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नूहं : हिंदू महिलाओं पर मदरसे से पथराव करने वालों में 9 से 12 साल के आरोपित: दो को भेजा बाल सुधार गृह

                                                                                                           साभार: ANI वीडियो स्क्रीन ग्रैब
हरियाणा के नूहं में कुआं पूजन के लिए जा रही हिंदू महिलाओं पर गुरुवार (16 नवंबर 2023) की शाम मदरसे से पथराव किया गया था। इस पथराव में 8 महिलाएँ घायल हो गई थीं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया था। महिलाओं पर पत्थर फेंकने वाले मुस्लिम समाज के तीन नाबालिगों में से दो को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। इन पर कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है।

पुलिस ने शनिवार (18 नवंबर 2023) को कहा कि पत्थरबाजी को लेकर तीन नाबालिगों को पकड़ा गया था। इनमें से 9 साल के नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और फिर उसे जमानत दे दी गई। वहीं 12 साल के दो नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके बाद वहाँ से दोनों को बाल सुधार गृह भेजा गया।

नूहं पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार के मुताबिक, “तीनों मदरसे के छात्र हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें पकड़ा गया। अभी अन्य लोगों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन मामले में आगे की जाँच चल रही है। अगर हमें जाँच के दौरान किसी अन्य के शामिल होने के सुबूत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद तीनों नाबालिगों से उनकी अभिभावकों की मौजूदगी में पूछताछ के बाद उन्हें पकड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक नूहं के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले राम अवतार के यहाँ बेटा पैदा हुआ था। रिवाज के मुताबिक, उनके परिवार की महिलाएँ 16 नवंबर को कुआँ पूजन के लिए पास के शिव मंदिर में जा रही थी। इस दौरान रात करीब 8:20 उन पर मदरसे से पथराव किया गया।

घटना की सूचना पाकर नूहं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। तब पथराव की घटना पर एसपी बिजारणिया ने कहा था, “महिलाओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मदरसे से फुटेज आए थे जिसमें 3 लड़के खड़े दिख रहे थे। उसके आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इन तीनों को राउंडअप कर लिया गया है और अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। 8 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई है और इन्हें मामूली चोटें आई हैं। हम तीनों लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं कि यह घटना क्यों हुई। तीनों बच्चे नाबालिग हैं। हम महिलाओं के लगाए गए सभी आरोपों की जाँच करेंगे। स्थिति नियंत्रण में है।”

आखिर इन पत्थरबाजों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से क्यों नहीं वंचित किया जाता? कभी शोभा यात्रा पर पत्थरबाज़ी तो कभी पारिवारिक समारोह में। आखिर ये कट्टरपंथी कब तक अपना बहशीपन दिखाते रहेंगे? कब लगेगा और कौन लगाएगा इन पर लगाम? क्या हिन्दू को अपनी संयमता को त्याग ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा? बर्दाश्त की एक सीमा होती है, जिस पर सरकार और कोर्ट को गंभीरता से सोंचना होगा। 

नूहं की इस घटना को लेकर शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीएचपी प्रदेशाध्यक्ष पवन कुमार ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की थी। बताते चले कि नूहं में इस साल 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा में शमिल हिंदू श्रद्धालुओं पर भी हमला किया गया था।

अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे दानिश कनेरिया, कहा – हिंदू पैदा हुआ, हिंदू ही मरूँगा

भगवान श्री राम का बुलावा आएगा तो दानिश कनेरिया अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु के दर्शन करने आएँगे… पूरे परिवार के साथ! पाकिस्तान में रह कर, इस्लाम कबूलने का प्रेशर झेल कर, क्रिकेटिंग करियर तबाह कर दिए जाने के बाद भी दानिश कनेरिया हिंदू बने रहे, तो उसके पीछे प्रभु श्री राम में उनकी अटूट आस्था ही है। टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कनेरिया ने दिल खोल कर बातें कीं – क्रिकेट पर, हिंदू होने पर, पाकिस्तान में भेदभाव पर, भारत-पाकिस्तान रिश्ते पर।

टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने राम मंदिर को लेकर अपनी आस्था के बारे में बताया। उनके अनुसार वो बचपन से भगवान राम और बजरंगबली के भक्त रहे हैं। राम मंदिर निर्माण और 22 जनवरी 2024 को उसके प्रांगण में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भावुक होते हुए कनेरिया ने कहा कि अगर भगवान ने मौका दिया तो वो अपने पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आएँगे।

हिंदू पैदा हुआ, हिंदू ही मरूँगा

इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने बताया कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व है। वो पैदा हिंदू धर्म में हुए और मरेंगे भी हिंदू के ही रूप में। भगवान राम के जीवन से सीख लेते हुए कनेरिया ने कहा कि हर परिस्थिति में संघर्ष करना चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने सीख दी है कि बुरी से बुरी परिस्थितियाँ भी बदल जाती हैं अगर आपका विश्वास पक्का है।
‘जय श्रीराम’ नारे को लेकर कट्टर मुस्लिम और वामपंथी-कॉन्ग्रेसी जैसा माहौल बना रहे हैं, उनको जवाब देते हुए कनेरिया ने कहा कि यह एक वेलकम या स्वागत करने जैसा है। इस पर जो बवाल कर रहे हैं, कनेरिया की नजर में वो दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के स्टेडियमों के आप-पास बनी मस्जिदों और उसमें से आने वाली अजान/नमाज की आवाज पर कभी किसी ने आपत्ति नहीं जताई, पाकिस्तान गए सभी खिलाड़ियों ने इसको इज्जत दी। इस पर आगे उन्होंने कहा: “आप भारतभूमि में हैं… तो क्या होगा, जय श्रीराम ही होगा!”

आरफा को पाकिस्तान में बुलावा

पत्रकारिता के नाम पर प्रोपेगेंडा करने वाली आरफा खानम शेरवानी को दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान आ जाने का बुलावा दिया था। इस पर टाइम्स नाउ के एंकर ने जब सवाल किया तो कनेरिया ने बहुत ही स्पष्ट जवाब दिया। कनेरिया के अनुसार किसी भारतीय को अगर भारत में रहने पर शर्म महसूस होती है तो फिर वहाँ रहना ही क्यों? छोड़ कर कहीं और रहने चले जाइए।
बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने आरफा खानम शेरवानी के समर्थन में ट्वीट किया था। दानिश कनेरिया को आड़े हाथों लिया था। इस सवाल के जवाब में कनेरिया ने कहा कि वो हिंदू धर्म को लेकर बात कर रहे थे, सनातन पर हो रहे अटैक को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। ऐसे में गौरव भाटिया या किसी को भी सोच-समझ कर बोलना चाहिए, पूरी बात सुननी-पढ़नी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब कुछ जानती है, और उसी जनता ने गौरव भाटिया को जवाब भी दे दिया।

