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क्रूज पर्यटन को दिया विस्तार, दुर्गा पूजा को दिलाई UNESCO में पहचान: मोदी सरकार ने बंगाल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए क्या-क्या किया, सारा क्रेडिट ले रहीं ममता बनर्जी

                                          बंगाल बना तीसरा पसंदीदा पर्यटन स्थल (साभार-toi, nbt)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टूरिज्म क्रांति ने विदेशी सैलानियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा किया है, जिसने तमाम राज्यों को फायदा पहुँचाया है। इस कड़ी में बंगाल जो 2023-2024 में पर्यटन के मामले में तीसरे नंबर पर था वो 2025 में दूसरे नंबर पर आ गया है। भारत के लिए जाहिर है कि ये गर्व की बात है लेकिन इस ग्रोथ का सारा क्रेडिट अब अकेले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लेती दिख रही हैं।

जिस ममता के राज में हिन्दुओं को अपने त्यौहार(दुर्गा पूजा) मनाने के अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हो, ममता बनर्जी को शर्म आनी चाहिए कि जिस दुर्गा पूजा के बंगाल के हिन्दुओं को तुम्हारे कट्टरपंथी गुंडों से झूझना पड़ता है उसी दुर्गा पूजा को UNESCO में पहचान दिलवाने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। 

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर खुद अपनी पीठ थपथपाई है। जबकि सच्चाई ये है कि 2011 से सत्तासीन ममता बनर्जी का प्रयास कहीं नजर नहीं आता है। वहीं मोदी सरकार आने के बाद शुरू किए गए प्रयास जैसे- इनक्रेडिबल इंडिया, ई वीजा, मेडिकल वीजा के साथ-साथ क्रूज से लेकर सड़क तक किए गए विकास का फायदा बंगाल को मिला है।

बंगाल बना तीसरा पसंदीदा स्पॉर्ट

 विदेशी पर्यटकों के लिए बंगाल पहले तीसरा और अब दूसरा सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। पूर्व में सबसे आगे महाराष्ट्र और उसके बाद गुजरात था। मगर, अब लिस्ट में बंगाल ने राजस्थान और दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए जगह बनाई है।

बंगाल को लेकर इस साल के शुरुआत में ही खबरें आ रही थी कि इस वर्ष बंगाल में आने वाले टूरिस्टों की पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती हैं। अब ये रिपोर्ट देखकर लगता है कि इस वर्ष हुआ भी यही। बता दें कि केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के ‘भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025’ ने राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या के मामले में देश भर में दूसरे स्थान पर रखा है। देख सकते हैं बंगाल विदेशी टूरिस्टों की लुभाने में नंबर 2 पर आया है। संख्या 3.12 मिलियन रही।

अब ये वृद्धि अचानक से बंगाल में कैसे देखने को मिली। इसके पीछे के कारण मोदी सरकार के अथक प्रयास हैं।

                                             भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025

दुर्गा पूजा को मिली वैश्विक पहचान

सांस्कृतिक समृद्धि और त्यौहारों ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। कोलकाता में होने वाले दुर्गापूजा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। दुर्गा पूजा वह समय है जब बंगाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की मेहनत का नतीजा है कि दिसंबर 2021 में यूनेस्को ने कोलकाता में होने वाले दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। इसे ‘धर्म और कला के समन्वय का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण’ माना। जाहिर है इससे शिल्पकारों, कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिला, जो सालभर माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने में मशगूल रहते हैं।

ई वीजा और मेडिकल वीजा

बंगाल के प्राइवेट अस्पतालों में बांग्लादेशी मेडिकल विज़िटर्स बड़ी संख्या में आते हैं। इसकी वजह बंगाल का सीमा से सटा होना और आसानी से मेडिकल वीजा मिलना है। ये लोग ममता के गिरते हुए हेल्थ सिस्टम को भी नजरअंदाज कर यहाँ पहुँचते हैं।
पीएम मोदी की ‘हील इन इंडिया’ पहल निजी क्षेत्र के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवा को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्यक्रम है। इसका फायदा बंगाल को भी हो रहा है। केन्द्र सरकार ने मेडिकल वीजा मिलना भी आसान कर दिया है। इसलिए बांग्लादेशी मेडिकल विजिटर्स रिकॉर्ड संख्या में बंगाल पहुँचे। ई वीजा की वजह से लोगों को वीजा मिलना भी सुलभ हो गया है। इसलिए पर्यटकों की संख्या में काफी बढोतरी हुई है।

