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एक हाथ में त्रिशूल, एक में खप्पर और प्रसाद में मदिरा… 6 हजार साल पुराना है काल भैरव मंदिर का इतिहास, जहाँ होती है शिव के रौद्र रूप की पूजा

 काल भैरव की मूर्ति (बाएँ), मंदिर का प्रवेश द्वार (दाएँ) (साभार : Instagram -kaal_bhairav_temple_ujjain)
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। फिर उसी मदिरा को भक्तों को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ये सच्चाई है काल भैरव मंदिर की। जो उज्जैन का न सिर्फ धार्मिक बल्कि रहस्यमयी चमत्कार भी है। काल भैरव को शिव के रौद्र रूप के तौर पर पूजा जाता है। यहाँ हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शराब की बोतल लेकर आते हैं और काल भैरव को अर्पित करते हैं।

माना जाता है कि पिलाते वक्त शराब मूर्ति के मुँह से गायब हो जाती है। कोई नली, कोई ट्रिक, यहाँ तक की अब तक कोई वैज्ञानिक भी इसका ठोस जवाब नहीं दे सका है। ये मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि जिज्ञासा का भी केंद्र है। यहाँ साधारण भक्तों से लेकर तांत्रिक तक सभी बाबा काल भैरव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

                           काल भैरव की मूर्ति को शराब का प्रसाद चढ़ाते महंत ( साभार : TripAdvisor)

मंदिर का इतिहास

 काल भैरव मंदिर का इतिहास लगभग छह हजार वर्ष पुराना है। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। काल भैरव की पूजा कपालिका और अघोरा संप्रदाय का हिस्सा रही है। इतिहासकार की मानें तो मंदिर का निर्माण शिप्रा नदी के ऊपर राजा भद्रसेन ने करवाया था।

                                     काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य (साभार : MP Tourism)

हालाँकि वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। यह मंदिर मराठा काल में बनवाया गया था। सन् 1788 में मराठा शासक महादजी शिंदे ने इस मंदिर को फिर से बनवाया और सजाया। उज्जैन प्राचीन अवंतिका नगरी रही है और यहाँ शैव परंपरा का गहरा असर है।

मंदिर की संरचना

मंदिर की बनावट बहुत ही साधारण पर प्रभावशाली है। मालवा शैली के अद्भुत चित्र मंदिर की दीवारों को सजाते हैं। मुख्य द्वार पर दो विशाल सिंहों की मूर्तियाँ हैं जो मंदिर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। अंदर प्रवेश करते ही मुख्य गर्भगृह है। जहाँ काले पत्थर से बनी काल भैरव की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति की खास बात है इसका मुंँह, जिसके जरिए शराब ‘पी’ जाती है।
                                काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य ( साभार : MP Tourism)
मूर्ति के दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में खप्पर (खोपड़ी का पात्र) है। मंदिर में दीवारों पर भैरव से जुड़े चित्र और तांत्रिक प्रतीक भी देखे जा सकते हैं। आसपास छोटे-छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य भैरव रूपों को समर्पित हैं। मंदिर में एक अलग जगह पर शराब अर्पण की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अपनी बोतल वहीं पुजारी को देते हैं और वो मूर्ति के मुँह से चढ़ाते हैं।
                                          काल भैरव की मूर्ति ( साभार : timeofindia)

मंदिर तक कैसे पहुँचे?

काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। हवाई यात्रा कर आने वाले भक्तों के लिए नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है। जो मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से उज्जैन पहुँचना बहुत आसान है। शहर में होटल और धर्मशालाओं की भी अच्छी सुविधा है।

काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों को लगाना होगा नेम प्लेट: बिहार के बोधगया की दुकानों में खुद ही लगाया बोर्ड

