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AMU के हॉस्टल से मिले जाली नोट और कारतूस, शहबाज फरार: पहली बार नहीं है यूनिवर्सिटी में संदिग्धों की तलाश, आतंकी मॉड्यूल तक का यहाँ से हो चुका खुलासा

एएमयू छात्र के कमरे में छापेमारी ( साभार-X@AN
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इतिहास साक्षी है कि भारत में जवाहरलाल यूनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दोनों ही अपनी स्थापना से लेकर आज तक विवादित रही है। नेहरू सरकार से लेकर आज मोदी सरकार तक कोई यहाँ हो रही देश विरोधी गतिविधियों पर हंटर चलाने में पूर्णरूप से नाकाम रही है। संदिग्धों को गिरफ्तार कर सरकारें अपना दामन बचा लेती हैं। एक यूनिवर्सिटी में टुकड़े-टुकड़े गैंग सक्रीय है तो दूसरी में पाकिस्तान समर्थक। नोटबंदी लेकर जनता तक विरोधियों के दुष्प्रचार में फंस मोदी सरकार को कोसती नज़र आती है। लेकिन भूल जाती है कि नोटबंदी होने पर कितना जाली नोट कार्टन भर-भर कर नदियों और कब्रिस्तानों में फेंका गया था। जिस पर हर राष्ट्रीय मीडिया चुप्पी साधे रहा लेकिन सोशल मीडिया पर फोटो सहित खूब प्रसारित किया गया था।    

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और इस बार मामला और भी गंभीर है। एक छात्र, शहबाज, के कमरे से पुलिस को जाली नोट और जिंदा कारतूस मिले हैं। छापेमारी से पहले ही वह फरार हो गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 13 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया।

पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। जाँच के दौरान 113 संदिग्धों की सूची भी बनाई गई है। इनकी तलाशी ली जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब एएमयू का नाम ऐसे मामलों में आया है। इससे पहले भी यहाँ कट्टरपंथ और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। 

जिस दिन शहबाज़ गिरफ्तार होगा जितने भी मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन और इनके समर्थक सियासत पार्टियां victim card खेलने की नौटंकी कर कहेंगे कि "मुस्लिम है इसलिए फंसाया जा रहा है, गरीब है, दिमाग से पागल है, मज़लूम है" आदि आदि और एक से बढ़कर एक महंगा वकील खड़ा किया जायेगा और अदालतें उन वकीलों को सम्मान देते हुए उनकी दलीलों को सुनने में देश का समय बर्बाद कर गुमराह होकर देश को भी गुमराह कर जमानत दे देंगी।      

शहबाज की तलाश में पुलिस

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शहबाज एमसीए का छात्र है। पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर एएमयू सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर कॉलेज हॉस्टल में छापेमारी की थी, इसको लेकर कॉलेज प्रशासन की मदद से एटीएस ने कमरे की छापेमारी की थी। इस दौरान उसके कमरे से 32 बोर पिस्टल की गोलियाँ, 12 बोर हथियार के चार कारतूस, नकली नोट, आठ मोबाइल फोन, खोखे और मैगजीन के अलावा नकली आईडी कार्ड मिले थे, लेकिन शहबाज कमरे में मौजूद नहीं था।

उसका अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है। इस बीच यूनिवर्सिटी ने उसे सस्पेंड कर दिया है। बरामद सामानों की फॉरेंसिक जाँच की जा रही है। ये भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट और छिपाकर रखे गए हथियार किस उद्देश्य के लिए और किसके कहने पर शहबाज ने रखे थे?

कॉलेज के हॉस्टल में छापेमारी हाल ही में हुए सिविल लाइंस क्षेत्र में फायरिंग को लेकर की गई थी। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में ही शहबाज का नाम सामने आया था।

एएमयू की दो डिग्रियाँ और फर्जी सर्टिफिकेट

शहबाग ने इससे पहले डिप्लोमा इन कैमिकल इंजीनियरिंग करने के लिए भी नामांकन लिया था। उसके पास एएमयू के हाईस्कूल और 12वीं के फर्जी सर्टिफिकेट भी मिले हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब उसकी कुंडली खँगाल रही है। ये बात भी सामने आई है कि शहबाज को रूम अलॉट नहीं किया गया था। उसने कमरे पर अवैध रूप से महीनों से कब्जा कर रखा था। वह गैर आवासीय छात्र था।

शहबाज ने अलग-अलग वक्त पर अलग कोर्स में एडमिशन लिया था। उसने डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग में भी पहले नामांकन लिया था। दूसरी बार एमसीए में नामांकन लिया। उसके कमरे से कई सर्टिफिकेट और दस्तावेज मिले हैं। दो एएमयू की मार्कशीट मिली है, जो फर्जी बताया गया है। वह हाईस्कूल और 12वीं की है। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि उसने 12वीं यहाँ से नहीं किया है और वह फर्जी सर्टिफिकेट है। उसे सस्पेंड कर दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 113 संदिग्धों की लिस्ट बनाई

एएमयू प्रशासन ने कॉलेज में आने जाने वालों पर कड़ी नजर रखने के सख्त हिदायत दिए हैं, साथ ही 113 संदिग्ध और अराजक तत्वों की लिस्ट तैयार की है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि कुछ छात्रों की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी का नाम खराब होता है और करीब 26 हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ता है।

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि 99 फीसदी बच्चा पढ़ने आता है। बहुत कम बच्चे हैं, जो कॉलेज किसी और मकसद से आते हैं। उन्हें अलग किया जा रहा है। अब छात्र-छात्राएँ भी गोपनीय तरीके से इनकी जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने स्टूडेंट नियमित कॉलेज आते हैं और कितने बाहरी बच्चें हैं, जो गलत काम में शामिल हैं। उन पर कार्रवाई की जा रही है।