पाकिस्तान, जय श्रीराम, दर्शक और खिलाड़ी

भारत-पाकिस्तान के विश्व कप मुकाबले में अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा था। इसको लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी में शिकायत दर्ज की। इस सवाल पर कनेरिया ने कहा कि यह नॉर्मल चीज है। उन्होंने कहा कि वो हिंदू हैं लेकिन खेलते पाकिस्तान की ओर से थे। ऐसे में बाउंड्री पर खड़ा दर्शक आपको कुछ-न-कुछ कहेगा ही, इसे प्रोफेशनल खिलाड़ी को नॉर्मल ढंग से लेना चाहिए न कि बात का बतंगड़ बनाना चाहिए।
‘जय श्री राम’ नारे पर भारत में रहने वाले भी वामपंथी भी पाकिस्तान प्रेम में रोने लगे थे। जिनके पिता खुद इंटरनेशनल क्रिकेटर रह चुके थे, उनके बेटे राजदीप सरदेसाई ने भी इस पर बवाल काटा था। लेकिन राजदीप को करारा जवाब मिला था एक पूर्व खिलाड़ी से ही। पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कहा था कि यह सब नॉर्मल है क्योंकि उन्हें भी पाकिस्तान में गालियाँ मिलीं थी। उनके धर्म से लेकर देश और संस्कृति तक को गाली दी गई थी।

हिंदू होने की सजा मिली

दानिश कनेरिया ने बताया कि एक हिंदू होने के कारण पाकिस्तान में उनका करियर बर्बाद कर दिया गया। क्रिकेटिंग करियर के बाद भी उनको इतना परेशान किया गया कि एक जॉब तक उनको करने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि इतनी विषम परिस्थिति में लेकिन वो भगवान श्री राम के सहारे रहे।
पाकिस्तान में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वहाँ भेदभाव नहीं है तो कनेरिया के अवाले कोई अन्य खिलाड़ी (जो गैर-मुस्लिम हो) क्यों नहीं इंटरनेशनल स्टेज तक आ पाया?
शाहिद अफरीदी को लेकर  कनेरिया ने कहा था कि वो हमेशा इन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहता था
शाहिद अफरीदी को लेकर ‘आजतक’ के इंटरव्यू में कनेरिया ने कहा था कि वो हमेशा इन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहता था, सुबह की नमाज पढ़ने के लिए उठा देता था।
इससे पहले 24 अक्टूबर 2023 को दानिश कनेरिया ने एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा कि मंदिर (अयोध्या का राम मंदिर) बन जाए… फिर दर्शन करने आएँगे। यह ट्वीट एक सवाल के जवाब में लिखा गया था। इस ट्वीट के रिप्लाई में कनेरिया को कट्टर मुस्लिम और वामपंथी टाइप के लोग गालियाँ और धमकी तक दे रहे हैं।

दुनिया भर में हिंदू धर्म पर हो रहे हमले, हिंदुओं को लड़ना चाहिए: फ्रांस के पत्रकार की खरी-खरी, कहा- बहुसंख्यक होकर भी अल्पसंख्यक वाली मानसिकता रखना छोड़ें

               फ्रेंच पत्रकार फ्रांस्वा गॉटियर लम्बे समय से भारत में रह रहे हैं। (चित्र साभार: स्पुतनिक इंडिया)
फ्रांस के प्रसिद्ध पत्रकार फ्रांस्वा गॉटियर ने कहा है कि हिन्दू भारत में बहुसंख्यक हैं, लेकिन उनकी मानसिकता अल्पसंख्यकों वाली है। गॉटियर आजकल भारत में ही रहते है। वह महाराष्ट्र के पुणे में छत्रपति शिवाजी महाराज की स्थापना कर चुके हैं। इसके लिए लगातार विदेशों से चंदा जुटाने में लगे हुए हैं। वे फ्रांस के विभिन्न अख़बारों में काम कर चुके हैं। वह कई दशकों से भारत में रह रहे हैं और उन्होंने एक भारतीय नमृता बिंदर से विवाह भी किया है।

गॉटियर ने एक साक्षात्कार में हिन्दुओं को लेकर कई महत्वपूर्व बातें कही हैं। उन्होंने कहा, “हमें इतिहास से यह सबक मिला है कि हिन्दुओं को लड़ना चाहिए। विश्व में आज भी हिन्दू धर्म पर हमले हो रहे हैं। चाहे पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान हो। ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण अब यह बहुत बड़ी समस्या है, विशेष कर पंजाब और दक्षिण में।”

उन्होंने आगे कहा, “केबल टीवी के माध्यम से भारत का पश्चिमीकरण हो रहा है। पूरे विश्व में विशेषज्ञों को भारत के विषय में बताने के लिए सरकारों द्वारा कहा जाता है, जो कि समझने के लिए काफी कठिन देश है। यह विशेषज्ञ हिन्दुओं के प्रति द्वेष भाव रखते हैं।” गॉटियर ने कहा, “हिन्दू धर्म कभी नहीं कहता कि आप धर्मान्तरित हो जाओ या फिर मैं आपको धर्मान्तरित करने के लिए मिशनरी भेज दूँगा।”

 उन्होंने इस विशेषज्ञों द्वारा हिन्दुओं के विषय में फैलाई जाने वाली घृणा को लेकर कहा, “यह विशेषज्ञ लगातार कहते रहते हैं कि हिन्दू रूढ़िवाद, इस्लामिक रूढ़िवाद के समान है जो कि बिलकुल झूठ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हिंदुत्व कभी भी भारत के बाहर विश्व विजय पर नहीं गया और ना ही अपने धर्म को इस तरह से रखा जैसे कि ईसाईयत ने दक्षिण अमेरिका की सभी सभ्यताओं को साफ़ कर दिया और ना ही इस्लाम की तरह जिसने मिस्र की सभ्यता को खत्म कर दिया।”

गॉटियर ने कहा कि हिन्दुओं की संख्या 1.3 अरब है और वह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। हिन्दू सबसे शांतिपूर्ण लोग हैं, लेकिन हिन्दुओं की मानसिकता अल्पसंख्यकों के जैसी है। यही सबसे बड़ी समस्या है। भारत में भी वह बहुसंख्यक हैं, लेकिन मानसिकता अल्पसंख्यक की रखते हैं। जब गॉटियर से पश्चिमी देशों में भारत में हिंदुत्व के बढ़ते प्रभाव को लेकर की जाने वाले नकारात्मक रिपोर्टिंग के विषय में पूछा गया तो उन्होंने इसे बकवास बताया।

गॉटियर ने कहा, “यह बेवकूफी है। हिन्दू विश्व में सबसे सहिष्णु लोग हैं। आज भी हम यह देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सभी समुदायों- हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई का ध्यान रखते हैं। इसलिए जो भी यह कहता है कि हिंदुत्व के माध्यम से चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह इस महान धर्म को अपमानित कर रहा है।”

