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जंतर-मंतर हिंसा: शांतिपूर्ण आंदोलन के दावों के बीच लहूलुहान वर्दी का सच; आयोजकों को हिरासत में लेकर पूछा जाए "गुंडों को किसने बुलाया?"


देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर, जो लंबे समय से जन-आंदोलनों और असहमति की आवाज़ उठाने का केंद्र रहा है, हाल ही में एक भीषण हिंसात्मक टकराव का गवाह बना। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पेपर लीक को लेकर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया था। हालांकि, ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान उग्र हुई भीड़ और उसके बाद सामने आए तथ्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब तक आयोजकों को हिरासत में लेकर सख्ती से यह नहीं पूछा जाए कि छात्रों के प्रदर्शन में गुंडों का क्या काम था? किसके कहने पर गुंडे आए? दिल्ली हिन्दू दंगा के आरोपितों की रिहाई की आवाज़ किसके कहने पर उठी थी? ये प्रदर्शन NEET को लेकर हुआ था या इन आरोपियों की रिहाई के लिए? क्या ये प्रदर्शन सनातन को बदनाम करने के लिए था? क्योकि जिस तरह की हिंसा हुई वह कोई साधारण हिंसा नहीं थी, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए हंगामे की तरह ही था। पुलिस तो अपना काम कर रही है लेकिन निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को इस प्रायोजित हिंसा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।     

प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों पर जानलेवा हमले हुए, जिनमें 180 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस दौरान भारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े गए, पत्थरबाजी हुई और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया। इस पूरी घटना ने उस समय एक नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया, जब ड्यूटी पर घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती साझा की।

 घायलों के परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रों के अधिकारों की आड़ में आए उपद्रवियों द्वारा ऑन-ड्यूटी सुरक्षा बलों पर बर्बर हमले किए गए और बाद में सोशल मीडिया पर पुलिस को ही खलनायक बनाकर पेश करने की कोशिश की गई। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि वर्दी पहनने का मतलब मानवाधिकारों का त्याग करना नहीं होता। इस मामले में अब पुलिस कर्मियों के परिवारों ने भी देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जिससे इस मुद्दे ने सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से एक बड़ा आकार ले लिया है।

घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की आपबीती: “जब खून से लथपथ घर पहुंचे हमारे अपने”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों ने अपनी आपबीती साझा की। सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों, अधिकारियों की पत्नियों और युवा छात्रों ने मीडिया के सामने घटना वाले दिन के जो संस्मरण रखे, वे दिल दहला देने वाले थे।

मरीन कमांडो रहे सब-इंस्पेक्टर की बेटी: “पिता की लिंचिंग की कोशिश की गई”
नेवी में 15 वर्षों तक मरीन कमांडो के रूप में देश सेवा करने के बाद दिल्ली पुलिस में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता मुख्य बैरिकेड्स पर तैनात थे। उन्होंने कहा: “मेरे पिता अक्सर कहते थे कि यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। 25 तारीख को दोपहर लगभग 2 बजे जंतर-मंतर मंच के पास उग्र भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और उनकी लिंचिंग की कोशिश की। वह RML अस्पताल में चार घंटे तक बेहोश रहे और जब देर रात उनके साथी उन्हें घर लाए, तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी… जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो देखा कि मेरे ही पिता को क्रिमिनल कहा जा रहा था। जिन लोगों ने उन पर हमला किया, वही सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसलिए हमने भी न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।”

सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने यह भी दोहराया कि उनके पिता अक्सर घर आकर यह चिंता जताते थे कि आंदोलन को उग्र तत्वों द्वारा हायजैक कर लिया गया है। 25 तारीख को हुए लिंचिंग के प्रयास और 4 घंटे तक बेहोश रहने के बाद जब उन्हें घर लाया गया, तो परिवार पूरी तरह सदमे में था।

घायल एसीपी (ACP) की पत्नी: “दो साल की बच्ची और मेरे लिए वह पल दर्दनाक था”
20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए एक घायल एसीपी की पत्नी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा: 20 जुलाई की देर रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर लौटे, तो वह क्षण मेरे और हमारी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। हम यहां अपने परिवार का दर्द साझा करने आए हैं क्योंकि पुलिसकर्मियों के परिवारों का भी इस देश में न्याय पाने का बराबर अधिकार है।”