एएमयू के कुछ छात्रों का ISIS कनेक्शन सामने आया था

यह पहला मामला नहीं है जब एएमयू के छात्र संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हों। नवबंर 2023 में ISIS मॉड्यूल का अलीगढ़ में भंडाफोड़ हुआ था जिसमें 7 एएमयू के छात्र थे। इसका पता तब चला जब एक फर्जी दस्तावेज और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उसकी जाँच के दौरान एटीएस को आईएसआईएस मॉड्यूल का पता चला था। इनमें से दो छात्र शाहनवाज और रिजवान एएमयू के छात्र संगठन एसएएमयू के सदस्य थे।

दरअसल छात्र संगठन SAMU पर CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान ही खुफिया एजेंसियों की नजर थी। उस वक्त भी एटीएस ने एएमयू के कुछ छात्रों को हिरासत में लिया था। इसमें नवंबर 2025 में गिरफ्तार एएमयू के छात्र भी थे।

2023 में सामने आया था मामला

ISIS लिंक को लेकर नवंबर 2023 से फरार चल रहे दो छात्रों, अब्दुल समद मलिक और फैजान बख्तियार पर सरकार ने 25-25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। ये लोग भी SAMU से जुड़े थे।

ATS की FIR के मुताबिक, फैजान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक सोशल मीडिया के साथ कई अन्य माध्यमों से ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिशों में जुटे थे। इन दोनों को जनवरी 2024 में एटीएस ने गिरफ्तार किया।

दिल्ली में हुई थी कई गिरफ्तारियाँ

अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई आतंकियों को दिल्ली से लेकर अलीगढ़ तक गिरफ्तार किया था। ये आतंकी आईएसआईएस का मॉड्यूल संचालित कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में पता चला था कि शहनवाज, रिजवान और अरशद नाम के आतंकी, जिसमें शहनवाज पुणे में यूएपीए केस में गिरफ्तारी के बाद से फरार था, वो उत्तरी भारत में आईएसआईएस का पूरा मॉड्यूल खड़ा कर रहे थे और दीपावली के त्योहार के समय कई जगहों पर धमाकों-हमलों की फिराक में थे।

इससे पहले 2023 में ही AMU से पीएचडी करने वाले ISIS आतंकी वजीउद्दीन की छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी हुई थी।

दरअसल एएमयू को आतंकी छिपने का अड्डा बनाते रहे है। हर तरह के कोर्स इस यूनिवर्सिटी में होते हैं। स्कूल से पीएचडी तक की पढ़ाई यहाँ होती है। ऐसे में किसी कोर्स में एडमिशन लेकर छिपना आसान होता है। छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना भी तुलनात्मक रूप से आसान होता है, क्योंकि पढ़ने लिखनेवाले छात्र एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर विश्वास कर लेते हैं। यही वजह है कि कई बार छात्रों के कनेक्शन आतंकियों, कट्टरपंथियों और देश में अराजकता फैलाने वालों से हो जाते है।

ISIS-अलकायदा आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार : लादेन की देखते थे वीडियो, गेमिंग ऐप से करते थे आका से संपर्क, पाकिस्तान जाने का था प्लान

                                           आतंकरोधी अभियान के तहत पकड़े गए 12 आतंकी
देश के विभिन्न राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने ISIS-अलकायदा से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। जानकारी सामने आई है कि आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुए अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 12 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

इन 12 आतंकियों की पहचान मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (आंध्र प्रदेश), मिर्जा सोहेल बेग (आंध्र प्रदेश), मोहम्मद दानिश (आंध्र प्रदेश), शादमान दिलकुश (बिहार), अजमनुल्लाह खान (बिहार), लकी अहमद (दिल्ली), मीर आसिफ अली (पश्चिम बंगाल), जीशान (राजस्थान), अब्दुल सलाम (कर्नाटक), शाहरुख खान (महाराष्ट्र), शियाक पियाज उर रहमान (महाराष्ट्र) और सईदा बेगम (तेलंगाना) के रूप में हुई है।

                                        साभार : सोशल मीडिया 
पुलिस की छानबीन में इनके संबंध अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS से जुड़े सामने आए हैं। जाँच में ये भी पता चला है कि ये आतंकी एक गेमिंग ऐप के जरिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और इनके तार ISIS से संबंध रखने वाले Benex Com नामक एक समूह से भी जुड़े थे।

पुलिस के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया पर भड़काऊ गतिविधियों में शामिल थे। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, ISIS के झंडे का समर्थन किया और भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की बात कही। आगे इनकी योजना पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण लेने की थी और साथ ही अपने साथ अन्य युवाओं को भी जिहाद के लिए प्रेरित करने की थी।

इनमें से तीन- मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश और मोहम्मद सोहेल बेग ने तो ‘अल-मलिक इस्लामिक यूथ’ नाम से ग्रुप भी बनाया था। इसके जरिए ये युवाओं को भड़काने और जिहाद के लिए तैयर करने का काम करते थे।

वहीं अन्य लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जिहाद से जुड़े प्रचार में सक्रिय थे और ओसामा बिन लादेन के वीडियो देखकर आतंकी-कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है और सभी डिजिटल साक्ष्यों व संपर्कों की पड़ताल की जा रही है, ताकि इस आतंकी साजिश के हर पहलू का खुलासा किया जा सके।

चीन में उइगर मुस्लिमों पर जुल्म का बदला : अफगानिस्तान में चीनी रेस्टोरेंट पर आत्मघाती हमला, 7 मारे गए: ISIS ने ली जिम्मेदारी; भारत के बिकाऊ आन्दोलनजीवी खामोश

                          काबुल में चीनी रेस्टोरेंट में आत्मघाती हमला, 7 मौत (साभार: X-WorldAffairs)
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में ‘चीन लांझोऊ बीफ नूडल्स’ नाम के चीनी रेस्टोरेंट में बम धमाका हुआ। धमाके के वक्त रेस्टोरेंट में ग्राहकों की भीड़ थी। हमले में एक चीनी नागरिक और 6 अफगानी मारे गए। इसके साथ ही बच्चों समेत दर्जन भर की बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ISIS ने ली है।

भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी और उनको समर्थन देने वाली पार्टियां तलाक और बुर्का आदि पर मुसलमानों को भड़काने में कोई मौका चूकते। फिलिस्तीन और गाज़ा पर इजराइल हमलों पर छातियां पीटते हैं। लेकिन ईरान में मीडिया के अनुसार 16000+ से ज्यादा मुसलमानों की मौत हो चुकी है सब खामोश हैं, सबके मुंह में दही जम गयी है। इसी तरह चीन में उइगर मुसलमानों पर कितने जुल्म हो रहे हैं, उइगर मुस्लिम महिलाओं के साथ जरुरत के ज्यादा उत्पीड़न हो रहा है क्यों नहीं चीन के विरुद्ध आवाज़ उठाते? भारतीय मुसलमानों को भी चीन के हर उत्पाद का बहिष्कार करना चाहिए। दरअसल सच्चाई यह है कि चीन के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए कोई इनको पैसा नहीं देने वाला। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बम धमाका सोमवार (19 जनवरी 2026) दोपहर के वक्त हुआ। कमर्शियल इलाके में स्थित चीनी रेस्टोरेंट में बम धमाके में आसपास की इमारतें और दुकानें भी चपेट में आईं। इस्लामी स्टेट (ISIS) की अफगान शाखा ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह एक आत्मघाती हमला था।

पुलिस के प्रवक्ता खालिद जादरान ने बताया कि मरने वालों में एक की पहचान चीनी नागरिक अयूब के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि चीनी नूडल रेस्टोरेंट को एक चीनी मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल मजीद, उनकी बीवी और एक अफगान सहयोगी अब्दुल जब्बार महमूद द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता था और इसके अधिकतर ग्राहक चीनी मुस्लिम थे।

हमले के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में चीनी रेस्टोरेंट के पास भीषण बम धमाका होता दिख रहा है, जिसके बाद इलाके में धुएँ का गुब्बार फैल जाता है। लोग दहशत में इधर-उधर भागते हैं। बम धमाके में चीनी रेस्टोरेंट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसकी तस्वीर और वीडियो भी सामने आई हैं।

वहीं ISIS की समाचार एजेंसी ‘अमाक न्यूज एजेंसी’ ने कहा कि ISIS की अफगान शाखा ने चीनी नागरिकों को अपनी लिस्ट में शामिल किया है, जिसका कारण उइगरों के खिलाफ चीनी सरकार द्वारा बढ़ता अपराध बताया गया है।

हजारों ईसाइयों का कत्लेआम, ISIS का बढ़ता आतंक और अमेरिका की अंतिम चेतावनी: ट्रंप ने क्रिसमस पर क्यों कराया नाइजीरिया पर हमला?

   ईसाइयों के नरसंहार के खिलाफ अमेरिका ने आतंकवादियों को निशाना बनाकर घातक एयर स्ट्राइक की (साभार: BBC/HT)
क्रिसमस पर अमेरिका ने नाइजीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए घातक एयर स्ट्राइक की। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस स्ट्राइक में कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, यह स्ट्राइक नाइजीरिया के आग्रह पर की गई है, जहाँ लगातार ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया में ईसाइयों की लगातार हत्या को लेकर नाइजीरिया को चेतावनी दी थी।

नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को कहा कि अमेरिका के सटीक हमलों में देश के उत्तर-पश्चिम में ‘आतंकवादी ठिकानों’ को निशाना बनाया है। साथ ही कहा कि नाइजीरिया वॉशिंगटन के साथ संरचित सुरक्षा सहयोग में लगा हुआ है। अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड ने भी बताया कि यह हमला नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया था और इसमें कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं।

एयर स्ट्राइक पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान

स्ट्राइक की जानकारी देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर कहा, “आज रात कमांडर इन चीफ के रूप में मेरे निर्देश पर अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजरिया में ISIS के आतंकवादी कचरे पर एक शक्तिशाली और घातक हमला किया, जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे थे और उनकी क्रूरता से हत्या कर रहे थे, जो कई वर्षों और सदियों में नहीं देखी गई थी।”

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, “मैंने पहले भी इन आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का नरसंहार नहीं रोका तो उन्हें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा और आज रात वही हुआ।” आतंकवाद पर सख्त नीति को लेकर उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना ने कई सटीक हमले किए, जैसा कि केवल अमेरिका की कर सकता है। मेरे नेतृत्व में हमारा देश कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।”

अंत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ, जिनमें मारे गए आतंकवादी भी शामिल हैं, जिनकी संख्या और भी अधिक होगी अगर वे ईसाइयों का नरसंहार जारी रखते हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप की नाइजीरिया को चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार पर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी आतंकवादियों को चेतावनी दे चुके हैं। दो महीने पहले ही अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाइजीरियन सरकार पर ईसाइयों के खिलाफ हो रहे सामूहिक नरसंहार को नहीं रोक पाने का आरोप लगाते हुए सैन्य संघर्ष के संकेत दिए थे।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा था, “अगर नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों की हत्या की इजाजत देती रही, तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली सभी तरह की मदद तुरंत बंद कर देगा, और हो सकता है कि उस बदनाम देश में ‘गोलियाँ बरसाकर’ उन इस्लामी आतंकवादियों का सफाया कर दे, जो ये भयानक अत्याचार कर रहे हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर नाइजीरियन सरकार इन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो अमेरिका घातक हमले के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मैं अपने युद्ध विभाग को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दे रहा हूँ। अगर हम हमला करेंगे, तो वह तेज, क्रूर और तीखा होगा, ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी गुंडे हमारे प्यारे ईसाइयों पर हमला करते हैं।”

नाइजीरिया में ईसाइयों का नरसंहार

 डोनाल्ड ट्रंप नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार की जो बात कर रहे हैं, उसकी असलियत जानते हैं। नाइजीरिया में बोको हराम और फुलानी चरवाहों जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठन सक्रिय हैं, जो लगातार ईसाइयों के गाँवों और चर्च को निशाना बना रहे हैं। ईसाइयों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच यह टकराव साल 1950 के दशक से चला आ रहा है।

साल 2025 की बात करें तो 14 अक्टूबर को नाइजीरिया के प्लेटू राज्य के रचास और रावुरु गाँव में फुलानी मिलिटेंट्स ने हमला कर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

