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धन्य हो उत्तर प्रदेश उपद्रवियों को वापस लाने का, क्योकि उपद्रवियों के बिना तुम्हारा जीवन बेदम हो रहा था

कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के जुलूस में उपद्रव
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश के शामली जिले की कैराना सीट से समाजवादी पार्टी की इकरा हसन ने जीत दर्ज की है। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रदीप चौधरी को हराया है। इकरा हसन की जीत के बाद उनके सैकड़ों समर्थकों ने गुरुवार (4 जून, 2024) को विजय जुलूस निकाल कर सड़कों पर उपद्रव किया था। इस उपद्रव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं जो पुलिस तक पहुँच गए। अब शामली पुलिस ने शनिवार (8 जून) को 110 उपद्रवियों के खिलाफ FIR दर्ज कर के उनकी पहचान के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

यह मामला शामली के थानाक्षेत्र आदर्श मंडी का है। यहाँ तैनात सब इंस्पेक्टर विनय कुमार ने अपने ही थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि 8 जून को उनके मोबाइल में व्हाट्सएप के जरिए एक वीडियो आई। यह वीडियो मतगणना के दिन यानी 4 मई का निकला। वीडियो में एक सड़क पर जा रहे कुछ लोगों को शोर मचाते और मार्ग में रुकावट डालते देखा गया। आरोप है कि वाहनों से स्टंट किए गए। पुलिस ने इसे आचार संहित का उल्लंघन माना है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

स्टंट के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इसमें बिना वजह कई लोगों को हॉर्न बजाते सुना जा सकता है। बाइक सवार जोर-जोर से शोर मचा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक भीड़ में 110 के आसपास लोग मौजूद थे। अभी तक इनकी पहचान नहीं हो पाई है। CCTV फुटेज व गाड़ियों के नंबर इत्यादि से पुलिस आरोपितों तक पहुँचने के प्रयास में जुटी है। अब तक 110 अज्ञात व्यक्तियों पर IPC की धारा 188, 143 और 341 के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 ख के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

शामली के पड़ोसी जिले सहारनपुर में भी इसी प्रकार का मामला सामने आया था। तब कॉन्ग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद की जीत का जश्न मनाने वाली एक भीड़ ने सड़कों पर हुड़दंग किया था। महिलाओं को अश्लील इशारे तक हुड़दंगियों ने किए थे। पुलिस ने इस मामले में भी FIR दर्ज कर की है। आरोपितों को चिह्नित कर के आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


हरियाणा: नूहं: मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक कांग्रेस हिन्दुओं को बता रही दंगाई

नूहं हिंसा पर पत्रकार पुनीत ने हिन्दुओं के खिलाफ फैलाया झूठा (चित्र साभार- BBC)
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं के ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। हिंसा से संबंधित ‘मिनी पाकिस्तान’ कहे जाने वाले मेवात के नूहं से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच कट्टरपंथी मुस्लिमों के बचाव में कुख्यात गिरोह भी सक्रिय हो चुका है।

यह गैंग हिन्दुओं को ही हमलावर और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए साजिशें रचना शुरू कर चुका है। इन्हीं में से एक कथित पत्रकार पुनीत कुमार सिंह भी हैं। पुनीत ‘बोलता हिंदुस्तान’ नाम का प्रोपोगेंडा पोर्टल चलाते हैं। उन्होंने कई फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की।

पुनीत ने मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास गर्ग नाम के व्यक्ति की दुकान में तोड़फोड़ हुई थी। पुनीत ने आरोप लगाया कि दुकान को मुस्लिमों की दुकान समझकर हिन्दू संगठनों के सदस्यों इसमें तोड़-फोड़ की।

पुनित ने लिखा, “नूहं में हिंदू ‘विकास गर्ग’ की दुकान को मुस्लिम की दुकान समझकर भगवा गुंडों ने तहस-नहस कर दिया।” इसी के साथ पुनीत ने मृत शायर राहत इंदौरी के एक ‘शेर’ की कुछ पंक्तियाँ – ‘लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।’ भी लिखा।

                                         पुनीत कुमार सिंह का वो ट्वीट जो अब डिलीट कर लिया गया है

कुल मिलाकर पुनीत यह कहना चाहते थे कि नूहं के दंगे हिंदुओं की वजह से हुए और हिन्दू ही इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। अब डिलीट हो चुके ट्वीट में इस कथित पत्रकार ने नूहं से बीबीसी की एक वीडियो रिपोर्ट भी संलग्न की थी।

