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उत्तर प्रदेश : मुजफ्फरनगर के 1 दर्जन मदरसों को शिक्षा विभाग का नोटिस : ‘फ़ौरन लगाओ ताला, वरना रोज भरो 10000 रूपए का जुर्माना’

                                                                                                         प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस भेजी जा रही है। इन नोटिसों में अवैध मदरसों को फ़ौरन बंद करने की हिदायत दी गई है। नोटिस में आदेश का पालन न करने वाले मदरसा संचालकों पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। अनुमान के मुताबिक, जिले में अवैध मदरसों की तादाद लगभग 100 है। शुरुआती चरण में अब तक 12 मदरसों को चिह्नित कर के नोटिस भेजी गई है। ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ ने इस आदेश की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी फंडिंग से चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर जिले में भी बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का डाटा जिले के अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिले में अब तक लगभग 100 ऐसे मदरसे ऐसे चिह्नित हुए है जिनके कागजात सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें से प्रशासन द्वारा 12 मदरसा संचालकों को नोटिस भेज कर कहा गया है कि अगर उन्होंने मदरसा फ़ौरन बंद नहीं किया तो उन पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को मुजफ्फरनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुर्माने वाली नोटिस ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी किए गए हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जिले में गैर-पंजीकृत पाए गए 100 मदरसों के बारे में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, ‘उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेशन बोर्ड’ इस नोटिस का विरोध कर रहा है। मदरसा बोर्ड साल 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार के उस प्रावधान का जिक्र कर रहा है जिसमें मदरसों को स्कूलों की बनाई नियमावली से अलग कर दिया गया था। बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक मदरसा मामलों में शिक्षा विभाग समेत किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मदरसों को आम स्कूल न समझने की बात कहते उन्हें अल्पसंख्यक विभाग के अधीनस्थ बताया।

मदरसों को मिली नोटिस के मामले में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपने विरोध के सुर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। जमीयत के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली। इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आदेश को संविधान द्वारा मिली धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों को नोटिस मिली है उनमे मज़हबी शिक्षा फ्री में दी जाती है और वहाँ क्लास नहीं चलते। मदरसा बोर्ड की तरह जमीयत भी इन मदरसों को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है।

घर में मदरसा, मौलवी कारी मोहम्मद ने नशीला पदार्थ खिला छात्रा से किया रेप

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मदरसे का मौलवी रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पीड़िता उसकी नाबालिग छात्रा है। कारी मोहम्मद अहमद पर नशीला पदार्थ खिलाकर छात्रा से रेप और अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है। इसके बाद वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा। मुँह खोलने पर जादू-टोने से उसके परिवार को खत्म करने की धमकी दी। 26 जून 2023 को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की। अगले दिन आरोपित मौलवी गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र का है। मौलवी कारी मोहम्मद अहमद अपने घर में लंबे समय से मदरसा चला रहा है। आसपास के बच्चे यहाँ दीनी तालीम लेने आते है। नाबालिग पीड़िता भी उसके मदरसे में आती थी। कथित तौर पर मौलवी की अश्लीलता और छेड़छाड़ से परेशान होकर उसने 2018 में ही मदरसा जाना बंद कर दिया। लेकिन मौलवी किसी न किसी बहाने से उसे बुलाकर अश्लील हरकतें करता रहता था।

पीड़िता ने शिकायत में बताया है कि 22 जनवरी 2022 को मौलवी ने अपनी बीवी के बीमार होने का बहाना बनाकर उसे अपने घर खाना बनाने के लिए बुलाया। इस दौरान उसने लड़की को नशीला पदार्थ खिला दिया जिससे वो बेसुध हो गई। नशे की हालत में मोहम्मद अहमद ने उससे रेप किया और इसका वीडियो बना लिया। इस वीडियो के बहाने मौलवी अक्सर पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा। 17 मई 2023 को एक बार फिर मौलवी ने लड़की को घर बुला कर रेप किया। आखिरकार प्रताड़ना से आजिज आ कर लड़की ने सारी बात अपने घर वालों को बता दी।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि मौलवी खुद को जादू-टोने का एक्सपर्ट बताता था। जब भी वह मौलवी की करतूतों का विरोध करती थी तब उसे और उसके परिवार को झाड़-फूँक से खत्म करने की धमकी देता था। शिकायत में पीड़ित परिवार ने खुद को मौलवी से डरा होने की बात कही है। पुलिस ने 27 जून (मंगलवार) को मौलवी कारी मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित पर IPC की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मौलवी को जेल भेज दिया गया है।

दूसरे राज्यों के 63 बच्चों को ट्रक में लादकर भेजा जा रहा था महाराष्ट्र के मदरसे; ड्राइवर फरार

नाबालिग मुस्लिम बच्चे
महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को कोल्हापुर शहर में 63 नाबालिग मुस्लिम लड़कों को ले जा रहे एक ट्रक को रोक कर पकड़ लिया। इन मुस्लिम लड़कों की उम्र 7 से 13 साल के बीच है। ये सारे बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं। इन्हें बिहार से ट्रेन के जरिए शहर में लाया गया था।

जानकारी के अनुसार, इन लड़कों को तालीम के लिए कोल्हापुर जिले के अजरा स्थित एक मदरसे में भेजा जा रहा था। यह घटना तब सामने आई, जब एक हिंदू संगठन के सदस्य विजयेंद्र माने ने शहर के रुईकर कॉलोनी में ट्रक को देखकर संदेह जताया। ट्रक चालक से पूछने पर वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद माने का शक और गहरा गया।

विजयेंद्र माने ने पुलिस और हिंदू संगठनों के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाया। हिंदू संगठन के लोगों ने इस मामले में पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने बच्चों को हिरासत में लिया और कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उन्हें सौंपे गए ट्रेन टिकटों की जाँच की। पूछताछ के दौरान नाबालिग लड़कों ने खुलासा किया कि उनमें से कुछ बिहार से, कुछ उत्तर प्रदेश से और कुछ पश्चिम बंगाल से हैं।

हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कई प्रासंगिक सवाल पूछे- ये बच्चे कौन हैं, कोल्हापुर क्यों आए थे, क्या उन्हें मजबूर किया गया था, ट्रक में क्यों ले जाया जा रहा था आदि। संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

ट्रक को रोकने में पुलिस की मदद करने वाले हिंदू संगठन के सदस्यों में विजयेंद्र माने, विजय खाड़े, विवेक वोरा, नितिन मिसाल, अनिकेत पाटिल, अनिकेत मोदकी, सुनील पाटिल, प्रसाद पटोले, अमेय भालकर, बजरंग दल के बांदा सालुंखे, प्रशांत कागले, अनिल चौगुले, सुजीत पाटिल और अवधूत भाटे प्रमुख हैं। बीजेपी से जुड़े विजयेंद्र माने ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्रों के पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं थे।

विजयेंद्र माने ने कहा, “मैंने ट्रक को आज सुबह रुइकर कॉलोनी में देखा, क्योंकि यह महाराजा होटल नाम के एक होटल के सामने खड़ा था। मैंने बच्चों से पूछा कि वे कौन हैं, वे यहाँ क्यों आए हैं। लेकिन उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। बाद में पता चला कि उन्हें कोल्हापुर के अजरा के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं है।”

कोल्हापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी मंगेश चव्हाण ने पुष्टि की है कि छात्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में जाँच की। हमें पता चला कि ये छात्र लंबे समय से अज़रा मदरसा में पढ़ रहे हैं। उन्हें छुट्टियों में उनके घर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भेजा गया था। अब उन्हें वापस लाया गया है।”