23 सितंबर 2025 को बोको हराम ने अदमवा राज्य के वाग्गा मोंगारो गाँव में 4 ईसाइयों की हत्या कर दी, घरों और चर्च को नेस्तनाबूद कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए। वहीं 5 सितंबर को इसी संगठन ने बोर्नो राज्य के दरुल जमाल गाँव में हमला कर 63 लोगों को मार डाला। 

13-14 जून की रात बेन्युए राज्य के इएलेवाटा गाँव में फुलानी चरवाहों ने 100 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या कर दी और उनके घरों में आग लगा दी। इससे पहले 24 मई को फुलानी चरवाहों ने ही ताराबा राज्य के करिम लामिदो पर हमला कर 42 ईसाइयों की हत्या कर दी और 60 से ज्यादा घर जला दिए।

गाँव के आसपास के करीब 5000 लोग अपना घर-बार छोड़ कर विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। अमेरिका स्थित काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से अब तक अलग-अलग वजहों से 60000 लोगों की मौत हो चुकी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 से बोको हराम ने 40000 से ज्यादा ईसाइयों की यहाँ हत्या कर दी। हजारों बच्चे मारे गए हैं और करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। 2011 से अभी तक बोको हराम और इस्लामिक स्टेट इन वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस ने 37500 से अधिक लोगों की हत्या कर दी।

अल-कायदा का कनेक्शन और इस्लामी कट्टरपंथ पर पकड़

ईसाइयों को निशाना बना रहा ये इस्लामी संगठन बोको हराम का अल-कायदा और उत्तरी अफ्रीका के कई आतंकी संगठन के साथ कनेक्शन है। नाइजीरिया में इसने राजनीतिक रूप से पैर पहले ही जमा लिए हैं। यहीं वजह है कि ईसाइयों की हत्या करने वाले इस संगठन के समर्थक नाईजीरिया में ऊँचे पदों पर हैं।

करीब 22 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब करीब आधी-आधी आबादी मुस्लिम और ईसाइयों की है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि नाइजीरियाई आबादी का बड़ा हिस्सा इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है । प्यू ग्लोबल एटीट्यूड्स प्रोजेक्ट द्वारा 2009 में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक नाइजीरिया में 43 फीसदी मुसलमान आत्मघाती बम विस्फोट को सही मानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज्यादा मुसलमानों ने आतंकी ओसामा बिन लादेन पर ‘विश्वास’ था।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने नाइजीरिया में दो रास्ते अपनाए हैं- पहला, बोको हराम जैसे कट्टरपंथियों द्वारा चलाया गया मार काट का रास्ता। इसका मकसद गैर इस्लामी जनसंख्या को कम करना है। दूसरा, कानूनी और संवैधानिक रास्ता यानी शरिया कानून लागू करने की कोशिश करना। ऐसा उत्तरी राज्यों में हो रहा है।

1999 और 2002 के बीच, 12 उत्तरी नाइजीरियाई राज्यों में शरिया कानून लागू किया गया था। इसका असर इन राज्यों में दिखता है। नाइजीरिया की सरकार भले ही इससे इनकार करे, लेकिन इस्लामिक कट्टरवाद नाइजीरिया की हकीकत बन गई है और गैरमुस्लिमों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

नाइजीरिया में मस्जिद में फटा बम

डोनाल्ड ट्रंप की क्रिसमस पर एयर स्ट्राइक से एक दिन पहले ही नाइजीरिया में मस्जिद में विस्फोटक बम फटने की खबर सामने आई थी। नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी शहर मैदुगुरी में बुधवार (24 दिसंबर 2025) की शाम नमाज के दौरान एक मस्जिद में हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

हमले के बाद सामने आए वीडियो में खून से लथपथ लोग और चादरों से ढके शव देखे गए हैं। हालाँकि, हमले की किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। पुलिस की शुरुआती जाँच में इसे आत्मघाती बम हमला बताया गया, क्योंकि मौके पर आत्मघाती जैकेट के टुकड़े मिले।

नाइजीरिया में ISIS आतंकियों को US ने किया ढेर, क्रिसमस की रात हुई बमबारी: ईसाइयों के नरसंहार का अमेरिका ने लिया बदला, ट्रंप ने पहले दी थी चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार के खिलाफ अमेरिका ने आतंकवादियों को निशाना बनाकर घातक एयर स्ट्राइक की (साभार: BBC/HT)
क्रिसमस पर अमेरिका ने नाइजीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए घातक एयर स्ट्राइक की। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस स्ट्राइक में कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, यह स्ट्राइक नाइजीरिया के आग्रह पर की गई है, जहाँ लगातार ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया में ईसाइयों की लगातार हत्या को लेकर नाइजीरिया को चेतावनी दी थी।

नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को कहा कि अमेरिका के सटीक हमलों में देश के उत्तर-पश्चिम में ‘आतंकवादी ठिकानों’ को निशाना बनाया है। साथ ही कहा कि नाइजीरिया वॉशिंगटन के साथ संरचित सुरक्षा सहयोग में लगा हुआ है। अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड ने भी बताया कि यह हमला नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया था और इसमें कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं।

एयर स्ट्राइक पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान

स्ट्राइक की जानकारी देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर कहा, “आज रात कमांडर इन चीफ के रूप में मेरे निर्देश पर अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजरिया में ISIS के आतंकवादी कचरे पर एक शक्तिशाली और घातक हमला किया, जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे थे और उनकी क्रूरता से हत्या कर रहे थे, जो कई वर्षों और सदियों में नहीं देखी गई थी।”

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, “मैंने पहले भी इन आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का नरसंहार नहीं रोका तो उन्हें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा और आज रात वही हुआ।” आतंकवाद पर सख्त नीति को लेकर उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना ने कई सटीक हमले किए, जैसा कि केवल अमेरिका की कर सकता है। मेरे नेतृत्व में हमारा देश कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।”