युवा पीढ़ी की अपील: “हम भी जेन-जी हैं, हमारी बात भी सुनी जाए”
हिंसा में घायल जवानों के बच्चों, जो स्वयं छात्र और जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का हिस्सा हैं, ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने देश के नागरिकों और मीडिया से अपील की कि वे हिंसा का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों का दर्द भी समझें।

1971 युद्ध के दिग्गज के पोते व ASI के बेटे का बयान: “अचानक हुआ जानलेवा पथराव”
चार वीरता पुरस्कार प्राप्त कर चुके एक एएसआई (ASI) के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके दादाजी BSF में थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने बताया: “मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे। अचानक उग्र भीड़ ने बिना किसी उकसावे के पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक भारी पत्थर उनके सिर पर लगा। जब मैंने अस्पताल में उनकी तस्वीर देखी, तो उनके सिर पर चार टांके लगे थे।”

33 साल से सेवारत ASI की पत्नी: “गमले और कांच की बोतलें फेंकी गईं”
33 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत एक अन्य एएसआई की पत्नी ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए तैनात थे। “शाम को मुझे खबर मिली कि वे LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, जूते और कांच की बोतलें फेंकी और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ डाले।”

राहुल गांधी से पूछा गया सवाल, तो कहा: “आप बीजेपी से हैं”
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मीडियाकर्मियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से इस संबंध में प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो एक नया विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने सवाल उठाया था कि जिस संसद की रक्षा करते हुए पुलिसकर्मी घायल हुए, उन्हें ‘गुंडे’ कैसे कहा जा सकता है। हालांकि, जब एक पत्रकार ने इस बाबत राहुल गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने सवाल का जवाब देने के बजाय पत्रकार पर ही तंज कसते हुए कह दिया कि “आप बीजेपी से हैं।” आलोचकों और सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया जा रहा है कि जब भी कोई सवाल राजनीतिक रूप से असुविधाजनक होता है, तो पत्रकारों पर किसी खास पार्टी का होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस वाकये के बाद प्रेस की आजादी के बड़े-बड़े दावे करने वाली विपक्षी राजनीति और उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

CJP का दावा बनाम पुलिस का पक्ष
जंतर-मंतर पर घटित इस घटनाक्रम ने आयोजकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों और पुलिस प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए जमीनी तथ्यों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर दिया है।

CJP और आयोजकों का दावा: आयोजकों का तर्क है कि उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में सुधारों और छात्र हितों को लेकर पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे छात्र घायल हुए।

दिल्ली पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष: पुलिस जांच और डिजिटल सर्विलांस के आंकड़ों के अनुसार, भीड़ की आड़ में कई उग्र तत्व शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जब भीड़ ने संसद भवन की ओर जबरन बढ़ने और सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुपातिक बल प्रयोग अनिवार्य हो गया था।

सुरक्षा बलों के मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट की कानूनी कार्यवाही
जंतर-मंतर हिंसा का मामला अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले ने सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों पर एक राष्ट्रीय कानूनी बहस शुरू कर दी है:

अनुच्छेद 21 और ऑन-ड्यूटी जवानों के अधिकार: याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और शारीरिक सुरक्षा का अधिकार) जितना आम नागरिकों पर लागू होता है, उतना ही ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों पर भी लागू होता है। भीड़ द्वारा जानलेवा हमला करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, ड्रोन फुटेज और बॉडी-वर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है।

आयोजकों की जवाबदेही: कोर्ट इस पहलू पर भी विचार कर रहा है कि यदि अनुमति प्राप्त प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, तो आयोजकों की नागरिक व आपराधिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में आंदोलनों की आड़ में कानून-व्यवस्था को नुकसान न पहुंचाया जा सके।

बिहार : कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान में दे-दनादन ; पूर्व MLC अजय सिंह घायल, सुनील सिंह का फटा सिर

                                            कांग्रेस ऑफिस में दो गुटों में हिंसक भिड़ंत (साभार पत्रिका) 
बिहार के भोजपुर जिले में गुरुवार(10 जुलाई 2025) को कांग्रेस पार्टी के दो गुटों में भयंकर मारपीट हुई। यह हंगामा कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान हुआ। इस मारपीट में पार्टी के नेता शिवकुमार सिंह के बेटे और कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील कुमार सिंह का सिर भी फट गया है।

भोजपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और छत्तीसगढ़ के भिलाई विधानसभा के विधायक देवेंद्र यादव के आगमन पर आयोजित अभिनंदन एवं स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी बीच दो गुटों ने आपस में मारपीट शुरु कर दी। इसी दौरान दो गुटों के बीच मारपीट होने लगी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है।

इसमें कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लात-घूसे चलाते दिखाई दे रहें हैं। हमले में गंभीर रुप से घायल सुनील कुमार ने बताया कि वे बीच-बचाव कर रहे थे। इस दौरान करीब 10 लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और गाली-गलौज करते हुए उनके सिर पर ईंट से हमला कर दिया। नवादा थानाध्यक्ष विपिन बिहारी ने बताया कि आवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अवलोकन करें:-

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक चल रही थी। इसी दौरान दोनों गुटों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। मारपीट में सुनील कुमार सिंह का सिर फट गया, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद पूर्व एमएलसी अजय सिंह अपने घायल समर्थक के साथ नवादा थाना पहुंचे और आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। इस घटना ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

चुनाव आते ही चोटिल होने की नौटंकीबाज ममता की नौटंकी शुरू

SSKM अस्पताल के डायरेक्टर ने कहा है कि CM ममता को पीछे से धक्का लगा था (साभार: ANI & AITCOffical/X)
ममता को यह चोट लोकसभा चुनावों के ऐलान से पहले लगी है। ऐसे में उनकी पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी चोटिल हो गई थीं और उनके कई कार्यक्रम रद्द करने पड़े थे। तब उनके पाँव में प्लास्टर चढ़ाया गया था और उन्होंने व्हीलचेयर पर ही चुनाव प्रचार पूरा किया था। लेकिन मतदान संपन्न होते ही व्हीलचेयर गायब हो गयी। यानि विधानसभा चुनाव में होती हार देख, सहानुभूति बटोरने पांव चोटिल होने नौटंकी की थी। 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को कल (14 मार्च, 2024) शाम माथे और नाक पर चोट पीछे से धक्का दिए जाने के कारण लगी थी। यह जानकारी SSKM अस्पताल के डायरेक्टर ने दी है, जहाँ CM ममता का इलाज हुआ था। पीएम मोदी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

SSKM अस्पताल के डायरेक्टर मोनिमॉय बंदोपाध्याय ने बताया, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री आज शाम लगभग 07:30 बजे हमारे अस्पताल में आई थीं। उन्होंने अपने घर पर पीछे से धक्का लगने के कारण गिरने की सूचना दी। उन्हें माथे पर चोट लगी थी और साथ ही नाक पर कटे हुए का निशान था। उनके काफी खून बह रहा था। उनके आने के बाद न्यूरोसर्जरी के विभागाध्यक्ष, मेडिसिन के डॉक्टर और हमारे संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा उनकी जाँच की गई।”

CM ममता को दिए गए इलाज के विषय में बंदोपाध्याय ने बताया, “उनके माथे पर तीन और नाक पर एक टांका लगाया गया और साथ ही में पट्टी कर दी गई थी। उनकी CT स्कैन और ECG जैसी जाँच भी की गईं थी।” उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने CM ममता को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी, जिससे उनकी देखरेख की जा सके, हालाँकि वह घर चली गईं।”

ममता की भाभी और TMC पार्षद काजरी बनर्जी ने भी धक्का दिए जाने की बात की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया ”उन्हें पीछे से धक्का दिया गया था।” ममता के साथ काजरी बनर्जी भी अस्पताल गईं थी। उनके पति कार्तिक बनर्जी ने कहा कि मैं उस समय घर पर नहीं था।

ममता को चोट लगने के मामले में अब कोलकाता की लालबाजार थाने की पुलिस जाँच करेगी। वह आज मुख्यमंत्री आवास जाएगी। CM ममता के बेडरूम में भी आने जाने वालों को सूची टियर हो रही है। धक्के के एंगल पर जाँच हो रही है कि उन्हें धक्का कैसे लगा?

