Showing posts with label inaugurate. Show all posts
Showing posts with label inaugurate. Show all posts

कर्नाटक : जो मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ सकती मंदिर में पूजा कैसे करवा रही है? क्या बानू मुश्ताक एक्स-मुस्लिम है? नहीं ‘पाप’ का भागी केवल व्याध (कांग्रेस+सुप्रीम कोर्ट), सुषुप्त हिंदुओं का भी समय लिखेगा ‘अपराध’

              बानू मुश्ताक ने मैसूर दशहरा महोत्सव का किया उद्घाटन (फोटो साभार: X/@publictvnews)
वह मुस्लिम है। पर मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकती। क्योंकि वह मुस्लिम होने के साथ-साथ औरत भी है। कुछेक मस्जिदों में उसे नमाज पढ़ने का हक मिला भी है तो शर्तों के साथ। मसलन, पर्दे में रहना, सुगंध न लगाना, अलग कमरा… वगैरह वगैरह। लेकिन एक गैर हिंदू (मुस्लिम महिला) आपके मंदिर में प्रवेश कर नवरात्र के आपके आगमिक अनुष्ठानों का प्रारंभ कर सकती है। क्योंकि कांग्रेस और इस देश की अदालतें ऐसा चाहती हैं। क्योंकि इस देश का हिंदू सुषुप्त है।

सोमवार (22 सितंबर 2025) को कलश स्थापना के साथ हिंदुओं की आस्था के महत्वपूर्ण पर्व नवरात्रि का प्रारंभ हुआ। लेकिन इसी दिन कांग्रेस शासित कर्नाटक से एक ऐसा वीडियो आया है जो हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। बानू मुश्ताक ने चामुंडेश्वरी मंदिर में प्रवेश कर मैसूर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव का प्रारंभ किया है।

कहाँ है हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं? क्यों नहीं हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं ने हिन्दुओं को एकजुट कर माता की आरती करने का विरोध किया? कांग्रेस जेल में ही तो भेजती कृष्ण ने भी जेल में जन्म लेकर अपनी लीला खेलनी शुरू कर दी थी। अगर बानू मुश्ताक इस्लाम छोड़ एक्स-मुस्लिम बन गयी है बात दूसरी है क्योकि एक्स-मुस्लिम मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना आदि करते हैं।     

ऐसा नहीं है कि लेखिका बानू मुश्ताक की हिंदुत्व में आस्था है। उनकी देवी पूजा में आस्था है। जैसा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा भी है, “कन्नड़ भाषा को देवी के रूप में पूजने पर स्वयं के मुस्लिम होने के नाते मजहबी ऐतराज जताने वाली लेखिका मुश्ताक बानो को कर्नाटक सरकार ने मैसूर दशहरा समारोह का अतिथि बना कर आमंत्रित किया है।”

बानू मुश्ताक इतने अव्वल दर्जे की सेकुलर हैं कि इस्लाम में औरतों की स्थिति पर वह केवल चुप्पी ही नहीं ओढ़ती हैं, बल्कि वह प्रयास करती हैं कि औरतों के साथ भेदभाव का ठीकरा भी सनातन की कथित परंपराओं पर फोड़ा जा सके। ऐसे में सीधा सवाल यह है कि जिसकी सनातन में कोई आस्था नहीं है, उसे माँ चामुंडेश्वरी के अनुष्ठान में शामिल क्यों किया गया? वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ की पवित्र मूर्ति पर पुष्प अर्पित करने की अनुमति कैसे दी गई?

चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर में विराजमान माँ चामुंडेश्वरी, मैसूर राजघराने की अधिष्ठात्री देवी हैं। भले कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मैसूर के दशहरा महोत्सव को ‘राजकीय यानी सरकारी’ कार्यक्रम बताए। भले हिंदुओं की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट भी इसे ‘सरकारी कार्यक्रम’ कह दे। पर सच्चाई यह है कि यह​ सदियों से चला आ रहा एक आगमिक अनुष्ठान है।

हमारे मंदिर, हमारे अनुष्ठान, हमारी परम्पराएँ किसी व्यक्ति या सरकार की बपौती नहीं हैं। सरकारी कार्यक्रम बताकर हमारी आस्थाओं से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। इनकी व्याख्या कोई अपनी सहूलियत के हिसाब से नहीं कर सकता। बावजूद एक विधर्मी महिला ने हमारे मंदिर में प्रवेश किया, हमारे अनुष्ठान की पवित्रता और गरिमा को भंग किया।

क्या इसकी दोषी केवल कांग्रेस है? यकीनन नहीं। अतीत में ऐसे सैकड़ों उदाहरण भरे पड़े हैं जब हिंदुओं की आस्थाओं पर प्रहार कर कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण किया है। फिर क्या इसकी दोषी कर्नाटक की वह जनता नहीं, जिसने कांग्रेस को अपनी आस्था पर प्रहार का यह मौका प्रदान किया है?

क्या हम इस मामले में अदालतों के भरोसे रहे सकते हैं? यकीनन नहीं। बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। उसने याचिका खारिज कर दी। फिर हिंदू सुप्रीम कोर्ट गए। परिणाम नहीं बदला। वैसे भी जिस देश का मुख्य न्यायाधीश एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी करे कि ‘अपने भगवान से कहो कि वे भी अपने लिए कुछ करें’, उस देश की न्यायपालिका से उम्मीद करना अपने कर्तव्यों से भागने जैसा है। 

अवलोकन करें:-

सुप्रीम कोर्ट आखिर कब तक हिन्दुओं का मजाक बनाती रहेगी? गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंद
सुप्रीम कोर्ट आखिर कब तक हिन्दुओं का मजाक बनाती रहेगी? गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंद
 

इस क्षण के लिए दोषी माँ चामुंडेश्वरी मंदिर के वे पुजारी भी हैं, जिन्होंने बानू मुश्ताक के हाथों में पूजा की थाली थमाई। पवित्र मूर्ति पर चढ़ाने के लिए उन्हें पुष्प भेंट किया। उन्हें आरती दी। दोषी मैसूर के वे हिंदू भी हैं जिन्होंने इस क्षण को आने से रोकने के लिए विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं किया। इस क्षण के लिए हर एक हिंदू दोषी है। क्यों नहीं पुजारी और मौजूद हिन्दुओं ने इसका विरोध किया? क्या हर धार्मिक अनुष्ठान के लिए हिन्दू अदालतों पर निर्भर रहेगा? हिन्दुओं को मालूम होना चाहिए कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम तुष्टिकरण की जनक कांग्रेस समर्पित जजों और कपिल सिबल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण जैसे हिन्दू विरोधी वकीलों के भरमार रहेगी कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा। क्या हिन्दू इतना नपुंसक हो गया है कि सच्चाई के एकजुट होकर विरोध कर सकते? इस पाप का पाश्ताचाप उन्हें ही करना होगा। कांग्रेस या न्यायापालिका को कोस कर हम अपने कर्तव्यों से भाग नहीं सकते।

दिल्ली को मिलेगा ट्रैफिक से राहत का तोहफा: पीएम मोदी द्वारा 11,000 करोड़ की हाईवे परियोजनाओं का उद्घाटन


राजधानी दिल्ली को ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ से राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के रोहिणी में लगभग 11,000 करोड़ रुपये की लागत से बनी दो अहम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (17 अगस्त 2025) को दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड-II’ (UER-II) और ‘द्वारका एक्सप्रेसवे’ के दिल्ली सेक्शन का उद्घाटन करेंगे। इन दोनों सड़कों के खुल जाने से अब नोएडा से दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे IGI एयरपोर्ट तक का सफर सिर्फ 20 मिनट में पूरा हो सकेगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

नए रास्तों के बनने से दिल्ली-NCR के पश्चिमी इलाकों से आने वाले लोगों के लिए सफर करना बहुत आसान हो जाएगा। अभी इन इलाकों से आने वाले लोगों को शहर की सबसे व्यस्त रिंग रोड से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे वहाँ बहुत ज़्यादा ट्रैफिक रहता है। लेकिन इन नए रास्तों के शुरू होने के बाद रिंग रोड पर गाड़ियों का बोझ कम हो जाएगा। इसका सीधा फायदा NH-48, NH-44, रिंग रोड और बारापुला जैसे बड़े और मुख्य रास्तों पर भी दिखेगा, जहाँ भीड़ कम हो जाएगी और लोगों को जाम में नहीं फँसना पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के साथ उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कई भाजपा नेता मौजूद रहेंगे।