अंत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ, जिनमें मारे गए आतंकवादी भी शामिल हैं, जिनकी संख्या और भी अधिक होगी अगर वे ईसाइयों का नरसंहार जारी रखते हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप की नाइजीरिया को चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार पर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी आतंकवादियों को चेतावनी दे चुके हैं। दो महीने पहले ही अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाइजीरियन सरकार पर ईसाइयों के खिलाफ हो रहे सामूहिक नरसंहार को नहीं रोक पाने का आरोप लगाते हुए सैन्य संघर्ष के संकेत दिए थे।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा था, “अगर नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों की हत्या की इजाजत देती रही, तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली सभी तरह की मदद तुरंत बंद कर देगा, और हो सकता है कि उस बदनाम देश में ‘गोलियाँ बरसाकर’ उन इस्लामी आतंकवादियों का सफाया कर दे, जो ये भयानक अत्याचार कर रहे हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर नाइजीरियन सरकार इन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो अमेरिका घातक हमले के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मैं अपने युद्ध विभाग को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दे रहा हूँ। अगर हम हमला करेंगे, तो वह तेज, क्रूर और तीखा होगा, ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी गुंडे हमारे प्यारे ईसाइयों पर हमला करते हैं।”

नाइजीरिया में ईसाइयों का नरसंहार

डोनाल्ड ट्रंप नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार की जो बात कर रहे हैं, उसकी असलियज जानते हैं। नाइजीरिया में बोको हराम और फुलानी चरवाहों जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठन सक्रिय हैं, जो लगातार ईसाइयों के गाँवों और चर्च को निशाना बना रहे हैं। ईसाइयों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच यह टकराव साल 1950 के दशक से चला आ रहा है।

साल 2025 की बात करें तो 14 अक्टूबर को नाइजीरिया के प्लेटू राज्य के रचास और रावुरु गाँव में फुलानी मिलिटेंट्स ने हमला कर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

23 सितंबर 2025 को बोको हराम ने अदमवा राज्य के वाग्गा मोंगारो गाँव में 4 ईसाइयों की हत्या कर दी, घरों और चर्च को नेस्तनाबूद कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए। वहीं 5 सितंबर को इसी संगठन ने बोर्नो राज्य के दरुल जमाल गाँव में हमला कर 63 लोगों को मार डाला।

13-14 जून की रात बेन्युए राज्य के इएलेवाटा गाँव में फुलानी चरवाहों ने 100 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या कर दी और उनके घरों में आग लगा दी। इससे पहले 24 मई को फुलानी चरवाहों ने ही ताराबा राज्य के करिम लामिदो पर हमला कर 42 ईसाइयों की हत्या कर दी और 60 से ज्यादा घर जला दिए।

गाँव के आसपास के करीब 5000 लोग अपना घर-बार छोड़ कर विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। अमेरिका स्थित काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से अब तक अलग-अलग वजहों से 60000 लोगों की मौत हो चुकी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 से बोको हराम ने 40000 से ज्यादा ईसाइयों की यहाँ हत्या कर दी। हजारों बच्चे मारे गए हैं और करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। 2011 से अभी तक बोको हराम और इस्लामिक स्टेट इन वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस ने 37500 से अधिक लोगों की हत्या कर दी।

अल-कायदा का कनेक्शन और इस्लामी कट्टरपंथ पर पकड़

ईसाइयों को निशाना बना रहा ये इस्लामी संगठन बोको हराम का अल-कायदा और उत्तरी अफ्रीका के कई आतंकी संगठन के साथ कनेक्शन है। नाइजीरिया में इसने राजनीतिक रूप से पैर पहले ही जमा लिए हैं। यहीं वजह है कि ईसाइयों की हत्या करने वाले इस संगठन के समर्थक नाईजीरिया में ऊँचे पदों पर हैं।

करीब 22 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब करीब आधी-आधी आबादी मुस्लिम और ईसाइयों की है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि नाइजीरियाई आबादी का बड़ा हिस्सा इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है । प्यू ग्लोबल एटीट्यूड्स प्रोजेक्ट द्वारा 2009 में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक नाइजीरिया में 43 फीसदी मुसलमान आत्मघाती बम विस्फोट को सही मानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज्यादा मुसलमानों ने आतंकी ओसामा बिन लादेन पर ‘विश्वास’ था।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने नाइजीरिया में दो रास्ते अपनाए हैं- पहला, बोको हराम जैसे कट्टरपंथियों द्वारा चलाया गया मार काट का रास्ता। इसका मकसद गैर इस्लामी जनसंख्या को कम करना है। दूसरा, कानूनी और संवैधानिक रास्ता यानी शरिया कानून लागू करने की कोशिश करना। ऐसा उत्तरी राज्यों में हो रहा है।

1999 और 2002 के बीच, 12 उत्तरी नाइजीरियाई राज्यों में शरिया कानून लागू किया गया था। इसका असर इन राज्यों में दिखता है। नाइजीरिया की सरकार भले ही इससे इनकार करे, लेकिन इस्लामिक कट्टरवाद नाइजीरिया की हकीकत बन गई है और गैरमुस्लिमों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

नाइजीरिया में मस्जिद में फटा बम

डोनाल्ड ट्रंप की क्रिसमस पर एयर स्ट्राइक से एक दिन पहले ही नाइजीरिया में मस्जिद में विस्फोटक बम फटने की खबर सामने आई थी। नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी शहर मैदुगुरी में बुधवार (24 दिसंबर 2025) की शाम नमाज के दौरान एक मस्जिद में हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

हमले के बाद सामने आए वीडियो में खून से लथपथ लोग और चादरों से ढके शव देखे गए हैं। हालाँकि, हमले की किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। पुलिस की शुरुआती जाँच में इसे आत्मघाती बम हमला बताया गया, क्योंकि मौके पर आत्मघाती जैकेट के टुकड़े मिले।

दिल्ली : ISIS आतंकी ने पहले वर्दी पहनकर ली शपथ, फिर Videos सीरिया हैंडलर को भेजा: लैपटॉप-फोन से मिली चैट्स से हुए कई खुलासे, पुलिस ने बताया- दिल्ली के मॉल में धमाके की थी साजिश

दिल्ली के मॉल में ISIS धमाके की साजिश करने वाले आतंकी गिरफ्तार (साभार : aajtak & X_@PBSHABD)

