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केरल : 16 वर्षीय लड़के का बलात्कार कर पादरी हुआ फरार; बलात्कारी पादरी को बचाने चर्च आगे आया

     आरोपित पादरी (बाएँ) ने 16 वर्षीय बच्चे को शिकार बनाया (प्रतीकात्मक साभार: Grok AI & Onmanorama)
केरल में एक पादरी ने एक 16 वर्षीय लड़के का रेप किया। पादरी अब फरार है। पादरी को बचाने के लिए चर्च आगे आ गया है। उसको बचाने के लिए एक मुहिम चलाई गई है। मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

यह मामला केरल के कासगरगोड का है। यहाँ अथिरुम्मावु स्थित सेंट पॉल चर्च के पादरी फादर पॉल थाट्टुपरम्बिल के खिलाफ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के की शिकायत पर FIR दर्ज हुई है। चित्तरिक्कल पुलिस ने इस मामले में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है।

शिकायत के अनुसार, पादरी ने 15 मई, 2024 से 13 अगस्त, 2024 के बीच पर 11वीं कक्षा के नाबालिग छात्र को अपने घर और अन्य जगहों पर ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। यह पूरा मामला एक काउंसिलिंग सेशन के बाद खुला और चाइल्डलाइन पर इसकी सूचना आई। मामला दर्ज होने के बाद से पादरी गायब है।

पादरी के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद चर्च उसे बचाने में जुट गया है। चर्च से जुड़े लोगों ने पॉल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। चर्च ने पादरी को बचाने के एक अभियान भी चालू कर दिया है। इस चर्च के लोग एक मुहिम चला रहे हैं।

चर्च से जुड़े लोगों द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक वॉयस मैसेज भेजा जा रहा है और निवेदन किया जा रहा है कि वे चित्तरिक्कल पुलिस को पादरी को अच्छा चरित्र का बताने वाला एक पत्र भेजें। वहीं पादरी की इस बीच तलाश तेज हो गई है। यह भी दावा किया गया है कि पादरी एक अस्पताल में भर्ती हो गया है।

जिस पादरी थट्टुपरम्बिल पर यह आरोप लगा है वह पिछले डेढ़ साल से अथिरुम्मावु पैरिश का पादरी हैं। मूलतः वह एर्नाकुलम का हैं। अब पुलिस इस मामले में आगे कार्रवाई के लिए सबूत जुटा रही है और जाँच कर रही है।

अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा स्तन दबाना-पायजामा खोलना ‘रेप का प्रयास’ है या नहीं? मजाक बनती न्यायपालिका

जिस तरह मुस्लिम तुष्टिकरण करते विपक्ष मुग़ल गुणगान कर आत्महत्या करने पर तुला हुआ उसी तरह न्यायपालिका भी अपनी आत्महत्या करने के रास्ते पर निकल पड़ी है। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं। 
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में एक मामले में की गई टिप्पणी ‘स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खोलना रेप या रेप का प्रयास का अपराध नहीं है’ का स्वत: संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज की पीठ द्वारा की जाएगी। इससे पहले जस्टिस बेला त्रिवेदी और प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने इस मामले में याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने 14 मार्च को कासगंज में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई के दौरान यह विवादित टिप्पणी की थी। जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि किसी लड़की का स्तन पकड़ना, उसके पायजामे के नाड़े तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना… रेप या रेप के प्रयास वाले अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

जस्टिस मिश्रा ने अपने फैसले में इसके पीछे यह तर्क दिया था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपितों की कार्रवाई अपराध करने की तैयारी से आगे बढ़ चुकी थी। अदालत ने कहा था कि बलात्कार के प्रयास और अपराध की तैयारी के बीच अंतर को सही तरीके से समझना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करने का भी निर्देश दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का देश भर में जमकर आलोचना हुई थी। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की वकील अंजलि पटेल ने याचिका दाखिल करके हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज कुछ टिप्पणियों को हटाने और उसे रद्द करने की माँग की गई थी। याचिका में यह भी माँग की थी कि हाल के कुछ मामलों में हाई कोर्ट के जजों ने अनुचित टिप्पणियाँ की हैं। इसलिए जजों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी की जाए।

इस मामले पर 24 मार्च को पेश वकील ने जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ के समक्ष दलीलें शुरू करते हुए ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ की बात कही। इसके तुरंत बाद जस्टिस बेला त्रिवेदी ने वकील को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके साथ ही कहा कि कहा कि कोर्ट में ‘लेक्चरबाजी’ की अनुमति नहीं होनी चाहिए। इसके बाद जस्टिस बेला त्रिवेदी ने याचिका को खारिज कर दी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और इसकी सुनवाई बुधवार (26 मार्च) को तय कर दी। बता दें कि यह मामला 11 वर्षीय पीड़िता से संबंधित है, जिसके साथ 10 नवंबर 2021 को आरोपित पवन, आकाश और अशोक ने पुलिया के नीचे खींचकर लेकर जाने की कोशिश करते हुए यौन उत्पीड़न की थी। आरोपितों में एक बच्ची के स्तन दबाए थे।

अवलोकन करें:-

कलंकित होने के बाद भी न्यायपालिका के जज नहीं सुधर सकते; ईश्वर सभी जजों का सर्वनाश करें; जजों की व
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वहीं, दूसरे आरोपित ने पीड़िता के पायजामे का नाड़ा तोड़ा था। जब शोर बढ़ा तो वहाँ से गुजर रहे लोगों ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद आरोपित फरार हो गए। बाद में पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज हुआ। निचली अदालत ने इसको लेकर समन जारी किया। इसके बाद आरोपित पक्ष इसके खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँचा। यहाँ इन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने रेप नहीं किया।