हालाँकि, पुलिस ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जाँच की जाएगी और छात्रों को राज्य बाल कल्याण संघ द्वारा गठित समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। कुछ मीडिया संगठनों का दावा है कि कुल 69 नाबालिग मुस्लिम लड़के थे, जबकि अन्य ने कहा है कि 63 नाबालिग मुस्लिम छात्रों को हिरासत में लिया गया है।


उत्तर प्रदेश : मदरसा रेप कांड : प्रयागराज का वो केस जब रात भर हुआ रेप; अतीक और अशरफ आरोपित थे

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को 3 शूटरों ने माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी थी। मारे जाने के बाद इन्हें पीड़ित मुस्लिम बताकर कुछ लोग इनके जघन्य अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ज्यातादार चर्चित मामलों के पीड़ित भी मुस्लिम ही हैं। ऐसा ही एक मामला 2007 का है, जिसे मदरसा रेप कांड के नाम से जाना जाता है। 17 जनवरी को हुई गैंगरेप की इस वारदात ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। तब राज्य में मुलायम सिंह के नेतृत्व में सपा की सरकार थी।

इस घटना में बंदूकधारियों ने दो नाबालिग लड़कियों को मदरसे से उठाया था। उनके साथ रातभर रेप किया गया। अगली सुबह गैंगरेप पीड़िताओं को लहूलुहान मदरसे के गेट पर फेंक दिया गया। अतीक अहमद के भाई अशरफ पर भी रेप के आरोप लगे थे। उस वक्त अतीक खुद सांसद और अशरफ विधायक हुआ करता था।

क्या था मदरसा रेप कांड

यह मामला 17 जनवरी 2007 का था। प्रयागराज में अतीक अहमद के प्रभुत्व वाले इलाके करेली में एक मदरसा चला करता था। इस मदरसे का संचालक वाराणसी संकटमोचन मंदिर ब्लास्ट में फाँसी की सजा पाए आतंकी वलीउल्लाह का भाई था। देर रात इस मदरसे के दरवाजे पर दस्तक हुई और दबंगई से गेट खोलने के लिए कहा गया। अंदर 3 बंदूकधारी घुसे और सीधे वहाँ पहुँचे जहाँ लड़कियाँ सोती थीं। लड़कियों के नकाब हटवाए। यहाँ से 2 लड़कियाँ चुनी गईं और उन्हें उठाकर जंगल ले जाया गया।
आरोप है कि जंगल में 5 लोगों ने दोनों लड़कियों से रेप किया। सुबह लड़कियों को लहूलुहान हालत में मदरसे के गेट पर फ़ेंक दिया गया। तब पुलिस ने प्रयागराज में ही रिक्शा चलाने वाले और दर्जी का काम करने वाले इखलाख अहमद और नौशाद अहमद सहित कुल 5 लोगों की गिरफ्तारी दिखा दी थी। जमानत पाने के बाद पाँचों ने पुलिस पर खुद को बेवजह फँसाने का आरोप लगाया था। इस घटना में अशरफ और उसके साथियों के शामिल होने की बात कही जाती रही।
मुलायम सरकार में यह घटना हुई थी। उसके बाद मायावती की सरकार आई। मामले की सीबीसीआईडी जाँच भी हुई। लेकिन नतीजा सिफर रहा। अपने पहले कार्यकाल में दिसंबर 2021 में योगी सरकार ने इस मामले की फिर से जाँच करवाने के आदेश दिए थे। इस घटना से उठी नाराजगी के बाद अतीक और उसका परिवार दुबारा कभी चुनाव नहीं जीत पाया। स्थानीय मुस्लिमों में भी एक बड़ा धड़ा अतीक अहमद के खिलाफ हो गया था।
एक मीडिया रिपोर्ट में रिटायर्ड इंस्पेक्टर नारायण सिंह परिहार के हवाले से भी इस कांड के बारे में बताया गया है। उन्होंने बताया है कि 2007 में अतीक के भाई अशरफ ने मदरसे से लड़कियों को उठवाया और फिर उनके साथ घिनौनी हरकत की। मामला कोर्ट में गया। गवाही भी हुई। लेकिन बाद में गवाह पलट गए। रिटायर्ड इंस्पेक्टर के अनुसार अतीक अहमद और उसके गुर्गे पीड़िताओं के परिजनों को धमकी देते थे। इसके कारण बाद में गवाह पलट गए और केस नहीं बन पाया। उन्होंने यह भी बताया कि जाँच के दौरान उनको भी धमकियाँ दी गई थी।

 

असम में 600 मदरसे बंद, सारे बंद करने का इरादा: कर्नाटक में असम मुख्यमंत्री सरमा, कहा- कांग्रेस आज की मुगल

असम में करीब 600 मदरसे बंद किए गए हैं। राज्य सरकार का इरादा सभी मदरसों को बंद करने का है। यह बात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कही है। वे कर्नाटक के बेलगावी में बीजेपी की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय संस्कृति के लिए खतरा बताते हुए कांग्रेस को आज के दौर का मुगल करार दिया।

सरमा ने कहा कि कांग्रेस आज के समय की मुगल है। वह देश को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। सभा को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने नए भारत की बात करते हुए कहा कि एक समय दिल्ली के बादशाह मंदिर तोड़ने की बात किया करते थे। आज नरेंद्र मोदी के दौर में हम मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए भारत की अर्थव्यवस्था आज ब्रिटेन से मजबूत है। नए भारत में कोविड से मुकाबले के लिए अपनी वैक्सीन का निर्माण किया जाता है। नए भारत में पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया जाता है। कांग्रेस इसी नए भारत को कमजोर करने की साजिश कर रही है। पहले भारत को कमजोर करने का काम मुगल किया करते थे।

हिमंता ने पूछा कि क्या वे लोग मुगल के बच्चे हैं जो बाबरी के लिए तो बोलते हैं, लेकिन राम मंदिर की बात नहीं करते। उन्होंने लोगों से छत्रपति शिवाजी और स्वामी विवेकानंद का भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देने की अपील की। असम मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में बहुत सारे लोग हैं जो गर्व से कहते हैं कि मैं मुस्लिम। मैं ईसाई हूँ। इससे मुझे आपत्ति नहीं है। लेकिन हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो गर्व से कह सके कि मैं हिंदू हूँ।

असम के मुख्यमंत्री ने राज्य में 600 मदरसों को बंद करने की जानकारी देते हुए कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। वे सभी मदरसों को बंद करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि मदरसों की जगह स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुले। सीएम सरमा ने बांग्लादेश से होने वाले घुसपैठ को खतरनाक करार दिया। कहा कि बांग्लादेश से असम में घुसपैठ करने वाले संस्कृति के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

मदरसा प्रिंसिपल निजामुद्दीन की मसाज : लुँगी घुटनों के ऊपर, जांघ तक तेल की मालिश

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में महिला से मसाज करवाते मदरसे के प्रिंसिपल का वीडियो वायरल (चित्र - वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में एक व्यक्ति का किसी महिला से मसाज करवाने का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो लगभग 1 मिनट 41 सेकेण्ड का है। इस वीडियो में एक मौलानानुमा व्यक्ति चारपाई पर लेटा हुआ है जिसका मसाज सलवार सूट पहने एक महिला कर रही है। दावा किया जा रहा है कि मसाज करवाने का शख्स एक मदरसे का प्रिंसिपल है जिसका नाम निजामुद्दीन है, जबकि मसाज करने वाली महिला उसी मदरसे में बच्चे के लिए खाना आदि बनाने वाली रसोइयाँ है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