‘जैसे HIV और कुष्ठ सामाजिक कलंक, वैसा ही है सनातन’: उदयनिधि के बाद अब ए राजा के बिगड़े बोल, RJD नेता बोले- तिलकधारियों ने देश को गुलाम बनाया

                                                       ए राजा और उदयनिधि (साभार: टीवी9 भारतवर्ष)
सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का सिलसिला रूक नहीं रहा है। तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि के बाद अब डीएमके सांसद ए राजा ने सनातन धर्म की तुलना HIV और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों से तुलना की है। वहीं, राजद नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि तिलक लगाकर घुमने वालों ने देश को गुलाम बनाया।

दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया के मच्छर तथा कोरोना से की थी। साथ ही कहा था कि सनातन ने लोगों को जातियों के आधार पर बाँटा। अब ए राजा ने इसकी तुलना असाध्य बीमारियों से की है। इतना ही नहीं, ए राजा ने उदयनिधि का बचाव भी किया।

डीएमके सांसद ए राजा ने कहा कि सनातन धर्म पर उदयनिधि का रुख बहुत नरम था। इसकी तुलना सामाजिक कलंक वाली कुछ बीमारियों से की जानी चाहिए, जबकि उदयनिधि ने इसकी तुलना डेंगू और मलेरिया से की है। राजा ने कहा, “सनातन धर्म की तुलना HIV और कुष्ठ रोग जैसी सामाजिक कलंक वाली बीमारियों से की जानी चाहिए।” 

वहीं, I.N.D.I.A. गठबंधन का हिस्सा बिहार के राष्ट्रीय जनता दल के नेता जगदानंद सिंह ने भाजपा और RSS पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तिलक लगाकर घुमने वालों ने भारत को गुलाम बनाया। RJD बिहार के अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा, “देश गुलाम किस समय हुआ? क्या उस समय कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद, राम मनोहर लोहिया जैसे नेता थे?”

राजद के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जगदानंद सिंह ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में हिंदू मुस्लिम को बाँटने से काम नहीं चलेगा और ना ही देश मंदिर बनाओ या मस्जिद तोड़ो से चलेगा।

जगदानंद सिंह के बयान पर बिहार भाजपा के प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि भारत को गुलाम वैसे टीकाधारी लोगों ने बनाया, जो सत्ता के लिए, कुर्सी के लिए, पद के लिए, राज्य के लिए अपना सब कुछ…. जमीर से लेकर जागीर और धर्म तक को बेच दिया। उन्होंने लालू यादव और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग पुत्र को मुख्यमंत्री बनाने के लिए और कुछ लोग खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए नकली जनेऊ पहन रहे हैं और नकली बाइबल पढ़ रहे हैं।उधर, एमके स्टालिन ने अपने बेटे उदयनिधि के बयान के बाद उनका बचाव किया है। स्टालिन ने कहा कि उदयनिधि ने अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करने वाले सनातन सिद्धांतों पर अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।

दरअसल, सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

अवलोकन करें:-

अमेरिका में मनेगा ‘सनातन धर्म दिवस’: उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद ऐलान, लुइसविले में 3 सितंबर

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन क्या है? यह संस्कृत भाषा से आया शब्द है। सनातन समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ होने के अलावा कुछ नहीं है। सनातन का क्या अभिप्राय है? यह शाश्वत है, जिसे बदला नहीं जा सकता, कोई सवाल नहीं कर सकता है। यही इसका मतलब है। सनातन ने लोगों को जातियों के आधार पर बाँटा है और इसे बदला नहीं जा सकता।”

ISIS ने भारतीय मुस्लिमों को ‘हिन्दुओं के रक्तपात’ के लिए उकसाया, कहा – मूर्तियाँ तोड़ने वाला युग वापस लाओ

           आतंकी संगठन आईएसआईएस ने मैगजीन 'द वॉयस ऑफ खुरासान' में हिन्दुओं का खून बहाने की धमकी दी
आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (ISIS) ने अपनी पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ का 28वाँ एडिशन जारी किया है। इस एडिशन का कवर पेज हरियाणा की नूहं हिंसा और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे को लेकर बनाया है।

केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर लिखे भड़काऊ लेखों में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इन जहर बुझे लेखों में भारत के मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ने को कहा गया है। आतंकी समूह ने इसमें हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को भी खुली धमकी दी है। ये मैगजीन आईएसआईएस प्रकाशन फ्रंट ‘अल-अज़ैम फाउंडेशन’ पब्लिश करता है।

मैग्जीन के कवर पेज पर टाइटल में लिखा है रक्तपात का जिहाद इस धरती पर हिंदुओं का आखिरी इलाज है। इससे साफ है कि आतंकी संगठन हिंदुओं के खिलाफ लड़ाई में उनके उनका ज़्यादा से ज़्यादा खून बहाने की मंशा रखता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएस ने अपनी प्रोपेगैंडा मैगजीन के नए एडिशन में ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) के बारे में भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ अच्छा खासा-जहर उगला गया है।

NIA के रडार पर है ‘वॉयस ऑफ खुरासान’

टेलीग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में प्रसारित होने वाली आईएस मैगजीन की सामग्री लगातार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) के रडार पर है। इस्लामिक स्टेट मैगजीन के कवर पेज पर उस बुलडोजर की तस्वीर है जिसका इस्तेमाल 31 जुलाई को हरियाणा के नूहं जिले में हुई हिंसा के बाद आरोपितों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए किया गया था।
रिपोर्टों में कहा गया है कि आईएस की प्रोपेगैंडा मैगजीन के लेख में मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि इन दोनों गौरक्षकों ने एक भड़काऊ वीडियो बनाया था। इसके बाद मुस्लिमों पर कथित तौर पर हमला किया गया।
आईएस मैग्जीन ने आगे आरोप लगाया कि हिंसा के बाद मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त कर दिया गया और जला दिया गया और इस कदम को हरियाणा के गृह मंत्री का समर्थन मिला। इसी वजह से मैगजीन ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज से बदला लेने का भी इशारा किया और उन्हें धमकी भी दी।

आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा

ऑपइंडिया ने आतंकी संगठन आईएस की मैग्जीन के नए अंक की पड़ताल में पाया कि ‘मूर्तियों को तोड़ने के स्वर्ण युग को वापस लाओ’ चैप्टर में आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि हिंदू मुस्लिम आक्रमणकारियों से छुटकारा पाने के काबिल नहीं थे। भारत में अंग्रेजों के आने के बाद ही मुस्लिम शासन की चमक फीकी हुई।
इसमें आगे कहा गया है, “अपमान बहुदेववादियों का आखिरी किस्मत है।” इसमें दावा किया गया है कि जो लोग कई देवताओं की पूजा करते हैं वे अपमानित होने के पात्र हैं। आक्रमणकारियों के हाथों सोमनाथ मंदिर और अन्य हिंदू मंदिरों के साथ जो हुआ उस पर फक्र जताया है। इसके साथ ही मैगजीन के लेख में दावा किया गया कि अंग्रेज केवल ‘कुछ धोखेबाजों मुस्लिमों के विश्वासघात की वजह’ से इस्लामी शासन को दबाने में कामयाब रहे।