केरल : काम था महिला क्रिकेटरों को कोचिंग देना, करने लगा यौन शोषण: नग्न तस्वीरें खींचकर कहता था- ये चयन के लिए जरूरी है

महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न करने वाला केरल क्रिकेट एसोसिएशन का कोच मनु पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार (चित्र साभार- onmanorama.com)
‘केरल क्रिकेट एसोशिएशन’ (KCA) के पूर्व कोच पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। आरोपित का नाम मनु है जिसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मनु पर महिला खिलाड़ियों की नग्न तस्वीरें खींचने और प्रशिक्षण के दौरान उनसे छेड़खानी करने का आरोप है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और रविवार (7 जुलाई, 2024) को KCA को नोटिस जारी कर के स्पष्टीकरण माँगा है। फिलहाल आरोपित को गिरफ्तार कर के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार(7 जुलाई) को केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था। इन रिपोर्ट्स में बताया गया था कि 10 साल से अधिक समय तक कोच रहे मनु ने कई नाबालिग खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न किया था। उसने क्रिकेट टीम में चयन के लिए जरूरी बता कर कई नाबालिग लड़कियों की नग्न तस्वीरें खींची थीं। उस पर तमिलनाडु के तेनकासी ले जा कर महिला खिलाडियों से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर मनु पर केस दर्ज कर लिया गया था।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने इन आरोपों की पुष्टि के लिए एक पैनल का भी गठन कर लिया। मनु पर केस दर्ज होने के बाद 5 लड़कियाँ सामने आई हैं। इन्होंने मनु के खिलाफ अपने बयान दर्ज करवाए हैं। आखिरकार पुलिस ने 2 दिन पहले मनु को पॉक्सो एक्ट के तहत तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार कर लिया है। उसको रिमांड पर ले कर पूछताछ भी की गई। आखिरकार आरोपित को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आयोग ने KCA को भी तलब किया। KCA ने आयोग को बताया है कि उनको इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी।

मनु फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में है। इधर केरल क्रिकेट एसोशिएसन (KCA) ने पीड़िताओं को हर सम्भव मदद का भरोसा दिया है। मनु पर पूर्व में भी एक महिला खिलाड़ी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। हालाँकि, बाद में लड़की अपने बयान से मुकर गई थी।

वाह मी लार्ड बच्चा अगर पोर्न देखे तो अपराध नहीं भी… लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध: बाल अश्लील कंटेंट डाउनलोड के मामले में CJI चंद्रचूड़

                       चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर सीजेआई चंद्रचूड़ की टिप्पणी (साभार: ABP/ŹEE न्यूज)
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना और देखना POCSO अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत अपराध नहीं है। इसके साथ ही आरोपित के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द कर दिया था।

इस मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, “बहस पूरी हो गई, फैसला सुरक्षित रखा गया।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी कर इस मामले में केंद्र सरकार से भी उसका पक्ष माँगा है। इस मामले में दो NGO ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

 सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “उसके मोबाइल पर कुछ चाइल्ड पॉर्न था..आपको कैसे पता चला कि उसके पास था।” इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, “टिप गृह मंत्रालय से जिला पुलिस को आती है। इसे एक विदेशी संगठन द्वारा स्कैन किया जाता है, जो बाल पोर्न के ऐसे इंटरनेट डाउनलोड को ट्रैक करता है। शख्स दो साल से चाइल्ड पोर्नोग्राफी देख रहा था।”

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “उन्होंने साइट पर वीडियो अपलोड किया था या उन्हें किसी तीसरे पक्ष ने वीडियो मुहैया कराया था? अगर उसे अपने दोस्त से मिला है तो क्या हम कह सकते हैं कि उसने वीडियो अपलोड किया है.. यह कानून का एक साफ-सुथरा सवाल है कि क्या ऐसा कृत्य POCSO के तहत अपराध हैं?”

सीजीआई चंद्रचूड़ ने कहा, “किसी को (पोर्नोग्राफी) सिर्फ अपने व्हाट्सएप इनबॉक्स पर रिसीव करना कोई अपराध नहीं है। वीडियो की प्राप्ति धारा 15 का उल्लंघन नहीं है, लेकिन यदि आप इसे देखना जारी रखते हैं और इसे शेयर करने का इरादा रखते हैं तो यह इस धारा का उल्लंघन है।”

दोनों NGO की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने तर्क दिया, “यह उसके (आरोपित के) पास है।” इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “आपको उनसे क्या करने की उम्मीद थी कि उन्हें इसे हटा देना चाहिए था? तथ्य यह है कि उन्होंने 2 साल तक इसे नहीं हटाया। यह एक अपराध है?”