आज कई राज्यों द्वारा योगी जैसा मुख्यमंत्री की मांग करने का कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी सख्त फैसले को लेने में हिचकाते नहीं। कितने सालों पहले कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जनहित में कानून बनाकर अलमारी में सजाकर रखा हुआ था। अगर यह कानून उसी समय लागु हो गया होता, आज ये चीखा-चिल्ली नहीं होती। सब कुछ सामान्य रहता, क्योकि चीखा-चिल्ली करने वाली सभी पार्टियां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यूपीए सरकार में शामिल थे। इस एपिसोड में एक बात खुलकर सामने आ गयी कि हिन्दुओं और हिन्दू देवी-देवताओं को अभद्र बोलने वाले उन्हीं के नाम से धंधा कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग में पड़ने वाले दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के योगी सरकार के निर्देश के बाद भले विपक्षी दल इस पर विवाद कर रहे हों, लेकिन यह नियम धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार के बाद यह मध्य प्रदेश के उज्जैन और बिहार के गया आदि जगहों पर नेम प्लेट लगने लगे हैं। इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने की माँग उठ रही है।

जब यूपीए ने अपने कार्यकाल में कानून बनाया है फिर इसे केवल मन्दिरों तक सीमित रखने की बजाए पूरे भारत में लागू करना चाहिए। योगी सरकार द्वारा विपक्ष द्वारा चील-कौओं की तरह मुस्लिम विरोधी बताकर चीखा-चिल्ली देख लगता है कि यूपीए सरकार ने शायद मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक इस कानून को लागु नहीं किया। यानि पिछली कांग्रेस समर्पित यूपीए भी असलियत जानती थी। आज I.N.D.I. गठबंधन में भी लगभग वही सभी पार्टियां है, जो यूपीए में शामिल थीं।  

उज्जैन में नेम प्लेट का आदेश

उज्जैन नगर निगम ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को दुकान मालिकों को अपनी दुकानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर की प्लेट लगाने का निर्देश दिया। उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा कि इस आदेश का पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए और दूसरी बार 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
ततवाल ने कहा कि उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने 26 सितंबर 2002 को दुकानदारों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर ने कहा कि यह कदम एमपी दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस में निहित है।
मेयर ने कहा, “उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है। लोग यहाँ धार्मिक आस्था के साथ आते हैं। उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे वे सामान खरीद रहे हैं। अगर कोई ग्राहक असंतुष्ट है या उसके साथ धोखा हुआ है तो दुकानदार के बारे में जानकारी होने से उसकी समस्या हल हो सकती है।”
वहीं, इंदौर से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुकानों के बाहर दुकानदार का नाम लिखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना नाम बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। उन्होंने इसे आस्था के साथ-साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के दुकानों पर भी नेम प्लेट

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम के आसपास स्थित दुकानदारों को भी अपने नाम का बोर्ड लगाना होगा। गोदौलिया में शनिवार (20 जुलाई 2024) को पुलिस ने दुकानदारों से बात की और उन्हें अपना नाम लिखने के लिए कहा। काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में लगभग 500 दुकानें हैं। इन दुकानों में लगभग 15 प्रतिशत दुकानें मुस्लिमों की हैं।
वहीं, राष्ट्रीय हिंदू दल के पदाधिकारियों ने भी दुकानों पर भगवा झंडा और आधार कार्ड रखने के लिए कहा है। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर के बाहर दुकानदारों को नाम लिखने की अपील की है। बता दें कि सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार लगभग 1 करोड़ लोगों के आने के अनुमान है।
प्रशासन के मुताबिक, इस आदेश के बाद अब मंदिर के बाहर स्थित दुकानदार श्रद्धालुओं को गुमराह करके पूजा सामग्री की बिक्री नहीं कर पाएँगे। दुकान मालिक का नाम लिखकर किराएदार दुकान संचालित नहीं कर सकेंगे। उन्हें बाहर अपना असली नाम-पता लिखना होगा। मंदिर के सामने देवी-देवताओं के नाम लिखकर गैर-धर्म के दुकानदार व्यवसाय करते मिले हैं। पुलिस ने उन्हें नोटिस थमाया है।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा, “यह आदेश सरकार के नहीं हैं। पुलिस विभाग ने दुकानदारों की पहचान के लिए सख्ती की है। सोशल मीडिया पर अक्सर ये दिखता है कि एक वर्ग के लोग मांस भी खा रहे हैं और शाकाहारी खाने का सामान भी बेच रहे हैं। ऐसे भी वीडियो देखने में आए हैं कि खाने पर पहले थूकते हैं, फिर बेच रहे हैं। ऐसे में एक वर्ग, जो सामान खरीद रहा है, उसकी आस्था को चोट पहुँचती है।”

बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के दुकानदारों ने लगाए नेम प्लेट

उत्तर प्रदेश में शुरू हुए इस नियम को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति करे, लेकिन श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने इसे सही बताया है। यही कारण है कि बिहार के गया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के बाहर स्थित दुकानदारों ने अपने मन से दुकानों पर नेम प्लेट लगा ली है। हिंदू और मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी स्वेच्छा से फल की दुकानों के आगे ये नेमप्लेट लगा रखा है।
अवलोकन करें:-
सावन के महीने में बोधगया के महाबोधि मंदिर में भी काँवड़िया पहुँचते हैं और गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाते है। इसको देखते हुए स्थानीय दुकानदारों ने आपसी सहमति से दुकान के आगे नेम प्लेट लगाने का फैसला लिया है। यहाँ पर कुछ फल दुकानदार तो बीते 20 सालों से अपने दुकान पर अपना नाम लिखे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार पर फर्क नहीं पड़ता।

मध्य प्रदेश : जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही गुंडई पर उतरे समर्थक: महाकाल मंदिर में तोड़ डाले दरवाजे

                         महाकाल मंदिर में जीतू पटवारी के समर्थकों ने की तोड़फोड़ (फोटो साभार: नई दुनिया)
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार (19 दिसंबर, 2023) को पद सँभाल लिया। भोपाल में 
कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने से पहले वो उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना के बाद भोपाल पहुँचकर अध्यक्ष पद की कुर्सी सँभाली। इस बीच, महाकाल मंदिर में जीतू पटवारी के समर्थक कांग्रेसियों ने जमकर दबंगई की और महाकाल के मंदिर में ही धक्कामुक्की करते हुए गेट का काँच ही तोड़ दिया। इस मामले में CCTV फुटेज के साथ मंदिर प्रबंधन ने जीतू पटवारी के समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुँचे। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल के मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आए जीतू पटवारी के साथ ढोल-नगाड़े बजाने वालों तक की टीम थी और समर्थकों का बड़ा हुजूम भी। जब वो मंदिर में पूजा के लिए घुसने लगे, तो उनके समर्थकों ने भी मंदिर में घुसने की कोशिश की। उन्हें जब रोका गया, तब समर्थकों ने धक्का-मुक्की की और काँच से बना गेट भी तोड़ दिया। अब इस मामले में मंदिर प्रबंधन समिति ने महाकाल पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया है।

महाकाल मंदिर के प्रशासक संदीप कुमार सोनी के हवाले से ‘नई दुनिया’ ने बताया है कि जीतू पटवारी के अलावा कुछ लोगों को दर्शन की विशेष अनुमति दी गई थी। उनके साथ कार्यकर्ताओं के आने का अनुमान भी था। इसे देखते हुए श्री महाकाल महालोक, वीआइपी गेट, काला गेट तथा नगाड़ा गेट पर भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बल सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इसमें पुलिस व मंदिर समिति के गार्ड शामिल थे। सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को भीतर प्रवेश करने से रोका, बावजूद इसके कुछ लोग नगाड़ा गेट तक पहुँच गए। इन लोगों ने गेट को पार करके नंदी हाल में प्रवेश करने का प्रयास किया, सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें रोका। इस दौरान धक्का-मुक्की में गेट का काँच फूट गया।

इस मामले में सीसीटीवी की फुटेज के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नंदी हाल में सिर्फ 20 लोगों के प्रवेश की अनुमति थी, जबकि इससे कहीं ज्यादा लोग घुस गए। अब अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया कि महाकाल थाना पुलिस ने अज्ञात कांग्रेसियों पर धारा 294, 323, 506, 34 भादवी धारा 37 (च) (छ) महाकाल मंदिर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में आरोपितों की पहचान की जा रही है, इसके बाद नामजद मामला दर्ज किया जाएगा।