हिंदुओं पर मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार का आरोप

इस मैगजीन के लेख में भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर ही उगला गया है। भारत और हिंदुओं पर ‘मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार’ करने का आरोप लगाया गया। मैगजीन के प्रचारक लेखक ने ज्ञानवापी में विवादित ढाँचे को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले हिंदुओं पर निशाना साधा है।
इसमें यह बताया गया कि अयोध्या में विवादित ढाँचे पर कब्ज़ा करने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई। लेख में कहा गया है, “हिंदू बहुदेववादी साँप अब साहसी बन रहे हैं और भारत और पूरी दुनिया में इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ अपना सिर उठा रहे हैं।”
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को ‘हिंदू तवागीत (Tawagheet) का सुप्रीम कोर्ट’ कहा। इस्लाम के मुताबिक, तवागीत एक ऐसी चीज़ है जिसकी पूजा खुद के लिए की जाती है। लेख में हिंदुओं के खिलाफ ‘जिहाद’ का भी ऐलान किया गया। इसमें लिखा था, “भारत में मुस्लिमों के लिए इस दुर्दशा और अपमान से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है जब तक कि वे इन कायर गाय-पूजक हिंदू गंदगी के खिलाफ जिहाद के ऐलान का जवाब नहीं देते।”

आईएसआईएस ने पुलिस को ‘कुत्ते’ कहा

अगले चैप्टर ‘रक्तपात की इबादत: इस सांसारिक जीवन में हिंदुओं का आखिरी इलाज’ में आईएसआईएस ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को निशाना बनाया और उन पर नूहं में ‘तलवारों, चाकुओं और बंदूकों से लैस’ हिंदू जुलूस को “मुस्लिम बहुल क्षेत्रों” से गुजरने की मंजूरी देने का आरोप लगाया।
उसने मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी पर जुलूस से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए हिंसा भड़काने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि पुलिस ने साफ कहा है कि हिंसा भड़काने में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं है। आईएसआईएस ने हिंदुओं पर एक इमाम की हत्या करने और मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए उनके के घरों में घुसने और उन्हें गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों को ‘कुत्ते’ कहा।
ISIS ने पुलिस अधिकारियों पर मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उसने भारत के सुप्रीम कोर्ट पर हिंदू यात्राओं को तथाकथित मुस्लिम क्षेत्रों से गुजरने से रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया।

वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहा

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहते हुए आईएसआईएस ने हिंदुओं को मारने की धमकी दी। लेख में कहा गया है, “हम इंशाअल्लाह आपके हर अन्याय और उत्पीड़न का बदला लेंगे, और बहुत जल्द हम आपको आपकी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक के रूप में आपकी दवा का स्वाद चखने के लिए देंगे।”
हिंदुओं के खिलाफ बदला लेने का उकसाते हुए, आईएसआईएस ने भारतीय इस्लामवादियों से ‘हिंदुओं को जिंदा जलाने, उनके घरों, बाजारों और फसलों को जलाकर राख करने’ के लिए कहा। उसने आगे कहा कि ‘उन्हें उनकी गलियों में मार डालो, वाहनों से उन्हें कुचल दो, उनकी पानी की टंकियों में जहर मिला दो और उनके जुलूसों में साँप फेंक दो।’

मीर फैसल की महिमा गाई

फेक न्यूज पैडलर मीर फैसल आईएसआईएस ने खासी इज्जत दी है। उसकी तीन पोस्ट का जिक्र आंतकी संगठन ने 30 जुलाई को अपनी मैगजीन में किया है। इससे ऐसा लगता है कि इस तारीख को आईएसआईएस ने मैगेजीन बनाने के लिए सोशल मीडिया को ‘स्क्रॉल’ किया था। इसमें आतंकी संगठन ने ये भी जिक्र किया है कि मीर फैसल की पोस्ट कहाँ-कहाँ से ली जा सकती हैं।
मीर फैसल एक प्रचारक और सिलसिलेवार फर्जी खबरें बेचने वाला शख्स है। ऑपइंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में उनके झूठ को बड़े पैमाने पर खुलासा किया है। मार्च 2023 में, उसने एक लंबा थ्रेड प्रकाशित किया जिसमें दावा किया गया कि हिंदू हिंसा में शामिल थे।
थ्रेड में कुल 30 वीडियो के साथ कुल 24 ट्वीट थे, जिनमें से 21वाँ ट्वीट अब हटा दिया गया है। ऑपइंडिया ने थ्रेड के शेष ट्वीट्स में सभी झूठों का भंडाफोड़ किया, जिसे यहाँ जाँचा जा सकता है। जून 2022 में, ऑपइंडिया ने मीर फैसल की एक प्रोफ़ाइल बनाई थी, जब उसने ट्वीट किया था कि सभी गैर-मुस्लिम एक जैसे हैं, वह काफिर है।

नूहं हिंसा में क्या हुआ?

इस साल 31 जुलाई को, हरियाणा के मुस्लिम बहुल नूहं जिले में दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। भीड़ ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के जुलूस पर पथराव किया था। पुलिस के अनुसार, 31 जुलाई को दोपहर 2 बजे के आसपास लगभग 200 लोगों का जुलूस एडवर्ड चौक से नूहं शहर की ओर बढ़ने के 10 मिनट बाद हिंसा शुरू हुई।
जैसे ही समूह मुख्य सड़क से नीचे चला गया, एक बड़ी भीड़ ने उस पर पत्थरों से हमला किया गया। हिंदू पक्ष शुरू में पीछे हट गया, लेकिन फिर से संगठित हो गया और इस्लामी भीड़ का सामना किया। खबरों के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष ने जुलूस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी जिसके बाद हिंदू पक्ष के लोग भड़क गए।
नीरज और गुरसेवक नाम के दो होम गार्डों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए और दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। नूंह और गुरुग्राम जिलों में भीड़ ने वीएचपी-बजरंग दल के जुलूस को रोकने की कोशिश की। लगभग दो सप्ताह बाद, 13 अगस्त को सर्व जातीय हिंदू महापंचायत ने पवित्र महीने सावन के आखिरी सोमवार, 28 अगस्त को नूहं में बृज मंडल शोभा यात्रा को फिर से शुरू करने का आह्वान किया।
हिंदू संगठन की इस शोभा यात्रा से पहले नूहं और इसके आसपास के जिले सोमवार (28 अगस्त) को किले में तब्दील हो गए। जिस स्थान पर 31 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी, वहाँ भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। हालाँकि, अधिकारियों ने सोमवार (28 अगस्त) को जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।(साभार)