हालाँकि यह वीडियो कब का है इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। मीडिया रिपोर्ट्स ही यह दावा कर कर रही हैं कि वायरल हो रहा वीडियो एक मदरसे का है। सिद्धार्थनगर जिले के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने वीडियो में दिख रहे प्रिंसिपल को नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण माँगा है। उनका कहना है कि जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वीडियो मालिश हो रहे कमरे में मौजूद किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा बनाई गई है। दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि जिस मदरसे की यह वीडियो है वह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। यहाँ पर दीनी तालीम के अलावा छात्रों को आईटीआई व सिलाई और कढ़ाई की भी ट्रेनिंग दी जाती है। सिद्धार्थनगर पुलिस ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया है। पुलिस ने SHO बांसी को जाँच और जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में जानने के लिए जब SHO बांसी को सम्पर्क किया तब उनका फोन बंद आया। इसी मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का भी फोन स्विच ऑफ़ बताया। उपरोक्त अधिकारियों के वर्जन आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा। फिलहाल, बांसी सिद्धार्थनगर के हिन्दू पदाधिकारी हरिशंकर चौरसिया ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग हिन्दू संतों में दिन भर कमी निकालते हैं। उन्होंने कहा कि वो पुलिस से आरोपित प्रिंसिपल पर कड़ी कार्रवाई की आशा करते हैं।

छत्तीसगढ़ : अरबी की ट्यूशन के लिए जाने वाली 9 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण करते मौलवी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

            नाबालिग बच्ची से अश्लीलता के आरोप में मदरसे का मौलवी गिरफ्तार (चित्र साभार- The CG Khabar)
छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक नाबालिग बच्चे के साथ अश्लीलता का मामला सामने आया है। आरोप मदरसे में अरबी पढ़ाने वाले एक मौलवी पर लगा है जिसका नाम मोहम्मद मेराज है। आरोप है कि मोहम्मद मेराज पिछले काफी समय से 9 साल की पीड़िता को गंदे तरीके से छू रहा था और गंदी-गंदी बातें किया करता था। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में केस दर्ज करते हुए मौलवी मेराज को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (18 फरवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सुपेला थानाक्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि क्लास 4 में पढ़ने वाली पीड़िता बच्ची मौलवी के पास अरबी भाषा का ट्यूशन पढ़ने जाया करती थी। यहाँ पढ़ाने वाला मौलवी मेराज काफी समय से पीड़िता से बैड टच कर रहा था। मौलवी की इस हरकत से बच्ची न सिर्फ गुमसुम बल्कि डरी-सहमी भी रहने लगी थी। आख़िरकार एक दिन उसने मौलवी की करतूत अपने घर वालों से बता दी। मामले की जानकारी होते ही बच्ची के अब्बा उसे ले कर थाने पहुँचे और मोहम्मद मेराज के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि मौलवी मोहम्मद मेराज नाबालिग पीड़िता से गंदी-गंदी बातें भी किया करता था। सुपेला थाना पुलिस ने पीड़िता के अब्बा की शिकायत पर मेराज के खिलाफ IPC की धारा 354 और 509 के साथ 12 पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया। पुलिस अधीक्षक दुर्ग के मुताबिक, आरोपित मौलवी मेराज को गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है रही है। पुलिस आरोपों के समर्थन में सबूत भी जुटा रही है। पुलिस ने परिजनों से भी ऐसे मामलों में थोड़ा अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।

इसी माह फरवरी में देहरादून की एक अदालत ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपित मदरसे मौलाना को 20 साल की कैद की सजा सुनाई थी। फरवरी महीने में ही सहारनपुर के ही एक मदरसे में पढ़ने वाले एक छात्र ने दूसरे छात्र से रेप के प्रयास में विफल रहने पर उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी थी। एक अन्य घटनाक्रम में जनवरी 2023 में गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में एक मदरसे के हाफिज पर 12 साल के नाबालिग छात्र से अप्राकृतिक कुकर्म का आरोप लगा था।

जनवरी 2023 में ही बिहार के नवादा जिले के एक मदरसे में पढ़ने गई नाबालिग लड़की को मौलवी शहादत हुसैन अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था।

बिहार : 2459 मदरसों की जाँच का हाई कोर्ट का आदेश, 609 मदरसों को सरकारी पैसे देने पर भी रोक: जाली दस्तावेजों से मान्यता लेने का मामला

उत्तर प्रदेश और असम के बाद अब बिहार में भी मदरसों की जाँच की जाएगी। यानि गैर-भाजपा शासित राज्यों ने भी मदरसों पर प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया है। हालाँकि, ये जाँच पटना हाईकोर्ट के आदेश पर की जाएगी। कोर्ट ने राज्य के 2459 मदरसों की मान्यता की जाँच करने के लिए कहा है। इसके साथ ही जाँच पूरी होने तक 609 मदरसों की अनुदान राशि को रोकने का आदेश दिया है। इनमें से ज्यादातर मदरसे फर्जी कागजात पर अनुदान ले रहे थे।

फर्जी कागजात के आधार पर मदरसों द्वारा अनुदान लेने को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को जाँचका आदेश दिया है। कोर्ट ने उन्हें सभी जिलाधिकारियों से बैठक करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने जाँच पूरी होने तक 609 मदरसों को दी जाने वाली अनुदान राशि पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही जाली कागजात के आधार पर मान्यता लेने वाले मदरसों के खिलाफ FIR के बाद हुई कार्रवाई को लेकर DGP से जानकारी माँगी है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी 2023 को करेगा।

मदरसों के फर्जीवाड़े की शिकायत सीतामढ़ी के रहने वाले मोहम्मद अलाउद्दीन बिस्मिल ने जनहित याचिका दायर कर की थी। याचिकाकर्ता के वकील राशिद इजहार ने कोर्ट को बताया कि माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक मोहम्मद तस्नीमुर रहमान ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीतामढ़ी जिले के 88 मदरसों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अनुदान लिया है।

उधर कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के अन्य जिलों के 609 मदरसों ने सरकारी अनुदान प्राप्त किया है। उन सभी की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है। 

उत्तर प्रदेश : सर्वे शुरू होते ही 2500+ गायब, कागजों पर चल रहे थे मदरसे

                 उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद (फोटो साभार: यूट्यूब)
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के मदरसों का सर्वे करवा रही है। यह सर्वे बीते 13 सितंबर से शुरू हो चुका है। मदरसों के इस सर्वे के लिए 5 अक्टूबर तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। मदरसों के सर्वे को लेकर ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद’ के अध्यक्ष डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा है कि सर्वे के शुरू होते ही राज्य से 2500 मदरसे गायब हो गए हैं।

ज्ञात हो, जब छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति सीधी छात्रों के बैंक खातों में जमा करने की योजना शुरू होने पर उत्तराखंड में मदरसों से 95000 छात्रों के गायब होने की खबर चर्चा में आयी थी, यानि मदरसों के नाम पर किस तरह मदरसा चलाने वाले कट्टरपंथी मुस्लिम सरकार को लूट रहे थे। ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मदरसों का सर्वे करवाने की घोषणा करते ही छद्दम धर्म-निरपेक्ष और कट्टरपंथी मुस्लिम नेता मुसलमानों पर अत्याचार करने का शोर मचाकर जनता को गुमराह कर भड़का कर देश का माहौल ख़राब का प्रयास कर रहे थे। लेकिन सर्वे शुरू होते ही मदरसों के नाम पर सरकार को लूटने का षड़यंत्र सामने आ गया है। मदरसों की आड़ में चल रहे जमीन जेहाद को जमींदोज करने सरकार को इन अवैध मदरसों की जमीन किसी वक़्फ़ बोर्ड को देने की बजाए अपने कब्जे में करनी चाहिए। 