इंदौर से उज्जैन फिर भोपाल पहुँचे जीतू

जीतू पटवारी के साथ बड़ा काफिला इंदौर से उज्जैन पहुँचा था। इसके बाद ये काफिला भोपाल पहुँचा। भोपाल में जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए चुनावी वादों को पूरा करवाना है। अगर बीजेपी सरकार ऐसा नहीं करेगी, तो जल्द ही भोपाल में 2 लाख से अधिक लोगों की रैली बुलाई जाएगी। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस में अब कोई गुटबाजी नहीं रह गई है।

जय माँ भवानी, जय श्री बाबा महाकाल


महाकाल मंदिर परिसर में प्रमुख 42 देवताओं के मंदिर है इस मन्दिर का लगभग साढ़े सात एकड़ में फैला विशाल परिसर संभवत भारत के किसी अन्य ज्योतिर्लिंग का नहीं है।

देश के 12 ज्योर्तिलिंगो में एक श्री महाकाल पृथ्वी लोक के अधिपति है। उज्जैन पूरी दुनिया से इस अर्थ में अलग है कि आकाश में उज्जैन को जो मध्य स्थान प्राप्त है, वहीं धरती पर भी प्राप्त है। आकाश व धरती दोनेां के केन्द्र बिन्दु पर उज्जैन स्थित है। महाकाल का अर्थ समय और मृत्यु के देवता दोनों रूपों में लिया जाता है। इसी स्थान से पूरी पृथ्वी की काल गणना होती रही है। प्राचीन श्री महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ। श्री महाकाल पृथ्वी के नाभी केन्द्र पर स्थित दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो दुनिया का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है। तंत्र मन्त्र की दृष्टि से भी इस दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग का बडा महत्व है।