बाल यौन शोषण से संबंधित कानून POCSO अधिनियम के प्रावधानों का अवलोकन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ ने कहा, “(पोर्नोग्राफी को) साझा करने या प्रसारित करने का इरादा होना चाहिए। यह परीक्षण का मामला है।” इसके बाद वकील फुल्का ने कनाडा के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, “जिस क्षण आरोपित के पास आ जाता है, उसके बाद यह उसकी जिम्मेदारी हो जाती है।”

वहीं, NCPCR की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरुपमा चतुर्वेदी ने कहा, “तीन अलग-अलग खंड हैं। समस्या यह है कि वे (उच्च न्यायालय) बच्चों के इस्तेमाल के बजाय बच्चों द्वारा पोर्न देखने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरी तरह से तथ्यों का गलत इस्तेमाल है।” इस पर CJI ने कहा, “हाँ, बच्चे का पोर्नोग्राफी देखना अपराध नहीं हो सकता है, लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध है।”

क्या कहा था मद्रास हाई कोर्ट ने?

दरअसल, मद्रास उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी 2024 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा था कि पॉर्नोग्राफी के लिए बच्चे का इस्तेमाल किया जाता है, तभी पॉक्सो के तहत मामला बनेगा।
केरल हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने कहा था कि इसमें IT एक्ट के तहत मामला तभी चलेगा, जब आरोपित ने कंटेंट बनाया हो, प्रकाशित किया हो और उसे दूसरों को भेजा हो। बता दें कि इस मामले में 28 साल के एक व्यक्ति पर चाइल्ड पॉर्न को डाउनलोड करने और उसे देखने पर पुलिस ने उस पर पॉक्सो और आईटी एक्ट लगाया था। 
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपित ने बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले, यह सब प्राइवेट में किया। जज ने कहा कि जिस क्षण वो कंटेंट को बाँटने या सार्वजनिक रूप से दिखाने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत धाराएँ लगाई जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि धूम्रपान और शराब पीने की तरह मौजूदा पीढ़ी के लिए पॉर्न देखना भी एक आदत बन गई है।
जज ने कहा था कि इसके लिए सज़ा सुनना समाधान नहीं हो सकता। ‘Gen Z’ इस गंभीर समस्या से जूझ रही है और इसके लिए उन्हें सज़ा देने की बजाए समाज को उन्हें सही सलाह, शिक्षा और काउंसिलिंग करनी चाहिए ताकि वो इस आदत से छुटकारा पाएँ। कोर्ट ने कहा था कि आजकल के किशोर गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ एक बटन टच करने पर चीजें बिना किसी सेंसर के पहुँच रही हैं।

चाइल्ड पॉर्न को लेकर कानून

भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़े कड़े कानून हैं। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी इंटरनेट पर सर्च करना, फोटो या वीडियो बनाना, डाउनलोड करना, उसे देखना और उसे साझा करना कानून अपराध है। ऐसे अपराध में 7 साल तक की सजा का प्रावधान और जुर्माना या दोनों है। यह POCSO ऐक्ट की धारा 14 और 15 तथा IT ऐक्ट की धारा 67B के तहत कानून जुर्म है।
POCSO Act 2012 के धारा 14 और 15 में कहा गया है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए किसी भी बच्चे का इस्तेमाल करने पर 7 साल की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, IT एक्ट की धारा 67B के अनुसार, चाइल्ड न्यूड कंटेंट रखना, ब्राउज करना, डाउनलोड करना, एडवर्टाइज करना, प्रमोट करना और शेयर करना गैरकानूनी है।
पॉक्सो ऐक्ट की धारा 15 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक से जुड़ा कोई भी मैटेरियल साझा करने, प्रकाशित करने या दिखाने के उद्देश्य से अपने पास रखता है और उसे डिलीट नहीं करता है तो उस कम-से-कम पाँच की सख्त सजा हो सकती है। यदि ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल कमर्शियल उद्देश्य के लिए किया जाता है तो 7 साल तक की सजा हो सकती है।
इतना ही नहीं, भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) की धारा 354, 354A, 354B, 354C और 376AB में बाल यौन उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों के लिए सजा है। बाल अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019 में बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता अपराध है। चाइल्ड लेबर (बैन) अधिनियम 2016 में बाल श्रम के साथ-साथ बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता को कानून जुर्म घोषित किया गया है।

केरल : केक खिलाया, पोर्न दिखाया…फिर किया 13 साल के नाबालिग का यौन उत्पीड़न

प्रतीकात्मक तस्वीर
केरल के तिरुवनंतपुरम में एक पादरी ने नाबालिग बच्चे का यौन शोषण कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। केरल पुलिस ने शुक्रवार (19 जनवरी,2024) को कट्टक्कडा के पेंटेकोस्टल चर्च के इस पादरी को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से आरोपित को न्यायायिक हिरासत में भेज दिया।

इस पादरी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 59 साल के इस पादरी की पहचान रविन्द्रनाथ के तौर पर की गई। रविन्द्रनाथ ने 13 साल के बच्चे को पहले अपनी बातों से फुसलाया। इसके बाद उसका यौन शोषण किया।

ये घटना आरोपित को हिरासत में लेने से दो दिन पहले 17 जनवरी 2024 की है। बताते चलें कि इस लड़के को इसकी माँ छोड़ कर चली गई है। वो अपनी अपनी दादी के साथ रहता है।

घटना के दिन बच्चे की दादी अस्पताल गई थीं। इसी का फायदा उठाकर पादरी ने बच्चे को बहकाया- फुसलाया और अपने घर ले गया। घर ले जाकर पादरी ने उसे केक खिलाया। उसने कथित तौर पर उसे टैबलेट पर अश्लील फोटो दिखाईं और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।