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में एक बड़ा आतंकी हमला होने से पहले ही रोक लिया। पुलिस ने ISIS से जुड़े दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब पहले भी UAPA के तहत जेल जा चुका था और जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया था। उसने ISIS की शपथ ली थी, दिवाली पर मॉल में धमाका करने की योजना बनाई थी और सोशल मीडिया पर चरमपंथी प्रचार करता था।

ISIS के लिए निष्ठा की शपथ और नया नाम

जानकारी के अनुसार, जाँच में सामने आया कि अदनान ने आतंकी संगठन ISIS की शपथ ली थी। यह शपथ ‘Bayah’ कहलाती है। इस प्रक्रिया में आतंकी संगठन का सदस्य अपने ‘खलीफा’ या कमांडर के प्रति वफादारी की कसमें खाता है। अदनान ने ISIS की वर्दी पहनकर यह शपथ ली और उसकी तस्वीर अपने विदेशी हैंडलर को सीरिया भेजी। शपथ के बाद उसे नया कोड नाम ‘अबू मुहरिब’ दिया गया।

सोशल मीडिया से बना कट्टरपंथी

अदनान सोशल मीडिया के जरिए ISIS के संपर्क में आया। वह धीरे-धीरे कट्टरपंथी सोच से प्रभावित हुआ। फिर उसने ऑनलाइन आतंकियों से बात करनी शुरू की और विदेशी हैंडलरों के संपर्क में आ गया। अदनान के फोन और लैपटॉप से कई खतरनाक चैट्स, फोटो और वीडियो मिले हैं, सीरिया-तुर्की बॉर्डर से संचालित ID के संपर्क में थे। इसके अलावा, आतंकियों के पास से एक टाइमर, एक ISIS का झंडा, और लिटरेचर मिला। इन्होंने ‘वॉइस ऑफ मुसलमान’ नामक ग्रुप बनाया हुआ था।

अब दिल्ली पुलिस अदनान से लगातार पूछताछ कर रही है। एजेंसियाँ यह पता लगाने में लगी हैं कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद डिजिटल सबूतों से कई और संदिग्धों की पहचान हो सकती है।

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दिल्ली में गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू मुहरिब पहले भी हुआ था अरेस्ट, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले

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ISIS से जुड़ी बड़ी साजिश का खुलासा

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने 24 अक्टूबर 2025 की सुबह ऑपरेशन में ISIS के दो आतंकियों को पकड़ा था। मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब दिल्ली का रहने वाला और दूसरा आतंकी अबू मोहम्मद मध्य प्रदेश का रहने वाला है। दोनों ही करीब 19 और 20 साल के हैं। इन दोनों ने मिलकर दिवाली के समय दिल्ली के एक बड़े मॉल में धमाका करने की योजना बनाई थी। उनका मकसद त्योहार के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाके में हमला कर दहशत फैलाना था। अदनान को जून 2024 में उत्तर प्रदेश ATS ने UAPA एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। सितंबर 2024 में उसे जमानत मिल गई। जमानत पर आने के बाद उसने फिर से ISIS से कनेक्शन बनाया था।

विपक्ष में हिन्दुओं को सताया गज़वा-ए-हिन्द का डर; आगरा का धर्मांतरण गिरोह निकला ‘छांगुर पीर’ से भी ज्यादा खतरनाक, ISIS के पैटर्न पर करता था ब्रेनवॉश: PFI से लेकर PAK तक कनेक्शन, 6 राज्यों में छापे के बाद 10 गिरफ्तार

                               धर्मांतरण गैंग के पकड़े गए 10 लोग, उत्तर प्रदेश पुलिस ने 6 राज्यों से इन्हें दबोचा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस जिस तरह मुस्लिम कट्टरपंथियों के धर्मातरण गैंग का पर्दाफाश होने से समस्त विपक्ष में भी बड़ी हलचल शुरू हो चुकी है। सिर्फ सत्ता के लिए किये जा रहे मुस्लिम तुष्टिकरण पर सोंचने पर मजबूर हो रहे हैं। 
जिस तरह लव जिहाद और इस्लामीकरण गैंग सामने आ रहे हैं किसी मुस्लिम कट्टरपंथी और गंगा-जमुनी तहजीब के पाखंडी नारों से हिन्दुओं को गुमराह करने वालों की बोलती बंद है। जिससे विपक्ष में सनातन प्रेमी सतर्क होकर अंदरखाने योगी और मोदी के पीछे जाने का मन बना रहे हैं। उनमे मंथन शुरू हो गया कि अगर इस नाजुक समय पर योगी-मोदी का साथ नहीं दिया देश में हिन्दुओं का अस्तित्व घोर संकट में पड़ जायेगा। हमारी आने वाली पीढ़ियां पानी पी-पीकर हमें धिक्कारेंगी।   

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में छह राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। यह नेटवर्क लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण कराने, विदेशों से फंडिंग हासिल करने और कट्टरता फैलाने का काम कर रहा था। पुलिस मानती है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें कनाडा, UAE और अमेरिका से फंडिंग मिलती थी। यह मामला आगरा की दो लापता बहनों की जाँच से सामने आया।

जाँच में 7 लोगों के खिलाफ सबूत मिले। उनके खिलाफ वारंट जारी हुए। फिर पुलिस ने 11 टीमें छह राज्यों में भेजीं। आगरा पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। यह गिरोह बलरामपुर के छांगुर पीर वाले गैंग से भी खतरनाक बताया जा रहा है।

आगरा पुलिस कमिश्नर ने जानकारी दी कि इस गिरोह में हर सदस्य का काम तय था। कुछ लोग ब्रेनवॉश करते थे। कुछ पैसा जमा करते थे और विदेशों से आए फंड को दूसरों तक पहुँचाते थे। कुछ सदस्य गिरोह के लोगों को छिपने की जगह देते थे। कुछ कानूनी सलाह देते थे और कुछ नए फोन व सिम का इंतजाम करते थे।

कैसे शुरू हुई जाँच?

मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई थी। इनमें एक की उम्र 33 और एक की 18 साल थी। शुरुआत में यह गुमशुदगी का मामला था, लेकिन बाद में इसे अपहरण में बदल दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, दोनों बहनें अपना फोन नहीं ले गई थीं और सोशल मीडिया पर अपने असली नामों से एक्टिव नहीं थी, इसलिए पुलिस के लिए उनका पता लगाना मुश्किल था। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त ने इस ऑपरेशन की कमान संभाली।

I’D से खुली धर्मांतरण की पोल

पुलिस को परिवार से जो भी जानकारी प्राप्त थी उसी के आधार पर साइबर सेल ने काम करना शुरू किया था। उन्हें इंस्टाग्राम पर एक ‘कनेक्टिंग रिवर्ट आईडी‘ मिली। आईडी की जब जाँच की गई, तब कोलकाता लोकेशन का पता चला।

इस आईडी से जो भी लोग जुड़े थे उनकी जाँच की गई। पुलिस की एक महिला दारोगा ने फेक नाम बताकर खुद का धर्मांतरण के लिए संपर्क किया। फिर महिला दरोगा को आईडी से जवाब आता है। जवाब देने वाली एक महिला होती है। यहीं से पुलिस को आयशा का सुराग मिलता है। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी भी हाथ लगती है।

छह राज्यों में एक साथ छापेमारी

लापता बहनों को खोजने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। कोलकाता में बहनों के होने का मजबूत सुराग था। इसलिए वहाँ एसीपी के साथ चार टीमें भेजी गईं। दिल्ली, राजस्थान, गोवा, उत्तराखंड और यूपी के बाकी इलाकों में भी टीमें भेजी गईं, जिनमें चार से पाँच पुलिसकर्मी थे।
गोवा के लिए पुलिस एयरप्लेन से भी गई। एक ही समय पर पुलिस ने सभी 6 राज्यों में छापा मारा। 50 पुलिसकर्मियों ने चार दिन तक दिन-रात काम किया और आखिरकार बहनें मिल गईं, साथ ही इस गिरोह के लोग भी पकड़े गए।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही व्यवस्थित था। ये लोग लव जिहाद करते थे। यानी, लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे। फिर उन्हें धर्म बदलने के लिए उकसाते थे। वे धर्म बदलने के कागजात भी बनाते थे। लड़कियों को कट्टर भी बनाते थे।
अवलोकन करें:-
इस्लामिक धर्मातरण और जेहादी हरकतों के लिए हमारी अदालतें और पिछली कांग्रेस सरकारें जिम्मेदार ;

इन्हें विदेशों से पैसा मिलता था। ये पैसे को सही जगह लगाते थे। छिपने के लिए सुरक्षित घर भी देते थे। कानूनी सलाह भी देते थे। नए फोन और सिम का भी इंतजाम करते थे। यह गिरोह दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, गोवा, देहरादून और यूपी के कई शहरों में फैला था।

सीरिया : चर्च में घुसकर ISIS आतंकी द्वारा दमिश्क में आत्मघाती हमला, ताबड़तोड़ फायरिंग में 20 की मौत

                                          दमिश्क के चर्च में धमाके के बाद बिखड़े पड़े सामान(साभार NDTV) 
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच सीरिया के दमिश्क से 20 जून को एक बड़े बम धमाके की खबर सामने आई है
 मिली जानकारी के अनुसार दमिश्क के एक चर्च में आत्मघाती हमला किया गया है इस हमले में 20 लोगों की मौत हो गई है जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दमिश्क के सेंट एलियास ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में एक सशस्त्र आत्मघाती हमलावर ने श्रद्धालुओं पर गोलीबारी की, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और फिर उसने विस्फोट कर दिया

दमिश्क के पास सेंट एलियास चर्च में धमाका

एसएएनए की रिपोर्ट के अनुसार, सीरियाई सुरक्षा बलों ने इलाके की सुरक्षा के लिए सेंट एलियास चर्च के आसपास तैनाती की है गोलीबारी और धमाके की सूचना पर स्थानीय प्रशासन और मेडिकल की टीम मौके पर पहुंच गई है

सीरिया के गृह मंत्रालय के अनुसार इस्लामिक स्टेट(ISIS) के एक आतंकी ने इस घटना को अंजाम दिया। उसने मार एलियास ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में घुसकर लोगों पर फायरिंग की और फिर खुद को उड़ा लिया। वहीं सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि हमले में दो व्यक्ति शामिल थे, जिनमें से एक ने खुद को उड़ा लिया था।

दिसंबर में कट्टरपंथी इस्लामिक विद्रोहियों द्वारा बशर अल-असद को सत्ता से हटा दिया गया था। उनकी सत्ता समाप्त होने के बाद दमिश्क में पहली बार इस तरह का बड़ा आतंकी हमला हुआ है।

सीरिया के नागरिक सुरक्षा बलों द्वारा घटनास्थल से लाइवस्ट्रीम में चर्च के अंदर के दृश्य को दिखाए गया, जिसमें चर्च के अंदर खून फैला हुआ दिख रहा है। इस हमले पर ग्रीक के विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम सीरिया के दमिश्क में मार एलियास ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च पर हुए घृणित आतंकवादी आत्मघाती बम विस्फोट की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं”।

जारी बयान में कहा गया है “हम माँग करते हैं कि सीरियाई अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें, ताकि इसमें शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके और ईसाई समुदायों और सभी धार्मिक समूहों की सुरक्षा की गारंटी दी जाए , ताकि वे बिना किसी भय के रह सकें।”

सीरिया की राजधानी में धमाके के जरिए प्रशासन को बड़ी चुनौती

SANA की रिपोर्ट के अनुसार सीरियाई सुरक्षा बलों ने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सेंट एलियास चर्च के आसपास तैनाती कर दी है राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है मालूम हो कि दमिश्क सीरिया की राजधानी है ऐसे में राजधानी में बड़े हमले के लिए सीरिया प्रशासन को एक बड़ी चुनौती दी गई है
सीरिया के चर्च में हुए धमाके की जानकारी मिलते ही वहां राहत-बचाव कार्य के लिए गैर सरकारी संगठन के कई कार्यकर्ता भी पहुंच चुके हैं. जिसकी तस्वीरें भी सामने आई है

