Showing posts with label #Nuh. Show all posts
Showing posts with label #Nuh. Show all posts

ISI के लिए जासूसी कर रहे वकील रिजवान को नूंह पुलिस ने दबोचा, पाकिस्तान भेजी थी संवेदनशील जानकारी: गुरुग्राम में कर रहा था वकालत की प्रैक्टिस

                             जासूसी के आरोप में वकील रिजवान गिरफ्तार (साभार: हिंदुस्तान)
दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जैसे-जैसे छानबीन हो रही है शायद ही कोई दिन जाता हो कि कोई न कोई गद्दार पुलिस और गुप्तचर एजेंसियों के हत्ते लग जाता है। ये तो मात्र ऊंट के मुंह जीरे के समान है। पाकिस्तान कोई ऐसे ही मार खाने के बाद भी आए दिन आंख दिखाता रहता है, क्योकि उसको मालूम है कि बिना तनखाह के भारत में उसके फौजी तैनात है। पुलिस और जाँच एजेंसियों को पाकिस्तानपरस्त नेताओं की भी गहन निगरानी करनी होगी। जैसे 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने की थी। एक बात जो गंभीरता से सोंचने और समझने की है वो है जितना भारत में कांग्रेस और विपक्ष कमजोर हो रहा है पाकिस्तान भी उतना ही कमजोर हो रहा है। हाथ में कटोरा आ गया। जिससे शक होता है कि ये ही विपक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की आर्थिक सहायता कर रहा हो। हाथ में कटोरा आने का मतलब साफ है कि कमाई बंद हो गयी। शक गलत भी हो सकता है। 

फिर मदनी जैसे सिरफिरे कट्टरपंथी कहते हैं कि मुसलमानों को जानबझ कर निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल, जब शोभा यात्राओं और मन्दिरों पर हो रही पत्थरबाज़ी की आड़ में हो रहे प्रयोग पर पुलिस और इंटेलिजेंस को इनकी गहनता से जाँच कर हरकत में आना चाहिए था। कौन ऐसी हरकतों के लिए धन लुटा रहा है? कौन पत्थर सप्लाई कर रहा है? हर कोई यह कहकर टालता रहा कि हिन्दुओं ने यात्रा में भड़काऊ नारेबाजी की। माना हिन्दुओं ने भड़काऊ नारेबाजी की, लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि एकदम इतना पत्थर कहाँ से आ गया? इसका मतलब साफ था कि यह पूर्व नियोजित षड़यंत्र था जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया। खैर, देर आए दुरुस्त आए।          

हरियाणा की नूंह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में गुरुग्राम की कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील रिजवान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रिजवान को दो दिन पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच में संदिग्ध गतिविधियों और कुछ डिजिटल सबूत सामने आने के बाद उसके खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

वकील के एक साथी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

बुधवार (26 नवंबर 2025) की सुबह पुलिस और केंद्रीय जाँच एजेंसी की टीम नूंह के गाँव खरखड़ी पहुँची और मौके से रिजवान को पकड़ा। अधिकारियों का कहना है कि रिजवान पर संवेदनशील और गोपनीय सूचनाएँ ISI तक पहुँचाने का संदेह है।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र के राजाका गाँव के अरमान और कांगरका गाँव के तारीफ को मई महीने में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के दौरान पाकिस्तानी मुद्रा और कई संदिग्ध सामान बरामद हुए थे। 

जहाँ 80% मुस्लिम, वहाँ जीता मामन खान जिसका हिंदू विरोधी दंगों में नाम, BJP के मुस्लिम नहीं कबूल: फिर बेशर्मी से कहते है कि BJP किसी मुस्लिम को मंत्री नहीं बनाती

                           मामन खान (हाथ में टोपी लिए) (चित्र साभार: Mammankhanmla/ig)
भारत में हर तीन-चार महीने पर एक-दो चुनाव आते रहते हैं। हर चुनाव के साथ देश की वोटबैंक राजनीति और उससे जुड़े मुद्दे भी उठते हैं। प्रत्येक चुनाव में जब भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित करती है तो लिस्ट में मुस्लिम नाम ढूँढने वाले हमेशा शोर मचाते हैं। उनका आरोप रहता है कि भाजपा की राजनीति में मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है और वह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती। यह आरोप गुजरात चुनाव से लेकर उत्तर प्रदेश और हालिया लोकसभा चुनावों तक लगता आया है।