दक्षिण भारत में पादरियों के बच्चों और औरतों के यौन शोषण करने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते साल तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक महिला ने नींद की 40 गोलियाँ निगल आत्महत्या की कोशिश की थी। महिला ने पादरी के यौन शोषण से तंग थी।

आरोपित पादरी 39 साल जगन था। उसका महिला से पहचाना चर्च में प्रार्थना के लिए आने-जाने के दौरान हुआ था। इससे पहले मार्च 2023 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में एक पादरी नर्सिंग छात्रा के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

‘2 मिनट के मजे के लिए सेक्स…’: कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा किशोरियों पर की गई थी टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

'दो मिनट के मजे' की जगह 'सेक्स की इच्छा' पर कंट्रोल रखे लड़कियाँ: कलकत्ता हाईकोर्ट (साभार-लाइव लॉ)
कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा किशोरियों को ‘दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचने’ की सलाह देने पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। शीर्ष न्यायालय ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि न्यायाधीशों से उपदेश देने की अपेक्षा नहीं की जाती है। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO के मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग से रेप के दोषी एक युवक को बरी करते यह यह टिप्पणी की थी। युवक को जिससे रेप का दोषी ठहराया गया था, उसका नाबालिग लड़की के साथ ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ रहे थे।

हाईकोर्ट की भाषा पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से बेहद आपत्तिजनक और अनुचित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशोें से ये उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने निजी विचार रखें या भाषण दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने राज्य सरकार
सहित कई लोगों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी या नहीं। बेंच अब इस मामले पर शनिवार (9 दिसंबर 2023) को विचार करेगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए और दो मिनट के आनंद के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। पीठ ने कहा था कि लड़कियाँ अपनी यौन इच्छाओं को नियंत्रित करें, क्योंकि मुश्किल से दो मिनट का सुख पाकर लड़कियाँ समाज की नजरों में गिर जाती हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह युवा लड़कियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने शरीर की अखंडता, गरिमा को बनाएँ रखें। लड़कों को नसीहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लड़कों को भी लड़कियों की गरिमा की इज्जत करनी चाहिए और लड़कों के दिमाग को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वे महिलाओं की इज्जत करें।

हाई कोर्ट ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की थी। इसके साथ ही 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”

कोर्ट ने बताया था यौन इच्छाओं के जागृत होने का कारण

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था, “प्रमुख एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में वृषण (Testicle) और महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से और पुरुषों और महिलाओं दोनों में अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) से थोड़ी मात्रा में स्रावित होता है। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड्स टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, जो मुख्य रूप से (पुरुषों में) सेक्स या कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है।”
विज्ञान की बात करते हुए उच्च न्यायालय ने आगे कहा था, “इसका अस्तित्व शरीर में है, इसलिए जब संबंधित ग्रंथि उत्तेजना से सक्रिय हो जाती है, तो यौन इच्छा जागृत होती है। लेकिन संबंधित जिम्मेदार ग्रंथि का सक्रिय होना स्वचालित नहीं है। क्योंकि इसे हमारी दृष्टि, श्रवण, कामुक सामग्री पढ़ने और विपरीत लिंग के साथ बातचीत से उत्तेजना की आवश्यकता होती है। यौन इच्छा हमारी अपनी क्रियाओं से जागृत होता है।”
कलकत्ता हाईकोर्ट के अनुसार, “किशोरों में सेक्स सामान्य है लेकिन यौन इच्छा या ऐसी इच्छा की उत्तेजना व्यक्ति, शायद पुरुष या महिला, के कुछ कार्यों पर निर्भर होती है। इसलिए, यौन इच्छा बिल्कुल भी सामान्य और आदर्श नहीं है। अगर हम कुछ क्रियाएँ  बंद कर देते हैं, तो यौन इच्छा की उत्तेजना सामान्य नहीं रह जाती, जैसा कि हमारी चर्चा में वकालत की गई है।”  

केरल कोर्ट : माँ द्वारा अपने 2 प्रेमियों से अपनी ही नाबालिग बेटियों का बलात्कार करवाने पर 40 साल की सजा

                                                               प्रतीकात्मक 
कोई माँ इस कदर क्रूर भी हो सकती है शायद कोई कल्पना नहीं कर सकता, लेकिन केरल की एक औरत ने सारी हदें पार करते हुए अपने दो प्रेमियों से बच्चियों का यौन उत्पीड़न ही नहीं करवाया बल्कि उन्हें मानसिक यातनाएँ देने में भी कसर नहीं छोड़ी।

केरल की तिरुवनंतपुरम विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत इस महिला को 40 साल के सख्त कारावास और 20,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

इस केस में 22 गवाहों से पूछताछ की गई और 33 दस्तावेज़ कोर्ट के सामने पेश किए गए। बच्चियों के साथ हो रहे इस हैवानियत भरे व्यवहार का खुलासा चिल्ड्रेन होम्स की काउंसलिंग के दौरान हुआ। दरअसल, महिला का पति मानसिक रूप से बीमार था।

वो बीमार पति को छोड़कर अपने शिशुपालान (Shishupalan) नाम के प्रेमी के साथ रहने चली गई। वो अपनी कक्षा 1 में पढ़ने वाली 7 साल की बेटी को भी अपने साथ ले जाती रही। इस दौरान उसके प्रेमी शिशुपालान ने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। उसका कई बार बेरहमी से रेप किया। इतना की उसके प्राइवेट पार्ट में गहरे जख्म बन गए।