विश्व में अकेले श्री महाकाल है जो विविध रूपों में भक्तों को दर्शन देते है। कभी प्राकृतिक रूप में तो कभी राजसी रूप में आभूषण धारण कर। कभी भांग, कभी चंदन और सूखे मेवे से तो कभी फल, फूल से सजते है राजाधिराज। हनुमान, शिव, देवी सरस्वती, अवंतिका, भद्रकाली, नवग्रह, शनि, राधा-कृष्ण, गणेश के मंदिरों से विभूषित यह परिसर आध्यात्मिक अनुभूति का पावन आंगन है।श्री महाकाल मंदिर परिसर में यू तो छोटे-बडे अनेकों देवी देवताओं के मंदिर है परंतु परिसर में प्रमुख 42 मंदिर स्थापित है जो निम्नानुसार हैः- श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर है जो मंदिर परिसर के गलियारे में स्थित हैं। ऋद्धि- सिद्धी गणेश जी का मंदिर है जो लक्ष्मी नृसिंह मंदिर के आगे ही स्थित है। विट्ठल पण्ढ़रीनाथ मंदिर है जो मंदिर के गलियारे में स्थित है। श्री राम दरबार मंदिर गलियारे से कोटीतीर्थ की ओर नीचे उतरने पर स्थित है। श्री अवंतिका देवी का मंदिर जो उज्जैन का एक प्राचीन नाम अवंतिका है। इसका मंदिर श्री रामदरबार मंदिर के पीछे स्थापित हैं। श्री चन्द्रादिप्तेश्वर मंदिर श्री रामदरबार मंदिर से आगे बढने पर बायें हाथ पर स्थित है। श्री मंगलनाथ का मंदिर चन्द्रादिप्तेश्वर मंदिर से आगे भूमि पुत्र मंगल शिवलिंग के रूप में यहां विराजमान है। श्री अन्नपूर्णा देवी का मंदिर मंगलनाथ शिवलिंग से आगे स्थापित है। वाच्छायन गणपति महाकाल मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार (चांदी द्वार) के पास पूर्व दिशा में प्रतिमा स्थिापित है। प्रवेश द्वार के गणेश जी की मूर्ति चांदी द्वार के उपर गणेश प्रतिमा विराजित है।
इसी तरह महाकाल मंदिर परिसर में ही गर्भगृह में विराजित ज्योर्तिलिंग के रूप में भगवान श्री महाकालेश्वर विराजमान है जो चांदी द्वार से नीचे उतरने पर गर्भगृह स्थापित है। गर्भगृह में ही देवी पार्वती, श्री गणेश व श्री कार्तिकेय की रजत प्रतिमाएं है। गर्भगृह में ही दो अखंड नदा दीप है। श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर है जो श्री महाकालेश्वर के ठीक उपर स्थित है। श्री नागचन्द्रेश्वर महादेव का मंदिर है जो ओंकारेश्वर महादेव के उपर यानी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर से तीसरी मंजिल पर स्थित है। इस मंदिर के पट वर्ष में एक बार नागपंचमी को ही खुलते है। नागचन्द्रेश्वर प्रतिमा के रूप में भी दर्शन होते है जो तीसरी मंजिल पर स्थापित है। सिद्धी विनायक मंदिर महाकालेश्वर प्रांगण में ओकारेश्वर मंदिर के सामने उत्तर दिशा की ओर स्थित है। साक्षी गोपाल मंदिर परिसर में सिद्धी विनायक के पास स्थित है। संकट मोचन सिद्धदास हनुमान मंदिर प्रांगण में उत्तर दिशा में स्थित है। स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर सिद्धदास हनुमान मंदिर के सामने स्थापित है।
महाकाल परिसर में ही बृहस्पतेश्वर महादेव मंदिर है जो प्रांगण के उत्तर में स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित हैं। शिव की प्राचीन प्रतिमाएं त्रिविष्टपेश्वर महादेव मंदिर श्री महाकाल मंदिर के पीछे स्थित है। मां भद्रकाल्ये मंदिर ओंकारेश्वर मंदिर से सटे उत्तरी कक्ष में है। नवग्रह मंदिर श्री महाकाल के निर्गम द्वार के पास स्थित है। मारूतिनंदन हनुमान मंदिर महाकाल परिसर के आग्नेय कोण में स्थित है। श्री राम मंदिर मारूतिनंदन हनुमान के पीछे स्थिापित है। नीलकंठेश्वर मंदिर महाकाल मंदिर के निर्गम द्वार के पीछे स्थित है। मराठों का मंदिर नीलकंठेश्वर महादेव के पास स्थित है। इसका निर्माण देवास के नरेश द्वारा कराया गया था। गोविन्देश्वर महादेव मंदिर वृद्धकालेश्वर महाकाल मंदिर के समीप स्थित है। सूर्यमुखी हनुमान मंदिर कोटितीर्थ के प्रदक्षिणा मार्ग पर श्री महाकाल के प्रमुख द्वार के पास स्थित है। लक्ष्मीप्रदाता मोढ़ गणेश मंदिर कोटितीर्थ के उत्तर दिशा में स्थित है। कोटेश्वर महादेव मंदिर यह महाकाल के गण तथा कोटितीर्थ के अधिष्ठाता है। यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है। प्रदोष के दिन श्री महाकाल की संध्या-पूजा के पहले कोटेश्वर की पूजा की जाती है।
सप्तऋषि मंदिर महाकाल परिसर के पीछे की ओर सप्तऋषियों के सात मंदिर है। अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर सप्तऋषि मंदिर के ठीक सामने है। श्री बाल विजय मस्त हनुमान मंदिर अनादिकल्पेश्वर महादेव के सामने स्थित है। यह एक चैतन्य देव स्थान माना जाता है। श्री ओंकारेश्वर महादेव का मंदिर परिसर में ही स्थित है। श्री वृद्धकालेश्वर महाकाल (जूना महाकाल) श्री बाल हनुमान मंदिर के पास स्थित है। पवित्र कोटितीर्थ महाकाल के आंगन का जल तीर्थ है। महाभारत इस तीर्थ का उल्लेख है। कोटितीर्थ के पवित्र जल से नित्य महाकाल का अभिषेक होता है।
भगवान श्री महाकाल की प्रतिदिन पांच आरती होती है। भस्मार्ती प्रतिदिन प्रातः होती है । भस्मार्ती का समय केवल श्रावण मास में परिवर्तन किया जाता है। इसी प्रकार महाशिवरात्रि पर्व पर भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होती है। विश्वभर में एक मात्र श्री महाकाल है जिनकी प्रातः 4 से 6 बजे तक वैदिक मंत्रों, स्त्रोत-पाठ, वाद्य यंत्रों, शंख, डमरू, घंटी घडियालों के साथ भस्मार्ती होती है। दद्दयोदय आरती प्रातः काल 7 बजे से होती है। इस आरती में समय पर परिवर्तन होता रहता है। तीसरी आरती प्रातः 10 बजे से नैवेद्य आरती होती है। शाम 5 बजे गर्भगृह में बाबा महाकाल का जलाभिषेक बंद रहता है और इस समय पूजन श्रंगार किया जाता है। इसके बाद शाम को संध्या आरती 7 बजे से की जाती है। शयन आरती रात्रि 10.30 बजे से होती है इसके बाद गर्भगृह के पट बंद हो जाते है। जेा अगले दिन प्रातः 4 बजे खुलते है। आरतियों में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है।
मंदिर परिसर के बाहर ही सिद्ध विनायक गणेश जी की विशाल प्रतिमा है ।इसी से थोड़ा आगे माँ हरसिद्धि का मंदिर है जो देवी के 52 शक्तिपीठो में से एक है ।प्रसिद्द शिप्रा का घाट रामघाट भी हरसिध्दि मंदिर के समीप ही है ।समीप ही चार धाम मंदिर है ।एक तरह से देखा जाय तो यह देवताओ की नगरी है जहाँ भी नजर दौड़ाये मंदिर नजर आएंगे!
यहां के कण कण में भगवान है 84 महादेव, 9 नारायण,सप्तसागर , कालभैरव, सिद्धवट, सांदीपनि आश्रम,गोपाल मंदिर,भर्तहरि गुफा, इस्कॉन मंदिर, गढ़कालिका,चिन्तामण गणेश, हनुमानजी के सेकड़ो सिद्ध मंदिर यहां की शोभा बढ़ाते है।
इसीलिये कहा जाता है महाकाल यहाँ सपरिवार विराजित है। बोहरा,जैन समुदाय के प्रसिद्ध स्थल भी इस धरती पर है
।