जिस साकिब नाचन के ठिकानों से मिले थे 44 ड्रोन, उसके घर पर ATS ने मारा छापा: ठाणे के गाँव को बना दिया था ‘अल शाम’, ISIS का सरगना बन दिलाई थी ‘बैयत’ की कसम

साकिब नचान (बाएँ) भारत में ISIS का नेटवर्क बढ़ा रहा था (फोटो साभार: India.com & PBS)
सेना प्रमुख बिपिन रावत ने ठीक ही कहा था कि युद्ध की स्थिति में "हमें ढाई मोर्चे पर लड़ना होगा", दूसरे 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान चर्चित गायक मोहम्मद रफ़ी ने गैर-फ़िल्मी देश भक्ति गीत "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से ...." जो उस दौरान भी सच साबित हुई और आज इतने सालों के बाद भी शत-प्रतिशत सही साबित हो रही है। जब मोदी सरकार आतंकवाद मुद्दे पर पाकिस्तान को बख्शने को तैयार नहीं फिर देश में पकडे जा रहे गद्दारों को परिवार सहित ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ इनको मिलने वाली हर सुविधा से भी वंचित क्यों नहीं करती? क्योकि इन गद्दारों को मिलने वाले धन पर ऐश तो परिवार वालों ने भी की।       

महाराष्ट्र के आतंकवादी निरोधी दस्ते (ATS) ने ठाणे के पडघा गाँव में छापेमारी की है। यह छापेमारी आतंकी साकिब नाचन के ठिकानों पर हुई है। ATS की यह छापेमारी आतंक से जुड़े एक मामले में हुई है। साकिब नाचन के कई ठिकानों की पुलिस और ATS तलाशी ले रही है।

ATS और महाराष्ट्र पुलिस की यह कार्रवाई सोमवार (2 जून, 2025) को की गई है। नाचन के घर समेत कई ठिकानों पर जाँच की गई है। आतंक से जुड़े कुछ और लोगों पर ATS यह तलाशी ले रही है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें कुछ सूचनाएँ मिली थीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

साकिब नाचन के ऊपर पहले छापेमारी में ड्रोन मिले थे। सुरक्षा एजेंसियों को 44 ड्रोन मिले थे। यह नई छापेमारी भी ऐसे समय में सामने आई है, जब रूस के भीतर यूक्रेन ने ऐसे ही ड्रोन से हमला किया है।

कौन है साकिब नाचन ?

गौरतलब है कि जिस साकिब नाचन के ऊपर यह कार्रवाई चल रही है, उस पर NIA के छापे भी 2023 में पड़ चुके हैं। उसे इस दौरान गिरफ्तार भी किया गया था। 63 वर्षीय साकिब मूल रूप से मुंबई के ठाणे जिले के बोरीवली का रहने वाला है। नाचन 3 बच्चों का अब्बा है, जिसमें 2 बेटे और एक बेटी शामिल हैं।

साकिब प्रतिबंधित आतंकी संगठन SIMI (सिमी) का सचिव भी रह चुका है। साकिब का कनेक्शन भगोड़े आतंकी जाकिर नाइक से भी है। वह युवाओं को जिहाद के लिए उकसाता था और खलीफा का राज लाने के लिए ‘बैयत’ (कसम) दिलाता था।

उस पर आतंकवाद से जुड़े दर्जनों केस दर्ज हैं, जिसमें से 2 में उसे अदालत से भी सजा मिल चुकी है। साकिब को साल 1997 में भारत में आतंकी वारदातों की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था। तब साकिब का खालिस्तानी आतंकियों से भी कनेक्शन सामने आया था।

साकिब को मुंबई में साल 2002-03 के दौरान हुए 3 बम धमाकों में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आरोपित बनाया था। एक दर्जन लोगों की जान लेने वाले ये धमाके मुंबई सेंट्रल, विलेपार्ले और मूलुंड में हुए थे। धमाकों में 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे।

इस मामले में भी साल 2016 में साकिब को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई। पहली और दूसरी सजाएँ एक साथ चलने की वजह से साकिब 2017 में जेल से रिहा हो गया। साकिब बम बनाने में माहिर माना जाता है। वह अन्य युवाओं को न सिर्फ बम बनाने बल्कि उसका परीक्षण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर ब्लास्ट करने की भी ट्रेनिंग देता है। 

शामिल और उसका अब्बा साकिब ने अपने मुंबई बोरीवली स्थित घर को आतंकवाद की ट्रेनिंग के लिए एक सेंटर पॉइंट के तौर पर प्रयोग किया था। शामिल नाचन जुल्फिकार अली बड़ोड़ावाला, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, सिमाब नसीरुद्दीन काजी और अब्दुल कादिर पठान और कुछ अन्य संदिग्धों के साथ मिल कर ISIS मॉड्यूल खड़ा कर रहा था।

ठाणे के गाँव को बना रहा था अल शाम

नाचन ISIS का पूरा मॉड्यूल चला रहा था। NIA ने इस मामले में उसे मुख्य आरोपित बनाया था। नाचन समेत बाकी आरोपितों ने महाराष्ट्र के ठाणे के एक गाँव को ‘अल शाम’ यानी इस्लामिक शासन वाला आजाद क्षेत्र घोषित कर दिया था। ये भारत में शरिया के तहत इस्लाम का शासन स्थापित और आतंकी हमलों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

NIA ने नाचन के अलावा हसीब जुबेर मुल्ला, काशिफ अब्दुल सत्तार बालेरे, सैफ अतीक नचन, रेहान अशफाक सुस, शगफ साफीक दिवकर, फिरोज दास्तगीर कुआरी को पकड़ा था। इस मामले में अन्य कई जगह से भी आतंकी पकड़े थे।

साकिब नचान ने कुख्यात आतंकी संगठन ISIS को आतंकी संगठन घोषित करने के खिलाने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  ISIS के सरगना रहे नाचन ने इस्लामिक स्टेट और अन्य समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को रद्द करने की माँग की थी।