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प्रतीकात्मक |
केरल की तिरुवनंतपुरम विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत इस महिला को 40 साल के सख्त कारावास और 20,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
इस केस में 22 गवाहों से पूछताछ की गई और 33 दस्तावेज़ कोर्ट के सामने पेश किए गए। बच्चियों के साथ हो रहे इस हैवानियत भरे व्यवहार का खुलासा चिल्ड्रेन होम्स की काउंसलिंग के दौरान हुआ। दरअसल, महिला का पति मानसिक रूप से बीमार था।
वो बीमार पति को छोड़कर अपने शिशुपालान (Shishupalan) नाम के प्रेमी के साथ रहने चली गई। वो अपनी कक्षा 1 में पढ़ने वाली 7 साल की बेटी को भी अपने साथ ले जाती रही। इस दौरान उसके प्रेमी शिशुपालान ने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। उसका कई बार बेरहमी से रेप किया। इतना की उसके प्राइवेट पार्ट में गहरे जख्म बन गए।
हैरानी की बात है कि उसकी माँ बार-बार बच्ची को प्रेमी के घर ले जाती रही। उसके ही सामने प्रेमी बच्ची का यौन उत्पीड़न करता रहा, लेकिन वो कुछ करना तो दूर प्रेमी के सामने मासूम बेटी का जिस्म परोसती रही। जब बच्ची की 11 साल की बहन घर आई तो उसने अपनी बड़ी बहन को ये बात बताई।
लेकिन महिला का वहशी प्रेमी शिशुपालान उसकी बड़ी बेटी को भी अपना हवस का शिकार बनाता रहा। वह दोनों बच्चियों को यौन उत्पीड़न की बात किसी को भी बताने पर धमकाता रहा।
इस दौरान मौका पाकर बड़ी बहन अपनी छोटी बहन को लेकर भागकर अपनी दादी के घर आ गई। बच्चियों ने दादी को अपने साथ हो रही दरिंदगी के बारे में बताया। इस पर बच्चियों की दादी ने महिला को प्रेमी को छोड़कर घर आने को कहा, लेकिन उसने घर आने को इंकार कर दिया।
इतना ही नहीं वो पहले प्रेमी को छोड़कर दूसरे युवक के साथ रहने चली गई। महिला के नए प्रेमी ने भी दोनों नाबालिग बच्चियों की माँ की इजाजत पर उनके साथ बलात्कार किया। बच्चियों ने इसकी जानकारी भी दादी को दी। इसके बाद दादी ने नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बच्चियों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। वहीं बच्चियों की दादी ने दोनों बच्चियों को चिल्ड्रेन होम के हवाले कर दिया। वहाँ काउसिलिंग के दौरान बच्चियों ने अपने साथ हुई दरिंदगी और हैवानियत के बारे में बताया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष लोक अभियोजक आरएस विजय मोहन कहा, “इस अपराध के लिए माँ को 40 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अपराध दो लड़कियों, आरोपित की बेटी के साथ दुर्व्यवहार का है। उनका यौन शोषण और उनके साथ क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “पहले प्रेमी शिशुपालान ने लड़की के साथ तब बेरहमी से बलात्कार किया जब वह सात साल की थी और पहली कक्षा में पढ़ रही थी। उस वक्त पीड़ित बच्ची ने आरोपित माँ को पूरी घटना बताई थी, लेकिन उसने कुछ नहीं किया था। उलटा उसने दूसरे प्रेमी को पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार करने में मदद की।
जज आर रेखा ने पाया कि आरोपित का रवैया पूरी तरह से मातृत्व के लिए शर्म की बात है और वह माफी की हकदार नहीं है और उसे अधिकतम सजा दी गई। ट्रायल के दौरान पहले आरोपित शिशुपालन ने आत्महत्या कर ली। इसलिए मुकदमा सिर्फ माँ के खिलाफ ही चला। बच्चियाँ फिलहाल चिल्ड्रेन होम में रह रही हैं।
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