दूसरे मजहबों पर Times of India ने बनाया ऐसा कार्टून तो जीवन से हो जाएँगे ‘आज़ाद’: उज्जैन में रेप पर हिन्दू घृणा वाला प्रोपेगंडा, मदरसों में यौन शोषण पर कभी बनाया मस्जिद को निशाना?

रेप के बाद सड़क पर भटकती रही बच्ची (बाएँ/प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI), TOI का हिन्दू विरोधी कार्टून (दाएँ, फोटो साभार: X/CartoonistSan)
उज्जैन का जो वीडियो सामने आया है और जिस प्रकार उस बच्ची को अपने अंगों को ढककर इतने किलोमीटर चलना पड़ा, उससे हर कोई स्तब्ध है। हर कोई जैसे प्रश्न पूछ रहा है कि आखिर यह क्या था और यह क्यों है? इस मामले में जो सबसे अधिक सीमा पार की है, वह की है कथित सेक्युलर लोगों ने, क्योंकि एक तो नगरी है महाकाल की उज्जैन और दूसरा वहाँ पर भाजपा की सरकार है। जहाँ पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार होती है, वहाँ के अपराधों पर शोर और गैर-भाजपा सरकारों के यहाँ हो रहे अपराधों पर चुप्पी इनकी विशेषता होती है।

हाल ही में केरल में एक नहीं बल्कि 2 बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना हुई। एक की हत्या कर दी गई मगर एक बच गई। फिर भी मीडिया में इन घटनाओं की चर्चा नहीं है और दोनों ही घटनाओं में आरोपित पहले भी अपराधों के कारण जेल जा चुके थे। फिर भी मीडिया में इन मामलों को लेकर शोर नहीं होता। शोर केवल तभी होता है जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाला राज्य हो। जैसे ही इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, उसके बाद ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के कार्टूनिस्ट ने हिन्दुओं को लेकर एक निहायत ही अपमानजनक कार्टून पोस्ट किया।

इसमें हिन्दुओं को गौमाता की पूजा करते हुए और बच्ची को एक तरफ जाते हुए दिखाया गया था। ऐसा दिखाया था जैसे कि हिन्दुओं की पूजा के कारण ही इस बच्ची के साथ यह हुआ हो। इस कार्टून के बाद लोगों ने प्रश्न किया कि पहले जाँच तो लेते? यह कार्टून पूरी तरह से हिन्दुओं के प्रति घृणा से भरा कार्टून था। मगर इससे क्या फर्क पड़ता है! क्या उज्जैन में केवल हिन्दू ही रहते हैं? या फिर महाकाल की नगरी होने के कारण ऐसा किया गया?