अमर उजाला से हुई बातचीत में, डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा है, “कोई भी व्यक्ति जो गरीब मुसलमानों के बच्चों को आधुनिक बेहतर शिक्षा देने का पक्षधर होगा, वह मदरसों के सर्वे को गलत नहीं ठहरा सकता। हमें समझना चाहिए कि मदरसों के सर्वे का विरोध अब तक कौन और क्यों कर रहा था? जो असदुद्दीन ओवैसी मदरसों के सर्वे को दूसरा एनआरसी कह रहे थे, उन्हीं के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी का बेटा अमेरिका में एमबीबीएस कर रहा है और बेटी लंदन में लॉ पढ़ रही है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि लोग ओवैसी की बातों में न आएँ। उन्होंने बताया, “वे लोग अपने बच्चों को बड़े अंग्रेजी मिशनरी स्कूलों में पढ़ाकर उनके लिए तरक्की का रास्ता खोलना चाहते हैं। जबकि गरीब के बच्चों को धार्मिक शिक्षा तक सीमित रखना चाहते हैं, क्यों? इसके पीछे केवल राजनीति जिम्मेदार है, लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि मुसलमानों के गरीब बच्चे भी अब आधुनिक शिक्षा हासिल कर सकेंगे। उनके विकास का रास्ता खुल गया है।”

मदरसों के सर्वे का विरोध करने वाले लोगों पर आगे बोलते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ जावेद ने यह भी कहा कि जो लोग मदरसों के सर्वे का विरोध कर रहे थे वे इसे मुसलमानों के आंतरिक मामलों में सरकार का दखल बता रहे थे। लेकिन जब आप केंद्र सरकार से हर साल 3000 करोड़ रुपए की सहायता लेंगे। अनेकों मदरसों में 50 हजार से लेकर लाख रुपए से ज्यादा वेतन लेंगे और उन्हीं मदरसों में सरकार से मिलने वाली बिजली-पानी, सड़क की सुविधा का उपयोग करेंगे, तो यह आपका व्यक्तिगत मामला कैसे रह गया। सरकार को ऐसे संस्थानों के लिए नियम बनाने और इसके हितधारकों की चिंता करने का अधिकार है। इससे कोई बच नहीं सकता।

इसके अलावा, डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि यह सच है कि भारी संख्या में मदरसे केवल कागजों पर चल रहे थे। इनके नाम पर आने वाला चंदे-जकात का पैसा गलत लोगों की जेबों में जा रहा था। जब सर्वे की शुरुआत हुई थी, तब यूपी में 19 हजार से ज्यादा मदरसे होने की बात कही जा रही थी। लेकिन अब इनकी संख्या केवल 16,513 रह गई है। यानी ढाई हजार से ज्यादा मदरसे गायब हो गए हैं। इससे गलत हाथों में जाने वाला पैसा बचेगा और यह पैसा गरीब मुसलमानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च होगा।

असम : टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 2 मदरसे सील: आतंकी संगठन अल कायदा ने ‘गो टू असम’ का दिया नारा

चित्र साभार- ANI
'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या' इस्लामिक स्कॉलर्स जब भी टीवी पर मदरसों में हो रही तालीम पर बात होने पर कहते हैं कि कोई एक मदरसा दिखाओं, लेकिन असम पुलिस उन्हें दिखा ही नहीं, मदरसे भी सील कर रही है। और अब तक सैंकड़ों मदरसे बंद किए जा चुके हैं। जुलाई 28 को एक चैनल पर चर्चा के दौरान एडवोकेट अश्विनी कुमार ने बताया कि भारत में 3 लाख से अधिक मदरसे हैं, इतने किसी भी मुस्लिम देश में नहीं। पता नहीं मीडिया भी अपनी TRP के चक्कर में इन समाचारों को बॉयकॉट कर रहा है और यदि स्थिति विपरीत होती देखो हर चैनल बढ़चढ़ कर उस समाचार को दिखाता।  
असम पुलिस (Assam Police) ने आतंकी गठजोड़ का खुलासा करते हुए अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के 12 सदस्यों को अब तक गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियाँ मोरगाँव, गुवाहाटी, बारपेटा और गोलपारा जिलों से की गई हैं। वहीं, एक को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।

एक दिन पहले असम पुलिस ने मोरीगाँव जिले के मोरियाबारी के एक मदरसा के टीचर मुफ्ती मुस्तफा को गिरफ्तार था। नेटवर्क से जुड़े बाकी फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

बारपेटा से गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम 25 वर्षीय जुबेर खान, 27 वर्षीय रफीकुल इस्लाम, 20 वर्षीय दीवान हमीदुल इस्लाम, 42 वर्षीय मोइनुल हक, 37 वर्षीय कज़ीबुर हुसैन, 50 वर्षीय मुजीबुर रहमान, 34 साल के शाहजहाँ अली और शहनूर आलम हैं। जुबेर खान को छोड़ कर बाकी सभी स्थानीय बरपेटा थानाक्षेत्र के ही रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक इन आरोपितों पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-कायदा के वर्तमान मुखिया अल जवाहिरी ने ‘गो टू असम’ का एलान किया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ और अधिक सतर्क हो गई हैं। मोरीगाँव में जमीउल हुडा मदरसा चलाने वाले मुफ़्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद 39 साल के अफसरूद्दीन भुयान को भी मोरीगाँव में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक अन्य गिरफ्तारी अब्बास अली की हुई है। इन सभी पर एक फरार आतंकी महबूब उर रहमान को शरण देने का आरोप है।

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

मोरीगाँव की SP अपर्णा के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों से उनके बाकी नेटवर्क और फंडिंग आदि के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक पुलिस द्वारा 2 मदरसों को सील किया जा चुका है। उसमें पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल में शिफ्ट किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं।

कानपुर में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी, बिरयानी खिलाकर पढ़ाया गया मजहबी कट्टरता का पाठ: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

                    कानपुर हिंसा में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी (तस्वीर-इंडियन एक्सप्रेस)
CAA के विरोध में धरना/प्रदर्शन हो, किसान आंदोलन हो या फिर अब नूपुर के बहाने खेला गया साम्प्रदायिकता का नंगा नाच,सभी में रुपयों के लेन-देन की बात सामने आयी है, जो बहुत चिंताजनक है। फिर प्रदर्शनकारी गरीब, मज़लूम और बेगुनाह आदि कैसे? अब कानपुर दंगे में भी रुपयों का लेन-देन सामने आ रहा है। जिन बच्चों को रुपयों का लालच देकर पत्थरबाज़ी करवाई गयी, यदि यह बात सच है, फिर मास्टरमाइंड के साथ-साथ उन लालची बच्चों के साथ भी उसी सख्ती से पेश आना चाहिए, ताकि भविष्य में लालच में आकर देश की शांति भंग करने का साहस न कर सके। केवल बच्चा समझकर कोई नरमाई नहीं बरती जानी चाहिए। धन का लालच देकर इन्हें कभी भी ख़रीदा जा सकता है। इन बच्चों एवं परिजनों को मिली सरकारी सुविधाओं की ब्याज समेत वसूली की जाए, और भविष्य में भी इन्हें हर सरकारी सुविधा से वंचित किया जाना चाहिए। पूछा जाए पेट्रोल के किसने पैसे दिए, पेट्रोल बम बनाने का सामान और पत्थर कहाँ से और किसने प्रबंध करवाया।   

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून, 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे पुलिस की रडार पर है। हिंसा के दौरान इन बच्चों ने जमकर पत्थरबाजी की और बम फेंके थे। CCTV फुटेज और वायरल फोटो-वीडियो की जाँच से इस बात की पुष्टि हुई है। इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के आदेश पर पुलिस ने जाँच शुरू की तो ऐसे कई चौकाने वाले खुलासे हुए। जिन मदरसों के ये बच्चे थे, उन मदरसों को बंद करने के साथ-साथ इन मदरसों के संरक्षकों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई है कि जिले में हिंसा कराने के लिए मदरसे के बच्चों को पैसे दिए गए थे। यहाँ तक कि हिंसा से पहले उन्हें कई बार बिरयानी भी खिलाई गई। साथ ही बच्चों को मजहबी कट्‌टरता का भी पाठ पढ़ाया गया था।