भाजपा पर यह आरोप लगाने 2024 के हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में निरुत्तर हो गए। भाजपा ने इन चुनावों में कुल 28 मुस्लिमों को टिकट दिया। 2 मुस्लिमों को हरियाणा में जबकि 26 मुस्लिम उम्मीदवारों को भाजपा ने जम्मू कश्मीर में उतारा। भाजपा ने हरियाणा के नूंह जिले की 3 में से 2 सीटों में पर मुस्लिम उम्मीदवार दिए। उसने फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद जबकि पुन्हाना से एजाज खान को उतारा था।

चुनाव नतीजों में इनमें से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल नहीं रहा है। जम्मू कश्मीर में भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों को सफलता नहीं हासिल हुई। हरियाणा में भी उसके दोनों उम्मीदवार हार गए। हरियाणा में उन सीटों पर भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार हारे जहाँ लगभग 80% जनसंख्या मुस्लिम है। फिरोजपुर झिरका में मुस्लिम आबादी ने भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार नसीम अहमद को ना चुन कर कॉन्ग्रेस के मामन खान को चुना।

कॉन्ग्रेस के मामन खान ने हरियाणा के अंदर सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। वह 98000 वोटों के अंतर से जीते हैं। गौरतलब है कि यह वही मामन खान हैं जो नूंह दंगों में आरोपित हैं और इस मामले में जेल तक जा चुका है। मामन खान को इन नूंह दंगों, जिनमें एक युवक की मौत हुई थी, उनका सरगना बताया गया था। मामन खान पर मात्र दंगा भड़काने ही नहीं बल्कि धमकी देने का भी आरोप है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार बनेगी तो अन्याय करने वालों मेवात छोड़ना पड़ेगा।

मामन खान को जिताना और वह भी हरियाणा में सबसे बड़े अंतर से जिताना दिखाता है कि मुस्लिम जनसंख्या को भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसका अर्थ है कि यदि उनके सामने भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार देती भी है तो उसे मुस्लिम वोट नहीं देंगे। उनका वोट ऐसे व्यक्ति को जाने की संभावना अधिक दिखाई पड़ती है जो दंगे में आरोपित है और विकास-इन्फ्रा जैसी बातों से कोसों दूर है। मामन खान की जीत यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम वोट उसे पसंद करता है जो भाजपा को हराता हो, भले ही वह दंगा आरोपित क्यों ना हो।

मामन खान और आफताब खान जैसे उम्मीदवारों की जीत में बड़े अंतर यह भी दिखाते हैं कि मुस्लिम आबादी का ध्यान विकास की तरफ कम और खुद को वोटबैंक बना कर राजनीति की तरफ अधिक है। मेवात देश के सबसे अधिक पिछड़े, गरीब और अपराध ग्रसित इलाकों में से एक है।

राजधानी दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर के दायरे में होने के बावजूद हाल तक यहाँ मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुँची थी। यहाँ महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यही पर बीत वर्ष नल्हड़ महादेव में जल चढ़ाने गए हिन्दुओं पर कट्टरपंथी भीड़ ने हमला किया था। लेकिन इन सब मुद्दों को सुलझाने का वादा करने के बजाय मामन जैसे लोगों को चुना जाता है।

ऐसे में मुस्लिमों को खुद इस यह सोचना होगा कि कब तक केवल भाजपा को हराने के नाम पर ही वोट करते रहेंगे भले ही उनके पास अपने ही समुदाय का उम्मीदवार हो। उन्हें यह भी सोचना होगा कि मात्र भाजपा का हौव्वा दिखा कर उनसे वोट लेने वाली पार्टियाँ उनका विकास कब करेंगी। भाजपा पर यह आरोप लगाने वाले मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि सबका साथ और सबका विश्वास का नारा तभी आगे बढेगा जब मुस्लिम उसमें शामिल हो जाएँ।