UER-II: दिल्ली की नई आउटर रिंग रोड

UER-II एक नई सड़क है जो अलीपुर से शुरू होकर महिपालपुर तक जाती है। यानी दिल्ली एयरपोर्ट के पास तक। इसकी लंबाई करीब 76 किलोमीटर है। यह सड़क पाँच हिस्सों में बनकर तैयार हुई है और इसे बनाने में करीब ₹6,445 करोड़ खर्च हुए हैं।

अब इस सड़क की मदद से गुड़गाँव, वेस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली से आने-जाने वाले लोगों को सफर में काफी आसानी होगी। उन्हें अब पुराने ट्रैफिक वाले रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा।

इस सड़क के खुलने से अब लोग सीधे NH-44 तक पहुँच सकते हैं, जिससे चंडीगढ़, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की तरफ जाना भी आसान हो जाएगा। पहले जिन जगहों पर ट्रैफिक जाम लगता था, जैसे धौला-कुआँ और रिंग रोड, वहाँ अब भीड़ कम हो जाएगी।

जानकारी के अनुसार, UER-II सड़क दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के हिसाब से बनाई गई है। यह सड़क दिल्ली में 54 किलोमीटर और हरियाणा में लगभग 21 किलोमीटर लंबी है। इस सड़क पर आठ लेन हैं। साथ ही सर्विस रोड, चार बड़े इंटरचेंज और कई अंडरपास भी बनाए गए हैं, जिससे यातायात आसान और बिना रुके चलेगा।

अब UER-II सड़क को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही एक नई 65 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी, जो ट्रॉनिका सिटी से FNG एक्सप्रेसवे तक जाएगी। इससे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और दिल्ली के दूसरे हिस्सों के हाईवे एक-दूसरे से जुड़ जाएँगे, जिससे सफर और आसान हो जाएगा।

UER-II को बनाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन पुराने और बेकार पड़े मलबे का इस्तेमाल किया गया। यह सारा मलबा दिल्ली के पुराने कूड़ेदानों (लैंडफिल साइट्स) से निकाला गया था। इस तरह, इन सड़कों के बनने से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि यह हमारे पर्यावरण के लिए भी एक अच्छा कदम माना जा रहा है।

द्वारका एक्सप्रेसवे: एयरपोर्ट का नया रास्ता

द्वारका एक्सप्रेसवे का जो हिस्सा दिल्ली में है, वो करीब 10 किलोमीटर लंबा है। इसमें एक सुरंग भी बनी है जो 5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी है। यह सुरंग सीधे IGI एयरपोर्ट तक जाती है, जिससे वहाँ पहुँचना अब बहुत आसान हो जाएगा।

इस एक्सप्रेसवे का जो हिस्सा हरियाणा में है, वो पहले ही मार्च 2024 में शुरू हो चुका था। अब दिल्ली वाला हिस्सा भी चालू हो गया है, जिससे दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सफर और भी तेज और आरामदायक हो गया है।

द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-II सड़कों की वजह से अब दिल्ली के अंदर के रास्तों पर भीड़ कम हो जाएगी। इससे NH-48, रिंग रोड और बारापुला फ्लाईओवर जैसे बड़े रास्तों पर गाड़ियों का दबाव पहले से कम होगा। लोग अब बाहर से आने-जाने के लिए सीधे इन नए रास्तों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर से बौखलाए इस्लामी कट्टरपंथी, UAE के शासक को भी दे रहे गाली


संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में बने BAPS स्वामी नारायण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वहाँ पहुँचे हैं। वह अबू धाबी में बुधवार (14 फरवरी 2024) को इस मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मंदिर पर अपनी घृणा दिखानी शुरू कर दी है।

