हुई है। यहाँ के सेक्टर-29 स्थित मोहन नगर में वह अपनी बहन के घर रहता था। यहाँ हमें कैमरा के साथ देखते हुए नोमान इलाही के रिश्तेदार भड़क उठे। करीब 75-80 गज के पुराने से मकान के फर्श पर बैठी नोमान की बहन जीनत ने कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई घर में अंदर आने की। किससे पूछकर घर के अंदर आए। हमें किसी से बात नहीं करनी। अपना कैमरा बंद करो।”
हमने नोमान के जीजा इरफान से बात करने की कोशिश की तो उसने कहा कि हम मीडिया से तंग आ चुके हैं। मीडिया पूछती कुछ है और दिखाती कुछ है। हमें किसी से बात नहीं करनी। उसने कहा, “अब हमारा नोमान से कोई नाता नहीं है। उसने हमारी 35 साल की कमाई हुई इज्जत को मिट्टी में मिला दिया है।”
उल्लेखनीय है कि 3 बहन और 3 भाइयों में नोमान सबसे छोटा है। उसका निकाह नहीं हुआ है। उसका जीजा इरफान पानीपत में कार धुलाई सेंटर के साथ साथ बाइक लेमिनेशन और लकड़ी का भी काम करता है।

‘घास भारत का खा रहा, दूध पाकिस्तान में दे रहा’

जिस गली में नोमान की बहन का घर है, उसके बाहर दुकान करने वाली एक महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “वह कभी-कभी बीड़ी का बंडल लेने के लिए दुकान पर आता था। हमें कभी शक ही नहीं हुआ कि वह ऐसा भी कुछ करता है। अगर वह गुनहगार है तो कानून उसे सजा दे।”
पड़ोस की एक अन्य लड़की का कहना था कि यदि उनलोगों को पता होता तो वे पहले ही नोमान इलाही की खबर पुलिस को देकर उसे पकड़वा देते। उसने कहा, “ऐसे बंदे तो गोली मार देनी चाहिए। घास भारत का खा रहा है और दूध पाकिस्तान में दे रहा है।”

अफगानिस्तान की महिलाओं का दर्द : ‘काश अल्लाह ने हम औरतों को बनाया ही नहीं होता’: हो रहा जानवरों से भी बदतर सलूक

                                                                                                                   फोटो साभार: DW
अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा मुस्लिम महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए भारतीय मुसलमानों विशेषकर महिला वर्ग को कट्टरपंथी मुल्लाओं के चुंगल से बाहर आने की कोशिश करनी चाहिए। ये लोग अपनी कुरीतियों को छुपाने के लिए हिन्दुओं को जातियों में बांट ध्यान हटाते रहे हैं, लेकिन शिक्षित हिन्दू भी अशिक्षित बन इनके मकड़जाल में फंस आपस में ही लड़ने लगता है। जिस दिन हिन्दुओं ने इन कट्टरपंथियों से पूछना शुरू कर दिया कि "बताओ तुम मुसलमानों में कितनी जातियां हैं? तुम मुसलमानों में एक जाति दूसरी जाति की मस्जिद में नमाज क्यों नहीं पढ़ सकता? एक जाति का मुर्दा दूसरी जाति के कब्रिस्तान में क्यों नहीं दफनाया जा सकता? क्यों नहीं एक जाति का दूसरी जाति में निकाह होता?" आदि आदि, इतना ही नहीं, हिन्दुओं में जातिवाद को बल देने डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का गुणगान करते हैं, लेकिन डॉ आंबेडकर ने इस्लाम पर क्या विचार व्यक्त किए हैं, कभी नहीं करते चर्चा, क्यों? जिस दिन हिन्दुओं ने ये सवाल करने शुरू कर दिए, यकीन मानो, 60% तो इनकी दुकान बंद हो जाएगी यानि इनकी चौथराहट पर लगाम। 
गौर करने की बात यह है कि ये कट्टरपंथी जो टीवी चर्चाओं में बैठ चाशनी भरी बातों से इस्लाम में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बातों से जनता को भ्रमित करते हैं, ये तालिबान के राज ने भांडा फोड़ दिया है। वैसे ईरान में हिजाब विरोध भी जीता-जागता दूसरा उदाहरण है, बस फर्क समझ और नसमझ का है, जिसे अंग्रेजी में कहते हैं eye or no eye. आखिर क्या कारण है कि ईरान में हिजाब का विरोध धमने का नाम नहीं ले रहा? अफगानिस्तान की महिलाएं क्यों अल्लाह से औरत बनाए जाने पर सवाल करने को मजबूर हैं?

अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से तालिबान ने वहाँ इस्लामिक कानून शरिया के तहत कई कड़े नियम लागू किए हैं। गत सप्ताह तालिबान ने महिलाओं की उच्च शिक्षा और गैर-सरकारी संगठनों में काम करने पर रोक लगा दी। इसके बाद से, अफगानिस्तान में रहने वाली महिलाओं की स्थिति पर संकट और अधिक गहरा गया है। मौजूदा हालातों को लेकर एक अफगानी महिला ने कहा है कि काश अल्लाह ने महिलाओं को न बनाया होता।

दरअसल, अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में कब्जा कर लिया था। इसके बाद से अब तक, तालिबान ने महिलाओं के पार्क में जाने, स्कूली शिक्षा, महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों चेहरा ढँकने, बिना पुरुष साथियों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध जैसे कई फरमान जारी किए थे। इसके बाद अब, तालिबान ने महिलाओं की उच्च शिक्षा पर भी रोक लगा दी गई है।