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की कल शाम को चोटिल होने की तस्वीरें सामने आई थीं। तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने उनकी दो तस्वीरें जारी करके यह जानकारी दी थी कि वह गंभीर रूप से चोटिल हैं। पार्टी द्वारा जारी की गई फोटो में CM ममता के माथे से खून बहता दिखा था और साथ ही नाक पर भी चोट लगी हुई थी।

ममता को लगी चोट को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके जल्दी स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं ममता दीदी के जल्द स्वस्थ होने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करता हूँ।” पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

मध्य प्रदेश : सड़क पर अर्धनग्न बच्ची, खून से लथपथ कपड़े, प्राइवेट पार्ट पर घाव… बलात्कार के बाद 8 किलोमीटर भटकती रही, बताया - माँ से भी हुई दरिंदगी

                                                                                              प्रतीकात्मक चित्र साभार: Leonardo AI
मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक नाबालिग लड़की से हैवानियत किए जाने का मामला सामने आया है। अर्धनग्न अवस्था में 12 वर्षीया बच्ची शहर की सड़कों पर काफी देर तक भटकते हुए लोगों से मदद की गुहार लगाती रही। उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिख रहे थे। पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसकी माँ के साथ भी गलत काम हुआ है। बच्ची मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की बताई जा रही है।

केस दर्ज करने के बाद जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। एक ऑटो ड्राइवर को भी हिरासत में लिया गया है। घटना सोमवार (25 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला थाना क्षेत्र महाकाल का है। सोमवार को पुलिस को यहाँ के बड़नगर रोड स्थित दांडी आश्रम के पास एक घायल बच्ची के पड़े होने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँची और सूचना सही पाई गई। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे। वह अर्धनग्न अवस्था में थी और कपड़े खून से सने हुए थे। पुलिस ने पीड़िता को फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया। बच्ची बेहद डरी हुई थी। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थी। बताया जा रहा है कि उसने अपनी माँ के साथ भी दरिंदगी होने की जानकारी दी। हालाँकि, पीड़िता की माँ का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।

पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। बच्ची को खून पुलिस वालों ने दिया। बच्ची को बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया है। वहाँ मेडिकल के बाद डॉक्टरों ने पीड़िता के साथ रेप होने की पुष्टि की। दूसरी तरफ CCTV फुटेज खँगाले जाने लगे। इन फुटेज में बच्ची घंटों से उज्जैन के अलग-अलग इलाकों में बदहवास हो कर भटकती और लोगों से मदद माँगती दिखाई दे रही है। लगभग 8 किलोमीटर की दूरी नाबालिग पीड़िता ने पैदल ही घायल हालत में तय की। इस दौरान वह सांवराखेड़ी मार्ग, तिरुपति ड्रीम्स, हाटकेश्वर विहार कॉलोनी सहित चिंतामण ब्रिज मार्ग पर भटकती रही।

पुलिस ने अपनी जाँच का दायरा बढ़ाते हुए 72 घंटों की CCTV फुटेज निकलवाई। इस फुटेज में एक व्यक्ति बच्ची के साथ हाटकेश्वर मार्ग पर दिखा। जाँच के दौरान वह संदिग्ध ऑटो ड्राइवर निकला जिसे हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। अन्य अन्य फुटेज सोमवार की सुबह लगभग 5 बज कर 52 मिनट का मिला है। इस फुटेज में उज्जैन की ड्रीम्स कॉलोनी से हड़बड़ा कर गुजर रही बच्ची से एक वृद्ध व्यक्ति ने सवाल-जवाब किया। बच्ची ने बस इतना बताया कि कुछ लोग उसके पीछे लगे हैं। इतना कह कर वो आगे बढ़ गई।

अभी तक हुई जाँच में पीड़िता के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के किसी हिस्से की निवासी होने की अपुष्ट जानकारी मिली है। मध्य प्रदेश पुलिस ने पुष्टि के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को सम्पर्क किया है। पीड़िता के मूल पते की तस्दीक करवाई जा रही है। अभी तक पीड़िता की माँ का भी कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस बच्ची के ठीक होने की प्रतीक्षा कर रही है। पीड़िता उज्जैन क्यों, कहाँ और किसके पास आई थी इसकी भी जानकारी अभी तक पुलिस को नहीं मिल पाई है। केस भी अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया है।