नूहं : हिंदू महिलाओं पर मदरसे से पथराव करने वालों में 9 से 12 साल के आरोपित: दो को भेजा बाल सुधार गृह

                                                                                                           साभार: ANI वीडियो स्क्रीन ग्रैब
हरियाणा के नूहं में कुआं पूजन के लिए जा रही हिंदू महिलाओं पर गुरुवार (16 नवंबर 2023) की शाम मदरसे से पथराव किया गया था। इस पथराव में 8 महिलाएँ घायल हो गई थीं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया था। महिलाओं पर पत्थर फेंकने वाले मुस्लिम समाज के तीन नाबालिगों में से दो को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। इन पर कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है।

पुलिस ने शनिवार (18 नवंबर 2023) को कहा कि पत्थरबाजी को लेकर तीन नाबालिगों को पकड़ा गया था। इनमें से 9 साल के नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और फिर उसे जमानत दे दी गई। वहीं 12 साल के दो नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके बाद वहाँ से दोनों को बाल सुधार गृह भेजा गया।

नूहं पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार के मुताबिक, “तीनों मदरसे के छात्र हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें पकड़ा गया। अभी अन्य लोगों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन मामले में आगे की जाँच चल रही है। अगर हमें जाँच के दौरान किसी अन्य के शामिल होने के सुबूत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद तीनों नाबालिगों से उनकी अभिभावकों की मौजूदगी में पूछताछ के बाद उन्हें पकड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक नूहं के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले राम अवतार के यहाँ बेटा पैदा हुआ था। रिवाज के मुताबिक, उनके परिवार की महिलाएँ 16 नवंबर को कुआँ पूजन के लिए पास के शिव मंदिर में जा रही थी। इस दौरान रात करीब 8:20 उन पर मदरसे से पथराव किया गया।

घटना की सूचना पाकर नूहं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। तब पथराव की घटना पर एसपी बिजारणिया ने कहा था, “महिलाओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मदरसे से फुटेज आए थे जिसमें 3 लड़के खड़े दिख रहे थे। उसके आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इन तीनों को राउंडअप कर लिया गया है और अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। 8 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई है और इन्हें मामूली चोटें आई हैं। हम तीनों लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं कि यह घटना क्यों हुई। तीनों बच्चे नाबालिग हैं। हम महिलाओं के लगाए गए सभी आरोपों की जाँच करेंगे। स्थिति नियंत्रण में है।”

आखिर इन पत्थरबाजों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से क्यों नहीं वंचित किया जाता? कभी शोभा यात्रा पर पत्थरबाज़ी तो कभी पारिवारिक समारोह में। आखिर ये कट्टरपंथी कब तक अपना बहशीपन दिखाते रहेंगे? कब लगेगा और कौन लगाएगा इन पर लगाम? क्या हिन्दू को अपनी संयमता को त्याग ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा? बर्दाश्त की एक सीमा होती है, जिस पर सरकार और कोर्ट को गंभीरता से सोंचना होगा। 

नूहं की इस घटना को लेकर शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीएचपी प्रदेशाध्यक्ष पवन कुमार ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की थी। बताते चले कि नूहं में इस साल 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा में शमिल हिंदू श्रद्धालुओं पर भी हमला किया गया था।

नूँह दंगों में AAP नेता जावेद को बचाने में जुटी पार्टी: स्थानीय कह रहे – ‘सोहना में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर’


हरियाणा के मेवात के नूँह में हुए दंगों में एक नाम जो सामना आया है, वो है AAP नेता जावेद अहमद का। आपको याद होगा कि दिल्ली दंगों के मुख्य अभियुक्तों में भी AAP का ही तत्कालीन पार्षद रहा ताहिर हुसैन शामिल था। उसने अपने घर को हिन्दुओं पर हमले के लिए लॉन्चपैड बना दिया था और सशस्त्र दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व किया था। उस समय भी AAP शुरू में उसके बचाव में थी। ठीक उसी तरह, अब पार्टी अपने नेता जावेद अहमद को बचाने में लग गई है। इसके लिए FIR तक को झुठला रही है।