हैरानी की बात है कि उसकी माँ बार-बार बच्ची को प्रेमी के घर ले जाती रही। उसके ही सामने प्रेमी बच्ची का यौन उत्पीड़न करता रहा, लेकिन वो कुछ करना तो दूर प्रेमी के सामने मासूम बेटी का जिस्म परोसती रही। जब बच्ची की 11 साल की बहन घर आई तो उसने अपनी बड़ी बहन को ये बात बताई।

लेकिन महिला का वहशी प्रेमी शिशुपालान उसकी बड़ी बेटी को भी अपना हवस का शिकार बनाता रहा। वह दोनों बच्चियों को यौन उत्पीड़न की बात किसी को भी बताने पर धमकाता रहा।

इस दौरान मौका पाकर बड़ी बहन अपनी छोटी बहन को लेकर भागकर अपनी दादी के घर आ गई। बच्चियों ने दादी को अपने साथ हो रही दरिंदगी के बारे में बताया। इस पर बच्चियों की दादी ने महिला को प्रेमी को छोड़कर घर आने को कहा, लेकिन उसने घर आने को इंकार कर दिया।

इतना ही नहीं वो पहले प्रेमी को छोड़कर दूसरे युवक के साथ रहने चली गई। महिला के नए प्रेमी ने भी दोनों नाबालिग बच्चियों की माँ की इजाजत पर उनके साथ बलात्कार किया। बच्चियों ने इसकी जानकारी भी दादी को दी। इसके बाद दादी ने नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

बच्चियों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। वहीं बच्चियों की दादी ने दोनों बच्चियों को चिल्ड्रेन होम के हवाले कर दिया। वहाँ काउसिलिंग के दौरान बच्चियों ने अपने साथ हुई दरिंदगी और हैवानियत के बारे में बताया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष लोक अभियोजक आरएस विजय मोहन कहा, “इस अपराध के लिए माँ को 40 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अपराध दो लड़कियों, आरोपित की बेटी के साथ दुर्व्यवहार का है। उनका यौन शोषण और उनके साथ क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले प्रेमी शिशुपालान ने लड़की के साथ तब बेरहमी से बलात्कार किया जब वह सात साल की थी और पहली कक्षा में पढ़ रही थी। उस वक्त पीड़ित बच्ची ने आरोपित माँ को पूरी घटना बताई थी, लेकिन उसने कुछ नहीं किया था। उलटा उसने दूसरे प्रेमी को पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार करने में मदद की।

जज आर रेखा ने पाया कि आरोपित का रवैया पूरी तरह से मातृत्व के लिए शर्म की बात है और वह माफी की हकदार नहीं है और उसे अधिकतम सजा दी गई। ट्रायल के दौरान पहले आरोपित शिशुपालन ने आत्महत्या कर ली। इसलिए मुकदमा सिर्फ माँ के खिलाफ ही चला। बच्चियाँ फिलहाल चिल्ड्रेन होम में रह रही हैं।

कर्नाटक : चुनाव के समय राहुल गाँधी ने जिस मठाधीश से ली थी दीक्षा, पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार

कर्नाटक पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मठाधीश शिवमूर्ति को किया गिरफ्तार (साभार- ETV/टाइम्स नाउ)
कर्नाटक पुलिस ने चित्रदुर्ग मुरुगराजेंद्र बृहन मठ के महंत शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (20 नवंबर, 2023) को यह गिरफ्तारी पॉक्सो एक्ट के तहत हुई है। लिंगायत धर्म के महंत के खिलाफ चित्रदुर्ग की अदालत ने गैरजमानती वारंट जारी किया था। सोमवार को ही जारी हुए इस वारंट में पुलिस को आदेश दिया गया था कि वो मंगलवार (21 नवंबर, 2023) तक महंत को अदालत में पेश करें। महंत शिवमूर्ति शरण पर पहले से ही बच्चों के यौन शोषण के 2 केस दर्ज हैं जिसमें वो जमानत पर चल रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवमूर्ति शरण के खिलाफ चित्रदुर्ग में न्यायाधीश बी के कोमला ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। लगभग 24 घंटों की मिली मोहलत में पुलिस ने लिंगायत महंत को महज कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। शिवमूर्ति की गिरफ्तारी दावनगेरे के विरक्ता मठ से हुई है। आरोपित महंत को 4 दिन पहले ही पॉक्सो के एक अन्य केस में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कड़े प्रावधानों के तहत जमानत दी थी। इन शर्तों में जाँच पूरी होने तक चित्रदुर्ग में न घुसने, सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न करने के साथ 2 लाख के मुचलके का भी आदेश दिया था।

जिन महंत शिवमूर्ति शरण को आज कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के 2 मामले दर्ज हैं। इन दोनों केसों की जाँच के दौरान पुलिस ने 1 नवंबर, 2022 को शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया था। लगभग 1 साल बाद कर्नाटक हाईकोर्ट से पहले केस में जमानत मिलने के बाद महंत 16 नवंबर, 2023 को जेल से रिहा हुए थे। रिहाई के महज 4 दिनों के बाद पॉक्सो के दूसरे मामले में जमानत न होने की वजह से शिवमूर्ति शरण को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

