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कर्नाटक : 3 करोड़ रूपए का चुराया सोना चुराने वाले फारूक अहमद गैंग को 30 रूपए का पावभाजी खाना पड़ा महँगा

           कर्नाटक के कलबुर्गी में जब्त किए गए सोने और नकदी की जाँच करते पुलिसकर्मी (फोटो साभार: द हिंदू)
कर्नाटक के कलबुर्गी में पुलिस ने 3 करोड़ रुपए के सोने की लूट का पर्दाफाश कर दिया है। मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस 30 रुपए की पावभाजी के ऑनलाइन पेमेंट से मामले की तह तक पहुँची।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बताया कि 11 जुलाई 2025 को चार नकाबपोश चोरों ने मारथुला मलिक की सोने की दुकान में चोरी की थी। चोरों ने उनके हाथ-पैर बाँध दिए थे और फिर लॉकर खोलकर 3 किलो सोने के गहने और नकदी लेकर फरार हो गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस लूट के मास्टरमाइंड फारुक ने डिजिटल वॉलेट के जरिए पावभाजी का पेमेंट किया था। इससे ही आरोपितों को गिरफ्तार करने में मदद मिली। पुलिस ने आरोपितों की खोज के लिए पाँच टीमें बनाई थी। सीसीटीवी की सहायता से पुलिस उस जगह पहुँची, जहाँ चोरी करने से पहले वे मिले थे।

चोरी करने से पहले फारूक ने 30 रुपये की पाव भाजी खरीदी थी। यहाँ उसने फोन पे से भुगतान किया था। वह दूर से ही साथियों की चोरी पर नजर रख रहा था। चोरी के बाद सभी फारूक के साथ भाग गए। सीसीटीवी मिलने के बाद पुलिस ने पावभाजी वाले के पास जाकर पेमेंट चेक की। जहाँ उन्हें फारुक का नंबर मिल गया।

हालाँकि सभी ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। इसके बाद पुलिस की टीम आरोपितों के गाँव पहुँची। पुलिस ने बताया कि आरोपित सोने के गहनों को पिघलाकर बेचने की कोशिश कर रहे थे। वे कुछ सोना बेच कर गाँव पहुँचे थे, इसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस कमिश्नर एस डी शरणप्पा ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने आरोपितों के पास से 2.865 किलो सोना और 4.80 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। आरोपितों की पहचान फारूक अहमद मलिक, अयोध्या प्रसाद चौहान और सोहेल शेख उर्फ बादशाह के रूप में हुई है। वहीं दो अन्य आरोपित अरबाज और साजिद की तलाश की जा रही है।

मुख्य आरोपित फारूक पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के दादपुर का रहने वाला है। पिछले कुछ सालों से कलबुर्गी में रहकर वह सुनार का काम कर रहा था। कर्नाटक आने से पहले वह दुबई में एक ज्वेलरी के शोरूम में काम करता था।

मंदिरों को लूट कर जिहाद की फंडिंग की साजिश का पर्दाफाश: केरल में पनप रहा था ISIS मॉड्यूल

                                                                                                                               प्रतीकात्मक चित्र
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में नए ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान नबील अहमद के रूप में हुई है। वो टेलीग्राम के माध्यम से केरल में आईएस के लिए भर्तियाँ कर रहा था, इसके लिए उसने ‘पेट लवर्स’ नाम का ग्रुप बनाया था। एनआईए ने जिस नबील अहमद को गिरफ्तार किया है, वो त्रिशूर जिले का रहने वाला है।

एनआईए की जाँच में पता चला है कि नबील ने केरल में आईएस का नया समूह बनाया था और वो युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। उसके निशाने पर ईसाई मजहब का एक पादरी भी था। यही नहीं, उसने त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों में मंदिरों को लूटने की योजना बनाई थी, ताकि वो अपने मकसद के लिए फंडिंग कर सके।

कतर में बैठे आईएस आतंकियों के संपर्क में था नबील

एनआईए ने बताया है कि नबील कतर में आईएस आतंकियों से कॉन्टैक्ट में था। उन्हीं आतंकियों की मदद से उसने केरल में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में पूरी ताकत झोंक रखी थी। एनआईए ने कहा है कि वो इस मामले में और भी गिरफ्तारियाँ करने वाली है।

त्रिशूर का अशरफ भी हो चुका है गिरफ्तार

इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए पैसे के लिए डकैती करने के मामले में एनआईए ने पहले त्रिशूर के मूल निवासी अशरफ को गिरफ्तार किया था। उनके समूह को हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा केरल में डकैती और सोने की तस्करी में लिप्त पाया गया था। पलक्कड़ से 30 लाख रुपए लूटने के बाद अशरफ और उसका गैंग सत्यमंगलम जंगल में एक घर में छिप गया था। संदिग्ध को कोच्चि एनआईए टीम ने जंगल के अंदर से पकड़ लिया।

असम : टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 2 मदरसे सील: आतंकी संगठन अल कायदा ने ‘गो टू असम’ का दिया नारा