इनक्रेडिबल इंडिया

भारत में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी टूरिस्ट आने का कारण इनक्रेडिबल इंडिया है, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किया था और PM नरेंद्र मोदी ने ई-वीज़ा, मेडिकल वीज़ा, ग्लोबल कैंपेन और आसान एंट्री से इसे सुपरचार्ज किया है। अतिथि देवो भव: अवधारणा के साथ शुरू इस योजना को 2017 में नई जान आ गई। ‘इनक्रेडिबल इंडिया 2.0’ को डिजिटल और सोशल मीडिया पर काफी प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने तो ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ भी शुरू कर रही है। इसका लक्ष्य 2027 तक हर राज्य को फायदा पहुँचाना है।
अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया। इसे भारत में आने वाले पर्यटकों के लिए खास तौर पर बनाया गया। यह यात्रियों को पर्यटन स्थलों को ढूँढने और शोध से लेकर योजना बनाने, बुकिंग करने, यात्रा करने और वापस लौटने तक सभी जरूरी जानकारी और सेवाएँ देता है। ‘बुक योर ट्रैवल’ फीचर उड़ानों, होटलों, कैब की बुकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिससे यात्रियों की पहुँच बेहतर होती है। जाहिर से इसका फायदा भी बंगाल को मिला।

अतुल्य भारत होमस्टे योजना

पर्यटकों की सुविधा के लिए केन्द्र सरकार ने स्वैच्छिक होमस्टे योजना शुरू की, ताकि पर्यटकों को कहीं ठहरने में दिक्कत न हो और स्थानीय जनता को भी आमदनी हो। योजना के तहत 5 से 6 गाँव में 5 से 10 होम स्टे हो सकता है जिसके लिए 5 करोड़ रुपए तक की सहायता की जा रही है।

जनजातीय पर्यटन सर्किट का विकास

स्वदेश दर्शन योजना के तहत थीम आधारित सर्किट विकसित की जा रही है। रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट आदि। इस योजना के तहत जनजातीय होम स्टे परियोजना भी शुरू किया गया है। ताकि पर्यटकों के आने जाने वाली जगहों का विकास किया जा सके। इसके लिए केन्द्र सरकार धन मुहैया कराती है।

तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्रशाद योजना

इसके तहत राज्य के अहम तीर्थस्थलों को संरक्षित करना और उन तक पहुँचने के लिए सुविधाएँ बढ़ाया गया है। जैसे त्रिपुरा संदुरी मंदिर, चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, पटना साहिब की विकास योजनाएँ।
घरेलू पर्यटकों को अपने देश के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए सरकार ने प्रोत्साहित किया। इसके लिए ‘देखो अपना देश’ पहल की गई
विशिष्ट पर्यटन उपक्षेत्रों को विकसित किया गया है जैसे उत्सव पर्यटन, साहसिक पर्यटन, विवाह पर्यटन और क्रूज पर्यटन। इसमें भारत के त्यौहारों, आयोजनों से लेकर पर्वतारोहण को बढ़ावा देने, ‘इंडिया सेज आई डू’ के तहत मैरिज डेस्टिनेशन सेंटर को बढ़ावा देना शामिल है।

क्रूज पर्यटन का विकास

क्रूज पर्यटन का फायदा भी कोलकाता को मिला है। बंगाल में कई तरह की क्रूज सेवाएं शुरू हो गई हैं, जिनमें ‘बंगाल गंगा क्रूज’ अहम है। इसके अतिरिक्त, भारत और आसियान देशों के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नए क्रूज पर्यटन कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। कोलकाता से शुरू होने वाली एक लग्जरी क्रूज सेवा भी है, जो हुगली नदी के किनारे बंगाल की संस्कृति और वास्तुकला को दर्शाती है।
बीजेपी ने ममता बनर्जी के पर्यटकों की संख्या में इजाफे को लेकर सवाल किया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर सीएम ममता बनर्जी से पूछा है कि आखिर किस काम का वे क्रेडिट ले रही हैं, जबकि पर्यटन को मोदी सरकार की प्राथमिकता में एक है।
जाहिर है विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता सरकार हर क्रेडिट लेना चाहेगी। पर्यटन से न सिर्फ राज्य की आय बढ़ती है बल्कि आम नागरिक को काफी फायदा होता है। करीब 15 सालों से ममता बनर्जी ने पर्यटन के विकास के लिए कुछ खास नहीं किया। सांस्कृतिक तौर पर समृद्ध बंगाल को इन सालों में काफी फायदा पहुँचाया जा सकता था।