पहले भी दर्ज है बच्चों के यौन शोषण की शिकायतें

पहला केस ओदानदी सेवा संस्थान नाम के NGO ने मैसूर के नजरबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाया था। इस FIR में शिवमूर्ति पर आरोप लगा था कि उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले दलित समुदाय के नाबालिग छात्रों का यौन शोषण किया था। तब पुलिस ने पॉक्सो और SC/ST एक्ट में FIR दर्ज की थी। बाद में यह केस जाँच और कार्रवाई के लिए चित्रदुर्ग ग्रामीण पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया था।
महंत शिवमूर्ति शरण के लिए दूसरा केस 2 नाबालिग लड़कियों की माँ ने दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि साल 2019 से 2022 तक जब उनकी बेटियाँ हॉस्टल में थीं तब शिवमूर्ति शरण ने उनका यौन शोषण किया था। यह केस भी पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था। इस केस में शिवमूर्ति के साथ कनिष्ठ द्रष्टा बसवदित्य और परमशिवैया, गंगाधर, महालिंगा और करिबासप्पा भी आरोपित किए गए थे। जाँच में कोई सबूत न मिलने की बात कह कर पुलिस ने बाद में परमशिवैया का नाम केस से निकाल दिया था।

राहुल गाँधी को दी थी दीक्षा

पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तारी शिवमूर्ति शरण कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को कर्नाटक चुनाव के समय दीक्षा भी दे चुके हैं। अपनी मुरुघा मठ की यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने मठ प्रबंधन से निवेदन किया था कि वो वहाँ से किसी को भेज कर उन्हें शिवयोगा की शिक्षा दिलाएँ। तब शिवमूर्ति शरण ने राहुल गाँधी का पारम्परिक तौर पर स्वागत भी किया था।

मध्य प्रदेश : सड़क पर अर्धनग्न बच्ची, खून से लथपथ कपड़े, प्राइवेट पार्ट पर घाव… बलात्कार के बाद 8 किलोमीटर भटकती रही, बताया - माँ से भी हुई दरिंदगी

                                                                                              प्रतीकात्मक चित्र साभार: Leonardo AI
मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक नाबालिग लड़की से हैवानियत किए जाने का मामला सामने आया है। अर्धनग्न अवस्था में 12 वर्षीया बच्ची शहर की सड़कों पर काफी देर तक भटकते हुए लोगों से मदद की गुहार लगाती रही। उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिख रहे थे। पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसकी माँ के साथ भी गलत काम हुआ है। बच्ची मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की बताई जा रही है।

केस दर्ज करने के बाद जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। एक ऑटो ड्राइवर को भी हिरासत में लिया गया है। घटना सोमवार (25 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला थाना क्षेत्र महाकाल का है। सोमवार को पुलिस को यहाँ के बड़नगर रोड स्थित दांडी आश्रम के पास एक घायल बच्ची के पड़े होने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँची और सूचना सही पाई गई। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे। वह अर्धनग्न अवस्था में थी और कपड़े खून से सने हुए थे। पुलिस ने पीड़िता को फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया। बच्ची बेहद डरी हुई थी। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थी। बताया जा रहा है कि उसने अपनी माँ के साथ भी दरिंदगी होने की जानकारी दी। हालाँकि, पीड़िता की माँ का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।

पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। बच्ची को खून पुलिस वालों ने दिया। बच्ची को बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया है। वहाँ मेडिकल के बाद डॉक्टरों ने पीड़िता के साथ रेप होने की पुष्टि की। दूसरी तरफ CCTV फुटेज खँगाले जाने लगे। इन फुटेज में बच्ची घंटों से उज्जैन के अलग-अलग इलाकों में बदहवास हो कर भटकती और लोगों से मदद माँगती दिखाई दे रही है। लगभग 8 किलोमीटर की दूरी नाबालिग पीड़िता ने पैदल ही घायल हालत में तय की। इस दौरान वह सांवराखेड़ी मार्ग, तिरुपति ड्रीम्स, हाटकेश्वर विहार कॉलोनी सहित चिंतामण ब्रिज मार्ग पर भटकती रही।

पुलिस ने अपनी जाँच का दायरा बढ़ाते हुए 72 घंटों की CCTV फुटेज निकलवाई। इस फुटेज में एक व्यक्ति बच्ची के साथ हाटकेश्वर मार्ग पर दिखा। जाँच के दौरान वह संदिग्ध ऑटो ड्राइवर निकला जिसे हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। अन्य अन्य फुटेज सोमवार की सुबह लगभग 5 बज कर 52 मिनट का मिला है। इस फुटेज में उज्जैन की ड्रीम्स कॉलोनी से हड़बड़ा कर गुजर रही बच्ची से एक वृद्ध व्यक्ति ने सवाल-जवाब किया। बच्ची ने बस इतना बताया कि कुछ लोग उसके पीछे लगे हैं। इतना कह कर वो आगे बढ़ गई।

अभी तक हुई जाँच में पीड़िता के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के किसी हिस्से की निवासी होने की अपुष्ट जानकारी मिली है। मध्य प्रदेश पुलिस ने पुष्टि के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को सम्पर्क किया है। पीड़िता के मूल पते की तस्दीक करवाई जा रही है। अभी तक पीड़िता की माँ का भी कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस बच्ची के ठीक होने की प्रतीक्षा कर रही है। पीड़िता उज्जैन क्यों, कहाँ और किसके पास आई थी इसकी भी जानकारी अभी तक पुलिस को नहीं मिल पाई है। केस भी अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया है।

छत्तीसगढ़ : अरबी की ट्यूशन के लिए जाने वाली 9 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण करते मौलवी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