चित्र साभार- ANI
'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या' इस्लामिक स्कॉलर्स जब भी टीवी पर मदरसों में हो रही तालीम पर बात होने पर कहते हैं कि कोई एक मदरसा दिखाओं, लेकिन असम पुलिस उन्हें दिखा ही नहीं, मदरसे भी सील कर रही है। और अब तक सैंकड़ों मदरसे बंद किए जा चुके हैं। जुलाई 28 को एक चैनल पर चर्चा के दौरान एडवोकेट अश्विनी कुमार ने बताया कि भारत में 3 लाख से अधिक मदरसे हैं, इतने किसी भी मुस्लिम देश में नहीं। पता नहीं मीडिया भी अपनी TRP के चक्कर में इन समाचारों को बॉयकॉट कर रहा है और यदि स्थिति विपरीत होती देखो हर चैनल बढ़चढ़ कर उस समाचार को दिखाता।  
असम पुलिस (Assam Police) ने आतंकी गठजोड़ का खुलासा करते हुए अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के 12 सदस्यों को अब तक गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियाँ मोरगाँव, गुवाहाटी, बारपेटा और गोलपारा जिलों से की गई हैं। वहीं, एक को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।

एक दिन पहले असम पुलिस ने मोरीगाँव जिले के मोरियाबारी के एक मदरसा के टीचर मुफ्ती मुस्तफा को गिरफ्तार था। नेटवर्क से जुड़े बाकी फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

बारपेटा से गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम 25 वर्षीय जुबेर खान, 27 वर्षीय रफीकुल इस्लाम, 20 वर्षीय दीवान हमीदुल इस्लाम, 42 वर्षीय मोइनुल हक, 37 वर्षीय कज़ीबुर हुसैन, 50 वर्षीय मुजीबुर रहमान, 34 साल के शाहजहाँ अली और शहनूर आलम हैं। जुबेर खान को छोड़ कर बाकी सभी स्थानीय बरपेटा थानाक्षेत्र के ही रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक इन आरोपितों पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-कायदा के वर्तमान मुखिया अल जवाहिरी ने ‘गो टू असम’ का एलान किया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ और अधिक सतर्क हो गई हैं। मोरीगाँव में जमीउल हुडा मदरसा चलाने वाले मुफ़्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद 39 साल के अफसरूद्दीन भुयान को भी मोरीगाँव में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक अन्य गिरफ्तारी अब्बास अली की हुई है। इन सभी पर एक फरार आतंकी महबूब उर रहमान को शरण देने का आरोप है।

अवलोकन करें:-

असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

मोरीगाँव की SP अपर्णा के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों से उनके बाकी नेटवर्क और फंडिंग आदि के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक पुलिस द्वारा 2 मदरसों को सील किया जा चुका है। उसमें पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल में शिफ्ट किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं।

असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ्तार: 8 मौलवी हिरासत में :

 मुफ्ती मुस्तफा को किया गिरफ्तार (फोटो साभार: @azad_nishant)

असम पुलिस ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य की पुलिस ने मोरीगाँव में सक्रिय एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। ताजा जानकारी के मुताबिक यहाँ के एक मदरसे में जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।

यह आतंकी मॉड्यूल एक मदरसे से संचालित हो रहा था और कथित तौर पर राज्य में बड़े हमले की योजना बना रहा था। असम पुलिस को इसके बारे में खुफिया एजेंसी से जानकारी मिली। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध जिहादी को गिरफ्तार किया। इसकी पहचान मुफ्ती मुस्तफा के रूप में हुई है।  

मोरीगाँव पुलिस ने 27 जुलाई 2022 रात मोइराबारी में मदरसा और अन्य आवासों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गिरफ्तार किया। मदरसे को भी पुलिस ने सील कर दिया है।

मुफ्ती मुस्तफा को ही आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह मोइराबारी में 2018 से जामी-उल-हुदा मदरसा चलाता है। पुलिस ने मुफ्ती मुस्तफा के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और अन्य सामग्री के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए। इसके साथ ही पुलिस ने पूछताछ के मदरसे के 8 मौलवियों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि उसे बांग्लादेश से अंसरुल्ला फंडिंग कर रहा था। इसके अलावा भी मदरसे को कई अन्य देशों से फंडिंग हो रही थी।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्तफा को किस वजह से गिरफ्तार किया गया है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय लोगों में से एक ने कहा, “मोरीगाँव पुलिस, सेना और अन्य अधिकारियों ने कल रात मुस्तफा के आवास और मदरसा में कम से कम दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। मुस्तफा को पुलिस ने पकड़ लिया। हमें नहीं पता कि उसे क्यों गिरफ्तार किया गया।”

फिलहाल पुलिस घटना के संबंध में आगे की जाँच कर रही है। इस बीच, इस मामले पर बोलते हुए, असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा, “आतंकवादी संगठन धीरे-धीरे असम को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे बांग्लादेश के रास्ते राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। वे राज्य के मुस्लिम युवाओं को ‘हदीस’ की शिक्षा देकर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”

पिछले दिनों मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को दाखिला दिलवाना ही मानवाधिकार का उल्लंघन है। सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा था कि ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। 

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि लगभग सात सौ मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को नर्सिंग स्कूल और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदलने का इरादा है। वो चाहते हैं कि मेरे मुसलमान भाई मदरसों में ना जाए और उसकी जगह लोग डॉक्टर-इंजीनियर बनें, समाज को रोशन करें।