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ISIS-अलकायदा आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार : लादेन की देखते थे वीडियो, गेमिंग ऐप से करते थे आका से संपर्क, पाकिस्तान जाने का था प्लान

                                           आतंकरोधी अभियान के तहत पकड़े गए 12 आतंकी
देश के विभिन्न राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने ISIS-अलकायदा से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। जानकारी सामने आई है कि आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुए अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 12 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

इन 12 आतंकियों की पहचान मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (आंध्र प्रदेश), मिर्जा सोहेल बेग (आंध्र प्रदेश), मोहम्मद दानिश (आंध्र प्रदेश), शादमान दिलकुश (बिहार), अजमनुल्लाह खान (बिहार), लकी अहमद (दिल्ली), मीर आसिफ अली (पश्चिम बंगाल), जीशान (राजस्थान), अब्दुल सलाम (कर्नाटक), शाहरुख खान (महाराष्ट्र), शियाक पियाज उर रहमान (महाराष्ट्र) और सईदा बेगम (तेलंगाना) के रूप में हुई है।

                                        साभार : सोशल मीडिया 
पुलिस की छानबीन में इनके संबंध अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS से जुड़े सामने आए हैं। जाँच में ये भी पता चला है कि ये आतंकी एक गेमिंग ऐप के जरिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और इनके तार ISIS से संबंध रखने वाले Benex Com नामक एक समूह से भी जुड़े थे।

पुलिस के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया पर भड़काऊ गतिविधियों में शामिल थे। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, ISIS के झंडे का समर्थन किया और भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की बात कही। आगे इनकी योजना पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण लेने की थी और साथ ही अपने साथ अन्य युवाओं को भी जिहाद के लिए प्रेरित करने की थी।

इनमें से तीन- मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश और मोहम्मद सोहेल बेग ने तो ‘अल-मलिक इस्लामिक यूथ’ नाम से ग्रुप भी बनाया था। इसके जरिए ये युवाओं को भड़काने और जिहाद के लिए तैयर करने का काम करते थे।

वहीं अन्य लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जिहाद से जुड़े प्रचार में सक्रिय थे और ओसामा बिन लादेन के वीडियो देखकर आतंकी-कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है और सभी डिजिटल साक्ष्यों व संपर्कों की पड़ताल की जा रही है, ताकि इस आतंकी साजिश के हर पहलू का खुलासा किया जा सके।

श्रीनगर के जिस पुलिस स्टेशन में रखा गया था फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक, वहाँ बड़ा धमाके; शरीर के उड़े लोथड़े, थाने की दीवारें भरभरा के गिरीं: 9 की हुई मौत

                    श्रीनगर पुलिस स्टेशन में विस्फोटक ब्लास्ट की तस्वीरें (साभार : X_@thepagetody)
श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में जब्त किए गए विस्फोटक की जाँच के दौरान बड़ा धमाका हुआ। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और 27 घायल हुए। विस्फोट में थाने का एक हिस्सा टूट गया और बचाव कार्य देर तक बाधित रहा। धमाका उस बड़े टेरर मॉड्यूल की जाँच से जुड़ा था, जिसमें आतंकी डॉक्टरों का एक नेटवर्क सामने आया था। घटना की जाँच दो एंगल से हो रही है- हैंडलिंग में चूक या आतंकी साजिश। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

धमाका कैसे हुआ

धमाका शुक्रवार (14 नवंबर 2025) रात देर से हुआ। पुलिस और फॉरेंसिक टीम जब बरामद किए गए विस्फोटक की सैंपलिंग कर रही थी, तब अचानक ब्लास्ट हो गया। यह विस्फोट इतना तेज था कि थाने के एक हिस्से की दीवारें गिर पड़ीं। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आसपास घरों के शीशे टूट गए और लोग दहशत में आ गए।

हादसे में जानमाल का नुकसान

धमाके में कुल 9 लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी और फॉरेंसिक स्टाफ शामिल हैं। 27 लोग घायल हुए हैं। कई की हालत गंभीर है। कुछ लोग लापता बताए गए और उनकी तलाश मलबे में चल रही है। मानव अंग दूर-दूर तक बिखरे मिले, जिससे धमाके की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बचाव और राहत कार्य की स्थिति

विस्फोट के बाद पुलिस स्टेशन से आग की लपटें उठने लगीं। छोटे-छोटे लगातार धमाकों ने बचाव टीम को तुरंत अंदर जाने नहीं दिया। फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस तेजी से मौके पर पहुँचे। घायलों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अस्पतालों को तुरंत अलर्ट पर रखा गया।
डिप्टी कमिश्नर अक्षय लाबरू ने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों को सभी जरूरी सुविधाएँ तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आसपास के क्षेत्रों की तलाशी जारी है।