कश्मीर में पत्थरबाजी करने के लिए आतंकी समूह भी ऐसा करते रहे हैं। जिससे इलाके के मदरसे में पढ़ने वाले छात्र भी अब पुलिस के रडार पर हैं। इसके अलावा एक बार फिर से कानपुर हिंसा के आरोपितों को पाँच दिन की रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई है। वहीं इस मामले में कानपुर पुलिस जल्द ही जाँच पूरी करके अपनी रिपोर्ट NCPCR को सौंपेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, JCP आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया, “बच्चों का हिंसा में शामिल होना गंभीर बात है। NCPCR ने भी इसका संज्ञान लेते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा को जाँच का आदेश दिया है। अभी तक कि जाँच में सामने आया कि नाबालिग बच्चों को रुपए देकर हिंसा के लिए डायवर्ट किया गया।”

उन्होंने बताया कि बच्चों तक फंड सीधे नहीं, बल्कि अलग-अलग चैनल से भेजे गए। यानी इलाके के नेताओं और गली-मोहल्ले के लोगों से रुपए बँटवाए गए। जिससे तय समय पर सैकड़ों नाबालिग हाथ में पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे और जमकर पथराव और बमबाजी किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में कानपुर के नामी बिल्डर हाजी वसी समेत आठ बिल्डरों का नाम सामने आया है। जिन्होंने कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी को फंडिंग करते थे। पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि कहीं इस पैसे का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए तो नहीं किया गया है।

कानपुर (Kanpur ) में 3 जून को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के दौरान पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया था। इसको लेकर अब खुलासा हुआ है कि घटना के 48 घंटे पहले ही चरमपंथियों ने सुनियोजित तरीके से बोतलों में पेट्रोल इकट्ठा किया था। हिंसा के दैरान कानपुर में दंगाइयों ने करीब 50 धमाके किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथियों ने शहर के डिप्टी पड़ाव स्थित भारत पेट्रोलियम के पंप से बोतलों में पेट्रोल भरवाया था। सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा होने के बाद कानपुर के जिलाधिकारी ने पेट्रोल पंप का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है। इसके साथ ही सभी 37 पंपों की जाँच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दिया था।

कर्नाटक : ‘टीपू सुल्तान टाइगर था’- स्कूलों में अब नहीं होगी ऐसी पढ़ाई, : मदरसों पर बैन की माँग भी

                                              साभार: जागरण/एशियानेट न्यूज
स्कूली पाठ्य-पुस्तकों में विवादित संदर्भों की पढ़ाई को लेकर कर्नाटक सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति ने टीपू सुल्तान पर अध्याय को बनाए रखने की सिफारिश की है, लेकिन इसके महिमामंडन वाले हिस्से को हटाने की बात कही है। समिति ने पाठ्यक्रमों में मैसूर के वाडियार राजपरिवार, सुरपुर वंश के वेंकटप्पा नायक सहित अन्य शासकों को शामिल करने की सिफारिश की है। दूसरी तरफ, राज्य के भाजपा विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने राज्य में मरदसों को बंद कराने की अपील करते हुए कहा कि इनमें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को शिक्षा दी जाती है।

रोहित चक्रतीर्थ की अध्यक्षता वाली स्कूली पाठ्य-पुस्तक समीक्षा समिति ने राज्य सरकार को दिए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान को मैसूर का शेर कहा जाता है। चक्रतीर्थ का कहना है कि ये कोई नहीं जानता की टीपू सुल्तान को यह उपाधि किसने और किस संदर्भ में दी है।

भाजपा विधायक अपाचू रंजन सहित कई हिंदू संगठनों ने टीपू सुल्तान को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। इनका कहना था कि वह एक कट्टर इस्लामिक सुल्तान था, जिसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार और उनका धर्मांतरण किया। उसका स्कूली पाठ्यक्रमों में अनावश्यक रूप से महिमामंडन किया गया है। इसके बाद सरकार इस समिति का गठन किया था।

समिति ने वाडियार राजवंश, उत्तर-पूर्व में 600 वर्षों तक शासन करने वाले अहोम राजवंश और कश्मीर पर 300 वर्षों तक शासन करने वाले करकोटा राजवंश को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महर्षि बाल्मिकी के लिए पाठ्यक्रमों में एकवचन का प्रयोग किया गया है, जो अपमानजक है।

इसको लेकर भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने टीपू सुल्तान, औरंगजेब सहित अन्य मुस्लिम शासकों को ‘कट्टर’ बताते हुए शनिवार (26 मार्च 2022) को उन्हें पाठ्यक्रमों से पूरी तरह हटाने की माँग की।

बंद हों राज्य के मदरसे

वहीं भाजपा के विधायक रेणुकाचार्य ने राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से मदरसों को बंद कराने और अन्य स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के अनुसार बनाए जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन मदरसों में देश विरोधी बातें बताई और पढ़ाई जाती हैं। उन्होंने देश में मदरसों की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि हिजाब का मुद्दा किसने बनाया, आपने या हमने? क्या वोट बैंक आपके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है? मैं कांग्रेस से पूछता हूँ कि हमें मदरसों की जरूरत क्यों है? मदरसे क्या प्रचार करते हैं? वे मासूम बच्चों को भड़काते हैं। कल वे हमारे देश के खिलाफ काम करेंगे। वे कभी भी ‘भारत माता की जय’ नहीं कहेंगे।”

‘सरकार से पैसे लेने वाले मदरसे मजहबी शिक्षा नहीं दे सकते’: गौहाटी हाईकोर्ट

                                    मदरसा और गौहाटी हाईकोर्ट (फोटो साभार: नवभारत/हिंदी न्यूज)
असम के गौहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court Assam) ने 4 फरवरी (शुक्रवार) को अपने फैसले में कहा कि सरकार से फंड प्राप्त करने वाले शिक्षण संस्थान मजहबी शिक्षा नहीं दे सकते। हाईकोर्ट ने राज्य के वित्तपोषित सभी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलने के असम सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए, मदरसों के लिए जमीन देने वाले 13 मुत्तवली (दानदाता) की याचिका को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने विधानसभा में असम रिपीलिंग एक्ट-2020 पास करते हुए इस कानून के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को विद्यालयों में बदलने का निर्णय लिया था। इस ऐक्ट के तहत मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम- 1995 और असम मदरसा शिक्षा (कर्मचारियों की सेवाओं का प्रांतीयकरण और मदरसा शैक्षिक संस्थानों का पुनर्गठन) अधिनियम- 2018 को खत्म कर दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि विभिन्न धर्मों वाले देश में सरकार को धार्मिक मामलों में तटस्थ रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “हम लोकतंत्र में और संविधान के अंतर्गत रहते हैं, जहाँ हर नागरिक बराबर है। इसलिए हमारे जैसे बहुधर्मी समाज में राज्य द्वारा किसी एक धर्म को वरीयता देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। इस प्रकार एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की प्रकृति है कि वह सुनिश्चित करे कि सरकार द्वारा वित्तपोषित किसी भी संस्थान में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाए।” यह संविधान के 28(1) के अनुकूल नहीं है।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और जस्टिस सौमित्र सैकिया की पीठ ने अपने निर्णय में कहा है कि जो विधायिका और कार्यपालिका की ओर से बदलाव किया गया है, वह केवल सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों के लिए है, न कि निजी अथवा सामुदायिक मदरसों के लिए। हाईकोर्ट ने एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को मामले पर सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि प्रांतीय मदरसों में शिक्षक के तौर पर नौकरी करने वालों की नौकरी नहीं जाएगी और आवश्यक हुआ तो उन्हें दूसरे विषयों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। हाईकोर्ट के फैसले को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा, “माननीय गौहाटी उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में मदरसा शिक्षा प्रक्रिया अधिनियम को निरस्त करने वाले 2020 के अधिनियम को बरकरार रखा और 397 प्रांतीय मदरसों को सामान्य शैक्षणिक संस्थानों में बदलने वाली अधिसूचनाओं को भी बरकरार रखा।”