इस वीडियो में क्षतिग्रस्त दुकान के मालिक विकास गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उनकी ’24×7 बेकरी एंड कैफे’ नाम की दुकान में सोमवार को तोड़फोड़ की गई थी। विकास ने घटना का समय सोमवार की दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे बताया।

बीबीसी की रिपोर्ट में विकास ने बताया, “जब यात्रा गुजर रही थी तो यहाँ दंगा भड़क गया। मैं अपनी दुकान में ताला लगाकर चला गया था। इस दौरान मेरी दुकान लूट ली गई। दुकान का काउंटर, शीशे, LED और 7 फ्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दुकान में रखे लगभग 7.5 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। सारा सामान चुरा लिया गया है।”

विकास ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रेस्तरां को बनाने के लिए कई सालों की कड़ी मेहनत की थी। उनके इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। इसी वीडियो के आधार पर पुनीत ने विकास गर्ग की दुकान को हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा लूटे जाने का दावा किया।

पुनित ने अपने ट्वीट में हिंदुओं के लिए ‘भगवा गुंडों’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। हालाँकि, पुनीत का ये दावा फर्जी निकला। विकास की दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर दुकान के मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से विकास गर्ग और सचिन गर्ग लिखे हुए थे। इसलिए मुस्लिम की दुकान समझकर हिंदुओं को तोड़-फोड़ वाला नैरेटिव फिट नहीं बैठता।

पुनीत ने अपने खास एजेंडे को फैलाने की कोशिश की। पोल खुलने और कई ट्विटर यूजर्स द्वारा आइना दिखाने के बाद फर्जी न्यूज़ विक्रेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। एक अन्य पत्रकार आदित्य राज कौल ने पुनीत कुमार सिंह के डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गुरुग्राम में लोगों से फर्जी खबर पर ध्यान न देने की अपील की है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, “गुरुग्राम में लोगों को फर्जी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। फर्जी सूचनाओं पर आधारित कुछ ट्वीट्स से हरियाणा में दहशत फैल रही है। ट्वीट डिलीट कर दिया गया है, इसके बावजूद इसे फॉरवर्ड किया जा रहा है। आशा है कि पुलिस मेवात हिंसा को गुरुग्राम तक फैलाने की साजिश की जाँच करेगी। सतर्क रहें। घबराएँ नहीं।”

इधर फजीहत होने के बाद पुनीत ने आधी रात को अपनी सफाई में एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि जानकारी पता होने के बाद ट्वीट डिलीट कर लिया गया है। पुनीत का कहना है कि उन्हें हिन्दुओं द्वारा हिन्दू की दुकान लूटे जाने की जानकारी एक विश्वसनीय पत्रकार ने दी थी।

फर्जी अफवाह वाला ट्वीट डिलीट करने के बाद भी पुनीत खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बता रहे हैं। लोगों के बीच भ्रामक सूचना और समाज में नफरत फैलाने के बावजूद पुनीत ने माफ़ी नहीं माँगी और बेशर्मी पर अड़े रहे।

इसके उलट, वह दूसरे पत्रकारों पर फर्जी न्यूज़ चलाने और पैसे की उगाही के आरोप लगाते रहे। अपने विवादास्पद ट्वीट में लिखी गई राहत इंदौरी की लाइनों को भी पुनीत ने अहिंसक बताया। फिलहाल सोशल मीडिया पर कथित पत्रकार पुनीत की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है।

इस पत्रकार को लोग कॉन्ग्रेस के फंड पर पलने वाला पत्रकार कहते हैं।


कनाडा : हिंदू मंदिर पर हमला: दीवार पर लिखा- मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद

  कनाडा में हिंदू मंदिर पर एक बार फिर हमला, दीवारों पर लिखे भारत विरोधी नारे (फोटो साभार: @WindsorPolice)
कनाडा (Canada) में हिंदुओं के खिलाफ घृणित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहाँ एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। ओंटारियों प्रांत के विंडसर शहर के नॉर्थवे एवेन्यू के 1700 ब्लॉक में स्थित हिंदू मंदिर (Hindu Temple) पर नकाबपोश हमलावरों ने 5 अप्रैल 2023 (स्थानीय समय) को हमला किया।
                                                        फोटो साभार: @WindsorPolice

उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे भी लिखे। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लिखे। स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी है।