कर्नाटक बाथरूम वीडियो कांड : ‘1 साल से मुस्लिम लड़कों के साथ शेयर किए जा रहे थे हिन्दू लड़कियों के वीडियो’: उडुपी की कॉलेज छात्राओं का खुलासा, एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल खादर बता रहा ‘प्रैंक’

छात्राओं ने बताया कि पिछले 1 साल से बाथरूम में कैमरा लगा कर हिन्दू लड़कियों के वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की करतूतें चल रही थीं (प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI)
कर्नाटक के उडुपी में कॉलेज के बाथरूम में कैमरा लगा कर हिन्दू लड़कियों का वीडियो बना जाने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया में बताया गया कि मुस्लिम लड़कियों ने ये वीडियो बना कर अपने समुदाय के लड़कों को भेजा। अब कॉलेज की छात्राओं ने इस बारे में कई अन्य खुलासे किए हैं। ‘TV9 कन्नड़’ के साथ एक इंटरव्यू में उसी कॉलेज की छात्राओं ने बताया है कि मुस्लिम लड़कियाँ पिछले 1 साल से हिन्दू छात्राओं के वीडियो बना रही थीं और मुस्लिम लड़कों के साथ साझा कर रही थीं।

‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ की छात्राओं ने बताया, “पिछले एक साल से ये सब हो रहा था। कॉलेज के बाहर मुस्लिम लड़के कार में इंतजार करते रहते थे। हिन्दू लड़कियों का वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद मुस्लिम लड़कियाँ उन्हें जाकर अपना फोन दे देती थीं। दोपहर में लंच के समय मोबाइल फोन्स की अदला-बदली होती थी। कॉलेज मैनेजमेंट के सामने इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। 18 जुलाई, 2023 को पीड़िता ने कॉलेज प्रबंधन से फिर शिकायत की।”

लड़कियों ने बताया कि मैनेजमेंट ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। 2 दिन बाद 20 जुलाई को कॉलेज की अन्य छात्राओं को इस बारे में पता चला और वो धरना प्रदर्शन पर बैठ गईं। छात्राओं ने बताया कि तीनों आरोपित मुस्लिम लड़कियों ने मोबाइल फोन में वीडियो डाल कर ऊच्चीला से आए मुस्लिम लड़कों को दिया था। ये लड़के पल्सर बाइक और कार से आते थे। छात्राओं ने ये भी बताया कि तीनों मुस्लिम लड़कियों के नाम हैं – शाफिया, अल्फिया और शबनाज़।

छात्रों ने बताया कि अब्दुल खादर कॉलेज मैनेजमेंट में एडमिनिस्ट्रेटर है। लड़कियों ने बताया कि उन्होंने आकर उनसे कहा कि उन तीनों लड़कियों को ‘सुंदर सज़ा’ दे दी गई है। उन्हें 5 बार ये लिखने के लिए कहा गया है कि वो आगे से ऐसा नहीं करेंगी। मीडिया से बात करते हुए कॉलेज की छात्राओं ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि ये सब प्रैंक के लिए किया गया था और उन्हें इस मामले को नहीं उठाना चाहिए। मोहम्मद ज़ुबैर जैसों ने भी इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया।

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कर्नाटक अश्लील वीडियो: दोषी मुस्लिम लड़कियों के बचाव में गृह मंत्री, बोले - ‘ये छोटी घटना है’; आखि

छात्राओं ने कहा, “हम पूछना चाहती हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी के घर के बाथरूम में वीडियो लगा कर घर की महिलाओं का वीडियो रिकॉर्ड करने लगे, तो क्या उस घर का व्यक्ति कहेगा कि ऐसी हरकत करने वालों को होमवर्क देकर छोड़ दिया जाए? ये 6 महीने पहले भी हुआ था, लेकिन कॉलेज मैनेजमेंट ने बिना किसी जाँच-पड़ताल के मामले को बंद कर दिया।” छात्राओं ने बताया कि कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल खादर ने पीड़िताओं को कहा था कि इस मामले को गंभीरता से न हो, ये प्रैंक है।

हिन्दू बन हिन्दू लड़की से शादी करने वाले आमिर अली को बीवी ने जेल भिजवाकर बचा दिया हिन्दू लड़की को

हिन्दू लड़की से शादी के लिए अमित बन रहा आमिर गिरफ्तार (चित्र साभार- JKNEWS24x7)
उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद पुलिस ने हिन्दू धर्म अपना कर एक लड़की से शादी का प्रार्थना पत्र देने वाले आमिर अली को गिरफ्तार कर लिया है। आमिर अली पर उसकी बीवी गुलफशा ने बुधवार (12 जुलाई, 2023) को दहेज़ माँगने, मारपीट और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। इस शिकायत में आमिर के अब्बा-अम्मी, सहित कुल 7 लोग नामजद हैं। आमिर की बीवी का आरोप है कि उसके शौहर का एक हिन्दू लड़की से साल 2014 से अफेयर है और दोनों मिल कर उसे रास्ते से हटाना चाहते हैं। आमिर की गिरफ्तारी शुक्रवार (14 जुलाई, 2023) को हुई है।

मुरादाबाद पुलिस के मुताबिक, आमिर अली पर उनकी बीवी ने धोखा देकर निकाह करने, दहेज़ माँगने और गाली-गलौज कर प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। इसी मामले की जाँच करते हुए पुलिस टीम को फरार चल रहे आमिर अली की लोकेशन मुरादाबाद के मुगलपुरा में प्रिंस पब्लिक स्कूल के पास मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुँच करआमिर अली को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में आगे की जाँच चल रही है।

आमिर की बीवी गुलफशा के मुताबिक उनका निकाह 20 फरवरी 2022 को हुआ था। आरोप है कि निकाह से पहले ही आमिर एक हिन्दू लड़की के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा था जिसे लड़की के घर वालों से छिपाया गया। इस हरकत को एक साजिश बताते हुए गुलफशा ने इसमें आमिर के अब्बा आरिफ, अम्मी हमीदा, बहन लुबना और उजमा के साथ उसके जीजा इमरान और आसिफ को भी इसमें शामिल बताया है। इन सभी 7 आरोपितों पर दहेज के लिए पीड़िता को मारने-पीटने के साथ धमकी और गालियाँ देने का आरोप है।

गुलफश का आरोप है कि आरोपितों द्वारा कई बार गर्भ गिराने के बाद भी उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के पैसा होने के 3 माह बाद उसका शौहर दूसरे निकाह की जिद करने लगा। गुलफशां के अनुसार उसने अपने शौहर की इस जिद का विरोध करने के साथ उसका मोबाइल भी चेक किया। आरोप है कि चैटिंग में आमिर और उसकी लिव इन पार्टनर मिल कर गुलफ़शा की हत्या की साजिश रच रहे थे। शिकायत में आमिर को उसकी लिव इन पार्टनर के साथ साल 2014 से रिलेशन में बताया गया है।