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा जो घृणा व्यक्त की जा रही है, उसे देख मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले समस्त छद्दम सेक्युलरिस्टों को होश में आना होगा। क्या इन्हीं कट्टरपंथियों को खुश करने हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत के बीज बो रहे हो। 

अबू धाबी में नवनिर्मित इस मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथी लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। वे उल्टी सीधी टिप्पणी कर रहे हैं। इसके साथ ही कट्टरपंथी इस्लामी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शासकों से पूछ रहे हैं कि एक इस्लामी मुल्क में आखिर मंदिर का कार्यक्रम होने ही क्यों दिया जा रहा है।

अबू धाबी में स्थित इस BAPS स्वामी नारायण मंदिर को लेकर जब UAE के सबसे बड़े समाचार पत्र खलीज टाइम्स ने ट्विटर पर खबर शेयर की तो कट्टरपंथी भड़क गए। ऐसे ही एक कट्टरपंथी ने लिखा, “वो तुम्हारी मस्जिदें गिराएँ और तुम उनके मंदिर बनाते जाओ। उनको शर्मिन्दा होना चाहिए, जिन्होंने इसे बनाया और इसके लिए पैसे दिए।”

उवैद खान नाम के एक कट्टरपंथी ने पूछा, “UAE ने इस कार्यक्रम की अनुमति ही क्यों दी?”

वहीं, एक दूसरे कट्टरपंथी ने लिखा, “मेरी दुआ है कि अरब मुनाफिक (अरब के मौलाना) इस मंदिर को चलाएँ।”

एक और कट्टरपंथी ने UAE के शासकों पर मंदिर को लेकर प्रश्न उठाए। हमीद रजा ने लिखा, “क्या हुआ अगर वे (हिंदू) भारत में मस्जिद को गिरा रहे हैं और मुस्लिम को मार रहे हैं। आप यूएई के बेशर्म लोगों पर शर्म आनी चाहिए।”

एक कट्टरपंथी ने तो यहाँ तक कह दिया कि कैसा हो अगर शेख जायद मस्जिद को ढहा कर मंदिर बना दिया जाए, ताकि हिन्दू खुश हो जाएँ।

UAE के इस मंदिर की खासियत

इस नवनिर्मित मंदिर को 1 मार्च 2024 आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर में एक विजिटर केंद्र, प्रार्थना कक्ष, प्रदर्शनियाँ, लर्निंग सेंटर, बच्चों और युवाओं के लिए खेल क्षेत्र, उद्यान, पानी की सुविधाएँ, फूड कोर्ट, पुस्तक एवं उपहार की दुकानों के साथ अन्य सुविधाएँ भी होंगी।
जिस मंदिर का प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे, वह अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात के अमीर द्वारा उपहार में दी गई 27 एकड़ भूमि पर बना है। स्वामी नारायण मंदिर के निदेशक प्रणव देसाई ने इस मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारतीय नेतृत्व को आभार जताया है।
स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट के अनुसार, इस संप्रदाय का हिंदू मंदिर UAE के अबू धाबी, दुबई, शारजाह और रुवैस शहर में स्थित हैं। ये मंदिर या तो बन गए हैं या फिर बन रहे हैं। अगर मीडिल ईस्ट की बात करें तो स्वामीनारायण मंदिर ओमान के मस्कट और सोहर तथा कुवैत एवं बहरीन में भी स्थित हैं।
दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय के बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के तत्कालीन अध्यक्ष स्वामी महाराज 5 अप्रैल 1997 को UAE के शारजाह के एक रेगिस्तानी इलाके में गए। वहाँ पर स्वामी जी विश्व शांति और सभी धर्मों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने सभी देशों की प्रगति की भी कामना की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा से अबू धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए भी प्रार्थना भी की।
अगले दो दशकों में स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों एवं भक्तों ने स्वामी जी की कल्पना के अनुसार मंदिर बनाने के लिए UAE के लोगों एवं वहाँ के नेताओं से मुलाकात की और उनसे इसके लिए इजाजत माँगी। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर बनाने के लिए जमीन की भी माँग की।
साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद भारत और UAE के बीच आपसी विश्वास का माहौल बना और दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए। इसके बाद साल 2015 में UAE की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी।
इसके बाद पीएम मोदी ने UAE सरकार की दिल खोलकर सराहना की थी। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, “मैं अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने के फैसले के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार का बहुत आभारी हूँ। यह एक महान कदम है।” मंदिर परियोजना के निर्माण, विकास और प्रशासन के लिए दोनों सरकारों ने स्वामीनारायण संस्था और मंदिर लिमिटेड को चुना।
इसके बाद अबू धाबी-दुबई राजमार्ग के नजदीक अबू धाबी-स्वीहान-अल ऐन रोड पर अल रहबा क्षेत्र के अबू मुरीखा में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मंदिर में सात टावर हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सात अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर को बनाने की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2018 में शाही दरबार में की गई थी और अप्रैल 2019 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मई 2023 में 30 से अधिक देशों के राजनयिकों ने निर्माणाधीन मंदिर का दौरा किया था।
मंदिर के प्रवक्ता के अनुसार, प्राचीन प्रथाओं का पालन करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। यह विशाल मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए 700 से अधिक कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर और संगमरमर अबू धाबी भेजा गया। नींव को भरने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है, जिससे कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह ली गई है।
इस मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल बन गया है। इसके कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। मंदिर की संरचना की निगरानी के लिए, दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं। गुजरात और राजस्थान के कारीगरों को बुलाकर मंदिर के खंभों एवं दीवारों पर मोर, घाथी, घोड़े, ऊँट, चंद्रमा आदि को उकेरा गया है।