जावेद अहमद हरियाणा में ‘आम आदमी पार्टी’ का स्टेट कोऑर्डिनेटर है। 31 जुलाई, 2023 को सोहना में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या के मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, जावेद अहमद का दावा है कि वो घटना के वक्त वहाँ से 100 किलोमीटर दूर था, इसीलिए इस वारदात में उसकी संलिप्तता का सवाल ही नहीं उठता है। अगर आप याद करेंगे तो पाएँगे कि एक वीडियो बना कर ताहिर हुसैन ने भी दावा किया था कि वो खुद पीड़ित है और बार-बार पुलिस को कॉल कर रहा था।

कई विश्लेषकों ने उसके इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ भी बताया था। अब आते हैं वापस नूँह दंगे पर, जिसमें नल्हड स्थित प्राचीन शिव मंदिर को चारों तरफ से निशाना बना कर गोलीबारी की गई। ये हमला ‘ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान किया गया था। स्थिति ये हुई कि भीड़ अस्पताल तक में घुस गई और मरीजों को मारा-पीटा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी इसे सुनियोजित साजिश के तहत हुआ हमला माना। आखिर भीड़ के पास इतने अत्याधुनिक हथियार आए कहाँ से, ये अभी तक चर्चा का विषय है।

जावेद अहमद को लेकर ऑपइंडिया का स्टिंग, जानिए स्थानीय लोगों ने क्या बताया

ऑपइंडिया की टीम नूँह में ग्राउंड पर पहुँची थी, जहाँ उसने ये स्टिंग किया। इस स्टिंग में स्थानीय लोगों ने बताया कि जावेद का यहाँ बहुत दहशत है। इस दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद की उम्र 50 के आसपास है, लेकिन वो खुद को मेंटेन (फिट) रखता है। उन्होंने बताया कि जावेद युवाओं को जिम कराने से लेकर उनका पूरा सर्कल बना रखा है। उन्होंने बताया कि भाजपा से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस दौरान ‘सोनिया गाँधी के किसी करीबी अहमद’ से उसकी अच्छी-खासी जान-पहचान थी।
इस दौरान इन लोगों ने बताया कि पूरे सोहना में जावेद के खिलाफ कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि उसका खौफ है। उन्होंने ये भी बताया कि निकिता तोमर हत्याकांड में भी इसका कुछ न कुछ हाथ था, इसका भतीजा इसमें शामिल था। बता दें कि बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में कॉलेज के सामने निकिता तोमर की तौसीफ और रहमान की हत्या कर दी थी। स्थानीय लोगों ने कुछ साल पहले एक अन्य दंगे में भी जावेद का हाथ होने की बात कही और कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर से पत्थर चलता था।
उन्होंने बताया कि कई डम्फर चलते थे। लोगों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी से रिश्ते के कारण जावेद अहमद बचता रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि नूँह से कॉन्ग्रेस का विधायक चौधरी आफताब अहमद, जावेद अहमद का चाचा है। उन्होंने बताया कि चाचा-भतीजे की कॉन्ग्रेस आलाकमान से सीधी बातचीत थी। उन्होंने बताया कि 2009-10 में तहसील को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान आया था। उन्होंने इलाके में अवैध खनन की बात भी स्वीकारी। नूँह में ही जुलाई 2022 में अवैध खनन की जाँच करने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी।
उन्हें ट्रक से कुचल कर मार डाला गया था। उन्होंने ये भी इंगित किया कि अवैध खनन के मामले में भी जावेद अहमद का हाथ है, लेकिन फिर भी वो नहीं पकड़ा जाता। उन्होंने बताया कि जो भी अपराधी चोरी-चकारी वगैरह में पकड़ा जाता है, उन सबको जावेद छुड़वाता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि किसी को फँसाना हो तो जावेद अहमद सुंदर लड़कियों को भी प्रशिक्षित कर के भेजता है और फिर केस करवा देता है। उन्होंने बताया कि सोहना में हमेशा से बाहर का ही विधायक बनता रहा है।