जाँच के दो मुख्य एंगल

जाँच एजेंसियाँ दो संभावित कारणों पर काम कर रही हैं। पहला, विस्फोटक की हैंडलिंग के दौरान तकनीकी चूक। अमोनियम नाइट्रेट बेहद संवेदनशील होता है और छोटी गलती भी भारी नुकसान पहुँचा सकती है।
दूसरा एंगल, आतंकी साजिश का है। थाने में खड़ी एक संदिग्ध कार से आईईडी फटने की आशंका जताई गई है। इससे पास में रखा विस्फोटक भी फट सकता है। कुछ आतंकी संगठनों ने धमाके की जिम्मेदारी ली है, जिससे शक और गहरा हो गया है।

टेरर मॉड्यूल की जाँच से जुड़ा मामला

नौगाम पुलिस स्टेशन एक इंटरस्टेट टेरर मॉड्यूल की जाँच कर रहा था। यह मॉड्यूल पोस्टर चिपकाने, कट्टरपंथ, और बड़े पैमाने पर विस्फोटक जमा करने से जुड़ा था। शुरुआती सुराग सीसीटीवी फुटेज से मिले थे। इससे गिरफ्तारियाँ हुईं।
पूरी जाँच डॉक्टरों के एक नेटवर्क तक पहुँची। इनके ठिकानों से 360 किलो विस्फोटक मिला था। इन्हें हरियाणा के फरीदाबाद से लाया गया था। यह वही विस्फोटक था जिसकी सैंपलिंग के दौरान ब्लास्ट हुआ। मॉड्यूल का एक सदस्य अब भी फरार है। एक अन्य के पास से AK-56 भी बरामद हुई थी। यह पूरा नेटवर्क गंभीर साजिश रच रहा था।
घटना के बाद NIA, SOG और बम स्क्वाड की टीमें तुरंत पहुंच गईं। पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि कोई दूसरी घटना न हो। अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है। जाँच टीमें मौके पर काम कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द हो; दिल्ली ब्लास्ट से जाँच के घेरे में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी, विवादित है इसका चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी

अल फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी (फोटो साभार: File/Al Falah University)
         
दिल्ली में लाल किले के सामने सोमवार(10 नवंबर 2025) को बड़ा धमाका हुआ, जिससे पूरा देश दहल गया। मिनटों में जाँच एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और उस ब्लास्ट की जाँच शुरू की जिसमें कम से कम 13 लोगों की जान गई।

जिस तरह अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम आतंकवादियों और अन्य विवादों के साथ जुड़ने की वजह से इसकी मान्यता रद्द करने की मांग भी उठ सकती है।  

जल्दी ही दिल्ली लाल किला ब्लास्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का लिंक सामने आया, क्योंकि धमाका करने वाला आतंकवादी उन तीन मेडिकल डॉक्टर्स का साथी था जो यूनिवर्सिटी से जुड़े थे और हरियाणा पुलिस व जम्मू-कश्मीर पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार हुए थे। पुलिस ने दिल्ली ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले गिरफ्तार डॉक्टर्स से जुड़े ठिकानों से 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद किए थे।

यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो (डॉ) भूपिंदर कौर ने आखिरकार बयान दिया कि यूनिवर्सिटी का पकड़े गए टेरर मॉड्यूल से कोई लिंक नहीं है, लेकिन यूनिवर्सिटी के चांसलर और फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी चुप रहे। हैरानी की बात है कि सिद्दीकी का डिजिटल फुटप्रिंट लगभग नहीं है।

ऑपइंडिया ने चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी पर उपलब्ध जानकारी खँगाली और कुछ परेशान करने वाला इतिहास मिला। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर ज्यादा जानकारी नहीं है। ‘अबाउट’ सेक्शन में लिखा है, ‘मैनेजिंग ट्रस्टी: अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट 1995 से अब तक, चांसलर: अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद 2014 से अब तक, मैनेजिंग डायरेक्टर: अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड 1996 से अब तक।’

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

ऑपइंडिया को मिल्ली गजट की जुलाई 2000 की रिपोर्ट में लिखा मिला कि जवाद अहमद सिद्दीकी नाम का शख्स अपने दो भाइयों के साथ तिहाड़ जेल में था क्योंकि अल-फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में निवेशकों को ठगा था। कंपनी की जानकारी देखी तो पता चला कि वो 1992 में रजिस्टर्ड हुई और स्टेटस ‘स्ट्राइक ऑफ’ है, यानी कंपनी बंद हो चुकी है।