108 स्तंभ, धागे का शिवलिंग, दीवारों पर शिवपुराण… 200 संत-60000 आम जन को साक्षी बनाकर राष्ट्र को ‘महाकाल लोक’ अर्पित करेंगे मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को ‘महाकाल लोक’ राष्ट्र को अर्पित करेंगे। इससे पहले उन्होंने वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश को समर्पित किया था।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर लोक परियोजना का काम दो चरणों में किया जा रहा है। 856 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 200 संतों और 60 हजार आम लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद पीएम कमलकुंड, सप्तऋषि, मंडपम और नवग्रह का भी अवलोकन करेंगे।

महाकाल लोक परियोजना क्या है

महाकाल लोक परियोजना का मकसद तीर्थयात्रियों को विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करना है। इससे मंदिर परिसर का करीब सात गुना विस्तार होगा। इस क्षेत्र में भीड़भाड़ को कम करना और विरासत संरचनाओं के संरक्षण एवं बहाली पर विशेष बल देना परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे मंदिर में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मौजूदा वक्त में लगभग 1.5 करोड़ हर साल तीर्थ यात्री यहाँ आते हैं। इस परियोजना के बाद यह संख्या दोगुना होने की उम्मीद है।

महाकाल लोक परियोजना की खासियत

कॉरिडोर की लंबाई 900 मीटर से ज्यादा है। इस परियोजना में महाकाल पथ में बलुआ पत्थर से 108 स्तंभ बनाए गए हैं। ये भगवान शिव के तांडव स्वरूप को दर्शाते हैं। 2.5 हेक्टेयर में फैला प्लाजा क्षेत्र कमल के तालाब से घिरा हुआ है। इसमें फव्वारे के साथ शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा महाकाल पथ के किनारे भगवान शिव के जीवन को दर्शाने वाली कई मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पथ के साथ भित्ति दीवार चित्र शिव पुराण की कहानियों पर आधारित हैं, जिनमें गणेश का जन्म, सती और दक्ष कहानियाँ आदि शामिल हैं। पूरे परिसर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। यह निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्विलांस कैमरों की मदद से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा की जाएगी।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जो ड्रोन के जरिए बनाया गया है। उन्होंने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्वीट किया, “जय महाकाल के श्री महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 11 अक्टूबर को करेंगे।”
महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के मुख्य गेट पर करीब 20 फीट का शिवलिंग धागे से बनाया गया है। इस पर से पर्दा उठाकर पीएम मोदी कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। महाकालेश्वर मंदिर विकास परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।