खैर, यह कथित सेक्युलर कलाकारों की चाल होती है। सभी को कठुआ वाला मामला याद होगा, जिसमें कला का प्रयोग बच्ची को न्याय दिलाने के स्थान पर महादेव के विकृत चित्र साझा करने आरम्भ कर दिए गए थे। यह भी देखा जाना चाहिए कि जो शोर मचा रहे हैं क्या वह वास्तव में न्याय के लिए है या फिर राजनीतिक अकाउंट सेटल करने के लिए? राजस्थान में एक बच्ची को भट्ठी में मारकर डाल दिया गया था, परन्तु न्याय के लिए शोर मचाने वाले लोग उधर नहीं पहुँचे थे।

मदरसों में यौन शोषण के इतने मामले आते हैं, मगर क्या कभी किसी कार्टूनिस्ट ने या किसी कलाकार ने मस्जिद को निशाना बनाया? क्या उनके मजहबी यकीनों पर कार्टून बनाए? नहीं बनाए! और न ही बनाएँगे! क्योंकि हिन्दू धर्म के अतिरिक्त किसी और धार्मिक मत पर कुछ कहने का, अपमान करने का परिणाम उन्हें पता है। उन्हें पता है कि जिस अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात वह दिनभर करते हुए हिन्दू धर्म को कोसते हैं, उसे यदि किसी और मत के लिए प्रयोग कर लिया तो वह जीवन से ही कहीं आजाद न हो जाएँ।

क्रान्ति का अर्थ केवल हिन्दू धर्म को कोसा जाना न हो कर रह जाए, यह सुनिश्चित करना होगा और हिन्दू धर्म से घृणा करने वाले लोग अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी केवल हिन्दुओं तक ही सीमित न करें, यह आवाज बार-बार उठानी होगी।

मध्य प्रदेश : सड़क पर अर्धनग्न बच्ची, खून से लथपथ कपड़े, प्राइवेट पार्ट पर घाव… बलात्कार के बाद 8 किलोमीटर भटकती रही, बताया - माँ से भी हुई दरिंदगी

                                                                                              प्रतीकात्मक चित्र साभार: Leonardo AI
मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक नाबालिग लड़की से हैवानियत किए जाने का मामला सामने आया है। अर्धनग्न अवस्था में 12 वर्षीया बच्ची शहर की सड़कों पर काफी देर तक भटकते हुए लोगों से मदद की गुहार लगाती रही। उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिख रहे थे। पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसकी माँ के साथ भी गलत काम हुआ है। बच्ची मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की बताई जा रही है।

केस दर्ज करने के बाद जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। एक ऑटो ड्राइवर को भी हिरासत में लिया गया है। घटना सोमवार (25 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला थाना क्षेत्र महाकाल का है। सोमवार को पुलिस को यहाँ के बड़नगर रोड स्थित दांडी आश्रम के पास एक घायल बच्ची के पड़े होने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँची और सूचना सही पाई गई। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे। वह अर्धनग्न अवस्था में थी और कपड़े खून से सने हुए थे। पुलिस ने पीड़िता को फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया। बच्ची बेहद डरी हुई थी। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थी। बताया जा रहा है कि उसने अपनी माँ के साथ भी दरिंदगी होने की जानकारी दी। हालाँकि, पीड़िता की माँ का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।

पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। बच्ची को खून पुलिस वालों ने दिया। बच्ची को बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया है। वहाँ मेडिकल के बाद डॉक्टरों ने पीड़िता के साथ रेप होने की पुष्टि की। दूसरी तरफ CCTV फुटेज खँगाले जाने लगे। इन फुटेज में बच्ची घंटों से उज्जैन के अलग-अलग इलाकों में बदहवास हो कर भटकती और लोगों से मदद माँगती दिखाई दे रही है। लगभग 8 किलोमीटर की दूरी नाबालिग पीड़िता ने पैदल ही घायल हालत में तय की। इस दौरान वह सांवराखेड़ी मार्ग, तिरुपति ड्रीम्स, हाटकेश्वर विहार कॉलोनी सहित चिंतामण ब्रिज मार्ग पर भटकती रही।