आमिर की बीवी की शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 498- A, 420, 323, 504 के साथ दहेज़ अधिनियम 3/4 के तहत 7 आरोपितों पर केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

3 जुलाई 2023 को आमिर अली ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी (DM) को एक पत्र लिख कर हिन्दू बनने की अनुमति माँगी थी। तब उसने पत्र में अपनी आस्था हिन्दुओं में बताते हुए इसे बिना किसी दबाव के लिया गया निर्णय बताया था। अपने पत्र में आमिर ने अपना नया नाम अमित माहेश्वरी रखने की इच्छा जताई थी। इस पत्र के सामने आने के बाद आमिर की बीवी गुलफशा ने अपने शौहर पर गंभीर आरोप लगाए थे। तब उन्होंने इसे हिन्दू लड़की से शादी करने की आमिर की साजिश बताया था।


‘हिन्दुओं के खिलाफ भी दिए जाते हैं द्वेषपूर्ण भाषण, सेलेक्टिव न हो सुप्रीम कोर्ट’: तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल, हेट स्पीच पर सुनवाई के दौरान दो टूक

23 मार्च, 2023 को हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका कर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुछ सेलेक्टिव खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। तुषार मेहता ने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ भी लगातार द्वेषपूर्ण भाषण दिए जा रहे हैं। कोर्ट को इसमें सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई कर रही है। 23 मार्च, 2023 को केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर कई सख्त टिप्पणियाँ की। कोर्ट ने कहा कि हम इन याचिकाओं पर इसलिए सनवाई कर रहे हैं क्योंकि राज्य सरकारें समय पर कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं। राज्य सरकारें इन मामलों में नाकाम और शक्तिहीन हो चुकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि हर दिन असामाजिक तत्व इस तरह के भाषण दे रहे हैं जिससे समाज में बैर की भावना पनप रही है। कोर्ट में तुषार मेहता और जजों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। तुषार मेहता ने हिंदुओं के खिलाफ दिए गए कई बयानों का उल्लेख किया। उन्होंने केरल के एक कार्यक्रम में फैलाए जा रहे हिंदू घृणा और तमिलनाडु में डीएमके नेता द्वारा ब्राह्मणों के वध की बात करने का उल्लेख किया।

जब हिन्दुओं और उनके देवी-देवताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाने का क्यों नहीं ये लोग विरोध करते? आखिर हिन्दू भी कब तक हाथ में चूड़ी पहन बैठा रहेगा? कब तक चुप रहेगा?

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका कर्ता ने इन घटनाओं का उल्लेख अपनी याचिका में नहीं किया है। याचिकाकर्ता अब्दुल्ला ने खास घटनाओं को ही अपने पेटिशन में शामिल किया है जो उनकी मंशा जाहिर करता है। कोर्ट को ऐसे मामलों में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए। इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। तुषार मेहता ने इस पर अदालत से इस तरह की टिप्पणी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे इस तरह के हेट स्पीचों को उचित ठहराया जाना माना जाएगा।

वास्तव में हो क्या रहा है कि हिन्दू विरोधी षड्यंत्रों पर चुप्पी साध, उसकी प्रतिक्रिया होने पर हिन्दू विरोधियों को 'गंगा-जमुनी तहजीब' और 'संविधान' की दुहाई देनी शुरू हो जाती है। जिस पर कोर्ट को सख्ती से पेश आना चाहिए। 

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यदि इन मामलों को वास्तव में कम करना है तो ऐसे मामलों में किसी खास धर्म, वर्ग या राज्य की बात न कर के सभी मामलों को एक साथ देखना होगा। कोर्ट ने 28 अप्रैल 2023 को मामले पर विचार करने की बात कही है।

‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना

जनवरी 26, 2023, शो अमिश देवगन, News18, मेहमान कवि मनोज मुंताशिर। इस शो में एक बहुत गंभीर बात निकल आयी कि "औरत" शब्द किसी भी नारी के लिए बहुत ही अपमानित शब्द है। मुग़ल सल्तनत आने  पूर्व किसी भी महिला को "औरत" नहीं कहा जाता था। नीचे देखिए पूरा वीडियो और जानिए महिला को अपमानित करने वाला लब्ज कहाँ से आया? क्या कोई उलेमा, इमाम या कोई इस्लामिक विद्वान इसका खंडन कर कवि को चुनौती देगा? यह बहुत ही गंभीर विषय सामने आया है। जिस पर चर्चा जरुरी है। चर्चा केवल "औरत" ही नहीं, "उर्दू", "नमाज़"(देखिए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का वीडियो, जिसका आज तक किसी ने खंडन नहीं किया) और "अल्लाह" आदि अनेकों लब्जों पर भी होनी चाहिए। कट्टरपंथियों ने जब माता सरस्वती की वीणा को स्पर्श किया है, उससे निकलने वाले स्वरों से भयभीत नहीं होना चाहिए। हिन्दुओं और मुसलमानों आंखें खोलो और देखों किस तरह शताब्दियों से हिन्दू और मुसलमानों को भ्रमित कर लड़वाया जा रहा है।  
अल्लाह है संस्कृत का शब्द , ये रहे प्रमाण - Saffron Tigers
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अल्लाह है संस्कृत का शब्द , ये रहे प्रमाण - Saffron Tigers
Allah is a Sanskrit word : वैसे तो एक समय ऐसा था जब पुरे विश्व में सनातन संस्कृ
   
  
उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित मुस्लिमों के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। रजा ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बन सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज का भगवान बताते हुए कहा कि जिन्ना मुस्लिम नहीं थे।

इतना ही नहीं, सपा के एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जो उसमेें लिखा है, वह आजकल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज शूद्र, गँवार, ढोल पीटे जा रहे है, उनकी लड़कियाँ उठाई जा रही हैं, उनकी बेइज्जती की जा रही है। लेकिन यह नहीं बताया कि लड़कियां उठाने, लव जेहाद के नाम पर बेइज्जत कौन कर रहा है।  

बागेश्वर के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के घर वापसी करवाने वाले बयान पर तौकीर रजा ने कहा कि वह पॉपुलर होना चाहते हैं। इसलिए ऐसा बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम पर बयान दो, फिर जान का खतरा बताओ। उन्होंने कहा कि शास्त्री को जान का खतरा नहीं है, वह पॉपुलर होना चाहते हैं।

घरवापसी को लेकर उन्होंने कहा, “घर वापसी क्या होती है? 1400 साल पहले एक लाइट हमें मिली थी और वो लाइट अभी तक आपको नहीं मिली है। जब मिल जायेगी तो आप भी इस्लाम में आ जाएँगे। इस्लाम को उन्होंने इंसाफ, अच्छाई, सच्चाई और मोहब्बत का रास्ता बताया।

धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के बयान पर तौकीर रजा कहा, “हिंदू राष्ट्र बनाने वाले न जाने कितने आए और चले गए। हमारे देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया जा जा सकता। यह आस्थाओं का देश है, हमारा देश गुलदस्ता है यहां हर रंग के फूल खिलते रहेंगे।” उन्होंने का कि देश का बँटवारा हो गया, लेकिन हिंदू राष्ट्र नहीं बन सका।

तौकीर रजा ने कहा कि मुहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम नहीं था। मुस्लिम बनकर इस देश का बँटवारा किया है। तौकीर रजा ने कहा कि किसी मुस्लिम ने गाँधी जी की हत्या नहीं की, गोडसे ने की। तौकीर रजा ने कहा कि गाँधी जी की हत्या RSS का षड़यंत्र था।

अपने विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले तौकीर रजा ने कहा कि RSS की योजना थी कि गाँधी जी की हत्या होगी तो मुस्लिमों का कत्लेआम हो जाएगा। लोगों को यह लगेगा कि गाँधी जी की हत्या किसी मुस्लिम ने की है। उन्होंने कहा कि RSS की इस योजना को मुस्लिमों ने नाकाम कर दिया।

ब्रिटेन को पहला हिन्दू प्रधानमंत्री ऋषि सुनक मिलने पर 'द गार्जियन' ने उगला ज़हर ; गोमांस न खाने और शराब से दूर रहने को बताया ‘सवर्णों वाली सोच’

क्या हिन्दू होना अपराध है? क्यों बात-बात में हिन्दू को ही निशाना बनाया जाता है? हिन्दुओं को भिन्न-भिन्न जातियों में बांट कर विभाजित तो किया जाता है, लेकिन ईसाई और मुस्लिम समाज इतनी अधिक जातियों में विभाजित है, उस पर कोई नहीं बोलता, क्यों? हिन्दुओं में इतनी जातियां होने के बावजूद सब एक मंदिर में जाते हैं, मृतक को एक ही शमशान पर जलाया जाता है, जबकि ईसाई और मुस्लिम समाज में स्थिति एकदम विपरीत, क्यों नहीं उसे उजागर किया जाता? इस ज्वलंत प्रश्न का हर हिन्दू विरोधी को उत्तर देना होगा। स्वामी विवेकानंद की हिन्दू विरोधी भी प्रशंसा करते हैं, लेकिन हिन्दुत्व पर शिकागो में दिए उनके भाषण को क्यों भूल जाते हैं? लेकिन दुर्भाग्य यह है कि सेकुलरिज्म का चोला ओढे पाखंडी सेक्युलरिस्टों ने तुष्टिकरण करते अपने ही गौरवशाली इतिहास को धूमिल करना कौन-सा राष्ट्रधर्म है। जितना गौरवशाली इतिहास हिन्दुओं उतना विश्व में किसी संस्कृति का नहीं।  
हिन्दुओं को जातियों में विभाजित करने वालों जवाब दो। यह सिर्फ एक उदाहरण है,  
कभी किसी को इस भेदभाव पर बोलते देखा 
यूनाइटेड किंगडम (UK) को ऋषि सुनक के रूप में नया प्रधानमंत्री मिला है। वहाँ के मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ उन्हें सिर्फ इसीलिए निशाना बना रहा है, क्योंकि वो हिन्दू हैं और भारतीय मूल के हैं। यही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भारत में अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों, जिनकी जनसंख्या ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का 3 गुना है) की तथाकथित प्रताड़ना का रोना रोते हैं, अपने ही देश में एक ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय के नेता पर निशाना साध रहे हैं जिनकी जनसंख्या 2% से भी कम है।

खास बात यह है कि इस लेख को पंकज मिश्रा नामक उपन्यासकार ने लिखा है। उनका दावा है कि ऋषि सुनक ‘कंजर्वेटिव पार्टी’ की विविधता वाली दृष्टि को ध्वस्त कर रहे हैं। लेखक का ये नहीं मानना है कि यूके को एक अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री मिलना ऐतिहासिक क्षण है, बल्कि उनका कहना है कि भारत से लेकर ब्रिटेन तक हुए हो-हंगामे के कारण ऐसा दिखाया जा रहा है। पंकज मिश्रा ने ‘हिन्दू सुप्रेमासिस्ट्स’ (राष्ट्रवादी और भाजपा समर्थकों के लिए वामपंथियों/इस्लामवादियों द्वारा प्रयोग किया जाने वाला शब्द) का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए ऋषि सुनक ‘देशी ब्रो’ हैं।

‘द गार्जियन’ में प्रकाशित इस लेख में कहा गया है कि ये हिन्दू ऐसा सोचते हैं कि ऋषि सुनक भारत के गुप्त एजेंट हैं, जो दुनिया भर भारत के कब्जे का एक हिस्सा हैं। ऋषि सुनक गोमांस और शराब से दूर रहते हैं, जिसे पंकज मिश्रा ने अपर कास्ट टैबू’ बताया है। ध्यान दीजिए, यहाँ हिन्दू न कह कर सवर्णों को गाली दी गई है। साथ ही ऋषि सुनक भगवान गणेश की मूर्ति अपने साथ रखते हैं, इसे लेकर भी उनकी आलोचना की गई है।

इसमें ऋषि सुनक के पहनावे पर भी निशाना साधा गया है और कहा गया है कि उन्होंने काफी सावधानी से अपनी छवि बनाई है। ‘द गार्जियन’ लिखता है कि ऋषि सुनक सूट-बूट में रहते हैं, इसीलिए वो एक धार्मिक हिन्दू नहीं लगते, जैसा कि महात्मा गाँधी अपने पहनावे से लगते थे। ये भी इशारा किया गया है कि कैसे वो अपने अरबपति ससुर नारायणमूर्ति (इंफोसिस के संस्थापक) की एक निवेश कंपनी में निदेशक रह चुके हैं।

इसमें ये बिलकुल नहीं माना गया है कि ऋषि सुनक का प्रधानमंत्री बनना अल्पसंख्यकों की विजय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया भारत गाँधीवादी मूल्यों को नीचा दिखाते हुए सत्ता और धन की तरफ भाग रहा है। जानबूझ कर ये लेख लिखवाने के लिए एक भारतीय को चुना गया, ताकि विवाद न हो। द गार्जियन’ लेस्टर और बर्मिंघम में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भी मुस्लिम आरोपितों को बचाते हुए हिन्दुओं को बदनाम कर चुका है। कई देशों में हिन्दू अहम मुकाम हासिल कर सत्ता में हस्तक्षेप करने की ताकत रखते हैं, इससे भी लेखक को दिक्कत है।

क्या किसी ‘अवतार’ की प्रतीक्षा में हैं हिंदू? आखिर कब तक सरकार को ही मानते रहेंगे ‘कर्म’?