इस रोक को लेकर एक 19 वर्षीय अफगानी महिला ने कहा है कि वह पढ़ने के लिए विश्वविद्यालय जाना चाहती है। लेकिन प्रतिबंध के बाद वह नहीं जा सकती। उसने तालिबानी सरकार के फैसले पर दुःख जताते हुए कहा, “काश अल्लाह ने कभी औरत नहीं बनाई होती। अगर हम इतने बदकिस्मत ही हैं तो इससे अच्छा है कि हम मर जाएँ। हमारे साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है। जानवर खुद से कहीं भी जा सकते हैं, लेकिन हम लड़कियों को अपने घरों से बाहर कदम रखने का भी अधिकार नहीं है।”

तालिबान सरकार के इस फैसले का वहाँ लगातार विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। विरोध कर रही लड़कियों का कहना है, “तालिबान ने यूनिवर्सिटी से लड़कियों को बाहर कर दिया। बाहर के सम्मानित लोग, कृपया हमारा समर्थन करें, या तो सभी के लिए अधिकार हो या किसी के लिए नहीं।”

रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी काबुल में हुए प्रदर्शन के बाद तालिबानी सरकार ने विरोध कर रही लड़कियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कुछ लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। वही, कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें तालिबान के सुरक्षा अधिकारियों को अपने अधिकारों के हनन का विरोध कर रही महिलाओं के साथ मारपीट करते देखा जा सकता है।

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ चिंता जताई है। यही नहीं, यूएन ने अफगानिस्तान में कई कार्यक्रमों को भी रोक दिया है। साथ ही, चेतावनी देते हुए कहा है कि इन प्रतिबंधों के कारण संयुक्त राष्ट्र कुछ अन्य चीजों पर भी रोक लगा सकता है। इस चेतावनी को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र अफगानिस्तान को मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगा सकता है।

‘भारत की करेंसी पर हो अल्लाह की भी तस्वीर’: कांग्रेस ने की माँग, दिल्ली के CM ने कहा था- नोटों पर चाहिए लक्ष्मी-गणेश

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने करेंसी नोटों पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की तस्वीर छापने की अपील कर राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि अल्लाह, अल्लाह, जीसस, गुरु नानक, बुद्ध और महावीर को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता सलमान अनीस सोज ने अरविंद केजरीवाल पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “प्रिय अरविंद केजरीवाल, यदि लक्ष्मी और गणेश समृद्धि ला सकते हैं तो हमें और अधिक समृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए और अल्लाह, जीसस, गुरु नानक, बुद्ध और महावीर को भी शामिल करना चाहिए।”

वहीं, कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल को भाजपा की ‘टीम बी’ बताया। दीक्षित ने कहा कि अगर केजरीवाल पाकिस्तान जाएँ तो वे खुद को पाकिस्तानी भी कह सकते हैं। उन्होंने कहा, “वह बीजेपी और आरएसएस की बी टीम हैं। उनकी कोई समझ नहीं है। यह उनकी वोट की राजनीति है। यदि वह पाकिस्तान जाएँ तो वह कह सकते हैं कि मैं पाकिस्तानी हूँ, इसलिए मुझे वोट दें।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने 26 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से नोटों पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की फोटो को छापने की अपील की। केजरीवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत में हर कोई अमीर हो और कभी-कभी, कोई कितनी भी कोशिश कर ले, कुछ कमी रह ही जाती है। उन्होंने कहा, “प्रयास तभी फलदायी होते हैं, जब हमारे पास देवी-देवताओं का आशीर्वाद होता है।”

मीडिया को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कल से एक दिन पहले दिवाली थी। हम सभी ने भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी से प्रार्थना की। हमने स्वास्थ्य, धन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। हम जानते हैं कि कैसे व्यवसायी अपने कमरों में भगवान गणेश और लक्ष्मीजी के चित्र रखते हैं और अपना काम शुरू करने से पहले उनसे प्रार्थना करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “आज मैं केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से भारतीय मुद्रा पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की तस्वीर शामिल करने की अपील करना चाहता हूँ। गाँधी जी की फोटो जैसी है, वैसी रह सकती है। अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए हमें और अधिक प्रयास करने की जरूरत है, लेकिन हमें अपने देवी-देवताओं के आशीर्वाद की भी जरूरत है।”

केजरीवाल के इस बयान के बाद ट्विटर पर मुस्लिम यूजर उन्हें ट्रोल करने लगे। किसी ने उन्हें RSS का छोटा रिचार्ज कहा तो किसी ने उन्हें धर्मनिरपेक्षता की पाठ पढ़ाई। वहीं, एक यूजर ने कहा कि अगर यही बात AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने नोट पर ला इल्लाह इलइल्लाह लिखने या अजमेर दरगाह की तस्वीर छापने के लिए कहा होता तो क्या होता। 

टीवी पर चर्चाओं में आम आदमी पार्टी ने केवल भाजपा को ही घेरने का प्रयास किया, लेकिन सभी कांग्रेस द्वारा अल्लाह और अन्य धर्मों के संस्थापकों के चित्र लगाए जाने चुप्पी साधे रहे। कुछ चैनलों ने अन्य पार्टियों के प्रवक्ताओं को मात्र दिखावे पर बुलाकर उनका एक तरह से अपमान किया।