मदरसों में दी जाने वाली मजहबी शिक्षा से कट्टरपंथी तत्वों को फायदे होने को आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता इनके छात्र सोच में कट्टरवादी होते हैं। ऐसी कई खबरें भी आईं हैं, जहाँ कई गंभीर अपराधों में मदरसों और उससे जुड़े मौलानाओं की सीधी संलिप्तता पाई गई है।

सरकारी जमीनों पर कब्जा

मदरसों में मजहबी शिक्षा और कट्टरपंथी सोच वाले पौध ही नहीं तैयार होते, बल्कि कई मदरसे तो सरकारी जमीनों को कब्जा करने का जरिया भी बनते हैं। सूरत नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर एक मदरसा बनाकर उस अवैध कब्जा कर लिया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वार्ड नंबर 3 में सिटी सर्वे नंबर 4936 और 4939 में अनवर-ए-रब्बानी तालीम-उल-इस्लाम के नाम से एक मदरसा चल रहा है। नगर निगम के स्वामित्व वाली भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए इस मदरसे को ध्वस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने पुलिस बंदोबस्त की भी माँग की थी।

केरल के मदरसे में यौन शोषण

मदरसों में महिलाओं के साथ-साथ नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होने की खबरें भी प्राय: आती रहती हैं। केरल के कोझीकोड मुखदार तरबियाथुल इस्लामी सेंटर में इस्लाम कबूल करने वाली एक युवती ने बताया कि सेंटर के प्रमुख महिलाओं और लड़कियों को इस्लाम ‘सिखाने’ के बहाने उनका यौन शोषण करता है। महिला का कहना था कि इस्लामी मदरसा का प्रमुख बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है। महिला ने केंद्र की तुलना जेल से की और कहा कि महिलाओं और लड़कियों को मजहबी मदरसा छोड़ने पर प्रतिबंध है।

अंधविश्वास और भेदभाव का पाठ

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि मदरसों में 400 साल पुराने पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है, जो अंधविश्वास पर आधारित है। इन मदरसों में कई बच्चे पढ़ते हैं, जहाँ शिक्षा के नाम पर बताया जाता है कि सूरज पृथ्वी के चक्कर लगाता है। इस पर मौलवियों का कहना था कि वो कुरान-हदीस को नहीं बदल सकते। धार्मिक पुस्तक वैसी की वैसी पढ़ाई जाती हैं। मौलवियों ने यहाँ तक तक कहा था कि लड़के और लड़कियों के लिए अलग शैक्षणिक संस्थान होने चाहिए, नहीं तो उनके बीच नाजायज संबंध बन जाते हैं।

कट्टरपंथी शिक्षा का केंद्र

ऐसे कई मदरसे और उनसे जुड़े मौलवियों की खबरें आई हैं, जो हत्या और आतंकवादी गतिविधियों के लिए लोगों को उकसाते हैं। केरल सुन्नी शिक्षा बोर्ड के एक शिक्षक शफी सादी कुमारमपुत्तूर की एक वीडियो सामने आई थी वह बच्चों को पढ़ा रहा था कि जो कोई भी इस्लाम धर्म को छोड़ता है उसे मार दिया जाना चाहिए।
गुजरात का हालिया मामला इसका उदाहरण है। दिल्ली के एक मौलाना के निर्देश पर गुजरात में एक हिंदू युवक की हत्या कर दी गई और मदरसे के पास हथियारों आदि को छिपा दिया गया। इन हत्यारों को मौलवियों ने ही हथियार आदि उपकरण और सुविधाएँ उपलब्ध कराई थीं।

‘मुस्लिम महिलाओं के हस्तमैथुन’ से लेकर ‘सेक्स के बाद नहाने’ तक: दारुल उलूम देवबंद के फतवे

इस्लाम में ‘क्या सही है और क्या नहीं’ इसकी जानकारी के लिए दारुल उलूम देवबंद के पास सैंकड़ों मुस्लिम आते हैं। वे अपनी निजी जीवन से संबंधी कुछ सवाल करते हैं और देवबंद से उन्हें जवाब ‘क्या हलाल है क्या हराम’ इसके आधार पर फतवा जारी करके दिया जाता है। इन्हीं सवालों में कई सवाल महिलाओं से जुड़े होते हैं। कुछ प्रश्न हस्तमैथुन पर होते हैं, कुछ सेक्स से जुड़े और कुछ गैर मजहबी औरतों से जुड़े।

ऑपइंडिया दोबारा कुछ चुनिंदा सवालों की सूची आपके लिए देवबंद की साइट दारुलइफ्ता से लेकर आया है। ये सारे सवाल महिलाओं से संबंधी हैं।

गैर-किताबी महिला से निकाह 

दारुलइफ्ता साइट पर जॉर्डन के एक शख्स ने मजहबी सलाह पाने के लिए दारुल उलूम से सवाल किया कि उसने एक जर्मन लड़की से शादी की थी। मगर लड़की न तो इस्लाम और न ईसाइयत और न ही कोई धर्म मानती है। वह मौत के बाद की जिंदगी और हूरों में भी विश्वास नहीं करती। मगर निकाह से पहले उसने ‘ला इला इल्लाह’ बोला है। शौहर ने पूछा कि आखिर उनकी शरिया के अनुसार क्या स्थिति है। वो अपनी बीवी को छोड़ना नहीं चाहता।

एक मजहबी शौहर के सवाल पर दारुल उलूम ने कहा कि अगर उस व्यक्ति की बीवी कोई मजहब नहीं मानती है तो मतलब है कि वो नास्तिक है/काफिर है। उससे साफ पूछा जाना चाहिए कि वो अल्लाह को मानेगी या नहीं और अगर वो मानने से मना करती है तो उससे फौरन दूरी बना ली जानी चाहिए।

वलीमा के कार्ड में दुल्हन का नाम

गैर-मजहबी महिला से जुड़े सवाल के अलावा इस साइट पर कई सवाल मजहबी लड़कियों/महिलाओं को लेकर भी हैं। यहाँ एक व्यक्ति ने सवाल किया हुआ है कि क्या वो अपने वलीमा के कार्ड में अपनी होने वाली बीवी का नाम छपवा सकता है या नहीं। इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम देवबंद ने उसे बताया कि होने वाली बीवी का नाम दावत पत्र में नहीं लिखवाना चाहिए।

बैंक में काम करने वाले आदमी के घर निकाह

अगला सवाल है कि क्या उस परिवार से निकाह के ऑफर को स्वीकारा जाना चाहिए जहाँ लड़की के पिता बैंक क्षेत्र में हों। इस प्रश्न के जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि जो लोग हराम के पैसे कमाते हैं उनमें  नैतिकता की कमी होती है इसलिए ऐसे रिश्तों से बचा जाना चाहिए।

मुस्लिम महिला हस्तमैथुन कर सकती है क्या?

मजहबी शिक्षा से संबंधी साइट पर हस्तमैथुन को लेकर भी सवाल किए गए हैं। पूछा गया है कि क्या शरिया लॉ के अनुसार मुस्लिम लड़की हस्तमैथुन कर सकती है या नहीं। देवबंद ने इस सवाल पर जवाब दिया कि किसी भी मुस्लिम लड़की को ऐसे गुनाह करने से बचना चाहिए।

यौन संबंध के बाद नहाना जरूरी या नहीं?