उन्होंने बताया कि गुज्जर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं पड़ते। इस दौरान उन्होंने एक गुज्जर नेता रोहतास की बात करते हुए कहा कि रिठोस गाँव में वो रहते हैं और 350 करोड़ रुपए की उनकी संपत्ति है, वो जीत सकते हैं लेकिन वो खड़े नहीं होते। उन्होंने ये स्वीकार किया कि इलाके में हिन्दुओं में एकता नहीं है। एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद उस समय पुन्हाना में होने की बात कह रहा है, लेकिन मुंबई हाइवे से कहा कि 20-25 मिनट में उस टोल तक पहुँचा जा सकता है, जिस टोल का वीडियो सामने आया है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अगर आम आदमी पर हत्या का आरोप होता तो उन्हें न सिर्फ उठा लिया जाता, बल्कि टॉर्चर भी किया जाता। उन्होंने बताया कि उस दिन कोई आम आदमी दंगों की सुन कर आता ही नहीं, फिर भी जावेद अहमद आया। उन्होंने बताया कि इलाके के लोग खुल कर नहीं कह रहे, लेकिन इसका (जावेद अहमद का) कहीं न कहीं इस दंगे में हाथ है। उन्होंने कहा कि AAP ऐसे लोगों को ही टिकट देती है, जावेद अहमद भी 2024 के विधानसभा चुनाव में ‘आम आदमी पार्टी’ से खड़ा होगा और जीतेगा।
जावेद इससे पहले दूसरे-तीसरे नंबर पर आता रहा है, ऐसे में बिखरे वोटों को इकट्ठा करने के लिए ये साजिश रची गई – ये भी स्थानीय व्यक्ति ने बताया। साथ ही कहा कि डर के कारण कुछ हिन्दू भी जावेद अहमद की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि AAP के कुछ नेता सोहना आए थे, दिल्ली से। इस दौरान उन्होंने सोहना के ‘चाइल्ड पॉइंट’ में एक गुज्जर समुदाय के लड़के की हत्या का मामला बताया, जो 8-10 साल पहले का है। उन्होंने बड़ा खुलासा किया कि जेल से निकल कर आने के बाद जावेद को कंधे पर उठा कर लाया गया था और उसका स्वागत किया गया था।
लोगों का सवाल है कि इतनी जल्दी छतों पर पत्थर कैसे आ गए, हथियार कैसे जुटा लिए गए? उन्होंने बताया कि ये सामान्य हथियार नहीं थे, 100-200 मीटर की रेंज में लड़कों को गोली लगी है। उन्होंने बताया कि जिधर दंगे हुए, उस तरफ जाने से पहले सोचना पड़ेगा, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए – इसका डर रहेगा। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी घटना बताते हुए कहा कि जान-माल के साथ कारोबार का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि बाहर के लोगों को भी इन्हीं लोगों ने बुलाया।
उन्होंने बताया कि किसी भी टोल तक 35-40 मिनट में पहुँचा जा सकता है, ऐसे में ये दावा सही नहीं है कि ये वहाँ से दूर था। साथ ही कहा कि सोहना में हुए दंगों में अधिकतर जावेद अहमद के लड़के थे, जो इसकी मर्जी के बिना पत्थर चलाना तो दूर, ये सड़क भी पार न करें। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जो हिंसा वगैरह हुई है, उसमें जावेद अहमद का हाथ था। साथ ही इलाके में 5-7000 रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की बात भी कही गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मम्मन खान, आफताब अहमद और जावेद अहमद का एक गिरोह है, जिसने ये दिखाने के लिए ये सब किया कि अभी भी हमारा दबदबा है और आपलोग खुल कर नहीं जी सकते। ये बात भी सामने आई है कि ‘जावेद कॉलोनी’ इसने खुद के नाम पर बसाई थी। स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि जंगल की जमीनों पर भी अवैध बस्तियाँ बसाई जा रही हैं। साथ ही उनका ये भी दावा है कि इन कॉलनियों में अधिकतर अपराधी किस्म के युवक ही रहते हैं।