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

जौबाकॉर्प पर उपलब्ध जानकारी से पता चला कि कंपनी का सिर्फ एक डायरेक्टर था, जवाद अहमद सिद्दीकी।

                                                                                                                                  सोर्स: लिंक्डइन

सिद्दीकी के पुराने डायरेक्टोरियल एसोसिएशन से अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का लिंक मिला। सिद्दीकी मार्च 2019 तक इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

                                                                                                                                 सोर्स: लिंक्डइन

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की और जानकारी देखी तो दो पुराने डायरेक्टर मिले, जवाद अहमद सिद्दीकी और सऊद अहमद सिद्दीकी।

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

ये जानकारी जरूरी थी क्योंकि जब ऑपइंडिया ने मिली गजट में बताए केस को देखा, तो दो नाम थे- जवाद और सऊद। इस केस पर बाद में आएँगे।

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन जोड़ने के लिए कंपनी का पता चेक किया। वो था ‘अल-फलाह हाउस, 274-ए, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली।’

                                                                                                                           सोर्स: लिंक्डइन

ये वही पता है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर है।

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हमने ‘jasiddiqui@rediffmail.com’ ईमेल से भी कनेक्शन जोड़ा, जो यूनिवर्सिटी प्रोफाइल वाली कई वेबसाइट्स पर ऑफिशियल ईमेल के तौर पर लिस्टेड है।

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यूनिवर्सिटी के भारत एजुकेशन पेज पर सिद्दीकी और फरदीन दोनों के ईमेल हैं।

                                                                                            सोर्स: लिंक्डइन

ये ईमेल आईडी अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के जौबाकॉर्प पेज पर भी है, वही कंपनी जो फ्रॉड में शामिल थी।

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साफ है कि जो शख्स गिरफ्तार हुआ और लंबे समय तिहाड़ जेल में रहा, वही जवाद अहमद सिद्दीकी है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी चला रहा है।

कंपनी के मौजूदा डायरेक्टर हैं सुफयान अहमद सिद्दीकी और फरदीन बेग। सुफयान अहमद सिद्दीकी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, फरदीन बेग अल-फलाह यूनिवर्सिटी में टीचर हैं और एंटी-रैगिंग कमिटी के मेंबर भी।

                                                                                                                             सोर्स: लिंक्डइन

हमारी रिसर्च में पता चला कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी 2 मई 2014 को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी (अमेंडमेंट) एक्ट, 2014 से स्थापित की गई, जो हरियाणा विधानसभा ने पास किया। यूजीसी से 5 जनवरी 2015 को सेक्शन 2(एफ) और 12(बी) के तहत मान्यता मिली। एक्सपर्ट कमिटी बनी और इंस्पेक्शन विजिट 29-30 मई 2015 को हुई। बाद में कमियों को पूरा करने पर यूजीसी ने मान लिया।

जवाद अहमद सिद्दीकी 2 साल से ज्यादा जेल में रहा

अब उस केस पर आते हैं, जिसके लिए उसे तिहाड़ भेजा गया था। ऑपइंडिया को दिल्ली हाई कोर्ट का 27 मार्च 2003 का जजमेंट मिला, जो जस्टिस आरसी चोपड़ा ने सुनाया था। कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, 2000 में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुई थी आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 468, 471 और 120(बी) के तहत। केस इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, क्राइम ब्रांच, नई दिल्ली को भेजा गया।

केस डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, जवाद सिद्दीकी अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर थे, और सऊद सिद्दीकी (अल-फलाह एजुकेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर में से एक) उसका डायरेक्टर था। पिटिशनर्स और उनके साथी आरोपियों ने ढेर सारे निवेशकों को अपनी कंपनीज में डिपॉजिट करवाया। कोर्ट ने नोट किया कि उन्होंने 7.5 करोड़ रुपये की रकम गबन की। शिकायत केआर सिंह ने की थी, जिन्हें 95 लाख रुपए का चूना लगाया गया था।

जजमेंट में लिखा था, “आरोप है कि पिटिशनर्स ने ढेर सारे लोगों को अपनी ग्रुप कंपनीज में डिपॉजिट करवाया लेकिन बाद में उनके सिग्नेचर फर्जी करके और डॉक्यूमेंट्स बनाकर उन डिपॉजिट्स को अपनी कंपनीज के शेयर्स में बदल दिया।”