ये सवाल एक महिला ने किया है। वह पूछती हैं कि अगर कोई शादीशुदा महिला सिर्फ संतुष्टि के लिए उंगली से स्पर्श करवाती है और कोई तरल पदार्थ बाहर नहीं निकलता तो क्या नहाना या खुद को साफ करना जरूरी है या नहीं। इसके जवाब में उसे बताया गया कि अगर खातून बिना किसी वासना के अपनी योनि में उंगली डालती है और उसे कुछ महसूस नहीं होता तो नहाना आवश्यक नहीं है। मगर ये काम अगर शौहर ने किया हो तो नहाना जरूरी है।

बहन की आधुनिक शिक्षा पर सवाल

इस साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी 14 साल की बहन के लिए सवाल किया कि उसकी बहन मॉर्डन शिक्षा ले रही है और इस्लाम के निर्देश नहीं मानती। उसे इस्लामी संस्थान भी भेजा गया। दारुल उलूम ने इस सवाल को सुनकर कहा कि उन लोगों की कोशिशें फायदा देंगी और बहन जल्दी इस्लामी मानदंडों को अपनाना शुरू कर देगी।
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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब
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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब
अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वा

विवादित फतवों के लिए नामी है दारुल उलूम देवबंद

इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित किया गया दारुल उलूम देवंबंद मुस्लिमों में बेहद जाना-माना शिक्षण संस्थान है। ये उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित है और विवादित फतवों के लिए जाना जाता है। साल 2018 में इनकी ओर से सीसीटीवी लगाने का विरोध किया गया था। इसी प्रकार महिलाओं के फुटबॉल देखने पर भी इन लोगों ने विरोध किया हुआ है। इतना ही नहीं, एक बार इस जगह से फतवा जारी किया गया था कि चूड़ियाँ पहनाते वक्त भी दुकानदार को महिला को छूना नहीं चाहिए। अभी हाल में ‘गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर फतवा जारी करके ये विवादो में आया था।

केरल : मदरसा में इस्लाम सिखाने के बहाने महिलाओं का मौलवी ने किया यौन शोषण

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: DNA India)
केरल के कोझीकोड मुखदार तरबियाथुल इस्लामी सेंटर में इस्लाम कबूल करने वाली एक युवती ने मदरसा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। महिला ने सेंटर के प्रमुख पर महिलाओं और लड़कियों को इस्लाम ‘सिखाने’ के बहाने प्रताड़ित करने और उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है।

जनम टीवी के साथ अपने इंटरव्यू में, महिला ने कहा कि इस्लामी मदरसा का प्रमुख बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है। महिला ने केंद्र की तुलना जेल से की और कहा कि महिलाओं और लड़कियों को मजहबी मदरसा छोड़ने पर प्रतिबंध है।

महिला के मुताबिक केंद्र के मुखिया मुस्लिम मौलवी ने एक दिन 18-19 साल की बच्ची के साथ रेप किया। इसके बाद लड़की को बताया गया कि स्नान करने के बाद उसके सभी पाप माफ हो जाएँगे। घटना के बारे में उसे कैसे पता चला, इस बारे में जानकारी देते हुए, महिला ने जनम टीवी को बताया कि पीड़िता ने ही उसके साथ आपबीती शेयर की थी।

महिला ने कहा कि पीड़िता को उसके परिवार वाले उसी दिन वहाँ से ले गए। महिला ने बताया कि कैसे मुस्लिम मौलवियों ने मजहबी केंद्र में शामिल होने के लिए असुरक्षित और कमजोर महिलाओं एवं लड़कियों को टारगेट किया और फिर इसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ असहनीय अत्याचार किया। महिलाओं और लड़कियों को रहने के लिए घर और उनके खर्च के लिए पैसे देने के बहाने मदरसा में शामिल होने के लिए बहकाया गया।

महिला ने कहा कि लड़कियों को 40 दिनों के लिए केंद्र में रहने के लिए कहा गया था। इस दौरान मदरसा के प्रमुख ने उनमें से प्रत्येक के साथ व्यक्तिगत रूप से समय बिताया। महिला ने खुलासा किया कि उसने लड़कियों के कमरे में जाकर प्रताड़ित किया और उनका यौन शोषण किया। 19 वर्षीय लड़की द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के बारे में बात करते हुए, महिला ने कहा कि घटना 8 जून को हुई थी, लेकिन पुलिस में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी क्योंकि लड़की को कथित तौर पर पुलिस में घटना की रिपोर्ट करने के खिलाफ अपराधी द्वारा धमकी दी गई थी।

बांग्लादेशी मुसलमान दिल्ली पर कब्जा करें ; ‘इस देश को काफिरों से मुक्त कराना होगा…’ : रफीकुल इस्लाम मदनी, बांग्लादेशी इस्लामी उपदेशक

                                      रफीकुल इस्लाम मदनी (साभार: Dhaka Tribune)
भारत में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को बचाने जगह-जगह बने शाहीन बागों का समर्थन कर रहे समस्त गैर-मुस्लिमों को अब अपनी नींद से जागना होगा। समस्त देशप्रेमी नागरिकों को उन सभी नेताओं और उन सभी पार्टियों को पाताल का रास्ता दिखाना होगा, जो विरोध धरने और प्रदर्शनों में Fuck Hindutva का नारा लगाने वालों का समर्थन कर रहे थे, घुसपैठियों के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड बनवाकर अपनी कुर्सी की खातिर देश को पुनः गुलामी की कगार पर ले जा रहे थे। इन आपत्तिजनक नारों की असलियत बांग्लादेश में रफीकुल इस्लाम की गिरफ़्तारी से सामने आ गयी है। 

बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक रफीकुल इस्लाम मदनी को रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने हाल ही में गिरफ्तार किया है। इस्लाम के नाम पर दूसरों को उकसाने वाले मदनी के मोबाइल से एडल्ट कंटेंट मिले हैं। RAB ने इसकी जानकारी देते हुए उसे ‘फ्रॉड’ उपदेशक बताया है।

उसकी गिरफ्तारी 12 मार्च को जन्नत टीवी 24 पर अपलोड किए गए एक वीडियो को लेकर हुई है। इसमें वह अपने अनुयायियों को अल्लाह के नियमों का पालन करने के नाम पर संविधान तथा कानून की अवहेलना करने के लिए उकसाता दिखा था।

रैपिड एक्शन बटालियन के निदेशक (कानून एवं मीडिया) कमांडर खानडाकेर अल मोइन ने बताया कि मदनी को उत्तरी बांग्लादेश के नेत्रकोना जिले में उसके पैतृक घर से पकड़ा गया। वह अपने आठ भाई-बहनों में सबसे छोटा है। गरीब परिवार से आने वाला मदनी अब दो मदरसों का निदेशक है।

एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बार है जब मदनी को गिरफ्तार किया गया है। उसे मोदी की यात्रा का विरोध करने के लिए ढाका में 30 अन्य लोगों को 25 मार्च को गिरफ्तार किया था। उस समय मदनी को कुछ घंटों बाद ही रिहा कर दिया गया था।

वीडियो में उसने कहा था, “अल्लाह के मुल्क में प्रशासनिक आदेश नहीं हो सकते। यही कारण है कि मैं किसी भी आदेश का पालन नहीं करता हूँ। मेरी डिक्शनरी या संविधान किसी भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या सांसद को मान्यता नहीं देती अगर वे इस्लाम के खिलाफ जाते हैं तो… आप क्या करेंगे?”