कर्नाटक : जो मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ सकती मंदिर में पूजा कैसे करवा रही है? क्या बानू मुश्ताक एक्स-मुस्लिम है? नहीं ‘पाप’ का भागी केवल व्याध (कांग्रेस+सुप्रीम कोर्ट), सुषुप्त हिंदुओं का भी समय लिखेगा ‘अपराध’

              बानू मुश्ताक ने मैसूर दशहरा महोत्सव का किया उद्घाटन (फोटो साभार: X/@publictvnews)
वह मुस्लिम है। पर मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकती। क्योंकि वह मुस्लिम होने के साथ-साथ औरत भी है। कुछेक मस्जिदों में उसे नमाज पढ़ने का हक मिला भी है तो शर्तों के साथ। मसलन, पर्दे में रहना, सुगंध न लगाना, अलग कमरा… वगैरह वगैरह। लेकिन एक गैर हिंदू (मुस्लिम महिला) आपके मंदिर में प्रवेश कर नवरात्र के आपके आगमिक अनुष्ठानों का प्रारंभ कर सकती है। क्योंकि कांग्रेस और इस देश की अदालतें ऐसा चाहती हैं। क्योंकि इस देश का हिंदू सुषुप्त है।

सोमवार (22 सितंबर 2025) को कलश स्थापना के साथ हिंदुओं की आस्था के महत्वपूर्ण पर्व नवरात्रि का प्रारंभ हुआ। लेकिन इसी दिन कांग्रेस शासित कर्नाटक से एक ऐसा वीडियो आया है जो हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। बानू मुश्ताक ने चामुंडेश्वरी मंदिर में प्रवेश कर मैसूर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव का प्रारंभ किया है।

कहाँ है हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं? क्यों नहीं हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं ने हिन्दुओं को एकजुट कर माता की आरती करने का विरोध किया? कांग्रेस जेल में ही तो भेजती कृष्ण ने भी जेल में जन्म लेकर अपनी लीला खेलनी शुरू कर दी थी। अगर बानू मुश्ताक इस्लाम छोड़ एक्स-मुस्लिम बन गयी है बात दूसरी है क्योकि एक्स-मुस्लिम मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना आदि करते हैं।     

ऐसा नहीं है कि लेखिका बानू मुश्ताक की हिंदुत्व में आस्था है। उनकी देवी पूजा में आस्था है। जैसा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा भी है, “कन्नड़ भाषा को देवी के रूप में पूजने पर स्वयं के मुस्लिम होने के नाते मजहबी ऐतराज जताने वाली लेखिका मुश्ताक बानो को कर्नाटक सरकार ने मैसूर दशहरा समारोह का अतिथि बना कर आमंत्रित किया है।”

बानू मुश्ताक इतने अव्वल दर्जे की सेकुलर हैं कि इस्लाम में औरतों की स्थिति पर वह केवल चुप्पी ही नहीं ओढ़ती हैं, बल्कि वह प्रयास करती हैं कि औरतों के साथ भेदभाव का ठीकरा भी सनातन की कथित परंपराओं पर फोड़ा जा सके। ऐसे में सीधा सवाल यह है कि जिसकी सनातन में कोई आस्था नहीं है, उसे माँ चामुंडेश्वरी के अनुष्ठान में शामिल क्यों किया गया? वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ की पवित्र मूर्ति पर पुष्प अर्पित करने की अनुमति कैसे दी गई?

चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर में विराजमान माँ चामुंडेश्वरी, मैसूर राजघराने की अधिष्ठात्री देवी हैं। भले कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मैसूर के दशहरा महोत्सव को ‘राजकीय यानी सरकारी’ कार्यक्रम बताए। भले हिंदुओं की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट भी इसे ‘सरकारी कार्यक्रम’ कह दे। पर सच्चाई यह है कि यह​ सदियों से चला आ रहा एक आगमिक अनुष्ठान है।

हमारे मंदिर, हमारे अनुष्ठान, हमारी परम्पराएँ किसी व्यक्ति या सरकार की बपौती नहीं हैं। सरकारी कार्यक्रम बताकर हमारी आस्थाओं से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। इनकी व्याख्या कोई अपनी सहूलियत के हिसाब से नहीं कर सकता। बावजूद एक विधर्मी महिला ने हमारे मंदिर में प्रवेश किया, हमारे अनुष्ठान की पवित्रता और गरिमा को भंग किया।

क्या इसकी दोषी केवल कांग्रेस है? यकीनन नहीं। अतीत में ऐसे सैकड़ों उदाहरण भरे पड़े हैं जब हिंदुओं की आस्थाओं पर प्रहार कर कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण किया है। फिर क्या इसकी दोषी कर्नाटक की वह जनता नहीं, जिसने कांग्रेस को अपनी आस्था पर प्रहार का यह मौका प्रदान किया है?

क्या हम इस मामले में अदालतों के भरोसे रहे सकते हैं? यकीनन नहीं। बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। उसने याचिका खारिज कर दी। फिर हिंदू सुप्रीम कोर्ट गए। परिणाम नहीं बदला। वैसे भी जिस देश का मुख्य न्यायाधीश एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी करे कि ‘अपने भगवान से कहो कि वे भी अपने लिए कुछ करें’, उस देश की न्यायपालिका से उम्मीद करना अपने कर्तव्यों से भागने जैसा है। 

अवलोकन करें:-

सुप्रीम कोर्ट आखिर कब तक हिन्दुओं का मजाक बनाती रहेगी? गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंद
सुप्रीम कोर्ट आखिर कब तक हिन्दुओं का मजाक बनाती रहेगी? गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंद
 

इस क्षण के लिए दोषी माँ चामुंडेश्वरी मंदिर के वे पुजारी भी हैं, जिन्होंने बानू मुश्ताक के हाथों में पूजा की थाली थमाई। पवित्र मूर्ति पर चढ़ाने के लिए उन्हें पुष्प भेंट किया। उन्हें आरती दी। दोषी मैसूर के वे हिंदू भी हैं जिन्होंने इस क्षण को आने से रोकने के लिए विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं किया। इस क्षण के लिए हर एक हिंदू दोषी है। क्यों नहीं पुजारी और मौजूद हिन्दुओं ने इसका विरोध किया? क्या हर धार्मिक अनुष्ठान के लिए हिन्दू अदालतों पर निर्भर रहेगा? हिन्दुओं को मालूम होना चाहिए कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम तुष्टिकरण की जनक कांग्रेस समर्पित जजों और कपिल सिबल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण जैसे हिन्दू विरोधी वकीलों के भरमार रहेगी कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा। क्या हिन्दू इतना नपुंसक हो गया है कि सच्चाई के एकजुट होकर विरोध कर सकते? इस पाप का पाश्ताचाप उन्हें ही करना होगा। कांग्रेस या न्यायापालिका को कोस कर हम अपने कर्तव्यों से भाग नहीं सकते।

‘दुर्गा पूजा मेले की तरह एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार है, धार्मिक नहीं’: कलकत्ता हाईकोर्ट ; पूजा पांडाल बनाने पर लगी प्रशासनिक रोक को हटाया

                                                                                                                      फोटो साभार : जी न्यूज
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2023 को दुर्गा पूजा के पांडाल लगाने पर लगाई गई प्रशासनिक रोक को हटा दिया। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा है कि दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की राजधानी के लिए किसी धार्मिक प्रतीक की बजाय सांस्कृतिक पहचान की तरह है। इसे धर्म के नजरिए से देखने की जगह सेक्युलर नजरिए से देखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस दौरान होने वाली धार्मिक जुटान को आम मेले की देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इसे सबसे सेक्युलर त्योहार बताया।

कोलकाता प्रशासन को दिए निर्देश-लगवाए जाएं पांडाल

कलकत्ता हाईकोर्ट 25 अगस्त को एक याचिका पर सुनवाई कर रही था। इसमें सार्वजनिक मैदान पर दुर्गा पूजा का पांडाल लगाने से प्रशासन ने रोक दिया था। केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने ये टिप्पणी की। उन्होंने कोलकाता प्रशासन को निर्देश दिया कि वो दुर्गा पूजा के लिए निर्धारित जगह पर याचिकाकर्ताओं को पांडाल लगाने की अनुमति दे।