विंडसर पुलिस ने दोनों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है, जिनमें नकाबपोश बदमाश मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पुलिस को इस घटना का एक वीडियो मिला है, जिसमें दो संदिग्धों को रात 12 बजे के बाद इलाके में देखा गया। वीडियो में, एक संदिग्ध मंदिर की दीवार पर तोड़फोड़ करता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरा थोड़ी दूर पर खड़ा होकर उसे देख रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के समय, एक संदिग्ध ने काले रंग का स्वेटर, बाएँ पैर पर एक छोटे से सफेद लोगो के साथ काली पैंट और काले व सफेद रंग के हाई-टॉप रनिंग शूज पहने थे। दूसरे संदिग्ध ने काली पैंट, एक स्वेटशर्ट, काले जूते और सफेद मोजे पहने थे। उन बदमाशों ने ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिखे हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा, “विंडसर पुलिस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जाँच कर रही है।”

पुलिस ने दोनों संदिग्धों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए फोन नंबर और वेबसाइट का पता जारी किया है। विंडसर पुलिस ने कहा, “जिस किसी को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, वह मोरेलिटी यूनिट को 519-255-6700 पर कॉल करे या EXT 4362 करें। वे 519-258-8477 (TIPS) पर बिना नाम बताए क्राइम स्टॉपर्स या www.catchcrooks.com पर ऑनलाइन संपर्क कर सकते हैं।”

पहले भी हो चुका है कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला

कनाडा के हिंदू मंदिरों में पहले भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक वहाँ की सरकार द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। विंडसर में भारत विरोधी यह पाँचवीं घटना है। इससे पहले फरवरी 2023 में मिसिसॉगा (Missisauga) के राम मंदिर (Ram Mandir) तोड़फोड़ के साथ हिंदू और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। जनवरी 2023 में कनाडा के ही ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर को निशाना बनाया गया। गौरी-शंकर मंदिर कनाडा के मशहूर हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वर्षों से हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ बताया गया था। इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने कई बार महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी निशाना बनाया है और भारत विरोधी नारे लिखे हैं।

हैदराबाद : 2 मुस्लिम महिलाओं ने पूजा पंडाल में घुस तोड़ डाली माँ दुर्गा की प्रतिमा: रोकने गए शख्स पर भी हमला,

                               दो मुस्लिम महिलाओं ने दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
समाज में कट्टरता किस कदर हावी हो रही है, इसका उदाहरण तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad, Telangana) में देखने को मिला। यहाँ दो मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) ने नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा पंडाल (Puja Pandal) में घुसकर माता दुर्गा (Durga Mata) की प्रतिमा को खंडित कर दिया। पुलिस ने दोनों मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।

यदि घटना विपरीत होती, जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता और पार्टियां है सभी गंगा-जमुनी तहजीब, सेकुलरिज्म और संविधान की दुहाई देते आसमान सिर पर उठा लेते, लेकिन हिन्दू देवी का अपमान होने सबके घरों में महाशोक होने के कारण मुंह में दही जम गया है। 

घटना हैदराबाद के खैरताबाद का है। यहाँ माँ दुर्गा की पूजा पंडाल लगाया गया है। इसमें अचानक काले बुर्के पहने दो मुस्लिम महिलाएँ घुस आईं और मूर्ति में तोड़-फोड़ करने लगी। उन्होंने प्रतिमा के कई हिस्सों को खंडित कर दिया है। इसके बाद लोगों ने महिलाओं को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP राजेश कुमार ने घटना को लेकर बताया, “आज सुबह दो मुस्लिम महिलाओं ने खैरताबाद स्थित एक पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा माता की मूर्ति के एक हिस्से में तोड़फोड़ की। एक महिला को स्पैनर ले जाते हुए भी देखा गया था।”

DCP ने आगे बताया कि प्रतिमा पर हमला करने के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया। हालाँकि, महिलाओं के कट्टरपंथी रवैए को देखते हुए स्थानीय लोग जुट गए और उसे पकड़ लिया। लोगों ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें सैदाबाद पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस इस मामले की गहना जाँच कर रही है। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि महिलाओं ने नवरात्रि में भड़काऊ काम करके कहीं हिंसा फैलाने की कोशिश तो नहीं है। आखिर ये महिलाएँ कौन हैं और इनका किस संगठन से ताल्लुक है। पुलिस उनकी मानसिक स्थिति को लेकर भी जाँच करेगी।