जाँच और एफएसएल रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि निवेशकों के सिग्नेचर फर्जी थे। डिपॉजिट कुछ ऐसी कंपनीज के नाम पर लिए गए जो कभी थीं ही नहीं। फिर पैसा आरोपितों के पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर हो गया। जब कोर्ट ने ये जजमेंट पास किया, तब तक जवाद 37 महीने और सऊद 38 महीने जेल में थे।

ट्रिब्यून की जून 2004 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1995 में अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज ने अल-फलाह सहकारी आवास समिति बनाई। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 1996 में समिति को 10,000 स्क्वायर मीटर अलॉट किए, जहाँ मेंबर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए 100 फ्लैट्स बनाने थे। लेकिन कुछ फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से कंस्ट्रक्शन नहीं हुआ और जवाद वगैरह गिरफ्तार हो गए।

जवाद जेल में थे, तब उनके कुछ साथियों ने उन्हें ठगा और उनके सिग्नेचर फर्जी करके 13 करोड़ में कुछ फ्लैट्स बेच दिए। ट्रिब्यून रिपोर्ट में उनकी गिरफ्तारी की खबर छपी थी, जिसमें आरोपित थे एसपी यादव, मंजूर हसन जैदी और संजीव श्रीवास्तव।

जवाद अहमद सिद्दीकी को लेकर ये खुलासे अल-फलाह यूनिवर्सिटी चलाने वालों की विश्वसनीयता और बैकग्राउंड पर गंभीर सवाल उठाते हैं। फ्रॉड और फॉर्जरी के पुराने आरोपों से लेकर टेरर मॉड्यूल से जुड़ा विवाद तक, पैटर्न ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खुद को चल रही जाँच से अलग कर लिया है, लेकिन अल-फलाह की लीडरशिप को संदिग्ध फाइनेंशियल और क्रिमिनल गतिविधियों से जोड़ने वाले सबूत बताते हैं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके मैनेजमेंट की तेजी से गहरी जाँच जरूरी है।

                                                                                                   (साभार :सभी ग्राफ चित्र OpIndia) 

असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ्तार: 8 मौलवी हिरासत में :

 मुफ्ती मुस्तफा को किया गिरफ्तार (फोटो साभार: @azad_nishant)

असम पुलिस ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य की पुलिस ने मोरीगाँव में सक्रिय एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। ताजा जानकारी के मुताबिक यहाँ के एक मदरसे में जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।

यह आतंकी मॉड्यूल एक मदरसे से संचालित हो रहा था और कथित तौर पर राज्य में बड़े हमले की योजना बना रहा था। असम पुलिस को इसके बारे में खुफिया एजेंसी से जानकारी मिली। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध जिहादी को गिरफ्तार किया। इसकी पहचान मुफ्ती मुस्तफा के रूप में हुई है।  

मोरीगाँव पुलिस ने 27 जुलाई 2022 रात मोइराबारी में मदरसा और अन्य आवासों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गिरफ्तार किया। मदरसे को भी पुलिस ने सील कर दिया है।

मुफ्ती मुस्तफा को ही आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह मोइराबारी में 2018 से जामी-उल-हुदा मदरसा चलाता है। पुलिस ने मुफ्ती मुस्तफा के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और अन्य सामग्री के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए। इसके साथ ही पुलिस ने पूछताछ के मदरसे के 8 मौलवियों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि उसे बांग्लादेश से अंसरुल्ला फंडिंग कर रहा था। इसके अलावा भी मदरसे को कई अन्य देशों से फंडिंग हो रही थी।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्तफा को किस वजह से गिरफ्तार किया गया है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय लोगों में से एक ने कहा, “मोरीगाँव पुलिस, सेना और अन्य अधिकारियों ने कल रात मुस्तफा के आवास और मदरसा में कम से कम दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। मुस्तफा को पुलिस ने पकड़ लिया। हमें नहीं पता कि उसे क्यों गिरफ्तार किया गया।”

फिलहाल पुलिस घटना के संबंध में आगे की जाँच कर रही है। इस बीच, इस मामले पर बोलते हुए, असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा, “आतंकवादी संगठन धीरे-धीरे असम को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे बांग्लादेश के रास्ते राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। वे राज्य के मुस्लिम युवाओं को ‘हदीस’ की शिक्षा देकर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”

पिछले दिनों मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को दाखिला दिलवाना ही मानवाधिकार का उल्लंघन है। सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा था कि ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। 

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि लगभग सात सौ मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को नर्सिंग स्कूल और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदलने का इरादा है। वो चाहते हैं कि मेरे मुसलमान भाई मदरसों में ना जाए और उसकी जगह लोग डॉक्टर-इंजीनियर बनें, समाज को रोशन करें।