वह आगे कहता है, “आप इसके लिए मुझे मार सकते हैं, कैद कर सकते हैं या मुझे फाँसी भी दे सकते हैं। आप (प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का जिक्र करते हुए) वही करें जो आपका कानून या संविधान कहता है और मैं वही करूँगा जो मेरे अल्लाह कहते हैं। मैं राष्ट्रपति का सम्मान तभी करूँगा जब वह अल्लाह और इस्लाम का सम्मान करेंगे।”

कथित इस्लामी उपदेशक ने शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को धमकी देते हुए कहा, “यह जान लें कि अगर आप (हम पर) पत्थर फेंकते हैं, तो आप पर ईंटें फेंकी जाएँगी। यदि आप इससे नहीं सीखते हैं, तो आप खुद को एक खतरनाक स्थिति में पाएँगे। हम आपके खिलाफ नहीं हैं। हमारी फोल्ड में लौट आओ।”

7 अप्रैल को जन्नत टीवी 24 पर अपलोड एक अन्य वीडियो में रफीकुल इस्लाम मदनी को मुसलमानों को इस्लाम के लिए मरने के लिए उकसाते हुए देखा गया था। उसने कहा था, “हमें इस देश और इस्लाम को, माफिया सरकार और काफिरों के हाथों से मुक्त कराना होगा… सभी इस्लामी संस्थानों के लिए एक मजहबी प्रमुख होना चाहिए। उनके निर्देशों के तहत, हम सरकारी तंत्र को पंगु बना देंगे और इस देश को माफियाओं के हाथों से मुक्त करेंगे। यदि आवश्यक हो, तो हम सेना को शक्ति प्रदान करेंगे।”

इसके अलावा, उसने अपने अनुयायियों को यह आरोप लगाकर भड़काया कि अवामी लीग का छात्रसंघ उन्हें और ऐसे अन्य प्रचारकों को मार देगा। रफीकुल इस्लाम मदनी ने कहा कि सभी विद्रोही मौलवी बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों की निगरानी में हैं। उसने कहा, “आज, मैं जिहाद नहीं कर सकता। वे मुझे प्रताड़ित कर सकते हैं, सड़क पर हमला कर सकते हैं या मुझे मार सकते हैं। मैं व्यर्थ में मरना नहीं चाहता।”

उसने सवालिया लहजे में अपनी बात बताते हुए पूछा, “मैं अल्लाह के आह्वान पर सही कारण के लिए शहीद होना चाहता हूँ। मैं बेवजह मरना नहीं चाहता। इसलिए मैं सुरक्षित रहने की कोशिश करता हूँ। हालाँकि हम मरना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं है। हम मरना चाहते हैं। हम अपन जीवन शहीद करना चाहते हैं। इस देश में (इस्लाम के लिए) लाखों लोग मरने को तैयार हैं। तुम किससे डरते हो?”

बांग्लादेशी मुसलमान दिल्ली पर कब्जा करें

पीएम मोदी की हालिया बांग्लादेश यात्रा का विरोध करते हुए रफीकुल इस्लाम मदनी ने एक वीडियो संदेश जारी किया था। उसने चेतावनी देते हुए कहा था, “हम बांग्लादेश की धरती पर मोदी को कदम नहीं रखने देंगे। हमारे सभी उलेमा कल इसे साबित कर देंगे।” शेख मुजीबुर रहमान का हवाला देते हुए, उसने धमकी दी कि 18 करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान शक्तिशाली हैं या मोदी… यह उनकी यात्रा के दौरान साबित हो जाएगा।
उसने मुसलमानों को उकसाते हुए कहा, “अगर भारत में अल्लामा मदनी की संतान हमें दिल्ली पर कब्जा करने के लिए बुलाती है, तो, हम जाएँगे और करेंगे। दुनिया की कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती। कोई भी शक्ति या बाड़ हमें रोक नहीं सकती। मुसलमानों के लिए हमारा प्यार इतना मजबूत है कि हम दिल्ली तक एक लंबा मार्च करेंगे। मुसलमानों को अल्लाह और साथी मुसलमानों से प्यार है। अपने इमान को मजबूत रखें। युद्ध के मैदान में जाओ। यदि आप मर जाते हैं, तो शहीद हो जाएँगे।”
उसने कहा था, “आप विश्वास नहीं कर सकते कि बांग्लादेश सरकार अब अपनी शर्तों पर काम नहीं कर रही है। यह हिंदुत्व और मोदी के इशारे पर चल रहा है। मोदी जो भी चाहते हैं, इस देश में होता है। अवामी लीग, चतरा लीग और शेख हसीना के मामले में ऐसा ही है। आज, सभी मंदिरों को उन्नत किया जा रहा है और यहाँ की मस्जिदें मर रही हैं। इसका मतलब है कि जो भी मोदी के खिलाफ बोलेगा उसे यातनाएँ दी जाएँगी और जेल में बंद किया जाएगा। लॉकडाउन के नाम पर वे मस्जिदों और मदरसों को बंद करवाएँगे। हम कुछ भी नहीं मानेंगे… हम चाहते हैं कि यह देश एक सच्चा इस्लामी गणराज्य हो।”

कौन है रफीकुल इस्लाम मदनी

मदनी की उम्र 26 साल है। पर वह ‘शिशु वक्ता (shishu bokta)’ के नाम से जाना जाता है। वजह उसकी हाइट है। भले ही वह 3 फीट 4 इंच का ही हो, लेकिन जहर जमकर उगलता है। सरकार, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और नामचीन लोगों के खिलाफ देशभर में घूम-घूमकर जहर उगल उसने पहचान बनाई है। बांग्लादेश में इस्लामी शासन की वह पैरोकारी करता है। वह कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) से जुड़ा है। मोदी की यात्रा के विरोध में बांग्लादेश में हुई हिंसा के लिए यही संगठन जिम्मेदार था।
जानकारी के मुताबिक रफीकुल के पिता और भाई खेती करते हैं और आजीविका के लिए रफीकुल की कमाई पर निर्भर हैं। रफीकुल अब नेत्रोकोना और गाजीपुर में दो मदरसों का संचालन कर रहा है। 1995 में जन्मे रफीकुल ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय से की और बाद में जामिया हुसैनिया मालनी मदरसा में दाखिला लिया। तीन साल तक वहाँ अध्ययन करने के बाद, वह गाजीपुर के एक मदरसे में शिफ्ट हो गया। बाद में, 2019 में, उन्होंने ढाका के जामिया मदनी मदरसा में अपनी दावरा-ए-हदीस की डिग्री पूरी की।
उसके हमनाम और पूर्व मदरसा साथी रफीकुल इस्लाम ने ढाका ट्रिब्यून को बताया, “मैं हिफाज़त-ए-इस्लाम के पूर्व महासचिव नूर हुसैन कासेमी के करीब था। मैं भी नेत्रोकोना से आता हूँ और मैं ही रफीकुल को बारिधारा के मदरसे में लाया था, जिसकी स्थापना नूर हुसैन कासेमी ने की थी।”
‘उपदेशक’ को मिलने वाले पैसे को लेकर रफीकुल ने कहा, “यह तय नहीं है। जहाँ तक मुझे पता है, यह 2,000 से 50,000 टका तक है। यह उन लोगों पर निर्भर करता है जो उसे (बोलने के लिए) आमंत्रित करते हैं।”
मदनी टाइटल के बारे में रफ़ीकुल ने बताया, “उसे मदनी मदरसे से अपनी दावरा-ए-हदीस की डिग्री मिली। यही वजह है कि कुछ लोग उसे मदनी कहते हैं। उन्हें हाल ही में उसे इस टाइटल का उपयोग बंद करने के लिए एक कानूनी नोटिस दिया गया था, क्योंकि वह सऊदी अरब में इस्लामिक विश्वविद्यालय मदीना से स्नातक नहीं था। जहाँ तक मुझे जानकारी है, रफीकुल ने खुद मदनी की उपाधि का इस्तेमाल नहीं किया। वह अपनी हाइट के लिए ‘शिशु वक्ता’ के रूप में जाना जाता है, भले ही वह 26 साल का है।”
सऊदी अरब से फंडिंग होती है हिफाजत-ए-इस्लाम को 
पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर काम करने वाले हिफाजत-ए-इस्लाम को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है। 2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।