दुर्गा पूजा में शामिल होते हैं सर्व समाज के लोग

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि उन्हें कोलकाता के न्यू टाउन मेला ग्राउंड में पांडाल लगाने की अनुमति दी जाए, क्योंकि प्रशासन इसकी अनुमति नहीं दे रहा है। इस पर जस्टिस सब्यासाची भट्टाचार्य ने अपनै फैसले में कहा, “दुर्गा पूजा का उत्सव कई संस्कृतियों के मिलन की तरह है। ये नारी शक्ति का प्रतीक है। इस उत्सव में धार्मिक के साथ सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इसे सेक्युलर नेचर का माना जाए, धार्मिक नेचर का नहीं। इसमें सभी समाज के लोग शामिल होते हैं।”

हाईकोर्ट बोला- सही जगह लगाया जा रहा पांडाल

इस मामले में प्रशासन सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने के नियमों के तहत रोक लगाया था। कोलकाता प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए ऐसा फैसला लिया था। इसे कोर्ट में संविधान के आर्टिकल 14 को दृष्टि में रखकर चुनौती दी गई थी। इसमें सभी धर्म के लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को अंजाम देने का अधिकार दिया गया है।
इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने किसी सड़क, गली, फुटपाथ और खेल के मैदान में नहीं, बल्कि मेले के लिए निर्धारित जगह पर दुर्गा पूजा का पांडाल लगाने की अनुमति माँगी थी। हाईकोर्ट ने अब इसकी इजाजत दे दी है।

हैदराबाद : 2 मुस्लिम महिलाओं ने पूजा पंडाल में घुस तोड़ डाली माँ दुर्गा की प्रतिमा: रोकने गए शख्स पर भी हमला,

                               दो मुस्लिम महिलाओं ने दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
समाज में कट्टरता किस कदर हावी हो रही है, इसका उदाहरण तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad, Telangana) में देखने को मिला। यहाँ दो मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) ने नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा पंडाल (Puja Pandal) में घुसकर माता दुर्गा (Durga Mata) की प्रतिमा को खंडित कर दिया। पुलिस ने दोनों मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।

यदि घटना विपरीत होती, जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता और पार्टियां है सभी गंगा-जमुनी तहजीब, सेकुलरिज्म और संविधान की दुहाई देते आसमान सिर पर उठा लेते, लेकिन हिन्दू देवी का अपमान होने सबके घरों में महाशोक होने के कारण मुंह में दही जम गया है। 

घटना हैदराबाद के खैरताबाद का है। यहाँ माँ दुर्गा की पूजा पंडाल लगाया गया है। इसमें अचानक काले बुर्के पहने दो मुस्लिम महिलाएँ घुस आईं और मूर्ति में तोड़-फोड़ करने लगी। उन्होंने प्रतिमा के कई हिस्सों को खंडित कर दिया है। इसके बाद लोगों ने महिलाओं को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP राजेश कुमार ने घटना को लेकर बताया, “आज सुबह दो मुस्लिम महिलाओं ने खैरताबाद स्थित एक पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा माता की मूर्ति के एक हिस्से में तोड़फोड़ की। एक महिला को स्पैनर ले जाते हुए भी देखा गया था।”

DCP ने आगे बताया कि प्रतिमा पर हमला करने के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया। हालाँकि, महिलाओं के कट्टरपंथी रवैए को देखते हुए स्थानीय लोग जुट गए और उसे पकड़ लिया। लोगों ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें सैदाबाद पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस इस मामले की गहना जाँच कर रही है। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि महिलाओं ने नवरात्रि में भड़काऊ काम करके कहीं हिंसा फैलाने की कोशिश तो नहीं है। आखिर ये महिलाएँ कौन हैं और इनका किस संगठन से ताल्लुक है। पुलिस उनकी मानसिक स्थिति को लेकर भी जाँच करेगी।

पिछले साल भी कुछ अज्ञात लोगों ने हैदराबाद के कुकटपल्ली में स्थित एक हिंदू मंदिर पर भी हमला कर दिया था। इस हमले में कट्टरपंथियों ने माता दुर्गा की मूर्ति को हटा दिया था। बता दें कि हैदराबाद भी संदिग्ध समाजविरोधी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का गढ़ बन गया है।

27 सितंबर 2022 को भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इसके पहले हैदराबाद से PFI के कई सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर UAPA के तहत कार्रवाई जारी है।