            नाबालिग बच्ची से अश्लीलता के आरोप में मदरसे का मौलवी गिरफ्तार (चित्र साभार- The CG Khabar)
छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक नाबालिग बच्चे के साथ अश्लीलता का मामला सामने आया है। आरोप मदरसे में अरबी पढ़ाने वाले एक मौलवी पर लगा है जिसका नाम मोहम्मद मेराज है। आरोप है कि मोहम्मद मेराज पिछले काफी समय से 9 साल की पीड़िता को गंदे तरीके से छू रहा था और गंदी-गंदी बातें किया करता था। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में केस दर्ज करते हुए मौलवी मेराज को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (18 फरवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सुपेला थानाक्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि क्लास 4 में पढ़ने वाली पीड़िता बच्ची मौलवी के पास अरबी भाषा का ट्यूशन पढ़ने जाया करती थी। यहाँ पढ़ाने वाला मौलवी मेराज काफी समय से पीड़िता से बैड टच कर रहा था। मौलवी की इस हरकत से बच्ची न सिर्फ गुमसुम बल्कि डरी-सहमी भी रहने लगी थी। आख़िरकार एक दिन उसने मौलवी की करतूत अपने घर वालों से बता दी। मामले की जानकारी होते ही बच्ची के अब्बा उसे ले कर थाने पहुँचे और मोहम्मद मेराज के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि मौलवी मोहम्मद मेराज नाबालिग पीड़िता से गंदी-गंदी बातें भी किया करता था। सुपेला थाना पुलिस ने पीड़िता के अब्बा की शिकायत पर मेराज के खिलाफ IPC की धारा 354 और 509 के साथ 12 पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया। पुलिस अधीक्षक दुर्ग के मुताबिक, आरोपित मौलवी मेराज को गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है रही है। पुलिस आरोपों के समर्थन में सबूत भी जुटा रही है। पुलिस ने परिजनों से भी ऐसे मामलों में थोड़ा अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।

इसी माह फरवरी में देहरादून की एक अदालत ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपित मदरसे मौलाना को 20 साल की कैद की सजा सुनाई थी। फरवरी महीने में ही सहारनपुर के ही एक मदरसे में पढ़ने वाले एक छात्र ने दूसरे छात्र से रेप के प्रयास में विफल रहने पर उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी थी। एक अन्य घटनाक्रम में जनवरी 2023 में गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में एक मदरसे के हाफिज पर 12 साल के नाबालिग छात्र से अप्राकृतिक कुकर्म का आरोप लगा था।

जनवरी 2023 में ही बिहार के नवादा जिले के एक मदरसे में पढ़ने गई नाबालिग लड़की को मौलवी शहादत हुसैन अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था।

ओडिशा : रैगिंग के नाम पर नाबालिग लड़की को KISS करवाया, हँसते रहे सब… : BJD का छात्र नेता है आरोपित

ओडिशा में रैगिंग के नाम पर नाबालिग लड़की को कराया किस (फोटो साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
ओडिशा के गंजाम जिले के एक जूनियर कॉलेज में रैगिंग के नाम पर नाबालिग लड़की और लड़के को जबरन किस कराने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद 5 छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो नाबालिग हैं। वहीं, कॉलेज ने घटना में शामिल छात्रों को कॉलेज से निष्काषित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रैगिंग और यौन उत्पीड़न का यह मामला गंजाम जिले के बेरहामपुर स्थित बिनायक आचार्य गवर्नमेंट कॉलेज बेरहामपुर का है। इस घटना के वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि आरोपित छात्र कॉलेज के जूनियर लड़के को एक नाबालिग लड़की को किस करने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके बाद, जूनियर लड़का लड़की को किस करता दिखाई देता है।

हालाँकि, बात यहीं पर खत्म नहीं होती। जब लड़का, वहाँ से जाने लगता है आरोपित छात्र डंडा दिखाकर उसे रोकता है। साथ ही, जब लड़की उठकर जाने लगती है तो आरोपित उसे भी डंडा दिखाता है और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए उसे वापस बैठा देता है। यही नहीं, वह जूनियर लड़के को जमीन पर बैठाकर पीटता हुआ भी दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में, कुछ लड़के और लड़कियाँ भी दिखाई दे रहीं हैं, लेकिन घटना का विरोध करने की बजाय सभी हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस मामले पर, कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रमिला खडंगा ने कहा है कि रैगिंग में शामिल हुए छात्रों की पहचान हो गई है। एंटी-रैगिंग टीम की सिफारिश के बाद इसमें संलिप्त 12 छात्रों को कॉलेज से निष्कासित किया गया है। 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन, ओडिशा बोर्ड को एक पत्र भी लिखेगा।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद, स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपित छात्रों को हिरासत में लिया है। इसमें, दो नाबालिग और तीन बालिग छात्र हैं। इस घटना का मुख्य आरोपित अभिषेक नाहक है, जो यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में जमानत पर है। आरोपित अभिषेक ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी ‘बीजू जनता दल’ के छात्र संगठन और कैंपस समिति का सदस्य है।

इस पूरी घटना पर बेरहामपुर एसपी सरबन विवेक एम का कहना है कि आरोपित छात्रों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो एक्ट) अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सिर्फ रैगिंग का मामला नहीं है, बल्कि पीड़ित छात्रा के यौन उत्पीड़न का भी मामला है।