2022। भारत की स्वतंत्रता का 75वाँ साल। अमृत महोत्सव का साल। हर घर तिरंगा अभियान का साल। श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा रैली का साल.. पर जरा थमिए, क्योंकि फिर से मजहबी खतरा उसी तरह आ खड़ा हुआ है, जिसने 1947 में स्वतंत्रता से पहले इस देश के टुकड़े करवाए।

इस्लामी आतंकवाद, इस्लामी कट्टरपंथ, इस्लामी घुसपैठ इन सबसे जूझते जब हम स्वतंत्रता के 75वें साल में हैं तो देश के भीतर मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिशों का असर भी दिखने लगा है। हाल में सामने आए कुछ रिपोर्ट बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के जो 5 जिले नेपाल से लगते हैं, उनके 116 गाँव में मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से ज्यादा हो गई है। 303 गाँव में वे 30 से 50 फीसदी के बीच हैं। इसी तरह असम के जो जिले बांग्लादेश की सीमा से लगे हुए हैं, वहॉं मुस्लिमों की आबादी 32 फीसदी तक बढ़ गई है। बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान के सीमावर्ती जिलों का भी यही हाल है। इसी रफ्तार से इन इलाकों में मस्जिद-मदरसे भी बढ़े हैं। रिपोर्ट बताते हैं कि यूपी के सीमावर्ती जिलों में 4 साल में मस्जिद-मदरसों की संख्या में 25 फीसदी का उछाल देखा गया है। असम में तो 1000 ऐसे मदरसे सामने आए हैं जिनका संचालन निजी स्तर पर हो रहा था।

इसके अलावा भी देश के हर हिस्से में इन्होंने अपने ऐसे इलाके में बना रखे हैं, जहाँ पुलिस भी जाने से डरती है। हाल ही में वे रिपोर्ट सामने आई हैं जो बताती हैं कि किस तरह बिहार और झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों के सरकारी स्कूलों तक में ‘शरिया शासन’ लागू कर दिया गया। रविवार की जगह स्कूलों की छुट्टी शुक्रवार को होने लगी। स्कूलों के नाम में उर्दू तक जोड़ दिए गए। ऐसे में एक खास पट्टी में इस तरह इनकी आबादी का बढ़ना, मस्जिदों-मदरसों का कुकुरमुत्ते की तरह उग आना एक बड़े खतरे का संकेत है।

यह बात सामने आ चुकी है कि एक मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिशें चल रही है। बांग्लादेश से पाकिस्तान तक जाने वाले यह गलियारा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब होकर गुजरता है। इन राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में बीते 10 साल के भीतर सुनियोजित तरीके से घुसपैठिए बसाए गए हैं। स्थानीय लोगों का पलायन हो रहा है और संसाधनों पर ये कब्जा करते जा रहे हैं। मजहबी शिक्षण संस्थान उन इलाकों में खोले जा रहे हैं जो सामरिक तौर पर ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इतना ही नहीं सीमा से सटे नेपाल के इलाकों में भी इसी तरह डेमोग्राफी बदली जा रही है।

इन सबके साथ भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने के लिए मुस्लिम युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण देने जैसे प्लान पर भी काम चल रहा है। कुल मिलाकर उसी तरह की स्थिति पैदा की जा रही है जो देश की स्वतंत्रता से पहले बनाया गया था। जिसकी वजह से पाकिस्तान की पैदाइश हुई। कन्हैया लाल हो या उमेश कोल्हे, हर्षा हो या प्रवीण नेट्टारू इन सबकी हत्या उन्हीं साजिशों का हिस्सा हैं। ऐसा लगता है जैसे डायरेक्ट एक्शन डे की तैयारियाँ हो।

ऐसे वक्त में इस देश का हिंदू क्या कर रहा है? वह एक ऐसी अंतहीन प्रतीक्षा में बैठा दिख रहा जब कोई ‘अवतार’ आएगा और एक साथ सारी आसुरी प्रवृत्तियों का संहार कर चला जाएगा। अवतार के आगमन तक उसने सरकार से सवाल को ही अपना कर्म मान लिया है। यदि इस देश को इस्लाम के नाम पर टूटने से बचाना है, काफिर कह कर काट डाले जाने से बचना है तो हमें इस तंद्रा को तोड़ना होगा।

यह सही है कि कुछ काम सरकार के होते हैं। उसकी एजेंसियों को ही उन्हें जमीन पर उतारना होगा। यकीनन सरकार और तंत्र का कार्य पूर्ण करने का बोझ भी हम अपने ऊपर नहीं ले सकते। हम उनकी तरह हथियार लेकर किसी का गला काटने भी नहीं निकल सकते। लेकिन इस देश का संविधान और कानून हमें आत्मरक्षा का अधिकार देता है, अफसोस हम ये भी भूल चुके हैं। हमें अपनी ही गलियों में उनकी घुसपैठ से फर्क नहीं पड़ता। अपने ही गाँव में अवैध मस्जिद-मदरसे खुलने से हमे खतरा नहीं लगता। हमारे ही हाथ गरम कर वे दस्तावेज बना ले जाते हैं और हमें वह अपना डेथ वारंट नहीं लगता। हमें तब भी फर्क नहीं पड़ता जब अपनी ही गली में बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक होकर कोई हिंदू अपना ही घर छोड़ने को मजबूर हो जाता है।

यह सही है कि हम व्यक्ति के तौर पर इस इकोसिस्टम से नहीं लड़ सकते। लेकिन यह भी सत्य है कि जब तक हम खुद काफिर कह कर काटे नहीं जाते, तब तक हम ही यह भी कह रहे होते हैं कि ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं है’। यह भी सत्य है कि जब कश्मीर के हिंदू अपने घर से भगाए जा रहे थे तो देश के दूसरे हिस्से के हिंदुओं के लिए यह कोई मसला नहीं था। दूसरी तरफ वे हैं जो फिलिस्तीन पर इजरायल का हमला हो तो सड़क पर उतर हिंदुओं को डरा जाते हैं। फिर ‘डरा हुआ मुसलमान’ और victim card का नैरेटिव भी बना जाते हैं।

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बॉर्डर पर 10 साल में 32% मुस्लिम बढ़े, BSF के हवाले हो सकता है 100 किमी इलाकाः नेपाल-बांग्लादेश से सटे इला

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बॉर्डर पर 10 साल में 32% मुस्लिम बढ़े, BSF के हवाले हो सकता है 100 किमी इलाकाः नेपाल-बांग्लादेश से सटे इला

ऐसे में इस लड़ाई को किसी सरकार या किसी व्यक्ति विशेष के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। न अवतार के भरोसे टाला जा सकता है। यह लड़ाई हर गली में लड़नी होगी। हर गॉंव में इसका विरोध करना होगा। हर शहर में इसके खिलाफ सड़क पर उतरना होगा। यह केवल तभी संभव है, जब हिंदू समूह में खड़े होंगे। इसके लिए यह आवश्यक नहीं कि हिंदू किसी खास संगठन, दल के साथ खड़े हों। जरूरी है कि हिंदू के साथ हिंदू खड़े हों।