पुलिस ने अपनी जाँच का दायरा बढ़ाते हुए 72 घंटों की CCTV फुटेज निकलवाई। इस फुटेज में एक व्यक्ति बच्ची के साथ हाटकेश्वर मार्ग पर दिखा। जाँच के दौरान वह संदिग्ध ऑटो ड्राइवर निकला जिसे हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। अन्य अन्य फुटेज सोमवार की सुबह लगभग 5 बज कर 52 मिनट का मिला है। इस फुटेज में उज्जैन की ड्रीम्स कॉलोनी से हड़बड़ा कर गुजर रही बच्ची से एक वृद्ध व्यक्ति ने सवाल-जवाब किया। बच्ची ने बस इतना बताया कि कुछ लोग उसके पीछे लगे हैं। इतना कह कर वो आगे बढ़ गई।

अभी तक हुई जाँच में पीड़िता के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के किसी हिस्से की निवासी होने की अपुष्ट जानकारी मिली है। मध्य प्रदेश पुलिस ने पुष्टि के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को सम्पर्क किया है। पीड़िता के मूल पते की तस्दीक करवाई जा रही है। अभी तक पीड़िता की माँ का भी कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस बच्ची के ठीक होने की प्रतीक्षा कर रही है। पीड़िता उज्जैन क्यों, कहाँ और किसके पास आई थी इसकी भी जानकारी अभी तक पुलिस को नहीं मिल पाई है। केस भी अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया है।

108 स्तंभ, धागे का शिवलिंग, दीवारों पर शिवपुराण… 200 संत-60000 आम जन को साक्षी बनाकर राष्ट्र को ‘महाकाल लोक’ अर्पित करेंगे मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को ‘महाकाल लोक’ राष्ट्र को अर्पित करेंगे। इससे पहले उन्होंने वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश को समर्पित किया था।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर लोक परियोजना का काम दो चरणों में किया जा रहा है। 856 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 200 संतों और 60 हजार आम लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद पीएम कमलकुंड, सप्तऋषि, मंडपम और नवग्रह का भी अवलोकन करेंगे।

महाकाल लोक परियोजना क्या है

महाकाल लोक परियोजना का मकसद तीर्थयात्रियों को विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करना है। इससे मंदिर परिसर का करीब सात गुना विस्तार होगा। इस क्षेत्र में भीड़भाड़ को कम करना और विरासत संरचनाओं के संरक्षण एवं बहाली पर विशेष बल देना परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे मंदिर में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मौजूदा वक्त में लगभग 1.5 करोड़ हर साल तीर्थ यात्री यहाँ आते हैं। इस परियोजना के बाद यह संख्या दोगुना होने की उम्मीद है।

महाकाल लोक परियोजना की खासियत

कॉरिडोर की लंबाई 900 मीटर से ज्यादा है। इस परियोजना में महाकाल पथ में बलुआ पत्थर से 108 स्तंभ बनाए गए हैं। ये भगवान शिव के तांडव स्वरूप को दर्शाते हैं। 2.5 हेक्टेयर में फैला प्लाजा क्षेत्र कमल के तालाब से घिरा हुआ है। इसमें फव्वारे के साथ शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा महाकाल पथ के किनारे भगवान शिव के जीवन को दर्शाने वाली कई मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पथ के साथ भित्ति दीवार चित्र शिव पुराण की कहानियों पर आधारित हैं, जिनमें गणेश का जन्म, सती और दक्ष कहानियाँ आदि शामिल हैं। पूरे परिसर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। यह निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्विलांस कैमरों की मदद से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा की जाएगी।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जो ड्रोन के जरिए बनाया गया है। उन्होंने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्वीट किया, “जय महाकाल के श्री महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 11 अक्टूबर को करेंगे।”
महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के मुख्य गेट पर करीब 20 फीट का शिवलिंग धागे से बनाया गया है। इस पर से पर्दा उठाकर पीएम मोदी कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। महाकालेश्वर मंदिर विकास परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।