राजस्थान : कांग्रेस विधायक के बेटे द्वारा 10वीं क्लास की लड़की से गैंगरेप, … खुद विधायक पर विधवा के साथ कई बार रेप का केस

                                                 प्रतीकत्मक चित्र
भाजपा शासित किसी भी राज्य में होने वाले बलात्कार पर भाजपा विरोधी कांग्रेस शासित राजस्थान में हो रहे बलात्कारों पर क्यों खामोश हैं?  
राजस्थान के दौसा जिले में कांग्रेस  विधायक जौहरी लाल मीणा के बेटे पर नाबालिग लड़की से गैंगरेप का आरोप लगा है। इसी मामले में 4 अन्य लोग आरोपित किए गए हैं। इन सभी पर पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाने और उसके बहाने ब्लैकमेल करने का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। सभी आरोपितों पर पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। घटना 24 फरवरी 2021 की बताई जा रही है।

स्थानीय मंडावर थाना प्रभारी के मुताबिक, “विधायक के आरोपित बेटे का नाम दीपक है। उनके साथ एक नेतराम हैं। इन्होंने मेरे थानाक्षेत्र में आने वाले समलेटी पैलेस होटल में नशे का पदार्थ खिला कर सामूहिक गैंगरेप किया। इस दौरान उसके (पीड़िता) के नग्न फोटो खींच लिए। उन्होंने दुबारा से वो अश्लील फोटो दिखा कर पीड़िता को ब्लैकमेल किया। इस दौरान इन्होंने पीड़िता के घर में रखे 15 लाख 40 हजार रुपए और जेवरात मँगवा लिए। साथ ही शिकायत करने पर परिवार को जान से मार देने की धमकी दी जाती रही। इस मामले की जाँच CO (DSP) महुवा द्वारा की जा रही है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता की उम्र 15 साल है। वो कक्षा 10 की छात्रा हैं। पीड़िता अलवर के थूमड़ा निवासी विवेक शर्मा से फेसबुक के माध्यम से मिली थी। इसके बाद 24 फरवरी 2021 को विवेक शर्मा ने पीड़िता के साथ होटल में गैंगरेप किया था। इसमें कांग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा का बेटा दीपक व 2 अन्य आरोपित भी शामिल थे। रेप का वीडियो मुख्य आरोपित विवेक ने ही बनाया था। इस वीडियो को दिखा कर विवेक ने कई बार पीड़िता से रेप किया और पैसे माँगे।

मई 2021 में पीड़िता के घर में शादी थी। इसी दौरान विवेक की धमकियों से डर कर पीड़िता ने चुपके से घर में शादी के लिए रखे 15 लाख 40 हजार रुपए विवेक को दे दिए। इस केस की शिकायत अलवर के रैणी थाने में दर्ज हुई थी। पुलिस जाँच पड़ताल करती हुई मुख्य आरोपित विवेक तक पहुँच गई। विवेक ने रुपए पीड़िता द्वारा देना कबूल कर लिया।

पुलिस के सामने पैसे लेने की बात स्वीकारने के बाद भी विवेक द्वारा पीड़िता को ब्लैकमेल करना और रेप करना जारी रहा। जब पीड़िता की तबियत अक्सर खराब रहने लगी, तब उसकी माँ ने 24 मार्च 2022 को इसका कारण पूछा। आखिरकार उसने सब कुछ अपनी माँ को सच-सच बता दिया। तब जाकर पीड़िता के परिजनों ने इस मामले में FIR दर्ज करवाई।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस के विधायक जौहरी लाल मीणा ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा, “मुझे इस केस की जानकारी किसी ने फोन पर दी है। मेरे बेटे को झूठा फँसाया जा रहा है और वो निर्दोष है।”

भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

कांग्रेस विधायक के बेटे पर गैंगरेप का आरोप लगने के बाद राजस्थान से भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा:
“लोग इस घटना से राजस्थान के हालात का अंदाजा लगाएँ। राजस्थान यह सब देखने का आदी नहीं है फिर भी पूरे प्रदेश में ऐसी घटनाएँ आम हो चुकी हैं। आम अपराधी तो दूर, आज कांग्रेस की सरकार में खुद सरकार से जुड़े लोग ऐसे कृत्यों में शामिल हैं। हमारी बहन बेटियाँ असुरक्षित महसूस कर रही हैं। राजस्थान खुद को शर्मशार महसूस कर रहा है। समाज में कड़ा संदेश देने के लिए विधायक के आरोपित पुत्र पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने प्रियंका गाँधी को भी अपने वीडियो ट्वीट में टैग किया है। प्रियंका गाँधी कांग्रेस की वही नेता हैं, जो उत्तर प्रदेश (वो भी सिर्फ चुनावों के समय) में लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ के गीत गाते चलती थीं।

खुद विधायक जौहरी लाल पर लग चुके हैं रेप के आरोप

अपने बेटे को निर्दोष बता रहे कांग्रेस विधायक जौहरी लाल खुद भी रेप केस में आरोपित रह चुके हैं। अप्रैल 2019 में एक विधवा महिला ने उन पर अपने साथ कई बार रेप किए जाने का आरोप लगाया था। तब जौहरी लाल पर धारा 328, 384 और 376 IPC के तहत केस दर्ज हुआ था। विधायक का एक अन्य वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो उन दलितों के लिए काम न करने को कह रहे थे, जिन्होंने उनको वोट नहीं दिया था।