सोहने में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर

इस दौरान ऑटो में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से भी ऑपइंडिया की टीम ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम इन दंगों में पक्का आ रहा है, सोहना में जब भी कोई हिंसा होती है तो जावेद का हाथ होता ही होता है। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम भले ही राजनीति के कारण छिपाया जा रहा हो, लेकिन सोहना में कोई भी दंगा होता है तो जावेद का नाम एक नंबर पर आता ही आता है।
स्थानीय व्यक्ति ने ये भी बताया कि बाईपास के उधर उसने ‘जावेद कॉलोनी’ बसा रखी है, जहाँ मकान और कोठियाँ हैं, जहाँ सारी साजिश रची जाती है। उसने बताया कि 2-3 साल पहले एक लड़के की हत्या हुई थी और सड़कों पर पत्थर बिछा दिए गए थे। उसने कहा कि जावेद अहमद उस समय कहीं और जाने की बात कह रहा है। उसने जावेद के खतरनाक व्यक्ति होने की भी पुष्टि की। उसने कहा कि यहाँ दंगा होगा तो वही करवाएगा – ये निश्चित है। उक्त व्यक्ति लखवा गाँव का है।

AAP नेता जावेद अहमद का दावा – हत्याकांड के समय वो घटनास्थल से दूर था

जावेद अहमद ने ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार हत्याकांड में संलिप्तता से इनकार करते हुए दावा किया कि वो उस समय घटनास्थल से 100 किलोमीटर की दूरी पर था। निरंकारी चौक थाने में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। कुछ CCTV फुटेज दिखा कर दावा किया कि वो टोल प्लाजा से गुजरा था। उसने कहा कि उसके गुजरने के 3 घंटे बाद ये घटना हुई और वो अगले दिन लौटा। उसने कहा कि उसे और पार्टी को बदनाम करने के लिए ये राजनीतिक प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है।
AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”

प्रदीप कुमार की हत्या में जावेद अहमद का हाथ: FIR

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी। उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा।
पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है। पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”
अवलोकन करें:-
पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।” शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे।

अरावली की पहाड़ियों में छिपा था नूहं हिंसा का आरोपित आमिर, पुलिस ने एनकाउंटर के बाद किया गिरफ्तार

                           एनकाउंटर  के बाद पकड़ा गया नूहं हिंसा का आरोपित आमिर (फोटो साभार: AajTak)
हरियाणा के मेवात के नूहं में हुई हिंसा का आरोपित आमिर गिरफ्तार हो गया है। वह अरावली की पहाड़ियों में छिपा था। सोमवार (21 अगस्त, 2023) रात एनकाउंटर के बाद वह पकड़ा गया। उसके पैर में गोली लगी है। उसके पास से अवैध कट्टा समेत 5 कारतूस बरामद हुए हैं। आखिर किसकी शह पर आमिर ने दंगा को अंजाम दिया? दूसरे, दंगा करवाकर क्यों भागा? किसने उसको अवैध कट्टा और कारतूस दिलवाए? खट्टर सरकार को सख्ती से इसके साथ पेश आना चाहिए और इसको मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाओं को छीन ब्लैकलिस्टेड करना होगा। 

नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर के तावड़ू में अरावली की पहाड़ियों के बीच सीलखो पहाड़ में बने एक खंडहर में छिपे होने की सूचना पुलिस को मिली थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। आमिर ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की।

फायरिंग में पुलिस की एक गोली आमिर के दाएँ पैर में जा लगी। इसके बाद वह गिर गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसका इलाज नल्हड़ मेडिकल हॉस्पिटल में चल रहा है।

आज तक ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित का नाम वसीम बताया है। उस पर ₹25000 का इनाम होने की जानकारी दी है। उस पर नूहं हिंसा के दौरान पुलिस से हथियार छीनकर फायरिंग करने का आरोप है। इसके अलावा तावड़ू में हत्या समेत दिल्ली-एनसीआर में करीब 100 आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के भी आरोप हैं।

नूहं हिंसा के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10 अगस्त को भी एनकाउंटर किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हुए हिंसक हमले के 2 आरोपित राजस्थान से नूहं लौट रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मुनसैद और सैकूल के रूप में हुई थी। गिरफ्तारी से पहले पुलिस और आरोपितों के बीच एनकाउंटर भी हुआ था। इस दौरान भी एक आरोपित को गोली लगी थी। आरोपितों के पास से कट्टा, कारतूस और बाइक बरामद हुई थी।