पिछले साल भी कुछ अज्ञात लोगों ने हैदराबाद के कुकटपल्ली में स्थित एक हिंदू मंदिर पर भी हमला कर दिया था। इस हमले में कट्टरपंथियों ने माता दुर्गा की मूर्ति को हटा दिया था। बता दें कि हैदराबाद भी संदिग्ध समाजविरोधी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का गढ़ बन गया है।

27 सितंबर 2022 को भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इसके पहले हैदराबाद से PFI के कई सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर UAPA के तहत कार्रवाई जारी है।

इस्लामी आतंकवाद पर प्रश्नोत्तर को लेकर भड़की इस्लामी भीड़, प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला: तोड़े फर्नीचर, जलाई किताबें

राजस्थान में मजहब के नाम पर इस्लामी भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने का मामला सामने आया है। राजधानी जयपुर में एक मुस्लिम भीड़ एक किताब में प्रकाशित कंटेंट को लेकर इस कदर नाराज़ और आक्रोशित हो गई कि प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर ही हमला बोल दिया। ये घटना बुधवार (मार्च 16, 2021) को चारदीवारी क्षेत्र में स्थित संजीव प्रकाशन में शाम के समय हुई। वहाँ जम कर तोड़फोड़ मचाई गई।

उक्त प्रकाशन संस्थान द्वारा छापी गई 12वीं की एक पुस्तक में इस्लामी आतंकवाद को लेकर एक चैप्टर था, जिसके कारण सारा विवाद हुआ। हमलावरों ने ऑफिस में रखे फर्नीचरों को तोड़ डाला और वहाँ रखी दूसरी किताबों को भी फाड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पर ज़रूर पहुँची, लेकिन उससे पहले हमलावर अपना काम करके फरार हो चुके थे। वो अपने साथ कई किताबें लूट कर भी ले गए।

इसके बाद इस्लामी समूह ऑफिस के बाहर आ गया और फिर वहाँ सारी किताबों को फाड़ कर रखा गया। फिर उसमें आग लगा दी गई। बेख़ौफ़ बदमाशों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। पब्लिशिंग मैनेजर विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर बवाल किया जा रहा है, जिसमें इस्लामी आतंकवाद के सवाल पर एक जवाब छपा था और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में भी वो प्रश्न आया था। उसका कंटेंट इस प्रकार है:

सवाल:इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते है?
जवाब:इस्लामी आतंकवाद इस्लाम का ही एक रूप है, जो पिछले 20-30 सालों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है। आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है। समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामी आतंकवाद का मुख्य लक्षण है। मजहब या अल्लाह के नाम पर आत्मघाती हमला और अत्यधिक बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली, और निर्मम नृशंस हत्याएँ करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया मजहबी व अलगाववादी श्रेणी में आता है। 

हालाँकि, ये हमला कंटेंट को हटाए जाने और किताबें बाजार से वापस लेने के बावजूद हुई है। पब्लिशिंग मैनेजर का कहना है कि कुछ दिनों पहले जब इस पर आपत्ति आई थी, तभी तमाम पुस्तकों को बाजारों से वापस उठवा लिया गया था और उक्त कंटेंट को हटा दिया गया था। शुक्ला ने कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचे, इसीलिए ऐसा किया गया। जबकि बाकी प्रकाशन संस्थानों की पुस्तकों में भी इस सवाल का जवाब यही है।

इतना ही नहीं, संजीव प्रकाशन संस्थान ने इसे लेकर लिखित में माफ़ी भी माँग ली थी। इसके बावजूद उन्हें कुछ दिनों पहले धमकी भरे फोन कॉल्स आए थे। पुलिस कोतवाली में शिकायत करने पर 2-4 जवान भी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए गए थे। दोपहर 3 बजे 4-4 लोग ऑफिस में आ धमके, जिनके साथ 30-40 और लोग थे जो बार खड़े थे। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

ये पूरा मामला 2017 का है। ये जवाब उसी साल छपा था। 4 साल बाद उस कंटेंट को लेकर प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला हुआ। राजस्थान पुलिस द्वारा मुहैया कराए गए 3 सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ‘संजीव प्रकाशन’ के दफ्तर पर इस्लामी आतंकवाद के उसी कंटेंट को लेकर हमला हुआ। कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान ने इस कंटेंट का मामला राजस्थान की विधानसभा में भी उठाया था और जवाबदेह लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस जाँच की बात कह रही है।